जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 से पहले भारतीय क्रिकेट टीमों के ठहरने और सुविधाओं को लेकर मामला चर्चा में है। आयोजकों ने दोनों टीमों के लिए होटल तय कर दिए हैं, लेकिन BCCI अभी इन व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम फैसला नहीं किया है। वहीं इसी बीच भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) ने साफ किया कि भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अलग से होटल की व्यवस्था नहीं किया जाएगा।
अगर BCCI अपने खिलाड़ियों के लिए अलग जगह चाहता है, तो खिलाड़ियों की पूरी व्यवस्था बोर्ड को खुद संभालनी होगी। इसमें होटल का खर्च, खाने-पीने, आने-जाने और मैच स्थल तक खिलाड़ियों को पहुंचाने जैसी जिम्मेदारियां शामिल होंगी। ये व्यवस्था जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स के दौरान लागू हो सकती है।
BCCI को लेनी होगा जिम्मेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, IOA ने साफ किया कि वह एशियन गेम्स के दौरान क्रिकेट टीम के लिए अलग होटल की व्यवस्था नहीं करेगा। अगर BCCI को आयोजन समिति की ओर से दिया गया होटल सुविधाजनक नहीं लगता है, तो वह खिलाड़ियों के लिए अपनी पसंद की जगह बुक कर सकता है। लेकिन, होटल चुनने से लेकर खिलाड़ियों के खाने और आने-जाने जैसी सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी BCCI को ही संभालनी होगी।
CEO रघुराम अय्यर ने क्या कहा
TOI से बात करते हुए IOA के CEO रघुराम अय्यर ने कहा, “BCCI के CEO हेमांग अमीन ने हमसे संपर्क किया और हमारी अच्छी बातचीत हुई। वे सुविधाओं का आकलन करने के लिए जापान में एक एडवांस टीम भेजने पर विचार कर रहे हैं। IOA को इससे कोई दिक्कत नहीं है। अपने आकलन के आधार पर, वे तय कर सकते हैं कि वे आयोजक की सुविधाओं का इस्तेमाल करना चाहते हैं या अपना इंतजाम खुद करना चाहते हैं।”
एक कमरे में होंगे दो खिलाड़ी
फिलहाल एशियन गेम्स के आयोजकों ने भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों के लिए होटल तय कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष टीम को तीन स्टार APA होटल नागोया एकिमाए और महिला टीम को चार स्टार मेइतेत्सु ग्रैंड होटल में ठहराया जाएगा। दोनों होटलों में जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेटरों को आमतौर पर मिलने वाली पांच स्टार सुविधा के मुकाबले ये एक स्तर नीचे हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए दो लोगों के एक कमरे में रहने की व्यवस्था की गई है, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
BCCI एक टीम भेजेगी नेपाल
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम के लिए एशियन गेम्स से पहले यात्रा और ठहरने से जुड़ी कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। टीम 13 सितंबर को दुबई में एशिया कप खत्म करने के बाद 14 सितंबर को जापान के नागोया के लिए रवाना होगी, जहां उसका अभियान 17 सितंबर से शुरू होना है। इससे पहले BCCI एक टीम को जापान भेजेगा, जो होटल, क्रिकेट मैदान और खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध दूसरी सुविधाओं की जांच करेगी। इसके बाद ही खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
नीम करौली बाबा का नाम आते ही महावीर हनुमान का खयाल दिल को छू जाता हैं, ऐसे में उनकी कहानी देश में लोगों को प्रभावित करने के बाद अब विदेशों तक पहुंच रही है। बता दें कि नीम करौली बाबा वही हैं, जिनके आध्यात्मिक प्रभाव ने स्टीव जॉब्स, मार्क जकरबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसी बड़े नामों को भी प्रभावित किया है।
भारतीय सिनेमाघरों में शानदार परफॉर्मेंस के बाद, हिंदी डिवोशनल ड्रामा फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ अब इंटरनेशनल दर्शकों तक पहुंचने के लिए तैयार है। ऐसे में इसकी इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन की कमान होम्बले फ़िल्म्स संभाल रही है। बता दें कि यह फ़िल्म 11 सितंबर, 2026 को ग्लोबल लेवल पर रिलीज़ होने के लिए तैयार है।
हनुमान अंश की कहानी नीम करोली बाबा की ज़िंदगी पर आधारित, जिसे विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखा और डायरेक्ट किया गया है। भक्तों द्वारा भगवान हनुमान के अवतार माने जाने वाले बाबा को लोग महाराज-जी के नाम से भी जानते हैं। बाबा को उनकी भक्ति के साथ साथ भक्त उनके प्यार और सेवा की अपनी शिक्षाओं के लिए भी जानते हैं। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि बाबा का प्रभाव भारत से ज्यादा पश्चिमी देशों में देखा गया है, खासकर 1960 और 1970 के दशक में जब ज्यादातर साधक देश में उनके दर्शन के लिए आए थे।
हनुमान अंश फिल्म थिएटर्स में अच्छा परफॉर्मेंस कर रही है। रिपोर्ट की माने तो फिल्म ने महज 10 लाख की ओपनिंग करने के बाद अच्छी रफ्तार पकड़ी है और देखते ही देखते बॉक्स ऑफिस पर 26वें दिन तक ₹63.82 करोड़ का आंकड़ा अपने नाम कर लिया है। फिल्म की अच्छी कहानी को ज़बरदस्त वर्ड-ऑफ़-माउथ का फायदा मिला है, जिसकी वजह से लोगों की फिल्म देखने को लेकर दिलचस्पी बढ़ते हुए देखने मिल रही है।
बाबा के देश से लेकर विदेश में तक भक्त हैं। भक्तों की बात करें तो इसमें दुनिया के कुछ सबसे प्रभावशाली हस्तियों का नाम शामिल है, जैसे कि स्टीव जॉब्स, मार्क ज़करबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स। वहीं, भारत में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा भी कैंची धाम बाबा का आशीर्वाद लेने आ चुके हैं।
साल 1974 में स्टीव जॉब्स ने महाराज-जी को ढूंढने के लिए भारत का रुख किया था। इसके बाद स्टीव जॉब्स की बात मानते हुए एक कठिन समय में मार्क ज़करबर्ग ने भी कैंची धाम की यात्रा की थी। इसके अलावा जूलिया रॉबर्ट्स ने भी अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में खुलकर बात करते हुए नीम करोली बाबा के नाम और उनके प्रभाव का जिक्र किया था।
होम्बले फिल्म्स हनुमान अंश फिल्म की कहानी को न सिर्फ ग्लोबल मार्केट में ला रहा है बल्कि एक ऐसे संत की कहानी को विदेशों में पहुंचाने का काम करने जा रहा है जिसका असर सरहदों से भी आगे था। कहना होगा कि यह फिल्म सभी के लिए एक अलग अनुभव होने वाली है और इसके साथ और भी दुनिया भर के दर्शक भक्त के रूप में जुड़ने वाले हैं। इस भक्तिमय फिल्म के साथ कैंची धाम से लेकर दुनिया भर के दर्शकों तक, महाराज जी की कहानी अब देश से लेकर विदेश तक के दर्शकों तक पहुंचने के लिए तैयार है।
IND vs SL: भारत-श्रीलंका के बीच हुए टेस्ट सीरीज में गेंदबाजों के बार-बार नो-बॉल करने का मुद्दा चर्चा में रहा है। मैच के दौरान भारत की ओर से कुल 13 नो-बॉल डाली। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने रेड-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल को लेकर अपनी राय रखी है। पूर्व क्रिकेटर ने गेंदबाजों को नो-बॉल डालने से रोकने के लिए अनोखा फॉर्मूला दिया है। उन्होंने कहा कि रेड-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल करने वाले गेंदबाजों पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाना चाहिए। इसी के साथ अगली गलती पर इसे दोगुना कर और गेंदबाजी कोच को भी आधा जुर्माना देने का सुझाव दिया।
श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में भारतीय गेंदबाजों की नो-बॉल चर्चा का विषय बन गई। मैच में भारत ने कुल 13 नो-बॉल फेंकीं। इनमें स्पिनर सारांश जैन और रवींद्र जडेजा की गेंदों पर कई बार पैर क्रीज से आगे निकल गया। जडेजा पहले भी नो-बॉल कर चुके हैं। गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में उन्होंने चार नो-बॉल फेंकी थीं।
गेंदबाजों पर लगे जुर्माना
दूसरे टेस्ट में बार-बार नो बॉल की समस्या सामने आने के बाद साईराज बहुतुले ने सुझाव दिया कि रेड-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल पर बल्लेबाज को फ्री हिट मिलनी चाहिए। गावस्कर ने ‘मिड-डे’ के लिए लिखे अपने कॉलम में कहा कि भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाजी कोच ने मजाक में सुझाव दिया था कि नो-बॉल के बाद फ्री हिट देने से गेंदबाजों की इस गलती को कम किया जा सकता है। गावस्कर ने आगे कहा कि, “एक ओवर में दो बाउंसर की सीमा और बाउंड्री के कारण बल्लेबाजों के लिए रन बनाना पहले ही थोड़ा आसान हो गया है। ऐसे में नो-बॉल पर फ्री हिट देने के बजाय गलती करने वाले गेंदबाज पर दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, जुर्माने की आधी रकम गेंदबाजी कोच से भी ली जा सकती है।”
गेंदबाजी पर रख सकते हैं नियंत्रण
पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर का कहा कि, “आज के समय में गेंदबाजों के लिए नो-बॉल जैसी गलती करना सही नहीं माना जा सकता। अब खिलाड़ियों के पास बेहतर तकनीक और आधुनिक उपकरण मौजूद हैं, जिससे गेंदबाज अपनी गेंदबाजी पर ज्यादा नियंत्रण रख सकते हैं। वहीं, व्हाइट-बॉल क्रिकेट में नो-बॉल करने पर गेंदबाजों को पहले से ही अतिरिक्त सजा मिलती है और अगली गेंद बल्लेबाज को फ्री हिट के रूप में मिलती है।”
इन चीजों पर भी लगे जुर्माना
गावस्कर ने सुझाव दिया कि, ‘फाइन के पैसों का इस्तेमाल खिलाड़ियों के अलग होने से पहले होने वाले टीम डिनर में किया जा सकता है।’ उन्होंने कहा कि, ‘नो-बॉल के अलावा भी खिलाड़ियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है, जैसे थ्रो के समय पीछे न हटना या मैदान पर कोई और गलती करना। इन मामलों में पूरी टीम मिलकर तय कर सकती है कि खिलाड़ी पर फाइन लगाया जाए या नहीं।’ गावस्कर ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर जल्द ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इससे क्रिकेट के खेल पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में कुछ ही चीजें ऐसी हैं, जो पूरी तरह खिलाड़ियों के नियंत्रण में होती हैं। इनमें बल्लेबाज का अपना गार्ड लेना और गेंदबाज का नो-बॉल न करना शामिल है।
क्रिकेट विश्व कप विजेता कप्तान और दिग्गज क्रिकेटर कपिल देव ने शनिवार को ट्रिनिटी गोल्फ चैंपियंस लीग (टीजीसीएल)-2026 के लिए चंडीगढ़ की टीम का शुभारंभ किया। मौजूदा चैंपियन चंडीगढ़ टाइटंस ने नए नाम और पहचान के साथ जीबी चंडीगढ़ लीजेंड्स के रूप में आगामी सत्र में उतरने की घोषणा की।
विशेष लॉन्च समारोह में टीम के मालिकों, नेतृत्व, खिलाड़ियों, साझेदारों और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में नई पहचान का अनावरण किया गया। टीम ने इस अवसर पर ‘ए न्यू नेम, ए बिगर गेम, ए स्ट्रॉन्गर लेगेसी’ का संदेश दिया। ‘फ्रॉम चंडीगढ़्स ग्रीन्स टू इंडिया’स फेयरवेज’ थीम के साथ टीम ने चंडीगढ़ की गोल्फ विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर आगे ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।
कपिल देव ने कहा कि किसी शहर का प्रतिनिधित्व करने वाली खेल टीम को देखकर हमेशा विशेष खुशी होती है। चंडीगढ़ की शानदार खेल संस्कृति है और जीबी चंडीगढ़ लीजेंड्स इस भावना को बड़े मंच तक ले जाने का अवसर है। उन्होंने टीम को आगामी सत्र के लिए शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि टीम आत्मविश्वास के साथ खेलेगी और चंडीगढ़ को जश्न मनाने के और मौके देगी। टीम के सह-मालिक करण गिलहोत्रा ने कहा कि नई पहचान का उद्देश्य एक स्थायी खेल विरासत तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि गोल्फ कौशल, अनुशासन, धैर्य और चरित्र का खेल है तथा टीम इन्हीं मूल्यों को अपनाना चाहती है। मौजूदा चैंपियन होने के कारण टीम पर पिछले प्रदर्शन के स्तर को बनाए रखने के साथ भविष्य के लिए कुछ बड़ा करने की जिम्मेदारी भी है।
जीबी रियल्टी ग्रुप के चेयरमैन गुरिंदर भट्टी ने कहा कि नई पहचान चंडीगढ़ के लिए टीजीसीएल में बड़ी महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि टीम मौजूदा चैंपियन के रूप में मैदान में उतरेगी और उसका लक्ष्य खिताब की रक्षा करने के साथ चंडीगढ़ की गोल्फ विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। टीम के सह-मालिक और गोल्फ खिलाड़ी सैंडी लेहल ने कहा कि मौजूदा चैंपियन के रूप में टीम के सामने बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि टीम आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए चंडीगढ़ का गौरव बढ़ाने का प्रयास करेगी।
टाइनॉर के प्रमोटर ए.जे. सिंह ने कहा कि खेल लोगों को प्रेरित करने, समुदायों को जोड़ने और उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि टाइनॉर स्पोर्ट्स के माध्यम से जीबी चंडीगढ़ लीजेंड्स और उसकी टीजीसीएल यात्रा को समर्थन देना गर्व की बात है।नई पहचान के साथ जीबी चंडीगढ़ लीजेंड्स ने टीजीसीएल-2026 में अपने खिताब की रक्षा करने और चंडीगढ़ की गोल्फ विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करने का लक्ष्य रखा है।
टेस्ट क्रिकेट में ऋषभ पंत के आक्रामक अंदाज़ ने भारत के लिए कई यादगार पल दिए हैं, लेकिन पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि विकेटकीपर-बल्लेबाज़ को अभी यह सीखना बाकी है कि कब अपने आक्रामक रवैये पर काबू रखना है।पंत ने श्रीलंका के दो टेस्ट मैचों के दौरे पर 168 रन बनाए, लेकिन उनके कुछ शॉट सिलेक्शन ने अश्विन को प्रभावित नहीं किया। भारत के पूर्व स्पिनर ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी आलोचना पंत की काबिलियत या उनके स्वाभाविक बल्लेबाज़ी अंदाज़ को लेकर नहीं थी, बल्कि हालात के हिसाब से फ़ैसले लेने के उनके तरीके पर थी।
अश्विन का मानना है कि पंत, जो अब एक अनुभवी टेस्ट क्रिकेटर हैं, उन्हें यह समझने की ज़रूरत है कि टीम को कब उनसे आक्रामक खेल की ज़रूरत है और कब उन्हें ज़्यादा संयम बरतना चाहिए।
अपने यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ पर बात करते हुए अश्विन ने कहा कि सीरीज़ में पंत का प्रदर्शन उन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा जो उन्हें उनसे थीं। अश्विन ने कहा, “ऋषभ पंत से मेरी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। मुझे बहुत अफ़सोस है। सोनल दिनुशा का स्ट्राइक रेट भी काफ़ी अच्छा था। लेकिन फ़र्क ज़्यादा जोखिम वाले विकल्पों का है। जब खेल आपके हाथ में हो, तो ये सब बातें मायने नहीं रखतीं कि ‘ऋषभ ऐसे ही खेलते हैं।’ असल बात यह है कि आपकी टीम को क्या चाहिए।”
जोखिम लेने की पंत की आदत उनके टेस्ट करियर की एक अहम पहचान रही है, जिससे उन्हें अक्सर मैचों का रुख बदलने में मदद मिली है। हालाँकि, अश्विन का मानना है कि यह पहचान खराब फ़ैसलों का बहाना नहीं बन सकती, खासकर तब जब कोई जोखिम भरा शॉट टीम को मुश्किल में डाल सकता हो।
उन्होंने आगे कहा, “ऋषभ ने सिडनी और ब्रिस्बेन में शानदार पारियां खेलीं, लेकिन आप वाशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर के बिना वह मैच नहीं जीत सकते थे। टेस्ट मैच बनाने और खेल के आखिरी सेशन में उसे जीतने के लिए 11 क्रिकेटरों की ज़रूरत होती है, लेकिन टेस्ट हारने के लिए बेवकूफी भरा एक पल ही काफ़ी होता है।”
अश्विन ने कहा कि पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन अगर वह टेस्ट क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो मैच की स्थिति को समझने और उसके अनुसार अपना खेल बदलने की उनकी क्षमता बहुत अहम होगी।पंत के श्रीलंका दौरे पर भी उन्हें कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कोलंबो में लाहिरू कुमारा की गेंद कलाई पर लगने के बाद चोटिल होकर रिटायर होने से पहले उन्होंने दो अर्धशतक लगाए। अगले दिन वह फिर बल्लेबाजी करने उतरे और तुरंत ही आक्रामक अंदाज अपनाते हुए छक्का जड़ा।
हालांकि, अश्विन का मानना है कि कुछ हालात ऐसे होते हैं जब पंत को अपनी स्वाभाविक आक्रामकता के बजाय टीम की जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं बस उन मौकों की बात कर रहा हूं जब मैच नाजुक मोड़ पर होता है और ऐसे जोखिम उठाए जाते हैं। मुझे खिलाड़ी के तौर पर ऋषभ पसंद हैं। इस फॉर्मेट में हालात के हिसाब से खेलना जरूरी है।”
पूर्व स्पिनर इस बात से भी सहमत नहीं थे कि मैच जिताने की काबिलियत रखने वाले खिलाड़ियों के साथ अलग व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “किसी एक खिलाड़ी को खास तवज्जो न दें। अगर (पीढ़ी में एक बार आने वाले) खिलाड़ी का समर्थन करना है, तो सबके लिए करें। (यशस्वी) जायसवाल भी ऐसे ही खिलाड़ी हैं। ऋषभ के बारे में मैं बस इतना कह रहा हूं कि वह अनुभवी हैं, उन्होंने 50 टेस्ट खेले हैं। उन्हें जिम्मेदारी लेने की जरूरत है।”
अश्विन ने टेस्ट क्रिकेट के दो सबसे खतरनाक बल्लेबाजों – वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट – का भी जिक्र किया। उन्होंने समझाया कि आक्रामक शैली अपनाने का मतलब यह नहीं है कि खेल की समझ को नजरअंदाज कर दिया जाए। उन्हें लगता है कि पंत अपनी स्वाभाविक आक्रामकता और हर स्थिति की मांग के बीच सही संतुलन बनाकर और भी बेहतर खिलाड़ी बन सकते हैं।अश्विन ने कहा, “जिस दिन आप उन्हें सच बताएंगे, वह भारत के लिए सभी फॉर्मेट में खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे।”
अनाया बांगर ने हाल ही में यह घोषणा कि वह जल्द ही ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलना चाहती हैं। हाल ही में उनको बिग बैश के लिए हरी झंडी मिल गई है। इस पर दक्षिण अफ्रीका की ऑलराउंडर खिलाड़ी मारीजैन कैप ने कड़ी आपत्ती जताई। उन्होंने कहा कि अनाया बांगर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। इस पर अनाया बांगर ने कहा है कि ना ही उनका शरीर टेस्टोस्टेरोन बनाएगा ना ही उनके शरीर में खोई हुई मांसपेशिया आएंगी तो इससे किसी को भी क्यों तकलीफ होनी चाहिए।
गौरतलब है कि ‘ट्रांसजेंडर’ खिलाड़ी अनाया बांगड़ सामुदायिक स्तर पर खेलने की अनुमति मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया में अपनी क्रिकेट यात्रा फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं और भले ही उन्हें अभी तक कोई टीम नहीं मिली है लेकिन उन्हें विश्वास है कि इससे उनके लिए अगले साल महिला बिग बैश लीग में खेलने के द्वार खुल जाएंगे।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की ‘बेटी’ अनाया ने इस साल मार्च में लिंग परिवर्तन की सर्जरी कराने से पहले मुंबई के लिए आयु वर्ग के पुरुषों का क्रिकेट खेला था। अनाया ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘आज का दिन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कई वर्षों तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैं आखिरकार उस खेल में वापसी के रास्ते के बारे में बात कर सकती हूं जो मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।’’
इस 25 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मैं मार्च 2027 से ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट में वापसी करने की तैयारी कर रही हूं, जिसका उद्देश्य एलीट क्रिकेट खेलना है। मैं यह दावा नहीं कर रही हूं कि मुझे किसी टीम में जगह मिल गई है। मैं बस इतना कह रही हूं कि मुझे टीम में जगह बनाने का मौका मिला है और मैं इसके लिए कड़ी मेहनत करूंगी।’’
अनाया ने इससे पहले बीसीसीआई से महिला क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने की अपील की थी, लेकिन भारतीय बोर्ड से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। ICC ने 2023 में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिला प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया था।
अनाया ने कहा कि हाल ही में हुई उनकी जांच से पता चलता है कि अगले साल मार्च में होने वाले एक और परीक्षण में भी उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर समान बना रह सकता है, जिससे उनके लिए महिला क्रिकेट में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त होगा।उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह परीक्षण मेरे अनुकूल रहा तो मैं शीर्ष स्तर की क्रिकेट में खेलने की पात्रता हासिल कर लूंगी।’’
वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलना खासा पसंद था। अब इन दोंनों क्रिकेटरों के बेटें को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही डेब्यू करने का मौका दिया जा रहा है। आर्यवीर सहवाग और अन्वय द्रविड़ को मार्च में होने वाली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 अंडर 19 एकदिवसीय सीरीज में भारतीय टीम के लिए चुना गया है। यह मैच राजकोट और अहमदाबाद में खेले जाएंगे। तीनों एकदिवसीय और पहला बहुदिवसीय मैच राजकोट में खेला जाएगा, जबकि दूसरा बहुदिवसीय मुकाबला अहमदाबाद में होगा।
अन्वय द्रविड़ एक विकेटकीपर की हैसियत से इस टूर्नामेंट में खेलेंगे जिसमें कप्तान लक्ष्य रायचंदानी होंगे। यशवर्धन सिंह चौहान को लंबे प्रारूप के मुकाबलों के लिए कप्तान बनाया गया है। आर्यवीर सहवाग एक बल्लेबाज के तौर पर टीम में चुने गए हैं। इससे पहले यह दोनों खिलाड़ी 3 साल पहले रणजी ट्रॉफी में आमने सामने हुए थे और अब दोनों साथ में खेलेंगे।
द्रविड़ के बड़े बेटे, समित द्रविड़, जो 20 वर्ष के हैं उन्हें भी 2024 में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के ख़िलाफ़ खेलने के लिए इंडिया अंडर-19 टीम में चुना गया था, लेकिन घुटने की चोट के कारण वह बाहर हो गए थे। समित ने कर्नाटक की टी20 लीग, महाराजा टी20 ट्रॉफ़ी में शानदार प्रदर्शन करने के बाद अंडर-19 टीम में जगह बनाई थी।
News
India U19 squad for Australia U19 Men’s Tour of India announced.
The tour consists of three One-Day matches and two Multi-Day fixtures.
भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है। वहीं इस मुकाबले के दौरान मैच के पहले दिन यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच मैदान पर बहस हो गई थी। इसके बाद आईसीसी ने दोनों खिलाड़ियों पर 25% मैच फीस का जुर्माना और 1 डिमेरिट पॉइंट लगाया है। इससे पहले श्रीलंका ए के खिलाफ मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी की भी गेंदबाज विशेन हलम्बागे से झड़प हुई थी। हाल ही में भारत के पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने दोनों खिलाड़ियों के मैदान पर किए गए व्यवहार पर नाराजगी जताई है। मांजरेकर का मानना है कि खिलाड़ियों को मैदान पर अपने व्यवहार को लेकर ज्यादा संयम रखना चाहिए।
आईसीसी-बीसीसीआई को लेकर कही ये बात
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कमेंटेटर और एक्सपर्ट के तौर पर काम कर रहे संजय मांजरेकर ने X पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने ICC और BCCI से मैदान पर खिलाड़ियों के अनुशासनहीन व्यवहार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। मांजरेकर ने X पर लिखा कि, “वैभव सूर्यवंशी के बाद अब यशस्वी जायसवाल भी मैदान पर ऐसे व्यवहार के लिए चर्चा में हैं। उन्होंने ICC और BCCI से कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि अगर खिलाड़ियों को ऐसी हरकतों के लिए लगातार बचाया जाएगा, तो वे आगे भी ऐसा व्यवहार दोहरा सकते हैं। यह न तो क्रिकेट के लिए अच्छा है और न ही खिलाड़ियों के भविष्य के लिए।”
क्यों भिड़े जायसवाल
यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बीच भिड़ंत 17वें ओवर की आखिरी गेंद के बाद हुआ। इससे पहले यशस्वी जायसवाल ने असिथा फर्नांडो की गेंदों पर तीन चौके लगाए थे, लेकिन ओवर की आखिरी गेंद पर वह बोल्ड हो गए। आउट होने के बाद जायसवाल वापस लौटे और फर्नांडो के जश्न पर नाराजगी जताई। दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ देर बहस हुई और मामला इतना बढ़ गया कि जायसवाल फर्नांडो के बेहद करीब आ गए और उन्हें सिर से टक्कर मारते हुए नजर आए। दोनों के बीच मामला बढ़ता देख श्रीलंका के कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने बीच में आकर दोनों को शांत कराया। माना जा रहा है कि जायसवाल ने गेंदबाज की किसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी।
जून में श्रीलंका A के खिलाफ ट्राई सीरीज के दौरान सुपर ओवर में हार के बाद वैभव सूर्यवंशी एक खिलाड़ी से बहस में उलझ गए थे। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका A के विशेन हलम्बागे को धक्का भी दिया था। 15 साल की उम्र में इस तरह के व्यवहार को लेकर संजय मांजरेकर ने चिंता जताई है।
पूर्व मुंबई अंडर-19 क्रिकेटर अनाया बांगर (Anaya Bangar) के लिए महिला क्रिकेट में वापसी का रास्ता खुल गया है। मार्च में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी (Gender Affirming Surgery) कराने वाली अनाया को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ऑस्ट्रेलिया में महिला कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, अगर वह विमेंस बिग बैश लीग (WBBL) जैसी एलीट क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलना चाहती हैं, तो उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की टेस्टोस्टेरोन से जुड़ी पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।
अनाया मुंबई की एज-ग्रुप क्रिकेट में खेल चुकी हैं। वह टेस्ट क्रिकेट खेल चुके सरफराज खान और उनके भाई मुशीर खान के साथ भी मुंबई के लिए क्रिकेट खेल चुकी हैं।
'मुझे लगा था कि मैं फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी'
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मंजूरी मिलने के बाद अनाया ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इसे अपने लिए बेहद खास दिन बताया। उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें लगा था कि वह शायद दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी।
“यह मेरे लिए बहुत खास दिन है, खासकर यह जानने के बाद कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल सकती हूं। एक समय ऐसा भी था जब मुझे लगा था कि मैं फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगी। लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का शुक्रिया, जिसने मुझे एक और मौका दिया।”
अनाया ने जून में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया था। इसके जवाब में 20 जुलाई को उन्हें बताया गया कि वह तुरंत कम्युनिटी क्रिकेट खेल सकती हैं। हालांकि, एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए उन्हें टेस्टोस्टेरोन से जुड़े पात्रता मानदंड पूरे करने होंगे।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की हेड ऑफ इंटीग्रिटी जैकी पार्ट्रिज ने अनाया को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि वह मार्च 2027 तक ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र में प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकती हैं।
“मार्च 2027 तक आप ऑस्ट्रेलिया के किसी भी राज्य या क्षेत्र में प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए पात्र हैं। चूंकि प्रीमियर क्रिकेट को इस नीति के तहत एलीट क्रिकेट के बजाय कम्युनिटी क्रिकेट की श्रेणी में रखा गया है, इसलिए इस फैसले का आपकी इन प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”
यानी अनाया मार्च 2027 तक ऑस्ट्रेलिया में कम्युनिटी लेवल पर महिला क्रिकेट खेल सकती हैं। हालांकि, इसके बाद एलीट क्रिकेट में उनकी पात्रता टेस्टोस्टेरोन टेस्ट समेत अन्य शर्तों पर निर्भर होगी।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, खिलाड़ी का सीरम टेस्टोस्टेरोन स्तर कम से कम 12 महीनों तक 10 nmol/L से नीचे होना चाहिए। मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए अनाया को ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर ब्लड टेस्ट भी कराना होगा।
“मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में आपकी पात्रता इस बात पर निर्भर करेगी कि आप ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर एक ब्लड टेस्ट उपलब्ध कराएं, जिसमें यह पुष्टि हो कि आपके सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर 10 nmol/L से कम है और आप नीति में तय पात्रता की अन्य सभी शर्तों को पूरा करना जारी रखती हैं।”
ICC का ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर क्या नियम है?
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 2023 में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की एलीट महिला क्रिकेट में भागीदारी को लेकर अपनी नीति स्पष्ट की थी। इसके तहत ऐसे ट्रांसजेंडर खिलाड़ी, जिन्होंने पुरुष यौवन यानी मेल प्यूबर्टी का अनुभव किया है, एलीट महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में हिस्सा नहीं ले सकते।
भारत में हालांकि इस तरह के मामले को लेकर BCCI की अभी कोई स्पष्ट नीति नहीं है। BCCI के एक शीर्ष अधिकारी ने *द इंडियन एक्सप्रेस* से कहा कि बोर्ड ने ट्रांस महिलाओं के महिला क्रिकेट खेलने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया है।
“जहां तक ICC की बात है, उसने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर अपना फैसला स्पष्ट कर दिया है। BCCI ने अभी यह तय नहीं किया है कि ऐसे मामलों में क्या किया जाना चाहिए। चूंकि यह पहली बार है जब इस तरह का मामला सामने आया है, इसलिए बोर्ड ने अभी इस पर कोई रुख तय नहीं किया है। खास तौर पर घरेलू क्रिकेट में उन्हें खेलने की अनुमति देने को लेकर।”
अनाया ने बताया, कैसे मिली क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मंजूरी
अनाया ने बताया कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनके मामले को विस्तार से देखा। उनकी मेडिकल हिस्ट्री, टेस्ट रिपोर्ट और सर्जरी से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी एथलीट टेस्टिंग रिपोर्ट और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से जुड़ी रिपोर्ट भी देखी। अनाया के मुताबिक, बोर्ड ने उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए एक पूरी टीम के जरिए उनके मामले की समीक्षा की।
“मेरी एथलीट टेस्टिंग रिपोर्ट और बाकी सभी जानकारी सामने आने के बाद भी BCCI की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने वास्तव में मेरी रिपोर्ट पढ़ी, मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री देखी और मेरी स्थिति का आकलन करने के लिए एक पूरी टीम बनाई।”
“मैंने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से संपर्क किया और उन्होंने निष्पक्षता और समावेशिता को ध्यान में रखते हुए मुझे खेलने की मंजूरी दी। उन्होंने मुझसे मेरी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और टेस्टोस्टेरोन टेस्ट की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने मेरी सर्जरी से जुड़े दस्तावेज भी मांगे। इसके अलावा, उन्होंने मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी की वह रिपोर्ट भी मांगी, जिसे मैंने एक साल से ज्यादा समय पहले सार्वजनिक किया था।”
अनाया ने आगे कहा कि अगर वह अच्छा प्रदर्शन करती हैं और बाकी पात्रता शर्तें पूरी करती हैं, तो उनके पास WBBL में खेलने का मौका हो सकता है।
“अगर सब कुछ ठीक रहा और मैं अच्छा प्रदर्शन करती हूं, तो मेरे पास WBBL में खेलने का मौका होगा।”
हार्मोन थेरेपी पर रिसर्च का भी हिस्सा बनी थीं अनाया
अनाया इससे पहले मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट के एक रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा रही हैं। इस प्रोजेक्ट में हार्मोन थेरेपी के दौरान उनकी स्ट्रेंथ, स्टैमिना, हार्मोन और ग्लूकोज लेवल में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया गया था।
उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए BCCI और ICC के प्रतिनिधियों से भी ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की अपील की थी। अनाया का कहना रहा है कि ऐसी नीतियां पुराने विचारों के बजाय वैज्ञानिक डेटा और रिसर्च पर आधारित होनी चाहिए।
अभी क्लब की तलाश में अनाया
जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के बाद अनाया फिलहाल रिकवरी कर रही हैं। इसके साथ ही वह ऑस्ट्रेलिया में अपने लिए एक क्लब की तलाश भी कर रही हैं, जहां से वह कम्युनिटी क्रिकेट में अपनी नई पारी शुरू कर सकें।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली मंजूरी को अनाया ने सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी बड़ा कदम बताया।
“मैं सच में यकीन नहीं कर पा रही थी कि मैं दोबारा क्रिकेट खेल पाऊंगी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और उसकी प्रगतिशील व समावेशी नीतियों की वजह से यह संभव हुआ है। ये नीतियां ट्रांस महिलाओं के लिए महिला खेलों में निष्पक्षता और समावेश पर ध्यान देती हैं।”
“यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि मेरे जैसे दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी एक बहुत बड़ा पड़ाव है, जो खेल में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें या तो खेल चुनना पड़ता है या फिर जेंडर ट्रांजिशन का विकल्प चुनना पड़ता है।”
भारत के स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह इस दिनों यूपी टी20 लीग 2026 में खेल रहे हैं। यूपी टी20 लीग 2026 में मेरठ मेवरिक्स के कप्तान मेरठ मेवरिक्स के कप्तान रिंकू सिंह ने अपने तूफानी खेल से सबको चौंका दिया। मुकाबले में रिंकू सिंह ने महज 7 गेंदों पर 29 रन बनाए और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 414.29 रहा। रिंकू सिंह ने तूफानी पारी गोरखपुर लायंस के खिलाफ लीग के 16वें मैच में खेला। बारिश की वजह से मुकाबला 8-8 ओवर का कर दिया गया।
गोरखपुर ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 ओवर में 91 रन बनाए। टारगेट का पीछा करने उतरी मेरठ की टीम ने सिर्फ 6.4 ओवर में बिना कोई विकेट गंवाए जीत दर्ज कर ली। इस मुकाबले में रिंकू सिंह की खेली गई पारी की काफी चर्चा हो रही है।
कैसा था मुकाबला
मेरठ मेवरिक्स की पारी के दौरान अक्षय दुबे पांचवें ओवर की तीसरी गेंद के बाद रिटायर्ड हर्ट होकर बाहर चले गए। इसके बाद कप्तान रिंकू सिंह ने मोर्चा संभाला। मेरठ को आखिरी तीन ओवर में जीत के लिए 36 रन चाहिए थे, लेकिन रिंकू ने कुछ ही गेंदों में मैच का रुख बदल दिया। विशाल निषाद के छठे ओवर में उन्होंने तीन छक्के और दो चौके लगाकर 28 रन बटोर लिए। दूसरी ओर स्वास्तिक चिकारा भी शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे और उन्होंने 24 गेंदों में नाबाद 44 रन बनाए। रिंकू ने सिर्फ 7 गेंदों पर 29 रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें 3 छक्के और 2 चौके शामिल रहे। उनका स्ट्राइक रेट 414.29 रहा और इसी आक्रामक बल्लेबाजी से मेरठ ने लक्ष्य बेहद आसानी से हासिल कर लिया।
गोरखपुर ने की तेज शुरुआत
गोरखपुर लायंस ने शुरुआत में तेज बल्लेबाजी करते हुए 5 ओवर में 63 रन बना लिए थे और टीम के 100 रन तक पहुंचने की उम्मीद दिख रही थी। लेकिन छठे ओवर में जीशान अंसारी ने लगातार दो विकेट लेकर गोरखपुर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। उन्होंने आर्यन जुयाल और हरदीप सिंह को आउट कर टीम को बड़ा झटका दिया। जीशान ने मैच में सिर्फ 2 ओवर गेंदबाजी की और 10 रन देकर कुल 4 विकेट अपने नाम किए।
टूर्नामेंट में मेरठ का शानदार प्रदर्शन
रिंकू सिंह की कप्तानी में मेरठ मेवरिक्स का यूपी टी20 लीग 2026 में शानदार प्रदर्शन जारी है। टीम ने अब तक खेले अपने सभी 6 मैचों में जीत हासिल की है और 12 अंकों के साथ अंक तालिका में सबसे ऊपर है। वहीं दूसरे नंबर पर लखनऊ फाल्कन्स मौजूद है। लखनऊ को 6 मैच खेलने के बाद उसके खाते में सिर्फ 6 अंक हैं। यानी मेरठ मेवरिक्स ने अपने प्रदर्शन से बाकी टीमों पर मजबूत बढ़त बना रखी है।