बीजू जनता दल विपक्ष के साथ नहीं है

कांग्रेस पार्टी और दूसरी विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेता भ्रम में आ गए थे। उनको लग रहा था कि नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल उनके साथ है। असल में छह अक्टूबर को निर्वाचन सदन के घेराव के कार्यक्रम में बीजद के कुछ नेता शामिल हुए थे। डीएमके जैसी पार्टी के सांसदों के दूर रहने और बीजद सांसदों के शामिल होने से ही कांग्रेस को यह लगा कि कम से कम इस मसले पर विपक्ष को बीजद का समर्थन है। लेकिन बीजद ने साफ कर दिया है कि वह ‘इंडिया’ ब्लॉक के साथ नहीं है।

इसे और स्पष्ट करने के लिए बीजू जनता दल ने कहा है कि ‘इंडिया’ ब्लॉक की  ओर से ओडिशा बंद के आह्वान में वह शामिल नहीं है। गौरतलब है कि छह अक्टूबर के प्रदर्शन में बीजू जनता दल के राज्यसभा में नेता मानस मंगराज ने हिस्सा लिया था। उनके अलावा सुलता देव और पूर्व सांसद मुजीबुल्ला खान भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। अब पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों से उनका विरोध है। वे इसके खिलाफ प्रदर्शन भी करेंगे लेकिन कांग्रेस और ‘इंडिया’ ब्लॉक का न तो हिस्सा बनेंगे और न उनकी ओर से घोषित किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे। अब ओडिशा में कांग्रेस को अकेले ही प्रदर्शन करना होगा। बीजद का प्रदर्शन अलग होगा।

पुलिस के समर्थन में भी उतरी भाजपा

नई दिल्ली। चुनाव आयोग के बाद अब भारतीय जनता पार्टी दिल्ली पुलिस के समर्थन में उतरी है। भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया है और आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस की ओर से कई महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी के वीडियो जारी किए गए।

इसे लेकर दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने सेंट्रल दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित कांग्रेस मुख्यालय के पास प्रदर्शन किया। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आईटीओ चौराहे से कांग्रेस मुख्यालय की ओर बढ़ने से रोक दिया।

उधर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन करने और राजघाट जाने को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, ‘इस समय आप राहुल गांधी और विपक्ष को राजघाट पर देख रहे हैं। अगर बापू जीवित होते तो कम से कम कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी को कुछ समझदारी भरी सलाह तो देते’।

मैं गलत कामों को बंद करने की ठान कर बैठा हूं, बंद कर के रहूंगा: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार ने मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से जनता का लाखों करोड़ रुपया गलत हाथों में जाने से बचाया है और बहुतों की मुफ्त की कमाई बंद की है और ऐसे ही लोग आज उनका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने गलत कामों को बंद करने की ठान रखी हैं और ऐसा करके रहेंगे चाहे उनका विरोध करने वाले कितना ही शोर क्यों न करें। श्री मोदी यहां यशोभूमि में भारत मोबाइल कांग्रेस 2026 का औपचारिक उद्घाटन कर रहे थे। उनका यह बयान ऐसे वातावरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जबकि विपक्ष राज्यों की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चुनाव आयोग के कार्यक्रम को लेकर मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए जगह जगह- धरने प्रदर्शन कर रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा आज सरकार की सैकड़ों सर्विसेज मोबाइल फोन पर हैं। सरकारी मदद अब सीधे बेनिफिशरीज़ के खाते में जाती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से करीब 50 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के मोबाइल में भेजे गए और उनके बैंक अकाउंट में पहुंचे। और इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपए, ये आंकड़ा छोटा नहीं है, 5 लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचे हैं।

श्री मोदी ने कहा अब मुझे बताइए, जिनकी ये मुफ्त की कमाई बंद हो गई है, वो क्या, मोदी को प्यार करेंगे क्या? मैंने सही किया कि नहीं किया? करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? ये सारे गलत कामों को बंद करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? वो कितने ही चिल्लाते रहें, चीखते रहें, मैं इसको ठान के बैठा हूं, करके रहूंगा। श्री मोदी ने कहा कि टेलीकॉम के क्षेत्र में भारत में पिछले 10-12 साल में जो क्रांति आई है उसका नागरिक को सीधा-सीधा फायदा हुआ है।

उन्होंने देश विदेश से आयी दूरसंचार जगत की हस्तियों को संबोधित करते हुए कहा आप जानते हैं कि भारत, भाषा और भूगोल, हर प्रकार से डायवर्स देश है, विविधताओं से भरा हुआ देश है। इसके कारण लोगों के जीवन में अनेक असुविधाएं भी आती हैं। मोबाइल कनेक्टिविटी ने इस डायवर्सिटी (विविधता) को भी सुविधा से जोड़ा है। पहले ज्यादातर बैंक शहरों में ही होते थे, अस्पताल शहरों में होते थे, सरकारी दफ्तर ब्लॉक या जिला स्तर पर रहते थे। यानि कुछ भी काम करना हो, सरकारी सेवा लेनी हो, तो लोगों का पैसा और समय दोनों खर्च होता था। 

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डिजिटल गवर्नेंस ने इन परिस्थितियों को बदला है। उन्होंने कहा पुरानी व्यवस्था होती, तो सरकार का 5 लाख करोड़ रुपए लीकेज में चला जाता और ऐसे लोगों की जेब भर देता, मोदी ने इसको रोका है। और अब वही पैसा सही लाभार्थी को मिल रहा है और बचा हुआ पैसा सही काम के लिए उपयोग आ रहा है।

श्री मोदी ने कहा पीएम किसान सम्मान निधि के तहत हम 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक किसानों के बैंक अकाउंट में जमा कर चुके हैं। किसान को मोबाइल फोन पर ही पैसा जमा होने का मैसेज मिल जाता है। ये पैसा उन करोड़ों छोटे किसानों तक पहुंचा है, जिन तक कभी सरकारी स्कीम्स का लाभ पहुंच ही नहीं पाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि दूरसंचार की चर्चा में अक्सर नेटवर्क और स्पैक्ट्रम पर बहस , मोबाइल टावर, नेटवर्क की पहुंच और गति की बातें होती हैं। लेकिन भारत के लोगों के लिए टेलीकॉम के मायने और भी रहे हैं। बीते 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन आधुनिक संचार के माध्यम के साथ-साथ गुड-गवर्नेंस (सुशासन) का भी अहम औजार बनकर सामने आया है। और यह हमारे डिजिटल इंडिया विजन के केंद्र में रहा है।

श्री मोदी ने कहा आज हम सुनते हैं कि भारत में डेटा सस्ता है, मोबाइल फोन सस्ते हैं, मोबाइल फोन यूजर बेस इतना एक्सपैंड हो गया है, ये अपनी जगह सब सच है, लेकिन ये हुआ कैसे? और ये सब किया क्यों गया? ये जब हम समझेंगे, तो सभी को भारत का फोकस, भारत का ध्यान एकदम स्पष्ट होगा। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले तक भारत में डिजिटल डिवाइड बहुत बड़ी चुनौती थी। आधुनिक टेक्नोलॉजी बड़े लोगों का अधिकार बनती जा रही थी। यानि जिसके पास साधन है, वही आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ ले सकता था।

प्रधानमंत्री ने कहा डिजिटल इंडिया अभियान से हमने इस स्थिति को बदलने की ठानी और इसके केंद्र में मोबाइल फोन को लेकर के आए। यह टेक्नोलॉजी के लोकतांत्रीकरण का बहुत बड़ा प्रयास था। उन्होंने कहा कि इसके लिए दूरसंचार क्षेत्र में हर जरूरी सुधार किए गए, अवसंरचना का विस्तार किया गया। हमने इस बात पर ध्यान दिया किया कि मोबाइल फोन और अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर भारत में ही बने।

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भाजपा जुटा लेगी दो तिहाई बहुमत

महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन बिल पास कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी दो तिहाई बहुमत की तलाश में लगी है। इस साल अप्रैल में हुए संसद के विशेष सत्र में सरकार के तीन बिल पास नहीं होने के बाद से ही इसकी कोशिश हो रही है। संसद के मानसून सत्र का अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है तो उसके पीछे भी यही कारण बताया जा रहा है। सवाल है कि क्या भाजपा अगले कुछ दिन में दो तिहाई बहुमत जुटा लेगी ताकि वह संविधान संशोधन के विधेयक पास करा सके? यह सवाल इसलिए है क्योंकि चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार चल रहे प्रदर्शन और देश बन रहे माहौल के कारण भाजपा के लिए नई पार्टियों का समर्थन हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। पहले जो काम आसान दिख रहा था उसमें भी नई पेचीदगियां पैदा हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस व दूसरी विपक्षी पार्टियों का गठबंधन है तो दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी है, जिसको आम आदमी पार्टी का समर्थन मिल रहा है। इनके लगातार प्रदर्शनों से सरकार विरोधी माहौल बन रहा है।

भाजपा के एक जानकार नेता के मुताबिक इन पार्टियों के विरोध प्रदर्शनों के बीच भी दो तिहाई बहुमत जुटाना संभव हो जाएगा क्योंकि कांग्रेस से नाराज पार्टियां  प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार का साथ देने को तैयार हैं। इसमें भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके से है। गौरतलब है कि डीएमके ने मंगलवार, छह अक्टूबर को हुए प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया। बीजू जनता दल का भी कांग्रेस से विरोध है लेकिन उसके नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बढ़ाई है तो भाजपा को लग रहा है कि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन उसको मिल जाएगा। अगर ये 22 सांसद सीधे तौर पर सरकार के विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे तो सदन से गैरहाजिर रह कर भी सरकार की मदद कर सकते हैं। वैसे भी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के ‘इंडिया’ ब्लॉक में शामिल होने के बाद डीएमके के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं।

इस बीच भाजपा का हिसाब किताब इस बात से मजबूत होता दिख रहा है कि तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी दोनों में टूट हो गई है। तभी ममता बनर्जी को साथ लेकर जिस ‘इंडिया’ ब्लॉक की ताकत पहले 233 सीट की थी वह घट कर 178 सीट की रह गई है। विपक्षी गठबंधन की ओर से ही यह आंकड़ा दिया गया है कि 19 पार्टियों के 178 लोकसभा सांसद और 62 राज्यसभा सांसद चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं। इसका अर्थ है कि ‘इंडिया’ ब्लॉक की ताकत में 47 सांसदों की कमी आई है। अगर यह संख्या भाजपा के साथ जुड़ जाती है तो संसद में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा करने में उसे समस्या नहीं आएगी। कुछ अन्य सांसदों को गैरहाजिर करा कर भाजपा यह काम कर सकती है।

राहुल के रॉल खाने पर विवाद

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार, छह अक्टूबर को बड़ा प्रदर्शन किया। करीब 12 घंटे के इस प्रदर्शन के दौरान वे आठ घंटे तक ‘सत्याग्रह’ पर भी बैठे, दो घंटे तक हिरासत में रहे और दो घंटे तक सड़क पर खूब ऑप्टिक्स भी बनवाए। वे पुलिस के लगाए बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए है, जिसकी वीडियो और तस्वीरें खूब वायरल हुई हैं। उनके प्रदर्शन का यह असर रहा कि मंगलवार को भाजपा को चार बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। भाजपा के अलग अलग प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग का बचाव किया।

इस पूरे प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया में सक्रिय भाजपा के इकोसिस्टम के लोगों को जब कोई और मुद्दा नहीं मिला तो उन्होंने राहुल गांधी के ‘खान चचा’ दुकान से मंगा कर रॉल खाने को मुद्दा बनाया। यह माना गया कि दुकान का मुस्लिम नाम है तो इससे एक नैरेटिव बनेगा। हालांकि दुकान एक हिंदू कारोबारी की ही है। हो सकता है कि रील वायरल करने वाले भी इस बात को जानते हों। उन्होंने नैरेटिव बनाने के लिए यह भी प्रचार किया कि राहुल चिकन रॉल खा रहे थे। तस्वीर जूम करके लाल निशान दिखाया जा रहा था। किसी को इस बात पर आपत्ति थी कि राहुल मंगलवार को नॉनवेज खा रहे थे तो किसी को इस पर परेशानी थी कि पितृपक्ष का समय चल रहा है और राहल नॉनवेज खा रहे थे। सोचें, कितने बड़े आरोपों को लेकर प्रदर्शन हो रहा था और भाजपा का इकोसिस्टम उसके किस स्तर पर ला रहा है!

ज्ञानेश के हटने तक नहीं रूकेंगे: राहुल

नई दिल्ली। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को लगातार दूसरे दिन कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे। उन्होंने जंतर मंतर पर जाने की कोशिश की परंतु पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल ने कहा कि वे नहीं रूकने वाले हैं। राहुल ने दो टूक अंदाज में कहा, जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता है तब तक हम नहीं रूकने वाले हैं…यह लड़ाई देश की सबसे पवित्र चीज को बचाने के लिए है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह कुछ भी करके हमें रोक नहीं सकते हैं।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी पार्टियों के सांसदों को बुधवार को कनॉट प्लेस में ‘सागर रत्ना’ रेस्तरां में दोपहर के भोजन पर बुलाया था। वहां से निकल कर सारे नेता जंतर मंतर की ओर बढ़े लेकिन पुलिस ने उनको रास्ते में रोक दिया। रोके जाने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सड़क पर लेट गईं। उनके हाथ में संविधान की कॉपी थी। प्रियंका ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘क्या यही तरीका है? आप देख सकते हैं कि ये क्या कर रहे हैं’।

कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के नेता बस में बैठ कर जंतर मंतर की ओर जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका तो राहुल सड़क पर धरने पर बैठ गए। थोड़ी देर के बाद पुलिस उनको वहां से उठा कर ले गई। पुलिस ने राहुल और अन्य नेताओं को करीब एक घंटे तक बाराखंभा पुलिस स्टेशन में रखा। शाम में साढ़े सात बजे के करीब पुलिस ने सबको छोड़ दिया। उससे पहले राहुल को हिरासत में लेते समय कांग्रेस कार्यकर्ता की सुरक्षा बलों के साथ धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस राहुल गांधी को जिस बस में लेकर जा रही थी, कांग्रेस कार्यकर्ता उसके ऊपर चढ़ गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बस को भी पंक्चर कर दिया।

गौरतलब है कि एक दिन पहले मंगलवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक के दो सौ से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला था, लेकिन उन्हें पहले ही रोक दिया गया। इसके बाद राहुल और प्रियंका ने आकाशवाणी परिसर में आठ घंटे धरना दिया था। आकाशवाणी परिसर में जबरन घुसने पर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। विपक्षी पार्टियों के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि जंतर मंतर पर बीएनएसएस की धारा 163 लागू है। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सचिन शर्मा ने सुरक्षाकर्मियों से सांसदों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सांसद और उनके समर्थक तीन बसों में जंतर मंतर जा रहे थे।

कोलकाता में कांग्रेस का विशाल प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की सड़कों पर उतर कर हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में बुधवार को एक विशाल विरोध मार्च निकाला। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, “यह रैली चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। हम चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई और दुर्व्यवहार भी किया। मध्य कोलकाता में आयोजित इस महारैली में श्री सरकार ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में दोबारा मतदान कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में मतदाताओं को डराया-धमकाया गया और कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों को बूथों से बाहर खदेड़ दिया गया।

प्रदर्शनकारी मध्य कोलकाता के बैंटिंक स्ट्रीट स्थित एक सिनेमा हॉल के पास एकत्र हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित ‘लोक भवन’ की ओर बढ़े। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस बड़े प्रदर्शन के कारण शहर के केंद्रीय व्यावसायिक क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ प्रवास स्थगित

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बुधवार और गुरुवार को प्रस्तावित दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास स्थगित कर दिया गया है।

चुनाव आयोग ने अपरिहार्य कारणों से मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का निर्धारित कार्यक्रम फिलहाल स्थगित किया है। संशोधित कार्यक्रम की तारीख बाद में घोषित की जाएगी। छत्तीसगढ़ के मुख्य चुनाव पदाधिकारी कार्यालय ने छह अक्टूबर को संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्यक्रम स्थगित होने की सूचना दी, जिसकी जानकारी आज सुबह दी गई। 

श्री कुमार के प्रस्तावित प्रवास को देखते हुए उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया था। उनके आगमन के मद्देनजर सुरक्षा, आवागमन और अन्य प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी की जा रही थीं। प्रस्तावित प्रवास के दौरान चुनाव संबंधी तैयारियों सहित विभिन्न विषयों पर अधिकारियों के साथ बैठक और समीक्षा की संभावना थी। चुनाव आयोग से संशोधित कार्यक्रम प्राप्त होने के बाद नई तारीख की जानकारी संबंधित विभागों को अलग से दी जाएगी।

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फिलहाल सात और आठ अक्टूबर का निर्धारित प्रवास स्थगित है। इस बीच, श्री कुमार से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय में मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में कथित बदलाव का विषय भी उठा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म 6 में किए गए किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, “हम भी होमवर्क करते हैं। 

हमें भी मामले की जानकारी है। श्री कुमार को निलंबित करने की मांग पर न्यायालय ने तत्काल कोई आदेश देने से इनकार करते हुए कहाहम याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं। याचिका का आधार न्यूज रिपोर्ट है, वह शत प्रतिशत सही, आंशिक रूप से सही या गलत भी हो सकती है। हम उसके आधार पर कोई आदेश नहीं दे सकते हैं।” न्यायालय ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

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हिरासत में लेकर राहुल को हटाया

नई दिल्ली। सुरक्षा बलों की भारी घेरेबंदी के बीच दिल्ली पुलिस ने रात आठ बजे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लिया और उनका ‘सत्याग्रह’ खत्म कराया। हिरासत में लिए जाने से पहले राहुल और प्रियंका कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ संसद मार्ग पर स्थित आकाशवाणी भवन के परिसर में करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठे रहे। राहुल ने ऐलान कर दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त से मिले बगैर वे वहां से नहीं हटने वाले हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के तीन सौ सांसदों से नहीं मिल कर मुख्य चुनाव आयुक्त लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं।

बहरहाल, रात आठ बजे के करीब भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच दिल्ली पुलिस ने राहुल और प्रियंका को हिरासत में लिया। दोनों को बस में बैठा कर आकाशवाणी परिसर से हटाया गया। इससे पहले जब पुलिस की टीम राहुल और प्रियंका को हटाने पहुंची तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेरा बना लिया। कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने उस बरगद की जड़ पकड़ ली, जिसके नीचे राहुल धरने पर बैठे थे। लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग करके सबको वहां से हटा दिया और धरने की जगह को खाली करा लिया।

गौरतलब है कि मंगलवार की सुबह कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया। सैकड़ों सांसदों और पार्टियों के नेताओं ने संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया। लेकिन पुलिस ने उनको नीति आयोग के पहले रोक दिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी रोके जाने पर बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए। बाद में राहुल और दूसरे विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन के परिसर में घुस गए और वहां धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिले बगैर नहीं जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान उन्हें प्रदर्शन की इजाजत देता है।

राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 19 विपक्षी पार्टियों के ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ का नेतृत्व कर रहे थे। कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, शरद पवार की एनसीपी, लालू प्रसाद की राजद, हेमंत सोरेन की जेएमएम और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्षी पार्टियों के नेता इस मार्च में शामिल हुए। गौरतलब है कि 30 सितंबर को हुई बैठक में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक ने एसआईआर में वोट चोरी का आरोप लगाते हुए निर्वाचन सदन के घेराव का ऐलान किया था।

मंगलवार को निर्वाचन सदन का घेराव करने जा रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल और प्रियंका को हिरासत में लेकर बस में बैठाया गया। लेकिन वे उतर कर आकाशवाणी परिसर में पेड़ के नीचे बैठ गए। राहुल ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी में भाजपा की मदद की। गौरतलब है कि आकाशवाणी से चुनाव आयोग का मुख्यालय सिर्फ ढाई सौ मीटर दूर है। राहुल वहां तक जाने देने की मांग कर रहे हैं। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद पिछले पांच दिन में चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में सात प्रदर्शन हुए हैं।

राहुल ‘जेन जी’ के मतदाताओं से कनेक्ट बनाने के लिए प्रदर्शन में ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ का पोस्टर लेकर पहुंचे थे। राहुल पुलिस के लगाए बैरिकेड पर भी चढ़ गए, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया में खूब वायरल हुई। विपक्ष के इस प्रदर्शन की वजह से सेंट्रल दिल्ली में दिन भर जाम लगा रहा।

आयोग और भाजपा पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के दौरान संसद मार्ग पर रोके जाने के बाद चुनाव आयोग के साथ साथ केंद्र सरकार और भाजपा पर भी जोरदार हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करने में भाजपा की मदद की है। राहुल ने यह भी कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग और आरएसएस ने देश में लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। राहुल कई घंटे तक धरने पर भी बैठे रहे।

राहुल ने कहा, ‘तीन सौ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद आए थे। हम चाहते थे ज्ञानेश कुमार और उनके दो चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। पुलिस ने हमें रोका। चुनाव आयोग से 50 गज दूर बैठाकर रखा है हमें जाने नहीं दे रहे हैं। तीन सौ सांसद ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते हैं। ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। अगर जनप्रतिनिधियों से चुनाव आयोग नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र का क्या मतलब है’।

एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, ‘मैं लोकतंत्र बचाने यहां खड़ा हूं। अमित शाह, नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार और मोहन भागवत ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। देश के युवा ये बात जानते हैं’। उन्होंने आगे कहा, ‘चुनाव को मोदी, शाह ने हाइजैक किया है और ज्ञानेश कुमार ने उनकी मदद की है। यहां पुलिस वाले भी यही कर रहे हैं। इनमें से कोई भी बचकर नहीं जाएगा। जो इन्होंने देश के साथ किया है, वह देशद्रोह है’।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए लोगों के अधिकार छीन रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। खड़गे ने कहा कि जिस तरह से सत्ता हासिल की गई, वह उचित नहीं था और इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश में नौ राज्यों की विधानसभाएं भंग की जा सकती हैं, तो यहां की अवैध व्यवस्था भी खत्म होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगी।

विपक्ष के इस प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें हमारी बात सुननी चाहिए। यह लोकतंत्र बचाने की बात है। पुलिस को बच्चों के साथ और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए’।