PM E-DRIVE Scheme : इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर बढ़ी सब्सिडी की अवधि, जानें किसे मिलेगा कितना फायदा

PM E-DRIVE Scheme : इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर बढ़ी सब्सिडी की अवधि, जानें किसे मिलेगा कितना फायदा

electric scooter

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली PM E-DRIVE Scheme की अवधि दो साल के लिए बढ़ा दी है। सरकार ने योजना को अब 31 मार्च 2028 तक जारी रखने का फैसला किया है। साथ ही योजना का कुल बजट भी 1,000 करोड़ रुपये बढ़ाकर 11,900 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

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सरकार ने इस योजना को सितंबर 2024 में 10,900 करोड़ रुपये के बजट के साथ अधिसूचित किया था। उस समय योजना की अवधि 31 मार्च 2026 तक तय की गई थी। अब इसे दो साल और बढ़ाने से इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाला सरकारी प्रोत्साहन जारी रहेगा।

 

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर खास फोकस

 

नई अधिसूचना में Electric Two-Wheelers (e-2Ws) के लिए प्रोत्साहन की अवधि को विशेष रूप से स्पष्ट किया गया है। पंजीकृत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए यह सहायता 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी। हालांकि, सब्सिडी पाने के लिए इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की कीमत और प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा तय की गई है।

1.5 लाख रुपये तक की एक्स-फैक्ट्री कीमत जरूरी

 

संशोधित PM E-DRIVE योजना के तहत केवल वे पंजीकृत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स प्रोत्साहन के लिए पात्र होंगे, जिनकी अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये है। यानी इससे अधिक एक्स-फैक्ट्री कीमत वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया इस प्रोत्साहन के दायरे में नहीं आएंगे। सरकार ने इस योजना के तहत अधिकतम 45,79,120 पंजीकृत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को सहायता देने का लक्ष्य रखा है।

 

प्रति kWh 2,500 रुपये का इंसेंटिव

 

योजना के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए 2,500 रुपये प्रति kWh की दर से इंसेंटिव दिया जाएगा। हालांकि, प्रति वाहन अधिकतम प्रोत्साहन राशि 5,000 रुपये निर्धारित की गई है। लेकिन यहां एक और महत्वपूर्ण सीमा लागू होगी। मिलने वाला इंसेंटिव वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता। उदाहरण के तौर पर, अगर बैटरी क्षमता के हिसाब से किसी वाहन का इंसेंटिव 5,000 रुपये बनता है, लेकिन वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत का 15 फीसदी इससे कम है, तो कम राशि ही इंसेंटिव के रूप में मिलेगी।

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हर इलेक्ट्रिक स्कूटर को 5,000 रुपये की सब्सिडी नहीं

 

इसका मतलब यह है कि पात्र इलेक्ट्रिक स्कूटर या इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल खरीदने पर हर ग्राहक को अपने आप 5,000 रुपये का इंसेंटिव नहीं मिलेगा। वास्तविक प्रोत्साहन राशि बैटरी की क्षमता और वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत, दोनों के आधार पर तय होगी। इस तरह PM E-DRIVE योजना के संशोधित नियमों के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदारों को राहत मिलती रहेगी, लेकिन इंसेंटिव पाने के लिए वाहन को तय कीमत सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।

इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तुरंत अस्पताल भेजने का आदेश; 16 सितंबर तक रहेंगे भर्ती

इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तुरंत अस्पताल भेजने का आदेश; 16 सितंबर तक रहेंगे भर्ती

imran khan to be shifted in hospital from jail

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने उन्हें इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का आदेश दिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने अदियाला जेल में बंद इमरान को इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराने का आदेश दिया है। उन्हें 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का निर्देश दिया गया है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस फैसले का स्वागत किया है।


पीटीआई और इमरान खान का परिवार लंबे समय से उनकी खराब सेहत को लेकर चिंता जताता रहा है। PTI प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला स्वागत योग्य है लेकिन उनकी पार्टी चाहती है कि इमरान खान को तब तक अस्पताल में रखा जाए, जब तक डॉक्टर उनकी सेहत को पूरी तरह ठीक न मान लें।

 

आंखों की रोशनी जाने का खतरा

गौरतलब है कि 73 वर्षीय इमरान खान अगस्त, 2023 से जेल में हैं। उन्हें कई मामलों में सजा सुनाई गई है। इमरान इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनके वकीलों के मुताबिक जेल में रहने के दौरान उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी प्रभावित हुई है। उनके बेटों ने भी पिछले साल उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई थी।

 

क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

Islamic NATO

दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के राजनीतिक क्षितिज पर एक बड़ा कूटनीतिक भूचाल आया है। पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मिलकर 'मक्का रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defense Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा विशेषज्ञों द्वारा इसे व्यापक रूप से 'इस्लामिक नाटो' (Islamic NATO) के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते के तहत प्रावधान किया गया है कि किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।

पाकिस्तान का मुख्य दांव न केवल मध्य पूर्व के रक्षा ढांचे में खुद को स्थापित करना है, बल्कि भारत के पड़ोसी देशों—विशेष रूप से बांग्लादेश—को भी इस बहुपक्षीय प्रभाव क्षेत्र में आकर्षित कर भारत को पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ से कूटनीतिक रूप से घेरना है। ALSO READ: 'इस्लामिक नाटो' का आगाज! जानिए कैसे पाकिस्तान समेत तीन मुल्कों की डील ने बढ़ाई भारत की टेंशन

मक्का रक्षा समझौता और बांग्लादेश का संभावित समीकरण

सऊदी अरब की आर्थिक ताकत, तुर्की की आधुनिक रक्षा तकनीक और पाकिस्तान की सैन्य व परमाणु क्षमता के इस त्रिकोण के बाद अब पूर्वी मोर्चे पर बांग्लादेश के इस घटनाक्रम में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं:

  • बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और विदेश नीति का बदलाव: बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक माहौल में ढाका की विदेश नीति पाकिस्तान और तुर्की की तरफ झुकाव दिखा रही है।
  • तुर्की-बांग्लादेश रक्षा साझेदारी: तुर्की लंबे समय से बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग और सैन्य उपकरण आपूर्ति (जैसे ड्रोन और बख्तरबंद वाहन) को मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान और तुर्की का लक्ष्य बांग्लादेश को इस विस्तृत सुरक्षा/आर्थिक ब्लॉक से जोड़ना है।
  • टू-फ्रंट कूटनीतिक दबाव: यदि बांग्लादेश इस तरह के सुरक्षा या आर्थिक ब्लॉक का हिस्सा बनता है, तो भारत के पूर्वी हिस्से (चिकन नेक कॉरिडोर) के पास एक नया सुरक्षा समीकरण बन सकता है, जिससे भारत पर रणनीतिक दबाव बढ़ेगा।

islamic nato mecca accord


भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया और काउंटर-रणनीति

भारत इस क्षेत्रीय गुटबंदी और बांग्लादेश के बदलते रुख पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारत ने इसे संतुलित करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है:

  1. आर्मेनिया और ग्रीस के साथ रक्षा गठबंधन: तुर्की-पाकिस्तान अक्ष को काटने के लिए भारत ने ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ अपने सामरिक और रक्षा संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचाया है।
  2. सऊदी अरब व यूएई के साथ मजबूत द्विपक्षीय व्यापार: हालांकि सऊदी अरब इस मक्का समझौते का हिस्सा है, लेकिन भारत के साथ उसके भारी-भरकम आर्थिक व ऊर्जा संबंध बने हुए हैं, जिससे यह समझौता पूरी तरह भारत-विरोधी रुख में तब्दील होना आसान नहीं है।
  3. बांग्लादेश के साथ व्यावहारिक जुड़ाव: ढाका में राजनीतिक बदलाव के बावजूद, भारत अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत बांग्लादेश के साथ आर्थिक, बिजली आपूर्ति और व्यापारिक निर्भरता के जरिए संबंध सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

पाकिस्तान द्वारा 'मक्का समझौते' के माध्यम से 'इस्लामिक नाटो' को आकार देना और उसमें बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई पड़ोसियों को आकर्षित करने की कोशिश भारत के लिए एक नई विदेश नीति चुनौती है। हालांकि, अरब देशों और पश्चिमी शक्तियों के अपने-अपने विरोधाभास इस ब्लॉक की वास्तविक सैन्य प्रभावकारिता को सीमित कर सकते हैं। भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा, पूर्वोत्तर सीमा और बहुपक्षीय कूटनीति को पहले से अधिक सतर्क और मजबूत रखना होगा।

मोदी की टिप्पणी के बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ इंस्टाग्राम पर 4 लाख से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय

मोदी की टिप्पणी के बाद 'दिमागी नक्सल पार्टी' इंस्टाग्राम पर 4 लाख से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय

Dimagi naxal Party

dimagi naxal party: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किया गया शब्द 'दिमागी नक्सल' सोशल मीडिया पर एक बड़े राजनीतिक व्यंग्य में बदल गया है। पीएम के भाषण के ठीक एक दिन बाद इंस्टाग्राम पर 'दिमागी नक्सल पार्टी' नाम से बना एक पेज महज कुछ घंटों में 4,00,000 से अधिक फॉलोअर्स के साथ इंटरनेट पर छा गया है।

एक शब्द से खड़ा हुआ नया ऑनलाइन मूवमेंट

सोशल मीडिया की दुनिया में कब क्या ट्रेंड कर जाए, कोई नहीं जानता! स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने जैसे ही 'दिमागी नक्सल' शब्द का जिक्र किया, इंटरनेट पर एक नया डिजिटल आंदोलन खड़ा हो गया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की तर्ज पर शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक इंस्टाग्राम पेज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

अपने ही नेता से असहमत होना पहली शर्त

इस व्यंग्यात्मक पेज ने अपनी कार्यशैली और सदस्यता के नियमों को काफी अनोखे अंदाज में पेश किया है। इस पेज पर पहली शर्त रखी गई है कि कि “आप हमारी पार्टी में तभी शामिल हो सकते हैं जब आप अपने ही नेताओं से असहमत होने की हिम्मत रखते हों।” बायो में इस ग्रुप ने लिखा— “हम सोचते हैं। हम शोध करते हैं। हम विरोध करते हैं।”

भगत सिंह से प्रेरणा

इस पेज के संचालकों का दावा है कि वे शहीद-ए-आजम भगत सिंह की सोच पर चलते हैं। उन्होंने लिखा कि अगर उन्हें देश विरोधी बताया गया या उनका अकाउंट बंद किया गया, तो यह भगत सिंह की विचारधारा का अनादर होगा।

ऑरवेल के '1984' और 'थॉट क्राइम' से तुलना

पेज पर कई ऐसे पोस्ट शेयर किए गए हैं जिनमें पीएम मोदी की टिप्पणी की तुलना जॉर्ज ऑरवेल के प्रसिद्ध उपन्यास 1984 की 'थॉट क्राइम' (सोच से जुड़े अपराध) की अवधारणा से की गई है। पेज ने 'दिमागी नक्सल' की परिभाषा देते हुए लिखा— “एक ऐसा दिमाग जो दमनकारी शासनों के व्यवस्थित पैटर्न को पहचान सकता है।”

साइबर हमला या बैन का डर?

सोमवार को जब फॉलोअर्स का आंकड़ा 2 लाख पार कर गया, तो यह पेज अचानक कुछ समय के लिए दिखना बंद हो गया। इसके संचालकों ने 'एक्स' (ट्विटर) पर दावा किया कि उन्हें साइबर हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद इंटरनेट यूजर्स ने “हटाए जाने से पहले फॉलो करें” की अपील के साथ इस पेज को तेजी से रीपोस्ट करना शुरू कर दिया।

पीएम मोदी ने भाषण में क्या कहा था?

दरअसल, 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार ने सशस्त्र माओवादी उग्रवाद पर तो लगभग काबू पा लिया है, लेकिन अब इस विचारधारा ने अपना रूप बदल लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी सोच वाले लोग लंबे समय से व्यवस्था के भीतर, सरकारी समितियों और सलाहकार मंडलों में बैठकर नीतियों को प्रभावित करते रहे हैं।

 

पीएम मोदी की इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक तरफ राजनीतिक बहस छिड़ गई है, तो दूसरी तरफ 'दिमागी नक्सल पार्टी' के रूप में इंटरनेट का नया 'मीम कल्चर' भी देखने को मिल रहा है।

मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन…

मोदी के मंत्री ने की अभिजीत दीपके की तारीफ, कहा- अपना ही लड़का है, लेकिन...

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Kiren Rijiju on Abhijit Deepke: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर बड़ा बयान दिया है। रिजिजू ने दीपके को 'अपना ही लड़का' बताते हुए उनकी छात्र पहचान पर सवाल खड़े कर दिए और आरोप लगाया कि इस पूरे जेन-जी आंदोलन को राजनीतिक दलों ने हाईजैक कर लिया।

किरेन रिजिजू का राजनीतिक 'ट्विस्ट'

राजनीति में कब कौन 'अपना' हो जाए और कब 'पराया', यह कहना मुश्किल है! कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एएनआई से बातचीत के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और युवाओं के बीच तेजी से उभरते चेहरे अभिजीत दीपके पर खुलकर अपनी राय रखी। ALSO READ: CJP कार्यकर्ता के पिता की पीट-पीटकर जान ली, बंगाल में सरकारी स्कूल की बदहाली दिखाना पड़ा भारी, दीपके ने साधा निशाना

 

रिजिजू से जेन-जी आंदोलन और छात्रों की शिक्षा सुधार संबंधी मांगों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में जवाब दिया। रिजिजू ने कहा कि यह जो अभिजीत दीपके है, वह हमारे अपने ही लड़के हैं, महाराष्ट्र से बौद्ध हैं…' लेकिन रिजिजू का यह प्यार यहीं नहीं रुका, उन्होंने तुरंत ही इस पर एक राजनीतिक 'ट्विस्ट' दे दिया।

वो स्टूडेंट कैसे हो गया?

नरम रुख दिखाने के तुरंत बाद रिजिजू ने दीपके की स्वतंत्र छात्र पहचान पर सीधा सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि लेकिन वो तो आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, वो तो आप भी जानते हैं, सब जानते हैं… वो स्टूडेंट कैसे हो गया? रिजिजू ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी पार्टियां छात्रों के पीछे छिपकर अपनी 'राजनीतिक रोटियां' सेकने में जुट जाती हैं। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

 

केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए इतने बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पूरी तरह शांति बनाए रखी और किसी को खरोंच तक नहीं आने दी, फिर भी सरकार पर दमन का झूठा नैरेटिव बनाया जा रहा है। हालांकि रिजिजू ने माना की छात्रों की चिंता जायज है। 

कौन हैं अभिजीत दीपके और क्यों मचा है बवाल?

अभिजीत दीपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जेन-जी (Gen-Z) के बीच जबरदस्त पैठ बनाई है। CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद इसका तगड़ा सियासी असर देखने को मिला था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था। यह मूवमेंट NEET-UG 2026 पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद मुखर रहा है। 15 अगस्त 2026 से दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने के लिए देशभर में 'सोशल ऑडिट' अभियान शुरू किया है।

NDA से भी मिल चुका है न्योता!

दिलचस्प बात यह है कि रिजिजू से पहले केंद्रीय मंत्री और RPI (A) प्रमुख रामदास आठवले भी अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी में आने का न्योता दे चुके हैं। आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने और समाज को मजबूत करने के लिए दीपके को RPI (A) यानी NDA के कुनबे में शामिल हो जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि 'अपना लड़का' कहे जाने और आप (AAP) का कार्यकर्ता बताए जाने के इस सियासी घेराबंदी पर अभिजीत दीपके और उनकी 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या रुख अपनाती है?

LIVE: स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा

LIVE: स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का दावा

delhi police on student protest

Latest News Today Live Updates in Hindi : छात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पल पल की जानकारी…

ट्रंप ने कहा कि भारत में करोड़ों लोगों ने मतदान किया और मतदाताओं के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने कहा कि भारत में हर मतदाता की पहचान फिर अमेरिका में क्यों नहीं। उन्होंने इसी आधार पर सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की मांग की। ALSO READ: भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया। ALSO READ: BJP में बड़ा फेरबदल: विनोद तावड़े को UP, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारीछात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पुलिस ने दावा किया कि छात्रों पर न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

हेमंत सोरेन के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

हेमंत सोरेन के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

jharkhand student protest ends

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और TDPL परीक्षा को रद्द करने के फैसले के बाद झारखंड में छात्र आंदोलन समाप्त हो गया। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 15 दिन से जारी अनशन समाप्त कर किया। हालांकि भाजपा का कहना है कि झारखंड सरकार ने आधी बात मानी है। CBI जांच से झारखंड सरकार भाग रही है क्योंकि उन्हें पता है कि CBI जांच होगी तो मुख्यमंत्री तक आंच आएगी।

 

देवेंद्र महतो ने उम्मीदवारों की मांगें मानने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राज्य के मंत्रियों दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी का धन्यवाद किया। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक को रोकने के लिए सख्त कानूनों और सुधारों की भी मांग की।
 

सरकार सभी मांगों पर सहमत

राज्य मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार हमेशा से झारखंड में शुरू हुए बड़े छात्र आंदोलन, खासकर सुधारों से जुड़े मुद्दों को लेकर संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री ने आंदोलन की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी है और राहुल गांधी ने भी लगातार छात्रों के हितों की बात की है। आज हम आंदोलनकारियों का धन्यवाद करना चाहते हैं। आपने जो आंदोलन शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से, राज्य और छात्रों दोनों के हित में चलाया, वह अब बहुत सम्मानजनक तरीके से समाप्त हो रहा है। सरकार आपकी सभी मांगों पर सहमत हो गई है और हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि जांच निष्पक्ष होगी। किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

 

सीबीआई जांच क्यों नहीं कराना चाहती सरकार?

दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि छात्र आंदोलन से पहले ही, देवेंद्र महतो ने CID जांच का प्रस्ताव दिया था और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। इसके विपरीत, CBI नतीजे देने में विफल रही है, पेपर लीक से जुड़े उसके 17 मामले लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि 2015 से देश भर में पेपर लीक और गड़बड़ी के 152 मामले सामने आए हैं, फिर भी न तो केंद्र सरकार और न ही केंद्रीय एजेंसियों को इन मामलों में कोई ठोस नतीजा मिला है। इसलिए, CID जांच के संबंध में हमने एक समय-सीमा तय की है। 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए और मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए होनी चाहिए ताकि जल्द फैसला आ सके।

 

सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र

छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने कहा कि मंत्री दीपिका पांडे और इरफान अंसारी जी अभी आए थे उन्होंने हमसे अपील की ये आंदोलन और अनशन को खत्म करें। लेकिन जो हमारी मांगे CBI संबंधित हैं उस पर सरकार की अभी तक सहमति नहीं बन पाई है हमारी CBI से संबंधित जो मांगे है उसे हम अभी भी जारी रखें हुए हैं। कल सरकार की तरफ से जो भी नोटिफिकेशन आएगा उसको भी हम अध्ययन करेंगे उसके बाद हम अपने आंदोलन की रणनीति के बारे में बताएंगे। हमारी मांग है कि CBI जांच होनी चाहिए।

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

CM Yogi Adityanath

UP Free Ration Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी राशन वितरण के उचित दर विक्रेताओं से अपील की कि वह कार्य करिए, जिसमें सम्मान हो। जिसमें सम्मान न हो, वह कार्य कभी नहीं करना चाहिए। इससे पीढ़ियां खराब होती हैं, उन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने 2017 के बाद आए बदलाव का जिक्र किया और कहा कि अब कोई आप पर अंगुली नहीं उठा सकता। 2017 के पहले सपाई गरीब का राशन कार्ड अपने घर में रख लेता था, जिससे वह भूख से मरता था परंतु अब ऐसी स्थिति नहीं है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को लगातार निःशुल्क राशन मिल रहा है। निराश्रितों/दिव्यांगों का राशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है। 2 करोड़ परिवारों को फ्री में रसोई गैस के कनेक्शन, 1.53 करोड़ परिवारों को फ्री में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। राशन की 10 हजार दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में स्थापित किया गया है। यह परिणाम राज्य की उन्नति को बताते हैं। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार की शुभकामना दी और राशन कोटेदारों की आस पूरी करते हुए सोमवार को लोकभवन में सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के अंतर्गत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली का शुभारंभ किया। सीएम ने बटन दबाकर उत्तर प्रदेश के 78 हजार से अधिक उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में हुई वृद्धि (90 रुपए से बढ़ाकर 125 रुपए प्रति क्विंटल) का उपहार दिया। सीएम ने कहा कि मार्जिन मनी में 35 रुपए की वृद्धि (10 रुपए केंद्र सरकार व 25 रुपए राज्य सरकार) से आपने लंबी छलांग लगाई है। हमने 25 रुपए और बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। समय लगेगा, लेकिन यह कार्य हो गया तो आपके लिए और भी अच्छी व्यवस्था होगी।

शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं फेयरप्राइस शॉप के संचालक

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति काम करके आजीविका चलाता है, लेकिन उचित मूल्य विक्रेता निराश्रित, गरीब, दिव्यांगजन समेत समाज के अन्य जरूरतमंदों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें शासन की योजना से जोड़ रहे हैं। उचित मूल्य विक्रेता से जुड़े फेयरप्राइस शॉप के संचालक दुनिया की सबसे बड़ी योजना (राशन वितरण) के जरिए शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। 

वर्ष 2017 के पहले कोटेदार नाम से लोगों को होती थी चिढ़ 

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले उचित दर मूल्य के विक्रेताओं का दर्द बयां किया। कहा कि आप तब भी मेहनत करते थे लेकिन शासन राशन नहीं भेजता था तो गाली आपको खानी पड़ती थी। उनकी लूट का खामियाजा आपको भुगतना पड़ता था। लोग शक की निगाहों से देखते थे। कोटेदार शब्द से ही लोगों को चिढ़ सी होने लग गई थी। गलती आपकी नहीं थी। पाप कोई करता था, भुक्तभोगी कोई और होता था। 

 

योगी ने कहा कि उस समय सत्तासीन लोगों की नीयत में खोट था। उनके भ्रष्ट आचरण की आंच से चाहकर भी आप स्वयं को बचा नहीं सकते थे, जिससे उस समय यूपी की 20-22 करोड़ की आबादी शक की निगाहों से देखी जाती थी। नौजवान, व्यापारी, बेटियां समेत आमजन अन्य प्रदेश में जाते थे तो कोई सम्मान नहीं करता था। 2017 के पहले जो लोग यूपी से दूरी बनाते थे, पिछले साढ़े 9 वर्ष के भीतर वही लोग अब यूपीवालों को गले लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के बारे में ओवरऑल धारणा बदली है। यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की ताकत है, जिसे पीएम मोदी जी के नेतृत्व/मार्गदर्शन में प्रदेश ने सामूहिक रूप से अर्जित किया है। 

CM yogi

वीडियो बनाने की धमकी देने वाले स्कूलों में जाकर देखें सकारात्मक बदलाव 

सीएम ने बेसिक शिक्षा परिषद का जिक्र किया। कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि स्कूल का वीडियो बनाएंगे, अरे! जरूर बनाओ। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से हर स्कूल की अच्छी फ्लोरिंग कराई। सरकार बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर, 1.60 करोड़ बच्चों को बैग, किताबें, दो यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर आदि सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। साल 2017 के पहले स्कूल का भवन नहीं होता था। यदि भवन था तो शिक्षक नहीं, शिक्षक थे तो छात्र नहीं। पेयजल, टॉयलेट न होने से सत्र पूरा होने से पहले ही आधे बच्चे पहले ही स्कूल छोड़कर चले जाते थे। अब निपुण भारत अभियान के तहत यूपी के स्कूली बच्चे अक्षर ज्ञान के साथ ही वाक्य विन्यास में भी पारंगत हुए हैं। विज्ञान, अंग्रेजी, गणित की शिक्षा भी स्कूल में लेते हैं। बच्चे अब अच्छा कर रहे हैं। 

जो कुछ नहीं कर पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं 

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना निशाना साधा। कहा कि जो लोग कुछ कर नहीं पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। ऐसे लोग परिवर्तन को नकारात्मकता में बदलना चाहते हैं। यही स्थिति आप सभी के साथ भी हुई। उचित दर विक्रेताओं के बारे में लोगों की धारणा ठीक हो, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2017 में ई-पॉस मशीन लगाना शुरू किया। हमने कहा कि सिंगल डोर स्टेप होगा यानी एफसीआई के गोदाम से सीधे फेयरप्राइस शॉप तक राशन पहुंचाया जाएगा। सरकार व उचित मूल्य विक्रेता के बीच में कोई बैरियर नहीं रहेगा। हम सीधे संवाद बनाएंगे, इससे परिणाम भी सकारात्मक आए। 

39 प्रकार के आइटम की कर सकते हैं बिक्री

सीएम ने कहा कि पारदर्शिता आई तो अब गांव में लोग आपका सम्मान भी करते हैं और आपके सुख-दुख में खड़े होते हैं। आपके प्रति विश्वास में वृद्धि हुई। पीएम के आदेश पर उचित दर विक्रेता से जुड़ी दुकान को अन्नपूर्णा भवन के रूप में निर्मित किया जा रहा है। इस वर्ष इस मद में 500 करोड़ रुपए दिए गए हैं। वहां दुकान व गोदाम की भी व्यवस्था होगी। पहले आप केवल राशन की ही बिक्री कर पाते थे, लेकिन अब 39 ऐसे आइटम हैं, जिन्हें आप अपनी दुकानों से बेच सकते हैं बशर्ते वह नशीले/ज्वलनशील पदार्थ या देश/समाज के प्रतिकूल आचरण से जुड़े सामान न हों। 

2017 में जनता दर्शन में 1000 में से 300 शिकायतें राशन से जुड़ी आती थीं, अब एक भी नहीं आतीं 

सीएम ने कहा कि पहले सरकार ही लूट मचाती थी तो परिवर्तन कैसे हो पाता। फेयर प्राइस शॉप संचालकों को कोसने भर से परिवर्तन नहीं होता। प्रदेश में अब खाद्य व रसद विभाग में भी व्यापक रिफॉर्म हुआ है। 2017 में जनता दर्शन में यदि हजार प्रार्थना पत्र आते थे तो इसमें से लगभग 300 अप्लीकेशन राशन से जुड़ी विसंगतियों को लेकर होती थी लेकिन अब राशन वितरण की एक भी शिकायत नहीं आती है। यही आपका सम्मान है। अब आपको कोई कटघरे में नहीं खड़ा कर सकता और न ही कोई ऊल-जुलूल बातें करता है। 

कोरोना के दौरान भी कोटेदारों की नहीं आई एक भी शिकायत

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की स्कीम को आपने धऱातल पर उतारने का कार्य किया। हमें प्रसन्नता होती है कि हमने गरीब के लिए जो चीज उपलब्ध कराई थी, वह उस तक पहुंच गई है। सीएम ने कोटेदारों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान भी आप राशन वितरित कर रहे थे। जब सारा काम-धंधा बंद हुआ तो हमने दाल, नमक और तेल का वितरण शुरू किया। सभी जगह सुचारु वितरण हुआ, कहीं से एक भी शिकायत नहीं आई और हर गरीब तक सामान पहुंचा। इसका मतलब पूर्ववर्ती सरकार की नीयत खराब थी। वे आपका इंसेंटिव भी नहीं बढ़ाते थे।  

मुख्यमंत्री ने फेयर प्राइस शॉप संचालकों की हौसलाअफजाई की

सीएम ने कहा कि औसतन हर विक्रेता को 100 कुंतल अनाज का आवंटन होता है। अब तक 90 रुपए के हिसाब से फेयरप्राइस शॉप के संचालक की प्रतिमाह आय लगभग 12,750 होती थी। अब 125 रुपए की दर से 100 कुंतल वितरण पर 16,250 रुपए प्राप्त होंगे। इसके अलावा दुकान का मुनाफा अलग से है। जो जितना अधिक बिक्री करेगा, उतना अधिक लाभांश कमाएगा। उचित मूल्य के विक्रेताओं के लिए पहली बार 30 प्रतिशत की मार्जिन मनी की बढ़ोतरी हो रही है। 

2017 के पहले किसानों से खरीदे जाने वाले खाद्यान्न में भी होती थी व्यापक हेराफेरी

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले किसानों से लिए जाने वाले खाद्यान्न में व्यापक हेराफेरी होती थी। सीधे किसान से खरीदारी नहीं होती थी, बिचौलिए के कारण किसान को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पाता था। 2017 से हम किसानों से सीधे धान, गेहूं, दलहन-तिलहन, मिलेट्स आदि की खरीद कर रहे हैं। डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में पैसा जा रहा है। किसान, नौजवान, महिला समेत हर तबके का व्यक्ति सीधे शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है। सीएम ने कहा कि यदि बीच की दीवार हट गईं तो बहुत सी चीजें पारदर्शी हो जाएंगी, जो विश्वास का कारक भी बनती हैं और लोकतंत्र विश्वास के कारण मजबूत होता है। 

विदेश जाने वाले पैसे का एक हिस्सा भारत के अस्थिर करने में होता है खर्च 

सीएम ने अपील की कि उचित मूल्य विक्रेता भी विश्वास के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाएं। आप सभी अन्नपूर्णा भवन के निर्माण की कार्रवाई तेजी से बढ़वाइए। सरकार धनराशि आवंटित करेगी। अच्छे भवन, वेयरहाउस अच्छे बनेंगे। राशन वितरण 7-10 दिन करेंगे, शेष 20 दिन वेयरहाउस का उपयोग अन्य कार्यों के लिए करके अतिरिक्त आय भी कर सकते हैं। ओडीओपी के सामान रखकर होली-दीवाली समेत अन्य त्योहारों पर भी स्थानीय उत्पाद को प्राथमिकता देंगे तो स्थानीय कारीगर, हस्तशिल्पी भी प्रोत्साहित होगा। साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

 

उन्होंने कहा कि जब हमारा धन विदेशों में जाता है तो उसका एक हिस्सा हमारे खिलाफ ही आतंकवाद को भड़काने और भारत को अस्थिर करने में खर्च होता है। सीएम ने अपील की कि स्वदेशी को प्राथमिकता दें, लोकल को ग्लोबल बनाने की दिशा में प्रयास करें। यह अभियान गांव में भी प्रारंभ हो सकता है। सीएम ने कहा ग्राम पंचायत का जो अन्नपूर्णा भवन बनेगा, वहां उचित मूल्य संचालकों (अन्नपूर्णा भवन संचालक) को मिला सम्मान आपके कार्यों, परिश्रम व प्रयासों का परिणाम है। 

 

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, खाद्य व रसद विभाग के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, योगेश शुक्ल, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे। 

मुख्यमंत्री को सौंपा धन्यवाद पत्र 

इस उपहार के लिए कोटेदारों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। उप्र सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार मेहरोत्रा, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के राजेश तिवारी, आदर्श कोटेदार कमलेश कुमार मिश्र, उपभोक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद पत्र प्रदान किया तो सीएम ने भी मंच से आभार जताया।

खरीफ में खाद की पर्याप्त उपलब्धता पर योगी सरकार का जोर

खरीफ में खाद की पर्याप्त उपलब्धता पर योगी सरकार का जोर

Kharif 2026 Fertilizer: योगी सरकार ने खरीफ-2026 अभियान के दौरान किसानों को उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और वितरण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सहकारिता विभाग में खरीफ-2026 में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा बैठक में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और कम अथवा शून्य स्टॉक वाली समितियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए।

 

समीक्षा के अनुसार 12 अगस्त तक प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता 5.02 लाख मीट्रिक टन और फास्फेटिक उर्वरक की उपलब्धता 4.04 लाख एलएमटी दर्ज की गई। खरीफ 2026 में अब तक 10.83 लाख एलएमटी उर्वरक का क्रमिक वितरण किया जा चुका है। पिछले खरीफ सत्र की तुलना में यूरिया के क्रमिक वितरण में 2.73 लाख एलएमटी तथा फास्फेटिक उर्वरक में 1.70 लाख एलएमटी स्टाक में उपलब्ध है।

 

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी समितियों एवं वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाए। शून्य एवं अल्प स्टॉक वाली समितियों की विशेष समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार तत्काल आपूर्ति किया जाए। प्रत्येक जनपद में एडीएम अथवा सीडीओ स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर उन्हें नजदीकी समिति से संबद्ध करने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

 

मुख्य सचिव ने सीडीओ को प्रतिदिन तथा जिलाधिकारी को साप्ताहिक स्तर पर उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उर्वरक की ओवररेटिंग अथवा अनधिकृत टैगिंग से संबंधित शिकायत किसी भी स्थिति में प्राप्त नहीं होनी चाहिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को खाद के लिए परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें नजदीकी वैकल्पिक समितियों से जोड़ने की व्यवस्था भी करने को कहा गया है। जनपदों में उर्वरक के परिवहन के लिए पर्याप्त ट्रकों की उपलब्धता भी कराई गई है।  

किसानों की सुविधा के लिए नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय 

 योगी सरकार की किसान-केंद्रित व्यवस्था के तहत खाद की उपलब्धता पर जिला स्तर तक निगरानी बनाए रखने के साथ ही किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए सहकारिता विभाग ने नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय रखा है। दस्तावेज में दिए गए नंबरों के अनुसार 0522-2289887 पर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक तथा 1800-180-5551 पर संपर्क किया जा सकता है।

ब्रिक्स से दूरी बांग्लादेश को पड़ेगी भारी, तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल होने पर संशय

ब्रिक्स से दूरी बांग्लादेश को पड़ेगी भारी, तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल होने पर संशय

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अवसरों को पहचानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना। विकासशील देशों के लिए बड़े बहुपक्षीय मंच केवल औपचारिक सम्मेलन नहीं होते, बल्कि वे निवेश,व्यापार, तकनीक,ऊर्जा और वैश्विक राजनीतिक स्वीकार्यता के नए रास्ते खोलते हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस वास्तविकता को अच्छी तरह समझती थी। उन्होंने भारत, चीन, रूस, अमेरिका, जापान और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश की आर्थिक जरूरतों तथा विकास की संभावनाओं को प्रमुखता दी।

 

भारत की ओर से प्रधानमंत्री तारिक रहमान को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना महत्वपूर्ण था। यह केवल भारत की ओर से दिया गया निमंत्रण नहीं था,बल्कि बांग्लादेश के लिए वैश्विक दक्षिण की बदलती आर्थिक और राजनीतिक संरचना से जुड़ने का अवसर था। इस मंच पर उपस्थित होकर तारिक रहमान भारत के साथ सीधे संवाद कर सकते थे, चीन और रूस सहित प्रमुख उभरती शक्तियों के नेताओं से संपर्क बढ़ा सकते थे तथा बांग्लादेश के लिए निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग के नए अवसर तलाश सकते थे।


यदि तारिक रहमान इस अवसर से दूर रहते है,तो इसका नुकसान केवल एक भारत यात्रा छूटने तक सीमित नहीं रहेगा। सबसे पहला नुकसान उनकी व्यक्तिगत कूटनीतिक छवि को हो सकता है। सत्ता संभालने के बाद किसी प्रधानमंत्री की पहली प्राथमिकता यह होती है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी सरकार की दिशा और प्राथमिकताओं का भरोसा दिलाए। ब्रिक्स जैसा मंच उन्हें यह अवसर देता कि वे बांग्लादेश की नई सरकार को एक व्यावहारिक, आर्थिक विकास केंद्रित और बहुध्रुवीय विदेश नीति वाली सरकार के रूप में प्रस्तुत करते। भारत की राजधानी में विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों के बीच उनकी मौजूदगी उनके लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक परिचय बन सकती है। तारिक रहमान यदि दिल्ली आते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के जरिए मतभेदों को व्यापक द्विपक्षीय एजेंडे से अलग रखने की कोशिश कर सकते थे। इससे यह संदेश जाता कि शेख हसीना का विवाद अपनी जगह है, लेकिन बांग्लादेश और भारत के राष्ट्रीय हित उससे कहीं बड़े हैं।


ब्रिक्स का मंच विकासशील देशों के लिए आर्थिक सहयोग और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अधिक प्रभाव की संभावनाओं से जुड़ा है। बांग्लादेश जैसे देश के लिए ऐसे मंच पर अपनी निवेश जरूरतों, औद्योगिक क्षमता, निर्यात संभावनाओं और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को प्रस्तुत करना उपयोगी हो सकता है। तारिक रहमान वहां भारत के साथ ही चीन, रूस, खाड़ी देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों से बातचीत कर सकते थे। किसी औपचारिक समझौते के बिना भी ऐसे संपर्क भविष्य के निवेश और व्यापार के लिए रास्ते खोलते हैं।


अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नेताओं की व्यक्तिगत संपर्क भी राष्ट्रीय शक्ति का हिस्सा होती है। किसी शिखर सम्मेलन में एक नेता की उपस्थिति अनेक द्विपक्षीय मुलाकातों,अनौपचारिक संवादों और भविष्य के संपर्कों का आधार बनती है। तारिक रहमान के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि उनकी सरकार अभी अपनी विदेश नीति की नई पहचान बना रही है। ब्रिक्स में भागीदारी उन्हें यह दिखाने का अवसर देती कि बांग्लादेश किसी एक शक्ति-गुट पर निर्भर नहीं है और वह भारत,चीन,रूस,पश्चिमी देशों तथा खाड़ी की शक्तियों के साथ संतुलित संबंध चाहता है।


बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है,लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में किसी एक नेता के भविष्य को पूरे द्विपक्षीय संबंधों की कसौटी बना देना दीर्घकाल में विकल्पों को सीमित कर सकता है। तारिक रहमान के लिए ब्रिक्स का मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे वे पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंधों को संतुलित करने का संदेश दे सकते थे। पाकिस्तान से संबंध मजबूत करना बांग्लादेश का संप्रभु अधिकार है,लेकिन भारत के साथ दूरी बनाकर पाकिस्तान के करीब जाना दक्षिण एशिया में अनावश्यक रणनीतिक ध्रुवीकरण पैदा कर सकता है। दिल्ली आकर तारिक रहमान यह स्पष्ट कर सकते थे कि ढाका की विदेश नीति किसी एक देश के विरुद्ध नहीं, बल्कि बांग्लादेश के आर्थिक और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।


यहां शेख हसीना की विदेश नीति का अनुभव भी प्रासंगिक है। उनके शासनकाल की आलोचना के बावजूद यह स्वीकार करना होगा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों को बांग्लादेश के आर्थिक हितों से जोड़ने का प्रयास किया। भारत के साथ निकटता के साथ उन्होंने चीन, जापान, रूस, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ भी संबंध बनाए रखे। उनका उद्देश्य यह था कि बांग्लादेश किसी एक शक्ति पर निर्भर न रहे और अलग-अलग देशों से अपने विकास के लिए अवसर प्राप्त करे।


बहरहाल तारिक रहमान यदि ब्रिक्स से दूर रहते है तो वे एक ऐसे मंच का उपयोग नहीं कर पाएंगे जहां वे अपनी सरकार की वैश्विक छवि गढ़ सकते थे, भारत के साथ सीधे संवाद कर सकते थे,निवेश के अवसर तलाश सकते थे और बांग्लादेश को वैश्विक दक्षिण की उभरती आर्थिक व्यवस्था में अधिक प्रभावी स्थान दिलाने की कोशिश कर सकते थे।
(लेखक विदेश नीति के जानकार है और लेख में छपे विचार उनके व्यक्तिगत हैं)