Top News 30 July: सुप्रीम कोर्ट में पैलेट गन पर सुनवाई, 3 राज्यों में उपचुनाव की वोटिंग, कांवड़ यात्रा शुरू

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Top News 30 July : पैलेट गन पर रोक के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान जारी है। श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही आज से देशभर में कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई। US फेड ने ब्याज दरें नहीं बदलीं। पल पल की जानकारी…

 

पैलेट गन मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

पैलेट गन पर रोक के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। 20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल 3 लोगों ने याचिका लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना वजह जवानों ने फायरिंग की।

 

बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में मतदान

बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर में विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान जारी है। तीनों ही सीटों पर शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे। 3 अगस्त को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। तीनों ही सीटों पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

 

सावन मास और कांवड़ यात्रा की शुरुआत

सावन (श्रावण) मास की शुरुआत के साथ ही आज से देशभर में कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई। शिव जी की पूजा और उपासना के लिए शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में कांवड़ यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ALSO READ: सावन का पहला सोमवार कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और 5 खास उपाय

 

US फेड ने ब्याज दरें नहीं बदलीं

फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखने का फैसला लिया है। बैठक के दौरान मौजूदा मुद्रास्फीति पर चिंता भी जताई गई। फेड अध्यक्ष नियुक्त किए गए केविन वॉर्श ट्रंप के विश्वासपात्र माने जाते हैं। 

 

नितेश तिवारी की रामायण का ट्रेलर रिलीज

30 जुलाई की सुबह ‘रामायण’ का ट्रेलर लॉन्च कर दिया। लगभग 4 मिनट के इस ट्रेलर में यश, रणबीर कपूर, साई पल्लवी, रवि दुबे, अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह और विवेक ओबेरॉय समेत अधिकतर कलाकार नजर आए।

कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला

पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला जारी है। अलग अलग कारणों से मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। कुछ और मंत्रियों का इस्तीफा होना है, जिसका इंतजार चल रहा है। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थोड़ी अलग परिस्थितियों में हुआ है। इसकी तुलना यूपीए दो की सरकार में खेल मंत्री रहे सुरेश कलमाड़ी के इस्तीफे से की जा रही है। यूपीए दो की सरकार में कलमाड़ी सबसे पहले मंत्री थे, जिनको भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफा देना प़ड़ा था। उनके ऊपर कॉमनवेल्थ खेलों में ग़ड़ब़ड़ी के आरोप लगे थे। उसके बाद तो सिलसिला ही शुरू हो गया था। मंत्रियों के इस्तीफे और सांसदों की गिरफ्तारी का सिलसिला ऐसा चला कि पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया और कांग्रेस 2014 का चुनाव बुरी तरह से हारी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भ्रष्टाचार के आरोपों में नहीं हुआ है। लेकिन उनके ऊपर जिम्मेदारी के निर्वहन में अक्षमता के आरोप लगे। उनके कार्यकाल में दो बार नीट यूजी का पेपर लीक हुआ। इस साल पेपर लीक के बाद 21 छात्रों की जान गई। तब भी छात्रों और युवाओं के भारी दबाव में उनका इस्तीफा हुआ।

बहरहाल, प्रधान के इस्तीफे से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा हुआ था। उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है। गौरतलब है कि वे 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से पाला बदल कर भाजपा में गए थे और लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद उनको मंत्री बनाया गया था। बाद में राजस्थान से राज्यसभा के उपचुनाव में जीत कर उच्च सदन के सदस्य बने थे। इस बार उनको राज्यसभा की टिकट नहीं मिली है। कहा जा रहा है कि वे पंजाब में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। उनसे पहले जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा नहीं दी गई थी और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वे केरल के रहने वाले हैं और उनको मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। केरल के चुनाव में भाजपा हार गई। फिर कुरियन को मध्य प्रदेश से राज्यसभा नहीं भेजा गया।

इनके अलावा दो और मंत्रियों के इस्तीफे का इंतजार हो रहा है। एक व्यक्ति, एक पद के हिसाब से इनका इस्तीफा होगा। केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली में संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। ये दोनों लोकसभा सांसद हैं और अभी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बताया जा रहा है कि संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के साथ ही इनका इस्तीफा होगा। उसके बाद नरेंद्र मोदी की सरकार में फेरबदल होगी। 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के बाद किसी भी दिन सरकार में बड़ी फेरबदल होगी। 20 अगस्त की तारीख बताई जा रही है। गौरतलब है कि मोदी की तीसरी सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं और अभी तक सरकार में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कम से कम पांच मंत्री पद खाली हो गए हैं या होने वाले हैं। इनके अलावा भी कई मंत्रियों को बदले जाने की चर्चा है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की वजह से ही पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम नहीं बन रही है। उनको अध्यक्ष बने छह महीने से ज्यादा हो गए। वे अब भी पुरानी टीम के साथ ही काम कर रहे हैं। उनको भी अगस्त में नई टीम मिलेगी। प्रधानमंत्री की टीम बिल्कुल नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाली होगी।

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले को सही ठहराने के लिए प्राइमरी तर्क पर तभी अड़ती है, जब उसका फैसला उन्हीं तर्कों पर आधारित होता है। यहां उलटा है। यहां फैसला हो जाता है और उसके बाद उसको न्यायसंगत ठहराने के तर्क खोजे जाते हैं और तथ्य तैयार किए जाते हैं। नोटबंदी के फैसले के बाद पूरे देश ने देखा कि कितने तरह के तर्कों से इसे जस्टिफाई किया गया। प्राइमरी तर्क काला धन रोकना था। लेकिन बाद में कहा गया कि जाली नोट बंद होगा, नक्सलियों की कमर टूटेगी, आतंकवादियों का नेटवर्क समाप्त होगा और जब यह सब नहीं चला तो कहा गया कि डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देने के लिए फैसला हुआ है। इन सबमें प्राइमरी तर्क कहीं गायब हो गया और आज उस समय के मुकाबले दो गुने से ज्यादा नकदी चलन में है।

बहरहाल, यही हाल इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई-20 पेट्रोल के मामले में दिख रहा है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का काम इसलिए शुरू हुआ था ताकि कच्चे तेल के आयात का बिल कम हो और लोगों को सस्ता पेट्रोल मिले। लेकिन न आयात बिल कम हुआ और न पेट्रोल सस्ता हुआ। जब मिश्रण शुरू हुआ था तब पेट्रोल की कीमत 60 रुपए लीटर के आसपास थी और अब जब सौ फीसदी पेट्रोल पंपों पर ई-20 पेट्रोल ही नॉर्मल पेट्रोल के तौर पर मिलने लगा तो कीमत दोगुनी हो गई है। आयात बिल भी बढ़ा है। इसलिए अब उसकी बात नहीं हो रही है। अब इसे किसानों के सम्मान और देश के अभिमान के नाम पर बेचा जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट लिख कर कहा है, ‘ई-20 हर बूंद में किसान का सम्मान, हर सफर में आत्मनिर्भर भारत का अभिमान’। मतलब अब किसानों की भलाई के नाम पर इथेनॉल मिश्रण को जस्टिफाई किया जाएगा। सोचें, किसानों की भलाई के नाम पर ही तंबाकू लॉबी भी प्रचार करती है।

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच गए थे और यहां तक कहा था कि अपने हिसाब से सीटें देकर भी एमआईएम को गठबंधन में एडजस्ट किया जाए। ओवैसी ने यह दांव इसलिए चला था कि बिहार के मुस्लिम मतदाताओं को यह मसैज दिया जाए कि वे भाजपा को हराना चाहते हैं इसलिए विपक्षी गठबंधन में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि लालू प्रसाद और कांग्रेस दोनों ने उनके प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दिया। वे अकेले लड़े और उनके पांच विधायक जीत गए।

अब ओवैसी ने यही दांव उत्तर प्रदेश में चला है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सामने तालमेल का प्रस्ताव रखा है। ओवैसी ने अखिलेश यादव से कहा है कि अभी समय है गठबंधन की बात कर ली जाए। साथ ही यह भी कहा है कि अभी गठबंधन करना है तो कर लें या कह दें कि चुनाव के बाद शिकायत नहीं करेंगे। असल में सपा, राजद या कांग्रेस आदि पार्टियां ओवैसी पर हमेशा आरोप लगाती रहती हैं कि वे भाजपा की बी टीम की तरह काम करते हैं। इस आरोप से छुटकारा पाने का तरीका भी यही है कि वे अपनी ओर से गठबंधन का प्रस्ताव रखें। उनको पता है कि कोई भी पार्टी उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी। इसलिए वे पूरे भरोसे से गेंद उन पार्टियों के पाले में डाल देते हैं। अब वे अकेले लड़ेंगे तो प्रचार में कहेंगे कि उन्होंने तो पहल की थी। उनके इस प्रचार का युवा मुस्लिम मतदाताओं पर असर होता है।

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की चर्चा हो रही है। जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से होली के दिन कथित रूप से जले हुए नोट बरामद होने की घटना के डेढ़ साल हो गए। लेकिन यह पता ही नहीं चल रहा है कि इस मामले में क्या होना है? सुप्रीम कोर्ट ने घटना के तुरंत बाद एक कमेटी बना कर जांच कराई थी, जिसने कहा था कि नोट उनके घर से बरामद हुए थे। उसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों ने उनकी नियुक्ति का बड़ा विरोध किया। उन्हें बिना कोई काम दिए अदालत में रखा गया। इधर संसद में महाभियोग का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया और जजेज इन्क्वायरी एक्ट के हिसाब से स्पीकर ने जांच की कमेटी भी बना दी। कुछ दिन पहले जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा भी दे दिया। सवाल है कि क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है? एक रिपोर्ट के मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट और भारत सरकार के न्याय विभाग के रिकॉर्ड में वे आज भी जज हैं। अगर ऐसा है तो इसका अर्थ है कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। तब भी सवाल है कि क्या वे महाभियोग के जरिए हटाए जाएंगे? अगर ऐसा होगा तो वे देश के पहले जज होंगे, जो महाभियोग के जरिए हटाए जाएंगे। यह भी सवाल है कि अगर इस्तीफा स्वीकार हो जाएगा तो क्या महाभियोग की प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी?

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन चल रहा था। अब उसकी रिपोर्ट आ गई है। बताया जा रहा है कि सीपीएम ने विधानसभा चुनाव हारने के कारण तलाश लिए हैं। सीपीएम का मानना है कि विजयन के चेहरे पर प्रचार केंद्रित करना चुनाव हारने का एक बड़ा कारण था। इसके अलावा विजयन की सॉफ्ट हिंदुत्व की नीति भी हार का कारण बनी।

गौरतलब है कि केरल में कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर हमेशा दो सत्ता केंद्र रहे हैं। प्रकाश करात एक स्थायी केंद्र थे, जो अब भी हैं। विजयन को उनका करीबी माना जाता है। केंद्र में सीताराम येचुरी के कमजोर होने और फिर उनके निधन के बाद करात खेमा बहुत मजबूत हुआ। उधर केरल में भी विजयन के मुख्यमंत्री बनने के बाद से करात खेमे की पकड़ सत्ता और संगठन दोनों पर हो गई। वीएस अच्युतानंदन की उम्र बहुत हो गई थी और केंद्र में येचुरी कमजोर हो गए थे। उसके बाद करात और विजयन के कंट्रोल में ही पार्टी रही। तभी प्रचार के केंद्र में विजयन को रखा गया। यह भी एक तथ्य है कि केरल और पश्चिम बंगाल दोनों जगह लीपीएम को हिंदुओं के वोट मिलते रहे हैं। इसी सोच में विजयन ने केरल में हिंदू वोटों की ज्यादा आस लगा ली। वे केंद्र की नीतियों का समर्थन करने लगे और एझवा नेता नतेशन के साथ घूमने लगे। इससे मुस्लिम और ईसाई दोनों सीपीएम से दूर हुए और दूसरी ओर हिंदू वोटों का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ चला गया।

LIVE: दतिया, बांकीपुर और मांजलपुर उपचुनाव में मतदान

bypoll election : voting in datia, bankipur and manjalpur

Latest News Today Live Updates in Hindi : बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर में विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान जारी है। पल पल की जानकारी…

पैलेट गन पर रोक के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। 20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल 3 लोगों ने याचिका लगाकर की पैलेट गन पर रोक की मांग।

-बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर में शुरू हुआ मतदान।

-बिहार भाजपा नेता सीपी ठाकुर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान किया।

-भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान किया।

 

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद हो कि न हो, दो साल पहले इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। जैसे 2026 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद यह कमेटी बनी है वैसे ही 2024 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद वह कमेटी बनी थी। राधाकृष्ण कमेटी ने एक सौ ज्यादा सिफारिशें की थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी 27 सिफारिशें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। कुछ सिफारिशें आंशिक तौर पर मानी गईं और 57 सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार किया गया। लेकिन उसका क्या नतीजा निकला? दो साल के बाद फिर पेपर लीक हो गया!

राधाकृष्ण कमेटी ने सिफारिश की थी नीट यूजी सहित करीब 20 प्रतियोगिता परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में विषय के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद भी पेपर लीक होना जारी है और दूसरी गड़बड़ियां भी हो ही रही हैं तो इसका अर्थ है कि एकमात्र समस्या यह नहीं है कि एनटीए में विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं। समस्या संरचनात्मक और व्यवस्थागत है। अगर नंदन नीलेकणी संरचनात्मक समस्याओं को समझ कर उसे ठीक करने का सुझाव देते हैं तब तो ठीक है अन्यथा इसका भी कोई मतलब नहीं होगा।

उनके सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे अखिल भारतीय परीक्षा के सिद्धांत को खत्म करने की सिफारिश करेंगे? क्या वे कहेंगे कि एक बार में 24 लाख छात्रों वाली नीट यूजी की परीक्षा नहीं होनी चाहिए? क्या वे यह सिफारिश कर सकते हैं कि मेडिकल में दाखिले की पुरानी व्यवस्था बहाल हो और नीट यूजी की बजाय राज्यों को अपने कॉलेजों में दाखिले का अधिकार पहले जैसा दिया जाए? यानी शिक्षा और परीक्षा के मामले में राज्यों की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए। अगर नंदन नीलेकणी की कमेटी नीट समाप्त करने और मेडिकल में दाखिले की परीक्षा का विकेंद्रीकरण करने की सिफारिश नहीं करती है तो उनकी सिफारिशों का स्कोप बहुत सीमित हो जाएगा और तब किसी बड़े सुधार की संभावना कम हो जाएगी।

अब सवाल है कि अगर नीट समाप्त करने या नीट जैसी दूसरी अखिल भारतीय परीक्षाएं खत्म करने की सिफारिश नीलेकणी कमेटी नहीं करती है तो उसके पास क्या विकल्प बचेगा? सबसे अच्छा तो यही होगा कि नीट को समाप्त किया जाए। लेकिन अगर सरकार की ओर से कमेटी की सिफारिशों का जो स्कोप तय किया जाएगा यानी जो फ्रेमवर्क दिया जाएगा उसमें पहले ही यह स्पष्ट कर दिया जाए कि नीट की परीक्षा जारी रहेगी तो फिर नीलेकणी कमेटी को नीट को इंजीनियरिंग में दाखिले की परीक्षा जेईई की तरह दो चरणों में कराने की सिफारिश करनी चाहिए। ध्यान रहे अगले साल नीट की परीक्षा जेईई की तरह कंप्यूटर आधारित होगी और कई पालियों में होगी। हालांकि उसमें प्रश्नपत्रों की कठिनता के आधार पर अंकों के सामान्यीकरण की अलग समस्या आती है। फिर भी कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा पेपर लीक की संभावना को कम करती है। इसके साथ साथ अगर नीट की परीक्षा भी जेईई के तरह दो चरण में हो तो पेपर लीक की संभावना और कम हो सकती है। दो चरण का अर्थ है कि पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा हो और दूसरे चरण में एडवांस परीक्षा हो। पहले चरण में मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न हों और दूसरे चरण में सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएं।

इसके अलावा नीलेकणी कमेटी को मेडिकल की पढ़ाई की फीस को नियमित करने के बारे में भी सुझाव देने चाहिए। अभी मेडिकल की परीक्षा में सबसे ज्यादा प्रश्न पत्र इसलिए लीक होते हैं कि एक बार में परीक्षा होती है और 720 अंकों की परीक्षा में अगर अच्छे अंक आ गए तो देश के प्रीमियम संस्थान में बहुत कम फीस में पढ़ने का मौका मिलता है। अन्यथा निजी कॉलेजों में फीस इतनी ज्यादा है कि लोग स्वाभाविक रूप से पेपर लीक पर पैसा खर्च करने के लिए प्रेरित होते हैं। खुद सरकार इसी वजह से इसे हाई स्टेक यानी बड़े दांव वाली परीक्षा मानती है। नीट के बचाव में तर्क दिया जाता है कि इसमें क्वालिफाई करके गरीब बच्चे भी मेडिकल की पढ़ाई कर सकते हैं। यह गलत है। निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक है। ऐसे में कौन गरीब अपने बच्चों को वहां पढ़ा पाएगा! अगर डोनेशन नहीं देना पड़े तब भी निजी कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर है।

बहरहाल, नीलेकणी कमेटी को सिर्फ नीट पर विचार नहीं करना है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के सुझाव देने हैं। इसकी शुरुआत एनटीए से हो सकती है। भारत सरकार ने एक देश, एक परीक्षा की महत्वाकांक्षी योजना के तहत एनटीए का गठन किया। इसके बाद एक एक करके परीक्षाओं को अखिल भारतीय स्वरूप दिया जाने लगा। मेडिकल की परीक्षा के साथ साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए भी सीयूईटी की परीक्षा ली जाने लगी। इसमें अलग समस्याएं हैं। वास्तविकता यह है कि एनटीए देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में शून्य योगदान दे रहा है। सो, नीलेकणी कमेटी एनटीए को खत्म करने और पुरानी विकेंद्रित परीक्षा व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश करे। सवाल है कि अगर एनटीए को समाप्त करना उसके स्कोप ऑफ वर्क से बाहर हो तो क्या करना चाहिए? तब उसे एनटीए में सुधार की सिफारिश करनी चाहिए।

सबसे पहला सुधार तो यह जरूरी है कि एनटीए को कम से कम वैधानिक दर्जा दिया जाए। अगर सरकार चाहती है कि यूपीएससी की तरह इसकी परीक्षाएं विश्वसनीय बनें तो इसे संवैधानिक नहीं तो वैधानिक दर्जा दिया जाए। इसका अपना कैडर बने ताकि तदर्थ ढंग से काम नहीं हो। अभी इधर उधर से ले आकर अधिकारियों को रखा जाता है और गड़बड़ी होने पर बाद में उनको वापस अपने कैडर में भेज दिया जाता है। इससे जवाबदेही नहीं बनती है। इसके बाद ठेके पर नियुक्ति रोकने की सिफारिश की जाए और परीक्षा से जुड़े काम आउटसोर्स करने पर रोक लगे। यूपीएससी की तरह एनटीए का अपना बुनियादी ढांचा बने। विशेषज्ञों की नियुक्ति हो और पूरे साल इसका काम चले। जैसे यूपीएससी की परीक्षा में प्रश्न पत्र के ढेर सारे सेट बनते हैं और किसी को पता नहीं होता है कि परीक्षा में कौन से सेट का इस्तेमाल होगा वैसी व्यवस्था एनटीए द्वारा आय़ोजित की जाने वाली परीक्षाओं के लिए भी की जाए। एनटीए जिन परीक्षाओं का आयोजन करता है उसके अलावा भी कई एजेंसियां हैं, जो दाखिला और भर्ती परीक्षा आयोजित करती हैं। उनमें भी एनटीए की तर्ज पर ही सुधार की सिफारिश होनी चाहिए। हालांकि सिर्फ कमेटी की सिफारिशों से कुछ खास नहीं होगा। सरकार की मंशा और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए तभी जरूरी सुधार होंगे।

पेपर लीक रोकने का बिल पास

नई दिल्ली। पेपर लीक रोकने के लिए लाया गया संशोधन बिल लोकसभा से पास हो गया। मंगलवार को दो बजे दिन में बिल पर चर्चा शुरू हुई और पहले दिन नौ घंटे का चर्चा हुई थी। बुधवार को फिर चर्चा शुरू हुई और उसके बाद बिल को ध्वनि मत से मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि सरकार ने 2024 में पहली बार यह कानून बनाया था। तब भी सभी पार्टियों के समर्थन से इसे पास किया गया था। दो साल में दो बार नीट यूजी का पेपर लीक होने के बाद सरकार इसे ज्यादा सख्त प्रावधानों के साथ वापस ले आ रही है। ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रीवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ में सजा और जुर्माने के प्रावधान को बढ़ाया गया है और मामले की जांच व सुनवाई की समय सीमा तय की गई है।

बहरहाल, बिल पर बुधवार को विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी करीब 50 मिनट बोले। उनके भाषण के बीच कई बार हंगामा हुआ। बाद में जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया और विपक्ष के हंगामे के बीच बिल पास हुआ। इस बिल के कानून बनने पर पेपर लीक से जुड़े अपराधों में अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

बिल पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष बिल के नाम पर राजनीति कर रही है। उन्होंने राहुल के भाषण पर कहा, ‘नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिन अपशब्दों का इस्तेमाल किया वे असंसदीय हैं। माननीय सदस्य खुद को भी ईडियट समझें तो वह नहीं कह सकते। उन्हें नियमों की जानकारी नहीं है’। राहुल को लक्ष्य करके उन्होंने कहा, ‘यदि वे व्यक्ति विशेष के लिए ये शब्द नहीं बोल रहे तो क्या छात्रों के लिए ये शब्द थे। और यदि छात्रों को इडियट कहा जाए तो इससे दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं है’।

बहरहाल, लोकसभा में अपने भाषण के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में कहा, ‘गृह मंत्री शाह सदन में नहीं आए, जबकि उन्हें छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए था’। राहुल ने कहा, ‘अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ देनी चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे संसद में बोलने का अधिकार है और वह अधिकार मुझे मिलना चाहिए’।

उधर राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक (2026) बिल पास हो गया। इसके जरिए राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ की तरह राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण मिलेगा। अब ‘वंदे मातरम’ का अपमान, अनादर और गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा। इस बिल के जरिए 1971 के मूल कानून में संशोधन का प्रावधान किया गया है। नए कानून में राष्ट्रगीत के अपमान के लिए तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों के प्रावधान हैं।

योगी सरकार का बड़ा कदम, IIT कानपुर और IIM इंदौर बनेंगे यूपी जल निगम ग्रामीण के नॉलेज पार्टनर, AI से होगी जल योजनाओं की निगरानी

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और जलापूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश जल निगम ग्रामीण ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईटी कानपुर (ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन) और आईआईएम इंदौर के साथ अहम समझौता किया है। विभाग ने देश के दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों को नॉलेज पार्टनर बनाया है। इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल मॉनिटरिंग और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से ग्रामीण जलापूर्ति, नदियों की सफाई और पुनरुद्धार को अधिक प्रभावी, पारदर्शी व भरोसेमंद बनाना है।
 

उत्तर प्रदेश जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने से जुड़ी सभी निर्मित, निर्माणाधीन व भविष्य की योजनाओं की आधुनिक टेक्नोलॉजी के आधार पर निगरानी और प्रबंधन आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नदियों की सफाई और पुनरुद्धार के लिए भी इसकी जरूरत है। इसी विजन के तहत आईआईटी कानपुर और आईआईएम इंदौर को जल निगम ग्रामीण के साथ जोड़ा जा रहा है। आईआईएम इंदौर के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हो चुका हैं, जल्द ही आईआईटी कानपुर के साथ सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी।

 

आईआईटी कानपुर विकसित करेगा एआई आधारित निगरानी प्रणाली

योगी सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए पानी की बर्बादी रोकते हुए हर ग्रामीण परिवार तक गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में आईआईटी कानपुर के सहयोग से जल योजनाओं में एआई आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे पाइपलाइन में लीकेज की समय रहते पहचान, जल दबाव और क्लोरीन स्तर की 24 घंटे निगरानी संभव होगी।
 

विशेषज्ञ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन एवं रख-रखाव को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय भी बताएंगे। वर्तमान योजनाओं का मूल्यांकन कर उसे अधिक सक्षम, किफायती और टिकाऊ बनाने में भी सहयोग देंगे। इसके साथ ही एकीकृत डिजिटल ऐप और डैशबोर्ड के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाएगा। इससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

आईआईएम इंदौर पर संस्थागत व वित्तीय सुधार की जिम्मेदारी

आईआईएम इंदौर के सहयोग से उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) में संस्थागत और वित्तीय सुधारों को गति मिलेगी। इसके तहत मानव संसाधन का पुनर्गठन, योजनाओं के परिचालन एवं रख-रखाव लागत को कम करने, वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। विशेषज्ञ विभाग की योजनाओं के जरिए राजस्व के नए स्रोत विकसित करने पर भी काम करेंगे। तकनीकी नवाचार और आधुनिक प्रबंधन के समन्वय से ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को आने वाले कई वर्षों तक लाभ मिलेगा।