राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 2 महीने में 18 महिलाओं की मौत से हड़कंप! डिलीवरी के बाद मौतों के मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या बोली सरकार?

Deaths of pregnant women in Rajasthan: राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कम से कम 18 महिलाओं की डिलीवरी या सी-सेक्शन (सिजेरियन) के बाद मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जुलाई की शुरुआत में केवल छह दिनों के भीतर ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

मामले केवल मौतों तक सीमित नहीं हैं। प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई 7 अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस करनी पड़ रही है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं। बल्कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर जटिलताओं का एक बड़ा पैटर्न हो सकता है।

सिर्फ 6 दिन में 9 मौत?

‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के बाद से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर और अन्य सहित कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में माताओं की 18 मौतों की खबर आई है। इनमें से नौ मौतें जुलाई की शुरुआत में सिर्फ छह दिनों में हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये मौतें भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर समेत कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई हैं। सभी मामलों में महिलाओं की मौत डिलीवरी या ऑपरेशन के बाद हुई, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले मातृ मृत्यु दर में सुधार, अब फिर चिंता

राजस्थान ने हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। साल 2017-19 के दौरान प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 141 माताओं की मौत होती थी, जो 2018-20 में घटकर 113 रह गई। इस सुधार के कारण राजस्थान को मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की सफलता की मिसाल माना गया था। लेकिन अब बेहद कम समय में एक साथ सामने आए इन मामलों ने एक्सपर्ट को भी चिंता में डाल दिया है कि आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि वे खुशहाल प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनकी बेटियां, बहुएं और पत्नियां कभी घर वापस नहीं लौट सकीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि आखिर मौत कैसे हुई। कई परिवारों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पूरी पारदर्शिता की मांग की है।

रिश्तेदारों का दावा है कि कई महिलाएं भर्ती होने के समय सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन सामान्य प्रसव या सी-सेक्शन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट-पार्टम हेमरेज), संक्रमण (सेप्सिस) या किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। कई महिलाओं की जिला अस्पतालों में मौत हो गई। जबकि कुछ को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इलाज में लापरवाही के आरोप

परिवारों ने अस्पतालों पर इलाज में देरी, मरीजों की पर्याप्त निगरानी न होने और एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई उप-जिला अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन और आईसीयू सुविधाओं की भारी कमी है। परिजनों के मुताबिक कई बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। कुछ अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई गंभीर मरीजों को संभाल रहा था, जबकि सीमित संसाधनों के बीच नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज करने की कोशिश कर रहा था।

सरकार ने क्या कहा?

राजस्थान सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित प्रभावित जिलों में विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई जांच समितियां गठित की हैं और लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। हालांकि, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन मौतों को फिलहाल रहस्य बताया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मई से अब तक इतनी बड़ी संख्या में माताओं की मौत आखिर क्यों हुई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक किसी जांच समिति ने इन सभी मामलों के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों में कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण (सेप्सिस), दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियां ऐसा कोई साझा कारण नहीं खोज पाई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आईं।

एक्सपर्ट की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की जल्द और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि हर मामले की मेडिकल ऑडिट कर यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इलाज में लापरवाही, संसाधनों की कमी या किसी अन्य प्रणालीगत समस्या के कारण तो ये मौतें नहीं हुईं। फिलहाल, राजस्थान में माताओं की लगातार हो रही मौतों का कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच जारी है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इन मौतों के पीछे असली वजह क्या है।

मामलों को लेकर सरकार गंभीर

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है। स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।” उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है। प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे। बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों से मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में 2, 2.5 या 3 फिटमेंट फैक्टर मिला तो इतनी हो जाएगी सैलरी, एक्सपर्ट ने बताया आगे का प्लान

8th Pay Commission updates: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत संभावित वेतन वृद्धि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने अपने पर्सनल फाइनेंस की प्लानिंग भी शुरू कर दी है। हालांकि विभिन्न फिटमेंट फैक्टर के परिदृश्यों के तहत मूल वेतन और सैलरी से जुड़े कंपोनेंट्स में होने वाले बदलावों को लेकर बहस जारी है लेकिन इसके साथ ही इस अतिरिक्त आमदनी को सही जगह प्लान करना भी बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो चुका है। हालांकि इसे असल में लागू करने और लोगों की सैलरी बढ़ने की बात करें तो पैनल द्वारा 2027 के मध्य के आसपास अपनी सिफारिशें सौंपने और सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दिए जाने के बाद ही होने की संभावना है।

मनी कंट्रोल पर दिपेन प्रधान की रिपोर्ट में अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संभावित सैलरी कैलकुलेट की गई है और एक्सपर्ट के हवाले से समझाया गया है कि बढ़ी सैलरी पर बेस्ट इन्वेस्टमेंट की स्ट्रैटिजी क्या होनी चाहिए। आइए जानते हैं कि अलग-अलग सैलरी लेवल पर इसका क्या असर पड़ेगा और बढ़े हुए पैसे को निवेश करने का एक्सपर्ट्स का क्या प्लान है।

2.0 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी हो जाएगी सैलरी?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और अनुमानित 69 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू करके लेवल 1 के कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ाकर ₹18000 कर दिया था। अब अगर 8वां वेतन आयोग इस मल्टीप्लायर को उदाहरण के तौर पर 2 बढ़ाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कुछ इस तरह बदलाव आएगा-

  • लेवल 1कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹36000 ({Rs 18000 ×2) हो जाएगा।
  • लेवल 7 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹89800 हो जाएगा।
  • लेवल 13 कर्मचारी: इस स्तर के अधिकारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹246200 प्रति माह हो जाएगा।

बाकी अगर फिटमेंट फैक्टर अगर 2.5 या 3 फिक्स किया गया तो बढ़ी हुई संभावित सैलरी का कैलकुलेशन यहां नीचे देखा जा सकता है-

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वेतन वृद्धि के बाद क्या होनी चाहिए एसेट एलोकेशन स्ट्रेटजी?

किंग स्टब एंड कसिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नी के पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा ने बढ़े हुए वेतन का संतुलित उपयोग करने के लिए एक खास एलोकेशन स्ट्रेटजी सुझाई है-

  • 40-50 प्रतिशत हिस्सा: दीर्घकालिक निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग में लगाएं।
  • 20-30 प्रतिशत हिस्सा: महंगे या उच्च ब्याज वाले कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करें।
  • 10-20 प्रतिशत हिस्सा: इमरजेंसी सेविंग्स बनाने में लगाएं।
  • शेष 10-20 प्रतिशत हिस्सा: लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने पर खर्च कर सकते हैं।

एक्सपर्ट की खास सलाह

रोहिताश्व सिन्हा के मुताबिक इसका मुख्य मंत्र सही सीक्वेंसिंग है। अपनी इच्छाओं पर खुलकर खर्च करने से पहले महंगे कर्ज को चुकाएं और अपने वित्तीय आधार को स्थिर करें। सैलरी हाइक स्थायी होती है इसलिए इसे आदर्श रूप से स्थायी संपत्ति में बदला जाना चाहिए न कि इसे सिर्फ स्थायी रूप से खर्च बढ़ाने की आदत बना लेना चाहिए।

सैलरी स्तर के हिसाब से निवेश की रणनीति

बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का मानना है कि कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के बाद अपनी जरूरतों के हिसाब से पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग आय वर्ग के लिए ये सुझाव दिए हैं:

सीमित बचत वाले कर्मचारी: जिन कर्मचारियों के पास बचत कम है वे सबसे पहले छह महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं और फिर ऊंचे ब्याज वाले लोन चुकता करें।

मध्यम आय वर्ग: इन्हें मुख्य रूप से एसआईपी और रिटायरमेंट के लिए ऊंचे योगदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उच्च आय वर्ग वाले कर्मचारी: जिनकी सैलरी अधिक है वे घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा की फंडिंग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए अधिक निवेश कर सकते हैं।

अधिल शेट्टी ने आगे कहा कि सैलरी बढ़ोतरी का एक छोटा हिस्सा अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर खर्च करना पूरी तरह ठीक है लेकिन इस बात से बचें कि पूरी की पूरी सैलरी हाइक आपके ऊंचे मासिक खर्चों में तब्दील हो जाए। इसके अलावा जोखिम भरे निवेशों पर विचार करने से पहले कर्मचारियों को पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन बीमा सुनिश्चित करना चाहिए।

करियर के पड़ाव के अनुसार कैसे करें निवेश?

अगर रोहिताश्व सिन्हा के बताए 40-50 प्रतिशत के एलोकेशन को आधार माना जाए तो 2.0 का फिटमेंट फैक्टर मानकर कर्मचारियों के पास लंबी अवधि के निवेश के लिए हर महीने एक बड़ी राशि बचेगी। यह बचत कुछ इस तरह की हो सकती है:

लेवल 1 के कर्मचारी: करीब ₹7200 से ₹9000 प्रति माह।

लेवल 7 के कर्मचारी: करीब ₹17960 से ₹22450 प्रति माह।

लेवल 13 के कर्मचारी: करीब ₹49240 से ₹61550 प्रति माह।

करियर के अलग-अलग चरणों के लिए रोहिताश्व सिन्हा ने अलग अलग सुझाव दिए हैं। युवा कर्मचारियों को इक्विटी एसआईपी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और साथ ही एनपीएस योगदान को जारी रखना चाहिए। मिड-करियर कर्मचारियों को अपने प्रमुख वित्तीय लक्ष्यों के इर्द-गिर्द एनपीएस, एसआईपी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को वीपीएफ, एनपीएस और फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से पूंजी के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ध्यान दें कि बिना किसी उचित वित्तीय योजना के सैलरी में हुई बढ़ोतरी बहुत तेजी से गायब हो सकती है। ऐसे में पहले से ही इस अतिरिक्त आय का उपयोग करने की योजना बनाना भविष्य में बड़ी संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

48 घंटे से भी कम समय में क्रेडिट होने वाला है आपके PF खाते में इंट्रेस्ट! जानिए कैसे कैलकुलेट होता है ब्याज, 5 लाख पीएफ पर कितनी होगी कमाई?

EPF Interest 2026: अगर आप भी बार-बार अपनी ईपीएफ (EPF) पासबुक रिफ्रेश कर रहे हैं तो आपका इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 34 करोड़ खातों में 15 जुलाई तक ब्याज की रकम क्रेडिट करने जा रहा है। पिछले वर्षों में जहां ब्याज अक्टूबर-नवंबर के समय क्रेडिट होता था। वहीं इस साल यह काफी पहले किया जा रहा है।

इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इंट्रेस्ट के मद में क्रेडिट होने वाली है। EPFO के नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम (CITES) के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया जाने वाला पहला ब्याज भुगतान है।

पिछले महीने वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूर की गई ब्याज दर लगातार तीसरे साल भी 8.25 प्रतिशत पर बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से इस 8.25% ब्याज का रुपयों में क्या गणित बैठता है और इसका कैलकुलेशन कैसे किया जाता है।

₹5 लाख से ₹1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इंट्रेस्ट का कैलकुलेशन 31 मार्च 2026 तक के कुल फंड के आधार पर की जाती है। ये इंट्रेस्ट 15 जुलाई तक आपके पासबुक में दिखने लगेगी। साधारण गणित के हिसाब से आपके पीएफ बैलेंस पर मिलने वाला इंट्रेस्ट कुछ ऐसा बनता है:-

₹5 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹41250 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹541250 हो जाएगा।

₹10 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹82500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹1082500 हो जाएगा।

₹50 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹412500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹5412500 हो जाएगा।

₹1 करोड़ के पीएफ बैलेंस पर: ₹825000 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹10825000 हो जाएगा।

इंट्रेस्ट क्रेडिट होने से पहले अपने ईपीएफओ मेंबर पोर्टल या उमंग (UMANG) ऐप पर जाकर तुरंत चेक कर लें कि आपकी केवाईसी डिटेल्स अपडेटेड हैं या नहीं। केवाईसी डिटेल्स का पुराना या आउटडेटेड होना ही सबसे आम कारण है जिसकी वजह से ब्याज क्रेडिट और क्लेम अटक जाते हैं।

कैसे होता है EPF ब्याज का कैलकुलेशन? जानिए नियम

ईपीएफ (EPF) में ब्याज की गणना मंथली आधार पर की जाती है। लेकिन यह रकम वित्तीय वर्ष के अंत में साल में एक बार आपके खाते में जमा होती है। इसका कैलकुलेशन कुछ इस तरह से किया जाता है-

मंथली क्लोजिंग बैलेंस: ईपीएफओ हर महीने के अंत में आपके खाते के बैलेंस को आधार बनाता है। पिछले वित्त वर्ष के क्लोजिंग बैलेंस पर पूरे साल का ब्याज मिलता है।

मासिक दर: वार्षिक ब्याज दर को 12 से भाग दिया जाता है, जैसे- 8.25% ÷ 12 = 0.6875% प्रति माह

नया योगदान: महीने के दौरान जमा हुई नई राशि को उस महीने के ब्याज में नहीं गिना जाता बल्कि उसे अगले महीने के ओपनिंग बैलेंस में शामिल किया जाता है। साल के दौरान जमा होने वाले नए पीएफ योगदान पर ब्याज, जमा होने के अगले महीने की पहली तारीख से 31 मार्च तक मिलता है।

पैसा निकालने पर नियम: अगर आपने साल के बीच में पीएफ का पैसा निकाला है तो निकाली गई रकम पर ब्याज केवल निकासी वाले महीने से ठीक पहले तक ही मिलता है। उसके बाद उस हिस्से पर ब्याज नहीं मिलता।

राउंड ऑफ और टोटल: सभी 12 महीनों के ब्याज को जोड़कर वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में क्रेडिट किया जाता है। आखिरी में EPFO कुल ब्याज की रकम को नजदीकी पूरे रुपये में राउंड ऑफ कर देता है।

इस बार नए CITES सिस्टम की वजह से न सिर्फ ब्याज काफी जल्दी मिल रहा है। बल्कि आगे चलकर क्लेम, अकाउंट ट्रांसफर और दूसरी EPFO सेवाएं भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगी।

मेंबर पासबुक पोर्टल पर कैसे चेक करें अपना बैलेंस? स्टेप बाई स्टेप तरीका

अगर आप यह चेक करना चाहते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज आपके खाते में क्रेडिट हुआ है या नहीं तो सुनिश्चित करें कि आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट हो। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:-

स्टेप 1: सबसे पहले EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपने UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी (OTP) को दर्ज करके अपनी पहचान सत्यापित करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आप अपना लेटेस्ट ईपीएफ बैलेंस देख सकते हैं और यह भी चेक कर सकते हैं कि FY26 का ब्याज क्रेडिट हुआ है या नहीं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)

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EPFO Alert: PF फंड का क्लेम और e-नॉमिनेशन के लिए तुरंत अपडेट करें प्रोफाइल फोटो, नहीं तो हो सकती है परेशानी

EPFO Alert: अगर आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्य हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। EPFO ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर लें। यह फोटो ई-नॉमिनेशन (e-nomination) की प्रक्रिया पूरी करने और ऑनलाइन PF फंड के क्लेम के दौरान पहचान वेरीफाई करने में अहम भूमिका निभाती है। प्रोफाइल फोटो अपडेट नहीं होने पर आपको कुछ सर्विस का लाभ लेने में देरी या परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यह प्रोफाइल फोटो पीएफ सदस्यों की एक विजुअल पहचान के रूप में काम करती है। इससे विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के दौरान ईपीएफओ को खाताधारक की पहचान वेरिफाई करने में मदद मिलती है। हालांकि सभी ईपीएफओ लेन-देन के लिए फोटो अपलोड करना अनिवार्य नहीं है। लेकिन ई-नॉमिनेशन जैसी कुछ खास सेवाओं के लिए यह बेहद जरूरी है। प्रोफाइल फोटो अपडेट रहने से पीएफ दावों की प्रोसेसिंग के दौरान होने वाली देरी से बचा जा सकता है।

e-Nomination के लिए क्यों जरूरी है प्रोफाइल फोटो?

EPFO के मुताबिक, सदस्यों को अपनी प्रोफाइल में हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी चाहिए। यह e-Nomination पूरा करने के लिए जरूरी है। e-Nomination के जरिए सदस्य अपने परिवार के किसी सदस्य या पात्र व्यक्ति को नामांकित कर सकते हैं। ताकि सदस्य की मृत्यु होने पर EPF, Employees Pension Scheme (EPS) और Employees’ Deposit Linked Insurance (EDLI) का लाभ आसानी से नामित व्यक्ति को मिल सके।

PF क्लेम के निपटारे में मिलती है मदद

यदि सदस्य की प्रोफाइल पूरी तरह अपडेट रहती है, तो EPFO को ऑनलाइन पहचान सत्यापित करने में आसानी होती है। इससे PF से जुड़े दावों के निपटारे में कम समय लगता है और कागजी प्रक्रिया भी घट जाती है। वैध e-Nomination होने पर नामित व्यक्ति को क्लेम सेटलमेंट में भी कम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

इन जानकारियों को भी रखें अपडेट

EPFO ने सदस्यों को सलाह दी गई है कि प्रोफाइल फोटो के अलावा आधार, PAN, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भी पोर्टल पर सही तरीके से लिंक और वैरीफाई रखें। इससे e-Nomination, ऑनलाइन PF निकासी, पेंशन संबंधी सेवाओं और अन्य डिजिटल सुविधाओं का लाभ बिना किसी बाधा के लिया जा सकता है। साथ ही अपने पहचान प्रमाण दस्तावेजों को भी अपडेट रखें। इन सभी जानकारियों को अपडेट रखने से ई-नॉमिनेशन, ऑनलाइन पीएफ निकासी (PF Withdrawal) और पेंशन से जुड़ी डिजिटल सेवाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के तेजी से मिलता है।

EPFO पोर्टल पर प्रोफाइल फोटो अपडेट करने के आसान स्टेप्स

EPFO सदस्य इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर सकते हैं:-

पोर्टल पर लॉग इन करें: सबसे पहले ईपीएफओ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (EPFO Unified Member Portal) पर जाएं। फिर अपने यूएएन (UAN), पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

प्रोफाइल सेक्शन में जाएं: डैशबोर्ड पर जाने के बाद ‘Profile’ या ‘View’ सेक्शन पर नेविगेट करें और प्रोफाइल फोटो अपलोड/अपडेट करने के विकल्प को चुनें।

फोटो का चयन करें: एक हालिया पासपोर्ट साइज फोटो चुनें जो पोर्टल की तय फाइल साइज और फॉर्मेट की शर्तों को पूरा करती हो।

अपलोड और सेव करें: चुनी गई फोटो को अपलोड करें और बदलावों को सेव (Save) कर दें।

वेरीफाई करें: आगे की ई-नॉमिनेशन प्रक्रिया या ऑनलाइन क्लेम फाइल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि अपडेट की गई फोटो आपके प्रोफाइल पर सही तरीके से दिख रही है या नहीं।

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HDFC Bank के सीईओ की बैसिक सैलरी ₹3.31 करोड़, बैठक में शामिल होने पर नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को ₹1.20 करोड़

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक की एनुअल रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि बैंक के एमडी और सीईओ समेत इसके एगीक्यूटिव्स और नॉन-एग्जीक्यूटिव्स डायरेक्टर्स की वित्त वर्ष 2026 में कितनी कमाई हुई। इसमें सैलरी, एलाउंसेज, परफॉरमेंस बोनस, रिटायरमेंट बेनेफिट्स, स्टॉक ऑप्शंस और सिटिंग फीस शामिल हैं। स्टॉक ऑप्शंस एंप्लॉयीज को दिया जाने वाला एक्स्ट्रा बेनेफिट है जिसके तहत एंप्लॉयी को कंपनी के शेयर भविष्य में एक तय कीमत यानी एक्सरसाइज प्राइस पर खरीदने का हक मिलता है।

HDFC Bank के टॉप एग्जीक्यूटिव्स की FY26 में कितनी कमाई

पहले बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन की बात करें तो उन्हें वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3.31 करोड़ की बेसिक सैलरी, ₹3.63 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाओं के रूप में, ₹39.70 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹49.64 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स के रूप में मिले। इसके अलावा उन्हें ₹7.29 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस मिला और वित्त वर्ष 2026 के दौरान 4,28,405 स्टॉक ऑप्शंस भी एलॉट हुए।

एचडीएफसी बैंक के डिप्टी एमडी कैजाद भरूचा को ₹3.60 करोड़ की बेसिक सैलरी और ₹4 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलीं। उन्हें ₹43.16 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹53.95 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स भी मिला तो उनका परफॉरमेंस बोनस ₹8.57 करोड़ रहा। कैजाद भरूचा को 6,23,651 स्टॉक ऑप्शंस मिले, जो बैंक के सभी पूर्णकालिक डायरेक्टर्स में सबसे अधिक था।

बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वी श्रीनिवास रंगन को ₹4.03 करोड़ की बेसिक सैलरी, ₹2.98 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाएं, ₹48.32 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹60.40 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स मिले। इसके अलावा उन्हें ₹3.18 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस मिला तथा वित्त वर्ष 2026 में 2,93,538 स्टॉक ऑप्शंस एलॉट हुए।

बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भावेश जावेरी का कार्यकाल 18 अप्रैल 2026 को समाप्त हो चुका है। उन्हें वित्त वर्ष 2026 में ₹2.02 करोड़ की बेसिक सैलरी, ₹2.53 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाएं, ₹24.26 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹30.33 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स मिला। उन्हें ₹2.02 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस भी मिला और 1,38,542 स्टॉक ऑप्शंस मिला। बैंक की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक परफॉरमेंस बोनस में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ग्रुप हेड के रूप में उनके परफॉरमेंस के लिए नकद बोनस भी शामिल था।

नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स में सबसे अधिक संदीप पारेख को ₹1.20 करोड़ की सिटिंग फीस मिली। इसके बाद एमडी रंगनाथ को ₹96 लाख, रेणु कर्नाड को ₹83 लाख, हर्ष कुमार भनवाला ₹79 लाख, लिली वडेरा को ₹69 लाख, अतनु चक्रवर्ती को ₹59 लाख, सुनीता महेश्वरी को ₹45 लाख, संतोष केशवन को ₹40 लाख और अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री को ₹35 लाख की सिटिंग फीस मिली। सिटिंग फीस के अलावा पार्ट-टाइम चेयरमैन को छोड़कर सभी नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स को आरबीआई के कॉरपोरेट गवर्नेंस फ्रेमवर्क के हिसाब से ₹30 लाख का फिक्स्ड पारिश्रमिक भी मिला।

पार्ट टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती को ₹30 लाख की बजाय ₹48.25 लाख का फिक्स्ड पारिश्रमिक मिला। बैंक की सालाना रिपोर्ट के हिसाब से आरबीआई ने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए उन्हें ₹50 लाख के फिक्स्ड पारिश्रमिक को मंजूरी दी थी लेकिन चूंकि चक्रवर्ती ने 18 मार्च 2026 को इस्तीफा दे दिया था, इसलिए उन्हें प्रो-राटा बेसिस यानी अनुपातिक आधार पर ₹48.25 लाख का पेमेंट मिला। बोर्ड और कमेटी की बैठकों में हिस्सा लेने के लिए मिले ₹59 लाख के सिटिंग फीस को जोड़कर वित्त वर्ष 2026 में उन्हें ₹1.07 करोड़ मिले। इसके अलावा इस्तीफे की तारीख तक उन्हें आधिकारिक और व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए एक कार भी दी गई थी।

सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 30 मार्च 2026 को फिर से स्वतंत्र निदेशक के तौर पर चुनी गईं सुनीता माहेश्वरी को वित्त वर्ष 2026 के दौरान आनुपातिक आधार पर निश्चित पारिश्रमिक मिला। बैंक के अनुसार उनके कार्यकाल के बाकी अवधि का पारिश्रमिक शेयरहोल्डर्स और आरबीआई की मंजूरी के हिसाब से अगले वित्तीय वर्ष यानी FY2027 में दिया जाएगा।

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PF Balance Check: 15 जुलाई से पहले EPFO ने दी बड़ी राहत, शुरू हुआ पासबुक पोर्टल; लेकिन यूएएन एक्टिवेशन का बदल गया तरीका

EPFO Passbook Portal Online UAN Activation: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ी राहत और एक बड़ा अपडेट सामने आया है। ईपीएफओ ने पिछले लगभग दो सप्ताह से बंद पड़े अपने EPFO Passbook Portal को मेंटेनेंस के बाद आखिरकार दोबारा शुरू कर दिया है। अब पीएफ खाताधारक आसानी से लॉग इन करके अपना अकाउंट स्टेटमेंट देख सकते हैं।

यह पोर्टल जून के आखिरी हफ्ते से सिस्टम अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस के कारण बंद था। हालांकि, पासबुक पोर्टल के दोबारा शुरू होने के साथ ही ईपीएफओ ने यूएएन (UAN) एक्टिवेशन को लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव कर दिया है, जिसके बारे में हर नौकरीपेशा को जानना जरूरी है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरी खबर क्या है।

1. आ रहा है 8.25% ब्याज का पैसा, ऐसे चेक करें बैलेंस

यह पासबुक पोर्टल ऐसे समय पर चालू हुआ है जब ईपीएफओ 15 जुलाई से सब्सक्राइबर्स के खातों में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% की दर से सालाना ब्याज का पैसा क्रेडिट करना शुरू करने जा रहा है। करोड़ों पीएफ मेंबर्स के लिए यह बेहद जरूरी था कि वे समय पर अपनी पासबुक चेक कर सकें कि उनके खाते में ब्याज का पैसा आया है या नहीं।

दिखेगा चुनिंदा सालों का डेटा: पोर्टल पर लॉग इन करने पर अब एक नोटिस दिख रहा है, जिसमें लिखा है कि हाल के वित्तीय वर्षों के ट्रांजैक्शन और बैलेंस तुरंत उपलब्ध हैं। हालांकि, बहुत पुराने सालों का डेटा अभी सिस्टम में ट्रांसफर किया जा रहा है, जो अगले कुछ दिनों में दिखने लगेगा। इसके लिए मेंबर्स को कुछ करने की जरूरत नहीं है, यह ऑटोमैटिक प्रोसेस है।

2. बड़ा झटका: वेबसाइट से UAN एक्टिवेशन की सुविधा बंद

सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड करने के बाद ईपीएफओ ने एक बड़ा बदलाव किया है। अब तक कर्मचारी ईपीएफओ के ‘यूनिफाइड मेंबर पोर्टल’ पर जाकर अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट कर लेते थे, लेकिन अब इस वेब-बेस्ड यूएएन एक्टिवेशन सुविधा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। नया पोर्टल अब यूजर्स को एक नोटिस दिखा रहा है, जिसके मुताबिक अब वेबसाइट से यूएएन एक्टिवेट नहीं होगा।

3. अब कैसे होगा UAN एक्टिवेट? नोट कर लें नया तरीका

ईपीएफओ ने सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए यूएएन एक्टिवेशन की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और मोबाइल-बेस्ड कर दिया है:

UMANG ऐप का करना होगा इस्तेमाल: अब कर्मचारियों को अपना यूएएन एक्टिवेट करने के लिए अपने मोबाइल में सरकारी UMANG ऐप डाउनलोड करना होगा।

फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT): उमंग ऐप के जरिए यूएएन एक्टिवेट करने के लिए अब आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। यानी अब चेहरा स्कैन होने के बाद ही आपका यूएएन एक्टिवेट हो पाएगा।

4. तकनीकी अपग्रेड का हिस्सा है यह बदलाव

ईपीएफओ ने 3 जुलाई से चरणबद्ध तरीके से अपने नए और अपग्रेड किए गए ‘यूनिफाइड मेंबर पोर्टल’ को रोल आउट करना शुरू किया था। विभाग का कहना है कि इस बड़े टेक्नोलॉजी ओवरहॉल का उद्देश्य पीएफ खातों की सुरक्षा को बेहद मजबूत करना, सिस्टम की गड़बड़ियों को दूर करना और यूजर्स को एक बेहतर डिजिटल अनुभव देना है।

भले ही पुराने सालों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री दिखने में कुछ दिनों का समय लग सकता है, लेकिन पोर्टल लाइव होने से अब करोड़ों सब्सक्राइबर्स अपनी मंथली कंट्रीब्यूशन हिस्ट्री और आने वाले ब्याज पर आसानी से नजर रख सकेंगे।

Retirement Planning: मंथली ₹5,000 SIP और ₹12,500 PPF से कैसे बन सकता है ₹2 करोड़ का फंड?

क्या आपने रिटायरमेंट प्लानिंग की है? अगर नहीं की है तो इसे जल्द पूरा कर लें। लंबी अवधि में नियमित रूप से निवेश करने पर रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड आसानी से तैयार हो जाता है। कई लोग देर से निवेश शुरू करते हैं, जिससे उनके पैसे को बढ़ने का पर्याप्त समय नहीं मिलता है। आप हर महीने 5000 रुपये के सिप और 12,500 रुपये के पीपीएफ में निवेश से आसानी से 2 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं।

पीपीएफ टैक्स के लिहाज से काफी फायदेमंद स्कीम

पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबी अवधि के निवेश के लिए काफी अट्रैक्टिव स्कीम है। इस स्कीम में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। टैक्स के लिहाज से यह स्कीम काफी फायदेमंद है। यह एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट की कैटेगरी में आती है। इसका मतलब है कि न तो इसमें पैसा जमा करने पर टैक्स लगता है, न तो इंटरेस्ट पर टैक्स लगता है और न ही मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स लगता है।

पीपीएफ में मैच्योरिटी पर भी नहीं लगता है टैक्स

मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने बताया कि पीपीएफ के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगता है। यह पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। यह स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। अगर आप हर महीने 12500 रुपये का निवेश इस स्कीम में करते हैं तो 15 साल में आप कुल 22,50,000 रुपये का निवेश करते हैं। इस पर आपको 18,18,209 रुपये इंटरेस्ट मिलेगा। इस तरह मैच्योरिटी पर आपको 40,68,209 रुपये मिलेंगे।

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 5000 का सिप

आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में सिप से हर महीने 5000 रुपये का निवेश 15 साल तक करना है। इस तरह आप 15 साल में कुल 9,00,000 रुपये का निवेश करेंगे। सालाना 12 फीसदी रिटर्न के हिसाब से 15 साल आपका पैसा बढ़कर 23,79,657 रुपये हो जाएगा। अगर इसमें पीपीएफ से मिले 40,68,209 रुपये को मिला दिया जाए तो कुल 64,47,866 रुपये हो जाते हैं। इस पैसे को आपको म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त निवेश करना होगा।

ऐसे तैयार हो जाएगा 25 साल में 2 करोड़ का फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में एकमुश्त 64,47,866 रुपये का निवेश 10 साल में बढ़कर 2,00,26,093 रुपये हो जाएगा। इस कैलकुलेशन के लिए सालाना 12 फीसदी रिटर्न का अंदाजा लगाया गया है। इस तरह आपको सिर्फ 15 साल तक हर महीने पीपीएफ में 12,500 रुपये और सिप में 5000 रुपये का निवेश करना है। 15 साल बाद आपको दोनों निवेश से मिले पैसे को म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में 10 साल के लिए निवेश करना है। इस तरह आपको निवेश सिर्फ 15 साल करना है। लेकिन, 2 लाख रुपये का फंड 25 साल में तैयार होगा।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स भी चुकाना होगा

एक बात आपको ध्यान में रखना होगा कि म्यूचुअल फंड में निवेश से हुए मुनाफे पर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस देना होगा। एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि आपको 23,79,657 रुपये पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा। यह टैक्स 2,97,457.125 रुपये बनेगा। इसे तीन लाख रुपये माना जा सकता है।

टैक्स चुकाने के बाद 25 साल कुछ महीने में तैयार होगा फंड

इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड में हर महीने 5000 रुपये निवेश करने पर टैक्स काटकर आपके हाथ में करीब 20,79,657 रुपये आएंगे। अब इसमें पीपीएफ से मिले पैसे को जोड़ देते हैं, क्योंकि पीपीएफ पर टैक्स नहीं लगता है। दोनों मिलकर 61,47,866 रुपये हो जाते है। इस पैसे को एकमुश्त निवेश करने पर 10 साल कुछ महीने में 2 करोड़ का फंड तैयार हो जाएगा।

Mutual Fund: ₹10000 की मंथली SIP से बन गए ₹97 लाख! इस धाकड़ म्यूचुअल फंड ने 16 साल में किया कमाल

Mirae Asset Large & Midcap Fund Return: म्यूचुअल फंड से पैसा बनाना अनुशासन और सब्र का खेल है। और जब ये दोनों मिल जाएं तो कैसी वेल्थ क्रिएट होती है, इसका एक जीता-जागता एक उदाहरण सामने आया है। मिराए एसेट लार्ज एंड मिडकैप फंड ने बाजार में अपने शानदार 16 साल पूरे कर लिए हैं।

फंड हाउस द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिन निवेशकों ने इस फंड की शुरुआत से ही हर महीने महज ₹10,000 की एसआईपी जारी रखी थी, उनका फंड 31 मई 2026 तक बढ़कर लगभग ₹97 लाख हो चुका है। आइए समझते हैं इस स्कीम के रिटर्न का पूरा रिपोर्ट कार्ड।

₹19 लाख निवेश पर मिले ₹97 लाख

मिराए एसेट म्यूचुअल फंड के डेटा के अनुसार, लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट ने निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है। 16 साल में ₹10,000 प्रति माह के हिसाब से निवेशक ने कुल ₹19 लाख जमा किए। 31 मई 2026 तक यह ₹19 लाख का निवेश बढ़कर ₹96.9 लाख हो गया। इस एसआईपी निवेश पर फंड ने 18.44% का जोरदार XIRR डिलीवर किया है।

लंपसम इन्वेस्टमेंट करने वाले भी हुए मालामाल

अगर किसी निवेशक ने 9 जुलाई 2010 को इस फंड के ‘रेगुलर प्लान-ग्रोथ’ ऑप्शन में सिर्फ ₹10,000 का एकमुश्त निवेश किया होता, तो वह रकम आज बढ़कर ₹1,50,690 हो चुकी होती। इसके मुकाबले, अगर यही पैसा इस स्कीम के बेंचमार्क में लगाया गया होता, तो वह सिर्फ ₹76,908 ही बनता।

बेंचमार्क और सेंसेक्स को पछाड़ा

पिछले 15 वर्षों के प्रदर्शन को देखें तो इस फंड ने अपने बेंचमार्क और इंडेक्स के मुकाबले काफी आउटपरफॉर्म किया है। पिछले 15 सालों में इस फंड ने 18.85% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया है। इसके मुकाबले स्कीम के बेंचमार्क ‘Nifty LargeMidcap 250 TRI’ ने 14.60% का रिटर्न दिया। वहीं, एडिशनल बेंचमार्क ‘BSE Sensex TRI’ इस दौरान सिर्फ 11.22% का रिटर्न ही दे पाया।

₹42,000 करोड़ से ज्यादा का फंड मैनेजमेंट

यह स्कीम एक ओपन-एंडेड इक्विटी योजना है, जो मुख्य रूप से भारतीय लार्ज-कैप और मिड-कैप के शेयरों में पैसा लगाती है। 31 मई 2026 तक यह फंड ₹42,792.20 करोड़ के विशाल एसेट बेस को मैनेज कर रहा है। इस फंड की सफलता के पीछे इसके अनुभवी फंड मैनेजर नीलेश सुराना हैं, जो इसकी शुरुआत से ही इससे जुड़े हैं। जनवरी 2019 से अंकित जैन भी सह-फंड मैनेजर के रूप में उनके साथ कमान संभाल रहे हैं।

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एक्सपर्ट नोट: हालांकि इस फंड का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है, लेकिन फंड हाउस का कहना है कि यह स्कीम किसी भी प्रकार के गारंटीड रिटर्न का वादा नहीं करती है। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होता है, इसलिए निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।