रक्षाबंधन पर हर साल बहनों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब तक बांटे 188 करोड़ रुपए से अधिक के नि:शुल्क टिकट

रक्षाबंधन पर हर साल बहनों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब तक बांटे 188 करोड़ रुपए से अधिक के नि:शुल्क टिकट

– 2 करोड़ से ज्यादा नि:शुल्क टिकटों से बहनों और उनके सहयात्री की राह हुई सुगम

– 2017 में 11 लाख तो 2025 में 78 लाख से अधिक महिलाओं को मिला इसका लाभ

– 15 लाख से ज्यादा सहयात्रियों ने भी 2025 में उठाया इस सुविधा का लाभ

Chief Minister Yogi Adityanath : रक्षाबंधन पर बहनों को भाइयों तक पहुंचने में किराए की चिंता न हो, इसके लिए योगी सरकार वर्ष 2017 से लगातार नि:शुल्क बस यात्रा का उपहार देती आ रही है। वर्ष 2017 से 2025 तक लगातार नौ रक्षाबंधन पर महिलाओं को दी गई इस सुविधा के तहत 2.01 करोड़ नि:शुल्क टिकट जारी किए गए। इन टिकटों के किराए पर खर्च 188.41 करोड़ रुपए (समतुल्य धनराशि) आंकी गई है यानी योगी सरकार के कार्यकाल में रक्षाबंधन पर बहनों व महिलाओं को अब तक 188.41 करोड़ रुपए की नि:शुल्क यात्रा का उपहार मिल चुका है।

 

2017 से लगातार जारी है बहनों के लिए नि:शुल्क सफर 

योगी सरकार ने वर्ष 2017 में रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए नि:शुल्क बस यात्रा की पहल शुरू की। इसके बाद लगातार 2025 तक यह सुविधा दी गई। नौ वर्षों में इस सुविधा का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ी और 2025 तक कुल 2.01 करोड़ से अधिक नि:शुल्क टिकट जारी किए गए।

 

188.41 करोड़ रुपए का नि:शुल्क यात्रा उपहार 

परिवहन निगम के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2025 तक रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को जारी नि:शुल्क टिकटों के किराये के समतुल्य धनराशि करीब 188.41 करोड़ रुपए है।

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2025 में महिला के साथ सहयात्री को भी नि:शुल्क सफर

वर्ष 2025 में योगी सरकार ने रक्षाबंधन की यात्रा को और सुविधाजनक बनाते हुए महिला के साथ एक सहयात्री को भी नि:शुल्क यात्रा का लाभ दिया। 8 अगस्त 2025 की सुबह छह बजे से 10 अगस्त की मध्यरात्रि तक कुल 66 घंटे की अवधि में करीब 63.14 लाख महिला यात्रियों और 15.11 लाख से अधिक महिला यात्रियों के सहयात्रियों को नि:शुल्क यात्रा की सुविधा मिली। इस दौरान 78.26 लाख से अधिक नि:शुल्क टिकट जारी हुए, जिनका कुल किराया मूल्य करीब 86.98 करोड़ रुपए रहा।

 

हर साल बढ़ता गया बहनों का भरोसा

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2017 में 11,16,332 महिला यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ लिया था। 2018 में यह संख्या 11,69,226, 2019 में 12,04,085 और 2020 में 7,36,605 रही। 2021 में 9,63,466, 2022 में 22,32,322, 2023 में 29,29,755 और 2024 में 19,78,403 महिला यात्रियों ने नि:शुल्क यात्रा की। 2025 में महिलाओं के साथ सहयात्री को जोड़ने के बाद कुल नि:शुल्क टिकटों की संख्या 78,26,324 तक पहुंच गई। 

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यूपीएसआरटीसी प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने कहा कि 2017 में शुरू हुई नि:शुल्क बस यात्रा की पहल अब रक्षाबंधन पर योगी सरकार की प्रमुख जनसुविधाओं में शामिल हो चुकी है। 9 वर्षों में 2.01 करोड़ से अधिक नि:शुल्क टिकट और 188.41 करोड़ रुपए के किराए के समतुल्य लाभ इस योजना के व्यापक असर को दर्शाते हैं। सरकार इस कदम में विभाग पूरी तरह आगे भी तत्पर्रता से जुटा रहेगा। प्रदेश के यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। 

 

त्योहार पर आर्थिक राहत के साथ आसान हुई यात्रा

रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए दूसरे शहरों और गांवों की यात्रा करती हैं। ऐसे में मुफ्त बस यात्रा उन्हें सीधे आर्थिक राहत देती है। खासतौर पर सामान्य और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह सुविधा त्योहार के दौरान यात्रा का अतिरिक्त खर्च कम करने में मदद करती है। साथ ही सरकारी बसों में अतिरिक्त बसों और फेरों की व्यवस्था से त्योहार के समय आवागमन को सुगम बनाने का प्रयास किया जाता है।

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महिला सम्मान और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ी पहल

योगी सरकार की सोच महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सम्मान, सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर भी केंद्रित है। रक्षाबंधन पर नि:शुल्क बस यात्रा इसी विजन का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को जरूरी यात्राओं के दौरान आर्थिक और परिवहन संबंधी बाधाओं का सामना कम करना पड़े और वे अपने परिवार के साथ त्योहारों और महत्वपूर्ण अवसरों में सहजता से शामिल हो सकें।

बांग्लादेश में हिंदू परिवार की निर्मम हत्या, बंद घर में मिले 4 शव, इस बात से नाराज थे आरोपी

बांग्लादेश में हिंदू परिवार की निर्मम हत्या, बंद घर में मिले 4 शव, इस बात से नाराज थे आरोपी

Murder of four members of a Hindu family in Bangladesh

Murder of a Hindu family in Bangladesh : बांग्लादेश के रंगपुर में याबा नशे का विरोध करने पर हिंदू परिवार के एक रिटायर्ड शिक्षक समेत परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिवार के चारों लोगों के शव शनिवार रात बंद घर से मिले थे। इस मामले में पुलिस ने 2 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है, जो कि रिश्‍ते में चचेरे भाई हैं। लेकिन मृतक के भाई ने सही जांच कर असली अपराधियों के पकड़ने की मांग की है। मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि हत्या के बाद दोनों आरोपी करीब 6 घंटे घर में ही रहे। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

बांग्लादेश के रंगपुर में याबा नशे का विरोध करने पर हिंदू परिवार के एक रिटायर्ड शिक्षक समेत परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिवार के चारों लोगों के शव शनिवार रात बंद घर से मिले थे। इस मामले में पुलिस ने 2 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है, जो कि रिश्‍ते में चचेरे भाई हैं। लेकिन मृतक के भाई ने सही जांच कर असली अपराधियों के पकड़ने की मांग की है।

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मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि हत्या के बाद दोनों आरोपी करीब 6 घंटे घर में ही रहे। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। याबा एक बेहद नशीला पदार्थ है, जिसमें मुख्य रूप से मेथामफेटामाइन और कैफीन होता है। बांग्लादेश में इसके इस्तेमाल और तस्करी को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। खबरों के मुताबिक, रिटायर्ड शिक्षक ने अपने घर की छत पर 2 युवकों को याबा का सेवन करते देखा था।

उन्होंने दोनों को ऐसा करने से रोका। इसी बात को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसके बाद दोनों संदिग्ध घर में घुस गए और परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया। इस हमले में चारों की मौत हो गई। आरोपियों को डर था कि रिटायर्ड शिक्षक उन्हें पहचान लेंगे, इसलिए उन्होंने उनका गला दबा दिया। इस बीच आवाज सुनकर शिक्षक की पत्नी भी ऊपर पहुंचीं तो आरोपियों ने उनका भी गला दबा दिया और इसके बाद उनकी बेटी और 12 साल के बेटे की भी हत्या कर दी।

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पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्ध करीब 6 घंटे तक घर के अंदर ही रहे। इस दौरान दोनों ने खजूर और खीरा खाया और घर में नहाया। इसके बाद वे वहां से फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, परिवार का किसी अन्य व्यक्ति के साथ कोई पुराना विवाद या दुश्मनी नहीं थी। ऐसे में नशे का विरोध ही वारदात की मुख्य वजह मानी जा रही है। रंगपुर की इस घटना ने बांग्लादेश में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन नहीं मिल रहा है? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन लेना पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और ऐप कुछ मिनटों में लोन देने का दावा करते हैं। लेकिन हर आवेदन मंजूर नहीं होता। कई बार अच्छी सैलरी होने के बाद भी लोन रिजेक्ट हो जाता है।

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर वजहें पहले से पता हों, तो उनसे बचा जा सकता है। आइए जानते हैं वो 5 कारण, जिनकी वजह से आपका पर्सनल लोन अटक सकता है।

1. क्रेडिट स्कोर खराब होना

यह सबसे बड़ी वजह होती है। बैंक सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि आपने पुराने लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया या नहीं।

अगर स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो मंजूरी मिलने की संभावना बेहतर रहती है। वहीं कम स्कोर होने पर बैंक लोन देने से मना कर सकते हैं या ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं।

2. पहले से बहुत ज्यादा EMI चलना

बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं देखते। वे यह भी देखते हैं कि हर महीने आपकी कमाई का कितना हिस्सा पहले से EMI में जा रहा है।

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी ₹60,000 है। अगर पहले से ₹30,000 EMI कट रही है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि कुल EMI आपकी कमाई का लगभग 40-50% से ज्यादा न हो।

3. नौकरी या आय स्थिर नहीं होना

अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है या आपकी आय नियमित नहीं है, तो बैंक सावधानी बरतते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी में सिर्फ एक-दो महीने पहले जॉइन किया है, तो बैंक थोड़ा इंतजार करने को कह सकते हैं। वहीं फ्रीलांसर और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों से अक्सर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाते हैं।

4. बार-बार लोन के लिए आवेदन करना

कई लोग एक साथ कई बैंकों में आवेदन कर देते हैं। यह उल्टा नुकसान कर सकता है।

हर आवेदन का रिकॉर्ड आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकता है। कम समय में बहुत ज्यादा आवेदन देखकर बैंक मान सकते हैं कि आपको पैसों की ज्यादा जरूरत है। इससे मंजूरी की संभावना घट सकती है।

5. दस्तावेजों में गलती

कई बार छोटी सी गलती भी बड़ी परेशानी बन जाती है।

नाम में अंतर, गलत पता, अधूरी बैंक स्टेटमेंट या आय का सही सबूत न देना आवेदन रोक सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले सभी दस्तावेज एक बार जरूर जांच लें।

लोन मंजूर होने की संभावना कैसे बढ़ाएं?

अगर आप पर्सनल लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ये बातें मदद कर सकती हैं।

  • क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ऊपर रखने की कोशिश करें।
  • पुरानी EMI कम रखें।
  • समय पर बिल और EMI भरें।
  • एक साथ कई जगह आवेदन न करें।
  • सभी दस्तावेज सही और अपडेटेड रखें।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

NHC Foods का रेवेन्यू 73% बढ़कर ₹601 करोड़ पहुंचा, एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

एग्री कमोडिटी सेक्टर की कंपनी NHC Foods Ltd ने पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 73% बढ़कर ₹601 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹348 करोड़ था। कंपनी का बिना ऑडिट वाला कंसोलिडेटेड मुनाफा ₹12 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA बढ़कर ₹21.95 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹16.42 करोड़ था। यानी इसमें 34% की बढ़ोतरी हुई। बेसिक EPS ₹0.20 प्रति शेयर रहा।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सत्यम शिरीषचंद्र जोशी ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी के मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स को दिखाते हैं। उनके मुताबिक ऑपरेशनल दक्षता और क्वालिटी पर फोकस का असर सीधे वित्तीय प्रदर्शन में दिखा है। उन्होंने कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करती है।

FCCB कन्वर्जन से बढ़ा कैपिटल बेस

कंपनी ने Global Focus Fund को 10.41 करोड़ पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह आवंटन 11 लाख डॉलर के FCCB के आंशिक कन्वर्जन के बाद हुआ। इसके बाद कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल बढ़कर ₹76.19 करोड़ हो गई।

एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

कंपनी के बोर्ड ने AgriConnect Solutions Pvt Ltd में प्रस्तावित निवेश और अधिग्रहण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट को मंजूरी दी है। यह कंपनी एग्री कमोडिटीज की सप्लाई और ट्रेडिंग के कारोबार में है। कंपनी का मानना है कि इससे इस सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

कंपनी का बिजनेस क्या है

NHC Foods Ltd एग्री कमोडिटी एक्सपोर्ट और फूड ट्रेडिंग सेक्टर की कंपनी है। यह मसाले, तिलहन, अनाज, दालें, चीनी, चाय, कॉफी और दूसरी कृषि जिंसों की खरीद, प्रोसेसिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी B2B मॉडल के जरिए कुछ देशों में फूड प्रोडक्ट्स का निर्यात करती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

120 KM/H की हवा ने विमानों को बना दिया ‘खिलौना’, इटली एयरपोर्ट का खौफनाक VIDEO देख हिल जाएंगे

Viral Video: उत्तरी इटली के फोर्ली एयरपोर्ट पर 21 अगस्त को तेज तूफानी हवाओं ने रनवे पर खड़े छोटे विमानों को बुरी तरह हिला दिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हल्के प्रोपेलर विमान गीले रनवे पर धीरे-धीरे खिसकते, घूमते और झुकते नजर आ रहे हैं।

रक्षाबंधन पर 3.54 लाख रसोइयों को CM योगी का बड़ा तोहफा, मानदेय बढ़कर 3000 रुपए हुआ, 5 लाख का इलाज और बीमा सुरक्षा कवच

रक्षाबंधन पर 3.54 लाख रसोइयों को CM योगी का बड़ा तोहफा, मानदेय बढ़कर 3000 रुपए हुआ, 5 लाख का इलाज और बीमा सुरक्षा कवच

– मानदेय में वृद्धि, परिधान की राशि अब दोगुनी, 5 लाख तक मुफ्त कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और दो लाख का एक्सीडेंट्ल बीमा कवर घोषित

– शिक्षा क्षेत्र के हित में योगी सरकार के लगातार फैसले, पिछले दिनों बढ़ाया गया था शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का मानदेय

– मुख्यमंत्री 

ने कहा कि हम 12 बजे सोकर नहीं उठते, बल्कि 18 घंटे काम करते हैं, तब आते हैं परिणाम

– मुख्यमंत्री का निर्देश: बच्चों का भविष्य अनमोल, इनके भोजन में कतई लापरवाही नहीं होनी चाहिए

– सपा ने नकल से ‘प्रदेश की अकल’ को किया था नीलाम, सपा को साफ करेगी जनता

– सोशल मीडिया पर स्कूलों के जर्जर भवन दिखाने वालों की खिंचाई

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाई का दायित्व निभाते हुए रक्षाबंधन से पहले 3.54 लाख रसोइयों जिनमें लगभग 93 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है, को चार बड़े उपहार दिए। रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सीएम ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि रसोइयों को अब 2 के बजाय 3 हजार मानदेय मिलेगा, घटना-दुर्घटना की स्थिति में रसोइयों व उनके परिवार को भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से दो लाख रुपए की सहायता और प्रतिवर्ष पांच लाख रुपए तक मुफ्त कैशलेस सुविधा मिलेगी। इसके अलावा परिधान के लिए मिलने वाली राशि भी दोगुनी यानी, 500 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए कर दी गई है।

 

सरकार सभी समस्याओं का करेगी समाधान 

सीएम ने कहा कि 9 साल पहले रसोइयों का मानदेय हजार रुपए था, वह भी कभी मिलता था तो कभी नहीं मिलता था। गरीबों के हक पर डकैती डालने वाले सपाइयों व कांग्रेसियों की लूट को रोकने के लिए पीएम मोदी जी ने 55 करोड़ लोगों के जनधन अकाउंट खुलवाए। अब डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में राशि जाती है। रसोइयों के लिए अभी तक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं थी।

कोई घटना-दुर्घटना, आपदा, पूर्ण दिव्यांग या मृत्यु होने पर परिवार असहाय हो जाता था। बेसिक शिक्षा परिषद ने भारतीय स्टेट बैंक से बातचीत कर तय कराया कि अकाउंट एसबीआई में खुलेगा, जिसमें रसोइयों का पूरा मानदेय जाएगा। यदि कोई अप्रिय स्थिति हुई तो बैंक तत्काल दो लाख रुपए की उपलब्ध कराएगा। आप भाजपा के डबल इंजन पर विश्वास कीजिए, सरकार सभी समस्याओं का समाधान करेगी।

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‘बबुआ’ पर चुटकी, सीएम बोले- सपा को साफ करेगी जनता

सीएम ने कहा कि यह काम पहले इसलिए नहीं होता था, क्योंकि गरीब कभी सपा के एजेंडे में नहीं था। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि बबुआ ने बयान दिया है कि परिवार के सभी लोग सांसद हैं, इसलिए सपा-सपा बनी हुई है। हम कह रहे हैं कि जनता सपा को अगले चुनाव में हमेशा के लिए साफ कर देगी, क्योंकि ये लोग परिवार की खातिर गरीबों का शोषण करते थे।

इन्होंने यूपी को गुंडा प्रदेश बना दिया था। जमीन पर कब्जा,  बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाते थे। रोज दंगा-फसाद होता था। त्योहारों के पहले खुशी छीन ली जाती थी। विकास ठप था, क्योंकि प्रदेश के पास कुछ नहीं था। अब कोई बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाएगा तो यमराज के घर जाने का रास्ता तय है। सपाई तो बच्चों के मिड-डे मील पर भी डकैती डलवाते थे। अब यूपी दंगा व कर्फ्यू मुक्त हुआ तो विकास दिखाई दे रहा है। जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे सिर्फ आक्षेप लगाते हैं। 

 

आप बचपन स्वस्थ बनाएं, आपके स्वास्थ्य का जिम्मा हमारा

सीएम ने कहा कि रसोई केवल बच्चे का पेट भरने वाला भोजन नहीं, बल्कि बचपन को स्वस्थ व समर्थ बनाने का अभियान भी है। आप देश के बचपन को स्वस्थ बनाते हैं, लेकिन आपके स्वास्थ्य की चिंता नहीं होती थी। पीएम मोदी जी ने आपको धुएं से मुक्ति दिलाई। प्रदेश सरकार ने भी सुनिश्चित किया कि रसोइया या उसके परिवार का कोई व्यक्ति अस्वस्थ होता है तो वह सरकारी अस्पताल समेत किसी भी इन्पैनल्ड अस्पताल में इलाज करा सकता है। सरकार प्रतिवर्ष इसके लिए पांच लाख रुपए का बीमा उपलब्ध कराएगी। 

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2017 से पहले भीषण सर्दी में ठिठुरते जाते थे बच्चे

सीएम ने कहा कि आंगनबाड़ी बाल वाटिका में पढ़ने वाले बच्चों की प्रगति निपुण भारत अभियान की सफलता को प्रदर्शित करती है। अब पांचवी कक्षा तक यह अभियान बढ़ रहा है। 2017 के पहले गरीब के बच्चे भीषण ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब सरकार हर बच्चे को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे, स्वेटर उपलब्ध कराती है। 

 

हम 12 बजे सोकर नहीं उठते, बल्कि 18 घंटे काम करते हैं

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोग 18 घंटे काम करते हैं। एक-एक योजना और विभागों के कार्यों को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं, तब परिणाम आते हैं। कोई बबुआ की तरह 12 बजे सोकर उठता, 2 बजे तैयार होता, 5 बजे जिम जाता और 7 बजे से महफिल जमा लेता, तो काम कब करता।

रसोइया माताएं-बहनें, आंगनबाड़ी व आशा वर्कर, गांव के चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान, ये सब प्रदेश को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। सरकार इनके सम्मानजनक जीवन और इनके मानदेय में वृद्धि के लिए कार्यरत है। पिछले दिनों सरकार ने शिक्षामित्रों, अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया। शिक्षकों के साथ ही उन्हें भी कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा व दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध कराया गया है। 

 

सपा ने नकल से प्रदेश की अकल को नीलाम किया था 

सीएम ने कहा कि एक समय सपा ने नकल को जन्मसिद्ध अधिकार बना दिया था। कल्याण सिंह जी ने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश को पहचान दी थी, लेकिन सपा ने एक झटके में नकल से प्रदेश की अकल को नीलाम कर दिया था। सपा सरकार ने रसोइयों, आंगनबाड़ी व आशा वर्करों, चौकीदारों, महिलाओं या गरीबों, किसी की नहीं सुनी, क्योंकि सुनने के लिए समय, सामर्थ्य, संसाधन चाहिए। डबल इंजन सरकार ने ये सभी जुटाए तो आज सारी सुविधाएं मिल रही हैं। 

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रसोई रहे साफ-सुथरी, बच्चों को दें पौष्टिक आहार

सीएम ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के 1.42 लाख विद्यालयों में डेढ़ करोड़ बच्चे अध्ययनरत हैं। बच्चों को अलग-अलग दिन अलग-अलग प्रकार का आहार देना है। विद्यालय में रसोई साफ-सुथरी रहे, बच्चों को समय पर स्वच्छता के साथ साप्ताहिक मेन्यू के अनुरूप पौष्टिक आहार उपलब्ध कराएं। इससे आपका सम्मान बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने रसोइयों को सचेत करते हुए कहा कि इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

फूड प्वॉइजनिंग भी नहीं होनी चाहिए। दुश्मन ऐसा काम न कर पाए, जिससे आप संदेह के घेरे में आएं। छिपकली व कीड़ा खाने में न गिरे, यह जीवन के साथ खिलवाड़ होगा। रसोई बनाते समय किचन में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश नहीं होना चाहिए। पीएम पोषण मिशन के अंतर्गत छह दिन के मेन्यू में मिलेट्स, स्थानीय व्यंजन, मौसमी फल भी शामिल हैं। 

 

बच्चे बढ़ेंगे तो भारत बढ़ेगा

सीएम ने कहा कि 2017 के पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय वीरान/उजाड़ दिखते थे। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए 19 पैरामीटर्स तय किए थे। विद्यालय में फर्श, बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, किचन, पेयजल, डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय आदि बन गए हैं। बतौर सांसद मैंने देखा है कि पहले बच्चों को कुछ पता नहीं होता था, परंतु अब बच्चे को अक्षर ज्ञान, वाक्य विन्यास, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान की जानकारी है। वे आगे बढ़ रहे हैं, बच्चे बढ़ेंगे तो देश बढ़ेगा और हर भारतवासी का सम्मान बढ़ेगा। 

 

वर्ष के अंत तक आएगा मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय मॉडल

सीएम ने कहा कि इस वर्ष के अंत तक मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का मॉडल भी आने वाला है। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने अंतिम पायदान पर बैठे श्रमिकों के बच्चों के बारे में भी सोचा। 18 मंडलों में 18 अटल आवासीय विद्यालय बनाए गए, जहां 18 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। 

 

कोरोना और महाकुंभ में रसोइयों के योगदान को भी सराहा

सीएम ने कोरोना और महाकुंभ में रसोइयों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना काल में प्रदेश लौटने वाले एक करोड़ से अधिक लोगों के लिए रसोइयों ने भोजन की व्यवस्था की। प्रयागराज महाकुंभ में जब बहुत भीड़ हो गई तो जौनपुर, प्रतापगढ़, भदोही, मीरजापुर, फतेहपुर समेत अलग-बगल जनपदों में होल्डिंग एरिया बनाए गए थे। कई जगहों पर बेसिक शिक्षा परिषद के रसोइयों ने इन श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनाया।  

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बच्चों के हित में लगातार काम किया सरकार ने

सीएम ने कहा कि कोरोना में निराश्रित हुए बच्चों के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना प्रारंभ की। ऐसे बच्चों को हर माह पढ़ाई के लिए चार हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाती है। गंभीर व बहुदिव्यांग 14 हजार बच्चों को छह हजार रुपए वार्षिक एस्कॉर्ट अलाउंस, 23 हजार से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को दो हजार रुपए वार्षिक स्टाइपेंड, 23 हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए हैं।

पहली से आठवीं कक्षा तक 2793 पूर्ण दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल पाठ्य पुस्तकें, 4438 अल्प दृष्टि बच्चों को इनलार्ज प्रिंट की पुस्तकें बेसिक शिक्षा परिषद ने उपलब्ध कराई हैं। जो स्कूल विलय किए गए थे, वहां बाल वाटिका का संचालन करते हुए 10 हजार स्पेशल एजूकेटर्स तैनात किए गए हैं। बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी 825 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय बनाने का कार्यक्रम बढ़ाया। विद्यालय अब 12वीं तक चलेंगे। यहां आईसीटी लैब स्थापित किए जा रहे हैं। 

 

नई शिक्षा व्यवस्था नकलमुक्त, अकल से युक्त 

सीएम ने सोशल मीडिया पर स्कूलों के जर्जर भवन दिखाने वालों को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जिनके इशारे पर ये हो रहा है, ये उन्हीं के स्मारक हैं। प्रदेश सरकार ने माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत पुराने व जर्जर भवनों को नए भवनों को बदला है। नई शिक्षा व्यवस्था नकलमुक्त, अकल से युक्त है।

अब समय से परीक्षाएं हो रही हैं। 2017 के पहले तीन महीना परीक्षा, तीन महीना परिणाम, तीन महीना अवकाश व कर्फ्यू में जाता था। बच्चों को तीन महीने भी पढ़ने को नहीं मिलते थे। अब 14 दिन में परीक्षा, अगले 14-15 दिन में परिणाम आते हैं। छह महीने का कार्य एक महीने में पूरा किया गया। शिक्षा व्यवस्था नए यूपी में स्केल को स्किल में बदलने का कार्य कर रहा है। 

 

समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह, रामचंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे।

पीएफ निकासी को लेकर नए नियम लागू, 75 प्रतिशत पर भी पहले से ज्यादा निकलेगा पैसा

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आंशिक अंशदान निकासी के नए नियमों से पीएफ निकासी के दावों का निस्तारण शुरू हो गया है। कानपुर रीजन के 15 जिलों में 20 हजार से अधिक पीएफ सदस्यों ने आवेदन किए हैं और उनके खातों में पीएफ भुगतान करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

टायर 2 सिटी के इस लड़के ने 25 की उम्र में बनाया ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ, बैंक में पड़े हैं 45 लाख रुपये! डिजिटल की ताकत से मिली ये सक्सेस

Tier 2 City Story: इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के दौर में सही सोच और सही समय पर शुरुआत किसी की भी जिंदगी बदल सकती है। ऐसी ही एक कहानी रेडिट पर सामने आई है। भारत के एक टायर-2 शहर के रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने महज 18 साल की उम्र में फ्रीलांसिंग से शुरुआत की और देखते ही देखते अपना खुद का डिजिटल-मीडिया बिजनेस खड़ा कर लिया। अपनी मेहनत के बल पर इस युवक ने 25 साल की उम्र में करीब ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ हासिल कर लिया है। रेडिट पर अपनी इस सफलता की कहानी साझा करते हुए युवक ने अपने पूरे पोर्टफोलियो का ब्योरा दिया है।

18 की उम्र में फ्रीलांसिंग, फिर खड़ा किया अपना बिजनेस

युवक ने बताया है कि उसने 18 साल की उम्र से ही फ्रीलांस काम करना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे अनुभव हासिल करने के बाद उसने एक डिजिटल-मीडिया कंपनी की नींव रखी। आज उसकी इनकम का मेन सोर्स उसका बिजनेस ही है। बिजनेस होने की वजह से उसकी कमाई फिक्स नहीं है बल्कि उतार-चढ़ाव भरी है। इसके बावजूद उसका पोर्टफोलियो उसकी सफलता की कहानी बयान कर रहा है।

जानिए कहां-कहां इन्वेस्ट है ₹1.6 करोड़

25 साल के इस युवा एंटरप्रेन्योर ने अपने पैसों को अलग-अलग एसेट क्लासेज में डाइवर्सिफाई किया हुआ है:-

भारतीय शेयर: ₹85 लाख

कैश/बैंक अकाउंट: ₹45 लाख

रियल एस्टेट: ₹15 लाख

यूएस स्टॉक्स: ₹7.5 लाख

म्यूचुअल फंड्स: ₹5 लाख

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: ₹5 लाख

क्रिप्टोकरेंसी: ₹3 लाख

गोल्ड ईटीएफ: ₹2 लाख

फिक्स्ड डिपॉजिट: ₹1 लाख

बैंक में पड़े हैं ₹45 लाख, आगे की स्ट्रैटिजी पर मांगी राय

युवक के बैंक खाते में पिछले काफी समय से ₹30 से ₹45 लाख की बड़ी राशि जमा है। उसका मानना है कि बचत खाते में इतना पैसा रखना काम का सौदा नहीं है। वह पिछले 1-2 सालों से रियल एस्टेट प्रॉपर्टी तलाश रहा है, लेकिन उसे अभी तक कोई ऐसा विकल्प नहीं मिला जहां कीमत और रिस्क/रिवॉर्ड का तालमेल सही बैठता हो। सुरक्षा के लिहाज से उसके पास ₹50 लाख का टर्म इंश्योरेंस तो है, लेकिन फिलहाल उसने अपने या अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया है।

FIRE गोल हासिल करने की चाहत

युवक का मुख्य उद्देश्य अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस को आगे बढ़ाना, फाइनेंशियल स्थिति को मजबूत करना और किसी एक बिजनेस या एसेट पर निर्भरता कम करके फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना है ताकि वह जल्द से जल्द फायर (FIRE- Financial Independence, Retire Early) का टारगेट हासिल कर सके।

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उसने रेडिट कम्युनिटी से सुझाव मांगते हुए पूछा कि अगर 25 साल की उम्र में किसी के पास ₹1.5 से ₹2 करोड़ का नेटवर्थ हो और ₹40-45 लाख कैश में हो, तो उसे अपने अगले कदम के रूप में किन चीजों पर फोकस करना चाहिए?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Sugar Import: चीनी के भाव कब कम होंगे? ब्राजील से आने वाली है खेप, सरकार जमाखोरी पर भी सख्त

Sugar Import: भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच थोड़ी राहत की खबर आई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने कहा है कि 15 अक्टूबर से पहले ब्राजील से कुछ चीनी की खेप भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकती है। हालांकि उन्होंने माना कि अभी यह बताना मुश्किल है कि तब तक कितनी मात्रा में चीनी आएगी।

फिलहाल ब्राजील ही सबसे बड़ा विकल्प

नाइकनवरे के मुताबिक, इस समय चीनी आयात के लिए ब्राजील ही सबसे व्यावहारिक विकल्प है। थाईलैंड आमतौर पर भारत को चीनी सप्लाई करता है। लेकिन, इस बार वो खुद उत्पादन की कमी से जूझ रहा है।

नाइकनवरे ने बताया कि ब्राजील से भारत तक जहाज आने में 40 से 45 दिन लगते हैं। इसके बाद बंदरगाह से मिलों तक चीनी पहुंचाने में भी कुछ समय लगता है। इसलिए 15 अक्टूबर तक कितनी चीनी पहुंचेगी, इसका सटीक अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है।

सरकार समय सीमा में ढील दे सकती है

केंद्र सरकार ने पहले 31 अक्टूबर तक आयातित चीनी के पहुंचने की शर्त रखी थी। लेकिन नाइकनवरे का मानना है कि सरकार इसे सख्ती से लागू नहीं करेगी। अगर कुछ खेप रास्ते में होगी, तो उसके बाद भी उसे मंजूरी मिल सकती है।

किन राज्यों को पहले मिलेगी चीनी?

सबसे पहले बंदरगाह वाले राज्यों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • गुजरात
  • आंध्र प्रदेश

उत्तर भारत के राज्यों तक भी यही चीनी बाद में सड़क और रेल के जरिए पहुंचाई जाएगी।

सरकार ने क्यों दी आयात की मंजूरी?

20 अगस्त को सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। पिछले एक महीने में चीनी की कीमतें 24% बढ़कर 56-60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। इसी वजह से यह फैसला लिया गया।

उत्पादन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं?

NFCSF ने 2025-26 सीजन के लिए 279 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान बरकरार रखा है। इसमें एथेनॉल के लिए भेजी जाने वाली 24 लाख टन चीनी शामिल नहीं है।

फेडरेशन का अनुमान है कि 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सीजन में शुरुआती स्टॉक 35 लाख टन रहेगा। देश की औसत मासिक खपत करीब 22 लाख टन है। नवंबर तक नई पेराई शुरू होने से सप्लाई और बढ़ने की उम्मीद है। नाइकनवरे ने कहा कि फिलहाल घबराहट जैसी कोई स्थिति नहीं दिख रही।

सरकार की सख्ती के बाद कीमतें घटीं

यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने हाल ही में चीनी उद्योग पर कीमतें बढ़ाने और स्टॉक जमा करने का आरोप लगाया था। इसके बाद सरकार ने कई कदम उठाए।

  • मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन
  • व्यापारियों पर 200 टन की स्टॉक सीमा
  • बड़े खरीदारों के लिए अलग सीमा
  • राज्यों में गोदामों की जांच
  • फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती

नाइकनवरे ने बताया कि शनिवार को खुले टेंडरों में एक्स-मिल चीनी के दाम करीब ₹5 प्रति किलो गिर गए। उनका मानना है कि अगले हफ्ते भी कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

दुनिया में चीनी सस्ती क्यों हुई?

दिलचस्प बात यह रही कि भारत के आयात के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी महंगी होने के बजाय सस्ती हो गई। कीमत पहले 18 सेंट प्रति पाउंड तक गई, लेकिन बाद में गिरकर करीब 17.50 सेंट प्रति पाउंड रह गई।

नाइकनवरे का कहना है कि वैश्विक सप्लाई फिलहाल आरामदायक स्थिति में है। इसी वजह से भारत के 10 लाख टन आयात का अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

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क्‍या अब सस्‍ती होगी चीनी, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, यहां से आ रही शकर की खेप

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Will sugar become cheaper now, Government takes major step

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ब्राजील से आने वाली खेप राहत दे सकती है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (NFCSF) के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने आज कहा कि चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं, लेकिन इस समय यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में चीनी आएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्राजील ही चीनी आयात का व्यावहारिक स्रोत है। नाईकनावारे ने कहा कि देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। नवंबर तक भी 15 से 20 लाख टन चीनी उपलब्ध रह सकती है।

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ब्राजील से आने वाली खेप राहत दे सकती है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (NFCSF) के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने आज कहा कि चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं, लेकिन इस समय यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में चीनी आएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्राजील ही चीनी आयात का व्यावहारिक स्रोत है।

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नाईकनावारे ने कहा कि देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। नवंबर तक भी 15 से 20 लाख टन चीनी उपलब्ध रह सकती है। इसी दौरान शुरुआती पेराई से नई चीनी भी बाजार में आने लगेगी। उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए चीनी की कमी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि मिल स्तर पर कीमतें माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को छोड़कर 65-67 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं, जो शनिवार को हुई निविदाओं में 5 रुपए प्रति किलोग्राम घट गईं। उनका अनुमान है कि राज्यों में निगरानी बढ़ने के साथ अगले सप्ताह भी कीमतों में नरमी जारी रहेगी।

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सरकार ने 20 अगस्त को घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। ब्राजील से भारतीय बंदरगाहों तक चीनी पहुंचने में आमतौर पर 40-45 दिन लगते हैं। इसके बाद बंदरगाह से चीनी मिल तक माल पहुंचने में भी समय लगता है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे बंदरगाह वाले राज्यों को आयातित कच्ची चीनी उत्तरी राज्यों की तुलना में जल्दी मिलने की संभावना है। सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 13 मई को 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी।

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विपक्षी दल पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका आरोप है कि इस नीति के कारण चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और आम लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कीमतें बढ़ाने के लिए चीनी उद्योग को जिम्मेदार ठहराया है।

सरकार के मुताबिक, वर्तमान में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों के संयोजन के कारण हुई है। इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम होना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, ग्‍लोबल स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं।

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इस बीच चीनी की जमाखोरी और कीमतों में तेजी को लेकर सरकार की सख्ती का असर भी दिखने लगा है। अब नजर इस बात पर है कि आयातित चीनी कितनी जल्दी बाजार तक पहुंचती है और क्या इससे आम लोगों को महंगी चीनी से बड़ी राहत मिलेगी?