नीली नहीं अब विश्व कप में भगवा जर्सी पहनेंगी भारतीय हॉकी टीमें

भारतीय पुरूष और महिला हॉकी टीमें अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआईएच विश्व कप में पारंपरिक नीली जर्सी नहीं बल्कि भगवा रंग की जर्सी पहनेगी।

इस फैसले पर हालांकि पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा ने सवाल उठाया है। हॉकी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया पेज पर नयी जर्सी का अनावरण करते हुए कहा कि जर्सी का डिजाइन और रंग एक कहानी बताने और भारत का गौरव दिखाने के लिये है।

हॉकी इंडिया ने कहा कि भगवा रंग साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक है। इसने कहा ,‘‘भारत के राष्ट्रध्वज और उगते हुए सूरज से प्रेरित यह जर्सी नयी शुरूआत की प्रतीक है।’

विश्व कप 15 से 30 अगस्त के बीच खेला जायेगा। जर्सी पर ‘मंडाला’ कला से प्रेरित पैटर्न हैं जो भारत की सांस्कृतिक विरासत दर्शाते हैं। हॉकी इंडिया ने कहा कि इस पर गहरा नेवी ब्लू रंक अशोक चक्र से प्रेरित है जो प्रगति, शांति और फोकस का प्रतीक है।

हॉकी इंडिया ने कहा कि छाती पर बना ग्राफिक सुदर्शन चक्र का एक आधुनिक रूप है, जो “ताकत, एकता और गति” का प्रतीक है।

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कंधों और बाजुओं पर तिरंगे की पाइपिंग है जो राष्ट्रीय गौरव की द्योतक है। जर्सी के आगे के हिस्से पर देवनागरी लिपि में ‘इंडिया’ लिखा है जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।

हॉकी इंडिया ने कहा नयी जर्सी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की परिचायक है। भारतीय टीम के पास भगवा के साथ इसी तरह की सफेद जर्सी भी होगी। पूर्व कप्तान रासकिन्हा ने हालांकि जर्सी का रंग बदलने के फैसले पर सवाल किया है।

उन्होंने एक्स पर लिखा हॉकी इंडिया ने खेल के लिये बहुत कुछ किया है लेकिन यह निराशाजनक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान नीला रंग रही है। मैने कई साल तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है। प्रशंसक हमारी टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं।यह भगवा का क्या तुक है। ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट के सीईओ ने कहा मेरा सरल और सीधा प्रश्न अपने गर्व, पहचान और विरासत से जुड़ा है।

हॉकी इंडिया ने हालांकि इस फैसले का बचाव किया और एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ,‘‘इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है। भगवा जर्सी होने में क्या खराबी है। यह हमारे तिरंगे का एक रंग है और परिवर्तन तो होते रहना चाहिये। उन्होंने कहा कि नीली टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से प्रशंसकों और प्रसारकों को देखने में समस्या आती है।

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क्या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद हो गए? दिल्ली पुलिस ने दिया बड़ा बयान, जानिए क्या है पूरा सच?

delhi police on protest at jantar mantar

Jantar Mantar Protest : दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को साफ कर दिया कि जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए बंद नहीं किया गया है। इस जगह अभी भी शांतिपूर्ण और अधिकृत प्रदर्शनों के लिए अनुमति दी जा रही है। पुलिस ने लोगों से केवर आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है। ALSO READ: सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

 

दिल्ली पुलिस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें फैल रही हैं कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शनों के लिए बंद कर दिया गया है। ये दावे पूरी तरह से गलत, गुमराह करने वाले और बिना किसी सच्चाई के हैं। आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया जाता है कि जंतर-मंतर शांतिपूर्ण और अधिकृत प्रदर्शनों के लिए एक सक्रिय और अधिकृत जगह बनी हुई है।

 

कितने लोगों को प्रदर्शन की अनुमति

बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके पालन में दिल्ली पुलिस द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार, इस जगह पर अधिकतम 1,000 लोगों को अनुमति दी जा सकती है। यह अनुमति संबंधित आयोजकों या व्यक्तियों द्वारा औपचारिक आवेदन करने पर सक्षम अधिकारी द्वारा दी जाती है, और इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना ज़रूरी होता है। ALSO READ: दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रदर्शनकारी को गोली लगने का दावा गलत, मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत

 

पुलिस की लोगों से अपील

पुलिस ने कहा कि नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे बिना पुष्टि की गई जानकारी पर विश्वास न करें या उसे न फैलाएं और सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

 

गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर में हुए छात्र आंदोलन के दौरान सख्त कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के साथ ही पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। हालांकि दिल्ली पुलिस ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि छात्रों पर पैलेट गन नहीं चलाई गई।

भारत से लगे नेपाल के इलाकों में चौथे दिन भी कर्फ्यू जारी

नेपाल के कोशी प्रांत में भारत की सीमा से लगे सुनसरी जिले के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा के बाद बृहस्पतिवार को लगातार चौथे दिन अनिश्चितकालीन कर्फ्यू जारी रहा।

इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। सुनसरी के सहायक मुख्य जिला अधिकारी पोषण लामिछाने ने कहा कि जिले में सुरक्षा स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने सोमवार को पहली बार कर्फ्यू लगाया था। बाद में इसका विस्तार करते हुए पूर्व-पश्चिम राजमार्ग समेत 10 इलाकों को इसके दायरे में शामिल कर लिया गया। अधिकारी ने बताया कि कर्फ्यू अगले आदेश तक जारी रहेगा।

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उन्होंने कहा कि कर्फ्यू के तहत आवाजाही, एकत्र होने, प्रदर्शन करने, जनसभा करने और धरने देने जैसी लोगों की गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, विभिन्न संवेदनशील इलाकों और सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने देश में, विशेष रूप से सुनसरी जिले में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई है।

दो धार्मिक समुदायों के उत्सव के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षाकर्मियों सहित 12 से अधिक लोग घायल हो गए।

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पेपर लीक कैसे रोकेंगे! मल्लिकार्जुन खरगे ने क्यों कहा अधूरा बिल लाई सरकार

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में 'परीक्षा संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। खरगे ने सरकार की नीयत और बिल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नया संशोधन विधेयक युवाओं की समस्या को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में उबल रहे छात्रों के गुस्से को ठंडा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने साफ लहजे में पूछा कि जब इस बिल में यही नहीं बताया गया है कि असल में 'पेपर लीक' कैसे रोका जाएगा, तो फिर इस अधूरे बिल का क्या मतलब?

युवाओं के संघर्ष के आगे झुकी सरकार

राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते एक महीने से देश के युवा सड़कों पर धरने पर बैठे थे और अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। यह युवाओं और छात्रों के अनवरत संघर्ष की ही ताकत है कि आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा। खरगे ने कहा कि सरकार ने खुद अपनी विफलता छिपाने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में पेश किया है। जो कदम सरकार आज उठा रही है, उसे 2024 की शुरुआत में ही क्यों नहीं उठाया गया? ALSO READ: सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

केवल आंकड़े बदले हैं, समस्या वहीं की वहीं

विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस नए संशोधन बिल से जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदलने वाला। इसमें कानून की धाराओं और आंकड़ों में भले ही हेरफेर कर दी गई हो, लेकिन मूलभूत समस्या के समाधान पर यह बिल पूरी तरह मौन है। खरगे ने सवाल उठाया कि बिल में सजा और जुर्माने की बातें तो कह दी गईं, लेकिन 'पेपर लीक' के उस नेक्सस (गिरोह) को कैसे खत्म किया जाएगा और भविष्य में लीक रोकेंगे कैसे, इसका कोई खाका या उल्लेख इस पूरे बिल में है ही नहीं। यह बिल आधा-अधूरा और सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ALSO READ: किसने दिया ऑर्डर?' पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

पीएम और गृहमंत्री की चुप्पी पर सवाल

सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि देश का भविष्य यानी युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा था, लेकिन न तो प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर कुछ बोले और न ही गृहमंत्री अमित शाह कहीं नजर आए। खरगे ने पूछा कि इतनी बड़ी-बड़ी धांधलियां और धांधलेबाजों के हौसले बुलंद होने के बावजूद गृहमंत्री आखिर क्यों चुप हैं? जब छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तो सरकार ने उन्हें 'अराजक' करार दे दिया। खरगे ने सवाल किया कि सरकार ने महीनों से प्रदर्शन कर रहे इन मासूम छात्रों से समय रहते बातचीत करने की जहमत तक क्यों नहीं उठाई? ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

'प्रधान' को हटाना पड़ा, पर व्यवस्था कब बदलेगी?

मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि बढ़ते जनाक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सरकार को प्रधान को हटाना ही पड़ा। लेकिन सिर्फ चेहरे बदलने से या दिखावे के लिए ऐसा बिल लाने से काम नहीं चलेगा। जब तक पेपर लीक के सिंडिकेट को खत्म करने का पुख्ता मैकेनिज्म नहीं बनता, तब तक लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

विपक्ष ने बुलंद की छात्रों की आवाज

खरगे ने राज्यसभा के पटल से देश के युवाओं को भरोसा दिलाया कि विपक्ष उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक छात्रों के हक की लड़ाई लड़ता रहेगा और सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देगा।

गृहमंत्री से इस्तीफा मांगा

सरकार पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि पेपर बाजार में बिकता रहा और पता नहीं चला। क्या सरकार सो रही थी? हमारी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब दें। यदि वे सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं तो इस्तीफा दे दें। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं पीएम मोदी को उन्हें हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2016, 21, 24 और अब 26 में पेपर लीक हो चुके हैं। कहां है कड़ी से कड़ी सजा? उन्होंने पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेन्द्र प्रधान के स्वागत को भी उन्होंने सरकार की नाकामी बताया। 

योगी ने श्रावण मास के प्रथम दिन बाबा विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर जाकर किया दर्शन-पूजन

Yogi Adityanath Kashi Vishwanath Temple

Yogi Adityanath Kashi Vishwanath Temple: मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ श्रावण मास के प्रथम दिन सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। काशी कोतवाल बाबा काल भैरव मंदिर तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम में विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर प्रदेश और देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं लोक कल्याण के लिए प्रार्थना की।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों के लिए की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं एवं कांवड़ियों की सुरक्षा, सुविधा और सुगम दर्शन की व्यवस्था को पूरे श्रावण मास में इसी प्रकार प्रभावी एवं निर्बाध रूप से बनाए रखा जाए। साथ ही सभी व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करते हुए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने देने के निर्देश भी दिए।

 

मुख्यमंत्री योगी सर्वप्रथम बाबा काल भैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने वैदिक रीति से पूजा-अर्चना एवं आरती कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री यहां से श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन किया और देशवासियों के कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। 

 

मुख्यमंत्री के मंदिर पहुंचते ही श्रद्धालुओं और कावाड़ियों ने उनका हर हर महादेव के उद्घोष से स्वागत किया, जिसका मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार करते हुए प्रत्युत्तर दिया। मुख्यमंत्री ने बुधवार को गुरु पूर्णिमा पर भी काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया था। इस अवसर पर विधायक नीलकंठ तिवारी, अवधेश सिंह आदि मौजूद रहे।

राजस्थान: आठ जिलों में स्थाई लोक अदालतों के गठन को मंजूरी

राजस्थान सरकार ने आठ जिलों में स्थाई लोक अदालतों के गठन को मंजूरी दी है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इन स्थाई लोक अदालतों के गठन के प्रस्ताव को अनुमोदित किया।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्णय के तहत फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, बाड़मेर, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ एवं सलूम्बर में स्थाई लोक अदालत स्थापित की जाएंगी।

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एक बयान के मुताबिक लोक अदालतें विवादों के त्वरित और किफायती समाधान की व्यवस्था है। इसमें आपसी सहमति से निर्णय किए जाते हैं, जिससे आमजन के समय और धन दोनों की बचत होती है।

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इंदौर में आर्थिक तंगी से मां-बेटे ने खाया जहर, क्‍या देश में बढ़ रहे तंगी से मौत के मामले?

suicide indore

देश में आर्थिक तंगी, कर्ज के बोझ और बेरोजगारी के चलते आत्महत्या या असमय मौत की खबरें समय-समय पर मीडिया में आती रहती हैं। हाल ही में गुजरात के राजकोट शहर में आर्थिक तंगी और कर्जदारों के दबाव के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्यों द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है।

इंदौर से भी ऐसी ही खबर आई है। इंदौर के परदेशीपुरा में आर्थिक तंगी और मानसिक बीमारी से जूझ रहे मां-बेटे ने जहर खाकर जान दे दी। दोनों ने मंगलवार दोपहर घर से करीब 100 मीटर दूर एक बगीचे में जहरीला पदार्थ खा लिया था। इलाज के दौरान बुधवार शाम बेटे और गुरुवार सुबह मां की मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक 62 वर्षीय इंदिरा पति खुशीराम और उनके 35 वर्षीय बेटे संजय की जहरीला पदार्थ खाने से उपचार के दौरान मौत हुई है। परिजनों ने बताया कि मंगलवार दोपहर दोनों घर के पास स्थित एक बगीचे में पहुंचे और वहां जहर खा लिया। बेहोशी की हालत में मिलने के बाद उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बहन उठा रही थी खर्च : रिश्तेदार शिवम ने बताया कि इंदिरा के पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। इसके बाद वह अपनी बहन, भांजे शिवम और परिवार के साथ रह रही थीं। उनके पालन-पोषण का पूरा खर्च बहन का परिवार ही उठाता था। वहीं बेटा संजय भी कोई काम नहीं करता था। मंगलवार दोपहर किसी परिचित ने शिवम को सूचना दी कि इंदिरा और संजय घर से कुछ दूरी पर स्थित बगीचे में बेसुध पड़े हैं। मौके पर पहुंचने पर दोनों की सांसें चल रही थीं। इसके बाद आसपास के लोगों की मदद से उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

पुलिस को दिए बयान में मां-बेटे ने अपनी मर्जी से जहर खाने की बात कही थी। परिजनों के अनुसार दोनों मानसिक बीमारी से भी पीड़ित थे और उनका इलाज बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में चल रहा था। मामले की जांच परदेशीपुरा पुलिस कर रही है।

क्‍या कहते हैं तंगी से मौतों के आंकड़े :  देश में आर्थिक तंगी, कर्ज (Bankruptcy/Indebtedness) और बेरोजगारी के कारण होने वाली मौतों या आत्महत्याओं के संबंध में आधिकारिक आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट 'Accidental Deaths and Suicides in India' से मिलते हैं।

एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े: कर्ज और गरीबी से मौतें एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, देश में दिवालियापन, कर्ज के बोझ (Bankruptcy or Indebtedness) और गरीबी के कारण हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं।

वर्ष 2023 के आंकड़े: हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में कर्ज, गरीबी और भुखमरी से जुड़े कारणों से कुल 10,903 लोगों ने आत्महत्या की। यह कुल आत्महत्याओं का लगभग 3.8% है।

बेरोजगारी का असर: इसी अवधि में अकेले बेरोजगारी (Unemployment) के कारण जान गंवाने वालों की संख्या भी हजारों में दर्ज की जाती है, जो कुल आत्महत्याओं का करीब 1.8% है।

आय वर्ग का दायरा: एनसीआरबी डेटा बताता है कि आर्थिक तंगी की मार सबसे ज्यादा समाज के निचले टके पर पड़ती है। कुल आत्महत्या करने वालों में से करीब 66% (दो-तिहाई) लोग वे थे जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपए से भी कम थी। इससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय असुरक्षा और गरीबी इन चरम कदमों के पीछे सबसे बड़े उत्प्रेरकों में से एक है।

हालिया चर्चित मामले और प्रवृत्तियांपारिवारिक सामूहिक खुदकुशी: देश के विभिन्न हिस्सों (जैसे हाल ही में राजकोट या अन्य जगहों पर) से ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां पूरा परिवार—पति, पत्नी और बच्चे—व्यापार में भारी घाटे, अनौपचारिक साहूकारों (Loan Sharks) के ऊंचे ब्याज और मानसिक दबाव के चलते एक साथ मौत को गले लगा लेते हैं।

दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति: आत्महत्या के कुल आंकड़ों में सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग एक चौथाई) दैनिक वेतन भोगियों (Daily Wage Earners) या छोटे कारीगरों का होता है, जो रोज कमाने-खाने वाले वर्ग से आते हैं और जरा सी आर्थिक मंदी या काम छूटने पर भयंकर तंगी का शिकार हो जाते हैं। 

पंजाब में ‘प्रश्नपत्र लीक’ के विरोध में दिल्ली भाजपा का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली ईकाई ने बृहस्पतिवार को मंडी हाउस के निकट आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर पंजाब में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी फिरोजशाह रोड स्थित ‘आप’ मुख्यालय के निकट एकत्र हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में साढ़े चार वर्ष पुरानी ‘आप’ सरकार के कार्यकाल में छह परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस सहित अन्य मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की।

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हाल में ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि पंजाब में उनकी सरकार के कार्यकाल में किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। हालांकि उन्होंने कहा था कि एक परीक्षा के दौरान दो केंद्रों पर कुछ विद्यार्थियों ने नकल के लिए डिजिटल पेन का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें तत्काल पकड़ लिया गया और प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ।

प्रदर्शन में शामिल भाजपा सांसदों, विधायकों और प्रदेश पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य में छह परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से 30 लाख विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि ‘आप’ ने हाल में जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उस प्रदर्शन का समर्थन किया था, जिसके बाद नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था।

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सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

Supreme Court Jantar Mantar Protest

Supreme Court Jantar Mantar Protest: संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए खौफनाक एक्शन और पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को साफ-साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्रों का इलाज सरकार अपने खर्चे पर कराएगी। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है और पैलेट गन की SOP पर जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम जल्द ही प्रोटोकॉल भी बनाने वाले हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

क्या है पूरा मामला?

बीती 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक के खिलाफ निकले 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में गरमा गया है। आरोपों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हक की आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों पर न केवल बेदर्दी से लाठियां भांजीं, बल्कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने का दावा जा रहा है। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

CJI सूर्यकांत की बेंच का कड़ा रुख

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता और पैलेट गन के शिकार पीड़ितों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में पुलिसिया कार्रवाई की खौफनाक तस्वीर पेश की। दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फौरन निर्देश जारी किया कि पैलेट गन से घायल याचिकाकर्ता समेत तमाम लोगों को बिना किसी देरी के सबसे बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ALSO READ: विदेशी मीडिया ने CJP की जीत पर क्या कहा, पाकिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में सुर्खियों में 'कॉकरोच'

हथियारों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा सुरक्षित

कोर्ट ने सिर्फ इलाज तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर शिकंजा कसते हुए बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों और कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

 

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और घायल छात्रों द्वारा दायर इस जनहित याचिका में धातु वाली पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बेहद असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है। लेकिन, कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि वह 20 जुलाई की घटना में हुए पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच और सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

इंदौर के वृद्धाश्रम में बुजुर्ग की बेरहमी से पिटाई, वीडियो देख खराब हुआ हर किसी का दिमाग

old age home

इंदौर के एक वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं की बेरहमी से डंडे से पिटाई का वीडियो सामने आया है। एक लडका बुजुर्ग महिलाओं को डंडे से पीट रहा है। लड़का महज 14 या 15 साल का बताया जा रहा है। मामला मरीमाता पानी की टंकी के पास महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी के वृद्धाश्रम का है।

बाणगंगा थाना पुलिस ने इसकी संचालिका को थाने बुलाया और समझाइश देकर छोड़ दिया। इतना ही नहीं, लड़के ने बीच-बचाव करने वाली महिलाओं के साथ भी मारपीट की। पुलिस ने एक्‍शन लेने की बजाए बच्चे को चाइल्ड लाइन संस्था के पास भेजा जाएगा।

मानसिक स्‍थिति ठीक नहीं लड़के की : एसीपी रुबीना मिजवानी के मुताबिक पूछताछ में पता चला है कि लड़के की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। अभी कार्रवाई नहीं की गई है। लड़का करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ यहां आया था। उसकी मां झुलस गई थी। कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद से लड़का वृद्धाश्रम में रह रहा था।

बुधवार को लड़के का एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया। इस पर लड़के ने उसे डंडे से पीटना शुरू कर दिया। वीडियो में बीच-बचाव करने वालों के साथ भी वह हाथापाई करता नजर आ रहा है। एसीपी के मुताबिक, बच्चे की काउंसलिंग कराई जाएगी। फिलहाल, वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे को लड़के को बुजुर्गों से अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं। उसे गुरुवार को वृद्धाश्रम से हटाकर नाबालिग बच्चों की देखरेख करने वाली संस्था में भेजा जाएगा।