सऊदी के महंगे हथियारों पर हूतियों के सस्ते ड्रोन भारी:15 लाख का ड्रोन रोकने में 30 करोड़ खर्च; यमन में जीत का रास्ता मुश्किल

सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा पर दशकों से अरबों डॉलर खर्च किए हैं। उसके पास आधुनिक फाइटर जेट हैं। मिसाइलों को हवा में नष्ट करने वाले महंगे सिस्टम भी हैं। सैन्य खर्च के मामले में वह दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है। हूतियों के पास सऊदी अरब जैसी बड़ी सेना और आधुनिक हथियार नहीं हैं। लेकिन उन्होंने सस्ते ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों को अपनी ताकत बना लिया है। इन हथियारों का पता लगाना और उन्हें हवा में ही नष्ट करना मुश्किल होता है। सऊदी अरब के लिए हूतियों के सस्ते ड्रोन रोकना महंगा सौदा साबित हो रहा है। करीब 15 लाख रुपए के एक ड्रोन को नष्ट करने के लिए 25 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। हूती विद्रोही इसका फायदा उठाकर सऊदी अरब की महंगी सुरक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि सऊदी अरब के पास इतने आधुनिक हथियार होने के बावजूद हूती उसके अहम ठिकानों तक पहुंच कैसे जा रहे हैं? महंगे हथियारों के सामने सस्ते ड्रोन की चुनौती सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका और यूरोपीय देशों से आधुनिक और महंगे हथियार खरीदता रहा है। इनमें अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। लेकिन हूतियों के हमले के आगे ये सब बेअसर हैं। वे कम कीमत वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं। ये हथियार कई बार जमीन के काफी करीब उड़ते हैं। ऐसे में रडार के लिए उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। सऊदी अरब को इन हमलों को रोकने के लिए कई बार बेहद महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है। एक पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करीब 30 करोड़ होती है। इसके मुकाबले एक ड्रोन की कीमत महज 15 लाख होती है। इसका नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है। महंगी मिसाइलों का भंडार भी सीमित होता है। यूक्रेन और ईरान जंग से इंटरसेप्टर मिसाइल की मांग बढ़ी यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्धों के कारण दुनियाभर में मिसाइल इंटरसेप्टर की मांग बढ़ी है। ऐसे में सऊदी अरब के लिए लंबे समय तक इसी तरह हमलों को रोकते रहना मुश्किल हो सकता है। हूतियों की ताकत भी पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने अपने हथियारों के भंडार को बढ़ाया है। अब वे कुछ हथियार खुद भी बनाने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र भी किया गया है कि अब हूती ईरान के भरोसे नहीं रहे। सऊदी की सुरक्षा का फोकस गलत दिशा में रहा सऊदी अरब की एक बड़ी कमजोरी उसका रडार सिस्टम है। देश ने अपनी सुरक्षा के लिए पूर्वी और उत्तर-पूर्वी इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया। इन दिशाओं से ईरान और इराक की तरफ से खतरा माना जाता रहा है। लेकिन यमन दक्षिण-पश्चिम में है। इस तरफ से होने वाले हमलों को पकड़ने और रोकने की व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है। हवाई हमलों को रोकने के लिए सबसे जरूरी है कि दुश्मन के ड्रोन या मिसाइल का समय रहते पता चल जाए। अगर हमले का पता देर से चलता है, तो जवाबी कार्रवाई के लिए कम समय बचता है। ऐसे में महंगी और आधुनिक मिसाइलें होने के बावजूद हमले को रोकना मुश्किल हो जाता है। सेना की बनावट भी बन रही है परेशानी सऊदी अरब की मुश्किल सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है। उसकी सेना का ढांचा और काम करने का तरीका भी चुनौती पैदा करते हैं। सऊदी अरब की नियमित सेना में करीब 2.5 लाख सैनिक हैं। वहीं, नेशनल गार्ड में करीब 1.25 लाख सैनिक हैं। नेशनल गार्ड सेना से अलग है। इसमें ऐसे कबीलों के लोगों की भर्ती की जाती रही है, जिन्हें सऊदी राजपरिवार का वफादार माना जाता है। सेना में सुधार के लिए मोहम्मद बिन सलमान ने 2018 में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया। रियाद में संयुक्त सैन्य कमान बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए, ताकि सेना की अलग-अलग इकाइयों के बीच तालमेल बेहतर हो सके। हालांकि, सेना की कार्यशैली बदलना आसान नहीं है। आधुनिक हथियारों के साथ उन्हें चलाने का प्रशिक्षण, तेजी से फैसले लेने की क्षमता और बेहतर तालमेल भी जरूरी है। 2015 में यमन युद्ध शुरू किया, लेकिन जीत आसान नहीं रही सऊदी अरब की मौजूदा परेशानी को समझने के लिए यमन युद्ध का इतिहास देखना जरूरी है। 2015 में मोहम्मद बिन सलमान ने रक्षा मंत्री के रूप में यमन में सैन्य अभियान शुरू किया था। उस समय उम्मीद थी कि हूतियों को कुछ ही हफ्तों में कमजोर कर दिया जाएगा। लेकिन युद्ध लंबा खिंचता गया।हूतियों ने यमन के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने सऊदी अरब पर भी बार-बार हमले किए। इस युद्ध में सऊदी अरब को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को भी धक्का लगा। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ। इससे लड़ाई कुछ समय के लिए थमी, लेकिन संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अब अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बीच क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है। हूती भी इस संघर्ष में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सऊदी अरब के सामने अब समस्या यह है कि वह केवल हवाई हमलों के जरिए हूतियों को हरा पाएगा या नहीं, इस पर गंभीर संदेह है। यमन में हूतियों के विरोधी गुट भी बंटे हुए हैं। उनके बीच एकजुटता की कमी है। ऐसे में सऊदी अरब के लिए जमीन पर किसी मजबूत सहयोगी के सहारे हूतियों को पीछे धकेलना भी आसान नहीं है। ईरान को कैसे मिल रहा है फायदा? हूती ईरान के सबसे प्रभावशाली सहयोगियों में गिने जाते हैं। वे सऊदी अरब और अमेरिका के लिए संघर्ष की लागत बढ़ा सकते हैं। इससे ईरान को क्षेत्र में दबाव बनाने का मौका मिलता है। अमेरिका ने 2025 में हूतियों के खिलाफ करीब चार महीने तक सैन्य अभियान चलाया था। इसके बावजूद वह उन्हें पूरी तरह झुका नहीं सका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी दोबारा बड़े सैन्य अभियान में उतरने को लेकर हिचक दिखा चुके हैं। अगर हूती अपनी शर्तों पर समझौता कराने में सफल होते हैं या सऊदी अरब को पीछे हटने के लिए मजबूर करते हैं, तो यह ईरान और उसके सहयोगी गुटों के लिए बड़ी रणनीतिक उपलब्धि होगी। यमन मामलों की विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी के मुताबिक, हूती अपनी समस्याओं का हल बातचीत के बजाय युद्ध के जरिए निकालने की कोशिश करते हैं। वहीं, सऊदी अरब को लगता था कि ज्यादा पैसा खर्च करके और आधुनिक हथियार खरीदकर वह अपने दुश्मनों को काबू में कर सकता है। लेकिन हूतियों के लगातार हमलों ने दिखा दिया कि सिर्फ पैसा और हथियार होने से दुश्मन को हराना आसान नहीं है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर हमला किया:5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, 4 की मौत; प्रधानमंत्री मौजूद थे, बाल-बाल बचे यमन के अदन शहर में हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन पर 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के समय प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी और सरकार के कई मंत्री परिसर में मौजूद थे, सभी सुरक्षित हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Caller Name Display Service : क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था, मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा, पूरी खबर में पढ़िए

Caller Name Display Service : क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था, मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा, पूरी खबर में पढ़िए

telecom sector

मोबाइल फोन पर कॉल करने वाले की पहचान करना अब आसान हो सकता है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 1 नवंबर से सभी टेलीकॉम ग्राहकों के लिए कॉलर नेम डिस्प्ले (Caller Name Display) अनिवार्य कर दिया है। इस निर्देश के तहत टेलीकॉम कंपनियों को कॉलर का नाम दिखाने की व्यवस्था लागू करने के साथ-साथ इस सुविधा से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतों का समाधान भी करना होगा।

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इस कदम का मुख्य उद्देश्य फोन कॉल के दौरान पारदर्शिता बढ़ाना और मोबाइल यूजर्स को आने वाली कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान करने में मदद देना है।

 

क्या है कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था?

 

कॉलर नेम डिस्प्ले ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए मोबाइल फोन पर इनकमिंग कॉल आने के दौरान कॉल करने वाले का नाम दिखाई दे सकता है। इससे यूजर्स को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उन्हें किसकी कॉल आ रही है। दूरसंचार विभाग के इस निर्देश का उद्देश्य कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर बनाना है, ताकि ग्राहकों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल के बारे में अधिक जानकारी मिल सके।

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टेलीकॉम कंपनियों की क्या होगी जिम्मेदारी?

 

दूरसंचार विभाग के निर्देश के अनुसार, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को कॉलर नेम डिस्प्ले की अनिवार्य व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा, यदि किसी ग्राहक को इस सुविधा से संबंधित परेशानी होती है या वह शिकायत दर्ज कराता है, तो कंपनी को उसका समाधान करना होगा।

 

इससे कॉलर नेम डिस्प्ले सुविधा के संचालन के साथ-साथ ग्राहकों की समस्याओं के निपटारे की जिम्मेदारी भी टेलीकॉम ऑपरेटरों पर होगी।

 

मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा?

 

कॉलर नेम डिस्प्ले की व्यवस्था का उद्देश्य फोन पर संपर्क करने वाले व्यक्ति की पहचान को आसान बनाना और दूरसंचार सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है। हालांकि, यह सुविधा अपने आप में हर अनजान कॉल या संभावित धोखाधड़ी वाली कॉल की पहचान की गारंटी नहीं देती। इस निर्देश को लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, नाम दिखाने के तकनीकी मानकों और ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे से जुड़े अतिरिक्त विवरणों की जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।

Jio IPO: ‘जियो ने फाइल किए 7220 पेटेंट एप्लिकेशन’, आकाश अंबानी ने कहा- ग्लोबल टॉप 20 में शामिल इकलौती भारतीय कंपनी

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन आकाश अंबानी का कहना है कि ने 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं। ये दुनिया की उन टॉप 20 कंपनियों में शामिल इकलौती भारतीय कंपनी है, जिन्होंने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी रैंकिंग में जगह बनाई है।

Jio Platforms की ओर से IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करने के एक दिन बाद आकाश अंबानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने बताया कि कंपनी की टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में 12,000 से ज्यादा इंजीनियरों की टीम लगी हुई है।

अपनी टेक्नोलॉजी पर जोर दे रही है Jio

आकाश अंबानी ने कहा कि Jio ने अपनी टेक्नोलॉजी खुद डेवलप करने पर जोर दिया है। इससे कंपनी को बाहरी टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।

उन्होंने कहा, ;हमने अपने ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए अपना टेक्नोलॉजी स्टैक बनाया है।’ टेक्नोलॉजी स्टैक का मतलब उन तकनीकों, सॉफ्टवेयर और सिस्टम से है, जिनकी मदद से कंपनी अपनी सेवाएं चलाती है।

इन कारोबारों पर रहेगा कंपनी का फोकस

आकाश अंबानी के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनी का जोर मोबाइल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सर्विसेज और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार पर रहेगा।

उन्होंने बताया कि Jio फिलहाल भारत के कुल डेटा ट्रैफिक का करीब 60% हिस्सा संभालती है। इससे देश में कंपनी के टेलीकॉम कारोबार के बड़े पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दुनिया में सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस

आकाश अंबानी ने कहा कि Jio ने करीब तीन साल पहले 5G नेटवर्क का विस्तार शुरू किया था। अब चीन को छोड़कर दुनिया में उसके पास सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस है।

कंपनी के ग्राहकों में डेटा की खपत भी तेजी से बढ़ी है। आकाश अंबानी के मुताबिक, Jio का हर ग्राहक औसतन हर महीने 43.7 GB डेटा इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने बताया कि डेटा की कीमत भी काफी कम हुई है। पहले एक GB डेटा के लिए करीब 228 रुपये खर्च करने पड़ते थे। वित्त वर्ष 2026 तक यह कीमत घटकर 7.5 रुपये प्रति GB रह गई।

21 अक्टूबर को खुलेगा Jio Platforms IPO

यह जानकारी ऐसे समय आई है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है।

कंपनी ने 14 अक्टूबर को IPO के लिए RHP दाखिल किया था। इसके तहत शेयर का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये तय किया गया है। IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा।

इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से कंपनी इस IPO के जरिए अधिकतम 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है।

Reliance Jio Origin Story: ईशा अंबानी ने सुनाया जियो की शुरुआत का दिलचस्प किस्सा, वो घटना जिसने भारत में ला दी डिजिटल क्रांति

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Reliance Jio Origin Story: ईशा अंबानी ने सुनाया जियो की शुरुआत का दिलचस्प किस्सा, वो घटना जिसने भारत में ला दी डिजिटल क्रांति

Reliance Jio Origin Story: रिलायंस जियो के मेगा IPO के ऐतिहासिक ऐलान के बीच, ईशा अंबानी ने वह दिलचस्प किस्सा शेयर किया है कि कैसे एक छोटी सी इंटरनेट समस्या ने भारत के सबसे बड़े डिजिटल नेटवर्क ‘रिलायंस जियो’ को जन्म दिया। इसके साथ ही उन्होंने रिलायंस ग्रुप के बिजनेस फिलॉसफी, नेट-डेट फ्री बनने के सफर और अपने दादा धीरूभाई अंबानी के 50 साल पुराने सपने को याद किया।

2009 की वो एक घटना… और हुआ Reliance Jio का जन्म

ईशा अंबानी ने जियो की शुरुआत के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे एक असाइनमेंट सबमिट न हो पाने की वजह से देश में डिजिटल क्रांति का विचार उपजा। उन्होंने बताया, ‘बात 2009-2010 की है। आकाश और मैं अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे और छुट्टियों में बॉम्बे वाले घर आए हुए थे। मुझे अपना एक कॉलेज असाइनमेंट ऑनलाइन सबमिट करना था, लेकिन इंटरनेट न चलने की वजह से मैं उसे जमा नहीं कर सकी।’

उन्होंने बताया कि, इसके बाद घर में इस बात पर लंबी चर्चा हुई कि आखिर भारत कनेक्टिविटी के मामले में पश्चिम के देशों से भारत क्यों पीछे है?

आकाश अंबानी का मानना था कि इसका एकमात्र समाधान भारत में एक मजबूत ‘डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी’ तैयार करना है। इसी सोच के साथ 2016 में जियो की नींव रखी गई, जो आज 2026 में देश का सबसे बड़ा डिजिटल नेटवर्क बन चुका है।

रिलायंस की सफलता के 3 मूल मंत्र: लॉन्ग-टर्म विजन, स्केल और एग्जीक्यूशन

ईशा अंबानी ने बताया कि रिलायंस में बिजनेस बनाने की फिलॉसफी तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है:

लॉन्ग-टर्म पर्सपेक्टिव: रिलायंस केवल आज या कल के लिए नहीं सोचता, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दांव लगाता है।

स्केल: कंपनी हमेशा उस स्तर का स्केल हासिल करने का लक्ष्य रखती है जो उस पूरे उद्योग की इकोनॉमिक्स को बुनियादी तौर पर बदल दे।

एग्जीक्यूशन: रिलायंस एक गहराई से तकनीकी कंपनी है। किसी भी प्रोजेक्ट को तय समय और सटीकता से पूरा करना कंपनी की आदत में शामिल है।

‘फाइनेंशियल प्रूडेंस’ और वादे पर खरे उतरने की मिसाल

अपने बयान में ईशा अंबानी ने रिलायंस की वित्तीय अनुशासन और शेयरधारकों के प्रति प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया, साल 2019 में मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2021 तक ‘नेट-डेट फ्री’ बनाने का वादा किया था। 2020 में कोरोना महामारी और वैश्विक मंदी आने के बावजूद, कंपनी ने समय सीमा से 9 महीने पहले ही रिलायंस को कर्जमुक्त बना दिया’।

धीरूभाई अंबानी का 50 साल पुराना सपना और 29% एनुअलाइज्ड रिटर्न

रिलायंस इंडस्ट्रीज की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए ईशा अंबानी ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी को नमन किया। 1977 में धीरूभाई अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज का आईपीओ (IPO) लेकर आए थे, जिसे लगभग 50 साल पूरे हो चुके हैं। इन 50 वर्षों में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने शेयरधारकों को 29% का सालाना रिटर्न दिया है।

उन्होंने कहा, ‘मेरे दादाजी के लिए रिलायंस सिर्फ एक कंपनी नहीं थी। रिलायंस एक वादा है कि हर भारतीय को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने, इसकी समृद्धि को साझा करने और एक बेहतर भविष्य पर विश्वास करने का अवसर मिलना चाहिए।’

लॉन्च से पहले Samsung Galaxy S27 Ultra के फीचर्स लीक, मिलेगा नया Privacy Display, देखें स्पेसिफिकेशंस

Samsung Galaxy S27 Ultra Leaks: अगर आप Samsung के प्रीमियम स्मार्टफोन का इंतजार कर रहे हैं, तो आने वाला Galaxy S27 Ultra आपके लिए खास हो सकता है। इस फोन को लेकर नई लीक सामने आई हैं, जिनमें कैमरा क्वालिटी से लेकर हार्डवेयर तक में बड़े बदलाव होने की उम्मीद जताई गई है। माना जा रहा है कि नया फोन मौजूदा Galaxy S26 Ultra से बेहतर हो सकता है। हालांकि, Samsung ने अभी तक इस स्मार्टफोन को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। आइए जानते हैं कि Galaxy S27 Ultra को लेकर अब तक क्या-क्या सामने आया है।

Samsung Galaxy S27 Ultra लीक: क्या उम्मीद करें

एक जाने-माने टिपस्टर सॉयर गैलोक्स (@Sawyergalox) के अनुसार, Samsung अपनी ‘प्राइवेसी डिस्प्ले’ तकनीक की दूसरी पीढ़ी पर काम कर रहा है। इस अपडेटेड फीचर में स्क्रीन के कई पहलुओं में सुधार देखने को मिल सकता है।

माना जा रहा है कि Galaxy S27 Ultra में ‘Privacy Display’ इनेबल होने पर भी हाई रिजॉल्यूशन मिलेगा। उम्मीद है कि यह कोरियाई टेक कंपनी व्यूइंग एंगल, स्क्रीन रिजॉल्यूशन और ओवरऑल डिस्प्ले क्लैरिटी को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है। बता दैं कि Samsung Galaxy S27 Ultra के 2027 की शुरुआत में लॉन्च होने की उम्मीद है, हालांकि कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक लॉन्च टाइमलाइन का खुलासा नहीं किया है।

Samsung Galaxy S27 Ultra (अनुमानित कीमतें)

टिप्स्टर के मुताबिक, Galaxy S27 Ultra में बेहतर डिस्प्ले हार्डवेयर मिलने से इसकी कीमत बढ़ सकती है। लीक के अनुसार, इस प्रीमियम स्मार्टफोन की शुरुआती कीमत 1,400 डॉलर (करीब 1,33,000 रुपये) से 1,500 डॉलर (लगभग 1,43,000 रुपये) के बीच हो सकती है।

हालांकि, इससे पहले सामने आई लीक में फोन की कीमत को लेकर अलग-अलग दावे किए गए थे। पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 1,399 डॉलर (करीब 1,35,000 रुपये) हो सकती है। वहीं, दक्षिण कोरिया में इसकी कीमत 1,499 डॉलर (लगभग 1,45,000 रुपये) होने की संभावना जताई गई थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी कीमतें फिलहाल अनुमान पर आधारित हैं। Samsung ने Galaxy S27 Ultra की कीमत का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। अलग-अलग देशों में इसकी कीमत भी अलग हो सकती है।

कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S27 Ultra में पीछे की तरफ चार कैमरे मिल सकते हैं। इसमें 200MP का मेन कैमरा, 50MP का टेलीफोटो कैमरा, 50MP का अल्ट्रावाइड कैमरा और 10MP का एक अन्य टेलीफोटो कैमरा शामिल हो सकता है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 12MP का फ्रंट कैमरा मिलने की उम्मीद है।

Samsung Galaxy S27 Ultra में 6.9 इंच की AMOLED 2X डिस्प्ले दी जा सकती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगी। परफॉर्मेंस के लिए इसमें Qualcomm का अपकमिंग Snapdragon 8 Elite Gen 6 प्रोसेसर मिल सकता है। इसके साथ 12GB रैम और 256GB स्टोरेज दिए जाने की उम्मीद है।

चीन के मशहूर टिप्स्टर Digital Chat Station के मुताबिक, यह प्रोसेसर 2nm टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। लीक में यह भी दावा किया गया है कि फोन की मोटाई 7.9mm हो सकती है और इसमें Galaxy S Pen का सपोर्ट मिलेगा।

बैटरी देखें तो Galaxy S27 Ultra में 7,000mAh की बैटरी दी जा सकती है, जो 65W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट कर सकती है। हालांकि, इन सभी फीचर्स की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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जमीन से कटे हुए

ऐसा लगता है कि नंदन निलेकणी देश की जमीनी हकीकत से बेखबर हैं। इसलिए उनकी बातें सुनकर यह सवाल भी उठा है कि क्या सचमुच निलेकणी समिति पेपर लीक रोकने के व्यावहारिक उपाय बता पाएगी? 

पेपर लीक रोकने के नंदन निलेकणी के सुझावों को भारत की जमीनी हकीकत के मद्देनजर हवाई सोच से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। प्रधानमंत्री ने पेपर लीक रोकने पर सुझाव देने के लिए जो उच्च-स्तरीय समिति बनाई, निलेकणी उसके प्रमुख हैं। इसीलिए उनके सुझाव गौरतलब हैं। उनके मुताबिक प्रश्न-पत्रों का विशाल डिजिटल बैंक बनाया जाना चाहिए, परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले उस बैंक में से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए परीक्षार्थियों को दिया जाना वाला प्रश्न-पत्र तैयार करना चाहिए, और देश भर में ऐसे परीक्षा केंद्र बनाए जाने चाहिए, जहां छात्र कंप्यूटर पर परीक्षा दे सकें।

निलेकणी हाई-टेक क्षेत्र से आते हैं। अतः उन्होंने उनसे व्यापक आयाम वाली एक समस्या के बारे में महज तकनीकी समाधान पेश किया है, तो उस पर कोई अचरज नहीं है। लेकिन यह मसला सिर्फ टेक्नोलॉजी से संबंधित नहीं है। इसके महत्त्वपूर्ण सामाजिक पहलू है। पहले यह साफ कर लेना चाहिए कि पेपर लीक सिर्फ नीट या जेईई जैसी परीक्षाओं से जुड़ी समस्या नहीं है, जिनमें अपेक्षाकृत संपन्न तबकों के छात्र भाग लेते हैं। बल्कि होम गार्ड से लेकर प्राइमरी शिक्षक और क्लर्क भर्ती तक के इम्तहान के पर्चे लीक हुए हैं। क्या उन जैसी हर परीक्षा के लिए वे महंगे उपाय भारत में संभव हैं, जिनकी बात निलेकणी ने की है।

दूसरा पहलू परीक्षा व्यवस्था के निजीकरण, कोचिंग संस्थानों के बढ़े प्रभाव, और उन सबके कारण फैले भ्रष्टाचार से जुड़ा है। क्या इस इकॉ-सिस्टम के कायम रहते तकनीकी उपायों से कोई समाधान निकल सकता है? बड़ा आयाम डिजिटल परीक्षा के लिए सभी परीक्षार्थियों की तैयारी, स्क्रीन पर लंबे प्रश्न पढ़ने और निर्धारित समय में उत्तर देने की आदत, तथा कंप्यूटर और इंटरनेट की उपलब्धता आदि से जुड़ा है। जिन छात्रों को ऐसी सुविधा नहीं मिली हुई है, क्या ऐसी परीक्षा व्यवस्था में उनके हितों की सुरक्षा हो सकेगी? बिजली, सुरक्षित नेटवर्क, प्रशिक्षित कर्मचारी और तकनीकी खराबी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था अन्य महत्त्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसा लगता है कि निलेकणी इन सबसे बेखबर हैं। इसलिए उनकी बातें सुनकर यह सवाल भी उठा है कि क्या सचमुच निलेकणी समिति पेपर लीक रोकने के व्यावहारिक उपाय बता पाएगी?

रिपोर्ट- चीन की मदद से मिसाइल बना रहे हूती विद्रोही:डिजाइन ईरान में तैयार हुआ; सऊदी के अलावा इजराइल को भी निशाना बना सकते हैं

यमन के हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से नई बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही ईरान में डिजाइन हुई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं, जिसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर है। अगर हूती ऐसा हथियार बनाने में सफल होते हैं, तो वे सऊदी अरब के अलावा इजराइल को भी ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बना सकते हैं। हथियार बनाने के लिए जरूरी सामान जुटा रहे हूती रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अधिकारियों ने जुलाई में चीन से भेजे गए दो संदिग्ध सामानों की खेप पकड़ी थी। इनमें मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे मिले। पकड़ी गई खेप चीन से भेजी गई थी। इसे यमन के होदेइदा बंदरगाह पहुंचाया जाना था। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईरान हथियारों की सप्लाई के लिए करता रहा है। पकड़ी गई खेप में क्या-क्या मिला? रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्था के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, हूती ईरान में डिजाइन की गई खास तरह की मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन पुर्जों का इस्तेमाल आम नागरिक कामों में करना मुश्किल है। हूतियों की हथियार बनाने की क्षमता पहले से ज्यादा हूती करीब दो दशक पहले यमन में एक विद्रोही संगठन के तौर पर उभरे थे। शुरुआत में उनके पास यमन की सेना से हासिल सोवियत दौर के और उत्तर कोरिया में बने हथियार थे। समय के साथ उन्हें ज्यादा आधुनिक हथियार और तकनीक मिलने लगी। ईरान पर निर्भरता घटाने की कोशिश क्यों? ईरान लंबे समय से हूतियों को हथियार बनाने की तकनीक, डिजाइन और जरूरी पुर्जे देता रहा है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, अब हूती चीन समेत दूसरे देशों से भी हथियार बनाने का सामान जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू ने कहा कि हथियार बनाने के लिए कई जगहों से सामान मिलना किसी संगठन के लिए फायदेमंद होता है। उनके मुताबिक, ईरान पर रोक के बीच हूती सामान जुटाने के दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हूती अभी मिसाइल के लिए जरूरी जटिल सिस्टम के लिए ईरान पर निर्भर हैं। वे दूसरे देशों से मिले पुर्जों को जोड़कर कुछ हथियार बना सकते हैं, लेकिन आधुनिक हथियारों की पूरी तकनीक खुद विकसित नहीं कर सकते। चीन के लिए कूटनीतिक चुनौती बढ़ सकती है चीन ईरान और सऊदी अरब, दोनों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। 2023 में चीन ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में भी भूमिका निभाई थी। चीन ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हूतियों के हमलों की निंदा की है और संघर्ष कम करने की अपील की है। अब अगर चीन से आए पुर्जों का इस्तेमाल हूती मिसाइल बनाने में होने के दावे की पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब और चीन के रिश्तों पर दबाव बढ़ सकता है। चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है। मध्य पूर्व के विशेषज्ञ क्रिस्टियन उलरिचसन के मुताबिक, सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और एयरपोर्ट पर हमलों के बाद चीन पर इस मुद्दे को लेकर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं होता कि चीन की सरकार ने जानबूझकर हूतियों को मिसाइल बनाने के लिए सामान भेजा था। ————————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज में बारूदी सुरंग से टकराकर जहाज डूबा: जंग शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराकर बुधवार सुबह एक मालवाहक जहाज डूब गया। जहाज में 2500 कंटेनर थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने यह जानकारी दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

जर्मनी के बोखुम में आग से 3 भारतीयों की मौत:हत्या के शक में 41 साल का रोमानियाई गिरफ्तार, 5 अस्पताल में भर्ती

जर्मनी के बोखुम शहर में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से 3 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। मृतकों में 25 और 27 साल की दो महिलाएं और 26 साल का एक युवक शामिल है। पुलिस ने हत्या के शक में 41 साल के एक रोमानियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। घटना मंगलवार तड़के हुई थी। आग लगने के बाद दमकलकर्मियों को दूसरी मंजिल के एक फ्लैट में तीनों के शव मिले। हादसे में 5 अन्य लोग धुएं की चपेट में आ गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।मृतकों की पहचान और भारत में उनके गृह राज्यों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। सीढ़ियों से फैली आग, लोग नीचे नहीं उतर पाए आग मंगलवार सुबह करीब 4:15 बजे बोखुम के होफ्स्टेड इलाके की एक रिहायशी इमारत में लगी थी। आग इमारत की सीढ़ियों से ऊपर तक फैल गई, जिससे ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया। दमकलकर्मियों ने बचाव के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। जर्मन न्यूज एजेंसी DPA के मुताबिक, दो लोगों को हाइड्रोलिक सीढ़ी और दो को पोर्टेबल सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया। एक अन्य व्यक्ति को एयर कुशन की मदद से बचाया गया। तकनीकी खराबी से आग लगने की आशंका खारिज जांचकर्ताओं ने आग लगने की वजह तकनीकी खराबी होने की आशंका खारिज कर दी है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि आग जानबूझकर लगाई गई थी या दुर्घटनावश लगी। पुलिस आग लगने की वजह, तीनों की मौत के हालात और गिरफ्तार व्यक्ति की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। खबर अपडेट हो रही है…

रोबोट ने कर दिया ऐसा गंदा काम, करना पड़ा गिरफ्तार, जानिए क्या है पूरा मामला?

एक रोबोट ने ऐसा गंदा काम कर दिया है की उसे गिरफ्तार करना पड़ा गया। रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक इंसानों की मदद के लिए बनाई गई हैं। लेकिन अब एक रोबोट को लेकर जो खबर सामने आ रही है वो हैरान करनी वाली तो है ही और आपको ये सोचने पर मजबूर भी कर सकती है कि एक रोबोट आपकी मदद करने के अलावा आपके लिए और आपके परिवार के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है अगर वो आपके कंट्रोल से बाहर हो गया तो।

ये मामला जर्मनी के कोलोन शहर का है जहां एक रोबोट पर 16 साल की लड़की को गलत तरीके से छूने और आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगा गया है। रोबोट की हरकत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और रोबोट को जब्त कर लिया है और उसे नियंत्रित करने वाले दो युवकों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोनों युवकों पर फिलहाल कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन उन्हें संदिग्ध माना जा रहा है।

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर रोबोट की इस हरकतो को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि रोबोट को रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा था या उसके प्रोग्रामिंग में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी. इन सब सवालों के जवाब पाने के लिए पुलिस जांच में जुट गई है।

लड़की के पास कैसे पहुंचा रोबोट, फिर क्या हुआ?

पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह घटना 10 अक्टूबर की देर रात कोलोन में एक फास्ट-फूड रेस्तरां के बाहर हुई। जहां 16 साल की एक लड़की अपनी दो सहेलियों के साथ वहां मौजूद थी। इसी दौरान वहां करीब 120 सेंटीमीटर यानी 1.2 मीटर लंबा लाल और सुनहरे रंग का एक रोबोट उस 16 साल की लड़की के पास पहुंचा। रोबोट ने लड़की के पास जाकर उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ और उसके साथ आपत्तिजनक हरकतें कीं इस घटना के दौरान रोबोट को कंट्रोल कर रहे दो युवकों पर वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर इस पूरी घचना को लाइव दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।

रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था या रोबोट ने ये हरकत खुद कर डाली। पुलिस का भी मुख्य सवाल यही है कि रोबोट की गतिविधियों को कौन नियंत्रित कर रहा था। कोलोन पुलिस के मुताबिक, रोबोट का मालिक 16 साल का है, जबकि उसके साथ मौजूद दूसरा युवक 19 साल का बताया जा रहा है। दोनों युवकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। फिलहाल उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए गए हैं।

पुलिस ने रोबोट को जब्त कर लिया है, लेकिन रोबोट को जब्त करना इस बात का सबूत नहीं है कि उसने खुद फैसले लेकर ये हरकतें कीं। जांच पूरी होने के बाद ही ये साफ होगा कि घटना के दौरान तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया गया था और इसमें किसकी क्या भूमिका थी।

जब सामने आई रोबोट की तस्वीर

रोबोट की तस्वीर को भी पुलिस ने साझा किया जिसमें देखा जा सकता है कि रोबोट सफेद टैंक टॉप, काले ट्रैक पैंट, चश्मा और गले में सोने जैसी चेन पहने हुई है। रोबोट की लांबई करीब 120 सेंटीमीटर बताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि घटना के बाद रोबोट एक कार की डिक्की में मिला था। अधिकारियों ने उसे वहीं से जब्त किया। इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए, ताकि घटना से संबंधित वीडियो और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच करने में मदद मिल सके।

क्या रोबोट खुद ले सकता है ऐसे फैसले?

इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या रोबोट खुद ऐसी हरकत करने के बारे में खुद से फैसला ले सकता है? क्या मशीन अपने आप ऐसी हरकत कर सकती है या इसके पीछे किसी व्यक्ति का कंट्रोल हो सकता है?

आज कई तरह के रोबोट बनाए जा रहे हैं। कुछ रोबोट सेंसर और सॉफ्टवेयर की मदद से अपने आसपास की चीजों को पहचानकर काम कर सकते हैं। वहीं, कुछ को रिमोट से नियंत्रित किया जाता है और कुछ में पहले से तय गतिविधियां प्रोग्राम की जाती हैं। आज जमाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों से लैस रोबोट्स के इस्तेमाल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में रोबोट द्वारा ऐसी हरकत ने दुनिया डरा दिया है। हालांकि, किसी रोबोट की क्षमताएं उसके डिजाइन, सॉफ्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम पर निर्भर करती हैं। इसलिए बिना जांच के अभी से ये मान लेना ठीक नहीं होगा कि रोबोट ने अपनी मर्जी से ऐसी हरकत को अंजाम दिया।

रोबोट की इस हरकत पर चर्चा के दौरान सवाल तकनीकी खराबी का उठ रहा है। कई बार किसी मशीन या रोबोट में खराबी आने से वो उस तरह से काम नहीं करता है जिस तरह से उसको प्रोग्राम किया गया होता है। इस रोबोट में खराबी थी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है इस पर भी पुलिस जांच कर रही है।

क्या एक रोबोट के खिलाफ अपराध का मामला बन सकता है? पुलिस ने जांच के लिए रोबोट को जब्त ज़रूर किया है, लेकिन उसे आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि घटना कैसे हुई और इसे नियंत्रित करने वाले लोगों की इसमें क्या भूमिका थी।

फिलहाल दोनों युवक जांच के दायरे में हैं और उन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसलिए इसे रोबोट द्वारा किया गया अपराध कहना गलत होगा। यह मामला सार्वजनिक स्थानों पर AI और रोबोट्स के सुरक्षित उपयोग और उनकी जवाबदेही तय करने की ज़रूरत को रेखांकित करता है।

रोबोट की इस हरकत की वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है । वायरल वीडियो में एक रोबोट लड़की की तरफ बढ़ता है, एक महिला को धक्का देता और दूसरों को गले लगाता दिख रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर इसका मज़ाक उड़ाने और वीडियो शेयर करने वालों को चेतावनी दी है, क्योंकि इससे पीड़ितों पर बुरा असर पड़ सकता है।