CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा आयोजित छात्रों के विरोध प्रदर्शन भले ही केंद्रीय राजनीति में बड़े बदलावों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ चर्चा में आए हों, लेकिन इसका जमीनी और सबसे व्यापक असर अब पूरे भारत के सरकारी स्कूलों में महसूस किया जा रहा है। इनमें सबसे उल्लेखनीय और सकारात्मक दृश्य यह है कि अब स्कूली बच्चे खुद अपने बुनियादी अधिकारों के लिए निडर होकर खड़े हो रहे हैं और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो दिखाती हैं कि कैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। वे पंखे, बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं और कक्षाओं में भारी शिक्षकों की कमी के खिलाफ मुखर होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

1. राजस्थान: शिक्षकों की भारी कमी पर छात्रों का फूटा गुस्सा
राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा गाँव से एक ऐसा ही बड़ा विरोध प्रदर्शन सामने आया है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

धरना और प्रशासनिक कार्रवाई: छात्रों ने कई घंटों तक स्कूल के बाहर धरना दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। अधिकारियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर शांत कराया और तुरंत चार नए शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश जारी किया। साथ ही, अगले 10 दिनों के भीतर बाकी बची तीन रिक्तियों को भी भरने का लिखित आश्वासन दिया।

छात्रों के मन की बात: एक छात्र ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा: “शिक्षा विभाग और सरकार से हमारी माँग है कि वे हमारी बात सुनें। यहाँ एक भी द्वितीय श्रेणी का शिक्षक नहीं है और प्रथम श्रेणी के भी केवल एक ही शिक्षक हैं—एक इतिहास के और दूसरे हिंदी के। इतिहास के शिक्षक के पास प्रधानाचार्य का भी प्रभार है, जिससे प्रशासनिक काम के बोझ के कारण पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। हमारी माँग है कि कक्षा 1 से 3 और एल1 व एल2 के लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो हम स्कूल पर ताला लगा देंगे।”

2. बिहार (गया): पंखे, हैंडपंप और टूटी बेंचों के खिलाफ मोर्चा
बिहार के गया जिले में एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने पंखे, हैंडपंप और बैठने के लिए बेंच न होने के कारण भारी धरना-प्रदर्शन किया।

जिलाधिकारी (डीएम) को आना पड़ा मैदान में: शुरुआत में जिला प्रशासन ने छात्रों को शांत करने के लिए एक कनिष्ठ अधिकारी को भेजा, लेकिन छात्रों ने विरोध खत्म करने से साफ इनकार कर दिया और सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से मिलने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों के इस कड़े रुख के बाद अंततः डीएम को खुद स्कूल पहुंचकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं।
 
3. महाराष्ट्र (डहानू): अस्वच्छ शौचालय और बदहाल बुनियादी ढांचा
महाराष्ट्र के डहानू में छात्रों ने अपने स्कूलों में अस्वच्छ शौचालयों, असुरक्षित माहौल और बुनियादी ढांचे की कमी के खिलाफ बहादुरी से आवाज उठाई।

छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी केवल सरकारी निरीक्षणों के दौरान ही उपलब्ध कराई जाती है, बाकी दिनों में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

4. उत्तर प्रदेश (फतेहपुर): सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों का प्रदर्शन
अभी कुछ ही दिन पहले, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर स्कूल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दबाव के चलते अंततः स्कूल प्रशासन को लिखित आश्वासन देना पड़ा कि छात्रों की सभी मांगें जल्द पूरी की जाएंगी।

बुनियादी समानता और शिक्षा का अधिकार: एक बड़ा सवाल
इन चारों राज्यों में छात्रों की माँगें काफी हद तक एक जैसी और बेहद बुनियादी हैं: सुचारू कक्षाएँ, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित माहौल, पर्याप्त शिक्षक और पीने योग्य शुद्ध पानी।

इन विरोध प्रदर्शनों ने एक पुरानी और गंभीर विषमता को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है: आसानी से मिलने वाली ये बुनियादी सुविधाएं जो शिक्षा का न्यूनतम स्तर होनी चाहिए, उनके लिए आज भी सरकारी स्कूलों के बच्चों को सड़कों पर उतरने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? बदलाव की यह बयार यह साबित करती है कि अब देश का युवा और छात्र अपनी शिक्षा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो रहा है।

PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

FIR on Meta chief on morfed video against PM Modi

छात्र प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ किए गए) कंटेंट और आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए जाने के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में Meta India के प्रमुख, कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ALSO READ: पुजारी बनकर संसद पहुंचे पप्पू यादव, राहुल गांधी ने दानपात्र में डाले पैसे; 'चढ़ावा चोरी' पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI से मॉर्फ्ड वीडियो बनाने के मामले में हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ एक केस दर्ज किया है। पीएम मोदी ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान वीडियो शेयर किया था, जिसको बाद में कुछ लोगों ने AI की मदद से एडिट किया है और गलत जानकारी सर्कुलेट की।

 

पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित मॉर्फ्ड सामग्री किसने तैयार की, किसने उसे प्रसारित किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके प्रसार को रोकने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। ALSO READ: 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

 

क्या है पूरा मामला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, NEET प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी कथित रूप से मॉर्फ्ड तस्वीरें, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तेजी से वायरल हुई थी। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि विवादित कंटेंट के प्रसार में किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका रही और क्या किसी प्लेटफॉर्म ने कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने में लापरवाही बरती।

 

किन पहलुओं की होगी जांच?

 

साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार जांच में कई बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—

  • कथित मॉर्फ्ड कंटेंट का मूल स्रोत कौन था।
  • कंटेंट किस नेटवर्क के माध्यम से वायरल हुआ।
  • संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका क्या रही।
  • लागू कानूनों और आईटी नियमों का पालन हुआ या नहीं।
  • डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई।

 

पुलिस का क्या कहना है?

साइबर क्राइम विभाग का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी, भ्रामक या मॉर्फ्ड सामग्री का प्रसार कानून के दायरे में आता है और ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट या संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

 

मॉर्फ्ड वीडियो क्या होते हैं? 

मॉर्फ्ड वीडियो, असल में ऐसे वीडियो होते हैं जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या हाव-भाव डिजिटल तकनीक, AI या वीडियो या एडिटिंग सॉफ्टवेयर के जरिए बदले जाते हैं। इन वीडियो का मकसद होता है कि लोगों को ऐसा लगे कि वह व्यक्ति कुछ ऐसा कह या कर रहा है, जो असल में उसने कहा ही नहीं था।

पुजारी बनकर संसद पहुंचे पप्पू यादव, राहुल गांधी ने दानपात्र में डाले पैसे; ‘चढ़ावा चोरी’ पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन

opposition chadawa chori drama in parliament

बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव शुक्रवार को संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहने पुजारी के रूप दिखाई दिए। विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में वह पुजारी के वेश में जमीन पर बैठे नजर आए। उनके बगल में दान पात्र रखा हुआ था और राहुल गांधी उसमें पैसे डालते नजर आ रहे थे। वहीं, उनके पीछे मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी समेत अन्य विपक्षी सांसद दिख रहे थे और उनके हाथ में 'अमित शाह संसद से गायब क्यों' वाला पोस्टर दिख रहा था। ALSO READ: 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

 

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

कांग्रेस ने इस ड्रामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पार्टी ने साथ में लिखी पोस्ट में कहा, 'चढ़ावा चोर – गद्दी छोड़' राम मंदिर में BJP-RSS ने 'चढ़ावा चोरी' कर देश के करोड़ों रामभक्तों की श्रद्धा से खिलवाड़ किया है- ये महापाप है। आज संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने बेहद अनोखे तरीके से 'चढ़ावा चोरी' के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

पप्पू यादव दानपात्र लेकर भागते नजर आए

विपक्षी सांसदों ने आज संसद में विरोध के दौरान एक ड्रामा किया। इसमें सांसद पप्पू यादव पुजारी बनकर आए। राहुल गांधी ने भी चंदा दानपात्र में डाला और पुजारी अयोध्या सांसद के पैर छूते दिखाई दिए। फिर पुजारी बने पप्पू यादव दानपात्र लेकर भाग गए। इस तरह विपक्ष ने अयोध्या के राम जन्मभूमि से कथित चढ़ावा चोरी को दिखाया गया है। ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

गौरतलब है कि विपक्षी सांसद संसद में चढ़ावा चोरी मामले में चर्चा की मांग कर रहे हैं। सपा ने भी लखनऊ में अपने दफ्तर के बाहर लगाए पोस्टर में चढ़ावा चोरी को महापाप कहा है। 

‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

opposition protest in parliament

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था 'अमित शाह संसद से गायब क्यों'? ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

संसद में एंटी पेपर लिक कानून पास होने के बाद भी छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष सांसदों की नाराजगी कम नहीं हुई है। उन्होंने अमित शाह से छात्रों पर की गई बर्बरता का जवाब मांगा।

 

कांग्रेस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' ये सवाल न सिर्फ विपक्ष बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। छात्रों पर की गई बर्बरता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो नरेंद्र मोदी तत्काल उन्हें गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करें। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।


इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी जी 10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

उन्होंने कहा कि युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उन पर कार्रवाई नहीं होगी, अब आपकी सरकारें अपनी ही जुबान से पलट गईं है। युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करवा रही है, बच्चियों को Dox किया जा रहा है। अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद सदन में कदम तक नहीं रखा, अकाउंटेबिलिटी के स्टेटमेंट से डरते रहे। अब ये सब फेस-सेविंग, इमेज प्रोटेक्शन के हथकंडे नहीं चलेंगे, युवा आपका सच जान चुका है। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो अमित शाह का इस्तीफा लीजिए।

‘Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते’: FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

rahul gandhi on FIR

जंतर मं‍तर पर छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री और उनकी मां को गांलियां देने वालों के खिलाफ पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एफआईआर पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ीं। अब आप एफआईआर दर्ज कर रहे हैं। आप Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते। ALSO READ: Anti Paper Leak Bill 2026 : पेपर लीक विरोधी बिल पास होने पर इंस्टाग्राम पर PM मोदी का संदेश, पेपर लीक गैंग पर होगी सख्त कार्रवाई

 

Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह – आप Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते। पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ीं। अब आप एफआईआर दर्ज कर रहे हैं और उनके अकाउंट बंद कर रहे हैं। आप भारत का अतीत हैं। भारत के भविष्य के साथ आप कैसा बर्ताव करते हैं, इस बात को लेकर सावधान रहें।

नोएडा की युवती के खिलाफ FIR

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत शून्य अपराध संख्या (Zero FIR) दर्ज की गई है। टिप्पणी करने वाली युवती की पहचान नोएडा के सेक्टर-168 स्थित लोट्स जिंग सोसाइटी निवासी रुचिका सिंह के रूप में हुई है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, यह टिप्पणी 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के दौरान की गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने के बाद केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है। अब मामले की जांच दिल्ली पुलिस करेगी। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

अराजक तत्वों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाएंगे

दिल्ली पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया है कि प्रदर्शन के दौरान उपद्रव मचाने वाले अराजक तत्वों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाएंगे। नई दिल्ली जिले के पांच थानों और स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट में दर्ज सभी 21 एफआइआर अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ हैं, इसमें किसी भी छात्र को नामजद नहीं किया गया है।

पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं व अन्य के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है।

 

मामले पर क्या बोली सीजेपी?

सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास, पिछले कई दिनों से इंटरनेट मीडिया के जरिये और मीडिया को जारी बयान में बार-बार दिल्ली पुलिस को छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की धमकी दे रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार से हुई बातचीत में एक शर्त यह भी था कि छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे पिछले मंगलवार तक वापस ले लिए जाएंगे।

Top News 31 July: ITR भरने की आखिरी तारीख आज, 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, भिवंडी हादसा समेत 5 बड़ी खबरें

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Top News 31 July : आज इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख है। मौसम विभाग ने 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। भिवंडी में 4 मंजिला इमारत गिरी। संसद में एंटी पेपर लिक बिल पास होने के बाद पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी किया वीडियो मैसेज। प्रियंका गांधी की  IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई टिप्पणी पर बवाल। 31 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

ITR भरने की आज आखिरी तारीख

आईटीआर भरने की आज आखिरी तारीख है। अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो जल्द कर लें। समय पर आईटीआर भरने से आपका टैक्स रिकॉर्ड सही रहता है, ज्यादा कटा हुआ टैक्स वापस (रिफंड) मिल सकता है और बाद में जुर्माने जैसी परेशानी से बचा जा सकता है। ALSO READ: ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

 

IMD का 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और एक पश्चिमी विक्षोभ आने वाले दिनों में कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश करा सकते हैं। देश के 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: IMD का बड़ा अलर्ट: 17 राज्यों में भारी बारिश का खतरा, क्या है बाढ़ प्रभावित गुजरात-असम का हाल?

 

भिवंडी में 4 मंजिला इमारत गिरी

महाराष्‍ट्र के भिवंडी में देर रात एक निर्माणाधिन 4 मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई। NDRF समेत कई टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी।

 

एंटी पेपर लीक बिल पास होने पर क्या बोले पीएम मोदी?

संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर अपने संदेश में कहा कि सरकार देश की परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए आने वाले समय में कई और कदम उठाए जाएंगे। ALSO READ: Anti Paper Leak Bill 2026 : पेपर लीक विरोधी बिल पास होने पर इंस्टाग्राम पर PM मोदी का संदेश, पेपर लीक गैंग पर होगी सख्त कार्रवाई

 

प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर बवाल

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है। ALSO READ: Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की 'गौमूत्र एक्सपर्ट' टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

सेलेब्रिटीज के पीछे का सच काला भी!

समाज को चाहिए कि वह अपने आदर्श माने जाने वाली हस्तियों से उच्च नैतिक मानदंडों की अपेक्षा करे। फिर वो चाहे कोई प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हो, आध्यात्मिक गुरु हो, उद्योगपति हो, या कोई अन्य मशहूर हस्ती, जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और अदालतों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

आए दिन हमें यह देखने को मिलता है कि उद्योग जगत, मनोरंजन जगत, आध्यात्मिक संस्थाओं और खेल जगत के कुछ नामी-गिरामी हस्तियों के नाम बार-बार ‘मनी लॉन्ड्रिंग’, फर्जी सौदों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के मामलों में चर्चा में आते हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी मेहनत, प्रतिभा और लोकप्रियता से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीता है। फिर भी इनमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी अच्छी छवि को दाव पर लगाकर काले धन के सौदों में उलझ जाते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल उनके व्यक्तिगत पतन का संकेत है, बल्कि पूरे समाज में भ्रष्टाचार की जड़ों को और मजबूत करती है।

गौरतलब है कि इन हस्तियों के पास पहले से ही करोड़ों की अपार संपत्ति, ब्रांड एंडोर्समेंट, फिल्मों या मैचों से की गई कमाई और सामाजिक प्रतिष्ठा होती है। फिर भी वे अवैध गतिविधियों की ओर क्यों आकर्षित होते हैं? एक बड़ा कारण है लोभ। सफलता के बाद भी और अधिक धन और अधिक पावर की भूख कभी नहीं मिटती। कई बार वे सोचते हैं कि उनकी छवि इतनी मजबूत है कि कोई उन पर उंगली नहीं उठाएगा। कुछ लोग अपने व्यवसाय को ‘विविधीकरण’ का नाम देकर रियल एस्टेट, शेल कंपनियों, दान के नाम पर काले धन को सफेद करना या विदेशी खातों के जरिए धन छिपाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बनाई हुई प्रतिष्ठा एक सुरक्षा कवच लगती है, लेकिन असल में यह उनके गिरने का कारण बन जाती है।

कई मामलों में यह भी देखने को मिलता है कि ये लोग अपने सरकारी संपर्कों और प्रभावशाली लोगों से परिचित होने के कारण अत्यधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगी या मामला दबा दिया जाएगा। यह आत्मविश्वास अक्सर गलत साबित होता है, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका होता है। लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो। फिर भी व्यवहार में कई बार प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच धीमी पड़ जाती है या सबूतों की कमी का हवाला देकर मामले कमजोर हो जाते हैं।

भारत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और अन्य एजेंसियां जब ऐसे मामलों की जांच करती हैं, तो अक्सर आरोपियों को सजा नहीं दिला पाती। इसके कई कारण हो सकते हैं; जटिल कानूनी प्रक्रियाएं, सबूतों की कमी, गवाहों का दबाव में आना या लंबी अदालती सुनवाई। कभी-कभी राजनीतिक प्रभाव या संसाधनों की कमी भी जांच को प्रभावित करती है। लेकिन ऐसे ‘जाहिर कारणों’ से बरी होना या मामला रुक जाना समाज में गलत संदेश देता है। आम आदमी सोचता है कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। यह धारणा लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

इस स्थिति में अदालतें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। स्वतंत्र न्यायपालिका को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई करे, सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन करे और दोषियों को उचित सजा दे। विशेष अदालतें या फास्ट-ट्रैक प्रक्रियाएं मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराधों के लिए बनाई जा सकती हैं। अदालतें एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दे सकती हैं कि जांच में देरी न की जाए और कोई भी प्रभाव जांच को बाधित न करे। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति अपनी शक्ति का दुरुपयोग करके जांच को प्रभावित करने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। न्याय तभी प्रभावी होगा जब वह बिना भेदभाव के लागू हो।

ज़रूरत है तो इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाना की। जनता को समझना चाहिए कि सेलेब्रिटीज की चमकदार जिंदगी के पीछे कई बार काले कारोबार की छाया होती है। मीडिया और जागरूक नागरिकों को ऐसे मामलों की लगातार निगरानी करनी चाहिए। एजेंसियों को चाहिए कि वे शिकायतों को गंभीरता से लें, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। शिकायत दर्ज होने के बाद प्रारंभिक जांच तुरंत शुरू होनी चाहिए और सबूतों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। यदि शिकायत में गंभीर आरोप हों और उसके ठोस प्रमाण भी संलग्न हों तो जांच एजेंसियों जिम्मेदारी हो कि शिकायतकर्ता की पहचान को गुप्त रखा जाए।

कानून के जानकार मानते हैं कि शिकायत दर्ज कराने के लिए ठोस सबूत जरूरी होते हैं।

सामान्य दस्तावेजी सबूतों में बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी दस्तावेज, कंपनी रजिस्ट्रेशन पेपर्स, इनकम टैक्स रिटर्न और संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। डिजिटल सबूत आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण हैं; ऑडी-वीडियो रिकॉर्डिंग, ईमेल, व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप के चैट, सोशल मीडिया पोस्ट, डिजिटल वॉलेट के लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन, क्लाउड स्टोरेज में सेव की गई फाइलें और सर्वर लॉग। ये सबूत समय-स्टैम्प के साथ उपलब्ध होने चाहिए और ‘चेन ऑफ कस्टडी’ बनाए रखते हुए पेश किए जाने चाहिए। इसके साथ ही गवाहों के बयान और फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। शिकायतकर्ता को चाहिए कि वह सभी उपलब्ध जानकारी व्यवस्थित रूप से एजेंसी को सौंपे और जांच में सहयोग करे।

समाज को चाहिए कि वह अपने आदर्श माने जाने वाली हस्तियों से उच्च नैतिक मानदंडों की अपेक्षा करे। फिर वो चाहे कोई प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हो, आध्यात्मिक गुरु हो, उद्योगपति हो, या कोई अन्य मशहूर हस्ती, जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और अदालतों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। तभी हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ सकेंगे जहां प्रतिष्ठा और धन किसी को कानून से ऊपर न रख सकें। काले धन और अवैध सौदों का चक्र तभी टूटेगा जब हर नागरिक, हर संस्था और हर अदालत अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए।

LIVE: महाराष्‍ट्र के भिवंडी में 4 मंजिला इमारत गिरी, 3 शव बरामद

bhivandi building collapsed

Latest News Today Live Updates in Hindi : महाराष्‍ट्र के भिवंडी में देर रात गिरी चार मंजिला इमारत गिरने से हड़कंप मच गया। मलबे से 3 शव बरामद किए गए हैं। बचाव कार्य जारी है। पल पल की जानकारी…

उत्तरप्रदेश के वाराणसी में भारी बारिश के बाद गंगा नदी का जल स्तर बढ़ रहा है। घाटों की सीढ़ियां और छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं।महाराष्‍ट्र के भिवंडी में देर रात एक निर्माणाधिन 4 मंजिला इमारत गिरी। इस दर्दनाक हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई। मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी।

क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

Mold at house

स्तुति लाल

दीवारों के काले धब्बे, बाथरूम की सीलन और घर की बासी गंध, ये सिर्फ सफाई की समस्याएं हैं या सेहत के लिए बड़ा खतरा? एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि फफूंद से जुड़ी बीमारियां डॉक्टरों के अनुमान से ज्यादा जानलेवा हो सकती हैं। ALSO READ: फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?

 

यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के एक ताजा और अपनी तरह के पहले अध्ययन में पाया गया है कि इनवेसिव मोल्ड डिजीज डॉक्टरों के अनुमान से कहीं अधिक जानलेवा है।

 

सीडीसी से प्रकाशित यह नई रिसर्च रिपोर्ट इनवेसिव मोल्ड के संक्रमण के व्यापक स्वरूप को समझने की पहली बड़ी कोशिशों में से एक है। इस रिसर्च रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ जेरेमी गोल्ड ने कहा, “यह पहली बार है जब हमारे पास इस तरह का कोई अनुमान है।” उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। रिसर्चरों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बढ़ने वाले तूफान, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के बाद फफूंद के संपर्क में आने का खतरा बार-बार देखा गया है। ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध
 

क्या है इनवेसिव मोल्ड डिजीज?

इनवेसिव मोल्ड डिजीज एक गंभीर फंगल (फफूंद) संक्रमणहै। हमारे आसपास हवा, मिट्टी और धूल में फफूंद (मोल्ड) के बहुत छोटे-छोटे कण होते हैं, जो दिखाई भी नहीं देते। सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति का शरीर इन्हें रोक देता है। लेकिन जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बहुत कम होती है, जैसे जिनका कैंसर का इलाज चल रहा हो, अंग प्रत्यारोपण हुआ हो, या कुछ गंभीर बीमारियां हों, तो उनमें यह फफूंद शरीर के अंदर जाकर बढ़ सकती है। जब यह फेफड़ों, साइनस, दिमाग या शरीर के अन्य अंगों में फैल जाती है, तो इसे इनवेसिव मोल्ड डिजीज कहा जाता है।

 

इस नई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अटलांटा क्षेत्र के अस्पतालों में पांच वर्षों में लगभग 450 मामले दर्ज किए गए और हर तीन में से एक मरीज की मौत अस्पताल में हुई।  विशेषज्ञों का मानना है कि ये संक्रमण पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और खतरनाक हो सकते हैं।

 

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण और किसे है ज्यादा खतरा?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, फफूंद का संक्रमण हर किसी के लिए बड़ा खतरा नहीं होता, लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इससे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। अंग प्रत्यारोपण, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, कैंसर, कीमोथेरेपी और कुछ विशेष दवाएं शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर सकती हैं, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। अगर ऐसे लोग फफूंद से प्रभावित वातावरण के संपर्क में आते हैं, तो उनके बीमार पड़ने की संभावना अधिक हो सकती है।

 

मोल्ड संक्रमण के लक्षण सभी लोगों में एक जैसे नहीं होते। इसकी गंभीरता व्यक्ति की पहले से मौजूद स्वास्थ्यसमस्याओं, फफूंद के संपर्क के तरीके, प्रभावित अंग और फफूंद की मात्रा पर निर्भर करती है। इसके संपर्क में आने के आम लक्षणों में लगातार खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द, नाक और साइनस में सूजन या जकड़न, त्वचा पर चकत्ते, गले में खराश और धुंधली दृष्टि शामिल हैं।

 

नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम के अध्ययन से पता चला है कि मोल्ड केवल सांस की बीमारी ही नहीं देता। इसके महीन कण नाक के जरिए सीधे दिमाग की नसों तक पहुंचकर ब्रेन फॉग, याददाश्त में कमी, तनाव और गंभीर एंजायटी (घबराहट) पैदा कर सकते हैं। ALSO READ: नेपाल: बालेन शाह के खिलाफ जेन-जी में क्यों है उबाल

 

कैसे पनपती है फफूंद?

घरों में फफूंद का बढ़ना एक छिपी हुई समस्या है, जो आमतौर पर सीलन भरे इलाकों और कम दिखाई देने वाली जगहों में पनपती है। इंडियन हेल्थ सर्विस के पर्यावरण स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक फफूंद प्रजनन की प्रक्रिया के दौरान बेहद छोटे बीजाणु (स्पोर्स) बनाती है, जो आसानी से हवा में फैल जाते हैं। पर्याप्त नमी मिलने पर यह स्पोर्स तेजी से बढ़ने लगते हैं और फफूंद का रूप ले लेते हैं। घरों में सीलन, पानी का रिसाव या ज्यादा नमी होने पर फफूंद आसानी से फैल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फफूंद को पूरी तरह खत्म करना लगभग असंभव है, लेकिन नमी पर नियंत्रण रखकर इसके फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है।

 

घरों में फफूंद के बढ़ने के कई आम कारण हो सकते हैं जैसे टपकती हुई छत, टूटी हुई पानी की पाइपें, लंबे समय तक गर्म पानी से नहाना या खाना पकाने के दौरान उबलता पानी।  बिना वेंटिलेशन वाले बाथरूम और कम हवा आने-जाने वाली बंद जगहों में नमी आसानी से जमा हो जाती है, जिससे फफूंद के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। यह नमी ठंडी सतहों पर जमकर सीलन का कारण बनती है।

 

घरों में इस्तेमाल होने वाली कई सामान्य निर्माण सामग्री, जैसे ड्राईवॉल, लकड़ी, वॉलपेपर, कार्पेट और धूल, फफूंद के लिए भोजन का काम करती हैं। बाढ़ और तूफान के बाद बढ़ने वाली सीलन और फफूंद इसी कारण स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन जाती है।

 

कैसे करें बचाव?

सीडीसी के मुताबिक घर में फफूंद को पनपने से रोकने के लिए कई सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।  उदाहरण के तौर पर, गीले कपड़ों को बंद कमरों के भीतर नहीं सुखाना चाहिए। खाना बनाते समय या पानी उबालते समय घर में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना जरूरी है ताकि भाप और नमी बाहर निकल सके। यदि घर में अत्यधिक नमी या भाप जमा हो रही हो, तो एग्जॉस्ट फैन और डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, बाढ़ के बाद घर की अच्छी तरह सफाई और उसे पूरी तरह सुखाना भी बेहद जरूरी है।

 

फफूंद का यह अनदेखा खतरा ना सिर्फ हमारे स्वास्थ्य बल्कि हमारे घरों की संरचना के लिए हानिकारक है। इसलिए नियमित रूप से घरों की सफाई और फफूंद को रोकना जरुरी है। इसके संपर्क में आने के बाद स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कत होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

IMD का बड़ा अलर्ट: 17 राज्यों में भारी बारिश का खतरा, क्या है बाढ़ प्रभावित गुजरात-असम का हाल?

weather update 31 july

देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण के कई राज्यों तक बादलों की आवाजाही और बारिश का दौर लगातार जारी है। जुलाई महीने के आखिरी दिन यानी आज 31 जुलाई 2026 को मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और एक पश्चिमी विक्षोभ आने वाले दिनों में कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश करा सकते हैं। देश के 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

 

मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक और निम्न दबाव क्षेत्र विकसित हुआ है, जो पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों और उत्तरी ओडिशा की ओर फैला हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सिस्टम अगले दो दिनों में और मजबूत हो सकता है। इसके अलावा मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है।

 

असम और गुजरात बाढ़ से बेहाल

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच 40,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मौसम विभाग ने गुजरात के कुछ हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, असम में बाढ़ से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। राज्य के 12 जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य में वर्षा जन्य हादसों में अब तक 78 लोगों की जान जा चुकी है।

 

पहाड़ी राज्यों में बरस आफत या राहत?

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है। उत्तराखंड सरकार ने आज बारिश की वजह से भूस्खलन की आशंका को देखते हुए चारधाम यात्रा स्थगित कर दी है। उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चंपावत समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इन इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में भी अगले दो दिनों तक कई इलाकों में व्यापक बारिश होने की संभावना है। चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कुल्लू में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

 

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, रामबन, जम्मू, पुंछ, कुलगाम, उधमपुर, कठुआ, डोडा, अनंतनाग, गांदरबल और कुपवाड़ा समेत कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है।

 

दिल्ली NCR में कैसा रहेगा मौसम

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद) में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। IMD के ताज़ा अपडेट के मुताबिक, आज दिनभर आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। बारिश के बाद तापमान में तो कुछ गिरावट दर्ज की जाएगी, लेकिन नमी बढ़ने के कारण उमस से पूरी तरह राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।
 

उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून सक्रिय

 

उत्तर प्रदेश के पूर्वी और तटीय जिलों में मानसून एक बार फिर मेहरबान हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज समेत कई जिलों में आज भारी बारिश का अनुमान है। वहीं, बिहार के भी कई जिलों में बादलों का डेरा है और कुछ स्थानों पर वज्रपात (आसानी बिजली गिरने) की चेतावनी भी जारी की गई है। किसानों के लिए यह बारिश धान की फसल के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।

 

मौसम विभाग ने इन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

गुजरात और हिमालयी क्षेत्र के अलावा कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेेश और राजस्थान में भारी की संभावना है। इन क्षेत्रों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा असम, मेघालय, गंगीय पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, केरल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश का अनुमान है। इनमें से कई क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ स्थानीय स्तर पर जलभराव और बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे सामान्य जनजीवन और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।