IMD का बड़ा अलर्ट: 17 राज्यों में भारी बारिश का खतरा, क्या है बाढ़ प्रभावित गुजरात-असम का हाल?

weather update 31 july

देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण के कई राज्यों तक बादलों की आवाजाही और बारिश का दौर लगातार जारी है। जुलाई महीने के आखिरी दिन यानी आज 31 जुलाई 2026 को मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और एक पश्चिमी विक्षोभ आने वाले दिनों में कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश करा सकते हैं। देश के 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

 

मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक और निम्न दबाव क्षेत्र विकसित हुआ है, जो पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों और उत्तरी ओडिशा की ओर फैला हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सिस्टम अगले दो दिनों में और मजबूत हो सकता है। इसके अलावा मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है।

 

असम और गुजरात बाढ़ से बेहाल

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच 40,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मौसम विभाग ने गुजरात के कुछ हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, असम में बाढ़ से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। राज्य के 12 जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य में वर्षा जन्य हादसों में अब तक 78 लोगों की जान जा चुकी है।

 

पहाड़ी राज्यों में बरस आफत या राहत?

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है। उत्तराखंड सरकार ने आज बारिश की वजह से भूस्खलन की आशंका को देखते हुए चारधाम यात्रा स्थगित कर दी है। उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चंपावत समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इन इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में भी अगले दो दिनों तक कई इलाकों में व्यापक बारिश होने की संभावना है। चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कुल्लू में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

 

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, रामबन, जम्मू, पुंछ, कुलगाम, उधमपुर, कठुआ, डोडा, अनंतनाग, गांदरबल और कुपवाड़ा समेत कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है।

 

दिल्ली NCR में कैसा रहेगा मौसम

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद) में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। IMD के ताज़ा अपडेट के मुताबिक, आज दिनभर आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। बारिश के बाद तापमान में तो कुछ गिरावट दर्ज की जाएगी, लेकिन नमी बढ़ने के कारण उमस से पूरी तरह राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।
 

उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून सक्रिय

 

उत्तर प्रदेश के पूर्वी और तटीय जिलों में मानसून एक बार फिर मेहरबान हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज समेत कई जिलों में आज भारी बारिश का अनुमान है। वहीं, बिहार के भी कई जिलों में बादलों का डेरा है और कुछ स्थानों पर वज्रपात (आसानी बिजली गिरने) की चेतावनी भी जारी की गई है। किसानों के लिए यह बारिश धान की फसल के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।

 

मौसम विभाग ने इन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

गुजरात और हिमालयी क्षेत्र के अलावा कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेेश और राजस्थान में भारी की संभावना है। इन क्षेत्रों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा असम, मेघालय, गंगीय पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, केरल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश का अनुमान है। इनमें से कई क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ स्थानीय स्तर पर जलभराव और बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे सामान्य जनजीवन और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।

भारत में इस्तीफे जोर जबरदस्ती ही होते हैं

दुनिया के संभवतः किसी दूसरे देश में नैतिकता की उतनी बात नहीं होती होंगी, जितनी भारत में होती हैं। भारत ने दया, करुणा, सत्य, प्रेम, भाईचारे आदि के जितने प्रतीक गढ़े हैं, दुनिया के किसी और देश में उतने नहीं होंगे। भारत में तो एक सतयुग ही था, जिसमें सत्य हरिश्चंद्र थे। लेकिन यह भी सही है कि सत्य, अहिंसा, प्रेम, भाईचारे, करुणा, दया आदि से जितनी दूरी भारत में है उतनी शायद ही कहीं और होगी। इस पर लंबी बहस हो सकती है। इसलिए उसमें जाने की जरुरत नहीं है। लेकिन दुनिया के जिन देशों में सत्य और नैतिकता आदि का ढोल रोज नहीं बताया जाता है वहां लोग ज्यादा नैतिक होते हैं। वहां लोग नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं और अगर कोई अपराध किया है तो उसे भी स्वीकार करके सजा पाते हैं। भारत में कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेता है और अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया व्यक्ति भी अदालत में खड़े होकर कहता है कि वह बेकसूर है और उसका पूरा परिवार और ज्यादातर मामलों में पूरी जाति उसके बचाव में खड़ी होती है।

भारत की राजनीति में भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने का कोई सिद्धांत नहीं रहा है। नैतिक जिम्मेदारी लेकर कुछ मंत्रियों आदि ने जरूर इस्तीफे दिए, जिनकी आज तक चर्चा होती है। लाल बहादुर शास्त्री, माधवराव सिंधिया या नीतीश कुमार का जिक्र किया जाता है। यह संयोग है कि इन तीनों के इस्तीफे ट्रेन दुर्घटना को लेकर हुए थे। इनके रेल मंत्री रहते ट्रेन दुर्घटनाएं हुईं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया। यह अलग बात है कि रेल मंत्रालय में विफल होने के बाद भी इन सभी लोगों को दूसरे मंत्रालयों में अहम जिम्मेदारी मिली। लाल बहादुर शास्त्री तो बाद में प्रधानमंत्री बने। बहरहाल, भारत में गंभीर से गंभीर विफलता या आर्थिक अपराध में शामिल होने के आरोपों के बाद भी इस्तीफा कराना बड़ा मुश्किल होता है। आर्थिक अपराध के मामलों में तो अब गिरफ्तार होकर जेल जाने के बाद भी नेता इस्तीफा नहीं देते हैं। दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल ने कमाल की मिसाल बनाई। वे कई महीने जेल में रहे और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। हेमंत सोरेन ने थोड़ी शर्म दिखाई और गिरफ्तारी से चंद मिनट पहले इस्तीफा दे दिया। अगर गिरफ्तारी की बाध्यता नहीं होती तो वे भी इस्तीफा नहीं देते।

सवाल है कि ऐसा क्यों होता है कि भारत में केंद्र या राज्य का मंत्री या मुख्यमंत्री किसी भी विवाद में फंसने या अपनी कैसी भी विफलता के बाद इस्तीफा नहीं देते हैं? इसे दो पहलुओं से देख सकते हैं। एक आपराधिक मामला और दूसरा विफलता व नैतिकता का मामला। जहां तक आपराधिक मामलों में फंसने पर इस्तीफे का सवाल है तो वह इसलिए आसानी से नहीं होता है क्योंकि भारत में पहले से जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं ऐसे, सैकड़ों लोग सांसद और विधायक चुने गए हैं। सवाल है जब गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने और उनकी जानकारी सार्वजनिक होने के बावजूद जनता उनको चुन देती है तो चुने जाने के बाद किए गए किसी अपराध के लिए वे क्यों इस्तीफा देंगे? जब जनता ने उनको सांसद चुन दिया है तो वे केंद्र में मंत्री बनने के योग्य हैं और जनता ने विधायक चुना है तो वे राज्य में मंत्री और मुख्यमंत्री बनने के योग्य हैं। ऐसे में उनके और जनता के बीच में नैतिकता की बात कहां से आ गई! उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि जानने के बाद भी अगर जनता ने चुना है तो वे वैसे ही किसी अन्य अपराध के मामले में भी क्यों इस्तीफा देंगे? तभी भारत में ऐसे मामलों में भी जोर जबरदस्ती ही इस्तीफा होता है। गिरफ्तार होने या गिरफ्तारी की नौबत आने या पार्टी व सरकार के प्रमुख की ओर से राजनीतिक नुकसान की आशंका देख कर दबाव डालने के बाद ही इस्तीफा होता है।

अब रही जिम्मेदारी के निर्वहन में विफलता की बात तो उसमें भी आजादी के बाद से ही यह परंपरा चलती आ रही है कि इस्तीफा जोर जबरदस्ती ही होगा। ध्यान रहे भारत में पहला हाई प्रोफाइल इस्तीफा वीके कृष्ण मेनन का हुआ था। चीन के साथ युद्ध में भारत की हार के बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन पर दबाव था कि वे इस्तीफा दें। लेकिन वे इस्तीफा देने को तैयार नहीं थे। जब जन दबाव बहुत बढ़ा तो अंत में उन्होंने इस्तीफा दिया। हालांकि जयराम रमेश ने उनके जीवन पर एक किताब लिखी है, ‘अ चेकर्ड ब्रिलियंसः द मेनी लाइव्स ऑफ वीके कृष्ण मेनन’, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि कृष्ण मेनन तो बहुत पहले इस्तीफा देने को तैयार थे लेकिन उन्हें रोका गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू मानते थे कि चीन के साथ युद्ध में पराजय का मेनन से कोई संबंध नहीं है। फिर वे क्यों इस्तीफा देंगे।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चल रही बातें सुन कर क्या कृष्ण मेनन के इस्तीफे की कहानी से समानता नहीं दिखती है? ध्यान रहे पिछले कई दिनों से कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान तो बहुत पहले इस्तीफा देना चाहते थे। लेकिन प्रधानमंत्री को लगता था कि पेपर लीक होने से उनका कोई लेना देना नहीं है, बल्कि उन्होंने तो पेपर लीक होने के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई। सारे आरोपी पकड़े गए और रिकॉर्ड समय में दोबारा परीक्षा करा ली गई ताकि छात्रों का एक साल बरबाद न हो। इसके बाद भी उनका इस्तीफा हुआ तो उसका कारण यही है कि जन दबाव बहुत बढ़ गया यानी जोर जबरदस्ती से ही उनका इस्तीफा हुआ।

सोचें, पेपर लीक कितनी बड़ी विफलता है! एक मंत्री के कार्यकाल में दो बार नीट यूजी जैसी विशाल अखिल भारतीय परीक्षा के पेपर लीक हो जाएं तो उससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है? आश्चर्य यह है कि 2024 के शुरू में बजट सत्र में पेपर लीक का कठोर कानून बना था और मई में पेपर लीक हो गया, उसके बाद भी जून में जब नई सरकार बनी तो फिर धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बना दिया गया! फिर 2026 के मई में नीट यूजी की परीक्षा का पेपर लीक हो गया और धर्मेंद्र प्रधान कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे।

यह सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का मामला नहीं है। यह भारत की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था का मामला है, जहां हर व्यक्ति चाहता है कि जवाबदेही और नैतिकता का तकाजा दूसरे पर लागू हो। अपनी जवाबदेही और नैतिकता का ध्यान किसी को नहीं रहता है। जोर जबरदस्ती न हो तो न वीके कृष्ण मेनन का इस्तीफा होता और न धर्मेंद्र प्रधान का। याद करें कैसे कारगिल युद्ध के समय ताबूत घोटाला खुला था और तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज ने कितनी मुश्किल से इस्तीफा दिया था। ऐसे ही दबाव नहीं होता और पार्टियों को चुनावी नुकसान का भय नहीं होता तो न ए राजा इस्तीफा देते और न अशोक चव्हाण की विदाई होती। महिलाओं का दबाव नहीं होता तो एमजे अकबर का भी इस्तीफा नहीं होता। सोचें, इंगलैंड में क्रिस्टीन किलर कांड में एक मंत्री लॉर्ड प्रोफ्यूमो का नाम आया था तो प्रधानमंत्री हेराल्ड मैकमिलन की पूरी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। भारत में मी टू के उतने बड़े मुद्दे में एमजे अकबर फंसे तो उनका भी इस्तीफा मुश्किल से हुआ और दुनिया के सबसे बड़े सेक्स अपराधी एपस्टीन के साथ संबंधों का खुलासा होने के बाद भी हरदीप पुरी का इस्तीफा नहीं हुआ।

Anti Paper Leak Bill 2026 : पेपर लीक विरोधी बिल पास होने पर इंस्टाग्राम पर PM मोदी का संदेश, पेपर लीक गैंग पर होगी सख्त कार्रवाई

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संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि सरकार देश की परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक विरोधी विधेयक का संसद से पारित होना भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

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उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए आने वाले समय में कई और कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने देशवासियों से विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने कहा कि दशकों से केंद्र और राज्य की अलग-अलग सरकारें पेपर लीक की घटनाओं से निपटती रही हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता थी।

 

प्रधानमंत्री ने अपने करीब 2 मिनट 26 सेकंड के वीडियो में कहा कि सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था और उनके वादे के मुताबिक दोनों सदनों में बड़ी संख्या में सांसदों ने इस पर विस्तार से चर्चा की। अब दोनों सदनों ने सख्त प्रावधानों वाले इस विधेयक को पारित कर दिया है।

 

पीएम मोदी ने कहा कि विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और यह काम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी स्थिति को लंबे समय तक बने नहीं रहने देगी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने की अपील की।

राज्यसभा में ध्वनिमत से पास हुआ बिल

'Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026' को गुरुवार को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस दौरान कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया। इससे पहले बुधवार को लोकसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी। अब विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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पेपर लीक पर 5 से 10 साल तक की सजा

 

संशोधन विधेयक में पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल में शामिल लोगों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, संगठित अपराध के मामलों में कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऐसे मामलों में कम से कम 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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यह विधेयक ऐसे समय में पारित हुआ है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सरकार का दावा है कि नए कड़े प्रावधान परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात, किन मुद्दों पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति से भेंट की। राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं।

राष्ट्रपति कार्यालय ने पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। 

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक सप्ताह के सफल विदेश दौरे के बाद रविवार को भारत लौटी हैं। इस दौरान उन्होंने मोल्दोवा, नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया का दौरा किया था।  राष्ट्रपति के इस दौरे को भारत के इन यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

CM डॉ. मोहन यादव की लीडरशिप में MP ने बनाया नया रिकॉर्ड, E-Pravesh से 4.89 लाख छात्रों ने लिया एडमिशन

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन से राज्य की शिक्षा प्रणाली लगातार बेहतर होती जा रही है। उनके नेतृत्व में अब शिक्षा विभाग ने नया रिकॉर्ड बनाया है। उच्च शिक्षा विभाग की विद्यार्थी-केंद्रित ई-प्रवेश (e-Pravesh) प्रणाली ने उच्च शिक्षा में प्रवेश का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग द्वारा प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और सरल बनाने के लिए किए गए नवाचारों का सकारात्मक परिणाम इस वर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। इस साल 24 जुलाई तक प्रदेश के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में 4 लाख 89 हजार 169 विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त कर लिया है। यह पिछले चार वर्षों में समान अवधि का सर्वाधिक आंकड़ा है।

 

उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में समान अवधि तक 3 लाख 21 हजार 154, वर्ष 2024-25 में 3 लाख 25 हजार 95, वर्ष 2025-26 में 4 लाख 15 हजार 655 तथा वर्ष 2026-27 में 4 लाख 89 हजार 169 विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त किया। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 73 हजार 514 तथा वर्ष 2023-24 की तुलना में 1 लाख 68 हजार 15 अधिक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा से जुड़कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह वृद्धि प्रदेश में उच्च शिक्षा के प्रति बढ़ते विश्वास, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार तथा विद्यार्थी-अनुकूल नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

 

डिजिटल प्रवेश प्रणाली बनी सफलता की आधारशिला

प्रवेश में इस उल्लेखनीय वृद्धि का सबसे बड़ा कारण विभाग द्वारा विकसित ई-प्रवेश पोर्टल एवं मोबाइल एप है। अब विद्यार्थी घर बैठे ही पंजीयन, दस्तावेज अपलोड, ऑनलाइन सत्यापन, महाविद्यालय एवं पाठ्यक्रम का चयन, शुल्क भुगतान तथा प्रवेश की संपूर्ण प्रक्रिया सहजता से पूरी कर रहे हैं। इस डिजिटल व्यवस्था से विद्यार्थियों और अभिभावकों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिली है तथा पूरी प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और सुविधाजनक बनी है।

 

24×7 कॉल सेंटर और सीएलसी की सुविधा से मिला बड़ा लाभ

प्रवेश प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए विभाग ने प्रदेशभर के महाविद्यालयों में हेल्प सेंटर, विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु 24×7 कॉल सेंटर, जिला एवं संभाग स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग तथा प्रभावी तकनीकी सहायता की व्यवस्था की है। विशेष रूप से कॉलेज लेवल काउंसिलिंग (CLC) चरण को पूरी तरह विद्यार्थी-केंद्रित बनाया गया है। विद्यार्थियों को उसी दिन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके कारण अंतिम चरण में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी पसंद के महाविद्यालयों में तत्काल प्रवेश प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में अब तक 7 लाख 18 हजार 386 विद्यार्थियों ने ई-प्रवेश पोर्टल पर पंजीयन कराया है। इनमें से 6 लाख 31 हजार 854 विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूर्ण हो चुका है तथा 4 लाख 89 हजार 169 विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त कर लिया है। एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों में 3 लाख 38 हजार 148 अंडर ग्रेजुएशन, 1 लाख 4 हजार 455 पोस्ट ग्रेजुएशन और 46 हजार 566 एनसीटीई पाठ्यक्रमों में एडमिशन लेने वाले छात्र शामिल हैं। 

 

अंतिम चरण में ‘प्रवेश मेला’ अभियान से मिली नई गति

अतिरिक्त कॉलेज लेवल काउंसिलिंग (CLC) राउंड के दौरान उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के शासकीय, अशासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में “प्रवेश मेला” अभियान संचालित किया। इसका उद्देश्य रिक्त सीटों पर अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाना था। प्रवेश मेले के दौरान विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पंजीयन, चॉइस फिलिंग एवं संशोधन, दस्तावेज सत्यापन, सीट आवंटन संबंधी मार्गदर्शन तथा शुल्क भुगतान सहित प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। महाविद्यालयों में स्थापित हेल्प डेस्क के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया गया, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उसी दिन अपना प्रवेश सुनिश्चित किया। इसके अतिरिक्त जिन विद्यार्थियों ने पंजीयन या दस्तावेज सत्यापन के बाद भी शुल्क जमा नहीं किया था, उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। जिन पाठ्यक्रमों में रिक्त सीटें अधिक थीं, वहां विशेष परामर्श अभियान चलाकर विद्यार्थियों को विषय चयन एवं चॉइस संशोधन में सहायता प्रदान की गई।

 

किसी भी विद्यार्थी को वंचित नहीं रहने देने का लक्ष्य

सीएलसी चरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि अंतिम चरण में भी हेल्प सेंटर पूरी सक्रियता से संचालित रहें तथा प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक पहुंच सुनिश्चित की जाए। विभाग ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे 31 जुलाई से पूर्व अपना प्रवेश सुनिश्चित कर लें। विभाग का उद्देश्य है कि प्रदेश का कोई भी विद्यार्थी जानकारी के अभाव, तकनीकी कठिनाई या प्रक्रिया संबंधी समस्या के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रहे।

Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

priyanka gandhi

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है।

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यह विवाद उस समय सामने आया जब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे।

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परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल हैं वी. कामकोटि

 

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टास्क फोर्स NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से घोषित कई उपायों में से एक है। इन घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

 

214 शिक्षाविदों ने खुले पत्र में क्या कहा?

 

214 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ बताना, चाहे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के रूप में, गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि को देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से एक बताया है। पत्र में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कई ऐसे विचार जिन्हें कभी असंभव माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार की गई धारणाओं को बाद में खारिज कर दिया गया।

 

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में National Informatics Centre (NIC) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सीएसआर प्रभु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अप्पा राव पोडिले, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरडी कुलकर्णी और IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. वीआर देसाई समेत कई शिक्षाविद शामिल हैं।

 

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने क्या कहा था?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ हैं।

 

उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों में से एक को निशाना बनाया है। ठाकुर ने प्रियंका गांधी की सदन में बोलने की शैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दों पर बात करते समय मुस्कुराकर और मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं।

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बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद अब 214 शिक्षाविदों के खुले पत्र ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक बहस में व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। परीक्षा सुधारों और NEET-UG से जुड़े विवाद के बीच टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

cjp jantar mantar protest

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह टिप्पणी 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के दौरान की गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने के बाद केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है। अब मामले की जांच दिल्ली पुलिस करेगी।

 

शिकायतकर्ता स्मृति सिंह ने पुलिस को बताया कि वह गाजियाबाद के वसुंधरा की रहने वाली हैं और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं। उनके मुताबिक, 23 जुलाई को उनके संज्ञान में आया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान एक युवती ने देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि युवती की टिप्पणी से संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और जानबूझकर लोक शांति भंग करने का प्रयास किया गया।

 

नोएडा की सोसाइटी में रहती है युवती

शिकायतकर्ता के मुताबिक, कथित टिप्पणी करने वाली युवती की पहचान नोएडा के सेक्टर-168 स्थित लोट्स जिंग सोसाइटी निवासी रुचिका सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह मूल रूप से फरीदाबाद के ऊंचागांव की रहने वाली बताई गई है। जानकारी के मुताबिक, युवती ब्यूटी पार्लर संचालित करती है और इसी साल जनवरी में उसने नोएडा में फ्लैट खरीदा था।

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घटना के बाद से युवती और परिजन घर पर नहीं मिले

पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से युवती और उसके परिजन कथित तौर पर अपने आवास पर नहीं मिले हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

BNS की इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

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पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत शून्य अपराध संख्या (Zero FIR) दर्ज की गई है। इसके बाद केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया है, क्योंकि कथित घटना दिल्ली के जंतर-मंतर से संबंधित है। अब मामले की आगे की विवेचना दिल्ली पुलिस द्वारा की जाएगी। फिलहाल पुलिस युवती की तलाश के साथ-साथ वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

Kanwar Yatra 2026 : मेरठ रेंज में हाईअलर्ट, AI कैमरों और ड्रोन से होगी कांवड़ियों की पल-पल निगरानी, 34000 से ज्यादा कैमरे तैनात

meerth kawar yatra

श्रावण मास में निकलने वाली देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा आज से शुरू हो गई है। शिव भक्तों की इस यात्रा को लेकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का कहा है कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आस्था, अनुशासन और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। पैदल चलकर करोड़ों शिवभक्त अपनी अटूट श्रद्धा के चलते कंधे पर गंगाजल लेकर लंबी पदयात्रा करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

मेरठ रेंज में कांवड़ यात्रा को सकुशल, शांतिपूर्ण और ढंग से करवाने के लिए मेरठ रेंज पुलिस ने सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए हैं। मेरठ, बागपत, बुलंदशहर और हापुड़ जनपदों में हाई अलर्ट घोषित करते हुए अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से यात्रा की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। पुलिस ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई लेअर सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

 

मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि पूरे मेरठ रेंज में कांवड़ यात्रा की पल-पल की मॉनिटरिंग के लिए विशेषज्ञ टीमों की तैनाती की गई है। हरियाणा सीमा और प्रमुख मार्गों पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक से लैस 20 स्मार्ट कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा लगभग 4,000 आईपी (IP) कैमरे सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े हुए हैं, जिनकी निगरानी प्रशिक्षित कर्मी कर रहे हैं। वहीं ऑपरेशन दृष्टि के तहत पहले करीब 30,000 कैमरे संचालित है जो इस यात्रा को सुरक्षा दृष्टि मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

हाईटेक सर्विलांस कंट्रोल रूम से होगी 24 घंटे निगरानी

 

मेरठ पुलिस लाइन में अत्याधुनिक सर्विलांस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से कांवड़ यात्रा मार्ग, प्रमुख चौराहों, संवेदनशील क्षेत्रों, शिविरों और घाटों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। कंट्रोल रूम में फाइबर ऑप्टिकल आधारित आधुनिक सर्विलांस प्रणाली स्थापित की गई है, जिसके माध्यम से 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की निगरानी होगी। इनमें 250 एआई (AI) इनेबल्ड कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग भी शामिल है।

 

किसी भी संदिग्ध गतिविधि, भीड़ की असामान्य स्थिति या आपात परिस्थिति की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों और फील्ड में तैनात पुलिस टीमों तक पहुंचाई जाएगी। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का भी व्यापक उपयोग किया जाएगा।

 

कई राज्यों की पुलिस के बीच रहेगा सीधा समन्वय

 

मेरठ का हाईटेक कंट्रोल रूम उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान पुलिस के कम्युनिकेशन नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

 

सोशल मीडिया पर 24 घंटे पैनी नजर

 

डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति माहौल खराब करने की नीयत से पुराना वीडियो या भ्रामक सामग्री वायरल करता है अथवा अफवाह फैलाने का प्रयास करता है तो उसकी तत्काल तकनीकी जांच कर एफआईआर दर्ज करते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

व्यापक सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था

 

कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एआई कैमरे, ड्रोन सर्विलांस, स्थायी एवं अस्थायी पुलिस चौकियां, विशेष ट्रैफिक प्लान, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), वायरलेस संचार व्यवस्था, नावें, गोताखोर तथा अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम से सभी गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी, ताकि किसी भी स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।

 

श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील

 

मेरठ पुलिस ने कांवड़ यात्रियों और आम नागरिकों से शांति, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने लोगों से अनुरोध किया है कि किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

 

कांवड़ यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

 

सावन मास में भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक कांवड़ यात्रा सनातन परंपरा की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। करोड़ों शिवभक्त उत्तराखंड के हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं।

 

मान्यता है कि सावन में भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। कांवड़ यात्रा केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी अनुपम उदाहरण है। यात्रा के दौरान जगह-जगह लगाए जाने वाले सेवा शिविर, भंडारे और चिकित्सा सहायता केंद्र भारतीय समाज की सेवा भावना और सामूहिक सहयोग की परंपरा को भी जीवंत करते हैं।

 

इस वर्ष लगभग 12 दिनों तक चलने वाली कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त उत्तराखंड की पवित्र गंगा से जल भरकर अपने गंतव्यों तक पैदल पहुंचेंगे। इसे देखते हुए मेरठ रेंज पुलिस ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक और तकनीक आधारित प्रबंध किए हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित, सहज और शांतिपूर्ण वातावरण में अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।

अयोध्या राम मंदिर चोरी के 81 लाख कैसे बरामद हुए? चंपत राय की चिट्‍ठी से खुला बड़ा राज

ayodhya ram mandir trust meeting

Ayodhya Ram Mandir: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफे ने राम मंदिर के दानपात्र से हुई लाखों की चोरी का सच उजागर कर दिया है। ट्रस्ट अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को लिखे गए इस पत्र में स्वीकार किया गया है कि दानपात्र से चोरी की गई 81 लाख रुपए की धनराशि वापस करवा ली गई थी।

पत्र से खुले बरामदगी के राज

पत्र के माध्यम से हुए खुलासे के मुताबिक दानपात्र के चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ संदिग्धों ने 81 लाख रुपए की चोरी की। ​5 जून को सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर संदिग्धों की गतिविधियां दर्ज पाई गईं। ​5 से 8 जून के बीच पुलिस में तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के बजाय ट्रस्ट ने संदिग्धों से पूछताछ की। आरोपी युवकों और उनके परिजनों ने चोरी स्वीकार करते हुए 81 लाख रुपए नकद ट्रस्ट में जमा कराए और लिखित स्वीकारोक्ति दी।

​SIT जांच की मांग व इस्तीफा

मामला मीडिया में आने पर पारदर्शी जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से SIT गठन का अनुरोध किया गया। श्रद्धालुओं की आस्था और ट्रस्ट की साख बनाए रखने के उद्देश्य से दोनों पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे 6 जुलाई की बैठक में स्वीकार कर लिया गया। दूसरी ओर, ​मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यूपी सरकार ने एसआईटी का पुनर्गठन किया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के 13 जुलाई के आदेश के तहत यह नई जांच टीम गठित की गई है। इनमें खनऊ रेंज की आईजी किरण एस जांच टीम का प्रमुख बनाया गया, जबकि अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर सदस्य के रूप में शामिल हैं। 

सवाल और आक्रोश?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि जांच में अब तक केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरी है, जबकि बड़े पदाधिकारियों से गहन पूछताछ होना अभी बाकी है।

ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव

​राम मंदिर ट्रस्ट का नए सिरे से पुनर्गठन किया जा रहा है। जगदीश आफले को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सचिव नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के खातों के संचालन के लिए जगदीश आफले को आधिकारिक सिग्नेचर अथॉरिटी सौंपी गई है। आफले IIT मुंबई से बीटेक/एमटेक हैं। वे बचपन से ही RSS से जुड़े रहे हैं। अमेरिका और यूरोप में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने के बाद वे बिना कोई फीस लिए राम मंदिर के प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

​CEO पद के लिए हो रही स्क्रीनिंग

​ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद के लिए 5 हजार 200 आवेदन प्राप्त हुए हैं। ​रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली कमेटी आवेदनों की जांच कर रही है। सचिव, प्रवक्ता और पहले CEO के नाम की आधिकारिक घोषणा 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में की जाएगी।

iPhone 18 Pro Max vs Pixel 11 Pro XL: अगस्त में Google और सितंबर में Apple की टक्कर, जानें कौन होगा सबसे दमदार?

Google Pixel 11

Apple और Google एक बार फिर प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में आमने-सामने आने की तैयारी में हैं। Google का नया Pixel 11 Pro XL अगस्त में लॉन्च होने की उम्मीद है, जबकि Apple सितंबर में iPhone 18 Pro Max पेश कर सकता है। दोनों फोन में इस बार बड़े डिजाइन बदलाव के बजाय हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में कई अहम अपग्रेड देखने को मिल सकते हैं। दोनों फ्लैगशिप स्मार्टफोन के बीच मुकाबला केवल डिजाइन तक सीमित नहीं रहेगा। परफॉर्मेंस, कैमरा, बैटरी लाइफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस इनके बीच बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।

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डिजाइन में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं

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iPhone 18 Pro Max में Apple अपने मौजूदा डिजाइन को ही आगे बढ़ा सकता है। फोन में एल्यूमीनियम फ्रेम और पीछे उभरा हुआ कैमरा मॉड्यूल मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कंपनी नए कलर ऑप्शन पेश कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone 18 Pro Max में डार्क रेड कलर को प्रमुख विकल्प बनाया जा सकता है। इसके अलावा Light Blue, Dark Grey और Silver कलर भी मिल सकते हैं।

 

वहीं Google Pixel 11 Pro XL में Pixel 10 Pro XL से मिलती-जुलती डिजाइन लैंग्वेज देखने को मिल सकती है। हालांकि, रियर कैमरा बार के चारों ओर नियोन LED लाइट स्ट्रिप मिलने की चर्चा है, जो फोन को अलग लुक दे सकती है। Pixel 11 Pro और Pro XL को Green, Light Green, Black और Dune कलर में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।

 

डिस्प्ले में Apple और Google की अलग रणनीति

 

iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच का Liquid Retina XDR डिस्प्ले और ProMotion तकनीक जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, स्क्रीन में कई अंदरूनी सुधार किए जा सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स से ज्यादा हो सकती है। LTPO+ तकनीक के इस्तेमाल से पावर एफिशिएंसी में सुधार की उम्मीद है। Dynamic Island का आकार भी करीब 40 फीसदी तक छोटा किए जाने की चर्चा है, जिससे यूजर्स को ज्यादा immersive viewing experience मिल सकता है।

 

दूसरी तरफ Pixel 11 Pro XL में 6.8 इंच का OLED डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है। इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट, HDR सपोर्ट और 3,000 निट्स से ज्यादा की पीक ब्राइटनेस मिल सकती है। बायोमेट्रिक सिक्योरिटी में दोनों कंपनियों का तरीका अलग होगा। Apple Face ID पर भरोसा जारी रख सकता है, जबकि Google अल्ट्रासोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ Class 3 फेस अनलॉक सिस्टम दे सकता है।

 

Processor: iPhone 18 Pro Max की बढ़त की उम्मीद

 

परफॉर्मेंस के मामले में Apple एक बार फिर मजबूत स्थिति में दिखाई दे सकता है। iPhone 18 Pro Max में कंपनी का नया 2nm A20 Pro chipset मिलने की उम्मीद है। यह प्रोसेसर स्पीड और पावर एफिशिएंसी दोनों में बड़ा सुधार ला सकता है। अगर सामने आई रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो A20 Pro Apple का अब तक का सबसे पावरफुल और एफिशिएंट मोबाइल प्रोसेसर हो सकता है।

 

Google Pixel 11 Pro XL में Tensor G6 चिपसेट मिलने की उम्मीद है, जिसे 2nm प्रोसेस पर तैयार किया जा सकता है। इसका फोकस AI प्रोसेसिंग और ऑन-डिवाइस मशीन लर्निंग पर ज्यादा रहने की संभावना है।

 

हालांकि, Tensor प्रोसेसर आमतौर पर बेंचमार्क परफॉर्मेंस के बजाय AI क्षमताओं पर अधिक फोकस करते हैं। ऐसे में raw computing power के मामले में iPhone 18 Pro Max को बढ़त मिल सकती है। दोनों फोन में 12GB RAM और 256GB, 512GB तथा 1TB स्टोरेज विकल्प मिलने की उम्मीद है। हालांकि, Pixel 11 Pro XL में पहली बार 2TB स्टोरेज विकल्प आने की भी चर्चा है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो iPhone 18 Pro Max में iOS 27 और Pixel 11 Pro XL में Android 17 मिलने की उम्मीद है।

 

Camera: यहां Google दे सकता है Apple को कड़ी टक्कर

 

कैमरा दोनों फ्लैगशिप फोन के बीच सबसे बड़ा मुकाबला बन सकता है।

 

Apple के iPhone 18 Pro Max में ट्रिपल 48MP रियर कैमरा सेटअप जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, मुख्य कैमरे में variable aperture technology जोड़ी जा सकती है। इस तकनीक की मदद से कैमरा कम रोशनी या पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के दौरान aperture को ज्यादा खोल सकेगा, जबकि तेज रोशनी में इसे कम करके ज्यादा sharp और detailed तस्वीरें लेने में मदद मिलेगी।

 

फ्रंट कैमरे में भी बदलाव की उम्मीद है। इसमें नया 18MP Centre Stage सेंसर दिया जा सकता है, जो वीडियो कॉल के दौरान यूजर को फ्रेम के बीच में रखने में मदद करेगा। Pixel 11 Pro XL में 50MP मुख्य कैमरे के साथ 48MP ultrawide और 48MP periscope telephoto कैमरा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मुख्य और टेलीफोटो कैमरों में नए सेंसर इस्तेमाल किए जाने की चर्चा है।

 

Google के फोन में 42MP selfie camera भी मिलने की उम्मीद है।

 

कैमरा एक्सपीरियंस में Apple की ताकत वीडियो रिकॉर्डिंग और कलर कंसिस्टेंसी हो सकती है, जबकि Google computational photography और AI-powered image processing पर ज्यादा फोकस कर सकता है। Battery: iPhone में मिल सकती है बड़ी बैटरी बैटरी के मामले में भी iPhone 18 Pro Max इस बार बड़ा अपग्रेड दे सकता है।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी eSIM-only मॉडल में 5,567mAh की बैटरी दी जा सकती है, जबकि इंटरनेशनल मॉडल में 5,391mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है।

 

अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं तो यह किसी standard iPhone में दी गई अब तक की सबसे बड़ी बैटरी हो सकती है। दूसरी ओर Pixel 11 Pro XL में करीब 5,200mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है, जो पिछले मॉडल के आसपास ही होगी। हालांकि Pixel की बैटरी क्षमता भी प्रतिस्पर्धी होगी, लेकिन बड़ी बैटरी और ज्यादा पावर-एफिशिएंट A20 Pro चिपसेट के कारण iPhone 18 Pro Max को real-world battery endurance में बढ़त मिल सकती है।

Launch Date: पहले Pixel, फिर iPhone

 

Google इस साल flagship smartphone season की शुरुआत कर सकता है। Pixel 11 Pro XL को अगस्त में पेश किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद Apple सितंबर में iPhone 18 Pro Max समेत पूरी iPhone 18 सीरीज लॉन्च कर सकता है। हर साल की तरह इस बार भी Apple का सितंबर लॉन्च प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

 

iPhone 18 Pro Max या Pixel 11 Pro XL, किसे खरीदना बेहतर होगा?

दोनों फोन में इस बार बड़े डिजाइन बदलाव के बजाय refined hardware, बेहतर display, upgraded cameras और AI capabilities पर फोकस देखने को मिल सकता है। अगर आपकी प्राथमिकता maximum performance, battery efficiency और Apple का software ecosystem है, तो iPhone 18 Pro Max आकर्षक विकल्प हो सकता है। अगर आप AI features, computational photography और Google का Android experience पसंद करते हैं तो Pixel 11 Pro XL एक मजबूत विकल्प बन सकता है। हालांकि, दोनों फोन के अंतिम स्पेसिफिकेशन, कीमत और फीचर्स लॉन्च के समय ही पूरी तरह स्पष्ट होंगे।

धमकी के बाद छिपकर रहे थे दीपके के माता-पिता, CJP नए आंदोलन की तैयारी में

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार पर आए राजनीतिक दबाव और धमकियों के सनसनीखेज मामले ने तूल पकड़ लिया है। अभिजीत की मां अनीता दीपके ने 29 जुलाई को एक मराठी समाचार चैनल के सामने खुलासा किया कि उनके बेटे को एक वीडियो के जरिए सीधे धमकी दी गई थी। इस वीडियो में साफ चेतावनी दी गई थी कि अगर अभिजीत भाजपा में शामिल नहीं हुए तो उनके माता-पिता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, सीजेपी ने कहा कि उसे न सरकार पर भरोसा और न ही सुप्रीम कोर्ट पर। अब वह सरकार के खिलाफ अगले आंदोलन की तैयारी कर रही है। 

16 दिनों तक कोंकण में छिपा रहा परिवार

अभिजीत दीपके के नई दिल्ली से वापस लौटने से पहले मराठी समाचार चैनल से बातचीत करते हुए उनकी मां अनीता दीपके का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने बताया कि धमकी के बाद परिवार में ऐसा डर समा गया था कि उन्हें अपना घर छोड़कर कोंकण क्षेत्र में अपने एक रिश्तेदार के घर पर 16 दिनों तक शरण लेनी पड़ी। ALSO READ: जेन-जी को 'गटर जनरेशन' कहकर घिरीं कंगना रनौत, CJP ने दिया करारा जवाब

आप यह वीडियो मत देखना

अनीता दीपके ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि अभिजीत को काफी समय से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उसने शुरुआत में हमें परेशान न करने की नीयत से कुछ नहीं बताया। बाद में उसने एक धमकी भरे वीडियो का जिक्र किया और मुझसे खास हिदायत दी कि मैं उस क्लिप को बिल्कुल न देखूं। उस क्लिप में अभिजीत को खुली चेतावनी दी गई थी कि यदि वह बीजेपी में शामिल नहीं होता है, तो उसके माता-पिता के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। इस सीधी धमकी के बाद अभिजीत ने खुद हमसे घर छोड़कर कहीं सुरक्षित जगह पर चले जाने का आग्रह किया। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

 

मां अनीता ने कहा कि अभिजीत खुद ऐसी धमकियों और राजनीतिक दबाव से नहीं डरते हैं, लेकिन चूंकि उनका परिवार राजनीति और इन खतरनाक चीजों का आदी नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने माता-पिता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। अभिजीत दीपके के पिता ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में काम करने वाले व्यक्ति को आलोचनाओं का सामना करना ही पड़ता है। लेकिन कुछ लोग 'फिक्स्ड सोच' के होते हैं जो रचनात्मक विरोध के बजाय सीधी धमकियों और दुश्मनी पर उतर आते हैं। ALSO READ: CJP के आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पार्टी का आरोप- राज्यों में जारी है गिरफ्तारियां, कानूनी सहायता के लिए बनाया फंड

नए आंदोलन की तैयारी में सीजेपी

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी CJP को एतराज है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि उन प्रदर्शनकारियों के साथ कोई नरमी न बरती जाए, जिनका आपराधिक रिकार्ड रहा है, जबकि सीजेपी नेता सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की बात कह रहे हैं। सीजेपी ने पेपर लीक रोकने की सरकार की पहल को भी नाकाफी बताया है। अब सीजेपी नए आंदोलन की तैयारी में जुट गई है। सीजेपी ने सरकार से बातचीत के बाद धरना-प्रदर्शन तो रोक दिया, लेकिन सरकार पर शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए फिर से आंदोलन की चेतावनी भी दी है। 

 

दरअसल, पेपर लीक रोकने के लिए सरकार के कानून से सीजेपी संतुष्ट नहीं है। उसके प्रवक्ता आशुतोष रांका कहते हैं कि सरकार ने जो बिल लोकसभा में पास कराया है, वह कारगर नहीं होगा। उनका कहना है कि परीक्षाओं के पेपर लीक रोकने के लिए सीजेपी ने कई सुझाव दिए थे, पहले उन पर अमल होना चाहिए।