महिलाओं के सम्मान में उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरस्कारों की राशि बढ़ाई गई

महिलाओं के सम्मान में उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरस्कारों की राशि बढ़ाई गई

Uttarakhand Government award: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य में महिला शक्ति के समर्पण, संघर्ष और उत्कृष्ट योगदान का सम्मान करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने प्रतिष्ठित 'वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार' और 'आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार' की सम्मान राशि में बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। इस फैसले से प्रदेश भर की महिलाओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।

 

सरकार द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, 'वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार' की मानदेय राशि को ₹51,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, 'आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार' की राशि को भी ₹51,000 से बढ़ाकर ₹61,000 करने का निर्णय लिया गया है।

महिला शक्ति के समर्पण और संघर्ष को नमन

यह फैसला राज्य की उन साहसी, कर्मठ और प्रतिभावान महिलाओं को सम्मानित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिन्होंने समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। पुरस्कार राशि में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अथक प्रयासों को पहचान देना तथा उन्हें भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित और प्रेरित करना है।

 

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास के क्षेत्र में सबसे निचले स्तर पर जाकर अपनी सेवाएं देती हैं। ऐसे में सम्मान राशि में वृद्धि से उनके मनोबल में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी और वे अधिक निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी।

तीलू रौतेली कौन थीं?

वीरांगना तीलू रौतेली (तिलोत्तमा देवी रौतेला) उत्तराखंड (गढ़वाल) की एक ऐतिहासिक और अदम्य साहसी महिला योद्धा थीं, जिन्हें 'गढ़वाल की झांसी की रानी' भी कहा जाता है। उन्होंने कम उम्र में ही अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए युद्ध लड़े थे। उत्तराखंड सरकार हर साल समाज सेवा, खेल, शिक्षा, साहसिक कार्य और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं और बालिकाओं को 'तीलू रौतेली पुरस्कार' से सम्मानित करती है।

CM विजय का धमाका, हेल्थ इंश्योरेंस 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख किया, दूध उत्‍पादकों को भी राहत, जनता में उत्‍साह

CM विजय का धमाका, हेल्थ इंश्योरेंस 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख किया, दूध उत्‍पादकों को भी राहत, जनता में उत्‍साह

cm vijay

तमिलनाडु की जनता को सीएम विजय ने बड़ा तोहफा दिया है। सीएम ने हेल्‍थ इंश्‍योरेंस की सीमा 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दिया है। इस खबर के बाद तमिलनाडु की जनता में खुशी की लहर है।

बता दें कि यह बीमा राशि पहले 5 लाख तक थी। अब तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सालाना इलाज की सीमा 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 25 लाख रुपए करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही दूध के खरीद मूल्य में भी बढ़ोतरी की गई है।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य के लोगों, दूध उत्पादकों और हेल्थ सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना की सालाना इलाज सीमा 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 25 लाख रुपए करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार के इन फैसलों से लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

दूध उत्‍पादकों को भी फायदा : सरकार ने दूध उत्पादकों को राहत देते हुए खरीद मूल्य 38 रुपए से बढ़ाकर 41 रुपए प्रति लीटर कर दिया है। इस फैसले से करीब 3.16 लाख दूध उत्पादकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा दूध उत्पादकों को मिलने वाला सरकारी प्रोत्साहन भी 3 रुपए से बढ़ाकर 5 रुपए प्रति लीटर किया गया है। खरीद मूल्य बढ़ाने से सरकार पर हर महीने करीब 30 करोड़ रुपए और सालाना 360 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।

हेल्थ इंश्योरेंस कवर 5 से 25 लाख रुपए : स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार का सबसे बड़ा फैसला मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़ा है। इसके तहत इलाज के लिए सालाना सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद बढ़ने की उम्मीद है। सरकार ने ट्रांसजेंडर लोगों के लिए भी अतिरिक्त मेडिकल और सर्जिकल सेवाओं को योजना में शामिल करने की घोषणा की है। ये सेवाएं चेन्नई, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन, चेंगलपट्टू समेत कई सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएंगी।

मेडिकल शिक्षा पर 351 करोड़ रुपये खर्च : तमिलनाडु सरकार ने मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा को मजबूत करने के लिए 351 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 6,098 अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जाएंगी। इनमें B.Sc नर्सिंग की 660 सीटें, नर्सिंग कॉलेजों और स्कूलों में 1,925 सीटें, 12 पैरामेडिकल कोर्स में 2,778 सीटें और मेडिकल कोर्स में 735 सीटें शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में 7 नए सरकारी नर्सिंग कॉलेज भी स्थापित किए जाएंगे।

बनेगा 400 बेड वाला अस्पताल : स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पेरम्बलूर में 300 करोड़ रुपये की लागत से 400 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जाएगा। यहां लोगों को आधुनिक और बेहतर इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, तमिलनाडु सरकार के इन फैसलों का फोकस स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और दूध उत्पादकों की आय बढ़ाने पर है।

विधायकों को मिलेगी सरकारी गाड़ी : सीएम विजय ने विधानसभा में एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि सभी विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य विधायकों को अपने क्षेत्र में जनसेवा और विकास के कामों के लिए आसानी से आने-जाने की सुविधा देना है। सरकार का मानना है कि इससे विधायक अपनी जिम्मेदारियां अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकेंगे।

हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है, बांग्लादेश में हारुन इजहार की खुलेआम धमकी

हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है, बांग्लादेश में हारुन इजहार की खुलेआम धमकी

harun izhar

बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से निकलने के बाद अल्पसंख्यकों, मुख्य रूप से हिंदूओं पर अत्याचार की खबरें आती रही हैं। ऐसी कई रिपोर्टें सामने आईं है जिसमें यह पैटर्न सामने आया है कि वहां हिंदू विरोधी ताकतें मजबूत हो गई हैं। इस बीच एक बार फिर बांग्लादेश में हिंदुओं को खुलेआम धमकी देने का मामला सामने आया है और वह भी अल-कायदा से जुड़े नेता का। बांग्लादेश के चटगांव के एक रैली के दौरान अल-कायदा से जुड़े बताए जा रहे बांग्लादेशी नेता हारुन इजहार ने हिंदुओं को धमकी दी है। इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

‘दावा मूवमेंट' नाम के इस कार्यक्रम में हारुन इजहार ने कथित तौर पर कहा कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है। उसने यह भी कहा कि उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उसके लोग ही इसके लिए काफी हैं। इजहार के इस कथित बयान को लेकर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बयान का वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर विवाद और चिंता बढ़ गई है।

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले UNSC की रिपोर्ट में भी बांग्लादेश में अल-कायदा के बढ़ते कदम और कट्टरवाद को लेकर चिंता जाहिर की गई थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हाल ही में चेतावनी दी है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) बांग्लादेश को आधार बनाकर आतंकवादी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। यह निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है। यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई है।

लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को उस जनविद्रोह के बाद देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा था, जिसमें कट्टर इस्लामवादी तत्वों की प्रमुख भूमिका बताई गई थी। इसके बाद से यह आशंका बढ़ गई है कि आतंकवादी संगठनों को वहां अपनी गतिविधियां फैलाने के लिए अनुकूल जमीन मिल सकती है।

LIVE: कोलकाता में भीषण आग, 9 मौतें, ट्रंप ने होर्मुज़ पर कब्ज़े का दावा दोहराया, ईरान ने उड़ाया मज़ाक

LIVE: कोलकाता में भीषण आग, 9 मौतें, ट्रंप ने होर्मुज़ पर कब्ज़े का दावा दोहराया, ईरान ने उड़ाया मज़ाक

ईरान और अमेरिका के बीच लगभग छह महीने से चल रहा युद्ध, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों से हुई थी, अब एक तनावपूर्ण गतिरोध में बदल गया है। जिसका नाम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। ट्रंप इस जलमार्ग पर बार बार दावा ठोक रहे हैं और ईरान कह रहा है कि ये जलमार्ग ईरान का था, ईरान का ही रहेगा। अब ताजा घटनाक्रम में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई ने होर्मुज़ (Strait of Hormuz) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि होर्मुज को फिर से खोलने में अमेरिका की नाकामी और उस पर अपना दावा करने के बीच का फ़ासला, अमेरिका की राजधानी और होर्मुज के बीच की 7,000 मील की दूरी से भी ज़्यादा है। 

कोलकाता के होटल में लगी भयानक आग, 9 लोगों की मौत : कोलकाता से एक बेहद ही दर्दनाक खबर सामने आई है। कोलकाता में मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर बने एक होटल में भीषण आग लग गई, जिसमें झुलसकर 9 लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक होटल में आग आज देर रात दो बजे के बाद लगी। इस होटल के ज्यादातर लोग बांग्लादेश के सीमावर्ता इलाके के रहने वाले थे और बांग्लादेश से इलाज के लिए कोलकाता आए थे। रात के तीन बजे के बाद घटनास्थल से 9 लोगों को रेस्क्यू किया गया और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कहा जा रहा है कि होटल के खिलाफ आरोप है कि होटल पर आग बुझाने का कोई व्यवस्था नहीं था। कम से कम 2 घंटे के कोशिश के बाद आग पर अभी काबू पा लिया गया है।

सपा नेता आज़म ख़ान के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी : समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान के ठिकानों पर आज अहले सुबह से ईडी की छापेमारी जारी है। ईडी की ये छापेमारी जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में काले धन के इस्तेमाल को लेकर दर्ज मामले में कार्रवाईसे संबंधित है। आज़म खान के ख़िलाफ़ दर्ज करीब कई दर्जन मामलों की लिस्ट ED से साथ शेयर हुई थी। जानकारी के मुताबिक ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर भी छापेमारी की जा रही है। आजम खान के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली सहित कुल 10 ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई जारी है। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के लखनऊ ज़ोनल ऑफ़िस ने आज मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के सिलसिले में की गई। यह जांच सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के फंड को प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स के ज़रिए दूसरी जगह लगाने और बाद में उनके इस्तेमाल (जिसमें यूनिवर्सिटी/ट्रस्ट के लिए संपत्ति बनाना भी शामिल है) से जुड़ी है।

उद्योगों को त्वरित बिजली कनेक्शन देने पर योगी सरकार का फोकस, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

उद्योगों को त्वरित बिजली कनेक्शन देने पर योगी सरकार का फोकस, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

CM Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश में उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने के लिए योगी सरकार ने विद्युत कनेक्शन प्रक्रिया को और तेज व पारदर्शी बनाने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं उ.प्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने विद्युत व्यवस्था की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
 

उन्होंने कहा कि सरकार की उद्योगों एवं व्यापारिक गतिविधि को बढ़ावा देना प्रमुख प्राथमिकता है। इसलिये निवेश मित्र पोर्टल आदि पर कनेक्शन के आवेदनों का अतिशीघ्र निस्तारण होना चाहिए। 

 

लंबित मामलों के समाधान पर विशेष जोर

 

यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि कनेक्शन देना हमारा काम है, इसमें विलंब ठीक नहीं है। अगर कहीं विलंब की शिकायत आएगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। विद्युत निगमों के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि विद्युत कनेक्शन देने में आनाकानी या विलंब की शिकायत आने पर कार्रवाई के साथ जिम्मेदार अधिकारी की विजिलेंस जांच भी कराई जाएगी। झटपट एवं निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को आवेदनवार स्थिति की निगरानी करने तथा जहां आवश्यक हो, आवेदकों से तत्काल संपर्क कर लंबित मामलों का समाधान कराने को भी कहा है।

 

उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के निर्देश

 

यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने बैठक में नगरीय, तहसील एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की स्थिति, फीडर मीटरों के आंकड़ों तथा वितरण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मानकों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फीडर स्तर के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण करते हुए जहां भी कमियां सामने आएं, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें।

साथ ही विद्युत बिलों में सुधार के लिए लगाए जा रहे शिविरों की प्रगति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली। 

 

निर्देश दिए कि शिविरों के माध्यम से उपभोक्ताओं की बिल संबंधी शिकायतों का मौके पर अधिक से अधिक निस्तारण किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। अधिक लाइन हानि वाले फीडरों एवं क्षेत्रों में चल रही कार्रवाई की जानकारी लेते हुए फीडरवार कार्य योजना बनाकर नियमित कार्यवाई करने के निर्देश दिए हैं।

 

*लाइन हानि कम करने और राजस्व बढ़ाने पर जोर*

 

वितरण निगमों में केंद्रीकृत सामग्री की निविदाओं, क्षतिग्रस्त वितरण परिवर्तकों की स्थिति तथा इनके लिए उत्तरदायी कार्मिकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी ली। 100 केवीए से कम क्षमता वाले वितरण परिवर्तकों पर फ्यूज सेट लगाने की प्रगति में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व वृद्धि, लाइन हानियों में कमी, बेहतर बिलिंग, स्मार्ट मीटर की प्रभावी मॉनिटरिंग और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लक्ष्य तभी पूरे होंगे जब प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

 

उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की नियमित निगरानी करते हुए परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने तथा उपभोक्ताओं को बेहतर, पारदर्शी एवं निर्बाध विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शक्ति भवन में हुई इस समीक्षा बैठक में कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक नितीश कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

el nano efact

वैश्विक वित्तीय संस्था JP Morgan से जुड़ी एक चेतावनी के मुताबिक, वर्ष 2027 में दुनिया को बड़े खाद्य आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया उन देशों में शामिल हो सकते हैं, जहां इसका असर सबसे गंभीर रहने की आशंका है। इस संभावित संकट के पीछे भूराजनीतिक तनाव, उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी और अल नीनो से जुड़े बदलते मौसम के पैटर्न को प्रमुख कारण माना गया है।

ALSO READ: मेरठ में महिला दारोगा अनु रानी सस्पेंड, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक लाइव-रील वायरल, साइबर सेल करेगी जांच

2027 की पहली छमाही में महंगाई 5% तक पहुंचने का अनुमान

 

रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के पहले छह महीनों में वैश्विक महंगाई करीब 5% तक पहुंच सकती है। इसकी तुलना में 2026 की इसी अवधि में यह करीब 2.8% रही थी।

 

संभावित संकट केवल खाद्यान्न की कमी तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन लागत बढ़ने और मौसम में अनिश्चितता के कारण किसानों के लिए फसल उत्पादन बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है। अगर खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो विकासशील देशों में परिवारों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा जरूरी खाद्य वस्तुओं पर खर्च करना पड़ सकता है।

 

उर्वरक की कमी बढ़ा सकती है चिंता

 

संभावित खाद्य संकट में उर्वरक आपूर्ति एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कुल यूरिया निर्यात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 42%, जबकि अमोनिया निर्यात में हिस्सेदारी करीब 27% है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

 

रिपोर्ट में एक संभावित घटनाक्रम की ओर भी इशारा किया गया है। इसके अनुसार, संघर्ष से ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिसके बाद उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी, उत्पादन में गिरावट और अंततः खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, बाधित आपूर्ति व्यवस्था और उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाने में एक से चार साल तक का समय लग सकता है।

 

अल नीनो से फसल उत्पादन पर बढ़ सकता है दबाव

 

अल नीनो से जुड़े मौसम में बदलाव वैश्विक कृषि पर दबाव और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के दौरान सूखा, बाढ़ और अन्य प्रतिकूल मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अल नीनो के कारण फसल उत्पादन में औसतन 3.5% की गिरावट देखी गई है। वहीं, एक 'सुपर अल नीनो' वैश्विक खाद्य महंगाई को करीब 0.7% तक बढ़ा सकता है। यदि इसके साथ ऊर्जा की कीमतों में भी वृद्धि होती है तो इसका प्रभाव 1.3% से 1.5% तक पहुंच सकता है।

ALSO READ: CJP आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस बलप्रयोग की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी, उधर सरकारी स्कूल में बदली तस्वीर

भारत पर भी पड़ सकता है सीधा असर

 

भारत में अगर मानसून कमजोर या अनियमित रहता है तो कृषि क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है। बारिश पर निर्भर धान, दाल, तिलहन, कपास और गन्ने जैसी फसलों पर बारिश के बदलते पैटर्न का प्रभाव पड़ने की आशंका है। भारत के सामने चुनौती केवल पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराने की नहीं होगी, बल्कि उर्वरक और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसानों के लिए कृषि उत्पादन की लागत को वहनीय बनाए रखना भी होगी।

ALSO READ: झारखंड में JSSC CGL परीक्षा रद्द : छात्रों की जीत के बाद क्यों राहुल गांधी के नारों से गूंजा रांची, बैकफुट पर आई हेमंत सरकार, बीजेपी क्यों रह गई पीछे?

ब्राजील और इंडोनेशिया भी जोखिम वाले देशों में

 

रिपोर्ट में ब्राजील और इंडोनेशिया को भी संभावित खाद्य संकट से गंभीर रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल किया गया है। कृषि लागत में वृद्धि, फसल उत्पादन में कमी, उर्वरक की संभावित कमी और प्रतिकूल मौसम इन देशों में खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। हालांकि, संभावित संकट का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में भूराजनीतिक तनाव, उर्वरक की उपलब्धता, ऊर्जा कीमतों और मौसम की स्थिति किस तरह बदलती है।

मेरठ में महिला दारोगा अनु रानी सस्पेंड, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक लाइव-रील वायरल, साइबर सेल करेगी जांच

मेरठ में महिला दारोगा अनु रानी सस्पेंड, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक लाइव-रील वायरल, साइबर सेल करेगी जांच

merreth

सोशल मीडिया पर रील और वीडियो बनाने का शौक किस कदर भारी पड़ सकता है, इसका ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आया है। यहाँ एक महिला दारोगा का आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला दारोगा अनु रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
 

​उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन

महिला दारोगा पर विभागीय सोशल मीडिया नीति का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में आला अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की है।
 

​जांच के प्रमुख बिंदु:

​साइबर सेल करेगी तकनीकी जांच: वायरल वीडियो की सत्यता परखने का जिम्मा साइबर सेल को सौंपा गया है। टीम इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि वीडियो असली है या इसके साथ कोई तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कहाँ से और कैसे वायरल हुआ।
 

​सीओ सौम्या सिंह को विभागीय जांच : निलंबन के बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच सीओ कार्यालय में तैनात अधिकारी सौम्या सिंह को सौंपी गई है। वह पुलिस नियमावली की अनदेखी और नीति उल्लंघन से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करेंगी।
 

​एसपी क्राइम का बयान

मेरठ के एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए महिला दारोगा को सस्पेंड कर दिया गया है। फिलहाल मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की विधिक व विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की ‘खाकी’ को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की 'खाकी' को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

up police

उत्तरप्रदेश पुलिस के पहले आधिकारिक एंथम ‘खाकी का सितारा’ का 6.5 मिनट का पूरा वीडियो यूट्यूब पर रिलीज हो गया है। महानायक अमिताभ बच्चन ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस के पोस्ट को कोट ट्वीट करते हुए इस एंथम को अपने खास अंदाज में सलाम किया। अमिताभ बच्चन ने लिखा, 'कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं… कुछ ख़ाकी पहनकर ज़मीन पर। ख़ाकी का सितारा।'

 

‘खाकी का सितारा’ सिर्फ एक म्यूजिक वीडियो नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जिम्मेदारियों और उसके कामकाज के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाने की कोशिश है। एंथम में कानून-व्यवस्था से लेकर महिला सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, तकनीक, आपदा एवं राहत कार्य, जनसेवा और रोजमर्रा की पुलिसिंग तक खाकी के अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं।

 

खास बात यह है कि इस एंथम की शूटिंग एक-दो दिन में नहीं, बल्कि महाकुंभ 2025 से स्वतंत्रता दिवस 2026 तक अलग-अलग मौकों और परिस्थितियों में की गई। उत्तर प्रदेश पुलिस के इस इन-हाउस क्रिएटिव प्रोडक्शन को तैयार करने में एक वर्ष से अधिक का समय लगा। महाकुंभ की विशाल पुलिस व्यवस्था से लेकर अलग-अलग मौकों पर कानून-व्यवस्था संभालते पुलिसकर्मियों तक, कैमरे ने खाकी की ड्यूटी के कई पहलुओं को रिकॉर्ड किया।

 

दरअसल, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है। ऐसे में ‘खाकी का सितारा’ के जरिए पुलिस की उसी भूमिका को एक अलग अंदाज में पेश किया गया है। वीडियो में पुलिस को केवल कार्रवाई करने वाली एजेंसी के तौर पर नहीं, बल्कि संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाली और आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाली व्यवस्था के रूप में दिखाया गया है।

 

त्योहार हो या आपदा, भीड़ का दबाव हो या कानून-व्यवस्था की चुनौती- खाकी हर जगह मौजूद दिखाई देती है। यही इस एंथम का मूल संदेश है। वीडियो में वर्दी के पीछे के उस इंसान को भी दिखाने की कोशिश की गई है, जो अपने परिवार और निजी जीवन से दूर रहकर ड्यूटी करता है और कई बार बिना किसी पहचान या अपेक्षा के अपना कर्तव्य निभाता है।

 

इस एंथम को देश के जाने-माने कलाकारों ने अपनी आवाज और प्रतिभा दी है। इसमें अमिताभ बच्चन की प्रभावशाली आवाज, पद्मश्री शंकर महादेवन का स्वर और संगीत तथा जाने-माने कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव के शब्द हैं। अभिनेता करण आनंद ने इसमें पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है।

up police

14 अगस्त को लोक भवन में हुआ था लॉन्च

 

‘खाकी का सितारा’ का औपचारिक लॉन्च 14 अगस्त को लोक भवन, लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इस मौके पर पद्मश्री शंकर महादेवन, पद्मश्री नाना पाटेकर, गीतकार आलोक श्रीवास्तव, अभिनेता करण आनंद सहित फिल्म और संगीत जगत से जुड़े कई कलाकार मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल हुए।

 

लॉन्च के दौरान शंकर महादेवन ने ‘खाकी का सितारा’ से जुड़ने को अपने जीवन के खास पलों में से एक बताया। उन्होंने इस एंथम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार को समर्पित किया। उन्होंने गीत की पंक्तियां “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” और “हम डटे रहे, हम खड़े रहे, चट्टानों जैसे अड़े रहे” सुनाते हुए कहा कि संगीत के जरिए पुलिस की सेवा, साहस और संकल्प को आवाज देना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा।

 

खाकी के कई रंग, एक ही संकल्प

 

‘खाकी का सितारा’ में पुलिस की सख्ती के साथ उसकी संवेदनशीलता को भी जगह दी गई है। कहीं कानून-व्यवस्था संभालते जवान नजर आते हैं, तो कहीं महिला सुरक्षा और जनसेवा में जुटी पुलिस दिखाई देती है। कहीं महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन की जिम्मेदारी है, तो कहीं आपदा और राहत के बीच लोगों तक पहुंचती खाकी।

यानी यह एंथम सिर्फ पुलिस की वर्दी का गीत नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी की कहानी है जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस हर दिन निभाती है। “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” के संदेश के साथ ‘खाकी का सितारा’ योगी सरकार के उस कानून-व्यवस्था मॉडल की भी तस्वीर पेश करता है, जिसमें पुलिस को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनता की सुरक्षा, सेवा और भरोसे की जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

अमिताभ बच्चन के शब्दों में कहें तो कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं और कुछ खाकी पहनकर जमीन पर- ‘खाकी का सितारा’ इसी जमीन पर चमकने वाली खाकी को समर्पित है।

CJP आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस बलप्रयोग की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी, उधर सरकारी स्कूल में बदली तस्वीर

CJP आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस बलप्रयोग की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी, उधर सरकारी स्कूल में बदली तस्वीर

abhijeet dipake.jpg

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो मार्च' के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बलप्रयोग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही है। हालांकि, CJP ने समिति के गठन को लेकर अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। पार्टी का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट समिति गठित करता है तो उसके सभी सदस्य पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए।

ALSO READ: पाकिस्तानी ब्यूटी क्रीम में पारे का ज़हर? महाराष्ट्र के गांवों में चेहरे की चमक बनी आफत, 100 से ज्यादा लोग गंभीर बीमार

सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई लेवल कमेटी

 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इसमें रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, सीबीआई के पूर्व निदेशक समेत अन्य सदस्य शामिल हो सकते हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि समिति में शामिल किए जाने वाले अन्य सदस्यों को लेकर अलग-अलग पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद समिति के गठन का आदेश बुधवार को जारी किया जाएगा।

ALSO READ: PM E-DRIVE Scheme : इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर बढ़ी सब्सिडी की अवधि, जानें किसे मिलेगा कितना फायदा

CJP ने कहा- समिति स्वतंत्र होनी चाहिए

 

सुप्रीम कोर्ट के बाहर CJP के सह संयोजक सौरभ दास ने कहा कि यदि अदालत को लगता है कि प्रदर्शनकारियों को न्याय दिलाने के लिए उच्चस्तरीय समिति जरूरी है तो पार्टी अदालत के फैसले का सम्मान करेगी। हालांकि, उन्होंने समिति के सदस्यों के चयन को लेकर स्पष्ट शर्त रखी। दास के मुताबिक, समिति के सदस्य ऐसे होने चाहिए जिनकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर कोई सवाल न उठे। उन्होंने कहा कि समिति में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए जिनका पिछला रिकॉर्ड पहले से सवालों के घेरे में रहा हो। उन्होंने कहा कि यह सरकार की समिति नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की समिति होगी और देश के युवा इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं।

 

CJP ने अपने सदस्यों को समिति में शामिल करने की मांग की

 

CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि प्रदर्शन से जुड़े सभी एफआईआर रद्द किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रदर्शन खत्म होने के एक सप्ताह के भीतर इस आश्वासन पर कार्रवाई चाहती थी। रत्ना सिंह ने कहा कि अगर जांच समिति बनाई जा रही है तो वह पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए और उसके सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

 

उन्होंने यह भी मांग की कि CJP के सदस्यों को समिति में शामिल किया जाए, ताकि समिति के सामने रखी जाने वाली सूचनाओं का सत्यापन किया जा सके। उनका कहना है कि व्यक्तिगत रूप से पार्टी उच्चस्तरीय समिति नहीं चाहती, बल्कि वह सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को पूरा किए जाने की मांग कर रही है। 

ALSO READ: iPhone 18 Pro और Pro Max की एंट्री सितंबर में! Apple ला सकता है अपना पहला फोल्डेबल iPhone

 


क्या है पूरा मामला?

20 जुलाई : दिल्ली में 'संसद चलो मार्च' के दौरान पुलिस बलप्रयोग के आरोप।

सुप्रीम कोर्ट : प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाने की घोषणा।

प्रस्तावित समिति : रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, पूर्व सीबीआई निदेशक समेत अन्य सदस्य।

CJP की मांग : समिति पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हो।

दूसरी मांग : समिति के सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।

CJP की अतिरिक्त मांग : पार्टी के सदस्यों को भी समिति में शामिल किया जाए।


 जंतर-मंतर आंदोलन के बाद 'स्कूल ठीक करो' अभियान

संसद मार्च और सुप्रीम कोर्ट में जांच समिति की मांग के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अब सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर अभियान चला रहे हैं। उनके अभियान का असर उनके पैतृक गांव महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी में भी दिखाई देने लगा है।

 

दीपके ने 15 अगस्त को अपने पैतृक गांव के जिला परिषद स्कूल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और टूटी खिड़कियों समेत कई समस्याओं को सामने रखा था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने स्कूल में मरम्मत कार्य शुरू करा दिया।

मिलीं नई बेंच-डेस्क और कंप्यूटर

अभिजीत दीपके ने मंगलवार, 18 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्कूल की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके गांव के स्कूल के बच्चों को अब नई बेंच-डेस्क मिल गई हैं। उन्होंने गांव के लोगों और स्कूल स्टाफ का आभार जताते हुए इसे अपने जीवन के सबसे खुशी भरे पलों में से एक बताया। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया कि स्कूल में अब कंप्यूटर भी लगाए गए हैं। दीपके ने कहा कि जब सरकारें विफल होती हैं तो आम लोग मदद के लिए आगे आते हैं।

'अब रुकना नहीं है, स्कूल ठीक करके ही रहेंगे'

 

दीपके ने इससे पहले एक वीडियो में कहा था कि हिंगोली जिले के लिंबाला गांव के लोगों की यह पहली बड़ी जीत है। उन्होंने बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित किया गया है। उन्होंने इस जीत को अब्दुल और उसके पिता को समर्पित करते हुए कहा कि अब स्कूल सुधार का अभियान रुकना नहीं चाहिए।

 

15 अगस्त से शुरू किया 'स्कूल ठीक करो' अभियान

 

अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत अपने पैतृक गांव के स्कूल से की थी। ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के बाद उन्होंने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं की टूटी खिड़कियों, खराब सीसीटीवी कैमरों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर किया। दीपके के दौरे के बाद स्थानीय ग्राम पंचायत ने स्कूल की समस्याओं को दूर करने के लिए काम शुरू कराया।

 

खिड़कियां बदली जा रहीं, नए CCTV कैमरे लगाए जा रहे

 

संतुक पिंपरी के सरपंच विजय पुरी ने बताया कि दीपके ने स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया था और जिन कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, उन्हें दूर करने का काम शुरू कर दिया गया है। स्कूल की क्षतिग्रस्त खिड़कियों को बदला जा रहा है और खराब सीसीटीवी कैमरों की जगह नए कैमरे लगाए जा रहे हैं।

इसके अलावा शौचालयों में पानी की समस्या को भी दूर किया गया है और चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। राज्य के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्कूल प्रबंधन को बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मरम्मत कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी स्कूलों को लेकर दीपके का बड़ा सवाल

अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि अगर मंत्री, शिक्षा विभाग के अधिकारी, प्रिंसिपल, शिक्षक और दूसरे कर्मचारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं तो इन स्कूलों की स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी अधिकारी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में क्यों पढ़ाते हैं? क्या उन्हें अपने ही सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर भरोसा नहीं है? दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति में सुधार के लिए केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही की जरूरत है।

गोरखपुर में राप्ती नदी में डूब रहे युवक के लिए फरिश्ता बने पीएसी जवान

गोरखपुर में राप्ती नदी में डूब रहे युवक के लिए फरिश्ता बने पीएसी जवान

उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रशासन को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में राहत दलों की तैनाती, मोटरबोट समेत आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और जवानों को बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन तैयारियों का असर गोरखपुर में उस समय देखने को मिला, जब राप्ती नदी में डूबते एक युवक के लिए बाढ़ राहत दल के जवान फरिश्ता बनकर पहुंचे।

 

युवक ने नौसढ़ रामघाट से राप्ती नदी में छलांग लगा दी थी और देखते ही देखते गहरे पानी में डूबने लगा। मौके पर मौजूद 26वीं वाहिनी पीएसी के बाढ़ राहत दल ने बिना वक्त गंवाए मोटरबोट से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जवानों की तत्परता, साहस और सूझबूझ से युवक को सकुशल नदी से बाहर निकाल लिया गया।

 

राप्ती नदी के रामघाट, नौसढ़ में शुक्रवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक ने आत्महत्या के इरादे से नदी में छलांग लगा दी। गहरे पानी में डूब रहे युवक की जान बचाने के लिए मौके पर मौजूद 26वीं वाहिनी पीएसी, गोरखपुर के बाढ़ राहत दल ने बिना देर किए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

बाढ़ राहत का प्रशिक्षण के दौरान चलाया बचाव अभियान

26वीं वाहिनी पीएसी गोरखपुर के मुताबिक संतकबीरनगर के धनघटा निवासी उमेश कुमार ने करीब शाम छह बजे राप्ती नदी में छलांग लगाई। उस समय रामघाट पर पीएसी का बी दल बाढ़ राहत प्रशिक्षण और ड्यूटी पर तैनात था। आरक्षियों को बाढ़ राहत का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। युवक को नदी में डूबता देख हेड कांस्टेबल महात्म प्रसाद ने तत्काल मोर्चा संभाला।

 

महात्म प्रसाद के नेतृत्व में टीम मोटरबोट लेकर तत्काल नदी में उतरी और डूब रहे युवक की तलाश शुरू की। टीम ने बेहद कम समय में युवक को सुरक्षित खोज निकाला। रेस्क्यू के बाद युवक को आवश्यक कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। अब उसकी स्थिति सामान्य है। इस साहसिक रेस्क्यू अभियान में हेड कांस्टेबल महात्म प्रसाद के साथ कांस्टेबल संजय कुमार गौतम, कृष्णचंद मौर्य, रमेश यादव, मनोज शुक्ला, जितेंद्र कुमार, रवि गौतम और धीरेंद्र गोंड शामिल रहे। बचाव दल की तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा की दलनायक तथा थाना राजघाट प्रभारी ने भी सराहना की।