केरल में दिल दहला देने वाला हादसा: खड़े ट्रक से टकराई तेज रफ्तार कार, इंजीनियरिंग के 8 छात्रों की मौत

केरल में दिल दहला देने वाला हादसा: खड़े ट्रक से टकराई तेज रफ्तार कार, इंजीनियरिंग के 8 छात्रों की मौत

Kerala Road Accident

केरल के त्रिशूर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक भीषण सड़क हादसे में तमिलनाडु के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 8 छात्रों की मौत हो गई। कार सड़क किनारे खड़ी लॉरी से जा टकराई थी। 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक घायल अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ गया।

 

यह हादसा आधी रात के करीब पनामबिकुन्नु सेंटर के पास हुआ। इसके तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ। मीडिया खबरों के अनुसार, कार में सवार लोग तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र थे। घटनास्थल से डिंडीगुल के पीएसएनए इंजीनियरिंग कॉलेज के एक छात्र का पहचान पत्र बरामद हुआ है।

 

बताया जा रहा है कि छात्रों से भरी कार गुरुवायूर से कोडुंगल्लूर की ओर जा रही थी। तभी सड़क पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण उसी दिशा में खड़ी लॉरी से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर से कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोगों को बाहर निकालने के लिए गाड़ी को काटकर खोलना पड़ा। 

Teacher day 2026: 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर इस बार क्या है खास

Teacher day 2026:  5 सितंबर शिक्षक दिवस पर इस बार क्या है खास

Teacher day 2026

Teacher day 2026: भारत में हर साल 5 सितंबर को देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान विद्वान और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। देशभर के स्कूलों में कार्यक्रम का आयोजन होता है। चलिए जानते हैं इस अवसर पर आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रम और विशेषताएं।

 

1. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026

राष्ट्रपति द्वारा सम्मान: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू देश भर से चुने गए उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित करेंगी।

48 चयनित शिक्षक: इस वर्ष देश भर से 48 उत्कृष्ट शिक्षकों (26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक) का चयन किया गया है, जिन्होंने शिक्षा, शिक्षण में नए प्रयोग (इनोवेशन) और छात्रों के सर्वांगीण विकास में असाधारण योगदान दिया है।

 

2. विद्यालयों एवं कॉलेजों में विशेष आयोजन

भूमिका अदला-बदली (Role Reversal): वरिष्ठ छात्र (Senior Students) एक दिन के लिए शिक्षक बनकर निचली कक्षाओं को पढ़ाते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था संभालते हैं, जिससे वे शिक्षकों की मेहनत और उत्तरदायित्व को समझ सकें।

सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं: छात्रों द्वारा शिक्षकों के लिए नाटक, नृत्य, संगीत और रोचक खेल (जैसे- क्विज़, रैपिड-फायर) आयोजित किए जाते हैं।

'थैंक यू' कार्ड और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति: छात्र अपने पसंदीदा शिक्षकों को हस्तनिर्मित कार्ड, पत्र व पुष्प गुच्छ देकर उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

 

3. डिजिटल एवं सोशल मीडिया पहल

ऑनलाइन माध्यमों और सोशल मीडिया पर छात्र #TeachersDay2026 और #ThankYouTeacher जैसे अभियानों के जरिए अपने शिक्षकों, प्रोफेसरों और मेंटर्स के प्रति अपने अनुभव और आभार संदेश साझा करते हैं।

 

शिक्षक दिवस का मुख्य संदेश

यह दिन हमें याद दिलाता है कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि वे चरित्र निर्माण, मूल्यों के विकास और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं।

PM-YASASVI Scholarship: पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप के लिए कक्षा 9 से 12 के छात्र कर सकते हैं आवेदन, जानें आवेदन का तरीका और लास्ट डेट

PM-YASASVI Scholarship: कक्षा 9 से 12 तक के बहुत छात्रों के लिए अपनी पढ़ाई पैसों की कमी के चलते जारी रखना मुश्किल होता है। इस वजह से असंख्य छात्र हर साल 10वीं या 12वीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी करने से वंचित रह जाते हैं। पीएम यशस्वी छात्रवृत्ति ऐसे छात्रों को शिक्षा की उनकी मंजिल तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। यह स्कॉलरशिप केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दी जाती है। यह छात्रवृत्ति अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EBC), और विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT) के योग्य छात्रों को आर्थिक मदद देती है। इस स्कीम का मकसद इन समुदायों के छात्रों को बिना किसी आर्थिक परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है। पात्र छात्र 31 अगस्त 2026 तक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 9 से 12 के लिए स्कॉलरशिप सपोर्ट

पीएम यशस्वी स्कीम कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को सहयोग प्रदान करती है। इस स्कॉलरशिप का मकसद पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने और छात्रों को उनकी सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी पढ़ाई के दौरान मदद करना है। इस आर्थिक मदद का इस्तेमाल लागू गाइडलाइन के अनुसार, ट्यूशन फीस, हॉस्टल चार्ज और दूसरी पढ़ाई की जरूरतों सहित पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए किया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि इस स्कीम का मकसद पिछड़े बैकग्राउंड के मेधावी छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और अपने पढ़ाई के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

ऑनलाइन योग्यता चेक करें छात्र

पीएम यशस्वी योजना के तहत चयन प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इस प्रक्रियाका मकसद पारदर्शिता पक्का करना और योग्य छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने का बराबर मौका देना है। केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस छात्रवृत्ति योजना के बारे में डिटेल्स शेयर कीं और छात्रों और अभिभावकों से गाइडलाइंस को ध्यान से पढ़ने को कहा। उन्हें और जानकारी पाने में मदद के लिए एक QR कोड भी दिया गया।

नोट करें आवेदन और वेरिफिकेशन की तारीख

इस स्कॉलरशिप के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर नए और नवीनीकरण (रिन्यूअल) दोनों श्रेणी के छात्र 1 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद शिक्षण संस्थान 15 सितंबर 2026 तक आवेदनों का सत्यापन करेंगे। मंत्रालय स्तर पर अंतिम सत्यापन 30 नवंबर 2026 तक इस काम को पूरा किया जाएगा।

पीएम यशस्वी योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

  • नेशनल स्कॉलरशिप की वेबसाइट scholarships.gov.in पर जाएं।
  • New Registration पर क्लिक करें, दिशानिर्देश पढ़ें और रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें।
  • इसके बाद User ID और Password मिल जाएगा।
  • एनएसपी पोर्टल पर आईडी और पासवर्ड से Log-in करें।
  • स्कॉलरशिप चुनें और आवेदन फॉर्म भरें।
  • डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें और सबमिट करें।
  • इसके बाद स्कूल के नोडल अधिकारी ऑनलाइन वेरिफिकेशन करेंगे।
  • बाद में राज्य सरकार भी इसकी ऑनलाइन पुष्टि कर देगी।

पीएम यशस्वी योजना के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत

  • आधार कार्ड
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • एजुकेशन सर्टिफिकेट
  • इनकम सर्टिफिकेट
  • निवास प्रमाण पत्र
  • जाति/समुदाय प्रमाण पत्र
  • विकलांगता प्रमाण पत्र, यदि लागू हो
  • बैंक खाता विवरण

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झारखंड प्रदर्शन: छात्र नेता देवेंद्र महतो ने खत्म की भूख हड़ताल! JSSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से TDPL की सभी परीक्षाओं की होगी जांच

Jharkhand students protest: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड में अहम परीक्षाएं रद्द होने के बाद अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद लिया गया। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा और TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं एवं भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।

सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की एक लंबी बैठक में लिया गया।

सोरेन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा, “सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तर (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी नतीजों को भी रद्द करने का फ़ैसला किया है।”

उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति के गठन की भी घोषणा की। सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंतित है। सीएम ने कहा कि उसने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले ही ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम’ लागू कर दिया है।

सीएम ने बड़ा आरोप

सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह में संलिप्त प्रतीत होती हैं। राज्य में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने हालांकि कहा है कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)से जांच कराने की उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

इस बीच, जेएसएससी-सीजीएल पास करके सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो लगभग 2,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र महतो ने कहा कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।

क्या है मांग?

सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी था। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने रांची में कहा कि आंदोलनकारी छात्रों से अपील की जा रही है कि वे अपना प्रदर्शन समाप्त कर दें क्योंकि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा को निरस्त किया है वे कानूनी रास्ता अपनाने को स्वतंत्र हैं।

अब आगे क्या होगा?

झारखंड सरकार के फैसले के बाद अब JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाएं जांच के घेरे में हैं। सबसे अहम बात यह है कि जांच का दायरा केवल हाल की परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। CID 2014 से TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं की पड़ताल करेगी। जबकि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली अलग समिति कथित अनियमितताओं की जांच करेगी।

JMM सरकार का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य छात्रों की शिकायतों का समाधान करना और झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है। अब जांच के नतीजों पर नजर रहेगी कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।

NALSAR छात्रों के समर्थन में उतरे CJI सूर्यकांत, बार काउंसिल को लगाई फटकार और अपनी स्टूडेंट लाइफ को याद कर ये सब कहा

हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के विरोध से उपजे विवाद में अब खुद चीफ जस्टिस स्टूडेंट्स के समर्थन में आ गए हैं। हमारी सहयोगी सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने BCI के हालिया निर्देश पर कड़ा रुख अपनाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने कानून के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को प्रोटेक्शन करते हुए निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

सुनवाई के दौरान BCI के हस्तक्षेप को पूरी तरह से गैरजरूरी बताते हुए CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यह उनके और स्टू़डेंट्स के बीच का मामला है। CJI ने कहा कि छात्रों ने मुझे पत्र लिखा है। BCI बीच में दखल देने वाला कौन होता है?

BCI को नोटिस जारी, सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने BCI द्वारा जारी किए गए (और बाद में वापस लिए गए) उस निर्देश पर स्पष्टीकरण मांगा है जिसमें NALSAR के छात्रों को निशाना बनाया गया था। अदालत ने BCI को नोटिस जारी कर पूछा कि यह निर्देश कैसे जारी किया गया था और क्या यह फैसला लेने से पहले बार काउंसिल ने कोई बैठक बुलाई थी? अदालत में दाखिल याचिका में दावा किया गया था कि BCI के कुछ सदस्यों को तो इस कार्रवाई के बारे में जानकारी तक नहीं थी।

छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, हमें बड़ा दिल दिखाना चाहिए- चीफ जस्टिस

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों के कदम शांतिपूर्ण हैं तब तक उन्हें अपने असंतोष या असहमति को व्यक्त करने का पूरा अधिकार है, भले ही उनके विचारों को गलत ही क्यों न माना जाए। CJI ने कहा कि भले ही वे गलत हों, जब तक वे शांतिपूर्ण हैं, उन्हें विरोध करने का अधिकार है। अपनी स्टूडेंट्स लाइफ को याद करते हुए CJI ने बताया कि वे खुद अपने छात्र दिनों के दौरान इस तरह की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हमें बड़ा दिल दिखाना चाहिए और छात्रों को अपनी असहमति व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए, भले ही उनके बयान गलत क्यों न माने जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों और फैकल्टी को दिया संरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कॉलेजों के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की है और निर्देश दिया है कि यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में CJI का विरोध करने के सिलसिले में किसी के भी खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए।

कैसे शुरू हुआ था यह पूरा विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब NALSAR के छात्रों के एक समूह ने 2026 के कनवोकेशन में CJI सूर्यकांत की प्रस्तावित भागीदारी का विरोध किया और अपनी आपत्तियां उन तक पहुंचाईं। इसके जवाब में BCI ने 13 अगस्त को एक कड़ा निर्देश जारी कर सभी राज्य बार कौंसिलों से कह दिया था कि वे अगले आदेश तक NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रैजुएट स्टूडेंट को वकील के रूप में इनरॉल न करें। इसके अलावा BCI ने यूनिवर्सिटी से उन छात्रों की पहचान करने वाली एक रिपोर्ट मांगी थी जिन्होंने इस अभियान को शुरू किया या इसमें हिस्सा लिया।

हालांकि BCI ने यह फैसला अंतरिम रखा था लेकिन इसकी वजह से पूरे पास-आउट बैच का प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन एक तरह से रुक जाता। बाद में BCI ने अपने रुख में संशोधन करते हुए NALSAR के 2026 बैच के स्नातकों को अपनी पसंद के किसी भी राज्य बार काउंसिल में इनरॉल होने की इजाजत दे दी थी, लेकिन जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए जांच रिपोर्ट मांगने की शर्त बरकरार रखी थी।

इसके बाद NALSAR ने इस जांच की संवैधानिकता और अपने शासन नियमों पर सवाल उठाते हुए मामले को अपनी कार्यकारी परिषद के समक्ष रखने का फैसला किया था। वरिष्ठ वकीलों, छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों की चौतरफा आलोचना के बाद, BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि काउंसिल ने अपना आदेश पूरी तरह से वापस ले लिया है और कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।

मनन मिश्रा ने कहा कि BCI इस बात से संतुष्ट है कि पास-आउट बैच की किसी भी उपद्रव या आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी और आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

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Video: यूपी में सड़क के लिए DM ऑफिस पहुंच गए Gen Alpha बच्चे, हमीरपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मांगने लगे जवाब

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से जनरेशन अल्फा को लेकर एक अनोखी खबर आ रही है। हमीरपुर में मंगलवार को स्कूली बच्चों ने अपने स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बच्चों का एक समूह अपने माता-पिता के साथ स्कूल से निकलकर डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस पहुंचा। हाथों में तिरंगा लेकर बच्चों (जनरेशन अल्फा) ने नारे लगाए और गांव से स्कूल तक जाने वाली खराब सड़क को जल्द ठीक कराने की मांग की। छात्रों ने कहा कि, सड़क की खराब हालत के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है। वहीं बारिश के दिनों में वहां से गुजरना और भी मुश्किल हो जाता है।

बच्चों के इस प्रदर्शन से डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन भी हैरान रह गया। बड़ी संख्या में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों से सड़क की समस्या को जल्द दूर करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल बच्चे हमीरपुर के कुरारा ब्लॉक की चंदूपुर ग्राम पंचायत के अलग-अलग गांवों और बस्तियों से आए थे।

आने-जाने में होती है दिक्कत

छात्रों और उनके माता-पिता का कहा कि, इस इलाके में करीब 3,000 लोग रहते हैं और यहां आने-जाने के लिए कच्ची सड़क ही मुख्य रास्ता है। तेज बारिश होने पर यह सड़क कीचड़ से भर जाती है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। इतना ही नहीं, किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। छात्रों का आरोप है कि पहले आने-जाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक दूसरा रास्ता वन विभाग ने बंद कर दिया है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

 

पहले भी किया है प्रदर्शन

सड़क की समस्या को लेकर बच्चों ने पहले भी आवाज उठाई थी। छात्रों ने 3 जुलाई को भी सड़क को लेकर प्रदर्शन किया था। तब मिट्टी डालकर रास्ता ठीक किया गया, लेकिन बारिश में सड़क फिर खराब हो गई। स्थायी समाधान न मिलने पर छात्र डीएम कार्यालय पहुंच गए। बच्चे तिरंगा और बैनर लेकर जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे तो प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने बच्चों को आगे जाने से रोकने की कोशिश की।

पुलिस ने की छात्रों को रोकने की कोशिश

सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार और सर्कल ऑफिसर यशपाल सिंह पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे और छात्रों से बातचीत करने की कोशिश की। लेकिन अपनी मांग को लेकर छात्र पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए और डीएम कार्यालय की ओर आगे बढ़ते रहे। पुलिस और एडमिनिस्ट्रेटिव की टीम ने छात्रों को कलेक्ट्रेट के गेट पर रोक दिया, जिसके बाद बच्चे वहीं बैठकर प्रदर्शन करने लगे। कुछ देर तक छात्रों ने नारे लगाते हुए अपने गांव से स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की मांग की। छात्रों ने साफ कहा कि जब तक सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में भी छात्रों ने इसी तरह सड़क की समस्या को लेकर प्रदर्शन किया था। उनके विरोध के बाद प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान दिया था।

Jharkhand Students Protest: झारखंड में अनशन पर बैठे छात्र नेता की बिगड़ी तबीयत! कविता, कटाक्ष और पोस्टर बने हथियार, सरकार आज फिर करेगी बातचीत

Jharkhand Students Protest: झारखंड सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16वें दिन भी जारी छात्रों के आंदोलन के बीच रविवार (9 अगस्त) को प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ फिर बातचीत करेगी। सरकार और छात्र संगठनों के बीच शुक्रवार रात और शनिवार को दिनभर हुई बैठकों के बावजूद गतिरोध दूर नहीं हो सका। इसके बाद रविवार को एक और दौर की बातचीत करने का फैसला लिया गया। इस बीच, रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में करीब एक सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की हालत शनिवार देर रात करीब तीन बजे अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसका ब्लड शुगर लेवल 53 दर्ज किया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के साथ शुक्रवार रात बातचीत की थी। इसके बाद शनिवार को सरकार ने विभिन्न छात्र संगठनों के साथ चार दौर की बातचीत की जिनमें कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ शामिल हैं। ये बैठकें बेनतीजा रहने के बाद सरकार ने रविवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र प्रतिनिधियों के साथ छठे दौर की बातचीत करने का फैसला किया।

राजनीतिक चालबाजी का आरोप

इस फैसले के तुरंत बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सरकार पर राजनीतिक चालबाजी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच फूट डालना और उनकी मुख्य मांगों से लोगों का ध्यान भटकाना है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे संगठनों के साथ बातचीत कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिनकी मौजूदा आंदोलन में कोई भूमिका नहीं रही।

पासवान ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पत्रकारों से कहा, “यह सरकार की राजनीतिक चाल है। वह छात्रों में विभाजन पैदा करने और लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसे पता होना चाहिए कि सभी छात्र एकजुट हैं।” पासवान ने दावा किया कि जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने शुक्रवार रात पांच सदस्यीय सरकारी समिति के सामने अपनी सभी मांगें रख दी थीं।

हालांकि, शनिवार को मंत्रियों दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार, चामरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव वाली समिति ने एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ सहित विभिन्न छात्र संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरानलउनसे उनकी मांगों का डिटेल्स मांगा।

सरकार बातचीत जारी रखेगी

सरकार ने हालांकि कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई। वह प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की चिंताओं पर विचार कर रही है। रविवार को फिर बातचीत करने का फैसला शनिवार शाम सरकारी समिति और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच चार घंटे की बैठक के बाद लिया गया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि समिति ने मुख्यमंत्री को छात्र प्रतिनिधिमंडलों की ओर से उठाई गई मांगों और चिंताओं से अवगत कराया। मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में व्यापक सुधार की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार बातचीत जारी रखेगी।

छात्र मोर्चा ने रखी 5 मांगें

झारखंड छात्र मोर्चा ने पांच मांगें रखी हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द करना शामिल है। वहीं एनएसयूआई ने छह मांगें रखीं, जिनमें संदेह के घेरे में आने वाली सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की तर्ज पर झारखंड परीक्षा एजेंसी की स्थापना शामिल है। आदिवासी छात्र संघ के नेता कार्तिक उरांव ने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्य योग्यता वाले विषयों के रूप में शामिल करने तथा जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं पाई गई हैं, उन्हें रद्द करने की मांग की।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के संबंध में अभ्यर्थियों से सुझाव लेने के लिए सरकार ने एक ईमेल आईडी जारी की है। बातचीत जारी रहने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार के रविवार तक मांगें पूरी नहीं करने पर 10 अगस्त को विधानसभा मार्च निकालने की भी घोषणा की है।

आइसा ने अलग मंच बनाया

इस बीच, अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) ने शनिवार को स्टेडियम में अपना अलग मंच बनाया। हालांकि, उसके नेताओं ने कहा कि इसे अलग आंदोलन नहीं माना जाना चाहिए। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, जिन पर शुक्रवार को बिरसा चौक के पास विधानसभा मार्च के दौरान स्याही फेंकी गई थी। इसके बाद थोड़ी देर के लिए प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर नारे लगाए।

संगठन की रांची इकाई के प्रमुख विजय कुमार ने कहा कि उसके सदस्य 10 अगस्त के मार्च में शामिल होंगे। लेकिन अखिल भारतीय छात्र संघ के बैनर के बिना। आंदोलन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने भी प्रदर्शन किया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के पास अवरोधक तोड़ने की कोशिश के दौरान उनकी पुलिस से झड़प हुई थी।

विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा

उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अजय आर्यन ने बताया कि मार्च के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब आठ से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 11 अगस्त को अलग विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा की है। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व परीक्षा पैनल अध्यक्ष एल. खियांग्ते से 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है।

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कविता, कटाक्ष और पोस्टर बने हथियार

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे झारखंड के छात्र अपने गुस्से को हिंसा या अपशब्दों के बजाय रचनात्मक अंदाज में आवाज दे रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर कहीं सरकारी नौकरियों का फर्जी ‘रेट कार्ड’ लगा है। कहीं व्यंग्यात्मक पोस्टर हैं तो कहीं ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियां गूंज रही हैं। रांची के बीचोंबीच स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 500 रुपये के नोट जैसी दिखने वाली गड्डियों से लदा एक तराजू सरकारी नौकरियों के नकली रेट कार्ड के पास रखा है। वहीं कुछ दूरी पर छात्र रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कृति रश्मिरथी की पंक्तियां सुनाते नजर आते हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच इस कविता का ‘कृष्ण की चेतावनी’ खंड सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसके जरिए महाभारत के प्रसंग को मौजूदा भर्ती आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र खासकर ये पंक्तियां सुनाते नजर आते हैं, “वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी, पत्थर, पांडव आए कुछ और निखर।” छात्र इन पंक्तियों के जरिए पांडवों के वर्षों के संघर्ष की तुलना सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों को लेकर अनिश्चितता के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की अपनी तैयारी से कर रहे हैं।

‘नौकरी बिक्री केंद्र’

कुछ छात्रों ने व्यंग्यात्मक ‘नौकरी बिक्री केंद्र’ बनाया है, जिसमें सहायक शिक्षक के पद की कीमत 15 लाख रुपये, पुलिस उपाधीक्षक की 1.2 करोड़ रुपये, प्रखंड विकास अधिकारी की 90 लाख रुपये और अंचल अधिकारी की एक करोड़ रुपये बताई गई है। कुछ पोस्टर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ काल्पनिक ‘मुख्यमंत्री सीट बेचो योजना’ का जिक्र किया गया है। यहां व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा है, “पेमेंट करो आराम से, नौकरी पाओ सम्मान से।”

प्रदर्शनकारी छात्र विवेक ने सफेद टी-शर्ट पर स्याही से लिखा है, “व्यवस्था ने हमें निराश किया है।” एक अन्य स्थान पर एक छात्रा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के दिवंगत संस्थापक शिबू सोरेन के बड़े पोस्टर के सामने सिर झुकाकर उनके बेटे एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों के साथ ‘अन्याय करने वालों के खिलाफ कार्रवाई’ की अपील करती नजर आई।

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेना आयोजित करेगी साइबर क्वेस्ट, 20 अगस्त तक करें आवेदन

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और साइबर दुनिया के खतरों से निपटने के लिए इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह एक प्रतियोगिता है जिसमें छात्र, साइबर प्रोफेशनल, इनोवेटर्सऔर टेक्नोलॉजी के शौकीन हिस्सा ले सकेंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन साइबरपीस फाउंडेशन के साथ मिलकर टेरिटोरियल आर्मी करेगी। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 अगस्त तक आधिकारिक पोर्टल के जरिए रजिस्टर कर सकते हैं।

इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 टाइमलाइन

रजिस्ट्रेशन : 30 जुलाई से 20 अगस्त, 2026

शॉर्टलिस्टिंग फेज : ऑनलाइन शॉर्टलिस्टिंग प्रोसेस 1 सितंबर से 10 सितंबर, 2026 तक चलेगा।

ग्रैंड फिनाले : कॉम्पिटिशन का ग्रैंड फिनाले 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर, 2026 तक होगा।

अवार्ड सेरेमनी : अवार्ड सेरेमनी 9 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में होगी।

अंतिम राउंड में चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक इनाम और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों से मिलने का मौका मिलेगा। इस प्रतियोगिता के विजेता रक्षा संस्थानों का दौरा भी करेंगे।

प्रतियोगिता का फॉर्मेट

शॉर्टलिस्टिंग राउंड में सभी उम्मीदवार एक ऑनलाइन कैप्चर-द-फ्लैग (CTF) चैलेंज में हिस्सा लेंगे। इस राउंड में चयनित टीमें फिर 36 घंटे के लाइव फिनाले में आगे बढ़ेंगी। यहां वे एक कृत्रिम नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर सैंडबॉक्स में इंडियन आर्मी के लिए खास तौर से विकसित सॉल्यूशन पर काम करेंगी। फिनाले के दौरान, टीमें कमजोरियों की पहचान करेंगी, गलतियों को दर्ज करेंगी, और डोमेन में कमाए गए अपने साइबर सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन या बैज के लिंक सबमिट करेंगी।

कौन हिस्सा ले सकता है ?

छात्र, साइबर सुरक्षा पेशेवर, एथिकल हैकर्स, सेना से जुड़े लोग और शोधकर्ता।

फॉर्मेट : एक पूरी तरह से ऑनलाइन सीटीएफ क्वालिफायर राउंड के बाद एक इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले होगा। हर टीम में टीम लीडर समेत ज्यादा से ज्यादा तीन सदस्य हो सकते हैं।

स्कोरिंग : एक विशेषज्ञ पैनल ग्रैंड फिनाले के दौरान जमा की गई एंट्री का आकलन कमजोरियों की गंभीरता, सुलझाने का तरीका और जटिलता के आधार पर करेगा।

ग्रैंड फिनाले

टॉप 10 शॉर्टलिस्टेड टीमें नई दिल्ली में 36 घंटे के इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले में मुकाबला करेंगी। सभी प्रतिभागी रियलिस्टिक डमी डेटा का इस्तेमाल करके एक खासतौर से तैयार सिस्टम स्टैक पर लाइव कमजोरी तलाशेंगे और दर्ज करेंगे। पहचानी गई वल्नरेबिलिटीज का उनकी गंभीरता, मूलता और जटिलता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। एक विशेषज्ञ पैनल खोजों को सत्यापित करेगा और फाइनल स्कोर तय करेगा। टॉप तीन टीमों को उनके पूरे प्रदर्शन के आधार पर विजेता घोषित किया जाएगा।

मेडल और सर्टिफिकेट

टेरिटोरियल आर्मी प्रतियोगिता में उम्मीदवारों के योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें मेडल और सर्टिफिकेट देगी। प्रतिभागियों को टेरिटोरियल आर्मी के साथ काम करने, रक्षा विशेषज्ञों के साथ काम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा इकोसिस्टम में योगदान देने और वरिष्ठ सरकारी और सेना के अधिकारियों के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा।

विजेताओं का सम्मान

इस प्रतियोगिता के विजेताओं को भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सम्मानित किया जाएगा और उन्हें खास डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट्स में जाने का भी मौका मिलेगा।

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क्या होती है JP Morgan SDE-2 की सैलरी? इंजीनियर ने शेयर किया अपना पूरा पैकेज

बेंगलुरु में काम करने वाली एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी सैलरी डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर कर इंटरनेट पर हलचल मचा दी। JP Morgan में Associate (SDE-2) पद पर काम करने वाली इस टेकी ने अपनी पूरी सैलरी स्ट्रक्चर सार्वजनिक कर दी, जिसके बाद कई इंजीनियरिंग छात्रों और फ्रेशर्स के बीच चर्चा शुरू हो गई।

उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में बताया कि कई छात्रों और नए ग्रेजुएट्स ने उनसे कंपनी में मिलने वाले पैकेज को लेकर सवाल पूछे थे। इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए उन्होंने अपने ऑफर लेटर का पूरा ब्रेकडाउन शेयर किया।

₹32 लाख फिक्स सैलरी, कुल पैकेज ₹35.2 लाख सालाना

टेकी के शेयर किए गए ऑफर ब्रेकडाउन के मुताबिक, उन्होंने JP Morgan Chase में बेंगलुरु लोकेशन पर Associate (SDE-2) के तौर पर जॉइन किया है।

उनके पैकेज में:

32 लाख रुपये सालाना फिक्स सैलरी

10 प्रतिशत परफॉर्मेंस बोनस

कुल अनुमानित पैकेज करीब 35.2 लाख रुपये प्रति वर्ष शामिल है।

उन्होंने बताया कि इस ऑफर में न तो कोई जॉइनिंग बोनस मिला और न ही रिलॉकेशन अलाउंस या स्टॉक बोनस दिया गया। कंपनी की ओर से मिलने वाले फायदे सामान्य JP Morgan कर्मचारियों वाले बेनिफिट्स हैं।

फ्रेशर्स के सवालों के बाद शेयर किया ऑफर लेटर

टेकी ने बताया कि उन्होंने अपनी सैलरी पहले से बताने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उनकी पिछली JP Morgan जॉइनिंग पोस्ट के बाद कई छात्रों और फ्रेशर्स ने उनसे पैकेज को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने लिखा कि लोग जानना चाहते थे कि Associate (SDE-2) जैसी भूमिका में वास्तविक ऑफर कितना होता है। इसी वजह से उन्होंने बिना किसी अनुमान के अपनी वास्तविक सैलरी डिटेल साझा की।

पहली जॉइनिंग पोस्ट के बाद भी मिली थी काफी चर्चा

इस टेकी की JP Morgan ऑफिस में पहले दिन की तस्वीर वाली पोस्ट भी सोशल मीडिया पर काफी पसंद की गई थी। हालांकि, सैलरी ब्रेकडाउन वाली पोस्ट ने उससे कहीं ज्यादा ध्यान खींचा। पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने पैकेज देखकर हैरानी जताई और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतनी सैलरी के बाद उन्हें सोशल मीडिया से होने वाली कमाई की जरूरत नहीं होगी।

लोगों ने कहा- छात्रों के लिए मददगार है ऐसी जानकारी

कई यूजर्स ने सैलरी की जानकारी सार्वजनिक करने के फैसले की तारीफ की। उनका कहना था कि असली ऑफर और पैकेज की जानकारी मिलने से छात्रों और नए इंजीनियरों को प्लेसमेंट की तैयारी में मदद मिलती है। एक यूजर ने कहा कि ऐसी वास्तविक सैलरी डिटेल्स अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय युवाओं को सही उम्मीदें तय करने में मदद करती हैं।

कई लोगों का मानना था कि कंपनियों के पैकेज को लेकर अक्सर भ्रम रहता है, ऐसे में वास्तविक अनुभव साझा करना नए उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

कुछ लोगों ने सैलरी सार्वजनिक करने पर जताई चिंता

हालांकि, हर कोई इस कदम से सहमत नहीं था। कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इतनी निजी जानकारी शेयर करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी।एक यूजर ने कहा कि अब उनकी पूरी टीम को उनकी सैलरी के बारे में पता चल सकता है, जिससे भविष्य में परेशानी हो सकती है। वहीं, एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि कंपनियों में काम करने वाले लोगों को अपनी कमाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से पहले इसके संभावित प्रभावों के बारे में सोचना चाहिए।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

JP Morgan टेकी की यह पोस्ट सिर्फ सैलरी चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया क्या युवाओं के लिए वेतन की जानकारी सार्वजनिक करना फायदेमंद है या निजी रखना बेहतर?

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CJP ने फिर दी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी, सरकार की वादाखिलाफी पर भड़की पार्टी, एक्स पर क्या बोले आशुतोष रांका

cjp jantar mantar protest

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। पार्टी का आरोप है कि देशव्यापी प्रदर्शन वापस लेने के बाद केंद्र के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया गया है।

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CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में कई छात्रों की निगरानी की जा रही है और उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है। रांका ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों को लॉजिस्टिक सहायता देने वाले स्वयंसेवकों को भी हिरासत में लिया जा रहा है।

FIR वापस लेने और छात्रों की रिहाई की मांग

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CJP ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस लेने, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां या भाजपा-शासित अथवा सहयोगी राज्यों की पुलिस छात्रों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करे।

 

आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी

 

आशुतोष रांका ने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो CJP फिर से आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस या सरकारी एजेंसियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।