Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस साल यह त्योहार खास तौर पर शुभ माना जा रहा है क्योंकि एक ही दिन सात अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। ग्रहों और नक्षत्रों का ऐसा मेल होने की उम्मीद है, जिसका परिणाम बहुत शुभ होगा। इससे भी जरूरी बात यह है कि भद्रा त्योहार पर असर नहीं डालेगी, जिससे बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र धागा बांधने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं

पंचांग के अनुसार, भद्रा गुरुवार, 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 9:27 बजे खत्म होगी। इसलिए, 28 अगस्त को भद्रा नहीं होगी, जिससे परिवार बिना इस रोक के रक्षाबंधन मना सकेंगे। भद्रा को राखी बांधने के लिए अशुभ समय माना जाता है। हालांकि, इस साल यह त्योहार से एक दिन पहले खत्म हो जाएगी।

रक्षाबंधन पर सात शुभ योग

रक्षाबंधन 2026 को खास बनाने के लिए कई अच्छे ज्योतिषीय संयोग बनने की उम्मीद है। इनमें शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ दूसरे शुभ ग्रहों की स्थिति शामिल है।

शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा। ज्योतिष में, यह नक्षत्र वरुण देव से जुड़ा है और राहु इसका स्वामी है। इस दौरान की जाने वाली पूजा, दान और दूसरे आध्यात्मिक कामों का खास महत्व माना जाता है।

कर्क राशि में बृहस्पति का होना भी अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, भद्रा का न होना भी उन वजहों में गिना जा रहा है जो इस दिन को रक्षाबंधन की रस्में करने के लिए ज़्यादा सही बनाती हैं।

सावन पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?

पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9:09 बजे शुरू होने और 28 अगस्त को सुबह करीब 9:48 बजे खत्म होने की उम्मीद है। पूर्णिमा 28 अगस्त को सूर्योदय के समय रहेगी, इसलिए उदया तिथि की परंपरा के अनुसार उसी दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पूर्णिमा का व्रत करने वाले श्रद्धालु 27 अगस्त को उपवास कर सकते हैं, जबकि बहनें 28 अगस्त को राखी बांध सकती हैं।

राखी बांधने का सबसे अच्छा समय

सुबह का मुहूर्त : सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक

शुभ चौघड़िया के आधार पर एक और शुभ समय इस समय रहने की उम्मीद है:

शुभ चौघड़िया : सुबह 11:45 बजे से दोपहर 1:19 बजे तक

राहु काल में राखी बांधने से बचें

राहु काल सुबह 10:11 बजे से 11:45 बजे तक रहने की उम्मीद है। ज्योतिष के हिसाब से समय मानने वाले परिवार इस दौरान राखी बांधने से बच सकते हैं।

पंचांग का समय शहर और कैलेंडर के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए परिवार यह रस्म करने से पहले लोकल मुहूर्त देख सकते हैं।

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Kriti Sanon: क्या वे इसे ईद के एड पर पहनेंगी? रक्षाबंधन के विज्ञापन में ब्रालेट टॉप पहने दिखीं कृति सेनन पर भड़के लोग

Kriti Sanon Rakshabandhan ad: कृति सेनन को रक्षाबंधन के ज्वेलरी विज्ञापन में एक फ्यूजन आउटफिट (जिसमें ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी) पहनने के बाद ऑनलाइन काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। जहां कुछ यूज़र्स ने इस लुक को त्योहार के कैंपेन के लिए गलत बताया, वहीं दूसरों ने एक्ट्रेस का बचाव करते हुए कहा कि महिलाओं को उनके पहनावे के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए।

विज्ञापन में कृति को एक कुत्ते को राखी बांधते हुए भी दिखाया गया है, जो उन पर भौंकता है। त्योहार में पालतू जानवर को शामिल करने का यह आइडिया कुछ लोगों को पसंद नहीं आया, जबकि अन्य लोगों ने उनके आउटफिट पर ध्यान दिया और सवाल उठाया कि क्या यह रक्षाबंधन के लिए सही था।

कृति सेनन को क्यों ट्रोल किया जा रहा है?

ऐड के ऑनलाइन शेयर होने के बाद कृति की ड्रेस चर्चा का मुख्य विषय बन गई। कुछ यूजर्स को लगा कि रक्षाबंधन से जुड़े कैंपेन के लिए उनका ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज कुछ ज्यादा ही रिवीलिंग था, जबकि दूसरों का कहना था कि यह आलोचना असल में महिला के कपड़ों पर रोक-टोक करने जैसा है।

एक और व्यक्ति ने ‘आदिपुरुष’ की एक्ट्रेस के खिलाफ शिकायत की मांग की। उन्होंने कहा, “भाई-बहन के त्योहार राखी को गलत तरीके से दिखाने और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए @kritisanon के खिलाफ BNS की धारा 299 के तहत FIR दर्ज की जानी चाहिए—इसमें विजुअल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने वाले जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्यों के लिए 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।”

एक और यूजर ने कहा, “लड़के ने पूरे पारंपरिक कपड़े क्यों पहने हैं?? उसे भी जिम वेस्ट पहननी चाहिए थी। लोग मौके के हिसाब से कपड़े पहनते हैं, यह तो आम समझ की बात है। यह रक्षाबंधन है किसी की प्राइवेट पार्टी नहीं।” कुछ आलोचनाओं में धर्म का मुद्दा भी उठाया गया। यूजर्स ने सवाल किया कि क्या ईद या क्रिसमस जैसे त्योहारों पर भी ऐसे कपड़ों को स्वीकार किया जाता।

कृति सेनन के फैन्स उनके समर्थन में आए

हर कोई इस आलोचना से सहमत नहीं था। कई यूजर्स कृति के बचाव में भी उतरे और कहा कि उनकी ड्रेस पारंपरिक त्योहारों के कपड़ों का एक आधुनिक रूप थी, न कि कुछ अनुचित। एक यूजर ने लिखा, “हर कोई कृति सेनन को इस GIVA ऐड के लिए ट्रोल कर रहा है और कह रहा है कि उन्होंने ‘बिकिनी’ पहनी है। क्या सच में? नहीं। उन्होंने कुछ भी गलत या अश्लील नहीं पहना है। हो सकता है कि उनका पहनावा ‘शालीनता’ की आपकी परिभाषा में फिट न बैठता हो। मैं भी अपने भाई के सामने ऐसे कपड़े पहन सकती हूं। जो लोग फिल्मों में उनके बिकिनी सीन पर तालियां बजाते थे, वही अब उनके कपड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। औरतों को हर हाल में जज किया जाता है। ट्रोलर्स, अपनी जिंदगी पर ध्यान दो।”

एक और यूजर ने कहा, “मजेदार बात है कि जब औरतों के कपड़ों की बात आती है, तो लोग अचानक शालीनता के ठेकेदार बन जाते हैं। अगर आपको उनका पहनावा पसंद नहीं है, तो आगे बढ़ जाइए। किसी और की पसंद पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है।”

तीसरे यूजर ने लिखा, “कृति सेनन के राखी ऐड पर क्लीवेज दिखाने और कुत्ते को राखी बांधने को लेकर हंगामा मच गया। आलोचकों ने त्योहार के दौरान उनके ‘अश्लील’ कपड़ों पर सवाल उठाए और पालतू कुत्ते को राखी बांधने पर आपत्ति जताई, इसे गलत बताया!! ये तो ‘मोरल पुलिस’ वाली बात हो गई!”

रक्षा बंधन 2026, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। यह हिंदू त्योहार भाई-बहन के रिश्ते का जश्न मनाता है। इस मौके पर बहनें पारंपरिक रूप से अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सलामती की दुआ करती हैं, जबकि भाई अक्सर बदले में तोहफे देते हैं।

कृति सेनन की फिल्में

कृति सेनन को हाल ही में होमी अदजानिया की फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था, जो 19 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फ़िल्म में उनके साथ शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना भी हैं और यह 14 अगस्त से नेटफ़्लिक्स पर स्ट्रीम होने लगी है।

UP News: सरकारी स्कूलों के रसोइयों की सैलरी में ₹1000 की बढ़ोतरी, 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिड-डे मील’ योजना के तहत काम करने वाली रसोइयों के हित में चार अहम ऐलान किया है। योगी सरकार ने दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव लेने की अनिवार्य दो साल की उम्र-अंतर की शर्त खत्म कर दी है। यानी अब दोनों बच्चों के बीच उम्र का अंतर दो साल से कम होने पर भी पात्र महिला कर्मचारी मैटरनिटी लीव ले सकेंगी। इसके अलावा करीब 3.5 लाख रसोइयों का मासिक मानदेय सितंबर से 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जो साल में 10 महीने मिलेगा।

साथ ही योगी सरकार ने 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राज्य के मिड-डे मील प्रोग्राम के तहत काम करने वाले 3.54 लाख रसोइयों के लिए कैशलेस मेडिकल कार्ड शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने इस पहल को उनकी सेहत, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि स्कूल की रसोई में खाना बनाना सिर्फ भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, क्योंकि यह लाखों बच्चों की सेहत, शिक्षा और भविष्य में योगदान देता है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 3.54 लाख मिड-डे मील रसोइयों के लिए रविवार को कैशलेस मेडिकल कार्ड वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

सीएम योगी ने रविवार को X पर लिखा, “रक्षाबंधन के पहले प्रदेश के रसोइयों हेतु चार उपहार…1- मानदेय में वृद्धि…2- दुर्घटना होने पर परिवार को ₹2 लाख की सहायता…3- प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस उपचार… 4- साड़ी के लिए धनराशि बढ़ाकर ₹1,000।” सीएम योगी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “रसोइयों का मानदेय ₹1,000 से बढ़ाकर अब ₹3,000 कर दिया गया है..।”

मुख्यमंत्री ने ‘पीएम पोषण योजना’ के तहत रसोइयों के तौर पर काम करने वाली महिलाओं की तारीफ की। सीएम योगी ने उन्हें प्रोग्राम की ‘बुनियादी ताकत’ बताते हुए स्कूली बच्चों को खाना खिलाने में उनके योगदान का जिक्र किया।

उनके ट्वीट में लिखा, “हमारी रसोइया माताएं और बहनें, जो अपनी मेहनत और ममता से इस पवित्र काम को पूरा करती हैं, वे पीएम पोषण की असली बुनियादी ताकत हैं।” मंत्रिमंडल ने बुलंदशहर में नए बस अड्डों और अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा मार्ग को चार लेन करने की संशोधित परियोजना को भी मंजूरी दी है।

जर्जर स्कूलों के वीडियो पर CM योगी का SP पर हमला

योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सोशल मीडिया पर प्रदेश के जर्जर स्कूल भवनों के वीडियो साझा कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इनमें से कई इमारतें 2017 से पहले की हैं, जब प्रदेश में सपा की सरकार थी।

लखनऊ में आयोजित ‘मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पुराने और जर्जर स्कूल भवनों को चिन्हित कर उन्हें नए भवनों से बदलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पुराने भवनों की तस्वीरें और वीडियो दिखाकर मौजूदा सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने कई पुराने और खराब हो चुके स्कूल भवनों को नए भवनों से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि जो भवन अभी भी जर्जर स्थिति में हैं, उनकी पहचान की जा रही है और उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था दोनों की स्थिति खराब थी। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार में गरीबों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी हुई तथा प्रदेश में दंगे और अव्यवस्था आम बात थी।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। सीएम योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षित भवन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है।

3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM Poshan Yojana) के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में काम कर रहे करीब 3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई बड़े ऐलान भी किए। सीएम योगी ने कहा कि मिड-डे मील तैयार करने वाले रसोइये बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरकार उनके हितों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल स्कूल भवनों तक सीमित नहीं है। बल्कि छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ उनसे जुड़े कर्मचारियों और रसोइयों के कल्याण पर भी सरकार का ध्यान है।

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उद्योगपति गौतम अडानी ने कर्नाटक CM डीके शिवकुमार से की मुलाकात, टनल रोड प्रोजेक्ट में Adani Group बनी है सबसे बड़ी दावेदार

Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और अडानी ग्रुप की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सामने आए वीडियो में शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, अडानी आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर की यात्रा के बाद एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।

टनल रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी है मुलाकात?

गौतम अडानी और सीएम डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई फाइनेंशियल बिड्स से पता चलता है कि AEL ने दोनों पैकेजों में L1 रही थी यानी सबसे कम बोली लगाई थी।

राज्य सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज ने करीब 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को राज्य सरकार को फाइल भेजी थी। उसी दिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।

अभी नहीं मिला है ठेका

हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज के सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अभी तक उसे आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का ठेका नहीं दिया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली विशेष उद्देश्य कंपनी (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण अब कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो गई है।

शिवकुमार के लिए अहम है ये प्रोजेक्ट

बेंगलुरु का यह टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल माना जाता है। बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इस प्रोजेक्ट का लगातार समर्थन किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से विरोध भी सामने आया है। आलोचकों ने इसकी लागत, ट्रैफिक पर प्रभाव और बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

30 साल तक निजी कंपनी को मिलेगा संचालन अधिकार

प्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। इस मॉडल के तहत कर्नाटक सरकार प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से मुमकिन बनाने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding)’ देगी। सरकार प्रोजेक्ट की लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी। जबकि प्राइवेट कंपनी लगभग 30 साल की अवधि में कंसेशन व्यवस्था के जरिए अपना निवेश वसूल करेगी।

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में मौजूदगी

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से ही मजूत बिजनेस मौजूदगी है। ग्रुप की कंपनियों ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा, अडानी ग्रुप उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।

राहुल गांधी के बयानों से बढ़ी नजर

अडानी की शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। सरकार पर उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी कई अडानी से जुड़े प्रोजेक्टों, जिनमें ग्रेट निकोबार परियोजना भी शामिल है, लेकिन आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।

ऐसे में अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में उनकी कंपनी के L1 bidder बनने का घटनाक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खासा ध्यान खींच रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा हुई या नहीं।

गुजरात में जैन मंदिर पहुंचे थे अडानी

इस मुलाकात से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ पहुंचे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी थीं। अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि उन्हें महुडी जैन तीर्थ के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए सभी के शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा।

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₹16 करोड़ में बिकी गांधीजी की पांडुलिपि फिर नेशनल गांधी म्यूजियम ने की ना बेचने की अपील, कहा- यह निजी संपत्ति नहीं, देश की धरोहर

Gandhi Museum: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कई पत्रों, पांडुलिपियों और निजी वस्तुओं की नीलामी के कुछ दिन बाद नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा कि ऐसी वस्तुएं केवल निजी संपत्ति नहीं हैं। बल्कि भारत की साझा विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने इन वस्तुओं को अपने पास रखने वालों से इन्हें संरक्षण के लिए संस्थान को सौंपने की अपील की है। 19 अगस्त को ‘सैफरनार्ट’ (Saffronart) की नीलामी में कुल 86 चीजें नीलाम की गईं। इनमें गांधीजी के हाथ से लिखे 688 विचारों का संग्रह भी शामिल था।

‘ए थॉट फॉर द डे’ शीर्षक वाला यह संग्रह गांधी ने अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को करीब दो वर्षों की अवधि में लिखा था। इसे 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया, जो नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए विश्व रिकॉर्ड है। अन्नामलाई ने शनिवार को जारी एक बयान में इस खबर को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया।

उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “कुछ दिन पहले महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए कुछ पत्रों और उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखा गया था। खबरों के अनुसार, इससे मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।”

कई किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं गांधी जी के लेटर

नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा कि गांधी के कई पत्र पहले ही किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं। लेकिन मूल पत्रों और उनके हस्तलिखित दस्तावेजों का संरक्षण करना हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। करीब दो साल की अवधि में उनके करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखे गए इस संग्रह को 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया। यह नीलामी में बिकने वाले किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है।

शनिवार को जारी एक बयान में अन्नामलाई ने इस खबर को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले महात्मा गांधी के लिखे कुछ पत्र और उनके इस्तेमाल की कुछ चीजें अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखी गई थीं। खबर है कि नीलामी से मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक मिले। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।”

गांधी म्यूज़ियम के डायरेक्टर ने कहा कि भले ही गांधीजी के कई पत्र पहले ही किताबों में छप चुके हैं। किन असली पत्रों और उनके हाथ से लिखी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना हमारी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज जिनके पास ऐसे पत्र और सामान हैं, वे मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी के लोग हैं। शायद उनके ऐतिहासिक महत्व को पूरी तरह नहीं समझते हैं।

गांधीजी के सामान वापस करने की मांग

अन्नामलाई ने उन सभी लोगों से अपील की है (जिनके पास गांधीजी के पत्र, हाथ से लिखी पांडुलिपियां या उनके इस्तेमाल की गई चीजें हैं) कि वे उन्हें बेचें या नीलाम न करें। बल्कि आगे आएं और उन्हें दिल्ली के नेशनल गांधी म्यूजियम को सौंप दें, ताकि हमारी राष्ट्रीय धरोहर की ये कीमती चीजें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जा सकें।

86 सामान की हुई नीलामी

‘गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी हिंगोरानी’ नाम की इस नीलामी में गांधीजी से जुड़ी 86 चीजें शामिल थीं। नीलाम करने वाली संस्था के अनुसार, सबसे ज्यादा कीमत पर बिकी पांडुलिपि में सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता निवारण, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य, स्वराज, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा की आवाज़, अनासक्ति और ईश्वर की खोज जैसे विषयों पर बात की गई है।

अन्य चीजों में ईश्वर और भगवद गीता पर गांधीजी के विचारों से जुड़ी तीन पांडुलिपियों और पत्रों का एक सेट शामिल था। इसका शीर्षक “मैसेज ऑन गॉड” (ईश्वर पर संदेश) था। यह 1.68 करोड़ रुपये में बिका।

नीलामी में शामिल निजी चीजों में गांधीजी का ‘पेटी चरखा’ (बॉक्स वाला चरखा) और सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र भी शामिल थे। इनकी अनुमानित कीमत 50-70 लाख रुपये थी। यह 1.02 करोड़ रुपये में बिका।

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गांधीजी की लिखते हुए एक हस्ताक्षरित तस्वीर 78 लाख रुपये में बिकी और आर्थिक आजादी पर गांधीजी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बिका। हिंगोरानी परिवार द्वारा पीढ़ियों से सहेजकर रखे गए इस संग्रह से हिंगोरानी के साथ गांधीजी के लंबे समय के रिश्ते के जरिए उनके बारे में एक निजी नजरिया मिलता है। हालांकि खरीदार की पहचान उजागर नहीं की गई है।

Raksha Bandhan Gift: रक्षाबंधन पर यूपी की महिलाओं को सीएम योगी का बड़ा तोहफा, एक साथी के साथ दो दिन बस में फ्री सफर कर सकेंगी महिलाएं

Raksha Bandhan Gift: उत्तर प्रदेश के मु्ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षाबंधन पर महिलाओं और उनके एक सहयात्री को सरकारी बसों में फ्री यात्रा की सौगात दी है। खास बात यह है कि यह फ्री सेवा एक नहीं बल्कि दो दिन तक जारी रहेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (23 अगस्त) को कहा कि रक्षाबंधन पर 27 अगस्त की रात से 28 अगस्त की रात तक राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में महिला यात्री एक सहयोगी के साथ मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। आपको बता दें कि इस साल रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

सीएम योगी ने इस संबंध में परिवहन विभाग, पुलिस और प्रशासन को मिलकर व्यापक इंतजाम करने के निर्देश दिए, ताकि महिलाएं त्योहार के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से अपने घर पहुंच सकें। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ को सक्रिय रखने और प्रमुख रूट्स पर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिलों में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

बैठक में उन्होंने प्रदेश में जलभराव, बाढ़ की स्थिति, रक्षाबंधन पर महिला यात्रियों के लिए परिवहन व्यवस्था, चीनी की उपलब्धता, आगामी गन्ना पेराई सत्र तथा स्कूलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के मद्देनजर बस चालकों की जांच और निगरानी के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे का सेवन करने वाले किसी भी चालक को बस चलाने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने कहा कि ऑटो और टैक्सी चालकों का भी सत्यापन सुनिश्चित करते हुए महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाएं।

सीएम आदित्यनाथ ने बैठक में प्रदेश के विभिन्न मंडलों और जिलों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, सहारनपुर और गाजियाबाद के मण्डलायुक्तों तथा नोएडा प्राधिकरण से जलभराव वाले क्षेत्रों और उसके कारणों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि कहीं भी अनावश्यक जलभराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निचले क्षेत्रों को चिह्नित कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पम्पिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं।

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मुख्यमंत्री ने सभी मेयर, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों को स्थानीय पार्षदों के साथ फील्ड में जाकर जलभराव और सफाई व्यवस्था देखने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि नालों पर जहां भी अतिक्रमण है, उसे चिह्नित कर तत्काल हटाया जाए। सीएम योगी ने यूपी के 19 बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा भी की। उन्होंने बलिया, गोण्डा, बहराइच, बाराबंकी, फर्रुखाबाद और लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली।

राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

Ayodhya Rakhi Mata Shanta: अयोध्या में भगवान श्रीराम की बड़ी बहन माता शांता की ओर से श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के कई विशिष्ट दिग्गजों को विशेष राखियां भेजी गई हैं। इन राखियों को केले के तने, रेशमी धागे और भागलपुर की कला का उपयोग करके तैयार किया गया है।                                

राखी की मुख्य विशेषताएं

  • विशिष्ट जनों को प्रेषित : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथसिंह, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ को यह रक्षा सूत्र भेजा गया है।
  • वैदिक मंत्रोच्चार: साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने इन सभी राखियों को वैदिक मंत्रों के साथ अभिमंत्रित किया है।
  • खास सामग्री : इस बार की राखियां मुख्य रूप से केले के तने के धागे, रेशम, मखाने और भागलपुरी पेंटिंग की कला का उपयोग करके बनाई गई हैं, जिन्हें मधुबनी की अंजलि सिंह के सहयोग से तैयार किया गया है।
  • भगवान राम को अर्पण : देश के प्रमुख नेताओं और गणमान्य लोगों तक रक्षा सूत्र पहुंचाने के बाद, माता शांता की ओर से भेजी गई यह पावन राखी अयोध्या में भगवान श्रीरामलला को भी अर्पित की गईं। 

क्या है धार्मिक मान्यता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता शांता राजा दशरथ की पुत्री और भगवान श्रीराम की बड़ी बहन थीं, जिनका विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ हुआ था। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का निर्वाह करते हुए हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर माता शांता के धाम/आश्रम की तरफ से यह रक्षा सूत्र भेजने की परंपरा निभाई जाती है। 

 

श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने बताया कि साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इन विशेष राखियों को अभिमंत्रित किया है। प्राचीन परंपरा और भ्रातृ-स्नेह को जीवंत रखने के लिए संस्थान हर वर्ष यह रक्षा सूत्र भेजता है।

अराजक या एंग्री यंग मैन? राहुल गांधी- भारतीय राजनीति का सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष

अराजक या एंग्री यंग मैन? राहुल गांधी- भारतीय राजनीति का सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष

Rahul Gandhi Anarchist or Angry Young Man?:

Rahul Gandhi Anarchist or Angry Young Man?: राहुल गांधी को समझना आसान नहीं है। पिछले 15 वर्षों में उनकी राजनीति ने कई चेहरे देखे हैं—‘पप्पूसे लेकर भारत जोड़ो यात्रा के यात्री तक, और अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में सत्ता को खुली चुनौती देने वाले नेता तक।

लेकिन राहुल गांधी की कहानी का एक पहलू ऐसा भी है जिसे राजनीति अक्सर ढक देती है—उनकी सहजता, परिवार के प्रति लगाव और आम आदमी के साथ बिना औपचारिकता घुलने-मिलने की कोशिश।
यही विरोधाभास राहुल को दिलचस्प बनाता है।

एक तरफ संसद और सड़क पर बेहद आक्रामक राहुल गांधी, दूसरी तरफ मां सोनिया का हाथ थामे, बहन प्रियंका को टॉफी देते या किसी साधारण मोची के घर बैठकर जूते सिलना सीखते राहुल गांधी।

तो आखिर राहुल गांधी कौन हैं?

अराजक? एंग्री यंग मैन? या भारतीय राजनीति का वह नेता जिसे विरोधी भले नापसंद करें, लेकिन आम आदमी अब भला इंसानमानने लगा है?

2011 का राहुल और 2026 का राहुल

करीब डेढ़ दशक पहले राहुल गांधी के पास विरासत बहुत थी, लेकिन अपनी राजनीतिक पहचान कम। 2014 में कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई। 2019 में वे अमेठी हार गए। ‘पप्पू’ की छवि इतनी मजबूत थी कि उनके गंभीर राजनीतिक प्रयास भी अक्सर मजाक में बदल जाते थे।

लेकिन हार ने राहुल को बदला।

उनकी भाषा बदली। तेवर बदले। संसद से सड़क तक उनकी मौजूदगी बढ़ी।

फिर आई भारत जोड़ो यात्रा। यह राहुल गांधी का राजनीतिक पुनर्जन्म था।
कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चलने वाला नेता लोगों के बीच बैठा, बच्चों से मिला, किसानों से बात की, युवाओं के सवाल सुने। पहली बार राहुल गांधी को टीवी के मंच पर नहीं, सड़क पर देखा गया।
और यहीं ‘पप्पू’ वाली छवि में पहली बड़ी दरार पड़ी।

राहुल की राजनीति में गुस्सा है, लेकिन आदमी में सहजता

राहुल गांधी की राजनीति आज जितनी आक्रामक है, उनका सार्वजनिक व्यवहार अक्सर उतना ही सहज दिखाई देता है। यही शायद उनकी सबसे बड़ी मानवीय ताकत है।

2024 में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के मोची रामचेत की दुकान पर रुकना और उनसे जूते सिलना सीखना केवल राजनीतिक फोटो-ऑप था या नहीं, इस पर बहस हो सकती है। लेकिन इसके महीनों बाद रामचेत और उनके परिवार को दिल्ली स्थित अपने घर बुलाना एक अलग तस्वीर पेश करता है। राहुल ने उन्हें गले लगाया; प्रियंका और सोनिया गांधी ने भी उनके परिवार से मुलाकात की।

यह वह राहुल है जिसे राजनीति की शब्दावली में आसानी से फिट नहीं किया जा सकता।

वह नेता जो संसद में प्रधानमंत्री पर सबसे तीखे हमले कर सकता है, वही किसी आम आदमी के घर बैठकर उसकी कहानी भी सुन सकता है।

यही भारतीय समाज की उस पुरानी परंपरा से जुड़ता है जिसमें राजनीति चाहे जितनी कठोर हो, परिवार और रिश्तों में आदमी की पहचान उसके व्यवहार से होती है।

भारत में नेता केवल भाषण से नहीं बनता। लोग यह भी देखते हैं कि वह अपनी मां के साथ कैसा है, बहन के साथ कैसा है, गरीब के साथ कैसा है और कमजोर आदमी के सामने उसका व्यवहार कैसा है।

सोनिया और प्रियंका : राहुल के राजनीतिक व्यक्तित्व का मानवीय पक्ष

राहुल गांधी को परिवार से अलग करके देखना संभव भी नहीं है और शायद सही भी नहीं। सोनिया गांधी उनकी मां ही नहीं, उनकी सबसे लंबी राजनीतिक छाया भी रही हैं।

हाल के दिनों में सोनिया गांधी की आने वाली आत्मकथा के संदर्भ में राहुल और प्रियंका दोनों का अपनी मां के प्रति भावनात्मक सार्वजनिक संदेश इस रिश्ते के निजी पक्ष को सामने लाता है। राहुल ने पिता राजीव गांधी का संदर्भ देते हुए मां के जीवन और संघर्ष के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

और प्रियंका? यह रिश्ता शायद राहुल गांधी के व्यक्तित्व का सबसे सहज आईना है।

राजनीति में दोनों भाई-बहन एक-दूसरे के सहयोगी हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कई बार उनका रिश्ता बिल्कुल आम भाई-बहन जैसा दिखाई देता है।

रक्षाबंधन पर दोनों का स्नेहपूर्ण संवाद हो या संसद परिसर में राहुल का प्रियंका को टॉफी देकर कहना—“Have a sweet”—इन छोटे क्षणों में नेता नहीं, भाई दिखाई देता है।

फरवरी 2026 में राहुल ने मजाकिया अंदाज में यह भी बताया कि एक समय प्रियंका उनसे नाराज थीं और वायनाड के एक प्रसंग ने दोनों के बीच का तनाव खत्म किया। यह किस्सा जितना सामान्य लगता है, उतना ही महत्वपूर्ण भी है—क्योंकि राजनीति में परिवार अक्सर केवल शक्ति-समीकरण बन जाता है, जबकि राहुल-प्रियंका के रिश्ते में भाई-बहन की सहजता अब भी दिखाई देती है।

यही राहुल गांधी का दूसरा चेहरा है।

जो नेता सत्ता से लड़ते समय तल्ख हो सकता है, वही परिवार में बेहद सहज और भावुक भी है।

और शायद यही Gen-Z को आकर्षित कर रहा है

आज का Gen-Z नेता में ‘महानता’ से ज्यादा ऑथेंटिसिटी खोजता है। उसे बहुत बनावटी भाषण पसंद नहीं। उसे ऐसा नेता चाहिए जो सवाल सुने, गलती स्वीकार करे, हंसे, मजाक करे और जरूरत पड़े तो उसके साथ जमीन पर बैठे।

राहुल गांधी ने पिछले कुछ समय में इसी भाषा को अपनाया है।

वे युवाओं से बेरोजगारी पर बात करते हैं, छात्रों से NEET और परीक्षा व्यवस्था पर संवाद करते हैं और रोजगार को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखते हैं। 2022 की भारत जोड़ो यात्रा में बेरोजगारी पर युवाओं के साथ उनका संवाद इसी राजनीति का हिस्सा था।

2024 में NEET छात्रों से उनकी मुलाकात और लगातार युवा मुद्दों को उठाना भी इसी दिशा में देखा जा सकता है। और उनका छात्रों की गूंज कार्यक्रम भी इसी संवाद की निरंतरता है, जिसका उद्देश्य छात्रों के सवाल सुनना और उनसे सीधे चर्चा करना है।

लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि Gen-Z राहुल गांधी का नया वोट बैंक बन चुका है।

लेकिन इतना जरूर है— राहुल अब युवाओं के बीच केवल एक राजनीतिक चुटकुला नहीं हैं। वे बातचीत का विषय हैं। और राजनीति में perception का बदलना कभी छोटी बात नहीं होती।

एंग्री यंग मैनउम्र से नहीं, तेवर से

राहुल गांधी अब युवा नहीं हैं। लेकिन उनकी राजनीति में ‘एंग्री यंग मैन’ का तेवर जरूर है।

  • व्यवस्था से नाराजगी।
  • बेरोजगारी पर गुस्सा।
  • असमानता पर सवाल।
  • संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर बेचैनी।
  • और सत्ता से लगातार टकराने की इच्छा।

21 अगस्त 2026 को छात्र प्रदर्शन में घायल युवक के लिए दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब घंटों धरने पर बैठना इसका ताजा उदाहरण है। उनके साथ प्रियंका गांधी भी थीं।

इसे कोई अराजकता कह सकता है। कोई राजनीतिक नौटंकी। लेकिन समर्थक इसे विपक्ष के सड़क पर उतरने की जिम्मेदारी कहेंगे। यही राहुल की राजनीति का नया चरित्र है—वे अब लड़ने से कतराते नहीं हैं।

लेकिन क्या वे अराजक हैं?

आक्रामक होना और अराजक होना एक बात नहीं। लोकतंत्र में विपक्ष का काम सत्ता से सवाल पूछना है। संसद में विरोध करना, सड़क पर उतरना और सरकार को चुनौती देना उसका अधिकार है।

समस्या तब शुरू होती है जब राजनीतिक विरोध और संस्थाओं पर अविश्वास के बीच की रेखा मिटने लगे। ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप बेहद गंभीर हैं। इसलिए उनके साथ गंभीर प्रमाण भी जरूरी हैं।

राहुल की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा जोखिम एक ही है— वे अब पीछे हटने वाले नेता नहीं हैं।

जनता की नजर में राहुल : नेता नहीं, पहले भला आदमी?

शायद राहुल गांधी की छवि में सबसे बड़ा बदलाव यही है। एक समय जनता उन्हें केवल ‘गांधी परिवार के बेटे’ के रूप में देखती थी।

आज एक वर्ग उन्हें पहले भला इंसान, फिर नेता के रूप में देखने लगा है। यह बदलाव चुनावी जीत की गारंटी नहीं है।

लेकिन राजनीति में किसी नेता के प्रति ‘भला आदमी’ वाली धारणा महत्वपूर्ण होती है। भारतीय मतदाता नेता की नीतियों से असहमत हो सकता है, लेकिन अगर उसे लगता है कि आदमी नीयत से ठीक है, तो राजनीतिक रिश्ते की एक जमीन तैयार हो जाती है।

राहुल गांधी शायद इसी जमीन पर खड़े हैं। उनके आलोचक उनकी राजनीति को नकारात्मक मान सकते हैं। उनके विरोधी उनकी शैली को आक्रामक कह सकते हैं। 

लेकिन उनके समर्थक और बढ़ता युवा वर्ग उनमें एक ऐसा नेता देखता है जो कम से कम सुनता है, लोगों के बीच जाता है और सत्ता से सवाल पूछने में डरता नहीं।

सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष?

आज राहुल गांधी निश्चित रूप से भारत के सबसे मुखर और आक्रामक विपक्षी नेताओं में हैं।

वे संसद में लड़ते हैं। सड़क पर लड़ते हैं। चुनाव में लड़ते हैं। सरकार से लड़ते हैं।

और अब युवाओं के सवालों और हक के लिए भी सड़क पर उतरते हैं। लेकिन आक्रामकता अपने आप में नेतृत्व नहीं है। नेतृत्व तब साबित होगा जब वही गुस्सा नीति में बदले, विरोध विकल्प में बदले और आंदोलन शासन की क्षमता में।

पप्पूसे पॉलिटिकल चैलेंजरतक

‘पप्पू’ से ‘पॉलिटिकल चैलेंजर’ बनने की यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि शायद यही है कि उन्होंने अपने विरोधियों को भी अपनी राजनीति पर बात करने के लिए मजबूर किया है। राहुल गांधी की 15 साल की कहानी शायद तीन शब्दों में लिखी जा सकती है—

पप्पू → भला आदमी → पॉलिटिकल चैलेंजर।

पहला नाम उनके विरोधियों ने दिया। दूसरी छवि जनता के एक हिस्से ने बनाई। तीसरी पहचान राहुल गांधी खुद बनाने की कोशिश कर रहे हैं। और शायद यहीं उनके नाम का अर्थ फिर लौटता है।

राहुल—दुःखों पर विजय पाने वाला। यह दावा नहीं कि राहुल गांधी ने राजनीति जीत ली है।

अभी नहीं। लेकिन उन्होंने एक बात जरूर साबित की है— उपहास किसी नेता का अंतिम परिचय नहीं होता।
महात्मा गांधी को पीटरमारित्जबर्ग की एक ठंडी रात ने बदल दिया था। शायद राहुल को वर्षों के राजनीतिक उपहास ने। गांधीजी ने अपमान के बाद संघर्ष चुना। राहुल ने उपहास के बाद पुनर्निर्माण। दोनों की यात्रा समान नहीं है, इतिहास दोनों को एक तराजू में नहीं तौल सकता।

लेकिन एक सबक समान जरूर है— जिसे आप सार्वजनिक रूप से छोटा समझते हैं, वही कभी-कभी सबसे लंबी लड़ाई लड़ने की जिद लेकर खड़ा हो जाता है।

राहुल ने उपहास से सम्मान तक की दूरी तय कर ली है। अब सम्मान से विश्वास तक जाना बाकी है।  2029 में सवाल यह नहीं होगा कि राहुल गांधी नरेंद्र मोदी की सत्ता पर कितनी जोरदार चोट करते हैं।

सवाल होगा— क्या वे उस युवा भारत के विश्वसनीय विकल्प बन पाएंगे, जो नौकरी चाहता है, अवसर चाहता है, अपनी आवाज चाहता हैऔर साथ ही ऐसा नेता भी चाहता है जो सत्ता में बैठकर भी इंसान बना रहे?
क्योंकि सरकार गिराने के लिए जनता का आक्रोश काफी है। लेकिन सरकार चलाने के लिए नीति, क्षमता और विश्वास—तीनों चाहिए। और राहुल गांधी की अगली राजनीतिक लड़ाई इन्हीं तीन शब्दों की है।

Bank Holidays: अगले हफ्ते 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, जरूरी काम सोमवार को जरूर निपटा लें

अगले हफ्ते अगर आपको बैंक का कोई काम है तो उसे सोमवार यानी 24 अगस्त को निपटा लेना ठीक रहेगा। 25 अगस्त से 30 अगस्त के बीच सरकारी और प्राइवेट बैंकों की शाखाएं अवकाश के कारण बंद रहेंगी। हालांकि, बैंकों के एटीएम खुले रहेंगे। नेट बैंकिंग सुविधाएं भी जारी रहेंगी। इससे ग्राहक जरूरी काम ऑनलाइन पूरी कर सकेंगे।

हर महीने दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में छुट्टी

बैंकों में हर रविवार को छुट्टी रहती है। इसके अलावा दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों की शाखाएं बंद रहती हैं। बैंकों को छुट्टी के मामले में आरबीआई के नियमों का पालन करना पड़ता है। ये नियम सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की शाखाओं पर एक समान तरह से लागू होते हैं।

आज चौथा शनिवार की वजह से बैंक की शाखाएं बंद हैं

आज चौथा शनिवार है, जिससे बैंकों की शाखाएं बंद हैं। कल यानी 23 अगस्त को रविवार है, जिससे बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। 24 अगस्त को बैंक खुलेंगे। सोमवार को आम तौर पर बैंक की शाखाओं में कामकाज का दबाव ज्यादा होता है। खासकर उस हफ्ते में ज्यादा दबाव देखने को मिलता है, जिस हफ्ते में बैंकों में शनिवार और रविवार की छुट्टी होती है।

25 अगस्त को कई राज्यों और इलाकों में बैंक बंद रहेंगे

अगले हफ्ते मंगलवार यानी 25 अगस्त को कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में मिलाद-उन-नबी, फर्स्ट ओणम और मिलाद-ए-शरीफ के मौके पर बैंकों में छुट्टी रहेगी। हालांकि, दूसरे जगहों पर बैंक की शाखाएं खुली रहेंगी। 26 अगस्त को ज्यादातर इलाकों में बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। इनमें बेंगलुरु, पटना, लखनऊ, नागपुर, मुंबई, दिल्ली, रांची, रायपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। उस दिन ईद-ए-मिलाद, बरावफात, मिलाद-उन-नबी के मौके पर छुट्टी रहेगी।

28 अगस्त को रक्षाबंधन के मौके पर कई राज्यों में छुट्टी

28 अगस्त को भी रक्षा बंधन और कुछ क्षेत्रीय त्योहारों के चलते कई इलाकों में बंद रहेंगे। इनमें अहमदाबाद, भोपाल, जयपुर, कानपुर, कोच्चि जैसे बड़े शहर शामिल हैं। रक्षा बंधन का त्योहार उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार शुक्रवार यानी 28 अगस्त को मनाया जा रहा है।

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29 अगस्त को शनिवार के दिन भी बैंकों में कामकाज होगा

29 अगस्त को शनिवार है। लेकिन, बैंकों की शाखाएं उस दिन खुली रहेंगी। इसकी वजह यह है कि उस दिन इस महीने का पांचवां शनिवार होगा। बैंकों की शाखाएं सिर्फ महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहती हैं। हालांकि, 30 अगस्त को रविवार की वजजह से बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। रविवार को हर राज्य में बैंकों की शाखाएं बंद रहती हैं। उस दिन कोई काम नहीं होता है।

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को 3.18 घंटे रहेगा चंद्र ग्रहण, जानें राखी बांधने का मुहूर्त और सूतक का समय

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व इस साल 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। लेकिन इस साल रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण लगने से एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण से क्या राखी का त्योहार प्रभावित होगा? इससे राखी बांधने के मुहूर्त पर क्या असर होगा? और सूतक काल कब से कब तक रहेगा?

बता दें, इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ राशि में संचार करेंगे, जहां पहले से ही छाया ग्रह राहु विराजमान हैं और केतु की भी दृष्टि बनी रहेगी। साथ ही सूर्य भी केतु से पीड़ित रहेंगे क्योंकि सिंह राशि में सूर्य और केतु की युति बन रही है। यह चंद्र ग्रहण 3 घंटे और 18 मिनट तक चलेगा। आइए जानें चंद्र ग्रहण के साये में कैसे मनेगा राखी का पर्व?

चंद्रग्रहण 2026 तारीख और समय

भारतीय समय के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 8 बजकर 4 मिनट से होगी। चंद्र ग्रहण का मध्य काल 9 बजकर 43 मिनट पर होगा और समापन 11 बजकर 22 मिनट पर होगा। चंद्रग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट की रहने वाली है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला नहीं है इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

28 अगस्त को होगा चंद्र ग्रहण

28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण आंशिक होगा। इस दौरान चंद्रमा का बड़ा भाग पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा, जिससे चंद्रमा गहरे लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आने लगेगा, इसी वजह से इसे ब्लड मून भी कहा जाएगा। यह ग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी एशिया (पाकिस्तान, अफगानिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र समेत सऊदी अरब, शारजाह, ईराक, ईरान आदि), अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में पूरी तरह दिखाई देने वाला है।

भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण

28 अगस्त को रक्षा बंधन के दिन लगने वाला साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन के पर्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ना ही राखी बांधने का मुहूर्त बदलेगा। आप बिना किसी बाधा के त्योहार मना सकते हैं।

भद्रा मुक्त रहेगा रक्षा बंधन का पर्व

इस बार रक्षाबंधन पर सबसे अच्छी बात यह है कि भद्राकाल नहीं है। भद्रा रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व यानी 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से रात्रि 9:32 बजे तक रहेगी। इसलिए 28 अगस्त को सूर्योदय के बाद बिना किसी बाधा के पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

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