पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर को लेकर कई बार युद्ध हो चुका है। दोनों देश इस हिमालयी इलाके पर अपना दावा करते हैं। पाकिस्तान ने हमेशा भारत के साथ कश्मीर विवाद को सबसे बड़ा मुद्दा माना। इस वजह से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों की अपनी परेशानियों पर कम ध्यान दिया गया। अब वहां हालात ऐसे हैं कि सरकार के लिए उनकी आवाज दबाना मुश्किल हो रहा है। महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। इसे कई वर्षों में पाकिस्तान सरकार के सामने PoK से उठी सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। PoK में आंदोलन की कमान किसके हाथ में है? PoK में आंदोलन का नेतृत्व जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। इसका गठन 2023 में हुआ था। इसमें व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता शामिल हैं। शुरुआत में संगठन ने महंगी बिजली और आटे की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। 2024 और 2025 में हुए प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान सरकार को झुकना पड़ा। सरकार ने बिजली की दरें कम कीं और आटे पर सब्सिडी दी। इसके बाद PoK में आटा पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों की तुलना में काफी सस्ता मिलने लगा। 12 रिजर्व सीटें रद्द करने की मांग पर आंदोलन लॉन्ग मार्च पर रोक, कई नेता गिरफ्तार हुए JAAC ने 9 जून को रावलकोट से राजधानी मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया। रावलकोट को JAAC का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। यह जगह LoC से करीब 20 मील दूर है। लॉन्ग मार्च होने से पहले ही 5 जून को पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध लगा दिया। कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद आंदोलन नहीं रुका। रावलकोट में समर्थकों ने कई हफ्तों तक धरना जारी रखा, जबकि दूसरी तरफ सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत भी चलती रही। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक जून की शुरुआत से 27 जुलाई तक प्रदर्शनकारियों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों समेत कम से कम 30 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने LoC को दुनिया के बाकी हिस्से से काटा न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर जब पिछले सप्ताह इलाके में पहुंचे तो उन्होंने पाया कि पाकिस्तान सरकार ने PoK के कई हिस्सों को लगभग बाहरी दुनिया से काट दिया है। पूरे इलाके में कई हफ्तों से इंटरनेट सेवा बंद थी। इसका असर सिर्फ मोबाइल और सोशल मीडिया पर नहीं पड़ा, बल्कि बैंक और ATM सेवाएं भी प्रभावित हुईं। मुजफ्फराबाद जाने वाली सड़कों पर जगह-जगह पुलिस की चौकियां बनाई गई थीं। नीलम और झेलम नदी के आसपास की ठंडी और हरी-भरी घाटियां, जहां आमतौर पर गर्मियों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, इस बार लगभग खाली दिखाई दीं। पाकिस्तान के सामने कई संकट PoK में उठा यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब पाकिस्तान पहले से कई मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सेना लंबे समय से उग्रवादी संगठनों के खिलाफ अभियान चला रही है, जिसमें हाल के कुछ साल में हजारों सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं। ऐसे माहौल में PoK इनकी तुलना में अब तक शांत माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदल चुकी है। जिस PoK को पाकिस्तान हमेशा शांत बताता रहा, वहीं अब उसके खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। आंदोलनकारियों और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अब पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी का कहना है कि सरकार ने संगठन की लगभग सभी मांगें मान ली थीं। सिर्फ संवैधानिक बदलाव की मांग स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने कहा, “अब यह विरोध प्रदर्शन नहीं रहा। ये लोग अब प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि दंगाई हैं।” पाकिस्तान सरकार का कहना है कि PoK की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव करने से भारत के साथ कश्मीर विवाद पर उसकी कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी। सरकार का मानना है कि अगर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें खत्म कर दी गईं, तो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी इस प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इससे कश्मीर पर उसके दावे को नुकसान पहुंच सकता है। भारत के फैसले के बाद बढ़ा PoK में तनाव एक्सपर्ट्स का मानना है कि PoK में चल रहे आंदोलन की शुरुआत 2019 की घटनाओं के बाद हुई। उसी साल भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसके विरोध में PoK में भी प्रदर्शन हुए और लोग नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार रहने वाले कश्मीरियों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। मुजफ्फराबाद के राजनीतिक कार्यकर्ता जाहिद अमीन का कहना है कि लोगों की नाराजगी सिर्फ भारत के फैसले से नहीं थी। उन्हें इस बात का भी गुस्सा था कि भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यहीं से पाकिस्तानी नेताओं के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़नी शुरू हुई। JAAC बोली- पाकिस्तान से अलग होना नहीं चाहते PoK एक विशेष संवैधानिक व्यवस्था के तहत चलता है। यहां अपना राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विधानसभा, सुप्रीम कोर्ट और अलग झंडा है। हालांकि रक्षा, विदेश नीति और कई अहम मामलों पर अंतिम फैसला पाकिस्तान की केंद्र सरकार का ही होता है। यहां चुनाव तो होते हैं, लेकिन चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को पाकिस्तान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी पड़ती है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर कई लोग मानते हैं कि उनके पास सीमित अधिकार हैं और बड़े फैसले इस्लामाबाद में लिए जाते हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि वह न तो पाकिस्तान से अलग होना चाहती है और न ही भारत में शामिल होना चाहती है। संगठन का कहना है कि उसकी सिर्फ इतनी मांग है कि PoK के लोगों को अपने इलाके के फैसले लेने का ज्यादा अधिकार मिले। इसके लिए वह ज्यादा स्थानीय अधिकार और संवैधानिक बदलाव की मांग कर रहा है। सेना बोली- आंदोलनकारी कानूनी तरीके से मांग उठाएं पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का कहना है कि सरकार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ संयम बरता है। चौधरी ने कहा कि सरकार ने कई बार JAAC से कहा कि वह 27 जुलाई से शुरू हुए स्थानीय चुनाव में हिस्सा ले और अपनी मांगें कानूनी तरीके से उठाए। लेकिन आंदोलनकारी सड़क पर दबाव बनाकर अपनी मांगें मनवाना चाहते हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने स्थानीय चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। संगठन का आरोप है कि आंदोलन से जुड़े कई उम्मीदवारों के नामांकन पत्र बिना कोई वजह बताए खारिज कर दिए गए। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस आरोप से इनकार किया है। इस्लामाबाद के राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा का कहना है कि 2024 और 2025 के आंदोलनों के दौरान सरकार ने बिजली सस्ती करने और आटे पर सब्सिडी जैसी रियायतें दी थीं। इससे लोगों में यह धारणा बन गई कि सड़क पर उतरकर दबाव बनाने से सरकार झुक जाती है। इसी वजह से JAAC अब राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर भी बड़े आंदोलन कर पा रही है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार ने 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया है। इस बजट में योगी सरकार ने नई योजनाओं की घोषणा करने के बजाय सड़क, उद्योग, बिजली और गांवों के विकास पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। मंगलवार को विधानसभा में पेश किए गए इस बजट में अतिरिक्त राशि का बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण, ग्रामीण संपर्क मार्ग, औद्योगिक ढांचे और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रखा गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार चुनाव से पहले विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रखना चाहती है।
महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों का खास ख्याल
यूपी सरकार द्वारा पेश किए गए इस बजट में महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए पहले से चल रही कई योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन का प्रावधान किया गया है। लेकिन इस बजट में बुजुर्गों, विधवाओं और निराश्रित लोगों की पेंशन बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसके अलावा, किसी नई नकद सहायता योजना या लड़कियों को मुफ्त स्कूटी देने जैसी नई योजना की भी घोषणा नहीं की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा फायदा
इस सप्लीमेंट्री बजट का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण विकास क्षेत्र को मिलेगा। सरकार ने गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए 16,432.46 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। यह पूरे सप्लीमेंट्री बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, सड़क और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 15,750.01 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसका उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क संपर्क देना और दूर-दराज के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
कनेक्टिविटी पर ज्यादा जोर
सरकार का यह बजट साफ दिखाता है कि वह विकास के लिए सड़क, एक्सप्रेसवे, उद्योग और बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार जोर दे रही है। नए एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) और लॉजिस्टिक्स से जुड़े ढांचे के विकास के लिए भी अच्छी-खासी रकम रखी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
एयरपोर्ट पर भी फोकस
सरकार ने कई बड़े विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। इनमें जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, हरदोई और फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली सड़क, गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार और सोनभद्र तक विंध्य एक्सप्रेसवे का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जाएगा। उद्योग क्षेत्र को भी इस बजट में अच्छी-खासी राशि दी गई है। इसके लिए 2,220.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। विदेशी निवेश (एफडीआई) और बड़ी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की नीति के तहत 1,302.61 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
वहीं, अटल औद्योगिक आधारभूत ढांचा मिशन के लिए 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तार योजना के तहत नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और विस्तार के लिए 3,000 करोड़ रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, प्रस्तावित आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और केंद्र सरकार की ‘भव्य’ (BHAVYA) योजना के तहत सात औद्योगिक आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त धन दिया गया है।
इस सप्लीमेंट्री बजट में बिजली क्षेत्र पर भी खास ध्यान दिया गया है। सरकार ने इसके लिए 7,358 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इसमें से 6,958 करोड़ रुपये संशोधित बिजली वितरण योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को पूरा करने के लिए दिए जाएंगे। इसके अलावा, प्रयागराज के मेजा-द्वितीय ताप बिजली परियोजना (मेजा-II थर्मल पावर प्रोजेक्ट) के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाना, लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति देना और बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। हालांकि, चुनावी साल में पेश होने वाले कई बजटों की तरह इस बार कोई बड़ी लोकलुभावन घोषणा नहीं की गई है। इस अनुपूरक बजट में नई मुफ्त योजनाओं या बड़े कल्याणकारी ऐलानों के बजाय विकास कार्यों और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर ज्यादा जोर दिया गया है।
यूपी के 59,020 करोड़ रुपये के सप्लीमेंट्री बजट की बड़ी बातें
- 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट: योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया है। इसमें सड़क, बिजली और अन्य विकास कार्यों पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।
- गांवों के विकास के लिए सबसे ज्यादा राशि: ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए 16,432.46 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इससे गांवों में सड़क, बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
- सड़क और परिवहन पर बड़ा निवेश: सड़क, पुल और परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 15,750.01 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस राशि से नए एक्सप्रेसवे और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाले मार्ग विकसित किए जाएंगे।
- कई नए एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मंजूरी: बजट में विंध्य एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली सड़क, आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली परियोजना तथा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए धन रखा गया है।
- उद्योग क्षेत्र को 2,220.89 करोड़ रुपये: उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 2,220.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इससे विदेशी निवेश, बड़े उद्योगों, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार, आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं को मदद मिलेगी।
- बिजली क्षेत्र के लिए 7,358 करोड़ रुपये: बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए 7,358 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसमें बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को पूरा करने के लिए 6,958 करोड़ रुपये और प्रयागराज की मेजा-द्वितीय ताप बिजली परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये शामिल हैं।
- पुरानी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन: सरकार ने महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों से जुड़ी पहले से चल रही योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि दी है। हालांकि, पेंशन या अन्य लाभ की राशि बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया गया है।
- किसानों और बुनकरों को भी राहत: कृषि क्षेत्र के लिए 254.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे आलू भंडारण पर सब्सिडी, मूल्य स्थिरीकरण कोष और बागवानी को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, हथकरघा और बुनकरों के लिए 140.03 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनका उपयोग बुनकर कल्याण योजनाओं और संत कबीर टेक्सटाइल एवं परिधान पार्क के विकास में किया जाएगा।
Gyan Bharatam Mission: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। देशभर में चलाए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से भी अधिक पांडुलिपियों (Manuscripts) के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। संस्कृति और पर्यटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए इस स्कीम से जुड़ी अहम जानकारियां शेयर की हैं। आपको बता दें कि संस्कृति मंत्रालय की यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, पांडुलिपियों के संरक्षण, इनके डिजिटलाइजेशन और ग्लोबल रिसर्च कम्युनिटी के लिए इसे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
क्या है ज्ञान भारतम मिशन और बजट 2025-26 में क्यों हुई थी घोषणा?
ज्ञान भारतम मिशन (GBM) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का एक विशेष कार्यक्रम है। इसका ऐलान केंद्रीय बजट 2025-26 के दौरान पांडुलिपियों से जुड़ी गतिविधियों को गति देने के लिए की गई थी। इस पैन-इंडिया पहल का मुख्य उद्देश्य किसी भी लिपि, भाषा, ज्ञान परंपरा, क्षेत्र या समुदाय की संरक्षक परंपराओं से परे हटकर संपूर्ण भारत की पांडुलिपि विरासत का संरक्षण करना है। पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, डिजिटलाइजेशन और प्रिजर्वेशन को फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव मजबूती देने के लिए स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने साल 2025 से 2031 के लिए 491।66 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है। इसी फंड का इस्तेमाल देश की बहुमूल्य प्राचीन धरोहरों को नष्ट होने से बचाने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने में किया जा रहा है।
क्या हैं ज्ञान भारतम मिशन के मुख्य उद्देश्य?
ज्ञान भारतम मिशन के तहत कई लक्ष्य तय किए गए हैं। इसमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन और उनके डॉक्युमेंटशन की स्पीड को बढ़ाना है। देशभर में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वे करने के साथ इसमें उनका ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन भी कराया जा रहा है। भारतीय पांडुलिपियों की सटीक कैटलॉगिंग करने से लेकर उन्हें अप टू डेट बनाने का टास्क भी है। पांडुलिपियों सभी तक पहुंचें और ये किताब के साथ-साथ मशीन रीडेबल यानी डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं, ये भी इस मिशन का एक बड़ा लक्ष्य है।
पांडुलिपियों को बचाने के लिए ट्रेनिंग, जागरूकता अभियानों और फाइनेंशियल मदद देने की तैयारी है। इसके अलावा भारतीय भाषाओं और पांडुलिपिविज्ञान की स्डडी, स्कॉलपशिप और रिसर्च को बढ़ावा देने की भी तैयारी की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि पांडुलिपियों की एक विशाल नेशनल डिजिटल रिपॉजिटरी भी तैयार की जाए।
मार्च 2026 में शुरू हुआ राष्ट्रीय सर्वेक्षण: 1.19 करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियां रिपोर्ट की गईं
पांडुलिपियों के धारकों, संग्रहकर्ताओं और अलग अलग भाषाओं व लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं की पहचान करने के लिए मार्च 2026 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इस सर्वे के दौरान देशभर से 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की मौजूदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। अभी देशभर में 8 लाख से अधिक डिजिटल पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। इनमें से 4.40 लाख से अधिक पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम पोर्टल पर आम जनता के देखने के लिए उपलब्ध करा दिया गया है, जिन्हें राज्यवार आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।
क्लस्टर सेंटर्स और राज्यों के साथ संस्थागत ढांचा
मिशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है। इसके तहत क्लस्टर सेंटर्स और इंडिपेंडेंट सेंटर्स बनाए गए हैं। इनमें यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट, पुस्तकालय, अभिलेखागार, निजी संरक्षक, धार्मिक संस्थान और दूसरे स्टेकहोल्डर्स शामिल हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान भारतम के कार्यान्वयन के लिए नोडल कोआर्डिनेटिंग अथॉरिटी के रूप में जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर, बिहार की कई प्रमुख संस्थाएं इस मिशन से जुड़ चुकी हैं, जिनमें नवा नालंदा महाविहार (नालंदा), खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी (पटना) और श्री बोधगया मठ (बोधगया) शामिल हैं।
कॉपीराइट और सुरक्षा का रखा जा रहा पूरा ध्यान
डिजिटल पांडुलिपियों तक एक्सेस देते समय इनके कस्टोडियनों और अधिकार धारकों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जिन पांडुलिपियों पर कोई कानूनी या तकनीकी रोक नहीं है उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से सार्वजनिक और विद्वानों के शोध के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित पांडुलिपियों तक पहुंच के लिए उचित शर्तें और नियम लागू किए जाएंगे।
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15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। लाल किले पर मुख्य समारोह और देश भर में तैयारियों को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस बार यह दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। हालांकि आजादी के उत्सव में विदेशी अतिथियों को बुलाने की परंपरा नहीं रहती है लेकिन इस दिन देश के गणमान्य नागरिकों को जरूर बुराया जाता है।
मुख्य अतिथि और विशेष आमंत्रित सदस्य
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की तरह विदेश से कोई मुख्य अतिथि (Chief Guest) बुलाने की परंपरा नहीं होती। इस दिन मुख्य रूप से केंद्र में देश के प्रधानमंत्री होते हैं, जो लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा देश भर से विभिन्न क्षेत्रों के विशेष अतिथियों को आमंत्रित करने की परंपरा जारी है-
जन-भागीदारी (Special Invitees): देश भर के विभिन्न राज्यों से ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने वाले लोग, उत्कृष्ट युवा इनोवेटर्स/स्टार्टअप उद्यमी, एयरोस्पेस/स्टेम (STEM) शिक्षा में योगदान देने वाले अग्रणी (जैसे एरोबे की संस्थापक नेहा चौहान), स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ, और माईभारत/माईगव (MyGov) प्रतियोगिताओं के विजेता अतिथियों में शामिल होंगे।
इस बार की खास तैयारियाँ:
'आत्मनिर्भर रक्षा' और स्वदेशी तकनीक: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर इस्तेमाल होने वाले तोप और सुरक्षा उपकरण स्वदेशी (Indigenously built) तकनीक से युक्त होंगे।
22 भारतीय भाषाओं में रीयल-टाइम अनुवाद: डिजिटल इंडिया के 'भाषिणी' (AI Bhashini) टूल की मदद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में रीयल-टाइम अनुवादित किया जाएगा।
'विकसित भारत 2047' और 'युवा संवाद': इस बार का मुख्य फोकस 6G ट्रायल्स, ग्रीन एनर्जी (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन), और 'यंग लीडर्स डायलॉग' पर रहेगा। 'हर घर तिरंगा' अभियान: इस अभियान के माध्यम से नागरिकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और डिजिटल रूप से तिरंगे के साथ सेल्फी शेयर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
Ather Energy Q1 Results: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी Ather Energy ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध घाटा घटकर ₹51 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹178.2 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 88.8% बढ़कर ₹1,217 करोड़ पहुंच गया।
कंपनी का EBITDA घाटा भी काफी कम होकर ₹33.4 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹134.3 करोड़ था। इसका मतलब है कि बिक्री बढ़ने के साथ कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी बेहतर हुई है।
EV बाजार में दिख रहा बड़ा मौका
Ather Energy का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी के मुताबिक, दिल्ली EV पॉलिसी और केंद्र सरकार की PM E-Drive जैसी योजनाएं इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं।
इसके अलावा पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता भी है। इससे ग्राहक EV अपनाने की तरफ बढ़ रहे हैं। कंपनी का कहना है कि हालिया पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी से पहले ही EV की मांग तेज होने लगी थी।
जल्द लॉन्च होगा नया स्कूटर
Ather अब अपने नए EL स्कूटर को लॉन्च करने की तैयारी में है। जून तिमाही में इसका होमोलोगेशन पूरा हो गया है और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं।
कंपनी के होसुर प्लांट में FY27 की दूसरी तिमाही से इसका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होगा। अगस्त में होने वाले Ather Community Day के दौरान इस स्कूटर को लॉन्च किया जाएगा।
कंपनी आने वाले समय में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60,000 गाड़ी प्रति माह करने की योजना पर काम कर रही है।
हाल ही में जुटाए ₹1,300 करोड़
Ather Energy ने इसी महीने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹1,300 करोड़ जुटाए हैं। कंपनी ने 1.08 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,202 प्रति शेयर के भाव पर जारी किए।
टेक्नोलॉजी फीचर्स पर भी फोकस
एथर एनर्जी लगातार अपने सॉफ्टवेयर फीचर्स भी मजबूत कर रही है। हाल ही में उसने ‘Pothole+ Alerts’ फीचर लॉन्च किया है। यह फीचर 450 Apex, 450X और Rizta Z समेत Gen 2 और उसके बाद के स्कूटरों में उपलब्ध है।
यह फीचर Ather के कनेक्टेड स्कूटरों से मिले डेटा की मदद से रास्ते में गड्ढों, टूटी सड़कों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और स्पीड ब्रेकर की पहले से जानकारी देता है। इससे राइडिंग ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सके।
Ather Energy के शेयरों का हाल
एथर एनर्जी का शेयर सोमवार को 1.56% की बढ़त के साथ 1,280 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसने 89.38% का रिटर्न दिया है। वहीं 1 साल में इसने 223.27% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 50.16 हजार करोड़ रुपये है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
जंतर-मंतर में Gen Z के प्रदर्शन की ताकत देखने के बाद कांग्रेस अब इसे लेकर एक नई रणनीति पर चलती हुई दिख रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। राहुल गांधी एक बार फिर बेरोजगारी, पेपर लीक और रुकी हुई सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी करते दिख रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 8 अगस्त को प्रयागराज के केपी ग्राउंड में छात्र संवाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रयागराज के छात्रों के लिए एक पोस्ट शेयर किया है।
राहुल गांधी ने किया ये ऐलान
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा, “जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।” उन्होंने कहा कि कोटा और देहरादून के बाद अब “छात्रों की गूंज” प्रयागराज पहुंच रही है। अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का वर्तमान छीन लिया है, जबकि रुकी हुई भर्तियों ने उनके भविष्य को भी संकट में डाल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में दिल्ली में अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी युवाओं की आवाज लगातार उठाती रहेगी और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि अब बहानों का समय खत्म हो चुका है। अपने पोस्टच के अंत में राहुल गांधी ने युवाओं से 8 अगस्त को प्रयागराज में मिलने की अपील भी की।
कांग्रेस ने बदली रणनीति
बता दें कि, कांग्रेस ने 17 जून को कोटा से छात्रों की गूंज अभियान का पहले चरण की शुरुआत करने के बाद दूसरा चरण 17 जुलाई को देहरादून में हुआ था। इसके बाद तीसरा चरण प्रयागराज में 8 अगस्त को होना तय हो गया है। बता दें कि, इससे पहले राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों ने बड़ा प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंर्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।
इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अपनी रणनीति में बदलाव करती दिख रही है। पार्टी अब इसी असंतोष को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है। जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों के घटते अवसर जैसे विषयों पर पार्टी फोकस करती नजर आ रही है।
Indian Rail Border Project: बदलती रीजनल मोबिलिटी और रणनीतिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपनी स्ट्रैटिजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों के तहत चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अपनी सीमाओं पर रेलवे नेटवर्क के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए लगभग ₹45000 करोड़ ($4.7 बिलियन) के निवेश की योजना बना रहा है। आने वाले 18 से 24 महीनों के भीतर लागू होने वाली यह परियोजना अगले दो वर्षों के लिए नियोजित कुल रेलवे इंफ्रा आउटले का करीब 22 फीसदी हिस्सा है।
इन सीमावर्ती राज्यों में बिछेगा रेलवे का जाल
रिपोर्ट के मुताबिक इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस खर्च का इस्तेमाल देश के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में नई पटरियां बिछाने, नए प्लेटफॉर्म बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस योजना में पाकिस्तानी सीमा से लगते पश्चिमी राज्य पंजाब और राजस्थान, बांग्लादेश सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सटे पश्चिम बंगाल और असम के रणनीतिक क्षेत्र, चीन सीमा के पास और सुदूर पर्वतीय क्षेत्र वाले हिमाचल और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं।
आपको बता दें कि ये नया प्लान भारत सरकार के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क, पुल और सुरंगों बनाने के उस $3.4 बिलियन ($340 करोड़) के प्लान से भी बड़ा है, जिसकी जानकारी पहले सामने आई थी।
संवेदनशील सीमाओं पर बदलती रणनीतिक स्थितियां
सीमावर्ती कनेक्टिविटी पर भारत का ये फोकस तब सामने आया है जब पड़ोसी देशों के साथ संबंध नए फेज में आगे बढ़े हैं। 6 साल पहले हुई घातक झड़प के बाद चीन के साथ संबंधों में अब स्थिरता आई है। आपको बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ एक ब्रीफ कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिला था। इसके अलावा साल 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उलटफेर ने भारत के पहले से स्थिर साझेदारी के संबंधों को जटिल बना दिया है।
नागरिक सुविधा के साथ सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूती
इस भारी निवेश से डुअल यूजर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये सिविलियन रेलवे नेटवर्क होंगे जिनका इस्तेमाल आम नागरिकों की आवाजाही के लिए तो होगा ही, साथ ही आपात स्थिति में ये सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी पूरा सहारा देंगे।
हिमालयी क्षेत्रों, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसी संवेदनशील सीमाओं तक उच्च क्षमता वाले, ऑल-वेदर रेल नेटवर्क को मजबूत करके ट्रूप मोबलाइजेशन टाइम को भी स्ट्रैटिजकली कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रिजनल प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ यह अहम सप्लाई लाइन को भी सुरक्षित करता है।
सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर पीएम मोदी का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवेदनशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को लगातार प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने इसे लेकर लगातार कदम उठाए हैं। पाकिस्तान सीमा के पास 1450 किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। डोकलाम के करीब इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर है।
पिछले साल कश्मीर घाटी को बाकी भारत से जोड़ने वाले दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का उद्घाटन किया गया। पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में लगभग 1700 किलोमीटर नई रेल लाइनें जोड़ी गई हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और सैन्य विमानों के इस्तेमाल के लिए 1962 से निष्क्रिय पड़े एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से सक्रिय किया गया है।
चीन की ओर से भी जारी है निर्माण
रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ चीन ने भी 2017 में डोकलाम में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से अपनी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण काफी तेज कर दिया है। चीन अपनी सीमा में एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। चीन के इस विस्तार ने उपकरण और सैनिकों की तेजी से आवाजाही के जरिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी भारत के रेल मंत्रालय की ओर से इस निवेश योजना पर कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी नहीं आई है।
8th Pay Commission Increment Calculation: पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को बने 9 महीने हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, आयोग साल 2027 की शुरुआत में अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा। वेतन आयोग की सिफारिशों में जहां फिटमेंट फैक्टर की सबसे ज्यादा चर्चा है, वहीं सालाना वेतन वृद्धि दर भी कर्मचारियों की सैलरी तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को बेसिक पे का 3% सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। हालांकि, विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग से एनुअल इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 5%, 6% या 7% करने की मांग की है। आइए अनुमानित आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि इंक्रीमेंट 3%, 5% या 6% होने पर अगले 5 सालों में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कितनी बढ़ सकती है।
कर्मचारी यूनियनों ने कितने % इंक्रीमेंट की मांग की है?
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सालाना वेतन वृद्धि की दर में बढ़ोतरी को लेकर अपनी मांगें रखी हैं। इसमें नेशनल काउंसिल ऑफ द जेसीएम (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने मौजूदा 3% इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, इंडियन रेलवे सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने 5% और ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने 7% वार्षिक इंक्रीमेंट की सिफारिश की है, ताकि लंबी अवधि में केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बेहतर बढ़ोतरी हो सके।
लेवल 1 कर्मचारियों की सैलरी का गणित
7वें पे मैट्रिक्स के अनुसार लेवल 1 की शुरुआती बेसिक पे ₹18,000 है। अलग-अलग इंक्रीमेंट रेट के हिसाब से 5 साल में बेसिक सैलरी का ट्रेंड ऐसा हो सकता है:

लेवल 2 कर्मचारियों की सैलरी का गणित
लेवल 2 की शुरुआती बेसिक पे ₹19,900 होती है। 5 साल में यह इस प्रकार बढ़ सकती है:

लेवल 3 कर्मचारियों की सैलरी का गणित
लेवल 3 की शुरुआती बेसिक पे ₹21,700 है। देखिए 5 साल में यह कितनी बढ़ेगी:

बेसिक पे बढ़ने का अलाउंस और पेंशन पर क्या पड़ेगा असर?
सालाना इंक्रीमेंट से केवल टेक-होम सैलरी ही नहीं बढ़ती, बल्कि इससे जुड़े कई अन्य भत्तों में भी कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है:
महंगाई भत्ता (DA) & HRA: डीए और एचआरए की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर होती है। बेसिक पे ज्यादा होने पर डीए और एचआरए की रकम भी अपने आप बढ़ जाएगी।
NPS / PF योगदान: एनपीएस या प्रोविडेंट फंड में बेसिक+डीए का 10% कटता है, जिससे रिटायरमेंट कॉर्पस मजबूत होगा।
पेंशन और रिटायरमेंट बेनेफिट्स: रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और पेंशन भी अंतिम बेसिक पे पर निर्भर करती है।
नोट: ये आंकड़े केवल 7वें पे मैट्रिक्स के आधार पर तैयार किए गए अनुमानित कैलकुलेशन हैं। 8वें वेतन आयोग ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
Samudra Manthan scheme: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस के आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता को घटाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले हफ्ते ₹84,084 करोड़ की समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (Samudra Manthan National Offshore Exploration Scheme) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सरकार उच्च जोखिम वाले गहरे और अत्यधिक गहरे समुद्री तेल व गैस की खोज का खर्च सीधे बजट से उठाएगी।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार समुद्र में एक गहरे या अत्यधिक गहरे पानी के एक्सप्लोरेशन वेल (कुएं) की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹650 करोड़ (जो भी कम हो) का खर्च उठाएगी। अधिकारियों के मुताबिक अगले पांच वर्षों में ऐसे 60 कुओं की ड्रिलिंग के लिए सरकारी सहायता बढ़ाई जाएगी।
सरकार क्यों उठा रही है जोखिम? दुनिया का पहला अनोखा कदम
सरकारी अधिकारियों ने इस पहल को एक अभूतपूर्व कदम बताया है जिसमें सरकार सीधे तौर पर बजटीय सहायता के माध्यम से एक्सप्लोरेशन रिस्क को अपने ऊपर ले रही है। पीटीआई से बातचीत में एक अधिकारी ने बताया कि शायद दुनिया में यह पहली बार है जब कोई सरकार सीधे अपने बजट से जोखिम वाले एक्सप्लोरेशन का खर्च उठा रही है। अगले पांच वर्षों में कुल 60 गहरे पानी और अत्यधिक गहरे पानी के एक्सप्लोरेशन कुओं को बजट से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी कंपनियां ऐसे जोखिम भरे एक्सप्लोरेशन से बचती रही हैं। इसका मुख्य कारण यह था कि अगर ड्रिलिंग के दौरान कॉमर्शियली रियलिस्टिक तेल या गैस के भंडार नहीं मिलते हैं, तो पूरा निवेश डूब जाता है। एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि कंपनियां सिर्फ डेवलपमेंट ड्रिलिंग यानी पहले से खोजे गए भंडारों से उत्पादन बढ़ाने पर ही पैसा खर्च कर रही थीं। नए संसाधनों की खोज के लिए सबसे महत्वपूर्ण रिस्क एक्सप्लोरेशन में न के बराबर पैसा लगाया जा रहा था। इस लिहाज से समुद्र मंथन एक गेम-चेंजिंग योजना है।
₹84084 करोड़ का पूरा बजट ब्रेकअप
इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए आवंटित कुल ₹84,084 करोड़ के बजट को अलग-अलग चरणों के हिसाब से बांटा गया है। डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर ड्रिलिंग के लिए अगले पांच वर्षों में गहरे समुद्र में ड्रिलिंग के लिए ₹43200 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। समुद्री भूकंपीय डेटा के लिए ₹28534 करोड़ आवंटित किए गए हैं। Subsea पाइपलाइनों और तटवर्ती तेल व गैस प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास के लिए ₹10000 करोड़ दिए जाएंगे। तेल व गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के विकास के लिए ₹2000 करोड़ रखे गए हैं।
कैसे काम करेगा कॉमन हब इंफ्रास्ट्रक्चर (CHI) मॉडल?
सिर्फ ड्रिलिंग में ही नहीं बल्कि सरकार सबसी पाइपलाइनोंऔर तटीय तेल व गैस प्राप्त करने Qj प्रसंस्करण करने वाली सुविधाओं जैसे कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी आंशिक फंडिंग देगी। इसके लिए कॉमन हब इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल तैयार किया गया है। इसके तहत एक से अधिक ऑपरेटर्स साझा संपत्तियों का उपयोग करके अपने खोजे गए भंडारों का व्यावसायिक उपयोग कर सकेंगे। इससे विकास लागत घटेगी, परियोजनाओं की व्यावहारिकता में सुधार होगा और छोटी खोजों से भी तेजी से व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया जा सकेगा।
कौन सी कंपनियां होंगी पात्र और क्या होगा फायदा?
ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (OALP) के पिछले दौरों में ब्लॉक हासिल करने वाली कंपनियों के साथ-साथ चल रहे बोली दौर में ब्लॉक हासिल करने वाली फर्में भी इस योजना के तहत पात्र होंगी। वे प्रत्येक गहरे या अत्यधिक गहरे पानी के कुएं की ड्रिलिंग के लिए सरकार से ₹650 करोड़ तक की सहायता प्राप्त कर सकेंगी। इस योजना से भारत के अपतटीय एक्सप्लोरेशन सेक्टर में वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के आकर्षित होने की भी उम्मीद है।
इंडस्ट्री इसके असर के बारे में टिप्पणी करते हुए इक्रा लिमिटेड (ICRA Ltd) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने पीटीआई को बताया कि यह कार्यक्रम ऑफशोर एक्सप्लोरेशन की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक को दूर करता है। इसके अलावा यह योजना गहरे और अत्यधिक गहरे पानी के कुओं की ड्रिलिंग के लिए सहायता प्रदान करती है, जहां घरेलू अपस्ट्रीम क्षेत्र के पास सीमित अनुभव व तकनीकी विशेषज्ञता है और इनका दोहन अत्यधिक पूंजी-गहन और जोखिम भरा है। इस योजना का लक्ष्य 10-15 मिलियन टन तेल समकक्ष का अतिरिक्त वार्षिक उत्पादन जोड़ना है जो तेल और गैस के आयात पर निर्भरता को 3 से 5 प्रतिशत तक कम कर देगा।
कच्चे तेल पर 88% तक पहुंची भारत की निर्भरता
यह योजना ऐसे समय में आई है जब पिछले एक दशक में भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता 77 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही देश अपनी कुल प्राकृतिक गैस आवश्यकता का लगभग आधा हिस्सा अब भी आयात करता है। अधिकारियों का मानना है कि भारतीय समुद्री क्षेत्र के भीतर अनछुए हाइड्रोकार्बन भंडारों का पता लगाकर घरेलू अपतटीय एक्सप्लोरेशन का विस्तार करने से देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्वीकार किया कि गहरे समुद्र में एक्सप्लोरेशन एक दीर्घकालिक निवेश है और जरूरी नहीं कि हर कुएं से व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक खोज ही निकले। इसके बावजूद सरकार द्वारा एक्सप्लोरेशन के जोखिम को सीधे फंड करने का फैसला भारत की तेल और गैस एक्सप्लोरेशन स्ट्रैटिजी में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है।
8th Central Pay Commission updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां केंद्रीय वेतन आयोग इस समय सबसे बड़ा और चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारी संगठनों की मांगों और वित्तीय विश्लेषण के मुताबिक अगर 8वें वेतन आयोग में महंगाई भत्ते (DA) का बेसिक वेतन में विलय और वार्षिक इंक्रीमेंट दर में बढ़ोतरी की मांग स्वीकार कर ली जाती है तो नियमित वेतन वृद्धि और DA संशोधनों के संयुक्त प्रभाव से केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी अगले 7 वर्षों के भीतर लगभग दोगुनी हो सकती है।
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आधिकारिक तौर पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही लगभग 55 लाख से अधिक कार्यरत कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों (जिसमें सेवानिवृत्त रक्षा कर्मी भी शामिल हैं) के वेतन, पेंशन, भत्तों, सेवा शर्तों और अन्य लाभों की समीक्षा व सिफारिश के लिए नियम एवं शर्तें जारी की गई थीं।
क्षेत्रीय परामर्श जारी: दिल्ली, चेन्नई और पुडुचेरी में होंगी आगामी बैठकें
अभी 8वां वेतन आयोग विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपना क्षेत्रीय परामर्श आयोजित कर रहा है। इसके तहत आगामी बैठकों का कार्यक्रम इस प्रकार तय किया गया है:
दिल्ली: 7 और 10 अगस्त 2026
चेन्नई: 7 और 8 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की अंतिम तिथि: 18 अगस्त 2026)
पुडुचेरी: 9 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की अंतिम तिथि: 18 अगस्त 2026)
पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित है आयोग
8वें वेतन आयोग की संरचना और नेतृत्व की बात करें तो इसकी कमान पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस के हाथों में है। इसकी अध्यक्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई हैं। सदस्य-सचिव पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन और सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष हैं जो प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य भी हैं। यह आयोग लगभग 50 लाख से 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख से 69 लाख पेंशनभोगियों के जीवन को प्रभावित करने वाले बदलावों की सिफारिश करेगा।
कर्मचारी यूनियनों (NC-JCM) की प्रमुख मांगें
कर्मचारी प्रतिनिधि निकायों में सबसे बड़े संगठनों में से एक नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आयोग कई मांगें रखी हैं। इसमें न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर ₹69000 करने की मांग है। इसके अलावा मौजूदा 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाले 3% वार्षिक इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का सुझाव है। दूसरे संगठनों की मांगों में DA को समय-समय पर बेसिक सैलरी में मर्ज करना शामिल है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 8वें वेतन आयोग में अगर DA मर्जर और 6% इंक्रीमेंट लागू होता है, तो चक्रवृद्धि प्रभाव से सैलरी में भारी उछाल आएगा। जब महंगाई भत्ता 50% से ऊपर चला जाता है, तो इसे मूल वेतन में शामिल करने की मांग बढ़ जाती है। जैसे ही DA का बेसिक पे में विलय होता है, कर्मचारी की बेसिक सैलरी बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप बेसिक पे पर निर्भर अन्य सभी भत्ते (जैसे HRA, TA आदि) भी स्वतः बढ़ जाते हैं।
अभी सरकारी कर्मचारियों को 3% का सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। अगर इसे बढ़ाकर 6% किया जाता है और साथ ही नियमित आधार पर DA को बेसिक पे में जोड़ा जाता है, तो वेतन वृद्धि की दर बहुत तेज हो जाएगी। उच्च वार्षिक वेतन वृद्धि और DA मर्जर का यह संयुक्त प्रभाव चक्रवृद्धि की तरह काम करेगा, जिससे 7 साल के भीतर ग्रॉस सैलरी दोगुनी हो सकती है।
फिटमेंट फैक्टर की भूमिका सबसे ज्यादा
नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगा। अगर पिछला इतिहास दोहराते हुए नया फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में शुरुआती स्तर पर ही बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। वैसे एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि 7 साल में सैलरी दोगुनी होने का गणित एक प्रोजेक्शन है। वास्तविक वेतन वृद्धि कितनी होगी, यह 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली अंतिम मंजूरी पर ही निर्भर करेगा।
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