बैंक में 100 करोड़ रुपये, सिलिकॉन वैली में करोड़ों की कंपनी… फिर भी गांव में क्यों रह रहा है ये करोड़पति

सफलता को अक्सर पैसा, बड़ा बिजनेस और शानदार जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन कई बार जिंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं, जहां आर्थिक मजबूती भी परेशानियों को कम नहीं कर पाती। एक उद्यमी द्वारा साझा की गई कहानी ने इसी सोच को सामने रखा है। इसमें एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र है, जिसने अपनी मेहनत से विदेश में बड़ी कामयाबी हासिल की, करोड़ों की संपत्ति बनाई और खुद को सफल साबित किया। हालांकि, निजी जिंदगी की चुनौतियों ने उसकी राह बदल दी।

परिवार से जुड़े विवाद, मानसिक तनाव और बदलते हालातों के बीच उसने अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देने का फैसला किया। यह कहानी सिर्फ सफलता और असफलता की नहीं, बल्कि मानसिक शांति, रिश्तों और जीवन में संतुलन की अहमियत को भी उजागर करती है।

सिलिकॉन वैली में बनाई अपनी पहचान

विनीथ के अनुसार, उनके कॉलेज साथी ने अपनी मेहनत के दम पर अमेरिका में एक सफल कंपनी बनाई और खुद को डॉलर मिलियनेयर बनाया। करियर में सफलता, आर्थिक मजबूती और एक शानदार भविष्य उसके साथ था। लेकिन कुछ समय बाद जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

परिवारिक विवादों ने बदली पूरी जिंदगी

विनीथ ने बताया कि उनके साथी को पत्नी, ससुराल पक्ष और परिवार से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ा। इसके बाद कानूनी मामलों और मानसिक तनाव ने उनकी जिंदगी को काफी प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि इन परिस्थितियों के बीच वह डिप्रेशन से भी गुजरे और अपने बच्चे से दूरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। आखिरकार उन्होंने अमेरिका छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया।

₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति, लेकिन जिंदगी गांव में

विनीथ के मुताबिक, आज उनके पूर्व साथी के पास बैंक में ₹100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, लेकिन वह अब शहरों की चमक-दमक से दूर एक छोटे गांव में रहते हैं। वह अपना समय आध्यात्मिक गतिविधियों में बिताते हैं और मानसिक शांति, उपचार और जीवन के अनुभवों से जुड़े वीडियो साझा करते हैं।

पैसे से ज्यादा जरूरी है मन की शांति

विनीथ ने इस कहानी के जरिए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां आर्थिक सफलता के बावजूद लोग मानसिक परेशानियों से जूझते हैं। उनका संदेश था कि जिस तरह लोग अपनी संपत्ति की सुरक्षा करते हैं, उसी तरह अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

विनीथ की पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी और माना कि जिंदगी में मानसिक शांति और अच्छे रिश्तों की अहमियत को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। एक यूजर ने लिखा कि अच्छी नींद और मन की शांति को लोग कम आंकते हैं। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि कई बार हालात इंसान के नियंत्रण में नहीं होते और मुश्किल समय का सामना करना ही एकमात्र रास्ता रह जाता है।

दौलत बड़ी है, लेकिन सुकून उससे भी ज्यादा जरूरी

इस कहानी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि असली सफलता सिर्फ पैसा कमाने में है या फिर एक संतुलित और शांत जीवन जीने में। करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद अगर मन अशांत हो, तो जिंदगी की खुशियां अधूरी रह सकती हैं।

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3 लगातार मैच जीतकर श्रेयस अय्यर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ जीती T20I सीरीज

INDvsZIM भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे स्पोर्ट्स क्लब में लगातार 3 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच  जीतकर लंबे समय बाद एक द्विपक्षीय सीरीज पर कब्जा जमाया है। बतौर श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारत पहली बार कोई सीरीज जीता है। भारत ने पहले 3 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 7 विकेट से और दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 90 रनों से जीत पाई थी।

वहीं मैन ऑफ द मैच और सीरीज वैभव सूर्यवंशी (81) की आतिशी अर्धशतकीय पारी के बाद गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत भारत ने रविवार को तीसरे टी-20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 35 रनों से शिकस्त दी। इसी के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली।

193 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे को मयंक यादव ने पहले ही ओवर की पहली गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई। इसके बाद चौथे ओवर में यश ठाकुर ने तेजी से रन बनाने का प्रयास कर रहे डिओन मेयर्स (19) का शिकार कर लिया। इसी ओवर की अगली गेंद पर ठाकुर ने जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा को बिना खाता खोले ही पवेलियन भेज दिया। आठवें ओवर में रवि बिश्नोई ने बेन करन (20) को आउट किया।

इसके बाद वेस्ली मधेवेरे और रायन बर्ल की जोड़ी ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए पांचवें विकेट के लिए 60 रन जोड़ कर जिम्बाब्वे की उम्मीदों को जिंदा रखने का प्रयास किया। 16वें ओवर में मयंक यादव ने वेस्ली मधेवेरे 25 गेंदों में (28) को आउट कर भारत को पांचवी सफलता दिलाई। 17वें ओवर की पहली गेंद पर अशोक शर्मा ने तडिवनाशे मारुमानी (एक) को बोल्ड कर जिम्बाब्वे को छठा झटका दिया।

20वें ओवर की पांचवीं गेंद पर मयंक यादव ने ब्रैड एवंस (14) रन को आउट कर अपना तीसरा विकेट लिया। जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित 20 ओवरों में सात विकेट पर 157 रन ही बना सकी और मुकाबला 35 रनों से हार गई। जिम्बाब्वे के लिए रायन बर्ल ने सर्वाधिक (नाबाद 54) रन बनाये। उन्होंने अपनी पारी में 43 गेंदों का सामना किया और चार चौके लगाये। भारत की ओर से मयंक यादव ने तीन विकेट लिये और यश ठाकुर को दो विकेट मिले। रवि बिश्नोई और अशोक शर्मा ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया।

इससे पहले भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत एक बार फिर अच्छी नहीं रही और दूसरे ही ओवर में ब्लेसिंग मुजारबानी ने अभिषेक शर्मा (दो) को आउट कर पवेलियन भेज दिया। इसके बाद बल्लेबाजी करने आये इशान किशन ने वैभाव सूर्यवंशी के साथ दूसरे विकेट के लिए 75 रन जोड़े। 11वें ओवर में सिकंदर रजा ने इशान किशन का शिकार कर भारत को दूसरा झटका दिया। इशान किशन ने 28 गेंदों में चार चौकों की मदद से (29) रन बनाये।

भारत का तीसरा विकेट 15वें ओवर में वैभव सूर्यवंशी के रूप में गिरा। वेस्ली मधेवेरे ने शतक की ओर बढ़ रहे वैभव सूर्यवंशी को आउट किया। वैभव सूर्यवंशी ने 49 गेंदों में आठ चौके और चार छक्के उड़ाते हुए (81) रनों की पारी खेली। 18वें ओवर की पहली गेंद पर ब्रैड एवंस ने कप्तान श्रेयस अय्यर को आउट किया।

श्रेयस अय्यर ने 18 गेंदों में दो चौकों की मदद से (27) रन बनाये। भारत ने निर्धारित 20 ओवरो में पांच विकेट पर 192 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। तिलक वर्मा ने (नाबाद 11) रन बनाये। रिंकू सिंह पारी की आखिरी गेंद पर कैच आउट हुये। रिंकू सिंह ने 14 गेंदों में दो चौके और एक छक्का लगाते हुए (25) रनों की पारी खेली।

Stock in News: रेलवे से पहली बार मिले दो ऑर्डर्स, खुलासे पर 4% उछल पड़ा यह शेयर

Hirect Share Price: हिरेक्ट (पूर्व नाम हिंद रेक्टिफायर्स) ने लगातार तीन दिनों तक तीन डिटेल्स एक्सचेंज फाइलिंग में दी और अब आज इसके शेयर 4% से अधिक ऊपर चढ़ गए। इसमें से एक जानकारी तो कंपनी ने ये भेजी है कि 24 जुलाई से इसका नाम हिंद रेक्टिफायर्स से हिरेक्ट हो गया तो बाकी में कंपनी ने बताया है कि इसे रेलवे से अपनी तरह का खास पहला ऑर्डर मिला है। इसने शेयरों की चमक बढ़ा दी। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया, जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 2.98% की बढ़त के साथ ₹1339.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 4.44% उछलकर ₹1,358.00 तक उछल गया था।

कैसे ऑर्डर्स मिले हैं Hirect (Hind Rectifiers) को रेलवे से

हिरेक्ट को रेलवे से ₹160 करोड़ के अपनी तरह के पहले ऑर्डर्स मिले हैं। इसमें से एक ₹60 करोड़ का एक ऑर्डर तो इसे मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) से मिला है। यह मेडेन ऑर्डर MEMU (मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट) ट्रेनसेट्स के लिए है, जिस पर कंपनी को 24 महीने के भीतर काम पूरा करना है। वहीं कंपनी को इंडियन रेलवे से वंदे मेट्रो (नमो भारत) के लिए पहला डेवलपमेंट ऑर्डर मिला है। ₹60 करोड़ के इस ऑर्डर के तहत कंपनी को 21 महीने के भीतर काम पूरा करना है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

हिरेक्ट के शेयरों ने निवेशकों का पैसा इस साल मार्केट की तेज उठा-पटक के बीच भी रॉकेट की स्पीड से बढ़ाया। महज छह महीने में ही यह 146% से अधिक ऊपर चढ़ गया यानी कि निवेशकों का पैसा करीब ढाई गुना हो गया। इस दौरान निफ्टी 4% से अधिक कमजोर हुआ था। हिरेक्ट के शेयर 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर ₹568.55 के भाव पर थे जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से छह ही महीने में यह 146.24% उछलकर 16 जुलाई 2026 को ₹1,400.00 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

5 वजहों से थमी 5 दिनों की गिरावट, उछले सेंसेक्स-निफ्टी 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शिक्षामंत्री का इस्तीफा: किसी की जीत नहीं, सिर्फ राष्ट्रहित है

A picture of students protesting at Jantar Mantar against the education system and the NEET-UG exam

क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं,

कर्तव्य पथ पर जो मिला, यह भी सही वह भी सही। — अटल बिहारी वाजपेयी

 

राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जब बात देश के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों विद्यार्थियों के हित की आती है, तब केवल और केवल राष्ट्र प्रथम का विचार ही सर्वोपरि रहता है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में हुआ नेतृत्व परिवर्तन केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह परिपक्व राजनीति, नैतिक उच्चता और देश को अस्थिर करने व अराजकता फैलाने का प्रयास करने वाली ताकतों को दिया गया मजबूत और करारा संदेश है।

 

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या कुर्सी से कहीं ऊपर देश और युवाओं का भविष्य है, जैसा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को स्वयं लिखे पत्र में भी उल्लेख किया है। जब जंतर-मंतर पर विभिन्न आंदोलनों और उपद्रवों की आड़ में देश को उद्वेलित करने और असंतोष फैलाने की साजिश रची जा रही थी, तब उन्होंने देश की युवाशक्ति के भविष्य को भ्रम और अनिश्चितता से बचाने के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।

 

उन्होंने पहले ही दिन से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सीबीआई जांच सौंपी और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड जैसी व्यवस्थाएं लागू की। जब यह साफ दिखने लगा कि विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में देशविरोधी और असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने का एजेंडा चला रहे हैं, तब उन्होंने पद त्याग कर विरोधियों की पूरी साजिश को एक झटके में नाकाम कर दिया। उनके इस कदम से सिद्ध हुआ कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए पद नहीं, बल्कि देश और विद्यार्थियों का हित ही सर्वोपरि है।

 

यहां यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान जी पहले भी इस्तीफा दे सकते थे? लेकिन जैसे ही पेपर लीक का विषय सामने आया, उन्होंने जिम्मेदारियों से भागने के बजाय नीट-यूजी की परीक्षा का पुनः आयोजन पूर्ण पारदर्शिता के साथ करवाया।

उन्होंने नीट का परिणाम आने और पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता से संपन्न होने के बाद ही अपना इस्तीफा सौंपा। यदि वे विवाद के शुरुआती दौर में इस्तीफा दे देते, जब पूरा विपक्ष और असामाजिक तत्व चील की तरह नज़रें गड़ाए बैठे थे, तो इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो सकता था। अतः पूरी प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने के उपरांत ही इस्तीफा सौंपना अत्यंत व्यावहारिक, रणनीतिक और सही कदम था।

 

राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रहलाद जोशी को सौंपी है। वे एक बहुत ही अनुशासित, दृढ़ और परिणाम-उन्मुख नेता माने जाते हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक के हुबली स्थित ईदगाह मैदान में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने के प्रखर राष्ट्रवादी संकल्प से हुई थी।

केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला व खान मंत्री के रूप में उन्होंने कई कठिन विधायकी कार्यों और संकटपूर्ण परिस्थितियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है। वे अपने सख्त अनुशासन, प्रशासनिक पकड़ और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों को बिना किसी गतिरोध के आगे बढ़ाने में वे पूरी तरह सक्षम हैं। 

 

एक घोर राष्ट्रवादी और दृढ़ नेतृत्व के हाथों में शिक्षा मंत्रालय आने से देश की शिक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त होने की आशा है। फिर भी इन सबके बीच जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा अब पूरी तरह जनता के सामने आ चुकी है।

आंदोलन के नाम पर अनशन, उग्र और अश्लील नारों तथा सनातन धर्म एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निशाने पर लेने का प्रयास किया गया। सोनम वांगचुक जैसे चेहरों की भूख हड़ताल को आगे रखकर व्यवस्था पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन देश के जागरूक नागरिकों ने इस विघटनकारी सोच को अच्छी तरह समझ लिया है।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने तथाकथित छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों के दोहरे मापदंडों की भी पोल खोल दी है। जो खुद को छात्रों का रहनुमा बताते फिर रहे हैं, वे गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे पंजाब, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में हुए पेपर लीक मामलों पर पूरी तरह खामोश बैठे हैं और मीडिया के सवालों से कतराते दिख रहे हैं।

लेकिन इन छात्र संगठनों और प्रवक्ताओं द्वारा वहां के शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं की जा रही? यह चुप्पी साबित करती है कि यह आंदोलन छात्रों के हित में नहीं, बल्कि केवल भाजपा से राजनीतिक द्वेष के तहत विपक्ष द्वारा प्रेरित था।

 

वहीं सरकार ने इस पूरे एजेंडे के जवाब में एक साथ कई बड़े रणनीतिक लक्ष्य साध लिए हैं। आंदोलन की आड़ में संसद का काम रोकने और देश का माहौल खराब करने का लक्ष्य पूरी तरह विफल हो गया है।

विपक्षी पार्टियों की पोल खुली है कि उनके लिए देश से पहले पार्टी है। वहीं हिंसक गतिविधियों और उपद्रव में लिप्त तत्वों की पहचान हो चुकी है, जिससे अब कानून के अनुसार उन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, विपक्षी राज्यों में भी पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर वहां की सरकारों को घेरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

कहते हैं अधर्म और षड्यंत्र रचने वाली शक्तियों को लगता है कि वे कुछ समय के लिए भ्रम फैला सकती हैं, लेकिन इतिहास साक्षी है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी धर्म की स्थापना के लिए चुनौतियों का सामना किया और अंततः रावण तथा कंस जैसी ताकतों का समूल नाश हुआ।

सनातन संस्कृति और देश को अस्थिर करने वाले अपने ही जाल में उलझकर रह गए हैं। उनका देश को नेपाल और बांग्लादेश बनाने के मंसूबे पर पानी फिर गया है। सत्य और धर्म की राह में सामयिक चुनौतियां अवश्य आती हैं, किंतु जीत राष्ट्रहित की ही होती है। एक बार फिर सिद्ध हो चुका है कि भारत की नीतियां किसी दबाव या षड्यंत्र से तय नहीं होंगी, वे केवल और केवल राष्ट्रहित से ही संचालित होंगी।

पुण्यतिथि विशेष: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन परिचय और महत्वपूर्ण कार्य

A photograph of Dr. A.P.J. Abdul Kalam, a source of inspiration for millions of Indians

APJ Abdul Kalam Memorial Day: प्रतिवर्ष 27 जुलाई भारत के सबसे प्रिय वैज्ञानिक, शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाई जाती है। साल 2015 में इसी दिन वे भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय ह्रदयघात होने से अचानक गिर पड़े और उनका निधन हो गया। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपनी सादगी, दूरदर्शिता और राष्ट्रनिष्ठा से करोड़ों युवाओं के दिलों में सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा जगाई। 

 

उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और उनके विचारों को याद किया जाता है, जो आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

 

संक्षेप में जीवन परिचय

पूरा नाम- अवुल पकीर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम

जन्म- 15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम (तमिलनाडु)

शिक्षा- सेंट जोसेफ्स कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिक विज्ञान तथा मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग।

निधन- 27 जुलाई 2015, शिलांग (मेघालय)

प्रसिद्ध पहचान- 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' एवं 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में।

सर्वोच्च सम्मान- भारत रत्न (1997)।

 

डॉ. कलाम का बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता एक नाविक थे। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए कलाम साहब बचपन में अखबार तक बेचते थे। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वे रक्षा अनुसंधान और अंतरिक्ष क्षेत्र में समर्पित हो गए।

 

महत्वपूर्ण कार्य और योगदान

1. अंतरिक्ष और उपग्रह प्रक्षेपण (ISRO)

SLV-III का सफल परीक्षण: इसरो में प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते हुए कलाम साहब के नेतृत्व में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-III) बना, जिसने 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया।

 

2. 'मिसाइल मैन' और आईजीएमडीपी (DRDO)

डीआरडीओ (DRDO), जिसका पूरा नाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) है, इसमें रहते हुए डॉ. कलाम ने इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) की नींव रखी। इसी कार्यक्रम के तहत भारत को अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइलें मिलीं, जिससे भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना।

 

3. पोखरण-2 परमाणु परीक्षण (1998)

1998 में पोखरण में हुए दूसरे परमाणु परीक्षण में डॉ. कलाम ने मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (Scientific Advisor) की भूमिका निभाई। उनके कुशल नेतृत्व में भारत ने खुद को एक परमाणु-संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

 

4. भारत के 11वें राष्ट्रपति (2002–2007)

2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जनता और विशेष रूप से बच्चों के लिए खोल दिए, जिसके कारण उन्हें 'पीपुल्स प्रेसिडेंट' (जनता का राष्ट्रपति) कहा गया।

 

5. स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान (कलाम-राजू स्टेंट)

उन्होंने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सोमा राजू के साथ मिलकर एक किफायती कोरोनरी स्टेंट विकसित किया, जिसे 'कलाम-राजू स्टेंट' के नाम से जाना जाता है। इसने भारत में हृदय रोगियों के इलाज को बेहद सस्ता बनाया।

 

उनकी प्रमुख पुस्तकें

* उनकी आत्मकथा- विंग्स ऑफ फायर (Wings of Fire)

* इंडिया 2020 (India 2020)

* इग्नाटेड माइंड्स (Ignited Minds)

 

निधन: 27 जुलाई 2015 को IIM शिलांग में छात्रों को संबोधित करते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अंतिम क्षण तक वह काम करते रहे जो उन्हें सबसे प्रिय था, 'शिक्षा देना और छात्रों से संवाद करना'। 

 

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Weather Update : हिमाचल में बादल फटा; असम में 68 मौतें, गुजरात में सेना का रेस्क्यू, IMD का 12 राज्यों में अलर्ट

weather update 27 july : rain, flood, imd alert

असम, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है तो गुजरात में भारी बारिश के कारण भारी तबाही हुई। सेना राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। मौसम विभाग ने अगले 2-3 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ALSO READ: Top News 27 July: संसद में पेपर लीक संशोधन बिल, सोनम वांगचुक होंगे डिस्चार्ज, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

असम में 68 की मौत

असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से अब तक 68 लोगों की मौत हो गई। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को फोन कर हालात की जानकारी ली। सोनोवाल बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य के दौरे पर हैं।

 

गुजरात ने सेना ने संभाली कमान

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद कई इलाकों में भीषण जलभराव की स्थिति बन गई है। विशेष रूप से अहमदाबाद जिले के बावला और सानंद क्षेत्र में जलजमाव के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सेना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 790 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। राज्य में वर्षाजन्य हादसों में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से 29 मौतें वलसाड और नवसारी जिलों में हुई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री के साथ टेलीफोन पर बातचीत कर बारिश के बाद के हालात की विस्तृत समीक्षा की। चर्चा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने और जल निकासी का काम तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। है। 

 

हिमाचल में फटे बादल

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में शनिवार रात बादल फटने से पुल और सड़क बह गई। इससे मयाड़ घाटी के सात गांवों का संपर्क टूट गया। भूस्खलन की वजह से राज्य में करीब 135 सड़कें बंद कर दी गई है। प्रदेश में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड से 15 लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग ने 5 जिलों में 28 से 31 जुलाई के बीच भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है।

 

IMD का 12 राज्यों में अलर्ट

दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भारी बारिश के साथ ही तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

 

ओडिशा में रेड अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र रविवार को और गहरा होकर डिप्रेशन में बदल गया है। अगले 24 घंटे के दौरान इसके और मजबूत होकर उत्तर ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के तटों को पार करने की संभावना है। इसके प्रभाव से 29 जुलाई तक सुंदरगढ़, क्योंझर और मयूरभंज जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।

 

1.25 लाख की डॉक्टर वाली नौकरी छोड़ी, 45 दिनों में कमाए 2 लाख रुपये, डॉ. चारुल सिंह की कहानी हैरान कर देगी

डॉक्टर बनना कई युवाओं का सपना होता है, लेकिन कुछ लोग सफलता की एक तय राह छोड़कर अपनी जिंदगी में नया रास्ता चुनने का साहस दिखाते हैं। डॉ. चारुल सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मेडिकल क्षेत्र में अच्छी पहचान बनाने के बाद उन्होंने अपने करियर को एक अलग दिशा देने का फैसला किया। एक समय अस्पतालों में सेवाएं देने वाली चारुल ने बदलती परिस्थितियों के बीच डिजिटल दुनिया में कदम रखा और यहां भी सफलता हासिल की। उनका सफर सिर्फ करियर बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने, नए अवसर तलाशने और अपने लिए बेहतर संतुलन बनाने की प्रेरणा देता है। पढ़ाई, नौकरी, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने जिस तरह अपने फैसले लिए, वह कई लोगों के लिए सीख बन गया है।

45 दिनों में कमाए पहले ₹2 लाख

डॉ. चारुल ने अपनी डिजिटल यात्रा शुरू करने के सिर्फ 45 दिनों के अंदर ₹2 लाख की कमाई कर ली। हालांकि, उनका यह फैसला सिर्फ पैसे के लिए नहीं था। इसके पीछे कई सालों की पढ़ाई, अस्पताल की लंबी ड्यूटी, मां बनने की जिम्मेदारियां, कानूनी लड़ाई और आर्मी अधिकारी पति के साथ बदलती परिस्थितियों का अनुभव था।

BDS के बाद शुरू हुआ असली संघर्ष

चारुल ने प्राइवेट कॉलेज से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई पूरी की थी। उन्हें उम्मीद थी कि मेडिकल क्षेत्र में कदम रखते ही आर्थिक स्थिरता मिल जाएगी, लेकिन नौकरी की शुरुआत में उन्हें हकीकत का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि इतने सालों की पढ़ाई और परिवार के खर्च के मुकाबले शुरुआती नौकरी में मिलने वाली सैलरी काफी कम थी। यही वह समय था जब उन्होंने अपने करियर को लेकर नए सिरे से सोचना शुरू किया।

परिवार और समाज की उम्मीदों के बीच बनाई अपनी राह

परंपरागत परिवार से आने वाली चारुल पर बड़ी बेटी होने की जिम्मेदारियां भी थीं। उम्र बढ़ने के साथ परिवार में करियर से ज्यादा शादी की बातें होने लगी थीं। लेकिन उन्होंने अपने सपनों को पीछे नहीं छोड़ा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।

दिल्ली के बड़े अस्पतालों में हासिल किया अनुभव

चारुल ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज में नॉन-PG जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सेवाएं दीं। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने NEET-PG परीक्षा पास की और लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री में मास्टर्स किया।

मेहनत का मिला फल, सैलरी पहुंची ₹1.25 लाख तक

अपने मेडिकल करियर में चारुल ने लंबा सफर तय किया। जूनियर रेजिडेंट के तौर पर उनकी शुरुआती सैलरी करीब ₹92 हजार प्रति माह थी। मास्टर्स के दौरान यह लगभग ₹1 लाख तक पहुंच गई और सीनियर रेजिडेंट बनने के बाद उनकी कमाई करीब ₹1.25 लाख प्रति माह हो गई।

शादी, मां बनने और नौकरी के बीच बड़ी चुनौती

मेडिकल करियर आगे बढ़ रहा था, तभी निजी जिंदगी में नई जिम्मेदारियां आईं। चारुल ने एक भारतीय सेना अधिकारी से शादी की। पति की अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग के कारण दोनों को कई शहरों में रहना पड़ा।

मां बनने के दौरान भी उन्होंने अस्पताल की लंबी शिफ्ट पूरी की और नवजात बच्चे की देखभाल के साथ अपनी मेडिकल जिम्मेदारियां निभाईं।

मातृत्व अवकाश के लिए लड़ी कानूनी लड़ाई

सीनियर रेजिडेंसी के दौरान चारुल को बॉन्डेड डॉक्टरों के लिए मैटरनिटी लीव से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कानूनी लड़ाई जीत हासिल की।

इस अनुभव ने उनकी सोच बदल दी। उन्हें एहसास हुआ कि खुद का कुछ बनाना और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना कितना जरूरी है।

मेडिकल करियर से डिजिटल बिजनेस तक का सफर

पति की लगातार आर्मी पोस्टिंग और दूर-दराज इलाकों में रहने की वजह से चारुल के लिए नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस जारी रखना मुश्किल हो गया। इसके बाद उन्होंने करीब छह महीने तक डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिजनेस को समझा।

जून 2025 में उन्होंने अपना डिजिटल वेंचर शुरू किया, जिसकी शुरुआत पर्सनल ब्रांडिंग और स्टोरीटेलिंग से हुई।

अब डॉक्टर से बनीं डिजिटल मेंटर

धीरे-धीरे क्लाइंट मिलने लगे और उनका ऑनलाइन काम बढ़ता गया। चारुल ने बताया कि डिजिटल बिजनेस से उनकी कमाई अब उनकी पुरानी डॉक्टर वाली सैलरी से भी आगे निकल चुकी है।

आज वह Charul’s Inner Circle के जरिए लोगों, खासकर महिलाओं और शुरुआती स्तर के लोगों को डिजिटल स्किल्स और पर्सनल ब्रांडिंग सिखा रही हैं।

महिलाओं को दिया खास संदेश

डॉ. चारुल का मानना है कि मां बनने के बाद महिलाओं के सपने खत्म नहीं होते, बल्कि उनकी सोच और लक्ष्य बदल सकते हैं। उनका कहना है कि अवसरों का इंतजार करने के बजाय खुद के लिए नए रास्ते बनाने चाहिए। उनकी कहानी दिखाती है कि सही समय पर लिया गया बदलाव जिंदगी की नई शुरुआत बन सकता है।

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सब्जी में डालने से पहले फ्रोजन मटर के साथ करें ये काम, हलवाई जैसा आएगा स्वाद!

हरी मटर (Green peas) लगभग हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। विंटर के बाद ज्यादातर लोग फ्रोजन मटर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर इसे सही तरीके से तैयार न किया जाए तो इसका स्वाद, रंग और टेक्सचर काफी हद तक खराब हो सकता है। कुछ आसान स्टेप्स (steps) अपनाकर आप फ्रोजन मटर को भी ताजी (fresh) मटर जैसा स्वादिष्ट बना सकते हैं:

 

Check the Peas (मटर चेक करें)

This may contain: green peas in a glass bowl on a black surface with one pea still attached to the bowl

फ्रीजर से मटर निकालने के बाद उसे एक प्लेट में फैलाकर ध्यान से देखें। अगर कोई दाना बदरंग, सिकुड़ा हुआ, बहुत नरम या खराब नजर आए, तो उसे अलग कर दें। इससे पूरी डिश का स्वाद और क्वालिटी बनी रहती है।

 

 

 

Avoid Direct Cooking (सीधे न पकाएं)

This may contain: a white bowl filled with peas and carrots

कई लोग फ्रोजन मटर को सीधे सब्जी या पुलाव में डाल देते हैं, लेकिन यह तरीका सही नहीं है। बहुत ठंडी मटर पकने के दौरान एक्स्ट्रा पानी छोड़ सकती है, जिससे सब्जी का स्वाद, मसालों का संतुलन और टेक्सचर एफेक्ट हो सकता है।

 

 

 

Blanch First (पहले हल्का उबालें)

This may contain: green beans are sitting on a wooden table

एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें एक चुटकी नमक व आधा छोटा चम्मच चीनी डालें। अब मटर को केवल 1–2 मिनट तक उबालें और तुरंत छान लें। यह तरीका मटर के प्राकृतिक हरे रंग (natural green color), मिठास और मुलायम बनावट को बनाए रखने में मदद करता है।

 

 

Bring to Room Temperature (रूम टेम्परेचर पर लाएं)

This may contain: peas being cooked in a skillet with wooden spoon

फ्रीजर से निकालने के बाद मटर को 10–15 मिनट तक रूम टेम्परेचर पर रखें। चाहें तो इसके बाद 5–10 मिनट के लिए सादे पानी में भिगो दें। इससे मटर समान रूप से पकती है और डिश में एक्स्ट्रा पानी छोड़ने की संभावना कम हो जाती है।

 

 

 

Drain & Use (पानी निकालकर यूज करें)

This may contain: a wooden spoon filled with green peas on top of a table

उबालने या भिगोने के बाद मटर को छलनी या साफ सूती कपड़े पर फैलाकर अच्छी तरह सुखा लें। जब एक्स्ट्रा पानी निकल जाता है, तो मटर मसालों के साथ बेहतर तरीके से पकती है और सब्जी, पुलाव या दूसरे डिश का टेस्ट ताजी मटर जैसा लगता है।

LPG Cylinder Price Today: गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले चेक करें कीमत, 27 जुलाई को ये है LPG का रेट

LPG Cylinder Price Today: सोमवार, 27 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मचे उथल-पुथल के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, आज कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से काफी नीचे आ गई है। आज सुबह 6 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 5.52% की गिरावट के साथ 91.44 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि, इसका असर LPG सिलेंडर की कीमतों पर नहीं पड़ा है। भारत में आज भी 14.2 किलो वाले घरेलू और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं। ऐसे में अगर आप आज LPG सिलेंडर बुक कराने की सोच रहे हैं तो, सबसे पहले आपको अपने शहर का रेट जरूर जानना चाहिए।

चेक करें अपने शहर का रेट

शहरघरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम)कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलोग्राम)
दिल्ली₹942.00₹1,766.00
मुंबई₹941.50₹1,717.00
कोलकाता₹968.00₹1,879.00
चेन्नई₹957.50₹1,929.00
बेंगलुरु₹945.50₹1,837.00
हैदराबाद₹995.50₹1,978.00
जयपुर₹956.50₹1,804.00
लखनऊ₹980.50₹1,910.00
चंडीगढ़₹955.50₹1,786.00
पटना₹1,001.00₹2,018.00

घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में नहीं हुआ बदलाव

देशभर में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम जस के तस बने हुए हैं। हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा करती हैं, लेकिन 27 जुलाई तक घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में कोई नई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की गई है।

कमर्शियल सिलेंडर का क्या है हाल?

1 जुलाई को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों की गई 183.50 रुपये की कटौती के बाद से अभी तक किमतों में बदलाव नहीं हुआ है। जिसका लाभ होटल, रेस्तरां और अन्य व्यवसायिक उपभोक्ताओं को मिल रहा है।

गैस सिलेंडर की कीमतें कैसे तय होती हैं?

एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को तय करने में कई कारकों की अहम भूमिका होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी के दाम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, परिवहन खर्च और सरकार की नीतियां शामिल होती हैं। यही वजह है कि समय-समय पर एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ते या घटते रहते हैं।

कहां चेक करें अपने शहर का रेट?

वैसे अगर आप घर बैठे अपने शहर का सटीक LPG रेट जानना चाहते हैं तो Indane, Bharat Gas या HP Gas की  वेबसाइट पर जाकर लेटेस्ट कीमत देख सकते हैं।

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मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार जीता गोल्ड

meerabai chanu wins gold in common wealth games 2026

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 48 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ भारत के लिए गोल्ड मेडल का खाता खोला बल्कि एक नया इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरा गोल्ड मेडल जीतकर अपनी हैट्रिक पूरी की। 

 

मीराबाई ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है। उन्होंने स्नैच राउंड में 85 किग्रा वजन उठाया। यह वजन कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अब तक किसी भी खिलाड़ी द्वारा उठाया गया सबसे ज्यादा वजन है। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 105 किलो वजन उठाया।  

 

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने रविवार को भारत को दिलाया पहला गोल्ड जीता तो भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी और ऋषिकांत सिंह भी रजत पदक जीतने में सफल रहे। भारत के जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रेहमान को पुरुष 55 किग्रा के राउंड ऑफ 16 में हराया।

 

पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि भारतीय भारोत्तोलन में एक और गौरवशाली अध्याय!

प्रतिभाशाली मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार स्वर्ण पदक जीतने और अपने नाम कुल चार पदक करने वाली मीराबाई हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। उन्हें ढेरों बधाई! आगे के सभी प्रयासों के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

मीरबाई चानू ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत चुकी है।