लगातार दो सीरीज हारने के बाद टी20 टीम में होगी सूर्यकुमार यादव की वापसी? बीसीसीआई ने रखी ये शर्त

टी20 विश्व कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने वाले सूर्यकुमार यादव को बड़ा झटका लगा। विश्व कप खत्म होने के बाद बीसीसीआई ने टी20 टीम की कप्तानी उनसे लेकर श्रेयस अय्यर को सौंप दी। वहीं अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम टी20 में अब तक एक भी मुकाबला नहीं जीत पाई है। भारतीय टीम आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज हार गई। वहीं अब सीरीज हारने के बाद सूर्यकुमार के भारतीय टीम में वापसी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम का प्रदर्शन अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। टीम अपने पिछले सात टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से छह हार चुकी है, जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया।

सूर्या को होगी वापसी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई ने सूर्यकुमार यादव के लिए भारतीय टीम के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। न्यूज एजेंसी ANI ने बीसीसीआई के एक सूत्र के हवाले से कहा, “सूर्यकुमार यादव के लिए भारतीय टीम के दरवाजे अभी भी खुले हैं। फिलहाल वह टीम का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन अगर वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं और रन बनाते हैं, तो उनकी वापसी पर जरूर विचार किया जाएगा।”

करना होगा बेहतरीन प्रदर्शन

अगर सूर्यकुमार यादव को भारतीय टीम में दोबारा जगह बनानी है, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट में मुंबई की ओर से लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। चयनकर्ताओं का भरोसा फिर से जीतने के लिए उन्हें बल्ले से लगातार रन बनाने होंगे। मजबूत प्रदर्शन ही उनके लिए राष्ट्रीय टीम में वापसी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है। पिछला साल सूर्यकुमार यादव के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वह लगातार 19 पारियों तक अर्धशतक नहीं बना सके। वहीं इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में उन्होंने पांच मैचों में तीन अर्धशतक जड़े। इसके बाद टी20 विश्व कप के पहले मुकाबले में नाबाद 84 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर उन्होंने दमदार अंदाज में अपनी फॉर्म में वापसी के संकेत दिए।

सूर्या का प्रदर्शन

इसके बाद टी20 विश्व कप के बाकी आठ मुकाबलों में सूर्यकुमार यादव का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा और वह कुल 158 रन ही बना सके। फाइनल मैच में भी उनका बल्ला नहीं चला और वह बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए उन्होंने 13 पारियों में 270 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 147.54 रहा, लेकिन लगातार बड़े स्कोर नहीं बना पाने के कारण चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टी20 टीम से बाहर कर दिया।

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जानिए भारत की सबसे तेज स्पीड वाली ट्रेनों के बारे में, क्या वंदे भारत शामिल है इसमें?

वंदे भारत एक्सप्रेस को अक्सर भारत की सबसे मॉडर्न और तेज ट्रेनों में गिना जाता है, लेकिन क्या यह सच में देश की सबसे तेज ट्रेन है? ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार की गई यह भारत की पहली स्वदेशी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है, जो मॉडर्न टेक्निक, तेज रफ्तार और शानदार सुविधाओं के लिए जानी जाती है। इसकी मैक्सिमम स्पीड 160 किमी/घंटा तक है और यह बिना अलग इंजन के इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) सिस्टम पर चलती है। आइए जानते हैं वंदे भारत, नमो भारत, राजधानी, शताब्दी और नई वंदे भारत स्लीपर में से कौन-सी ट्रेन स्पीड, टेक्नोलॉजी और आराम के मामले में सबसे आगे है:

वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस: ​​

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2026 में शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस, वंदे भारत प्लेटफॉर्म पर बनी भारत की पहली ओवरनाइट (रात भर चलने वाली) ट्रेन है। कोटा-नागदा रूट पर ट्रायल रन के दौरान इसने 180 किमी/घंटा की स्पीड हासिल की, जबकि रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर लॉन्ग डिस्टेंस के टेस्ट भी किए। हालांकि, रेगुलर कमर्शियल ऑपरेशन में यह ट्रेन मंजूर की गई ऑपरेशनल स्पीड पर चलेगी।

राजधानी एक्सप्रेस:

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​​1969 में शुरू हुई राजधानी एक्सप्रेस भारत की पहली पूरी तरह से एयर-कंडीशंड प्रीमियम ट्रेन सर्विस थी। 130 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के साथ, यह नई दिल्ली को देश भर की कई स्टेट की राजधानियों और बड़े शहरों से जोड़ती है। दशकों से, राजधानी भारत में लॉन्ग डिस्टेंस की प्रीमियम रेल ट्रैवल के लिए एक बेंचमार्क रही है।

अमृत भारत एक्सप्रेस:

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​​2023 में शुरू की गई अमृत भारत एक्सप्रेस एक नॉन-AC पुश-पुल ट्रेन है जिसे किफायती लॉन्ग डिस्टेंस के ट्रैवल के लिए डिजाइन किया गया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनी यह ट्रेन 130 किमी/घंटा तक की स्पीड से चल सकती है। दोनों सिरों पर लोकोमोटिव होने के कारण, ट्रेन की स्पीड तेजी से बढ़ती और कम होती है। इसका ऑब्जेक्टिव छोटे कस्बों और शहरों को तेज और कम्फर्टेबल ट्रैवल ऑप्शन देना है, जहां राजधानी या शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनें नहीं जाती हैं।

गतिमान एक्सप्रेस:

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अप्रैल 2016 में शुरू की गई गतिमान एक्सप्रेस भारत की पहली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन सेवा थी। हजरत निजामुद्दीन और आगरा कैंट के बीच चलने वाली यह ट्रेन मैक्सिमम 160 किमी/घंटा की स्पीड से चलती है। इस ट्रेन को 5,500 HP वाले WAP-5 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से चलाया जाता है और इसमें एग्जीक्यूटिव चेयर कार और AC चेयर कार कोच होते हैं। सभी कोच बायो-टॉयलेट से लैस हैं, जो इसे इंडियन रेलवे की प्रीमियम डे की ट्रैवल सर्विस में से एक बनाता है।

शताब्दी एक्सप्रेस: ​​

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1988 में शुरू हुई शताब्दी एक्सप्रेस भारत की सबसे पॉपुलर प्रीमियम दिन की ट्रेनों में से एक है। इसे उसी दिन वापसी की जर्नी के लिए डिजाइन किया गया है और यह मैक्सिमम 130 किमी/घंटा की गति से चलती है। इस ट्रेन में केवल AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार कोच होते हैं, इसमें स्लीपर डिब्बे नहीं होते, जिससे यह कम से मीडियम डिस्टेंस की जर्नी के लिए आइडियल बन जाती है।

नमो भारत RRTS:

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दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) पर चलने वाली नमो भारत ट्रेनें तेज स्पीड वाली रीजनल ट्रैवल के लिए डिज़ाइन की गई हैं। हालांकि ये 160 किमी/घंटा की ऑपरेशनल स्पीड से चलती हैं, लेकिन इन ट्रेनों की डिज़ाइन स्पीड 180 किमी/घंटा है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) डेवलप्ड यह सिस्टम ट्रेडिशनल रेलवे लाइनों और रोड ट्रैफिक से अलग, खास तौर पर इसके लिए बनाए गए ट्रैक पर चलता है, जिससे ट्रैवल तेज और ज़्यादा भरोसेमंद होती है।

वंदे भारत से लेकर अमृत भारत तक, इंडियन रेलवे तेजी से मॉडर्न हो रहा है और तेज ट्रेनें, बेहतर टेक्नोलॉजी और पैसेंजर के लिए ज्यादा आराम जैसी सुविधाएं ला रहा है। ये अगली जनरेशन की सर्विस ट्रैवल का समय कम कर रही हैं, सेफ्टी बढ़ा रही हैं और देश भर के ज्यादा शहरों और कस्बों तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचा रही हैं।

भारत में इंजीनियर बनने का सपना फीका क्यों पड़ रहा है?

Engineering Colleges Closing in India

समीरात्मज मिश्र

एक समय इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना एक सुरक्षित कारोबार माना जाता था। आज उनमें से कई खाली हैं या बंद हो रहे हैं। आखिर ऐसा क्या बदला कि इंजीनियर बनने का सपना लाखों युवाओं के लिए पहले जैसा आकर्षक नहीं रहा? ALSO READ: पर्यावरण संरक्षण में क्यों पिछड़ रहा है भारत

 

करीब डेढ़ दशक पहले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता था। हर साल हजारों छात्र बीटेक में दाखिला लेते थे और निजी कॉलेजों का तेजी से विस्तार हो रहा था। लेकिन अब वही संस्थान छात्रों के इंतजार में खाली पड़े हैं। कई कॉलेज बंद हो चुके हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं। एक समय जिस तकनीकी शिक्षा को रोजगार की गारंटी माना जाता था, वही मॉडल आज सवालों के घेरे में है।

 

यही नहीं, इंजीनियरिंग की महंगी डिग्री लेने के बाद छात्रों को या तो बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है या फिर बहुत कम तनख्वाह वाली नौकरियां मिलती हैं। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियरिंग और एमबीए जैसे तमाम अन्य तकनीकी संस्थान धीरे-धीरे बंद होते जा रहे हैं।

 

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी एआईसीटीई की एक ताजा रिपोर्ट ने न सिर्फ इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक गंभीर चेतावनी दी है बल्कि देश के शैक्षिक परिवेश और बेरोजगारी की स्थिति पर भी सोचने को मजबूर किया है। एआईसीटीई के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देश भर में 58 से ज्यादा इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

 

जिन राज्यों में ये कॉलेज बंद हुए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष पर हैं। इन दोनों राज्यों में 12-12 संस्थान बंद हुए हैं जबकि मध्य प्रदेश में आठ और तेलंगाना और पंजाब में चार-चार संस्थान बंद हुए हैं। इन 58 संस्थानों में से तीन सरकारी मदद वाले थे, जबकि बाकी निजी तौर पर संचालित हो रहे थे। ALSO READ: अमेरिकी नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय

 

क्यों बंद हो रहे हैं कॉलेज?

दरअसल, एआईसीटीई उन स्थितियों में किसी संस्थान को बंद करने का आदेश देती है जब वहां छात्रों का दाखिला लगातार कम हो रहा हो, संस्थान में स्वीकृत संख्या में शिक्षकों की कमी हो और इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन के नियमों का सही तरीके से पालन न हो रहा हो।

 

एआईसीटीई भारत में तकनीकी शिक्षा के लिए कानूनी तौर पर बनी राष्ट्रीय संस्था और नियामक है। यह इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे कार्यक्रमों की देख-रेख करती है और गुणवत्ता और मानक बनाए रखने की निगरानी करती है।

 

नोएडा के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में मेकेनेकिल इंजीनियरिंग पढ़ाने वाले एक शिक्षक नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि चार साल की पढ़ाई के दौरान एक छात्र औसतन आठ-दस लाख रुपये खर्च करता है लेकिन इस खर्च के अनुरूप उन्हें नौकरी नहीं मिलती।

 

उनके मुताबिक, “कई कॉलेजों की फीस तो और भी ज्यादा है। चार साल में इंजीनियर बनकर जब छात्र बाहर जाते हैं तो उन्हें 15-20 हजार महीने की नौकरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। यही नहीं, इसके बाद वो फिर उन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं जिसके लिए सिर्फ स्नातक की अर्हता होती है। तो धीरे-धीरे पेरेंट्स को भी लगता है कि बीटेक कराने से फायदा ही क्या?” ALSO READ: पश्चिम बंगाल: पुलिस मुठभेड़ में अभियुक्त की मौत से उठे सवाल

 

समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है

यानी समस्या सिर्फ रोजगार की नहीं है, बल्कि चार साल की पढ़ाई पर होने वाले निवेश और उससे होने वाले लाभ या रिटर्न के बिगड़ते समीकरण की भी है। दीपाली राज मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं। नोएडा के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। वो बताती हैं, “कैंपस प्लेसमेंट में जो ऑफर मिले, उनकी सैलरी चार साल की पढ़ाई पर हुए खर्च के मुकाबले बहुत कम थी। इसलिए मैंने बैंकिंग की तैयारी शुरू कर दी। कम से कम वहां नौकरी की स्थिरता तो है”

 

दीपाली पिछले तीन साल से तैयारी में हैं लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। दीपाली कहती हैं कि उनकी तरह हजारों की संख्या में इंजीनियरिंग करने वाले छात्र इन परीक्षाओं की तैयारी क रहे हैं। वजह यह कि कम से कम स्थाई नौकरी तो मिल जाएगी, बीटेक की डिग्री में इसकी गारंटी नहीं है।

 

प्राइवेट संस्थानों के बंद होने के पीछे और भी कई कारण हैं। जानकारों के मुताबिक, एक तो ये अभी भी पुराने पाठ्यक्रमों के हिसाब से चल रहे हैं जबकि आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के जमाने में चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं। इसके अलावा बीटेक के पाठ्यक्रमों का विकल्प अन्य पाठ्यक्रमों में भी है जिन्हें पूरा करने में समय भी कम लगता है और खर्च भी।

 

गाजियाबाद के एबीईएस कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर आदित्य टंडन बताते हैं, “बीटेक में भीड़ बढ़ गई है। डेटा साइंस में भरमार हो गई है और इसमें सिर्फ बीटेक ही नहीं चाहिए, दूसरे क्षेत्रों के लोग भी आते हैं। इसके अलावा, बीटेक के विकल्प के रूप में बीसीए, बीएससी कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्स तीन साल में ही हो जा रहे हैं। इनका पाठ्यक्रम बीटेक जैसा ही है। यही नहीं, कई प्रोग्राम ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग मोड में भी हैं। तो छात्रों को यह भी एक विकल्प मिल जाता है। छात्रों की संख्या में कमी की वजह ये भी है।”

 

तकनीक तेजी से बदल रही है

पिछले कुछ वर्षों में आईटी और तकनीकी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया भी बदली है। कई कंपनियां अब केवल डिग्री के आधार पर भर्ती करने के बजाय उम्मीदवार के कौशल, प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और समस्या सुलझाने की क्षमता पर ज्यादा जोर दे रही हैं। ऐसे में केवल बीटेक की डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं रह गई है।

 

यहीं एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा होता है कि यदि इंजीनियरिंग का आकर्षण कम हो रहा है, तो फिर हर साल लाखों छात्र जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी क्यों कर रहे हैं?

 

दिल्ली, कोटा, पुणे, कानपुर जैसी जगहों पर लाखों की संख्या में छात्र इन्हीं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। दिल्ली में एक इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले दुर्गेश कुमार खुद भी आईआईटी से इंजीनियर रहे हैं। नौकरी करने की बजाय उन्होंने छात्रों को पढ़ाने का फैसला किया।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में दुर्गेश कहते हैं, “यह कहना ठीक नहीं है कि इंजीनियरिंग में लोगों की दिलचस्पी कम हो गई है। लेकिन हां, उन संस्थानों से बीटेक का क्रेज जरूर खत्म हुआ है जहां पढ़ाई, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट का स्तर कमजोर है। जो संस्थान इसे सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाए हुए हैं। आज भी आईआईटी, एनआईटी और तमाम अन्य संस्थानों की मांग वैसी ही बनी हुई है जैसी बीस-तीस साल पहले थी। इसका कारण है कि इन संस्थानों ने अपनी गुणवत्ता बरकरार रखी है और आधुनिक तकनीक और समय के हिसाब से खुद को ढालते रहे हैं। ज्यादातर संस्थान सरकारी नियंत्रण में हैं जहां पैसा कमाना संस्थान का लक्ष्य नहीं बल्कि संस्थान से बेहतर प्रशिक्षित लोग तैयार करना है।”

 

सिर्फ यही संस्थान टिक पाएंगे

जानकारों का मानना है कि उद्योगों की मांग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी नई तकनीकों की ओर बढ़ रही है। जिन संस्थानों ने समय के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम, प्रयोगशालाओं और उद्योगों से जुड़ाव को मजबूत नहीं किया, वहां छात्रों का रुझान लगातार घटा है। आदित्य टंडन कहते हैं कि आने वाले समय में वही संस्थान टिक पाएंगे, जो आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ कौशल आधारित शिक्षा और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर देंगे।

 

उनके मुताबिक, “चूंकि निजी क्षेत्र के ज्यादातर संस्थान किसी तरह मान्यता लेने की कोशिश करते हैं, इसके लिए तमाम मानकों का उल्लंघन भी करते हैं लेकिन जब छात्र यहां आते हैं तो खुद को ठगा महसूस करते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे वहां छात्रों की संख्या में कमी आने ही लगती है। यही नहीं, संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की गुणवत्ता और उनका प्रोफाइल भी बहुत मायने रखता है। बहुत से निजी संस्थान इस तरफ भी ज्यादा ध्यान नहीं देते। नतीजा, छात्रों की कमी होना ही है।”

 

दरअसल, यह कहानी केवल 58 इंजीनियरिंग कॉलेजों के बंद होने की नहीं है बल्कि यह भारत की तकनीकी शिक्षा के उस दौर के खत्म होने की कहानी है, जिसमें सिर्फ डिग्री मिल जाना ही सफलता की गारंटी माना जाता था। अब छात्र डिग्री नहीं, रोजगार तलाश रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में वही इंजीनियरिंग संस्थान टिक पाएंगे जो बदलती तकनीक, उद्योगों की जरूरत और छात्रों की अपेक्षाओं के साथ खुद को बदल सकेंगे। बाकी संस्थानों के लिए चुनौती और कठिन होती जाएगी।

UN सिक्योरिटी कॉउंसिल सीट के लिए भारत ने लॉन्च किया SHANTI कैंपेन, जानें क्या है विदेश मंत्री जयशंकर का सुपर प्लान

UNSC Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुए आधिकारिक तौर पर अपना अभियान शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का सुपर प्लान पेश किया। इसे SHANTI कैंपेन का नाम दिया गया है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के कई राजदूत, राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक इस आधिकारिक कैंपेन को लॉन्च करने के साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मुलाकात की और पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान सहित कई वैश्विक घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से निकलते समय जब पीटीआई ने उनसे पूछा कि बैठक कैसी रही तो जयशंकर ने संक्षिप्त शब्दों में कहा कि हमेशा की तरह अच्छी।

क्या है भारत का SHANTI कैंपेन?

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के लिए देश की प्राथमिकताओं को स्पष्ट। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘SHANTI’ यानी ‘Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity’ (नियमों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना) पर आधारित है। जयशंकर ने भारत के इस सुपर प्लान के तहत सुरक्षा परिषद के लिए अपनी 6 मुख्य प्राथमिकताओं को सामने रखा है।

पहली ग्लोबल साउथ की आवाज बनना। यानी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मंच पर ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की चिंताओं और मुद्दों को मजबूती से उठाना। दूसरी सुधारित बहुपक्षवाद यानी वैश्विक शासन में सुधार को आगे बढ़ाना ताकि इसे अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाया जा सके। तीसरी भविष्य के लिए तैयार पीसकीपिंग, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन को आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाना। चौथी एआई (AI) के दुरुपयोग से निपटना, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले खतरों को एड्रेस करना। पांचवीं समुद्री सुरक्षा जिसके तहत वैश्विक समुद्री मार्गों और सुरक्षा को मजबूत करना। छठी टेरर फाइनेंसिंग पर लगाम। इसके तहत आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद का कड़ा विरोध करना और इसे रोकना।

इस अभियान की शुरुआत के अवसर पर एक विशेष वीडियो भी दिखाया गया। इसमें वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका, उसके योगदान और यूएनएससी अभियान की प्राथमिकताओं को दिखाया गया। वीडियो में मिसाइल हमलों से तबाह होते शहरों और प्राकृतिक आपदाओं के फुटेज के बीच भारत द्वारा पहुंचाई गई मानवीय और राहत सहायता को दिखाया गया। वीडियो में कहा गया कि एक अव्यवस्थित दुनिया के लिए, एक सभ्यता ने हमेशा केवल एक ही शब्द में उत्तर दिया है – शांति (Shanti).

इस विशेष वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक आह्वान को भी शामिल किया गया, जो उन्होंने जून 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए किया था कि यह युद्ध का युग नहीं है बल्कि यह संवाद और कूटनीति का युग है। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शासन में बदलाव लाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। बहुपक्षवाद को लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक और प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे देशों का मतभेदों को पाटने और आम सहमति बनाने का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे देश निश्चित रूप से इस दिशा में अपना उचित योगदान दे सकते हैं।

अगले साल जून में होगा मुकाबला, 9वीं बार सीट की तैयारी

यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल यानी जून 2027 में आयोजित किए जाएंगे। इस चुनाव में एशिया-पैसिफिक ग्रुप श्रेणी की इकलौती सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली 15-सदस्यीय निकाय में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में बैठ चुका है। भारत का पिछला कार्यकाल 2021-22 में था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में इस प्रतिष्ठित टेबल पर रह चुका है।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी उम्मीदवारी ऐसे समय में पेश कर रहा है जब दुनिया एक गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। एक तरफ दुनिया के पास मानव कल्याण को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की अभूतपूर्व क्षमताएं हैं तो दूसरी तरफ हम संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता का ऐसा दौर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इस जटिलता से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को नेतृत्व करना होगा और सुरक्षा परिषद को रास्ता दिखाना होगा इसलिए इस सदस्यता के चुनाव का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात

सप्ताहांत में न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने इस कैंपेन लॉन्च के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी और भारत के यूएन मिशन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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आंध्र प्रदेश में कोरोना से 2 मौतें, 8 नए मरीज मिले; किस वैरिएंट से फैला संक्रमण?

corona cases in Andhra Pradesh

Corona in Andhra Pradesh : आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडप्पा और अन्नमय्या जिलों में कोरोना संक्रमण से जुड़ी दो मौतों की पुष्टि से हड़कंप मच गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग तुरंत सक्रिय हो गया। दोनों जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अभियान चलाया गया, जिसमें 8 नए सक्रिय मरीज मिले। कोरोना के किस वैरिएंट से संक्रमण फैल रहा है, इसकी पहचान की जा रही है।

 

डॉक्टरों के अनुसार, इन सभी मरीजों की हालत स्थिर है। इनमें किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं हैं और सभी होम आइसोलेशन में रहकर स्वस्थ हो रहे हैं। ALSO READ: भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले: कुमार सानू के बेटे जान अस्पताल में भर्ती

 

गौरतलब है कि साल 2019 से 2022 के बीच कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इस महामारी में लाखों लोगों की जान गई और दुनिया भर के देशों ने इसे नियंत्रित करने के लिए व्यापक प्रयास किए। हालांकि, कोरोना वायरस के नए-नए वैरिएंट समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

 

वैरिएंट की पहचान के लिए पुणे भेजे गए सैंपल

वाईएसआर कडप्पा और अन्नमय्या जिलों में मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सैनिटाइजेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तेज कर दी है। एहतियात के तौर पर सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड भी तैयार किए गए हैं।

 

संक्रमित मरीजों के सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमण किस वैरिएंट के कारण हुआ है। शुरुआती संकेतों के अनुसार, यह वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) से मिलता-जुलता हो सकता है।

 

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट का समय-समय पर सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। इसलिए लोगों को घबराने की बजाय सावधानी बरतनी चाहिए।

 

 विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब तक स्वास्थ्य विभाग किसी नए वैरिएंट को लेकर आधिकारिक पुष्टि न करे, तब तक अफवाहों से बचें और सामान्य एहतियाती उपाय अपनाते रहें।

 

इन सावधानियों का पालन करें

  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय मास्क जरूर पहनें।
  • सार्वजनिक स्थानों पर नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
  • हाथों को नियमित रूप से साफ करें या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
  • तेज सर्दी, बुखार, खांसी या अन्य लक्षण दिखाई दें तो लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

त्योहारों में महंगे हवाई टिकट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से 2 हफ्ते में मांगे नए एयरफेयर नियम

supreme court on air fare

त्योहारों और छुट्टियों के दौरान एयरलाइंस कंपनियों द्वारा बढ़ाए जाने वाले हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 2 हफ्तों के भीतर नए एयरफेयर नियम सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। ALSO READ: हार्मुज स्ट्रेट में UAE के 2 तेल टैंकरों पर ईरानी मिसाइल हमला, 1 भारतीय की मौत; अमेरिका ने नाकेबंदी का किया ऐलान

 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान जब केंद्र ने बताया कि हवाई किराया कंट्रोल करने के नियम तैयार हैं और इन्हें 30 दिन में संसद में पेश किया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियम संसद में पेश हों या न हो, लेकिन सरकार को अगले 2 हफ्तों के भीतर इसकी एक कॉपी 'सीलबंद लिफाफे' में कोर्ट में जमा करनी होगी।

 

क्या थी याचिकाकर्ता की मांग?

सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन ने एयरलाइंस कंपनियों की ओर से टिकटों के दामों में उतार-चढ़ाव और यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई थी।

याचिका में किराए की अधिकतम सीमा तय करने, यात्रियों के मुफ्त चेक इन सामान का वजन दोबारा 25 किलोग्राम करने जैसी मांगें भी की गई हैं। उन्होंने देश में एक ऐसे मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर बनाने की मांग की थी, जो एयरलाइनों के किराए और एक्स्ट्रा चार्जेस पर निगरानी रखे। ALSO READ: SBI Funds Management IPO खुला: 11,693 करोड़ के इश्यू पर दांव लगाने से पहले जानें GMP, प्राइस बैंड और लिस्टिंग डेट

 

किरायों में भारी उछाल यात्रियों का शोषण

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बेंच से कहा- हवाई किराया 300% तक बढ़ जाता है। इस पर बेंच ने मजाक में कहा- वकीलों की फीस भी कई बार 400% तक बढ़ जाती है, अब क्या किया जाए। कोर्ट ने त्योहारों और छुट्टियों के दौरान किरायों में भारी उछाल को यात्रियों का शोषण करार दिया था। ALSO READ: 900 साल पुरानी मूर्ति का रहस्य सुलझा, सरस्वतीजी की समझी जाने वाली मूर्ति निकली देवी गायत्री की दुर्लभ प्रतिमा

कोर्ट ने केंद्र और डीजीसीए से इस पर विचार के लिए कहा था। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि 'भारतीय वायुयान कानून, 2024' लागू हो चुका है। उसके आधार पर नए नियम बनाए जा रहे हैं।

LIVE: उत्तर भारत में फिर कमजोर पड़ा दक्षिण-पश्चिम मानसून

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Latest News Today Live Updates in Hindi : उत्तर भारत में एक बार फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है। हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान दिखे। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां मूसलाधार बारिश हो रही है। पल पल की जानकारी…

वियतनाम में नाव पलटने से मारे गए आंध्र प्रदेश के तीन लोगों के पार्थिव शरीर RGI एयरपोर्ट पर पहुंचे और अधिकारियों ने उन्हें उनके परिवार वालों को सौंप दिया।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी इंदौर से भोपाल की जेन ज़ी साइक्लोथॉन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की गूंज की शुरूआत और संकल्प है। प्रदेश में 25 सालों से भाजपा की सरकार है। मध्य प्रदेश में पेपर माफिया और नौकरियों में धांधली चल रही है। यह चिंता का विषय है। यह राजनीतिक यात्रा नहीं बल्कि शिक्षा को बचाने की यात्रा है। जो अमीर है उसके पास शिक्षा है और गरीबों के पास केवल मजदूरी है। ऐसा 80 साल की आजादी के बाद है। मध्य प्रदेश में शिक्षा को लेकर अराजकता है।

-उत्तर भारत में एक बार फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है।

-पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां मूसलधार बारिश हो रही है। 

-राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई हिस्सों में मंगलवार सुबह बारिश हुई। 

Market Trend : निफ्टी के 24000 के ऊपर टिके रहने तक हर गिरावट में करें खरीदारी, आईटी और ऑटो सेक्टर के ये दो शेयर कर सकते हैं कमाल

Market Trend : मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच,14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले और निफ्टी 24,100 के नीचे कारोबार कर रहा है। 9.50 बजे के आसपास सेंसेक्स 462.88 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 77,153.52 पर और निफ्टी 118.00 अंक या 0.49 प्रतिशत गिरकर 24,093.00 पर कारोबार कर रहा है। लगभग 908 शेयरों में बढ़त देखने को मिल रही है। वहीं, 1363 शेयरों में गिरावट आई है और 165 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में हिंडाल्को,ONGC,TCS,इंफोसिस और विप्रो शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में HCL टेक,श्रीराम फाइनेंस,इंटरग्लोब एविएशन,बजाज फाइनेंस और L&T शामिल हैं।

निफ्टी व्यू

बाजार की चाल पर बात करते हुए manasjaiswal.com के Technical Analyst मानस जायसवाल ने कहा कि कल गिरावट के साथ हुई ओपनिंग के बाद निफ्टी बैंक निफ्टी दोनों ने ही 20 डे मूविंग एवरेज पे सपोर्ट लिया और वहां पर बाइंग इंटरेस्ट देखने को मिला है। ऐसे में बाजार की ओवरऑल ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव लग रहा है। निफ्टी जब तक 24,000 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा तब तक हर गिरावट में खरीदारी करेंगे और 24,500 के आपको टारगेट सेट करके चलना चाहिए।

बैंक निफ्टी व्यू

बैंक निफ्टी की जहां तक बात है,ये जब तक 57,400 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा,यहां पर भी पॉजिटिव ट्रेंड बना रहेगा। उम्मीद कि यहां पर आउट परफॉर्मेंस देखने को मिलेगा और बहुत ही जल्द ही यह इंडेक्स 58,900 को ब्रेक करके 59,000 की तरफ जाने की कोशिश करेगा। दोनों ही इंडाइससेस के ट्रेंड पॉजिटिव है और डिप पर खरीदारी करने की राय रहेगी।

मानस जायसवाल के पसंदीदा शेयर

मानस जायसवाल की पहली रिकमेंडेशन बजाज ऑटो है, जहां पर इंट्राडे चार्ट पर इनवर्स पैटर्न का ब्रेकआउट देखने को मिला है। बजाज ऑटो में 10,240 रुपए के स्टॉप लॉस से खरीदारी करने की राय रहेगी। इसमें 10,700 तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

इनकी दूसरा रेमेंडेशन टाटा एलेक्सी है। अब ऐसा लग रहा है कि इस स्टॉक ने 3600 रुपए के आसपास एक बॉटम बना लिया है। इसमें हायर टॉप फायर बॉटम्स का कंफर्मेशन है। स्टॉक 10 डे मूविंग एवरेज के ऊपर निकला है। टाटा एलेक्सी में 3765 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी करेंगे। इसमें 3975 रुपए तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

 

Market view : बाजार में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति करेगी काम, आज इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Waaree Energies Share Price: यूबीएस ने रेटिंग में किया बदलाव, टारगेट प्राइस में भी की 30% की कटौती, जानें क्या हैं इसकी वजह

Waaree Energies Share Price: कैपिटल गुड्स सेक्टर , Electric Equipment इंडस्ट्रीज की कंपनी वारी एनर्जीज लिमिटेड (Waaree Energies) के शेयरों में मंगलवार, 14 जुलाई को गिरावट देखने को मिली। शेयर एनएसई पर 09.50 बजे के आसपास 1.88 फीसदी गिरकर 2826 रुपये पर ट्रेड कर रहा। शेयर में यह आज यह गिरावट ब्रोकरेज फर्म UBS द्वारा स्टॉक की रेटिंग में बदलाव और टारगेट प्राइस में भारी कटौती के बाद आया है।

ब्रोकरेज फर्म UBS ने स्टॉक को ‘Buy’ से ‘Neutral’ रेटिंग कर दी है। साथ ही UBS ने अपने प्राइस टारगेट को पहले के ₹4,400 से 30% घटाकर ₹3,100 कर दिया। हालांकि, बदले हुए टारगेट से अभी भी सोमवार को स्टॉक के आखिरी क्लोजिंग प्राइस से 8% की संभावित बढ़त का पता चलता है।

ब्रोकरेज ने इंडस्ट्री के साथियों की तुलना में ज़्यादा डिस्काउंट और कम मार्जिन की उम्मीदों का हवाला देते हुए अपने वैल्यूएशन मल्टीपल को 28x से घटाकर 21x 12-महीने के फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) कर दिया।

UBS के अनुसार, यह डाउनग्रेड सोलर इंडस्ट्री के लिए बढ़ती नियर टू मीडियम अवधि की चुनौतियों को दिखाता है क्योंकि यह सेक्टर कंसोलिडेशन के दौर में प्रवेश कर रहा है।

ब्रोकरेज ने कहा कि वारी के प्लान किए गए ₹30,000 करोड़ के कैपिटल खर्च (जो पिछले साल घोषित ₹13,000 करोड़ से काफी ज़्यादा है) से FY28 तक इसकी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़कर 15.4 GW सोलर मॉड्यूल और 10 GW सेल और इंगोट-वेफर कैपेसिटी हो जाने की उम्मीद है। यह भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का लगभग 20% होगा।

ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि यह इन्वेस्टमेंट ज़्यादा बैकवर्ड इंटीग्रेशन के ज़रिए वारी की लीडरशिप पोजीशन को मज़बूत करेगा। हालांकि, इसने यह भी चेतावनी दी कि इंडस्ट्री में तेज़ी से कैपेसिटी बढ़ाने से प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है।ब्रोकरेज ने वारी के बड़े एक्सपेंशन प्लान से जुड़े एग्ज़िक्यूशन रिस्क का भी ज़िक्र किया और कहा कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) जैसे नए बिज़नेस से रिटर्न की विजिबिलिटी अभी भी लिमिटेड है।

ब्लूमबर्ग डेटा के मुताबिक, अभी 19 एनालिस्ट स्टॉक को कवर करते हैं। इनमें से 14 ने ‘buy’ रेटिंग दी है, 1 ने ‘hold’ करने की सलाह दी है, जबकि 4 ने ‘Sell’ करने की सलाह दी है।

वारी एनर्जीज़ के शेयर मंगलवार 14 जुलाई को सुबह 9.58 बजे 1.85% गिरकर ₹2,827.80 पर ट्रेड कर रहा है। पिछले एक महीने में इनमें लगभग 6% से ज्यादा की गिरावट आई है। जबकि 3 महीनों में यह 15 फीसदी से अधिक टूटा है।

Stock Market Live Update Today: सेंसेक्स 460 अंक टूटा, निफ्टी 24100 के नीचे, HCLTech 2% गिरा, Biocon में तेजी

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Video: वीकेंड पर ऑफिस बुलाया तो महिला ने रख दी ऐसी शर्त, सुनकर मैनेजर भी रह गया शांत

आज के दौर में वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ एक कॉरपोरेट शब्द नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जरूरत बन चुका है। देर तक काम करना, वीकेंड पर लगातार काम और बिना अतिरिक्त भुगतान के ओवरटाइम जैसे मुद्दे अक्सर चर्चा में रहते हैं। सोशल मीडिया पर भी कर्मचारी खुलकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे कार्यस्थल की संस्कृति पर लगातार बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच एक वीडियो ने इंटरनेट यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में एक महिला कर्मचारी अपने अधिकारों और तय कार्य समय को लेकर जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखती है, उसने हजारों लोगों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी।

किसी ने इसे कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायक बताया, तो किसी ने इसे भारतीय वर्क कल्चर की वास्तविक तस्वीर कहा। यही वजह है कि ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं।

हर बार मदद की, लेकिन इसे नियम मत बनाइए

वीडियो में मैनेजर कर्मचारी अफरीन को फोन कर पूछता है कि वो ऑफिस क्यों नहीं पहुंची, जबकि पूरी टीम उसका इंतजार कर रही है। जवाब में अफरीन कहती हैं कि शनिवार उनका ऑफ है। जब मैनेजर याद दिलाता है कि वो पिछले दो महीनों से हर शनिवार आ रही थीं, तो अफरीन समझाती हैं कि वह सिर्फ टीम की मदद के लिए कभी-कभी शनिवार को ऑफिस आती थीं, लेकिन यह उनकी नियमित ड्यूटी नहीं थी।

अब मुफ्त में काम नहीं करूंगी

बातचीत के दौरान मैनेजर टीम पर बढ़ते काम का दबाव बताता है, लेकिन अफरीन दो टूक कहती हैं कि टीम पर दबाव होना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। वो कहती हैं कि अगर शनिवार को काम चाहिए तो ओवरटाइम का भुगतान किया जाए। उनका ये जवाब “मैंने सिर्फ मुफ्त में काम करना बंद किया है” सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।

सोमवार तक टली बहस

जब अफरीन ओवरटाइम की बात करती हैं, तो मैनेजर कहता है कि इस मुद्दे पर सोमवार को बात होगी और कॉल समाप्त कर देता है। वीडियो के कैप्शन में अफरीन ने लिखा कि अगर आज आवाज नहीं उठातीं तो “बस इस वीकेंड” वाला सिलसिला शायद सालों तक चलता रहता।

असल घटना नहीं, लेकिन लोगों को लगी अपनी कहानी

अफरीन आमतौर पर स्क्रिप्टेड वीडियो बनाती हैं और ये वीडियो भी उसी का हिस्सा है। हालांकि, इसकी कहानी ने हजारों लोगों को अपनी नौकरी के अनुभव याद दिला दिए। कई यूजर्स ने कहा कि भारतीय दफ्तरों में कर्मचारियों से अक्सर वीकेंड और ऑफिस समय के बाद भी बिना अतिरिक्त भुगतान के काम कराया जाता है।

लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि वीकेंड पर काम तो लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलता। दूसरे ने कहा कि उन्होंने भी कई सप्ताह तक शनिवार को काम किया, लेकिन कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला। वहीं एक अन्य यूजर ने दावा किया कि कई देशों में तय कार्य समय का सम्मान किया जाता है और अतिरिक्त काम के बदले भुगतान या बोनस दिया जाता है। कुछ लोगों ने ये भी कहा कि चाहे वीडियो स्क्रिप्टेड हो, लेकिन इसमें दिखाई गई स्थिति भारतीय वर्क कल्चर की सच्चाई से काफी मेल खाती है।

Viral Post: ‘दिन में सॉफ्टवेयर डेवलपर, रात में Uber चलाता है युवक’ सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्ट