Kawasaki Ninja ZX-6R gets free Ohlins steering damper offer

Kawasaki Ninja ZX-6R gets free Ohlins steering damper offer
Kawasaki Ninja ZX-6R gets free Ohlins steering damper offer

Kawasaki India has announced an offer on the Ninja ZX-6R, bundling a free Ohlins steering damper worth Rs 83,000 with the middleweight supersport.

  1. Free Ohlins steering damper worth Rs 83,000
  2. Ninja ZX-6R is priced from Rs 12.49 lakh, ex-showroom, India

Kawasaki Ninja ZX-6R: What’s new?

636cc engine produces 124hp and 69Nm

Priced from Rs 12.49 lakh, ex-showroom, the MY26 Ninja ZX-6R continues to be powered by a 636cc inline four-cylinder engine producing 124hp at 13,000rpm and 69Nm at 11,000rpm, with output rising to 129hp with ram-air effect. The ZX-6R remains one of the few inline-four supersport offerings currently on sale in India.

The addition of the Ohlins steering damper should aid high-speed stability and front-end composure, especially during aggressive riding and track use. Steering dampers are typically associated with larger-capacity superbikes, making this a notable addition in the segment.

इंदौर में साहित्य की विविध विधाओं का संगम: जनवादी लेखक संघ का 150वाँ रचना पाठ संपन्न

इंदौर में साहित्य की विविध विधाओं का संगम: जनवादी लेखक संघ का 150वाँ रचना पाठ संपन्न

Janvadi Lekhak Sangh pradeep kant

इंदौर। 22 अगस्त 2026 को इंदौर के 'अभिनव कला समाज' में जनवादी लेखक संघ के 150वें मासिक रचना पाठ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं पर केंद्रित था, जिसमें ललित निबंध, यात्रा वृत्तांत और व्यंग्य विधा की रचनाएँ प्रस्तुत की गईं।

 

रचना पाठ का विवरण

ललित निबंध (संध्या गंगराड़े): संध्या गंगराड़े ने अपने ललित निबंध 'तबे एकला चालो रे' का पाठ किया। यह निबंध कबीर, मीरा, ग़ालिब और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी महान विभूतियों के माध्यम से भीड़ से अलग हटकर अपनी राह बनाने वाले व्यक्तित्वों की बात करता है। निबंध में यह विचार व्यक्त किया गया कि अपनी अलग राह बनाने वाले ही समाज को कुछ नया दे सकते हैं, जबकि भीड़ तो भेड़चाल में बदलकर मंदिर-मस्जिद के विवादों में उलझी रहती है। इसी अकेलेपन के संघर्ष को दर्शाने के लिए कबीर के “जो घर फूँके आपना चले हमारे साथ”, मीरा के “मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई”, ग़ालिब के “रहिए अब ऐसी जगह चलकर जहाँ कोई ना हो” और टैगोर के “जोदी तोर डाक शुने केउ ना आशे तोबे एकला चालो रे” का उल्लेख किया गया।

 

यात्रा वृत्तांत (विभा दुबे): विभा दुबे ने अपने यात्रा वृत्तांत 'मेरी अमेरिका यात्रा' का वाचन किया। उन्होंने बताया कि यह यात्रा दो दृष्टियों से महत्वपूर्ण थी—पहला, अपने देश से दूर बसे परिजनों (बेटी और भाई) से मिलना और दूसरा, वहाँ की संस्कृति को समझना। इसमें न्यूज़र्सी, न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और नियाग्रा फॉल्स की यात्रा का वर्णन था, जिसके अंतर्गत अमेरिका के वातावरण, वनस्पति, स्थानीय संस्कृति और मकानों की बनावट का सुंदर ज़िक्र किया गया।

 

व्यंग्य पाठ (सुरेश उपाध्याय): अंत में सुरेश उपाध्याय ने अपने तीन व्यंग्यों—'फाइल है फाइल का क्या', 'बैसाखी नंदन के बल्ले-बल्ले' और 'चोर-चोर का शोर' का पाठ किया। ये तीनों व्यंग्य वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों पर चुटकी लेते हुए गहराई से सोचने पर विवश करते हैं।

 

रचनाओं पर समीक्षा एवं चर्चा

रचना पाठ के उपरांत उपस्थित साहित्यकारों ने पढ़े गए आलेखों पर बेबाक और ईमानदार चर्चा की:

प्रदीप कांत: उन्होंने कहा कि ललित निबंध अपनी अलग राह बनाने वालों से शुरू होकर भीड़ की उस भेड़चाल तक जाता है, जो कभी भी सांप्रदायिकता का रूप ले सकती है। वहीं, यात्रा वृत्तांत को अपने वास्तविक स्वरूप में लिखा जाना अभी बाकी है।

 

प्रदीप मिश्र: उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में रचनात्मकता साझा की जाती है, इसलिए उन पर ईमानदारी से चर्चा ज़रूरी है। उन्होंने निबंध में अकेलेपन के संघर्ष की सराहना करते हुए लालित्य की थोड़ी कमी को रेखांकित किया। यात्रा वृत्तांत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बतकही के साथ-साथ इसमें शब्दचित्र बनने चाहिए थे, जिनकी अभी कमी दिखी। साथ ही उन्होंने सुरेश उपाध्याय के व्यंग्यों की पैनी धार की सराहना की।

 

अन्य वक्ता (देवेंद्र रिणवा, शिरीन भावसार, विश्वनाथ कदम, विभा दुबे और संध्या गंगराड़े): देवेंद्र रिणवा, शिरीन भावसार और विश्वनाथ कदम ने व्यंग्य तथा ललित निबंध की सराहना की, परंतु यह भी माना कि यात्रा वृत्तांत का अपने पूर्ण स्वरूप में आना अभी शेष है। विभा दुबे और संध्या गंगराड़े ने व्यंग्यों के छोटे आकार के बावजूद उनके भीतर छिपी बड़ी सामाजिक मार को रेखांकित किया।

 

मंच संचालन एवं आभार

कार्यक्रम का सफल संचालन सचिव, जनवादी लेखक संघ प्रदीप कांत ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन देवेंद्र रिणवा द्वारा किया गया।

Kunal Kohli: कुणाल कोहली ने तुकाराम मुंडे से इंडियन किचिन में छापेमारी करने को कहा, बोले- ‘वहां एक्सपायर्ड सामान मिलेगा’

Kunal Kohli: फिल्ममेकर कुणाल कोहली ने महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंडे को एक आसान सुझाव दिया है, क्योंकि विभाग अभी फ़ूड सेफ्टी की जांच कर रहा है। वे चाहते हैं कि यह मुहिम सिर्फ रेस्टोरेंट और फ़ूड आउटलेट तक ही सीमित न रहे, बल्कि भारतीय घरों तक भी पहुंचे, जहां किचन की शेल्फ और फ्रिज में खाने के पैकेट और बोतलें सालों से रखी हो सकती हैं।

फिल्ममेकर ने रविवार 23 अगस्त को इंस्टाग्राम पर यह सुझाव शेयर किया। उन्होंने लिखा- “मैं तुकाराम मुंडे से गुज़ारिश करता हूं कि वे देश भर के भारतीय घरों में किचन की शेल्फ और फ्रिज की भी जांच करें।”कुणाल कोहली चाहते हैं कि भारतीय रसोई में खाने-पीने की चीज़ों की सुरक्षा की जांच हो।

कुणाल कोहली की पोस्ट एक ऐसी समस्या पर केंद्रित थी जिससे कई घर जुड़े हुए महसूस कर सकते हैं: पुराने खाने-पीने के सामान को सिर्फ इसलिए रखे रहना क्योंकि वे रसोई में अच्छी तरह से रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ सामान तो सालों से रखे हो सकते हैं, जिनका असल में कभी इस्तेमाल ही नहीं किया गया।

“सालों पुराने एक्सपायर हो चुके सामान भी होंगे, जिन्हें अच्छी तरह और सुरक्षित तरीके से रखा गया होगा; जिनकी बोतलें और पैकेट हर महीने पोंछकर साफ़ किए जाते होंगे और वापस शेल्फ या फ्रिज में रख दिए जाते होंगे, ताकि उनका कभी इस्तेमाल न हो।”

इसके बाद फिल्ममेकर ने अपने सुझाव को घर पर मौजूद लोगों के लिए एक चुनौती में बदल दिया। किसी इंस्पेक्शन का इंतज़ार करने के बजाय, उन्होंने लोगों से कहा कि वे खुद अपनी किचन की शेल्फ और रेफ्रिजरेटर की जांच करें। कोहली ने लिखा, “चलो, अपनी किचन की शेल्फ और रेफ्रिजरेटर की ‘तुकाराम मुंडे’ स्टाइल में सफाई करते हैं।”

महाराष्ट्र FDA क्यों फूड सेफ्टी की जांच कर रहा है?

कुणाल कोहली का यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र FDA उन जगहों की जांच कर रहा है जहां खाना बनाया और बेचा जाता है। विभाग पूरे राज्य में रेस्तरां, होटल, सड़क किनारे खाने-पीने की जगहों और खाने-पीने से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों की जांच कर रहा है।

इन जांचों में वे प्रतिष्ठान भी शामिल हैं जो ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए खाना पहुंचाते हैं। फूड सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वाली जगहों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिसमें कुछ मामलों में सुधार के लिए नोटिस देना और लाइसेंस सस्पेंड करना शामिल है।

मिलावटी दूध से लेकर बैन गुटखा तक, FDA की जांच जारी

फूड सेफ्टी जांच में मिलावटी दूध, रेस्तरां में परोसे जाने वाले खाने और स्कूलों के आस-पास बेचे जाने वाले जंक फूड की जांच की जा रही है। विभाग बैन गुटखा और तंबाकू वाले पान मसाला के निर्माण और बिक्री की भी जांच कर रहा है।

कुणाल कोहली फिल्म्स

कुणाल कोहली ऐसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं जो अक्सर रोमांस और रिश्तों पर आधारित होती हैं। उन्होंने 2002 में ‘मुझसे दोस्ती करोगे!’ से बतौर डायरेक्टर अपना डेब्यू किया, जिसके बाद उन्होंने सफल रोमांटिक कॉमेडी ‘हम तुम’ और रोमांटिक थ्रिलर ‘फना’ बनाई। इसके बाद उन्होंने ‘थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक’ और ‘तेरी मेरी कहानी’ को डायरेक्ट किया, फिर ‘नेक्स्ट एंती?’ (Next Enti?) के साथ तेलुगु फ़िल्मों में डेब्यू किया और बाद में ‘लाहौर कॉन्फिडेंशियल’ और ‘बॉबी और ऋषि की लव स्टोरी’ को डायरेक्ट किया।

त्योहारों से पहले प्याज ने रुलाया! नासिक में 76% बढ़े दाम, कई राज्यों में कीमतें दोगुनी

त्योहारों से पहले प्याज ने रुलाया! नासिक में 76% बढ़े दाम, कई राज्यों में कीमतें दोगुनी

onion price increasing in india

त्योहारों के मौसम बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। चीनी, चावल, दाल और तेल के बाद प्याज की कीमतों में भी भारी उछाल दिखाई दे रहा है। नासिक मंडी में एक माह में प्याज के दाम लगभग 76 फीसदी बढ़ गए। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, दिल्ली और हरियाणा में भी प्याज के दाम दोगुना हो गए। ALSO READ: क्‍या अब सस्‍ती होगी चीनी, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, यहां से आ रही शकर की खेप

 

कहां क्या है दाम?

नासिक मंडी में जुलाई में प्याज 2050 रुपए प्रति क्विंटल था। 23 अगस्त को इसकी कीमत बढ़कर 3600 रुपए पार हो गई। दिल्ली-NCR, मुंबई, कोलकाता जैसे बड़े महानगरों में प्याज 50-60 रुपये प्रति किलो के रेट पर बिक रहे हैं। भुवनेश्वर में प्याज की कीमतें 25-30 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 55-60 रुपए प्रति किलो हो गई हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 20 रुपए किलो वाला प्याज 40 किलो रुपए हो गया।

 

क्यों महंगा हुआ प्याज?

बताया जा रहा है कि प्याज अकसर अगस्त सितंबर में महंगा हो जाता है। इसकी एक वजह है कि रबी का प्याज बाजार में कम हो जाता है तौर खरीफ का प्याज बाजार में आ नहीं पाता। कमजोर मानसून की वजह से इस वर्ष खरीफ की फसलों की बुआई में देरी की वजह से भी ऐसा माना जा रहा है कि इस वर्ष प्याज ज्यादा रुलाएगा। ALSO READ: त्योहारों से पहले कड़वी हुई चीनी! खरगे बोले- 9 साल के निचले स्तर पर स्टॉक, सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

 

सुरक्षित बफर स्टॉक से उम्मीद

हालांकि महंगाई से परेशान जनता को प्याज की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए सरकार ने भी कमर कस ली है। कहा जा रहा है कि सितंबर से सरकार अपने सुरक्षित बफर स्टॉक से प्याज को मंडियों में उतार सकती है। इससे प्याज की कीमतों में कमी आएगी।

 

क्या सस्ती होगी चीनी?

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ब्राजील से आने वाली खेप राहत दे सकती है। NFCSF के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने कहा- चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं, लेकिन इस समय यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में चीनी आएगी। देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है।

Aprilia Tuono 457 vs Tuono 457 Special Edition: Price and differences explained

Aprilia Tuono 457 vs Tuono 457 Special Edition: Price and differences explained
Aprilia Tuono 457 vs Tuono 457 Special Edition: Price and differences explained

With the Special Edition, Aprilia has addressed almost all the major complaints with the Tuono 457 but what exactly are the changes? At first glance, both motorcycles look the same and they largely are the same as well. This is a case of small changes adding up to a markedly different (and better) final product.

Aprilia Tuono 457 vs Tuono 457 Special Edition: Design

Slightly different, with a new colour

The most obvious change is the updated decals and the brand-new Mamba Black colour. The new colourway, which is exclusive to the Special Edition at the moment, gets a blacked out chassis and swingarm which wasn’t the case earlier. Even on the Puma Gray colour (carried over from earlier), Aprilia has updated the decals so the India-specific Special Edition does look different compared to the international version of the Tuono 457.

Aprilia Tuono 457 vs Tuono 457 Special Edition: Comfort

Seat, handlebar, and suspension all see upgrades

Starting off with changes that are visible, Aprilia has updated the Tuono 457’s seat to be slightly different now from the RS 457. Although the main difference is the extra padding, the seat profile has been slightly changed too to make sure longer stints are more comfortable. It results in the Special Edition having a 10mm taller seat height at 810mm, but we don’t expect anyone to complain about that. The next change is to the handlebar that now gets a 10mm taller riser even though the bar itself is unchanged. Lastly, there’s a standard flyscreen above the headlight, but we’d chalk that as strictly an aesthetical improvement. Finally, the brake lever is now adjustable though the clutch lever remains non-adjustable.

The changes that won’t be visible are to the suspension. At launch, the Tuono appeared to share the exact same suspension setup as the RS 457, which was jostling to most, literally and figuratively. On the Special Edition, Aprilia has made the front suspension softer on both damping and spring preload. While the rear has a softer compression damping and spring preload; rebound damping remains where it was earlier.

Aprilia Tuono 457 vs Tuono 457 Special Edition: Price

Costs Rs 2,000 extra now

With all the upgrades, Aprilia has priced the Tuono 457 Special Edition at Rs 3.99 lakh (ex-showroom), a Rs 2,000 increase from before. Despite the name, this is the only Tuono you can buy in India now so if you were a fan of the earlier Tuono, tough luck.

Aprilia Tuono 457 vs Tuono 457 Special Edition: What did not change

Engine, chassis, and most features

The Tuono 457’s engine immediately became a favourite at launch so Aprilia has not changed that in any way. The Special Edition retains the 457cc twin-cylinder, liquid-cooled engine with a parallel twin configuration. No changes to the performance figures either with the power (47.6hp) and (43.5Nm) torque remaining exactly the same.

Like we mentioned at the beginning, the list of upgrades on the Tuono 457 Special Edition isn’t long. However, most of them make a meaningful difference to how the motorcycle is to ride which is what Aprilia seems to have wanted. It remains to be seen whether these changes will help make the Tuono any more popular than before.

Lenskart Block Deal: एक झटके में बिके 4.5 करोड़ शेयर, कीमत फिसली

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में ब्लॉक डील के तहत 4.5 करोड़ शेयरों का लेनदेन हुआ है। ये शेयर कंपनी की 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। लेंसकार्ट का शेयर सुबह के कारोबार में पहले पिछले क्लोजिंग प्राइस से करीब 2 प्रतिशत तक उछलकर BSE पर 673.35 रुपये के हाई तक गया। फिर यह लाल निशान में आया और 1.2 प्रतिशत तक टूटकर 653.20 रुपये के लो तक गया। शेयरों को किसने बेचा और किसने खरीदा, इसके बारे में अभी तक आधिकारिक रूप से डिटेल सामने नहीं आई है।

हालांकि शनिवार को CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब केमैन 2.6 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की बिक्री कर सकती है। ट्रांजेक्शन के लिए फ्लोर प्राइस 635 रुपये प्रति शेयर रह सकता है। इस आधार पर लगभग 30 करोड़ डॉलर के शेयर बिक सकते हैं। शेयर बेचने वाले के लिए बाकी हिस्सेदारी बेचने को लेकर 45 दिन का लॉक-अप पीरियड होगा।

लेंसकार्ट में जून 2026 तिमाही के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 17.53 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 82.05 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, इसमें से SVF II Lightbulb (Cayman) Ltd के पास 9.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Lenskart का शेयर इस साल अब तक 50 प्रतिशत चढ़ा

लेंसकार्ट का मार्केट कैप 1.14 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। लेंसकार्ट ने 10 नवंबर, 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। इसका IPO 7278.02 करोड़ रुपये का था। शेयर साल 2026 में अब तक 50 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 28 प्रतिशत उछली है। हाल ही में MSCI इंडिया इंडेक्स में लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस के साथ-साथ लॉरस लैब्स, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो की पेरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स की एंट्री हुई है।

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स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

लेंसकार्ट के शेयर को कवर कर रहे 21 एनालिस्ट्स में से 17 ने ‘बाय’ रेटिंग दी है। 3 ने ‘होल्ड’ और एक ने ‘सेल’ की सलाह दी है। जेफरीज ने स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस बढ़ाकर 680 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि मांग के बजाय आपूर्ति कंपनी के लिए प्रमुख बाधा बनी हुई है। सिटी ने 650 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है। कहा है कि लेंसकार्ट के मार्जिन को हायर एवरेज सेलिंग प्राइस, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेटिंग लेवरेज से लाभ होता है।

सिटी को उम्मीद है कि कंपनी की ग्रोथ की रफ्तार अच्छी बनी रहेगी। इसे स्टोर्स में बढ़ोतरी और कस्टमर एक्वीजीशन का सपोर्ट मिलेगा। HSBC ने स्टॉक के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 575 रुपये प्रति शेयर दिया है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और ​2028 के लिए EBITDA अनुमानों को क्रमशः 6 प्रतिशत और 5 प्रतिशत बढ़ाया है।

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PPF Maturity: 15 साल पूरे होने के बाद भी बंद न करें PPF अकाउंट! मैच्योरिटी पर मिलते हैं 3 बड़े ऑप्शंस, जानें कहां होगा सबसे ज्यादा फायदा

What to do after PPF Maturity: क्या आपका पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) अकाउंट 15 साल पूरे कर चुका है? अक्सर लोग 15 साल की अवधि खत्म होते ही इसे फिनिश लाइन मानकर पूरा पैसा निकाल लेते हैं। लेकिन ठहरिए! 15 साल बाद भी आपकी सेविंग्स की यह रफ्तार थमने की जरूरत नहीं है। PPF के नियम आपको मैच्योरिटी के बाद ऐसे कई शानदार ऑप्शंस देते हैं, जहां आप बिना कोई रिस्क लिए 7.1% की सालाना गारंटीड ब्याज दर का फायदा उठाना जारी रख सकते हैं।

आइए जानते हैं PPF मैच्योरिटी के बाद आपके पास कौन-कौन से 3 सबसे बड़े विकल्प हैं और आपको इनमें से क्या चुनना चाहिए।

ऑप्शन 1: पूरा पैसा निकालें और अकाउंट बंद करें

अगर आपके पास कोई बड़ा वित्तीय लक्ष्य (जैसे- बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदना) सामने है, तो आप अकाउंट बंद करके पूरा पैसा निकाल सकते हैं। 15 साल का वित्त वर्ष पूरा होने पर आप संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस में क्लोजर फॉर्म भरकर ब्याज सहित पूरा फंड निकाल सकते हैं। PPF ‘EEE’ कैटेगरी में आता है, इसलिए मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम 100% टैक्स-फ्री होगी।

ऑप्शन 2: बिना पैसा जमा किए अकाउंट चालू रखें

अगर आपको तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है, लेकिन आप भविष्य के लिए नया पैसा भी लॉक नहीं करना चाहते, तो यह ऑप्शन आपके लिए बेस्ट है। आपके मौजूदा जमा पैसों पर सरकार की ओर से तय 7.1% सालाना दर से ब्याज जुड़ता रहेगा। इस विकल्प के तहत आपको हर साल एक बार अपनी जरूरत के मुताबिक पैसा निकालने की आजादी मिलती है।

ऑप्शन 3: नए निवेश के साथ 5-5 साल के लिए बढ़ाएं

अगर आप आगे भी अपनी बचत जारी रखना चाहते हैं, तो अपने अकाउंट को 5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं।

1 साल का समय: यह विकल्प चुनने के लिए आपको मैच्योरिटी की तारीख से 1 साल के भीतर फॉर्म (Form 4/H) जमा करके एक्सटेंशन का विकल्प चुनना होगा।

कंटिन्यू रखें SIP/निवेश: इसमें आप पहले की तरह हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख जमा कर सकते हैं और उस पर टैक्स छूट (सेक्शन 80C) और 7.1% का ब्याज पा सकते हैं।

गलती न करें: एक्सटेंशन के इन 2 नियमों में अंतर समझें

निवेशक सबसे बड़ी गलती एक्सटेंशन का चुनाव करने में करते हैं:

पैसा जमा करने के साथ एक्सटेंशन: अगर आपने 1 साल के भीतर ‘With Contribution’ का विकल्प चुन लिया, तो आप नए पैसे जमा करना जारी रख सकते हैं।

बिना पैसे के एक्सटेंशन: अगर आपने बिना योगदान के अकाउंट छोड़ दिया और 1 साल की समय-सीमा निकल गई, तो आप बाद में उसी एक्सटेंशन पीरियड में दोबारा नए पैसे जमा नहीं कर पाएंगे। इसलिए फैसला सोच-समझकर लें।

PPF मैच्योरिटी ऑप्शंस की पूरी डिटेल्स

PPF मैच्योरिटी ऑप्शंस की पूरी डिटेल्स

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपको घर बनाने, मेडिकल इमरजेंसी या अन्य बड़े खर्च के लिए तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है, तो PPF अकाउंट बंद करने के बजाय इसे आगे बढ़ाना ही समझदारी है। अपने अन्य पोर्टफोलियो (EPF, NPS, म्यूचुअल फंड्स) को देखने के बाद ही फैसला लें। PPF 15 साल बाद भी आपके वेल्थ क्रिएशन का सबसे सुरक्षित और टैक्स-फ्री जरिया बना रह सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Apollo Tyres Share Price: ब्रोकरेज ने रेटिंग की अपग्रेड, शेयर 5% चढ़ा, दिया 34% अपसाइड का टारगेट

Apollo Tyres Share Price : टायर बनाने वाली कंपनी अपोलो टायर (Apollo Tyres) के शेयरों में 24 अगस्त को बढ़त देखने को मिली। शेयर में आज 5 फीसदी का उछाल देखने को मिला। शेयर में यह तेजी ब्रोकरेज फर्म यूबीएस द्वारा रेटिंग को अपग्रेड करने के बाद आई। ब्रोकरेज फर्म UBS ने स्टॉक की रेटिंग को ‘Neutral’ से बढ़ाकर ‘Buy’ कर दिया और इसका टारगेट प्राइस ₹590 प्रति शेयर तय किया। इस नए टारगेट का मतलब है कि शुक्रवार के क्लोजिंग प्राइस ₹439.95 से इसमें लगभग 34% की बढ़त हो सकती है।

UBS का कहना है कि Apollo Tyres का वैल्यूएशन अभी भी अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम है, जबकि पिछले चार सालों में इस स्टॉक का प्रदर्शन टायर सेक्टर के मुकाबले कमजोर रहा है।

हालांकि, ब्रोकरेज का मानना ​​है कि हालात बेहतर हो रहे हैं क्योंकि मैनेजमेंट भारत में अपने कारोबार को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है। इनमें ब्रांड बनाने के लिए निवेश शामिल है, जैसे कि भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी को स्पॉन्सर करना। UBS को कंपनी के यूरोप बिजनेस के भी बेहतर होने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि निवेशक कम समय में कमोडिटी की लागत के दबाव और हाल की चुनौतियों पर बहुत ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं, जबकि वे Apollo Tyres की कमाई में होने वाले बड़े सुधार की संभावना को नजरअंदाज़ कर रहे हैं, जो कमोडिटी की कीमतों का दबाव कम होने पर हो सकता है।

हालांकि Q2FY27 में और दबाव दिख सकता है, क्योंकि Q1FY27 में नेचुरल रबर की कीमतें तिमाही-दर-तिमाही 22% बढ़ी थीं, लेकिन UBS को इसके बाद कमाई में काफी सुधार की उम्मीद है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY28E में EBITDA सालाना आधार पर 21% बढ़ेगा, क्योंकि कमोडिटी का दबाव कम होगा और बिजनेस की स्थिति बेहतर होगी।हालांकि Q2FY27 में और दबाव दिख सकता है, क्योंकि Q1FY27 में नेचुरल रबर की कीमतें तिमाही-दर-तिमाही 22% बढ़ी थीं, लेकिन UBS को इसके बाद कमाई में काफी सुधार की उम्मीद है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY28E में EBITDA सालाना आधार पर 21% बढ़ेगा, क्योंकि कमोडिटी का दबाव कम होगा और बिजनेस की स्थिति बेहतर होगी। मांग मजबूत बनी हुई है और रणनीतिक पहल जोर पकड़ रही हैं, इसलिए UBS का मानना ​​है कि बाजार Apollo Tyres की मध्यम अवधि में कमाई में सुधार की क्षमता को कम आंक रहा है।

 

GIFT Nifty Indicator: क्रूड में नरमी से क्या सुधरेगा बाजार का सेंटिमेंट, गिफ्ट निफ्टी दे रहा मजबूत शुरुआत के संकेत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

महाराष्ट्र के अमरावती में दर्दनाक हादसा: अस्पताल के NICU वार्ड में भीषण आग, धुएं में दम घुटने से 3 मासूमों की मौत

महाराष्ट्र के अमरावती में दर्दनाक हादसा: अस्पताल के NICU वार्ड में भीषण आग, धुएं में दम घुटने से 3 मासूमों की मौत

fire in amravati hospital

महाराष्‍ट्र के अमरावती में जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में सोमवार तड़के भीषण आग लग गई। धुएं के कारण दम घुटने से तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई। इस घटना ने अस्पताल की अग्निशमन और सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ALSO READ: iPhone नहीं दिलाया तो पहाड़ पर चढ़ा बेटा, बचाने में गई माता-पिता की भी जान; रोंगटे खड़े कर देगी यह घटना

 

महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में सोमवार तड़के लगी भीषण आग में तीन नवजात बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। आग के धुएं से दम घुटने के कारण इन मासूम बच्चों की जान चली गई। अन्य छह बच्चों को इलाज के लिए एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ बच्चों के हाथ और पैर झुलस जाने की भी जानकारी सामने आई है।

 

प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, यह हादसा सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे हुआ। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनआईसीयू (NICU) में रखे एक वेंटिलेटर में अचानक विस्फोट हो गया, जिससे आग लग गई। यह आग तेजी से पूरे वार्ड में फैल गई और पूरा वार्ड धुएं से भर गया।

 

आग लगने की सूचना मिलते ही, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों ने वार्ड में भर्ती नवजात बच्चों को तुरंत बाहर निकालने का प्रयास किया। इस वार्ड में कुल 12 नवजात बच्चे भर्ती थे। कर्मचारियों की तत्परता से कई बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तीन मासूम बच्चों को बचाया नहीं जा सका।

 

आग से प्रभावित बच्चों और पास के वार्ड में भर्ती कुछ अन्य नवजात बच्चों को भी एहतियात के तौर पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

 

वार्ड में भर्ती थे 12 बच्चे

अमरावती जिला महिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर नवजात बच्चों के लिए तीन एनआईसीयू (NICU) वार्ड हैं। प्रत्येक वार्ड में 13 नवजात बच्चों का इलाज किया जा सकता है, जिससे कुल 39 बच्चों को भर्ती किया जा सकता है। जिस वार्ड में आग लगी, उस वार्ड में घटना के समय 12 बच्चे भर्ती थे।

 

खबर है कि यह नवजात गहन चिकित्सा विभाग लगभग एक साल पहले ही शुरू किया गया था। इस वजह से अस्पताल की अग्निशमन और आपातकालीन सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

 

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आग लगने के बाद अस्पताल की फायर फाइटिंग सिस्टम तुरंत सक्रिय क्यों नहीं हुआ? इसके अलावा, नवजात शिशु विभाग में तैनात कर्मचारियों ने आग बुझाने के लिए क्या कदम उठाए, यह सुनिश्चित करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, वेंटिलेटर में विस्फोट का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से विस्तृत स्पष्टीकरण का इंतजार है।