वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, यूपी-पंजाब समेत 17 राज्यों में होगा SSR

Voter List Revision: वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने या उसमें किसी तरह का बदलाव कराने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अहम खबर है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। गुरुवार को जारी नोटिस के मुताबिक, इन जगहों पर स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देशभर में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद चल रहा है।

इस प्रक्रिया के दायरे में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा समेत 17 राज्य शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख तय किया है।

इस पुनरीक्षण (रिवीजन) में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल होंगे।

यह अधिसूचना तब आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के नौ अन्य नेताओं द्वारा दायर एक याचिका पर ECI (चुनाव आयोग), CEC ज्ञानेश कुमार, और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) को चुनौती दी गई है।

आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां SSR (स्पेशल समरी रिवीजन) का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

बता दें कि यह याचिका 12 अक्टूबर को गांधी के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के बाद दायर की गई है, जो SIR (विशेष पुनरीक्षण) प्रक्रिया के खिलाफ था।

खड़गे, अखिलेश और तेजस्वी समेत कई विपक्षी नेताओं ने दायर की याचिका

इस याचिका को गांधी के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता एम.ए. बेबी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सुप्रिया सुले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता मोहम्मद बशीर, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री सज्जाद अहमद किचलू ने दायर किया है।

इसमें SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है। साथ ही, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने, हटाए गए मतदाताओं का विवरण जारी करने, मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के खिलाफ सुरक्षा उपाय करने और नाम वापस जोड़ने के लिए एक व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

नेताओं ने वोटर लिस्ट ने संशोधन प्रक्रिया के न्यायिक ऑडिट की भी मांग की और यह भी कहा कि जब तक इस मामले पर कोई फैसला नहीं आ जाता, तब तक सभी राज्यों में यह प्रक्रिया रोक दी जानी चाहिए।

इससे पहले, विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं जताने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के लिए CJI सूर्य कांत से मिलने का समय मांगा था। लेकिन CJI ने इसे अस्वीकार कर दिया और कहा कि ये मुद्दे पहले से ही कोर्ट के सामने लंबित हैं, इसलिए नेता न्यायिक कार्यवाही के जरिए राहत मांग सकते हैं।

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कर्नाटक में एसआईआर के खिलाफ अभियान तेज करेगा इंडिया गठबंधन

इंडिया गठबंधन कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अभियान तेज करेगा और इस सिलसिले में विपक्षी दल शुक्रवार को बेंगलुरु में बैठक कर पात्र मतदाताओं के नाम कथित तौर पर सूची से हटाए जाने, मतदान के अधिकारों की रक्षा और संयुक्त राजनीतिक एवं कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर विचार करेंगे।

कर्नाटक कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के नेतृत्व में होगी। इसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भाकपा (माले) लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

कांग्रेस ने गुरुवार को जारी विज्ञप्ति में बताया कि बैठक में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोपों और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की जाएगी। विपक्षी दल इन मुद्दों को राजनीतिक अभियान, कानूनी हस्तक्षेप और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उठाने के उपायों पर विचार करेंगे।

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बैठक में राज्य, जिला और जमीनी स्तर पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करने, शिकायतों का दस्तावेजीकरण करने तथा कथित अनियमितताओं के मामलों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाने की रणनीति भी बनाई जाएगी। इसके अलावा मतदाताओं को अपने पंजीकरण की स्थिति जांचने और मतदाता सूची में किसी विसंगति की सूचना निर्धारित प्रक्रिया के तहत देने के लिए जागरूक करने पर भी चर्चा होगी।

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई है। शुक्रवार की बैठक में इस संबंध में गठबंधन के आगे के अभियान की रूपरेखा तय की जाएगी। कर्नाटक कांग्रेस ने कहा है कि बैठक में मतदान के अधिकारों की रक्षा करने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

यह बैठक मतदाता सूची में संशोधन और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस के बीच हो रही है। विपक्ष ने जहां पात्र मतदाताओं के सूची से बाहर रह जाने की आशंका जताई है, वहीं गलत तरीके से नाम हटाए जाने के विशिष्ट आरोपों की पुष्टि आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड से करनी होगी।

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अंकिता के माता-पिता के साथ, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता भी हिरासत में

अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर इंडिया गेट पर उनके माता-पिता के साथ धरने पर बैठे युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत संगठन के कई अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने गुरुवार सुबह हिरासत में ले लिया और बाद में छोड़ दिया।

युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय चेयरमैन (मीडिया विभाग) वरुण पांडेय ने गुरुवार को बताया कि श्री चिब समेत संगठन के कार्यकर्ता बुधवार रात से ही अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ इंडिया गेट पर सत्याग्रह कर रहे थे। पुलिस ने सुबह करीब चार बजे अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया और इसके बाद युवा कांग्रेस के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को भी जबरन बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया।

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श्री चिब ने कहा कि अंकिता के माता-पिता पिछले चार वर्षों से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ही हिरासत में लिया जा रहा है जबकि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि बेटियों को भाजपा नेताओं से बचाना है या राज्यपाल से।

उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस अंकिता और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। दुष्यंत गौतम को राज्यपाल के पद से बर्खास्त करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो न्याय की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन किया जाएगा।

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एसआईआर के खिलाफ विपक्षी दलों की याचिका पर चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किये।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किये । मुख्य न्यायाधीश ने याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी की, ” हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में भी पूछेंगे।” गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को श्री गांधी, कांग्रेस और विपक्षी दलों के कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने उच्चतम न्यायालय तक एक मार्च निकाला था और उसके वे उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करने गये थे। इससे न्यायालय परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और हंगामा के स्थिति बन गयी थी।

याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, ममता तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के एम ए बेबी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी. मुहम्मद बशीर शामिल हैं। विदुथलाई चिरुथाइगल काची के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।

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कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया का शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी के दबाव में मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम काट दिये हैं। वे इसको लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे है। न्यायालय ने अल हिंद मुस्लिम इत्तेहाहुल मुसलमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने भी एसआईआर के विरुद्ध न्यायालय में अलग अलग याचिकाएं दायर की हैं।

याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर कराने के संबंध में चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 के फैसले के रिकॉर्ड को तलब किये जाने और यह तय करने का अनुरोध किया है कि इस प्रक्रिया में नियम कायदे का पालन हुआ है या नहीं । याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि इस मामले में यह न्यायिक समीक्षा भी की जाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत आयोग की निर्णय प्रक्रिया में सामूहिक दायित्व और दस्तावेजी निर्णय लेने की व्यवस्था का अनुपालन हुआ या नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने तथा मतदाता सूची डेटाबेस का ऑडिट करने के लिए उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की भी मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों और उन्हें हटाने के कारणों की बूथ-वार जानकारी दिये जाने, नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई , नाम वापस जोड़ने की व्यवस्था किये जाने, चुनाव वाले राज्यों में पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाये जाने और जब तक यह मामला चल रहा है, तब तक पूरे देश में एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की है।

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UP में वोटर लिस्ट से गायब हुआ है नाम? टेंशन नहीं, CEO ने 17 और 24 अक्टूबर को लगाए स्पेशल कैंप, फॉर्म-6 भरकर फिर जुड़ेगा नाम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगर आपका नाम पिछली वोटर लिस्ट में था और नई लिस्ट में गायब हो गया है, तो आपके लिए अच्छी खबर है। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिनवा ने ऐसे छूटे हुए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चलाने का ऐलान किया है।

बुधवार को ANI से बातचीत में CEO रिनवा ने बताया कि चुनाव आयोग ने उन सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं जहां वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है, वहां एक कैंपेन चलाया जाए। इस कैंपेन में उन वोटरों को चिन्हित किया जाएगा जिनका नाम पहले की लिस्ट में था लेकिन बाद की लिस्ट में नहीं है।

17 और 24 अक्टूबर को लगेंगे विशेष कैंप

रिनवा ने बताया कि इस मुहिम के लिए यूपी में दो तारीखें तय की गई हैं। 17 अक्टूबर और 24 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में बूथ लेवल पर स्पेशल कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में लोग अपना नाम चेक कर सकेंगे और अगर नाम गायब है तो वहीं पर फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वा सकेंगे।

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए भरें Form 6

विशेष कैंप का उद्देश्य मतदाता सूची से छूटे नामों की पहचान करना और पात्र लोगों को सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया में मदद करना है। जिन लोगों का नाम पिछली मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन बाद की सूची में नहीं मिल रहा है, वे इन कैंपों में अपने नाम की स्थिति की जांच करा सकते हैं और फॉर्म 6 भरने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले तीन सपा विधायक BJP में हुए शामिल

इस बीच, उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) के तीन बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। ANI के मुताबिक, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी बुधवार को अमेठी में BJP में शामिल हुए। इस दौरान उत्तर प्रदेश BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे।

BJP की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने तीनों नेताओं का पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनके शामिल होने से गौरीगंज में उत्सव जैसा माहौल बना है। ईरानी ने आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत का भरोसा भी जताया।

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की निर्वाचन आयोग पर की गई आलोचना को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपनी बात रखने के लिए कई राजनीतिक दलों का समर्थन मांग रहे हैं। ईरानी ने अमेठी से चुनाव लड़ने के उनके रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। ईरानी ने कहा कि तीनों नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देने के लिए BJP में शामिल हुए हैं।

Tripura Civic Polls: स्थानीय निकाय चुनाव के लिए त्रिपुरा SEC ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, नवंबर में होंगे अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव

Tripura Civic Polls: देश पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में नवंबर में नगरपालिकाओं का चुनाव कराया जाएगा। इस दौरान राज्य की राजधानी अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव होंगे। राज्य में अर्बन लोकल बॉडी चुनाव की तैयारियों के तहत राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया था। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य चुनाव आयुक्त प्रदीप कुमार ने की। बैठक के बाद कुमार ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में चुनावों के लिए उठाए जा रहे तैयारी के कदमों पर चर्चा की गई। बैठक में राज्य के पुलिस पुलिस प्रमुख भी मौजूद थे। उन्होंने राज्य में उपस्थित केंद्रीय सुरक्षा बलों के चुनाव में उपयोग का मुद्दा उठाया।

बैठक के बाद स्टेट सेक्रेटेरिएट में रिपोर्टर्स से बात करते हुए, राज्य चुनाव आयुक्त (SEC) प्रदीप कुमार ने कहा कि उन्होंने चुनावों के लिए उठाए जा रहे तैयारी के कदमों पर चर्चा की, जिसमें सुरक्षा बल की तैनाती और अलग-अलग स्तरों पर दूसरे उपाय शामिल हैं। त्रिपुरा में नवंबर में अर्बन लोकल बॉडी चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर स्टेट इलेक्शन कमीशन ने बुधवार को एक ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाई थी। अगरतला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन समेत 21 म्युनिसिपल बॉडीज में चुनाव होंगे।

एसईसी ने कहा, “यह पहली ऑल-पार्टी मीटिंग थी। चुनावों से पहले एक जरूरी काम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल का पब्लिकेशन है, जिसके बाद उसका फाइनल पब्लिकेशन होगा।” उन्होंने पत्रकारवार्ता में कहा, “हमने नामांकन प्रक्रिया, नॉमिनेशन फाइल करने का तरीका, स्क्रूटनी और नाम वापस लेने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की। हमने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट, चुनावों की घोषणा के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों की जिम्मेदारियों और अधिकारियों की ड्यूटी पर भी चर्चा की।”

चक्रवर्ती ने कहा, “हमने राजनीतिक दलों से चुनाव के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की। हमने चुनाव के दौरान सिक्योरिटी फोर्स की तैनाती पर भी चर्चा की। पॉलिटिकल पार्टियों ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की तैनाती की मांग की है।” उन्होंने आगे कहा, “स्टेट पुलिस चीफ (इनचार्ज) जी एस राव ने बैठक में कहा कि राज्य में मौजूद केंद्रीय सुरक्षा बल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।”

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हॉलीवुड सिंगर बोलीं- CJP को अमेरिका से फंडिंग मिल रही:भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे; मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील

हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी पर अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि PM नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के काम में रुकावट डालने के लिए किया जा रहा है। मिलबेन ने X पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, ‘यह चुप रहने का समय नहीं है।’ मिलबेन बोलीं- PM मोदी बाहरी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे मिलबेन ने दावा किया कि फंडिंग करने वाले कुछ अमेरिकी दुनियाभर के दक्षिणपंथी नेताओं को निशाना बनाने का एक तय तरीका अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘ऐसे लोग किसी देश में अमेरिका से पढ़े व्यक्ति को ढूंढते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं, वापस उसके देश भेजते हैं और अराजकता व तबाही फैलाने के लिए फंड करते हैं।’ मिलबेन ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। वह अमेरिका से आने वाली ऐसी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है। 10 अक्टूबर को हुए दिल्ली प्रदर्शन पर हार्वर्ड के दो बयान दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के दो समूहों ने अलग-अलग बयान जारी किए। पहले समूह ने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता, गैरकानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया। 12 अक्टूबर को जारी इस बयान पर 100 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए थे। वहीं, बुधवार को जारी दूसरे बयान पर 44 लोगों के हस्ताक्षर हैं। खुद को ‘हार्वर्ड कम्युनिटी’ बताने वाले इस समूह ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित अभियान पर चिंता जताई। इसमें चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय और संसद के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशों का जिक्र किया गया। ———————— यह खबर भी पढ़ें… दिल्ली में प्रदर्शन पर वर्ल्ड मीडिया: अल-जजीरा ने लिखा- सरकार के लिए सबसे गंभीर चुनौती, NYT बोला- विरोध को दबाना मुश्किल भारत में SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Amit Shah: ‘2029 में भी हार के लिए रहें तैयार…’SIR पर राहुल गांधी को अमित शाह की दो टूक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उपचुनावों में कांग्रेस की हार को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, राहुल गांधी को हार के लिए मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी पार्टी की कमियों पर ध्यान देना चाहिए। शाह ने ये भी दावा किया कि कांग्रेस पिछले 41 साल से गुजरात में कोई चुनाव नहीं जीत पाई है, जबकि वहां के मतदाता लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भरोसा जता रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री का ये बयान उपचुनाव और गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन पर बात करते हुए यह बयान दिया। वहीं, राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात में कांग्रेस को पिछले 41 साल से चुनावी जीत नहीं मिली है। शाह ने कहा, “मैं यह बात साफ करना चाहता हूं और खास तौर पर राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि कांग्रेस ने पिछले 41 साल में गुजरात में एक भी चुनाव नहीं जीता है। पार्टी ने आखिरी बार 1985 में जीत हासिल की थी। इसके बाद से उसे लगातार हार का सामना करना पड़ा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की लगातार चुनावी हार का कारण मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है, जबकि यह प्रक्रिया 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद शुरू हुई थी।

हार का ठीकरा SIR पर फोड़े

शाह ने कहा कि, “राहुल गांधी को ये सोचना चाहिए कि क्या गुजरात में कांग्रेस की हार के लिए SIR जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव में हार का ठीकरा SIR पर फोड़ने के बजाय अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को 2029 के लोकसभा चुनाव में भी हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार गलत जानकारी फैलाते हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

2029 में भी मिलेगा हार

अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के विरोध पर राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि, राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को 2029 के लोकसभा चुनाव में चौथी बार हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।

गुजरात में बीजेपी का बेहतरीन प्रदर्शन

गुजरात में बीजेपी के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि पार्टी ने नगर पालिकाओं और नगर निगम के चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने बताया कि दो नगर पालिकाओं और एक नगर निगम की कुल 104 सीटों में से बीजेपी ने 90 सीटों पर कब्जा किया। वहीं, गांधीनगर नगर निगम में पार्टी को 44 में से 38 सीटों पर जीत मिली। गांधीनगर शाह के संसदीय क्षेत्र में आता है। शाह ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी ने सभी 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर उसके उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा सके। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजों से साफ पता चलता है कि गुजरात के लोगों का रुझान बीजेपी की ओर है और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन कर रहे हैं।

पीएम मोदी के साथ खड़े हैं लोग

अमित शाह ने कहा कि, गुजरात में बीजेपी की बड़ी जीत से पता चलता है कि वहां के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव के मुकाबले गांधीनगर नगर निगम में बीजेपी का वोट शेयर 10 प्रतिशत बढ़ा है।

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Rahul Gandhi SC Petition: राहुल गांधी की सुप्रीम कोर्ट याचिका में 14 खामियां! दस्तावेज अधूरे, खड़गे के ID कार्ड की कॉपी धुंधली, कोर्ट फीस भी ₹220 कम

Rahul Gandhi SC Petition: सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने सोमवार (12 अक्तूबर) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य लोगों की ओर से वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर दायर याचिका में 14 से ज्यादा खामियां बताईं। सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका दायर करने वाले वकील से कहा कि वह मामले में सह-याचिकाकर्ता कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की साफ कॉपी जमा करे।

सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ ऐसे पन्नों की ओर भी इशारा किया जो पढ़े जाने योग्य नहीं थे या गायब थे। इसके अलावा, रजिस्ट्री ने अदालत शुल्क में 200 रुपये से अधिक की कमी की बात भी बताई। इससे पहले दिन में, गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता याचिका दायर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करके गए।

इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। जबकि तकनीकी विशेषज्ञ एवं गणमान्य नागरिक उनकी मदद करेंगे।

खामियों को करना होगा दूर

रजिस्ट्री की ओर से इन आपत्तियों को दर्ज किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ताओं को पहले सभी खामियों को दूर करना होगा। इसके बाद ही मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकेगा। इस घटनाक्रम से चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की कानूनी लड़ाई में एक प्रक्रियागत बाधा सामने आई है। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियों का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने याचिका में उठाए गए आरोपों या मांगों पर कोई फैसला सुना दिया है।

याचिका में क्या-क्या खामियां मिलीं?

न्यूज 18 के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका की प्रारंभिक जांच के दौरान कुल 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा नौ याचिकाकर्ताओं के प्राधिकरण से जुड़े कागजात भी अधूरे पाए गए। याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की कॉपी भी स्पष्ट नहीं थी। दस्तावेज की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। इसके साथ ही कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी पाई गई। इन कमियों को दूर करने के लिए याचिकाकर्ताओं को जरूरी दस्तावेज पूरे करने, प्राधिकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने और निर्धारित कोर्ट फीस जमा करने सहित रजिस्ट्री की आपत्तियों का समाधान करना होगा।

SIR पर रोक और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर भी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कुल 10 तरह की राहत मांगी हैं। इन मांगों का संबंध SIR की प्रक्रिया और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से लिए गए फैसलों से है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और याचिका में की गई मांगों पर फैसला अदालत को सुनवाई के दौरान करना होगा।

राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग के नाम से दर्ज है मामला

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस मामले को Rahul Gandhi v. Election Commission of India के नाम से दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस की कानूनी टीम ने याचिका राहुल गांधी के अदालत पहुंचने से करीब एक से दो घंटे पहले दाखिल की थी। राहुल गांधी सोमवार शाम 4:30 बजे की समयसीमा से पहले नहीं पहुंच सके थे। ऐसे में वकील एस. प्रसन्ना ने उनकी ओर से याचिका दाखिल की। इसके बाद राहुल गांधी सैकड़ों समर्थकों के साथ INDIA गठबंधन के मार्च में शामिल हुए। इस मार्च का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष की आवाज पहुंचाना था।

INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता मार्च में हुए शामिल

सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर ने भी यह याचिका दायर की है। इस याचिका पर आज यानी मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए।

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विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च

नई दिल्ली। राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में नए नए तरीके आजमा रहे हैं। सोमवार को उन्होंने एक नई मिसाल कायम की। एक दर्जन विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ राहुल ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। विपक्षी नेताओं के मार्च को सुप्रीम कोर्ट से आधा किलोमीटर दूर रोक दिया गया। वहां से विपक्ष के चुनिंदा नेता सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर की। यह याचिका 10 विपक्षी राजनीतिक दलों के 11 नेताओं की ओर से दायर की गई है।

इससे पहले राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। जब विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट के अंदर गए तो वहां राहुल गांधी की लीगल टीम पहले से मौजूद थी। लीगल टीम ने याचिका तैयार कर रखी थी, जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेताओं ने रविवार को चिट्ठी लिख कर चीफ जस्टिस से मिलने का समय मांगा था। विपक्ष उनको ज्ञापन देना चाहता था। लेकिन चीफ जस्टिस ने मिलने का समय देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने हितों के टकराव, शक्तियों के पृथक्करण और मामला न्यायालय के विचाराधीन होने के हवाले मिलने का समय देने से इनकार किया था। इसके बाद विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का फैसला किया। राहुल ने इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका मार्च शिवजी की बारात की तरह है, जिसमें जो चाहे वह शामिल हो सकता है। इसके बाद राहुल कांस्टीट्यूशन क्लब पहुंचे, जहां से विपक्ष ने मार्च शुरू किया।

राहुल गांधी के मार्च में देरी होने पर उनकी कानूनी टीम ने दोपहर में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के शाम साढ़े चार बजे बंद होने की समय सीमा के बाद याचिका दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रही है। आम तौर पर ऐसे मामलों में पक्षकार सुप्रीम कोर्ट की ई फाइलिंग सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो 24 घंटे उपलब्ध रहती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका दायर करने वालों में कांग्रेस से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं। उनके अलावा समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस से सौगत राय, राजद से तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे की शिव सेना से संजय राउत, सीपीएम महासचिव एमए बेबी, सीपीआई महासचिव डी राजा, जेएमएम सांसद महुआ माझी, शरद पवार की एनसीपी से सुप्रिया सुले और मुस्लिम लीग से ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में शामिल सपा के नेता अखिलेश यादव ने कहा, ‘आंदोलन और धरना जारी रहेगा। लोकतंत्र को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। बीजेपी, चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। वह हमेशा सत्ता में बने रहना चाहती है। वे फर्जी वोटर लिस्ट बनाते हैं, फर्जी वोट डालते हैं और चुनाव के नतीजे तैयार करते हैं’। राजद के नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ‘देश की जनता उन्हें नहीं भूलेगी। हम सभी लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए एकजुट हुए हैं। अब उन्हें सजा देने का समय आ गया है’।