Mumbai Landslide: मुंबई के घाटकोपर में लैंडस्लाइड! चॉल पर गिरा मलबा, हादसे में 5 की मौत

Mumbai Ghatkopar Landslide: मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार तड़के भूस्खलन के कारण एक चॉल पर पहाड़ का हिस्सा गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में करीब 5 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। वहीं, इस घटना के बाद कई एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया है।

बता दें कि यह भूस्खलन सुबह करीब 3:48 बजे कुर्ला के चिराग नगर में राठौड़ मेडिकल के पास स्थित गौसिया चॉल में हुआ। बताया जा रहा है कि पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक नीचे ढह गया, और इसका मलबा पास की चॉल के दो से तीन कमरों पर जा गिरा।

हालांकि, मलबे से दो लोगों को बाहर निकाला गया, जिनकी पहचान 28 वर्षीय साहिल अंसारी और 14 वर्षीय मोहम्मद समीर के रूप में हुई है। उन्हें राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शुरुआत में खबर थी कि मलबे में 3 से 4 लोग फंसे हो सकते हैं, लेकिन बाद में स्थानीय लोगों ने बताया कि 6 से 8 लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।

वहीं, मुंबई फायर ब्रिगेड ने सुबह करीब 4:32 बजे इस घटना को लेवल-2 इमरजेंसी घोषित किया और तुरंत राहत-बचाव अभियान शुरू कर दिया। फिलहाल करीब 50 BMC कर्मचारी और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें मिलकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार, मलबे को हटाने और उसके नीचे फंसे लोगों को खोजने के लिए खास बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

DCP ने दी जानकारी

DCP गणेश शिंदे ने बताया कि अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और बचाव अभियान अभी भी जारी है।

अधिकारी ने कहा, “बारिश के कारण घाटकोपर पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अशोकनगर इलाके में भूस्खलन हुआ है। अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और बचाव अभियान चल रहा है।”

इस घटना में घायल हुए दो अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर है। इनकी पहचान 18 वर्षीय सोहेल अंसारी (सिर में चोट) और 14 वर्षीय मोहम्मद अंसारी (पीठ में चोट) के तौर पर हुई है।

राहत और बचाव कार्य जारी

DCP शिंदे ने कहा, “बचाव कार्य जारी है और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें व स्थानीय अधिकारी घटनास्थल पर लगातार कोशिशें कर रहे हैं। हालांकि अभी सही संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी तीन से चार लोग फंसे हो सकते हैं।”

बता दें कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के शवों को आगे की प्रक्रिया के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में कानूनी कार्रवाई और जांच आगे जारी रहेगी।

वहीं, मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस और NDRF की टीमें घटनास्थल पर तैनात की गई हैं, जबकि BMC के वार्ड कर्मचारी और अन्य इमरजेंसी कर्मी बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं।

BMC मेयर ने किया घटनास्थल का दौरा

BMC की मेयर रितु तावड़े और एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (ईस्टर्न सबर्ब्स) अविनाश ढकने ने भी हालात का जायजा लेने के लिए घाटकोपर में प्रभावित जगह का दौरा किया।

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IND vs AFG: दिल्ली में होगी चौकों-छक्कों की बारिश, खेलते दिखेंगे वैभव सूर्यवंशी! अफगानिस्तान सीरीज का आ गया शेड्यूल

भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाले तीन मैचों की टी20 सीरीज का शेड्यूल जारी हो गया है। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम सितंबर में भारत के दौरे पर आएगी। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुताबिक, सीरीज के मुकाबले 13 सितंबर से 17 सितंबर को नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होंगे। ACB ने बताया कि इन तारीखों को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की भी मंजूरी मिल चुकी है। वहीं इस सीरीज में भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक्शन में दिखाई दे सकते हैं। हाल ही में हुए जिम्बाब्वे दौरे पर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने तूफानी पारी खेली थी।

क्रिकबज की एक रिपोर्ट के अनुसार, ACB के CEO नसीब खान ने बोर्ड के कमर्शियल पार्टनर्स को भेजे एक लेटर में लिखा, “ACB ये कन्फर्म करता है कि भारत का अफ़गानिस्तान टूर 2026, 13 सितंबर से 17 सितंबर तक होने वाला है। ACB यह भी कन्फर्म करता है कि इवेंट की तारीखें BCCI के साथ कन्फर्म और सहमत हो गई हैं और तय मैचों की जगहें भी फाइनल हो गई हैं।”

इन शहरों के स्टेडियम का करती है इस्तेमाल अफगानिस्तान

अफगानिस्तान की टीम पिछले कुछ समय से भारत के अलग-अलग शहरों को अपने घरेलू मुकाबलों के लिए इस्तेमाल करती रही है। उसने लखनऊ, देहरादून और ग्रेटर नोएडा में अपने मैच खेले हैं, लेकिन अब तक भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज का मुकाबला नहीं हुआ है। ऐसे में भारत की जमीन पर होने वाली यह टी20 सीरीज दोनों टीमों के लिए खास मानी जा रही है। ACB ने तारीखों की पुष्टि तो कर दी लेकिन साथ ही बोर्ड ने साफ किया कि संबंधित अधिकारियों की ओर से सीरीज का सार्वजनिक आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है।

बांग्लादेश दौरे की संभावना कम

अफगानिस्तान के भारत दौरे की पुष्टि के बाद अब बांग्लादेश के खिलाफ उसकी सीरीज होने की संभावना काफी कम हो गई है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 1 से 13 सितंबर के बीच छह वनडे और टी20 मुकाबलों के लिए समय तय किया था, लेकिन अफगानिस्तान के भारत दौरे की तारीखें इससे टकरा रही हैं। ऐसे में अफगानिस्तान का बांग्लादेश दौरा फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। BCB की प्रस्तावित तारीखों में अब तीन हफ्ते से भी कम समय बचा है और ऐसे में बांग्लादेश सीरीज होने की संभावना लगभग खत्म होती दिख रही है। अगर सरकारों की ओर से आखिरी समय में कोई अलग फैसला या निर्देश आता है, तो स्थिति बदल सकती है।

ब्रॉडकास्ट राइट्स को लेकर हलचल

क्रिकबज की एक रिपोर्ट के अनुसार, ITW यूनिवर्स, जिसके पास इस सीरीज के मीडिया राइट्स हैं, तीन मैचों के लीनियर राइट्स को लेकर JioStar, Sony Sports और Zee Unite8 के साथ बातचीत कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार तक ब्रॉडकास्टर के नाम पर फैसला होने की उम्मीद है। वहीं, सीरीज के डिजिटल राइट्स FanCode के पास हैं।

Video: यूपी में सड़क के लिए DM ऑफिस पहुंच गए Gen Alpha बच्चे, हमीरपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मांगने लगे जवाब

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से जनरेशन अल्फा को लेकर एक अनोखी खबर आ रही है। हमीरपुर में मंगलवार को स्कूली बच्चों ने अपने स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बच्चों का एक समूह अपने माता-पिता के साथ स्कूल से निकलकर डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस पहुंचा। हाथों में तिरंगा लेकर बच्चों (जनरेशन अल्फा) ने नारे लगाए और गांव से स्कूल तक जाने वाली खराब सड़क को जल्द ठीक कराने की मांग की। छात्रों ने कहा कि, सड़क की खराब हालत के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है। वहीं बारिश के दिनों में वहां से गुजरना और भी मुश्किल हो जाता है।

बच्चों के इस प्रदर्शन से डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन भी हैरान रह गया। बड़ी संख्या में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों से सड़क की समस्या को जल्द दूर करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल बच्चे हमीरपुर के कुरारा ब्लॉक की चंदूपुर ग्राम पंचायत के अलग-अलग गांवों और बस्तियों से आए थे।

आने-जाने में होती है दिक्कत

छात्रों और उनके माता-पिता का कहा कि, इस इलाके में करीब 3,000 लोग रहते हैं और यहां आने-जाने के लिए कच्ची सड़क ही मुख्य रास्ता है। तेज बारिश होने पर यह सड़क कीचड़ से भर जाती है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। इतना ही नहीं, किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। छात्रों का आरोप है कि पहले आने-जाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक दूसरा रास्ता वन विभाग ने बंद कर दिया है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

 

पहले भी किया है प्रदर्शन

सड़क की समस्या को लेकर बच्चों ने पहले भी आवाज उठाई थी। छात्रों ने 3 जुलाई को भी सड़क को लेकर प्रदर्शन किया था। तब मिट्टी डालकर रास्ता ठीक किया गया, लेकिन बारिश में सड़क फिर खराब हो गई। स्थायी समाधान न मिलने पर छात्र डीएम कार्यालय पहुंच गए। बच्चे तिरंगा और बैनर लेकर जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे तो प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने बच्चों को आगे जाने से रोकने की कोशिश की।

पुलिस ने की छात्रों को रोकने की कोशिश

सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार और सर्कल ऑफिसर यशपाल सिंह पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे और छात्रों से बातचीत करने की कोशिश की। लेकिन अपनी मांग को लेकर छात्र पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए और डीएम कार्यालय की ओर आगे बढ़ते रहे। पुलिस और एडमिनिस्ट्रेटिव की टीम ने छात्रों को कलेक्ट्रेट के गेट पर रोक दिया, जिसके बाद बच्चे वहीं बैठकर प्रदर्शन करने लगे। कुछ देर तक छात्रों ने नारे लगाते हुए अपने गांव से स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की मांग की। छात्रों ने साफ कहा कि जब तक सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में भी छात्रों ने इसी तरह सड़क की समस्या को लेकर प्रदर्शन किया था। उनके विरोध के बाद प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान दिया था।

El Nino impact: मजबूत हो रहा अल नीनो! अगले 2 हफ्तों में मानसून को लेकर सामने आई टेंशन वाली बात, इन चीजों को लेकर रिस्क बढ़ा

Monsoon & El Nino update: भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मौसम विभाग (IMD) के दो वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, मजबूत हो रहे अल नीनो (El Nino) के असर की वजह से अगले दो हफ्तों के दौरान देश के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में औसतन से कम बारिश होने की संभावना है। ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक मानसून में आने वाली इस सुस्ती और शुष्क मौसम के लंबे खिंचने से हाल ही में बोई गई कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों (दलहन) की फसलों पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

मानसून में कमी से सिंचाई और कृषि आजीविका पर बड़ा असर

भारत में वार्षिक वर्षा का करीब 70 फीसदी हिस्सा मानसूनी बारिश से ही आता है। ये देश के महत्वपूर्ण जल स्रोतों को रीचार्ज करने के लिए बेहद जरूरी है। भारत में कृषि भूमि का लगभग आधा हिस्सा आज भी सिंचाई सुविधाओं से वंचित है और देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है।

न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IMD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगले दो हफ्तों के दौरान देश के कुछ पूर्वी और उत्तरी राज्यों को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसदौरान देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में बारिश की कमी काफी महत्वपूर्ण या गंभीर हो सकती है।

1 जून से अब तक 12 प्रतिशत कम हुई बारिश और बढ़ा तापमान का खतरा

चालू मानसून सीजन में 1 जून से लेकर अब तक भारत में औसत से 12 फीसदी कम बारिश हुई है। देश के कुछ राज्यों में स्थिति और भी चिंताजनक है। उदाहरण के लिए दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी का आंकड़ा 34 फीसदी तक पहुंच गया है।

मौसम विभाग के एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि मजबूत होते अल नीनो की वजह से आने वाले हफ्तों में बारिश और कम होगी। इससे महीने के अंत तक बारिश की कमी का यह अंतर और अधिक बढ़ सकता है। इसके साथ ही आने वाले सप्ताहों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी होने और इसके सामान्य से ऊपर बने रहने की संभावना जताई गई है।

नई बोई गई सोयाबीन, कपास और मक्का की फसलों पर मंडराया जोखिम

जुलाई महीने में हुई सामान्य के करीब बारिश की वजह से मिट्टी में नमी बढ़ गई थी। इसके बाद किसानों ने सोयाबीन, कपास, मक्का, दालें और धान जैसी खरीफ की फसलों की बुवाई में तेजी दिखाई थी। मुंबई बेस्ड एक ग्लोबल ट्रेड हाउस के डीलर के मुताबिक नई बोई गई इन फसलों की जड़ें अभी तक मिट्टी में गहराई तक नहीं पहुंची हैं। ऐसी स्थिति में, बारिश के बिना लंबा शुष्क दौर चलने से ये फसलें बेहद संवेदनशील हो जाती हैं और इन्हें भारी नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ जाता है।

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कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 7 अगस्त तक किसानों ने 96.8 मिलियन (9.68 करोड़) हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई कर ली थी। ये एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में करीब 2 प्रतिशत कम है। अब अल नीनो के मजबूत होने और मानसून के कमजोर पड़ने से इन फसलों के उत्पादन को लेकर जोखिम काफी बढ़ गया है।

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IMD Alert: देशभर में बारिश ने इस वक्त प्रचंड रफ्तार पकड़ रखी है। इस बीत मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 अगस्त को भी कई राज्यों में बारिश का कड़ा मिजाज देखने को मिलेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी वेदर बुलेटिन के मुताबिक बुधवार को देश के करीब 20 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, मध्य महाराष्ट्र और पूर्वी राजस्थान में मूसलाधार बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया है। वहीं उत्तर भारत के पहाड़ी व मैदानी इलाकों से लेकर पूर्वोत्तर और तटीय राज्यों तक बादलों का जमकर बरसना तय माना जा रहा है।

ओडिशा, बंगाल, महाराष्ट्र और पूर्वी राजस्थान में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 अगस्त को चार प्रमुख राज्यों में मूसलाधार बारिश का बड़ा असर देखने को मिलेगा। ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, मध्य महाराष्ट्र और पूर्वी राजस्थान के अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी/घाटी वाले क्षेत्रों में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन ने इन इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

उत्तर भारत, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर समेत 20 राज्यों में भारी बारिश

मूसलाधार बारिश वाले राज्यों के अलावा देश के कई दूसरे हिस्सों में भी भारी बारिश देखने को मिलेगी। उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बालटिस्तान-मुज़फ्फराबाद और पश्चिमी राजस्थान में तेज बारिश होने का अनुमान है। इसी तरह पश्चिमी और मध्य भारत के पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात क्षेत्र और कोंकण व गोवा में भी मूसलाधार बारिश का जोर रहेगा।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके साथ ही अंडमान व निकोबार द्वीप समूह और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

तूफानी हवाएं, आंधी और आकाशीय बिजली का खतरा

12 अगस्त को बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने का गंभीर खतरा बना रहेगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग अलग जगहों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।

वहीं आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं और बिजली चमकने का अनुमान है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और बिजली कड़केगी। अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा और उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में भी गरज-चमक और बिजली गिरने का अंदेशा जताया गया है।

तटीय क्षेत्रों में तेज सतही हवाएं और अरब सागर में अलर्ट

मैदानी और तटीय राज्यों में मौसमी हलचल बनी रहेगी। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के अलग-अलग इलाकों में दिन के समय तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। समुद्री सुरक्षा के लिहाज से मौसम विभाग ने अरब सागर के लिए भी चेतावनी जारी की है।

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अरब सागर में सोमालिया और ओमान तट के पास व उससे सटे क्षेत्र, पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश भागों, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और उत्तर-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के झोंके 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न जाने की हिदायत दी है।

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क्या भारत की Agni-6 मिसाइल धरती के किसी भी कोने तक पहुंच सकती है? समझिए ICBM की पूरी साइंस

Agni-6: भारत के अग्नि मिसाइल प्रोग्राम में अग्नि-6 को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसे भारत की भविष्य की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में देखा जाता है। सबसे ज्यादा चर्चा इसकी संभावित मारक क्षमता को लेकर है। कहा जा रहा है कि इस नई मिसाइल की रेंज बहुत ज्यादा हो सकती है। लेकिन यह हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? कई रिपोर्टों में अग्नि-6 की संभावित रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि इसकी फाइनल ऑपरेशनल रेंज को लेकर अभी आधिकारिक और डिटेल्स जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल यह है कि कोई मिसाइल आखिर हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? इसके पीछे रॉकेट प्रोपल्शन, मल्टी-स्टेज रॉकेट तकनीक, बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी, गाइडेंस सिस्टम और सबसे मुश्किल चरणों में से एक वायुमंडल में री-एंट्री का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

Agni-6 मिसाइल क्या है?

अग्नि-6 को भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाता है। इसे भविष्य की ICBM क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की कई तकनीकी जानकारियां अभी सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं हैं। कहा जाता है कि Agni-6 एक ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) है जिसे भारत भविष्य में विकसित करेगा। इसमें भारत की Agni मिसाइलों की रिसर्च के दौरान विकसित की गई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत ने अग्नि मिसाइल परिवार के अलग-अलग वर्जन के विकास के दौरान रॉकेट, गाइडेंस, नेविगेशन, एयरोडायनामिक्स, कंट्रोल सिस्टम और हाई-टेम्परेचर मटेरियल जैसी टेक्नोलॉजी में लगातार प्रगति की है। इन्हीं क्षेत्रों में हासिल विशेषज्ञता किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Agni-6 को कैसे विकसित किया गया?

Agni सीरीज में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी में DRDO और भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री की कोशिशों से कई दशकों से लगातार सुधार हो रहा है। इसके लिए सॉलिड रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस, मटीरियल साइंस, एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल सिस्टम में बहुत ज्यादा महारत की जरूरत होती है। इन टेक्नोलॉजीज़ में स्पेस इंजीनियरिंग से काफी समानताएं हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है।

हजारों किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचती है बैलिस्टिक मिसाइल?

बैलिस्टिक मिसाइल का काम सामान्य विमान की तरह लगातार इंजन चलाकर पूरी दूरी तय करना नहीं होता। इसका एक बड़ा हिस्सा बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के आधार पर तय होता है। मिसाइल के शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन उसे तेज गति प्रदान करते हैं। ये काफी ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। जब उसका पावर्ड फ्लाइट चरण पूरा हो जाता है, तो वाहन गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक निर्धारित घुमावदार पथ पर आगे बढ़ता है। यानी शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन मुख्य भूमिका निभाते हैं। जबकि उसके बाद गति, गुरुत्वाकर्षण और निर्धारित रूट्स के आधार पर मिसाइल बहुत लंबी दूरी तय कर सकती है।

Agni-6 धरती पर कहीं भी उड़ सकती है?

अग्नि-6 को लेकर कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि यह धरती के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हो सकती है। इसका अर्थ तकनीकी तौर पर यह नहीं है कि मिसाइल सचमुच पृथ्वी के हर स्थान पर पहुंच सकती है। जब कहा जाता है कि Agni-6 “धरती पर कहीं भी” उड़ सकती है, तो इसका मतलब है कि इसमें बहुत दूर तक उड़ने की क्षमता है।

दरअसल, कोई भी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की जगह, ट्रेजेक्टरी और पेलोड के आधार पर इतनी दूर तक नहीं उड़ सकती। इस टेक्नोलॉजी के पीछे की फिजिक्स काफी आसान है। जब बैलिस्टिक व्हीकल अपनी पावर्ड फ्लाइट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है, तो वह ग्रेविटी के असर से आर्क ट्रेजेक्टरी (घुमावदार रास्ते) पर उड़ता है।

टेस्ट के लिए कई रॉकेट स्टेज का इस्तेमाल 

मल्टी-स्टेजिंग एक आसान आइडिया पर आधारित है। बिना इस्तेमाल वाले हिस्से को अलग करके व्हीकल का वजन कम करना। हर रॉकेट स्टेज में व्हीकल के फ्यूल टैंक और इंजन होते हैं। जब फ्यूल खत्म हो जाता है, तो उसे अलग किया जा सकता है। बाकी बचा रॉकेट हल्का हो जाएगा और ज्यादा स्पीड पकड़ सकेगा। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की वास्तविक पहुंच कई कारकों पर निर्भर करती है।

इनमें लॉन्च लोकेशन, प्रक्षेपवक्र, पेलोड और मिसाइल की वास्तविक क्षमता शामिल हैं। इसलिए ‘कहीं भी पहुंचने’ जैसी भाषा आमतौर पर इसकी अत्यधिक लंबी दूरी की क्षमता को दर्शाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। अग्नि-6 की वास्तविक रेंज और ऑपरेशनल क्षमता को लेकर आधिकारिक तौर पर जितनी जानकारी उपलब्ध है, उससे आगे के दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

मल्टी-स्टेज रॉकेट टेक्नोलॉजी क्यों है अहम?

लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम में मल्टी-स्टेजिंग एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसका मूल सिद्धांत काफी सरल है। इस हिस्से का ईंधन खत्म हो गया है। उसे अलग कर दिया जाए ताकि बाकी वाहन का वजन कम हो सके। जब किसी चरण का ईंधन खत्म हो जाता है, तो उस खाली चरण को अलग किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ रहे वाहन का वजन कम होता है। उपलब्ध ऊर्जा का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम में मल्टी-स्टेज डिजाइन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

अग्नि परिवार के विकास में DRDO की भूमिका

भारत के अग्नि मिसाइल परिवार का विकास कई दशकों में हुआ है। इसमें DRDO और भारतीय एयरोस्पेस एवं डिफेंस उद्योग से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने गाइडेंस, नियंत्रण, संरचनात्मक डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में काम किया है।

लंबी दूरी की मिसाइल तैयार करने के लिए केवल शक्तिशाली इंजन पर्याप्त नहीं होता। उसे सही दिशा में बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना, उड़ान के दौरान उसकी स्थिति निर्धारित करना और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके ढांचे को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। इनमें से कई तकनीकी क्षेत्र अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली इंजीनियरिंग से जुड़े हैं।

धरती पर Agni-6 की री-एंट्री के समय क्या होता है?

तेज रफ्तार वाली उड़ान में ‘री-एंट्री’ (वापसी) को सबसे मुश्किल चरणों में से एक माना जाता है। जैसे ही यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, उसे लगातार ज्यादा घनी हवा का सामना करना पड़ता है। रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ, हवा के घर्षण और दबाव से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है। इसका मतलब है कि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा एंट्री करने के दौरान होने वाली कठोर स्थितियों को झेलने के लिए यान को खास तरह की सामग्रियों की जरूरत होती है। किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के लिए वायुमंडल में दोबारा प्रवेश यानी री-एंट्री बेहद चुनौतीपूर्ण चरण होता है।

सिर्फ लंबी दूरी ही नहीं, सटीकता भी जरूरी

किसी ICBM की क्षमता का आकलन केवल उसकी रेंज से नहीं किया जाता। लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ उसे निर्धारित रूट्स पर बनाए रखना और लक्ष्य क्षेत्र तक आवश्यक सटीकता के साथ पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं। मिसाइल की उड़ान के दौरान उसका रूट कंट्रोल करने और आवश्यक सुधार करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है।

अग्नि-6 को लेकर बड़ी बातें

अग्नि-6 को भारत की भविष्य की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से जोड़ा जाता है। लेकिन इसकी सटीक रेंज, अंतिम डिजाइन, तैनाती और अन्य ऑपरेशनल क्षमताओं को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है। 8,000 से 12,000 किलोमीटर जैसी रेंज का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है। लेकिन इसे अग्नि-6 की आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम ऑपरेशनल रेंज मानना उचित नहीं होगा।

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कुल मिलाकर, अग्नि-6 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल की क्षमता के पीछे केवल एक शक्तिशाली रॉकेट नहीं। बल्कि मल्टी-स्टेज प्रोपल्शन, बैलिस्टिक उड़ान, गाइडेंस एवं कंट्रोल, एयरोडायनामिक्स और हाई-स्पीड री-एंट्री तकनीक जैसी कई जटिल तकनीकों का संयोजन होता है। यही तकनीकें किसी मिसाइल को हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम बनाती हैं।

Delhi Weather Today: दिल्ली में आज फिर होगी झमाझम बारिश, IMD ने जारी किया येलो अलर्ट, जानें पूरा अपडेट

Delhi Weather Today: मंगलवार (11 अगस्त) को दिल्ली में आसमान में बादल छाए रहे और हल्की बारिश हुई। इस दौरान राजधानी की हवा लगातार 10वें दिन संतोषजनक श्रेणी में रही। वहीं, दिल्ली में अगस्त महीने की बारिश का आंकड़ा भी अब महीने की औसत बारिश से ज्यादा हो गया है। यह जानकारी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दी है।

IMD के मुताबिक, दिल्ली में अगस्त के पहले 10 दिनों में (सोमवार सुबह 8.30 बजे तक) 230.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच 4 मिमी और बारिश हुई, जिससे महीने की कुल बारिश 234.5 मिमी हो गई — जो 233.1 मिमी के मासिक औसत से पहले ही ज्यादा है।

दिल्ली में आज का मौसम: येलो अलर्ट, और बारिश की संभावना

IMD ने मंगलवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। अनुमान है कि आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और ज्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी, जबकि कुछ जगहों पर मध्यम बारिश हो सकती है। जिस वजह से सुबह के समय तापमान 23°C से 25°C के बीच रहने की संभावना है, जबकि अधिकतम तापमान 33°C से 35°C के आसपास रह सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार, सुबह से दोपहर तक मध्यम बारिश भी हो सकती है, और उसके बाद शाम और रात के समय बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है।

दिल्लीवासियों को बारिश के दौरान सड़कों पर फिसलन और निचले इलाकों में जलभराव जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर तेज बारिश के समय कुछ जगहों पर पानी जमा हो सकता है। ऐसे में घर से निकलने से पहले लोग ट्रैफिक की स्थिति जरूर चेक कर लें, ताकि रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो।

मयूर विहार में सबसे ज्यादा बारिश

IMD के अनुसार, सोमवार को मयूर विहार में सबसे ज्यादा 37mm बारिश दर्ज की गई। इसके बाद मुंगेशपुर में 21mm, पूसा में 4mm और नारायणा में 3mm बारिश हुई।

शहर के मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग में सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच 4mm बारिश दर्ज की गई। लोधी रोड पर 4.8mm बारिश हुई, जबकि रिज में 6.8mm बारिश दर्ज की गई। पालम में बहुत कम (ट्रेस) बारिश हुई और अयानगर में इस दौरान कोई बारिश नहीं हुई।

वहीं, सफदरजंग में अधिकतम तापमान 35.4°C रहा, जो सामान्य से 1.2 डिग्री ज्यादा है, जबकि न्यूनतम तापमान 27.6°C रहा, जो सामान्य से 0.6 डिग्री ज्यादा है।

दिल्ली में लगातार 10वें दिन AQI संतोषजनक रहा

सोमवार शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 89 दर्ज किया गया, जिससे शहर की हवा की गुणवत्ता लगातार 10वें दिन संतोषजनक श्रेणी में बनी रही। इसके अलावा, शहर में अगस्त के हर दिन हवा की गुणवत्ता संतोषजनक रही है। ऐसा पैटर्न पिछली बार अगस्त 2024 के शुरुआती 10 दिनों में देखा गया था।

CPCB के अनुसार, 51 से 100 के बीच का AQI संतोषजनक माना जाता है। लगातार बारिश से उमस से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि तेज बारिश से राजधानी में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है।

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Delhi-NCR Rain Alert: IMD ने दिल्ली-NCR में जारी किया रेड अलर्ट, यूपी-हरियाणा में भी आंधी-तूफान की चेतावनी

Delhi-NCR Rain Alert: दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में मौसम ने एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाकों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। वहीं IMD ने सोमवार को दिल्ली के 11 जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, कुछ जगहों पर एक घंटे में 15 मिमी से ज्यादा बारिश हो सकती है और हवाओं की रफ्तार करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

मौसम विभाग के मुताबिक, मंगलवार 11 अगस्त को भी दिल्ली में बारिश होने की संभावना है। ऐसे में लोगों को बाहर निकलते समय सावधानी बरतने और बारिश से बचने के लिए जरूरी सामान साथ रखने की सलाह दी गई है।

इन इलाकों में है रेड अलर्ट

मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार, दिल्ली के सभी 11 जिलों में आज रेड वॉर्निंग जारी की गई है। इसमें सेंट्रल दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, नई दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली, शाहदरा, साउथ दिल्ली, साउथ-ईस्ट दिल्ली, साउथ-वेस्ट दिल्ली और वेस्ट दिल्ली शामिल हैं। मौसम खराब होने की आशंका को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। खासतौर पर तेज बारिश और आंधी-तूफान के दौरान घर से बाहर निकलने से बचने और सुरक्षित जगह पर रहने की सलाह दी गई है।

यूपी में भी जारी किया अलर्ट

उत्तर प्रदेश में भी मौसम को लेकर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद समेत राज्य के कई इलाकों में मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक, 11 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान आने की संभावना है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं हरियाणा के कई जिलों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने सोनीपत, पानीपत और करनाल समेत कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

क्या होता है रेड अलर्ट

मौसम विभाग का रेड अलर्ट सबसे बड़ी मौसम चेतावनी होती है। इसका मतलब है कि मौसम बहुत खराब हो सकता है और इसका असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। तेज आंधी, भारी बारिश और बिजली गिरने जैसी स्थिति में लोगों को सावधान रहना चाहिए। साथ ही, मौसम विभाग और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

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Weather Alert: अगले सात दिन नहीं थमेगी बारिश! दिल्ली-UP समेत 20+ राज्यों में अलर्ट, इन दो राज्यों में भारी बारिश का खतरा

देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले सात दिनों यानी 10 से 16 अगस्त तक कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। खास तौर पर पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 10 अगस्त को मौसम ज्यादा खराब रहने की आशंका है।

राजस्थान और मध्य प्रदेश में भारी बारिश का खतरा

IMD के मुताबिक, 10 अगस्त को पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश भी हो सकती है। इसके अलावा गुजरात, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पहले ही तेज बारिश हो चुकी है। बीते 24 घंटे में पश्चिमी मध्य प्रदेश के श्यामपुर में 21 सेंटीमीटर, भोपाल के नवीबाग में 20 सेंटीमीटर और राजगढ़ के सारंगपुर में 19 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। पूर्वी मध्य प्रदेश के मोहगांव में 19 सेंटीमीटर और सिहोरा में 16 सेंटीमीटर बारिश हुई।

11 अगस्त को भी कई राज्यों में बारिश

11 अगस्त को पूर्वी राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश का अनुमान है। कई राज्यों में गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है।

12 अगस्त से ओडिशा पर ज्यादा असर

12 अगस्त को ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। 13 और 14 अगस्त को भी ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है।

15 और 16 अगस्त तक बारिश से राहत नहीं

IMD के सात दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक, 15 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी भारी बारिश की संभावना है। 16 अगस्त को भी अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। बिहार, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है।

दिल्ली-UP समेत इन राज्यों में भी बारिश

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 10-11 अगस्त और 13 अगस्त को कई जगहों पर बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 अगस्त को बारिश का दौर बढ़ सकता है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 और 14-15 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13 से 15 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

फ्लैश फ्लड का भी खतरा

तेज बारिश के कारण कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। 11 अगस्त की सुबह तक पूर्वी राजस्थान के बारां, बूंदी, झालावाड़ और कोटा तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश के अगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी जिलों में कम से मध्यम फ्लैश फ्लड का जोखिम बताया गया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन तथा उत्तराखंड के कई जिलों में भी कम से मध्यम फ्लैश फ्लड का खतरा है। निचले इलाकों में जलभराव और पानी भरने की स्थिति बन सकती है।

बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली का खतरा

कई राज्यों में बारिश के साथ आंधी, बिजली और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। 10 अगस्त को कुछ इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं अंडमान-निकोबार में कुछ जगहों पर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं के साथ थंडरस्क्वॉल की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। तेज बारिश और बिजली चमकने के समय खुले इलाकों में जाने से बचें और पेड़ों के नीचे खड़े न हों। भारी बारिश के कारण जलभराव, बाढ़, भूस्खलन, सड़क और रेल यातायात में परेशानी जैसी स्थिति भी बन सकती है।

कल का मौसम: दिल्ली-NCR समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, हिमाचल में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी, IMD ने बताया मौसम का हाल

Weather Update 11 August: देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। दिल्ली-NCR, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, उत्तराखंड में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR की बात करें तो यहां अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर हल्की बारिश होने की आशंका है। हालांकि, बारिश के बावजूद उमस से राहत पूरी तरह मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है।

दिल्ली-NCR में कल कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में, 13, 14 और 15 अगस्त को कई इलाकों में हल्की से बहुत हल्की बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। 14 अगस्त को पश्चिमी हवाएं भी चल सकती हैं। जबकि 15 अगस्त को उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव रहने का अनुमान है।

IMD के मुताबिक, पूरे सप्ताह दिल्ली में मौसम मुख्य रूप से बादल छाए रहने वाला रहेगा। इस दौरान बीच-बीच में हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, इन बारिश की बौछारों से उमस में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले सात दिनों के दौरान दिल्ली के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ऐसे में बारिश के बीच भी गर्म और उमस भरा मौसम लोगों को परेशान कर सकता है।

उत्तराखंड में अधिकांश जगह बारिश और गरज-चमक

उत्तराखंड में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता लगातार बनी रह सकती है। वहीं, मैदानी जिलों हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में बारिश कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित रहने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर फिसलन, जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।

तमिलनाडु में इन इलाकों में होगी मूसलाधार बारिश

तमिलनाडु के मौसम पर उत्तर तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र के ऊपर बने वायुमंडलीय परिसंचरण का असर पड़ने की आशंका है। 12 और 13 अगस्त को पश्चिमी घाट से लगे इलाकों और उत्तरी तटीय जिलों में बारिश की गतिविधियां ज्यादा सक्रिय रह सकती हैं। इन क्षेत्रों में मध्यम बारिश होने की संभावना है। नमी से भरी हवाओं और मौजूदा वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण बारिश वाले बादल बनने के लिए अनुकूल स्थिति रह सकती है।

तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में भी कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है। हालांकि, बारिश की तीव्रता अलग-अलग इलाकों में अलग रह सकता है। दूसरी ओर, राज्य के उत्तरी आंतरिक हिस्सों में बारिश के बावजूद गर्मी बनी रह सकती है। यहां 13 अगस्त तक अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने की संभावना है।

राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

राजस्थान में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश का दौर तेज रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। राज्य में बारिश की गतिविधियां 13 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। इसके बाद पश्चिमी राजस्थान में 14 अगस्त से मौसम में सुधार शुरू हो सकता है, जबकि पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में 15 अगस्त से कमी आने का अनुमान है।

उत्तर-पूर्वी राजस्थान में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय

मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके प्रभाव से 11 अगस्त को दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश भी होने की संभावना है। इसके बाद 13 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। 14 अगस्त से पश्चिमी राजस्थान में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क होने की संभावना है, जबकि पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधि 15 अगस्त से कमजोर पड़ सकती है।

हिमाचल प्रदेश में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को राज्य के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। खास तौर पर कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

IMD ने राज्य में बारिश का दौर 15 अगस्त तक जारी रहने का पूर्वानुमान लगाया है। पहाड़ी राज्य में लगातार बारिश के कारण कुछ इलाकों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने, नदियों-नालों के जलस्तर बढ़ने और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

उत्तर और दक्षिण भारत में मानसून सक्रिय

IMD के ताजा पूर्वानुमान से साफ है कि देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां फिलहाल सक्रिय बनी हुई हैं। उत्तर भारत में उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश, जबकि दक्षिण भारत में तमिलनाडु के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की आशंका है। वहीं, दिल्ली में लगातार बारिश भले ही तापमान को कुछ हद तक कंट्रोल कर रही हो। लेकिन उमस और अपेक्षाकृत अधिक तापमान के कारण लोगों को पूरी तरह आराम मिलने की उम्मीद नहीं है।

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