अमेरिका में गोल्डी बराड़ पर ₹10 करोड़ का इनाम:FBI की टॉप 10 मोस्ट वांटेंड लिस्ट में शामिल, लॉरेंस गैंग से जुड़ा, निज्जर की हत्या करवाने का आरोप

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को टॉप 10 मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल किया है। बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले को 10 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपए) तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। यह घोषणा FBI के लॉस एंजिलिस फील्ड ऑफिस ने की। अमेरिका में बराड़ के खिलाफ साजिश रचने, जबरन वसूली और ड्रग्स की तस्करी समेत कई आरोप हैं। बराड़ को लॉरेंस ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप का उत्तरी अमेरिका में प्रमुख ऑपरेशनल लीडर बताया गया है। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ पर 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप है। इसी साल जुलाई में निज्जर की हत्या को लेकर अमेरिका ने पहली बार चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसमें दावा है कि हत्या का आदेश भारतीय जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और फरार चल रहे गोल्डी बराड़ ने दिया था। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई भारतीय जेल में रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चला रहा था। वह जेल में तस्करी से पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस के जरिए हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों का निर्देश देता था।

ब्रिटेन में अमेरिकी एयरबेस के पास आतंकी साजिश का शक:5 गिरफ्तार, 85 घर खाली कराए; ईरान पर हमलों में इस्तेमाल होता है बेस

ब्रिटेन में अमेरिकी वायुसेना के इस्तेमाल वाले एयरबेस के पास आतंकी साजिश की आशंका में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को रविवार तड़के एयरबेस की ओर जा रही 3 संदिग्ध गाड़ियों की सूचना मिली थी। इसके बाद इलाके में अलर्ट जारी किया गया और आसपास के गांव में 85 घर खाली कराए गए। यह एयरबेस इंग्लैंड के ग्लॉस्टरशायर में RAF फेयरफोर्ड के नाम से जाना जाता है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों पर आतंकी हमला करने की तैयारी और विस्फोटक से जुड़े अपराधों का शक है। रविवार शाम तक पांचों पुलिस की हिरासत में थे। अमेरिकी वायुसेना मार्च से RAF फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले शुरू करने के लिए कर रही है। हाल के दिनों में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने यहां से ईरान के खिलाफ हमलों के लिए उड़ान भरी थी। स्थानीय महिला ने पुलिस को संदिग्ध गतिविधि की सूचना दी BBC के मुताबिक, एक स्थानीय महिला ने रविवार तड़के एयरबेस के पास संदिग्ध गतिविधि देखकर पुलिस को सूचना दी थी। महिला ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि उसने पहले रक्षा मंत्रालय की पुलिस को फोन किया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसने आपातकालीन नंबर 999 पर कॉल किया। महिला के मुताबिक, उसने तीन वैन खड़ी देखी थीं। वहां कुछ लोग मास्क पहने हुए थे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सेना ने रोबोट से वैन की जांच कराई AP की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के बाद सेना की बम निरोधक टीम ने रोबोट की मदद से तीनों वैन की जांच की। सोमवार सुबह तक ग्रामीणों को घर लौटने की अनुमति नहीं मिली थी और वैन को भी वहां से हटाया नहीं गया था। अमेरिकी वायुसेना ने कहा कि RAF फेयरफोर्ड पर तैनात उसके कर्मचारी सतर्क हैं। हालांकि, उसने सुरक्षा कारणों से सुरक्षा व्यवस्था के विशेष तरीकों की जानकारी देने से इनकार कर दिया। लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी ब्रिटेन में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी। ईरान के खिलाफ हमलों में इस्तेमाल होता है एयरबेस RAF फेयरफोर्ड ब्रिटेन का एयरबेस है, जिसका संचालन अमेरिकी वायुसेना करती है। यह लंदन से करीब 160 किलोमीटर पश्चिम में है। मध्य पूर्व में कई दशकों से चल रहे सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिकी सेना ने इसका इस्तेमाल किया है। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग शुरू होने के बाद इस एयरबेस की भूमिका फिर बढ़ गई। अमेरिकी B-1 और B-52 बमवर्षक विमानों ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों के लिए यहां से उड़ान भरी है। ब्रिटेन ने शुरुआत में ईरान पर हमले करने के लिए अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की ट्रम्प की मांग ठुकरा दी थी। हालांकि, मार्च में तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरान की मिसाइलों और उनके लॉन्च ठिकानों के खिलाफ रक्षात्मक कार्रवाई के लिए अमेरिकी सेना को ब्रिटिश एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। यह फैसला ईरान की ओर से ब्रिटेन के हितों और खाड़ी क्षेत्र में उसके सहयोगियों पर हमलों के बाद लिया गया था। ईरान पहले कह चुका है कि उसके क्षेत्र पर हमले के लिए इस्तेमाल होने वाला कोई भी सैन्य अड्डा उसके लिए वैध निशाना है।

आज का एक्सप्लेनर:तिहाड़ जेल से अमेरिका गया ‘भाड़े का सैनिक’ मैथ्यू; आतंकी साजिश के आरोप थे, फिर कैसे छूटा, क्या अब भारत लौटेगा

24 सितंबर को तिहाड़ जेल से निकला मैथ्यू वैनडाइक अमेरिका की उड़ान भर चुका है। वही भाड़े का सैनिक मैथ्यू, जिसे 6 महीने पहले भारत की सबसे सख्त आतंकवाद-रोधी एजेंसी NIA ने पकड़ा था और UAPA जैसा कड़ा कानून लगाया था। आखिर कौन है मैथ्यू, UAPA लगने के बावजूद भारत से जाने क्यों दिया गया और क्या वापस लौटेगा; 3 चैप्टर्स में पूरी कहानी… मैथ्यू वैनडाइक 1981 में अमेरिका के बाल्टीमोर में पैदा हुआ। वो खुद को मर्सिनरी बताता है, यानी भाड़े का सैनिक, जो पैसों के बदले किसी भी देश या संगठन के लिए लड़ सकता है। मैथ्यू की वेबसाइट के मुताबिक, वो ‘Sons of Liberty International’ (SOLI) नाम की प्राइवेट मिलिट्री का फाउंडर, जंग कवर करने वाला पत्रकार, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर है। वह सीरिया और इराक जैसे देशों में युद्धबंदी भी रहा है। पिछले दो दशकों में उसने दुनियाभर में कई ऑपरेशन किए… तो मैथ्यू भारत में क्या कर रहा था? गिरफ्तारी के वक्त NIA ने आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, यानी UAPA की धारा 18 लगाई, जो आतंकी साजिश, कोशिश, समर्थन, उकसाने या मदद करने से जुड़ी है। UAPA के तहत जांच पूरी करके 180 दिनों में चार्जशीट दायर करनी होती है, जो मैथ्यू के मामले में 8 सितंबर 2026 को खत्म हो रही थी। NIA ने 8 सितंबर को चार्जशीट दाखिल तो कर दी, लेकिन UAPA की धाराओं के बजाय इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 लगाईं। धारा 21 वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के बिना भारत में दाखिल होने से जुड़ी है, जबकि धारा 23 वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रुकने या वीजा नियमों को तोड़ने से जुड़ी है। NIA का तर्क था कि जांच अब भी जारी है और UAPA के तहत अपराध की पुष्टि करने के लिए अभी और वक्त चाहिए। यहीं से कानूनी छूट का एक मौका बना… कोर्ट छूट के साथ कुछ शर्तें भी लगाईं… इसके बाद 24 सितंबर की रात मैथ्यू और बाकी 6 आरोपी तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। इस पर कई विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 23-26 मई को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने मैथ्यू का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव ने यह नतीजा तय किया, लेकिन भारत को बदले में क्या मिला? इससे भी अहम है कि इन विदेशी संदिग्धों को वीजा कैसे मिला और इन्हें भारत के रास्ते म्यांमार जाने की इजाजत कैसे मिली? AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘UAPA के तहत किसके खिलाफ चार्जशीट दायर की जानी चाहिए, यह सर्जियो गोर तय करते हैं। भारतीय नागरिक UAPA के तहत 9 से 10 साल तक जेल में सड़ सकते हैं, क्योंकि उनके पास सर्जियो गोर नहीं हैं।’ स्ट्रैटजिक अफेयर्स एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि भारत ने बार-बार कूटनीतिक या रणनीतिक दबाव के तहत विदेशी नागरिकों या संस्थाओं के खिलाफ हाई-प्रोफाइल आपराधिक कार्यवाहियों को कमजोर कर दिया गया, छोड़ दिया गया या बेअसर कर दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक महीने बाद मैथ्यू और बाकी 6 आरोपियों को भारत लौटना होगा और लौटने के 72 घंटों के भीतर कोर्ट को बताना होगा। वहीं NIA की UAPA को लेकर जांच जारी है। अगर एजेंसी को सबूत मिले और अपराधों की पुष्टि हुई, तो वह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर सकती है। ऐसा हुआ तो मैथ्यू पर फिर से UAPA के तहत आतंकी गतिविधियों के आरोप फिर से लग सकते हैं और केस चल सकता है। हालांकि मैथ्यू की वापसी पर संशय बना हुआ है। ज्यादातर मामलों में विदेशी आरोपियों के लौटने की गारंटी लेने वाला कोई नहीं होता। पहले भी ऐसा हो चुका है कि जब विदेशी आरोपी एक बार छूटने के बाद वापस लौटे ही नहीं। 3 चर्चित मामले… ऐसे में अगर मैथ्यू तय समय पर नहीं लौटता, तो भारत के पास 2 विकल्प हैं- जमानत रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी करना या भारत-अमेरिका की प्रत्यर्पण संधि (1997) के तहत औपचारिक प्रत्यर्पण की मांग करना। ————— ये भी खबर पढ़िए…. मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम रख पाकिस्तान कैसे करोड़ों जुटाएगा; ये मोस्ट वॉन्टेड आतंकी आखिर छिपा कहां है जैश-ए-मोहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर के सिर पर पाकिस्तान ने 70 लाख रुपए का इनाम रखा है। पाकिस्तान 2021 से दावा करता आ रहा है कि मसूद अफगानिस्तान भाग चुका है, जबकि भारतीय एजेंसियों का मानना है कि वो पाकिस्तान में ही छिपा है। पूरी खबर पढ़िए…

राजद ने रांची में प्रदर्शन किया, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इ्स्तीफे की मांग

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के अंदर मतभेद की सामने आई खबर को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकर्ताओं ने यहां विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और उनके इस्तीफे की मांग की।

शनिवार को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पार्टी कार्यकर्ताओं ने आयोग पर चुनावों में भाजपा को “अनुचित लाभ” पहुंचाने का आरोप लगाया।

राजद के प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम दास सिंह ने आरोप लगाया, “बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों में जन भावनाएं भाजपा के खिलाफ थीं। लेकिन सीईसी ज्ञानेश कुमार ने चुनावों को प्रभावित करने और भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूचियों में हेरफेर कराया। उन्होंने कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।

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यह घटनाक्रम ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे, जबकि एसआईआर का राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन पूर्ण आयोग की देखरेख में हो रहा था।

राजद नेता सिंह ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बिहार में करीब 65 लाख और बंगाल में करीब 27 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।

राजद की उपाध्यक्ष अनीता यादव ने आरोप लगाया, “राजनीतिक दलों की ओर से ईवीएम की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठाए जाने के बावजूद कुमार पूरी तरह उदासीन रहे। उन्होंने न केवल एसआईआर प्रक्रिया और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि मतदान हो जाने के बाद वोट प्रतिशत में बदलाव की साजिश भी रची।

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Komal Rani: ‘जो अपने पति को सालों से मारने की कोशिश…’, गोविंदा के साथ डेटिंग रूमर्स के बीच कोमल रानी ने सुनीता आहूजा पर लगाए गंभीर आरोप

Komal Rani: गोविंदा और कोमल रानी स्वर्णकार के अफेयर की चर्चाएं जल्द खत्म होने वाली नहीं हैं। हाल ही में इंस्टाग्राम स्टोरी पर कोमल रानी ने सुनीता आहूजा के हालिया बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। गोविंदा और कोमल बीते दिनों लालबागचा राजा गए थे, जिसके बाद सुनीता आहूजा दक्षिणेश्वर काली मंदिर गईं।

अपनी जर्नी के एक वीडियो में उन्हें यह कहते हुए देखा गया, “मेरा घर बिना किसी वजह के टूट रहा है।” सुनीता को जवाब देते हुए कोमल ने अपनी हालिया पोस्ट में लिखा, “जो घर पहले से ही टूटा हुआ हो, उसे कोई और नहीं तोड़ सकता।”

कोमल रानी ने तोड़ी चुप्पी

गोविंदा के साथ अपने रिश्तों को लेकर लगातार हो रही चर्चाओं के बीच कोमल ने आखिरकार अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक लंबा नोट लिखकर चुप्पी तोड़ी। कोमल ने अपने खिलाफ साजिश के लिए सुनीता की आलोचना की और कहा, “जो औरत सालों से अपने ही पति की जान लेने की कोशिश कर रही हो, ऐसी औरतों की बद्दुआएं किसी को नहीं लगतीं। जो घर पहले से ही टूटा हुआ हो, उसे कोई और नहीं तोड़ सकता।

उन्होंने आगे लिखा- हमारे देश के लोग इतने बेवकूफ नहीं हैं कि किसी के कहने पर कि ‘कौवे ने तुम्हारा कान ले लिया है’, वे कौवे के पीछे भागने लगेंगे। मुझे समझ नहीं आता कि एक महिला किस तरह के दर्द से गुजर रही है, जहां वह अपने दर्द को ठीक करने की कोशिश करने के बजाय, वह उसे सबके सामने दिखाने में मजा ले रही है। क्या यह सच में दर्द है या यह सोच-समझकर रची गई कोई साजिश है?”

उन्होंने आगे कहा, “किसी आदमी को लगातार मानसिक रूप से परेशान करना, उसे काम करने से रोकना, उसे घर पर बैठने और बर्बाद होने के लिए मजबूर करना, उसे पूरी तरह अलग-थलग कर देना और उसे मौत के कगार पर पहुंचा देना… मुझे नहीं लगता कि कोई अच्छी और समर्पित पत्नी अपने पति के साथ इतना बुरा बर्ताव कर सकती है। क्या ऐसी महिलाएं मानसिक रूप से बीमार होती हैं या वे बहुत ज्यादा चालाक होती हैं। उन्हें अच्छी तरह पता होता है कि जो काम वे बंद दरवाजों के पीछे नहीं कर पाईं, उसे वे सबके सामने आकर और लोगों की सहानुभूति हासिल करके कर सकती हैं? अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए मेरे नाम का इस्तेमाल करना बंद करें। भगवान हर भले आदमी को ऐसी चालाक औरतों से बचाए।”

गोविंदा-कोमल रानी का रूमर्ड अफेयर

इस साल की शुरुआत में मुंबई एयरपोर्ट पर गोविंदा और कोमल रानी को एक साथ यात्रा करते देखे जाने के बाद उनके बीच रिश्ते को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। कोमल, गोविंदा के साथ आने वाली फिल्म ‘रूपा’ में काम कर रही हैं। हालांकि, दोनों के बीच रोमांटिक रिश्ते की खबरें अभी भी सिर्फ अटकलें ही हैं, क्योंकि किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है।

गोविंदा और सुनीता की शादी 1987 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं-बेटी टीना आहूजा और बेटा यशवर्धन आहूजा। सुनीता ने हाल के महीनों में कई बार अपनी शादी के बारे में बात की है और दक्षिणेश्वर से उनकी हालिया टिप्पणी अब तक की उनकी सबसे भावुक सार्वजनिक अपीलों में से एक है।

मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त के इस्तीफे की मांग को लेकर लखनऊ में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने यहां विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विधानसभा की ओर मार्च करने से रोके जाने पर पुलिस से उनकी झड़प हो गई।

शुक्रवार को भारी बारिश के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस ने अवरोधक लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।

चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ता अवरोधकों पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद उनकी पुलिस से झड़प हो गई।

इसके बाद पुलिस ने राय, मिश्रा और प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर विरोध प्रदर्शन स्थल ‘इको गार्डन’ ले गई।

इस बीच प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्‍स’ हैंडल से एक पोस्ट में कहा लोकतंत्र की हत्‍या करने वाले मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। ज्ञानेश ने देशद्रोह का काम किया है, उन्हें चुनाव आयुक्त की कुर्सी पर बैठने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन जारी रहेगा।

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प्रदेश कांग्रेस ने एक अन्‍य पोस्ट में कहा जिन्‍हें लगता है हिरासत में लेकर आवाज दबा देंगे, वो गलतफहमी में हैं। यह आत्‍मविश्‍वास सत्‍ता के दमन पर सच की जीत का शंखनाद है 

प्रदर्शनकारियों ने बारिश के बीच अपना आंदोलन जारी रखा, महिला कार्यकर्ता “वोट चोर, गद्दी छोड़” लिखे पोस्टर लिए हुए थीं। राय ने भाजपा और चुनाव आयोग पर साजिश करने का आरोप लगाया।

उन्‍होंने कहा हक की यह लड़ाई न रुकी है, न रुकेगी! लोकतंत्र पर हमला और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा 

गौतम ने भी कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की चुनावी गड़बड़ी देश हित के ख़िलाफ़ है।

मिश्रा ने कहा कि हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में भी “वोट की चोरी” के आरोप लगे थे।

उन्होंने कहा, “राहुल जी सबूतों के साथ यह मुद्दा उठाते रहे हैं। आज वह मुद्दा लोगों के सामने आ गया है।”

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति या पार्टी का नहीं, बल्कि संविधान और देश के लोगों के वोट देने के अधिकार की रक्षा का है।

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आतंकी हाफिज पर सवाल से भागे पाकिस्तान PM:शहबाज UN में पत्रकारों ने पूछा- आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे; कोई जवाब नहीं दिया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे। यहां पत्रकारों ने उनसे लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर सवाल किया, लेकिन शहबाज सवालों को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए। UN मुख्यालय में दाखिल होते समय पत्रकारों ने शहबाज से पूछा, “प्रधानमंत्री, आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” शहबाज ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। बाहर निकलते समय पत्रकारों ने फिर पूछा कि पाकिस्तान हाफिज सईद पर कार्रवाई कब करेगा, लेकिन शहबाज ने दोबारा कोई जवाब नहीं दिया। हाफिज सईद 26/11 मामले में आरोपी हाफिज सईद प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का संस्थापक है। भारत ने उसे UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है। वह 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में आरोपी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में भी सईद को आरोपी बनाया है। NIA ने उसे कथित साजिश में आरोपी नंबर 8 बताया है और पाकिस्तान स्थित LeT के आतंकियों की भूमिका का आरोप लगाया है। भारत बोला- PAK आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को घर छोड़ने पर मजबूर किया संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में कश्मीर और अल्पसंख्यकों को लेकर पाकिस्तान के बयान पर भारत ने पलटवार किया। भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान ने जिन आतंकियों को हथियार और ट्रेनिंग दी, उन्हीं ने 1990 में कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से निकलने पर मजबूर किया। पाकिस्तान ने भारत में कश्मीर और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत पर सवाल उठाने से पहले अपने यहां के हालात देखने चाहिए। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकियों को हथियार और ट्रेनिंग देकर भारत भेजा। उन्होंने कहा कि यही आतंकी बाद में कश्मीर में अलग-अलग धर्मों के लोगों को निशाना बनाते रहे, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान ने इन आतंकियों को समर्थन दिया, वही अब UN में मानवाधिकारों की बात कर रहा है। भारत ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया भारत ने पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। त्यागी ने जबरन धर्म परिवर्तन और शादी, ईशनिंदा कानून और शिया, अहमदिया, इस्माइली और हजारा समुदायों के खिलाफ भेदभाव का जिक्र किया। त्यागी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर के उसके कब्जे वाले हिस्से को खाली करने को कहा। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को अपनी कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की सलाह दी। ————————

ईरान के लिए ‘सीक्रेट हथियार’ बना रहा चीन! रिपोर्ट में हुए खुलासे से अमेरिका में हड़कंप

China Secret Support to Iran: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन एक तरफ तो खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से ईरान की आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। एक खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, ईरान के लिए एक खास ‘सीक्रेट हथियार’ भी बना रहा है।

अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान के रक्षा मंत्रालय को भेजे जाने वाले ‘डुअल-यूज’ पार्ट्स यानी दोहरे इस्तेमाल वाले घटकों की डिलीवरी में इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। ईरानी सीमा शुल्क डेटा, अमेरिकी अधिकारियों और इस गुप्त व्यापार से जुड़े लोगों के हवाले से आई इस रिपोर्ट से कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। चीन और अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के बीच इस खुलासे ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

चीन से क्या-क्या मिल रहा है ईरान को?

‘डुअल-यूज’ पार्ट्स वे सामान होते हैं जिनका उपयोग आम नागरिक उपकरणों के साथ-साथ खतरनाक हथियारों में भी किया जा सकता है। WSJ रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान भेजे गए सामान में ये प्रमुख चीजें शामिल हैं:

इलेक्ट्रॉनिक्स और जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण: जो मिसाइलों की सटीक निशाना लगाने की क्षमता बढ़ाते हैं।

इलेक्ट्रिक मोटर और एयरक्राफ्ट इंजन पार्ट्स: जिनका सीधा इस्तेमाल सैन्य ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम में होता है।

रासायनिक सामग्री: जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल के फ्यूल बनाने में किया जा सकता है।

उपग्रह तस्वीरें: अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि 17 जुलाई के उस हमले से पहले और बाद में ईरान ने चीनी सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

कार्गो फ्लाइट्स में अचानक उछाल: ‘महान एयर’ का संदिग्ध रोल

फ्लाइट ट्रैकिंग साइट ‘FlightRadar24’ के डेटा के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन महान एयर ने मार्च के महीने में चीन के बीजिंग, शंघाई और गुआंगझू से तेहरान के लिए हर हफ्ते सिर्फ 4 उड़ानें भरी थीं।

लेकिन अप्रैल के अंत तक यह संख्या बढ़कर 27 उड़ानें प्रति सप्ताह हो गई। सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में महान एयर की फ्लाइट्स की संख्या 39 तक पहुंच गई। इन अधिकांश उड़ानों का इस्तेमाल यात्रियों को ले जाने के बजाय गुप्त सैन्य और तकनीकी कार्गो (हथियारों के पुर्जों) की डिलीवरी के लिए किया जा रहा था।

अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार कर खेल कर रहा तेल का ‘मास्टरमाइंड’

अमेरिकी पाबंदियों से पंगु हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को चीन संजीवनी दे रहा है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, चीन ईरान के क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा खुद खरीद रहा है। अमेरिकी वित्तीय पाबंदियों को चकमा देने के लिए चीनी बैंकों और छद्म कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे तेहरान तक पैसा आसानी से पहुंच रहा है।

16 सितंबर को बीजिंग में हुई बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साफ शब्दों में कहा था कि चीन और ईरान ‘व्यापक रणनीतिक भागीदार’ हैं और चीन ईरान के ‘वैध अधिकारों और हितों’ की रक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने को तैयार है।

ट्रंप-जिनपिंग की मीटिंग के बीच अमेरिकी सियासत में भूचाल

वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, एआई सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन अमेरिकी संसद में ईरान का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है।

सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन समेत कई डेमोक्रेट नेताओं ने व्हाइट हाउस को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रपति ट्रंप, शी जिनपिंग के सामने चीन की इस ‘सैन्य मदद’ का मुद्दा सख्ती से उठाएं। सीनेटरों ने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अमेरिकी सैनिकों की हत्या और ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को जिंदा रखने में मदद कर रही हैं।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन चीन से सीधे टकराने में थोड़ा हिचकिचा रहा है। ट्रंप पहले कह चुके हैं कि शी जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे ईरान को सीधे हथियार नहीं देंगे और वे शी पर भरोसा करते हैं।

चीन की सफाई: ‘हमारी छवि खराब करने की कोशिश’

इन गंभीर आरोपों पर चीन के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘चीन को बदनाम करने की साजिश’ है। चीन का तर्क है कि वह दोहरे उपयोग वाले सामानों के निर्यात पर सख्त नियम लागू करता है और अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।

सिंधु जल संधि पर यूएन सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को गैर कानूनी बताया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की साजिश एक बार फिर नाकाम हो गई। पाकिस्तान ने यूएनएससी में सिंधु जल समझौते से जुड़े कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के एक हालिया फैसले के बारे में पत्र जारी किया। भारत ने पड़ोसी मुल्क की इस हरकत का करारा जवाब दिया है। भारत ने कहा कि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन गैर-कानूनी तरीके से बना है और सिंधु जल संधि पर इस्लामाबाद झूठ फैला रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तान की आदत है कि वह अपने गलत प्रोपेगैंडा के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है और झूठ फैलाता है। सबसे पहले, यह तथाकथित फैसला परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का फैसला नहीं है, जैसा कि पाकिस्तान के मंत्री ने दिखाने की कोशिश की है। बल्कि यह एक गैर-कानूनी तरीके से बने कोर्ट का फैसला है।” उन्होंने आगे कहा, “हम इसे पाकिस्तान की तरफ से असलियत को तोड़-मरोड़कर पेश करने की एक और कोशिश के तौर पर देखते हैं। इस मुद्दे पर हमारी स्थिति बहुत साफ है और हमने इसे कई बार दोहराया है।”

कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को नहीं मानता भारत

भारत ने लगातार कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को यह कहते हुए खारिज किया है कि इसे सिंधु जल संधि का उल्लंघन करके बनाया गया था और उसने कभी भी इसे मान्यता नहीं दी या इसकी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। नई दिल्ली ने यह भी कहा है कि ट्रिब्यूनल का भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।

पिछले साल अप्रैल में, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। नई दिल्ली ने कहा है कि यह संधि तब तक बाधित रहेगी जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद तरीके से और पक्के तौर पर सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देना बंद नहीं करता।

सीओए ने 31 अगस्त को जारी किया था फैसला

कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 31 अगस्त को एक फैसला दिया, जिसमें कहा गया कि भारत सिंधु जल संधि पर एकतरफा रोक नहीं लगा सकता। भारत ने तुरंत इस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि यह “गैर-कानूनी तरीके से बनाया गया” न्यायाधिकरण है और भारत के संप्रभु फैसले पर इसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं था। रणधीर जयसवाल ने ये बातें पाकिस्तान के यूएन सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ से जुड़े हालिया फैसलों के बारे में एक पत्र भेजने से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहीं।

दिखावा है मसूद अजहर पर इनाम राशि बढ़ाना

रणधीर जयसवाल की यह टिप्पणी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) प्रमुख मसूद अजहर की गिरफ्तारी या सजा के लिए पाकिस्तान के इनाम बढ़ाने के कुछ दिनों बाद आई है। पाकिस्तान ने अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की बैठक से कुछ हफ्ते पहले, मोस्ट-वांटेड आतंकवादियों की अपनी नई लिस्ट में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सरगना मसूद अजहर पर इनाम PKR 20 लाख से बढ़ाकर PKR 70 लाख कर दिया है। भारत ने पाकिस्तान के इस कदम को “नौटंकी” और “दिखावटी घोषणा” बताते हुए खारिज कर दिया, और कहा कि इस्लामाबाद को मसूद अजहर के खिलाफ ठोस एक्शन लेने की जरूरत है।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि अजहर अफगानिस्तान में छिपा है। हालांकि, पिछले 6 महीनों के तकनीकी एनालिसिस के आधार पर भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अजहर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में है।

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Surat Employee News: ₹10 हजार बकाए के लिए बॉस की दुकान में लगाई आग! 14 दुकानें जलकर खाक; 24 करोड़ रुपये का माल स्वाहा

Surat Employee News: गुजरात के सूरत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज 10 हजार रुपये के कथित बकाए पेमेंट को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि इसका अंजाम करोड़ों रुपये के नुकसान के रूप में सामने आया। सूरत पुलिस के मुताबिक, एक पूर्व अकाउंटेंट ने अपने मालिक से नाराज होकर उसकी दुकान में कथित तौर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसकी वजह से देखते ही देखते आग ने आसपास की दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में 14 दुकानें जलकर खाक हो गईं। इस दौरान करीब 24 करोड़ रुपये का कपड़ा एवं अन्य सामान नष्ट हो गया।

बताया जा रहा है कि यह घटना 9 सितंबर को सरोली इलाके के ‘श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट (Surat Shyam Sangini Textile Market)’ में हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे आग लगने की घटना माना जा रहा था। लेकिन कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने इसे कथित रूप से सुनियोजित आगजनी बताया है। मामले में सूरत क्राइम ब्रांच ने 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले (Vinod Pandit Sawale) को आगजनी के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कहा कि 9 सितंबर को सरोली इलाके में लगी आग कोई हादसा नहीं थी। बल्कि कर्मचारी द्वारा अपने मालिक के खिलाफ जान-बूझकर लगाई गई आग थी।

अप्रैल में नौकरी शुरू की थी, कुछ समय बाद हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार, सावले ने अप्रैल 2026 में मार्केट की छठी मंजिल स्थित एक दुकान में अकाउंटेंट के तौर पर काम शुरू किया था। उसे करीब 30 हजार रुपये सैलरी मिलती थी। बाद में उसके काम को लेकर दुकान मालिक के साथ विवाद हुआ। फिर उसने नौकरी छोड़ दी। पुलिस का कहना है कि सावले का करीब ₹10 हजार के कथित बकाया भुगतान को लेकर भी मालिक से विवाद था। इसी बकाए पेमेंट को लेकर वह नाराज था। कथित तौर पर उसने मालिक को सबक सिखाने के लिए आग लगाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम, दूसरी बार पेट्रोल लेकर पहुंचा

जांच में पुलिस ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं था जब सावले ने दुकान में आग लगाने की कोशिश की। उसने कथित तौर पर पहले भी आग लगाने का प्रयास किया था। लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने दूसरी योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब 150 रुपये का पेट्रोल खरीदा और उसे प्लास्टिक की थैली तथा एक बोतल में लेकर मार्केट पहुंचा।

12:30 बजे दुकान के बाहर पेट्रोल छिड़कने का आरोप

CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने बताया कि एक सख्त चेहरे को सफेद रुमाल से ढककर और कंधे पर बैग लटकाए मार्केट में दाखिल हुआ था। पुलिस के मुताबिक, बाद में उसकी पहचान सावले के रूप में हुई। जांच के अनुसार, सावले ने देवध गांव स्थित एक पेट्रोल पंप से करीब 150 रुपये का पेट्रोल लिया। फिर 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे वह मार्केट पहुंचा। वह 5वीं मंजिल की सीढ़ियों के पास बैठकर इंतजार करता रहा।

करीब रात 12:30 बजे जब मार्केट लगभग सुनसान हो गया, उसने कथित तौर पर दुकान के बाहर रखे कपड़े के बॉक्स और पार्सल पर पेट्रोल छिड़का। फिर उसमें आग लगा दी। इसके बाद वह मौके से भाग गया। आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते आग आसपास की दुकानों तक फैल गई। पुलिस के मुताबिक, करीब 14 दुकानें पूरी तरह जल गईं। जबकि बड़ी मात्रा में कपड़ा और अन्य सामान नष्ट हो गया। आग पर काबू पाने में दमकलकर्मियों को करीब 38 घंटे लगे।

1,500 CCTV कैमरों से खुला राज

घटना के बाद सरोली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने मार्केट और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान 1,500 से ज्यादा CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया गया। ये कैमरे सूरत पुलिस के ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ फेज-2 के तहत लगाए गए हैं। जांचकर्ताओं ने संदिग्ध के आने-जाने के रास्ते को आगे और पीछे की दिशा में ट्रैक किया। इसी CCTV ट्रेल के आधार पर पुलिस कथित तौर पर सावले तक पहुंची।

FIR की जानकारी मिलते ही बंद किया मोबाइल, परिवार के साथ भागा

पुलिस के अनुसार, आग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और FIR दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद सावले ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। इतना ही नहीं पत्नी तथा बच्चे के साथ वह सूरत से फरार हो गया। जांच में पुलिस को पता चला कि वह पहले राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर गया और बाद में अयोध्या पहुंचा। बाद में जब वह सूरत लौटा तो क्राइम ब्रांच को उसके ठिकाने की जानकारी मिली। गणपति सुरक्षा व्यवस्था में तैनात क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे डिंडोली के फ्लावर गार्डन के पास गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे सरोली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पुलिस कर रही पेट्रोल खरीद और कथित साजिश की जांच

सूरत के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर करणराज वाघेला के अनुसार, आग से करीब 25 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, पुलिस की जांच में जले हुए कपड़े और अन्य सामान की कीमत करीब ₹24 करोड़ बताई गई है। सूरत पुलिस अब आरोपी से कथित साजिश, आग लगाने की पूरी योजना और पेट्रोल की खरीद से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।

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जांचकर्ता उस पेट्रोल पंप संचालक की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं, जिसने कथित तौर पर आरोपी को पेट्रोल बेचा था। पुलिस ने घटना का क्रम समझने के लिए आरोपी को श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट भी ले जाकर सीन का री-कंस्ट्रक्शन कराया। इस दौरान आरोपी हाथ जोड़े हुए नजर आया। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।