वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत!, किसका फायदा, किसका नुकसान?

वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत!, किसका फायदा, किसका नुकसान?

भारतीय जनता पार्टी के वंदे मातरम पर देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस के वंदे मातरम के केवल एक अंतरे (दो पद) को पार्टी के कार्यक्रमों के गाने के फैसले को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के तीखे हमले के बाद इस पर सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले  रही है। कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर यह फ़ैसला ऐसे समय किया जब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में भाजपा ने सोनिया गांधी पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगाया था। 
 
कांग्रेस वर्किंग कमेटी में वंदे मातरम के गाने के फैसले पर गृहमंत्री अमित शाह की आपत्ति पर  कांग्रेस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए दिखावटी राष्ट्रवाद का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए वंदे मातरम के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे है।
 
वंदे मातरम पर विवाद की शुरुआत कैसे?- वंदे मातरम पर नए विवाद पर स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम मे वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी के व्यवहार को लेकर हुई। भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम को बीच में रोकने की कोशिश की। इसके बाद बुधवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के नेताओं ने वंदे मातरम के गायन का मुद्दा उठाया था।
 
बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो पद गाने की बात कही। इसके लिए खरगे ने  28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्ताव का हवाला दिया।
 
दरअसल 1937 में कोलकाता मे हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में वंदेमातम को लेकर चर्चा हुई और एक प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव को तैयार करने में जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे नेताओं की भूमिका थी। यह प्रस्ताव गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तैयार किया गया था।
 
25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की आखिरी बैठक में संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत होगा। उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ में भी पांच में से केवल एक अंतरे को राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया गया है।
 
अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ा- कांग्रेस कार्यसमिति में वंदेमातरम पर हुए इस फैसले को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ दिया। मीडिया एजेंसी से चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि “कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति ने एक आश्चर्यजनक और देशविरोधी फैसला लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी के 1937 के रिजोल्यूशन को फॉलो करते हुए महान वंदे मातरम् गीत के दो ही छंद गाने का फैसला लिया है”।
 
अमित शाह ने आगे कहा कि “मैं पूरे देश को याद दिलाना चाहता हूं, 1937 में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् के दो टुकड़े कर देश के विभाजन की नींव डाली थी और वहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली थी। अंततोगत्वा देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान का जन्म हुआ। आज जब उस ऐतिहासिक गलती को वंदे मातरम् गीत के प्राकट्य के 150वें साल में सुधार कर बंकिम बाबू की इस अमर कृति को पूरा गीत गाकर राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है, और सभी सरकारी कार्यक्रमों में इसे पूर्ण रूप से गाने का निर्णय किया गया है और इस निर्णय को कानूनी जामा भी पहनाया गया है। इसी की अवहेलना करने का निर्णय कांग्रेस ने कल किया है”।

अमित शाह ने आगे कहा कि “कांग्रेस का यह निर्णय केवल और केवल इनकी घोर तुष्टिकरण की नीति की पुष्टि करता है। वोट बैंक के लिए इन्होंने न सिर्फ बंकिम बाबू की इस अमर कृति का अपमान किया, बल्कि उन लाखों शहीदों का भी अपमान किया, जो वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए देश की आजादी के लिए फांसी पर चढ़ गए।  आज कांग्रेस पार्टी 1937 के अपनी पार्टी के रिजोल्यूशन को मान रही है और पार्लियामेंट के एक्ट को नकार रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर एक बार तुष्टिकरण की राजनीति को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ा रही है”।
 
वहीं केंद्रीय शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के खिलाफ तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि वंदे मातरम को अधूरा गाने का फैसला देश की भावना और राष्ट्रगीत का अपमान है। उन्होंने कहा  कि यह किसी पार्टी का नहीं बल्कि भारत माता के सम्मान का प्रश्न है। शिवराज सिंह ने कहा कि जो गीत स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा रहा, उसे पूरा गाना हर भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ दल देश की एकता और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को भी राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ देते हैं।
 
कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार-भाजपा के वंदे मातरम के मुद्दें को राजनीतिक तूल देने पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर को लेकर एक अलग राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दे का राजनीतिकरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों और सरकार की कथित नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है, जिसमें छात्रों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
 
कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पूरे विवाद में कानूनी पहलू सामने रखा है। कानून को उसकी मौजूदा स्थिति के हिसाब से देखा जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों के बीच अंतर बताया। सिंघवी के मुताबिक मौजूदा कानून सरकारी आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन से जुड़ी बात करता है। पार्टी के आंतरिक कार्यक्रमों के बारे में उसमें वैसी स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। यही तर्क कांग्रेस के उस फैसले को समझने की कोशिश में अहम हो जाता है, जिस पर अब पार्टी के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है।

भूपेंद्र पटेल की वर्ल्ड बैंक संग बड़ी बैठक, GIFT City से AI तक पर चर्चा; वॉलमार्ट के साथ MSME को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन

भूपेंद्र पटेल की वर्ल्ड बैंक संग बड़ी बैठक, GIFT City से AI तक पर चर्चा; वॉलमार्ट के साथ MSME को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन

bhupendra patel in washington DC

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वाशिंगटन डी.सी. में वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल बैठक की। बैठक में गुजरात के वित्तीय प्रबंधन, आर्थिक विकास, GIFT City और सरकारी सेवाओं में AI व आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। वहीं वॉलमार्ट के साथ MSME सेक्टर और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने पर भी मंथन हुआ।

 

विकसित गुजरात के विज़न की प्रस्तुति

इस राउंड टेबल बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वैश्विक मंच पर गुजरात का समग्र विज़न सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। उन्होंने राज्य में बनाए रखे गए वित्तीय अनुशासन, टिकाऊ आर्थिक विकास और भविष्य के मॉडल स्टेट के रूप में गुजरात की योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों ने भी गुजरात के आर्थिक मॉडल और टेक्नोलॉजी आधारित सुशासन के प्रयासों की सराहना की।

 

वॉलमार्ट के साथ MSME सेक्टर के विकास पर मंथन

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने वॉलमार्ट के ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नमेंट अफेयर्स के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डैन ब्रायंट के साथ एक फलदायी वन-टू-वन बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य गुजरात के विशाल MSME सेक्टर, स्थानीय उत्पादकों और छोटे कारीगरों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन से जोड़ना था। इस उच्च स्तरीय चर्चा मंउ उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और वैश्विक बाजार में स्थानीय कारीगरों को नए अवसर प्रदान करने पर जोर दिया गया।

जयपुर में CJP के स्कूल दौरे पर बवाल, ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से निकाला; क्या बोले आशुतोष रांका?

जयपुर में CJP के स्कूल दौरे पर बवाल, ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से निकाला; क्या बोले आशुतोष रांका?

protest of cjp workers in jaipur

राजस्थान में जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में कॉकरोच जनता पार्टी के स्कूल दौरे का ग्रामीणों ने विरोध किया और कार्यकर्ताओं को बाहर निकाल दिया। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इसे भाजपा प्रायोजित विरोध बताते हुए मारपीट का आरोप लगाते हुए स्कूल की बदहाली पर सवाल उठाए।

 

दरअसल, CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका इसी स्कूल में पहुंचने वाले थे, लेकिन इससे पहले ग्रामीणों ने सीजेपी के कार्यकर्ताओं को धक्का देकर गांव से बाहर निकाल दिया। इसके बाद ग्रामीण सीजेपी के विरोध में स्कूल के बाहर धरना पर बैठ गए हैं।

बच्चों को भैंसों में तबेले में चल रहा है स्कूल

आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'यह वहां के गांव वाले नहीं भाजपा के बुलाये हुए गुंडे है। इनका सरगना कमल प्रधान वहां गरीब लोगों की जमीन पर कब्जे का काम करता है। बच्चों को भैंसों में तबेले में पढ़ाया जा रहा है, और यह रोकने पर भाजपा अपने गुंडे भेज रही है क्या शर्मनाक स्थिति है।'

 

उन्होंने दावा किया कि रामपुरा, कंवरपुरा स्थित सरकारी स्कूल पिछले कई सालों से भैंसों के तबेले में चल रहा है। मैं अभी वही पहुंच रहा हूं। लेकिन हमारी टीम के कुछ साथी जो वहां पहुचे हुए थे, उनकी टीम के साथियों के साथ भाजपा के गुंडों ने मारपीट की। भाजपा को हमारे बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहे, यह मंजूर है, लेकिन इन स्कूलों को अगर हम ठीक करवाने की कोशिश करें यह मंजूर नहीं है।

कुर्ला में अचानक घरों पर गिरी भारी क्रेन, 4-5 मकान क्षतिग्रस्त; 10 से ज्यादा लोग घायल

कुर्ला में अचानक घरों पर गिरी भारी क्रेन, 4-5 मकान क्षतिग्रस्त; 10 से ज्यादा लोग घायल

kurla crane collapse

Kurla Crane Collapse: मुंबई के कुर्ला में शुक्रवार सुबह तोड़-फोड़ के काम के दौरान एक भारी-भरकम क्रेन पास के घरों और रेलवे के ओवरहेड तारों पर गिर गई। इससे 4-5 घरों को नुकसान पहुंचा और कई लोग घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है। ALSO READ: केन-बेतवा लिंक परियोजना: अफवाहों का गुबार बनाम जमीनी हकीकत, जानिए दावों के पीछे का सच

 

कुर्ला में शुक्रवार की सुबह कुरैशी नगर के पास यह हादसा तब हुआ जब ऑपरेशन के लिए पोकलेन मशीन का इस्तेमाल करके क्रेन लगाई जा रही थी। घरों पर क्रेन गिरने से हड़कंप मच गया।

क्रेन गिरने की आवाज सुनकर स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और आसपास के क्षेत्रों को खाली कराया। इस हादसे में 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि घायलों की हालत स्थिर है।

ट्रेन की आवाजाही पर कोई असर नहीं

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) की एक क्रेन पास की वर्क साइट से कुर्ला और ट्रॉम्बे के बीच ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) पर गिर गई। इस हादसे के कारण ट्रेन की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा है।

आधी रात शिफा अस्पताल पहुंचे इमरान खान, 6 डॉक्टरों ने की जांच; फिर अडियाला जेल भेजे गए

आधी रात शिफा अस्पताल पहुंचे इमरान खान, 6 डॉक्टरों ने की जांच; फिर अडियाला जेल भेजे गए

Imran Khan sent to adiyala jail after checkup

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को आधी रात को कड़ी सुरक्षा के बीच जांच के लिए शिफा अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में 6 डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की। जांच के बाद वापस फिर अडियाला जेल भेज दिया गया। ALSO READ: Top News 21 August: चीनी के दाम से अमेरिका के कर्ज तक, इमरान खान और शशि थरूर समेत पढ़ें दिन की 5 बड़ी खबरें

 

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को दिए आदेश में इमरान को इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार दफ्तर ने सरकार की उस समीक्षा याचिका को भी वापस लौटा दिया है जो इमरान खान को अस्पताल भेजे जाने के खिलाफ दाखिल की गई थी।

 

इस बीच संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने कहा है कि यदि देश की सरकारी सुविधाओं में पर्याप्त चिकित्सा देखभाल उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो सरकार इमरान खान को इलाज के लिए विदेश भेजने पर भी विचार कर सकती है।

 

पीटीआई और इमरान खान का परिवार लंबे समय से उनकी खराब सेहत को लेकर चिंता जताता रहा है। PTI प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला स्वागत योग्य है लेकिन उनकी पार्टी चाहती है कि इमरान खान को तब तक अस्पताल में रखा जाए, जब तक डॉक्टर उनकी सेहत को पूरी तरह ठीक न मान लें। ALSO READ: इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तुरंत अस्पताल भेजने का आदेश; 16 सितंबर तक रहेंगे भर्ती

 

गौरतलब है कि 73 वर्षीय इमरान खान अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद अगस्त, 2023 से जेल में हैं। उन्हें कई मामलों में सजा सुनाई गई है। इमरान इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनके वकीलों के मुताबिक जेल में रहने के दौरान उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी प्रभावित हुई है। उनके बेटों ने भी पिछले साल उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई थी।

Top News 21 August: चीनी के दाम से अमेरिका के कर्ज तक, इमरान खान और शशि थरूर समेत पढ़ें दिन की 5 बड़ी खबरें

Top News 21 August: चीनी के दाम से अमेरिका के कर्ज तक, इमरान खान और शशि थरूर समेत पढ़ें दिन की 5 बड़ी खबरें

top news 21 august

Top News 21 August: चीनी के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने रॉ शुगर का आयात ड्यूटी फ्री किया। अमेरिका का कर्ज 40 अरब डॉलर पार। इमरान खान को जांच के बाद फिर पटियाला जेल लाया गया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन को बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर बताया। हरियाणा की खाप लिन इन के खिलाफ लेकिन लव मैरिज मंजूर। 21 अगस्त की बड़ी खबरें :

 

ड्यूटी-फ्री होगा रॉ-शुगर का आयात

त्योहारी सीजन में चीनी पर महंगाई की मार। अगस्त में चीनी के दाम करीब 20 रुपए तक बढ़ गए हैं। देश में कई स्थानों पर 70 रुपए किलो तक बिकी। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी। ALSO READ: Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में 20 रुपए महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

 

अमेरिका का कर्ज 40 खरब डॉलर के पार

अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज बुधवार को 40 खरब डॉलर के पार पहुंच गया। बढ़ते कर्ज ने अमेरिकी सरकार के सामने खर्च और आय के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय कर्ज खत्म करने का वादा किया था, लेकिन कर्ज लगातार बढ़ता गया। अब उनके दूसरे कार्यकाल में यह उस समय के मुकाबले करीब दोगुना हो चुका है।

 

इमरान को फिर अडियाला जेल लाया गया

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कड़ी सुरक्षा के बीच शिफा अस्पताल में जांच के बाद वापस फिर अडियाला जेल लाया गया। अस्पताल में 6 डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए शिफा अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया था। 

 

नया संसद भवन 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' : थरूर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की डिजाइन और वहां के माहौल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नए संसद भवन को 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' बताते हुए कहा कि इसमें पुराने संसद भवन जैसा अपनापन और सहज बातचीत का माहौल नहीं है।  

 

हरियाणा की खाप को लव मैरिज मंजूर

हरियाणा की माजरा खाप लिव-इन संबंधों के खिलाफ है, पर लव मैरिज के नहीं। वह चाहती है कि लव मैरिज के साथ-साथ समलैंगिक विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों में बदलाव हो। वह लव 

 

मैरिज के खिलाफ नहीं है, पर माता-पिता की सहमति जरूर होनी चाहिए।

 

Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में ₹20 महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में ₹20 महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

sugar

अगर आपको पिछले कुछ दिनों में चीनी पहले से महंगी लग रही है, तो इसकी वजह समझना आपके घरेलू बजट के लिए जरूरी है। त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज 15 दिनों में चीनी के दाम करीब 20 रुपये तक बढ़ गए हैं। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है।

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बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में चीनी के स्टॉक को लेकर सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। यानी तय सीमा के भीतर विदेश से आने वाली कच्ची चीनी पर आयात शुल्क नहीं लगेगा।

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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) ने गुरुवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का मानना है कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में राहत मिल सकती है।

 

31 अक्टूबर तक मिलेगी ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा

DGFT के नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर का आयात किया जा सकेगा। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, रॉ-शुगर का आयात सामान्य तौर पर 'फ्री' रहेगा, लेकिन 10 लाख मीट्रिक टन की शुल्क-मुक्त सीमा और निर्धारित शर्तें लागू होंगी।

सरकार ने तय की स्टॉक सीमा

भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। करीब एक दशक बाद भारत में चीनी आयात का रास्ता खुल सकता है।

आयातित चीनी को विदेश नहीं भेज सकेंगे

सरकार ने इस योजना के तहत एक अहम शर्त भी रखी है। आयात की गई रॉ-शुगर से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचना होगा।  इसका मतलब है कि इस ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के तहत लाई गई चीनी को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकेगा। इससे सरकार का फोकस घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने पर है।

 

चीनी महंगी होने की क्या वजह है?

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार में मांग जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। त्योहारों से पहले मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत बढ़ सकती है। चीनी का स्टॉक घट रहा है। मौजूदा सीजन के अंत में घरेलू चीनी स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। कम उत्पादन और पिछले सीजन में हुए निर्यात ने उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है।  महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी और अनियमित मानसून से अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

 

इसके अलावा, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने एथेनॉल नीति को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, चीनी के दाम बढ़ने की पूरी तस्वीर समझने के लिए उत्पादन, स्टॉक, मांग और एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल—सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। अगर आयातित रॉ-शुगर की सप्लाई समय पर बाजार में आती है, तो इससे चीनी की कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका असर खास तौर पर त्योहारों के दौरान महत्वपूर्ण होगा, जब घरों में चीनी की खपत के साथ-साथ मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ जाती है। 

क्या और बढ़ेंगे दाम ?

दावा किया जा रहा है कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है।

Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, जानें कौन-कौन शामिल

Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच,  जानें कौन-कौन शामिल

20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने घटना की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी (HPEC) का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।

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प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई की होगी जांच

 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। खास तौर पर यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल नियमों के तहत किया गया था या इसका अनावश्यक इस्तेमाल हुआ। समिति प्रदर्शन स्थल पर मौजूद महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिंसा के आरोपों की भी जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। समिति को तय समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत को सौंपनी होगी।

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कमेटी में कौन-कौन शामिल?

 

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा कर्मियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों की व्यापक जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है।

 

इस समिति में शामिल सदस्य हैं:

 

  • जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी – सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और समिति के अध्यक्ष
  • जस्टिस रवि शंकर झा – पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
  • जस्टिस शालिंदर कौर – दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश
  • ऋषि कुमार शुक्ला – सीबीआई के पूर्व निदेशक
  • डॉ. एल.आर. बिश्नोई – मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी
  • पुलिस पर बल प्रयोग के आरोपों की भी पड़ताल

 

समिति प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की ओर से कथित बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की जांच करेगी। इसके साथ ही पुलिस की ओर से लगाए गए उन आरोपों पर भी गौर किया जाएगा, जिनमें पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। इस जांच का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी प्रमुख आरोपों और परिस्थितियों की निष्पक्ष पड़ताल करना है।

मैडम और सर बाथरूम में प्यार करते हैं, पढ़ाते नहीं, स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, बच्‍चों की शिकायत पर जांच शुरू

मैडम और सर बाथरूम में प्यार करते हैं, पढ़ाते नहीं, स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, बच्‍चों की शिकायत पर जांच शुरू

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सर और मैडम बाथरूम में बंद होकर प्‍यार करते हैं। पढ़ाते नहीं और स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, अंदर बंद होकर प्‍यार करते हैं और किसी को अंदर आने भी नहीं देते। यह आरोप है स्‍कूल की छात्राओं का। दरअसल, छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव इलाके के बिचबेहरी गांव के सरकारी स्कूल की छात्राओं का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में वे कह रही हैं कि सर और मैडम स्कूल आते तो हैं लेकिन हमें पढ़ाते नहीं है। वे हमारी जल्दी छुट्टी कर बाथरूम में बंद होकर प्यार करते हैं। हमारे स्कूल का टाइम 4 बजे तक है। लेकिन हमारी 3 बजे ही छुट्‌टी कर दी जाती है।

छात्राओं ने ये बात स्कूल के टीचर इंचार्ज और गेस्ट फीमेल टीचर के बारे में की। 15 अगस्त 2026 को स्टूडेंट्स ने दोनों के आपत्तिजनक व्यवहार से संबंधित वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया।

बता दें कि पहले यह मामला ग्राम सभा में पहुंचा और उसके बाद कलेक्टर की जनसुनवाई में। स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के पेरेंट्स का कहना है। बच्चे अभी छोटे हैं। अगर स्कूल में टीचर ऐसे गलत काम करेंगे तो बच्चों पर इसका क्या असर होगा। इसलिए दोनों टीचर को स्कूल से हटाकर किसी दूसरे टीचर की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई ठीक से हो सके।

छात्राओं ने टीचर की शिकायत करते हुए कहा- हमारे स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह बंद हैं। दोनों टीचर पढ़ाने के बजाय दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। स्कूल की छुट्‌टी का समय शाम 4:30 बजे तक है, लेकिन बच्चों की 3 बजे ही छुट्‌टी कर दी जाती है। बच्चों ने खुलकर आरोप लगाया कि छात्रों को घर भेजने के बाद दोनो बाथरूम में बंद होकर प्यार करते हैं। इस दौरान किसी भी छात्र को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती है। बता दें कि अधिकारियों के रवैये से तंग आकर ग्रामीणों ने 16 अगस्त को आयोजित ग्रामसभा की बैठक में दोनों टीचर्स को तत्काल पद से हटाने की मांग की थी।

आरोपों पर बोलें टीचर्स : बच्‍चों के आरोपों पर टीचर का कहना है कि हमें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। बच्चे किसी बहकावे में आकर ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि यहां पर किसी और ने भी गेस्ट टीचर बनने के लिए आवेदन दिया है, उनका नाम वेटिंग लिस्ट में है। मुझे हटाकर दूसरे का नाम आ जाए, इसलिए ऐसा किया जा रहा है।

तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

CJP Abhijeet Dipke TN CM Vijay

CJP Abhijeet Dipke Tamil Nadu CM Vijay: देश में सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 'स्कूल ठीक करो' आंदोलन अब एक देशव्यापी जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इसी बीच, तमिलनाडु सरकार द्वारा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंध के आदेश को वापस लेने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तीखा हमला बोला है। एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने तमिलनाडु सरकार, पश्चिम बंगाल में एक छात्र के पिता की हत्या, सुप्रीम कोर्ट के एफआईआर वापसी के निर्देश और 'पीएम केयर्स फंड' जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखी।   

अगर डर लग रहा है तो स्कूल ठीक करो

हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन को एक विवादास्पद आदेश जारी किया था, जिसके तहत छात्रों को CJP और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित 'स्कूल ठीक करो' जैसे आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, भारी जन-विरोध के बाद सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है। ALSO READ: तमिलनाडु की विजय सरकार का यू-टर्न, CJP और लेफ्ट के प्रदर्शन में जाने से छात्रों को रोकने वाला आदेश वापस

 

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि ऐसा आदेश आना ही गलत था। आंदोलन करना और अपनी बात रखना नागरिकों का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार (Fundamental Right) है। ऐसे आदेश दिखाते हैं कि सरकारें जनता और छात्रों से डर रही हैं। अगर आपको डर है कि लोग वीडियो बना लेंगे या बदनामी होगी, तो स्कूलों की हालत सुधार दीजिए! लोग रोकने के बजाय आपकी तारीफ में वीडियो बनाएंगे। ALSO READ: आखिर क्‍यों CM विजय थलापति ने वापस लिया स्‍टूडेंट को कॉकरोचों से दूर रखने वाला आदेश, क्‍या है वजह?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी धोखा दे रही सरकार?

दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी मुकदमों का ब्योरा मांगा था ताकि उन्हें निरस्त (Quash) किया जा सके। इस पर दीपके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले सरकारें सुप्रीम कोर्ट के कंधों पर बंदूक रखकर यह बहाना बनाती थीं कि अदालत की वजह से केस वापस नहीं लिए जा सकते। लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट खुद केस खत्म करने को तैयार है, तब भी सरकारें डेटा जमा नहीं कर रही हैं। यह देश के युवाओं के साथ सीधी धोखाधड़ी है।  

PM CARES में 8000 करोड़ की FD क्यों? शिक्षा नीति पर उठाया सवाल

CJP नेता अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर 'PM CARES Fund' में जमा पड़ी विशाल धनराशि पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने बताया कि एक तरफ देश के गरीब बच्चे बिना पीने के पानी, टूटी बेंचेस और जर्जर क्लासरूम में पढ़ने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ PM CARES Fund में लगभग 8,000 करोड़ रुपए बिना किसी इस्तेमाल के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में पड़े हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा किसी नेता के रिटायरमेंट के लिए बचाकर रखा गया है? जब देश के बच्चे एक अच्छे स्कूल और सड़कों के लिए रो रहे हैं, तो इस पैसे का इस्तेमाल देश में हाई-टेक मॉडल स्कूल बनाने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा?

पश्चिम बंगाल में स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाया तो हेट क्राइम का शिकार हुए अब्दुल के पिता

पश्चिम बंगाल के बांकुरा में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना पर दीपके बेहद भावुक और आक्रोशित नजर आए। 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत अपने पुराने सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने और बदहाली उजागर करने के कारण अब्दुल हफीज के परिवार पर प्राणघातक हमला हुआ, जिसमें उनके पिता की जान चली गई।  

  • हेट क्राइम का आरोप : पुलिस रिपोर्ट्स में पकड़े गए आरोपियों का संबंध राजनीतिक पृष्ठभूमि से बताया गया है। दीपके ने इसे साफ तौर पर 'हेट क्राइम' करार दिया।
  • मुआवजा नहीं, स्कूल चाहिए : अब्दुल के जज्बे को सलाम करते हुए दीपके ने कहा कि पिता को खोने के बाद भी उस लड़के ने कोई आर्थिक मुआवजा (Compensation) नहीं मांगा। उसकी एक ही मांग है कि उसके गांव में एक वर्ल्ड क्लास स्कूल बने और उसका नाम उसके दिवंगत पिता के नाम पर रखा जाए। इससे बड़ा देशभक्त कोई नहीं हो सकता।  

गांधी के विचारों को कोई नहीं मार सकता

आंदोलन पर उठे हिंसा और अराजकता के सवालों पर जवाब देते हुए दीपके ने कहा कि आज जब महात्मा गांधी का परिवार खुद इस मुहिम के साथ खड़ा है, तो इससे बड़ा देशभक्ति का कोई प्रमाण पत्र नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन नेपाल या बांग्लादेश जैसी हिंसक घटनाओं पर आधारित नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला के अहिंसक और शांतिपूर्ण रास्तों पर चलता है। जिस विचारधारा ने गांधी की हत्या की थी, वे आज भी उनके विचारों को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन भारत की आत्मा गांधी के सिद्धांतों में ही बसती है।