यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026

उत्तर प्रदेश को स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से गोमती नगर स्थित ताज होटल में यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 का आयोजन हुआ। बैठक में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों और जापान के यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी समेत उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। इस दौरान ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक, उत्पादन, अनुसंधान और निवेश के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी संपन्न हुआ।

 

ऊर्जा सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। उत्तर प्रदेश में इसके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा मिलने से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग उद्योगों, भारी वाणिज्यिक वाहनों जैसे बसों और ट्रकों, उर्वरक निर्माण तथा अन्य क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

यामानाशी मॉडल और पावर-टू-गैस तकनीक का सहयोग

जापान के यामानाशी प्रांत के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी अत्याधुनिक पावर-टू-गैस (पी2जी) तकनीक का प्रस्तुतीकरण किया। इस तकनीक में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करते हुए जल के इलेक्ट्रोलिसिस से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है।

 

बैठक में यामानाशी हाइड्रोजन कंपनी (वाईएचसी) तथा कानाडेविया कॉरपोरेशन के सहयोग से उत्तर प्रदेश में एक उच्च क्षमता वाली पायलट परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी फरवरी 2027 तक पूरी करने तथा मार्च 2027 तक व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा गया है।

 

1 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में प्रति वर्ष 1 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निवेश, तकनीकी नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी-2024 के तहत ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें परियोजना लागत पर 10 से 30 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक छूट तथा निजी विकासकर्ताओं के माध्यम से भूमि लीज पर उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

 

आईआईटी कानपुर और आईआईटी-बीएचयू में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से नई तकनीकों के विकास, अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण तथा प्रयोगशाला स्तर की तकनीक को औद्योगिक स्तर पर स्केल-अप करने में मदद मिलेगी।

 

मजबूत कनेक्टिविटी और हाइड्रोजन मोबिलिटी के बड़े अवसर

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और मजबूत कनेक्टिविटी प्रदेश को ग्रीन हाइड्रोजन निवेश के लिए विशेष रूप से आकर्षक बनाती है। प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय हवाई अड्डे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी), अंतर्देशीय जलमार्ग, एक्सप्रेसवे, रेलवे और मेट्रो नेटवर्क जैसी आधुनिक परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और औद्योगिक उपयोग के लिए मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने के अवसर उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश में विशाल औद्योगिक आधार, बड़ा उपभोक्ता बाजार और भारी परिवहन क्षेत्र के कारण हाइड्रोजन मोबिलिटी के लिए भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

 

जापान के साथ तकनीकी और निवेश सहयोग को नई दिशा

ऊर्जा मंत्री ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित, सक्षम और संभावनाओं से भरपूर निवेश गंतव्य के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में जापान की उन्नत तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश का स्वागत करती है तथा इस क्षेत्र में परियोजनाओं को गति देने के लिए हर संभव नीतिगत एवं प्रशासनिक सहयोग प्रदान करेगी।

 

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के दौरान हुआ यह सहयोग उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम के विकास, तकनीकी नवाचार, औद्योगिक निवेश और स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल  समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।

निवेश से आगे ग्लोबल फ्यूचर की ओर बढ़ रही यूपी-जापान साझेदारी: सीएम योगी

निवेश से आगे ग्लोबल फ्यूचर की ओर बढ़ रही यूपी-जापान साझेदारी: सीएम योगी

 

 

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के रिश्ते अब केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि लॉन्ग-टर्म, ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप के रूप में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। जापान के प्रिसिजन और टेक्नोलॉजी को उत्तर प्रदेश के स्केल, युवा शक्ति और टैलेंट से जोड़ते हुए प्रदेश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में काम होगा। 

 

शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के वेलेडक्टरी सेशन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान उत्तर प्रदेश के लिए केवल इन्वेस्टर नहीं, बल्कि को-क्रिएटर है। एमओयू को प्रोडक्शन, प्रोडक्शन को ग्लोबल एक्सपोर्ट और निवेश को रोजगार में बदलना सरकार का लक्ष्य है। 2047 के भारत के उद्योग आज डिजाइन हो रहे हैं और उत्तर प्रदेश चाहता है कि जापान के साथ मिलकर इन उद्योगों का भविष्य तैयार किया जाए।

 

जापानी भाषा में मुख्यमंत्री ने दिया दोस्ती और साझेदारी का संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जापानी भाषा का प्रयोग करते हुए जापानी प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने “कोनिचिवा मिनासान” कहकर सभी जापानी अतिथियों का अभिवादन किया और भारत-जापान के मजबूत होते संबंधों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। संबोधन के समापन पर मुख्यमंत्री ने जापानी भाषा में “अरिगातो गोजाइमासु” कहकर प्रतिनिधिमंडल और उपस्थित जापानी अतिथियों का आभार जताया। जापानी भाषा में मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संवाद ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक जुड़ाव और दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास का संदेश दिया। सीएम योगी के इस भाव ने उपस्थित मेहमानों का उत्साहवर्धन भी किया।

 

जापान के साथ बातचीत अब स्ट्रांग बिजनेस पार्टनरशिप में बदल रही

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पूर्व जापान की धरती पर जो संकल्प लिया गया था, आज लखनऊ की धरती पर उसे साकार रूप लेते हुए देखा जा रहा है। जापान में हुई बातचीत अब स्ट्रांग बिजनेस पार्टनरशिप में बदल रही है, जो उत्तर प्रदेश में इन्वेस्टमेंट, इंडस्ट्री और एम्प्लॉयमेंट के नए अवसरों का आधार बनेगी। यह भारत-जापान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और यामानाशी के संबंधों में भी नई साझेदारी के युग की शुरुआत है। जापान ने दुनिया को दिखाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद डिसिप्लिन, विल पावर, हाई क्वालिटी स्टैंडर्ड, इनोवेशन और नेशन फर्स्ट की भावना के साथ सही दिशा में प्रयास किया जाए तो कोई भी चुनौती मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। जापान आज विश्व की प्रमुख इकोनॉमिक एंड इंडस्ट्रियल पावर के रूप में स्थापित है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और हाई क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग के साथ क्लीनलीनेस और कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी के लिए भी उसकी पूरी दुनिया में अलग पहचान है। काइजेन, मोनोजुकुरी और ‘वा’ यानी सामाजिक सामंजस्य जापान की लाइफस्टाइल और वर्क कल्चर के महत्वपूर्ण आधार हैं। इन मूल्यों की झलक जापान के एडमिनिस्ट्रेशन, इंडस्ट्री, एजुकेशन और सोशल लाइफ के हर क्षेत्र में दिखाई देती है। शिंकानसेन, यानी जापान की बुलेट ट्रेन, टेक्निकल एफिशिएंसी, पंक्चुअलिटी, सेफ्टी और रिलायबिलिटी के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। यह जापान की उस सोच का प्रतीक है, जहां टेक्नोलॉजी के साथ प्रिसिजन, स्पीड के साथ सेफ्टी और डेवलपमेंट के साथ रिलायबिलिटी को समान महत्व दिया जाता है।

 

जापान का इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस और यूपी की युवा शक्ति मिलकर रचेंगे नई कहानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट्स, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और मॉडर्न ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश का लक्ष्य केवल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम तैयार करना है, जो इंडस्ट्री को स्पीड, आम नागरिक को सेफ्टी और इन्वेस्टर्स को रिलायबिलिटी दे सके। जापान के पास इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस की असाधारण विरासत है, जबकि उत्तर प्रदेश के पास सीखने, सृजन करने और नेतृत्व करने के लिए तैयार युवाओं की ऊर्जावान पीढ़ी है। यूपी के युवाओं को ऐसी स्किल, प्रिसिजन और वर्क कल्चर से जोड़ा जाएगा, जिसकी मांग टोक्यो से लेकर दुनिया के किसी भी एडवांस मैन्युफैक्चरिंग हब तक हो। लैंग्वेज उन्हें जापान से, टेक्निकल स्किल इंडस्ट्री से और जापानी वर्क कल्चर उन्हें ग्लोबल स्टैंडर्ड से जोड़ेगा। आज ग्लोबल कंपनियां ऐसे स्थान की तलाश में हैं, जहां रेजिलिएंस, रिलायबिलिटी, ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए डायवर्सिफिकेशन और बड़े पैमाने पर ग्रोथ की क्षमता हो। उत्तर प्रदेश इन चारों आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता रखता है।

 

600 करोड़ के फंड से बढ़ेगा जापानी निवेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन दिनों में जापानी डेलीगेशन के साथ हुई बातचीत में वर्किंग रिलेशनशिप मजबूत करने, उत्तर प्रदेश की पॉलिसीज और बिजनेस एनवायरमेंट को समझने तथा निवेश के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। जापानी प्रतिनिधियों ने प्रदेश में पॉलिसी रिफॉर्म और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हुए सुधारों की सराहना की है। उन्होंने सीमलेस अप्रूवल, लैंड अलॉटमेंट की सरल प्रक्रिया और रिड्यूस्ड कंप्लायंसेज को सकारात्मक बदलाव बताया। वहीं मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर्स, इंडस्ट्रियल पार्क्स और बेहतर कनेक्टिविटी को निवेश के लिए महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू माना। सीएम ने कहा कि इन सुविधाओं के कारण प्रदेश में निर्मित उत्पादों की देश के अलग-अलग हिस्सों में सीमलेस मूवमेंट संभव हो रही है। यामानाशी के साथ सहयोग को अब मजबूत और संस्थागत व्यवस्था में बदला जाएगा। इन्वेस्ट यूपी में डेडिकेटेड यामानाशी डेस्क स्थापित की जाएगी, जो यामानाशी सरकार, वहां के उद्योगों और निवेशकों के साथ निरंतर समन्वय करेगी। दोनों पक्ष इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्री की आवश्यकताओं, अप्रूवल्स और सामने आ रही चुनौतियों की हर 90 दिन में कोऑर्डिनेशन के साथ रिव्यू करेंगे, ताकि किसी भी स्तर पर कोई गैप न रहे। इससे एमओयू के क्रियान्वयन से लेकर निवेश तक की पूरी प्रक्रिया को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यामानाशी के गवर्नर को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने यामानाशी की एमएसएमई कंपनियों के उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए 600 करोड़ रुपये का फंड घोषित किया है। यह उत्तर प्रदेश में जापानी उद्योग के बढ़ते विश्वास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

 

यामानाशी मॉडल को जापान के अन्य प्रिफेक्चर्स तक विस्तार देंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 की जापान यात्रा के दौरान जापानी सीईओज, बिजनेस एसोसिएशंस और इंडस्ट्री डेलिगेशंस के साथ व्यापक चर्चा हुई थी। इन चर्चाओं में उत्तर प्रदेश सरकार और जापान के अन्य प्रीफेक्चर्स के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी थी। अब यामानाशी के साथ विकसित मॉडल को जापान के अन्य प्रिफेक्चर्स तक भी विस्तार दिया जाएगा। इसके लिए यामानाशी के गवर्नर ने सहयोग की इच्छा जताई है। प्रसन्नता का विषय है कि उत्तर प्रदेश की गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने जापानी डेलिगेशन के साथ एमओयू किया है। इसी तरह की साझेदारी यूपी के अन्य विश्वविद्यालयों और जापान के विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच भी विकसित की जाएगी। हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग प्रोफेशनल्स के साथ-साथ पॉलिटेक्निक, नर्सिंग ग्रेजुएट्स और अन्य टेक्निकल कोर्सेज के छात्रों को जापानी लैंग्वेज में प्रशिक्षित करने तथा उनके लिए रोजगार और ट्रेनिंग के अवसरों का विस्तार किया जाएगा। जापानी कंपनियों के साथ मिलकर उनकी सेक्टर-स्पेसिफिक मैनपावर जरूरतों को समझा जाएगा और उसी आधार पर उत्तर प्रदेश में विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किए जाएंगे। हमारा लक्ष्य इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार स्किल और स्किल के अनुसार एंप्लॉयमेंट का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। इससे जापानी कंपनियों को प्रशिक्षित वर्कफोर्स और उत्तर प्रदेश के युवाओं को ग्लोबल इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के अनुरूप रोजगार के अवसर मिलेंगे।

 

बौद्ध सर्किट से जापानी पर्यटकों को यूपी की ओर आकर्षित करेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बौद्ध सर्किट के माध्यम से जापानी पर्यटकों के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी। इस संबंध में यहां एक एमओयू भी संपन्न हुआ है। उत्तर प्रदेश भारत का प्रमुख स्पिरिचुअल टूरिज्म हब है और यहां आध्यात्मिक, बौद्ध, कल्चरल और हेरिटेज टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। जापान में आयोजित होने वाले टूरिज्म फेस्टिवल में उत्तर प्रदेश की भागीदारी के माध्यम से भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और हॉस्पिटैलिटी को वहां प्रस्तुत किया जाएगा।

 

ग्रीन हाइड्रोजन पर मिलकर करेंगे काम

सीएम ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी यामानाशी के साथ सहयोग को अगले चरण तक ले जाया जाएगा। आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। इसी मॉडल की तर्ज पर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा सकते हैं, ताकि रिसर्च एंड डेवलपमेंट, न्यू टेक्नोलॉजी के एडॉप्शन और क्लीन एनर्जी में इनोवेशन को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। यामानाशी के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट विकसित करने पर सहमति हुई है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर इंप्लीमेंट करेगी। इसके लिए भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच टेक्नोलॉजी एवं बिजनेस पार्टनरशिप विकसित की जाएगी। यूपी के उद्यमी और इन्वेस्टर इस टेक्नोलॉजी को अपनी-अपनी इंडस्ट्री में लागू करने के लिए आगे आ सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर उनके डेलिगेशन को यामानाशी प्रीफेक्चर की यात्रा पर भेजा जाएगा, ताकि वे वहां इन कार्यों का अनुभव कर सकें। साथ ही, उद्योग जगत के साथ समन्वय कर एक उपयुक्त ऑफ-टेकर की पहचान की जाएगी, जिससे पायलट परियोजना को बड़े स्तर पर विस्तार योग्य कमर्शियल मॉडल में बदला जा सके। अक्टूबर 2026 में यामानाशी में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल हाइड्रोजन समिट में उत्तर प्रदेश अपना डेलिगेशन अवश्य भेजेगा।

 

जापानी जीसीसी कंपनियों को यूपी में निवेश और बिजनेस सेटअप का न्योता

मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) की स्थापना के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। उन्होंने जापानी जीसीसी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में आने, निवेश करने और अपना बिजनेस सेटअप करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि इस विषय में एक एमओयू भी संपन्न हुआ है। प्रदेश का लक्ष्य केवल निवेश लाना नहीं, बल्कि जापान के साथ लॉन्ग-टर्म, ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप विकसित करना है। जापानी कंपनियां यूपी में निवेश और उत्पादन करें तथा यहां से पूरे भारत और ग्लोबल मार्केट तक पहुंच बनाएं, यही सरकार का प्रयास है। भारत और जापान ऐसे देश हैं, जिन्होंने अपनी विरासत और परंपरा को दैनिक जीवन और कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाए रखा है। जापान की संस्कृति हजारों वर्षों की समृद्ध परंपरा से विकसित हुई है और उस पर शिंतो तथा बौद्ध परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा है। भारतीय जीवन पद्धति भी प्रकृति के प्रति सम्मान, समाज के प्रति दायित्व और समस्त मानवता को एक परिवार मानने की भावना पर आधारित है। हमारी संस्कृति का संदेश ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ है। 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी का महोत्सव मनाएगा। तब हमारी आकांक्षा है कि उत्तर प्रदेश में काम कर रही जापानी कंपनियां केवल यह न कहें कि हमने भारत में निवेश किया है, अपितु गर्व से कहें कि हमने अपना ग्लोबल फ्यूचर उत्तर प्रदेश से बनाया है। उत्तर प्रदेश एक रिलायबल और लॉन्ग-टर्म पार्टनर के रूप में जापान के साथ खड़ा है।

 

इस अवसर पर यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी, यामानाशी प्रीफेक्चर के वाइस गवर्नर जुनिची इशिदेरा, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, यूपी ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार और गवर्नर यामानाशी के साथ आए उच्चस्तरीय डेलीगेशन के इंडस्ट्री लीडर्स, सीईओज व अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

Yamaha XSR900 SP in the works for overseas markets

Yamaha XSR900 SP in the works for overseas markets
Yamaha XSR900 SP in the works for overseas markets

Yamaha appears to be preparing a higher-spec version of its retro-styled XSR900. An XSR900 SP has surfaced in US regulatory filings, pointing to the possibility of a new performance-focused variant of the 890cc neo-retro motorcycle.

  1. XSR900 SP name appears in Yamaha’s US NHTSA filings
  2. Expected to share the 117.4hp CP3 engine with the standard XSR900
  3. Could borrow premium suspension and braking hardware from the MT-09 SP

Yamaha XSR900 SP: what the filings reveal

The XSR900 SP has appeared in vehicle identification number (VIN) filings submitted by Yamaha to the US National Highway Traffic Safety Administration (NHTSA). The documents list both a standard XSR900 SP and a California-spec version, indicating that Yamaha is preparing the model for the 2027 model year.

The filings show that the XSR900 SP will use Yamaha’s 890cc, three-cylinder CP3 engine, with a peak output of 117.4hp. This is identical to the output listed for the standard XSR900, as well as the MT-09, Tracer 9 and R9 in the same documentation. This suggests that the SP variant will focus on chassis and equipment upgrades rather than additional engine performance.

XSR900 SP could get MT-09 SP hardware

While Yamaha has not revealed the equipment list for the XSR900 SP, the motorcycle’s relationship with the MT-09 SP gives a strong indication of what could change.

The MT-09 SP gets DLC-coated front forks, an Öhlins rear shock, Brembo Stylema brake calipers and additional electronic features over the standard MT-09. Yamaha could bring similar upgrades to the XSR900 SP, giving the neo-retro motorcycle a more premium chassis and braking package.

There is one caveat to the filings. The latest NHTSA documents list the XSR900 SP but do not mention the XSR900 GP, while separate California Air Resources Board (CARB) documents for the 2027 XSR900 range list the XSR900 GP but not the SP. This could be down to an error in one of the filings or the documents being updated at different times.

The VIN information does, however, point towards the XSR900 SP being a new variant rather than simply the XSR900 GP being introduced in another market. The SP gets a different VIN prefix from the existing XSR900 GP, further strengthening the case that Yamaha is developing the model.

There is no word yet on when Yamaha will officially reveal the XSR900 SP or which overseas markets will receive it.

Yamaha R2 to launch in India next week

Closer to home, Yamaha is preparing to launch the much-anticipated R2 in India on August 27. The company has already opened pre-bookings for the motorcycle at Rs 10,000, ahead of its official debut.

The R2 is expected to sit above the R15 in Yamaha’s Indian line-up and is being developed and manufactured in India for both domestic sales and exports. Yamaha has yet to reveal its complete specifications, but the motorcycle is expected to use a larger-capacity single-cylinder engine than the R15.

कनाडा के नानकसर गुरुद्वारे में बेअदबी:जेल से छूटकर आया अपराधी घुसा, गुरु साहिब का रूमाला उतारा, पेंचकस मारकर 2 लोग घायल किए

कनाडा के एडमंटन स्थित गुरुद्वारा नानकसर साहिब में बेअदबी की घटना हुई है। 27 साल का एक व्यक्ति पेंचकस लेकर गुरुद्वारे के अंदर घुस गया। अंदर आते ही बिछाई साहब पर चढ़ गया और गुरु साहब का रूमाला उतार लिया। इससे पहले कि वह गुरु ग्रंथ साहिब को नुकसान पहुंचाता संगत ने उसे पकड़ लिया। प्रधान जोरा सिंह ने बताया कि 21 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे एक स्थानीय युवक अंदर आया तो उत्पाद मचाने लगा। जैसे ही वह गुरु ग्रंथ साहिब की तरफ बढ़ा तो सिंहों ने उसे रोक लिया। इस पर उसने 2 सिंहों को पेंचकस माकर घायल कर लिया। नीली टी-शर्ट पहने युवक को संगत ने पकड़ लिया। इसके बाद गुरुदारे की एक लड़की ने पुलिस को फोन कर लिया। पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अरेस्ट कर लिया। वहीं, पुलिस ने बताया कि घायलों को अस्पताल भर्ती करवाया गया। एक को छुट्टी मिल गई है, जबकि दूसरे का इलाज चल रहा है। आरोपी की पहले से वांटेड था। पुलिस ने बताया कि आरोपी मेंटली डिस्टर्ब है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जानें प्रधान जोरा सिंह ने क्या बताया… संगत ने उठाए सवाल- हर बार आरोपी मेंटली डिस्टर्ब क्यों? इस घटना के बाद स्थानीय सिख समुदाय में भारी रोष है। लोगों ने सवाल उठाया है कि चाहे भारत हो या विदेश, धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों के बाद आरोपियों को मानसिक रूप से बीमार बताकर जांच की दिशा क्यों बदल दी जाती है? सिख संगत ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए और आरोपी को सख्त से सख्त सजा दी जाए। फिलहाल, गुरुद्वारा साहिब को संगत के लिए दोबारा पूरी तरह से खोल दिया गया है। जेल से रिहाई के कुछ घंटे बाद ही हमला पुलिस की प्राथमिक जांच और CBC न्यूज के अनुसार, 27 वर्षीय आरोपी कोई आम राहगीर नहीं, बल्कि एक पुराना हिंसक अपराधी है। वह घटना से ठीक एक दिन पहले ही एक गंभीर हमले और पुलिस अधिकारी पर हमला करने के जुर्म में जेल की सजा काटकर रिहा हुआ था। रिहाई के बाद उसे तय रिहाइश हाफवे हाउस जाना था, लेकिन वह वहां नहीं पहुंचा और गायब हो गया। पुलिस ने अभी घायलों और आरोपी की पहचान नहीं बताई है। पुलिस का कहना है कि मामले के निपटारे के बाद पहचान उजागर की जाएगी। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई कनाडा के कैलगरी स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थल दशमेश कल्चर सेंटर को अज्ञात लोगों ने इमारत गिराने की धमकी दी है। लगातार आ रहे इन नस्ली और धमकी भरे फोन कॉल्स के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गई है। पढ़ें पूरी खबर…

असम में क्यों हो रहा है इतना निवेश?

असम में क्यों हो रहा है इतना निवेश?

investment in assam

प्रभाकर मणि तिवारी

असम अपनी बेहतर क्वालिटी की चाय के उत्पादन के लिए पूरी दुनिया में मशहूर रहा है। अस्सी के दशक में घुसपैठ और उग्रवाद ने इसकी छवि एक ऐसे राज्य के तौर पर बना दी जहां निवेशक तो दूर बाहरी राज्यों के लोग भी आने से डरते थे। लेकिन अब बीते कुछ साल से यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। पहले उद्योग के नाम पर राज्य में या तो चाय बागान थे या फिर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम। लेकिन अब बड़े पैमाने पर देशी विदेशी निवेश की वजह से असम दक्षिण एशिया का सप्लाई चेन हब बनने की राह पर बढ़ रहा है। ALSO READ: राज्यपालों के कार्यकाल पर क्या कहता है भारत का संविधान

 

राज्य सरकार ने अगले पांच साल में राज्य में बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये खर्च करने का एलान किया है।

 

असम का असंगठित क्षेत्र

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, असम की करीब सवा तीन करोड़ की आबादी में से एक तिहाई युवा है। लेकिन राज्य में चाय बागानों, खेती, हथकरघा के अलावा रोजगार का कोई साधन नहीं है। चाय बागान मजदूरों और छोटे किसानों के अलावा राज्य के पारंपरिक हथकरघा और रेशम उद्योग में काम करने वाले लाखों कारीगर असंगठित क्षेत्र का हिस्सा हैं।

 

तिनसुकिया के एक कालेज में समाज विज्ञान के प्रोफेसर रहे डा. सुकांत कर डीडब्ल्यू से कहते हैं, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने वाले ज्यादातर लोग बाहरी राज्यों के हैं। राज्य सरकार के उपक्रमों में स्थानीय लोग जरूर हैं। लेकिन सरकारी कर्मचारियों की संख्या करीब साढ़े चार लाख ही है। ऐसे में निजी निवेशकों के आने से युवा आबादी के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।

 

विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के नेतृत्व में असम के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस साल जनवरी में पहली बार दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) में शिरकत की। वहां शर्मा ने असम को देश के विकास के परिदृश्य में एक स्वाभाविक मंजिल बताते हुए विदेशी निवेशकों से हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और पर्यटन के क्षेत्र में राज्य की अपार संभावनाओं का पता लगाने और इन क्षेत्रों में निवेश करने की अपील की। सरकार का दावा है कि दावोस में बातचीत के दौरान विभिन्न कंपनियों ने राज्य में हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का भरोसा दिया है। ALSO READ: भारत में नए नए हाईवे और एक्सप्रेसवे आखिर टूट क्यों रहे हैं?

 

असम में बढ़ता निवेश

टाटा समूह ने राज्य के जागी रोड में करीब तीस हजार करोड़ की लागत से एक सेमीकंडक्टर प्लांट लगाया है। अब इसकी वजह से छोटे-छोटे पुर्जे बनाने वाली कंपनियां और विदेशी निवेशक भी आकर्षित हो रहे हैं। इसके ऑटोमोटिव मॉड्यूल के लिए मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के तौर पर अग्रणी वैश्विक कंपनी क्वालकॉम भी राज्य में पहुंची है। इससे असम पहली  बार ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का हिस्सा बन गया है।

 

सरकार का दावा है कि कई जापानी कंपनियों ने भी राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई है। जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को बीते जून में असम के दौरे पर आना था। लेकिन किसी वजह से वह दौरा टल गया था और प्रस्तावित बैठक दिल्ली में हुई। जापानी कंपनियों की ओर से राज्य में बड़े पैमाने पर संभावित निवेश को ध्यान में रखते हुए राज्य की ओर से संचालित पूर्वोत्तर कौशल केंद्र सक्रिय रूप से जापानी भाषा के अलावा कई तकनीकी कार्यक्रम चला रहा है।

 

जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोआपरेशन और कुछ निजी निवेशक गोलाघाट जिले के नुमलीगढ़ में एक बायोरिफाइनरी के लिए 408 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता दे रहे हैं। इसमें बांस से इथेनॉल बनाया जाएगा। इस साझा उपक्रम में फिनलैंड की दो कंपनियां फोर्टम और केमपोलिस भी शामिल है। यह दोनों बायो रिफाइनरी को तकनीक मुहैया कराएंगी। इस रिफाइनरी के लिए पूर्वोत्तर के करीब तीस हजार किसानो से कच्चा माल यानी बांस खरीदा जाएगा।

 

जापानी कंपनी सुजुकी ने राज्य में एक बायोगैस संयंत्र की स्थापना के लिए स्थानीय सहयोगियों के साथ हाथ मिलाया है।

 

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत डिपार्टमेंट फार प्रमोशन आफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अक्तूबर, 2019 से इस साल मार्च तक 26.10 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है।

 

राज्य सरकार ते मुताबिक, सिंगापुर की कई कंपनियां असम के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में तेजी से निवेश कर रही हैं। इसके अलावा एससीजी इंटरनेशनल और ग्लोबल पावर सिनर्जी  जैसे थाई ग्रुप असम में हरित ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और मैटीरियल सप्लाई चेन सेक्टर में निवेश की संभावनाएं तलाशते हुए अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। ALSO READ: मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

 

क्यों असम को चुन रहे हैं निवेशक

लेकिन आखिर राज्य के बदलते औद्योगिक परिदृश्य की क्या वजह है? विश्लेषकों का कहना है कि हाल के वर्षों में राज्य में सुरक्षा का परिदृश्य बदला है। राज्य सरकार बुनियादी ढांचा विकसित करने पर काफी जोर दे रही है। वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक समुद्र गुप्त कश्यप डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने असम को निवेश के आकर्षक ठिकाने के तौर पर बढ़ावा देकर इसे भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के के तौर पर स्थापित किया है।”

 

उनका कहना है, “खासकर टाटा समूह की ओर से सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित किए जाने के बाद देशी, विदेशी कंपनियों में यह ठोस संदेश गया है कि असम में निवेश के अनुकूल सुरक्षित माहौल है।”

 

राजनीतिक विश्लेषक श्यामाकांत बरुआ डीडब्ल्यू से कहते हैं, असम की भौगोलिक स्थिति भी बड़े उद्योगों के लिए अनुकूल है। दक्षिण एशिया के नजदीक होने के कारण यहां से निर्यात में सहूलियत होगी।

 

कश्यप भी उनसे सहमत हैं। वो कहते हैं, “अब पूर्वोत्तर में ज्यादातर राज्यों तक रेलवे और सड़क का बेहतर नेटवर्क है। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र में जल परिवहन भी शुरू हो गया है। ऐसे में यहां बनने वाले सामान को पूर्वोत्तर के अलावा देश के दूसरे राज्यों तक भेजना काफी आसान हो गया है।”

 

उनका कहना था, “यहां से निर्यात के लिए जल मार्ग के जरिए कोलकाता पोर्ट तक सामान भेजा जा सकता है। इसके साथ ही बांग्लादेश से देर-सबेर रिश्ते सुधरने के बाद चटगांव पोर्ट तक भी पहुंच आसान हो जाएगी। इसके साथ ही म्यांमार के सितवे पोर्ट को विकसित करने और वहां से मिजोरम की राजधानी आइजल को जोड़ने वाली सड़क का काम भी चल रहा है।” ALSO READ: क्या स्वस्थ रहने के लिए 8 घंटे सोना सच में जरूरी है?

 

बढ़ते निवेश के साथ चिंता भी बढ़ी

दूसरी ओर, इस तेज औद्योगीकरण ने चिंता भी बढ़ाई है। खासकर पर्यावरणविदों को आशंका है कि नए उद्योगों को लिए जंगल और पेड़ों की कटाई तेज हो सकती है। इसका पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

 

पर्यावरणविद दिनेश हाजरा डीडब्ल्यू से बातचीत में काजीरंगा नेशनल पार्क में कुछ साल पहले पंचसितारा होटल खोलने के सरकार के फैसले और उस पर होने वाले विवाद की मिसाल देते हैं। उनका कहना था, “असम को उद्योग, निवेश और रोजगार की जरूरत तो है। लेकिन पर्यावरण की कीमत पर ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।”

 

हाजरा कहते हैं, “काजीरंगा नेशनल पार्क का इलाका पहले ही घट रहा है। हर साल आने वाली बाढ़ के दौरान इसका बड़ा इलाका नदी में समा जाता है। ऐसे में किसी बड़े उद्योग को अनुमति देने से पहले पर्यावरण के नियमों का पालन किया जाना चाहिए। राज्य में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का असर पहले से ही नजर आ रहा है। अब औद्योगीकरण के साथ पर्यावरण को सुरक्षित रखने के उपायों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।”

Shadowfax में क्वालकॉम ने बेची ₹184 करोड़ की हिस्सेदारी, सोमवार को शेयर में दिख सकता है जबरदस्त एक्शन

अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी क्वालकॉम इनकॉरपोरेटेड ने ओपन-मार्केट ट्रांजेक्शन के जरिए लॉजिस्टिक्स फर्म शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज में 184 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध बल्क डील डेटा के अनुसार, क्वालकॉम की सब्सिडियरी क्वालकॉम एशिया पैसिफिक पीटीई ने शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज में 75 लाख शेयर बेचे। ये कंपनी की कुल हिस्सेदारी के 1.28 प्रतिशत के बराबर हैं। शेयर 245.13 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचे गए, जिससे इस ट्रांजेक्शन की कुल वैल्यू 183.8 करोड़ रुपये रही।

जून 2026 तक क्वालकॉम एशिया पैसिफिक पीटीई के पास शैडोफैक्स की 2.26 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इस डेवलपमेंट के बाद सोमवार, 24 अगस्त को शैडोफैक्स के शेयरों में तेज हलचल दिख सकती है। जुलाई-सितंबर तिमाही में अब तक कुछ और बड़े इनवेस्टर्स भी शैडोफैक्स में अपनी हिस्सेदारी कम कर चुके हैं। न्यूवेस्ट एशिया फंड IV (सिंगापुर) ने 6 अगस्त को 2.13 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची, जबकि फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने 5.48 प्रतिशत और एट रोड्स इन्वेस्टमेंट्स मॉरीशस II ने 24 जुलाई को 7.67 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची।

शैडोफैक्स, फ्लिपकार्ट के मुख्य लास्ट-माइल डिलीवरी पार्टनर्स में से एक है। यह हाइपरलोकल और ई-कॉमर्स शिपमेंट संभालती है, खासकर पीक डिमांड के समय जब कंपनी का अपना लॉजिस्टिक्स नेटवर्क दबाव में होता है। शैडोफैक्स के प्रमोटर अभिषेक बंसल और वैभव खंडेलवाल हैं। अभिषेक मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हैं। वहीं वैभव होल टाइम डायरेक्टर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं।

जनवरी 2026 में लिस्ट हुई थी Shadowfax Technologies

शुक्रवार, 21 अगस्त को BSE पर शैडोफैक्स के शेयर 255.45 रुपये पर बंद हुए। शैडोफैक्स टेक्नोलोजिज जनवरी 2026 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,907.27 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 14900 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 120 प्रतिशत और 3 महीनों में 24 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 16.51 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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शैडोफैक्स कई तरह के एंटरप्राइज क्लाइंट्स को सर्विस देती है। इनमें हॉरिजॉन्टल और नॉन-हॉरिजॉन्टल ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, फूड मार्केटप्लेस और ऑन-डिमांड मोबिलिटी कंपनियां शामिल हैं। कंपनी एक्सप्रेस फॉरवर्ड पार्सल डिलीवरी, रिवर्स पिकअप, ऑन-डिमांड हाइपरलोकल और क्रिटिकल लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन उपलब्ध कराती है।

कंपनी की वित्तीय सेहत

शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,323.85 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 66.20 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 4,080.35 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 115.18 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LPG Rate 22 August 2026: आपके शहर में कितने का मिल रहा गैस सिलेंडर? यहां देखें घरेलू और कमर्शियल रेट

LPG Rate 22 August 2026:  रसोई गैस की कीमतों में होने वाला बदलाव सीधे आम परिवारों के बजट पर असर डालता है। महीने की शुरुआत में सिलेंडर का खर्च पहले से तय करना पड़ता है, इसलिए LPG के दाम स्थिर रहना लोगों के लिए राहत की खबर होती है। 22 अगस्त 2026 को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी आज उपभोक्ताओं को गैस के लिए अतिरिक्त रकम नहीं चुकानी पड़ेगी। हालांकि, अलग-अलग शहरों में LPG के दाम अलग हो सकते हैं।

स्थानीय टैक्स और अन्य खर्चों की वजह से कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में अपने शहर का ताजा रेट जानना जरूरी है। फिलहाल घरेलू गैस की कीमतें स्थिर रहने से परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा है। आने वाले दिनों में LPG की कीमतों में किसी बदलाव पर उपभोक्ताओं की नजर बनी रहेगी।

आपके शहर में LPG सिलेंडर का क्या भाव है?

शहर के हिसाब से LPG की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। स्थानीय टैक्स और अन्य लागतों की वजह से एक ही सिलेंडर के लिए अलग-अलग शहरों में ग्राहकों को अलग कीमत चुकानी पड़ सकती है।

शहरघरेलू LPG (14.2 किलो)कमर्शियल LPG (19 किलो)
कोलकाता₹968.00₹2,872.50
मुंबई₹941.50₹2,691.50
चेन्नई₹957.50₹2,906.00
गुड़गांव₹950.50₹2,755.00
नोएडा₹939.50₹2,738.00
बैंगलोर₹944.50₹2,821.00
भुवनेश्वर₹968.00₹2,908.00
चंडीगढ़₹951.50₹2,760.00
हैदराबाद₹994.00₹2,985.00
जयपुर₹945.50₹2,765.50
लखनऊ₹979.50₹2,860.50
पटना₹1,031.50₹3,018.00
तिरुवनंतपुरम₹951.00

कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ज्यादा क्यों?

घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम अलग होते हैं। 19 किलो वाला सिलेंडर मुख्य रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए होता है और इसकी कीमत घरेलू सिलेंडर की तुलना में अधिक रहती है। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कारोबारों के लिए इसका खर्च सीधे संचालन लागत का हिस्सा बनता है।

घर बैठे ऐसे जानें LPG सिलेंडर का ताजा रेट

अगर आप Indane Gas का इस्तेमाल करते हैं, तो अपने क्षेत्र में LPG सिलेंडर की मौजूदा कीमत ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए Indian Oil की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना राज्य और जिला चुनना होगा।

वहीं, Bharat Gas के ग्राहक ebharatgas.com पर मौजूद ‘Quick Book & Pay’ विकल्प के जरिए सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत चेक कर सकते हैं।

इसके अलावा, HP Gas के उपभोक्ता HP Pay ऐप पर LPG सिलेंडर का ताजा रेट देख सकते हैं। सरकार के UMANG ऐप की मदद से भी ग्राहक LPG रिफिल बुक करने के साथ-साथ उसकी मौजूदा कीमत की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

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सावधान! क्या आपको भी है तेज बुखार और खांसी? नजरंदाज न करें H1N1 का यह खतरा

सावधान! क्या आपको भी है तेज बुखार और खांसी? नजरंदाज न करें H1N1 का यह खतरा

H1N1 swine flu

देश के बड़े शहरों में एक बार फिर स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मौसम में बदलाव और लापरवाही के चलते यह खतरनाक वायरस तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर बचाव न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है। आइए जानते हैं स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण, इससे बचने के उपाय और किन लोगों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ALSO READ: H1N1 Cases: दिल्ली-NCR में 1,700 से ज्यादा मामले, मुंबई में भी तेजी, बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़े, जानें बचाव और कब कराएं टेस्ट

 

क्या है H1N1 (स्वाइन फ्लू) और यह कैसे फैलता है?

H1N1 एक श्वसन तंत्र (Respiratory) से जुड़ा संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलता है। जब संक्रमित व्यक्ति खासता या छींकता है, तो हवा में मौजूद बूंदों के जरिए यह स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है।

 

स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण (Early Symptoms)

स्वाइन फ्लू के लक्षण आम फ्लू जैसे ही शुरू होते हैं, लेकिन इनकी तीव्रता काफी ज्यादा होती है। इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें:

 

तेज बुखार और कंपकंपी: अचानक से तेज बुखार आना और ठंड लगना।

लगातार खांसी और गले में खराश: सूखी या बलगम वाली तेज खांसी।

शरीर और सिरदर्द: मांसपेशियों में तेज दर्द और भयंकर सिरदर्द।

बेहद कमजोरी और थकान: शरीर में ऊर्जा की कमी और हर समय थकावट महसूस होना।

सांस लेने में तकलीफ: गंभीर मामलों में सीने में जकड़न और सांस फूलना (विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों में)।

पेट से जुड़ी समस्याएं: कुछ मामलों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी देखी जाती है।

 

किसे है सबसे ज्यादा खतरा?

कुछ विशेष वर्गों के लोगों के लिए H1N1 का यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है, जिन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

  • 5 साल से छोटे बच्चे और बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएं
  • अस्थमा, डायबिटीज, दिल या किडनी की पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोग
  • कमजोर इम्युनिटी वाले मरीज

स्वाइन फ्लू से बचाव के असरदार उपाय

मास्क का उपयोग करें: भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें और मास्क पहनें।

हाथों की स्वच्छता: अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं या सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें। आंखों, नाक और मुंह को गंदे हाथों से छूने से बचें।

खांसते-छींकते वक्त रखें सावधानी: खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल या टिश्यू पेपर से ढकें।

हाइड्रेटेड रहें और आराम करें: खूब पानी पिएं, पौष्टिक आहार लें और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखें।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें: यदि आपको लगातार तेज बुखार या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो खुद से दवा (सेल्फ-मेडिकेशन) लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और H1N1 की जांच करवाएं।

 

विशेष नोट: थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें।

Weather Alert: दिल्ली-NCR में अचानक बदला मौसम, यूपी-बिहार समेत इन 17 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट

दिल्ली-एनसीआर के आज तड़के मौसम ने अचानक बदलाव हुआ है। राजधानी दिल्ली समेत आसपास के शहरों में सुबह से ही बारिश हो रही है। वहीं दिल्ली के लोगों को बारिश की वजह से उमस और गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक, अभी दिल्ली-एनसीआर में आज और कल यानि रविवार को पूरे दिन हल्की बारिश की संभावना है। वहीं दूसरी ओर मौसम विभाग ने 22 अगस्त के लिए यूपी, बिहार समेत 17 राज्यों में मौसम खराब रहने का अनुमान जताया है। इन इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना है।

आज कैसा होगा दिल्ली का मौसम

22 अगस्त को राजधानी में मौसम बदला हुआ रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, शाम के समय दिल्ली के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान दिन का अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस और रात में न्यूनतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। वहीं रविवार को भी राजधानी में बारिश की संभावना जताई गई है।

यूपी और बिहार का हाल

22 अगस्त को उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों के कई हिस्सों में मौसम खराब रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के नोएडा, मेरठ, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, गोरखपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं, बिहार के गया, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, किशनगंज समेत कई जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट है, जहां हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। लखनऊ में तापमान 27 से 32 डिग्री और पटना में 28 से 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

आईएमडी का अलर्ट

पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। पूर्वी भारत के कई राज्यों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है और कुछ जगहों पर ओले गिर सकते हैं। वहीं, पश्चिमी भारत में तेज बारिश का दौर फिर शुरू हो सकता है, जिससे कई नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी हरियाणा और दक्षिण-पश्चिमी मध्य प्रदेश के आसपास हवा में चक्रवाती सिस्टम बना हुआ है। इसका असर आसपास के इलाकों के मौसम पर पड़ सकता है।

इन राज्यों में होगा भारी बारिश

मौसम विभाग ने 22 अगस्त को देश के कई राज्यों में खराब मौसम की आशंका जताई है। यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र और असम में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है जंगल की आग का धुआं

शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है जंगल की आग का धुआं

forest fire

नाओमी मिहारा

शोधकर्ता अब इंसान की सेहत पर जंगल के धुएं के लंबे समय तक पड़ने वाले असर को समझने लगे हैं। और सच कहें, तो यह काफी डरावना है। अटलांटा की एमोरी यूनिवर्सिटी में पर्यावरण स्वास्थ्य के प्रोफेसर यांग लियू का कहना है, “यह धुआं आपके पूरे शरीर को प्रभावित करता है। यह शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव (अंदरूनी क्षति) पैदा करता है और बीमारियों को बहुत तेजी से बढ़ाता है या उनके होने की रफ्तार तेज कर देता है।” ALSO READ: इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर उबाल

 

जनवरी 2026 में इससे जुड़ा एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसमें यांग लियू और दूसरे शोधकर्ताओं ने पाया कि कम मात्रा में भी बार-बार धुएं के संपर्क में आने से बुजुर्गों में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। एक महीने बाद, एक और अध्ययन में पाया गया कि 2006 और 2020 के बीच अमेरिका में जंगल की आग के धुएं के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हर साल औसतन 24,100 लोगों की मौत हुई।

 

वनाग्नि के धुएं में कई तरह के खतरनाक और जहरीले वायु प्रदूषक घुले होते हैं। लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला तत्व धूल और धुएं के अतिसूक्ष्म कण होते हैं, जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर, पीएम2।5 कहा जाता है।

 

पीएम2.5 राख, धूल और अन्य पदार्थों से बना होता है, जो स्पंज की तरह काम करता है और जहरीली धातुओं व ऑर्गेनिक कंपाउंड को अपने अंदर सोख लेता है। सांस के जरिए शरीर में घुसने पर पीएम2.5 के ये कण फेफड़ों और खून की नसों तक पहुंच जाते हैं। वहां से ये शरीर के बाकी अंगों में जलन, सूजन और भारी नुकसान पहुंचाते हैं।

 

लंबे समय तक पीएम2.5 के संपर्क में रहने से अस्थमा जैसी फेफड़ों की बीमारियों के साथ-साथ दिल की बीमारी, डायबिटीज, डिमेंशिया और कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

 

जंगल की आग का धुआं गर्भवती महिलाओं के लिए खास तौर पर खतरनाक होता है। इससे समय से पहले बच्चे के जन्म और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने का खतरा बढ़ सकता है। ALSO READ: जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जर्मन शहर ने उठाए कदम

 

जंगल की आग के धुएं में मौजूद पीएम 2.5 इतना जहरीला क्यों होता है?

जंगल की आग से निकलने वाला पीएम 2.5 बहुत ज्यादा जहरीला होता है, क्योंकि इसमें जलने वाली कई चीजों का मिश्रण होता है। गांव, देहात के जंगलों की आग और शहरों तक फैलने वाली आग में जलने वाली चीजें अलग होती हैं। इसलिए, इनका असर भी बदल जाता है।

 

हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एनवायर्नमेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल रिसर्च साइंटिस्ट मैरी जॉनसन का कहना है, “यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आग कहां लगी है। यहां तक कि एक ही शहर के अलग अलग मोहल्लों में भी धुएं का असर बदल सकता है, क्योंकि इसमें घुले तत्व अलग अलग हो सकते हैं।”

 

मैरी जॉनसन ने एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया, जिसने हाल ही में वनाग्नि के धुएं के संपर्क में आए स्वस्थ दमकलकर्मियों और आम नागरिकों पर धुएं के जहरीले असर का अध्ययन किया। वे यह समझना चाहते थे कि ये जहरीले तत्व हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं और शरीर को संक्रमणों व पुरानी बीमारियों के प्रति कितना संवेदनशील बना देते हैं।

 

शोधकर्ताओं को इसमें पारा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं मिलीं, जो कुदरती रूप से पौधों और मिट्टी में पाई जाती हैं और ये इंसान की बनाई चीजों में भी होती हैं। इसके अलावा, उन्हें कैंसर पैदा करने वाले तत्व और कभी न खत्म होने वाले केमिकल भी मिले, जिन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स' या पीफास कहा जाता है।

 

पीफास इंसानों द्वारा बनाए गए रसायन (सिंथेटिक केमिकल) हैं, जिनका इस्तेमाल रोजमर्रा की कई चीजों और निर्माण सामग्री में होता है। इन्हें कई तरह के कैंसर और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है।

 

इन नतीजों के आधार पर शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि भविष्य में किए जाने वाले शोध में बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों जैसे संवेदनशील वर्गों के लिए इलाज ढूंढने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ALSO READ: मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

 

समय और दूरी के साथ ज्यादा घातक हो जाता है जंगल की आग का धुआं

जंगल की आग का धुआं हवा में जितने ज्यादा समय तक रहता है, उतना ही जहरीला होता जाता है। वक्त के साथ इसमें ऐसे केमिकल रिएक्शन होते हैं कि यह हमारे शरीर की कोशिकाओं को और भी बुरी तरह से नुकसान पहुंचाने लगता है।

 

ग्रीस के शोधकर्ताओं ने पाया कि आग लगने के अगले कुछ दिनों में धुआं चार गुना तक ज्यादा जहरीला हो सकता है। यह लंबी दूरी भी तेजी से तय कर सकता है और जहां आग लगी थी, वहां से हजारों मील दूर के इलाकों में भी फैल सकता है।

 

नेशनल ऑब्जर्वेटरी ऑफ एथेंस के इंस्टीट्यूट फॉर एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक निकोलॉस मिहालोपोलोस ने बताया, “अगर इन कणों को साफ करने के लिए बारिश न हो, तो ये हवा में दस दिन या उससे भी ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं। इतने समय में ये पूरे गोलार्ध का चक्कर लगाकर वापस अपनी शुरुआत वाली जगह पर आ सकते हैं।”

 

उदाहरण के लिए, 2023 में कनाडा के जंगलों में 6,000 जगहों पर लगी आग से 1.5 करोड़ हेक्टेयर जमीन जल गई थी। इसकी वजह से “दूर तक फैलने वाला पीएम2.5 प्रदूषण” पूरे उत्तरी अमेरिका में फैल गया और यहां तक कि यूरोप और एशिया तक पहुंच गया था।

 

सितंबर 2025 में प्रकाशित एक शोध में शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि 2023 में कनाडा के जंगलों में लगी आग से निकले पीएम2।5 के संपर्क में आने के कारण उत्तरी अमेरिका में करीब 5,400 लोगों की अचानक मौत हुई। वहीं, उत्तरी अमेरिका व यूरोप में करीब 64,300 लोगों की लंबी बीमारी के कारण मौत हो सकती है।

 

हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि वायु प्रदूषण के अन्य स्रोत, जैसे कि गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों से होने वाला उत्सर्जन और खाना पकाने के लिए ईंधन जलाना, कुल मिलाकर ज्यादा स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं, क्योंकि लोग रोजाना इनके संपर्क में आते हैं।

 

बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ की एनवायर्नमेंटल एपिडेमियोलॉजिस्ट कैथरीन टोन कहती हैं, “जब हम यह देखते हैं कि पूरी आबादी में मौत की मुख्य वजह क्या है, तो पता चलता है कि वायु प्रदूषण के ये बाकी दूसरे स्रोत ही असल में इतनी मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।” ALSO READ: पृथ्वी पर ऑक्सीजन की उत्पत्ति की पहेली थोड़ी और सुलझी

 

वनाग्नि के धुएं से खुद को कैसे बचाएं

जंगल की आग का धुआं बहुत जहरीला होता है, खासकर उन लोगों के लिए जो आग लगने की आशंका वाले इलाकों के पास रहते हैं। बतौर जॉनसन, “आप धुएं से बचने के लिए जितना प्रयास करेंगे, उतना ही अच्छा होगा।”

 

उनकी सलाह है कि आग के दौरान और उसके तुरंत बाद घर के अंदर रहें, हीटिंग और एयर कंडीशनिंग सिस्टम में फिल्टर का इस्तेमाल करें, अपने पास एन95 मास्क रखें और यह ध्यान रखें कि बीमार या संवेदनशील लोगों को उनकी दवाइयां और इनहेलर आसानी से उपलब्ध हों।

 

आग का मौसम शुरू होने से पहले, लोगों को अपने घर और जमीन से आग पकड़ने वाली चीजों को हटा देना चाहिए। साथ ही, आस-पड़ोस में ऐसे निगरानी समूह बनाने चाहिए जो आग के शुरुआती संकेतों पर नजर रखें और छोटी आग को बड़ी तबाही में तब्दील होने से रोकने में मदद करे।