राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

Ayodhya Rakhi Mata Shanta: अयोध्या में भगवान श्रीराम की बड़ी बहन माता शांता की ओर से श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के कई विशिष्ट दिग्गजों को विशेष राखियां भेजी गई हैं। इन राखियों को केले के तने, रेशमी धागे और भागलपुर की कला का उपयोग करके तैयार किया गया है।                                

राखी की मुख्य विशेषताएं

  • विशिष्ट जनों को प्रेषित : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथसिंह, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ को यह रक्षा सूत्र भेजा गया है।
  • वैदिक मंत्रोच्चार: साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने इन सभी राखियों को वैदिक मंत्रों के साथ अभिमंत्रित किया है।
  • खास सामग्री : इस बार की राखियां मुख्य रूप से केले के तने के धागे, रेशम, मखाने और भागलपुरी पेंटिंग की कला का उपयोग करके बनाई गई हैं, जिन्हें मधुबनी की अंजलि सिंह के सहयोग से तैयार किया गया है।
  • भगवान राम को अर्पण : देश के प्रमुख नेताओं और गणमान्य लोगों तक रक्षा सूत्र पहुंचाने के बाद, माता शांता की ओर से भेजी गई यह पावन राखी अयोध्या में भगवान श्रीरामलला को भी अर्पित की गईं। 

क्या है धार्मिक मान्यता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता शांता राजा दशरथ की पुत्री और भगवान श्रीराम की बड़ी बहन थीं, जिनका विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ हुआ था। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का निर्वाह करते हुए हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर माता शांता के धाम/आश्रम की तरफ से यह रक्षा सूत्र भेजने की परंपरा निभाई जाती है। 

 

श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने बताया कि साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इन विशेष राखियों को अभिमंत्रित किया है। प्राचीन परंपरा और भ्रातृ-स्नेह को जीवंत रखने के लिए संस्थान हर वर्ष यह रक्षा सूत्र भेजता है।

अराजक या एंग्री यंग मैन? राहुल गांधी- भारतीय राजनीति का सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष

अराजक या एंग्री यंग मैन? राहुल गांधी- भारतीय राजनीति का सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष

Rahul Gandhi Anarchist or Angry Young Man?:

Rahul Gandhi Anarchist or Angry Young Man?: राहुल गांधी को समझना आसान नहीं है। पिछले 15 वर्षों में उनकी राजनीति ने कई चेहरे देखे हैं—‘पप्पूसे लेकर भारत जोड़ो यात्रा के यात्री तक, और अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में सत्ता को खुली चुनौती देने वाले नेता तक।

लेकिन राहुल गांधी की कहानी का एक पहलू ऐसा भी है जिसे राजनीति अक्सर ढक देती है—उनकी सहजता, परिवार के प्रति लगाव और आम आदमी के साथ बिना औपचारिकता घुलने-मिलने की कोशिश।
यही विरोधाभास राहुल को दिलचस्प बनाता है।

एक तरफ संसद और सड़क पर बेहद आक्रामक राहुल गांधी, दूसरी तरफ मां सोनिया का हाथ थामे, बहन प्रियंका को टॉफी देते या किसी साधारण मोची के घर बैठकर जूते सिलना सीखते राहुल गांधी।

तो आखिर राहुल गांधी कौन हैं?

अराजक? एंग्री यंग मैन? या भारतीय राजनीति का वह नेता जिसे विरोधी भले नापसंद करें, लेकिन आम आदमी अब भला इंसानमानने लगा है?

2011 का राहुल और 2026 का राहुल

करीब डेढ़ दशक पहले राहुल गांधी के पास विरासत बहुत थी, लेकिन अपनी राजनीतिक पहचान कम। 2014 में कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई। 2019 में वे अमेठी हार गए। ‘पप्पू’ की छवि इतनी मजबूत थी कि उनके गंभीर राजनीतिक प्रयास भी अक्सर मजाक में बदल जाते थे।

लेकिन हार ने राहुल को बदला।

उनकी भाषा बदली। तेवर बदले। संसद से सड़क तक उनकी मौजूदगी बढ़ी।

फिर आई भारत जोड़ो यात्रा। यह राहुल गांधी का राजनीतिक पुनर्जन्म था।
कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चलने वाला नेता लोगों के बीच बैठा, बच्चों से मिला, किसानों से बात की, युवाओं के सवाल सुने। पहली बार राहुल गांधी को टीवी के मंच पर नहीं, सड़क पर देखा गया।
और यहीं ‘पप्पू’ वाली छवि में पहली बड़ी दरार पड़ी।

राहुल की राजनीति में गुस्सा है, लेकिन आदमी में सहजता

राहुल गांधी की राजनीति आज जितनी आक्रामक है, उनका सार्वजनिक व्यवहार अक्सर उतना ही सहज दिखाई देता है। यही शायद उनकी सबसे बड़ी मानवीय ताकत है।

2024 में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के मोची रामचेत की दुकान पर रुकना और उनसे जूते सिलना सीखना केवल राजनीतिक फोटो-ऑप था या नहीं, इस पर बहस हो सकती है। लेकिन इसके महीनों बाद रामचेत और उनके परिवार को दिल्ली स्थित अपने घर बुलाना एक अलग तस्वीर पेश करता है। राहुल ने उन्हें गले लगाया; प्रियंका और सोनिया गांधी ने भी उनके परिवार से मुलाकात की।

यह वह राहुल है जिसे राजनीति की शब्दावली में आसानी से फिट नहीं किया जा सकता।

वह नेता जो संसद में प्रधानमंत्री पर सबसे तीखे हमले कर सकता है, वही किसी आम आदमी के घर बैठकर उसकी कहानी भी सुन सकता है।

यही भारतीय समाज की उस पुरानी परंपरा से जुड़ता है जिसमें राजनीति चाहे जितनी कठोर हो, परिवार और रिश्तों में आदमी की पहचान उसके व्यवहार से होती है।

भारत में नेता केवल भाषण से नहीं बनता। लोग यह भी देखते हैं कि वह अपनी मां के साथ कैसा है, बहन के साथ कैसा है, गरीब के साथ कैसा है और कमजोर आदमी के सामने उसका व्यवहार कैसा है।

सोनिया और प्रियंका : राहुल के राजनीतिक व्यक्तित्व का मानवीय पक्ष

राहुल गांधी को परिवार से अलग करके देखना संभव भी नहीं है और शायद सही भी नहीं। सोनिया गांधी उनकी मां ही नहीं, उनकी सबसे लंबी राजनीतिक छाया भी रही हैं।

हाल के दिनों में सोनिया गांधी की आने वाली आत्मकथा के संदर्भ में राहुल और प्रियंका दोनों का अपनी मां के प्रति भावनात्मक सार्वजनिक संदेश इस रिश्ते के निजी पक्ष को सामने लाता है। राहुल ने पिता राजीव गांधी का संदर्भ देते हुए मां के जीवन और संघर्ष के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

और प्रियंका? यह रिश्ता शायद राहुल गांधी के व्यक्तित्व का सबसे सहज आईना है।

राजनीति में दोनों भाई-बहन एक-दूसरे के सहयोगी हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कई बार उनका रिश्ता बिल्कुल आम भाई-बहन जैसा दिखाई देता है।

रक्षाबंधन पर दोनों का स्नेहपूर्ण संवाद हो या संसद परिसर में राहुल का प्रियंका को टॉफी देकर कहना—“Have a sweet”—इन छोटे क्षणों में नेता नहीं, भाई दिखाई देता है।

फरवरी 2026 में राहुल ने मजाकिया अंदाज में यह भी बताया कि एक समय प्रियंका उनसे नाराज थीं और वायनाड के एक प्रसंग ने दोनों के बीच का तनाव खत्म किया। यह किस्सा जितना सामान्य लगता है, उतना ही महत्वपूर्ण भी है—क्योंकि राजनीति में परिवार अक्सर केवल शक्ति-समीकरण बन जाता है, जबकि राहुल-प्रियंका के रिश्ते में भाई-बहन की सहजता अब भी दिखाई देती है।

यही राहुल गांधी का दूसरा चेहरा है।

जो नेता सत्ता से लड़ते समय तल्ख हो सकता है, वही परिवार में बेहद सहज और भावुक भी है।

और शायद यही Gen-Z को आकर्षित कर रहा है

आज का Gen-Z नेता में ‘महानता’ से ज्यादा ऑथेंटिसिटी खोजता है। उसे बहुत बनावटी भाषण पसंद नहीं। उसे ऐसा नेता चाहिए जो सवाल सुने, गलती स्वीकार करे, हंसे, मजाक करे और जरूरत पड़े तो उसके साथ जमीन पर बैठे।

राहुल गांधी ने पिछले कुछ समय में इसी भाषा को अपनाया है।

वे युवाओं से बेरोजगारी पर बात करते हैं, छात्रों से NEET और परीक्षा व्यवस्था पर संवाद करते हैं और रोजगार को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखते हैं। 2022 की भारत जोड़ो यात्रा में बेरोजगारी पर युवाओं के साथ उनका संवाद इसी राजनीति का हिस्सा था।

2024 में NEET छात्रों से उनकी मुलाकात और लगातार युवा मुद्दों को उठाना भी इसी दिशा में देखा जा सकता है। और उनका छात्रों की गूंज कार्यक्रम भी इसी संवाद की निरंतरता है, जिसका उद्देश्य छात्रों के सवाल सुनना और उनसे सीधे चर्चा करना है।

लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि Gen-Z राहुल गांधी का नया वोट बैंक बन चुका है।

लेकिन इतना जरूर है— राहुल अब युवाओं के बीच केवल एक राजनीतिक चुटकुला नहीं हैं। वे बातचीत का विषय हैं। और राजनीति में perception का बदलना कभी छोटी बात नहीं होती।

एंग्री यंग मैनउम्र से नहीं, तेवर से

राहुल गांधी अब युवा नहीं हैं। लेकिन उनकी राजनीति में ‘एंग्री यंग मैन’ का तेवर जरूर है।

  • व्यवस्था से नाराजगी।
  • बेरोजगारी पर गुस्सा।
  • असमानता पर सवाल।
  • संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर बेचैनी।
  • और सत्ता से लगातार टकराने की इच्छा।

21 अगस्त 2026 को छात्र प्रदर्शन में घायल युवक के लिए दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब घंटों धरने पर बैठना इसका ताजा उदाहरण है। उनके साथ प्रियंका गांधी भी थीं।

इसे कोई अराजकता कह सकता है। कोई राजनीतिक नौटंकी। लेकिन समर्थक इसे विपक्ष के सड़क पर उतरने की जिम्मेदारी कहेंगे। यही राहुल की राजनीति का नया चरित्र है—वे अब लड़ने से कतराते नहीं हैं।

लेकिन क्या वे अराजक हैं?

आक्रामक होना और अराजक होना एक बात नहीं। लोकतंत्र में विपक्ष का काम सत्ता से सवाल पूछना है। संसद में विरोध करना, सड़क पर उतरना और सरकार को चुनौती देना उसका अधिकार है।

समस्या तब शुरू होती है जब राजनीतिक विरोध और संस्थाओं पर अविश्वास के बीच की रेखा मिटने लगे। ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप बेहद गंभीर हैं। इसलिए उनके साथ गंभीर प्रमाण भी जरूरी हैं।

राहुल की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा जोखिम एक ही है— वे अब पीछे हटने वाले नेता नहीं हैं।

जनता की नजर में राहुल : नेता नहीं, पहले भला आदमी?

शायद राहुल गांधी की छवि में सबसे बड़ा बदलाव यही है। एक समय जनता उन्हें केवल ‘गांधी परिवार के बेटे’ के रूप में देखती थी।

आज एक वर्ग उन्हें पहले भला इंसान, फिर नेता के रूप में देखने लगा है। यह बदलाव चुनावी जीत की गारंटी नहीं है।

लेकिन राजनीति में किसी नेता के प्रति ‘भला आदमी’ वाली धारणा महत्वपूर्ण होती है। भारतीय मतदाता नेता की नीतियों से असहमत हो सकता है, लेकिन अगर उसे लगता है कि आदमी नीयत से ठीक है, तो राजनीतिक रिश्ते की एक जमीन तैयार हो जाती है।

राहुल गांधी शायद इसी जमीन पर खड़े हैं। उनके आलोचक उनकी राजनीति को नकारात्मक मान सकते हैं। उनके विरोधी उनकी शैली को आक्रामक कह सकते हैं। 

लेकिन उनके समर्थक और बढ़ता युवा वर्ग उनमें एक ऐसा नेता देखता है जो कम से कम सुनता है, लोगों के बीच जाता है और सत्ता से सवाल पूछने में डरता नहीं।

सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष?

आज राहुल गांधी निश्चित रूप से भारत के सबसे मुखर और आक्रामक विपक्षी नेताओं में हैं।

वे संसद में लड़ते हैं। सड़क पर लड़ते हैं। चुनाव में लड़ते हैं। सरकार से लड़ते हैं।

और अब युवाओं के सवालों और हक के लिए भी सड़क पर उतरते हैं। लेकिन आक्रामकता अपने आप में नेतृत्व नहीं है। नेतृत्व तब साबित होगा जब वही गुस्सा नीति में बदले, विरोध विकल्प में बदले और आंदोलन शासन की क्षमता में।

पप्पूसे पॉलिटिकल चैलेंजरतक

‘पप्पू’ से ‘पॉलिटिकल चैलेंजर’ बनने की यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि शायद यही है कि उन्होंने अपने विरोधियों को भी अपनी राजनीति पर बात करने के लिए मजबूर किया है। राहुल गांधी की 15 साल की कहानी शायद तीन शब्दों में लिखी जा सकती है—

पप्पू → भला आदमी → पॉलिटिकल चैलेंजर।

पहला नाम उनके विरोधियों ने दिया। दूसरी छवि जनता के एक हिस्से ने बनाई। तीसरी पहचान राहुल गांधी खुद बनाने की कोशिश कर रहे हैं। और शायद यहीं उनके नाम का अर्थ फिर लौटता है।

राहुल—दुःखों पर विजय पाने वाला। यह दावा नहीं कि राहुल गांधी ने राजनीति जीत ली है।

अभी नहीं। लेकिन उन्होंने एक बात जरूर साबित की है— उपहास किसी नेता का अंतिम परिचय नहीं होता।
महात्मा गांधी को पीटरमारित्जबर्ग की एक ठंडी रात ने बदल दिया था। शायद राहुल को वर्षों के राजनीतिक उपहास ने। गांधीजी ने अपमान के बाद संघर्ष चुना। राहुल ने उपहास के बाद पुनर्निर्माण। दोनों की यात्रा समान नहीं है, इतिहास दोनों को एक तराजू में नहीं तौल सकता।

लेकिन एक सबक समान जरूर है— जिसे आप सार्वजनिक रूप से छोटा समझते हैं, वही कभी-कभी सबसे लंबी लड़ाई लड़ने की जिद लेकर खड़ा हो जाता है।

राहुल ने उपहास से सम्मान तक की दूरी तय कर ली है। अब सम्मान से विश्वास तक जाना बाकी है।  2029 में सवाल यह नहीं होगा कि राहुल गांधी नरेंद्र मोदी की सत्ता पर कितनी जोरदार चोट करते हैं।

सवाल होगा— क्या वे उस युवा भारत के विश्वसनीय विकल्प बन पाएंगे, जो नौकरी चाहता है, अवसर चाहता है, अपनी आवाज चाहता हैऔर साथ ही ऐसा नेता भी चाहता है जो सत्ता में बैठकर भी इंसान बना रहे?
क्योंकि सरकार गिराने के लिए जनता का आक्रोश काफी है। लेकिन सरकार चलाने के लिए नीति, क्षमता और विश्वास—तीनों चाहिए। और राहुल गांधी की अगली राजनीतिक लड़ाई इन्हीं तीन शब्दों की है।

प्रदेश में पर्याप्त चीनी, आमजन परेशान न हों : CM योगी

प्रदेश में पर्याप्त चीनी, आमजन परेशान न हों : CM योगी

CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि राज्य में चीनी की कोई कमी नहीं है, इसलिए आम नागरिक कतई परेशान न हों। प्रदेश की चीनी मिलों में वर्तमान में 179.38 लाख क्विंटल चीनी का भंडार उपलब्ध है। चीनी मिलों ने दो महीने (जून-जुलाई) में 235 लाख क्विंटल चीनी की बिक्री की है। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर चीनी मिलें 15 अक्टूबर से संचालित की जाएं।

15 अक्टूबर से संचालित की जाए चीनी मिलें 

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि सहकारी चीनी मिलों में 23.60 लाख क्विंटल, निगम की चीनी मिलों में 5.28 लाख क्विंटल और निजी चीनी मिलों में 150.50 लाख क्विंटल (कुल 179.38 लाख क्विंटल) चीनी प्रदेश में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त जून व जुलाई में चीनी मिलों ने 235 लाख क्विंटल चीनी की बिक्री की है, इसमें से अधिकांश चीनी अभी भी खुले बाजार में उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर 15 अक्टूबर से चीनी मिलों को संचालित किया जाए।

भ्रम फैलाने व कालाबाजारी करने वालों पर करें कार्रवाई 

सीएम योगी ने आमजन से अपील की कि चीनी की कमी बताकर भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहें। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि चीनी की कालाबाजारी और भ्रम फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें। उन्होंने भारत सरकार के निर्देश के क्रम में कहा कि कोई भी डीलर 30 दिन से अधिक चीनी स्टॉक का भंडारण नहीं करेगा और वे एक समय में 400 टन से ज्यादा स्टॉक भी नहीं रख सकते। बल्क कंज्यूमर्स (10 मीट्रिक टन प्रतिमाह खपत) भी 15 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकते। चीनी मिलें भी अपने मासिक कोटे के अंतर्गत विक्रित चीनी को विक्रय की तिथि से 7 दिन से अधिक अवधि तक गोदाम में नहीं रोकेंगी। 

सीएम ने दिया निर्देश- भौतिक सत्यापन कराएं जिलाधिकारी

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद की समस्त पंजीकृत चीनी मिलों, थोक एवं फुटकर विक्रेताओं के गोदामों का भौतिक सत्यापन कराते हुए उपलब्ध स्टॉक की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्राप्त करें। निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक धारित करने अथवा जमाखोरी पर कठोर कार्रवाई की जाए। जनपद में चीनी की उपलब्धता एवं मूल्य पर सतत निगरानी रखते हुए किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी अथवा मूल्यवृद्धि की स्थिति में तत्काल शासन को अवगत कराएं।

48 लाख किसानों को किया गया 32,554 करोड़ का भुगतान 

बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए 28.14 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल संभावित है। इससे 90 लाख टन चीनी उत्पादन की संभावना है। उत्तर प्रदेश में प्रतिमाह अनुमानित चीनी खपत लगभग 4 लाख टन है। पेराई सत्र 2025-26 में 48 लाख किसानों को 32,554 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी किया गया है।

एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश, अधिकारियों ने बैठक कर बनाई रणनीति

एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश, अधिकारियों ने बैठक कर बनाई रणनीति

NCR Air Pollution: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए है। अभी हाल ही में मुख्य सचिव ने पराली प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 

बैठक में विशेष रूप से पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध संसाधनों और कृषि मशीनरी की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को पराली प्रबंधन में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए आवश्यक बेलर एवं अन्य कृषि मशीनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मशीनरी की कमी को दूर करने के लिए लंबित टेंडर प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खेत स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए और किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जाए। इसके साथ ही पराली प्रबंधन के उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को कहा गया कि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच की जाए तथा नियमों का पालन न करने वाले उद्योगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

बैठक में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिए गए कि संबंधित प्रत्येक विभाग द्वारा नोडल अधिकारी नामित किया जाए, ताकि वायु प्रदूषण की रोकथाम से जुड़े कार्यों की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

 

मुख्य सचिव ने धान की पराली (पैडी स्ट्रॉ) के प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं। पराली प्रबंधन में उपलब्ध संसाधनों और मशीनरी की कमी को दूर करने के लिए बेलर एवं अन्य आवश्यक कृषि मशीनों की व्यवस्था हेतु टेंडर प्रक्रिया समय से पूर्ण कराई जाए, ताकि फसल अवशेषों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सड़क विकास एवं रखरखाव कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि रोड रिडेवलपमेंट तथा रोड डस्ट की रोकथाम से संबंधित आवश्यक टेंडर समय से कराकर कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराया जाए। उन्होंने गड्ढों (पॉटहोल्स) की मरम्मत तथा क्षतिग्रस्त फुटपाथों के पुनर्स्थापन का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए।

 

मुख्य सचिव ने कहा कि लोक निर्माण, नगर निकायों/स्थानीय निकायों, हाउसिंग एवं अर्बन से जुड़े विभागों की क्षतिग्रस्त सड़कों की सूचना संबंधित विभागों को तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य समयबद्ध रूप से कराया जा सके। वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उन्हें प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक उपकरण स्थापित करने हेतु निर्देशित किया जाए। उन्होंने ईवी सिटी बसों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक ईवी चार्जिंग पॉइंट्स की संभावित लोकेशन तत्काल चिन्हित कर नेडा को उपलब्ध कराने को कहा, जिससे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ाई जा सके।

 

बैठक में विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए प्रत्येक संबंधित विभाग द्वारा नोडल अधिकारी नामित किए जाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि पवन पोर्टल पर संबंधित विभागों द्वारा सही, पूर्ण एवं अद्यतन डेटा अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए, ताकि वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्यों की वास्तविक प्रगति का प्रभावी आकलन किया जा सके। उन्होंने एंड टू एंड वाहनों को जब्त किए जाने की कार्रवाई में प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अपेक्षित प्रगति न करने वाले जनपदों के जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए तथा कार्यों की नियमित समीक्षा के लिए मासिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। जनजागरूकता के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियां संचालित की जाएं।

 

इंदौर के सारांश जैन कोलंबो टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बेहद करीब

इंदौर के सारांश जैन कोलंबो टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बेहद करीब

इंदौर के स्थानीय निवासी और ऑलराउंडर क्रिकेटर सारांश जैन कोलंबो टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बेहद नजदीक खड़े हैं। इसका इशारा तब मिला जब श्रीलंका के मध्यक्रम में एक और बाएं हाथ का बल्लेबाज शामिल हुआ और सारांश को अभ्यास सत्र में काफी मेहनत करते हुए देखा गया। उनको कुलदीप यादव की जगह शामिल करने की आशंका है।

चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में मध्य-प्रदेश की रणजी ट्रॉफी विजेता टीम के प्रमुख सदस्य रहे लंबे कद के Off-Spinner सारांश ने हाल ही में भारत A के श्रीलंका दौरे के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए दो मैचों में छह विकेट लेने के साथ एक पारी में नाबाद 70 रन भी बनाए थे।

दिलचस्प बात यह है कि सारांश के पिता सुबोध भी मध्य प्रदेश के पूर्व ऑफ-स्पिनर रहे हैं और उनको यह बात सालती रही कि वह राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके। लेकिन उन्होंने अपनी असफलता पर चिंतन करने से बेहतर बेटे की कुशलता पर मेहनत करना समझा। वह ही अपने बेटे के कोच है।

सारांश के पिता सुबोध ने 9 रणजी ट्रॉफी मैचों में 23 विकेट लिए थे। उन्होंने अपने बेटे को कोचिंग देनी शुरु की लेकिन भारतीय टेस्ट गेंदबाजी क्रम खासकर स्पिन गेंदबाजी का- इतना सुदृढ़ था कि इसका किला भेदना असंभव था। रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जड़ेजा ही टीम के लिए इतने विकेट निकाल देते थे कि कुलदीप यादव तक के 10 साल के करियर में 19 मैच हैं।

ऐसे में सारांज को 30 प्लस के बाद जाकर मौका मिला। अमूमन भारतीय चयनकर्ता इतनी उम्र के बाद किसी पर मेहरबान नहीं होते। लेकिन सारांश जैन का केस अलग था।

चुनाव से पहले UP में बड़ा सुरक्षा अलर्ट, अखिलेश-मायावती समेत 52 दिग्गजों को मिली बुलेटप्रूफ जैकेट

चुनाव से पहले UP में बड़ा सुरक्षा अलर्ट, अखिलेश-मायावती समेत 52 दिग्गजों को मिली बुलेटप्रूफ जैकेट

​UP Elections 2027 Bulletproof Jacket Security

UP Elections 2027 Bulletproof Jacket Security: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं की सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। गृह मंत्रालय की सलाह पर यूपी के सुरक्षा मुख्यालय ने राज्य के 52 प्रमुख नेताओं को करीब 1.5 लाख रुपए की कीमत वाली हाई-टेक बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया कराई हैं।

 

प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब अलग-अलग सुरक्षा श्रेणी (Y से Z+ तक) वाले नेताओं को सुरक्षा घेरे के साथ बुलेटप्रूफ जैकेट भी दी गई है। बताया जा रहा है कि सुरक्षा अलर्ट के चलते राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। 

​फैसले से जुड़ी मुख्य बातें

  • ​दो चरणों में वितरण : सुरक्षा मुख्यालय ने पहले चरण में 8 और दूसरे चरण में 44 नेताओं को जैकेट सौंपी, जिससे कुल संख्या 52 हो गई है।
  • ​विपक्ष और सहयोगियों पर भी भरोसा : सुरक्षा केवल सत्ता पक्ष तक सीमित नहीं है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ-साथ भाजपा व उसके सहयोगी दलों के नेताओं को भी यह कवर मिला है।

इन नेताओं को मिली बुलेटप्रूफ जैकेट

अखिलेश यादव और मायावती के अलावा कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', संजय निषाद, ओपी राजभर, रामपुर से विधायक आकाश सक्सेना, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, संगीत सोम और सुरेश राणा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस सुरक्षा व्यवस्था में योगी सरकार के 11 कैबिनेट मंत्रियों को भी  शामिल किया गया है।

 

​गौरतलब है कि वर्तमान में UP के लगभग 98 नेताओं को विभिन्न श्रेणियों की सुरक्षा (Y, X, Z, Z+) प्राप्त है, जिसमें अब इस जैकेट को अनिवार्य सुरक्षा उपकरण के रूप में जोड़ा गया है।

यूपी विधानसभा चुनाव कब होंगे?

उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त हो रहा है। नियमानुसार, अगले यानी 19वीं विधानसभा के चुनाव फरवरी- मार्च 2027 के दौरान आयोजित होने प्रस्तावित हैं। चुनाव की घोषणा जनवरी 2027 की शुरुआत में हो सकती है। यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं।

वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 257 सीटें हैं, जबकि उसके सहयोगी दलों- अपना दल (सोनेलाल) 13, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) 9,  सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) 6, निषाद पार्टी के पास 5 सीटें हैं। दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के पास वर्तमान में 100 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 2 सीटें हैं। शेष सीटें निर्दलीय और अन्य दलों के पास हैं। 

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iPhone नहीं दिलाया तो पहाड़ पर चढ़ा बेटा, बचाने में गई माता-पिता की भी जान; रोंगटे खड़े कर देगी यह घटना

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महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आईफोन खरीदने की जिद पर अड़े 18 वर्षीय युवक और उसे बचाने की कोशिश में उसके माता-पिता की पहाड़ी से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। दिल दहला देने वाली इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। ALSO READ: भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

 

आईफोन की किस्त को लेकर अपने पिता से विवाद कर एक 18 साल का लड़का कुणाल गुस्से में पहाड़ी पर चढ़ गया। उसे नीचे उतारने के लिए उसके माता पिता ने काफी मिन्नतें की लेकिन वह नहीं माना। उसे बचाने के चक्कर में माता-पिता भी पहाड़ी से नीचे गिर गए और तीनों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना का वीडियो फिलहाल हर जगह वायरल हो रहा है।

 

दरअसल, 19 साल का एक युवक iPhone खरीदवाने की जिद पर अड़ गया। पिता ने इतना महंगा स्‍मार्टफोन दिलाने से साफ इनकार कर दिया। इस पर उसकी पिता से जमकर बहस हुई और नाराज होकर वह खुद को ही मिटाने पर आमाद हो गया और वह खवल्या पहाड़ के सबसे ऊंचे और खतरनाक शिखर पर चढ़ गया। ALSO READ: प्यार का झांसा देकर चलती बाइक पर पिलाया जहर, डेढ़ घंटे तड़पते पति को देखती रही महिला, जयपुर मर्डर केस में बड़ा खुलासा

 

सूचना मिलते ही छत्रपती संभाजीनगर पुलिस, दमकल विभाग और उस युवक के परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे। लगभग तीन घंटे तक परिजनों और बचाव दल ने उस युवक को समझाने की कोशिश की, तभी अचानक युवक का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे गिरने लगा। पिता अपने बेटे को बचाने की कोशिश की। लेकिन बाप-बेटा पहाड़ी से नीचे जा गिरे। वहीं खड़ी मां ने जब ये सब देखा तो उन्‍होंने भी पहाड़ी से छलांग लगा दी। इस हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

 

घटना के तुरंत बाद, छत्रपती संभाजीनगर पुलिस और दमकल विभाग के जवानों ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से खदान में उतरकर बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद, तीनों के शव बाहर निकालकर अस्पताल भेज दिए गए। ALSO READ: सांप के डसने से कोमा में जा रहा था एंबुलेंस ड्राइवर, दोस्तों ने 2 घंटे में मारीं 400 थपकियां; 30 इंजेक्शन भी बेअसर
 

मां ने भी फेंका मंगलसूत्र

मीडिया खबरों के अनुसार, कुणाल जब पहाड़ी पर चढ़ गया था तो पिता के साथ मां संगीता भी उसे समझाने के लिए वहां पहुंची थीं। कुणाल की मां बार-बार उसको बचाने और समझाने की कोशिश कर रही थीं। मां ने बेटे के सामने ही अपना मंगलसूत्र निकाल कर फेंक दिया और कहा था कि तुम्हारा झगड़ा पिता के साथ है। मैं भी उनके साथ नहीं रहूंगी, बस तुम यह सब मत करो। हम दोनों अलग रहेंगे। मगर बेटे ने उनकी भी नहीं सुनी।

भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

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गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 61 लोग प्रभावित हैं। पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है। इस पूरी घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित लोगों के इलाज और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल की वर्ल्ड बैंक संग बड़ी बैठक, GIFT City से AI तक पर चर्चा; वॉलमार्ट के साथ MSME को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन

 

अस्पताल से अब तक 16 डिस्चार्ज 

अस्पताल में भर्ती मरीजों में से अब तक 16 लोगों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि वर्तमान में 19 मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इलाज करा रहे मरीजों में से 5 मरीजों को आईसीयू (ICU) में रखा गया है, जिनमें से एक मरीज की हालत बेहद गंभीर बताई गई है। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 मरीजों की मौत संदिग्ध मानी जा रही है। राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटों में कोई नया मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है। 

 

पुलिस रिमांड पर आरोपी

नकली शराबकांड को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अब तक कुल 14 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। शुरुआत में पकड़े गए 13 आरोपियों को कोर्ट ने 10 दिन के रिमांड पर भेजा था। इस मामले के मुख्य आरोपी रईस के 9 दिन की पुलिस रिमांड पर है। पुलिस द्वारा मामले में आरोपियों की भूमिका, नकली शराब की सप्लाई और पूरे नेटवर्क को लेकर गहन जांच की जा रही है। 

 

इस मामले में पकड़े गए सभी आरोपियों की रिमांड अवधि 31 अगस्त को पूरी हो रही है। रिमांड खत्म होने के बाद सभी आरोपियों को दोबारा अदालत के सामने पेश किया जाएगा। पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस नकली शराबकांड से जुड़े अन्य लोगों और उनके नेटवर्क के बारे में भी नई जानकारी सामने आने की संभावना है। ALSO READ: गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, विदेश में पढ़ाई के लिए अब 10 लाख रुपये तक आय वालों को मिलेगा लोन

 

मामले पर गरमाई सियासत

भावनगर की इस गंभीर घटना को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी सिलसिले में कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल भावनगर का दौरा करेंगे। वे वहां पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी लेंगे और प्रभावित परिवारों तथा मौजूदा स्थिति का जायजा लेंगे। फिलहाल भावनगर में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी स्थिति पर सख्त निगरानी बनाए हुए हैं।

Top News 22 August: इमरान खान की सेहत पर बहन का बड़ा दावा, राम मंदिर निर्माण पर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?

Top News 22 August: इमरान खान की सेहत पर बहन का बड़ा दावा, राम मंदिर निर्माण पर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?

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Top News 22 August: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के बाद उनकी बहन ने कहा कि इमरान को बहुत टॉर्चर किया जा रहा है। राम मंदिर निर्माण समिति ने अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का दावा, मंदिर निर्माण में सरकार का एक भी पैसा नहीं लगा। दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन। रूस का यूक्रेन के शॉपिंग मॉल पर हमला। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा झाखंड भर्ती विवाद। 22 अगस्त की बड़ी खबरें : 

 

इमरान के स्वास्थ्य पर क्या बोलीं बहन उज्मा?

पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व PM इमरान खान की बहन उज्मा ने दावा किया कि मुलाकात के दौरान इमरान बार-बार एक ही चीज कही, मेरे साथ जुल्म हुआ है। मुझे बहुत टॉर्चर किया जा रहा है। आंखों के इलाज के लिए इंजेक्शन न लगने पर स्थिति और बिगड़ने का खतरा था। आंख की एक नस खराब होने से बची हुई है। एक इंजेक्शन लगने के बाद अब धीरे-धीरे आंखों की रोशनी वापस आ रही है।

 

मंदिर निर्माण में नहीं लिया सरकार का एक भी पैसा

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर निर्माण में निश्चित रूप से ट्रस्ट का योगदान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर और परिसर के निर्माण में केंद्र अथवा राज्य सरकार का एक पैसा भी नहीं लगा है।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के प्रसिद्ध धरना स्थल जंतर-मंतर पर शुक्रवार को एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन हुआ। आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी रेगुलेशंस के विरोध में हजारों लोग जुटे। प्रदर्शन का आयोजन ‘Reservation Reform Andolan’ के बैनर तले किया गया। ALSO READ: दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण और UGC नियमों के विरोध में उतरे हजारों लोग

 

रूस का यूक्रेन के शॉपिंग मॉल पर हमला

रूस ने शुक्रवार दोपहर मध्य यूक्रेन के क्रिवी रिह शहर में कई ड्रोन से हमला किया। इस हमले में शहर के एक बड़े शॉपिंग मॉल को निशाना बनाया गया। मीडिया खबरों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 121 लोग घायल हुए। घायलों में 22 बच्चे शामिल हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा झाखंड भर्ती विवाद

झारखंड में परीक्षा रद्द करने और नियुक्तियों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। रांची में 24 दिन आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने परीक्षाएं रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी। मामले में दायर याचिका पर शीर्ष अदालत सोमवार को सुनवाई कर सकती है।

 

CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, लापरवाह जिला पंजीयक सहकारिता निलंबित, टीकमगढ़ में सुनीं जनशिकायतें

CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, लापरवाह जिला पंजीयक सहकारिता निलंबित, टीकमगढ़ में सुनीं जनशिकायतें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 अगस्त को जन विश्वास अभियान के अंतर्गत टीकमगढ़ में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को सुना। उन्होंने शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण किया। उन्होंने इस दौरान कार्य में लापरवाही बरतने पर जिला पंजीयक सहकारिता एसके कौशिक को निलंबित करने के निर्देश दिए। दयाराम लोधी की मां स्व. रानीबाई की मृत्यु होने पर सहकारी बैंक की मवई शाखा द्वारा नॉमिनी के खाते में राशि अंतरित नहीं किए जाने की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी सतत रूप से फील्ड भ्रमण कर विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन का जायजा लें। स्थानीय स्तर पर जनता की शिकायतों का समय सीमा में प्रभावी निराकरण किया जाये। क्षेत्र विशेष में मिलने वाली शिकायतों का भी समुचित निराकरण सुनिश्चित हो।

 

अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकायतकर्ता महेश प्रसाद लोधी, कमलेश नामूलिया, दयाराम लोधी, कालीचरण सिंह राजपूत और हरिराम विश्वकर्मा से संवाद किया और उनके प्रकरणों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के संबद्ध निराकरण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आवश्यक निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी, जबकि उत्कृष्ट कार्य पर शासकीय सेवक सम्मानित किए जाएंगे।

 

उचित मूल्य की दुकानों पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मौके पर जिले में विभिन्न शासकीय उचित मूल्य दुकानों के वास्तविक स्थान पर संचालन के लिए आवश्यक कार्रवाई पर भी चर्चा हुई। बैठक में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, पूर्व राज्य मंत्री एवं विधायक जतारा हरिशंकर खटीक सहित मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री डॉ. सुदाम खाड़े, आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह सहित कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय एवं अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।