Market Mantra : कोटक AMC की शिबानी कुरियन से जानें, शेयर बाजार के इस रोलर कोस्टर राइड में कहां बनेगा पैसा

Market Mantra : शेयर बाजार इस समय जोरदार रोलर कोस्टर राइड में हैं। ग्लोबल अनिश्चितता,तिमाही नतीजों और बाजार के वैल्यूएशन निवेश की रणनीति पर बड़ा असर डाल रहे हैं। ऐसे में दिग्गज फंड मैनेजर क्या नजरिया लेकर चल रहे हैं, अब आगे बाजार की दिशा क्या होगी? इन सब बातों को लेकर निवेशक कंफ्यूज है। ऐसे में निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं? इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं कोटक महिंद्रा AMC की सीनियर फंड मैनेजर और इक्विटी रिसर्च हेड शिबानी कुरियन।

Q1 नतीजे बाजार के लिए करेंगे बड़े ट्रिगर का काम 

बाजार पर बात करते हुए शिबानी कुरियन ने कहा कि वेस्ट एशिया संकट के चलते बाजार में काफी उतार-चढ़ाव है। शॉर्ट टर्म में बाजार का रुख वेस्ट एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी। Q1 अर्निंग्स सीजन से बाजार की रिकवरी को सपोर्ट मिलेगा। अब तक Q1 नतीजे ज्यादातर अनुमान से बेहतर रहे। Q1 नतीजे बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर का काम करेंगे।

लार्जकैप प्राइवेट बैंकों के नतीजों से मिली निराशा

उन्होंने आगे कहा कि मिडकैप कंपनियों के नतीजे सुस्त रहे हैं। OMCs को छोड़कर सभी सेक्टर्स के मजबूत नतीजे आए हैं। स्मॉलकैप कंपनियों के नतीजे मिलेजुले रहे हैं। NBFCs, ऑटो और कैपिटल गुड्स में अनुमान से बेहतर नतीजे देखने को मिले हैं। लार्जकैप प्राइवेट बैंकों के नतीजों से निराशा मिली है। पिछले 2 साल के मुकाबले अर्निंग्स सीजन में सुधार की उम्मीद दिख रही है।

IT सेक्टर का आउटलुक अभी भी सुस्त

आईटी सेक्टर पर अपनी राय साझा करते हुए शिबानी कुरियन ने कहा कि IT सेक्टर का आउटलुक अभी भी सुस्त है। डिस्क्रिशनरी खर्च में कम सुधार देखने को मिला है। ज्यादातर IT कंपनियों ने ग्रोथ गाइडेंस घटाई है। AI और कंपिटीशन के चलते प्राइसिंग में दबाव देखने को मिल रहा है। IT कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ और आउटलुक कमजोर है। AI से वॉल्यूम ग्रोथ को सपोर्ट मिला है। मिडकैप IT में वैल्यूशन बेहतर दिख रहे हैं। उनके फोकस फंड में 25-30 शेयर हैं। कैपिटल गुड्स, हेल्थकेयर सेक्टर पर ओवरवेट हैं। फाइनेंशियल पर भी ओवरवेट हैं। लेकिन इंश्योरेंस स्पेस पर अंडरवेट हैं।

 

Experts View : आशीष चतुरमोहता से जानें, मौजूदा बाजार में क्या करें निवेशक, लंबे समय के लिए कहां लगाएं दांव?

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

US ETFs: बच्चे की विदेश में पढ़ाई के लिए अमेरिकी ETFs क्यों हैं बेस्ट? जानिए सही करेंसी में बचत का फॉर्मूला

US ETFs for Overseas Education: बच्चों को विदेश की टॉप यूनिवर्सिटीज (US, UK या यूरोप) में पढ़ाना आज कई भारतीय माता-पिता का सपना है। इसके लिए अधिकांश पेरेंट्स सालों पहले से भारतीय म्यूचुअल फंड्स में SIP शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुपए में की गई आपकी बचत डॉलर में बढ़ते कॉलेज फीस के खर्च के सामने कम पड़ सकती है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब आपका वित्तीय लक्ष्य डॉलर या विदेशी मुद्रा में है, तो निवेश भी उसी करेंसी में होना चाहिए। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि विदेश में पढ़ाई के लिए US ETFs में सीधा निवेश क्यों सबसे समझदारी भरा विकल्प है।

रुपए में बचत क्यों पड़ सकती है कम?

अगर आपका लक्ष्य डॉलर में है, तो सिर्फ रुपए में कंपाउंडिंग करना मुश्किल हो सकता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

1- ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी: विदेशी यूनिवर्सिटीज की फीस हर साल 5% से 8% की दर से बढ़ती है।

2- रुपए की कमजोरी: ऐतिहासिक रूप से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हर साल औसतन 4% से 5% टूटता है।

एक उदाहरण से समझे तो जैसे आज किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी की 4 साल की फीस $2,00,000 है, तो अगले 10 साल बाद रुपए के अवमूल्यन और महंगाई को मिलाकर यह बिल ₹3.5 करोड़ से भी अधिक का हो सकता है।

भारतीय इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स के बजाय Direct US ETFs क्यों बेहतर?

पहले पेरेंट्स भारतीय फंड हाउसेज के ‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिए विदेश में निवेश करते थे। लेकिन अब Direct US-listed ETFs एक बेहतर विकल्प बन गए हैं:

SEBI ओवरसीज कैप की सीमा नहीं: भारतीय म्यूचुअल फंड्स पर SEBI द्वारा लगाई गई विदेशी निवेश की लिमिट (करीब $7 बिलियन) बार-बार पूरी हो जाती है, जिससे फंड्स को अपनी SIP बार-बार रोकनी पड़ती है।

LRS के जरिए सीधा निवेश: RBI की लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर भारतीय नागरिक (नाबालिग सहित) को हर साल $2,50,000 तक विदेश भेजने और सीधे US ETFs में निवेश करने की पूरी छूट मिलती है।

कम एक्सपेंस रेशियो: डायरेक्ट US ETFs (जैसे- Vanguard या iShares) का एक्सपेंस रेशियो बेहद कम (0.03% से 0.09%) होता है, जबकि घरेलू इंटरनेशनल फंड्स में यह 1.25% से 1.75% तक हो सकता है।

ऐतिहासिक रिटर्न का गणित

अगर पिछले 10 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें, तो S&P 500, Nasdaq 100 और ग्लोबल इक्विटीज के 60/20/20 पोर्टफोलियो ने डॉलर (USD) टर्म में 13% से 14% वार्षिक रिटर्न दिया है। जब इसमें रुपए की 4-5% सालाना गिरावट को जोड़ दिया जाता है, तो भारतीय निवेशकों के लिए यह सालाना रिटर्न रुपए के टर्म में 17% से 19% के करीब बैठता है। यानी डॉलर में निवेश करना फायदे वाला सौदा रहा है।

निवेश शुरू करने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान

अमेरिकी ETFs में ऐप या ब्रोकरेज के जरिए निवेश करते समय इन व्यावहारिक पहलुओं को न भूलें:

Micro-SIP से बचें: हर महीने ₹1,000 या ₹2,000 जैसी छोटी SIP पर बैंक वायर चार्ज और फॉरेक्स स्प्रेड का खर्च भारी पड़ सकता है। इसलिए पैसे को रुपए में इकट्ठा करें और हर 3 या 6 महीने में एक बार में रेमिटेंस करें।

TCS के नियम: एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख तक के रेमिटेंस पर अतिरिक्त टीसीएस नहीं लगता। ₹10 लाख से ऊपर 20% TCS कटता है, जिसे आप अपने वार्षिक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में एडजस्ट या रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

Schedule FA रिपोर्टिंग: विदेश में शेयर या ETF खरीदते ही ITR-2 या ITR-3 भरते समय Schedule FA में उसका ब्योरा देना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।

टारगेट तक पहुंचने की सही रणनीति

जैसे-जैसे आपके बच्चे के कॉलेज एडमिशन का समय करीब आए, आपको अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित मोड में शिफ्ट करना चाहिए:

Build Phase (शुरुआती 5-10 साल): इक्विटी ETFs (जैसे S&P 500 / Nasdaq) में आक्रामक तरीके से निवेश करें।

Protect Phase (3-4 साल पहले): जब एडमिशन में 3-4 साल बचें, तो धीरे-धीरे इक्विटी से पैसा निकालकर US डेट/बॉन्ड फंड्स में शिफ्ट करें।

Deploy Phase (आखिरी 1-2 साल): फीस भुगतान से 1-2 साल पहले फंड को USD कैश या लिक्विड बकेट में रखें, ताकि शेयर बाजार में किसी तात्कालिक गिरावट से आपकी फीस का बजट प्रभावित न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI ने बैंकों को बल्क डिपॉजिट्स पर डिफरेंशियल इंटरेस्ट रेट ऑफर करने की इजाजत दी, जानिए क्या है इसका मतलब

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग इंटरेस्ट रेट ऑफर करने की इजाजत दे दी है। यह लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) फ्रेमवर्क के तहत बैंक के स्पेशिफिक रन-ऑफ रेट्स पर आधारित होगा।

RBI ने इस बारे में 30 जुलाई को एक नोटिफिकेशन इश्यू किया है। इसमें कहा गया है कि यह नियम घरेलू डिपॉजिट यानी रुपये में होने वाले डिपॉजिट के साथ ही NRI डिपॉजिट पर लागू होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट्स से दूसरे नियम पहले की तरह होंगे।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि बैंक को अपनी सभी शाखाओं में एक समान इंटरेस्ट रेट्स ऑफर करने होंगे। बैक को ग्राहकों के साथ किसी तरह का भेदभाव करने की इजाजत नहीं होगी। आरबीआई के नियम के मुताबिक, हर बैंक को रोजाना सुबह 10 बजे तक बल्क डिपॉजिट के इंटरेस्ट रेट ब्रांच में डिस्प्ले करने होंगे।

एचडीएफसी बैंक के हाल में एक ग्राहक को बल्क डिपॉजिट पर ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करने से विवाद खड़ा हो गया था। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ने महाराष्ट्र स्टेट रोड एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) को ‘मार्केटिंग स्पेंड्स’ के तहत कथित रूप से 45 करोड़ रुपये का पेमेंट किया था। उसने बल्क डिपॉजिट हासिल करने के लिए ऐसा किया था।

HDFC Bank ने MSRDC को बल्क डिपॉजिट पर 6.01 इंटरेस्ट रेट ऑफर किया था। यह रेगुलर सेविंग्स डिपॉजिट पर मिलने वाले 3.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट से काफी ज्यादा था। मामले की जांच के बाद एचडीएफसी बैंक ने अपने कुछ टॉप अधिकारियों को वार्निंग लेटर इश्यू किए। उन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

आरबीआई के नियम में बदलाव करने के बाद बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट पर ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करने का रास्ता खुल गया है। इससे बैंकों को डिपॉजिट अट्रैक्ट करने में आसानी होगी। आरबीआई के नियम के मुताबिक, अलग-अलग कैटेगरी के बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट की परिभाषा अलग है।

शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए 3 करोड़ और इससे ज्यादा के डिपॉजिट बल्क डिपॉजिट की श्रेणी में आते हैं। रीजनल रूरल बैंक और को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए 1 करोड़ और इससे ज्यादा अमाउंट के डिपॉजिट बल्क श्रेणी में आते हैं।

Stock Market View: निफ्टी अब 24700–24900 की ओर रैली के लिए तैयार, आज इस FMCG शेयर में हो सकती है बंपर कमाई

Stock Market View : शुक्रवार, 31 जुलाई को भारतीय इक्विटी बाजार हल्की बढ़त के साथ खुले हैं। अच्छे ग्लोबल संकेतों ने भारतीय बाजारों को सपोर्ट मिल रहा है। निफ्टी 24,300 के स्तर के ऊपर पहुंच गया है। फिलहाल सेंसेक्स 59.26 अंक या 0.08 प्रतिशत बढ़कर 77,987.41 पर और निफ्टी 34.35 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,351.50 पर दिख रहा है। ऐसे में थिंक्रेडब्लू सिक्योरिटीज (Thincredblu Securities) के फाउंडर गौरव उदानी का कहना है कि ग्लोबल संकेतों के सपोर्ट से निफ्टी में तेजी की उम्मीद है। यह इंडेक्स अभी एक अहम ब्रेकआउट जोनन के करीब ट्रेड कर रहा है। अगर निफ्टी 24,400–24,500 के ऊपर टिक रहता है तो इससे बुलिश ब्रेकआउट की पुष्टि हो सकती है और शॉर्ट टर्म में इसमें 24,700–24,900 की ओर रैली आ सकती है।

निफ्टी के लिए नीचे की तरफ 24,200–24,250 के लेवल पर तत्काल सपोर्ट दिख रहा है। जब तक निफ्टी इस रेंज के ऊपर बना रहता है, तब तक इसका शॉर्ट-टर्म ट्रेंड तेजड़ियों के पक्ष में रहेगा।

मार्केट ब्रेथ में सुधार हुआ है और ग्लोबल सेंटीमेंट पॉजिटिव होने के साथ मोमेंटम बनता दिख रहा है। अगर आज पूरे सेशन के दौरान तेजा बनी रहती है,तो आज की चाल अपट्रेंड के अगले फेज की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में ट्रेडर्स को गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाने की सलाह होगी। 24,500 के लेवल के ऊपर साफ ब्रेकआउट होने पर नई लॉन्ग पोजीशन बनाई जा सकती है।

इक्विनॉक्स रिसर्च एंड एडवाइज़र्स के पंकज रांदड़ ने कहा कि एफआई लगातार अपना माल हल्का करते जा रहे थे।लेकिन अब एफआईआई की तरफ से खरीदारी आ रही है। इस बीच डीआई बाइंग करते दिख रहे दिख रहे थे। ऐसे में कहीं ना कहीं उनका प्रॉफिट बुकिंग करना जरूरी था। कल के यूएस फेड के फैसले के बाद यूएस मार्केट में जिस तरह के मूव्स आए उनको देखते हुए लगता है कि विदेशी निवेशक अब इमर्जिंग मार्केट्स में मौके खोज रहे हैं। ढूंढ रहे हैं। ऐसे में लगता कि हमारे मार्केट यहां से साइडवेज पॉजिटिव रह सकते हैं। बैंक निफ्टी और निफ्टी को लेकर सेंटीमेंट में सुधार दिख रहा है।

उन्होंने आगे कहा निफ्टी और बैंक निफ्टी में उनका नजरिया मिलाजुला है। निफ्टी कल 24355 की रेंज में आकर बंद होते हुए नजर आया। मार्केट को यहां से साइडवेज पॉजिटिव रुझान के साथ में चलना चाहिए। जिस हिसाब से कल के मूव्स रहे हैं, उनसे एक कॉन्फिडेंस बना है। लेकिन सतर्क रहते हुए कहा ज सकता है कि 24380 के ऊपर जाने पर ही निफ्टी में टिकाऊ तेजी आ सकती है। निफ्टी के अंदर जब तक एक निफ्टी 24380- 24400 की रेंज क्रॉस ना करे वेट करने की सलाह रहेगी, लेकिन ओवरऑल रुझान साइडवेज पॉजिटिव है।

जहां तक बैंक निफ्टी की बात है तो 57380 के ऊपर ही इसमें बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह यह है कि आज बैंक ऑफ जापान का फैसला आना है और उसके बाद में मार्केट के सेंटीमेंट्स चेंज हो सकते हैं। अगर बैंक निफ्टी 57400 के ऊपर खुलता है तो मार्केट के अंदर एक नया तेजी का दौर शुरू हो सकता है।

अपने पसंदीदा शेयर पर बात करते हुए पंकज रांदड़ ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों में पूरे एफएमसीजी सेक्टर में काफी अच्छा एक्शन देखने को मिला है। इसी सेक्टर के गॉडफ्रे फिलिप्स (GODFREY PHILLIPS) के फ्यूचर्स में खरीदारी की सलाह होगी कल यह शेयर 2110 रुपए के आसपास बंद हुआ था। इसी के आसपास ही इसमें खरीदारी करें। 2155-2175 रुपए के टारगेट के लिए 2086 रुपए पर स्टॉपलॉस लगाएं।

 

Market Trend : अगर 24410 का रेजिस्टेंस पार हुआ तो 24500 के पार जाएगा निफ्टी, इन दो शेयरों में बन सकता है मोटा पैसा

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SBI Lakhpati Scheme: रोजाना महज ₹20 बचाकर बनेंगे लखपति! जानिए एसबीआई की इस खास आरडी स्कीम का पूरा गणित

SBI Har Ghar Lakhpati Scheme Details: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने छोटे और मध्यम आय वर्ग के बचतकर्ताओं के लिए एक शानदार योजना शुरू की है, जिसका नाम ‘हर घर लखपति’ (Har Ghar Lakhpati Scheme) है। यह बेसिकली एसबीआई की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) का एक कस्टमाइज्ड गोल-बेस्ड वेरिएंट है।

इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य देश के हर परिवार को छोटी-छोटी मासिक बचत के जरिए ₹1 लाख या उससे अधिक का गारंटीड फंड तैयार करने में मदद करना है। अगर आप भी जोखिम रहित और सुरक्षित तरीके से ₹1 लाख की बचत करना चाहते हैं, तो यह स्कीम आपके लिए मुफीद साबित हो सकती है।

क्या है एसबीआई की ‘हर घर लखपति’ योजना?

‘हर घर लखपति’ एसबीआई की एक विशेष आवर्ती जमा (RD) योजना है। इसमें ग्राहक को हर महीने एक निश्चित समय अवधि के लिए एक तय राशि जमा करनी होती है। इस स्कीम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मैच्योरिटी पूरी होने पर निवेशक को सीधे ₹1 लाख या इसके मल्टीपल जैसे ₹2 लाख, ₹3 लाख का एकमुश्त कॉर्पस मिलता है। चूंकि यह भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक की योजना है, इसलिए इसमें जमा आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और ब्याज दरें तय रहती हैं।

हर महीने कितना करना होगा निवेश?

आप अपनी सहूलियत और बजट के हिसाब से 3 साल से लेकर 10 साल तक का कार्यकाल चुन सकते हैं। चुने गए साल के हिसाब से आपकी महीने की किस्त तय होती है:

हर महीने कितना करना होगा निवेश?

 

नोट: ब्याज दरों में समय-समय पर होने वाले बदलाव के अनुसार मासिक किस्त की राशि में थोड़ा-बहुत अंतर आ सकता है।

ब्याज दरें और सीनियर सिटीजन्स को एक्स्ट्रा फायदा

एसबीआई इस स्कीम पर अपनी सामान्य आरडी के बराबर ब्याज दरें देता है, जिसमें ब्याज की गणना तिमाही आधार पर कंपाउंड की जाती है।

सामान्य नागरिकों के लिए: अवधि के अनुसार ब्याज दर 6.50% से 6.75% प्रति वर्ष तक मिलती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए: बुजुर्गों को सामान्य नागरिकों की तुलना में 0.50% (50 बीपीएस) अधिक ब्याज मिलता है। यानी वरिष्ठ नागरिक हर महीने थोड़ा कम प्रीमियम जमा करके भी ₹1 लाख का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

खाता कैसे खोलें और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

‘हर घर लखपति’ खाता खोलना बेहद आसान है। इसके लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

SBI YONO App / Net Banking: अगर आप एसबीआई के मौजूदा ग्राहक हैं, तो आप YONO ऐप में जाकर ‘Deposits’ > ‘e-RD’ सेक्शन में जाकर ‘Har Ghar Lakhpati’ विकल्प चुनकर घर बैठे खाता खोल सकते हैं।

शाखा में जाकर: अपने नजदीकी एसबीआई ब्रांच में जाकर आवेदन फॉर्म भरें।

आवश्यक दस्तावेज: पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और एसबीआई का सेविंग्स अकाउंट।

लोन सुविधा और पेनाल्टी के नियम

लोन सुविधा: जरूरत पड़ने पर निवेशक जमा राशि के 90% तक का लोन या ओवरड्राफ्ट (OD) भी ले सकते हैं।

किस्त चूकने पर जुर्माना: अगर आप किसी महीने की किस्त समय पर नहीं भर पाते हैं, तो एसबीआई नियमानुसार मामूली पेनाल्टी वसूलता है। लगातार किस्तें मिस होने पर अकाउंट बंद भी हो सकता है।

टैक्स नियम (TDS): एक वित्त वर्ष में मिलने वाला कुल ब्याज अगर ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक होता है, तो टीडीएस लागू होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Trend : अगर 24410 का रेजिस्टेंस पार हुआ तो 24500 के पार जाएगा निफ्टी, इन दो शेयरों में बन सकता है मोटा पैसा

Market Trend : 30 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे ट्रेडिंग सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। IT शेयरों में आई बढ़त का असर रियल्टी,कैपिटल गुड्स,हेल्थकेयर और कुछ बड़े शेयरों में आई कमजोरी से संतुलित हो गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 273.55 अंक या 0.35 प्रतिशत बढ़कर 77,928.15 पर और निफ्टी 66.95 अंक या 0.28 प्रतिशत बढ़कर 24,317.15 पर बंद हुआ। बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले ब्रॉडर इंडेक्स का प्रदर्शन कमजोर रहा। इसके चलते निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे गिरे।

आज बाजार में क्या हो रणनीति?

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24370-24410 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24468-24491/24543 पर है। इसके लिए पहला बेस 24210-24266 पर और बड़ा बेस 24138-24171 पर है। कल बेस-1 पर गिरावट में खरीदारी की सलाह थी,24336 लक्ष्य हासिल हुआ। FIIs की कैश खरीदारी देखने को मिली है। DIIs की कैश में बिकवाली देखने को मिली है।

इंडेक्स में शॉर्ट कवरिंग हुई है। नेट शॉर्ट घटकर 1.86 लाख पर रहे हैं। US हैंडओवर अच्छा रहा। लेकिन सॉफ्टवेयर शेयर टूटे,चिप शेयरों में उछाल आया। निफ्टी IT ने कल 200 DEMA छुआ,आज हल्की मुनाफावसूली संभव है। कच्चा तेल 89 डॉलर के करीब ठीक-ठाक स्थित में है। 24500-24600 पर कॉल राइटिंग हुई है। 24300-24200 पर पुट राइटिंग दिखी है। बेस-1 तक गिरावट में किसी भी स्थिति में खरीदारी की रणनीति रहेगी। रजिस्टेंस-1 पर 200 DEMA और कॉल राइटर्स हैं। अगर रेजिस्टेंस-1 पार हुआ तो निफ्टी रेजिस्टेंस-2 तक जाएगा।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 57381-57542 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 57709-57889/58078 पर है। इसके लिए पहला बेस 56610-56833 पर और बड़ा बेस 56434-56506 पर है। यह कल बताए गए दायरे में ही रहा,गिरावट पर खरीदारी की रणनीति कारगर रही। रेजिस्टेंस-1 तक की तेजी भी देखने को मिली।

57000 पर कॉल और पुट राइटर्स की सबसे मजबूत पोजिशन है। ऑप्शन पोजिशनिंग से फिलहाल कंसोलिडेशन के संकेत मिल रहे हैं। बेस-1 तक गिरावट में खरीदारी की रणनीति बेहतर रहेगी। रेजिस्टेंस-1 के आसपास मुनाफावसूली की सलाह होगी। 57542 के ऊपर टिकते ही ब्रेकआउट के संकेत मिलेंगे। 57542 के ऊपर रेजिस्टेंस-2 तक स्विंग की उम्मीद है।

Trading Plan: 24200–24100 का सपोर्ट बने रहने तक निफ्टी में गिरावट पर करें खरीदारी, ऊपर की और 24500-24600 का टारेगट मुमकिन

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं manasjaiswal.com के मानस जायसवाल। मानस जायसवाल की नायका (NYKAA) में 330 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 342 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। इनकी हैवेल्स (HAVELLS) में भी 1239 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 1300 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

सेलेब्रिटीज के पीछे का सच काला भी!

समाज को चाहिए कि वह अपने आदर्श माने जाने वाली हस्तियों से उच्च नैतिक मानदंडों की अपेक्षा करे। फिर वो चाहे कोई प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हो, आध्यात्मिक गुरु हो, उद्योगपति हो, या कोई अन्य मशहूर हस्ती, जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और अदालतों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

आए दिन हमें यह देखने को मिलता है कि उद्योग जगत, मनोरंजन जगत, आध्यात्मिक संस्थाओं और खेल जगत के कुछ नामी-गिरामी हस्तियों के नाम बार-बार ‘मनी लॉन्ड्रिंग’, फर्जी सौदों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के मामलों में चर्चा में आते हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी मेहनत, प्रतिभा और लोकप्रियता से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीता है। फिर भी इनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी अच्छी छवि को दाव पर लगाकर काले धन के सौदों में उलझ जाते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल उनके व्यक्तिगत पतन का संकेत है, बल्कि पूरे समाज में भ्रष्टाचार की जड़ों को और मजबूत करती है।

गौरतलब है कि इन हस्तियों के पास पहले से ही करोड़ों की अपार संपत्ति, ब्रांड एंडोर्समेंट, फिल्मों या मैचों से की गई कमाई और सामाजिक प्रतिष्ठा होती है। फिर भी वे अवैध गतिविधियों की ओर क्यों आकर्षित होते हैं? एक बड़ा कारण है लोभ। सफलता के बाद भी और अधिक धन और अधिक पावर की भूख कभी नहीं मिटती। कई बार वे सोचते हैं कि उनकी छवि इतनी मजबूत है कि कोई उन पर उंगली नहीं उठाएगा। कुछ लोग अपने व्यवसाय को ‘विविधीकरण’ का नाम देकर रियल एस्टेट, शेल कंपनियों, दान के नाम पर काले धन को सफेद करना या विदेशी खातों के जरिए धन छिपाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बनाई हुई प्रतिष्ठा एक सुरक्षा कवच लगती है, लेकिन असल में यह उनके गिरने का कारण बन जाती है।

कई मामलों में यह भी देखने को मिलता है कि ये लोग अपने सरकारी संपर्कों और प्रभावशाली लोगों से परिचित होने के कारण अत्यधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगी या मामला दबा दिया जाएगा। यह आत्मविश्वास अक्सर गलत साबित होता है, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका होता है। लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो। फिर भी व्यवहार में कई बार प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच धीमी पड़ जाती है या सबूतों की कमी का हवाला देकर मामले कमजोर हो जाते हैं।

भारत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और अन्य एजेंसियां जब ऐसे मामलों की जांच करती हैं, तो अक्सर आरोपियों को सजा नहीं दिला पाती। इसके कई कारण हो सकते हैं; जटिल कानूनी प्रक्रियाएं, सबूतों की कमी, गवाहों का दबाव में आना या लंबी अदालती सुनवाई। कभी-कभी राजनीतिक प्रभाव या संसाधनों की कमी भी जांच को प्रभावित करती है। लेकिन ऐसे ‘जाहिर कारणों’ से बरी होना या मामला रुक जाना समाज में गलत संदेश देता है। आम आदमी सोचता है कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। यह धारणा लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

इस स्थिति में अदालतें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। स्वतंत्र न्यायपालिका को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई करे, सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन करे और दोषियों को उचित सजा दे। विशेष अदालतें या फास्ट-ट्रैक प्रक्रियाएं मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराधों के लिए बनाई जा सकती हैं। अदालतें एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दे सकती हैं कि जांच में देरी न की जाए और कोई भी प्रभाव जांच को बाधित न करे। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति अपनी शक्ति का दुरुपयोग करके जांच को प्रभावित करने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। न्याय तभी प्रभावी होगा जब वह बिना भेदभाव के लागू हो।

ज़रूरत है तो इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाना की। जनता को समझना चाहिए कि सेलेब्रिटीज की चमकदार जिंदगी के पीछे कई बार काले कारोबार की छाया होती है। मीडिया और जागरूक नागरिकों को ऐसे मामलों की लगातार निगरानी करनी चाहिए। एजेंसियों को चाहिए कि वे शिकायतों को गंभीरता से लें, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। शिकायत दर्ज होने के बाद प्रारंभिक जांच तुरंत शुरू होनी चाहिए और सबूतों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। यदि शिकायत में गंभीर आरोप हों और उसके ठोस प्रमाण भी संलग्न हों तो जांच एजेंसियों जिम्मेदारी हो कि शिकायतकर्ता की पहचान को गुप्त रखा जाए।

कानून के जानकार मानते हैं कि शिकायत दर्ज कराने के लिए ठोस सबूत जरूरी होते हैं।

सामान्य दस्तावेजी सबूतों में बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी दस्तावेज, कंपनी रजिस्ट्रेशन पेपर्स, इनकम टैक्स रिटर्न और संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। डिजिटल सबूत आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण हैं; ऑडी-वीडियो रिकॉर्डिंग, ईमेल, व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप के चैट, सोशल मीडिया पोस्ट, डिजिटल वॉलेट के लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन, क्लाउड स्टोरेज में सेव की गई फाइलें और सर्वर लॉग। ये सबूत समय-स्टैम्प के साथ उपलब्ध होने चाहिए और ‘चेन ऑफ कस्टडी’ बनाए रखते हुए पेश किए जाने चाहिए। इसके साथ ही गवाहों के बयान और फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। शिकायतकर्ता को चाहिए कि वह सभी उपलब्ध जानकारी व्यवस्थित रूप से एजेंसी को सौंपे और जांच में सहयोग करे।

समाज को चाहिए कि वह अपने आदर्श माने जाने वाली हस्तियों से उच्च नैतिक मानदंडों की अपेक्षा करे। फिर वो चाहे कोई प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हो, आध्यात्मिक गुरु हो, उद्योगपति हो, या कोई अन्य मशहूर हस्ती, जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और अदालतों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। तभी हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ सकेंगे जहां प्रतिष्ठा और धन किसी को कानून से ऊपर न रख सकें। काले धन और अवैध सौदों का चक्र तभी टूटेगा जब हर नागरिक, हर संस्था और हर अदालत अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए।

बैंक में जमा किए गए रुपये को लेकर RBI ने दिया बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से लागू हो जाएगा ये नया नियम

RBI New Rules on Bank Deposit Rates: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के सभी कमर्शियल बैंकों के लिए जमा पर मिलने वाले ब्याज से जुड़ा एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। रिजर्व बैंक ने बैंकों से साफ कह दिया है कि वे अपनी सभी शाखाओं में एक ही दिन जमा की जाने वाली समान राशि पर ग्राहकों को एक जैसी ही ब्याज दरें प्रदान करें। किसी भी ब्रांच में ब्याज दरों को लेकर भेदभाव या अंतर करने की इजाजत नहीं होगी।

आरबीआई का यह नया आदेश ‘भारतीय रिजर्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक- जमाओं पर ब्याज दर) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026’ के तहत जारी किया गया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।

एक दिन, एक रकम तो ब्याज भी होगा बिल्कुल एकसमान

केंद्रीय बैंक के संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक, बैंकों को अपने जमा पर वही ब्याज देना होगा जो उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर पहले से तय और घोषित है। अगर कोई ग्राहक देश की किसी भी शहर या ब्रांच में एक ही दिन समान रकम जमा करता है, तो बैंक उसे अलग-अलग ब्याज दर नहीं दे सकते।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि एक ही दिन स्वीकार किए गए समान अमाउंट के डिपॉजिट पर अलग-अलग दरें देना पूरी तरह से अस्वीकार्य और नियमों के खिलाफ होगा।

रोज सुबह 10:10 बजे तक अपडेट करनी होंगी थोक जमा दरें

पारदर्शिता को और बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ने बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को सार्वजनिक करने का समय भी तय कर दिया है:

समय सीमा: सभी बैंकों को हर कारोबारी दिन सुबह 10:00 बजे तक अपनी वेबसाइट पर थोक जमा की नई ब्याज दरें पब्लिश करनी होंगी।

10 मिनट की छूट: आरबीआई ने इसमें अधिकतम 10 मिनट की रियायत दी है, यानी बैंकों को हर हाल में सुबह 10:10 बजे तक अपनी ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट कर देनी होंगी।

LCR फ्रेमवर्क के तहत सीमित छूट की शर्त

आरबीआई ने बैंकों को लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) ढांचे के तहत थोक जमा पर ब्याज दरों में मामूली या सीमित अंतर रखने की छूट दी है। लेकिन यह छूट तभी मान्य होगी जब इसका आधार कोई ठोस और वैध वित्तीय मानक होगा, न कि बैंक की मनमर्जी।

1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे नए नियम

आरबीआई के अनुसार, यह नया ड्राफ्ट जून में जारी किए गए ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर बैंकिंग स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से मिली प्रतिक्रियाओं का गहराई से अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इस नियम से बैंक ग्राहकों को अपनी जमा राशि पर पारदर्शी और सही रिटर्न मिलेगा।

Trading Plan: 24200–24100 का सपोर्ट बने रहने तक निफ्टी में गिरावट पर करें खरीदारी, ऊपर की और 24500-24600 का टारेगट मुमकिन

Trading Plan : निफ्टी में लगातार हायर हाईज और हायर लोज बन रहे है। यह शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसके मोमेंटम इंडिकेटर हो रहे हैं। साथ ही इंडिया VIX में भी नरमी आ रही है। कच्चे तेल के भाव भी घट रहे हैं। इन सब वजहों से बाजार को सपोर्ट मिल रहा है। ऐसे में निफ्टी के 24400 के लेवल (जो इसके 200-दिन के EMA से थोड़ा ऊपर है) पर वापस आने की संभावना दिख रही है। बाजार जानकारों का कहना है कि अगर निफ्टी 24,100 के सपोर्ट लेवल को बचाए रख पाता है और लगातार इस लेवल के ऊपर बना रहता है,तो यह 24,500-24,600 के जोन (पिछले स्विंग हाई और अहम रेजिस्टेंस लेवल) की ओर बढ़ सकता है।

बैंक शेयरों की बात करें तो बैंक निफ्टी को 57,800-58,000 के जोन की ओर अपनी बढ़त जारी रखने के लिए 57,300 के रेजिस्टेंस को साफ तौर पर पार करना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना जब तक ऐसा नहीं होता तब तक कंसोलिडेशन जारी रहने की संभावना है। बैंक निफ्टी के लिए 56,650-56,500 का जोन में सपोर्ट है।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

सैमको सिक्योरिटीज के डेरिवेटिव रिसर्च एनालिस्ट,धूपेश धमेजा का कहना है कि निफ्टी में लगातार पांचवें सेशन में रिकवरी देखने को मिली। इसने हायर हाइज़ की एक सीरीज़ बनाई,जो लगातार हो रही खरीदारी और मजबूत होते बुलिश मोमेंटम का संकेत है। निफ्टी अपने 20-DEMA के ऊपर ट्रेड कर रहा है और अब 200-DEMA (24,370) के अहम लेवल के करीब पहुंच रहा है। यह एक बड़ा रेजिस्टेंस है जिसे पार करने पर मीडियम-टर्म ट्रेंड और मज़बूत हो सकता है। RSI बढ़कर 57.66 हो गया है,जो बेहतर होते मोमेंटम का संकेत है। इंडिया VIX 12.16 के निचले स्तर पर बना रहा। यह भी एक अच्छा संकेत है।

ऑप्शंस के आंकड़ों की बात करें तो सबसे ज़्यादा पुट ओपन इंटरेस्ट 24,000 के लेवल पर है और उसके बाद 24,200 पर भी अच्छे खासे पुट ओपन इंटरेस्ट हैं। वहीं सबसे ज्यादा कॉल ओपन इंटरेस्ट 24,600 के लेवल पर है और उसके बाद 24,500 पर भी अच्छी कॉल राइटिंग हुई है। PCR (पुट-कॉल रेश्यो) 1.29 के लेवल पर है, जो डेरिवेटिव्स में पॉजिटिव पोजीशन दिखाता है। जब तक निफ्टी 24,200–24,100 के सपोर्ट जोन के ऊपर टिका रहता है,तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। निफ्टी में ऊपर की ओर 24,370 और 24,500 तक जाने की संभावना है।

अहम रेजिस्टेंस: 24,360, 24,500, 24,650

अह सपोर्ट: 24,200, 24,100, 24,000

स्ट्रैटेजी: ट्रेडर्स 4अगस्त,2026 की एक्सपायरी के लिए’बुल पुट स्प्रेड’ले सकते हैं। इसके लिए वे 24,500 PE का एक लॉट 242 रुपये में बेच सकते हैं और 24,300 PE का एक लॉट 114 रुपये में खरीद सकते हैं। यह सेटअप संभावित बढ़त का फायदा उठाने के लिए बनाया गया है।

स्टॉप-लॉस: इस स्ट्रेटेजी को सख्ती से अपनाएं और रिस्क मैनेजमेंट को सही ढंग से बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान की सीमा ₹4,712 तय करें।

टारगेट: इस स्ट्रेटेजी को बनाए रखें और ज्यादा से ज्यादा ₹9,456 के मार्क-टू-मार्केट (MTM) मुनाफो का लक्ष्य रखें। जब MTM मुनाफा ₹8,287 से ज्यादा हो जाए,तो मुनाफा बुक कर लें।

 

 

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market cues : निफ्टी 24500-24600 पर स्थित अगले रेजिस्टेंस की और बढ़ने को तैयार, आज इन अहम लेवल्स पर रहे नजर

Trade setup for today : 30 जुलाई को सीमित दायरे में कारोबार करने के बावजूद निफ्टी मे 0.3 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। मोमेंटम इंडिकेटर्स में सुधार,इंडेक्स का शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बने रहना, साथ ही अच्छे ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ’हायर हाई-हायर लो’पैटर्न का बनना, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और इंडिया VIX में नरमी जैसी बातों देखते हुए उम्मीद है कि इंडेक्स 24,400 (200 डे EMA) के अपने अगले रेजिस्टेंस लेवल की ओर बढ़ता नजर आएगा। मार्केट दिग्गजों का कहना है कि निफ्टी अब 24,400 (200 डे EMA) के आसपास स्थित अगले रेजिस्टेंस की ओर बढ़ता नजर आ सकता है। अगर यह 24,100 पर स्थित सपोर्ट को बचाए रख पाता है तो इसके लिए 24,500-24,600 के जोन (पिछले स्विंग हाई) की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,223, 24,186 और 24,127

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,342, 24,379 और 24,438

निफ्टी ने पिछले हफ्ते हुए नुकसान की भरपाई करते हुए अपनी बढ़त बनाए रखी है। इसने डेली टाइमफ़्रेम पर स्मॉल अपर और लोअर विक्स (wicks) के साथ एक बुलिश कैंडलस्टिक बनाई है। यह 200-डे EMA और पिछले स्विंग हाई जैसे ओवरहेड रेजिस्टेंस लेवल के पास कंसोलिडेशन का संकेत है। वहीं,’हायर हाई-हायर लो’का पैटर्न भी बना हुआ है। निफ्टी अपने 20, 50 और 100 डे EMA के ऊपर बना हुआ है। यह तेजी बने रहने का संकेत है। RSI बढ़कर 57.66 पर पहुंच गया है और रेफरेंस लाइन के ऊपर टिका हुआ है। वहीं,MACD भी बुलिश क्रॉसओवर के करीब है। ये सभी इंडिकेटर तेजी के मोमेंटम के मजबूत होने और आगे और बढ़त की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं,बशर्ते अहम सपोर्ट लेवल बचे रहें।

बैंक निफ्टी

पिवट प्वाइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,230, 57,340 और 57,519

पिवट प्वाइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,872, 56,762 और 56,583

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,253, 59,247

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,441, 55,742

लगातार चौथे ट्रेडिंग सेशन में बैंक निफ्टी 20 डे, 50 डे और 100 डे EMA के बीच और मई के लो से जून के हाई तक की रैली के 23.6% और 38.2% फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल के दायरे में ट्रेड करता रहा। इससे बाजार की दिशा साफ न होने का संकेत मिलता है। इसने डेली चार्ट पर’डोजि'(Doji)जैसा कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया,जो एक और सेशन में मार्केट में दुविधा या अनिश्चितता बने रहने का संकेत है। RSI 49.44 पर स्थिर रहा और रेफरेंस लाइन के नीचे बना रहा। इससे पता चलता है कि इसमें कोई मजबूत तेजी या मंदी का मोमेंटम नहीं है। वहीं, MACD धीरे-धीरे जीरो लाइन की ओर नीचे आता रहा। हालांकि रेड हिस्टोग्राम बार्स में गिरावट में कमी दिखी। ये सभी संकेत बताते हैं कि बैंक निफ्टी के तब तक एक दायरे में ही घूमता रह सकता है, जब तक कि कोई निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन नहीं होता।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX गुरुवार को 1.23 प्रतिशत बढ़कर 12.15 पर पहुंचने के बावजूद निचले स्तरों के आसपास बना रहा और अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा। यह मार्केट में स्थिरता के साथ तेजड़ियों के लिए अनुकूल माहौल का संकेत है। अगर यह लगातार 12 के स्तर से नीचे बना रहता है,तो इससे तेजड़ियों को और राहत मिल सकती है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 30 जुलाई को बढ़कर 1.26 पर पहुंच गया,जबकि पिछले सेशन में यह 1.18 के लेवल पर था। PCR का बढ़ना या 0.7 से ज़्यादा होना या इसका 1 से ऊपर निकल जाना,यह बताता है कि ट्रेडर्स कॉल ऑप्शन के मुकाबले पुट ऑप्शन ज्यादा बेच रहे हैं। आम तौर पर,यह बाजार में तेजी का संकेत होता है। अगर यह रेश्यो 0.7 से नीचे गिरता है या 0.5 की तरफ जाता है,तो इसका मतलब है कि पुट के मुकाबले कॉल की बिक्री ज्यादा हो रही है,जो बाजार में मंदी का संकेत है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।