UPI पर 0.4% एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा, सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा

यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा। सरकार के सूत्रों ने 16 सितंबर को यह बताया। एनपीसीआई ने 15 सितंबर को 2000 रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज लगाने का ऐलान किया।

एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं लेगी सरकार

सरकार क्या 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर लगाने का फैसला वापस लेगी? इस सवाल के जवाब में एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस बारे में फैसला लिया जा चुका है और इसे वापस लेने का सवाल ही नहीं पैदा होता।

एमडीआर चार्ज से यूपीआई सिस्टम को फायदा

सूत्रों ने बताया कि एमडीआर चार्ज लगाने का फैसला यूपीआई ईकोसिस्टम के हित में लिया गया है। इसका मकसद यूपीआई की सेफ्टी और सिक्योरिटी को मजबूत बनाना है। सूत्रों ने यह भी कहा कि 2020 में यूपीआई शुरू होने पर दूसरे देशों की तरह लेवी लगाने का फैसला लिया गया था। नए एमडीआर फ्रेमवर्क से यूपीआई को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कई पक्षों ने एमडीआर चार्ज का किया विरोध

यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज लगाने का कई पक्षों ने विरोध किया है। इनमें ट्रेडर्स, दुकानदार और राजनीतिक दल शामिल हैं। राजनीतिक दलों ने इसे ‘मोदी टैक्स’ बताया है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया है।

एमडीआर चार्ज से यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी

सरकार ने एमडीआर चार्ज लगाने के फैसले का बचाव करते हुए 15 सितंबर को कहा कि इससे रूरल और सेमी अर्बन एरिया में यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि यूपीआई से होने वाले ज्यादातर पेमेंट्स को फ्री बनाए रखा गया है।

संसद की समिति ने यूपीआई को फ्री रखने का समर्थन नहीं किया था 

फाइनेंस पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में कहा था कि ‘जीरो यूपीआई रीजीम’ से सरकार पर वित्तीय दबाव पड़ता है। इससे लॉन्ग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने की यूपीआई ईकोसिस्टम की क्षमता भी सीमित बनी रहती है। उसने यूपीआई को वित्तीय रूप से सस्टेनेबल बनाए रखने के लिए व्यावहारिक रेवेन्यू की व्यवस्था शुरू करने की सलाह दी थी।

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यूपीआई सिस्टम पर सरकार को सालाना 2000 करोड़ खर्च करना पड़ता है

समिति ने यह भी कहा था कि यूपीआई पेमेंट ईकोसिस्टम की मदद के लिए सरकार सालाना 2000 करोड़ रुपये खर्च करती है। करीब 6 सालों तक पूरी तरह से फ्री रहने के बाद यूपीआई अब चार्जेबल हो जाएगा। एमडीआर चार्ज 15 अक्तूबर से लागू हो जाएगा। हालांकि, चार्ज के दायरे में 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन आएंगे। कस्टमर्स को यह चार्ज नहीं चुकाना होगा।

Gen Z रिटायरमेंट प्लानिंग में दूसरों से काफी आगे, एक्सिस मैक्स लाइफ सर्वे के दिलचस्प नतीजे

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड ने 16 सितंबर को कांतार के साथ मिलकर किए गए अपने सालाना ‘भरोसा टॉक्स इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी’ के छठे एडिशन (आइरिस 6.0) के नतीजे जारी किए। यह स्टडी शहरी भारत में रिटायरमेंट के बारे में सोच में आए एक बड़े बदलाव को दिखाती है।

लोग रिटायरमेंट के बारे में जल्द सोचने लगे हैं

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अब पहले से कहीं ज्यादा भारतीय जल्दी रिटायर होना चाहते हैं और रिटायरमेंट के बारे में जल्दी सोचना भी शुरू कर रहे हैं। हालांकि स्टडी में यह भी सामने आया कि इच्छा से लेकर तैयारी तक का फाइनेंशियल सफर अभी भी काफी लंबा है।

जल्द रिटायर करने की बढ़ रही है चाहत

‘भरोसा टॉक्स आइरिस’ के छठे एडिशन से यह बात सामने आई है कि अगर आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाएं, तो 10 में से 7 शहरी भारतीय 58-60 साल की उम्र से पहले ही रिटायर होना चाहेंगे। रिटायर होने की चाहत रखने वालों में से आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले ही ‘फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस एंड रिटायर एर्ली’ (एफआईआरई) का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल लोगों ने अपने रिटायरमेंट के लिए तय किए गए अपने फंड का औसतन सिर्फ 28 प्रतिशत ही अब तक जमा किया है।

रिटायरमेंट के लिए पैसे जुटाना एक चुनौती

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ सुमित मदान ने कहा, “भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि कई भारतीयों के लिए रिटायरमेंट अभी भी एक फाइनेंशियल चुनौती है। स्टडी में सामने आया है कि जेन एक्स+ के 82 प्रतिशत लोगों को लगता है कि लगातार इनकम के लिए उन्हें काम करते रहना पड़ेगा। इस डर से एक अहम सच्चाई सामने आई है: ‘रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ एक खास उम्र तक पहुंचना नहीं होता है, बल्कि आगे क्या करना है, यह चुनने की फाइनेंशियल आजादी भी होनी चाहिए।’

मन की शांति सुरक्षित रिटायरमेंट का असल मतलब

अब युवा अपनी रिटायरमेंट की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर रहे हैं। यह रिएक्टिव प्लानिंग से प्रोएक्टिव तैयारी की ओर बदलाव का संकेत है। असली चुनौती लोगों के इरादे को फाइनेंस, हेल्थ और इमोशनल वेलबीइंग के मामले में लगातार एक्शन में बदलने की है, क्योंकि असल में आजादी, पसंद और मन की शांति ही सुरक्षित रिटायरमेंट का असली मतलब है।

अलग-अलग पीढ़ियों में बदल रही रिटायरमेंट प्लानिंग

कांतार की साउथ एशिया की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ क्लाइंट ऑफिसर सौम्या मोहंती ने कहा, “भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 से पता चलता है कि अलग-अलग पीढ़ियों और इलाकों में रिटायरमेंट प्लानिंग का तरीका बदल रहा है। युवा भारतीय अब रिटायरमेंट प्लानिंग जल्दी शुरू कर रहे हैं। रिटायरमेंट की तैयारी में सेहत का ध्यान रखना भी अहम हो गया है।

टियर-2 शहरों में भी बेहतर हुई रिटायरमेंट प्लानिंग

उन्होंने कहा कि 59 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से या कभी-कभी हेल्थ चेक-अप करवाते हैं। इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से 44 प्रतिशत लोग रोजाना ऐसा करते हैं। टियर-2 शहरों में भी रिटायरमेंट की तैयारी बेहतर हुई है, जो शहरी भारत में रिटायरमेंट को लेकर लोगों के बीच व्यापक बातचीत का संकेत है।”

 62 फीसदी जेन जी ने शुरू की रिटायरमेंट प्लानिंग

जेन जी के 62 प्रतिशत लोगों ने रिटायरमेंट के लिए निवेश करना शुरू कर दिया है, जबकि मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और जेन एक्स+ में 75 प्रतिशत है। 61 प्रतिशत लोग जानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में अपनी मौजूदा जीवनशैली बनाए रखने के लिए उन्हें कितनी रकम की जरूरत होगी, लेकिन उन्हें इस बात का पूरा भरोसा नहीं है कि यह रकम काफी होगी। सिर्फ 11 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी रिटायरमेंट की बचत जिंदगी भर चलेगी। 39 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी बचत पांच साल भी नहीं चल पाएगी।

रिटायरमेंट फंड को लेकर भी बदल रही सोच

रिटायरमेंट के लिए कितनी रकम (कॉर्पस) काफी है, इसे लेकर भी लोगों की सोच बदल रही है। आरामदायक रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ रुपये या उससे कुछ कम की रकम को ही काफी मानने वालों की संख्या 7 प्रतिशत कम हुई है। 2025 में ऐसा मानने वाले 77 प्रतिशत थे, जो 2026 में 70 प्रतिशत हो गए। यह सोच उन लोगों में खास तौर पर कम है जिनकी सालाना घरेलू आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है। इस आय स्तर पर ऐसा मानने वाले 51 प्रतिशत हैं, जबकि मेट्रो शहरों में रहने वालों में ऐसा मानने वाले 63 प्रतिशत हैं।

52 फीसदी लोगों ने लिया हेल्थ इंश्योरेंस

75 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में सेहतमंद और फिट रहेंगे। वर्तमान समय में 52 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस लिया है और जो लोग नियमित तौर पर शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से 44 प्रतिशत लोग रोजाना ऐसा करते हैं। इसके अलावा, 21 प्रतिशत लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं।

NPS में रिटायरमेंट के बाद कैसे और कितनी पेंशन मिलती है? समझिए पूरा कैलकुलेशन

NPS retirement planning: बहुत से लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं। हालांकि, कई लोगों को पूरा आइडिया नहीं होता कि रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त पैसा कितना मिलेगा और पेंशन कितनी मिलेगी।

नौकरी के दौरान NPS में जमा पैसा रिटायरमेंट के बाद दो हिस्सों में इस्तेमाल होता है। एक हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है। दूसरे हिस्से से एन्युटी खरीदी जाती है। इसी एन्युटी से नियमित पेंशन मिलती है। इसलिए रिटायरमेंट के समय कुल जमा रकम के साथ यह देखना भी जरूरी है कि कितनी रकम एन्युटी में लग रही है।

रिटायरमेंट पर NPS का पैसा कैसे मिलता है?

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के NPS में सामान्य रिटायरमेंट पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। कम से कम 40% रकम से एन्युटी खरीदनी होती है। चाहें तो 40% से ज्यादा रकम भी एन्युटी में लगाई जा सकती है।

एन्युटी खरीदने के बाद मिलने वाली पेंशन उसकी योजना और उस समय उपलब्ध दर पर निर्भर करती है। अलग-अलग विकल्पों में मिलने वाली पेंशन अलग हो सकती है। इसलिए NPS में जमा कुल रकम देखकर सीधे यह नहीं बताया जा सकता कि हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी।

₹50 लाख के कॉर्पस पर समझिए पूरा हिसाब

मान लीजिए किसी कर्मचारी के रिटायरमेंट के समय NPS में ₹50 लाख जमा हैं। अगर वह 60% रकम एकमुश्त निकालता है, तो उसे ₹30 लाख मिलेंगे।

बाकी ₹20 लाख एन्युटी खरीदने में लगाए जाएंगे। अब सिर्फ उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि इस एन्युटी से सालाना 7% की दर से पेंशन मिलती है। तब सालाना पेंशन होगी:

₹20 लाख × 7% = ₹1.40 लाख

यानी हर महीने करीब ₹11,667 पेंशन मिलेगी। यहां 7% की दर सिर्फ समझाने के लिए ली गई है। वास्तविक पेंशन एन्युटी के विकल्प और उस समय उपलब्ध दर पर निर्भर करेगी।

NPS में कुल कॉर्पसएकमुश्त रकम (60%)एन्युटी के लिए रकम (40%)
7% पर मासिक पेंशन

₹25 लाख₹15 लाख₹10 लाख₹5,833
₹50 लाख₹30 लाख₹20 लाख₹11,667
₹75 लाख₹45 लाख₹30 लाख₹17,500
₹1 करोड़₹60 लाख₹40 लाख₹23,333
₹1.5 करोड़₹90 लाख₹60 लाख₹35,000

₹1 करोड़ जमा हैं तो कितनी पेंशन बनेगी?

अब मान लेते हैं कि रिटायरमेंट के समय NPS में ₹1 करोड़ का कॉर्पस है। इसमें से 60% यानी ₹60 लाख एकमुश्त निकाले जा सकते हैं।

बाकी ₹40 लाख एन्युटी में लगाए जाएंगे। अगर उदाहरण के लिए सालाना 7% की दर मानें, तो इससे सालाना ₹2.80 लाख पेंशन बनेगी। यानी हर महीने करीब ₹23,333। ध्यान रखें कि ₹23,333 कोई तय NPS पेंशन नहीं है। यह सिर्फ 7% की उदाहरण वाली दर पर किया गया कैलकुलेशन है।

एन्युटी का विकल्प भी अहम है

एन्युटी खरीदते समय अलग-अलग विकल्प मिलते हैं। किसी विकल्प में व्यक्ति को जीवनभर पेंशन मिलती है। कुछ विकल्पों में पति या पत्नी को भी पेंशन जारी रखने का प्रावधान होता है। कुछ योजनाओं में मृत्यु के बाद एन्युटी खरीदने में लगी मूल रकम वापस करने का विकल्प भी होता है।

इन विकल्पों की शर्तें अलग होती हैं। इसलिए चुने गए विकल्प के हिसाब से मिलने वाली पेंशन भी बदल सकती है।

NPS में सिर्फ बड़ा कॉर्पस बनाना काफी नहीं

रिटायरमेंट की योजना बनाते समय सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि NPS में कितने रुपये जमा होंगे। यह भी देखना जरूरी है कि उस रकम में से कितना हिस्सा एन्युटी में जाएगा और किस तरह की एन्युटी चुनी जाएगी।

उदाहरण के लिए ₹1 करोड़ के कॉर्पस में 40% रकम एन्युटी में लगाने पर ₹40 लाख से पेंशन बनेगी। वहीं, अगर कोई व्यक्ति इससे ज्यादा रकम एन्युटी में लगाता है, तो नियमित पेंशन भी बढ़ सकती है।

NPS के सभी खातों में नियम समान नहीं

60% एकमुश्त और 40% एन्युटी का नियम सामान्य रिटायरमेंट पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के NPS के लिए है। NPS के दूसरे मॉडल और समय से पहले निकासी के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने NPS मॉडल और रिटायरमेंट की स्थिति के हिसाब से नियम देखना जरूरी है।

कुल मिलाकर NPS में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन का आधार एन्युटी में लगाई गई रकम और उससे मिलने वाली दर है। इसलिए NPS में बड़ा कॉर्पस बनाने के साथ यह समझना भी जरूरी है कि रिटायरमेंट के समय उस रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद इन 5 स्कीमों में लगाएं पैसा, सुरक्षित निवेश के साथ नियमित आमदनी मिलेगी

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

NPS Calculator: रिटायरमेंट के बाद चाहिए ₹20,000 महीना पेंशन? जानिए 60 की उम्र में कितना बड़ा होना चाहिए कॉर्पस

NPS Pension Calculation: रिटायरमेंट के बाद बिना किसी टेंशन के जीवन जीने के लिए एक फिक्स मंथली इनकम का होना बेहद जरूरी है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) देश में रिटायरमेंट प्लानिंग का सबसे लोकप्रिय और टैक्स-एफिशिएंट जरिया बन चुका है। लेकिन अधिकांश निवेशकों के मन में यह सवाल रहता है कि ‘अगर मुझे 60 की उम्र के बाद हर महीने ₹20,000 की पेंशन चाहिए, तो मुझे अपने एनपीएस खाते में कितना फंड जमा करना होगा?’

इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप रिटायरमेंट के समय अपने कुल फंड का कितना हिस्सा ऐन्यूटी में जमा करते हैं और कितना कैश निकालते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं इसका पूरा गणित।

₹20,000 पेंशन के लिए कितना फंड जरूरी?

NPS के नियमों के मुताबिक, 60 साल की उम्र में आपको अपने कुल कॉर्पस का कम से कम 40% हिस्सा ऐन्यूटी में लगाना अनिवार्य होता है, जिससे आपको आजीवन पेंशन मिलती है। बाकी 60% हिस्सा आप एकमुश्त टैक्स-फ्री कैश निकाल सकते हैं। फिलहाल भारत में प्रमुख बीमा कंपनियों की ऐन्यूटी दर औसतन 6% प्रति वर्ष के आसपास है।

स्थिति 1: जब आप 100% पैसा ऐन्यूटी में लगाते हैं (मैक्सिमम पेंशन)

अगर आप रिटायरमेंट पर कोई एकमुश्त कैश नहीं निकालते और अपना पूरा 100% फंड पेंशन के लिए ऐन्यूटी में डाल देते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी कॉर्पस: ₹40 लाख

मासिक पेंशन (6% ऐन्यूटी दर पर): ₹20,000 / महीना

कुल रिटायरमेंट फंड: ₹40 लाख

स्थिति 2: जब आप 40% ऐन्यूटी और 60% लंपसम का विकल्प चुनते हैं

अगर आप 60% पैसा कैश निकालना चाहते हैं और केवल अनिवार्य 40% हिस्से से ही ₹20,000/माह पेंशन बनाना चाहते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी हिस्सा (40%): ₹40 लाख

एकमुश्त कैश निकासी (60%): ₹60 लाख (पूरी तरह टैक्स-फ्री)

कुल रिटायरमेंट फंड (100%): ₹1 करोड़

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

₹20,000 पेंशन पाने के लिए हर महीने कितना SIP निवेश करना होगा?

अगर हम NPS में इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (C) और सरकारी सिक्योरिटीज़ (G) के कॉम्बिनेशन से औसतन 10% वार्षिक रिटर्न मानकर चलें, तो आपकी उम्र के हिसाब से हर महीने की जाने वाली SIP इस प्रकार होगी:

लक्ष्य: ₹1 करोड़ का कुल फंड बनाना (₹60 लाख कैश + ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹2,630 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹4,450 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹7,750 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹13,170 / महीना

लक्ष्य: ₹40 लाख का कुल फंड बनाना (0% कैश, 100% ऐन्यूटी से ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹1,050 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹1,780 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹3,100 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹5,270 / महीना

NPS में निवेश के 3 बड़े फायदे

एक्स्ट्रा टैक्स बचत: आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1B) के तहत 80C की ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

कम लागत वाला प्रोडक्ट: NPS दुनिया के सबसे कम फंड मैनेजमेंट फीस वाले निवेश विकल्पों में से एक है, जिससे लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा मिलता है।

कम जोखिम पर बेहतर रिटर्न: NPS का ऑटो चॉइस और एक्टिव चॉइस आपको उम्र के हिसाब से इक्विटी और डेट में एसेट एलोकेशन मैनेज करने की सुविधा देता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की सबसे बेस्ट स्ट्रेटजी? NPS, EPF और एन्युटी पर समझिए एक्सपर्ट का ये मास्टर प्लान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कितने की करनी होगी मंथली SIP? जानिए 15, 20 और 25 साल का पूरा कैलकुलेशन

Monthly SIP For ₹1 Crore Retirement Corpus: अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीने के लिए एक बड़ा फंड होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कम से कम ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट गोल एक बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इस ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने कितना निवेश करना होगा?

म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए रेगुलर निवेश करके आप आसानी से ₹1 करोड़ का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इक्विटी स्कीम्स ने लंबी अवधि में औसतन 12% का सीएजीआर रिटर्न दिया है। आइए समझते हैं कि 15, 20 और 25 साल की समय सीमा के हिसाब से आपको हर महीने कितने रुपये की SIP शुरू करनी होगी।

1. 15 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 40-45 साल के करीब है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए केवल 15 साल का समय बचा है, तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए थोड़ी बड़ी रकम निवेश करनी होगी:

  • लक्ष्य: ₹1 करोड़
  • समय अवधि: 15 साल (180 महीने)
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • जरूरी मंथली SIP: ₹20,017 (करीब ₹20,000 प्रति महीने)

गणित का पूरा हिसाब:

कुल निवेश: ₹36,03,060

अनुमानित वेल्थ गेन: ₹63,96,940

कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

2. 20 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आप 35-40 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और आपके पास 20 साल का समय है, तो आपका मंथली SIP अमाउंट काफी घटकर आधा रह जाता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹10,009 (करीब ₹10,000 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹24,02,160
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹75,97,840
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

3. 25 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और आप अपने करियर की शुरुआत में ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग (Chakravridhi) का जादू सबसे बेहतरीन काम करता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹5,270 (करीब ₹5,300 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹15,81,000
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹84,19,000
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

स्मार्ट टिप: Step-Up SIP से आसान होगी राह

अगर आप शुरुआत में ही ₹10,000 या ₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं कर सकते, तो आप Step-Up SIP का सहारा ले सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी या आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP रकम में 10% का इजाफा कर सकते हैं। ऐसा करने पर आप बहुत छोटी मंथली रकम (जैसे- ₹2,500 – ₹3,000) से शुरुआत करके भी समय से पहले 1 करोड़ रुपये का गोल हासिल कर सकते हैं।

एक्सपर्ट्स की माने तो रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारक आपकी उम्र और समय है। जितना जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। अगर आप भी 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड्स में SIP की शुरुआत करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NPS Equity: किस पेंशन फंड ने NPS इक्विटी में सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? समझिए 10 साल का पूरा हिसाब

NPS Equity: NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में रिटायरमेंट के लिए निवेश के सबसे अच्छे विकल्पों में गिना जाता है। इसमें इक्विटी यानी Scheme E एक अहम विकल्प है। इसमें आपके निवेश का पैसा मुख्य रूप से शेयरों और शेयर से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है।

इसलिए इसमें डेट या सरकारी सिक्योरिटीज की तुलना में ज्यादा रिटर्न की संभावना रहती है। लेकिन बाजार गिरने पर नुकसान का जोखिम भी होता है। यह विकल्प खासतौर पर लंबे समय के रिटायरमेंट निवेश के लिए देखा जाता है।

NPS Scheme E में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया?

NPS Scheme E के 10 साल के आंकड़ों में HDFC पेंशन सबसे आगे है। सरकारी सेक्टर में इसने 10 साल में 13.01% का सालाना रिटर्न दिया। बेंचमार्क का रिटर्न 13.12% रहा। ICICI Prudential 12.90% के साथ दूसरे नंबर पर रहा। Kotak ने 12.75% रिटर्न दिया।

पेंशन फंड10 साल का रिटर्नशुरुआत से रिटर्न
HDFC Pension13.01%13.93%
ICICI Prudential12.90%12.44%
Kotak12.75%11.82%
UTI12.54%12.19%
LIC11.69%12.24%
SBI11.64%10.66%

नोट : आंकड़े NPS Trust के हैं। डेटा 25 अगस्त 2026 तक का है।

प्राइवेट सेक्टर में भी HDFC आगे

नॉन गवर्नमेंट सेक्टर में भी HDFC Pension का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। इसने 10 साल में 12.99% का सालाना रिटर्न दिया। ICICI Prudential का रिटर्न 12.88% रहा। Kotak ने 12.74% रिटर्न दिया।

NPS में 100% इक्विटी का विकल्प

NPS में इक्विटी में ज्यादा पैसा लगाने के विकल्प भी हैं। Active Choice में निवेशक खुद एसेट अलोकेशन तय कर सकता है। Auto Choice में उम्र के हिसाब से इक्विटी का हिस्सा बदलता रहता है। Multiple Scheme Framework के तहत नॉन गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स के लिए 100% तक इक्विटी का विकल्प भी है।

सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला न करें

किसी NPS फंड को चुनते समय सिर्फ रिटर्न देखना ठीक नहीं है। लंबी अवधि का प्रदर्शन देखना जरूरी है। बाजार गिरने पर फंड ने कैसा प्रदर्शन किया, यह भी देखना चाहिए।

इसके अलावा बेंचमार्क से तुलना करें। पोर्टफोलियो और जोखिम भी देखें। रिटायरमेंट के लिए निवेश है, इसलिए सिर्फ पिछले एक साल के अच्छे रिटर्न के पीछे भागना सही नहीं है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।