PAK आतंकी शहजाद भट्‌टी पर NIA का एक्शन:मोहाली कोर्ट ने NBW जारी किया; ब्राजील में छुपा, रेड कॉर्नर नोटिस-प्रत्यर्पण का रास्ता खुला

पाकिस्तानी आतंकी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शहजाद भट्टी के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जालंधर के इन्फ्लुएंसर नवदीप सिंह उर्फ रॉजर संधू के घर पर ग्रेनेड हमले के मामले में मोहाली स्थित NIA की स्पेशल कोर्ट ने उसके खिलाफ ओपन-डेटेड नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी किया है। अदालत ने माना कि आरोपी लगातार फरार है। उसके अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे समन या जमानती वारंट के जरिए अदालत में पेश कराना संभव नहीं है। NIA के इनपुट के मुताबिक, शहजाद भट्टी फिलहाल ब्राजील में छिपा हुआ है और वहीं से भारत विरोधी आतंकी एक्टीविटीज का संचालन कर रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस NBW के आधार पर आगे इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने और प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। यह वारंट आरोपी की गिरफ्तारी तक प्रभावी रहेगा। यह वारंट कुख्यात पाकिस्तानी आतंकी मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ भी जारी हो चुका है। जिस मामले में NBW, उसे 4 पॉइंट में समझिए… 1. सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद, ग्रेनेड हमले तक पहुंचा
यह मामला 16 मार्च 2025 का है। जालंधर के थाना मकसूदां क्षेत्र में इन्फ्लुएंसर नवदीप सिंह उर्फ रॉजर संधू के घर की बालकनी में एक संदिग्ध धातु की वस्तु मिली, जो जांच में हैंड ग्रेनेड निकली। शुरुआत में मामले की जांच पंजाब पुलिस ने की। जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी ने टिकटॉक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के जरिए नवदीप संधू पर लाइव स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन गिफ्टिंग के माध्यम से पैसे देने का दबाव बनाया। इनकार करने पर उसने अपने भारतीय नेटवर्क के जरिए ग्रेनेड हमला कराने की साजिश रची। 2. व्हाट्सएप ग्रुप से तैयार हुई हमले की साजिश
NIA की जांच में खुलासा हुआ कि शहजाद भट्टी पाकिस्तानी मोबाइल नंबर से एक व्हाट्सएप ग्रुप चला रहा था, जिसमें कई भारतीय नंबर जुड़े हुए थे। एजेंसी के अनुसार, इसी ग्रुप के जरिए हमले की योजना बनाई गई, आरोपियों के बीच संपर्क कराया गया और पूरी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की गई। 3. गृह मंत्रालय के आदेश पर NIA ने संभाली जांच
15 दिसंबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद NIA ने मामले को दोबारा दर्ज कर जांच शुरू की। इससे पहले पंजाब पुलिस 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी और 9 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को NIA ने विशेष अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। जिसमें शहजाद भट्टी और दीपेंद्र प्रताप सिंह उर्फ दीपन राणा को आरोपी बनाया। NIA की जांच में यह भी सामने आया कि भट्टी ने भारतीय गुर्गे हार्दिक कंबोज को जालंधर भेजा था, जबकि विदेश में बैठे मोहम्मद जशीर अख्तर उर्फ जस्सी के साथ मिलकर भर्ती और लॉजिस्टिक्स का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। 4. भट्‌टी ब्राजील में छिपा, अब आगे क्या होगा?
NIA ने अदालत में पंजाब पुलिस की रिपोर्ट भी पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहजाद भट्टी के खिलाफ पंजाब के अलग-अलग थानों में आतंकवाद, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े 15 से अधिक मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि भट्टी केवल रंगदारी या व्यक्तिगत रंजिश तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी धरती का इस्तेमाल कर भारत विरोधी गैंगस्टर-टेरर नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े सिंडिकेट का हिस्सा है। NBW जारी होने के बाद अब एजेंसी उसके खिलाफ इंटरनेशनल लेवल पर कानूनी कार्रवाई तेज कर सकती है। ********** ये खबर भी पढ़ें: पाकिस्तानी डॉन ने लॉरेंस को बच्चा कहा: फर्जी गैंगस्टर भी बताया; शहजाद भट्‌टी बोला- मेरी गोली मारकर हत्या की अफवाह फैलाई पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्‌टी ने अपनी मौत के दावे को खारिज किया है। भट्‌टी ने एक ऑडियो जारी कर कहा कि एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि लॉरेंस गैंग ने उस पर फायरिंग कराई। जिसमें उसकी मौत हो गई। मगर, मैं कभी पुर्तगाल गया ही नहीं और न ही मुझ पर किसी तरह की कोई फायरिंग हुई है। (पढ़ें पूरी खबर)

केसरिया और भगवा कपड़ों से समाजवादी पार्टी की जन्मजात दुश्मनी: मुख्यमंत्री योगी

CM Yogi Barabanki Speech

 

 

  • सीएम योगी ने मैनपुरी में 682 करोड़ रुपये की 111 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास
  • मुख्यमंत्री योगी ने कहा- धूम-धाम से निकलेगी कांवड़ यात्रा, प्रदेशभर में होंगे जन्माष्टमी के आयोजन
  • सीएम बोले –‘अब कर्फ्यू न दंगा, यूपी में सब चंगा’, विकास के लिए भी पैसों की कमी नहीं
  • देश की हर समस्या का समाधान उत्तर प्रदेश में, अब यूपी की काबिलियत पर कोई प्रश्न नहीं करता

 

लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी कहती थी, कांवड़ यात्रा में शिव भक्त आएंगे तो दंगा हो जाएगा। सपा शंख व घंटा भी नहीं बजाने देती थी। समाजवादी पार्टी की केसरिया और भगवा कपड़ों से मानो जन्मजात दुश्मनी थी। हालांकि अब कोई कांवड़ यात्रा पर रोक नहीं लगा पाएगा, अब धूमधाम से कांवड़ यात्रा भी निकलेगी और शिवभक्त शिवालयों में जलाभिषेक भी करेंगे। उन्होंने कहा कि सपा ने जन्माष्टमी के आयोजनों पर भी रोक लगा दी थी, जिसे डबल इंजन सरकार ने फिर से शुरू कराया।

 

सीएम योगी मैनपुरी में 682 करोड़ रुपये से अधिक की 111 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के दौरान संबोधन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज हमारा प्रदेश उपद्रवग्रस्त नहीं, उत्सव प्रदेश बन गया है। अब कर्फ्यू न दंगा है, यूपी में सब चंगा है। 

 

उन्होंने कहा कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है और उसके बाद सावन का महीना शुरू हो जाएगा। कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। पहले समाजवादी पार्टी कहती थी कि कांवड़ यात्रा नहीं होने देंगे, शिव भक्त जाएंगे तो दंगा हो जाएगा। वे शंख नहीं बजने देते थे, घंटा भी नहीं बजने देते थे। केसरिया व भगवा कपड़ों से मानो समाजवादी पार्टी की जन्मजात दुश्मनी थी। उन्होंने कहा, प्रदेश में डबल इंजन सरकार आते ही हमने तय किया कि धूम-धाम से कांवड़ यात्रा निकलेगी।

 

कांवड़ यात्रा पर नहीं लगने दी रोक

सीएम ने कहा कि हमने सुनिश्चित किया कि कांवड़ यात्रा पर कोई रोक नहीं लगाएगा। हमारी डबल इंजन सरकार ने आते ही कहा कि हम सुविधा देंगे और अनुशासित तरीके से शिव भक्त कांवड़ यात्रा निकालेंगे। कांवड़िए यात्रा कर जल लेकर आएंगे और शिवालयों में जलाभिषेक भी करेंगे। 

 

सपा ने जन्माष्टमी के आयोजन पर लगा दी थी रोक

सीएम ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन को अब कोई रोक नहीं सकता। भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा, वृंदावन से लेकर मैनपुरी, इटावा समेत उत्तर प्रदेश के हर जिले में भव्यता के साथ आयोजन होते हैं। हर थाने, पुलिस लाइन, जेल में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन होता है, जिस पर पहले सपा ने रोक लगा दी थी।

 

उन्होंने कहा कि आज पर्यटन और संस्कृति विभाग के द्वारा मंदिरों के सुंदरीकरण के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले ये पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल के लिए चला जाता था। अब मंदिरों के सुंदरीकरण में वही पैसा खर्च हो रहा है। सपाई विकास की योजनाओं का पैसा अपने परिवार के विकास में लगा देते थे और गरीब देखता रहता था। छात्र की छात्रवृत्ति नहीं आती थी, नौजवान की नौकरी चली जाती थी, महिला स्वावलंबन के नाम पर सुरक्षा का संकट खड़ा कर देते थे।

 

मैनपुरी की पौराणिक और ऐतिहासिक पहचान

सीएम ने कहा कि आज का मैनपुरी अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत की वजह से पहचाना जा रहा है। एक समय ऐसा भी था, जब मैनपुरी के नाम पर लोग घबराते थे। यहां के नौजवानों को होटल में कमरे नहीं मिलते थे। दूसरे शहरों में मैनपुरी के लोगों को किराए का मकान नहीं मिलता था। आज मयन ऋषि व च्यवन ऋषि की इस धरा को डबल इंजन की सरकार ने नई पहचान दी है। आज मैनपुरी का नौजवान, किसान, व्यापारी देश के किसी कोने में जाता है तो उसे सम्मान मिलता है। यह पहचान का संकट पूर्व की सरकारों ने पैदा किया था।

 

पहले जो गरीब नौजवान पैसा नहीं दे सकता था, उसकी नौकरी नहीं लगती थी। आज डबल इंजन की सरकार में नौकरी निकलती है तो मैनपुरी व इटावा का नौजवान भी नियुक्ति पत्र प्राप्त करता है। बड़ी शान के साथ अपनी सेवाएं देता है, नए भारत के नए उत्तर प्रदेश के निर्माण में योगदान भी करता है।

 

यूपी में विकास के लिए पैसों की कमी नहीं

सीएम ने कहा कि आज यूपी बीमारू नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस राज्य है, भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था में अपना स्थान बनाया है। अब यूपी में पैसे की कमी नहीं है, विकास के लिए जितना पैसा चाहिए दिया जाएगा। नौजवानों के लिए नौकरी और किसानों के लिए योजनाओं की भी कमी नहीं है।

 

सीएम ने कहा कि हमने योजनाओं का लाभ बिना जातिगत के भेदभाव के दिया है। फसल ऋण माफी के जरिए 86 लाख अन्नदाता किसानों को लाभ पहुंचाया गया, किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ। वह किसान दलित, वंचित, पिछड़ा समेत हर जाति के थे, जिन्हें लाभान्वित किया गया। एक जिला एक उत्पाद की योजना भी बिना भेदभाव के चलाई गई। मैनपुरी तारकशी कारीगरी को वैश्विक पहचान दिलाया गया। 

 

सपा के गुंडों ने बेटियों का जीना मुश्किल किया था

सीएम ने कहा कि पूर्व की सरकारों में बहुत सारे संभ्रांत परिवार अपनी बेटियों को यूपी के बाहर हॉस्टल या रिश्तेदारों के घर पढ़ने के लिए भेज देते थे। क्योंकि समाजवादी पार्टी के गुंडों ने बेटियों व उनके परिवार का जीना मुश्किल कर दिया था। व्यापारी यूपी में निवेश नहीं करना चाहता था, उसे पूंजी के साथ अपनी सुरक्षा का भी भय रहता था।

 

सपा सरकार में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को मारी गोली

सीएम योगी ने कहा कि सपा सरकार में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मदन चौहान को उनके मैनपुरी स्थित पेट्रोल पंप में घुसकर गोली मारी गई थी। पूर्व सरकार में व्यापारी घर से निकलता था तो शाम को परिवार का मुंह देख पाने की प्रार्थना करता था। इसी को देखते हुए भाजपा सरकार ने अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉरलेंस अपनाया। इटावा हो या मैनपुरी यहां के संगठित अपराध की कमर तोड़ दी। प्रदेश को माफिया मुक्त किया गया। बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। अपराधियों को जेल या जहन्नुम भेज दिया गया और माफियों को मिट्टी में मिला दिया।

 

यह कार्य 2017 से पहले हो सकता था, लेकिन विकास, विरासत, उत्सवपूर्ण माहौल के लिए समय चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 12 बजे सोकर उठेगा, 2 बजे तैयार होगा, 5 बजे जिम जाएगा और 7 बजे अपनी महफिल में चला जाएगा, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। विकास का कोई विजन उस व्यक्ति के पास नहीं था, केवल लूट कर अपने परिवार का खजाना भरा गया। यही यूपी की दुर्गति का कारण था।

 

देश की हर समस्या का समाधान यूपी में

सीएम ने कहा कि सपा सरकार में नौकरी निकलते ही वसूली शुरू हो जाती थी। आज नियुक्ति पत्र बांटते वक्त पूछने पर मैनपुरी के युवाओं से भी पता चलता है कि उन्हें कहीं सिफारिश, वसूली या किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि 9 लाख से ज्यादा नौजवानों को सरकारी नौकरी मिली है। परंपरागत उद्यम जीवित हुआ तो सवा तीन करोड़ लोगों को रोजगार मिला। सुरक्षा का बेहतर माहौल बना तो 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव यूपी में प्राप्त हुआ। आज यूपी के प्रति व्यक्ति की आय बढ़ी है। अब यूपी पर कोई सवाल नहीं उठाता, बल्कि देश की हर समस्या का समाधान यूपी में ढूंढता है। सीएम ने कहा कि लोग फिर जाति, क्षेत्र के नाम पर बांटने आएंगे, लेकिन ये समाज और देश के दुश्मन हैं। कभी ऐसे लोगों के कारण विदेशी हमले होते थे, फिर से वैसी ही साजिश पैदा हो रही हैं। 

 

सपा को महापुरुष पसंद नहीं

सीएम ने कहा कि हम लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल एंप्लॉयमेंट जोन बना रहे हैं, समाजवादी पार्टी को इससे कोई लेना-देना नहीं था। हम लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के नाम पर श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रहे हैं, समाजवादी पार्टी उनके नाम पर बने हुए संस्थानों का नाम मिटाती थी। डबल इंजन सरकार बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कर रही है, समाजवादी पार्टी ने कन्नौज में बाबा साहब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम ही हटा दिया था। इन्हें सामाजिक न्याय से जुड़े हुए पुरोधा और महापुरुष पसंद नहीं हैं। इनको केवल परिवार के नाम पर सबकुछ पसंद है। यूपी को विकसित उत्तर प्रदेश बनना है, तो मैनपुरी को विकसित बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैनपुरी जिले को विकसित बनाने के लिए जरूरी है कि मैनपुरी व करहल क्षेत्र का हर विधानसभा क्षेत्र, हर विकासखंड विकसित बने और उसी की कार्ययोजना को आगे बढ़ा जा रहा है। 

 

किसानों को जरूर मिलेगी 10 घंटे बिजली

सीएम ने कहा कि अन्नदाता किसान को कम से कम 10 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। मैनपुरी के किसानों को ये जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि वह जुलाई के महीने में मैनपुरी इसलिए आए हैं, ताकि पानी, बरसात की स्थिति देख सकें। उन्होंने कहा कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर मैनपुरी जिले की सभी समस्याओं का समाधान निकालकर विकास कार्य को आगे बढ़ा रही है। मैनपुरी के लोगों को कहीं भी निराश और हताश नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विकसित यूपी के लिए मैनपुरी को भी तैयार होना है। 

 

सीएम योगी ने कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण से की। इसके बाद महिलाओं को फलों की टोकरी देकर गोदभराई की रस्म और बच्चों का अन्नप्राशन कराया। उन्होंने बच्चों को गोद में लेकर दुलार किया व उपहार भेंट किए। सीएम ने यहां आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बेसिक शिक्षा विभाग के स्टॉल पर स्कूली बच्चों को स्कूल बैग व किट उपहार स्वरूप भेंट की। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए विकास से जुड़े विभिन्न मॉडलों को देखकर खुशी व्यक्त की। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को देखा। सीएम ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी, मिशन शक्ति समेत अन्य स्टॉलों का भी अवलोकन किया।

 

इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापति, विधायक रामनेरश अग्निहोत्री, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी, जिला अध्यक्ष ममता राजपूत, जिला प्रभारी अनिल चौधरी, डीसीबी चेयरमैन नरेंद्र सिंह राठौर, मैनपुरी जिला पंचायत प्रशासक अर्चना भदौरिया, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष संगीता गुप्ता समेत अन्य भाजपा नेता व गणमान्य उपस्थित रहें।

शिक्षामंत्री का इस्तीफा: किसी की जीत नहीं, सिर्फ राष्ट्रहित है

A picture of students protesting at Jantar Mantar against the education system and the NEET-UG exam

क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं,

कर्तव्य पथ पर जो मिला, यह भी सही वह भी सही। — अटल बिहारी वाजपेयी

 

राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जब बात देश के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों विद्यार्थियों के हित की आती है, तब केवल और केवल राष्ट्र प्रथम का विचार ही सर्वोपरि रहता है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में हुआ नेतृत्व परिवर्तन केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह परिपक्व राजनीति, नैतिक उच्चता और देश को अस्थिर करने व अराजकता फैलाने का प्रयास करने वाली ताकतों को दिया गया मजबूत और करारा संदेश है।

 

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या कुर्सी से कहीं ऊपर देश और युवाओं का भविष्य है, जैसा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को स्वयं लिखे पत्र में भी उल्लेख किया है। जब जंतर-मंतर पर विभिन्न आंदोलनों और उपद्रवों की आड़ में देश को उद्वेलित करने और असंतोष फैलाने की साजिश रची जा रही थी, तब उन्होंने देश की युवाशक्ति के भविष्य को भ्रम और अनिश्चितता से बचाने के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।

 

उन्होंने पहले ही दिन से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सीबीआई जांच सौंपी और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड जैसी व्यवस्थाएं लागू की। जब यह साफ दिखने लगा कि विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में देशविरोधी और असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने का एजेंडा चला रहे हैं, तब उन्होंने पद त्याग कर विरोधियों की पूरी साजिश को एक झटके में नाकाम कर दिया। उनके इस कदम से सिद्ध हुआ कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए पद नहीं, बल्कि देश और विद्यार्थियों का हित ही सर्वोपरि है।

 

यहां यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान जी पहले भी इस्तीफा दे सकते थे? लेकिन जैसे ही पेपर लीक का विषय सामने आया, उन्होंने जिम्मेदारियों से भागने के बजाय नीट-यूजी की परीक्षा का पुनः आयोजन पूर्ण पारदर्शिता के साथ करवाया।

उन्होंने नीट का परिणाम आने और पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता से संपन्न होने के बाद ही अपना इस्तीफा सौंपा। यदि वे विवाद के शुरुआती दौर में इस्तीफा दे देते, जब पूरा विपक्ष और असामाजिक तत्व चील की तरह नज़रें गड़ाए बैठे थे, तो इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो सकता था। अतः पूरी प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने के उपरांत ही इस्तीफा सौंपना अत्यंत व्यावहारिक, रणनीतिक और सही कदम था।

 

राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रहलाद जोशी को सौंपी है। वे एक बहुत ही अनुशासित, दृढ़ और परिणाम-उन्मुख नेता माने जाते हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक के हुबली स्थित ईदगाह मैदान में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने के प्रखर राष्ट्रवादी संकल्प से हुई थी।

केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला व खान मंत्री के रूप में उन्होंने कई कठिन विधायकी कार्यों और संकटपूर्ण परिस्थितियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है। वे अपने सख्त अनुशासन, प्रशासनिक पकड़ और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों को बिना किसी गतिरोध के आगे बढ़ाने में वे पूरी तरह सक्षम हैं। 

 

एक घोर राष्ट्रवादी और दृढ़ नेतृत्व के हाथों में शिक्षा मंत्रालय आने से देश की शिक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त होने की आशा है। फिर भी इन सबके बीच जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा अब पूरी तरह जनता के सामने आ चुकी है।

आंदोलन के नाम पर अनशन, उग्र और अश्लील नारों तथा सनातन धर्म एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निशाने पर लेने का प्रयास किया गया। सोनम वांगचुक जैसे चेहरों की भूख हड़ताल को आगे रखकर व्यवस्था पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन देश के जागरूक नागरिकों ने इस विघटनकारी सोच को अच्छी तरह समझ लिया है।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने तथाकथित छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों के दोहरे मापदंडों की भी पोल खोल दी है। जो खुद को छात्रों का रहनुमा बताते फिर रहे हैं, वे गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे पंजाब, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में हुए पेपर लीक मामलों पर पूरी तरह खामोश बैठे हैं और मीडिया के सवालों से कतराते दिख रहे हैं।

लेकिन इन छात्र संगठनों और प्रवक्ताओं द्वारा वहां के शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं की जा रही? यह चुप्पी साबित करती है कि यह आंदोलन छात्रों के हित में नहीं, बल्कि केवल भाजपा से राजनीतिक द्वेष के तहत विपक्ष द्वारा प्रेरित था।

 

वहीं सरकार ने इस पूरे एजेंडे के जवाब में एक साथ कई बड़े रणनीतिक लक्ष्य साध लिए हैं। आंदोलन की आड़ में संसद का काम रोकने और देश का माहौल खराब करने का लक्ष्य पूरी तरह विफल हो गया है।

विपक्षी पार्टियों की पोल खुली है कि उनके लिए देश से पहले पार्टी है। वहीं हिंसक गतिविधियों और उपद्रव में लिप्त तत्वों की पहचान हो चुकी है, जिससे अब कानून के अनुसार उन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, विपक्षी राज्यों में भी पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर वहां की सरकारों को घेरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

कहते हैं अधर्म और षड्यंत्र रचने वाली शक्तियों को लगता है कि वे कुछ समय के लिए भ्रम फैला सकती हैं, लेकिन इतिहास साक्षी है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी धर्म की स्थापना के लिए चुनौतियों का सामना किया और अंततः रावण तथा कंस जैसी ताकतों का समूल नाश हुआ।

सनातन संस्कृति और देश को अस्थिर करने वाले अपने ही जाल में उलझकर रह गए हैं। उनका देश को नेपाल और बांग्लादेश बनाने के मंसूबे पर पानी फिर गया है। सत्य और धर्म की राह में सामयिक चुनौतियां अवश्य आती हैं, किंतु जीत राष्ट्रहित की ही होती है। एक बार फिर सिद्ध हो चुका है कि भारत की नीतियां किसी दबाव या षड्यंत्र से तय नहीं होंगी, वे केवल और केवल राष्ट्रहित से ही संचालित होंगी।

दिल्ली पुलिस 2022 की तरह CJP प्रदर्शन से जुड़े छात्रों से वापस लेगी केस? सामने आया बड़ा अपडेट्स

Delhi Police: संसद परिसर के हाल में और जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए दिल्ली पुलिस वर्ष 2022 में अपनाई गई प्रक्रिया को दोहरा सकती है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस इस संबंध में कानूनी सलाह ले रही है। मंगलवार 28 जुलाई तक इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 में किसान आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने के दौरान दिल्ली पुलिस, तत्कालीन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रक्रिया अपनाई गई थी। उसी मॉडल को इस बार भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, उस समय पुलिस ने 17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को भेजा था। इसके बाद फाइल तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय से तत्कालीन गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के पास पहुंची। गृह मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई। फिर 28 फरवरी को एलजी कार्यालय लौटने पर उसी दिन उसे मंजूरी मिल गई थी।

कानूनी विशेषज्ञों से मांगी राय 

अब संसद प्रदर्शन से जुड़े मामलों में भी दिल्ली पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों से राय मांगी है कि FIR वापस लेने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई जाए। एक विकल्प यह भी माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इन मामलों को रद्द (Quash) कराने का अनुरोध करे।

15 FIR दर्ज

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस ने अब तक 15 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों की पहचान की गई है। जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिनकी भूमिका गंभीर नहीं पाई गई है। उन्हें फिलहाल जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। इन मामलों में गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, आपराधिक साजिश, निषेधाज्ञा का उल्लंघन और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। कुछ मामलों में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं।

 पुलिस ने उठाकर मसूरी छोड़ दिया

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। प्रदर्शनकारियों को खाना देने वाले एक स्वयंसेवक जुनैद ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मी उन्हें अपने साथ ले गए। उनका कहना है कि उनसे पूछताछ की गई, आंखों पर पट्टी बांधी गई और अगले दिन उन्हें उत्तराखंड के मसूरी में छोड़ दिया गया।

जुनैद के अनुसार, पुलिस ने उनसे खाना बांटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता और इतने बड़े स्तर पर भोजन की व्यवस्था के बारे में सवाल पूछे। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जुनैद के लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जुनैद ने दावा किया कि उन्हें भोजन और पानी समर्थकों से मिलने वाले दान और डिलीवरी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था।

पीएम मोदी के मामले में होगी कार्रवाई?

दिल्ली पुलिस विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। एक सूत्र ने बताया कि पुलिस ऐसे पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर सकती है।

सूत्र ने कहा, “विरोध-प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद अपलोड की गई सामग्री की समीक्षा के बाद पुलिस अपमानजनक प्रकृति की पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी करेगी।” उन्होंने कहा, “विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री की पहचान करने का अभियान पहले ही शुरू किया जा चुका है।”

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सूत्र के मुताबिक, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी सामग्री में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या उससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने होने की आशंका थी। सूत्र ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम पूरे दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर नजर रखे हुए है, ताकि विरोध-प्रदर्शन से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री की पहचान की जा सके।

NEET Controversy: छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश

-प्रो. संजय सिन्हा
neet exam controversy: पिछले कुछ दिनों में नीट परीक्षा को लेकर देश और प्रदेश में जो कुछ देखने को मिला, वह कई तरह के सवाल खड़े करता है। पहला तो यही कि क्या छात्रों की पढ़ाई-लिखाई या परीक्षा से जुड़ा मुद्दा राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता संघर्ष का माध्यम बन गया है और इसी से जुड़ा सवाल यह भी है कि आखिर राजनीतिक दल क्यों इस आंदोलन को अराजकता की दिशा में ले जाना चाहते हैं? क्या यह वाकई अब छात्रों की लड़ाई रह गई है या फिर इसके बहाने मुद्दाविहीन विपक्ष द्वारा राजनीतिक जमीन तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है? यह सवाल उद्वेलित करने वाले हैं। कोई संशय नहीं कि नीट पेपर का लीक होना एक आपराधिक घटना है, चिंता का विषय है लेकिन जब कोई संवेदनशील मुद्दा राजनीतिक मंच में बदल जाता है तो कहानी नया रंग ले लेती है।

 

दिल्ली की सड़कों और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रदर्शन इस बात की पुष्टि करते हैं कि छात्रों की शिकायत को चेहरा बनाकर कुछ पार्टियां खासतौर पर सपा व कांग्रेस अपना खोया जनाधार हासिल करना चाहती हैं। विपक्षी दलों के बीच इस आंदोलन का नेतृत्व करने की होड़ मची है और इसका प्रमाण यह है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में एक धरना आयोजित हुआ, तो उसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने एक समानांतर प्रदर्शन खड़ा कर दिया। छात्रों के एक प्रतिनिधि आंदोलन पर राजनीतिक दल यह साबित करने की कोशिश में जुट गए कि उस पर उनका नेतृत्व है। इस बात की चिंता भी नहीं कि उनकी यह कोशिश उनकी प्राथमिकता को उजागर कर देगी कि उनके लिए महत्वपूर्ण क्या है, छात्रों का हित या राजनीतिक मंच। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह द्वारा कांग्रेस के धरने पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया जाना इस बात का प्रमाण है कि विपक्षी खेमे में भी इस मुद्दे को लेकर आंतरिक कलह व खींचतान शुरू हो चुकी है।

प्रदर्शनरत छात्रों के लिए भी चिंतन का विषय

इस प्रकरण के एक और पहलू को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के दौरान सामने आए कुछ वीडियो में कई छात्र व अभिभावक यह बयान देते नजर आए कि वे नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन में आए थे, लेकिन धरनास्थल पर उपस्थित राजनेताओं ने बातचीत का रुख अन्य दिशाओं में मोड़ दिया। जब किसी छात्र आंदोलन के भीतर से ऐसी आवाज़ें उठने लगें कि मूल मुद्दे से हटकर बातें हो रही हैं, तो यह प्रदर्शनरत छात्रों के लिए भी चिंतन का विषय बनना चाहिए। एक आंदोलन जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा की पवित्रता बचाने के लिए शुरू हुआ था, अगर वह अलग-अलग राजनीतिक नारों और असंबद्ध विवादों में उलझने लगे, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं छात्रों को होगा, जिनके नाम पर यह सब खड़ा किया गया।

 

संसद परिसर के आसपास सुरक्षा को लेकर उपजी चिंता भी एक गंभीर विषय है। किसी भी लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार बुनियादी है, लेकिन जब भीड़ किसी संवैधानिक संस्थान की सुरक्षा-सीमा के करीब पहुंचने की स्थिति पैदा करे, तो यह प्रशासन और आयोजकों दोनों के लिए एक गंभीर उत्तरदायित्व का प्रश्न बन जाता है। ऐसी स्थितियों में जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व से यह अपेक्षा की जाती है कि वह भीड़ को संयमित रखे, न कि उसे और उकसाए। लेकिन सपा व कांग्रेस नेता अराजकता को बढ़ावा देते दिखाई दिए। यदि आंदोलन को समर्थन देने वाले दलों ने सुरक्षा जोखिम की आशंका के बावजूद मार्च को प्रोत्साहित करना जारी रखा, तो यह सवाल वाजिब है कि क्या उनके लिए राजनीतिक लाभ, बच्चों की सुरक्षा से ऊपर है।

 यह कोई नई घटना नहीं

अब बात करते हैं मूल मुद्दे की। पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी निस्संदेह एक वास्तविक और गंभीर समस्या है। लेकिन, यह कोई नई घटना नहीं है। बीते वर्षों में विभिन्न राज्यों में, चाहे किसी भी दल का शासन रहा हो, प्रश्नपत्रों के लीक होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अचरज की बात यह है कि जिन राजनीतिक दलों के शासनकाल में बार-बार भर्ती परीक्षाएं विवादों में रहीं, वही आज स्वयं को नैतिकता का सबसे बड़ा प्रहरी सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती, अधीनस्थ सेवा आयोग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अनेक विवाद सामने आए। चयन आयोगों में जाति विशेष के लोगों को प्रमुख बनाने पर सवाल खड़े हुए। भाई-भतीजावाद व रिश्वतखोरी के मामले भी सामने आए। सपा आज तक इन आरोपों पर बगलें झांकने लगती है।

 

इसी तरह बिहार में शिक्षक नियुक्तियों और अन्य परीक्षाओं को लेकर प्रश्न उठे। राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान भी ऐसा ही हुआ। पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। ऐसे उदाहरणों के बाद जनता छात्र आंदोलन में घुसे विपक्षी दलों से यह पूछने का अधिकार रखती है कि जब वे सत्ता में थे तब ऐसी घटनाओं को रोकने में क्यों विफल रहे। यदि पेपर लीक एक व्यवस्थागत समस्या है, जो अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग सरकारों के दौर में सामने आती रही है, तो इसका समाधान भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर खोजा जाना चाहिए।

 

यूपी में जहां 2017 से पहले की सरकारों ने प्रतियोगी परीक्षाओं को संगठित माफिया के हवाले कर दिया था और नियुक्तियों को भाई-भतीजावाद तक सीमित कर रखा था, योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक के जरिये इन अनियमितताओं को दूर करने का प्रयास किया, जिसके तहत कड़े कानूनी प्रावधान किए गए। इनमें एक करोड़ रुपये तक जुर्माना व उम्रकैद तक शामिल है। छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करना, और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना। यह किसी एक दल की नहीं, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की साझा जिम्मेदारी है। जब कोई सरकार पेपर लीक के मामलों में जांच एजेंसियों को सक्रिय करती है, दोषियों पर कार्रवाई करती है, और नई परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रस्ताव लाती है, तो इसे स्वीकार करने के बजाय केवल विरोध के लिए विरोध करना, समस्या के समाधान में बाधा ही उत्पन्न करता है। जनता यह अपेक्षा करती है कि जब कोई गंभीर मुद्दा सामने आए, तो सभी राजनीतिक दल मिलकर समाधान की दिशा में काम करें, न कि उसे चुनावी लाभ की दृष्टि से देखें।

 

पेपर लीक प्रकरण देश की शिक्षा व्यवस्था और लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। इसे राजनीतिक क्रेडिट की लड़ाई में बदलना छात्रों के साथ अन्याय होगा। ज़रूरत इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, अधिक सुरक्षित और अधिक जवाबदेह बनाया जाए सभी राजनीतिक दलों की साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से। जब तक यह मूल उद्देश्य राजनीतिक बयानबाज़ी के शोर में दब कर रह जाएगा, तब तक न तो छात्रों को न्याय मिलेगा और न ही व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार संभव हो पाएगा। सपा और कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या वे वास्तव में छात्रों के भविष्य की चिंता में खड़े हैं, या केवल एक अवसर की तलाश में सड़कों पर उतरे हैं। (लेखक श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल में डीन, स्किल फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च हैं)

 

लंदन के लग्जरी होटल में 29 साल के सऊदी प्रिंस की मौत के पीछे क्या घातक कॉकटेल था? जांच में सामने आई ये बात

यूनाइटेड किंगडम में हुई एक अदालती जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय सऊदी प्रिंस अब्दुल्लाह बिन फहद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत लंदन के एक लग्जरी होटल में शराब, पार्टी ड्रग और एंटी-एंजाइटी दवाइयों के एक जानलेवा और घातक कॉकटेल के सेवन से हुई थी। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंस अब्दुल्लाह का शव पिछले साल 25 नवंबर को केंसिंग्टन स्थित पांच सितारा मैरियट होटल में उनके कमरे के बाथरूम के फर्श पर पड़ा मिला था। एक क्लीनर जब उनके बंद कमरे में आया तो प्रिंस की संदिग्ध मौत की जानकारी सामने आई। पैरामेडिक्स द्वारा उन्हें बचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद मौके पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।

होटल में अकेले लौटे थे प्रिंस

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस 19 नवंबर को एक हफ्ते के लिए इस 5-स्टार होटल में चेक-इन हुए थे। मौत से ठीक एक रात पहले सीसीटीवी फुटेज में उन्हें आखिरी बार देखा गया था, जब वे सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले थे और फिर अकेले ही होटल वापस लौट आए थे। जांचकर्ताओं के लिए यह सीसीटीवी फुटेज बेहद अहम सबूत साबित हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि घटना के वक्त उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और मामले में किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता नहीं थी।

जांच में क्या निकला? शराब, GHB और जैनैक्स का ‘जानलेवा कॉकटेल’

इनर वेस्ट लंदन कॉरोनर्स कोर्ट में हुई जांच के बाद असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन इस नतीजे पर पहुंचे कि प्रिंस की मौत मल्टी-ड्रग इंजेशन यानी एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों और दवाओं के सेवन से हुई है। उन्होंने इसे दुर्घटनाजन्य मौत का मामला करार दिया। इसका मतलब है कि यह मौत अनजाने में हुई एक दुर्घटना थी। टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में प्रिंस के खून में अल्कोहल का कंसंट्रेशन 222 mg प्रति 100 ml पाया गया, जो इंग्लैंड में ड्रिंक-एंड-ड्राइव की कानूनी सीमा से करीब तीन गुना अधिक था। विशेषज्ञों ने अदालत को बताया कि सिर्फ शराब का इतना स्तर ही किसी इंसान को कोमा में भेजने के लिए काफी था।

जांचकर्ताओं को उनके शरीर में गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूटाइरेट (GHB – जिसे आमतौर पर पार्टी ड्रग कहा जाता है) का संभावित रूप से जानलेवा स्तर मिला। इसके अलावा गांजा, जैनैक्स और दूसरे एंटी-एंजाइटी दवाओं के अंश भी मिले। पोस्ट-मॉर्टम जांच में पाया गया कि प्रिंस को कोई पुरानी या गंभीर बीमारी नहीं थी। मेडिकल साक्ष्यों ने निष्कर्ष निकाला कि शराब और कई दवाओं के इस घातक कॉकटेल ने कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर किया, जिससे उनकी मौत हो गई।

नशे की लत से जूझ रहे थे सऊदी प्रिंस

सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों से पता चला कि मौत से पहले प्रिंस अब्दुल्लाह शराब के अत्यधिक सेवन और जैनैक्स दवा पर निर्भरता की समस्या से जूझ रहे थे। द टेलीग्राफ के मुताबिक उन्हें पिछले साल अगस्त में रोहैम्पटन के प्रायरी क्लीनिक में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शराब, बेंजोडायजेपाइन और प्रेगाबालिन से डिटॉक्सिफिकेशन का इलाज कराया था। प्रायरी क्लीनिक छोड़ने के बाद, उन्होंने मर्सियासाइड के रेनफोर्ड हॉल क्लीनिक में रेसेपरेट्री ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कराया और अक्टूबर में वहां से डिस्चार्ज हुए थे।

कंसलटेंट मनोचिकित्सक डॉ. विक्टोरिया चमोरो ने अदालत को बताया कि प्रिंस को एंजाइटी के लक्षणों के साथ भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्होंने इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दी थी। डिस्चार्ज के समय उन्हें आत्महत्या के जोखिम वाला नहीं माना गया था, हालांकि बाद में वे निर्धारित ऑनलाइन फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में शामिल नहीं हुए थे।

न आत्महत्या का सबूत, न ही किसी साजिश का अंदेशा

असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन ने कहा कि ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे यह लगे कि प्रिंस अब्दुल्लाह अपनी जान खुद लेना चाहते थे। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक कॉरोनर ने नोट किया कि प्रिंस ने कभी खुदकुशी के विचार व्यक्त नहीं किए थे, होटल के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ऐसा कोई सबूत मिला जो यह दर्शाता हो कि उनकी मौत से पहले वहां कोई और व्यक्ति मौजूद था। अकेले होटल लौटने की सीसीटीवी फुटेज ने भी किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।

सऊदी शाही दरबार ने कुछ दिनों बाद की थी मौत की घोषणा

सऊदी रॉयल कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर 2 दिसंबर को प्रिंस अब्दुल्लाह के निधन की सार्वजनिक घोषणा की थी। सऊदी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रिंस के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजकुमारों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।

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सांप के डसने से मौत समझ रहे थे लोग, लेकिन जांच में सामने आई ऐसी साजिश जिसने पूरे मेरठ को हिला दिया

मेरठ में एक स्कूल संचालक की मौत का मामला अब साधारण हादसे से कहीं आगे बढ़कर सनसनीखेज आपराधिक जांच का रूप ले चुका है। शुरुआती तौर पर इसे सांप के डसने से हुई मौत माना गया था, लेकिन पुलिस की जांच में सामने आए दावों ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया कि पहली नजर में यह प्राकृतिक हादसा लगे और किसी को शक न हो। मामले में मृतक की पत्नी, उसके कथित प्रेमी और दो सपेरों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का कहना है कि हत्या के लिए बेहद जहरीले करैत सांप का इस्तेमाल किया गया और पूरी साजिश पहले से तैयार की गई थी। इस खुलासे के बाद मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर होगी।

सांप के डसने की कहानी निकली हत्या की साजिश

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पहले जिस मौत को सामान्य सांप के डसने का मामला माना जा रहा था, वही अब एक चौंकाने वाली हत्या की जांच में बदल गई है। पुलिस का आरोप है कि 32 साल से स्कूल चला रहे अतुल कुमार पंवार की हत्या बेहद सुनियोजित तरीके से की गई।

पत्नी और प्रेमी पर रची साजिश का आरोप

पुलिस के अनुसार, अतुल की पत्नी दामिनी ने स्कूल में बस चालक के रूप में काम करने वाले तुषार के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि पहले अतुल को दूध में नींद की गोलियां मिलाकर पिलाई गईं, ताकि वह गहरी नींद में चला जाए।

करैत सांप बना कथित ‘मर्डर वेपन’

जांच में सामने आया कि अतुल के बेहोश होने के बाद बिस्तर पर एक बेहद जहरीला करैत सांप छोड़ दिया गया। सांप के डसने से उसकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि इस साजिश में दो सपेरे सोनू और उदय कुमार की भी मदद ली गई, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला

यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई यूजर्स ने इसे “Calculated, Cold, Cruel” बताते हुए हैरानी जताई। कुछ लोगों ने आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की, जबकि कई ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं।

जांच जारी, पुलिस जुटा रही सबूत

पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। फिलहाल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। अदालत में पेश होने वाले सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी।

सांप के डसने से मौत समझ रहे थे लोग, लेकिन जांच में सामने आई ऐसी साजिश जिसने पूरे मेरठ को हिला दिया

मेरठ में एक स्कूल संचालक की मौत का मामला अब साधारण हादसे से कहीं आगे बढ़कर सनसनीखेज आपराधिक जांच का रूप ले चुका है। शुरुआती तौर पर इसे सांप के डसने से हुई मौत माना गया था, लेकिन पुलिस की जांच में सामने आए दावों ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया कि पहली नजर में यह प्राकृतिक हादसा लगे और किसी को शक न हो। मामले में मृतक की पत्नी, उसके कथित प्रेमी और दो सपेरों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का कहना है कि हत्या के लिए बेहद जहरीले करैत सांप का इस्तेमाल किया गया और पूरी साजिश पहले से तैयार की गई थी। इस खुलासे के बाद मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर होगी।

सांप के डसने की कहानी निकली हत्या की साजिश

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पहले जिस मौत को सामान्य सांप के डसने का मामला माना जा रहा था, वही अब एक चौंकाने वाली हत्या की जांच में बदल गई है। पुलिस का आरोप है कि 32 साल से स्कूल चला रहे अतुल कुमार पंवार की हत्या बेहद सुनियोजित तरीके से की गई।

पत्नी और प्रेमी पर रची साजिश का आरोप

पुलिस के अनुसार, अतुल की पत्नी दामिनी ने स्कूल में बस चालक के रूप में काम करने वाले तुषार के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि पहले अतुल को दूध में नींद की गोलियां मिलाकर पिलाई गईं, ताकि वह गहरी नींद में चला जाए।

करैत सांप बना कथित ‘मर्डर वेपन’

जांच में सामने आया कि अतुल के बेहोश होने के बाद बिस्तर पर एक बेहद जहरीला करैत सांप छोड़ दिया गया। सांप के डसने से उसकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि इस साजिश में दो सपेरे सोनू और उदय कुमार की भी मदद ली गई, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला

यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई यूजर्स ने इसे “Calculated, Cold, Cruel” बताते हुए हैरानी जताई। कुछ लोगों ने आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की, जबकि कई ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं।

जांच जारी, पुलिस जुटा रही सबूत

पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। फिलहाल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। अदालत में पेश होने वाले सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी।

25 लाख का इनामी नक्सली अजय महतो गिरफ्तार, 21 साल से था सक्रिय… चार राज्यों की पुलिस को थी तलाश

झारखंड के गिरिडीह में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोबरा 209 बटालियन की संयुक्त टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने 25 लाख रुपये के इनामी माओवादी अजय महतो को गिरफ्तार कर लिया है। उसे मोचू और टाइगर के नाम से भी जाना जाता है। गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने बताया कि अजय महतो को पिपराडीह गांव के जंगलों में चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान पकड़ा गया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को उसके इलाके में मौजूद होने की पक्की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस और सीआरपीएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया और उसे गिरफ्तार कर लिया।

2005 से था एक्टिव

पुलिस के मुताबिक, अजय महतो साल 2005 से माओवादी गतिविधियों में शामिल था। वह संगठन में स्पेशल एरिया कमेटी (एसएसी) कमांडर के पद पर काम कर रहा था। उस पर जबरन वसूली करने, हथियार और विस्फोटक जुटाने तथा हमलों की साजिश रचने जैसे कई गंभीर आरोप हैं। अधिकारियों ने बताया कि झारखंड के कई जिलों में अजय महतो के खिलाफ 240 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, आईईडी विस्फोट, सुरक्षा बलों पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि अजय महतो की गिरफ्तारी से उन इलाकों में माओवादी गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा, जहां वह लंबे समय से सक्रिय था।

 ‘ऑपरेशन कगार’ है जारी

अजय महतो की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब झारखंड समेत कई राज्यों में सुरक्षा बल माओवाद के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और उसकी विशेष कोबरा (CoBRA) कमांडो इकाइयां माओवादी नेताओं और उनके नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त अभियान चला रही हैं। इसी अभियान के तहत ‘ऑपरेशन कगार’ भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य माओवादी प्रभावित इलाकों में कार्रवाई को और तेज करना है। इस अभियान में कई सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। अधिकारी बताते हैं कि अभियान के दौरान माओवादियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, खुफिया जानकारी जुटाई जा रही है और जंगलों व दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन और इलाके पर नियंत्रण मजबूत करने का काम कर रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से माओवादी प्रभाव खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की समय-सीमा तय की थी। सरकार का कहना है कि लगातार सुरक्षा अभियान और प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए तय समय के भीतर देश को माओवादी गतिविधियों से मुक्त बनाने की कोशिश जारी है। अधिकारियों के अनुसार, अजय महतो जैसे बड़े माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी इसी रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि ऐसे अभियानों का मकसद माओवादी संगठनों के वरिष्ठ नेताओं को पकड़ना, उनके नेटवर्क को तोड़ना और उनकी गतिविधियों को कमजोर करना है।

मेरठ में ‘सांप से मौत’ का सनसनीखेज खुलासा! पत्नी ने प्रेमी संग रची खौफनाक साजिश, नींद की गोलियां देकर चादर में छोड़ा जहरीला सांप

Meerut Snake Murder Case

हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में सांप के डसने से हुई एक युवक की मौत का मामला सामने आया था, पुलिस जांच में सर्पदंश से हुई मौत 24 घंटे के अंदर चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई। जिस घटना को पहले सामान्य दुर्घटना माना जा रहा था, पुलिस जांच में वह कथित तौर पर एक सुनियोजित हत्या निकली। यह हत्या किसी और ने नही बल्कि मृतक की पत्नी, उसके कथित प्रेमी ने की है। पुलिस ने इस हत्याकांड से जुड़े आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दावा किया है कि पत्नी ने पति को पहले नींद की गोलियों का ओवरडोज दी और फिर जहरीला सांप उसकी चादर में छोड़कर उसे डसवाया गया। ALSO READ: एक और खौफनाक कांड! पत्नी ने लाइव लोकेशन शेयर कर प्रेमी से करवाया पति का कत्ल

 

सर्पदंश की कहानी में झोल

मृतक 35 वर्षीय अतुल पंवार अपनी पत्नी दामिनी के साथ हस्तिनापुर के रामलीला मैदान के पास कृष्णा किड्स पब्लिक स्कूल संचालित करते थे। दोनों ने वर्ष 2019 में प्रेम विवाह किया था और हंसी-खुशी के साथ स्कूल परिसर में ही रह रहें थे। शुक्रवार सुबह दामिनी ने पति को सांप काटने की सूचना परिवार को दी। आनन-फानन में अतुल को सीएचसी हस्तिनापुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बिस्तर में सांप मिलने से इसे हादसा माना जा रहा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया तो सर्पदंश की कहानी में झोल नजर आया।

 

पूछताछ में हत्या की साजिश का खुलासा

जब परिजनों ने मौत पर संदेह जताया तो पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि सांप का व्यवहार शर्मीला होता है, इसलिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर स्वाट टीम देहात और थाना हस्तिनापुर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की। एस एस पी अविनाश पांडे के मुताबिक अतुल की पत्नी दामिनी के मोबाइल की जांच- पड़ताल की तो उनके स्कूल के ड्राइवर तुषार उर्फ निक्की से लगातार संपर्क होने की जानकारी मिली। पूछताछ में दोनों के बीच प्रेम संबंध होने और अतुल की हत्या की साजिश रचने का खुलासा हुआ। ALSO READ: UP Bahraich Crocodile Attack : बहराइच में दर्दनाक हादसा, घाघरा नदी किनारे गए 12 साल के बच्चे को मगरमच्छ खींच ले गया, घंटों बाद मिला शव

 

दूध में नींद की गोलियों की अधिक मात्रा दी गई

पुलिस का दावा है कि घटना वाली रात अतुल को दूध में नींद की गोलियों की अधिक मात्रा दी गई। सोनू और उदय नाम के सपेरे से जहरीला सांप खरीदा गया और उसे अतुल की चादर में छोड़ दिया गया। सांप के डसने से उसकी मौत हो गई। दामिनी पटकथा के मुताबिक शुक्रवार की सुबह अतुल को जगाने का प्रयास किया और जब वह उठा नही तो चादर हटाई, जिसके बाद सांप के काटने का शोर मचा दिया।

 

20 लाख के बीमे पर थी नजर

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अतुल स्कूल खोलने से पहले एक प्रकाशन कंपनी में नौकरी करता था, उसके नाम करीब 20 लाख रुपये का बीमा था। बीमे की राशि हड़पने के लिए दामिनी ने प्रेमी तुषार के साथ मिलकर उसे रास्ते से हटा दिया। पुलिस के अनुसार, बीमा राशि में से पांच लाख रुपये साजिश में शामिल दो सहयोगियों को देने की बात तय हुई थी।

20 दिन पहले भी हुई थी अतुल को मारने की कोशिश

पुलिस ने यह भी दावा किया कि करीब 20 दिन पहले अतुल को कार से टक्कर मारकर मारने की कोशिश की गई थी, लेकिन हेलमेट पहने होने के कारण वह बच गया। उस समय वह घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाना चाहता था लेकिन दामिनी ने उसे रोक दिया। पुलिस ने इस मामले में दामिनी, तुषार उर्फ निक्की, सोनू और उदय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। सभी के न्यायालय में पेश किया जायेगा।