अल्फांसो आम की फसल को गर्मी ने दिया झटका, फिर भी रिकॉर्ड 34 देशों तक पहुंचा भारत का हापुस

Indian Alphonso Mango Crop: बेमौसम गर्मी और जलवायु परिवर्तन की मार के बावजूद भारतीय अल्फांसो आम (हापुस) ने ग्लोबल बाजार में अपनी मिठास का परचम लहराया है। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में भीषण गर्मी और प्रतिकूल मौसम की वजह से अल्फांसो आम की पैदावार को भारी नुकसान हुआ लेकिन इसके बावजूद भारत ने चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 34 देशों तक हापुस आम का निर्यात करने में सफलता हासिल की है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 21 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान ये जानकारी दी है।

कोंकण में बेमौसम गर्मी की मार और लॉजिस्टिक्स का संकट

राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, विशेष रूप से रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में अनियंत्रित और बेमौसम गर्मी और अनियमित जलवायु की वजह से अल्फांसो आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे न सिर्फ उत्पादन प्रभावित हुआ बल्कि एक्सपोर्ट क्वॉलिटी वाले फलों की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है। इसके अलावा निर्यातकों को कई अंतरराष्ट्रीय और लॉजिस्टिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। वेस्ट एशिया में जारी संकट की वजह से शिपमेंट में देरी हुई और बंदरगाहों पर भीड़ बढ़ गई। निर्यातकों को उच्च फ्रेट लागत, वॉर-रिस्क सरचार्ज और कंटेनरों की भारी किल्लत से जूझना पड़ा।

इसके बाद भी 24 से बढ़कर 34 देशों तक पहुंचा भारतीय हापुस

इन तमाम वैश्विक चुनौतियों, भाड़े में बढ़ोतरी और फसल के नुकसान के बावजूद भारत ने अल्फांसो आम के अंतरराष्ट्रीय बाजार का विस्तार जारी रखा है। वित्त वर्ष 2020-21 में जहां अल्फांसो आम सिर्फ 24 देशों में निर्यात होता था वहीं चालू वित्त वर्ष में यह दायरा बढ़कर 34 देशों तक पहुंच गया है। अमेरिका, बेल्जियम, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, आइसलैंड, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया और रूस सहित 15 से अधिक देशों में भारतीय आम को बढ़ावा देने के लिए प्रचार कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

जापान और नेपाल निर्यात पर सरकार का स्पष्टीकरण

निर्यात से जुड़े अन्य मुद्दों पर मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया। नेपाल को आम के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं है। नेपाल में जरूरी नियमों का पालन करते हुए आयात की अनुमति दी गई है। ‘नेशनल प्लांट प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन’ (NPPO) भारतीय निर्यात सुविधाओं के 2026 प्री-सीजन निरीक्षण के दौरान जापानी अधिकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए लगातार उनके संपर्क में है।

प्रभावित निर्यातकों के लिए सरकार का राहत पैकेज

लॉजिस्टिक्स में आए व्यवधानों और माल भाड़े के बोझ से प्रभावित निर्यातकों को सहयोग देने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत सरकार ने RELIEF पहल शुरू की है। इसके जरिए भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम के माध्यम से बीमाकृत निर्यातकों और पात्र MSMEs को सहायता दी जा रही है। ऐसा इसलिए ताकि उनके अतिरिक्त फ्रेट और बीमा बोझ को कम किया जा सके। वाणिज्य विभाग, एपीडा (APEDA) के माध्यम से अपनी वित्तीय सहायता योजना के तहत आम निर्यातकों को सहायता दे रहा है। इसका उद्देश्य एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, गुणवत्ता अनुपालन और बाजार विकास को मजबूत करना है।

यह भी पढ़ें: Kanwar Yatra 2026: मीट-शराब की दुकानें बंद, ड्रोन से होगी निगरानी… कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी सरकार का मेगा प्लान, जानें- बड़ी बातें

HDFC Bank की गिरावट पर Sensex-Nifty लाल बंद, फिर भी इस कारण निवेशकों पर बरसे ₹2 लाख करोड़

Stock Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में कच्चे तेल में और उबला आया तो मार्केट में आज भी इसकी आंच महसूस हुई। घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार दूसरे दिन फिसले। एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) जैसे हैवीवेट स्टॉक में गिरावट के चलते इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24150 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर रौनक दिखी और स्मॉलकैप स्पेस में अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी से थोड़ी कम बढ़त रही तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से थोड़ी अधिक तेजी आई।

सेक्टरवाइज आज मार्केट में सबसे अच्छी रौनक रियल्टी सेक्टर में दिखी जिसके निफ्टी इंडेक्स में 1% से अधिक बढ़त रही। निफ्टी ऑटो में 1% से थोड़ी कम बढ़त रही। वहीं दूसरी तरफ सरकारी बैंकों में बिकवाली का दबाव दिखा और इसका निफ्टी इंडेक्स 0.88% कमजोर हुआ तो निफ्टी आईटी भी आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ। इस मिले-जुले माहौल में ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹2 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹2 लाख करोड़ से अधिक की तेजी आई है।

इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज सेंसेक्स (Sensex) 238.41 प्वाइंट्स यानी 0.31% की कमजोरी के साथ 77,470.11 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 50.80 प्वाइंट्स यानी 0.21% की गिरावट के साथ 24,187.70 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 371.19 प्वाइंट्स टूटकर 77,337.33 और निफ्टी 102.85 प्वाइंट्स गिरकर 24,135.65 तक आ गया था।

₹2.15 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 20 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,82,19,644.97 करोड़ था। आज यानी 21 जुलाई 2026 को यह बढ़कर ₹4,84,29,159.65 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹2,09,514.68 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है

Sensex के 21 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें से 21 आज ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज बजाज फिनसर्व, इंडिगो और अल्ट्राटेक सीमेंट में रही। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट आज एचडीएफसी बैंक में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

sensex 11

 131 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4399 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2188 शेयर आज मजबूत हुए तो 2021 में गिरावट रही जबकि 190 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 131 शेयर एक साल के हाई और 90 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 15 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 9 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

bse 12

पश्चिमी एशिया में क्या है स्थिति

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 10वीं रात किया ताबड़तोड़ हमला किया तो दूसरी तरफ इस युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। वीकेंड पर अमेरिकी सैनिकों की हुई मौतों और नुकसान से भड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ भयंकर बदले की कसम खाई है। अमेरिकी हमलों से बौखलाए ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य और व्यापारिक नेटवर्क पर चौतरफा हमला बोल दिया है। ईरानी सेना ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसने बहरीन में स्थित अमेरिकी ई-कॉमर्स और टेक दिग्गज अमेजन के सेंट्रल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर कई क्रूज मिसाइलों से हमला कर उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

लगातार 10वीं रात अमेरिका ने ईरान पर किया तबाही वाला हमला, इस बीच 17 अमेरिकी सैनिक मारे गए तो ट्रंप ने खाई ये कसम

ईरान का सबसे भीषण पलटवार! बहरीन में अमेजन का सेंट्रल डेटा सेंटर तबाह, कुवैत से जॉर्डन तक अमेरिकी ठिकानों पर हमला

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MTAR Tech के शेयर में चौथे दिन लगा लोअर सर्किट, बीते 30 दिन में शेयर 34% क्रैश

एमटीएआर के शेयरों में बीते कुछ हफ्तों में बड़ी बिकवाली दिखी है। बीते एक महीने में यह शेयर 34 फीसदी से ज्यादा गिरा है। एक हफ्ते में यह करीब 17 फीसदी फिसला है। 21 जुलाई को लगातार चौथे सत्र इस शेयर में बड़ी गिरावट दिखी। 5 फीसदी गिरने के बाद इस शेयर में लोअर सर्किट लग गया।

MTAR Technologies के शेयर में 21 जुलाई को लगातर चौथे सत्र लोअर सर्किट लगा। इससे पहले अमेरिकी कंपनी ब्लूम एनर्जी के शेयर में बड़ी गिरावट आई। यह शेयर बीते एक महीने में 38 फीसदी फिसला है। दुनियाभर के शेयर बाजारों में एआई-लिंक्ड स्टॉक्स में कमजोरी का असर ब्लूम एनर्जी पर पड़ा है।

एमटीएआर टेक्नोलॉजीज के बारे में एनालिस्ट्स का कहना है कि गिरावट के बावजूद शेयर स्ट्रॉन्ग दिख रहा है। हालांकि, नई खरीदारी में जल्दबाजी ठीक नहीं होगी। एसबीआई सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के हेड सनी अग्रवाल ने कहा कि FY28 में एमटीएआर के शेयर का अर्निंग्स प्रति शेयर 100 रुपये रहने की संभावना है। FY26-FY28 के बीच अर्निंग्स की सीएजीआर 50 फीसदी से ज्यादा रहने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, “50 गुना के पी/ई मल्टीपल पर इस बिजनेस की फेयर वैल्यू 5,000 करोड़ रुपये है। इस प्राइस टारगेट को ध्यान में रख इनवेस्टर्स कीमत में गिरावट पर इस शेयर को खरीद सकते है। 4,000 रुपये के प्राइस पर नए निवेशकों के लिए रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो फेवरेबल दिखता है।”

एमटीएआर का शेयर बीते छह महीनों में 123 फीसदी चढ़ा है, क्योंकि दुनियाभर में एआई से जुड़े शेयरों में तेजी आई थी। इस उम्मीद में शेयरों में तेजी आई थी कि कंपनी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई चेन की बड़ी प्लेयर के रूप में उभरेगी। Bloom Energy से MTAR Technologies के जुड़ाव से इस सोच को और मजबूती मिली। ब्लूम एनर्जी एआई डेटा सेंटर्स को फ्यूल सेल सॉल्यूशंस सप्लाई करती है।

शेयर बाजारों में 21 जुलाई को कमजोरी दिखी। 1:30 बजे निफ्टी 0.29 फीसदी यानी 70 अंक गिरकर 24,169 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.35 फीसदी यानी 271 अंक की कमजोरी के साथ 77,433 था। बैंक निफ्टी में 0.05 फीसदी की कमजोरी दिखी। 20 जुलाई को भी शेयर बाजार में गिरावट आई थी।

Core Sector Growth: जून में 5% पर पहुंची कोर सेक्टर की ग्रोथ, 5 महीने की सबसे तेज रफ्तार

Core Sector Growth: भारत के कोर सेक्टर ने जून 2026 में 5% की सालाना वृद्धि दर्ज की है। यह पिछले 5 महीनों की सबसे तेज ग्रोथ है। मई में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 3.2% रही थी। जून में तेज बढ़त की सबसे बड़ी वजह आयरन ओर (लौह अयस्क) का उत्पादन, साथ ही बिजली और सीमेंट सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन रहा।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कोर सेक्टर की कुल वृद्धि 3.6% रही। पिछले साल इसी अवधि में यह सिर्फ 1% थी। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में सुस्ती के बाद औद्योगिक गतिविधियों ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।

आयरन ओर बना सबसे बड़ा सहारा

रिवाइज्ड कोर सेक्टर इंडेक्स में इस बार पहली बार आयरन ओर को शामिल किया गया है। जून में इसका उत्पादन 43.9% बढ़ा। मई में इसमें 19% की वृद्धि दर्ज की गई थी। नए बेस ईयर 2022-23 के तहत इसे इंडेक्स में शामिल किए जाने से इसका योगदान भी बढ़ गया है।

बिजली और सीमेंट सेक्टर ने बनाए रखा दम

भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग बढ़ी, जिससे बिजली उत्पादन 9.8% बढ़ा। मई में इसमें 11.2% की वृद्धि हुई थी। वहीं, सीमेंट उत्पादन भी 9.8% बढ़ा। इससे साफ संकेत मिलता है कि देश में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

स्टील और कोयला उत्पादन भी बढ़ा

स्टील प्रोडक्शन जून में 4.6% बढ़ा। हालांकि यह मई के 5.1% से थोड़ा कम है, लेकिन सेक्टर लगातार बढ़त में बना हुआ है। मई में 9.5% की गिरावट के बाद कोयला उत्पादन भी वापसी करते हुए 1.4% बढ़ा, जिससे कोर सेक्टर को अतिरिक्त सहारा मिला।

इन सेक्टरों में रही कमजोरी

दूसरी ओर, कुछ सेक्टरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

  • रिफाइनरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन 4.7% घटा। हालांकि मई में इसमें 8.2% की गिरावट थी।
  • कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन 4.2% घटा। यह लगातार तीसरा महीना है जब इसमें गिरावट आई है।
  • प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का उत्पादन 7.4% घटा, जो एक साल से ज्यादा समय की सबसे बड़ी गिरावट है।
  • उर्वरक (Fertiliser) उत्पादन भी 3.3% घटा। मार्च से इस सेक्टर में कमजोरी बनी हुई है।

बदला कोर सेक्टर इंडेक्स

जून के आंकड़ों के साथ सरकार ने कोर सेक्टर इंडेक्स की नई सीरीज भी जारी की है। इसमें 2011-12 की जगह अब 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है।

अब इंडेक्स में 9 उद्योग शामिल हैं। पहली बार आयरन ओर को इसमें जगह मिली है। वहीं, स्टील इंडेक्स को इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के आंकड़ों के मुताबिक किया गया है। इसके अलावा, पुराने कोयला मापदंड की जगह रॉ कोल (Raw Coal) को शामिल किया गया है, ताकि दोहरी गिनती से बचा जा सके।

क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?

बिजली, सीमेंट, स्टील, कोयला और आयरन ओर में मजबूत बढ़त बताती है कि निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियां अभी भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी सेक्टर की कमजोरी अब भी औद्योगिक विकास की रफ्तार पर दबाव बनाए हुए है।

नोएडा में यमुना-हरनंदी दोआब के किनारे बनेगा 500 करोड़ का 4 लेन रिवरफ्रंट रोड, अथॉरिटी ने दी मंजूरी जानिए सारी डिटेल

नोएडा अथॉरिटी ने यमुना-हरनंदी दोआब के किनारे 29 किलोमीटर लंबी चार-लेन वाली सड़क बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह सड़क नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का एक विकल्प होगी और इसका मकसद इलाके में ट्रैफिक जाम को कम करना है। News 18 की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित कॉरिडोर से यात्रा का समय कम होगा, कनेक्टिविटी बेहतर होगी और ग्रेटर नोएडा की 75 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों, 25 सेक्टरों और 20 गांवों में रहने वाले लगभग पांच लाख लोगों को सीधा फायदा होगा।

नोएडा अथॉरिटी के CEO कृष्णा करुणेश ने कहा, “नोएडा अथॉरिटी इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह एक्सप्रेसवे यात्रियों को काफी राहत देगा और नदी के किनारे सुनियोजित विकास में मदद करेगा।”

25 सेक्टर, 20 गांव लाभान्वित होंगे

अधिकारियों के अनुसार, इस नए प्रोजेक्ट से नोएडा के कई रिहायशी सेक्टरों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें सेक्टर 94, 124, 125, 126, 127, 128, 129, 130, 131, 132, 133, 134, 135, 150, 151, 152, 153, 154, 155, 158, 159, 163, 164 और 168 शामिल हैं।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन गांवों को फायदा होने की उम्मीद है उनमें रायपुर, बख्तावरपुर, असगरपुर जहांगीर, सुल्तानपुर, शाहपुर गोवर्धनपुर, शाहपुर गढ़ी, नंगला नंगली, रोहिल्लापुर, नंगला वाजिदपुर, छपरौली, मंगरौली, मोहियापुर, बदौली, झट्टा, दल्लूपुरा, गुजरान डेरिन, कमबक्शपुर, याकूतपुर, गुलावली और मोमनाथल शामिल हैं।

मौजूदा सड़क को अपग्रेड किया जाएगा

अधिकारियों ने बताया कि यमुना तटबंध के किनारे 11.2 किलोमीटर लंबी मौजूदा फोर-लेन सड़क का नवीनीकरण पहले से ही 34 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जा रहा है, जिसमें से अब तक 11 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

नए प्रस्ताव के तहत, यमुना दोआब वाले हिस्से को चौड़ा करके फोर-लेन सड़क बनाई जाएगी, जबकि हरनंदी दोआब के किनारे 17 किलोमीटर लंबा नया फोर-लेन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।

यह कॉरिडोर सेक्टर 150 तक जाएगा, जहां यह कोंडली-बांगर की तरफ से आने वाली मौजूदा 75 मीटर चौड़ी सड़क से जुड़ेगा, जिससे यात्रियों के लिए एक लगातार वैकल्पिक रास्ता बन जाएगा।

बहुत कम जमीन अधिग्रहण की उम्मीद

अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए बड़े स्तर पर जमीन अधिग्रहण की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास पहले से ही दोआब क्षेत्र में 22 से 28 मीटर चौड़ी जमीन उपलब्ध है।

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध जमीन फोर-लेन कॉरिडोर बनाने के लिए काफी होने की उम्मीद है, जिससे किसानों से कृषि भूमि अधिग्रहण करने की जरूरत कम हो जाएगी।

CEO कृष्णा करुणेश ने यह भी कहा कि जिन जगहों पर जमीन के मालिक सहमत होंगे, वहां तटबंध (embankment) को और बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “जहां किसान सहमत होंगे, हम उनकी मंजूरी से तटबंध को बाहर की ओर बढ़ा सकते हैं। अथॉरिटी किसी भी जमीन के अधिग्रहण के लिए मुआवजा देने को तैयार है।”

व्यस्त एक्सप्रेसवे पर दबाव कम करने की तैयारी

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर अभी लगभग 10 लाख गाड़ियां चलती हैं, जिससे पीक आवर्स (सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाले समय) में बहुत ज्यादा जाम लगता है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित रिवरफ्रंट रोड और सैद्धांतिक रूप से मंजूर किए गए अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से मौजूदा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होने की उम्मीद है।

बता दें कि यह नया कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहे यमुना-हरनंदी दोआब क्षेत्र के भविष्य के शहरी विकास में भी मदद करेगा। इस इलाके में स्पोर्ट्स सिटी और जेपी विश टाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण रिहायशी इलाकों का विस्तार तेजी से हो रहा है।

न्यूज 18 के अनुसार, कृष्णा करुणेश ने कहा, “तटबंध के विस्तार से न केवल ट्रैफिक की समस्याएं हल होंगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। इससे स्थानीय निवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी और इलाके की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।”

Udhna Station: सूरत के उधना स्टेशन पर बना देश का पहला स्टील सबवे! सिर्फ 8 घंटे में हुआ तैयार, रेलवे ने रचा इतिहास

Udhna Station: भारतीय रेलवे ने इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा काम कर दिखाया है। गुजरात में सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर रेलवे पटरियों के नीचे देश का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे बनाने में सफलता हासिल हुई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्टके मुताबिक, पश्चिम रेलवे द्वारा चलाए गए इस पायलट प्रोजेक्ट को बिल्कुल नई और आधुनिक ट्रैक कट-एंड-कवर तकनीक का इस्तेमाल करके मात्र 8 घंटे के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है।

इस सबवे के बन जाने से अब प्लेटफॉर्म बदलने के लिए पटरियों को पार करने की खतरनाक प्रथा पर लगाम लगेगी और यात्रियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार होगा।

कैसे हुआ यह कारनामा? जानिए क्या है ट्रैक Cut-and-Cover तकनीक

पश्चिम रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) पंकज सिंह ने इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस तकनीक के तहत निर्धारित ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान रेलवे पटरी को काटा जाता है और पटरियों के नीचे की जमीन की खुदाई की जाती है। खुदाई के बाद फैक्ट्री में तैयार स्टील आर्च स्ट्रक्चर को नीचे स्थापित कर दिया जाता है और फिर गड्ढे को भरकर पटरी को तुरंत चालू स्थिति में बहाल कर दिया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड 8 घंटे के भीतर पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया था ताकि ट्रेन संचालन पर कम से कम असर पड़े। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस काम को तय 8 घंटे की विंडो में बिना किसी बड़े ट्रेन प्रभाव के पूरा कर लिया गया।

इस ऑपरेशन के दौरान गुजरात के उधना को महाराष्ट्र के जलगांव से जोड़ने वाली रेलवे पटरियों को अस्थायी रूप से हटाया गया, मिट्टी की खुदाई की गई, प्रीफैब्रिकेटेड स्टील आर्च स्ट्रक्चर को रखा गया और फिर लाइन को तुरंत बहाल कर दिया गया।

कितना बड़ा है यह स्टील सबवे?

पारंपरिक प्रबलित सीमेंट कंक्रीट संरचनाओं की तुलना में इसके निर्माण में काफी कम समय लगा है। इसकी लंबानी करीब 12 मीटर, चौड़ाई 4.8 मीटर और ऊंचाई 2.7 मीटर है। इसमें स्टील आर्च और प्रीकास्ट कंक्रीट नींव का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में तैयार संरचना होने के कारण गुणवत्ता बेहतर रही और ट्रैक ब्लॉक की समयसीमा को न्यूनतम करने में मदद मिली।

उधना स्टेशन पर क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

उधना रेलवे स्टेशन पर रोजाना करीब 10000 यात्री आवाजाही करते हैं। त्योहारों के सीजन में यहां यात्रियों की संख्या में भारी उछाल आता है। इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष के दौरान जब बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों को लौटे थे तब उधना स्टेशन पर यात्रियों की संख्या रोजाना 30000 को पार कर गई थी।

पटरियों को पार करके प्लेटफॉर्म बदलना या बाईपास लाइन पर जाना बेहद खतरनाक होता है, खासकर उन जगहों पर जहां मुड़े हुए ट्रैक होते हैं और विजिबिलिटी सीमित होती है। उधना बाईपास लाइन पर भी ऐसी ही खतरनाक स्थिति बनी रहती थी, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती थीं। इसी खतरे को देखते हुए और यात्रियों व कुलियों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म बदलने की सुविधा देने के लिए रेल मंत्रालय की मंजूरी के बाद इस तकनीक को अपनाया गया।

देश भर के व्यस्त स्टेशनों पर लागू हो सकता है यह मॉडल

पश्चिम रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उधना में इस पायलट प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद अब देश भर के अन्य व्यस्त रेलवे स्टेशनों और रेल सेक्शनों पर भी इस तरह के स्टील सबवे बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। एक बार इस सबवे के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद उधना में बाईपास लाइन पर खतरनाक तरीके से पटरी पार करने की समस्या खत्म हो जाएगी और दुर्घटनाओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

ये भी पढ़ें- Tripura DGP Dead: त्रिपुरा के DGP की संदिग्ध मौत से हड़कंप! पुलिस हेडक्वार्टर में मृत पाए गए अनुराग धनखड़, जानिए कौन थे IPS अधिकारी

मार्केट कर रहा नए बुल रन की तैयारी! दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा की बड़ी भविष्यवाणी, जानें कब तक आएगी तेजी

Shankar Sharma Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो दशकों में निवेशकों ने जिस तरह छप्परफाड़ कमाई की है, अब उन्हें अपनी उम्मीदों को थोड़ा कम करने की जरूरत है। ऐसा मानना है दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का। उन्होंने ये भी कहा कि, भारत में अगला बड़ा और मजबूत बुल मार्केट आने में अभी कम से कम एक से दो साल का वक्त लग सकता है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अगला बुल रन पिछले रिकॉर्ड्स के मुकाबले काफी धीमी रफ्तार वाला होगा और इससे मिलने वाला रिटर्न भी काफी कम रहेगा।

मनीकंट्रोल की सीनियर कॉरेस्पोंडेंट जोया स्प्रिंगवाला को दिए एक इंटरव्यू में शंकर शर्मा ने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार का आकार अब इतना बड़ा हो चुका है कि पहले जैसी तूफानी रफ्तार को बरकरार रखना नामुमकिन है। आइए जानते हैं शंकर शर्मा ने मार्केट को लेकर और क्या-क्या कहा।

अब केवल 8-10% रिटर्न की ही उम्मीद रखें निवेशक

शंकर शर्मा ने साफ तौर पर कहा कि आने वाले समय में निवेशकों को अपने रिटर्न के नजरिए को बदलना होगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले एक-दो सालों में हमें बाजार में एक ठोस बुल रैली देखने को मिलेगी। लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि लंबी अवधि के रिटर्न का स्तर अब नीचे खिसक चुका है। भारत अब उस तरह का रिटर्न नहीं देगा जो हमारी पीढ़ी ने कमाया है।’

जहां पिछले दो दशकों में भारतीय निवेशकों को औसतन 14-15% का सालाना रिटर्न मिलने की आदत हो चुकी है, वहीं शंकर शर्मा के मुताबिक अब लंबी अवधि में 8-10% का सालाना रिटर्न ही मिलने की उम्मीद करनी चाहिए।

शंकर शर्मा की ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी क्या है?

शर्मा ने बाजार के इतिहास का विश्लेषण करते हुए अपनी ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी समझाई। उनके मुताबिक, 1991 के उदारीकरण के बाद भारत ने केवल एक बार पूरी तरह से टिकाऊ और बड़ा बुल मार्केट देखा है, जो 2003 से 2007 के बीच आया था। उन्होंने हर्षद मेहता वाले दौर को मार्केट की एक स्वाभाविक रैली नहीं माना।

साल 2003-2007 के बुल रन में निफ्टी ने करीब 55% का सालाना रिटर्न दिया था। इसके मुकाबले कोरोना महामारी के बाद आए उछाल में निफ्टी ने लगभग 31% का रिटर्न दिया, जो पिछले बार से 40% कम था। उनके अनुसार, अगला बुल मार्केट इससे भी निचले स्तर पर रहेगा।

क्यों धीमी होगी बाजार की रफ्तार?

शंकर शर्मा का मानना है कि इस मंदी या कम रिटर्न का कारण वैश्विक राजनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या ब्याज दरें नहीं हैं, बल्कि इसका असली कारण भारत की ‘स्केल’ है। भारत अब 4 से 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है। इस आकार पर सिर्फ अपनी जगह बने रहने के लिए भी हर साल जीडीपी में सैकड़ों अरब डॉलर जोड़ने पड़ते हैं। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्थाएं बड़ी होती हैं, उनकी ग्रोथ स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है।

उन्होंने एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा, ‘आज कोई भी एचडीएफसी बैंक से 35-40% की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद नहीं करता, क्योंकि यह बहुत बड़ा हो चुका है। देशों की अर्थव्यवस्था भी ठीक इसी तरह काम करती है।’

लार्ज-कैप के मुकाबले स्मॉल-कैप पर बड़ा दांव

शंकर शर्मा का मानना है कि भविष्य में जब भी अगला बुल मार्केट आएगा, उसकी अगुवाई आज के मुख्य सूचकांकों में शामिल दिग्गज लार्ज-कैप (Blue-chip) शेयर नहीं करेंगे। मेन इंडेक्स की मैच्योर हो चुकी कंपनियों के मुकाबले छोटी कंपनियों (Small-caps) में अर्निंग ग्रोथ और वेल्थ क्रिएशन की गुंजाइश कहीं ज्यादा है।

शंकर शर्मा ने कहां लगाया है पैसा?

अपने इसी भरोसे के चलते शंकर शर्मा ने खुद ₹100-200 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप कंपनियों में किया है। उन्होंने विशेष रूप से भारत के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा-सेंटर इकोसिस्टम से जुड़े सेक्टर्स को चुना है, क्योंकि ये सेक्टर्स अभी अपने ग्रोथ साइकिल के शुरुआती चरण में हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शानदार रह सकता है। स्ट्रॉन्ग ग्रोथ, लगातार अच्छा कैपिटल एक्सपेंडिचर और क्रेडिट एक्सपैंशन इसकी वजह होगी। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने से इंटरेस्ट रेट में इजाफा हो सकता है। एललामा की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

चुनौतियों की बीच इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8 फीसदी

इस रिपोर्ट में इनफ्लेशन बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऑयल की दोगुनी कीमतों को बर्दाश्त किया है। महंगे ऑयल के बावजूद 7.8 फीसदी ग्रोथ बनाए रखी है। भारतीय इकोनॉमी ज्यादातर दूसरी बड़ी इकोनॉमीज के मुकाबले मजबूत है। 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 59.3 है।

निफ्टी की वैल्यूएशन 10 साल के एवरेज के मुकाबले कम

इनफ्लेशन को चिंता की वजह बताते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन बढ़ने के 9-15 महीनों के दौरान मार्केट में तेजी दिखी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी अपने 10 साल के एवरेज 18.6 के पी/ई के मुकाबले 17.7 पी/ई पर आ गया है। इस हिसाब से महंगे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार सस्ता है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजारों में अब तक 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 45.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस रिपोर्ट में एनर्जी, मेटल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।

बाजार के लिए ये हैं कुछ बड़े रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल, आरबीआई के उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट में वृद्धि और जल्द डिसइनफ्लेशन जैसे रिस्क बने हुए हैं। ऐसे में रियल एस्टेट और साइक्लिकल्स में ओवरवेट बने रहना ठीक होगा। जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भारत को लेकर बदला है। उन्होंने भारत में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है।

यह भी पढ़ें: इस डिफेंस स्टॉक ने नागपुर की नुवाल फैमिली को बना दिया 1.2 लाख करोड़ रुपये का मालिक

17 जुलाई को प्रमुख सूचकाकों में जोरदार तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने और क्रूड में उछाल के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। 17 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दिखी। निफ्टी 1.09 फीसदी यानी 261.55 फीसदी चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.25 फीसदी यानी 964 अंक के उछाल के साथ 78,151 पर क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

…तो बंद हो गया होता यूपी का चीनी उद्योग : सीएम योगी

CM Yogi Amroha rally: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले विकास, औद्योगिक निवेश व किसानों को गन्ना भुगतान संभव नहीं था। 2007 से 2017 के बीच सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 चीनी मिलों को औने-पौने दाम पर बेच दिया था। यदि वे सरकारें अभी होतीं तो अब तक यूपी का चीनी उद्योग बंद हो चुका होता। डबल इंजन की भाजपा सरकार 122 चीनी मिलों का संचालन कर रही है। 3.23 लाख करोड़ रुपए का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है। गन्ना मूल्य भी बढ़कर 400 रुपए प्रति कुंतल हो गया है। यूपी अब चीनी, गन्ना, एथेनॉल उत्पादन करने वाला नंबर-वन राज्य है।

 

सीएम योगी शनिवार को वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, गजरौला में अमरोहा व धनौरा विधानसभा क्षेत्र के लिए 207 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 43 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर जनपद के आध्यात्मिक इतिहास व महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

अमरोहा को अब कोई पिछड़ा नहीं कह सकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरोहा को अब कोई पिछड़ा नहीं कहेगा। इसने हस्तशिल्प व कारीगरी के माध्यम से दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। ओडीओपी के जरिए अमरोहा के तबला व ढोलक की पहचान बनी है। यहां का किसान आम की उपज को वैश्विक बाजार में पहुंचा रहा है। मध्य गंगा नहर परियोजना भी पूरी हो रही है। गंगा एक्सप्रेसवे ने राह आसान कर दी है। 10 साल पहले कोई सोच नहीं सकता था कि अमरोहा से दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज की दूरी कम हो पाएगी। अब अमरोहा से हरिद्वार की दूरी भी आसान बनाएंगे और किसानों को जमीन का अच्छा दाम देंगे। विकास के नए प्रतिमान पर स्थापित हो रहा अमरोहा अपनी नई पहचान बनाएगा। औद्योगिक विकास के लिए हसनपुर में बन रहा पार्क जनपद को नई ऊंचाई देगा। 

यूपी में सुरक्षा, सुशासन के साथ बरस रही समृद्धि 

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में आगामी 50-100 वर्ष की योजना को लेकर विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। अब नौजवान बेरोजगार नहीं होगा, पलायन नहीं करेगा। 2017 के बाद से यूपी में सुरक्षा, सुशासन के साथ समृद्धि बरस रही है। सरकार तिगरी व गढ़ के लिए काम कर रही है। मां गंगा तिगरी की तरफ कुछ बढ़ रही हैं, इसलिए सिंचाई विभाग को निर्देश दिया गया है कि गंगाजी को चैनलाइज कर तिगरी व गढ़ मेले के स्वरूप को और भव्य करो, जिससे यह पश्चिमी उप्र में माघ व कुंभ मेले की तरह चमकता दिखे। 

पहले आस्था पर होता था प्रहार, अब किसी त्योहार पर रोक नहीं 

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले आस्था पर प्रहार होता था। कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, रामनवमी की शोभायात्रा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोक लगाई जाती थी। जयश्रीराम कहने पर लाठी-डंडे चलते थे और सरकारें मौन रहती थीं लेकिन अब किसी त्योहार पर रोक नहीं है, बल्कि सरकार आस्था का सम्मान करते हुए हरसंभव सहयोग करती है।

सुरक्षा में सेंध लगाने वाले जेल या जहन्नुम जाएंगे 

सीएम ने जनपदवासियों से कहा कि सरकार जनप्रतिनिधियों के हर प्रस्ताव को धरातल पर उतार रही है। विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी नहीं है, लेकिन इसके लिए समय, सोच, संवेदना, नीति और नीयत चाहिए। पिछली सरकारों में हर जनपद में दंगे होते थे, लोग असुरक्षित थे। हमने कहा कि सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम ही जगह है। हमारी सरकार ने माफिया को मिट्टी में मिलाने का काम किया।

यहां के लोग कभी एक मंत्री से थे आतंकित

सीएम ने कहा कि यूपी अब सुरक्षा का मॉडल दे रहा है। सुरक्षा सुशासन लाती है। सुशासन निवेश और निवेश समृद्धि लेकर आता है। अब हर भर्ती में अमरोहा-धनौरा का नौजवान भी नियुक्ति पत्र पाता है, लेकिन पहले रामपुर व सैफई का सिडिंकेट नौकरियों में डकैती डालता था। अब आपकी अपनी सरकार है, कोई हक पर डकैती नहीं डाल सकता। 2017 में महेंद्र खड़गवंशी के प्रचार में आया था तो लोग एक मंत्री के आतंक से भयभीत थे। तब मैंने कहा था कि भाजपा सरकार आएगी तो ये सभी दुम दबाकर बिल में घुसकर ही खुद को सुरक्षित कर पाएंगे। अब यहां किसी का भय या आतंक नहीं। 

सीएम ने चेतन चौहान को भी याद किया

मुख्यमंत्री ने पूर्व क्रिकेटर व पूर्व मंत्री चेतन चौहान को भी याद किया। कहा कि वह नौगावां सादात व जनपद में खेल, विकास को बढ़ाने के लिए समर्पित थे। एनडीए सरकार चौधरी चरण सिंह के सपनों को साकार कर रही है। हर तबके को बिना भेदभाव सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जबकि 2017 के पहले यह संभव नहीं था।

 

गरीबों के हक पर डकैती डालते थे सपा-कांग्रेस के लोग

सीएम ने कहा कि कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने अपनी लाचारगी जताते हुए कहा था कि 100 में से 85 पैसे ही नीचे जनता तक पहुंचते हैं। यह छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि, गरीब के राशन, आवास, पेंशन, शौचालय का पैसा था, जिस पर सपा व कांग्रेस वाले डकैती डालते थे। अब डबल इंजन सरकार में गरीब को पूरी रकम सीधे उसके बैंक खाते में मिलती है। 

हर वर्ग के लिए योजनाएं लाई है सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर वर्ग के लिए योजनाएं हैं। निराश्रितों के लिए अटल आवासीय विद्यालय, गरीब, पिछड़ी व अनुसूचित जाति की बच्चियों के लिए कस्तूरबा गांधी विद्यालय है। आज मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का शिलान्यास भी हो रहा है। बेटियों को कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिल रहा है। सरकार ने हाल में शिक्षकों के लिए हर वर्ष पांच लाख रुपए के कैशलेस इलाज की व्यवस्था की है।

शिक्षामित्रों का मानदेय 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपए किया गया है। हर शिक्षामित्र, अनुदेशक, शिक्षक के लिए सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना भी लागू की गई। आपदा की चपेट में आने वाले शिक्षक के परिजनों को 80 लाख से डेढ़ करोड़ की सहायता मिलेगी। शिक्षामित्र या अनुदेशक के साथ घटना-दुर्घटना होने पर परिवार वालों को 30 से 80 लाख रुपए तथा रसोइया के परिजनों को दो लाख रुपए का बीमा कवर मिलेगा। आपदा की चपेट में आने वाले किसानों के परिवारों को मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना में 24 घंटे के भीतर पांच लाख रुपए की सहायता दिलाई जाती है। 

विकास के प्रस्ताव लेकर लखनऊ आते हैं तरारा व खड़गवंशी, अमरोहा व नौगावां सादात वाले रजाई तानकर सोते हैं 

सीएम ने कहा कि किसानों-नौजवानों के हित में सरकारें आती हैं तो हर वर्ग के विकास के लिए कार्य होता है। जहां खानदान का कब्जा हो और एक ही परिवार सभी पदों पर काबिज हो, वहां विकास नहीं हो सकता। आपने राजीव तरारा व महेंद्र सिंह खड़गवंशी जैसे अच्छे विधायकों व कंवर सिंह तंवर को सांसद चुना तो विकास कार्य हो रहे हैं। हमारे विधायक निरंतर विकास के प्रस्ताव लेकर लखनऊ आते हैं। अमरोहा सदर व नौगावां सादात वाले शासन में पैरवी नहीं करते, वे जीतने के बाद रजाई तानकर सो गए। जनता ने इन दोनों क्षेत्रों में भी कमल खिलाया होता तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती। सीएम ने अमरोहावासियों को आश्वस्त किया कि डबल इंजन सरकार हर हित का ध्यान रखेगी। उन्होंने पैरोकारी के लिए अच्छे विधायक व सांसद चुनने की अपील करते हुए आमजन को आश्वस्त किया कि जल्द ही वे नौगावां सादात व हसनपुर भी आएंगे।

 

इस अवसर पर कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, सांसद कंवर सिंह तंवर, जिला पंचायत अध्यक्ष ललित तंवर, विधायक राजीव तरारा, महेंद्र सिंह खड़गवंशी, विधान परिषद सदस्य हरि सिंह ढिल्लो, भाजपा के जिलाध्यक्ष उदय गिरि गोस्वामी आदि मौजूद रहे।

दावा-खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री को पत्थर मारे:राष्ट्रपति को गालियां दीं; कट्टरपंथियों का आरोप- सरकार अमेरिका के सामने झुकी

अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा। कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया। मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है। मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है। अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया। कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए। राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।” राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं। कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है। कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया। सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया। नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके। विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा, “हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।” हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है। इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे। अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा, मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा। यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। —————————– ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक; ईरान ने कतर-कुवैत पर दागीं मिसाइलें अमेरिका ने शनिवार को लगातार सातवीं रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में पुल, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट का एक कंट्रोल (निगरानी) टावर निशाना बना। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…