8th Pay Commission पर 5 नए बड़े अपडेट्स! कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर पड़ेगा सीधा असर

8th Pay Commission Latest Updates: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हुए लगभग 9 महीने का समय बीत चुका है। नवंबर 2025 में पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह आयोग अब अपनी 18 महीने की कुल समय-सीमा के आधे सफर पर पहुंच रहा है। अगस्त 2026 के पहले हफ्ते में आयोग के 9 महीने पूरे होने के साथ ही दूसरे चरण का काम बेहद तेजी से शुरू होने जा रहा है।

देश भर के करीब 1.1 करोड़ से ज्यादा सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर परामर्श, बैठकों और शिकायतों को लेकर लगातार कई नए नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं। आइए जानते हैं आयोग की वेबसाइट पर आए हालिया 5 सबसे बड़े अपडेट्स के बारे में, जो आपकी सैलरी, पेंशन और भत्तों पर सीधा असर डालेंगे।

8वें वेतन आयोग की वेबसाइट पर आए 5 नए अपडेट्स

आयोग ने हितधारकों, कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों के साथ चर्चा का दायरा बढ़ाते हुए परामर्श बैठकों का नया शेड्यूल जारी किया है:

8वें वेतन आयोग की वेबसाइट पर आए 5 नए अपडेट्स

संसद में वित्त मंत्रालय की बड़ी सफाई

हाल ही में राज्यसभा में वित्त मंत्रालय से आयोग की कार्यप्रगति को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर मंत्रालय ने साफ किया कि 8वें वेतन आयोग के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह सरकार को अपनी आंतरिक प्रगति या चर्चाओं की समय-समय पर रिपोर्ट दे।

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जारी टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) के तहत आयोग को अपनी बैठकों, फीडबैक और प्रक्रिया तय करने की पूरी आजादी है। आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंप सकता है।

फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या चल रहा है?

कर्मचारी यूनियनों जैसे- NCJCM, BPMS, AIDEF की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष फिटमेंट फैक्टर को 3.8x से 4.0x तक बढ़ाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।

अगर सरकार 3.83 के आसपास का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर सीधे करीब ₹68,900 – ₹69,000 प्रति माह तक पहुंच सकता है।

हालांकि, फिटमेंट फैक्टर या सैलरी में बढ़ोतरी के आधिकारिक आंकड़ों पर आयोग या सरकार ने अभी तक कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है। बैठकों का यह दौर पूरा होने के बाद ही स्थिति साफ होगी।

कर्मचारियों को कब मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी?

भले ही आयोग अपनी रिपोर्ट 2027 के मध्य तक सौंपे और सरकार को इसे मंजूर करने में कुछ महीनों का समय लगे, लेकिन 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से ही लागू माना जाएगा। इसका मतलब है कि देरी होने पर भी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पूरा एरियर एकमुश्त दिया जाएगा।

बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

Yashasvini Raje Singh Support CJP

Yashasvini Raje Singh Support CJP: नीट धांधली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के शांत होते ही एक बड़े राजनीतिक भूचाल ने दस्तक दे दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन का सत्तारूढ़ भाजपा के ही एक बड़े नेता की बेटी ने खुलकर समर्थन किया है। पेशे से कंटेंट क्रिएटर यशस्विनी राजे सिंह ने न सिर्फ अपनी ही सरकार के नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी सरेआम मजाक उड़ाया है।

 

यूपी के फतेहपुर सदर से पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी ने सीजेपी का समर्थन करते हुए सीधे केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला बोला है। 'अल जजीरा' को दिए इंटरव्यू में यशस्विनी ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाए जाने के फैसले पर तीखा तंज कसते हुए इसे 'एक बेहद भद्दा मजाक' करार दिया। ALSO READ: धमकी के बाद छिपकर रहे थे दीपके के माता-पिता, CJP नए आंदोलन की तैयारी में

 

पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को बताया 'शहादत का ड्रामा'

नीट परीक्षा विवाद के बाद 25 जुलाई को जब धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो यशस्विनी ने उनके पत्र की धज्जियां उड़ा दीं। यशस्विनी ने कहा कि इस्तीफे की भाषा देखकर बिल्कुल नहीं लगता कि धर्मेंद्र प्रधान को अपने किए पर जरा भी पछतावा है या वे अपनी गलती मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्र की भाषा ऐसी है जैसे कोई खुद को 'शहीद' साबित करने की कोशिश कर रहा हो। 
 

गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा था कि वे छात्रों के नुकसान को रोकने और 'राष्ट्रविरोधी ताकतों' से देश को बचाने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। ALSO READ: CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

परिवार और पिता की राजनीति से पूरी तरह बनाई दूरी

बीजेपी नेता की बेटी होने के बावजूद यशस्विनी का यह रुख हर किसी को हैरान कर रहा है। हालांकि, यशस्विनी ने साफ किया कि वे पिछले साढ़े तीन सालों से अपने परिवार से अलग रह रही हैं। वे अपने पिता से राजनीति पर कोई बात नहीं करतीं और सालों से उनके निर्वाचन क्षेत्र भी नहीं गई हैं। यशस्विनी के मुताबिक, इसी आजादी और दूरी की वजह से वे बिना किसी पाखंड या डर के अपनी बात बेबाकी से रख पाती हैं।

कौन हैं यशस्विनी?

यशस्विनी राजे सिंह पेशे से एक कंटेंट क्रिएटर हैं। वे उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी हैं। सिंह भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक रह चुके हैं। यशस्विनी पिछले साढ़े तीन साल से अपने परिवार से अलग रहकर स्वतंत्र जीवन जी रही हैं और उन्होंने CJP के तहत जंतर-मंतर पर हुए नीट आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी भाजपा नेताओं, यहां तक कि वर्तमान सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहड़ ने भी सीजेपी प्रोटेस्ट का समर्थन किया था। अर्चिता ने इंस्टाग्राम पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाते हुए स्टोरी पोस्ट की और लिखा- “पूरा भाजपा परिवार और मेरे संबंधी डीपी (धर्मेंद्र प्रधान) के साथ हैं, लेकिन मैं छात्रों के साथ हूं।

 

जब उनकी पोस्ट हटाने को लेकर दबाव बनाने के दावे सोशल मीडिया पर चले, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया कि वे अपनी पोस्ट डिलीट नहीं करेंगी। इनके साथ ही असम सरकार में कैबिनेट मंत्री और एनडीए के सहयोगी दल असम गण परिषद के वरिष्ठ नेता केशव महंता की बेटी दिबिसा महंता ने भी सीजेपी का समर्थन किया था। 

Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कब शुरू होगी? 61% काम पूरा, जानिए पहले किस रूट पर दौड़ेगी

Bullet Train news: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को डेवलप करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसने 61 फीसदी से ज्यादा की फिजिकल प्रोग्रेस कर ली है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की जून महीने की रिपोर्ट के मुताबिक इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर अब तक 90966.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

पहले किस रूट पर और कब दौड़ेगी पहली बुलेट ट्रेन?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक भारत की पहली बुलेट ट्रेन का पहला कमर्शियल रन अगस्त 2027 में शुरू होगा। यह शुरुआत 100 किलोमीटर लंबे सूरत से वापी खंड के बीच होगी। यह इस पूरे हाई-स्पीड कॉरिडोर का पहला चरण होगा। इसके बाद वापी-अहमदाबाद और ठाणे-अहमदाबाद सेक्शन को चालू किया जाएगा। इसके बाद अंत में पूरा मुंबई-अहमदाबाद रूट चालू होगा। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पूरे 508 किमी के इस रूट का काम दिसंबर 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।

1.08 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है कॉस्ट

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की निगरानी केंद्र सरकार के प्रगति (PRAGATI) पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। वर्तमान में इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये रखी गई है। परियोजना के अंत तक इसकी कुल लागत बढ़कर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारतीय रेलवे लागत में होने वाली इस बढ़ोतरी को बिना जापानी एजेंसी जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से अतिरिक्त कर्ज मांगे खुद ही वहन करेगी। गौरतलब है कि JICA ने इस प्रोजेक्ट के एक बड़े हिस्से के लिए फंडिंग दी है।

ग्राउंड पर कितना हुआ काम?

संसद में पेश आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक इस 508 किलोमीटर के कॉरिडोर पर काम काफी तेजी से चल रहा है। 209 किलोमीटर ट्रैक बेड बनकर तैयार हो चुका है और 190 किलोमीटर तक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन के मस्तूल तैयार किए जा चुके हैं। 452 किलोमीटर पियर्स का काम भी पूरा कर लिया गया है जबकि 356 किलोमीटर के हिस्से में गर्डर बिछाए जा चुके हैं। महाराष्ट्र में घनसोली से शीलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी अंडर-सी टनल का काम चल रहा है। इसमें से 4.8 किलोमीटर टनलिंग का काम पूरा हो चुका है।

सूरत से वापी के बीच के 97 किमी के हिस्से पर नदी पुलों के निर्माण सहित सभी सिविल काम पूरे हो चुके हैं और 86% ट्रैक बेड बिछा दिया गया है। इस पूरे कॉरिडोर का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड यानी खंभों पर बनाया जा रहा है जबकि बाकी का हिस्सा टनल, ब्रिज और स्टेशन एरिया का है।

किन 12 स्टेशनों से होकर गुजरेगी बुलेट ट्रेन?

यह हाई-स्पीड कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरता है। इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं-

  • मुंबई
  • ठाणे
  • विरार
  • बोईसर
  • वापी
  • बिलिमोरा
  • सूरत
  • भरूच
  • वडोदरा
  • आनंद
  • अहमदाबाद
  • साबरमती

320 किमी/घंटे की रफ्तार, महज 1 घंटे 58 मिनट में सफर पूरा

पूरा प्रोजेक्ट चालू होने के बाद बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ेगी। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। जानकारी के मुताबिक अगर बुलेट ट्रेन सिर्फ 4 प्रमुख इंटरमीडिएट स्टेशनों पर रुकती है तो मुंबई से अहमदाबाद की दूरी तय करने में 1 घंटा 58 मिनट का समय लगेगा। अगर ट्रेन सभी 12 स्टेशनों पर रुकते हुए चलती है तो इस सफर को पूरा करने में 2 घंटे 17 मिनट का समय लगेगा। ऐसा माना जा रहा है कि यह कॉरिडोर पश्चिम भारत के दो प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को जोड़कर रेल यात्रा का रूप बदल देगा।

क्या है 84 हजार करोड़ का भारत का समुद्र मंथन मिशन जिसे आज मिल सकती है मंजूरी? 5 पॉइंट में समझिए किस खजाने की होगी खोज

Samudra Manthan Mission Deep Sea Exploration Scheme: केंद्र सरकार देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय कैबिनेट शुक्रवार 31 जुलाई को सरकार के महत्वाकांक्षी समुद्र मंथन कार्यक्रम के पहले चरण को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। हमारे सहयोगी न्यूज चैनल सीएनबीसी-टीवी18 ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना का मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को तेज करना और भारत के ऊर्जा क्षेत्र को एक नई दिशा देना है।

आइए 5 पॉइंट में समझते हैं कि करीब 84000 करोड़ रुपये का यह समुद्र मंथन मिशन क्या है, इसका उद्देश्य क्या है और इसके जरिए किस समुद्री खजाने की तलाश की जाएगी।

  • 1- 84000 करोड़ रुपये का बजट और पहला चरण

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित समुद्र मंथन योजना के पहले चरण में करीब 84000 करोड़ रुपये का आउटले शामिल है। इस भारी-भरकम बजट के जरिए देश में ऑफशोर एक्सप्लोरेशन को स्पीडअप किया जाएगा। अगर कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह हाल के वर्षों में भारत के अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस सेक्टर के लिए सरकार का सबसे बड़ी पॉलिसी सपोर्ट इनिशिएटिव्स में से एक होगा।

  • 2- किस खजाने की होगी खोज?

इस मिशन का मुख्य लक्ष्य समुद्र की गहराइयों में छिपे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडारों की खोज करना है। यह योजना भारत के गहरे समुद्री तलछटी बेसिनों में एक्सप्लोरेशन को पुश करेगी। इसके जरिए देश में हाइड्रोकार्बन का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा ताकि विदेशी कच्चे तेल और गैस के आयात पर भारत की निर्भरता को कम किया जा सके।

  • 3- हाई-रिस्क वाले डीप-वाटर प्रोजेक्ट्स को मिलेगी पॉलिसी सपोर्ट

गहरे समुद्र और बेहद गहरे समुद्र के इलाकों में तेल-गैस की खोज करना न सिर्फ तकनीक के लिहाज से काफी जटिल है बल्कि इसमें वित्तीय और भूगर्भीय जोखिम भी बहुत अधिक होता है। इन क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन की लागत काफी अधिक आती है। समुद्र मंथन योजना का एक बड़ा उद्देश्य इन हाई रिस्क वाली खोज गतिविधियों को मजबूत पॉलिसी सपोर्ट देना है ताकि कंपनियों को गहरे पानी में उतरने का प्रोत्साहन मिल सके।

  • 4- पीएम मोदी के राष्ट्रीय डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन का हिस्सा

सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2025 को अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान रखी गई थी। पीएम मोदी ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में देश के प्रयासों के तहत समुद्र मंथन नाम से राष्ट्रीय डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि समुद्र के नीचे तेल और गैस भंडारों की खोज के लिए इसे मिशन मोड में शुरू किया जाएगा।

  • 5- कैबिनेट बैठक के बाद आधिकारिक ऐलान संभव

अपस्ट्रीम एनर्जी सेक्टर में निवेश और रिसर्च को बढ़ावा देने वाले इस मेगा प्लान पर आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मुहर लग सकती है। सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट की बैठक पूरी होने के बाद सरकार की ओर से इस 84000 करोड़ रुपये के समुद्र मंथन मिशन का औपचारिक और आधिकारिक ऐलान किए जाने की पूरी संभावना है।

‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

opposition protest in parliament

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था 'अमित शाह संसद से गायब क्यों'? ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

संसद में एंटी पेपर लिक कानून पास होने के बाद भी छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष सांसदों की नाराजगी कम नहीं हुई है। उन्होंने अमित शाह से छात्रों पर की गई बर्बरता का जवाब मांगा।

 

कांग्रेस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' ये सवाल न सिर्फ विपक्ष बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। छात्रों पर की गई बर्बरता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो नरेंद्र मोदी तत्काल उन्हें गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करें। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।


इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी जी 10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

उन्होंने कहा कि युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उन पर कार्रवाई नहीं होगी, अब आपकी सरकारें अपनी ही जुबान से पलट गईं है। युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करवा रही है, बच्चियों को Dox किया जा रहा है। अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद सदन में कदम तक नहीं रखा, अकाउंटेबिलिटी के स्टेटमेंट से डरते रहे। अब ये सब फेस-सेविंग, इमेज प्रोटेक्शन के हथकंडे नहीं चलेंगे, युवा आपका सच जान चुका है। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो अमित शाह का इस्तीफा लीजिए।

योगी सरकार में रेशम क्षेत्र बना रहा आत्मनिर्भरता और रोजगार का मजबूत आधार

CM Yogi Adityanath

Yogi Government Silk Industry UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार रेशम क्षेत्र के समग्र विकास, किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। गुरुवार को रेशम निदेशालय लखनऊ में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने यह बात कही। उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं, बजट व्यय, प्रशिक्षण कार्यक्रमों व प्रशासनिक कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

समय पर योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश 

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेशम विभाग की सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध, पारदर्शी व प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही योजनाओं के भौतिक सत्यापन, नियमित मॉनिटरिंग और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूरा करने पर विशेष जोर दिया।

प्रशिक्षण व स्वरोजगार से जुड़ी कार्य योजना बनाने के निर्देश

राकेश सचान ने प्रशिक्षण केंद्रों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने व प्रशिक्षित लाभार्थियों को स्वरोजगार और रेशम उत्पादन से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बजट व्यय की समीक्षा करते हुए स्वीकृत धनराशि का नियमानुसार और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कहा। साथ ही प्रत्येक मद के व्यय का सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

 

इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ प्रदेश को दिलाने के लिए समयबद्ध प्रस्ताव भेजने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर मामले को लेकर संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर “बल प्रयोग” को लेकर बृहस्पतिवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया तथा सरकार एवं गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की।

सपा सांसदों ने संसद के मकर द्वार के निकट प्रतीकात्मक रूप से “दान पेटी” रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ नारेबाजी की।

कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्रों पर कथित बल प्रयोग के विषय का उल्लेख करते हुए एक बैनर भी ले रखा था जिस पर “ऑर्डर किसने दिया” लिखा हुआ था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, के सी वेणुगोपाल, सपा नेता धर्मेंद्र यादव और कई अन्य सांसद इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

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उल्लेखनीय है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों पर कथित बल प्रयोग को लेकर सदन में शाह पर गंभीर आरोप लगाये थे जिसके बाद सत्तापक्ष ने उनसे माफी की मांग की थी।

बाद में गांधी ने संवाददाता सम्मेलन में शाह को छात्रों के साथ कथित बर्बरता के लिए जिम्मेदार ठहराया था और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी। उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल सपा के सांसदों ने राम मंदिर मामले पर बुधवार को भी संसद परिसर में प्रदर्शन किया था।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी “आस्था के साथ विश्वासघात” के दोषी हैं। उन्होंने दावा किया कि दान-पात्र से चढ़ावे की कथित चोरी, गुप्त दान में अनियमितताएं, जमीन सौदों में कथित गड़बड़ियां, सबूत मिटाने और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं।

उनका कहना है कि यह “अक्षम्य महापाप” है और “लोकधन की लूट” का मुद्दा संसद में उठाना सभी का दायित्व है। यादव ने यह भी कहा कि मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

Pic Credit : ANI

पेपर लीक कैसे रोकेंगे! मल्लिकार्जुन खरगे ने क्यों कहा अधूरा बिल लाई सरकार

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में 'परीक्षा संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। खरगे ने सरकार की नीयत और बिल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नया संशोधन विधेयक युवाओं की समस्या को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में उबल रहे छात्रों के गुस्से को ठंडा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने साफ लहजे में पूछा कि जब इस बिल में यही नहीं बताया गया है कि असल में 'पेपर लीक' कैसे रोका जाएगा, तो फिर इस अधूरे बिल का क्या मतलब?

युवाओं के संघर्ष के आगे झुकी सरकार

राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते एक महीने से देश के युवा सड़कों पर धरने पर बैठे थे और अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। यह युवाओं और छात्रों के अनवरत संघर्ष की ही ताकत है कि आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा। खरगे ने कहा कि सरकार ने खुद अपनी विफलता छिपाने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में पेश किया है। जो कदम सरकार आज उठा रही है, उसे 2024 की शुरुआत में ही क्यों नहीं उठाया गया? ALSO READ: सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

केवल आंकड़े बदले हैं, समस्या वहीं की वहीं

विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस नए संशोधन बिल से जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदलने वाला। इसमें कानून की धाराओं और आंकड़ों में भले ही हेरफेर कर दी गई हो, लेकिन मूलभूत समस्या के समाधान पर यह बिल पूरी तरह मौन है। खरगे ने सवाल उठाया कि बिल में सजा और जुर्माने की बातें तो कह दी गईं, लेकिन 'पेपर लीक' के उस नेक्सस (गिरोह) को कैसे खत्म किया जाएगा और भविष्य में लीक रोकेंगे कैसे, इसका कोई खाका या उल्लेख इस पूरे बिल में है ही नहीं। यह बिल आधा-अधूरा और सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ALSO READ: किसने दिया ऑर्डर?' पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

पीएम और गृहमंत्री की चुप्पी पर सवाल

सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि देश का भविष्य यानी युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा था, लेकिन न तो प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर कुछ बोले और न ही गृहमंत्री अमित शाह कहीं नजर आए। खरगे ने पूछा कि इतनी बड़ी-बड़ी धांधलियां और धांधलेबाजों के हौसले बुलंद होने के बावजूद गृहमंत्री आखिर क्यों चुप हैं? जब छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तो सरकार ने उन्हें 'अराजक' करार दे दिया। खरगे ने सवाल किया कि सरकार ने महीनों से प्रदर्शन कर रहे इन मासूम छात्रों से समय रहते बातचीत करने की जहमत तक क्यों नहीं उठाई? ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

'प्रधान' को हटाना पड़ा, पर व्यवस्था कब बदलेगी?

मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि बढ़ते जनाक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सरकार को प्रधान को हटाना ही पड़ा। लेकिन सिर्फ चेहरे बदलने से या दिखावे के लिए ऐसा बिल लाने से काम नहीं चलेगा। जब तक पेपर लीक के सिंडिकेट को खत्म करने का पुख्ता मैकेनिज्म नहीं बनता, तब तक लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

विपक्ष ने बुलंद की छात्रों की आवाज

खरगे ने राज्यसभा के पटल से देश के युवाओं को भरोसा दिलाया कि विपक्ष उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक छात्रों के हक की लड़ाई लड़ता रहेगा और सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देगा।

गृहमंत्री से इस्तीफा मांगा

सरकार पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि पेपर बाजार में बिकता रहा और पता नहीं चला। क्या सरकार सो रही थी? हमारी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब दें। यदि वे सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं तो इस्तीफा दे दें। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं पीएम मोदी को उन्हें हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2016, 21, 24 और अब 26 में पेपर लीक हो चुके हैं। कहां है कड़ी से कड़ी सजा? उन्होंने पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेन्द्र प्रधान के स्वागत को भी उन्होंने सरकार की नाकामी बताया। 

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

Supreme Court Jantar Mantar Protest

Supreme Court Jantar Mantar Protest: संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए खौफनाक एक्शन और पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को साफ-साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्रों का इलाज सरकार अपने खर्चे पर कराएगी। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है और पैलेट गन की SOP पर जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम जल्द ही प्रोटोकॉल भी बनाने वाले हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

क्या है पूरा मामला?

बीती 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक के खिलाफ निकले 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में गरमा गया है। आरोपों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हक की आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों पर न केवल बेदर्दी से लाठियां भांजीं, बल्कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने का दावा जा रहा है। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

CJI सूर्यकांत की बेंच का कड़ा रुख

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता और पैलेट गन के शिकार पीड़ितों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में पुलिसिया कार्रवाई की खौफनाक तस्वीर पेश की। दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फौरन निर्देश जारी किया कि पैलेट गन से घायल याचिकाकर्ता समेत तमाम लोगों को बिना किसी देरी के सबसे बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ALSO READ: विदेशी मीडिया ने CJP की जीत पर क्या कहा, पाकिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में सुर्खियों में 'कॉकरोच'

हथियारों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा सुरक्षित

कोर्ट ने सिर्फ इलाज तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर शिकंजा कसते हुए बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों और कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

 

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और घायल छात्रों द्वारा दायर इस जनहित याचिका में धातु वाली पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बेहद असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है। लेकिन, कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि वह 20 जुलाई की घटना में हुए पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच और सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

PM मोदी की फेसबुक पोस्ट हटने के विवाद पर Meta का बड़ा कदम, अब VIP अकाउंट्स के लिए लागू किए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल

PM Modi post row: दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य प्रमुख हस्तियों द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए लागू किए गए कड़े और एडवांस्ड सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी दी है। प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पोस्ट कुछ समय के लिए हटाए जाने के विवाद के बाद Meta ने प्रमुख VIP अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए नए प्रोटोकॉल लागू किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने गुरुवार (30 जुलाई) को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कंपनी ने सरकार को इस बारे में जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि अगले 7 से 10 दिनों के भीतर इस मुद्दे पर एक विस्तृत बैठक भी होगी। पत्रकारों से बातचीत में एस. कृष्णन ने कहा कि Meta ने सरकार को बताया है कि 28 जुलाई की घटना के बाद नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हट गया था, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया था। बता दें कि मेटा, फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाती है।

मेटा ने लेटर में क्या कहा?

सूत्रों ने बताया कि मेटा ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय को सूचित किया है कि प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की अतिरिक्त निगरानी की जाएगी। साथ ही कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कई स्तरों पर इसकी समीक्षा की जाएगी। सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि मेटा की टीम इस सप्ताह के अंत में या अगले सप्ताह की शुरुआत में सरकारी अधिकारियों से उस घटना के संबंध में मिल सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटा दिया गया था।

सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाए जाने के मुद्दे पर मंगलवार को मेटा के ग्लोबल हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी को तलब किया था। 23 जुलाई की पोस्ट में प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित किया था। उन्हें पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। अमेरिका स्थित सोशल मीडिया कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी थी। हालांकि, IT मंत्रालय ने इस स्पष्टीकरण को अपर्याप्त माना था।

प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो संदेश शुरू में 23 जुलाई को इंस्टाग्राम पर साझा किया गया था। बाद में फेसबुक पर पोस्ट किया गया था। लेकिन मेटा ने इसे अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया था। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने इस स्थिति के लिए अपने ऑटोमेटेड AI कंटेंट फिल्टर में तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराया। कंपनी ने कहा कि जो कंटेंट गलती से हटा दिया गया था, उसे बाद में बहाल कर दिया गया।

मेटा के अधिकारियों से इन पहलुओं पर होगी चर्चा

MeitY सचिव ने बताया कि प्रस्तावित बैठक में इस पूरे मामले के नीतिगत (Policy) और तकनीकी (Technical) दोनों पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी समीक्षा की जाएगी कि Meta ने सरकार की चिंताओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि Meta ने सरकार को एक लेटर लिखकर इस घटना पर खेद (Regret) भी जताया है। साथ ही यह बताया है कि किन कारणों से पोस्ट हटाई गई थी।

Meta के जवाब की जांच जारी

एस. कृष्णन ने कहा कि केंद्र सरकार अभी Meta द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण का अध्ययन कर रही है। इसके अलावा, यूजरनेम से जुड़े मुद्दे पर विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तुतियों की भी जांच की जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने प्रधानमंत्री की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को तलब किया था।

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सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार Meta के इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है कि पोस्ट ऑटोमेटेड सिस्टम की तकनीकी गलती (Automated Error) के कारण हटाई गई थी। सरकार और Meta के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे भी जारी रहेगी।