मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साझा किया समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 का विजन, MP को नंबर-1 बनाने पर हुआ मंथन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साझा किया समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 का विजन, MP को नंबर-1 बनाने पर हुआ मंथन

भोपाल। मध्यप्रदेश के लिए 24 अगस्त का दिन बेहद खास रहा। देशभर के संस्थानों के विद्वानों ने प्रदेश के विकास पर अपने-अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि वे राज्य के विकास के लिए क्या कर रहे हैं और क्या कर सकते हैं। मौका था भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीटयूशनस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” स्मारिका का विमोचन भी। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA) द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव की थीम “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” है। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान का अद्भुत समय चल रहा है। रामायण काल में जब भगवान श्री राम की सेना युद्ध के लिए तैयार थी, उस वक्त सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जामवंत ने निभाई थी। उस वक्त चुनौती भी थी, अवसर भी था, लेकिन जामवंत को भगवान हनुमान को उनका सामर्थ्य याद दिलाना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी आज वही भूमिका निभाई है, जो जामवंत ने निभाई थी।

उन्होंने भारत को भारत की ताकत का अहसास कराया है। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि भारत हर चुनौती का सामना करने का माद्दा रखता है। उनके 12 वर्ष के कार्यकाल में चमत्कार हुए हैं। जबकि, 12 वर्ष का कार्यकाल बहुत कम होता है। आज सेमीकंडक्टर की यूनिट मध्यप्रदेश में लग रही है। दो-तीन पहले तक हम जो सोच नहीं सकते थे, वह हो रहा है। समय कहां से कहां चला गया। आज सारे राज्यों के पास आगे बढ़ने के समान अवसर हैं। उन्होंने कहा कि आज सारे संस्थानों के विद्वान यहां इकट्ठा हुए हैं। निश्चित रूप से हम विकास की ओर और तेजी से अग्रसर होंगे।

हमारे सामने ये है बड़ी चुनौती-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इजराइल हमारी आजादी के एक साल बाद आजाद हुआ, जापान द्वितीय विश्व युद्ध में करीब-करीब तबाह हो गया। लेकिन, आज ये देश कहां से कहां पहुंच गए। कुछ समय पहले तक पाकिस्तान की इकोनॉमी भारत से बेहतर मानी जाती थी, लेकिन अब चिंतनीय स्थिति में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वो समय गया जब दुश्मन हमारे सैनिकों के सिर काटकर ले जाते थे, वो दौर बड़ी चुनौती का दौर था। लेकिन, आज समय बदला है। हमने थल-जल-नभ में अपनी ताकत बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि ड्रोन की वजह से युद्ध का स्वरूप बदल गया है। ऑपरेशन सिंदूर में हम इसकी झलक देख चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस बदलते दौर में भी हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। आज कोई छात्र ये नहीं कहता कि वह खेती करना चाहता है। हमारा देश और प्रदेश कृषि आधारित हैं, ऐसे में किसी का खेती में रुचि न लेना बड़ी चुनौती है। 1956 में मध्यप्रदेश बना, लेकिन 2002-03 तक सिंचाई क्षेत्र केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर ही था। साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बनाने में 55 साल लग गए। 

 

राज्य आगे बढ़ेंगे तो देश आगे बढ़ेगा-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं नदी जोड़ो अभियान के लिए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद देता हूं। इसके जरिये सिंचाई का क्षेत्र और विस्तृत होगा। हमने दक्षिण भारतीय राज्यों में बाढ़ की स्थिति में लोगों को मरते देखा है। नदियां जुड़ जाएंगी तो बाढ़ा का पानी व्यवस्थित होगा। आज मिल-जुलकर काम करने का समय है। राज्य आगे बढ़ेगा तो देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान के साथ हमारा दो दशकों से पानी के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था, अब पीकेसी योजना के जरिये 15 जिले राजस्थान के और 15 जिले हमारे हरे-भरे होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग में मध्यप्रदेश ग्लोबल हब, रिसर्च, एआई और पब्लिकेशन से पेटेंट तक का रोडमैप, इंफ्रास्ट्रक्चर, नवाजार और अधोसंरचना, डिजिटल पेमेंट और एआई तकनीक से सुशासन की ओर बढ़ने का मार्ग मिलता है। मानव पूंजी, आत्मनिर्भरता, रोजगार, निवेश, नवाचार, उद्यमशीलता, क्षेत्रीय संतुलन के साथ समावेशी विकास करते हुए मध्यप्रदेश निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में स्किल हमारे लिए नई करेंसी और इनोवेशन नई इकोनॉमी है। ऐसे समय में प्रदेश को शोध, नवाचार, उद्यमिता का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। अटल बिहारी वाजपेयी जी के मन में राष्ट्रवाद की अटूट भावना थी।

 

सभी की भागीदारी जरूरी- कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव अशोक वर्णबाल ने कहा कि समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 विजन डॉक्यूमेंट विकसित भारत का एक लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सप्त संकल्प बताए हैं। मध्यप्रदेश तकनीक और नवाचारों में अग्रणी राज्य है। हमारा प्रयास वर्ष 2047 तक की सभी जनरेशन को एक सूत्र में बांधना है। इसमें सिविल सोसाइटी, उद्यमी, संस्थानों और हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। हमें केवल इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट नहीं चाहिए, बल्कि प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट चाहिए, जो वैल्यू जनरेट कर मध्यप्रदेश को नेशनल वैल्यू चेन में शामिल करे। विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प में 2029 हमारा चेक प्वाइंट है।विकसित मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी सिर्फ शासन की नहीं, बल्कि हम सभी की है, क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ी यह देखेगी कि उन्हें क्या मिला?

 

केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से हुई अहम बात-गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इस सत्र को एआईजीजीपीए के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर संतोष कुमार विश्वकर्मा ने मॉडरेट किया। एनआई ट्रिपल टीआर के प्रतिधिनि ने मध्यप्रदेश को सेमीकंडक्टर तकनीक के विकास के लिए सबसे अनुकूल स्थान बताया। संस्थान इस दिशा में कार्य करेगा। ट्रिपल आईटी भोपाल के प्रतिनिधि ने साइबर सिक्योरिटी और डेटा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय सेना की ओर से मेजर जनरल विकास ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करने की आवश्यकता बताई।

मैनिट के निदेशक ने बताया कि मध्यप्रदेश में होम स्टे का प्रशिक्षण देने के लिए कार्य़ कर रहा है। होम स्टे को विषय के रूप में जोड़ा गया है। एलएनआईपी की प्रतिनिधि ने शारीरिक शिक्षण और खेलों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने की बात कही। एम्प्री के प्रतिनिधि ने बताया कि राज्य के युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का काम जारी है। क्रिटिकल एलिमेंट्स के लिए रिसर्च में हमारा अहम योगदान होगा। रायसेन के जनकपुर गांव को एम्प्री ने सीएसआर के अंतर्गत गोद लिया है। इस गांव को स्मार्ट विलेज बनाने के प्रयास जारी हैं, अगले दो साल में 4 से 5 करोड़ रुपए का निवेश और सीएसआर के जरिए तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी। मध्यप्रदेश का यह गांव देश के 5 चयनित गांवों में शामिल है, जिन्हें स्मार्ट विलेज बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सिंहस्थ 2028 के लिए भी सीएसआर के जरिए प्रयास जारी रखेंगे। इस दौरान आईआईटी इंदौर, आयशर भोपाल, आईआईएम इंदौर, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के निदेशक ने भी विकसित मध्यप्रदेश के लिए अपनी योजनाएं सामने रखीं।

Sugar Stock: शुगर शेयरों में आज फिर तेजी, 52 हफ्ते के हाई पर पहुंचा Dwarikesh, Bajaj Hind

Sugar Stock: चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार द्वारा स्टॉक रखने की सीमा सख्त किए जाने के बाद सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में चीनी कंपनियों के शेयरों में तेजी आई और कई शेयरों ने अपने 52-हफ़्ते के उच्चतम स्तर को छुआ।

बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयरों में 12 फीसदी से अधिक की बढ़त हुई और उन्होंने अपने 52-हफ़्ते का उच्चतम स्तर छुआ।

अवध शुगर एंड एनर्जी, डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज, धामपुर शुगर मिल्स, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज, मगध शुगर एंड एनर्जी, मवाना शुगर्स, पोन्नी शुगर्स (इरोड), उगर शुगर वर्क्स और उत्तम शुगर मिल्स के शेयरों ने भी इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान अपने-अपने 52-हफ़्ते के उच्चतम स्तर को छुआ।श्री रेणुका शुगर्स, ईआईडी पैरी इंडिया, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज और बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में भी तेजी देखी गई और इनमें 3 से 8 फीसदी तक की बढ़त हुई।

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अनुमान से कम उत्पादन के बावजूद देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है।

शुक्रवार को, सरकार द्वारा 1 मिलियन टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने के बाद चीनी शेयरों में 5 प्रतिशत तक की गिरावट आई थी, जिससे त्योहारों के समय मांग के बीच घरेलू बाजार में तंगी का संकेत मिला था।

चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को देखते हुए, सरकार ने चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के लिए कीमतें स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है।

इस साल 1 अगस्त से 30 नवंबर तक देश भर में चीनी डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा लगाई गई है। इसके अलावा, थोक उपभोक्ताओं को 1 सितंबर से 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई (क्रशिंग) शुरू करने की सलाह दी गई है। इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे त्योहारों के मौसम में उपलब्धता और बेहतर होगी।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Skoda Kushaq 1.0 AT vs 1.5 DCT: Real-world efficiency compared

Skoda Kushaq 1.0 AT vs 1.5 DCT: Real-world efficiency compared
Skoda Kushaq side tracking

The Skoda Kushaq was updated earlier this year with much-needed improvements, and continues to offer 1.0-litre and 1.5-litre direct-injection turbo-petrol engines. In the interest of better fuel efficiency, the carmaker introduced a new automatic gearbox for the former engine option, replacing the older 6-speed unit. We’ve tested the updated Kushaq’s fuel efficiency with this new gearbox and compared it with the real-world fuel efficiency figures with the larger, more powerful 1.5 TSI engine.

Skoda Kushaq 1.0 AT vs 1.5 DCT: Specifications 

1.5 unit develops more power, while the 1.0 has a much lighter kerb weight

Skoda Kushaq 1.0 AT vs 1.5 DCT:

 

Kushaq 1.0

Kushaq 1.5

Engine

3 cyls, turbo-petrol 

4 cyls, turbo-petrol

Displacement (cc)

999

1,498

Power (hp)

115

150

Torque (Nm)

178

250

Gearbox

8AT

7DCT

Fuel tank capacity (litres)

50

50

Kerb weight (kg)

1,270 – 1,300 

1,321 – 1,322

While the smaller 1.0 TSI develops 115hp and 178Nm, the 1.5 TSI mill outputs 150hp and 250Nm. In automatic guise, the former is paired to an 8-speed torque converter gearbox while the latter is paired to a 7-speed DCT. Additionally, both come with an auto engine start/stop system, but only the 1.5 TSI comes with cylinder deactivation technology, a feature that shuts off operation of two of the four cylinders depending on throttle input and engine load to curb fuel consumption. Both come with identical 50-litre fuel tanks, but the smaller 1.0 TSI helps it have a lighter kerb weight than the 1.5 TSI.

Skoda Kushaq 1.0 AT vs 1.5 DCT: Real-world fuel efficiency 

1.0 AT delivers better efficiency, but the gap isn’t huge 

In our real-world fuel efficiency tests, the Kushaq 1.0 TSI AT averaged better than the 1.5 TSI DCT by 0.48kpl. In the city, the 1.0 TSI was more efficient than the 1.5 TSI by 1.15kpl. This is because of the 1.0’s lighter kerb weight and aggressive start/stop system. In contrast, the 1.5’s twin-cylinder deactivation tech helped it be more efficient on the highway than the 1.0 by 0.19kpl. Overall, the gap in real-world efficiency is slightly higher than their ARAI-claimed figures (0.48kpl vs 0.37kpl).   

Skoda Kushaq 1.0 AT vs 1.5 DCT: Price

Availability from lower trims makes the 1.0 AT much more affordable than the 1.5 DCT 

Skoda Kushaq 1.0 AT vs 1.5 DCT: Price

 

Kushaq 1.0 TSI

Kushaq 1.5 TSI

Petrol automatic price range (Rs lakh)

12.89 – 17.89

18.79 – 18.99

As the Kushaq’s 1.5 TSI automatic is limited to top-spec variants, it is Rs 5.9 lakh pricier than the 1.0 TSI automatic. In fact, even in top-spec guise, the latter powertrain combo is Rs 1 lakh cheaper than the former.

Autocar India’s fuel-efficiency testing

Before our real-world fuel-efficiency tests, we fill our test cars’ tanks to the brim and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations. These cars are driven in fixed city and highway loops in and around Navi Mumbai, and we maintain certain average speeds. Throughout the tests, there is only one person in each car, operating the air conditioner and other electricals, such as the audio system, indicators and wipers, when required, just like a regular user would. Periodic driver swaps further neutralise variations in driver patterns. At the end of each cycle, we calculate efficiency by filling the tanks to full again.

All prices are ex-showroom, India.

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

UK Israel relations

UK Israel relations: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने, एक इंटरव्यू में कुछ दिन पूर्व ब्रिटेन का मज़ाक उड़ते हुए उसे “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहा। कहने की आवश्यकता नहीं कि ब्रिटिश सरकार ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूर्णतः अस्वीकार्य” बताया है।

 

इसराइली प्रधानमंत्री इस इंटरव्यू में अपने देश के प्रति ब्रिटेन के रुख की आलोचना कर रहे थे। एक मिलिट्री रेडियो पॉडकास्ट के दौरान दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्हो़ंने कहा, “किसी ने एक बार कहा था कि परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन होगा।…हम इसराइली यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान ऐसा दूसरा देश न बन पाए।” ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने नेतन्याहू की इन टिप्पणियों को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया।

ब्रिटेन में इस्लाम की बढ़ती धाक

नेतन्याहू ने ऐसा करके, अपने आप को पश्चिमी देशों के उन दक्षिणपंथी राजनेताओं और टिप्पणीकारों की पांत से जोड़ लिया है, जिन्होंने आगाह किया था कि बड़े पैमाने पर आप्रवासन (इमिग्रेशन) के कारण ब्रिटेन के कुछ हिस्से इस्लामी कानूनों के दायरे में आ गए हैं। बाद में इन नेताओं और टिप्पणीकारों पर “इस्लामोफोबिया” (इस्लाम-विरोधी होने) के आरोप भी लगे थे। ब्रिटेन उन यूरोपीय देशों में से एक है, जिन्होंने पिछले साल फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता भी दी थी; इस कदम से स्वाभाविक है कि इसराइल इन देशों से प्रसन्न नहीं है। ALSO READ: स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

 

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में अपने पूर्ववर्ती कीर स्टारमर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टारमर, गाज़ा पट्टी में अपना हमला रोकने के लिए इसराइल पर पर्याप्त दबाव बनाने में नाकाम रहे। अपना पद संभालने से कुछ समय पहले, “द गार्डियन” को दिए एक इंटरव्यू में बर्नहम ने कहा कि ग्रेट ब्रिटेन, “वेस्ट बैंक” में स्थित इसराइली बस्तियों से आने वाले सामानों के व्यापार पर रोक लगाने के बारे में गंभीरता से विचार करेगा। “वेस्ट बैंक” जॉर्डन नदी के पश्चिम में स्थित फ़िलिस्तीन का एक क्षेत्र है और 1967 से इसराइली क़ब्ज़े में है, जिसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार अवैध माना जात है।

ख़राब होते रिश्ते

ब्रिटेन पारंपरिक रूप से अमेरिका का हमेशा क़रीबी सहयोगी रहा है; इसराइल के साथ उसके रिश्ते तब से ख़राब हुए हैं जब इस साल अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया— इसी के साथ मध्यपूर्व में युद्ध भी छिड़ गया। ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका परमाणु शक्तियां हैं और यह बात भी जग-जाहिर है कि इसराइल के पास भी परमाणु हथियार हैं; हालांकि उसने सार्वजनिक रूप से इसे कभी स्वीकार नहीं किया है। 1998 में पाकिस्तान परमाणु शक्ति वाला पहला इस्लामी देश बना था।  ALSO READ: महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

 

इसराइल उस समय भारत के सहयोग से पाकिस्तानी बम बनने को रोकना चाहता था, पर इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं थीं। अत: नेतन्याहू का इसराइल, अब हर हाल में ईरान को “दूसरी इस्लामी परमाणु शक्ति” बनाने से रोकने के लिए पूर्णत: कटिबद्ध है।

 

नेतन्याहू द्वारा ब्रिटेन को एक “इस्लामिक रिपब्लिक” कहने के पीछे एक दूसर प्रमुख कारण संभवत: यह भी है कि ब्रिटेन में मुस्लिम जनसंख्या न केवल तेज़ी से बढ़ी है और अब भी बढ़ रही है, वहां की सरकारें इसे रोकने के बदले दुम दबाकर “मुस्लिम तुष्टीकरण” नीति की कायल बन गई हैं। ब्रिटेन की सरकारें मुस्लिम प्रवासियों द्वारा वहां की रहन-सहन के नियमों को ठुकराने की ही नहीं, उनका वोट पाने के लिए उनके द्वारा देश के क़ानूनों की अवहेलना के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने से बिदकती हैं। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह

ताज़े अनुमानों के अनुसार, ब्रिटेन की मुस्लिम जनसंख्या लगभग 41 लाख है, जो वहां की कुल जनसंख्या के 6.5 प्रतिशत के बराबर है। पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह हैं। अप्रैल 2026 के एक मत सर्वेक्षण के अनुसार, 25 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम इसराइल विरोधी हमास के प्रबल समर्थक हैं। 45 प्रतिशत का मानना है कि ब्रिटेन के समाचार मीडिया में यहूदियों की धाक चलती है। 16 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम सीरिया में यज़ीदियों का नरसंहार करने वाले अल बगदादी के “इस्लामी राज्य” के प्रशंसक हैं और 15 प्रतिशत ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा की यादें अब भी संजोए हुए हैं। ईरान में हर तरह के जन—असंतोष को निर्ममता से कुचलने वाले वहां के तथाकथित “पसदारान” (रिवल्यूशनरी गार्ड) के समर्थकों की संख्या भी कुछ कम नहीं है।

रोज़मर्रा की अविश्वसनीय वास्तविकता

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पॉडकास्ट वाले वक्तव्य से कुछ ही दिन पहले, ब्रिटेन के एक सांसद रूपर्ट लो ने वहां की संसद में एक ऐसा वक्तव्य पढ़ कर सुनाया, जो ब्रिटेन में रोज़मर्रा की एक अविश्सनवीय वास्तविकता है। ब्रिटेन में रहने वाले मुख्यतः पाकिस्तानियों द्वारा, वहां की मूल ईसाई लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ और बलात्कार के लिए कुख्यात, तथाकथित “ग्रूमिंग गैंग्स” के काले कारनामों का वर्णन करते हुए रूपर्ट लो ने कहा कि उनका वक्तव्य, उनकी खुद की जांच-परख पर आधारित है।

 

उदाहरण के तौर पर, बलात्कार पीड़ित एक लड़की की आपबीती को रूपर्ट लो ने उसी के शब्दों में संसद में सुनाया: “उसने (बलात्कारी ने) जैक डेनियल्स (शराब) की बोतल उठाई, जो अब खाली हो चुकी थी, और उसे ज़बरदस्ती मेरे (गुप्तांग के) अंदर घुसेड़ दिया। बोतल वहीं तोड़ दी। उस समय मैं लगभग 12 साल की थी। लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं कि गोरी लड़कियों—- यानी ईसाई लड़कियों में— नैतिकता की या अच्छे मूल्यों की कमी होती है, जबकि मुस्लिम लड़कियों को गरिमापू्र्ण और उच्च नैतिक स्तर वाला बताया जाता है।”

 

“इस पूरे यौन शोषण के दौरान, देश के अलग अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा बलात्कार किया। ईद और छुट्टियों के दौरान पार्टियां और भी बड़ी हो जाती थीं—हालात और भी बदतर हो जाते थे। पार्टियों में और अधिक हिंसक लोग शामिल हो जाते थे— और अधिक लोग हुए, तो उनकी हवश के लिए और अधिक लड़कियां भी होनी चाहिए! मुझे याद है, एक आदमी ने एक वैन का पिछला दरवाज़ा खोला और मैने देखा कि उसमें 15 से 20 लड़कियां कुत्तों के पिंजरों में बंद थीं।” यह मात्र एक उदाहरण है। ऐसे अनगिनत मामले हैं।

कु्ख्यात “ग्रूमिंग गैंग”

“ग्रूमिंग गैंग” ऐसे लोगों के एक संगठित नेटवर्क को कहते हैं, जो सुनियोजित तरीके से कमज़ोरों-पीड़ितों को—आमतौर पर बच्चों और किशोरवय लड़के-लड़कियों—को बहला-फुसलाकर उनका शोषण करते हैं। उन्हें गंभीर दुर्व्यवहार का शिकार बनाते हैं; इसमें बच्चों का यौन शोषण और मानव तस्करी भी शामिल है। अपने शिकारों को उपहारों, मादक द्रव्यों, शराब आदि के द्वारा ललचाया और पटाया जाता है। घर-परिवार से दूर रखकर, गैंग पर निर्भर बनाकर यौन शोषण सहित उनका हर तरह से दुरुपयोग किया जाता है।

 

ब्रिटिश पुलिस भी मुस्तैदी से काम नहीं करती। 2021 में, ब्रिटिश अख़बार “टाइम्स” की एक जांच से पता चला कि साउथ यॉर्कशायर पुलिस, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े संदिग्धों के मामले में नियमित रूप से यह दर्ज नहीं कर रही थी कि शोषण करने वाले किस जाति, धर्म, देश या समुदाय के लोग थे। रॉदरहैम में, पुलिस ने 67 प्रतिशत मामलों में ऐसे विवरण लिखना ज़रूरी ही नहीं समझा। ग्रेटर मैनचेस्टर इलाके में तीन साल की अवधि में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों के 52 प्रतिशत अपराधी “एशियाई” मूल के दर्ज किए गए, जिनमें सबसे बड़ा समूह पाकिस्तानियों का था, जबकि 38 प्रतिशत “श्वेत” (White) यानी गोरे दर्ज किए गए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, मैनचेस्टर की स्थानीय आबादी में 21 प्रतिशत लोग एशियाई मूल के हैं।

पाकिस्तानी लड़कियां भी सुरक्षित नहीं

पाकिस्तानी महिलाओं के एक स्थानीय समूह का कहना था कि पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर और मकान-मालिक पाकिस्तानी लड़कियों को अपनी हवश का निशाना बनाते हैं। लेकिन, इसकी शिकायत करने पर अपनी शादी की संभावनाओं पर असर पड़ने के डर से लड़कियां पुलिस के पास जा कर कोई रिपोर्ट दर्ज करने से कतराती रही हैं।

 

इन सब तथ्यों के प्रकाश में, इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का—भले मज़ाक के ही तौर पर— ब्रिटेन को “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहना क्या सही नहीं है?

यूक्रेन को सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा ब्रिटेन:कीव में बनेगी लंबी दूरी की SCALP मिसाइल; रूस में अंदर तक हमला करने में सक्षम

रूस के खिलाफ जंग में मदद के लिए ब्रिटेन यूक्रेन को अपनी सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा। इससे कीव में ही लंबी दूरी की SCALP क्रूज मिसाइल बनाने का रास्ता साफ होगा। ब्रिटेन में इस मिसाइल को स्टॉर्म शैडो कहा जाता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को अपनी पहली विदेश यात्रा पर यूक्रेन पहुंचे। इसी दौरान मिसाइल तकनीक साझा करने का ऐलान किया गया है। वे राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। फ्रांस और यूक्रेन की योजना है कि इस साल के आखिर तक यूक्रेन में SCALP की उत्पादन लाइन शुरू की जाए। इससे यूक्रेन को मिसाइल की तकनीक समझने और उसे देश में बनाने में मदद मिलेगी। ब्रिटेन ने यूक्रेन को लंबे साथ का भरोसा दिया यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को राजधानी कीव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका देश यूक्रेन के साथ लंबे समय तक खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा ब्रिटेन की सुरक्षा से जुड़ी है। यूक्रेन अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों पर भी काम कर रहा है। यूक्रेनी कंपनी फायर प्वाइंट ने एफपी-5 फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल बनाई है, जिसकी बताई गई मारक क्षमता करीब 3,000 किमी है। वहीं, रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए यूक्रेन को हवाई हमले रोकने वाली मिसाइलों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी पैट्रियट प्रणाली के लिए जरूरी मिसाइलों की कमी भी उसकी बड़ी परेशानी है।
खबर अपडेट हो रही है….

‘VVIP विजिट से पहले ऐसी चर्चा आम बात है’; PM मोदी-ट्रंप मुलाकात में ‘नो क्वेश्चन’ पर सर्जियो गोर को भारत का जवाब

Sergio Gor No Questions Remark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया के सवालों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि किसी भी VVIP दौरे से पहले नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी और मीडिया से बातचीत को लेकर चर्चा करना एक सामान्य प्रक्रिया है। नई दिल्ली ने कहा कि यह किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं है।

गोर के बयान पर सरकार के सूत्र की तरफ से साफ किया गया है कि नेताओं की सार्वजनिक उपस्थिति से जुड़ी व्यवस्थाओं पर VVIP दौरे से पहले चर्चा होती है। इसी संदर्भ में भारतीय पक्ष ने ऐसी यात्राओं के लिए अपनी मानक प्रक्रिया अमेरिकी पक्ष के साथ साझा की थी। सूत्रों ने कहा, “किसी भी VVIP विज़िट से पहले नेताओं के पब्लिक में आने के इंतजाम के बारे में बातचीत आम बात है। इस बारे में भारतीय पक्ष ने ऐसे विजिट के लिए अपने स्टैंडर्ड प्रैक्टिस के बारे में बताया।”

सर्जियो गोर ने क्या कहा था?

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा था कि दोनों पक्षों के बीच बैठक के दौरान मीडिया की मौजूदगी और पत्रकारों के सवालों को लेकर पहले से एक समझ बनी थी। गोर के मुताबिक, उन्होंने ट्रंप के साथ बैठक से पहले निजी बातचीत की थी। ट्रंप ने उनसे पूछा था कि भारत किन मुद्दों को उठाना चाहता है और क्या नई दिल्ली की ओर से कोई विशेष अनुरोध है।

गोर ने दावा किया कि विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से मुख्य अनुरोध था कि मीडिया को बैठक में बुलाया जाए। लेकिन इसे पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में न बदला जाए। गोर के अनुसार, उन्होंने ट्रंप से कहा था कि भारतीय पक्ष पत्रकारों के सवाल नहीं चाहता। ट्रंप ने कथित तौर पर इस पर सहमति जताई और कहा कि कोई समस्या नहीं है।

उन्होंने कहा, “एवियन में G7 के दौरान PM मोदी से मिलने से पहले मैं प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ था। उन्होंने पूछा कि क्या भारत की कोई रिक्वेस्ट है। MEA क्या मुद्दे उठा सकता है। मैंने उनके साथ कुछ टॉपिक डिस्कस किए। भारत के MEA ने कहा था कि प्रेस को आने दें लेकिन कोई सवाल नहीं होगा। ट्रंप मान गए। लेकिन जब मीडिया आया तो क़रीब 50 कैमरे थे। दोनों ने अपनी बात रखी। फिर ट्रंप ने सबसे पहले मीडिया से पूछा कि क्या उनके कोई सवाल हैं। फिर उन्होंने 45 मिनट की कॉन्फ्रेंस की।”

ट्रंप ने पत्रकारों से पूछा- कोई सवाल?

गोर के मुताबिक, बैठक शुरू हुई तो वहां पत्रकारों के साथ करीब 50 कैमरे मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप ने शुरुआत में अपनी बात रखी। इसके बाद ट्रंप ने अचानक पत्रकारों की ओर देखकर पूछा- Any questions? यानी ‘कोई सवाल है?’

गोर ने आगे कहा कि ट्रंप के इस सवाल के बाद बैठक का पूरा प्रारूप बदल गया। पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका मिल गया और बातचीत आगे बढ़ते-बढ़ते करीब 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसी हो गई। उनके मुताबिक, इसके बाद कई अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर सवाल-जवाब हुए।

भारत ने क्यों कहा- यह सामान्य प्रोटोकॉल है?

गोर के बयान से ऐसा प्रतीत हुआ था कि भारत ने दोनों नेताओं की सार्वजनिक बातचीत के प्रारूप को सीमित रखने की इच्छा जताई थी। इसी पर भारत ने अब अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, किसी भी बड़े VVIP कार्यक्रम से पहले दोनों देशों के अधिकारी यह तय करने के लिए बातचीत करते हैं कि नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी किस तरह होगी। भारत का कहना है कि ऐसी व्यवस्थाओं पर पहले से बातचीत होना नियमित राजनयिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

प्रारूप तय करना और जवाब नियंत्रित करना अलग बात

इस मामले में सबसे अहम अंतर यही है। किसी बैठक से पहले यह कहना कि मीडिया से बातचीत किस प्रारूप में हो, एक प्रशासनिक और प्रोटोकॉल संबंधी विषय है। इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश के नेता को पत्रकारों के सवालों का क्या जवाब देना है, यह भी तय किया जा रहा है।

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यानी भारत की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का सार यह है कि ‘नो क्वेश्चन’ या सीमित मीडिया इंटरेक्शन की पसंद बताना और किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करना दो अलग-अलग बातें हैं। गोर के मुताबिक, ट्रंप ने अंततः पत्रकारों के सवाल लेने का फैसला किया और बैठक का दायरा काफी बढ़ गया।

Delhi Weather: दिल्ली-एनसीआर में मूसलाधार बारिश, कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट! यहां जानिए मौसम पर क्या है अपडेट

Delhi-NCR Heavy Rain: दिल्ली एनसीआर में सावन के आखिरी सोमवार को अचानक मौसम का मिजाज एकदम बदल गया और कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश देखने को मिली। सुबह करीब 10:30 बजे ही काले बादलों की वजह से अंधेरा छा गया। इस भारी बारिश की वजह से पूरे एनसीआर में जगह जगह में जलभराव और ट्रैफिक को लेकर दिक्कतें दिखने लगी हैं। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अलग-अलग इलाकों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा और अलर्ट

हमारी सहयोगी News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, नई दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में आज दिन भर रुक-रुक कर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ-साथ अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक के साथ अचानक बारिश के स्पेल देखने को मिल सकते हैं।

नोएडा और गुरुग्राम में भी पूरे एनसीआर में फैले मानसूनी पैटर्न की वजह से इसी तरह का मौसम बना रहेगा। बारिश के चलते विजिबिलिटी में कमी आ सकती है और सड़कों पर ट्रैफिक की स्पीड स्लो रह सकती है।

तेज हवाओं के साथ दिल्ली के तापमान का हाल

मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की उम्मीद है। अगर बीते 24 घंटों की बात करें तो सोमवार सुबह 8:30 बजे तक दिल्ली के विभिन्न सेंटरों पर हल्की बारिश दर्ज की गई थी। सफदरजंग में 3.4 मिमी, पालम में 10.6 मिमी और लोधी रोड पर 2.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

उत्तराखंड, ओडिशा और तेलंगाना समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग ने सोमवार को सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड, ओडिशा और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान दिया है। खासकर ओडिशा में अत्यधिक तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है, जबकि कई दूसरे क्षेत्रों में गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का अलर्ट है। दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम में होने वाले अचानक बदलावों के लिए तैयार रहें और बारिश के दौरान यात्रा करते समय खास सावधानी बरतें।

Vishal Mega Mart Share Price: गिरते बाजार में हाइपरमार्केट चेन का शेयर 11% भागा, MD गुनेंदर कपूर के रीअपॉइंटमेंट से ​निवेशक खुश

हाइपरमार्केट चेन विशाल मेगा मार्ट के शेयरहोल्डर्स के लिए 24 अगस्त का दिन बेहद अच्छा बीत रहा है। शेयर की कीमत में दिन में 11 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई पर भाव 115.40 रुपये के हाई तक गया। कंपनी ने शुक्रवार, 21 अगस्त को बाजार बंद होने के बाद जानकारी दी थी कि उसके मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) गुनेंदर कपूर को अगले 5 सालों के लिए रीअपॉइंट किया गया है। उनका नया कार्यकाल 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा और 31 अगस्त 2031 तक रहेगा।

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि कपूर को 27 जून 2024 को 3 साल के लिए विशाल मेगा मार्ट का MD और CEO नियुक्त किया गया था। उनका मौजूदा कार्यकाल 26 जून 2027 को खत्म हो रहा है। उनके रीअपॉइंटमेंट पर अभी शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लिया जाना बाकी है।

शेयर एक साल में 25 प्रतिशत गिरा

विशाल मेगा मार्ट दिसंबर 2024 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 8000 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 52900 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक साल में 25 प्रतिशत नीचे आया है। साल 2026 में अब तक यह 16 प्रतिशत की गिरावट देख चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 40.09 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 157.75 रुपये और निचला स्तर 98.70 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,887.31 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 173.19 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 37 लाख रुपये दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026 के दौरान विशाल मेगा मार्ट का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 6,631.38 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 656 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 1.41 करोड़ रुपये रही।

जून तिमाही में विशाल मेगा मार्ट ने 24 नए स्टोर खोले, जिससे इसके कुल स्टोर्स की संख्या 819 हो गई। कंपनी ने अपनी क्विक-कॉमर्स पहल का विस्तार 520 शहरों में 767 स्टोर तक किया है। इसके रजिस्टर्ड यूजर्स की संख्या 1.41 करोड़ है।

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अयोध्या में ‘मछली भोज’ पर मचा सियासी घमासान! अजय राय पर BJP का हमला, आयोजकों ने बताया क्या है पूरा मामला

अयोध्या में ‘मछली भोज’ पर मचा सियासी घमासान! अजय राय पर BJP का हमला, आयोजकों ने बताया क्या है पूरा मामला

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अयोध्या में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम में मछली बनाए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई भाजपा नेताओं ने श्रावण मास में मछली भोज को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। वहीं आयोजकों ने अजय राय के मछली खाने के दावे को गलत बताया है। अजय राय का भी कहना है कि अयोध्या में मैंने मछली नहीं खाई। ALSO READ: त्योहारों से पहले प्याज ने रुलाया! नासिक में 76% बढ़े दाम, कई राज्यों में कीमतें दोगुनी

 

बताया जा रहा है कि अजय राय ने अयोध्या पहुंचकर हनुमानगढ़ी में हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इसके बाद उनके स्वागत के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम में मछली भोज कराए जाने की चर्चा पर बवाल मच गया।

भाजपा का अजय राय पर बड़ा हमला

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के सावन मास में मछली खाने को लेकर भाजपा नेता हमलावर हो गए हैं। भाजपाइयों ने इसे सनातन आस्था का अपमान बताते हुए कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाए। कहा, अयोध्या जैसी धार्मिक नगरी में ऐसे आयोजन से हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस के अध्यक्ष अयोध्या में हनुमान गढ़ी के दर्शन करने जाते हैं और फिर मछली भोज की दावत उड़ाते हैं, ये राम राम चिल्लाते है बेशर्मी की भी सीमा होती है। किसने कहा था हनुमानगढ़ी जाने के लिए और मछली खानी थी तो अयोध्या के बाहर जाकर खा लेते. ये है कांग्रेस का दोहरा आचरण, गिरगिट भी शर्मा जाता होगा।

 

यूपी भाजपा अध्यक्ष और सांसद पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सनातन का अपमान ही अब कांग्रेस की पहचान बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पवित्र श्रावण मास में अयोध्या धाम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत समारोह में मछली भोज का आयोजन किया गया। इसे निंदनीय और अक्षम्य बताते हुए उन्होंने कांग्रेस से संत समाज और देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

 

'मछली भोज' विवाद पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि पवित्र श्रावण मास में अगर आप अयोध्या में मछली की दावत देंगे तो इससे एक बात बहुत साफ है कि आप सनातन के प्रति असहिष्णुता के साथ धर्मनिरपेक्षता के सूरमा बनने की प्रतिस्पर्धा में लगे हैं। ALSO READ: ऊना एक्‍सप्रेस में चूहे ने कुतरी बुजुर्ग की नाक, चंड़ीगढ़ से आ रहे थे इंदौर, इलाज के लिए पहुंचे अस्पताल

सफाई में क्या बोले आयोजक?

कार्यक्रम के आयोजक राम निहाल निषाद व अन्य नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने मछली नहीं खाई है। गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। रामनिहाल निषाद ने कहा कि कार्यक्रम में निषाद समाज के भी लोग बड़ी संख्या में जुटे थे। उनके लिए भोज भी था। इसमें पूड़ी-सब्जी के साथ मछली की भी दावत थी। इसी दौरान मछली बनते हुए किसी ने वीडियो प्रसारित कर दिया। इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

 

आयोजक ने बचाव करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का संवैधानिक अधिकार है। आयोजक का कहना है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था थी। उनका कहना है कि मछली पकड़ना और मछली खाना निषाद समुदाय की पारंपरिक प्रथाओं का हिस्सा है।

Miss Universe India 2026: कौन हैं काजियाह लिज मेजो? केरल की इस 19 साल की मॉडल ने जीता ‘मिस यूनिवर्स इंडिया 2026’ का खिताब

Miss Universe India 2026: काजिया लिज मेजो नई मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 हैं। केरल की रहने वाली 19 साल की काजिया ने रविवार को जयपुर में हुए पेजेंट के फाइनल में 52 दूसरी कंटेस्टेंट को हराकर यह नेशनल टाइटल जीता। अब वह नवंबर में प्यूर्टो रिको में होने वाले 75वें मिस यूनिवर्स पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। तमिलनाडु की वैष्णवी गणेश को फर्स्ट रनर-अप चुना गया, जबकि गुजरात की अनुश्री सतवलेकर सेकंड रनर-अप रहीं और उन्होंने मिस इंटरनेशनल इंडिया 2026 का टाइटल जीता।

कौन हैं काजिया लिज मेजो?

काजिया लिज मेजो केरल के मावेलिक्कारा की रहने वाली एक लॉ स्टूडेंट और मॉडल हैं। हालांकि वह अभी नेशनल मिस यूनिवर्स इंडिया का क्राउन जीतने की वजह से चर्चा में हैं, लेकिन यह उनका पहला पेजेंट टाइटल नहीं है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 17 साल की उम्र में मिस टीन दिवा 2024 जीता था। इसके बाद उन्होंने मिस टीन इंटरनेशनल 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व किया और फर्स्ट रनर-अप रहीं। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने मिस यूनिवर्स केरल 2026 जीता और सबसे कम उम्र की स्टेट टाइटलहोल्डर बनीं। उनकी इस हालिया जीत ने उन्हें एक और खास पहचान दिलाई है। काज़ियाह लिज़ मेजो ‘मिस यूनिवर्स इंडिया’ का खिताब जीतने वाली केरल की पहली महिला हैं।

वह अबू धाबी में पली-बढ़ीं

2007 में जन्मीं काजियाह लिज मेजो का बचपन अबू धाबी, UAE में बीता। उन्होंने एमिरेट्स नेशनल स्कूल, सेंट जोसेफ स्कूल और अबू धाबी इंडियन स्कूल में पढ़ाई की। वह अभी लॉ की पढ़ाई कर रही हैं और साथ ही मॉडल के तौर पर भी काम कर रही हैं। लेकिन उनकी दिलचस्पी सिर्फ पेजेंट तक ही सीमित नहीं है।

‘मिस टीन दिवा’ की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, काजियाह लिज मेजो ने 12 साल तक क्लासिकल डांस की ट्रेनिंग ली है। वह गाती भी हैं और ड्रम व वायलिन बजा सकती हैं। उन्होंने पब्लिक स्पीकिंग और एक्टिंग में भी हाथ आजमाया है। काजियाह लिज मेजो ने मलयालम फिल्म ‘शायलॉक’ से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा।

उनका पेजेंट का सफर

काजियाह लिज मेजो की हालिया जीत एक ऐसे फ़िनाले में हुई, जिसे भारतीय पेजेंट जगत की कुछ बड़ी हस्तियों ने जज किया था। जूरी की अगुवाई पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन ने की। पूर्व मिस यूनिवर्स इंडिया विजेता उर्वशी रौतेला और सेलिना जेटली भी इस पैनल का हिस्सा थीं। पिछले साल, मणिका विश्वकर्मा ने मिस यूनिवर्स इंडिया का खिताब जीता था और इंटरनेशनल पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इस साल, वह नई विजेताओं को ताज पहनाने के लिए नेशनल फिनाले में लौटीं।

काज़ियाह लिज मेजो के सामने अब उनका सबसे बड़ा पेजेंट असाइनमेंट है। वह नवंबर में प्यूर्टो रिको जाएंगी और 75वें मिस यूनिवर्स पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।