यमन के हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से नई बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही ईरान में डिजाइन हुई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं, जिसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर है। अगर हूती ऐसा हथियार बनाने में सफल होते हैं, तो वे सऊदी अरब के अलावा इजराइल को भी ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बना सकते हैं। हथियार बनाने के लिए जरूरी सामान जुटा रहे हूती रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अधिकारियों ने जुलाई में चीन से भेजे गए दो संदिग्ध सामानों की खेप पकड़ी थी। इनमें मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे मिले। पकड़ी गई खेप चीन से भेजी गई थी। इसे यमन के होदेइदा बंदरगाह पहुंचाया जाना था। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईरान हथियारों की सप्लाई के लिए करता रहा है। पकड़ी गई खेप में क्या-क्या मिला? रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्था के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, हूती ईरान में डिजाइन की गई खास तरह की मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन पुर्जों का इस्तेमाल आम नागरिक कामों में करना मुश्किल है। हूतियों की हथियार बनाने की क्षमता पहले से ज्यादा हूती करीब दो दशक पहले यमन में एक विद्रोही संगठन के तौर पर उभरे थे। शुरुआत में उनके पास यमन की सेना से हासिल सोवियत दौर के और उत्तर कोरिया में बने हथियार थे। समय के साथ उन्हें ज्यादा आधुनिक हथियार और तकनीक मिलने लगी। ईरान पर निर्भरता घटाने की कोशिश क्यों? ईरान लंबे समय से हूतियों को हथियार बनाने की तकनीक, डिजाइन और जरूरी पुर्जे देता रहा है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, अब हूती चीन समेत दूसरे देशों से भी हथियार बनाने का सामान जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू ने कहा कि हथियार बनाने के लिए कई जगहों से सामान मिलना किसी संगठन के लिए फायदेमंद होता है। उनके मुताबिक, ईरान पर रोक के बीच हूती सामान जुटाने के दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हूती अभी मिसाइल के लिए जरूरी जटिल सिस्टम के लिए ईरान पर निर्भर हैं। वे दूसरे देशों से मिले पुर्जों को जोड़कर कुछ हथियार बना सकते हैं, लेकिन आधुनिक हथियारों की पूरी तकनीक खुद विकसित नहीं कर सकते। चीन के लिए कूटनीतिक चुनौती बढ़ सकती है चीन ईरान और सऊदी अरब, दोनों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। 2023 में चीन ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में भी भूमिका निभाई थी। चीन ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हूतियों के हमलों की निंदा की है और संघर्ष कम करने की अपील की है। अब अगर चीन से आए पुर्जों का इस्तेमाल हूती मिसाइल बनाने में होने के दावे की पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब और चीन के रिश्तों पर दबाव बढ़ सकता है। चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है। मध्य पूर्व के विशेषज्ञ क्रिस्टियन उलरिचसन के मुताबिक, सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और एयरपोर्ट पर हमलों के बाद चीन पर इस मुद्दे को लेकर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं होता कि चीन की सरकार ने जानबूझकर हूतियों को मिसाइल बनाने के लिए सामान भेजा था। ————————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज में बारूदी सुरंग से टकराकर जहाज डूबा: जंग शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराकर बुधवार सुबह एक मालवाहक जहाज डूब गया। जहाज में 2500 कंटेनर थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने यह जानकारी दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
जर्मनी के बोखुम शहर में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से 3 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। मृतकों में 25 और 27 साल की दो महिलाएं और 26 साल का एक युवक शामिल है। पुलिस ने हत्या के शक में 41 साल के एक रोमानियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। घटना मंगलवार तड़के हुई थी। आग लगने के बाद दमकलकर्मियों को दूसरी मंजिल के एक फ्लैट में तीनों के शव मिले। हादसे में 5 अन्य लोग धुएं की चपेट में आ गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।मृतकों की पहचान और भारत में उनके गृह राज्यों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। सीढ़ियों से फैली आग, लोग नीचे नहीं उतर पाए आग मंगलवार सुबह करीब 4:15 बजे बोखुम के होफ्स्टेड इलाके की एक रिहायशी इमारत में लगी थी। आग इमारत की सीढ़ियों से ऊपर तक फैल गई, जिससे ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया। दमकलकर्मियों ने बचाव के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। जर्मन न्यूज एजेंसी DPA के मुताबिक, दो लोगों को हाइड्रोलिक सीढ़ी और दो को पोर्टेबल सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया। एक अन्य व्यक्ति को एयर कुशन की मदद से बचाया गया। तकनीकी खराबी से आग लगने की आशंका खारिज जांचकर्ताओं ने आग लगने की वजह तकनीकी खराबी होने की आशंका खारिज कर दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि आग जानबूझकर लगाई गई थी या दुर्घटनावश लगी। पुलिस आग लगने की वजह, तीनों की मौत के हालात और गिरफ्तार व्यक्ति की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। खबर अपडेट हो रही है…
एक रोबोट ने ऐसा गंदा काम कर दिया है की उसे गिरफ्तार करना पड़ा गया। रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक इंसानों की मदद के लिए बनाई गई हैं। लेकिन अब एक रोबोट को लेकर जो खबर सामने आ रही है वो हैरान करनी वाली तो है ही और आपको ये सोचने पर मजबूर भी कर सकती है कि एक रोबोट आपकी मदद करने के अलावा आपके लिए और आपके परिवार के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है अगर वो आपके कंट्रोल से बाहर हो गया तो।
ये मामला जर्मनी के कोलोन शहर का है जहां एक रोबोट पर 16 साल की लड़की को गलत तरीके से छूने और आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगा गया है। रोबोट की हरकत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और रोबोट को जब्त कर लिया है और उसे नियंत्रित करने वाले दो युवकों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोनों युवकों पर फिलहाल कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन उन्हें संदिग्ध माना जा रहा है।
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर रोबोट की इस हरकतो को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि रोबोट को रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा था या उसके प्रोग्रामिंग में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी. इन सब सवालों के जवाब पाने के लिए पुलिस जांच में जुट गई है।
लड़की के पास कैसे पहुंचा रोबोट, फिर क्या हुआ?
पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह घटना 10 अक्टूबर की देर रात कोलोन में एक फास्ट-फूड रेस्तरां के बाहर हुई। जहां 16 साल की एक लड़की अपनी दो सहेलियों के साथ वहां मौजूद थी। इसी दौरान वहां करीब 120 सेंटीमीटर यानी 1.2 मीटर लंबा लाल और सुनहरे रंग का एक रोबोट उस 16 साल की लड़की के पास पहुंचा। रोबोट ने लड़की के पास जाकर उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ और उसके साथ आपत्तिजनक हरकतें कीं इस घटना के दौरान रोबोट को कंट्रोल कर रहे दो युवकों पर वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर इस पूरी घचना को लाइव दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।
रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था या रोबोट ने ये हरकत खुद कर डाली। पुलिस का भी मुख्य सवाल यही है कि रोबोट की गतिविधियों को कौन नियंत्रित कर रहा था। कोलोन पुलिस के मुताबिक, रोबोट का मालिक 16 साल का है, जबकि उसके साथ मौजूद दूसरा युवक 19 साल का बताया जा रहा है। दोनों युवकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। फिलहाल उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए गए हैं।
पुलिस ने रोबोट को जब्त कर लिया है, लेकिन रोबोट को जब्त करना इस बात का सबूत नहीं है कि उसने खुद फैसले लेकर ये हरकतें कीं। जांच पूरी होने के बाद ही ये साफ होगा कि घटना के दौरान तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया गया था और इसमें किसकी क्या भूमिका थी।
जब सामने आई रोबोट की तस्वीर
रोबोट की तस्वीर को भी पुलिस ने साझा किया जिसमें देखा जा सकता है कि रोबोट सफेद टैंक टॉप, काले ट्रैक पैंट, चश्मा और गले में सोने जैसी चेन पहने हुई है। रोबोट की लांबई करीब 120 सेंटीमीटर बताई जा रही है।
पुलिस ने बताया कि घटना के बाद रोबोट एक कार की डिक्की में मिला था। अधिकारियों ने उसे वहीं से जब्त किया। इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए, ताकि घटना से संबंधित वीडियो और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच करने में मदद मिल सके।
क्या रोबोट खुद ले सकता है ऐसे फैसले?
इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या रोबोट खुद ऐसी हरकत करने के बारे में खुद से फैसला ले सकता है? क्या मशीन अपने आप ऐसी हरकत कर सकती है या इसके पीछे किसी व्यक्ति का कंट्रोल हो सकता है?
आज कई तरह के रोबोट बनाए जा रहे हैं। कुछ रोबोट सेंसर और सॉफ्टवेयर की मदद से अपने आसपास की चीजों को पहचानकर काम कर सकते हैं। वहीं, कुछ को रिमोट से नियंत्रित किया जाता है और कुछ में पहले से तय गतिविधियां प्रोग्राम की जाती हैं। आज जमाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों से लैस रोबोट्स के इस्तेमाल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में रोबोट द्वारा ऐसी हरकत ने दुनिया डरा दिया है। हालांकि, किसी रोबोट की क्षमताएं उसके डिजाइन, सॉफ्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम पर निर्भर करती हैं। इसलिए बिना जांच के अभी से ये मान लेना ठीक नहीं होगा कि रोबोट ने अपनी मर्जी से ऐसी हरकत को अंजाम दिया।
रोबोट की इस हरकत पर चर्चा के दौरान सवाल तकनीकी खराबी का उठ रहा है। कई बार किसी मशीन या रोबोट में खराबी आने से वो उस तरह से काम नहीं करता है जिस तरह से उसको प्रोग्राम किया गया होता है। इस रोबोट में खराबी थी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है इस पर भी पुलिस जांच कर रही है।
क्या एक रोबोट के खिलाफ अपराध का मामला बन सकता है? पुलिस ने जांच के लिए रोबोट को जब्त ज़रूर किया है, लेकिन उसे आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि घटना कैसे हुई और इसे नियंत्रित करने वाले लोगों की इसमें क्या भूमिका थी।
फिलहाल दोनों युवक जांच के दायरे में हैं और उन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसलिए इसे रोबोट द्वारा किया गया अपराध कहना गलत होगा। यह मामला सार्वजनिक स्थानों पर AI और रोबोट्स के सुरक्षित उपयोग और उनकी जवाबदेही तय करने की ज़रूरत को रेखांकित करता है।
रोबोट की इस हरकत की वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है । वायरल वीडियो में एक रोबोट लड़की की तरफ बढ़ता है, एक महिला को धक्का देता और दूसरों को गले लगाता दिख रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर इसका मज़ाक उड़ाने और वीडियो शेयर करने वालों को चेतावनी दी है, क्योंकि इससे पीड़ितों पर बुरा असर पड़ सकता है।
Delhi industrial policy: दिल्ली सरकार ने देश की राजधानी को इंडस्ट्रियल हब बनाने की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दी गई। इस योजना का मकसद अगले 10 सालों में राष्ट्रीय राजधानी को साफ, हाई-वैल्यू उद्योग, ज्ञान और प्राद्योगिकी आधारित बिजनेस को बढ़ावा देना है।
इसमें वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक, पांच सालों में मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इसका मकसद नए उद्योगों को बढ़ावा देना और रोजगार के ज्यादा मौके बनाना है। CM गुप्ता ने कहा कि दिल्ली इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 का मकसद राजधानी को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, डेटा सेंटर्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, हेल्थकेयर सर्विसेज़, अर्बन लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकॉनमी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक बड़ा हब बनाना है।
यह योजना साफ-सुथरी, हाई-वैल्यू इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देगी, नया निवेश लाएगी, मौजूदा उद्योगों को आधुनिक बनाएगी, महिला उद्यमियों को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि 10 प्राथमिक क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इसमें पूंजी निवेश, ऑफिस या वर्कस्पेस रेंटल, नई रिक्रूटमेंट, रिसर्च, सर्टिफिकेशन, टेक्नोलॉजिकल मॉडर्नाइजेशन, एनर्जी एफिशिएंसी और स्किल डेवलपमेंट शामिल हैं। यह नीति स्रोत के दोबारा इस्तेमाल और वेस्ट कम करने को भी बढ़ावा देगी।
दिल्ली कैबिनेट बैठक में इन क्षेत्रों को प्रोत्साहन पर जोर
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव, जो 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) होगा, तीन साल के लिए मिलेगा। ऑफिस रेंटल में 40 परसेंट की मदद, जो 2 करोड़ रुपये तक होगी, तीन साल के लिए भी दी जाएगी। बैंडविड्थ और क्लाउड सर्विसेज दो साल के लिए 25% मदद के लिए क्वालिफाई करेंगी, जिसकी सालाना सीमा 10 लाख रुपये होगी। हर नई नियुक्ति पर 40,000 से 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर 25% प्रोत्साहन, 50 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 60 करोड़ रुपये), पांच साल के लिए उपलब्ध होगा। 40% की ऑफिस किराया सहायता, 2 करोड़ रुपये तक, दो साल के लिए प्रदान की जाएगी। प्रत्येक नया कर्मचारी 1 लाख रुपये से 1.2 लाख रुपये के प्रोत्साहन के लिए पात्र होगा। यह नीति प्रमाणन के लिए 50% सहायता, 25 लाख रुपये तक, अनुसंधान और विकास के लिए 30% प्रोत्साहन, 5 करोड़ रुपये तक; और कार्यक्षेत्र विकसित करने वाली इकाइयों के लिए 25% सहायता, 10 करोड़ रुपये तक प्रदान करती है।
पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत प्रोत्साहन, 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) उपलब्ध होगा। यह नीति कम पानी की खपत वाले शीतलन प्रणालियों के लिए 30% सहायता प्रदान करती है, और रेगुलेटरी कम्प्लायंस की तैयारी के लिए 50% मदद, 25 लाख रुपये तक।
पूंजीगत निवेश पर 25% इंसेंटिव, 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) मिलेगा। शोध कार्य 50% ग्रांट के लिए क्वालिफाई करेंगी, जिसकी सीमा 50 लाख रुपये होगी। पेटेंट से जुड़ी मदद में लागत का 25% कवर होगा, जो हर पेटेंट के लिए 5 लाख रुपये तक होगा, अधिक से अधिक चार पेटेंट के लिए। लैबोरेटरी एक्रेडिटेशन से जुड़े खर्चों के लिए 25% प्रोत्साहन, 25 लाख रुपये तक, भी दिया जाएगा।
कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25 % इंसेंटिव, जो आम तौर पर 10 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) तक होगा, मिलेगा। 1,000 या उससे अधिक बेड वाले हॉस्पिटल 100 करोड़ रुपये तक की मदद के लिए योग्य होंगे। वेलनेस एक्टिविटीज को 5% प्रोत्साहन मिलेगा, जो ज्यादा से ज्यादा 1 करोड़ रुपये तक होगा, जबकि NABH, NABL और JCI जैसी संस्थाओं से प्रमाणन पर 50% मदद मिलेगी, जो ज्यादा से ज्यादा 20 लाख रुपये होगी। विशेषज्ञ डॉक्टर की हर नई अपॉइंटमेंट पर 50,000 रुपये से 60,000 रुपये तक का इंसेंटिव मिलेगा।
नई वेयरहाउसिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज्यादा से ज्यादा 10 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) तक होगा, जबकि मौजूदा यूनिट्स को 25% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 1 करोड़ रुपये होगी। कोल्ड-चेन फैसिलिटीज को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो अधिकतम 2 करोड़ रुपये होगा। लॉजिस्टिक्स में टेक्नोलॉजी अपनाने पर 40% मदद मिलेगी, जो ज्यादा से ज्यादा 50 लाख रुपये होगी, जबकि ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल पर 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो अधिक से अधिक 2 करोड़ रुपये होगा।
रीसाइक्लिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज्यदा से ज्यादा 1 करोड़ रुपये होगा। रोज 10 टन से अधिक ऑर्गेनिक वेस्ट प्रोसेस करने वाली इकाइयों को 25% मदद मिलेगी, जो ज़्यादा से ज़्यादा 1 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 1.2 करोड़ रुपये) तक होगी। ई-वेस्ट मैनेजमेंट को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज़्यादा से ज़्यादा 2 करोड़ रुपये होगा, जबकि एनवायरनमेंटल सर्टिफिकेशन के लिए 50% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 10 लाख रुपये होगी। इन नियमों का मकसद वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर बनाना, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना और रिसोर्स के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव, जो अधिकतम 5 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 6 करोड़ रुपये) तक होगा, मिलेगा। रेंटल में 20% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 50 रुपये होगी। सालाना 2 लाख रुपये, दो साल तक दिए जाएंगे। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए छह महीने तक अतिरिक्त मदद भी मिलेगी।
कौशल विकास ढांचे के लिए 25% इंसेंटिव, 2 करोड़ रुपये तक, मिलेगा, जिसके लिए कम से कम 50 लाख रुपये का निवेश करना होगा। सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए भी 25% मदद मिलेगी, जिसकी लिमिट 2 करोड़ रुपये होगी, जिसके लिए कम से कम 75 लाख रुपये का निवेश करना होगा।
तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए 25% प्रोत्साहन, 5 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 7 करोड़ रुपये) मिलेगा। एनर्जी एफिशिएंसी सुधारने और रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए 25% इंसेंटिव, जिसकी लिमिट 50 लाख रुपये होगी, भी दिया जाएगा। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए छह महीने तक एक्स्ट्रा मदद मिलेगी। इन नियमों का मकसद MSMEs को मॉडर्न टेक्नोलॉजी अपनाने, प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने और एनर्जी बचाने में मदद करना है।
दीपावली से पहले चकाचक होंगी कानपुर की 500 सड़कें, 50 लाख की आबादी को मिलेगा गड्ढों से छुटकारा
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। उनके मुताबिक, सेना को इस बदलाव की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कनेक्टिविटी में रुकावट की पुष्टि की है। खास बात यह है कि मस्क यही स्टारलिंक सर्विस भारत में शुरू करना चाहते हैं। इसे लेकर हाल ही में उन्होंने भारत सरकार पर भेदभाव के आरोप लगाए थे। 160 की रफ्तार से तेज चलते ही इंटनेट धीमा जेलेंस्की के सलाहकार सेरही के मुताबिक अब 160 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलने पर स्टारलिंक का इंटरनेट धीमा हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यह फैसला मौजूदा राजनीतिक हालात से जुड़ा हो सकता है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। BBC ने यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि इंटरनेट की रफ्तार धीमी होने से सेना के सामान पहुंचाने, ड्रोन चलाने और हमले से जुड़े मिशनों में परेशानी आ रही है। स्पेसएक्स ने इस मामले पर अब तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। रूस के ड्रोन रोकने में भी काम आता है स्टारलिंक स्टारलिंक अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट देता है। यूक्रेनी सेना इसका इस्तेमाल सैनिकों के बीच संपर्क बनाए रखने और दूर बैठे ड्रोन चलाने के लिए करती है। इन ड्रोन से रूसी ठिकानों पर हमले किए जाते हैं। सलाहकार सेरही के मुताबिक, स्टारलिंक की मदद से ऐसे ड्रोन भी चलाए जाते हैं, जो रूस के नए जेट इंजन वाले ड्रोन को हवा में रोकने की कोशिश करते हैं। इससे पहले मस्क ने फरवरी में रूसी सेना के लिए स्टारलिंक बंद कर दिया था। इससे रूस को यूक्रेन में लड़ाई लड़ने में परेशानी हुई और उसके कमांडरों और सैनिकों के बीच तालमेल बिगड़ गया था। रूस के हमलों से 6 लाख लोग बिना बिजली के रहे राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक, रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन में कम से कम 6 लाख लोग बिजली के बिना रहने पर मजबूर हैं। रूस ने राजधानी कीव, उसके आसपास के इलाकों में बिजली से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, कीव में तीन लोगों की मौत हुई। यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में 39 मिसाइलें और 128 ड्रोन दागे। इनमें से चार मिसाइलों और 115 ड्रोन को मार गिराया गया। वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में रूस के अलग-अलग इलाकों में यूक्रेन के 902 ड्रोन मार गिराए गए। इनमें मॉस्को और क्रीमिया के ऊपर गिराए गए ड्रोन भी शामिल हैं। क्रीमिया पर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था। ट्रम्प के सीजफायर के दावे के बाद भी हमले जारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को दावा किया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। यह रोक तुरंत लागू होनी थी, लेकिन हमले जारी रहे। जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों और दूसरे ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोक देगा, अगर रूस भी ऐसा करता है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि ट्रम्प प्रशासन ने सीजफायर पर सहमति नहीं बनने पर यूक्रेन को खुफिया जानकारी देना बंद करने की धमकी दी थी। ट्रम्प ने मंगलवार को इस आरोप से इनकार किया। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यूक्रेन सीजफायर से राहत पाने का हकदार नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि इस दौरान यूरोपीय देश यूक्रेन को और हथियार दे सकते हैं। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। फिलहाल यूक्रेन का करीब 20% इलाका रूस के कब्जे में है। भारत में भी स्टारलिंक शुरू करना चाहते हैं मस्क यूक्रेन में स्टारलिंक की स्पीड घटाने की खबर ऐसे समय आई है, जब मस्क भारत में भी यही इंटरनेट सर्विस शुरू करना चाहते हैं। स्टारलिंक की खासियत यह है कि यह जमीन पर बिछी इंटरनेट केबल या मोबाइल टावर के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से इंटरनेट देता है। इससे उन गांवों, पहाड़ी इलाकों और दूरदराज की जगहों पर इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड की सुविधा नहीं है। मस्क भारत में सस्ते प्लान लाने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि नई कंपनी आने से इंटरनेट कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ेगा और इसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा। भारत में स्टारलिंक का मुकाबला रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों से होगा। ये कंपनियां पहले से कम कीमत पर इंटरनेट सेवाएं दे रही हैं। इसलिए भारत में स्टारलिंक की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह ग्राहकों को किस कीमत पर इंटरनेट देती है। भारत में सर्विस शुरू करने के लिए अभी मंजूरियां जरूरी भारत सरकार ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए जियो सैटकॉम, एयरटेल की सहयोगी कंपनी यूटेलसेट वनवेब और स्टारलिंक को लाइसेंस दिए हैं। लेकिन सिर्फ लाइसेंस मिलने से सर्विस शुरू नहीं की जा सकती। इसके लिए सुरक्षा से जुड़ी मंजूरियां और सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट देने में इस्तेमाल होने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी की कीमत तय होना भी जरूरी है। भारत में स्टारलिंक की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके प्लान कितने सस्ते होते हैं, नेटवर्क कितना अच्छा चलता है और कंपनी को कब तक सभी जरूरी मंजूरियां मिलती हैं। अंडमान और मणिपुर में मिले थे स्टारलिंक डिवाइस 2024 में भारतीय एजेंसियों को अंडमान-निकोबार में ड्रग्स तस्करी की जांच के दौरान और मणिपुर में सेना के एक ऑपरेशन के समय स्टारलिंक डिवाइस मिले थे। उस समय मस्क ने कहा था कि स्टारलिंक की सर्विस भारत में कभी चालू ही नहीं हुई। उन्होंने दावा किया था कि मिले हुए उपकरण स्टारलिंक के सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। स्टारलिंक के उपकरणों में एक डिश, वाई-फाई राउटर, बिजली की केबल और डिश को लगाने के लिए स्टैंड होता है। इंटरनेट चलाने के लिए डिश को ऐसी जगह रखा जाता है, जहां से आसमान साफ दिखाई दे। कंपनी का मोबाइल ऐप इसे सेट करने और नेटवर्क की स्थिति देखने में मदद करता है। यूक्रेन में स्पीड रोकने से स्टारलिंक पर सवाल उठे यूक्रेन में स्टारलिंक की स्पीड पर लगी रोक से यह सवाल उठा है कि जब सेना किसी निजी कंपनी की इंटरनेट सर्विस पर निर्भर हो, तो कंपनी के तकनीकी फैसलों का उसके काम पर कितना असर पड़ सकता है। भारत में स्टारलिंक का इस्तेमाल मुख्य रूप से इंटरनेट की सुविधा से वंचित इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए हो सकता है। इसलिए यूक्रेन के मामले का यह मतलब नहीं है कि भारत में भी ऐसी ही स्थिति बनेगी। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि सैटेलाइट इंटरनेट देने वाली कंपनियों की तकनीक पर निर्भरता बढ़ने के साथ उनके फैसलों का महत्व भी बढ़ जाता है।
Kashi Vishwanath Temple Gold Controversy: अयोध्या स्थित राम मंदिर से चंदा चोरी के बाद अब वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोप ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में अधिवक्ता नित्यानंद राय ने शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि मंदिर के शिखर पर लगे सोने के कई कलश गायब हो गए हैं। उनका आरोप है कि यह मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है और कथित तौर पर हर दूसरे दिन सोना निकाला जा रहा है। अधिवक्ता ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने उनकी शिकायत पर संज्ञान लिया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
29 सितंबर को की थी PMO से शिकायत
वाराणसी के तेलियाबाग निवासी अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि 29 सितंबर को उन्होंने मंडल आयुक्त समेत प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र भेज कर शिकायत की थी। पत्र में उन्होंने बताया कि मंदिर के उत्तरी द्वार के ठीक ऊपर दो स्थानों पर स्वर्ण कलश गायब है। उसकी जगह वहां पर कुछ पेंट किया गया है। नित्यानंद राय ने बताया कि यह तकरीबन 2 से लेकर 3 फीट की चौड़ाई का था। पहले भी मंदिर से सोना चांदी की चोरी हो चुकी है, इसलिए इस प्रकरण की गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता है। ऐसा पैच करीब दो से तीन जगहों पर है।
श्वेत पत्र जारी करने और वेबसाइट पर जानकारी देने की मांग
अधिवक्ता नित्यानंद राय ने मांग की है कि मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि मंदिर में सोना कब से गायब हो रहा है और अब तक कितनी मात्रा में सोना या चांदी गायब हुआ है, इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए।
उन्होंने मंदिर प्रशासन से इस मामले में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। साथ ही, मंदिर के अंदर और शिखर पर लगे सोने-चांदी का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की बात कही है। नित्यानंद राय चाहते हैं कि यह जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि लोग इसे आसानी से देख सकें। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मंदिर प्रशासन की ओर से अब तक जो जवाब दिया गया है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं।
ओलावृष्टि में टूटा था कलश का हिस्सा, मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रखा
दूसरी ओर, वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने मंदिर से सोना गायब होने के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने इन खबरों को भ्रामक और बेबुनियाद बताया। मंडलायुक्त के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले ओलावृष्टि के दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर बने गुंबद या कलश का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि टूटे हुए हिस्से को मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रख लिया है।
IIT मद्रास की तकनीकी टीम करेगी सर्वे
मंडलाआयुक्त ने बताया कि गिरा हुआ कलश जिसे विश्वनाथ धाम में सुरक्षित रखा गया है, पुनर्स्थापना के लिए IIT मद्रास से सर्वे कराया गया है। उसकी मदद से जल्द ही फिर से कलश स्थापित कराया जाएगा। बिना किसी तकनीकी परीक्षण के कलश को दोबारा लगाना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है। इसके लिए IIT मद्रास से संपर्क किया गया है और वहां की टीम प्राथमिक सर्वे का काम कर चुकी है।

अभिनेत्री बरखा सिंह महिलाओं के फुटवियर ब्रांड ‘नुवा’ से चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के रूप में जुड़ी हैं। बरखा सिंह इस भूमिका में वह ब्रांड की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनि जैन के साथ मिलकर उत्पादों के डिजाइन, ब्रांड की पहचान और रचनात्मक प्रस्तुति को विकसित करने में योगदान देंगी।
‘मसाबा मसाबा’, ‘क्रिमिनल जस्टिस’, ‘इंजीनियरिंग गर्ल्स’ और ‘प्लीज फाइंड अटैच्ड’ जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुकीं बरखा सिंह अब फैशन के प्रति अपने जुनून को कारोबार का रूप दे रही हैं। वह वैश्विक फैशन रुझानों को भारतीय महिलाओं की पसंद और जरूरतों के अनुरूप पेश करने पर ध्यान देंगी।
Also Read : महिलाएं सदियों से साहसी और संघर्षशील रही हैं : कुब्रा सैत
वर्ष 2026 में स्थापित ‘नुवा’ महिलाओं के जूतों और सैंडल का ब्रांड है, जो मुख्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से अपने उत्पाद बेचता है। ब्रांड का उद्देश्य स्टाइल और आराम का संयोजन पेश करना है। इसके उत्पादों में ‘स्टेडी-फॉर्म’ फुटबेड और ‘स्टाइल-स्विच’ तकनीक शामिल हैं। इस तकनीक के तहत हील्स बदलने की सुविधा के लिए पेटेंट आवेदन किया गया है।
‘नुवा’ से जुड़ने पर बरखा सिंह ने कहा कि किसी ब्रांड को शुरुआती दौर से विकसित करने और उसकी रचनात्मक पहचान बनाने का अवसर उनके लिए खास है। फैशन हमेशा से उनका जुनून रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश ऐसे उत्पाद तैयार करने की होगी, जो आधुनिक होने के साथ भारतीय महिलाओं की पसंद और आकांक्षाओं के अनुरूप हों।
मनोरंजन जगत में बरखा हाल ही में गायक दर्शन रावल के गीत ‘नाल नाल वे’ में नजर आई थीं। वह दर्शन रावल के साथ एक नए प्रोजेक्ट में भी काम करेंगी। इसके अलावा, उनका एक नया वेब शो भी आने वाला है, जिसकी घोषणा जल्द की जाएगी।
Pic Credit : UNI

अभिनेत्री बरखा सिंह महिलाओं के फुटवियर ब्रांड ‘नुवा’ से चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के रूप में जुड़ी हैं। बरखा सिंह इस भूमिका में वह ब्रांड की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनि जैन के साथ मिलकर उत्पादों के डिजाइन, ब्रांड की पहचान और रचनात्मक प्रस्तुति को विकसित करने में योगदान देंगी।
‘मसाबा मसाबा’, ‘क्रिमिनल जस्टिस’, ‘इंजीनियरिंग गर्ल्स’ और ‘प्लीज फाइंड अटैच्ड’ जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुकीं बरखा सिंह अब फैशन के प्रति अपने जुनून को कारोबार का रूप दे रही हैं। वह वैश्विक फैशन रुझानों को भारतीय महिलाओं की पसंद और जरूरतों के अनुरूप पेश करने पर ध्यान देंगी।
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वर्ष 2026 में स्थापित ‘नुवा’ महिलाओं के जूतों और सैंडल का ब्रांड है, जो मुख्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से अपने उत्पाद बेचता है। ब्रांड का उद्देश्य स्टाइल और आराम का संयोजन पेश करना है। इसके उत्पादों में ‘स्टेडी-फॉर्म’ फुटबेड और ‘स्टाइल-स्विच’ तकनीक शामिल हैं। इस तकनीक के तहत हील्स बदलने की सुविधा के लिए पेटेंट आवेदन किया गया है।
‘नुवा’ से जुड़ने पर बरखा सिंह ने कहा कि किसी ब्रांड को शुरुआती दौर से विकसित करने और उसकी रचनात्मक पहचान बनाने का अवसर उनके लिए खास है। फैशन हमेशा से उनका जुनून रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश ऐसे उत्पाद तैयार करने की होगी, जो आधुनिक होने के साथ भारतीय महिलाओं की पसंद और आकांक्षाओं के अनुरूप हों।
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इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह प्रस्ताव अमेरिका की मध्यस्थता के जरिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने रखा। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्हें डर है कि इजराइली सेना की भागीदारी से सऊदी अरब में जनता की नाराजगी बढ़ सकती है। लेकिन इजराइल आखिर इस सैन्य अभियान में जुड़ना क्यों चाहता है… दरअसल इसकी मुख्य रूप से 3 वजहें हैं… 1. इजराइल सऊदी के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है सऊदी अरब यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल को उम्मीद थी कि सऊदी अरब के साथ सैन्य सहयोग से दोनों अमेरिकी सहयोगियों के संबंध मजबूत होंगे। इजराइल को यह भी उम्मीद थी कि इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य करने का समझौता भी हो सकता है। 2. इजराइल ईरान समर्थित हूतियों को कमजोर करना चाहता है ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संबंध हैं। सऊदी अरब और अमेरिका का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देता है। इससे हूती ड्रोन और मिसाइलों से हमले करने में सक्षम हुए हैं। इस ही वजह से हूती इजराइल और क्षेत्र के कई देशों के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुके हैं। हूतियों ने क्षेत्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों को प्रभावित करने वाले हमले किए हैं। उन्होंने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच इजराइल को भी निशाना बनाया है। इसलिए इजराइल इस सैन्य अभियान में शामिल होकर हूतियों को कमजोर करना चाहता है। 3. इजराइल सऊदी के साथ सैन्य तालमेल भी बढ़ा सकता है हूतियों की गतिविधियों से सऊदी अरब को भी खतरा रहा है। सऊदी अरब लंबे समय से अपनी दक्षिणी सीमा के पास हूतियों को सुरक्षा चुनौती मानता है। इजराइल सऊदी की मदद कर क्षेत्र की एक बड़ी अरब शक्ति के साथ सैन्य तालमेल भी बढ़ सकता है। हालांकि, इससे रियाद के सामने राजनीतिक जोखिम भी हैं। सऊदी अरब से जुड़े सैन्य अभियानों में इजराइली सेना की भागीदारी पर देश के अंदर और पूरे अरब जगत में विरोध हो सकता है। यह विरोध खास तौर पर तब बढ़ सकता है, जब फिलिस्तीनी मुद्दा अब भी हल नहीं हुआ है। सऊदी और इजराइल के बीच फिलिस्तीन को लेकर मतभेद सऊदी अरब और इजराइल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। हालांकि दोनों ईरान के खिलाफ एक ही रुख अपनाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी कई बार सऊदी से इजराइल के साथ संबंध बनाने की अपील कर चुके है। इसके लिए अमेरिका ने अब्राहम समझौता भी सामने रखा है। अब्राहम समझौते के तहत इजराइल ने 2020 में कई अरब देशों के साथ संबंध सामान्य किए थे। सऊदी अरब का कहना है कि इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने का फैसला फिलिस्तीनी मुद्दे पर प्रगति से जुड़ा होना चाहिए। इसमें एक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना भी शामिल है। लेकिन नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का विरोध करते रहे हैं। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई ————————- यह खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा: अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस हथियार भी बेअसर; अब तेल-गैस की कमाई में हिस्सा मांग रहे विद्रोही सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। पूरी खबर पढ़ें…
OpenAI Saudi Engineer Spy Case: दुनिया की सबसे प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी OpenAI में एक सनसनीखेज सुरक्षा सेंधमारी का मामला सामने आया है। अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) और FBI ने कंपनी में कार्यरत 35 वर्षीय सऊदी मूल के इंजीनियर अब्दुलरहमान अल्फोजान को गिरफ्तार किया है। अल्फोजान पर आरोप है कि उसने कंपनी के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में सीक्रेट रूप से ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाया था, ताकि ‘सुपरइंटेलिजेंस’ टेक्नोलॉजी से जुड़ी संवेदनशील मीटिंग्स को रिकॉर्ड किया जा सके।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर AI और अत्याधुनिक तकनीक को लेकर टेक कंपनियों और सरकारों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है।
टॉयलेट पेपर में छिपाया अंगूठे के आकार का जासूसी डिवाइस
FBI की शिकायत के मुताबिक, जासूसी का यह मामला 30 सितंबर को सामने आया, जब सैन फ्रांसिस्को स्थित OpenAI की इमारत के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे यूएसबी पोर्ट में लगा एक छोटा रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। यह अंगूठे के आकार का एक कस्टमाइज्ड डिवाइस था, जिसमें माइक्रोफोन लगा हुआ था और जिसे कैमरे से भी जोड़ा जा सकता था।
इस डिवाइस को टॉयलेट पेपर में लपेटकर टीवी के पीछे यूएसबी पोर्ट में छिपाया गया था। जांच के अनुसार, इसे 28 सितंबर के आसपास लगाया गया था। हालांकि, इसमें स्टोर डेटा एन्क्रिप्टेड था। एफबीआई जांच अधिकारियों को बाद में अल्फोजान के व्यक्तिगत बैग से भी इसी तरह का एक और कस्टमाइज्ड जासूसी डिवाइस बरामद हुआ।
OpenAI ने खुद के AI मॉडल से पकड़ा आरोपी
OpenAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उसने जासूसी करने वाले व्यक्ति की पहचान करने और डिवाइस के स्रोत का पता लगाने के लिए अपने ही इंटरनल AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि आरोपी कर्मचारी के पास ऑफिस के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी और रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाने की योजना के सबूत मिले हैं। वैसे कंपनी ने राहत की बात यह बताई कि आरोपी कर्मचारी सोर्स कोड, मॉडल वेट्स या कस्टमर डेटा तक पहुंचने या उन्हें लीक करने में कामयाब नहीं हो पाया था। OpenAI ने आरोपी इंजीनियर को तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर एफबीआई को मामला सौंप दिया।
कौन है आरोपी इंजीनियर अब्दुलरहमान अल्फोजान?
प्रोफेशनल बैकग्राउंड: अब्दुलरहमान अल्फोजान जुलाई 2025 से OpenAI में बतौर इंजीनियर कार्यरत था। उसकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उसने प्रसिद्ध संस्थान एमआईटी (MIT) और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से पढ़ाई की है। इससे पहले वह मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में भी काम कर चुका है।वह सितंबर 2020 से अमेरिका का लीगल परमानेंट रेजिडेंट है।
एफबीआई निदेशक काश पटेल ने बयान जारी कर बताया कि आरोपी ने कमरे के कैलेंडर और मीटिंग डिटेल्स हासिल करने के लिए करीब एक महीने तक AI प्रॉडक्टिविटी एजेंट का भी इस्तेमाल किया था। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो अल्फोजान को 5 साल तक की जेल, $250,000 (लगभग ₹2.1 करोड़) का जुर्माना और 3 साल की निगरानी की सजा हो सकती है।
ओपनएआई के अंदर बढ़ते सुरक्षा खतरे और विवाद
यह घटना केवल एक जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि OpenAI में हाल के दिनों में सुरक्षा नियमों को लेकर आंतरिक हलचल भी तेज हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर में सुरक्षा कमियों को ढूंढने वाली स्टार्टअप कंपनी ‘Trail of Bits’ को खरीदने के लिए शुरुआती बातचीत कर रही है, ताकि अपने सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर सके।
हाल ही में OpenAI ने संवेदनशील जानकारी के रख-रखाव से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर अपने तीन शोधकर्ताओं- जैस्मीन वांग, तोमेक कोरबैक और मिकिता बालेस्नी को बर्खास्त कर दिया। निष्कासित शोधकर्ताओं ने एक खुला पत्र लिखकर कहा है कि इस तरह की अचानक कार्रवाई से सुरक्षा चिंताओं को उठाने वाले कर्मचारियों में डर का माहौल बन सकता है।

