Skyways Air Services IPO: ₹583 करोड़ के इश्यू के​ लिए ₹131-₹138 है प्राइस बैंड, 24 अगस्त से लगा सकेंगे पैसे

मेनबोर्ड सेगमेंट में स्काईवेज एयर सर्विसेज का IPO 24 अगस्त को खुलने वाला है। कंपनी का इरादा ₹582.80 करोड़ जुटाने का है। इस इश्यू में ₹398.80 करोड़ के 2.89 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹184 करोड़ के 1.33 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर यशपाल शर्मा, तरुण शर्मा और निवेशक हिमांशु छाबड़ा, रोहित सहगल शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। IPO में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹131-₹138 प्रति शेयर है। लॉट साइज 100 शेयर है।

इश्यू की क्लोजिंग 27 अगस्त को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 28 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 1 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। IPO के लिए होलानी कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, शैनोन एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड और दौलत फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है।

क्या करती है Skyways Air Services

स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड (SASL) एक जानी-मानी लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी है। एक फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी लॉजिस्टिक्स मैनेजर की तरह काम करती है। ऐसी कंपनी आमतौर पर खुद माल को एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाती, बल्कि ग्राहक की ओर से माल ढोने की जगह (शिपमेंट स्पेस) बुक करती है, सीमा शुल्क की प्रक्रिया संभालती है और अलग-अलग परिवहन कंपनियों के जरिए माल को हवाई, समुद्री, सड़क या रेल मार्ग से पहुंचाने की व्यवस्था करती है।

SASL लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई तरह की सेवाएं देती है, जैसे कि एयर और ओशन फ्रेट फॉरवर्डिंग, ट्रकिंग, कस्टम्स ब्रोकिंग, वेयरहाउसिंग, टेक्नोलॉजी पर बेस्ड एक्सप्रेस कार्गो और पार्सल डिलीवरी, और अन्य वैल्यू-एडेड सेवाएं। कंपनी की बाजार में मजबूत स्थिति और ग्लोबल कनेक्टिविटी है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

SASL अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और अपनी सब्सिडियरी Forin Container Line Pvt.Ltd. का कर्ज चुकाने के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। इस पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

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कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹174.54 करोड़ जुटाए। BSE पर अपलोड किए गए ​सर्कुलर के मुताबिक, SASL ने ₹138 प्रति शेयर के भाव पर 17 एंकर इनवेस्टर्स को 1.26 करोड़ शेयर एलोकेट किए। एंकर बुक में नोमुरा सिंगापुर, सिटी ग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरिशस, होलानी वेंचर कैपिटल फंड-I, इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस और ASAS ग्लोबल फंड जैसे दिग्गजों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड और टॉरस एसेट मैनेजमेंट ने 6 स्कीम्स के जरिए निवेश किया। उन्हें ₹69.69 करोड़ के 50.5 लाख शेयर अलॉट किए गए।

कंपनी की वित्तीय सेहत

SASL का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 25 प्रतिशत बढ़कर ₹2,839.67 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹63.52 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹2,270.99 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹48.14 करोड़ रहा था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹624 करोड़ की उधारी थी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 26.81 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FPI ने भारतीय शेयरों में बढ़ाई खरीद, अगस्त में अब तक लगाए ₹23544 करोड़

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज कर दी है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

हाल की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों की ओर से साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजारों में सेलिंग का आंकड़ा करीब 2,30,000 करोड़ रुपये रहा है। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग की थी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार का कहना है कि FPI की भारतीय बाजार में वापसी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कंपनी के जून तिमाही के बेहतर नतीजे, रुपये की स्थिरता और व्यापक बाजार में कंपनियों की ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं प्रमुख हैं। विदेशी निवेशक आकर्षक वैल्यूएशंस वाले बड़े बैंकिंग और आईटी शेयरों में तगड़ी खरीद नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय वे हाई वैल्यूएशंस के बावजूद चुनिंदा मझोली कंपनियों के शेयरों में पैसे लगा रहे हैं।

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बाजार की आगे की दिशा के लिए निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव पर रहेगी। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी ऋण या बॉन्ड बाजार में भी दिखाई दी है। अगस्त में अब तक उन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत ऋण बाजार में 852 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वहीं जनरल रूट के जरिए 995 करोड़ रुपये निकाले हैं।

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7 Financial Rules: अमीर बनने के 7 ‘सीक्रेट’ रूल्स! तेजी से बढ़ेगा आपका बैंक बैलेंस

Personal Finance Tips: क्या आप भी हर महीने अच्छी सैलरी कमाने के बाद भी बैंक बैलेंस खाली होने से परेशान रहते हैं? सच यह है कि वेल्दी बनने के लिए सिर्फ ज्यादा कमाना काफी नहीं होता, बल्कि कमाए हुए पैसे को सही तरीके से मैनेज, सेव और इन्वेस्ट करना भी उतना ही जरूरी है।

अगर आपकी बचत नहीं हो पा रही है और महीने के अंत में पैसे खत्म हो जाते हैं, तो ये 7 आसान और असरदार फाइनेंशियल हैबिट्स आपके काम आ सकती हैं। इन्हें अपनाकर आप अपनी फाइनेंशियल सिक्योरिटी मजबूत कर सकते हैं और लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।

1. सबसे पहले बनाएं इमरजेंसी फंड

जिंदगी में नौकरी जाने, अचानक बीमारी या किसी अन्य इमरजेंसी का सामना कभी भी करना पड़ सकता है। ऐसे समय में इमरजेंसी फंड ही आपका सबसे बड़ा सहारा बनता है। कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर राशि इमरजेंसी फंड में रखें।इसे किसी सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड में रखें ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके।

2. सैलरी आते ही फॉलो करें ‘Pay Yourself First’ रूल

ज्यादातर लोग महीने भर खर्च करने के बाद बचे हुए पैसे को सेव करने की कोशिश करते हैं और अंत में कुछ नहीं बचता। सैलरी अकाउंट से बचत या म्यूचुअल फंड SIP के लिए ऑटो-ट्रांसफर सेट करें। सैलरी क्रेडिट होते ही तय रकम अपने आप सेव हो जाएगी और आपके पास गैर-जरूरी खर्चों का विकल्प नहीं बचेगा।

3. डेली खर्चों को ट्रैक करना शुरू करें

अक्सर छोटी-छोटी खरीदारी और बेवजह के खर्चे महीने के बजट को बिगाड़ देते हैं।किसी बजटिंग ऐप, एक्सेल शीट या डायरी में रोज के छोटे-बड़े खर्चों को नोट करें।इससे आपको पता चलेगा कि आपका पैसा कहां बेकार जा रहा है, जैसे कि वे ओवर-सब्सक्रिप्शन या बेवजह की ऑनलाइन शॉपिंग जिन्हें बंद किया जा सकता है।

4. क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल करें

क्रेडिट कार्ड एक बेहतरीन टूल है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल आपको कर्ज के जाल में फंसा सकता है। हमेशा ड्यू डेट से पहले पूरे बिल का भुगतान करें। इससे भारी-भरकम ब्याज और पेनल्टी से बचाव होगा और आपका सिबिल स्कोर भी मजबूत रहेगा।

5. कम उम्र में शुरू करें इन्वेस्टमेंट

जितनी जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, कम्पाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। शुरुआत के लिए कम लागत वाले इंडेक्स फंड्स या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स बेहतर विकल्प माने जाते हैं। अपने फाइनेंशियल गोल्स और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से ही सही विकल्प चुनें।

6. अपनी स्किल्स को अपग्रेड करें

आपकी सबसे बड़ी एसेट आप खुद हैं। प्रोफेशनल स्किल्स में सुधार करने से आपकी अर्निंग पोटेंशियल बढ़ती है। नए सर्टिफिकेशन्स, ट्रेनिंग या वर्कशॉप के जरिए अपनी स्किल बढ़ाएं। अच्छी स्किल्स आपको बेहतर जॉब और ज्यादा सैलरी पाने में मदद करेगी, जिससे निवेश के लिए ज्यादा पैसा बचेगा।

7. सैलरी नेगोशिएशन में न हिचकिचाएं

आपकी मौजूदा सैलरी ही आपकी भविष्य की बोनस, सेविंग्स और रिटायरमेंट फंड की नींव तय करती है। अपनी जॉब रोल और इंडस्ट्री के हिसाब से मिलने वाले सही पे-स्केल की जानकारी रखें। जॉब ऑफर या अप्रेजल के समय अपने काम और वैल्यू के हिसाब से सही सैलरी मांगने में बिल्कुल संकोच न करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी की हत्या:19 साल की बेटी के सामने लुटेरे ने पिता को गोली मारी

अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी सुरेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना टेनेसी राज्य के जैक्सन शहर की है। पुलिस के मुताबिक, एक नकाबपोश बदमाश पैसे लूटने के इरादे से दुकान में घुसा। कैश लेने के बाद उसने सुरेश पटेल पर फायरिंग कर दी। घटना के समय उनकी 19 साल की बेटी भी दुकान में मौजूद थी। उसने अपनी आंखों के सामने यह वारदात देखी। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। सुरेश पटेल गुजरात के मेहसाणा जिले के रहने वाले थे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सुरेश पटेल ने घटना से सिर्फ 3 दिन पहले ही यह दुकान खरीदी थी। गोलीबारी के बाद मौके से फरार हो गया आरोपी वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, एक नकाबपोश व्यक्ति दुकान में घुसा और कर्मचारियों से कैश की मांग की। पैसे मिलने के बाद उसने कई राउंड फायरिंग की। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने ग्रे रंग की हुडी, जींस और काले बूट पहन रखे थे। उसके चेहरे पर मास्क था। वारदात के बाद वह सफेद रंग की कार में फरार हो गया। आरोपी की तलाश कर रही पुलिस पुलिस को इस घटना से जुड़ी CCTV फुटेज मिली है। पुलिस ने लोगों से आरोपी के बारे में जानकारी देने की अपील भी की है। खबर अपडेट की जा रही है….

LPG Rate 23 August 2026: 23 अगस्त को कितने बढ़े LPG सिलेंडर के दाम? दिल्ली से बिहार तक जानें अपने शहर का रेट

LPG Rate 23 August 2026: रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर की कीमतें आम परिवारों के घरेलू बजट का एक अहम हिस्सा होती हैं। गैस के दाम बढ़ने या घटने का सीधा असर महीने के कुल खर्च पर दिखाई देता है। 23 अगस्त 2026 को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। यानी आज उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने के लिए पहले से अधिक पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। कीमतें स्थिर रहने से परिवारों को फिलहाल राहत मिली है और उनके मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। हालांकि, LPG की कीमत सभी शहरों में एक समान नहीं होती।

स्थानीय टैक्स, परिवहन खर्च और अन्य शुल्कों के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में सिलेंडर के दामों में अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे सिलेंडर बुक करने या खरीदने से पहले अपने शहर में लागू LPG की ताजा कीमत जरूर जांच लें। इससे उन्हें सही कीमत की जानकारी मिलेगी और अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकेगा।

आपके शहर में LPG सिलेंडर का क्या भाव है?

शहर के हिसाब से LPG की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। स्थानीय टैक्स और अन्य लागतों की वजह से एक ही सिलेंडर के लिए अलग-अलग शहरों में ग्राहकों को अलग कीमत चुकानी पड़ सकती है।

शहरघरेलू LPG (14.2 किलो)कमर्शियल LPG (19 किलो)
कोलकाता₹968.00₹2,872.50
मुंबई₹941.50₹2,691.50
चेन्नई₹957.50₹2,906.00
गुड़गांव₹950.50₹2,755.00
नोएडा₹939.50₹2,738.00
बैंगलोर₹944.50₹2,821.00
भुवनेश्वर₹968.00₹2,908.00
चंडीगढ़₹951.50₹2,760.00
हैदराबाद₹994.00₹2,985.00
जयपुर₹945.50₹2,765.50
लखनऊ₹979.50₹2,860.50
पटना₹1,031.50₹3,018.00
तिरुवनंतपुरम₹951.00

कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा क्यों?

घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें अलग होती हैं। 19 किलोग्राम का सिलेंडर मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से इसकी कीमत घरेलू LPG सिलेंडर के मुकाबले अधिक रहती है और इसका खर्च कारोबार की संचालन लागत में शामिल होता है।

घर बैठे ऐसे चेक करें LPG का ताजा रेट

अगर आप Indane Gas का इस्तेमाल करते हैं, तो Indian Oil की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने राज्य और जिले का चयन करके LPG सिलेंडर की मौजूदा कीमत देख सकते हैं। Bharat Gas ग्राहक ebharatgas.com पर उपलब्ध ‘Quick Book & Pay’ विकल्प के जरिए सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, HP Gas उपभोक्ता HP Pay ऐप से LPG सिलेंडर का ताजा रेट चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, UMANG ऐप के जरिए LPG रिफिल बुक करने के साथ उसकी मौजूदा कीमत भी देखी जा सकती है।

LPG की कीमतों पर रहेगी नजर

फिलहाल घरेलू LPG के दाम स्थिर रहने से परिवारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। हालांकि, आने वाले दिनों में तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में किसी भी संभावित बदलाव पर उपभोक्ताओं की नजर बनी रहेगी।

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तमिलनाडु के सरकारी अस्पताल में पैदा हुए बच्चों को मिलेगी सोने की अंगूठी, 1.28 लाख रिंग का वर्क ऑर्डर जारी

तमिलनाडु सरकार ने नवजात बच्चों के लिए शुरू की जाने वाली ‘मामा गोल्ड रिंग योजना’ के तहत करीब 1.28 लाख सोने की अंगूठियां बनवाने का ऑर्डर दिया है। इन अंगूठियों पर करीब 220 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार ने इसके लिए दो बड़ी ज्वेलरी रिटेल चेन को काम सौंपा है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

इस योजना के तहत चार महीने के दौरान एक लाख से ज्यादा नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी दी जाएगी। सरकार इस कल्याणकारी योजना की शुरुआत 15 सितंबर से करने जा रही है। इसी दिन द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता सीएन अन्नादुरई की जयंती भी है।

बता दें कि नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने का यह वादा टीवीके (TVK) के चुनावी घोषणापत्र में शामिल था।

22 जून से अस्पताल में पैदा हुए बच्चों को मिलेगा योजना का लाभ

इस स्कीम का फायदा उन नवजात बच्चों को मिलेगा जो 22 जून को सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का जन्मदिन भी है।

एक मोटे अनुमान के मुताबिक, लगभग 128.5 किलोग्राम वजन वाली 1,28,499 अंगूठियों (22-कैरेट) की लागत 220 करोड़ रुपये होगी और तमिलनाडु सरकार ने कुल 4,41,667 अंगूठियों (एक साल के लिए) की सप्लाई के लिए 755.83 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

हालांकि, अंगूठियों के शुरुआती बैच की अंतिम लागत में बदलाव हो सकता है, लेकिन राज्य सरकार ने मौजूदा बाजार दरों पर सोने का भुगतान करने का जिम्मा लिया है।

गोल्ड रिंग सप्लाई का जिम्मा दो कंपनियों को मिला

अंगूठियां बनाने और सप्लाई करने में जॉयअलुक्कास (Joyalukkas) को 70 फीसदी और कल्याण ज्वेलर्स (Kalyan Jewellers) को 30 फीसदी हिस्सा मिला है। इसके तहत जॉयअलुक्कास करीब 89,949 अंगूठियां, जबकि कल्याण ज्वेलर्स 38,550 अंगूठियां तैयार करेगा।

सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में आज की बाजार दर के हिसाब से, इस स्कीम के तहत एक सोने की अंगूठी की लागत सरकार को लगभग 14,850 रुपये प्रति ग्राम पड़ेगी।

सरकार ने शुक्रवार देर रात बताया कि तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (TNMSC) ने जून से सितंबर तक लाभार्थियों के लिए जरूरी 1,28,499 सोने की अंगूठियां सप्लाई करने के लिए जोयालुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स को 70:30 के अनुपात में वर्क ऑर्डर जारी किए हैं।

सीएम विजय ने विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का किया था ऐलान

बता दें कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना का ऐलान किया था, जिसका लाभ सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा। इस योजना का मकसद सरकारी अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा देना है।

सरकार की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, “एक-एक ग्राम वजन वाली 4,41,667 सोने की अंगूठियां सप्लाई करने के सरकारी आदेश के बाद, 11 कंपनियों ने 14 जुलाई को तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के टेंडर में हिस्सा लिया और TN टेंडर्स पोर्टल के जरिए अपनी कीमत की जानकारी जमा की।”

जॉयअलुक्कास ने एक ग्राम सोने की कीमत को छोड़कर सिर्फ 0.01 रुपये की सबसे कम बोली लगाई। इसमें प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्टेशन और BIS हॉलमार्किंग जैसे सभी अतिरिक्त खर्च शामिल थे।

सरकार ने बताया कि जब संबंधित कानूनों के तहत 10 अन्य बोलीदाताओं को जीतने वाली कीमत के बारे में बताया गया, तो कल्याण ज्वैलर्स ने भी उसी कीमत की बोली लगाई।

सरकार ने कहा, “थाईमामन गोल्ड रिंग स्कीम को तमिलनाडु सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का भरोसा बढ़ाने, सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चे के जन्म को यादगार बनाने और मातृत्व की खुशी व महत्व का जश्न मनाने के लिए लागू किया जा रहा है।”

1 पैसे की बोली पर विधानसभा में हंगामा

इस हफ्ते विधानसभा में इस स्कीम के टेंडर को लेकर जोरदार बहस हुई। विपक्षी पार्टियों DMK और AIADMK ने खरीद की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और “टेंडर के बहुत ही अजीब नतीजे” के बारे में पूछा, क्योंकि सफल बोली लगाने वाले ने अतिरिक्त शुल्क के तौर पर ₹0.01 (एक पैसा) की बोली लगाई थी।

विपक्षी पार्टियों के अनुसार, दूसरी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने अतिरिक्त शुल्क के तौर पर ₹410.97 से लेकर ₹15,000 से ज्यादा तक की बोली लगाई थी।

जॉयलुक्कास ने एक बयान में कहा: “इस टेंडर की कीमत लगभग 755 करोड़ रुपये है, जिसमें सोने की कीमत कुल खरीद मूल्य का मुख्य हिस्सा है।” कंपनी ने कहा कि उसने “मौजूदा सोने की कीमत से सिर्फ 1 पैसा ज्यादा का सांकेतिक सर्विस चार्ज” कोट किया था।

वहीं, विपक्ष ने सवाल उठाया कि यह खरीद तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के जरिए क्यों की गई और तर्क दिया कि TNMSC को सिर्फ दवाइयां, मेडिकल उपकरण खरीदने और हेल्थकेयर बिल्डिंग बनाने के लिए बनाया गया था।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह योजना राज्य की हेल्थकेयर सेवाओं में जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है।

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Awarapan 2 Budget vs Collection: 45 करोड़ के बजट में बनी ‘आवारापन 2’, इमरान हाशमी की फिल्म ने 3 गुना कमाया मुनाफा

Awarapan 2 Budget vs Collection: ‘आवारापन 2’ ठीक वही कर रही है, जिसकी उम्मीद इसके मेकर्स ने की थी – यानी लोगों को सिनेमाघरों तक वापस लाना। जबकि आपको जानकर हैरानी होगी कि रिलीज से पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस फिल्म में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इमरान हाशमी के लीड रोल वाली इस सीक्वल फिल्म ने शुरुआती दो दिनों में ही 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था, जबकि प्रोड्यूसर विशेष भट्ट का कहना है कि टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

कितना है फिल्म का बजट

जानकारी के मुताबिक फिल्म का बजट 30 से 45 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। हालांकि ये आंकड़े ऑफिशियल नहीं हैं। फिल्म प्रोड्यूसर विशेष भट्ट ने बताया थी कि उनकी फिल्म पर कोई भरोसा नहीं कर रहा था। हर किसी को फिल्म के फ्लॉप हो जाने का डर सता रहा था। टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

फिल्म ने कितनी कमाई की

2007 की फिल्म ‘आवारापन’ बेशक बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी, लेकिन इसका म्यूजिक और कहानी आज भी लोगों के जुबान पर चढ़े हैं। इसी का फायदा ‘आवारापन 2’ को पूरी तरह से मिला है। सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक ‘आवारापन 2’ ने 21.50 करोड़ के नेट कलेक्शन के साथ ओपनिंग की थी। भारत में ग्रॉस कलेक्शन 25.80 करोड़ रुपये रहा था। जबकि वर्ल्डवाइड इस फिल्म ने 27.80 करोड़ से ओपनिंग की थी।

वहीं 8वें दिन फिल्म ने भारत में आठवें दिन 5.50 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। इसके साथ ही, फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 119 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन अभी 141.87 करोड़ रुपये है। फ़िल्म विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। आठवें दिन, ‘आवारापन 2’ ने विदेशी बाजार में 1 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिससे इसका इंटरनेशनल कलेक्शन 27.30 करोड़ रुपये हो गया। फ़िल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 169.17 करोड़ रुपये है, जो इसे 170 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब ले आया है।

पहले दिन का कलेक्शन-22 करोड़

दूसरे दिन का कलेक्शन-33.75 करोड़

तीसरे दिन का कलेक्शन-26 करोड़

चौथे दिन का कलेक्शन-9.25 करोड़

पांचवें दिन का कलेक्शन-9.75 करोड़

छठवें दिन का कलेक्शन-6.75 करोड़

सातवें दिन का कलेक्शन-6 करोड़

आठवें दिन का कलेक्शन-5.75 करोड़

India Net (Sacnilk): 119.00 crore

India Gross (Sacnilk): 142.21 cr

Worldwide Gross: 169.17 crore

कितना कमाया मुनाफा

‘आवारापन 2’ ने 45 करोड़ के बजट के मुकाबले 74 करोड़ से 78.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट (164% से 175% रिटर्न) कमाया है, जो अपने एक बड़ा आंकड़ा है। फिल्म साल की तीसरी बिग ओपनर बनकर उभरी है। इससे पहले यशराज की ‘सैयारा’ और ‘धुरंधर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर तूफान लाया था।

यह फ़िल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ से टक्कर के बावजूद अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रही। लेकिन रिलीज़ से पहले कहानी कुछ और ही थी। ‘ज़ूम’ के साथ एक इंटरव्यू में, विशेष भट्ट – जिन्होंने बिलाल सिद्दीकी के साथ मिलकर इस फ़िल्म की कहानी भी लिखी है – ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर इस फ़िल्म को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। उनके मुताबिक, दिलचस्पी न दिखाने की वजह से ही उन्हें नहीं लगता कि ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ जल्दी पैसे कमाने के मकसद से बनाई गई फ़िल्म है।

उन्होंने कहा, “अगर आप ‘आवारापन’ जैसी फ़िल्में देखना चाहते हैं, तो आपको सिनेमाघरों में जाकर उन्हें सपोर्ट करना होगा। वरना मुझे कैसे पता चलेगा कि आपको इसमें दिलचस्पी है? अगर मुझे पता होगा, तो मैं भी अपनी मेहनत की कमाई लगाकर फ़िल्म बनाऊंगा ताकि पैसे कमा सकूं। मैं आपको बता दूं, ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ पैसे कमाने के लिए बनाई गई फ़िल्म नहीं है।”

इस म्यूचुअल फंड ने ₹1 लाख के निवेश को ₹46 लाख बना दिया, जानिए इस स्कीम के बारे में

म्यूचुअल फंड में निवेश से जोरदार रिटर्न में फंड सेलेक्शन का बड़ा हाथ है। अगर निवेश के लिए सही फंड का चुनाव हो जाए तो फिर पैसे बढ़ना तय है। आईसीआईसीआई एएमसी के फंड ने निवेशकों को मालामाल किया है। इस फंड का नाम आईसीआआईसीआई वैल्यू प्रूडेंशियल फंड है। इस फंड ने सिर्फ 1 लाख रुपये के निवेश को 22 साल में 46.6 लाख रुपये बना दिया है।

इस फंड ने एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को किया मालामाल

ICICI Prudential Asset Management Company ने अपने इस फंड के बारे में बताया है। ICICI Prudential Value Fund की शुरुआत 22 साल पहले हुई थी। इस फंड ने शुरुआत में पैसे लगाने वाले एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को मालामाल किया है। इसका कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 19.11 फीसदी है। इसने Nifty Total Return Index (TRI) के मुकाबले काफी ज्यादा रिटर्न दिया है। इस अवधि में निफ्टी 50 टीआरआई का सीएजीआर 14.63 फीसदी है।

वैल्यू इनवेस्टिंग की स्ट्रेटेजी का करता है इस्तेमाल 

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू फंड की शुरुआत 16 अगस्त, 2004 को हुई थी। इस फंड ने हाल ही में 22 साल पूरे किए हैं। यह फंड वैल्यू ओरिएंटेड इक्विटी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। इस फंड का फोकस उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करने पर होता है, जिनमें उनके इंटिनसिक वैल्यू से कम पर ट्रेडिंग हो रही होती है। ऐसी कंपनी छोटी या बड़ी हो सकती है।

तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी अच्छा रिटर्न 

इस फंड का रिटर्न तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी बहुत अच्छा है। यह क्रमश: 13.44 फीसदी और 16.05 फीसदी है। अगर किसी निवेशक ने इस फंड की शुरुआत के समय इसमें हर महीने 10,000 रुपये का सिप शुरू किया होता तो उसका पैसा बढ़कर 2.37 करोड़ रुपये हो गया होता। यह 17.04 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न है। 31 जुलाई को इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 61,102.29 करोड़ रुपये था।

93 फीसदी पैसे का निवेश शेयरों में, फाइनेंशियल कंपनियों में ज्यादा निवेश 

इस फंड ने अपना 93.31 पैसा शेयरों में निवेश किया है। सबसे ज्यादा 38.10 फीसदी निवेश फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। इसके बाद 9.08 फीसदी का निवेश हेल्थकेयर सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। उसके बाद 9 फीसदी का निवेश एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में है। इस फंड ने 2022 में अपने बेंचमार्क को निफ्टी 500 वैल्यू 50 टीआरआई से बदलकर निफ्टी 500 टीआरआई कर दिया था।

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निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय जरूर लें

अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देख भविष्य में उसके रिटर्न का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। निवेशक को रिस्क लेने की अपनी क्षमता, निवेश की अवधि और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रख निवेश का फैसला करना चाहिए।

Lumino Industries IPO: ₹700 करोड़ का एक और इश्यू, 27 अगस्त को ओपनिंग; ग्रे मार्केट में अभी से 56% चढ़ा शेयर

मेनबोर्ड सेगमेंट में ₹700 करोड़ का एक और IPO खुलने जा रहा है। कंपनी है- ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज। IPO की ओपनिंग 27 अगस्त को होगी। इसमें करीब ₹500 करोड़ के 6.10 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही लगभग ₹200 करोड़ के 2.44 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर देवेंद्र गोयल और जय गोयल शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। इश्यू में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹78-₹82 प्रति शेयर है। लॉट साइज 182 शेयर है। IPO 31 अगस्त को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 1 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 3 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। एंकर निवेशक 25 अगस्त को बोली लगा सकेंगे।

ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी है। इसका फोकस पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए कंडक्टर, पावर केबल, इलेक्ट्रिकल वायर और खास तरह के प्रोडक्ट बनाने और उनकी सप्लाई करने पर है। कंपनी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-टेंपरेचर लो-सैग (HTLS) कंडक्टर भी बनाती है।

इसके मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में एल्युमीनियम कंडक्टर, पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर शामिल हैं। वहीं EPC बिजनेस में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशनए HTLS री-कंडक्टरिंग, EHV सबस्टेशन, सोलर पावर प्रोजेक्ट और वॉटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शामिल हैं। ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज अपने प्रोडक्ट भारत की बड़ी EPC कंपनियों को सप्लाई करती है और इंटरनेशनल ग्राहकों को भी सेवाएं देती है।

IPO में कितना हिस्सा ​किसके लिए रिजर्व

इस IPO के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, JM फाइनेंशियल और मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल लिमिटेड, बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है। IPO में 10 करोड़ रुपये के शेयर कंपनी के कर्मचारियों के लिए रिजर्व हैं। बाकी बचे इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Lumino Industries कैसे इस्तेमाल करेगी IPO के पैसे

कंपनी अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों में से एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। इसके अलावा मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए उपकरणों और मशीनरी की खरीद, सिविल वर्क और इंटीरियर डेवलप करने के लिए भी इन पैसों का इस्तेमाल होगा। बाकी बचे पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए रहेंगे।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 7 प्रतिशत बढ़कर ₹2,089.31 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹160 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹1,946.68 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹124.59 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹384.16 करोड़ की उधारी थी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर अभी से 56.10 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हरिद्वार कांवड़ मेले में भिखारी बनकर बैठा यूट्यूबर, 8 घंटे में कमाए 4,000 रुपये

हरिद्वार के कांवड़ मेले में एक यूट्यूब सोशल एक्सपेरिमेंट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। यूट्यूबर पुरुषोत्तम वशिष्ठ और उनके दोस्त सचिन ने यह जानने की कोशिश की कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक मेले में भिखारी बनकर पैसे मांगे, तो एक दिन में कितनी रकम जुटा सकता है। सचिन करीब 8 घंटे तक भिखारी का हुलिया बनाकर लोगों के बीच घूमे और दोनों के मुताबिक इस दौरान करीब ₹4,000 जमा हुए।

फटे कपड़े, हाथ में कटोरा और गले में QR कोड

एक्सपेरिमेंट के लिए सचिन ने फटे-पुराने कपड़े पहने और हाथ में छोटा सा कटोरा लेकर श्रद्धालुओं के बीच पैसे मांगने लगे। इस प्रयोग को थोड़ा अलग बनाने के लिए उन्होंने गले में UPI QR कोड भी लटका रखा था, ताकि लोग चाहें तो डिजिटल पेमेंट से भी मदद कर सकें। शुरुआत में दोनों को लगा था कि पूरे दिन में शायद ₹1,000 से ₹2,000 तक ही मिल पाएंगे।

शुरुआत में मिले सिर्फ ₹130

मेले में पैसे मांगने के शुरुआती घंटों में सचिन को ज्यादा सफलता नहीं मिली। काफी कोशिश के बाद उनके पास करीब ₹130 ही जमा हुए। कुछ लोगों ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने उनकी मदद की। कई लोगों ने पैसे न होने की बात कहकर आगे बढ़ना बेहतर समझा, तो कुछ ने सचिन के साथ अच्छा व्यवहार किया।

दुकानदार ने दे दी चश्मे की जोड़ी

मेले में घूमते हुए सचिन कई दुकानदारों से भी बातचीत करने लगे। इसी दौरान एक सनग्लास विक्रेता ने उन्हें चश्मे की एक जोड़ी दे दी। इस घटना के बाद सचिन ने मजाकिया अंदाज में खुद को ‘प्रोफेशनल भिखारी’ तक कह दिया। वहीं, गले में लगे UPI QR कोड से भी करीब ₹40 का डिजिटल भुगतान मिला।

असली भिखारी से हुई दिलचस्प बातचीत

एक वक्त सचिन एक असली भिखारी के पास जाकर बैठ गए। दोनों के बीच बातचीत हुई। बताया गया कि उस व्यक्ति को अपना नाम और वह पहले कहां रहता था, इसकी जानकारी तक याद नहीं थी। यह मुलाकात एक्सपेरिमेंट के दौरान सामने आई उन स्थितियों में से एक थी, जिसने भिक्षावृत्ति के पीछे छिपी व्यक्तिगत परेशानियों की ओर भी ध्यान खींचा।

चार घंटे में ₹800, आठ घंटे में ₹4 हजार

करीब चार घंटे बाद सचिन ने अपनी जमा रकम गिनी तो उनके पास लगभग ₹800 थे। इसके बाद उन्होंने कई घंटे और मेले में बिताए। कभी लोगों ने पैसे दिए तो कभी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटने के लिए भी कहा। बारिश और लगातार पैदल चलने की वजह से एक्सपेरिमेंट उनके लिए शारीरिक रूप से भी काफी थकाऊ बन गया। करीब 8 घंटे बाद दोनों ने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग ₹4,000 जमा हुए। यानी इस प्रयोग में औसतन करीब ₹500 प्रति घंटे की रकम जुटी।

₹4 हजार से लाखों की कमाई का हिसाब

इसके बाद दोनों ने इसी आंकड़े के आधार पर अनुमान लगाना शुरू किया। उनका कहना था कि अगर रोजाना इतनी ही रकम मिलती रहे तो महीने में करीब ₹1.2 लाख तक जुटाए जा सकते हैं। वायरल पोस्ट में इससे भी ज्यादा कमाई का एक अनुमान सामने आया, जिसमें 12-13 घंटे रोजाना काम करने पर ₹8,000 से ₹10,000 प्रतिदिन तक की संभावित कमाई की बात कही गई। हालांकि, ये सिर्फ इस एक्सपेरिमेंट पर आधारित अनुमान हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि वास्तविक जिंदगी में भीख मांगने वाले लोग नियमित रूप से इतनी रकम कमाते हैं।

‘भीख मांगना बिल्कुल आसान नहीं’

एक्सपेरिमेंट के अंत में दोनों ने माना कि बाहर से आसान दिखने वाला यह काम असल में बेहद थका देने वाला है। घंटों तक अजनबियों के पास जाकर मदद मांगना मानसिक और शारीरिक रूप से काफी मुश्किल लगा। सचिन को जहां कुछ लोगों ने पैसे देकर मदद की, वहीं कुछ लोगों के खराब व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। दोनों ने लोगों को सलाह दी कि भीख मांगने को कमाई का जरिया बनाने के बजाय मेहनत और ईमानदारी से कमाने की कोशिश करनी चाहिए।

₹4 हजार की कमाई ने छेड़ दी बड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने 8 घंटे में ₹4,000 जमा होने पर हैरानी जताई। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक आयोजनों और पर्यटन स्थलों पर भीख मांगना कुछ लोगों के लिए कमाई का स्थायी जरिया बन गया है।

वहीं, कई यूजर्स ने इस एक्सपेरिमेंट से बड़े निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि सिर्फ 8 घंटे का प्रयोग उन लोगों की असली जिंदगी को नहीं दर्शा सकता, जो गरीबी, बेघरपन, बीमारी, दिव्यांगता, शोषण या लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानियों के कारण भीख मांगने को मजबूर हैं।

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