विश्वकप फाइनल में नाबाद अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज को ऑस्ट्रेलिया ने किया वनडे टीम से ड्रॉप

मार्नस लाबुशेन को ज़िम्बाब्वे और साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ होने वाली वनडे सीरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम से बाहर कर दिया गया है। इस बीच उन्हें टेस्ट टीम में अपनी जगह के बारे में फ़ैसला होने का इंतज़ार भी है।गौरतलब है कि मार्नस लाबुशेन वही बल्लेबाज हैं जिन्होंने भारत के खिलाफ एकदिवसीय विश्वकप फाइनल में  नाबाद अर्धशतक जड़ा था।

लाबुशेन ने जून में पाकिस्तान और बांग्लादेश के दौरों पर संघर्ष किया था, हालांकि बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दूसरे वनडे में बल्लेबाज़ी क्रम में नीचे भेजे जाने के बाद उन्होंने नाबाद 55 रन बनाए थे। लेकिन ट्रैविस हेड और मिचेल मार्श की वनडे टीम में वापसी और चयनकर्ताओं के युवा खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाने के कारण लाबुशेन टीम से बाहर हो गए हैं। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ के लिए टीम की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी।

इस दौरे पर जोएल डेविस के वनडे डेब्यू करने की संभावना है। न्यू साउथ वेल्स के इस ऑलराउंडर ने इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ T20I सीरीज़ में प्रभावित किया था। वहीं बाएं हाथ के बल्लेबाज ऑली पीक को एक और मौक़ा दिया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक वनडे कप्तान पैट कमिंस और उनके साथी तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क साउथ अफ़्रीका में टीम से जुड़ेंगे, वहीं जॉश हेज़लवुड दोनों वनडे सीरीज़ में खेलेंगे।

ज़िम्बाब्वे में मार्श टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि साउथ अफ़्रीका में वह और कमिंस कप्तानी की ज़िम्मेदारी साझा करेंगे। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कमिंस कितने मैच खेलते हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने इस दौरे के लिए अपने तेज़ गेंदबाज़ी विकल्पों को मजबूत करते हुए स्पेंसर जॉनसन और बिली स्टेनलेक को भी टीम में शामिल किया है। बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ जॉनसन ने अपना पिछला वनडे 2025 की शुरुआत में खेला था। लंबी चोट के बाद उन्होंने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ T20I टीम में वापसी की थी।

स्टेनलेक पाकिस्तान दौरे के लिए वनडे टीम का हिस्सा थे और रावलपिंडी में खेले गए मैच में उन्होंने सात साल से अधिक समय बाद अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। हालांकि, सीरीज़ में उनके एकमात्र मैच में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था।

चयनकर्ताओं ने वनडे और ऑस्ट्रेलिया ए टीम के बीच खिलाड़ियों को बांटने का फैसला नहीं किया है। 
ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ वनडे मैच 15, 18 और 20 सितंबर को हरारे में खेले जाएंगे। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सीरीज़ के मैच 24, 27 और 30 सितंबर को क्रमशः डरबन, जोहैनसबर्ग और पोटचेफ़स्ट्रूम में होंगे।

ज़िम्बाब्वे और साउथ अफ़्रीका दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया की वनडे टीम

ज़ेवियर बार्टलेट, ऐलेक्स कैरी, कूपर कॉनली, पैट कमिंस (केवल साउथ अफ़्रीका, कप्तान), जोएल डेविस, नेथन एलिस, कैमरन ग्रीन, जॉश हेज़लवुड, ट्रैविस हेड, जॉश इंग्लिस, स्पेंसर जॉनसन, मिचेल मार्श, ऑली पीक, मैथ्यू रेनशॉ, बिली स्टेनलेक, मिचेल स्टार्क (केवल साउथ अफ़्रीका), ऐडम ज़ैम्पा

7 चौके और छक्के, दलीप ट्रॉफी में शतक चूके लेकिन वैभव ने बना दिया यह अनोखा रिकॉर्ड

इस्ट जोन बनाम सेंट्रल जोन की दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल मैच में वैभव सूर्यवंशी भले ही 8 रनों से शतक चूक गए हों लेकिन उन्होंने दलीप ट्रॉफी में सबसे अर्धशतक जमा कर सबसे कम उम्र में यह कारनमा किया। वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल 157 दिनों में दिलीप ट्रॉफी में अर्धशतक जड़ा इससे पहले उनसे युवा सिर्फ लक्ष्मण सिंह थे जिन्होंने 16 साल 23 दिनों में अर्धशतक जमाया था।

लाल गेंद के टूर्नामेंट दिलीप ट्रॉफी में वैभव सफेद गेंद की तरह ही खेले और उन्होंने 81 गेंदों में खेली 92 रनों की पारी में 7 चौके और छक्के लगाए। इससे पहले ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यंवशी ने दलीप ट्रॉफी क्वार्टरफाइनल में नॉर्थ इस्ट जोन के खिलाफ 4 गेंदों में 2 विकेट चटकाए थे । उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के किशन को 25 रनों पर और इमलिवती को 4 रनों पर आउट किया था।

15 साल के इस खिलाड़ी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है। इस उभरते हुए बल्लेबाज ने इंग्लैंड में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 14, 13 और 15 रन बनाए। इनमें से दो पारियों में सूर्यवंशी जोफ्रा आर्चर की शॉर्ट गेंद पर आउट हुए। इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपने डेब्यू में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में प्रभावित किया। वहाँ उन्होंने कई मैचों में जीत दिलाने वाला प्रदर्शन किया और ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़’ चुने गए।

हालांकि इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने बिहार के लिए आठ प्रथम श्रेणी मैचों की 12 पारियों 17 से अधिक के औसत से रन बनाए हैं जो कि आकर्षक नहीं हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 93 रन है।ईस्ट ज़ोन ने एक मज़बूत टीम चुनी है जिसमें कई अनुभवी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। चुने गए प्रमुख खिलाड़ियों में भारत के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन, तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार, ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कुमार कुशाग्र शामिल हैं।


AUSvsIND सीरीज के लिए कप्तान नियुक्त हुई यस्तिका भाटिया और अनुष्का शर्मा

बीसीसीआई ने गुरुवार को घोषणा की कि विकेटकीपर-बल्लेबाज़ यास्तिका भाटिया और बैटिंग ऑलराउंडर अनुष्का शर्मा ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ़ होने वाली घरेलू मल्टी-फ़ॉर्मेट सीरीज़ के लिए इंडिया ए टीमों की कप्तानी करेंगी।

अनुष्का टी20 टीम की कप्तानी करेंगी और सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर सायली सतघरे उनकी डिप्टी (उप-कप्तान) होंगी। यास्तिका 50-ओवर और रेड-बॉल (मल्टी-डे) दोनों टीमों की कप्तानी करेंगी, और इन फ़ॉर्मेट में अनुष्का उप-कप्तान की भूमिका निभाएंगी।

महिला चयन समिति ने उन इंडिया ए टीमों की तुलना में स्क्वाड में कई बदलाव किए हैं जिन्होंने जुलाई में इंग्लैंड का दौरा किया था और 50-ओवर की सीरीज़ जीती थी।

टी20 स्क्वाड में टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज़ तेजल हसबनीस, सायली सतघरे, विकेटकीपर शिप्रा गिरी और सुजाता डे को शामिल किया गया है। वे इंग्लैंड में खेलने वाली टीम की जी कमलिनी, पूर्वजा वेरलेकर, साइमा ठाकोर और दीया यादव की जगह लेंगी।

यास्तिका, जो लॉर्ड्स में महिला टेस्ट में शतक लगाने वाली पहली बल्लेबाज़ बनी थीं, 50-ओवर वाली टीम की कप्तानी करेंगी। स्क्वाड में बाएं हाथ की रिस्ट-स्पिनर अमनदीप कौर, तेज़ गेंदबाज़ अक्षिता भगत, तेजल हसबनीस और अनुष्का शर्मा भी शामिल हैं; ये सभी इंग्लैंड में पिछले 50-ओवर वाले लेग का हिस्सा नहीं थीं।वे हरलीन देओल, प्रतिका रावल, जी कमलिनी, तनुजा कंवर और साइमा ठाकोर की जगह लेंगी।

मल्टी-डे स्क्वाड में टेस्ट बल्लेबाज़ शुभा सतीश, ऑलराउंडर दिब्यदर्शिनी, बाएं हाथ की स्पिनर शुचि उपाध्याय और विकेटकीपर ममता मदीवाला शामिल हैं। श्रृंखला 12, 15 और 17 सितंबर को न्यू चंडीगढ़ में तीन टी20 मैचों के साथ शुरू होगी। इसके बाद टीमें 20, 23 और 25 सितंबर को 50 ओवर के तीन मैचों के लिए मोहाली के पीसीए स्टेडियम में जाएंगी। यह दौरा 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक धर्मशाला में चार दिवसीय मैच के साथ समाप्त होगा।


भारत ए टी20 मैच: अनुष्का शर्मा (कप्तान), सयाली सतघरे (उपकप्तान), वृंदा दिनेश, सुजाता डे, तेजल हसब्निस, निक्की प्रसाद, शिप्रा गिरी (विकेटकीपर), श्वेता सहरावत, उमा छेत्री (विकेटकीपर), तनुजा कंवर, मिन्नू मणि, वैष्णवी शर्मा, जिन्तिमणि कलिता, शबनम शकील और सिमरन दिल बहादुर

इंडिया ए वन-डे गेम्स: यास्तिका भाटिया (कप्तान और विकेटकीपर)। अनुष्का शर्मा (उपकप्तान), वृंदा दिनेश, प्रिया पुनिया, तनीषा सिंह, तेजल हसब्निस, निक्की प्रसाद, उमा छेत्री (विकेटकीपर), मिन्नू मणि, अमनदीप कौर, वैष्णवी शर्मा, सयाली सतघरे, जिन्तिमणि कलिता, शबनम शकील और अक्षिता भगत

इंडिया ए मल्टी-डे गेम: यास्तिका भाटिया (कप्तान और विकेटकीपर), अनुष्का शर्मा (उप-कप्तान), शुभा सतीश, प्रिया पुनिया, तनीषा सिंह, तेजल हसब्निस, निक्की प्रसाद, ममता मडिवाला (विकेटकीपर), दिव्यदर्शनी, शुचि उपाध्याय, वैष्णवी शर्मा, सयाली सतघरे, जिन्तिमणि कलिता, शबनम शकील और अक्षिता भगत

यशस्वी जायसवाल को सस्ते में छोड़ने पर संजय मांजरेकर ने ट्वीट कर दिखाई नाराजगी

भारत के पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने युवा खिलाड़ियों वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल से जुड़े अनुशासनहीनता के मामलों से निपटने के तरीके को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) की आलोचना की है।उन्होंने कहा कि यह दोनों संस्थाएं नरम रवैया अपना रही हैं जिससे खिलाड़ियों को अनुशासनहीनता के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।

मांजरेकर ने एक्स पर लिखा, ‘‘आईसीसी और बीसीसीआई, वैभव ने हाल ही में भारत ​​ए के लिए और अब जायसवाल ने (अनुशासनहीनता दिखाई है)। अगर आप उनका इस तरह के व्यवहार में बचाव करते रहेंगे तो आप उन्हें ऐसा व्यवहार दोहराने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। यह खेल के लिए अच्छा नहीं है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उनके भविष्य के लिए भी अच्छा नहीं है।’’

कोलंबो में दूसरे टेस्ट के पहले दिन मैदान पर हुई कहासुनी के लिए जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो पर उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया। दोनों को एक-एक डिमेरिट अंक भी दिया गया।भारत की पहली पारी के 17वें ओवर में फर्नांडो ने जायसवाल को आउट किया जिसके बाद दोनों में कहासुनी हो गई थी।जून में 15 वर्षीय बल्लेबाज सूर्यवंशी भारत ए की तरफ से खेलते हुए श्रीलंका ए के एक खिलाड़ी के साथ तीखी बहस में उलझ गए थे और हाथापाई की नौबत तक आ गई थी।

हालांकि इससे पहले भारत के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी कहा था कि यशस्वी जायसवाल को अशिता फर्नाडो के इतने करीब नहीं जाना चाहिए। सितांशु कोटक ने कहा, “मुझे लगता है कि गेंदबाज़ ने कुछ कहा और यह जोश-जोश में हुआ। ज़ाहिर है, यशस्वी को उनके इतना करीब नहीं जाना चाहिए था, लेकिन जोश-जोश में ऐसा हो जाता है।”

श्रीलंका के तेज़ गेंदबाज़ी कोच रयान वैन नीकेर्क की राय भी कुछ ऐसी ही थी। उन्हें लगा कि यह कड़े मुकाबले वाले दिन का हिस्सा था और उन्होंने इसे “भावनाओं के उबाल” का नतीजा बताया। “देखिए, टेस्ट क्रिकेट मुश्किल होता है, है ना? जब आप भारत जैसी टीम के खिलाफ खेल रहे हों, तो आप बस पीछे हटकर गेंदबाजी नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि हमारी तरफ से, हमें हर समय चुनौती पेश करनी होगी और कुछ न कुछ करने की कोशिश करनी होगी।”

उन्होंने आगे कहा,”इसलिए, मेरे नजरिए से, मैंने गेंदबाजों से आगे बढ़कर कुछ करने को कहा है। शायद तीखी बातें भावनाओं के उबाल का नतीजा हैं। मैं इसे मैच रेफरी पर छोड़ता हूं कि वे इसे कैसे देखते हैं।”

Duleep Trophy में वैभव का गेंद से कमाल 4 गेंदों में झटके 2 विकेट (Video)

बिहार के वैभव सूर्यवंशी आईसीसी टूर्नामेंट्स और इंडियन प्रीमियर लीग में अपनी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं लेकिन दिलीप ट्रॉफी में उन्होंने दिखाया कि वह गेंद से भी उतना ही कमाल कर सकते हैं। ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यंवशी ने आज दलीप ट्रॉफी क्वार्टरफाइनल में नॉर्थ इस्ट जोन के खिलाफ 4 गेंदों में 2 विकेट चटकाए। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के किशन को 25 रनों पर और इमलिवती को 4 रनों पर आउट किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

15 साल के इस खिलाड़ी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है। इस उभरते हुए बल्लेबाज ने इंग्लैंड में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 14, 13 और 15 रन बनाए। इनमें से दो पारियों में सूर्यवंशी जोफ्रा आर्चर की शॉर्ट गेंद पर आउट हुए। इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपने डेब्यू में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में प्रभावित किया। वहाँ उन्होंने कई मैचों में जीत दिलाने वाला प्रदर्शन किया और ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़’ चुने गए।

हालांकि इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने बिहार के लिए आठ प्रथम श्रेणी मैचों की 12 पारियों 17 से अधिक के औसत से रन बनाए हैं जो कि आकर्षक नहीं हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 93 रन है।ईस्ट ज़ोन ने एक मज़बूत टीम चुनी है जिसमें कई अनुभवी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। चुने गए प्रमुख खिलाड़ियों में भारत के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन, तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार, ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कुमार कुशाग्र शामिल हैं।

कभी भारत की टीम में जगह बनाने की चाह रखने वाले खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण टूर्नामेंट रहे दलीप ट्रॉफी अब महज बीसीसीआई के कैलेंडर में एक और टूर्नामेंट बनकर रह गया है क्योंकि अधिकतर खिलाड़ी टेस्ट टीम में जगह बनाने की दौड़ में नहीं हैं।

रणजी ट्रॉफी की तरह ही दलीप ट्रॉफी भी भारत ए की टीम में जगह बनाने का जरिया रह गया है। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सितंबर के आखिर और अक्टूबर की शुरुआत में पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए टीम के खिलाफ होने वाले दो चार दिवसीय ‘टेस्ट’ मैचों के लिए दावेदार हो सकते हैं।

श्रीलंका के कप्तान धनंजय टेस्ट टीम की इस कमी से हैं परेशान

श्रीलंका के कप्तान धनंजय डीसिल्वा चाहते हैं कि टीम के पास 140 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा रफ़्तार से गेंदबाज़ी करने वाले कम से कम “दो या तीन गेंदबाज़” होने चाहिए।धनंजय डीसिल्वा चाहते हैं कि उनके पास चुनने के लिए ज़्यादा तेज़ गेंदबाज़ हों, और वह मौजूदा तेज़ गेंदबाज़ों से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं।

असिता फ़र्नांडो पिछले कुछ वर्षों में अपने बेहतर प्रदर्शन के कारण श्रीलंका के प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ बन गए हैं। हालांकि वह 130 किमी प्रति घंटे के आसपास की रफ़्तार से लगातार सटीक लाइन-लेंथ और तीव्रता के साथ गेंदबाज़ी करते हैं। श्रीलंका आम तौर पर दूसरे छोर से अधिक रफ़्तार वाले गेंदबाज़ के ज़रिए बल्लेबाज़ों को परेशान करने की कोशिश करता है।

असिता के साथ यह भूमिका फ़िलहाल लहिरू कुमारा निभाते हैं, जिनके नाम 36 टेस्ट में 36.38 की औसत से 106 विकेट हैं। भारत के ख़िलाफ़ गॉल टेस्ट में उन्होंने 175 रन देकर सिर्फ़ दो विकेट लिए थे। इसके अलावा चोटों ने भी उनके करियर का बड़ा हिस्सा प्रभावित किया है।

दूसरे टेस्ट से पहले डीसिल्वा ने कहा, “हमने लहिरू कुमारा को चोट-मुक्त रखने के लिए बहुत मेहनत की है। फ़िलहाल हमारे संसाधनों को देखते हुए असिता के साथ खेलने के लिए वही सबसे उपयुक्त विकल्प हैं। असिता की लाइन और लेंथ बेहतरीन है और लहिरू कुमारा के पास रफ़्तार है। अभी हमारे पास यही सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।”

हालांकि डीसिल्वा चाहते हैं कि उनके पास ज़्यादा तेज़ गेंदबाज़ों के विकल्प हों। श्रीलंका के पास दुश्मंता चमीरा, दिलशान मदुशंका और मथीशा पथिराना जैसे गेंदबाज़ भी हैं। मदुशंका तो गॉल टेस्ट के लिए श्रीलंका की टेस्ट टीम का हिस्सा भी थे, लेकिन बाद में उन्हें घरेलू टी 20 खेलने के लिए रिलीज़ कर दिया गया और एसएससी टेस्ट के लिए भी टीम में जगह नहीं मिली।

चमीरा ने अपने करियर में 12 टेस्ट खेले हैं, लेकिन उनका आख़िरी टेस्ट 2021 में आया था। चोटों के इतिहास और सीमित ओवरों की टीम में उनकी अहमियत को देखते हुए श्रीलंका ने उन्हें सफ़ेद गेंद वाले क्रिकेट के लिए सुरक्षित रखा है।

चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने अभी तक बहु-दिवसीय क्रिकेट के लिए तेज़ गेंदबाज़ों का दायरा बढ़ाने की कोई गंभीर योजना नहीं बनाई है। डीसिल्वा ने कहा, “मैं यह भी चाहता हूं कि हमारे पास 140 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा रफ़्तार वाले दो या तीन गेंदबाज़ हों, लेकिन दुर्भाग्य से टेस्ट सेटअप में अभी हमारे पास सिर्फ़ एक ही ऐसा गेंदबाज़ है। फ़िलहाल मुझे इस बारे में कोई बड़ी योजना नहीं बताई गई है कि टेस्ट टीम में किन खिलाड़ियों को लाया जा सकता है। उम्मीद है कि भविष्य में हम ऐसे और क्रिकेटर तैयार करेंगे।”

डीसिल्वा की कप्तानी में आक्रमण में दो तेज़ गेंदबाज़ खिलाना एक नियमित रणनीति रही है। पूर्व कोच क्रिस सिल्वरवुड और सनथ जयसूर्या भी तेज़ गेंदबाज़ी प्रतिभा को विकसित करने पर ज़ोर देते रहे हैं। 2010 के दशक के उत्तरार्ध में श्रीलंका घरेलू मैदानों पर स्पिन पर इतना निर्भर हो गया था कि वह अक्सर सिर्फ़ एक तेज़ गेंदबाज़ के साथ खेलता था।

डीसिल्वा ने कहा, “मेरी कप्तानी में खेले गए हर मैच में हमने दो तेज़ गेंदबाज़ खिलाए हैं, जबकि पहले सिर्फ़ एक गेंदबाज़ होता था। मेरा मानना है कि श्रीलंका में भी तेज़ गेंदबाज़ों की भूमिका है। अगर आपके तेज़ गेंदबाज़ यहां विकेट ले सकते हैं तो वे दुनिया में कहीं भी विकेट ले सकते हैं। यह बात हमें जल्दी सीखनी होगी।”

पिछले 15 वर्षों में श्रीलंका में सिर्फ़ एक श्रीलंकाई तेज़ गेंदबाज़ ने पांच विकेट लेने का कारनामा किया है। नुवान प्रदीप ने 2017 में भारत के ख़िलाफ़ 132 रन देकर छह विकेट लिए थे। इसी अवधि में 14 विदेशी तेज़ गेंदबाज़ों ने श्रीलंका में पांच विकेट लिए हैं। मिचेल स्टार्क और जुनैद ख़ान ने यह उपलब्धि तीन-तीन बार हासिल की है।

डीसिल्वा ने कहा, “उदाहरण के लिए गॉल में विदेशी तेज़ गेंदबाज़ पांच विकेट ले चुके हैं, लेकिन हाल के वर्षों में हमारे किसी सीमर ने गॉल या एसएससी में ऐसा नहीं किया है। हमारे तेज़ गेंदबाज़ों में उस तरह का आत्मविश्वास नहीं है। अगर वे अपने खेल में कुछ प्रतिशत भी सुधार कर लें तो हम एक टीम के रूप में कहीं बेहतर आगे बढ़ सकते हैं।”

दूसरे टेस्ट के पहले दिन गिरे 18 विकेट, स्टार्क के बाद शोरिफुल का जलवा

AUSvsBAN मैके में एक रोमांचक पहले दिन 18 विकेट गिरे। क्वींसलैंड के इस तटीय मैदान पर पहले टेस्ट के शुरुआती दिन बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों ने छह-छह विकेट लेकर इसे पुराने ज़माने के गेंदबाज़ों का खेल बना दिया। डार्विन में मिली करारी हार के कुछ ही दिनों बाद, ऑस्ट्रेलिया ने ज़बरदस्त वापसी की। मिशेल स्टार्क के शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने बंगलादेश को 64 रन पर ऑल-आउट कर दिया – जो उनका चौथा सबसे कम टेस्ट स्कोर है। हालांकि, बाद में ऑस्ट्रेलिया की पारी भी लड़खड़ाई, लेकिन दिन का खेल खत्म होने तक उन्होंने 101 रनों की अहम बढ़त बना ली।

पैट कमिंस ने टॉस जीता और बिना किसी हिचकिचाहट के बंगलादेश को पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया। इसके बाद स्टार्क ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मैच की पहली ही गेंद पर शादमान इस्लाम को गली में कैच आउट करा दिया। विकेटों के गिरने का सिलसिला तेज़ी से चला; टॉप-6 बल्लेबाज़ों में से चार बिना खाता खोले आउट हो गए और बंगलादेश का स्कोर सात ओवर के अंदर 5 विकेट पर 12 रन हो गया।

नई गेंद के साथ स्टार्क की गति और स्विंग का बल्लेबाज़ों के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने 22 गेंदों के अंदर पांच बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेज दिया, लेकिन मुशफिकुर रहीम के डटकर खेलने की वजह से उन्हें हैट्रिक का मौका नहीं मिला। पारी के बीच में थोड़ी देर के लिए बंगलादेश की स्थिति संभली। मेहदी हसन मिराज और हसन महमूद ने पहला सेशन निकाला और ब्रेक तक बांग्लादेश का स्कोर 6 विकेट पर 35 रन तक पहुंचा, लेकिन यह राहत ज़्यादा देर नहीं रही। लंच के बाद कमिंस ने दो और विकेट लिए, जबकि जोश हेज़लवुड ने भी एक विकेट चटकाया।

इसके बाद स्टार्क ने वापसी की और बाकी बचे विकेट लेकर 10 ओवर में 12 रन देकर 6 विकेट का शानदार कारनामा पूरा किया। इस प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने डेल स्टेन के 439 टेस्ट विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बंगलादेश की टीम सिर्फ़ 34 ओवर में ऑल-आउट हो गई। दूसरे सेशन के एक घंटे से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई। निचले क्रम के बल्लेबाजों की हिम्मत भरी बल्लेबाजी की वजह से ही वे इस फ़ॉर्मेट में अपने अब तक के सबसे कम स्कोर (वेस्टइंडीज के खिलाफ़ 43 रन) से आगे निकल पाए।

वापसी कर रहे मैट रेनशॉ, ट्रैविस हेड और मार्नस लाबुशेन के नाकाम रहने के बावजूद, ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी रही। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि वे दिन का खेल पूरी तरह से दबदबे के साथ खत्म करेंगे। स्टीवन स्मिथ और कैमरन ग्रीन ने ऐसी पिच पर बल्लेबाजी को आसान बना दिया, जिसने सुबह से ही बल्लेबाजों को परेशान किया था। उन्होंने हल्के हाथों से गैप में शॉट खेले और छोटी या सीधी गेंदों का फायदा उठाकर स्कोरिंग रेट को पांच रन प्रति ओवर से ऊपर पहुंचाया। इस जोड़ी ने चौथे विकेट के लिए सिर्फ़ 108 गेंदों में 77 रन जोड़े।

फिर शोरिफुल इस्लाम की धीमी गेंद का कमाल दिखा। बांग्लादेश की पारी में सबसे ज़्यादा 14 रन बनाने और हेड व लाबुशेन का विकेट लेने के बाद, इस बाएं हाथ के गेंदबाज ने वही अनुशासन और लाइन-लेंथ दिखाई जिससे स्टार्क को दिन की शुरुआत में सफलता मिली थी। उन्होंने सबसे अहम विकेट लिया और आखिरी सेशन में ड्रिंक्स ब्रेक के ठीक समय पर स्मिथ को 42 रन पर पगबाधा आउट कर दिया।

यहीं से पारी का रुख बदल गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए जो दिन अब तक आसान लग रहा था, वह अचानक मुश्किलों में घिर गया। एलेक्स कैरी आगे बढ़कर खेलने की कोशिश में लेंथ बॉल को ठीक से नहीं खेल पाए और मिड-ऑन पर कैच दे बैठे, जिससे ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 5 विकेट पर 145 रन हो गया। इसके बाद उन्होंने 3 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए; शोरिफुल ने ब्यू वेबस्टर और पैट कमिंस को शून्य पर आउट किया और फिर स्टार्क को भी बोल्ड कर दिया।

इन सबके बीच, एक खिलाड़ी अडिग रहा। कैमरन ग्रीन ने उसी स्पष्टता और शांति के साथ बल्लेबाजी की, जो उन्हें डार्विन में फॉर्म में वापसी वाली सेंचुरी के दौरान मिली थी। उनकी नाबाद 51 रनों की पारी वाकई शानदार थी, खासकर ऐसी पिच पर जिसने लगभग हर दूसरे बल्लेबाज को मुश्किल में डाला था। उनके डटे रहने की वजह से ऑस्ट्रेलिया दिन का खेल खत्म होने तक 101 रन आगे रहा। पहले दिन की उथल-पुथल को देखते हुए यह बढ़त काफी अहम साबित हो सकती है।

संक्षिप्त स्कोर: बांग्लादेश 64 (शोरिफुल इस्लाम 14; मिशेल स्टार्क 6-12, पैट कमिंस 3-25), ऑस्ट्रेलिया 165/8 (कैमरन ग्रीन 51*, स्टीव स्मिथ 42; शोरिफुल इस्लाम 6-35) से 101 रन पीछे।

पहले टेस्ट के तीसरे ही दिन पाकिस्तान को मिली इंग्लैंड के हाथों पारी की हार

ENGvsPAK

ENGvsPAK तेज गेंदबाजों ओली रॉबिन्सन, जोफ्रा आर्चर और जोश टंग के तीन-तीन विकेटों की बदौलत इंग्लैंड ने पाकिस्तान को पहले टेस्ट के तीसरे ही दिन शुक्रवार को पारी और 103 रन से पीट दिया। यह सिर्फ़ दूसरी बार है जब इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों ने टेस्ट मैच में पाकिस्तान के सभी 20 विकेट लिए हैं; इससे पहले 2001 में लॉर्ड्स में ऐसा हुआ था।लीड्स में पाकिस्तान को लगातार दूसरी बार पारी से हार का सामना करना पड़ा है; इससे पहले 2018 में भी उन्हें पारी और 55 रनों से हार मिली थी।

गेंदबाज़ी में भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। पाकिस्तान ने कई मौके गंवाए और दूसरे दिन लंबे समय तक कोई खास असर नहीं डाल पाए, जिससे इंग्लैंड को पहली पारी में बड़ी बढ़त बनाने का मौका मिल गया। इंग्लैंड ने खत्म होने कल के 8 विकेट पर 366 रन से आगे खेलते हुए पहली पारी में 409 रन बनाये और 238 रन की भारी बढ़त हासिल की।

हेडिंग्ले को अपनी पसंदीदा जगह बनाने वाली टीम के खिलाफ़, उन मौकों को गंवाना भारी पड़ने वाला था। इंग्लैंड ने शानदार खेल दिखाया और एक बार बढ़त बनाने के बाद, उन्होंने मेहमान टीम को मैच में वापसी का कोई मौका नहीं दिया। मैच से पहले जो रूट ने इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण की विविधता और गहराई के बारे में बात की थी और बताया था कि वह अपने पास मौजूद अलग-अलग तरह के कौशल को लेकर कितने उत्साहित हैं।

उनके गेंदबाज़ निश्चित रूप से उम्मीदों पर खरे उतरे। आर्चर, एटकिंसन, रॉबिन्सन और टंग ने स्टंप्स पर लगातार गेंदबाज़ी की, सही लेंथ पर गेंद डाली और पूरे मैच के दौरान अपनी योजनाओं में बेहतरीन बदलाव किए। इन सभी ने मिलकर पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखा और यह सुनिश्चित किया कि इंग्लैंड का मैच पर पूरा नियंत्रण रहे।

पाकिस्तान को थोड़ी किस्मत की ज़रूरत थी, और बाबर आज़म के चोट के कारण बाहर होने के बाद तो इसकी और भी ज़्यादा ज़रूरत थी। लेकिन किस्मत अक्सर उनका साथ देती है जो छोटे-छोटे मौकों का भी पूरा फ़ायदा उठाते हैं, और पाकिस्तान इस टेस्ट में ऐसा करने में नाकाम रहा। वे टॉस हार गए और फिर कई अहम मौके गंवा दिए।

मैच की शुरुआत में एक छोटा सा समय ऐसा आया जब इमाम-उल-हक और अब्दुल्ला शफ़ीक़ की 91 रनों की साझेदारी ने उन्हें कुछ हद तक नियंत्रण दिलाया, लेकिन उनमें से किसी एक को उस अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने की ज़रूरत थी। इसके बजाय, जोश टंग के खिलाफ़ इमाम के आक्रामक शॉट ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दीं और टीम 117/3 से 171 रन पर ऑल आउट हो गई।

जुलाई 2023 से पाकिस्तान ने विदेश में सिर्फ़ दो टेस्ट मैच जीते थे, और अगर इंग्लैंड में कोई ऐसी जगह थी जहाँ वे अपना रिकॉर्ड सुधारने की कोशिश बिल्कुल नहीं करना चाहते, तो हेडिंग्ले उनमें से एक थी। पिछले दशक में यह इंग्लैंड के लिए एक अभेद्य किला रहा है, और इस जीत के साथ यहाँ खेले गए पिछले नौ टेस्ट मैचों में उनकी यह आठवीं जीत है। इनमें से चार जीत पारी के अंतर से मिली हैं, और दिलचस्प बात यह है कि ये सभी एशियाई टीमों के खिलाफ़ थीं – दो बार पाकिस्तान के खिलाफ़, एक बार भारत के खिलाफ़ और एक बार श्रीलंका के खिलाफ़।

पाकिस्तान की तरफ से मोहम्मद रिजवान ने 41 और शान मसूद ने 29 रन बनाये। ओली रॉबिन्सन, जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने तीन-तीन विकेट लेकर पाकिस्तान का दूसरी पारी में पुलिंदा 135 रन पर बाँध दिया जबकि गस एटकिंसन ने एक अन्य विकेट हासिल किया। ओली रॉबिन्सन को मैच में कुल आठ विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

IPL 2027 में नहीं भाग लेंगे प्रमुख ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी, कोच ने दिए संकेत

ऑस्ट्रेलिया के हेड कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने संकेत दिया है कि अगले साल IPL 2027 में टीम के टेस्ट खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर कुछ कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं, क्योंकि शेड्यूल बहुत व्यस्त है और एशेज़ से पहले तेज़ गेंदबाजों का मैनेजमेंट खास तौर पर अहम है।

ऑस्ट्रेलिया गुरुवार को डार्विन और मैके में बांग्लादेश के खिलाफ़ मैच के साथ 12 महीनों में 20 टेस्ट और 14 व्हाइट-बॉल गेम का सिलसिला शुरू करेगा। इस दौरान ज़िम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका में छह वनडे, दक्षिण अफ्रीका में तीन टेस्ट, घर पर इंग्लैंड के खिलाफ़ आठ व्हाइट-बॉल गेम, न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ चार घरेलू टेस्ट, भारत का पांच-टेस्ट का दौरा, मार्च में इंग्लैंड के खिलाफ़ 150वीं वर्षगांठ का एक घरेलू टेस्ट और फिर जून और जुलाई में इंग्लैंड का पांच-टेस्ट का दौरा शामिल है।

इस लिस्ट में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भी जुड़ सकता है। इसके बाद अगस्त के आखिर में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ घरेलू व्हाइट-बॉल सीरीज़ होने की संभावना है, जिसके बाद अक्टूबर और नवंबर में वनडे वर्ल्ड कप होगा।

ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा पहली पसंद के टेस्ट और वनडे खिलाड़ियों में से पांच – पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क, जोश हेज़लवुड, कैमरन ग्रीन और ट्रैविस हेड – आईपीएल लिस्ट में हैं, लेकिन रिटेंशन की समय-सीमा और इस साल के आखिर में होने वाली नीलामी के बाद यह बदल सकता है। वनडे विकेटकीपर और टेस्ट बैक-अप जोश इंग्लिस भी लखनऊ की मौजूदा टीम का हिस्सा हैं।

मैकडोनाल्ड ने एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट से कहा, “मुझे पता है कि लोग आईपीएल और उस समय का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इस बारे में बात करेंगे। मैंने पहले भी कहा है कि आईपीएल हमारे कई खिलाड़ियों के लिए हमारे मैनेजमेंट प्लान का हिस्सा है। टी20 क्रिकेट के लिहाज़ से सबसे अच्छे कॉम्पिटिशन में अपने सबसे अच्छे खिलाड़ियों को खेलने का मौका देने से उनके परफॉर्मेंस में भी फ़ायदा होता है। बस आपको इसमें बैलेंस बनाना होता है।”

उपलब्धता को लेकर पहले ही तनाव

भारत और ऑस्ट्रेलिया में आईपीएल के लिए उन खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर पहले ही तनाव रहा है। पिछले सीज़न में दिल्ली कैपिटल्स, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद तब निराश हुए थे जब स्टार्क, हेज़लवुड और कमिंस टूर्नामेंट में देर से पहुंचे थे, क्योंकि वे सीए की देखरेख में चोट की समस्याओं से निपट रहे थे।

ऑस्ट्रेलिया में तब हैरानी हुई थी जब नेशनल सेलेक्टर्स ने इन तीनों और हेड को पाकिस्तान और बांग्लादेश के दो व्हाइट-बॉल टूर से बाहर रखने का फ़ैसला किया, जबकि उन्हें आईपीएल खेलने की इजाज़त दी गई थी, ताकि वे आराम कर सकें और आगे के मुश्किल शेड्यूल के लिए तैयारी कर सकें।

IPL 2027 के दौरान आराम करने की योजना

ऑस्ट्रेलिया के उम्रदराज़ तेज़ गेंदबाज़ों के लिए बिना खेले, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग के लिए शेड्यूल में आठ हफ़्ते का ब्रेक मिलना उनकी फ़िटनेस और 30 के दशक के बीच तक लंबे समय तक सफलता के लिए बहुत ज़रूरी रहा है। 2027 में आईपीएल का समय – जो जून में डब्ल्यूटीसी फ़ाइनल से पहले मार्च के बीच से मई के अंत तक चलने की संभावना है – एकमात्र ऐसा ब्लॉक है जब ऑस्ट्रेलिया के पास अभी से 2027 के अंत तक कोई इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं होगा। आईपीएल ने उन विदेशी खिलाड़ियों के लिए दो साल का बैन लगाया है जो ऑक्शन के दौरान साइन करते हैं और फिर बिना किसी चोट के बाद में हट जाते हैं।

मैकडोनाल्ड ने कहा, “मुझे पता है कि लोग देश बनाम फ्रेंचाइज़ी और ऐसी बातें करते हैं, लेकिन इस समय का अहम हिस्सा यह है कि हम अपने तेज़ गेंदबाज़ों को अपने शरीर को रीसेट करने और सब कुछ ठीक करने का मौका दे रहे हैं, ताकि वे उन 20 या 21 मैचों में अपना बेस्ट दे सकें जिनकी हर कोई बात करता है।”

कड़ा हुआ खिलाड़ियों का फिटनेस टेस्ट, 5 मिनट में दौड़ने होगे 1200 मीटर

Team India

भारतीय खिलाड़ियों का फिटनेस परीक्षण पहले यो यो टेस्ट से होता था लेकिन अब रग्बी के खेल में फिटनेस जांचने का टेस्ट जिसे BRONCO कहते हैं वह अब भारतीय क्रिकेट टीम अपनाने वाली है। यह टेस्ट योयो टेस्ट से भी काफी कठिन होने वाला है।

ब्रोंको टेस्ट एक प्रशिक्षण अभ्यास है जिसमें खिलाड़ी 20 मीटर शटल रन से शुरुआत करता है, जिसके बाद 40 मीटर और 60 मीटर की दौड़ भी होती है। ये तीन रन मिलकर एक सेट बनाते हैं। गौरतलब है कि एक खिलाड़ी को ऐसे पाँच सेट करने होते हैं, जो बिना रुके कुल 1200 मीटर दौड़ के बराबर होंगे। खिलाड़ियों को यह टेस्ट छह मिनट में पूरा करना होता है।

समझा जाता है कि टीम के कुछ खिलाड़ी पहले ही बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के बेंगलुरु स्थित उत्कृष्टता केंद्र में ब्रोंको टेस्ट दे चुके हैं। ब्रोंको टेस्ट के अलावा, बीसीसीआई भारतीय टीम के सितारों के लिए फिटनेस टेस्ट के तौर पर यो-यो टेस्ट और 2 किलोमीटर का टाइम ट्रायल भी आयोजित करता है।

गौरतलब है कि ले रॉक्स जून 2025 में भारतीय टीम में स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच के रूप में शामिल हुए थे; जनवरी 2022 से मई 2023 तक टीम इंडिया में भी वह इसी पद पर थे और दक्षिण अफ्रीका के कोचिंग स्टाफ का भी हिस्सा रहे। इसके अलावा, उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स और पंजाब किंग्स जैसी आईपीएल टीमों में भी काम किया।

भारत के कई अनुबंधित खिलाड़ी इस टेस्ट के लिए बेंगलुरु पहुंचे

गौरतलब है कि भारत के कुछ अनुबंधित खिलाड़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शुरू किए गए ब्रोंको टेस्ट के लिए बेंगलुरु पहुँच चुके हैं। यह टेस्ट फिटनेस मानकों को बनाए रखने के लिए शुरू किया गया है और कोच तेज़ गेंदबाज़ों के लिए वेट ट्रेनिंग की बजाय रनिंग ड्रिल को ज़्यादा प्राथमिकता देने पर विचार कर रहे हैं।

एक प्रतिश्ठित अंग्रेजी अखबार के सूत्र के हवाले से बताया, “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ब्रोंको टेस्ट शुरू किया गया है। भारत के कुछ अनुबंधित खिलाड़ी बेंगलुरु पहुँच चुके हैं और उन्होंने यह टेस्ट दिया है। ब्रोंको टेस्ट का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि फिटनेस मानक स्पष्ट हों।”