कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा, कथित वाल्मीकि घोटाले में भूमिका से किया इनकार

B. Nagendra: कर्नाटक कैबिनेट मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि यह इस्तीफा ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम’ में कथित तौर पर 89 करोड़ रुपये की गड़बड़ी को लेकर बीजेपी की रायचूर से बेल्लारी तक 10 दिन की पदयात्रा से ठीक पहले दिया गया।

योजना और सांख्यिकी विभाग संभालने वाले नागेंद्र ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कथित वाल्मीकि घोटाले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी आलाकमान के नेताओं से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

उन्होंने कहा, “मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं। मेरे मुख्यमंत्री का भी मानना ​​है कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है। विकास और मुख्यमंत्री के विजन में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। बीजेपी ने मुझे आरोपी बताकर एक बेगुनाह को आरोपी बना दिया है।”

इससे पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा

बता दें कि यह दूसरी बार है जब नागेंद्र ने सरकार से इस्तीफा दिया है। इससे पहले, 2024 में कर्नाटक अनुसूचित जनजाति विकास बोर्ड से जुड़े ₹94 करोड़ के फंड डायवर्जन घोटाले में नाम आने के बाद उन्होंने सिद्धारमैया की कैबिनेट से ST कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

वहीं, कर्नाटक विधानसभा का हालिया मॉनसून सत्र हंगामे की वजह से बेकार चला गया, क्योंकि बीजेपी ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की थी।

नागेंद्र ने कहा, “साजिश वाली राजनीति के कारण, हमने कई बार अपील की और विपक्ष से कहा कि वे नोटिस दें और चर्चा के लिए आएं। वे सूखे, KPSC और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए नहीं आए। बिना किसी आधार या मुद्दे के, उन्होंने घोटाले होने का झूठा दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने झूठा दावा किया कि वाल्मीकि घोटाला हुआ और निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी।”

उन्होंने आगे कहा, “SIT और CID ने इस मामले की जांच की। साजिश के तहत CBI जांच शुरू करवाई गई और ED ने मुझे गिरफ्तार कर लिया। मैं तीन महीने जेल में भी रहा और फिर बाहर आया। दूसरी चार्जशीट में, उन्होंने बेवजह मेरा नाम शामिल कर दिया।”

बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) ने कथित वाल्मीकि घोटाले को लेकर नागेंद्र के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। दोनों पार्टियों ने 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 170 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है।

बीजेपी एमएलसी एन. रवि कुमार ने कहा, “नागेंद्र को आज नहीं तो कल इस्तीफा देना ही होगा क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है। 600 खातों में पैसे जमा किए गए। वह सरकारी फंड था… कांग्रेस पार्टी ने तेलंगाना और बेल्लारी लोकसभा चुनावों में और परिवार के लिए सोना खरीदने में सरकारी पैसे का इस्तेमाल किया।”

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सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

putin and trump

ख़ुफ़िया एजेंसियां अपने राष्ट्र के दूरगामी हितों के लिए दोस्तों का भी बलिदान कर सकती है। ट्रम्प और पुतिन के दोस्ताना रिश्तों के बारे में दुनिया जानती है। ट्रम्प ईरान युद्द को जीतकर चुनाव जितना चाहते है वहीं पुतिन भी यूक्रेन को लेकर कुछ ऐसे ही मंसूबे पाले हुए है। यदि ईरान में तख्तापलट हो जाये तो ट्रम्प जीत जायेंगे और यदि यूक्रेन से जेलेंसकी की बिदाई हो जाये तो पुतिन जीत जायेंगे। लगता है ट्रम्प और पुतिन मिलकर एक दूसरे की मदद करने का मंसूबा बना चूके है। हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को पहुंचना और रूसी खुफिया अधिकारियों से बातचीत करना इस बात का संकेत है कि दोनों महाशक्तियों के बीच कुछ खास पक रहा है।  

 

दरअसल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती, स्थायी होते हैं राष्ट्रीय हित। यही वजह है कि जो देश सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी दिखाई देते है, उनकी खुफिया एजेंसियां पर्दे के पीछे संवाद के रास्ते खुले रखती है। रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूसी खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की, इसकी रूस की विदेशी खुफिया सेवा एसवीआर के प्रमुख सर्गेई नारीश्किन ने पुष्टि की है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सीआईए प्रमुख की मॉस्को यात्रा का महत्व  बहुत अधिक है। दोनों देशो की खुफियां एजेंसियों के बीच संवाद का इतिहास भी पुराना है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ वैचारिक रूप से एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे, लेकिन नाजी जर्मनी के खिलाफ दोनों एक ही मोर्चे पर खड़े थे। उस दौर में अमेरिकी ओएसएस और सोवियत खुफिया तंत्र के बीच संपर्क स्थापित हुआ। अमेरिकी खुफिया इतिहास से पता चलता है कि ओएसएस प्रमुख विलियम जे.डोनोवन ने 1943 में सोवियत अधिकारियों के साथ खुफिया सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर बातचीत की थी। कुछ ही वर्षों बाद यही दोनों देश शीत युद्ध में एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए। इतिहास का यह अध्याय बताता है कि खुफिया सहयोग विचारधारा या मित्रता पर नहीं, बल्कि तत्कालीन रणनीतिक जरूरतों पर आधारित होता है।

 

अमेरिका और रूस के बीच बाद के वर्षों में भी सीमित खुफिया सहयोग के उदाहरण मिलते है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों ने कई बार एक-दूसरे को महत्वपूर्ण सूचनाएं दी है। दिसंबर 2017 में अमेरिका ने रूस को सेंट पीटर्सबर्ग में संभावित आतंकी हमले की जानकारी दी थी। रूसी सुरक्षा एजेंसियों ने इस सूचना के आधार पर कार्रवाई की और हमले की साजिश को विफल किया। इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर अमेरिकी सहायता के लिए धन्यवाद दिया था। यह घटना बताती है कि गंभीर साझा खतरे के सामने कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी खुफिया जानकारी साझा कर सकते हैं।


रैटक्लिफ की वर्तमान मॉस्को यात्रा को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। यूक्रेन युद्ध ने अमेरिका और रूस को आमने-सामने खड़ा कर रखा है, लेकिन युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों ने दोनों के बीच संवाद की आवश्यकता भी पैदा की है। राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यूक्रेन युद्ध का अंत उनकी विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि हो सकता है, जबकि पुतिन ऐसी समाप्ति चाहते हैं जिसमें रूस की रणनीतिक और क्षेत्रीय स्थिति कमजोर न हो। दोनों के हित पूरी तरह समान नहीं हैं, लेकिन युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक ला सकती है। ऐसे संवेदनशील दौर में खुफिया चैनल औपचारिक कूटनीति से अधिक उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि उनके माध्यम से बिना सार्वजनिक दबाव के संभावित विकल्पों पर बातचीत की जा सकती है।

 

इस पूरे घटनाक्रम में ईरान भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, रूस और ईरान के रणनीतिक संबंध तथा पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते समीकरणों ने मॉस्को और वॉशिंगटन दोनों की चिंताएं बढ़ाई है। यदि अमेरिका ईरान में निर्णायक रणनीतिक सफलता चाहता है, तो उसे रूस की भूमिका और उसके प्रभाव को भी ध्यान में रखना होगा। इसी तरह रूस के लिए भी यूक्रेन के अलावा पश्चिम एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन को समझना आवश्यक है। इस मुलाकात में ईरान में तख्तापलट या यूक्रेन में राष्ट्रपति जेलेंस्की की सत्ता से विदाई पर बातचीत की संभावना से इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस पर ट्रम्प और पुतिन का राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकता है कि बड़ी शक्तियां दूसरे देशों की राजनीतिक परिस्थितियों को अपने हितों के अनुरूप प्रभावित करने के विकल्पों पर विचार करती रहती है। सत्ता परिवर्तन, नेतृत्व परिवर्तन या राजनीतिक दबाव जैसी परिस्थितियां कई बार बड़े भू-राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बनती है। इसलिए रैटक्लिफ की यात्रा को सामान्य तो नहीं लिया जा सकता। 

 

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि ट्रंप और पुतिन के बीच सार्वजनिक राजनीति से अलग एक रणनीतिक संवाद की संभावना बनी हुई है। दोनों नेता अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और खुफिया एजेंसियां इसी रणनीतिक सोच का सबसे संवेदनशील हिस्सा होती है। वे मित्रता की रक्षा से अधिक अपने राष्ट्र के हितों की रक्षा करती है। आवश्यकता पड़ने पर प्रतिद्वंद्वी से बातचीत करना और अवसर मिलने पर सहयोगी से दूरी बनाना उनके लिए असामान्य नहीं है। इतिहास बताता है कि खुफिया एजेंसियों के बीच होने वाली बातचीत का वास्तविक महत्व अक्सर उसके तत्काल सार्वजनिक परिणामों से नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में दिखाई देने वाले घटनाक्रमों से समझ में आता है। अमेरिका और रूस भले ही आज भी प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन राष्ट्रीय हित उन्हें एक-दूसरे से बात करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की यह खामोश कूटनीति आने वाले समय में यूक्रेन और ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक शक्ति-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

 

ईरान रूस का रणनीतिक साझेदार है, जबकि यूक्रेन अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा-व्यवस्था का अहम मोर्चा। ऐसे में यदि दोनों देशों में सत्ता परिवर्तन होता है और नई सत्ताएं मॉस्को और वॉशिंगटन के अनुकूल बैठती है, तो यह पुतिन और ट्रंप दोनों के लिए असाधारण राजनीतिक जीत होगी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महाशक्तियां अपने हितों के लिए दूसरे देशों की राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन को प्रभावित करने से पीछे नहीं रही है। सत्ता परिवर्तन कई बार विचारधारा से नहीं, भू-राजनीतिक जरूरतों से संचालित होते हैं। ट्रंप और पुतिन भी शक्ति की इसी कठोर राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते है।

‘ईरान ने मेरे बेटे की हत्या की कोशिश की…’; नेतन्याहू का सनसनीखेज दावा, बोले- सुरक्षा हटती तो हमलावर सफल हो जाते

Benjamin Netanyahu: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर एक बेहद ही सनसनीखेज दावा किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि उसे निशाना बनाकर हत्या की कोशिश की गई। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद इजरायल की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नेतन्याहू ने सोमवार (24 अगस्त) को एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे परिवार को निशाना बनाया।” उन्होंने यह बात इजरायली चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही।

इजरायली टेलीविजन चैनल चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे को निशाना बनाया था। उन्होंने दावा किया कि यह केवल धमकी नहीं थी। बल्कि उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की गई थी। नेतन्याहू ने इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे एक बेटे को निशाना बनाया। ईरान ने मेरे एक बेटे की हत्या करने की कोशिश की। उसने उसकी हत्या की साजिश रची और उसे मारने की कोशिश की।”

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी किया बड़ा दावा

नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या उनके बेटे को निशाना बनाने की जानकारी किसी खुफिया सूचना के लीक होने के कारण सामने आई थी। इसके जवाब में उन्होंने दोबारा स्पष्ट तौर पर कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की कोशिश की थी। इसके बाद नेतन्याहू ने अपने परिवार को दी जा रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का बचाव किया।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार की सुरक्षा किसी दिखावे या विशेष सुविधा के लिए नहीं है, बल्कि वास्तविक खतरे को देखते हुए जरूरी है। नेतन्याहू ने कहा कि अगर यह सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती, तो उनके बेटे को निशाना बनाने वाले लोग अपने मकसद में सफल हो सकते थे। उनके मुताबिक, परिवार के सदस्यों को सुरक्षा देना मौजूदा परिस्थितियों में एक आवश्यक कदम है।

किस बेटे को बनाया गया निशाना?

नेतन्याहू ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित हत्या की कोशिश में उनके किस बेटे को निशाना बनाया गया था। उनके दो बेटे याइर नेतन्याहू और अवनेर नेतन्याहू हैं। इसलिए यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कथित ईरानी साजिश का निशाना याइर थे या अवनेर। नेतन्याहू ने इंटरव्यू के दौरान इस बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी शेयर नहीं की।

परिवार की सुरक्षा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है

नेतन्याहू का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर पहले ही अतिरिक्त कदम उठाए जा चुके हैं। जुलाई में शिन बेट मामलों से संबंधित मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू की पत्नी सारा नेतन्याहू और उनके दोनों बेटों याइर तथा अवनेर के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी थी। यह फैसला प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच लिया गया था। हालांकि, उस समय सुरक्षा बढ़ाने के पीछे कथित तौर पर किस विशेष खतरे का आकलन किया गया था, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

लंबे समय से सुरक्षा मामलों पर गोपनीयता

नेतन्याहू का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब सुरक्षा से जुड़े कई मामलों को लेकर लंबे समय से सख्त गोपनीयता और प्रतिबंध लागू रहे हैं। इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा से संबंधित खुफिया जानकारी को आम तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता। ऐसे में नेतन्याहू द्वारा खुद अपने एक बेटे को ईरान की कथित हत्या की कोशिश का निशाना बताए जाने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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हालांकि, उनके बयान में कथित हमले की तारीख, स्थान, हमले के तरीके या उसे विफल करने वाली सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बारे में कोई डिटेल्स जानकारी नहीं दी गई। नेतन्याहू के इस दावे से एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि इजरायल और ईरान के बीच जारी गंभीर तनाव अब प्रधानमंत्री के परिवार तक कितनी दूर पहुंच चुका है। हालांकि, कथित हत्या की कोशिश से जुड़े विस्तृत तथ्य और खुफिया जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी एशोआराम के लिए नहीं, विपक्ष ने सवाल उठाए थे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अनवर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू बोले- सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अवनेर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। खबर लगातार अपडेट की जा रही है।

नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी एशोआराम के लिए नहीं, विपक्ष ने सवाल उठाए थे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अवनर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू अगला चुनाव हारे, तब भी मिलेगी सुरक्षा दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अगला चुनाव दो महीने में है। अवनर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। नेतन्याहू परिवार की सुरक्षा पर विवाद क्या है इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार को सुरक्षा मिलती है। विवाद तब बढ़ा, जब सारा नेतन्याहू और उनके दोनों वयस्क बेटों याएर व अवनर की सुरक्षा लंबे समय तक जारी रखने का फैसला हुआ। जुलाई 2026 में एक मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू और सारा को जीवनभर, जबकि दोनों बेटों को कम से कम 5 साल सुरक्षा देने का फैसला किया। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा की अवधि पहले से तय करने के बजाय वास्तविक खतरे के आधार पर समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। बड़ा विवाद याइर नेतन्याहू की विदेश में सुरक्षा को लेकर है। वह अमेरिका के मियामी में रहते हैं, फिर भी उन्हें शिन बेट के सुरक्षाकर्मी मिलते हैं। 2018-2023 के बीच याएर, अवनर और सारा की सुरक्षा पर करीब 32 मिलियन शेकेल खर्च होने की जानकारी सामने आई थी। याइर को विदेश में निजी छुट्टियों के दौरान भी सुरक्षा मिलने पर सवाल उठे। आलोचकों का कहना है कि दोनों बेटे वयस्क हैं और विदेश में रहने वाले बेटे की महंगी सुरक्षा का खर्च इजरायली करदाताओं पर पड़ रहा है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन: कहा- जो देश बिजनेस करेंगे, उन पर भी कार्रवाई अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग के क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें…

टायर 2 सिटी के इस लड़के ने 25 की उम्र में बनाया ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ, बैंक में पड़े हैं 45 लाख रुपये! डिजिटल की ताकत से मिली ये सक्सेस

Tier 2 City Story: इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के दौर में सही सोच और सही समय पर शुरुआत किसी की भी जिंदगी बदल सकती है। ऐसी ही एक कहानी रेडिट पर सामने आई है। भारत के एक टायर-2 शहर के रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने महज 18 साल की उम्र में फ्रीलांसिंग से शुरुआत की और देखते ही देखते अपना खुद का डिजिटल-मीडिया बिजनेस खड़ा कर लिया। अपनी मेहनत के बल पर इस युवक ने 25 साल की उम्र में करीब ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ हासिल कर लिया है। रेडिट पर अपनी इस सफलता की कहानी साझा करते हुए युवक ने अपने पूरे पोर्टफोलियो का ब्योरा दिया है।

18 की उम्र में फ्रीलांसिंग, फिर खड़ा किया अपना बिजनेस

युवक ने बताया है कि उसने 18 साल की उम्र से ही फ्रीलांस काम करना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे अनुभव हासिल करने के बाद उसने एक डिजिटल-मीडिया कंपनी की नींव रखी। आज उसकी इनकम का मेन सोर्स उसका बिजनेस ही है। बिजनेस होने की वजह से उसकी कमाई फिक्स नहीं है बल्कि उतार-चढ़ाव भरी है। इसके बावजूद उसका पोर्टफोलियो उसकी सफलता की कहानी बयान कर रहा है।

जानिए कहां-कहां इन्वेस्ट है ₹1.6 करोड़

25 साल के इस युवा एंटरप्रेन्योर ने अपने पैसों को अलग-अलग एसेट क्लासेज में डाइवर्सिफाई किया हुआ है:-

भारतीय शेयर: ₹85 लाख

कैश/बैंक अकाउंट: ₹45 लाख

रियल एस्टेट: ₹15 लाख

यूएस स्टॉक्स: ₹7.5 लाख

म्यूचुअल फंड्स: ₹5 लाख

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: ₹5 लाख

क्रिप्टोकरेंसी: ₹3 लाख

गोल्ड ईटीएफ: ₹2 लाख

फिक्स्ड डिपॉजिट: ₹1 लाख

बैंक में पड़े हैं ₹45 लाख, आगे की स्ट्रैटिजी पर मांगी राय

युवक के बैंक खाते में पिछले काफी समय से ₹30 से ₹45 लाख की बड़ी राशि जमा है। उसका मानना है कि बचत खाते में इतना पैसा रखना काम का सौदा नहीं है। वह पिछले 1-2 सालों से रियल एस्टेट प्रॉपर्टी तलाश रहा है, लेकिन उसे अभी तक कोई ऐसा विकल्प नहीं मिला जहां कीमत और रिस्क/रिवॉर्ड का तालमेल सही बैठता हो। सुरक्षा के लिहाज से उसके पास ₹50 लाख का टर्म इंश्योरेंस तो है, लेकिन फिलहाल उसने अपने या अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया है।

FIRE गोल हासिल करने की चाहत

युवक का मुख्य उद्देश्य अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस को आगे बढ़ाना, फाइनेंशियल स्थिति को मजबूत करना और किसी एक बिजनेस या एसेट पर निर्भरता कम करके फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना है ताकि वह जल्द से जल्द फायर (FIRE- Financial Independence, Retire Early) का टारगेट हासिल कर सके।

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उसने रेडिट कम्युनिटी से सुझाव मांगते हुए पूछा कि अगर 25 साल की उम्र में किसी के पास ₹1.5 से ₹2 करोड़ का नेटवर्थ हो और ₹40-45 लाख कैश में हो, तो उसे अपने अगले कदम के रूप में किन चीजों पर फोकस करना चाहिए?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

₹2.5 लाख महीना कमाता है ये 29 साल का युवक फिर भी कर्ज में डूबा! जानिए शादी-घर ने कैसे बिगाड़ा पूरा हिसाब

Bengaluru Viral News: हैंडसम सैलरी और अच्छा करियर होने के बावजूद खराब फाइनेंशियल मैनेजमेंट किसी को भी कर्ज के जाल में फंसा सकता है। बेंगलुरु के रहने वाले 29 वर्षीय एक शादीशुदा युवक की कहानी इसी बात का लेटेस्ट उदाहरण बनी है। टैक्स कटने के बाद हर महीने ₹2.5 लाख की कुल कमाई करने के बावजूद यह युवक शादी और घर के रिनोवेशन पर बड़ा खर्च करने की वजह से कई लोन और कर्ज के भारी बोझ तले दब गया है। युवक ने सोशल मीडिया पर अपने फाइनेंशियल स्टेटस को शेयर करते हुए लोगों से सलाह मांगी है।

95 फीसदी सेविंग्स खत्म, शादी और घर के रेनोवेशन ने बिगाड़ा बजट

युवक ने अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि ‘मैं हाल ही में एक ऐसे कर्ज के जाल में फंस गया, जिसमें मैं कभी नहीं फंसना चाहता था। मैंने हाल ही में दो बड़े खर्च किए एक मेरी शादी और दूसरा घर का रेनोवेशन, जिसने मेरी 95 प्रतिशत बचत को खत्म कर दिया।’

रेडिट पर की गई युवक की इस पोस्ट के मुताबिक उसके माता-पिता ने उसे अपने पैतृक घर पर एक और मंजिल बनाने के लिए जोर दिया ताकि उसे किराए पर दिया जा सके। इस घर के रेनोवेशन में कुल 35 लाख रुपये खर्च हुए। उसने अपनी सेविंग्स में से ₹15 लाख दिए और बाकी के ₹20 लाख लोन लिए। उसकी शादी का खर्च ₹30 लाख से अधिक हो गया। शादी के खर्चों के लिए उसने अपने स्टॉक्स (शेयर) बेचे लेकिन आखिरी समय में कैश की कमी होने की वजह से उसे 9.1 फीसदी के इंट्रेस्ट पर 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेना पड़ा। उसने बताया कि आखिरी समय में इस अमाउंट के कैश का बंदोबस्त करने के लिए उसके पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं था।

EMI और क्रेडिट कार्ड का भारी-भरकम बोझ

घर के रेनोवेशन और शादी के अलावा युवक पर कार लोन भी है। इसपर अभी 3 लाख रुपये बचे हुए हैं। उसके माता-पिता फाईनेंशियली से उसी पर निर्भर हैं और राशन-पानी व अन्य घरेलू खर्चों के लिए उसी के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। हर महीने युवक को होम लोन में 35000, पर्सनल लोन ईएमआई 16000, कार लोन पर 15000, किराए और बिल पर 37000, क्रेडिट कार्ड के बिल पर 70 हजार, राशन के मद में 15 हजार, आउटिंग और मूवी पर करीब 6000 खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा 1500 रुपये SIP इन्वेंस्टमेंट में जाते हैं।

युवक के पास फिलहाल स्टॉक्स में 3 लाख रुपये और एफडी में 1 लाख रुपये जमा हैं। इसके अलावा उसके पास 50 सॉवरेन सोना है, जिसे वह बेचना या इस्तेमाल करना नहीं चाहता। युवक ने बताया है कि ‘हम पार्टियां नहीं करते, न ही मैं अक्सर बाहर खाता हूं। मैं अपने कैश फ्लो को सुधारने के लिए नौकरी बदलने की योजना बना रहा हूं, लेकिन इसमें अभी समय लग रहा है।’ अब वह किसी भी तरह अपने कर्जों को जल्द चुकता करने, क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर लगाम लगाने और मासिक बचत बढ़ाने के तरीके तलाश रहा है।

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इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि, ‘यह पति-पत्नी दोनों की मिलाकर कमाई है। अगर पति अपनी पत्नी की कमाई का इस्तेमाल अपने माता-पिता द्वारा इस्तेमाल किए गए क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के लिए करेगा, तो नई-नवेली पत्नी नाराज हो सकती है और लड़ाई शुरू हो सकती है। इसके अलावा युवक ने पत्नी के पक्ष के खर्चों का जिक्र नहीं किया है, यकीनन पत्नी भी अपने माता-पिता को कुछ पैसे भेज रही होगी या शादी के लिए लिए गए किसी लोन की भरपाई कर रही होगी।’

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में तबाह जैश के अड्डे को फिर बना रहा पाकिस्तान, बहावलपुर में फिर सज रहा आतंकियों का अड्डा!

Pakistan News: भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के जिन ठिकानों नेस्तानाबूद कर दिया था, अब उनको लेकर एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय को पाकिस्तान द्वारा काफी हद तक फिर से बना लिया गया है। भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच बहावलपुर कॉम्प्लेक्स का यह रीडेवलपमेंट इस बात का साफ सबूत है कि पाकिस्तान आतंकियों और उनके बुनियादी ढांचे को खत्म करने में पूरी तरह विफल रहा है।

25 करोड़ रुपये का फंड, ISI पर लगे आरोप

CNN-न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान सरकार और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने जैश कॉम्प्लेक्स को बनाने के लिएए किश्तों में करीब 25 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस फंड में से करीब 11 करोड़ रुपये मरकज सुभानअल्लाह सेंट्रल हॉल को बनाने में खर्च किए गए हैं।

2026 की शुरुआत से ही चल रहा काम

रिपोर्ट के मुताबिक, बहावलपुर में ये काम साल 2026 की शुरुआत में ही दिखने लगा था। उस दौरान भारी मशीनरी, ईंटें, स्टील और दूसरे कंस्ट्रक्शन मैटेरियल साइट पर लाए गए थे। धीरे-धीरे आतंकियों का ये पूरा कॉन्प्लेक्स अब फंक्शनल हो गया है। इसके सेंट्रल हॉल को और बड़ा बनाया गया है। इसकी दीवारों पर नया प्लास्टर और पेंट किया गया है, संगमरमर का नया फर्श बिछाया गया है और पूरे परिसर की साफ-सफाई की गई है। सूत्रों का कहना है कि यह कॉम्प्लेक्स एक बार से इस्तेमाल के लिए तैयार हो रहा है।

क्या है बहावलपुर बेस का पाकिस्तानी सेना से कनेक्शन?

एन-5 हाईवे के ठीक पीछे स्थित बहावलपुर का यह ठिकाना ऐतिहासिक रूप से जैश-ए-मोहम्मद के लिए कई काम करता रहा है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से एक मदरसे, भर्ती केंद्र और आतंकी साजिशों के प्लानिंग सेंटर के रूप में किया जाता रहा है। सीएनएन-न्यूज18 की एक पुरानी रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया था कि यह कॉम्प्लेक्स पाकिस्तान की 31 कोर सैन्य छावनी के बेहद करीब है। खुफिया स्रोतों ने इस लोकेशन को इस बात का स्पष्ट संकेतक माना था कि पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सेना के भीतर के तत्वों द्वारा जैश-ए-मोहम्मद को पूरी सुरक्षा और समर्थन दिया जाता है।

क्या था भारत का ऑपरेशन सिंदूर?

साल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बेहद घातक आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इन ठिकानों को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे का हिस्सा माना जाता था।

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यह पहली बार नहीं है जब ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं जो इशारा करती हैं कि पाकिस्तान भारत द्वारा नष्ट किए गए आतंकी ठिकानों का फिर से निर्माण कर रहा है। भारत ने हमेशा इंटरनेशनल कम्युनिटी को बताया है कि पाकिस्तान लगातार जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों को पनाह देना जारी रखे हुए है। यही आतंकी संगठन भारत में 2019 के पुलवामा आतंकी हमले सहित कई हाई-प्रोफाइल हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है।

Islamic NATO: भारत के खिलाफ बांग्लादेश की साजिश? सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किये के ‘इस्लामिक NATO’ में होगा शामिल

Islamic NATO: बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने कहा है कि उनका देश हाल में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने रक्षा गठबंधन में शामिल होने के लिए तैयार है। हालांकि, भारत के पड़ोसी देश ने कहा है कि इस संबंध में कोई भी फैसला राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। 7 अगस्त को मक्का में हुए इस समझौते के तहत सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध का एक ढांचा तैयार किया गया है। ‘इस्लामिक NATO’ कहे जाने वाले इस ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ में प्रावधान है कि इसमें से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

इस बीच खबर है कि फरवरी से ही अमेरिका का मुकाबला कर रहे ईरान को भी सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए इस एग्रीमेंट में शामिल होने का न्योता दिया गया है। पाकिस्तान के SAMAA TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘खानेह मिल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी ने लेबनान के ‘अल मयादीन’ को बताया कि तेहरान को न्योता मिला है। इसके बाद इस मामले पर विचार किया जा रहा है।

बांग्लादेश ने क्या कहा?

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नवनियुक्त विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा, “बांग्लादेश अपने हितों और वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं व्यापार में बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना के प्रति सकारात्मक रुख रखता है।” कबीर ने शुक्रवार को सरकारी न्यूज एजेंसी ‘बीएसएस’ की बांग्ला सेवा को दिए इंटरव्यू में कहा कि सरकार बांग्लादेश फर्स्ट पॉलिसी और संतुलित विदेश नीति पर आगे बढ़ रही है, जिसमें राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

पाकिस्तान के करीब जा रहा ढाका!

कबीर ने कहा कि इसी नीति के तहत ढाका रक्षा समझौते में शामिल होने का फैसला कर सकता है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सामान्य राजनयिक संबंधों के माध्यम से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करेगा जिसे व्यापार और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शुक्रवार को विदेश मामलों के दूसरे राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने रियाद आने का निमंत्रण दिया है।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा की तारीख गर्मियां खत्म होने के बाद निर्धारित की जा सकती है। विदेश मामलों की एक अन्य राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कबीर की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रक्षा समझौते में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख उसके राष्ट्रीय हित और वहां के लोगों के हितों से तय होगा।

बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं?

जब उनसे पूछा गया कि क्या बांग्लादेश इस त्रिपक्षीय ढांचे का हिस्सा बनेगा तो उन्होंने कहा, “हम किसी भी समझौते या बहुपक्षीय संगठन में शामिल होंगे या नहीं, इसका फैसला मुख्य रूप से इस आधार पर होगा कि बांग्लादेश और बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं।”

दोनों मंत्रियों की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के वित्त एवं योजना सलाहकार प्रोफेसर राशेद अल महमूद तितुमीर के उस बयान के दो दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति को देश की विदेश नीति में ‘बुनियादी बदलाव’ बताया था।

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उन्होंने कहा था कि इस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बांग्लादेश के संबंधों में राष्ट्रीय हित, संप्रभुता, आपसी सम्मान और क्षेत्रीय सौहार्द को केंद्र में रखा गया है। इसके तहत सभी देशों के साथ रचनात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।

सोमालिया तट पर हथियारों से लदा जहाज हाईजैक, क्रू में भारतीय नागरिक शामिल, अबतक क्या-क्या पता चला?

सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास समुद्री डाकुओं ने तुर्की के हथियारों से लदे एक कार्गो शिप का अपहरण कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हाईजैक हुए जहाज पर 10 क्रू मेंबर्स मौजूद हैं। इनमें 6 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। एक सोमाली अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री डाकुओं ने जहाज को अपने कब्जे में लेकर तटीय इलाके की ओर मोड़ दिया है।

किस जहाज का हुआ अपहरण और क्या था उस पर लदा?

हाईजैक हुए जहाज का नाम एम/वी लुटुफ है। इस पर कैमरून का झंडा लगा हुआ है। इस जहाज का स्वामित्व पोलर मूवमेंट शिपिंग के पास है। सोमाली अधिकारी के मुताबिक जहाज को पुंटलैंड के ईल जिले में मरराया से करीब 3.5 समुद्री मील दूर से अगवा किया गया। यह जहाज मोगादिशु में स्थित एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए तुर्की के हथियार, संचार उपकरण और सैटेलाइट उपकरण ले जा रहा था।

क्रू में 6 भारतीय शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक हाइजैक जहाज पर कुल 10 लोग सवार हैं। 6 भारतीय नागरिक, 1 तुर्की का नागरिक, 1 जॉर्जिया का नागरिक, 2 सर्बियाई सुरक्षा गार्ड शामिल हैं। इस घटना के बाद तुर्की के अधिकारियों की ओर से तुरंत कोई बयान नहीं आया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से भी फिलहाल इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

8 समुद्री डाकू शामिल, हमले के बाद एयरस्ट्राइक में 4 की मौत

सोमाली अधिकारी के अनुसार जहाज पर कब्जा करने में 8 समुद्री डाकू शामिल थे। ऐसा माना जा रहा है कि यह समूह 26 अप्रैल को एम/वी स्वॉर्ड के अपहरण में शामिल गुट से जुड़ा हुआ है। डाकू इस जहाज को पुंटलैंड के डांगोरोयो जिले में गरमाल के पास तट की ओर ले गए। अपहरण के बाद तुर्की के स्वामित्व वाले दो जहाज हाईजैक किए गए पोत के करीब पहुंचे जबकि तुर्की के हेलीकॉप्टरों और ड्रोन ने क्षेत्र की निगरानी की।

मंगलवार को एक छोटी नाव में सवार दो लोग जहाज के पास पहुंचे और उन्होंने जहाज पर खाट (सोमालिया में चबाया जाने वाला एक प्रकार का नशीला पदार्थ) पहुंचाया। नाव के वापस किनारे लौटने के बाद एक एयरस्ट्राइक हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 2 अन्य घायल हो गए।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हवाई हमला किसने किया था और मारे गए लोग सीधे तौर पर अपहरण की साजिश में शामिल थे या नहीं। जहाज ‘एम/वी लुटुफ’, उसके क्रू मेंबर्स और उस पर लदे हथियारों की मौजूदा स्थिति अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सकी है।

अदन की खाड़ी में एक और टैंकर पर हमला, समुद्री डकैती की बढ़ी चिंताएं

सोमालिया तट पर समुद्री डकैती के दोबारा उभरने से अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में चिंताएं बढ़ गई हैं। इस घटना के तुरंत बाद गुरुवार को अदन की खाड़ी में एक और घटना सामने आई, जहां अमेरिकी प्रतिबंधों वाले एक टैंकर ‘सीमुल’ पर 6 हथियारबंद लोग सवार हो गए और उसे जबरन सोमालिया की ओर मोड़ने पर मजबूर कर दिया। ईयू के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर इंडियन ओशन ने पुष्टि की है कि 6 सशस्त्र लोगों ने टैंकर पर कब्जा कर लिया है। सीमुल को पिछले साल अमेरिका ने ईरान के ‘शैडो Fleet’ का हिस्सा बताते हुए प्रतिबंधित किया था।

सोमालिया तट पर 2011 में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गश्त के बाद समुद्री डकैती में भारी कमी आई थी। लेकिन इस साल अप्रैल के बाद से एक बार फिर हमलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है और कई जहाजों को बंधक बनाए जाने की खबरें आ रही हैं।

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