Ketan Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब क्या होगा? पंचशील टेस्ट से जमानत तक, जानिए आगे की पूरी कहानी

पूरे देश को हिला देने वाले पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस की आरोपी सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों की 11 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद अब जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ की बजाय मामले से जुड़े सबूतों की जांच और उन्हें मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।

अब आगे क्या होगा?

इस मामले में अब जांच का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल सबूतों पर है। जांच एजेंसियां सिया गोयल के मोबाइल से मिले डेटा और कोड में लिखे गए मैसेज को समझने की कोशिश कर रही हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस को हाल ही में स्नैपचैट की एक चैट मिली है। इसमें सिया ने कथित तौर पर अपनी एक दोस्त से आधार कार्ड की जानकारी मांगी थी ताकि टिकट बुक किया जा सके। चैट में उसने यह भी लिखा था कि यह “ऐसी शादी के लिए है जो कभी नहीं होगी।” अब जांचकर्ता दूसरे संदिग्ध कोड वाले मैसेज भी खंगाल रहे हैं। उनका पता लगाना है कि क्या इस कथित साजिश में सिया और चेतन के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति भी शामिल था।

इन सबूतों पर टिकी जांच

इस मामले में लोहगढ़ किले से कथित तौर पर धक्का देने की घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। इसलिए पुलिस पूरे मामले को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर मजबूत बनाने में जुटी है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अभियोजन पक्ष को ऐसे सबूत पेश करने होंगे, जिनसे घटनाओं की पूरी कड़ी साफ तौर पर जुड़ जाए और यह साबित हो सके कि आरोपियों की भूमिका ही अपराध की ओर इशारा करती है।

जांच में पुलिस कई अहम सबूतों को जोड़कर मामला मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसमें घटनास्थल का पंचनामा, घटना का री-क्रिएशन (दोबारा घटनाक्रम तैयार करना) और वह जगह भी शामिल है, जहां आरोपियों ने कथित तौर पर केतन को धक्का देने की प्रैक्टिस की थी। इसके अलावा, घटना के समय पहने गए बताए जा रहे कपड़ों और केतन के जले हुए पासपोर्ट की फोरेंसिक जांच भी की जा रही है।

क्या है पंचशील टेस्ट?

पंचशील टेस्ट सुप्रीम कोर्ट का एक अहम कानूनी सिद्धांत है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी मामले में सीधे गवाह नहीं होते और फैसला परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर करना होता है। साल 1984 में ‘शरद बिरधीचंद सारडा बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसके पांच मुख्य सिद्धांत बताए थे।इन पांच सिद्धांतों में यह जरूरी है कि सभी तथ्य पूरी तरह साबित हों, सबूत अपराध से साफ तौर पर जुड़े हों, उनकी विश्वसनीयता मजबूत हो, किसी दूसरी संभावना की गुंजाइश न बचे और सभी सबूत मिलकर ऐसी अटूट कड़ी बनाएं जो सीधे आरोपी की ओर इशारा करे।

शुरुआत में पुलिस दोनों आरोपियों के अलग-अलग बयानों की सच्चाई जानने के लिए उनका पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती थी। लेकिन कोर्ट में पेशी के दौरान सिया गोयल और चेतन चौधरी, दोनों ने इन टेस्ट के लिए अपनी मंजूरी देने से इनकार कर दिया। भारतीय कानून के अनुसार, किसी आरोपी की सहमति के बिना पॉलीग्राफ या नार्को टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए पुलिस को इन टेस्ट की मांग वापस लेनी पड़ी और अब जांच दूसरे सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

कोर्ट में अब जमानत की लड़ाई शुरू

सिया गोयल और चेतन चौधरी अब पुलिस हिरासत की जगह न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में दोनों की ओर से जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके वकीलों का कहना है कि पुलिस जरूरी डिजिटल डिवाइस पहले ही जब्त कर चुकी है, इसलिए अब उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने की जरूरत नहीं है। वहीं, सिया गोयल की ओर से अदालत में कौन वकील पेश होगा, इसे लेकर भी नया कानूनी विवाद सामने आया है। इस मामले में एक चर्चित वकील का नाम सामने आया है और 10 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस की भी चर्चा हो रही है।

Ketan Agarwal Murder Case: ‘वो शादी जो होनी नहीं है…’ केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया गोयल और उसकी दोस्त की चैट आई सामने

Ketan Agarwal Murder Case: रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने आरोपी सिया गोयल के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए चैट्स को रिकवर किया है, जिन्हें अब जांच में शामिल किया जा रहा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, एक चैट में सिया ने अपनी एक दोस्त से उसके आधार कार्ड के दोनों तरफ की फोटो भेजने को कहा था, ताकि शादी के टिकट बुक किए जा सकें।

चैट में लिखा था: “आधार कार्ड का आगे और पीछे का हिस्सा भेज दो। शादी के टिकट के लिए, जो होने वाली नहीं है, फिर भी भेज दो।” बाद में दोस्त जवाब देता है कि दस्तावेज पहले ही व्हाट्सएप पर भेज दिया था।

स्क्रीनशॉट 2026-07-04 130231फिलहाल, पुलिस अब इन चैट्स की जांच कर रही है ताकि बातचीत का संदर्भ समझा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि क्या इनसे आरोपी की कथित हत्या से पहले या बाद की योजनाओं के बारे में कोई सुराग मिलता है।

बता दें कि बरामद किए गए चैट्स उन डिलीट किए गए डेटा का हिस्सा हैं, जिन्हें जांचकर्ताओं ने हाल ही में जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन से रिकवर किया है।

वहीं, पुलिस ने पहले ही अदालत को सूचित किया था कि उन्हें सांकेतिक (कोड) भाषा में हुई बातचीत मिली है और वे यह पता लगाने के लिए उनकी जांच कर रहे हैं कि क्या कथित साजिश में कोई और भी शामिल था।

सिया गोयल और चेतन चौधरी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दूसरी तरफ, सिया गोयल और उसके साथी चेतन चौधरी को पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल, केतन अग्रवाल की हत्या की जांच चल रही है और पुलिस आरोपियों के डिवाइस से मिले डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।

तीसरे व्यक्ति की भूमिका की जांच

पुणे पुलिस ने अदालत को बताया कि उन्हें आरोपियों के फोन से डिलीट किया गया डेटा मिला है, जिसमें कोड वर्ड्स, निकनेम और इमोजी में लिखी गई कथित चैट शामिल हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ये बातचीत कथित साजिश में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की ओर इशारा करती हैं।

बीड के युवक से पूछताछ

पुलिस ने बीड जिले से एक युवक को हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर उसे हत्या की योजना के बारे में बताया था। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इस कथित साजिश में उसकी कोई भूमिका थी। हालांकि, युवक ने पुलिस को बताया कि उसने दोनों को ऐसा कदम न उठाने की सलाह दी थी।

दूसरा मोबाइल फोन बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने सिया गोयल का एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। फिलहाल, पुलिस डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है और उम्मीद है कि इस फोन का फोरेंसिक विश्लेषण भी किया जाएगा।

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Ketan Agarwal Murder Case: पुणे पुलिस को शक! केतन मर्डर केस में आ सकता है ‘सोनम रघुवंशी जैसा मोड़’

Ketan Agarwal Murder Case: मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली कानूनी खामियों से सबक लेते हुए, पुणे ग्रामीण पुलिस अब पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोणावला (लोहगढ़ किले) में हुई हत्या के मामले में एक “पूरी तरह मजबूत और बिना गलती वाली” चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। यह जानकारी महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने न्यूज18 को दी है।

जांच अधिकारी केतन की मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, यह टेस्ट कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता, लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिन्हें बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक सबूतों से जांचकर पक्का किया जा सकता है।

यह सावधानी हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी मामले को देखते हुए बरती जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी और बाद में हाई कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि सिया के खिलाफ उनके मुकदमे को किसी भी तरह की ऐसी तकनीकी चूक से कमजोर न होने दिया जाए।

पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

भारतीय कानून के तहत, पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अदालत में मुख्य सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। हालांकि, जांचकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट जांच के दौरान नई जानकारियां या सुराग हासिल करने के लिए एक टूल के तौर पर काम आ सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो पहले पता नहीं थी। उदाहरण के लिए, अगर सिया अनजाने में यह बता देती है कि उसने लोहागढ़ किले की चट्टान की ऊंचाई के बारे में जानकारी जुटाई थी, या ऐसी किसी डिजिटल गतिविधि का जिक्र करती है जिसके बारे में जांचकर्ताओं को पहले पता नहीं था, तो पुलिस उस डिजिटल सबूत को स्वतंत्र रूप से हासिल कर सकती है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ब्राउजर हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीट की गई सर्च जैसी जानकारी, अगर सही कानूनी प्रक्रियाओं से हासिल की जाए, तो कोर्ट में सबूत के तौर पर मानी जा सकती है, भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जवाब खुद सबूत के तौर पर मान्य न हों।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है। इसका मकसद छिपे हुए तथ्यों का पता लगाना है, जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।”

प्रत्यक्ष सबूत नहीं, केवल परिस्थिति पर टिका पूरा मामला

जांच करने वाले मानते हैं कि उन्हें सबूत जुटाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने केतन को चट्टान से धक्का देते हुए देखा हो। न ही इस कथित घटना का कोई CCTV फुटेज मौजूद है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए घटना वाली जगह के पास ही देखा गया है, लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।

पुलिस ने डमी का इस्तेमाल करके कथित अपराध वाली जगह का सीन भी दोबारा बनाया है, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि ऐसे प्रदर्शनों का सबूत के तौर पर बहुत कम महत्व होता है। एक सूत्र ने कहा, “डमी किस तरह गिरती है, यह उसके वजन के बंटवारे, कोण और गति पर निर्भर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।”

इन्हीं सब वजह से, जांचकर्ता इस मामले को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित मानते हैं, जिसमें अपराध साबित करने के लिए हर सबूत का आपस में सही ढंग से जुड़ना जरूरी है ताकि कोई शक न रहे।

अभियोजन पक्ष मकसद और डिजिटल सबूतों पर भरोसा कर रहा है

जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन की मुख्य थ्योरी यह है कि सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी, क्योंकि सिया कथित तौर पर उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

इसलिए, चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल, फोरेंसिक और हालात से जुड़े सबूत इकट्ठा करने पर ध्यान दे रही है, जो इस कथित साजिश को पुख्ता कर सकें।

जांचकर्ता डिजिटल सर्च हिस्ट्री, मोबाइल फोन डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रहे हैं, जिनसे साजिश या पहले से योजना बनाने की बात साबित हो सके। सूत्रों का कहना है कि ऐसे डिजिटल सबूत हासिल करना, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके, जांच की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

‘एक कमजोर कड़ी पूरे केस को गिरा सकती है’

पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि केस का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे घटनाओं की एक अटूट कड़ी बना पाते हैं या नहीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर बचाव पक्ष उस कड़ी की एक भी अहम कड़ी को तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो अभियोजन पक्ष का केस काफी कमजोर पड़ सकता है।” उन्होंने ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों का जिक्र किया जिनमें सबूतों की कमी के कारण कोर्ट में मुश्किलें आईं।

यही एक वजह है कि जांच करने वाले अधिकारी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं।

सोनम रघुवंशी का मामला एक सबक क्यों बन गया है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही का सोनम रघुवंशी मामला-जिसमें उन पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है-अब पुलिस के लिए एक चेतावनी बन गया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच प्रक्रिया के कड़ाई से पालन करने के महत्व को और पुख्ता करता है।

सोनम के मामले में, कोर्ट में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद अभियोजन पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जमानत के आदेश के मुताबिक, पुलिस आरोपी को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के असल कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाई। गिरफ्तारी मेमो और उससे जुड़े दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से जुड़ी है, जबकि हत्या के मामले में उसकी जांच धारा 103(1) के तहत हो रही थी।

कोर्ट ने माना कि ऐसी गलतियों की वजह से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ा, जिससे उसे शुरुआती जांच चरण में अपना बचाव ठीक से करने का मौका नहीं मिला। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मजबूत जनमत या मीडिया की कड़ी नजर भी अदालत में हुई प्रक्रियात्मक गलतियों की भरपाई नहीं कर सकती। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ सूत्र ने News18 को बताया, “अदालतें सबूतों और कानूनी वैधता के आधार पर मामले तय करती हैं। यहां तक ​​कि क्लर्क की कोई छोटी सी गलती या तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना भी बचाव पक्ष के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।”

चूंकि कोई चश्मदीद गवाह या सीधा वीडियो सबूत नहीं है, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि प्रक्रिया का हर कदम कानूनी रूप से सही हो। साथ ही, वे डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को भी मजबूत कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि ये सिया के खिलाफ उनके मामले का मुख्य आधार बनेंगे।

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Ketan Agarwal Murder Case: केतन हत्याकांड की आरोपी सिया गोयल का 17 सेकंड का वीडियो वायरल, मीडिया को दिखाई मिडिल फिंगर

अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह पुलिस जांच नहीं, बल्कि उनका एक वायरल वीडियो है। 17 सेकंड की इस क्लिप में सिया पुलिस के साथ घर से बाहर निकलती दिखाई देती हैं। इसी दौरान वह बाहर मौजूद मीडिया कर्मियों की ओर देखकर कथित तौर पर मिडिल फिंगर दिखाती नजर आती हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस जांच के लिए घर पहुंची थी टीम

यह घटना पुणे के मार्केट यार्ड इलाके की है। पुलिस जांच के सिलसिले में सिया गोयल को उनके घर ले जाया गया था। जांच पूरी होने के बाद जब पुलिस उन्हें वापस लेकर बाहर निकली, तभी कैमरों के सामने उन्होंने कथित तौर पर आपत्तिजनक इशारा किया। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। इस वीडियो को न्यूज एजेंसी IANS ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर शेयर किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 18 जून का है, जब केतन अग्रवाल की मौत पुणे के पास स्थित लोहगढ़ किले की खाई में गिरने से हुई थी। शुरुआत में सिया ने पुलिस को बताया था कि केतन का पैर फिसल गया था और यह एक हादसा था। इसी आधार पर पहले दुर्घटना का मामला दर्ज किया गया।

पुलिस को कैसे हुआ शक?

जांच के दौरान पुलिस को सिया के व्यवहार पर शक हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, केतन की मौत के बाद सिया के चेहरे पर दुख के कोई खास भाव नहीं दिखे। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की, जिसमें कई नए तथ्य सामने आए और सिया गोयल व चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मंगेतर की हत्या की रची गई थी साजिश?

पुलिस का दावा है कि सिया और केतन की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। लेकिन सिया के कथित प्रेमी चेतन चौधरी को यह रिश्ता पसंद नहीं था। जांच में सामने आया कि दोनों ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम रही

पुलिस के अनुसार, 14 जून को भी केतन को मारने की कोशिश की गई थी। आरोप है कि सिया ने उन्हें किले के पास धक्का दिया, लेकिन वह झाड़ियों का सहारा लेकर बच गए। इसके बाद सिया ने सांप देखने का बहाना बनाकर पूरा मामला सामान्य दिखाने की कोशिश की और बाद में केतन को भरोसे में लिया।

दूसरी बार बुलाकर खाई में धक्का देने का आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ दिनों बाद सिया ने केतन को दोबारा लोहगढ़ किले पर बुलाया, जहां चेतन चौधरी पहले से मौजूद था। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पीछे से धक्का देकर केतन को खाई में गिरा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

आज कोर्ट में होगी पेशी

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सिया गोयल और चेतन चौधरी को शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे वडगांव कोर्ट में पेश किया जाना है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

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रिपोर्ट- अमेरिका ने ईरान को इजराइली साजिश की चेतावनी दी:बातचीत में शामिल अराघची और गालिबाफ की हत्या कर सकता था इजराइल

अमेरिका-ईरान के बीच अप्रैल में शुरू हुई बातचीत के दौरान अमेरिका को डर था कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट के कुछ सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को सतर्क रहने का संदेश भिजवाया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को डर था कि अगर दोनों वार्ताकारों की हत्या हुई तो युद्धविराम और शांति प्रक्रिया टूट जाएगी। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली एक बैठक से पहले भी ईरान को हमले का खतरा था। इसी कारण पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को फाइटर जेट की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। लौटते समय भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई और डेलिगेशन सड़क के जरिए तेहरान पहुंचा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान में अगली वार्ता खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद: दोहा में हुई बातचीत के बाद कतर ने बताया कि दोनों पक्ष पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बाद जल्द अगले दौर की वार्ता करेंगे। 2. UN पहुंचा ईरान-इजराइल विवाद: ईरान ने इजराइल पर सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को धमकी देने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई। 3. ईरान हाई अलर्ट पर, 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का दावा: ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले सेना की तैनाती बढ़ी। कार्यक्रम में 30 देशों के प्रतिनिधि और करीब 2 करोड़ लोग शामिल होंगे। 4. होर्मुज पर ईरान की अमेरिका को चेतावनी: ईरान ने कहा है कि होर्मुज हमारा इलाका है, अमेरिकी दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे। सभी जहाजों को तय समुद्री मार्ग अपनाने को कहा। 5. ईरान ने IAEA को परमाणु ठिकानों की जांच से रोका: ईरान ने कहा है कि फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु साइट्स पर IAEA के निरीक्षकों को एंट्री नहीं मिलेगी। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा अपडेट, आरोपी सिया और चेतन ने पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए दी सहमति

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति दे दी है।जिसके बाद पुलिस अब सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी, दोनों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई है और सरकारी वकील ने भी इसकी पुष्टि की है।

सिया गोयल का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट

गोयल के वकील विपुल डुसिंग ने बताया कि 20 साल की सिया ने गुरुवार को लोनावाला ग्रामीण पुलिस को पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अपनी सहमति दे दी है। बता दें कि ऐसे टेस्ट के लिए आरोपी की सहमति कानूनी तौर पर जरूरी होती है।

वहीं, जांचकर्ताओं का मानना है कि इस टेस्ट से मामले से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं, क्योंकि अब तक जांच मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य और तकनीकी सबूतों पर आधारित रही है।

18 जून को हुई केतन की हत्या

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले की करीब 400 मीटर गहरी खाई में धक्का देकर हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस का दावा है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी 22 वर्षीय चेतन चौधरी ने मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी।

पुलिस का कहना है कि सिया गोयल की इसी साल नवंबर में केतन अग्रवाल से शादी होने वाली थी। दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी। आरोप है कि शादी से बचने के लिए सिया और चेतन ने मिलकर केतन की हत्या की योजना बनाई। फिलहाल दोनों आरोपी 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं।

केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

इस केस में कई चुनौतियां हैं क्योंकि पुलिस को कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला है और न ही कोई ऐसा CCTV फुटेज मिला है जिसमें उस जगह को दिखाया गया हो जहां से केतन अग्रवाल के कथित तौर पर चट्टान से गिरने की बात कही जा रही है। पुलिस का यह भी दावा है कि आरोपियों ने घटना से पहले और बाद में अपने मोबाइल फोन से कॉल रिकॉर्ड और डेटा (रीसायकल बिन की फाइलों सहित) डिलीट कर दिए थे, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

इसके अलावा, शादी की तैयारियों को लेकर परिवार के सदस्यों और आरोपियों के अलग-अलग बयानों ने कथित मकसद का पता लगाने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है। ऐसे में पुलिस का मानना है कि पॉलीग्राफ (लाइ डिटेक्टर) टेस्ट से आरोपियों के बयानों की सच्चाई जांचने, विरोधाभासों का पता लगाने और जांच में नए सुराग मिलने में मदद मिल सकती है।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट से क्या पता चल सकता है?

हालांकि, पॉलीग्राफ के नतीजों को कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर नहीं माना जाता, लेकिन जांच करने वाले अक्सर इनका इस्तेमाल जांच के एक टूल के तौर पर करते हैं। इस टेस्ट में व्यक्ति के सवालों के जवाब देने के दौरान उसके शरीर की प्रतिक्रियाओं, जैसे सांस लेने का तरीका, दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और त्वचा की कंडक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके बाद जांच करने वाले इन प्रतिक्रियाओं में आए बदलावों का विश्लेषण करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जरूरी सवालों के जवाब सामान्य प्रतिक्रियाओं (बेसलाइन रिस्पॉन्स) से काफी अलग हैं या नहीं।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट के बारे में कानून क्या कहता है?

सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में ‘सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य’ मामले में एक अहम फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि पॉलीग्राफ टेस्ट, नार्को-एनालिसिस और ब्रेन-मैपिंग टेस्ट संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने माना कि ऐसे टेस्ट जबरदस्ती करने से संविधान के आर्टिकल 20(3) के तहत खुद के खिलाफ गवाही न देने के अधिकार और आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होता है। इसलिए, पॉलीग्राफ टेस्ट करने से पहले आरोपी की अपनी मर्जी से सहमति लेना जरूरी है।

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Ketan Murder: क्या केतन अग्रवाल की कुंडली में था हत्या का संकेत? वायरल दावों के बीच ज्योतिषियों ने बताए खतरनाक ग्रह योग, दी ये अहम चेतावनी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस मामले में जहां पुलिस हत्या की साजिश की जांच कर रही है। वहीं सोशल मीडिया पर केतन और उनकी मंगेतर सिया गोयल की कुंडली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि शादी से पहले दोनों की कुंडली का मिलान कराया गया था, जिसमें 36 में से 27 गुण मिले थे। कुंडली में किसी भी बड़े दोष का संकेत नहीं मिला था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ज्योतिष ऐसी घटनाओं की भविष्यवाणी कर सकता है?

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले से धक्का देकर हत्या किए जाने का आरोप उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी पर है। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।

कुंडली को लेकर कई तरह के दावे वायरल

इसी बीच, सोशल मीडिया पर दोनों की कुंडली को लेकर कई तरह के दावे वायरल होने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी तय होने से पहले दोनों परिवारों ने ज्योतिषीय मिलान कराया था। News18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ होने के बावजूद दोनों के 36 में से 27 गुण मिले थे। किसी भी बड़े दोष (दोष) की बात सामने नहीं आई थी। वैवाहिक जीवन को सामान्य एवं सुखद बताया गया था।

हालांकि, कथित हत्या की घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेज हो गया है कि यदि कुंडली अनुकूल थी, तो इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हुई? इसी मुद्दे पर Zee News से बातचीत में ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुण बंसल और डॉ. अजय भाम्बी ने कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, जन्म कुंडली में मंगल का पांचवें या नौवें भाव में होना, बृहस्पति का कमजोर होना या शनि का ऐसे स्थान पर होना जिससे सप्तम भाव प्रभावित हो, कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति के स्वभाव, क्रोध या वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले योग माने जाते हैं।

हालांकि दोनों ज्योतिषियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे ग्रह योग किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित नहीं करते। उनके मुताबिक, ये केवल कुछ प्रवृत्तियों या मानसिक झुकाव का संकेत माने जाते हैं। जबकि किसी व्यक्ति का व्यवहार उसके संस्कार, पारिवारिक माहौल, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन के अनुभवों से भी गहराई से प्रभावित होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध, आवेग या मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो केवल ज्योतिषीय उपायों पर निर्भर रहने के बजाय मनोवैज्ञानिक परामर्श, ध्यान, योग और परिवार का सहयोग अधिक महत्वपूर्ण है। पारंपरिक मान्यताओं के तहत रुद्राक्ष धारण करने, नियमित ध्यान करने और भगवद्गीता के छठे अध्याय का पाठ करने की भी सलाह दी गई।

सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि कुंडली पूरी तरह अनुकूल थी तो कथित तौर पर इतनी भयावह घटना कैसे हुई। वहीं कई यूजर्स का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के निर्णय, रिश्ते और अपराध जैसे मामलों को केवल कुंडली के आधार पर नहीं समझा जा सकता।

News18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिश्ता पक्का करने से पहले केतन के पिता और सिया के भाई साहिल ने एक ज्योतिषी से शादी को लेकर सलाह ली थी। कहा जा रहा है कि कुंडली अच्छी तरह से मिली थी। केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ आपसी समझ का संकेत दे रहे थे। दोनों के 36 में से 27 गुण मिल रहे थे। कोई बड़ा दोष नहीं पाया गया था। ज्योतिषियों ने जोड़े के लिए सुखद वैवाहिक जीवन की भविष्यवाणी की थी।

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(डिस्क्लेमर: यह खबर ज्योतिषाचार्यों द्वारा व्यक्त पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। ज्योतिष आस्था और व्यक्तिगत विश्वास का विषय है। इससे किसी व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य या अपराध में संलिप्तता की पुष्टि नहीं की जा सकती। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी है और आरोपितों का दोष न्यायालय में विधिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।)

मध्यप्रदेश में दिग्विजय–जीतू पटवारी विवाद में अरुण यादव की एंट्री, राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग, कांग्रेस महासचिव ने लगाया पुत्र मोह का आरोप

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच चल रही बयानबाजी और तल्खी अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है। इस विवाद में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता अरुण यादव की भी एंट्री हो गई है। इसके साथ कांग्रेस के सीनियर नेता सत्यवत चतुर्वेदी की बेटी और पार्टी की महासचिव निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा है।
 
पूर्व मंत्री अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सीधे हस्तक्षेप करने और प्रदेश संगठन में एकता कायम करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर अरुण यादव ने लिखा कि माननीय राहुल गांधी जी, मध्यप्रदेश में आंतरिक संघर्ष और असफलताओं सहित अन्य समस्याओं से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार से जब इस दौर में भी पार्टी संगठन का वास्तविक निष्ठावान कार्यकर्ता वैचारिक और सतही तौर पर संघर्ष कर रहा है उस दौर में कतिपय लोग एक मिलीजुली साजिश के तहत उन कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे है, इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि युवाओं का जोश और पार्टी के अनुभवी नेताओं का होश मिलजुल कर ही फासीवादी विचारधारा का सामना कर पाएगा ऐसी स्थिति में जवाबदार लोग ही अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और वैमनस्यता पार्टी के कार्यकर्ताओं की कीमत पर भुनाने की कोशिश करेंगे तो वह समयोचित नहीं होगी । कृपा कर केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से संघर्षशील कार्यकर्ताओं के मनोबल को टूटने से बचाएं तथा संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करवाने की कृपा करें।
 
पुत्र मोह में फंसे दिग्विजय सिंह-वहीं प्रदेश कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस हाईकमान से दिग्विजय सिंह के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर 'दिग्विजय का नागपाश, कांग्रेस पर प्रहार' नाम से एक लेख लिखा है। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “अपनों के ही इस घातक बाण से कब मुक्त होगी मध्य प्रदेश कांग्रेस? उज्जैन के भूमि विवाद और वीर भारत न्यास के मामले में सच क्या है और झूठ क्या, कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है। आज हर सच्चे कांग्रेसी का सिर शर्म से झुक गया है। दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ जिस प्रकार मोर्चा खोला वह निंदनीय है।
 
इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि अगर जीतू पटवारी कहीं गलत भी थे, तो वरिष्ठ और मार्गदर्शक होने के नाते दिग्विजय सिंह उन्हें आमने-सामने बैठकर या फ़ोन करके बता सकते थे। उनके पास दिल्ली से लेकर भोपाल तक पार्टी के तमाम आंतरिक मंच उपलब्ध हैं, जहां वे अपनी बात रख सकते थे. लेकिन इन सब मर्यादाओं को दरकिनार कर हाथ में फ़ाइल लेकर उज्जैन जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस बात को उछालने का क्या औचित्य है? इस तरह सरेआम मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना, जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. आखिर यह सारी कवायद क्यों की गई।
 
निधि चतुर्वेदी का कहना है “दिग्विजय सिंह की यह छटपटाहट, यह गुस्सा और यह अमर्यादित आचरण और कुछ नहीं, बल्कि 'पुत्र-मोह' में उठाया गया बेहद अशोभनीय, पीड़ादायक और निंदनीय कदम है। अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने की महत्वाकांक्षा में वे भूल चुके हैं कि पार्टी का अनुशासन क्या होता है। जब देशभर में राहुल गांधी भाजपा और संघ की जनविरोधी विचारधारा के खिलाफ सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं, तब पार्टी के एक शीर्ष नेता द्वारा इस तरह की बयानबाज़ी करना कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर करारा तमाचा है।

तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी

An image featuring sharp satire on the country's economy and rising inflation

साहब! दो जून की रोटी मिल जाए, बस और क्या चाहिए? यह वाक्य सुनने में जितना सरल लगता है, उतना ही भयावह है। दरअसल यह कोई संतोष का वाक्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का मृत्युलेख है जिसने करोड़ों लोगों की पूरी जिंदगी को सिर्फ रोटी तक सीमित कर दिया। जिस देश ने चंद्रयान भेज दिया, डिजिटल क्रांति कर दी, जीडीपी के ग्राफ आसमान तक पहुँचा दिए, उसी देश का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी सुबह उठकर यह तय नहीं कर पाता कि शाम को चूल्हा जलेगा भी या नहीं।

 

एक तरफ कांच की ऊंची इमारतों में बैठे लोग वर्क फ्रॉम होम करते हुए एवोकाडो टोस्ट और ग्रीन टी के साथ हेल्दी लाइफस्टाइल पर वेबिनार कर रहे हैं, दूसरी तरफ शहर के किसी नाले किनारे बैठा रिक्शेवाला अपनी पत्नी से पूछ रहा है आज आटा बचेगा या फिर बच्चों को कहानी सुनाकर सुला दें?

 

यह वही देश है जहां भूख अब आं तों से कम और भाषणों में अधिक पाई जाती है। यहां रोटी पेट से ज्यादा राजनीति में फूलती है। चुनाव आते ही हर दल गरीब की थाली में उतर आता है। कोई कहता है मुफ्त राशन देंगे, कोई कहता है पोषण देंगे, कोई कहता है सब्सिडी देंगे, लेकिन कोई यह नहीं कहता कि ऐसी व्यवस्था देंगे जहां आदमी खुद अपनी रोटी सम्मान से कमा सके। क्योंकि आत्मनिर्भर गरीब राजनीति के लिए उतना उपयोगी नहीं होता जितना राशन कार्ड वाला गरीब।

 

अब रोटी भी वर्ग देखकर परोसी जाती है। अमीर आदमी की थाली में मल्टीग्रेन, लो कार्ब, ग्लूटन फ्री, ऑर्गेनिक रोटियां हैं। गरीब की थाली में रोटी नहीं, समझौता रखा होता है। आधी जली हुई दो बासी रोटियाँ, नमक-मिर्च और बच्चों को यह समझाने की कोशिश कि आज भूख कम लग रही होगी। अमीर के यहां डाइट प्लान बनते हैं, गरीब के यहां रोटी प्लान। वहां लोग वजन घटाने के लिए खाना छोड़ते हैं, यहां लोग पैसे बचाने के लिए।

 

देश की अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है। हर महीने कोई नया आंकड़ा आता है जो बताता है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने वाला है। मगर अजीब बात है कि यह अर्थव्यवस्था हमेशा गरीब की थाली के ऊपर से छलांग लगाकर निकल जाती है। स्टॉक मार्केट ऊपर जाता है तो मजदूर की कमर और झुक जाती है। सेंसेक्स को देखकर कॉर्पोरेट जगत मुस्कुराता है, लेकिन दिहाड़ी मजदूर रोज सुबह इस डर से उठता है कि आज काम मिला तो रोटी मिलेगी, नहीं मिला तो लोकतंत्र का भाषण पीकर सोना पड़ेगा।

 

बिहार का मजदूर राजस्थान में ईंट ढो रहा है। उड़ीसा का युवक पंजाब की मंडियों में धूप सेंक रहा है। बुंदेलखंड का किसान दिल्ली में निर्माणाधीन इमारतों पर सीमेंट मल रहा है। और इन सबका सपना क्या है? कोई बंगला नहीं, कोई कार नहीं बस इतना कि घर में चूल्हा जलता रहे। ये लोग इस देश की अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक देवता हैं, लेकिन व्यवस्था इन्हें अनस्किल्ड लेबर कहती है, जैसे भूख मिटाने के लिए डिग्री जरूरी हो।

 

महंगाई अब आर्थिक समस्या नहीं रही, वह एक संगठित साजिश जैसी लगती है। प्याज अब सब्जी कम, भावनात्मक हथियार अधिक हो गया है। टमाटर कभी आम आदमी की पहुंच से बाहर जाकर अचानक वीआईपी व्यवहार करने लगता है। गैस सिलेंडर की कीमत सुनकर गृहिणी रोटी बेलने से पहले बजट बेलती है। अब रसोई में मसाले कम और गणित अधिक पकता है। महीने के अंतिम सप्ताह में घर की महिलाएँ वैज्ञानिकों की तरह प्रयोग करती हैं कि बची हुई दाल से कितने दिन और लोकतंत्र चलाया जा सकता है।

 

सरकारें कहती हैं डिजिटल इंडिया बन रहा है। बिल्कुल बन रहा है। अब भूख भी डिजिटल हो गई है। राशन चाहिए तो आधार लिंक कराइए। अंगूठा लगाइए। ओटीपी डालिए। सर्वर डाउन हो तो भूखे रहिए। गरीब आदमी अब रोटी से पहले नेटवर्क खोजता है। सरकारी पोर्टल कहता है भोजन की गारंटी। गांव वाला कहता है साहब, यहां तो नेटवर्क ही नहीं आता। ऐसा लगता है मानो अब पेट भी ऐप डाउनलोड करके ही भरेगा।

 

शिक्षा और भूख का रिश्ता भी बड़ा विचित्र है। गांव के स्कूलों में बच्चे ज्ञान लेने कम, मध्यान्ह भोजन लेने अधिक आते हैं। शिक्षक उपस्थिति दर्ज करते समय जानते हैं कि बच्चे गणित से पहले खिचड़ी गिनना सीख रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा का सपना उन घरों में भेजा गया जहां मोबाइल से ज्यादा जरूरी आटा था। जिन बच्चों के घर में बिजली नहीं, उनसे कहा गया- डिजिटल बनो। यानी इस देश में गरीब से कहा जा रहा है कि वह भूखे पेट आधुनिक हो जाए।

 

राजनीति भूख की सबसे पुरानी व्यापारी रही है। हर चुनाव में गरीब की थाली कैमरे के सामने परोसी जाती है। नेता रोटी खाते हुए फोटो खिंचवाते हैं, फिर पांच साल तक गरीब लाइन में खड़ा होकर वही रोटी मांगता रहता है। पिछली सरकार कहती है हमने राशन दिया। वर्तमान सरकार कहती है हमने मुफ्त अनाज बढ़ाया। अगली सरकार शायद कहे हमने गरीब को खाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी करोड़ों लोग मुफ्त राशन पर निर्भर क्यों हैं।

 

सबसे भयावह दृश्य सोशल मीडिया पर दिखाई देता है। किसी भूखे बच्चे की वीडियो वायरल होती है। लोग दुखी इमोजी भेजते हैं, मानवता पर लंबी पोस्ट लिखते हैं, फिर अगले ही क्षण किसी सेलिब्रिटी की शादी या क्रिकेट मैच में व्यस्त हो जाते हैं। भूख अब ट्रेंडिंग कंटेंट है। गरीब की पीड़ा अब एल्गोरिद्म के भरोसे चलती है।

 

और इस पूरी व्यवस्था का सबसे क्रूर पक्ष यह है कि अब रोटी भी इज्जत मांगती है। भूखा होना अपराध नहीं माना जाता, लेकिन रोटी मांगना अपमान बना दिया गया है। लोग दान तो करते हैं, पर इस अंदाज़ में कि सामने वाले को उसकी गरीबी का पूरा अहसास हो जाए। अब रोटी पेट नहीं भरती, आत्मसम्मान भी तोड़ती है।

 

सवाल यह नहीं कि देश में अनाज की कमी है। गोदाम भरे पड़े हैं। सवाल यह है कि व्यवस्था की संवेदना खाली क्यों है। एक तरफ शादी-ब्याह में टनों खाना कूड़ेदान में फेंका जाता है, दूसरी तरफ कोई मां अपने बच्चे को पानी पिलाकर सुला देती है ताकि उसे भूख कम लगे। यह केवल आर्थिक असमानता नहीं, सभ्यता की असफलता है।

 

आज दो जून की रोटी कोई साधारण आवश्यकता नहीं रही। यह एक युद्ध है महंगाई और मजदूरी के बीच, भूख और व्यवस्था के बीच, इंसान और उपभोक्ता के बीच। आदमी अब रोटी नहीं खा रहा, वह अपनी जिंदगी किस्तों में चुका रहा है।

 

और शायद इस समय का सबसे बड़ा व्यंग्य यही है कि जिस लोकतंत्र में रोटी सबसे बड़ा मुद्दा हो, वहां भूखा आदमी आंकड़ा कहलाता है और भरी थाली वाला राष्ट्रवाद समझाता है।

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Ram Mandir Donation Scam: कुंभ में लूटा गया सबसे ज्यादा राम मंदिर का चढ़ावा! जीजा-साले की जोड़ी ने उड़ाई बड़ी रकम

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के लिए मिले दान की चोरी के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। अयोध्या पुलिस की जांच में पता चला है कि मंदिर में सबसे ज्यादा चोरी 2025 की शुरुआत में कुंभ मेले के दौरान हुई थी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कुछ कुंभ से पहले भी छोटी-मोटी चोरियों में शामिल थे। लेकिन कुंभ के दौरान मंदिर में चढ़ावे और दान में भारी बढ़ोतरी हुई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने इसका फायदा उठाया और मिलीभगत करके एक बड़ी चोरी को अंजाम दिया।

फिलहाल इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव (जिन्हें टिन्नू यादव भी कहा जाता है) शामिल हैं। इन सभी से मंगलवार को कई घंटों तक पूछताछ की गई।

वहीं, पुलिस का दावा है कि पूरी साजिश सभी आठों आरोपियों ने मिलकर रची थी।

जीजा-साले की जोड़ी ने सबसे ज्यादा कैश चुराया

जांच में सामने आया है कि जीजा-साले की जोड़ी, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने सबसे ज्यादा रकम चुराई थी। पुलिस के मुताबिक, इस जोड़ी ने चोरी के पैसों से प्रॉपर्टी भी खरीदी। अब तक पुलिस ने इन दोनों से जुड़ी आधी दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी का पता लगाया है।

पैसे के लेन-देन की जांच के लिए, अयोध्या पुलिस अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर आरोपी की संपत्ति और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। अधिकारी मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) की विस्तृत जांच के लिए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है।

ऐसा इसलिए क्योंकि, राम मंदिर में नकद चढ़ावे की गिनती SBI की देखरेख में होती है, जो इस काम के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को नियुक्त करता है। मंदिर में आने वाले दान को चार दान-पेटियों में जमा किया जाता है और इसकी गिनती 14 लोगों की एक टीम करती है, जिसमें बैंक के 11 कर्मचारी और मंदिर ट्रस्ट के तीन सदस्य शामिल होते हैं।

इस बीच, पुलिस ने बताया कि इस मामले में सबसे ज्यादा नकद राशि आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़ी कौशालपुरी की एक जगह से बरामद की गई थी। यह जगह उसके भाई अभिषेक से जुड़े एक योग केंद्र की है।

योग सेंटर चलाने वाली सीमा तिवारी ने बताया कि पुलिस ने 5 जून को सेंटर की तलाशी ली और भारी मात्रा में कैश बरामद किया। उन्होंने कहा कि वहां अभिषेक के चार बक्से रखे हुए थे, जिनमें कंबल के अंदर पैसे छिपाकर रखे गए थे। एक बक्से पर “राम राज्य कोष” लिखा हुआ था।

सीमा तिवारी के मुताबिक, जब अभिषेक से छापेमारी और कैश के बारे में पूछताछ की गई, तो उसने दावा किया कि उसका भाई अविनाश शुक्ला ड्रग्स के धंधे में शामिल है और इसी वजह से छापेमारी हुई।

आरोपियों के घरों से कैश बरामद

वहीं, जांच अब सभी आरोपियों के घरों तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने तीन दिन पहले तलाशी ली और टिन्नू यादव के घर से कैश बरामद किया, जो पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है।

सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं को पता चला कि मंदिर में मिले दान की गिनती वाले कमरे की एक चाबी कथित तौर पर टिन्नू यादव के पास थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक स्टाफ के पास रहती थी। सूत्रों ने आगे बताया कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से फंड का कथित तौर पर गबन किया गया और इसमें शामिल लोगों के बीच पैसे आपस में बांट लिए गए।

इसके साथ ही, पुलिस ने सभी आरोपियों की चल और अचल संपत्ति से जुड़े बैंक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी इकट्ठा किए हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले एक साल के उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से कथित तौर पर ऐसे लेन-देन का पता चला है जो उनकी ज्ञात आय से कहीं ज़्यादा थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि, इस मामले में सबसे ज्यादा कैश की बरामदगी 89 लाख रुपये की हुई, जो आरोपी अविनाश शुक्ला द्वारा कथित तौर पर जगह बताने के बाद की गई। पुलिस ने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज होने से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने यह रकम बरामद कर ली थी।

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