‘मेरी छवि खराब करने की कोशिश हुई’ कुक के साथ मारपीट विवाद पर क्रिकेटर शशांक सिंह ने तोड़ी चुप्पी

पंजाब किंग्स के खिलाड़ी शशांक सिंह ने अपने और परिवार के खिलाफ दर्ज पुलिस मामले पर पहली बार रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह झूठी है और एक मशहूर खिलाड़ी होने की वजह से उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। शशांक के मुताबिक इस मामले का इस्तेमाल उन पर दबाव बनाने और कथित तौर पर उगाही करने के लिए किया गया। बता दें पिछले महीने भोपाल के रातीबाद थाने में शशांक सिंह और उनके पिता शैलेश सिंह के खिलाफ उनके घर में काम करने वाले कुक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

कुक ने आरोप लगाया था कि दोनों ने उसके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और उसका मोबाइल फोन छीन लिया। वहीं शशांक ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया।

शशांक सिंह ने क्या कहा

शशांक सिंह ने लिखा, “इस घटना ने मुझे पूरी तरह बदल दिया और मुझे ऐसे सबक सिखाए, जिन्हें मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा। मैं यह बात किसी की सहानुभूति पाने के लिए नहीं लिख रहा, बल्कि इसलिए साझा कर रहा हूं क्योंकि मेरे परिवार और मैंने पहली बार ऐसी स्थिति का सामना किया है। मुझे उम्मीद है कि दूसरे लोग भी इससे कुछ सीखेंगे। एक खिलाड़ी होने के नाते मैंने वर्षों तक आलोचना, ट्रोलिंग और अपशब्दों का सामना किया है और उसके साथ जीना भी सीख लिया है। लेकिन इस बार मामला अलग था। देखते ही देखते मुझे ऐसे पेश किया गया, मानो मैंने अपने से कमजोर और कम साधन वाले व्यक्ति के साथ मारपीट की हो। बिना पूरी सच्चाई जाने हजारों लोगों ने मुझे सोशल मीडिया पर गलत बातें कहीं।”

 

वीडियो देख हैरान थे हम

उन्होंने आगे लिखा, “मैं आज भी इस बात को लेकर सवाल उठाता हूं कि शिकायत में जो बातें कही गईं, वे कैसे सामने आईं। जिस दिन वह हमारे घर से गया, उस समय उसे किसी तरह की चोट नहीं थी। बाद में जब हमने उसका वीडियो देखा तो हम हैरान रह गए। हमें समझ नहीं आया कि इतनी गंभीर चोटें आखिर आईं कैसे। वह अपनी इच्छा से हमारे घर काम करने आया था, लेकिन तीसरे ही दिन हमने उसे वापस भेज दिया। इसकी वजह ये थी कि हमने उसे घर में इधर-उधर घूमते, घर के अंदर की तस्वीरें खींचते और उन्हें अपने दोस्तों या साथियों को भेजते हुए देखा था। बाद में इस पूरे घटनाक्रम को देखकर हमें कई बातें समझ में आने लगीं।”

 

ये घटना सोची-समझी साजिश

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी और इसका मकसद उन पर दबाव बनाकर पैसे ऐंठना था। उन्होंने आगे लिखा, “जैसे-जैसे इस मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आती गई, मुझे पूरा भरोसा हो गया कि वह हमारे घर किसी अच्छे इरादे से नहीं आया था। मेरे अनुसार, पूरी योजना झूठी एफआईआर दर्ज कराकर मुझ पर दबाव बनाने की थी। शायद उन्हें लगा कि एक सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति होने के कारण मैं अपनी छवि बचाने के लिए पैसे देने को मजबूर हो जाऊंगा। मेरा मानना है कि इस मामले में एफआईआर का इस्तेमाल किसी वास्तविक शिकायत के लिए नहीं, बल्कि कथित तौर पर दबाव बनाकर उगाही करने के साधन के रूप में किया गया।”

उन्होंने एफआईआर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। 33 वर्षीय क्रिकेटर ने कहा कि, पुलिस ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले उनका पक्ष जानने या उनसे पूछताछ करने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने लिखा, “मुझे सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात की हुई कि जहां कई वास्तविक पीड़ितों को गंभीर मामलों में भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ बिना हमारी बात सुने और बिना किसी पूछताछ के तुरंत एफआईआर दर्ज कर दी गई।”

शशांक सिंह ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी गलत बताया, जिनमें उन्हें 30 अप्रैल 2026 की एक दूसरी कथित घटना से जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि इन खबरों में बुनियादी तथ्यों की भी जांच नहीं की गई। शशांक के मुताबिक, जिस दिन की घटना का जिक्र किया जा रहा है, उस दिन वह आईपीएल मैच खेल रहे थे, इसलिए उन पर लगाए गए आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते।

शशांक सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि घटना के समय वह अपने माता-पिता के साथ घर पर मौजूद थे। उन्होंने लिखा, “इस पूरे अनुभव ने मुझे कई कठिन सबक सिखाए हैं। किसी पर सिर्फ दया या हमदर्दी के आधार पर भरोसा नहीं करना चाहिए। घर में काम करने के लिए हमेशा किसी रजिस्टर्ड एजेंसी के जरिए ही कर्मचारी रखें और उसका पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएं।”

Lawrence Bishnoi: क्या गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को FBI को सौंपेगा भारत? निज्जर हत्याकांड मामले में अमेरिका ने की प्रत्यर्पण की मांग

Lawrence Bishnoi Extradition: कनाडा के खालिस्तानी अलगाववादी एवं आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या समेत कई अपराधों में शामिल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DoJ) ने कंफर्म किया है कि वह भारत से उसके प्रत्यर्पण यानी एक्सट्रैडिशन की मांग करेगा। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने कंफर्म किया है कि वह जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भारत से एक्सट्रैडिशन की कोशिश करना चाहता है।

कुछ दिन पहले ही एक फेडरल चार्जशीट में उस पर कनाडा के खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या समेत कई अपराधों की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। रिपोर्ट में कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के US अटॉर्नी ऑफिस में पब्लिक अफेयर्स ऑफिसर सियारन मैकएवॉय के हवाले से कहा गया है कि बिश्नोई को अमेरिका लाने की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि इसमें समय लगने की उम्मीद है।

मैकएवॉय ने एक ईमेल में कहा, “बिश्नोई खुद भारत में जेल में बंद है। हम उसे अमेरिका में एक्सट्रैडिशन करने की कोशिश करना चाहते हैं। (एक्सट्रैडिशन एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है और इसे पूरा होने में अक्सर सालों लग जाते हैं)।” बिश्नोई 2015 से भारत में जेल में बंद है। अभी वहगुजरात की एक जेल में बंद है। इस सप्ताह की शुरुआत में लॉस एंजिल्स में खुले एक फेडरल चार्जशीट में नामजद मुख्य आरोपियों में से एक था।

चार्जशीट के मुताबिक, बिश्नोई ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था, जो एक कनाडाई नागरिक था। उसकी 18 जून, 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मैकएवॉय ने साफ किया कि बिश्नोई गैंग के सदस्यों को अभी तक US कोर्ट के सामने पेश नहीं किया गया है क्योंकि वे अभी उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं।

बिश्नोई और उसके करीबी साथी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ के अलावा चार्जशीट में जग्गू भगवानपुरिया और कनाडा में रहने वाले रविंदर सिंह ढांडा का भी नाम कथित गैंग लीडर के तौर पर है। मैकएवॉय ने कहा कि ढांडा गैंग के सदस्यों का ट्रायल लॉस एंजिल्स की एक कोर्ट में 31 अगस्त को तय किया गया है। जबकि भगवानपुरिया गैंग के सदस्यों से जुड़ी कार्यवाही 1 सितंबर को लिस्ट की गई है।

आरोपित किए जाने के बाद फिर सुर्खियों में लारेंस बिश्नोई

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करने का कथित तौर पर आदेश देने के मामले में अमेरिका द्वारा आरोपित किया गया लॉरेंस बिश्नोई लंबे समय से भारतीय एजेंसियों की जांच का सामना कर रहा है। गुजरात में उच्च सुरक्षा वाली जेल में शिफ्ट होने से पहले 33 वर्षीय बिश्नोई को मकोका के तहत एक मामले के सिलसिले में राष्ट्रीय राजधानी लाए जाने के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया था।

साल 2023 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दायर एक आरोप पत्र में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोप लगाया कि बिश्नोई के गिरोह के कई राज्यों में लगभग 700 गुर्गे हैं। उन्होंने विदेशों में भी संबंध बनाए रखे हैं।

कौन है लारेंस बिश्नोई?

पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की ग्रेजुएट डिग्री हासिल करने वाला बिश्नोई हत्या के प्रयास, हमले, लूट और रंगदारी के कई मामलों का सामना कर रहा है। वह विश्वविद्यालय परिसर की राजनीति के माध्यम से अपराध की दुनिया में आया। जांचकर्ताओं का आरोप है कि बाद में उसने अपने गिरोह का विस्तार सुपारी लेकर हत्या करने, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स की तस्करी और रंगदारी वसूलने में किया। उसने एन्क्रिप्टेड और इंटरनेट-आधारित संचार के माध्यम से जेल से सहयोगियों को निर्देशित करना जारी रखा।

अमेरिका ने बिश्नोई और उसके करीबी सहयोगी, सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर कनाडा में निज्जर की हत्या का आदेश देने का आरोप लगाया है, जिससे दिल्ली से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोह पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित हो गया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि बिश्नोई जेल में बंद रहने के बावजूद सक्रिय है।

निज्जर हत्याकांड में भी आया नाम

अमेरिकी शहर लॉस एंजिलिस की एक संघीय अदालत में मंगलवार को पेश आरोपपत्र के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने निज्जर (45) की हत्या की साजिश रची थी। अदालत के दस्तावेजों में निज्जर का उल्लेख ‘एच एस एन’ के रूप में किया गया है।

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‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत इन आरोपों की घोषणा की गई। यह अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाई है, जिसके तहत भारत स्थित तीन संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। अभियोग में बराड़ का भी नाम है, जो अब भी फरार है।

‘आमिर खान Love Jihad के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं’; अभिनेता की तीसरी शादी पर भड़के महाराष्ट्र के मंत्री

Nitesh Rane on Aamir Khan: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सीनियर नेता नितेश राणे ने बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह तय करना उनका काम नहीं है कि किसकी शादी में कौन जाए। लेकिन अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो आमिर खान को अपना आदर्श मानते हैं, इस पर विचार करें कि उन्हें उनसे कैसी प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आमिर खान ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बनते जा रहे हैं।

न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, शिरडी में आमिर खान की तीसरी शादी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री नितेश राणे ने कहा, “यह तय करना मेरा काम नहीं है कि कौन किसकी शादी में शामिल होगा। लेकिन, अब समय आ गया है कि हिंदू युवा, जो उन्हें एक सेलिब्रिटी मानते हैं, इस पर सोचें कि उन्हें इससे किस तरह की प्रेरणा लेनी चाहिए। मेरा मानना ​​है कि जब सेलिब्रिटी अपनी निजी जिंदगी के बारे में ऐसे फैसले लेते हैं, तो हिंदू समाज को इस पर सोचना चाहिए। आमिर खान असल में ‘लव जिहाद’ के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं।”

राणे के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, आमिर खान की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मंत्री का कहना है कि ‘लव जिहाद’ संबंधी आरोप उनका व्यक्तिगत राजनीतिक बयान है। आमिर खान ने इसी महीने गौरी स्प्रैट के साथ तीसरी शादी की थी। रीना दत्ता और किरण राव के बाद यह आमिर खान की तीसरी शादी है।

आमिर खान ने 1986 में रीना दत्ता से शादी की थी। दोनों के दो बच्चे अभिनेता जुनैद खान और इरा खान हैं। साल 2002 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद आमिर ने 2005 में किरण राव से दूसरी शादी की। इस शादी से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ। हालांकि, साल 2021 में दोनों ने अलग होने का ऐलान कर दिया। अब आमिर ने तीसरी शादी की है।

मुस्लिम विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं नितेश राणे

नितेश राणे पहले भी कई ऐसे सार्वजनिक बयान दे चुके हैं जिन्हें आलोचकों, विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने मुस्लिम विरोधी या सांप्रदायिक बताया है। इनमें मुस्लिम समुदाय, मस्जिदों, हलाल, लव जिहाद और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर उनकी तीखी टिप्पणियां शामिल रही हैं। दूसरी ओर, राणे और उनके समर्थकों का कहना है कि वे हिंदू हितों की बात करते हैं और उनके बयान कानून या सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर आधारित हैं।

Love Jihad क्या होता है?

‘लव जिहाद’ एक बेहद संवेदनशील और विवादित शब्द है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत में राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहसों में किया जाता है। इस शब्द का उपयोग उन मामलों को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, जहां कथित तौर पर कोई मुस्लिम पुरुष किसी गैर-मुस्लिम महिला (आमतौर पर हिंदू या ईसाई) को शादी के माध्यम से इस्लाम में परिवर्तित करने के इरादे से प्रेम जाल में फंसाता है।

इस विषय से जुड़े विभिन्न दृष्टिकोण और मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:-

1. आरोप और चिंताएं (दावा करने वालों का पक्ष)

धर्मांतरण का आरोप: दक्षिणपंथी संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों का आरोप है कि यह एक संगठित प्रयास है, जिसके तहत पहचान छिपाकर (जैसे गलत नाम बताकर) या शादी का झांसा देकर महिलाओं का जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

पारिवारिक और सांस्कृतिक चिंताएं: इन समूहों का मानना है कि इसके पीछे जनसांख्यिकीय (demographic) बदलाव या सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने का इरादा होता है।

2. आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

आरोप निराधार: आलोचकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कई विपक्षी दलों का कहना है कि ‘लव जिहाद’ जैसी कोई संगठित साजिश नहीं है। उनका मानना है कि इस शब्द का इस्तेमाल सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने और वयस्कों की अपनी मर्जी से की जाने वाली अंतरधार्मिक (interfaith) शादियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता: आलोचकों का तर्क है कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत हर वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

3. अदालतों और जांच एजेंसियों का रुख

एनआईए (NIA) और पुलिस जांच: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कुछ मामलों की जांच की है। जांच रिपोर्टों के अनुसार, व्यक्तिगत स्तर पर धोखाधड़ी या जबरन धर्मांतरण के मामले तो सामने आए हैं। लेकिन किसी केंद्रीयकृत या संगठित ‘लव जिहाद’ नेटवर्क या साजिश के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

संसद में बयान: भारत सरकार ने भी संसद में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया था कि मौजूदा कानूनों में ‘लव जिहाद’ जैसी कोई परिभाषा नहीं है और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ऐसा कोई संगठित मामला दर्ज नहीं किया गया है।

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4. राज्यों के कानून

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों ने ‘गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध कानून’ (Anti-Conversion Laws) पारित किए हैं। हालांकि, इन कानूनों में सीधे तौर पर ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं है। लेकिन इनमें शादी के लिए धोखाधड़ी, लालच या जबरन किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने और इसके लिए सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।

“हम ट्रंप को मार देंगे…”, ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा ईरान, इजरायली खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को दी चेतावनी

इजरायल ने हाल ही में अमेरिका को महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी साझा की है। जिसके अनुसार ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की एक नई साजिश तैयार कर रहा है। यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने अपने सूत्रों के हवाले से दी है।रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अ

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अमेरिकी एजेंसियों के आगे कैसे खुला SHO नागरा का राज:पंजाब में समधी पर मर्डर की FIR, फिर उसी केस में 4 लाख डॉलर की फिरौती; जानें पूरा मामला

अमेरिका में 4 लाख डॉलर यानी करीब साढ़े 3 करोड़ रुपए की फिरौती के मामले में पंजाब पुलिस के टांडा थाने के SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा को कुर्सी गंवानी पड़ी। होशियारपुर के SSP संदीप मलिक ने नागरा को लाइनहाजिर कर दिया। अब उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई है। जांच की निगरानी जालंधर रेंज के DIG डॉ. नवीन सिंगला करेंगे। हालांकि पंजाब में पुलिस के 153 थानों में से टांडा थाने के SHO का कथित कारनामे का अमेरिका में कैसे खुलासा हुआ?। अमेरिकी जांच एजेंसियों को इसका पता कैसे चला?, वह केस क्या है, जिसमें SHO नागरा पर मोटी फिरौती मांगने के आरोप लगे हैं, यह सवाल अभी भी बने हुए हैं। इन सब सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए, SHO के नाम का खुलासा कैसे हुआ
अमेरिका और कनाडा की जांच एजेंसियों ने जॉइंट तरीके से अमेरिका, कनाडा और यूरोप में गैंगस्टर नेटवर्क की जांच की। इसी दौरान जब कैलिफोर्निया में गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच के दौरान भारतीय पुलिस अधिकारी के नाम का जिक्र सामने आया। अमेरिकी एजेंसियों ने आरोप लगाया कि पंजाब के एक SHO ने गैंग नेटवर्क के साथ मिलकर एक अमेरिकी परिवार से 4 लाख डॉलर की कथित फिरौती मांगने की कोशिश की। जिसका नाम गुरिंदरजीत सिंह नागरा है। उसकी फोटो भी गैंगस्टरों के साथ जारी की गई। वह टांडा हत्याकांड, जिससे SHO के तार जोड़े जा रहे
15 जनवरी 2026 की शाम करीब 4 बजे होशियारपुर के टांडा के गांव मियाणी में तीन बाइक सवार हमलावरों ने AAP वर्कर और हार्डवेयर कारोबारी बलविंदर सिंह सतकरतार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। टांडा पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की। वारदात के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें इंस्टाग्राम अकाउंट gurlal_rudiana307 और jashal_gill0046 को टैग करते हुए हत्या की जिम्मेदारी ली गई। पोस्ट में लिखा गया कि बलविंदर सिंह की हत्या की जिम्मेदारी जशल गिल और गुरलाल रुदियाना लेते हैं। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर स्वराज उर्फ अभि और गुरमुख सिंह की पहचान की। दोनों उस समय पट्टी जेल में बंद थे। उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की गई। पुलिस ने कहा कि हत्या का अमेरिका से कनेक्शन है?
24 मई 2026 को तत्कालीन SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि पूछताछ में सामने आया है कि हत्या पारिवारिक रंजिश में करवाई गई। पुलिस के मुताबिक, अमेरिका में रह रहे रिटायर्ड ASI और मृतक के समधी चरनजीत सिंह ने अपनी बेटी के तलाक के मामले की रंजिश में शूटरों को सुपारी दिलवाई। पुलिस ने दावा किया कि जांच और पूछताछ में शूटरों के खातों में 1.80 लाख रुपए ट्रांसफर होने की जानकारी मिली। इसके बाद चरनजीत सिंह, उनके बेटे गुरप्रीत सिंह और बेटी को भी हत्या के मामले में नामजद कर लिया गया। फिर SHO नागरा विवाद में कैसे आए?
यहीं से मामले ने नया मोड़ लिया। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए चरनजीत सिंह और उनके परिवार को बाद में इसी केस में फंसाए रखने और राहत दिलाने के नाम पर 4 लाख डॉलर की कथित मांग की गई। आरोप है कि गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के नेटवर्क से जुड़े लोगों ने अमेरिका में रह रहे परिवार की जानकारी जुटाकर भारत में अपने कॉन्टैक्ट तक पहुंचाई और फिर इस केस का दबाव बनाकर पैसे मांगने की कोशिश की। अमेरिकी अटॉर्नी बिलाल ए. एसायली ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत के कुछ पुलिस अधिकारियों की भी भूमिका थी। आरोपों में तत्कालीन SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम भी शामिल है। आरोप- प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन मांगे गए पैसे
अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि 24 मई 2026 को SHO नागरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चरनजीत सिंह और उनके परिवार को हत्या की साजिश का आरोपी बताया। इसके अगले दिन कथित तौर पर परिवार के एक सदस्य से संपर्क कर 4 लाख डॉलर की मांग की गई। आरोप है कि रकम देने पर हत्या के मामले में राहत दिलाने का भरोसा दिया गया। गैंगस्टर नेटवर्क की क्या भूमिका बताई गई?
अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि गैंगस्टर नेटवर्क के सदस्य गुरलाल सिंह ने अमेरिका में रह रहे परिवार की जानकारी भारत भेजी। जिसे SHO गुरिंदरजीत तक पहुंचाया गया ताकि परिवार को फंसाया जा सके। इसके बाद भारत में मौजूद उनके रिश्तेदारों पर हत्या के केस में कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगने की कोशिश की गई। इसी कथित साजिश के आधार पर अमेरिका में केस दर्ज किया गया। पंजाब पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
अमेरिका में लगे आरोप सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने टांडा के SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा को लाइनहाजिर कर दिया। उनके खिलाफ एसपी (इन्वेस्टिगेशन) को विभागीय जांच सौंप दी गई है, जो अपनी रिपोर्ट डीआईजी जालंधर रेंज डॉ. नवीन सिंगला को सौंपेंगे। ये खबरें भी पढ़ें… गैंगस्टर लॉरेंस पर अमेरिका में हत्या का केस, चार्जशीट दायर:गोल्डी बराड़ पर 50 हजार डॉलर इनाम कनाडा में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर अमेरिका ने पहली बार चार्जशीट दाखिल की है। इसमें दावा है कि हत्या का आदेश भारतीय जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और फरार चल रहे गोल्डी बराड़ ने दिया था। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई भारतीय जेल में रहते हुए भी अपने अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चला रहा था। (पढ़ें पूरी खबर) अमेरिका के खुलासे के बाद होशियारपुर SHO हटाया, अटॉर्नी जनरल ने कहा था- 4 लाख डॉलर फिरौती मांगी होशियारपुर के पुलिस थाना टांडा के SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा को 4 लाख डॉलर की फिरौती केस में लाइन हाजिर कर दिया गया है। अमेरिका के अटॉर्नी जनरल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागरा का नाम लिया था। जनरल ने फिरौती के मामले में कई खुलासे किए। (पढ़ें पूरी खबर)

Lawrence Bishnoi US Charges: रंगदारी का मॉडल, डर को बनाया बिजनेस वेपन! समझिए कैसे दुनिया का सबसे खतरनाक सिंडिकेट बना बिश्नोई गैंग

सितंबर 2023 में कनाडा ने आरोप लगाया था कि कनाडा में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों का हाथ था। इस आरोप के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव बढ़ गया और दोनों देशों के बीच बड़ा राजनयिक विवाद खड़ा हो गया। अब करीब तीन साल बाद, अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) ने जेल में बंद भारतीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथी गोल्डी बराड़ पर इस हत्या का आरोप लगाया है। अमेरिका और कनाडा की एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम से संयुक्त जांच की थी। इस जांच के तहत भारत से जुड़े तीन संगठित अपराध गिरोहों के 37 लोगों पर रैकेटियरिंग, जबरन वसूली और ड्रग तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अपने बयान में कहा कि कुल 37 लोगों के खिलाफ तीन अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। इनमें दो ऐसे आरोपी भी शामिल हैं, जो भारत की जेल में बंद रहते हुए भी अपने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चला रहे थे। DOJ के मुताबिक, अमेरिका में गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों में से 11 को कैलिफोर्निया, एक को इंडियाना और एक को जॉर्जिया में पकड़ा गया है। इन सभी को मंगलवार को संघीय अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है।

इस मामले में आरोप तय होने के बाद, अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गोल्डी बराड़ (असल नाम सतविंदरजीत सिंह) की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर 50,000 डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है। साथ ही, अमेरिका लॉरेंस बिश्नोई को भारत से प्रत्यर्पित कराने की तैयारी भी कर रहा है। उस पर गंभीर संघीय रैकेटियरिंग के आरोप हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि वह जेल में रहते हुए अपने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को संचालित न कर सके।

कौन है लॉरेंस बिश्नोई?

लॉरेंस बिश्नोई को बिश्नोई गैंग का सरगना माना जाता है। फिलहाल वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। लॉरेंस बिश्नोई का जन्म किसी अपराधी परिवार में नहीं, बल्कि एक संपन्न परिवार में हुआ था। उसका जन्म 1993 में पंजाब के फाजिल्का जिले में हुआ। उसका परिवार इलाके के सबसे अमीर परिवारों में गिना जाता था और उनके पास कई एकड़ जमीन थी। परिवार एक बड़े बंगले में रहता था।

लॉरेंस के पिता पहले पुलिस विभाग में नौकरी करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने खेती और परिवार की जमीन की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ दी। परिवार के एक रिश्तेदार के अनुसार, लॉरेंस का नाम ब्रिटिश अधिकारी हेनरी मोंटगोमरी लॉरेंस के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने सनावर में प्रसिद्ध लॉरेंस स्कूल की स्थापना की थी। लॉरेंस ने कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की। वह आठवीं कक्षा से ही बाइक चलाता था और महंगे जूते पहनता था। उस समय उसके पास ऐसी कई सुविधाएं थीं, जो आम लोगों को आसानी से नहीं मिलती थीं।

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद लॉरेंस बिश्नोई आगे की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ चला गया। वहीं उसने छात्र राजनीति में कदम रखा। इसी दौरान उसका सामना विरोधी छात्र गुटों से हुआ और धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया की ओर बढ़ता चला गया। कई लोगों का मानना है कि अपने गांव में अमीर और प्रभावशाली परिवार से होने के बावजूद, चंडीगढ़ जैसे बड़े शहर में उसकी पहचान और परिवार की दौलत का ज्यादा असर नहीं था। इसी वजह से वह गैंग और अपराध के रास्ते पर चला गया।

उत्तर भारत में गैंगवार पर लंबे समय से नजर रखने वाले लेखक जुपिंदरजीत सिंह के मुताबिक, लॉरेंस अपने गांव में बेहद संपन्न परिवार से था। उसके परिवार के पास बड़ी जमीन थी और बचपन से उसे हर तरह की सुविधाएं मिली थीं। लेकिन चंडीगढ़ पहुंचने के बाद उसे एहसास हुआ कि वहां पहचान बनाने के लिए सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि पैसा, रुतबा और सामाजिक प्रभाव भी जरूरी है। माना जाता है कि इसी सोच ने उसे अपराध की दुनिया की ओर धकेल दिया।

गोल्डी बराड़ कौन है?

गोल्डी बराड़ का असली नाम सतविंदरजीत सिंह है। उसे लॉरेंस बिश्नोई का सबसे करीबी साथी माना जाता है। उसका जीवन भी काफी हद तक बिश्नोई जैसा रहा है। गोल्डी का जन्म 1994 में पंजाब में हुआ था। बताया जाता है कि कॉलेज के दौरान उसकी लॉरेंस बिश्नोई से गहरी दोस्ती हो गई थी। ‘ओपन’ मैगज़ीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिश्नोई और बराड़ 2012 से पहले ही हिंसक घटनाओं में शामिल हो चुके थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्र संघ चुनाव के दौरान एक विरोधी उम्मीदवार पर गोली चलाई गई थी। बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद चुनावी रंजिश में उस उम्मीदवार के एक रिश्तेदार की भी हत्या कर दी गई, जिसने चुनाव जीता था।

इसके बाद दोनों ने धीरे-धीरे अपना आपराधिक नेटवर्क बढ़ाया। उन पर जबरन वसूली, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और पंजाब समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में विरोधी गैंग के लोगों पर हमले कराने के आरोप लगते रहे हैं। बताया जाता है कि 2017 में गोल्डी बराड़ स्टूडेंट वीज़ा पर कनाडा चला गया। इसके बाद से उस पर कनाडा में रहते हुए बिश्नोई गैंग की गतिविधियों को संचालित करने के आरोप लगते रहे हैं।

बिश्नोई गैंग कैसे बना अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क?

समय के साथ लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई ने अपने गैंग का नेटवर्क लगातार बढ़ाया। आज इस गैंग की पहुंच पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों तक बताई जाती है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कनाडा, अमेरिका, थाईलैंड, फिलीपींस, मध्य एशिया, चीन और यूरोप के कुछ देशों में भी इसके नेटवर्क होने की बात कही जाती है।

रिपोर्टों के अनुसार, बिश्नोई गैंग के पास दुनिया भर में 700 से ज्यादा शूटर होने का दावा किया जाता है। जेल में बंद होने के बावजूद लॉरेंस पर आरोप है कि वह अपने गैंग की गतिविधियां संचालित करता रहता है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का कहना है कि लॉरेंस अपने मजबूत संपर्कों और अलग-अलग आपराधिक गठजोड़ का इस्तेमाल करता है। एजेंसी का यह भी आरोप है कि उसके कुछ संबंध खालिस्तान समर्थक संगठनों से भी रहे हैं। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लॉरेंस जानबूझकर जमानत की अर्जी नहीं देता और जेल के अंदर से अपने साथियों से “डब्बा कॉलिंग” और VoIP जैसी तकनीकों के जरिए संपर्क में रहता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई अपने गैंग को चलाने के लिए एक खास “बिजनेस मॉडल” अपनाता है। इसके तहत वह अलग-अलग राज्यों के जेल में बंद गैंगस्टरों से गठजोड़ करता है। इनमें उत्तर प्रदेश के धनंजय सिंह, हरियाणा के काला जठेड़ी, राजस्थान के रोहित गोदारा और दिल्ली के रोहित मोई व हाशिम बाबा जैसे नाम शामिल बताए जाते हैं। बिश्नोई गैंग की ताकत उसके सक्रिय सदस्यों की वजह से भी बढ़ी है। गोल्डी बराड़ के अलावा रोहित गोदारा को भी गैंग का अहम सदस्य माना जाता है। बताया जाता है कि वह लॉरेंस का करीबी है और ब्रिटेन (UK) से गैंग की गतिविधियां संभालता है। राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला रोहित गोदारा हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर मामलों समेत 35 से ज्यादा आपराधिक मामलों में आरोपी है।

हरदीप सिंह निज्जर से लेकर सलमान खान तक, किन लोगों को बनाया गया निशाना?

बिश्नोई गैंग का नाम कई चर्चित लोगों को निशाना बनाने के आरोपों में सामने आ चुका है। अमेरिका ने जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में गुरु नानक सिंह गुरुद्वारे के बाहर खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई पर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी आरोप पत्र के अनुसार, 18 जून 2023 या उससे पहले लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने निज्जर की हत्या का आदेश दिया था। आरोप है कि इस साजिश के लिए बिश्नोई ने अपने एक साथी को निज्जर की तस्वीर और उसके ठिकानों की जानकारी भी उपलब्ध कराई थी। इसके अलावा, साल 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या की जिम्मेदारी भी बिश्नोई गैंग ने ली थी। हत्या के कुछ घंटों बाद ही गोल्डी बराड़ ने फेसबुक पर पोस्ट कर इस वारदात की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था।

जब बीबीसी ने गोल्डी बराड़ से पूछा कि सिद्धू मूसे वाला को क्यों निशाना बनाया गया, तो उसने कहा कि मूसे वाला ने ऐसी गलतियां की थीं जिन्हें वह माफ नहीं कर सकता था। बराड़ का दावा था कि उनके पास उसे मारने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। करीब दो साल बाद, बिश्नोई गैंग का नाम मुंबई में हुए चर्चित नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में भी सामने आया। अक्टूबर 2024 में बांद्रा इलाके में उनके बेटे के ऑफिस के पास 66 वर्षीय बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

बाबा सिद्दीकी तीन बार विधायक रह चुके थे और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रहे थे। वे बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के करीबी दोस्त माने जाते थे। हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए बिश्नोई गैंग से जुड़े एक व्यक्ति की कथित फेसबुक पोस्ट में लिखा गया था कि उनकी किसी से निजी दुश्मनी नहीं है, लेकिन जो भी सलमान खान की मदद करेगा, उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

लारेंस-गोल्डी गैंग पर FBI का पहली बार बड़ा एक्शन:अमेरिका-कनाडा समेत कई देशों में 50 जगह रेड, 24 अरेस्ट, ड्रग-आर्म्स बरामद

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने पहली बार गैंगस्टर लॉरेंस, गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया पर बड़ा एक्शन लिया है। मंगलवार को अमेरिका, कनाडा और यूरोप में संयुक्त एक्शन के दौरान भारत से जुड़े गैंगस्टर्स के 24 साथियों को गिरफ्तार किया गया। जबकि 37 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं, गैंगस्टर लॉरेंस और गोल्डी बराड़ को खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड का आरोपी बनाया गया। आरोप है कि दोनों ने मिलकर साजिश रची थी। दावा है कि आरोपियों में रोहित गोदारा और अन्य सहयोगियों के नाम भी शामिल है। आरोप पत्र में बताया गया कि लॉरेंस भारत में जेल में रहते हुए भी अपने नेटवर्क को चलाता है और उसके सहयोगी भारत अमेरिका, कनाडा तथा यूरोप में टारगेट किलिंग और ड्रग तस्करी को अंजाम देते हैं। यूएस फेडरल सरकार के अधिकारियों ने कहा कि वो जल्द ही भारतीय सरकार से लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और एक्टिव पुलिस चीफ पुंदरप्रीत सिंह के औपचारिक प्रत्यर्पण की मांग करेंगे। इसके अलावा एफबीआई ने गोल्डी बराड़ पर 50 हजार डॉलर का इनाम घोषित किया है। FBI ने और क्या खुलासे किए…. 50 जगह रेड, ड्रग्स-हथियार सीज अमेरिकी फेडरल अथॉरिटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अहम खुलासे किए। बताया कि वे इंडिया बेस्ड ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप के खिलाफ कई सालों से इंटरकॉन्टिनेंटल जांच कर रहे थे। इसके तहत उन्होंने कम से कम 2 दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां यूएस, कनाडा और यूरोप में हुई हैं। आरोपियों के खिलाफ कम से कम 50 सर्च वारंट लागू किए गए थे, जिसके बाद हजार किलो नारकोटिक्स ड्रग्स और दर्जनों हथियार सीज किए गए हैं। गैंगस्टर लॉरेंस जेल से चला रहा गैंग यूएस फेडरल सरकार और लॉस एंजेल्स के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी जनरल के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पूरे इंडियन बेस्ड क्रिमिनल ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क को इंडिया की जेल में बैठा गैंगस्टर लॉरेंस हेड कर रहा है। नॉर्थ अमेरिका में इसके ऑपरेशन गोल्डी बराड़ लीड कर रहा था और यूरोप में सारा काम रोहित गोदारा द्वारा संभाला जा रहा था। माना जाता है कि इन तीनों गैंग लीडरों के बीच अब फूट पड़ गई है और ये एक-दूसरे के विरोधी बन चुके हैं, लेकिन यूएस अथॉरिटीज का कहना है कि ये तीनों अब तक मिलकर काम करते आए हैं।

बकरियां बचाने पर पंजाबी वकील पर अमेरिका में क्रिमिनल केस:कैलिफोर्निया में 2 को फार्म से निकाला, 6 साल सजा हो सकती; लाइसेंस पर भी खतरा

पंजाब के एक युवक पर कैलिफोर्निया में दो बकरियों की जान बचाने के मामले में क्रिमिनल केस दर्ज कर दिया गया। जल्द मामले में कोर्ट ट्रायल शुरू होने जा रहा है। आरोपी की पहचान तजिंदर उर्फ ताज उप्पल के रूप में हुई है, जो कैलिफोर्निया में वकील हैं और पशु अधिकारों से जुड़े अभियानों में एक्टिव रहते हैं। केस के बाद अब उनकी नौकरी और वकील के लाइसेंस पर भी खतरा मंडरा रहा है। घटना 27 मई 2025 को स्ट्रैटफोर्ड इलाके की है। यहां वेरा गोट डेयरी से कुछ पशु-अधिकार कार्यकर्ताओं ने दो बकरी के बच्चों, फोबी और सीलिया को बाहर निकाला था। फार्म पर उनकी हालत ठीक नहीं थी। बाहर लाने के बाद डॉक्टरों ने जांच में उन्हें निमोनिया और आंखों की बीमारी से ग्रस्त पाया। इलाज के बाद दोनों बकरियां ठीक हो गईं, लेकिन इसके बाद बकरी फार्म चलाने वाली फर्म ने उप्पल सहित 4 लोगों के खिलाफ क्रिमिनल केस कर दिया। पढ़िए क्या है पूरा मामला… बकरियां चुराने, बिना परमिशन प्लाट में घुसने के आरोप पंजाबी मूल के ताज उप्पल सिख वकील और एक्टिविस्ट हैं। वह पशु अधिकारों को लेकर लंबे समय से सक्रिय हैं। किंग्स काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ने इन पर ग्रैंड थेफ्ट ऑफ लाइवस्टॉक, साजिश और बिना अनुमति जमीन में घुसने जैसे आरोप लगाए हैं। 6 साल तक की सजा हो सकती पंजाबी समुदाय के लोगों का मानना है कि आरोप गंभीर हैं और अगर अदालत में ये साबित हो जाते हैं तो ताज उप्पल को करीब 6 साल तक की सजा हो सकती है। सभी आरोपियों ने कहा कि वे निर्दोष हैं और वे मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं। बकरी फार्म ने इसे कानून के खिलाफ बताया केस करने वाले पक्ष ने कहा कि किसी प्राइवेट फार्म से जानवरों को बिना अनुमति ले जाना कानून के खिलाफ है। पुलिस और प्रशासन ने इस घटना को बचाव अभियान नहीं, बल्कि चोरी और साजिश से जुड़ा मामला माना है। यही वजह है कि अब यह केस सिर्फ दो बकरियों की कहानी नहीं रहा, बल्कि पशु अधिकार, बकरी फार्मिंग, प्राइवेट प्रापर्टी और नैतिक जिम्मेदारी के बीच टकराव बन गया है। उप्पल बोले- बकरियां मर रही थीं, बचाने गए ताज उप्पल की संस्था डायरेक्ट एक्शन एवरीवेयर का कहना है कि उन्होंने फार्म पर जानवरों की हालत बहुत खराब देखी थी। वहां हजारों बकरियों को बंद रखा गया था। कई जगह मृत जानवरों के ढेर दिखाई दिए। माएं और उनके बच्चे अलग-अलग रखे जा रहे थे। इसी वजह से कार्यकर्ताओं ने मजबूरी में कदम उठाया। उनका तर्क है कि जब प्रशासन या फार्म प्रबंधन ने हालात सुधारने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, तब जानवरों को बचाना इंसानियत के दायरे में आने वाला काम था। राइट टू रेस्क्यू की बहस शुरू हुई यह मामला 27 मई 2025 की घटना से शुरू हुआ। 2026 में जांच के बाद पुलिस ने क्रिमिनल केस किया है और कोर्ट ट्रायल की तैयारी है। कोर्ट ट्रायल और केस होने से मामला एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर राइट टू रेस्क्यू की बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे इंसानियत की जीत बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसे कानून तोड़ने वाला कदम बता रहे हैं। लोगों का मानना है कि ताज उप्पल और उनके साथियों का यह मामला इमोशनल के साथ कानूनी भी है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस पर बहस को और छेड़ेगा।

Ketan Agarwal Murder Case: केतन की हत्या करने से पहले सिया ने चेतन से कर ली थी शादी! WhatsApp चैट से हुआ खुलासा

Ketan Agarwal Murder Case: लोनावला के पास ऐतिहासिक लोहागढ़ किले से कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर धक्का देकर नीचे गिराने और उनकी मौत के मामले ने पूरे देश को हिला दिया था। अब इस केस में एक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि केतन की मंगेतर और इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल कथित तौर पर पहले से शादीशुदा थीं।

News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का दावा है कि आरोपी सिया गोयल और उनके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने चार महीने पहले अपने परिवारों से छिपाकर गुपचुप तरीके से शादी कर ली थी।

खबरों के मुताबिक, उनके फोन से मिली WhatsApp चैट से यह बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन चैट ने इस गुपचुप शादी का राज खोल दिया है और पूरे मामले को एक नया मोड़ दिया है।

आरोप है कि 18 जून को केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले से नीचे धकेलकर मार डाला गया था। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है।

WhatsApp चैट और इंटरनेट हिस्ट्री से कथित तौर पर क्या पता चला?

News18 के मुताबिक, पुलिस ने आरोपियों के फोन से मिले कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की जांच की। पिछले छह-सात महीनों के डिजिटल डेटा की जांच के दौरान, जांच करने वालों को पता चला कि सिया और चेतन ने कथित तौर पर चार महीने पहले ही शादी कर ली थी, लेकिन परिवारों के डर से इसे छिपाकर रखा था।

पुलिस को शक है कि इसी गुपचुप शादी के बाद केतन को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची गई थी।

‘मुझमें हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ’: सिया ने कथित तौर पर चेतन से क्या कहा?

पुलिस का कहना है कि केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश कथित तौर पर 14 जून को ही की गई थी, लेकिन सिया आखिरी पल में घबरा गई और कोशिश नाकाम रही। इसके बाद, उसने कथित तौर पर चेतन को मैसेज किया, “मुझमें यह करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ – हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से नीचे धकेल देंगे।” जांचकर्ताओं का कहना है कि दोनों ने कथित तौर पर 18 जून को मिलकर हत्या को अंजाम दिया।

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Gurugram: शादी के 3 महीने बाद पत्नी का कत्ल! प्रेमिका के साथ मिलकर पति ने खेला खूनी खेल

दिल्ली-NCR से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। गुरुग्राम में एक 25 वर्षीय युवक पर अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी है। पुलिस का कहना है कि इस वारदात में उसकी तीन साल पुरानी प्रेमिका ने भी उसका साथ दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मानेसर निवासी अंकित ने झज्जर की रहने वाली अपनी 38 वर्षीय प्रेमिका रजनी देवी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। पुलिस का आरोप है कि दोनों अपने रिश्ते में किसी तरह की रुकावट नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया।ॉ

फरवरी में हुई थी शादी

यह मामला 22 मई को सामने आया, जब मृतका की मां ने मानेसर थाना में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी 22 वर्षीय बेटी की शादी इसी साल फरवरी में अंकित से हुई थी। मृतका की मां ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी 21 मई को अचानक लापता हो गई थी। परिवार ने उसकी काफी तलाश की और ससुराल पक्ष से भी जानकारी ली, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शक होने पर उन्होंने अपने दामाद और उसके परिवार के खिलाफ मानेसर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।

प्रेमिका से साथ मिलकर रचि साजिश

रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने 22 मई को मानेसर स्थित एक कमरे से महिला का शव बरामद किया। शुरुआती जांच में पता चला कि महिला की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी और मामले में संबंधित धाराएं भी जोड़ दीं।जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अंकित और उसकी प्रेमिका रजनी देवी को गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, अंकित मानेसर में तंबाकू की दुकान चलाता था, जबकि रजनी उसी इलाके के एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी।

पुलिस पूछताछ में पता चला कि दोनों पिछले तीन साल से प्रेम संबंध में थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या की साजिश रजनी के किराए के कमरे में बनाई गई थी। आरोप है कि वारदात वाले दिन अंकित अपनी पत्नी को वहां लेकर गया, जहां उसने रजनी के साथ मिलकर उसे गोली मार दी। रिपोर्ट के अनुसार, हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार वारदात से करीब दो महीने पहले उत्तर प्रदेश से खरीदा गया था। पुलिस को शक है कि इस हथियार को पहले से ही हत्या की योजना के तहत खरीदा गया था।

गिरफ्तार हुए आरोपी 

पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद अंकित और रजनी देवी पहले हरिद्वार भाग गए और वहां से नेपाल चले गए। 30 जून को भारत लौटने पर क्राइम ब्रांच की टीम ने दोनों को मानेसर से गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस उनसे लगातार पूछताछ कर रही है। साथ ही हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद करने और मामले से जुड़े अन्य सबूत जुटाने की कोशिश भी जारी है।