Stock in Fcous: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को BMC से ₹1918 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, मुंबई में बनाएगी वाटर टनल

Stock in Fcous: शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की कंपनी अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से 1,918 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी मुंबई में डिसैलिनेटेड यानी समुद्री पानी को साफ कर तैयार पेयजल की सप्लाई के लिए टनल बनाएगी। इस प्रोजेक्ट में डिजाइन, निर्माण, GST और ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (O&M) भी शामिल है। कंपनी ने अभी इसकी समयसीमा नहीं बताई है।

मुंबई की पानी सप्लाई होगी मजबूत

यह टनल मनोरी के पंपिंग स्टेशन से चारकोप होते हुए कांदिवली के महावीर नगर तक बनाई जाएगी। डिसैलिनेशन प्लांट में समुद्र के पानी को पीने लायक बनाया जाएगा। इसके बाद इसी टनल के जरिए पानी शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाएगा। बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को काफी अहम माना जा रहा है।

पहले भी BMC के साथ कर रही है काम

अफकॉन्स पहले से ही BMC के लिए 7.13 किलोमीटर लंबी कशेली-मुलुंड अंडरग्राउंड वाटर टनल बना रही है। इसके अलावा कंपनी नवी मुंबई, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी कई जल आपूर्ति परियोजनाओं पर काम कर रही है। पानी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अब कंपनी के कारोबार का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।

148.67 करोड़ रुपये का आर्बिट्रेशन अवॉर्ड

हाल ही में अफकॉन्स को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना से जुड़े टनल T74-R मामले में 148.67 करोड़ रुपये का आर्बिट्रेशन अवॉर्ड भी मिला है। नए ऑर्डर और इस फैसले से कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत होगी। साथ ही आने वाले वर्षों में रेवेन्यू को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।

अफकॉन्स के शेयरों का हाल

अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर गुरुवार को 0.55% की गिरावट के साथ 279.35 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 15.86% गिरा है। वहीं, बीते 1 साल में यह 30.76% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 10.27 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Emcure Pharma Q1 Results: नमिता थापर की कंपनी का मुनाफा 42% बढ़ा, रेवेन्यू रहा 23% ज्यादा

एमक्योर फार्मा का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर 293.98 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 206.95 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2,580.45 करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 तिमाही में 2,100.54 करोड़ रुपये था। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसके कुल खर्च 2,188.99 करोड़ रुपये के रहे, जबकि एक साल पहले खर्च 1,809.97 करोड़ रुपये के थे।

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड का नाता शार्क टैंक इंडिया में जज के तौर पर दिख चुकीं नमिता थापर से है। वह इसमें होल टाइम डायरेक्टर हैं। नमिता के पिता सतीश रमनलाल मेहता कंपनी के फाउंडर, CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। जून 2026 तिमाही में कंपनी का EBITDA एक साल पहले से 27.8 प्रतिशत बढ़कर 532.5 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 20.6 प्रतिशत पर पहुंच गया।

कंपनी का कहना है कि जून 2026 तिमाही के दौरान उसका देश के अंदर कारोबार 10.2 प्रतिशत बढ़कर 1,095.3 करोड़ रुपये हो गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय कारोबार 34.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,485.1 करोड़ रुपये का रहा।

Emcure Pharma का शेयर लाल निशान में बंद

एमक्योर फार्मा जुलाई 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,952.03 करोड़ रुपये का रहा था। कंपनी का शेयर 6 अगस्त को BSE पर 1 प्रतिशत गिरावट के साथ 1936.10 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 36700 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 28 प्रतिशत और एक साल में 36 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 2 साल में कीमत लगभग 50 प्रतिशत बढ़ी है।

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45वीं सालाना आम बैठक 21 सितंबर को

एमक्योर फार्मा की 45वीं सालाना आम बैठक 21 सितंबर 2026 को होने वाली है। इस मीटिंग में वित्त वर्ष 2026 के लिए घोषित किए जा चुके 3.60 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी भी ली जाएगी। मंजूरी मिलने पर 30 दिनों के अंदर डिविडेंड का पेमेंट कर दिया जाएगा। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 4 सितंबर है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trent Q1 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 21% बढ़ा, रेवेन्यू में 18% का इजाफा

टाटा ग्रुप की कंपनी ट्रेंट लिमिटेड का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर करीब 21 प्रतिशत बढ़कर 519 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 429.69 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 17.8 प्रतिशत बढ़कर 5754.71 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में रेवेन्यू 4883.48 करोड़ रुपये था। ट्रेंट, टाटा ग्रुप का फैशन और लाइफस्टाइल बिजनेस है। कंपनी के Westside, Zudio और Star जैसे ब्रांड्स के तहत रिटेल स्टोर हैं।

कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसके कुल खर्च 5,082.96 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 4,368.59 करोड़ रुपये के थे। ट्रेंट में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 37.01 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है।

ट्रेंट ने जून 2026 तिमाही में 19 जूडियो स्टोर खोले। वहीं वेस्टसाइड स्टोर्स में 1 का इजाफा किया। इसके बाद जूडियो स्टोर्स की कुल संख्या 982 और वेस्टसाइड स्टोर्स की कुल संख्या 301 हो गई है।

ट्रेंट के शेयरों में तेजी

6 अगस्त को ट्रेंट के शेयरों में तेजी है। दिन में कीमत BSE पर पिछले बंद भाव से 4.5 प्रतिशत तक चढ़कर 3246.65 रुपये के हाई तक गई। कंपनी का मार्केट कैप 1.7 लाख करोड़ रुपये के करीब है। शेयर 2 सप्ताह में 11 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल में कीमत 180 प्रतिशत से ज्यादा उछली है। 5 साल का रिटर्न लगभग 420 प्रतिशत है।

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Firstsource Solutions Q1 Results: नतीजों के बाद शेयर 16% टूटा, मुनाफा 19% गिरा, रेवेन्यू और मार्जिन का अनुमान बरकरार

Firstsource Solutions Q1 Results: सॉफ्टवेयर एंड आईटी सेक्टर की कंपनी फर्स्टसोर्स सोल्युशंस (Firstsource Solutions) ने अपने तिमाही नतीजे घोषित कर दिए है। नेट प्रॉफ़िट 19% गिरकर ₹166 करोड़ हो गया, जो पहले ₹205 करोड़ था। नतीजों के ऐलान के बाद शेयर 16 फीसदी से ज्यादा टूटा।

कंपनी ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए, Firstsource ने अपने कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 10% से 13% के बीच बनाए रखा है, जबकि EBIT मार्जिन 12.25% से 12.75% के बीच रहने की उम्मीद है।

जून तिमाही के दौरान, Firstsource के रेवेन्यू में 4.5% की गिरावट आई और यह पिछली तिमाही के ₹2,853 करोड़ से घटकर ₹2,725 करोड़ हो गया।

इस तिमाही में EBIT (ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई) ₹337 करोड़ रही, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 7.2% ज़्यादा है, जबकि EBIT मार्जिन पिछली तिमाही के 12.2% से बढ़कर 12.3% पर स्थिर रहा। इस अवधि के लिए नेट प्रॉफ़िट 19% गिरकर ₹166 करोड़ हो गया, जो पहले ₹205 करोड़ था।

US डॉलर के हिसाब से, Firstsource ने $288 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जिसका मतलब है कि कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ पिछली तिमाही के मुकाबले 2.2% रही।

तिमाही के दौरान, Firstsource को UK की एक प्रमुख बेनिफिट्स और पेंशन एडमिनिस्ट्रेशन प्रोवाइडर कंपनी से एंड-टू-एंड बैक-ऑफ़िस ट्रांसफॉर्मेशन और रिसोर्स ऑप्टिमाइज़ेशन के लिए एक बड़ा ट्रांसफॉर्मेटिव डील मिला।

कंपनी ने US के एक प्रमुख एकेडमिक मेडिकल सेंटर से भी इंश्योरेंस फ़ॉलो-अप, डिनायल्स मैनेजमेंट और कॉम्प्लेक्स क्लेम रिज़ॉल्यूशन के लिए एक बड़ा डील हासिल किया। कंपनी की इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन के अनुसार, यह कंपनी के लिए एक नया क्लाइंट (नया लोगो) है। कुल डील की जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है।

जून तिमाही के अंत में, कंपनी में कर्मचारियों की कुल संख्या 36,875 थी; पिछली तिमाही के मुकाबले 670 और साल-दर-साल आधार पर 2,380 कर्मचारी बढ़े। पिछले 12 महीनों में कर्मचारियों के छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 33.1% रही। यह उन कर्मचारियों के लिए है जो 180 दिनों से ज़्यादा समय से नौकरी कर रहे थे।

नतीजों की घोषणा के बाद Firstsource Solutions के शेयर 16% गिरकर ₹283.70 पर ट्रेड कर रहे हैं। पिछले एक महीने में स्टॉक 28% बढ़ा है।

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Q1 Results: फार्मा कंपनी का प्रॉफिट 10 गुना बढ़ा, रेवेन्यू भी डबल; शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: फार्मा कंपनी न्यूलैंड लेबोरेटरीज ने जून तिमाही (Q1 FY27) में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 10 गुना से ज्यादा बढ़कर 148 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 14 करोड़ रुपये था।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी दोगुना से ज्यादा होकर 641.5 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 292.7 करोड़ रुपये थी।

EBITDA और मार्जिन में जबरदस्त सुधार

जून तिमाही में EBITDA बढ़कर 222.7 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 34.4 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.8% से बढ़कर 34.7% पर पहुंच गया। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा सुधार हुआ है।

कंपनी की कुल आय भी बढ़कर 650.1 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल 300.6 करोड़ रुपये थी। टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) 17.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 197.5 करोड़ रुपये रहा। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 13.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 147.4 करोड़ रुपये हो गया।

CMS और GDS कारोबार ने दिखाई दमदार ग्रोथ

मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सहर्ष दावुलुरी ने कहा कि तिमाही का प्रदर्शन कंपनी की उम्मीदों के मुताबिक रहा। कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (CMS) और जेनेरिक ड्रग सब्सटेंस (GDS) कारोबार ने मजबूत प्रदर्शन किया।

कंपनी ने बताया कि तिमाही के दौरान कमर्शियल प्रोडक्ट्स से सबसे ज्यादा रेवेन्यू आई। साथ ही प्रोजेक्ट पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है। ग्राहकों की दिलचस्पी भी कंपनी की व्यापक क्षमताओं में बढ़ रही है।

विस्तार पर रहेगा फोकस

न्यूलैंड लेबोरेटरीज ने कहा कि वह API, जटिल मॉलिक्यूल्स और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश कर रही है। हालांकि, आने वाले समय में कंपनी का प्रदर्शन नए प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने, नए प्रोडक्ट्स के सफल कमर्शियल लॉन्च और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखने पर निर्भर करेगा।

शेयरों का हाल

नतीजों से पहले बुधवार को NSE पर न्यूलैंड लेबोरेटरीज का शेयर 4.03% की बढ़त के साथ 20,049 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 51.86% चढ़ा है। वहीं, बीते 5 साल में इसने 1,081% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 25.72 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Biocon Q1 Results: फार्मा कंपनी का मुनाफा 349% बढ़ा, रेवेन्यू में भी उछाल; शेयरों पर रहेगी नजर

Biocon Q1 Results: फार्मा कंपनी बायोकॉन ने 5 अगस्त को जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर चार गुना से ज्यादा बढ़कर 141 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 31.4 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी का प्रॉफिट करीब 349% उछला है।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 10% बढ़कर 4,336 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,942 करोड़ रुपये थी।

EBITDA और मार्जिन में सुधार

जून तिमाही में EBITDA 10.6% बढ़कर 847.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 766.1 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी मामूली बढ़कर 19.54% हो गया, जो एक साल पहले 19.43% था।

ग्रॉस EBITDA 902 करोड़ रुपये रहा। इसका मार्जिन 21% रहा। कंपनी ने कहा कि बायोफार्मा कारोबार में बेहतर मुनाफे की वजह से यह सुधार देखने को मिला।

बायोफार्मा कारोबार ने कमाल किया

बायोकॉन का बायोफार्मा कारोबार सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन रहा। इस कारोबार की रेवेन्यू 17% बढ़कर 3,615 करोड़ रुपये पहुंच गई। बायोसिमिलर कारोबार की रेवेन्यू 16% बढ़कर 2,855 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, जेनेरिक दवाओं की रेवेन्यू 21% बढ़कर 760 करोड़ रुपये रही।

कंपनी ने कहा कि नए बायोसिमिलर और जेनेरिक प्रोडक्ट लॉन्च होने से यह बढ़त मिली। हालांकि, सर्विसेज कारोबार दबाव में रहा। इस सेगमेंट की रेवेन्यू 16% घटकर 736 करोड़ रुपये रह गई।

फाइनेंस कॉस्ट घटी, R&D खर्च बढ़ा

बैलेंस शीट मजबूत करने की रणनीति के चलते कंपनी का ब्याज खर्च 23% घटकर 213 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च 17% बढ़कर 240 करोड़ रुपये हो गया।

अमेरिका और यूरोप में कई नए प्रोडक्ट लॉन्च

बायोकॉन के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीहास तांबे ने कहा कि कंपनी ने तिमाही के दौरान अमेरिका और यूरोप समेत विकसित बाजारों में कई प्रो़डक्ट लॉन्च किए। साथ ही उभरते बाजारों में नए प्रोडक्ट और साझेदारियों के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाई। उन्होंने कहा कि कि कंपनी को उम्मीद है कि पूरे वित्त वर्ष में ग्रोथ की रफ्तार और तेज होगी। इसका असर दूसरी छमाही के नतीजों में साफ दिखाई देगा।

बायोकॉन की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने कहा कि कंपनी अब रणनीतिक निवेश को टिकाऊ ग्रोथ में बदलने पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा कि बायोसिमिलर के लिए बेहतर नीति माहौल और अमेरिका में बढ़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से लंबी अवधि की ग्रोथ को मजबूती मिलेगी।

बायोकॉन के शेयरों का हाल

नतीजों से पहले बुधवार को बायोकॉन का शेयर 0.76% की बढ़त के साथ 425.20 रुपये पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक यह करीब 10% चढ़ चुका है। वहीं, पिछले एक साल में इसने 14% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

Berger Paints Q1 Results: प्रॉफिट 21 फीसदी बढ़कर 404 करोड़ रुपये, रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Berger Paints Q1 Results: प्रॉफिट 21 फीसदी बढ़कर 404 करोड़ रुपये, रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़ा

Berger Paints Q1 Results: बर्जर पेंट्स ने 5 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। प्रॉफिट और रेवेन्यू दोनों में अच्छी ग्रोथ दिखी। इसमें डेकोरेटिव और ऑटोमोटिव बिजनेसेज के अच्छे प्रदर्शन का हाथ है। इससे रॉ मैटेरियल की कॉस्ट में इजाफा का ज्यादा असर प्रॉफिट पर नहीं पड़ा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़ा

जून तिमाही में Berger Paints का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 21 फीसदी बढ़कर 404.3 करोड़ रुपये रहा। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़कर 3,583.7 करोड़ रुपये रहा। इससे सभी मुख्य सेगमेंट्स में स्ट्रॉन्ग डिमांड का संकेत मिलता है। कंपनी के शेयरों में 5 अगस्त को अच्छी तेजी दिखी।

एबिड्टा 15 फीसदी बढ़कर 607 करोड़ रुपये

बर्जर पेंट्स का EBITDA जून तिमाही में 15 फीसदी बढ़कर 607.4 करोड़ रुपये रहा। ऑपरेटिंग मार्जिन इस दौरान 17 फीसदी पर बना रहा। खास बात यह है कि क्रूड ऑयल और दूसरे रॉ मैटेरियल की कीमतों में उछाल की वजह से इनफ्लेशनरी प्रेशर के बावजूद ऑपरेटिंग मार्जिन में कमी नहीं आई।

कीमतों में इजाफा का पूरा असर आगे दिखेगा

कंपनी के एमडी और सीईओ अभिजीत रॉय ने कहा कि मार्च तिमाही में डिमांड में जो रिकवरी दिखी थी, वह जून तिमाही में भी जारी रही। इससे कंपनी की स्टैंडएलोन वैल्यू ग्रोथ 12.7 फीसदी रही। उन्होंने कहा कि प्राइसिंग में इजाफा का पॉजिटिव असर जून तिमाही में प्रदर्शन पर पड़ा। हालांकि, कीमतों में इजाफा का पूरा असर आने वाले महीनों में दिखेगा।

अच्छे प्रदर्शन में डेकोरेटिव पेंट्स का बड़ा हाथ

कंपनी ने कहा है कि ग्रोथ में डेकोरेटिव पेंट्स और ऑटोमोटिव कोटिंग्स का बड़ा हाथ रहा। हालांकि, वाटरप्रूफिंग, कंस्ट्रक्शन केमिकल्स और वुड कोटिंग्स की ग्रोथ भी अच्छी रही। कंपनी ने कहा कि हाल में लॉन्च प्रीमियम प्रोडक्ट्स का भी प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी का फोकस नए मार्केट्स में नेटवर्क का विस्तार करने पर है।

पश्चिम एशिया में टेंशन से रॉ मैटेरियल की कीमतों में इजाफा

बर्जर पेंट्स के मैनेजमेंट ने कहा कि पश्चिम एशिया में टेंशन का असर क्रूड की सप्लाई पर पड़ा। इससे पेट्रोलियम आधारित रॉ मैटेरियल की कीमतें बढ़ गईं। इससे मार्जिन पर दबाव बना। लेकिन, खर्च को नियंत्रण में रखने और ऑपरेशनल एफिशियंसी से कंपनी अच्छा मुनाफा कमाने में सफल रही। कंपनी को घरेलू डिमांड आगे भी स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद है।

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इस हफ्ते शेयरों में 5 फीसदी की तेजी

बर्जर पेंट्स देश की दूसरी सबसे बड़ी पेंट कंपनी है। इसका पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड है, जिसमें डेकोरेटिव पेंट्स, इंडस्ट्रियल कोटिंग्स, वाटरप्रूफिंग सॉल्यूशंस, कंस्ट्रक्शंस केमिकल्स और ऑटोमोटिव फिनिशेज शामिल हैं। कंपनी का शेयर 5 अगस्त को 1.54 फीसदी चढ़कर 542 रुपये पर बंद हुआ। एक हफ्ते में यह करीब 5 फीसदी चढ़ा है।

Q1 Results: अग्रवाल टफन्ड ग्लास का रेवेन्यू 23% बढ़ा, ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ पहुंची

Agarwal Toughened Glass Q1 Results: टफन्ड, लैमिनेटेड, इंसुलेटेड और सेफ्टी ग्लास बनाने वाली कंपनी Agarwal Toughened Glass India Ltd ने जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 22.86% बढ़कर ₹34.40 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹28 करोड़ था।

ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ पर पहुंची

30 जून 2026 तक कंपनी की एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर बुक ₹55 करोड़ रही। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने ₹95 करोड़ का रेवेन्यू और ₹22 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।

किन वजहों से बढ़ा कारोबार?

कंपनी ने बताया कि आर्किटेक्चरल, इंफ्रास्ट्रक्चर और वैल्यू-एडेड ग्लास प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग से कारोबार को सहारा मिला। ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश भी किया जा रहा है।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

अग्रवाल टफन्ड ग्लास के प्रमोटर और होल-टाइम डायरेक्टर महेश अग्रवाल ने कहा कि FY27 की शुरुआत सकारात्मक रही है। मजबूत ऑर्डर बुक और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस से कारोबार को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि हाल ही में कंपनी ने पूंजी भी जुटाई है। इससे बैलेंस शीट और मजबूत हुई है। अब कंपनी अगले चरण की ग्रोथ के लिए तैयार है।

आगे की क्या रणनीति है?

कंपनी प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो मजबूत करने पर काम कर रही है। फोकस इंसुलेटेड ग्लास, लैमिनेटेड ग्लास और जंबो ग्लास जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर रहेगा। कंपनी प्रीमियम कमर्शियल बिल्डिंग, एयरपोर्ट, मेट्रो रेल और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

मुनाफा बढ़ाने पर रहेगा फोकस

अग्रवाल टफन्ड ग्लास का लक्ष्य बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के जरिए मार्जिन बढ़ाना है। साथ ही कच्चे माल और बिजली की लागत को नियंत्रित करने के लिए सोर्सिंग और एनर्जी एफिशिएंसी में सुधार किया जाएगा। कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार भी करना चाहती है, ताकि नए बाजारों में तेजी से और कम लागत पर डिलीवरी की जा सके।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।