Nepal-China Border Floods: नेपाल-चीन बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 160 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

Nepal-China Border Floods Update: तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार (27 अगस्त) सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अचानक आई बाढ़ में करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए। कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तबाह हो गईं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया। उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

500 लोग लापता

नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं। जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए।

सामने आए खौफनाक वीडियो

एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया। जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया।

133 भारतीय लापता

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

भारत ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए।

X पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

टोल-फ्री नंबर जारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

19 पुल बह गए

‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए। हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

खोज और बचाव अभियान जारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

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नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित देश में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश करने और एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का देर शाम आभार व्यक्त किया।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर खुल सकते है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update: भारतीय बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे है। BSE के मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिन गिफ्ट निफ्टी में करीब 100 प्वाइंट की गिरावट आई। FIIs की करीब 2300 करोड़ की नेट बिकवाली आई। FIIs के नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट भी बढ़े। इधर jackson hole symposium से पहले अमेरिकी बाजार में भी  दबाव दिखा। डाओ जोंस की तीन दिन की तेजी पर  ब्रेक लगा।  डाओ 100 प्वाइंट से ज्यादा नीचे है। वहीं S&P और नैस्डैक में हल्की नरमी आई।  वहीं एशिया मे मिला-जुला कारोबार हो रहा। निक्केई में हल्की गिरावट, लेकिन कॉस्पी एक परसेंट से ज्यादा ऊपर है।

मुरझाए पौधे भी होंगे हरे-भरे! चावल के पानी का इस्तेमाल करते समय रखें इन 4 बातों का ध्यान

आजकल पौधों की देखभाल के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। चावल को धोने के बाद बचा हुआ पानी फेंकने के बजाय कई लोग इसे पौधों में डालते हैं। इसमें मौजूद स्टार्च और कुछ पोषक तत्वों की वजह से इसे पौधों के लिए फायदेमंद माना जाता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार चावल धोने का पानी पौधों में डाल दिया जाए। गमलों में जरूरत से ज्यादा पानी देने से मिट्टी लगातार गीली रह सकती है, जिससे पौधे की जड़ों पर असर पड़ सकता है। इसलिए चावल का पानी इस्तेमाल करने से पहले यह जानना जरूरी है कि इसे कब, कितनी मात्रा में और किस तरह पौधों में डालना सही रहेगा।

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1. कम मात्रा से शुरुआत

छोटे गमलों में चावल का पानी डालते समय ज्यादा सावधानी रखें, क्योंकि इनमें पानी जल्दी जमा हो सकता है। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद होना जरूरी है। हर पौधे की पानी की जरूरत अलग होती है। पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं तो कम मात्रा से शुरुआत करें और पौधे की मिट्टी, पत्तियों और ग्रोथ पर ध्यान रखें।

2. सादा पानी इस्तेमाल करें

पौधों में वही चावल का पानी डालें जिसमें सिर्फ सादे चावल धोए गए हों। यदि पानी में नमक, तेल, मसाला या साबुन जैसी कोई चीज मिली है, तो उसे गमले में डालने से बचें। ऐसी चीजें मिट्टी की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं और पौधे की जड़ों के लिए सही नहीं हैं।

3. ज्यादा पानी का पौधों पर असर

चावल का पानी बार-बार डालने से गमले की मिट्टी लगातार गीली रह सकती है। इससे जड़ों को सही मात्रा में हवा नहीं मिल पाती और जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर पौधे की पत्तियों पर भी दिख सकता है, जैसे पत्तियां पीली पड़ना या ग्रोथ धीमी होना। इसलिए इसे रोज या बहुत ज्यादा मात्रा में डालने से बचें।

4. फफूंद दिखे तो सावधान रहे

चावल के पानी में स्टार्च होता है, इसलिए इसे बार-बार मिट्टी में डालने से कुछ मामलों में मिट्टी की ऊपर फफूंद जैसी लेयर दिखाई दे सकती है। यदि ऐसी लेयर लगातार बढ़ रही है, तो कुछ समय के लिए चावल का पानी देना बंद कर दें और मिट्टी को सूखने का मौका दें।

चावल धोने का पानी पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे पौधों की खाद समझकर रोज डालना भी सही नहीं है. अगर इस्तेमाल करना है तो सादे चावल का साफ पानी लें, उसे ठंडा होने दें और कभी-कभार ही मिट्टी में डालें. सबसे जरूरी है कि गमले में पानी जमा न हो. पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय धूप, सही मिट्टी, पानी और जरूरत के हिसाब से खाद का भी ध्यान रखें.

5 things to know before buying the Honda Rebel 300

5 things to know before buying the Honda Rebel 300
Honda Rebel 300

The Honda Rebel 300 is the first model in the Rebel family to be manufactured locally and acts as the brand’s most accessible cruiser motorcycle here. Built around a bobber-style design with a teardrop fuel tank, round LED headlamp and short exhaust, it is sold exclusively through Honda BigWing dealerships. Here are answers to some of the most commonly asked questions about it.

What is the price of the Honda Rebel 300?

The Honda Rebel 300 is available in two variants. The Standard variant is priced at Rs 2.22 lakh and the E-Clutch variant at Rs 2.62 lakh – a Rs 40,000 premium for the automated clutch system. At Rs 2.22 lakh, the Standard variant undercuts the Royal Enfield Goan Classic 350 (Rs 2.25-2.28 lakh, ex-showroom, Chennai), one of the few other bobber-styled motorcycles currently on sale in India.

What engine does the Honda Rebel 300 use?

The Honda Rebel 300 is powered by a 286cc single-cylinder, liquid-cooled engine producing 30hp and 27.5Nm of torque, paired with a 6-speed gearbox. This is the same engine that powered the CB300R previously sold in our market.

What features does the Honda Rebel 300 have?

Both variants of the Rebel 300 get a circular TFT instrument display with Honda RoadSync connectivity and turn-by-turn navigation, full LED lighting and dual-channel ABS. The E-Clutch variant additionally allows the rider to configure the clutch system via the TFT display.

What is the Honda Rebel 300 E-Clutch and how does it work?

Honda’s E-Clutch is an electronically automated clutch system that uses actuators to operate the clutch automatically, allowing the rider to change gears without using the clutch lever. It does not make the Rebel 300 a fully automatic motorcycle, as the rider still selects gears manually using the gear lever. However, the system handles clutch engagement and disengagement on its own.

Importantly, the clutch lever is retained and can be used manually whenever the rider chooses. The system is designed to reduce rider fatigue in stop-and-go traffic while making the bike more accessible for those who find operating a clutch lever demanding.

What is the seat height and weight of the Honda Rebel 300?

The Honda Rebel 300 has a seat height of 690mm, making it one of the lowest motorcycles currently on sale in our market. This uld make it exceptionally accessible for a wide range of riders. The upright handlebar and forward-set footpegs complement the low t to create a relaxed, unhurried riding position. Kerb weight is 172kg and fuel tank capacity is 11 litres.

ITR Filing Deadline: 31 अगस्त की ITR डेडलाइन छूटने पर क्या होगा? फिर कैसे भर सकते हैं रिटर्न, कितना देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं की है, तो आपके पास सिर्फ कुछ दिन बचे हैं। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कुछ टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और बकाया टैक्स पर लगने वाले ब्याज से बच सकते हैं।

अगर 31 अगस्त तक रिटर्न नहीं भर पाए, तो भी मामला खत्म नहीं होगा। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी पड़ सकती है। साथ ही, कुछ मामलों में टैक्स लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी छूट सकता है।

31 अगस्त की डेडलाइन उन कुछ टैक्सपेयर्स पर लागू होती है, जिन्हें ITR-3, ITR-4, ITR-5 या ITR-7 दाखिल करना है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय है, लेकिन उनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।

31 अगस्त की डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

डेडलाइन निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि अब ITR नहीं भर सकते। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, अगर उससे पहले आपका असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।

देरी से ITR भरने पर लेट फीस भी लगती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा है, तो ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं ₹5 लाख तक की कुल आय वालों के लिए यह फीस ₹1,000 है।

अगर आपका टैक्स भी बकाया है, तो उस पर 1% प्रति महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए ब्याज लग सकता है। यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234A के तहत लगता है।

क्या देर से ITR भरने पर रिफंड मिलेगा?

हां, सिर्फ डेडलाइन चूकने से आपका टैक्स रिफंड खत्म नहीं हो जाता। अगर आपको रिफंड मिलना है, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करके उसे क्लेम कर सकते हैं।

लेकिन रिटर्न दाखिल करने के बाद उसे वेरिफाई करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन का समय दिया है। रिटर्न वेरिफाई होने के बाद ही रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नुकसान को आगे एडजस्ट करने में दिक्कत

डेडलाइन के बाद ITR भरने का एक बड़ा नुकसान हो सकता है। यह लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने से जुड़ा है। मान लीजिए आपको बिजनेस, शेयर बाजार या F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है। आप इस नुकसान को आने वाले वर्षों की कमाई से एडजस्ट करके टैक्स बचा सकते हैं। लेकिन अगर आपने ITR समय पर दाखिल नहीं किया, तो कुछ तरह के नुकसान को आगे ले जाने का फायदा नहीं मिल सकता।

यानी सिर्फ लेट फीस का मामला नहीं है। देर से ITR भरने पर भविष्य में टैक्स बचाने का मौका भी जा सकता है।

ITR में गलती हो गई तो क्या करें?

अगर ITR दाखिल करने के बाद आपको कोई गलती दिखती है या कोई जानकारी छूट गई है, तो आप धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आम तौर पर रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च 2027 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि, अगर उससे पहले असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो यह सुविधा खत्म हो सकती है। रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर पुरानी रिटर्न की जगह नई रिटर्न मानी जाती है। इसे भी दोबारा वेरिफाई करना पड़ता है।

लेकिन एक बात ध्यान रखें। देर से ITR भरने की वजह से जो टैक्स लाभ पहले ही खो चुके हैं, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से वे वापस नहीं मिलते। इसमें कुछ तरह के लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी शामिल है।

Pension Scheme: अटल पेंशन योजना या PM मानधन, किस स्कीम में ज्यादा फायदा? 

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Rashifal Today: किस मूलांक के लोगों का आज का दिन होगा अच्छा, किसे रहना होगा सावधान? जानें आपना राशिफल

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। 27 अगस्त 2026 का दिन आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने का संकेत दे रहा है। आज कई मूलांक वाले लोगों को अपने खर्च, बचत और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना होगा। किसी भी तरह का बड़ा आर्थिक फैसला लेने से पहले अपनी स्थिति को समझना जरूरी रहेगा। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लोगों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आपको पैसों के मामले में सावधानी बरतनी होगी। अचानक होने वाले खर्च से बचें और अपने बजट का पालन करें। भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लंबी अवधि की योजना पर ध्यान दें। सोच-समझकर लिए गए फैसले आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में आज का दिन महत्वपूर्ण रहेगा। बेवजह खर्च करने से बचें और अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान दें। अगर आप खर्चों पर नियंत्रण रखते हैं तो भविष्य के लिए अच्छी बचत कर सकते हैं। पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला जल्दबाजी में न लें।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आपकी सोच और योजना बनाने की क्षमता बेहतर रहेगी। नौकरी और निवेश से जुड़े नए अवसरों पर नजर रखें। बाजार या आर्थिक स्थिति में होने वाले बदलाव आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। बजट को जरूरत के अनुसार बदलने के लिए तैयार रहें और पूरी जानकारी के बाद फैसला लें।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। ऐसे में भावनाओं में आकर पैसा खर्च करने से बचें। जरूरी जरूरतों को प्राथमिकता दें और बजट में कुछ रकम अचानक आने वाले खर्चों के लिए रखें। सही योजना से आप आर्थिक दबाव को आसानी से संभाल पाएंगे।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति को व्यवस्थित करने के लिए दिन अच्छा है। अपने खर्चों पर नजर रखें और जरूरी व गैर-जरूरी खर्चों के बीच अंतर समझें। आज नए आर्थिक अवसरों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी निवेश या खर्च से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी होगा।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में व्यवस्थित तरीके से काम करना जरूरी है। अपने खर्चों की समीक्षा करें और देखें कि कहां बचत की जा सकती है। गैर-जरूरी खर्च कम करने से आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है। छोटी-छोटी बचत आगे चलकर आपके लिए बड़ा फायदा दे सकती है।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिरता पर खास ध्यान देना होगा। महंगी या गैर-जरूरी चीजों पर पैसा खर्च करने से बचें। कर्ज और निवेश से जुड़े फैसले अपनी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही लें। मजबूत वित्तीय आधार बनाने के लिए आज सावधानी से कदम उठाना बेहतर रहेगा।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में आज का दिन सकारात्मक रह सकता है। लंबी अवधि की योजनाओं पर ध्यान दें और अपने बजट व निवेश की समीक्षा करें। अचानक होने वाले खर्चों से बचना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर फैसला लेने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों से जुड़े नए अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि, किसी भी आकर्षक मौके को देखकर तुरंत फैसला न लें। अपने बजट और निवेश योजनाओं की समीक्षा करने का यह सही समय है। भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए सोच-समझकर बदलाव करना आपके लिए लाभदायक हो सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बाढ़ से 160 मौतें, 844 लापता:33 शव 150km दूर मिले; भूकंप नहीं, पहाड़ खिसकने से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में 160 लोगों की मौत हो गई। नेपाल में 157 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई, जबकि 844 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर आ गया था। तेज बहाव में घर, गाड़ियां और सरकारी ढांचे बह गए। शुरुआत में माना जा रहा था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक चीन की तरफ ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा था। इसी लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। इसके बाद ल्हेंदे नदी से पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा, जिससे बाढ़ आई। बहाव इतना तेज था कि लोगों और मलबे को करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बहा ले गया, जहां अब तक 33 शव बरामद किए गए हैं। राहतकर्मी खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल में लापता लोगों में 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं, जिनमें 133 भारतीय और 37 NRI भी हैं। भास्कर नॉलेजः कैसे आई बाढ़, कितना असर और भारत पर इम्पैक्ट बाढ़ की वजह को लेकर 3 आशंकाएं 1. लैंडस्लाइड से नदी का रास्ता रुका: यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जांच में पता चला कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर चीन की ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा। इससे नदी का बहाव रुका और पानी-मलबा जमा होने के बाद अचानक तेज बहाव आया। इस घटना से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितनी ऊर्जा पैदा हुई थी। ल्हेंदे का पानी भोटेकोशी नदी में पहुंच गया, जिससे बाढ़ आ गई। 2. भूकंप से ग्लेशियल फटने की आशंका: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल आउटबर्स्ट हुआ होगा। 3. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट: एक संभावना यह भी है कि बर्फ और मलबे से नदी का रास्ता रुकने के बाद अस्थायी झील बनी और उसका पानी अचानक बाहर निकला। विशेषज्ञ अभी यह जांच रहे हैं कि क्या इस घटना में ग्लेशियल झील भी फूटी थी। बारिश को फिलहाल वजह नहीं माना जा रहा है, क्योंकि नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विभाग के मुताबिक बाढ़ से पहले रसुवा में भारी बारिश नहीं हुई थी। नदी किनारे रहने वालों को खतरा बरकरार नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन की ओर नदी के रास्ते में बनी झील अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है। लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। नेपाल में पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। नेपाल-चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था। भारत में कहां-कितना असर होगा भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है। खबर से जुड़े पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

छोड़ना मत… दिल्ली में बड़ा ड्रेन हादसा; 15 फुट गहरे नाले में गिरा किशोर- VIDEO

दिल्ली के सरिता विहार में ड्रेन की टूटी जाली से फिसलकर एक किशोर 15 फुट गहरे नाले में समा गया। 

Nepal Flash Flood : बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही, खौफनाक Photos देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे

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तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 100 लोगों के मौत हो चुकी है। बाढ़ ने खासतौर पर भोटे कोशी नदी के आसपास के इलाकों को प्रभावित किया है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 1000 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। फोटो में देखें बाढ़ के बाद की तबाही के फोटोज- 

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तिब्बत की तरफ से आया पानी बना आफत

बताया गया है कि तिब्बत की ओर से बड़ी मात्रा में पानी आने के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव ने घरों, सड़कों और बिजली से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को नुकसान पहुंचाया है।

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384 लोग लापता, 133 भारतीय नागरिक शामिल

नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 384 लोग लापता हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय बताए गए हैं।

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परिजनों की बढ़ी चिंता

133 भारतीयों के लापता होने की खबर से उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। परिजन अपने रिश्तेदारों की सुरक्षित होने की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

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नेपाल सुरक्षा बलों के जवान भी लापता

बाढ़ का असर नेपाल के सुरक्षा बलों पर भी पड़ा है। रसुवा जिले में नेपाल पुलिस के 26 जवान लापता बताए गए हैं। वहीं सशस्त्र पुलिस बल के 7 जवान भी लापता हैं। नुवाकोट और धादिंग जिलों से पुलिस ने 8 शव बरामद किए हैं।

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सड़क और हाईवे बुरी तरह क्षतिग्रस्त

बाढ़ ने उत्तरी नेपाल की कई सड़कों और राजमार्गों को नुकसान पहुंचाया है। कुछ प्रमुख मार्ग बंद होने से प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालना और राहत-बचाव टीमों का पहुंचना मुश्किल हो गया है।

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हाइड्रोपावर और बिजली व्यवस्था को नुकसान

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के मुताबिक बाढ़ से 6 प्रमुख जलविद्युत और ट्रांसमिशन सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3ए, त्रिशूली-3बी हब 220 केवी सबस्टेशन, त्रिशूली हाइड्रोपावर स्टेशन और देवीघाट हाइड्रोपावर स्टेशन शामिल हैं।

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बाढ़ का खौफनाक मंजर कैमरे में कैद

नेपाल पुलिस और अन्य लोगों द्वारा साझा किए गए वीडियो में पहाड़ी इलाकों से तेज रफ्तार में मटमैला पानी बहता हुआ दिखाई दे रहा है। पानी ने घरों, सड़कों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया है। पुलिस ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

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सेना के हेलीकॉप्टर राहत-बचाव में जुटे

नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर और आपदा प्रतिक्रिया दल भेजे हैं। अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किन इलाकों में तत्काल मदद की जरूरत है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की आपात बैठक भी बुलाई है।

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मानसून के बीच जारी है राहत-बचाव अभियान

यह आपदा नेपाल के मानसून सीजन के दौरान हुई है, जब भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।

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फिलहाल राहतकर्मी दुर्गम और कटे हुए इलाकों तक पहुंचने, लापता लोगों की तलाश करने और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने में जुटे हैं। परिवार अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की खबर का इंतजार कर रहे हैं।