क्या सूखे की मार से जर्मनी में महंगा होगा भोजन?

क्या सूखे की मार से जर्मनी में महंगा होगा भोजन?

Germany drought

निक मार्टिन

जर्मनी के मुख्य किसान संघ ने चेतावनी दी है कि सूखे और भीषण गर्मी से फसलों को पहुंचे नुकसान के कारण इस बार पैदावार औसत से कम रहेगी। क्या कम पैदावार का महंगाई भड़काएगी।

 

जर्मनी के मुख्य किसान संघ ने चेतावनी के बाद डीडब्ल्यू यह समझने की कोशिश कर रहा है कि कम पैदावार से खाने-पीने की चीजों की कीमतों और राशन के बिल पर क्या असर पड़ सकता है। जानिए जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्यान्न संकट के अलग अलग आयाम। ALSO READ: शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है जंगल की आग का धुआं

 

1. जर्मनी में 2026 में फसल की पैदावार पर कितना असर होगा?

जर्मन किसान संघ (डीबीवी) ने मध्य अगस्त में चेतावनी दी कि लगातार सूखे के कारण फसल की पैदावार ‘औसत से कम' होगी, क्योंकि खेतों का बहुत बड़ा हिस्सा बुरी तरह से सूख चुका है और जमीन प्यासी पड़ी है।

 

एक बयान में, डीबीवी के अध्यक्ष योआखिम रुकवीड ने चेतावनी दी कि देश में अनाज की पैदावार पिछले साल की तुलना में 7 फीसदी कम रहेगी। उन्होंने इसका कारण “बहुत ज्यादा सूखी बसंत ऋतु और जून के दूसरे भाग में पड़ी भीषण गर्मी” को बताया, जिसने “कई फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया।”

 

डीबीवी ने कहा कि इस साल अनाज का कुल उत्पादन 41.9 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो 2025 की तुलना में लगभग 3.3 मिलियन टन कम है।

 

रेपसीड (सरसों जैसी एक फसल का तिलहन) की पैदावार में सबसे बड़ी गिरावट आई। इसकी 3.3 मिलियन टन फसल हुई, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 17 फीसदी कम है। वहीं, कम पैदावार के बावजूद जौ का उत्पादन पिछले साल के स्तर पर ही रहा, क्योंकि इसे उगाने के लिए ज्यादा जमीन का इस्तेमाल किया गया था।

 

डीबीवी ने कहा कि आलू की फसल भी औसत से कम रहने की उम्मीद है और कुछ इलाकों में चुकंदर की फसल “काफी खराब” हो सकती है। रुकवीड का कहना है कि इस बार खेती में यह बात बहुत मायने रख रही है कि खेत किस इलाके में है। उन्होंने बताया कि खासकर दक्षिण और पश्चिम जर्मनी में फसलें बहुत कम हुई हैं और कई जगहों पर तो पूरी की पूरी फसल ही बर्बाद हो गई है।

 

इसके अलावा, जर्मनी के फेडरल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ने चेतावनी दी है कि पिछले साल की तुलना में देश में सेब की फसल में 18 फीसदी की कमी आने का अनुमान है।

 

जर्मन मौसम विभाग के अनुसार, जर्मनी इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी वाले मौसम के बीच भीषण सूखे का सामना कर रहा है। मार्च से ही बारिश बहुत कम हो रही थी और अब इस भीषण गर्मी ने हालात को और भी बिगाड़ दिया है। ALSO READ: ट्रंप को झटका, 75 देशों पर वीजा प्रतिबंध के फैसले पर रोक

 

2. सूखे का असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों और उनकी उपलब्धता पर कैसे पड़ेगा?

कृषि मंत्री आलोइस रेनर ने मंगलवार को सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘जेडडीएफ' को बताया कि मंत्रियों को “तुरंत दाम बढ़ने की उम्मीद नहीं है।” हालांकि, उन्होंने इस बात की गुंजाइश छोड़ दी कि ग्राहकों को किराना सामान के लिए ज्यादा पैसे देने में कुछ वक्त लग सकता है, यानी आगे चलकर दुकानों पर राशन थोड़ा महंगा हो सकता है।

 

हालांकि, 1,600 कृषि सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले जर्मन राइफआइजन एसोसिएशन (डीआरवी) के प्रबंध निदेशक फिलिप श्पिने ने डीडब्ल्यू को बताया कि उनके सदस्यों को खेतों में ही 60 करोड़ यूरो का ‘सीधा नुकसान' हो चुका है।

 

श्पिने ने चेतावनी दी, “फिलहाल, खेती और सप्लाई चेन से जुड़े कई क्षेत्रों में लागत नहीं निकल पा रही है।” उन्होंने बताया कि खाद, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत किस तरह किसानों पर दबाव बढ़ा रही हैं।

 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जर्मनी के पास पिछले साल की फसल का 20 लाख टन अनाज का सरप्लस यानी अतिरिक्त भंडार है, जिससे ब्रेड की कीमतों को बढ़ने से रोका जा सकता है। फिर भी, रेपसीड और चुकंदर के उत्पादन में आई भारी गिरावट से घरेलू खाद्य तेल और चीनी की आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। इस कमी को पूरा करने के लिए आयात की जरूरत पड़ेगी।

 

स्थानीय मीडिया ने पिछले हफ्ते खबर दी कि सूखे के कारण कई राज्यों में पशु चारे के स्टॉक में भारी गिरावट आई है, खासकर दक्षिणी जर्मनी में। जर्मन किसान संघ ने पहले भी चेतावनी दी थी कि अगर अनाज कम पैदा होगा और मवेशियों के चरने के लिए घास कम उगेगी, तो जाहिर है कि चिकन-मीट, दूध और अंडों के दाम भी ऊपर भागेंगे।

 

देश के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में, आपूर्ति कम होने से आलू और दूसरी सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर खरीदारों को सामान की किल्लत तो शायद ही झेलनी पड़े, लेकिन हां, धीरे-धीरे चीजों के दाम बढ़ने से जेब पर बोझ जरूर बढ़ेगा। ALSO READ: इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर उबाल

 

3. यह सूखा खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को कैसे बढ़ाता है?

कोरोना महामारी के बाद से जर्मनीा और दुनिया भर में खेती पर बार-बार दबाव पड़ा है। पिछले महीने जारी हुए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 से अब तक जर्मनी में खाने-पीने की चीजों के दाम 36 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ चुके हैं। सरकार के हिसाब से, पोल्ट्री मीट, दूध से बने कई उत्पादों, अंडे, खाने वाले तेल, बटर और चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

 

साल 2022 में रूस-यूक्रेन जंग की वजह से ब्लैक सी से होने वाली यूक्रेनी अनाज की सप्लाई ठप पड़ गई थी और ईंधन महंगा हो गया था। इसका सीधा असर खाद, ट्रांसपोर्ट और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े खर्चों पर पड़ा।

 

इसके बाद, ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया। इससे खाड़ी के देशों से निकलने वाले तेल, गैस और खाद सप्लाई के रास्ते सुन्न पड़ गए। इस लड़ाई ने डीजल, उर्वरक और कीटनाशकों को इतना महंगा कर दिया है कि कई किसानों ने तो खेतों में खाद, पोषण डालना ही कम कर दिया है।

 

उद्योग जगत ने चेतावनी दी है कि पिछले छह सालों से एक के बाद एक आए संकटों ने जर्मन कृषि क्षेत्र के एक बड़े हिस्से की आर्थिक हालत बिगाड़ दी है। कई किसानों का कहना है कि वे बहुत ज्यादा बढ़ती लागतों और बढ़ते कर्ज का सामना कर रहे हैं। अब उनके पास आगे होने वाले नुकसान को झेलने की बहुत कम गुंजाइश बची है।

 

4. जर्मन किसान किस तरह की मदद चाहते हैं?

जर्मन किसान संघ ने कहा कि कुछ किसानों को अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम वित्तपोषण (तुरंत आर्थिक मदद) की जरूरत हो सकती है। रुकवीड ने बर्लिन (जर्मन सरकार) से कृषि क्षेत्र की मदद के लिए एक ‘तत्काल पैकेज' शुरू करने की मांग की है। उनकी सिफारिशों में यूरोपीय संघ के उर्वरक सहायता पैकेज को 6 करोड़ यूरो से बढ़ाकर 18 करोड़ यूरो करना शामिल है, जिसका भुगतान तेजी से और बिना किसी कागजी अड़चन के किया जाए।

 

डीबीवी ने मंत्रियों से मांग की है कि कम से कम नवंबर के आखिर तक खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल पर टैक्स कम किया जाए। साल 2023 के अंत से कई महीनों तक, जर्मन किसानों ने खेती के लिए मिलने वाली ईंधन सब्सिडी खत्म करने की योजनाओं के विरोध में ट्रैक्टरों से राजमार्ग जाम कर दिए थे। बाद में, इस फैसले को आंशिक रूप से वापस ले लिया गया था।

 

कृषि मंत्री राइनर ने किसानों को खास मदद देने का वादा किया है, लेकिन यह मदद तभी मिलेगी जब अगस्त के आखिर में भरोसेमंद सरकारी आंकड़े मिल जाएंगे।

पानी की कमी के लक्षण और उसे दूर करने के 5 असरदार घरेलू तरीके, जानिए पांच मिनट में

ज्यादा पानी पीने के लिए किसी नियम की जरूरत नहीं होती। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, पानी वाली चीजें खाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना सबसे आसान तरीका है। जाने शरीर के लिए पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है, पानी की मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है और किन आसान आदतों को अपनाकर पूरे दिन हाइड्रेट रहा जा सकता है।

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कम पानी पीने के नुकसान

पानी शरीर के लगभग हर अंग के सही काम करने के लिए जरूरी है। यह शरीर का टेम्परेचर कंट्रोल रखता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है, पाचन में मदद करता है और किडनी के जरिए शरीर से गंदगी बाहर निकालने में सहायता करता है। पर्याप्त पानी पीने से बॉडी सेल्स भी सही तरीके से काम करती हैं। पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी, कब्ज और होंठ सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सही समय

एक्सपर्ट के अनुसार, पानी पीने की आदत धीरे-धीरे बनानी चाहिए। सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं, हर भोजन और स्नैक के साथ पानी लें, हमेशा अपने पास पानी की बोतल रखें और जरूरत हो तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं। सादा पानी पसंद न आए तो उसमें नींबू, खीरा, पुदीना या नेचुरल फ्लेवर मिलाकर पी सकते हैं। इससे पानी पीना आसान हो जाता है।

हाइड्रेटेड फूड्स

हाइड्रेशन सिर्फ पानी पीने से ही नहीं होता, बल्कि कई फूड्स भी इसमें मदद करते हैं। तरबूज, संतरा, खीरा, टमाटर, दही और सूप जैसे फूड्स में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त तरल मिलता है और पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है।

डिहाइड्रेशन

यदि शरीर में पानी की कमी होने लगे तो प्यास ज्यादा लगना, मुंह सूखना, गहरे पीले रंग का पेशाब, कम पेशाब आना, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पेशाब का हल्का पीला रंग सामान्य हाइड्रेशन का संकेत माना जाता है, जबकि गहरा रंग इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत है।

लक्षण

कई लोग बिजी शेड्यूल, ट्रैवलिंग, बार-बार बाथरूम जाने से बचने की आदत या सादा पानी पसंद न आने की वजह से पर्याप्त पानी नहीं पीते। वहीं, बुखार, उल्टी, दस्त, ज्यादा पसीना आना, गर्म मौसम और कुछ दवाएं भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसलिए मौसम और अपनी फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार पानी का सेवन बढ़ाना जरूरी होता है।

सुरक्षित तरीके से हाइड्रेट

एक्सपर्ट का कहना है कि एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर होता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। अपनी उम्र, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और स्वास्थ्य के अनुसार पानी पिएं।

डॉक्टर से सलाह

अगर पर्याप्त पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगे, बार-बार डिहाइड्रेशन हो, बहुत कम पेशाब आए, अचानक वजन कम होने लगे, धुंधला दिखाई दे या लगातार कमजोरी और चक्कर महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हार्मोन संबंधी समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी का संकेत हो सकते हैं।

Volkswagen Tayron R-Line long term review, 4420km report

Volkswagen Tayron R-Line long term review, 4420km report
VW Tayron R Line front quarter static

The VW Tayron R-Line is back in the Autocar India garage, and we’ve been running it for some weeks now. First things first, I switch off the Automatic Emergency Braking (AEB) as a matter of habit. The thing is, every time you turn on the car, the system defaults to AEB being active; it doesn’t remember that you last turned it off. This can be rather annoying, but like with most CBUs, which this VW Tayron R-Line is, it follows the homologation requirements of Europe, or what is called GSR 870. That means, for safety reasons, it is mandated to have the AEB on by default every time you begin driving the car. 

AEB triggers inadvertently in traffic.

Now, in Europe and other parts of the world where traffic is predictable and sane, it makes sense, but on our chaotic streets, pedestrians, cyclists, bikes and three-wheelers can trigger the AEB into a heart-stopping slam on the brakes, with the risk of being rear-ended by someone who is two inches away from your bumper. Every run to work, the proximity sensors go berserk tackling Mahalaxmi’s infamous Saat Rasta roundabout in Mumbai. It’s also a reminder that the Tayron is a long car, but the good thing is that outside visibility is pretty good, so you can judge the edges quite easily, which is essential when threading through traffic. 

2.0-litre TSI feels refined at all speeds.

The Tayron got a chance to stretch its legs on a run to the Nanoli track. The ‘EA888 Evo’ 2.0-litre TSI engine is the epitome of refinement and possibly the smoothest turbo-petrol in the premium segment. It lacks a bit of low-end punch, but likes to be revved and encourages visits to the 6,000rpm redline. The Tayron is a happy cruiser too, and feels nice and planted at expressway speeds in a VW sort of way. 

Peeling off the expressway onto the poorly paved, single-lane roads leading to Nanoli exposes a weak chink in the Tayron R-Line – a crashy ride that makes the body jar. The true culprit is the low 45-profile tyres the R-Line comes with, and their short sidewalls simply can’t cushion sharp edges, ruts and jagged tarmac well enough. I suspect the lower-spec Tayron Life, recently launched at Rs 41.99 lakh, is a cheaper and more practical option with the less sporty spec and taller 55-profile tyres. 

Low-profile tyres impact ride comfort.

Living with the Tayron R-Line, you discover the smaller details that go some way in justifying the hefty Rs 46.99 lakh price. Cabin materials feel genuinely plush – the stitching, fit and finish and tasteful use of ambient lighting – though I have to say some of the trim did creak on bad roads. There’s good storage space too, which makes long-distance driving with your family a pleasant affair. What stood out for me was the clarity and ease of use of the infotainment system. Large fonts, smooth and slick operation and a nicely intuitive menu make it easy to operate on the go. 

Seats comfy for long hours behind the wheel.

Other things that stood out after a long drive were the seats – supremely comfortable and not too hard and stiff like those in Volkswagens of the past. These seats have well-judged cushioning, and what makes them special is that they also give your upper body good and even support. 

Fuel efficiency is not the strength of a turbo-petrol, and E20 now being the only choice doesn’t help matters. In the city, we could only muster up 6.2kpl, whilst on the sole highway run to Nanoli, we averaged 11.2kpl.

Volkswagen Tayron R-Line test data

Odometer4,421km
PriceRs 47.74 lakh (ex-showroom, India)
Economy8.7kpl (this month)
Maintenance costNone
FaultsNone
Previous reportNone

विदेशों में लहराया भारत का परचम, अब अपनी ही नागरिकता साबित करने के पड़े लाले! पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के साथ क्या हुआ?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर अब तक कई लोग सवाल उठा चुके हैं। वहीं अब एसआईआर पर भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने चिंता जताई है। कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके सूरी ने बताया कि उन्हें भी अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ रहे हैं। सूरी पंजाब में वोटर लिस्ट की जांच और अपडेट के लिए चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए है। नवदीप सूरी यूएई व मिस्र में भारत के राजदूत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में उच्चायुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

उन्होंने पंजाब में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान अपने अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। सूरी ने कई पोस्ट के जरिए बताया कि वोटर लिस्ट के सत्यापन के दौरान उन्हें किन परेशानियों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा।

नवदीप सूरी ने बताई अपनी परेशानी

नवदीप सूरी ने बताया कि, SIR के दौरान उन्होंने अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर वोटर आईडी और आधार कार्ड जमा किए थे। उस समय उन्हें बताया गया कि उनके दस्तावेज और दी गई जानकारी सही है। लेकिन, कुछ समय बाद एक वॉलंटियर ने उन्हें संदेश भेजकर बताया कि उनकी कुछ जानकारी साल 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही है। इसके बाद सूरी ने इस मामले को समझने और आगे की प्रक्रिया जानने के लिए BLO से दोबारा संपर्क किया।

नोटिस जारी कर फिर बुलाया

सूरी के अनुसार, इसके बाद उन्हें एक नोटिस लेने के लिए फिर से बुलाया गया। वहां उनसे ऐसे कागजात जमा करने को कहा गया, जिनसे उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि हो सके। इस मांग को लेकर उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पूर्व राजनयिक को भी नागरिकता साबित करने में दिक्कत हो रही है, तो आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया कितनी मुश्किल होगी। उन्होंने चुनाव आयोग से सफाई मांगी।

बताया क्यों नहीं है रिकॉर्ड

सूरी ने बताया कि, साल 2003 में वह भारत से बाहर तैनात थे, इसलिए उस समय के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से उनका डिटेल्स नहीं मिल पाया। अधिकारियों ने उनसे भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट दिखाने को कहा। उन्होंने कहा कि उनके पास वोटर आईडी और आधार के अलावा भी कई जरूरी डॉक्युमेंट मौजूद हैं, जिससे वह अपनी नागरिकता साबित कर सकते हैं। सूरी की इस बात से SIR के दौरान पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा दस्तावेजों के मिलान को लेकर चल रही चर्चा और बढ़ सकती है।

क्या है SIR

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में केवल योग्य मतदाताओं के नाम ही दर्ज रहें। यह प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई थी, जहां सत्यापन के दौरान मृत लोगों समेत कई नाम मतदाता सूची से हटाए गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल में भी चुनाव से पहले मतदाता रिकॉर्ड की जांच और सुधार का काम किया गया। SIR के दौरान अगर किसी मतदाता का नाम 2002 या 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है, तो उससे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। ऐसे लोगों को पुराने मतदाता रिकॉर्ड से अपना या अपने परिवार का संबंध साबित करने के लिए जरूरी कागजात देने पड़ सकते हैं।

Gold Price Today: सा​वन के आखिरी सोमवार को सोना हुआ सस्ता, 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव फिसला

देश में सोने की कीमत में गिरावट लौटी है। 24 अगस्त की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड फिसलकर 163230 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भाव 163080 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। बीते सप्ताह 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 7960 रुपये तक ​बढ़ी। वहीं 22 कैरेट गोल्ड 7300 रुपये तक महंगा हुआ।

दूसरी ओर सोने की वैश्विक कीमत चढ़ी है और 3 महीने से ज्यादा समय के हाई पर पहुंच गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, हाजिर सोना 4,636.34 डॉलर प्रति औंस पर है। बीते सप्ताह सोने की वैश्विक कीमत 5 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ी। निवेशक अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों और इस हफ्ते के आखिर में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषण का इंतजार कर रहे हैं। वॉर्श जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) में बोलने वाले हैं। उनके संबोधन से बेंचमार्क ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 163230 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 149650 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 199490 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 163080 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 163080 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 199490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 163080 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 199490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली149640163230
मुंबई199490163080
अहमदाबाद149540163130
चेन्नई149500163090
कोलकाता199490163080
हैदराबाद199490163080
जयपुर149640163230
भोपाल149540163130
लखनऊ149640163230
चंडीगढ़149640163230

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर बढ़ा तो HRA कितना बढ़ेगा? समझिए हर पे-लेवल का पूरा हिसाब

चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट दिख रही है। 24 अगस्त की सुबह चांदी 259900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। बीते सप्ताह भाव 10000 रुपये ​बढ़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 69.51 डॉलर प्रति औंस है। प्लेटिनम की कीमत 1,885.38 डॉलर प्रति औंस पर है।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत या झटका? जानें 24 अगस्त के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 24 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

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H1N1 Strain : क्या देश में आ गया कोई नया खतरनाक वायरस? ICMR के इस बड़े खुलासे ने दूर किया सबका डर!

ICMR on H1N1 Strain

H1N1 Strain Update: देशभर के अस्पतालों में इन दिनों बदलते मौसम और मानसून के चलते फ्लू और सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। राजधानी दिल्ली से लेकर बेंगलुरु और मुंबई तक स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामलों के बढ़ने से लोगों के मन में डर बैठ गया था कि क्या कोई नया म्यूटेंट या खतरनाक वायरस देश में पैर पसार रहा है। लेकिन अब देश की सर्वोच्च चिकित्सा अनुसंधान संस्था ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) ने इस पर आधिकारिक बयान जारी कर सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है। ALSO READ: H1N1 Cases: दिल्ली-NCR में 1,700 से ज्यादा मामले, मुंबई में भी तेजी, बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़े, जानें बचाव और कब कराएं टेस्ट

 

क्या कहती है आईसीएमआर की रिपोर्ट

ICMR के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि भारत में इन दिनों जो Influenza A (H1N1) वायरस एक्टिव हैं, वह कोई नया स्ट्रेन नहीं है। यह वायरस असल में A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09-like स्ट्रेन से मेल खाता है, जो कि क्लेड (Clade) 6B.1A.5a2a और सबकलेड D.3.1.1 के अंतर्गत आता है। इससे घबराने की जरूत नहीं है। यह स्ट्रेन साल 2025 से ही देश में सर्कुलेशन में है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में फैल रहे इन फ्लू स्ट्रेन पर उत्तरी गोलार्ध के लिए अनुशंसित मौजूदा वैक्सीन पूरी तरह प्रभावी और मेल खाने वाली हैं।

 

क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हाल ही में देश में मौसमी बीमारियों और अस्पताल की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और भीड़-भाड़ वाले इनडोर स्थानों की वजह से मौसमी फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी आम बात है। दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क है और अस्पतालों में पर्याप्त बेड व दवाइयां उपलब्ध हैं। ALSO READ: सावधान! क्या आपको भी है तेज बुखार और खांसी? नजरंदाज न करें H1N1 का यह खतरा

 

फ्लू के मुख्य लक्षण और बचाव के उपाय

मौसमी फ्लू आमतौर पर स्वतः ठीक होने वाला (Self-limiting) होता है, फिर भी इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

मुख्य लक्षण: तेज बुखार, लगातार खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द।  किन्हें है ज्यादा खतरा? छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे डायबिटीज या दिल के रोग) से पीड़ित लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

क्या रखें सावधानी?

  • ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  • जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें।
  • अपने हाथों से बार-बार अपनी आंख, नाक या मुंह को न छूएं।

डॉक्टर से संपर्क कब करें: यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तबीयत ज्यादा बिगड़े या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। उचित आराम और समय पर देखभाल से मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।

लखनऊ-कानपुर नमो भारत ट्रेन का खाका तैयार, तीन जिले मिलकर बनाएंगे डीपीआर, भेजा प्रस्ताव

लखनऊ-कानपुर के बीच तेज और सुरक्षित यात्रा के लिए प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन के डीपीआर की तैयारी शुरू हो गई है। लखनऊ, कानपुर के साथ उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण इसकी डीपीआर बनाएंगे।

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर बढ़ा तो HRA कितना बढ़ेगा? समझिए हर पे-लेवल का पूरा हिसाब

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर करीब 50-55 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स की नजर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी है। अगर बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो उसके साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी बढ़ सकता है, क्योंकि इसकी गणना बेसिक पे के आधार पर होती है।

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत HRA शहर की कैटेगरी के हिसाब से मिलता है। X कैटेगरी शहरों में सबसे ज्यादा HRA मिलता है। वहीं, Y और Z कैटेगरी में यह क्रमश: कम होता है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के तहत अंतिम HRA कितना होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगा।

HRA कैसे बढ़ सकता है?

फिलहाल HRA की मौजूदा दरें इस तरह हैं।

  • X शहर: 30%
  • Y शहर: 20%
  • Z शहर: 10%

नीचे की गणना 2x, 2.5x और 3x फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर आधारित है। यह सिर्फ संभावित हिसाब है, अंतिम फैसला सरकार करेगी।

chart ggks

लेवल-4 कर्मचारी का अनुमानित HRA

मान लीजिए किसी लेवल-4 कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर के बाद ₹51,000 हो जाती है। ऐसे में HRA का अनुमान इस तरह बनता है।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹15,300
Y (20%)₹10,200
Z (10%)₹5,100

अगर यही कर्मचारी 2.5 फिटमेंट फैक्टर के दायरे में आता है और उसकी बेसिक पे ₹63,750 हो जाती है, तो HRA भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹19,125
Y (20%)₹12,750
Z (10%)₹6,375

यानी सिर्फ 2.0 से 2.5 फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर ही X शहर में HRA करीब ₹3,825, Y शहर में ₹2,550 और Z शहर में ₹1,275 बढ़ सकता है।

HRA बढ़ने का सीधा मतलब क्या है?

कई कर्मचारी सिर्फ बेसिक सैलरी पर ध्यान देते हैं। लेकिन HRA बढ़ने का असर हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी पर भी पड़ता है। अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो उसी के साथ HRA की रकम भी ऊपर चली जाती है।

हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर सीधे HRA तय नहीं करता। यह सिर्फ बेसिक पे बढ़ाता है और HRA उसी बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का तय प्रतिशत होता है। इसलिए अंतिम बढ़ोतरी का सही आंकड़ा 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगा।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

8 things to know about the 2026 Royal Enfield Continental GT 650

8 things to know about the 2026 Royal Enfield Continental GT 650
8 things to know about the 2026 Royal Enfield Continental GT 650

Royal Enfield’s Continental GT 650 is the brand’s modern take on the classic cafe racer, combining a retro design with its 648cc parallel-twin engine. If you’re considering one, here’s everything you need to know about the motorcycle.

1. How much does the Continental GT 650 cost?

Royal Enfield has priced the Continental GT 650 from Rs 3.58 lakh to Rs 3.88 lakh (ex-showroom, Chennai). The Rocker Red and British Racing Green variants are priced at Rs 3.58 lakh, while the Apex Grey and Mr Clean cost Rs 3.81 lakh and Rs 3.88 lakh, respectively.

2. Which engine does the Continental GT 650 have?

The Continental GT 650 continues with Royal Enfield’s 648cc, air/oil-cooled parallel-twin engine. It produces 47hp at 7,150rpm and 52.3Nm at 5,250rpm, with power sent to the rear wheel through a six-speed gearbox.

3. What is the seat height of the Continental GT 650?

The Continental GT 650 has an 820mm seat height. It also has a 1,398mm wheelbase and 174mm of ground clearance.

4. What features does the Continental GT 650 get?

The updated Continental GT 650 gets LED indicators, a USB Type-C charging port and a black-painted instrument cowl. The Rocker Red and Apex Grey variants get blacked-out engines and exhausts, while both are equipped with cast-alloy wheels.

5. Does the Continental GT 650 get dual-channel ABS?

Yes, the Continental GT 650 gets dual-channel ABS as standard. It uses a 320mm disc at the front and a 240mm disc at the rear.

6. What is the weight and ground clearance of the Continental GT 650?

The Continental GT 650 has a 214kg kerb weight and 174mm of ground clearance.

7. What is the fuel tank capacity of the Continental GT 650?

The Continental GT 650 gets a 12.5-litre fuel tank.

8. Does the Continental GT 650 get alloy wheels?

Not all versions. The Rocker Red and Apex Grey variants get cast-alloy wheels, while the British Racing Green and Mr Clean versions continue with traditional spoke wheels.