उद्योगपति गौतम अडानी ने कर्नाटक CM डीके शिवकुमार से की मुलाकात, टनल रोड प्रोजेक्ट में Adani Group बनी है सबसे बड़ी दावेदार

Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और अडानी ग्रुप की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सामने आए वीडियो में शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, अडानी आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर की यात्रा के बाद एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।

टनल रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी है मुलाकात?

गौतम अडानी और सीएम डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई फाइनेंशियल बिड्स से पता चलता है कि AEL ने दोनों पैकेजों में L1 रही थी यानी सबसे कम बोली लगाई थी।

राज्य सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज ने करीब 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को राज्य सरकार को फाइल भेजी थी। उसी दिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।

अभी नहीं मिला है ठेका

हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज के सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अभी तक उसे आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का ठेका नहीं दिया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली विशेष उद्देश्य कंपनी (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण अब कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो गई है।

शिवकुमार के लिए अहम है ये प्रोजेक्ट

बेंगलुरु का यह टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल माना जाता है। बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इस प्रोजेक्ट का लगातार समर्थन किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से विरोध भी सामने आया है। आलोचकों ने इसकी लागत, ट्रैफिक पर प्रभाव और बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

30 साल तक निजी कंपनी को मिलेगा संचालन अधिकार

प्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। इस मॉडल के तहत कर्नाटक सरकार प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से मुमकिन बनाने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding)’ देगी। सरकार प्रोजेक्ट की लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी। जबकि प्राइवेट कंपनी लगभग 30 साल की अवधि में कंसेशन व्यवस्था के जरिए अपना निवेश वसूल करेगी।

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में मौजूदगी

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से ही मजूत बिजनेस मौजूदगी है। ग्रुप की कंपनियों ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा, अडानी ग्रुप उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।

राहुल गांधी के बयानों से बढ़ी नजर

अडानी की शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। सरकार पर उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी कई अडानी से जुड़े प्रोजेक्टों, जिनमें ग्रेट निकोबार परियोजना भी शामिल है, लेकिन आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।

ऐसे में अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में उनकी कंपनी के L1 bidder बनने का घटनाक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खासा ध्यान खींच रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा हुई या नहीं।

गुजरात में जैन मंदिर पहुंचे थे अडानी

इस मुलाकात से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ पहुंचे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी थीं। अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि उन्हें महुडी जैन तीर्थ के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए सभी के शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा।

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बांग्लादेश बोला- हमारे PM को भारत दौरे की जल्दबाजी नहीं:मंत्री ने कहा- भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। भारत ने रहमान को द्विपक्षीय दौरे का न्योता भेजा भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया था। इसी के चलते बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। भारत का कहना है कि वह बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा कर रहा है। हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और देश को फिर से सही रास्ते पर लाने की कोशिश करेंगी। इस बयान पर बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ गया। ढाका ने कहा था कि भारत में हसीना के ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिशों पर असर डाल सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया कि कार्यक्रम के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। जयशंकर बोले- कोई भी रिश्ता तभी मजबूत जब उससे दोनों का फायदा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने शनिवार को इकोनॉमिक टाइम्स के वर्ल्ड लीडर फोरम में कहा, कोई भी रिश्ता तभी मजबूत और सफल होता है, जब उससे दोनों पक्षों को फायदा हो। जयशंकर ने कहा कि भारत यह उम्मीद नहीं करता कि पड़ोसी देश सिर्फ उसके हितों के मुताबिक काम करें। जैसे भारत दूसरे देशों के हितों का सम्मान करता है, वैसे ही उम्मीद वह दूसरे देशों से रखता है। —————————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश गंगा जल संधि में भारत से ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

संडे प्रोफाइल : रोरी कैनेडी:कैनेडी परिवार की रोरी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से बना रही हैं खास पहचान

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की भतीजी रोरी कैनेडी ने पेचीदा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर कई चर्चित डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई हैं। इन दिनों विमानन कंपनी बोइंग पर बनाई नई डॉक्यूमेंट्री को लेकर रोरी चर्चा में हैं। अमेरिका के मशहूर कैनेडी परिवार की विरासत से जुड़ी रोरी कैनेडी ने अपनी पहचान राजनीति में नहीं बल्कि डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की दुनिया में बनाई है। उनके पिता सीनेटर रॉबर्ट कैनेडी पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के छोटे भाई थे। कैनेडी परिवार का इतिहास कई त्रासद घटनाओं से भरा रहा है। 1968 में रोरी के जन्म से पहले ही उनके अंकल जॉन एफ. कैनेडी और पिता रॉबर्ट कैनेडी की हत्या हो चुकी थी। ब्राउन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाली रोरी बताती हैं कि कॉलेज के दिनों में अमेरिका में केबल टीवी तेजी से लोकप्रिय हो रहा था। इससे फिल्मों के प्रति उनका रुझान बढ़ा। वह एक आयरिश परिवार में पली-बढ़ीं, जहां कहानी सुनाने की पुरानी परंपरा थी, जो उनके रचनात्मक सफर का आधार बनी। रोरी ने अपनी फिल्मों में राजनीति और सरकार के फैसलों से पैदा होने वाले मानवीय संकटों को प्रमुखता से उठाया। इराक की कुख्यात अबू गरेब जेल की परिस्थितियों पर बनी उनकी फिल्म को एमी अवॉर्ड मिला। वियतनाम युद्ध के अंतिम दिनों पर बनी उनकी फिल्म ऑस्कर के लिए नामजद हुई। एक अन्य फिल्म में उन्होंने पिता रॉबर्ट कैनेडी की हत्या के बाद अपनी मां की जिंदगी पर पड़े असर को दिखाया। अलग तरह की कहानियां सामने लाने के इरादे से शुरू हुआ उनका सफर अब तक 35 से अधिक डॉक्यूमेंट्री फिल्मों तक पहुंच चुका है। अब उनकी नई फिल्म ‘फ्री फॉल : अ रेकनिंग फॉर बोइंग’ विमानन कंपनी बोइंग की अंदरूनी कहानी सामने लाती है। फिल्म में कंपनी के व्हिसल ब्लोअर्स के अनुभवों के जरिए यह बताया गया है कि सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े सवालों पर कंपनी के भीतर क्या हुआ। यह उनकी 2022 में आई फिल्म ‘डाउनफॉल : द केस अगेंस्ट बोइंग’ की अगली कड़ी है। पहली फिल्म में रोरी ने बताया था कि प्रतिस्पर्धा और मुनाफे की होड़ ने किस तरह कंपनी के फैसलों को प्रभावित किया और दुर्घटनाओं की जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए। रोरी के मुताबिक पहली फिल्म के बाद बोइंग ने सार्वजनिक रूप से भरोसा दिलाया था कि उसने गलतियों से सबक लिया है, लेकिन उड़ानों में दोबारा खराबी की नई खबरें सामने आने लगीं। इसी दौरान कंपनी के कई व्हिसल ब्लोअर्स ने रोरी से संपर्क किया और दावा किया कि हालात सुधरने के बजाय और खराब हो रहे हैं। इनमें बोइंग के पूर्व कर्मचारी जॉन बार्नेट भी थे, जिन्होंने पहली फिल्म के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी थी। मार्च 2024 में बोइंग के खिलाफ गवाही के दौरान बार्नेट मृत पाए गए थे। रोरी का मानना है कि कंपनियों और सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके फैसलों का केंद्र सार्वजनिक हित हो, न कि निजी।

फ्रांस में सितंबर में खुलेगा पहला बड़ा हिंदू मंदिर:पेरिस के पास होगा उद्घाटन, 13 दिन तक चलेगा भारतीय संस्कृति उत्सव

फ्रांस में पेरिस के पास बुसी-सेंट-जॉर्जेस में सितंबर 2026 में BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का उद्घाटन होगा। इसे फ्रांस का पहला बड़ा हिंदू मंदिर बताया जा रहा है। मंदिर के उद्घाटन के साथ 2 से 14 सितंबर तक 13 दिन का ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ होगा। इसमें लोगों को हिंदू परंपराओं, भारतीय कला, संगीत और संस्कृति के बारे में जानने का मौका मिलेगा। यह मंदिर सिर्फ पूजा के लिए नहीं होगा। यहां सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रम भी होंगे। उद्घाटन में भारतीय मूल के लोगों के साथ हिंदू समुदाय और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। मंदिर के खुलने से फ्रांस में रहने वाले भारतीय और हिंदू समुदाय को पूजा और संस्कृति से जुड़ने के लिए एक बड़ा केंद्र मिलेगा। भारत में तराशे गए पत्थरों से बना मंदिर पेरिस के पास बने BAPS स्वामीनारायण मंदिर में भारत से लाए गए खास पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें भारत में करीब 1,000 साल पुरानी नक्काशी की तकनीकों से तैयार किया गया है। कई हिस्सों पर कारीगरों ने हाथ से बारीक नक्काशी की है। भारत में तैयार किए गए इन पत्थरों को फ्रांस लाकर मंदिर में लगाया गया। इस काम में भारतीय कारीगरों के साथ फ्रांस के विशेषज्ञ भी शामिल रहे। इनमें नोट्रे-डाम कैथेड्रल की मरम्मत से जुड़े कारीगर भी थे। इस तरह मंदिर में भारतीय शिल्पकला और फ्रांस की आधुनिक निर्माण तकनीक का मेल देखने को मिलता है। मंदिर की संरचना में गुंबद, स्तंभ और शिखर जैसी पारंपरिक हिंदू वास्तुकला शामिल है। मंदिर उद्घाटन से पहले हुई विशेष पूजा मंदिर के शिखरों और मुख्य गुंबद पर लगाए जाने वाले पवित्र कलश और ध्वज की विशेष पूजा की गई। इस पूजा में बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान वैदिक मंत्रों का जाप किया गया और शांति, सद्भाव और सभी लोगों की भलाई के लिए प्रार्थना की गई 1970 में आया था फ्रांस में हिंदू मंदिर बनाने का आइडिया BAPS पेरिस की वेबसाइट के मुताबिक, फ्रांस में हिंदू मंदिर बनाने का आइडिया 1970 में आया था। इसके करीब 25 साल बाद, 1995 में पेरिस में मंदिर बनाने की योजना पर काम आगे बढ़ा।
2017 में बुसी-सेंट-जॉर्जेस में मंदिर के लिए जमीन मिली। इसके बाद 2021 में निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। करीब 56 साल बाद अब 2026 में मंदिर बनकर तैयार है। BAPS ने दुनिया में 1,300 से ज्यादा मंदिर बनाए बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी BAPS स्वामीनारायण परंपरा से जुड़ी एक वैश्विक हिंदू संस्था है। यह सिर्फ धार्मिक गतिविधियां नहीं चलाती, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सेवा से भी जुड़ी है। BAPS के मंदिर भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में हैं। यहां पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भारतीय संस्कृति, भाषा, संगीत, कला और बच्चों से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। BAPS के मुताबिक, दुनिया भर में उसके 1,300 से ज्यादा मंदिर हैं और इसका नेटवर्क 50 से ज्यादा देशों में फैला है। पेरिस के पास बना BAPS स्वामीनारायण मंदिर भी इसी वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा है। भारत में अक्षरधाम भी BAPS ने बनाया BAPS के बनाए सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम भी शामिल है। इसके अलावा गुजरात के गांधीनगर में भी अक्षरधाम परिसर है। दिल्ली का अक्षरधाम पारंपरिक भारतीय शैली में बनाया गया है। इसे बनाने में हजारों कारीगरों और स्वयंसेवकों ने काम किया था। BAPS के मुताबिक, मंदिर को पारंपरिक वास्तु और शिल्प परंपराओं के अनुसार तैयार किया गया है।

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20 साल में एग्जिक्यूटिव ट्रेनी से DGM तक का सफर! गेल की तरक्की ने कैसे लंबे समय तक टिके एंप्लॉयी की जिंदगी बदली और मिला अवॉर्ड

आज के दौर में बेहतर सैलरी, जल्दी प्रमोशन और नई चुनौतियों के लिए नौकरी बदलना काफी सामान्य हो गया है। कई प्रोफेशनल्स मानते हैं कि हर कुछ साल में कंपनी बदलने से करियर तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। अगर कोई कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हो और वहां कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां, सीखने के अवसर और आगे बढ़ने के मौके मिलते रहें, तो लंबे समय तक उसी संगठन के साथ बने रहना भी समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी कंपनी के बिजनेस और कामकाज को गहराई से समझने के साथ-साथ धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होता है।

समय के साथ अनुभव, नेटवर्क और संगठन का भरोसा भी मजबूत होता है। GAIL में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही का करियर इसी पहलू की एक दिलचस्प मिसाल पेश करता है, जहां लंबें समय तक काम करना लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों और पेशेवर विकास के साथ आगे बढ़ा।

वायरल पोस्ट

GAIL (India) Limited में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही की LinkedIn पोस्ट इसी पहलू को सामने लाती है। जून 2026 में अपने दो दशक पूरे होने पर उन्होंने Executive Trainee से Deputy General Manager तक के सफर को याद किया। उनकी कहानी बताती है कि सही माहौल मिलने पर कंपनी की ग्रोथ के साथ कर्मचारी का करियर भी लगातार आगे बढ़ सकता है।

एक कंपनी में लंबे समय तक काम करने के फायदे

लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कर्मचारी संगठन के कामकाज और बिजनेस को गहराई से समझने लगता है। समय के साथ उसे ज्यादा जिम्मेदारियां और बड़े प्रोजेक्ट संभालने का मौका मिल सकता है।

राकेश शाही ने अपने करियर के दौरान Project Management, Gas Marketing, Business Development, Pipeline Infrastructure, Policy, Regulation और Compliance जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। इससे उनकी विशेषज्ञता सिर्फ एक भूमिका तक सीमित नहीं रही।

प्रमोशन के साथ बढ़ती जिम्मेदारी

अगर कंपनी अपने कर्मचारियों की क्षमता को पहचानती है, तो लंबा कार्यकाल Leadership Roles तक पहुंचने का रास्ता भी खोल सकता है। Executive Trainee से DGM तक का सफर इसका उदाहरण है।

हालांकि सिर्फ लंबे समय तक कंपनी में बने रहना प्रमोशन की गारंटी नहीं है। असली फायदा तब होता है, जब संगठन performance को महत्व देता हो और कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां लेने के अवसर देता हो।

Deputation और नए अनुभव का फायदा

राकेश शाही के करियर में PNGRB में deputation भी एक अहम पड़ाव रहा। वहां उन्हें regulatory framework, authorisation, consumer affairs और natural gas sector से जुड़े विषयों पर काम करने का मौका मिला। ऐसे अवसर कर्मचारी के अनुभव को व्यापक बनाते हैं। बड़ी कंपनियों में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों, प्रोजेक्ट्स और संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है।

कब कंपनी के साथ बने रहना चाहिए?

हर कर्मचारी के लिए यह सवाल अहम है कि उसे मौजूदा कंपनी में बने रहना चाहिए या नई नौकरी तलाशनी चाहिए। अगर आपको नए प्रोजेक्ट्स और जिम्मेदारियां मिल रही हैं, नई स्किल्स सीखने का मौका है और आपके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन या अप्रेजल हो रहा है, तो कंपनी में बने रहना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कंपनी का बिजनेस मजबूत होना, सीनियर्स का सपोर्ट मिलना और अच्छा वर्क कल्चर भी महत्वपूर्ण संकेत हैं।

कब समझें कि नौकरी बदलने का समय आ गया है?

दूसरी तरफ, अगर कई सालों से आपका काम एक जैसा है और सीखने के मौके खत्म हो चुके हैं, तो बदलाव के बारे में सोचना चाहिए। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद प्रमोशन या उचित अप्रेजल न मिलना भी संकेत हो सकता है। अगर कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, भविष्य की संभावनाएं कमजोर हैं या वर्क कल्चर लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है, तो दूसरे अवसर तलाशना बेहतर हो सकता है।

लंबा करियर तभी फायदेमंद जब ग्रोथ जारी रहे

राकेश शाही की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि लंबे समय तक एक कंपनी में रहना तभी फायदेमंद है, जब आपकी ग्रोथ भी साथ-साथ हो रही हो। सिर्फ वर्षों की संख्या बढ़ाना करियर की सफलता नहीं है। अगर कंपनी आगे बढ़ रही है, आपको सीखने और जिम्मेदारी लेने के अवसर मिल रहे हैं और आपकी मेहनत को पहचान मिल रही है, तो बार-बार नौकरी बदलने के बजाय उसी संगठन के साथ आगे बढ़ना एक मजबूत करियर रणनीति हो सकती है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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बाढ़ प्रभावितों के लिए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय, CM योगी के निर्देश पर राहत-बचाव कार्य तेज

बाढ़ प्रभावितों के लिए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय, CM योगी के निर्देश पर राहत-बचाव कार्य तेज

CM Yogi Adityanath

उत्तरप्रदेश में बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। राहत आयुक्त कार्यालय की 21 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में अब तक 19 जिले प्रभावित हुए हैं, जबकि 14 जिलों में 21 अगस्त को बाढ़ का प्रभाव दर्ज किया गया। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के साथ नावों, मोटर बोट, बचाव टीमों, मेडिकल टीमों और कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की गई है।

 

अब तक 258 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें 92 गांवों में आबादी और कृषि दोनों प्रभावित हैं। वहीं 27 गांवों में कटान, 75 गांवों में जलभराव से आबादी प्रभावित, 91 गांवों में केवल कृषि प्रभावित और 26 गांवों में बाढ़ से संपर्क मार्ग कटने की स्थिति दर्ज की गई है। वहीं 157 गांवों में राहत कार्य संचालित किया जा रहा है।

 

1.45 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी प्रभावित

ग्रामीण क्षेत्र की करीब 1.45 लाख की आबादी बाढ़ और जलभराव से प्रभावित है। वहीं बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने शरणालयों और सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था की है। 1,274 गांवों से संबंधित लोगों को बाढ़ शरणालयों तक पहुंचाए जाने, 1,905 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और 13,611 लोगों के बाढ़ शरणालयों में रहने की व्यवस्था की जा चुकी है।

 

बाढ़ प्रभावित पशुओं के लिए भी व्यवस्था हुई

मानव आबादी के साथ पशुधन की सुरक्षा पर भी प्रशासन का जोर है। रिपोर्ट के अनुसार 15,561 पशु प्रभावित हुए हैं। इनके लिए पशु शिविर लगाए गए हैं और उपचार व टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। 544 पशुओं के उपचार, 12,695 पशुओं के टीकाकरण और 22,636 क्विंटल भूसा वितरण किया गया है।

 

200 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया

बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रदेश में 17,428.01 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। इसमें 8,452.88 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि, 3,903.16 हेक्टेयर बोया गया क्षेत्र और 62 हेक्टेयर कटान प्रभावित क्षेत्र है। फसल क्षति के लिए 200.31 करोड़ रुपये अनुदान दिया गया है।

 

राहत के लिए 1,599 नावें और 621 मोटरबोट

बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और आवागमन के लिए बड़ी संख्या में संसाधन लगाए गए हैं। रिपोर्ट में 1,599 नावें, 621 मोटरबोट, 1,315 स्थानीय गोताखोर, 12 एनडीआरएफ टीमें, 9 एसडीआरएफ टीमें और 7 पीएसी टीमें लगाए जाने का आंकड़ा दिया गया है। साथ ही 6,032 खोज-बचाव वाहन भी दर्ज किए गए हैं।

 

1.28 करोड़ लीटर से अधिक पानी की व्यवस्था

राहत सामग्री के वितरण में भी प्रशासन की सक्रियता सामने आई है। 28,126 खाद्यान्न सामग्री पैकेट, 17,424 डिग्निटी किट, 22,883.5 मीटर तिरपाल, 1,28,576 लीटर पीने का पानी, 35,153 ओआरएस पैकेट और 69,834 क्लोरीन टैबलेट वितरित किए गए हैं। वहीं राहत एवं स्वास्थ्य मोर्चे पर 1,560 कम्युनिटी किचन/लंगर, 762 मेडिकल टीम, 544 उपचारित मानव, 566 एंटी-स्नेक वेनम की व्यवस्था हुई है।

 

प्रशिक्षित आपदा मित्र कर रहे मदद

बाढ़ प्रबंधन में स्थानीय स्तर पर भी व्यवस्था मजबूत की गई है। प्रदेश में 12,687 राहत चौपालें लगाई गई हैं। इसके अलावा 6,704 आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया गया है, जो लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

Home Loan: सस्ता लोन पड़ न जाए महंगा! होम लोन लेने से पहले इन 6 पॉइंट्स में समझ लें प्रोसेसिंग फीस और हिडन चार्जेस का पूरा गणित

Home Loan Hidden Charges: नया घर खरीदने के लिए होम लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ बैंक की ब्याज दरों की तुलना करते हैं। लेकिन सच यह है कि लोन लेने का कुल खर्च सिर्फ ब्याज तक सीमित नहीं होता।

बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) आपकी लोन एप्लिकेशन की जांच और प्रोसेसिंग के नाम पर एक अच्छी-खासी रकम ‘प्रोसेसिंग फीस’ और अन्य चार्जेस के रूप में वसूलती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, लोन लेने से पहले इन सभी खर्चों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि बाद में कोई छिपा हुआ खर्च आपकी जेब पर भारी न पड़े।

1. क्या होती है होम लोन प्रोसेसिंग फीस?

प्रोसेसिंग फीस वह प्रशासनिक शुल्क है, जो बैंक आपके लोन आवेदन की क्रेडिट जांच, दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और अन्य कागजी कार्रवाई के लिए लेता है। यह फीस हर बैंक में अलग-अलग होती है। कुछ बैंक एक तय राशि वसूलते हैं, तो कुछ लोन राशि का 0.25% से लेकर 2% तक चार्ज करते हैं। त्योहारों या विशेष स्कीम के दौरान बैंक इस फीस पर पूरी या आंशिक छूट भी देते हैं।

2. लोन रिजेक्ट होने पर क्या प्रोसेसिंग फीस वापस मिलती है?

अक्सर लोग मान लेते हैं कि अगर लोन मंजूर नहीं हुआ, तो बैंक फीस वापस कर देगा लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, बैंकों को आवेदन के समय ही साफ-साफ बताना होगा कि लोन रिजेक्ट या डिसबर्स न होने की स्थिति में प्रोसेसिंग फीस का कितना हिस्सा रिफंडेबल है। एप्लिकेशन फीस देने से पहले बैंक अधिकारी से रिफंड पॉलिसी लिखित में जरूर समझ लें।

3. प्रोसेसिंग फीस के अलावा ये ‘अतिरिक्त खर्च’ भी समझें

केवल प्रोसेसिंग फीस देखकर किसी लोन को सस्ता न समझें। इसके साथ कई अन्य अपफ्रंट खर्च भी जुड़ते हैं:

लीगल और टाइटिल फीस: प्रॉपर्टी के मालिकाना हक और कानूनी जांच के लिए।

टेक्निकल और वैल्युएशन चार्ज: प्रॉपर्टी की बाजार में सही कीमत और निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए।

डॉक्यूमेंटेशन फीस: एग्रीमेंट और स्टांप ड्यूटी से जुड़े खर्च।

इस बात का ध्यान दें कि जिस बैंक की प्रोसेसिंग फीस कम दिख रही हो, हो सकता है कि उसके लीगल या टेक्निकल चार्जेस दूसरे बैंकों से ज्यादा हों!

4. केवल ब्याज दर नहीं, ‘ऑल-इन कॉस्ट’ की तुलना करें

दो बैंकों के लोन की तुलना करते समय सिर्फ विज्ञापनों में दिख रही ब्याज दर न देखें।RBI के आदेशानुसार, बैंक को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को ‘की फैक्ट्स स्टेटमेंट’ (KFS) देना अनिवार्य है। इसमें लोन की असली कुल लागत यानी Annual Percentage Rate (APR) लिखा होता है। स्मार्ट तरीका ये है कि दो लोन की तुलना करते समय ब्याज दर + प्रोसेसिंग फीस + अन्य सभी चार्ज को जोड़कर ही फैसला लें।

5. क्या प्रोसेसिंग फीस कम या माफ कराई जा सकती है?

जी हां! बैंक अक्सर ग्राहकों के क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर फीस में मोलभाव की गुंजाइश रखते हैं। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है और आपकी जॉब प्रोफाइल स्थिर है, तो आप बैंक से फीस माफ करने या घटाने की मांग कर सकते हैं। बैंक प्रतिनिधि या एजेंट द्वारा दी गई किसी भी छूट या छूट के मौखिक वादे पर भरोसा न करें, इसे आधिकारिक ईमेल या लेटर हेड पर लिखित रूप में ही लें।

6. पेमेंट करने से पहले एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें

आवेदन जमा करने से पहले बैंक से फीस की पूरी सूची मांगें। अगर लोन मंजूर होने के बाद कोई ऐसा चार्ज जोड़ा जाता है जिसका खुलासा पहले नहीं किया गया था, तो आप बैंक से जवाब मांग सकते हैं। RBI के नियमों के अनुसार, बिना पूर्व जानकारी के ग्राहकों पर नए चार्ज थोपना अनुचित व्यापार प्रथा के अंतर्गत आता है।

Home Loan: एक नजर में होम लोन के प्रमुख चार्जेस की लिस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पेंटागन में किचन कैबिनेट:अमेरिकी रक्षा मंत्री की पत्नी अटैक प्लान के लिए सीक्रेट मीटिंग में बैठीं, स्टाफ भी चुन रहीं

दुनिया का सबसे ताकतवर रक्षा मंत्रालय अमेरिकी पेंटगन किचन कैबिनेट (ताकतवर नेता के परिवार जन) में तब्दील हो गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की पत्नी जेनिफर हेगसेथ इन दिनों पेंटागन में सबसे प्रभावशाली सलाहकार की भूमिका निभा रही हैं। पत्रकार रहीं जेनिफर पति के इंटरव्यू की तैयारी, स्टाफ चुनने व रणनीति बनाने में मौजूद रहती हैं। उनकी भूमिका तब विवादों में आई, जब वे उस सिग्नल चैट मीटिंग में शामिल थीं, जिसमें यमन में अमेरिकी हमले की योजना साझा की गई थी। हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें सैन्य परिवारों से जुड़े मिलिट्री स्पाउस कमीशन का अध्यक्ष बनाया है। न्यूज चैनल में हेगसेथ के शो की प्रोड्यूसर थीं जेनिफर, यहीं हुई दोस्ती पीट-जेनिफर की दोस्ती 2014 में टीवी चैनल में हुई। तब पीट बतौर एंकर शो होस्ट करते और जेनिफर उनकी शो प्रोड्यूसर हुआ करती थीं। साथ काम करते-करते दोनों करीब आए और 2019 में शादी के बंधन में बंध गए। दोनों की ये दूसरी शादी है। पीट अक्सर कहते हैं कि ‘जीसस’ (ईश्वर) और ‘जेनिफर’ ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है। ऐसे बढ़ा जेनिफर का प्रभाव… जेनिफर का दबदबा तब और बढ़ा, जब वह मार्च 2025 में ब्रिटिश वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ एक बेहद गोपनीय बैठक में मौजूद थीं। उस वक्त अमेरिका ने यूक्रेन के साथ सैन्य खुफिया जानकारी साझा करना रोक दिया था। जेनिफर की मौजूदगी से असहज ब्रिटिश अधिकारियों ने संवेदनशील बातें रोक दीं। इसके बाद अलग से जेनिफर की गैरमौजूदगी में बैठक करनी पड़ी। पाबंदियां लगाईं जेनिफर ने मीडिया के प्रति कड़ा रुख अपनाया। फरवरी 2025 में पेंटागन ने ‘मीडिया रोटेशन प्रोग्राम’ लागू किया, जिसके तहत कई संस्थानों को पेंटागन के वर्कस्पेस से बाहर कर दिया। साथ ही, वे रक्षा विभाग के वीडियो-रील्स के जरिए सैन्य गतिविधियों को युवा, जेन-जी तक पहुंचाने की रणनीति में भी भूमिका निभा रही हैं। सैन्य अफसरों का भी इंटरव्यू ले चुकीं ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद जेनिफर ने रक्षा विभाग से जुड़े सैन्य अफसरों के 40-40 मिनट के लंबे इंटरव्यू लिए और मीडिया से निपटने की क्षमता पर तीखे सवाल पूछे। भूमिका पर सैन्य अफसरों ने उठाए सवाल हेगसेथ के साथ काम कर चुके पूर्व मुख्य प्रवक्ता जॉन उलीओट ने कहा, ‘किसी रक्षा मंत्री का अपनी पत्नी को गोपनीय सैन्य कर्तव्यों में शामिल करना और उस पर कोई कार्रवाई न होना हैरान करने वाला है।’ वहीं सीनेटर क्रिस कून्स ने कहा कि रक्षा मंत्री को मिली उच्च-स्तरीय सुरक्षा मंजूरी कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे वे अपनी पत्नी को सौंप दें।

RE Hunter 350 vs 350cc Triumph Speed 400: Price and specification comparison

RE Hunter 350 vs 350cc Triumph Speed 400: Price and specification comparison
RE Hunter 350 and Triumph Speed 400

The last time we compared the Hunter 350 to the Speed 400, things were a lot more straightforward, but things have since changed. Royal Enfield has fixed the Hunter’s biggest deterrent, comfort and has positioned it squarely as a stylish and relaxed street naked; completely different from its retro siblings. Bajaj, on the other hand, had to downsize the Triumph Speed 400’s 398cc engine to a 349cc one, to meet the 18 percent GST slab. So, is picking one from these two, very good motorcycles still difficult? Let’s see.

Royal Enfield Hunter 350 vs Triumph Speed 400: Engine and output

Triumph has more power and torque, but RE delivers both earlier

 

Royal Enfield Hunter 350

Triumph Speed 400

Engine

349cc single-cylinder, air-cooled

349cc single-cylinder, liquid-cooled

Power

20.2hp at 6,100rpm

37hp at 8500rpm

Torque

27Nm at 4,000rpm

32Nm at 7,000rpm

Transmission

6-speed

5-speed

Power-to-weight ratio

111.6hp/tonne

206.7hp/tonne

Bajaj’s downsizing of the 398cc engine has reduced torque more than horsepower, making the Speed 400 a relatively weaker proposition compared to before, at least on paper. Royal Enfield, however, has not had to do anything and continues with its likable J-series engine making the same power and torque as before. It’s hard not to miss that the Hunter delivers both of it much earlier in the rev range than the Speed which reinforces the status quo that these still aren’t meant to be substitutes for each other. The Speed does have one extra gear, making it more capable at highway speeds of the two.

Royal Enfield Hunter 350 vs Triumph Speed 400: Dimensions and weight

Both remain in lockstep with each other

 

Royal Enfield Hunter 350

Triumph Speed 400

Fuel tank capacity

13 litres

13 litres

Ground clearance

160mm

164mm

Kerb weight

181kg

179kg

Seat height

790mm

803mm

Wheelbase

1370mm

1386mm

Had this been the Bullet/Classic 350, this section would’ve been an onslaught on them but perhaps that’s exactly why the Hunter 350 exists. Being the lightest Royal Enfield, the Hunter puts up a tough fight to the Speed 400 on every front. Even though it is 2kg heavier than the Speed, it’s more accessible with a lower seat height. Both are very approachable and friendly machines, for both newer and shorter riders.

Royal Enfield Hunter 350 vs Triumph Speed 400: Tyres, brakes, and suspension

Speed 400 gets a fatter fork and better brakes

 

Royal Enfield Hunter 350

Triumph Speed 400

Tyres (F, R)

110/70-17, 140/70-17

110/80R17, 150/70R17

Brakes (F, R)

300mm disc, 270mm disc; dual-channel ABS

300mm disc, 230mm disc; dual-channel ABS

Suspension (F, R)

41mm RSU fork, twin-shock

43mm USD fork, monoshock

On paper, the numbers once again continue to be really close. However, the Speed 400 gains on the Hunter 350 in a few areas. It has a wider rear tyre, gets radial tyres at both ends and a slightly fatter USD fork. The Triumph also gets better brakes with a far more effective four-piston, radial caliper at the front, whereas the Hunter 350 sticks to a more conventional two-piston, floating caliper.

Royal Enfield Hunter 350 vs Triumph Speed 400: Features

Par for the (retro) course for both

Packing in the most features for the money isn’t what this segment is known for, and neither motorcycle attempts to change that. The Hunter 350 offers dual-channel ABS, an assist and slipper clutch, a type-C USB port, and a TFT navigation tripper pod on higher variants. The Speed 400, gets everything except the navigation feature, offering traction control instead.

Royal Enfield Hunter 350 vs Triumph Speed 400: Price

Hunter is far more affordable

 

Royal Enfield Hunter 350

Triumph Speed 400

Price

Rs 1.37 lakh – Rs 1.71 lakh

Rs 2.34 lakh

Last but not least, how much do you pay to buy one of these? And this is an area where the Hunter 350 has a huge advantage. The top-most variant of the Hunter 350 will set you back by Rs 1.71 lakh, with the base variant starting at as low as Rs 1.37 lakh (both prices ex-showroom, Chennai). On the other hand, the Speed 400 costs Rs 2.34 lakh (ex-showroom, Delhi). On paper, this can look like a difficult choice considering how close these are, but that confusion will go away as soon as you take test rides considering the vastly different riding experiences of both.

पूर्वी यूपी की विरासत और झरनों से रूबरू होंगे 80 बाइकर्स, ‘द राइडिंग चैप्टर्स-2’ में दिखेगा उत्तर प्रदेश का नया अंदाज

पूर्वी यूपी की विरासत और झरनों से रूबरू होंगे 80 बाइकर्स, ‘द राइडिंग चैप्टर्स-2’ में दिखेगा उत्तर प्रदेश का नया अंदाज

bike riders

बौद्ध विरासत के केंद्र सारनाथ, ऐतिहासिक चुनारगढ़ और मानसून में अपनी रंगत में नजर आने वाले देवदरी व राजदरी जलप्रपात अब एडवेंचर टूरिज्म के नए आकर्षण के रूप में उभरेंगे। उत्तर प्रदेश पर्यटन ने इन स्थलों को जोड़ते हुए युवाओं और बाइकिंग के शौकीनों के लिए खास वीकेंड यात्रा तैयार की है। शनिवार को 'द राइडिंग चैप्टर्स' के दूसरे संस्करण के तहत 80 बाइक सवार लखनऊ से दो दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' अभियान के जरिए पर्यटन विभाग का प्रयास प्रदेश के उन समृद्ध लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित (अल्पज्ञात) स्थलों को नई पहचान दिलाना है, जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन सर्किट का हिस्सा नहीं बन सके हैं।

 

उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने सुबह 8 बजे 1090 चौराहे से दो दिवसीय बाइक यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान लखनऊ के मुख्य विकास अधिकारी प्रफुल्ल कुमार शर्मा भी मौजूद रहे। बाइकर्स का दल सुल्तानपुर और जौनपुर होते हुए बौद्ध स्थली सारनाथ पहुंचेगा। इसके बाद चुनार की ओर बढ़ेगा। इस तरह यह यात्रा पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को करीब से जानने-समझने का अवसर भी देगी।

 

गंगा किनारे इतिहास का प्रहरी चुनारगढ़

गंगा नदी के किनारे बसा ऐतिहासिक चुनारगढ़ इस यात्रा का अहम पड़ाव है। शेरशाह सूरी से लेकर मुगल और ब्रिटिश शासनकाल तक के दौर का साक्षी रहा यह किला  विशाल पत्थर की दीवारों, सामरिक महत्व और गंगा तट पर बसे भव्य स्वरूप के लिए जाना जाता है। स्वयं में इतिहास की कई परतों को समेटे चुनारगढ़ आज भी पूर्वी उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत का अहम प्रतीक है, जहां पर्यटन की संभावनाओं को और विस्तार देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

 

'बेहतर कनेक्टिविटी से नए पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान'

यूपीएसटीडीसी के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने कहा कि प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षित यात्रा का माहौल पर्यटन के नए और अल्पज्ञात स्थलों तक पहुंच को आसान बना रहा है। उन्होंने कहा कि 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' के माध्यम से युवाओं को रोमांच और प्रत्यक्ष अनुभव के जरिए ऐसे पर्यटन स्थलों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो अब तक सामान्य यात्रा कार्यक्रमों से बाहर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से युवाओं को उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से इतर इतिहास, प्रकृति, संस्कृति और रोमांच से जुड़े अनदेखे अनुभवों को जानने और समझने का अवसर मिलेगा।

 

आस्था से एडवेंचर तक

रात्रि विश्राम के बाद रविवार को बाइकर्स काशी आनंदम से अगले पड़ाव के लिए रवाना होंगे। यहां से दल शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगा, जहां दर्शन-गंगा आरती के बाद यात्रा देवदरी और राजदरी वाटरफॉल की ओर बढ़ेगी। घने जंगलों व हरियाली के बीच स्थित देवदरी और राजदरी जलप्रपात मानसून में पूरे उफान पर रहते हैं। ऐसे में यात्रा का दूसरा दिन बाइकिंग के रोमांच के साथ प्रकृति और एडवेंचर टूरिज्म का विशेष अनुभव कराएगा।

 

..ताकि पर्यटन मानचित्र पर दिखें अल्पज्ञात स्थल 

'द राइडिंग चैप्टर्स' का पहला संस्करण इस माह के शुरुआत में लखनऊ से कालिंजर किले तक आयोजित किया गया था। पहली बाइक यात्रा को मिली सफलता के बाद शनिवार को इसके दूसरे संस्करण को हरी झंडी दिखाई गई। ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत पर्यटन विभाग सुनियोजित सड़क यात्राओं के जरिए प्रदेश की विरासत और अल्पज्ञात पर्यटन स्थलों को पर्यटकों से रूबरू कराते हुए इन्हें प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर लाने की पहल कर रहा है।