UP-Japan Relations: CM योगी का बड़ा प्लान, जापानी निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

UP-Japan Relations: CM योगी का बड़ा प्लान, जापानी निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी कंपनियों के निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को इन्वेस्ट यूपी व अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 240 लोगों के प्रतिनिधिमंडल का प्रदेश में आगमन हुआ। इस यात्रा में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच सकारात्मक माहौल का सृजन हुआ। जापान से आए अतिथियों ने उत्तर प्रदेश में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की। ऐसे में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच निरंतर संवाद कर निवेश के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। 

 

बैठक में मुख्यमंत्री जी को जापान के प्रतिनिधिमंडल की ओर से किए गए सभी एमओयू के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि इस दौरे का मुख्य फोकस निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, तकनीक, कौशल विकास, शिक्षा और पर्यटन में सहयोग बढ़ाने पर रहा।

 

मुख्यमंत्री जी ने यीडा के अंतर्गत जापानी सिटी के लिए भूमि अधिग्रहण के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने अवगत कराया कि 500 एकड़ में से 350 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री जी ने इस कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापान में सितंबर, अक्टूबर व दिसंबर में होने वाले विभिन्न वैश्विक आयोजन में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को भी भेजा जाए। इसमें मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, उद्योगपतियों के साथ ही संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापानी भाषा के प्रशिक्षण तथा स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। यामानाशी प्रांत सहित जापान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं को सुदृढ़ किया जाए। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन्वेस्ट यूपी में अलग से यामानाशी जापान डेस्क बनाई जाए। इसके जरिए निरंतर संवाद होता रहे। उन्होंने हर तीसरे महीने इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी लेने का निर्देश दिया। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध स्थलों पर जाने के लिए अच्छी सुविधाएं दी जाएं। एक ऐसा रूट विकसित किया जाए, जिससे वे एक साथ सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु समेत अधिक से अधिक बौद्ध स्थलों का दर्शन कर सकें। 

 

मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिया कि आगामी ट्रेड शो में जापानी विशेषज्ञों के साथ विशेष सत्र आयोजित किए जाएं, जिससे युवाओं को उनके अनुभवों का लाभ प्राप्त हो सके।  मुख्यमंत्री जी ने कहाकि यूनेस्को ने सारनाथ की भांति जापान के नारा को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। दोनों को परस्पर सांस्कृतिक रूप से जोड़ने के लिए कदम उठाए जाएं।  मुख्यमंत्री जी ने द्विपक्षीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश एवं यामानाशी प्रांत के टूर ऑपरेटरों के मध्य बढ़ावा देने हेतु आवश्यक कदम उठाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट में पर्यटन गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए।

बांग्लादेश के PM तारिक रहमान ने रद्द किया दिल्ली दौरा, सामने आया चौंकाने वाला कारण

बांग्लादेश के PM तारिक रहमान ने रद्द किया दिल्ली दौरा, सामने आया चौंकाने वाला कारण

Tariq Rehman

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का 3 दिवसीय दिल्ली दौरा टल गया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले अगस्त के तीसरे हफ्ते की तारीखें भी तय मानी जा रही थीं। दोनों तरफ के अधिकारी कूटनीतिक मोर्चे पर पूरी तैयारी में थे और राष्ट्रपति भवन से एक प्रेस विज्ञप्ति ने इस बात पर मुहर भी लगा दी थी। रहमान के रद्द हुए दौरे से पहले उनके एक वरिष्ठ सहयोगी ने कथित तौर पर तथाकथित ‘इस्लामिक NATO’ के प्रति खुलेपन का संकेत दिया था। इसी दौरान ढाका ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी दोहराई, ताकि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके।

रिपोर्टों के मुताबिक तारिक रहमान आगामी BRICS Summit में शामिल होने को लेकर भी अनिच्छुक हैं, जबकि भारत ने उन्हें आमंत्रित किया है और चीन तथा रूस के नेता भी इसमें शामिल होने की पुष्टि कर चुके हैं।  ठीक आखिरी वक्त पर, ढाका और कूटनीतिक हलकों के सूत्रों के मुताबिक यह पूरा दौरा अचानक खटाई में पड़ गया। इस पूरे घटनाक्रम के अचानक रुक जाने के पीछे कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में असमंजस की स्थिति बन गई।

पर्दे के पीछे बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन दौरा फिलहाल अधर में लटक गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह ढाका के अंदर चल रही राजनीतिक उथल-पुथल है। सबसे बड़ा और तुरंत उभरने वाला कारण  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना हैं। बांग्लादेश सरकार चाहती है कि उन्हें वापस भारत से प्रत्यर्पित किया जाए।

रविवार को बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने एक बयान में साफ कर दिया कि तारिक रहमान के दौरे के लिए यह प्रत्यर्पण एक मुख्य शर्त है। खबरों के मुताबिक बांग्लादेशी विपक्षी दल और छात्र आंदोलन से जुड़े नेता भारत के साथ तब तक सामान्य कूटनीतिक संबंधों के पक्ष में नहीं हैं जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा हल नहीं हो जाता।

CJP का 5 सितंबर को दिल्ली में बड़ा विरोध मार्च, वादाखिलाफी पर सरकार को घेरा

CJP का 5 सितंबर को दिल्ली में बड़ा विरोध मार्च, वादाखिलाफी पर सरकार को घेरा

CJP Delhi march: जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक आंदोलन चलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को नई दिल्ली में एक बड़े शांतिपूर्ण विरोध मार्च का ऐलान किया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए अपने वादों को पूरा नहीं किया है।

5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध मार्च

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर युवाओं और छात्र संगठनों का बड़ा जुटान देखने को मिल सकता है। CJP के नेतृत्व में यह मार्च 5 सितंबर को इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़ेगा। CJP के सह-संयोजक सौरव दास के अनुसार, इस मार्च का नेतृत्व नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों और पुलिस की बर्बरता के शिकार लोगों के परिवार करेंगे। ALSO READ: CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

सरकार परलापरवाही का आरोप

CJP ने हाल ही में हुई ऑनलाइन कार्यसमिति की बैठक में यह समीक्षा की कि एक महीना बीत जाने के बाद भी सरकार ने मुआवजे और मुकदमे वापस लेने के अपने वादों पर अमल नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि उनके धैर्य और सद्भावना को कमजोरी न समझा जाए, इसलिए अब वे एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए विवश हैं। ALSO READ: जयपुर में CJP के स्कूल दौरे पर बवाल, ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से निकाला; क्या बोले आशुतोष रांका?

क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है विरोध?

पिछले दिनों नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन चला था। उस दौरान सरकार के आश्वासन और सद्भावना के चलते 25 जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया गया था। हालांकि प्रदर्शनकारियों की मांग के अनुरूप शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है। सीजेपी की अन्य मांगों में नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को पूरी तरह रद्द करना भी शामिल है।

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

Deepak letter to Education Ministers

Deepak letter to the Education Ministers: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने देश और राज्यों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा है। पत्र में आजादी के 80 साल बाद भी स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय और डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए गए हैं।

सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक

CJP ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा कि स्वतंत्रता के आठ दशकों बाद भी बच्चे मूलभूत सुविधाओं के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। बच्चों को सुरक्षित पेयजल, चालू शौचालय, उचित कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

दीपके के 6 प्रमुख सवाल

  • पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का जीर्णोद्धार (Renovation) किया गया है और कितनों में मरम्मत या पूर्ण सुधार की आवश्यकता है?
  • वर्तमान में शिक्षकों के कितने पद स्वीकृत हैं, कितने भरे गए हैं और कितने पद खाली पड़े हैं?
  • बीते पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित किया गया और उसमें से वास्तव में कितना पैसा खर्च हुआ?
  • हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है?
  • सरकारी स्कूल के शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा कौन-कौन से गैर-शैक्षणिक (Non-teaching) काम सौंपे गए हैं?
  • कितने सरकारी स्कूलों में वर्तमान में कंप्यूटर, डिजिटल लर्निंग, साफ शौचालय और खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं?

पत्र के अंत में CJP ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीति या किसी एक सरकार का नहीं है, बल्कि देश के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि सरकार इन जानकारियों को सार्वजनिक करे और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

सीजेपी टीम पर राजस्थान में हुआ था हमला

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में 21 अगस्त 2026 को CJP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर कथित रूप से हमला और पथराव हुआ था। CJP की टीम अपने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत इस सरकारी स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंची थी। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि यह सरकारी स्कूल सालों से एक मवेशी शेड में चलाया जा रहा था। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल पहुंचने से पहले ही स्थानीय उपद्रवियों और विरोधियों ने उनकी गाड़ियों पर पथराव किया, गाड़ियों के शीशे तोड़े और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।

मध्यप्रदेश में सिस्टम के खिलाफ मुखर हो रहे जेन-जी से जेन-अल्फा तक, स्कूलों के मर्जर के खिलाफ खोला मोर्चा

मध्यप्रदेश में सिस्टम के खिलाफ मुखर हो रहे जेन-जी से जेन-अल्फा तक, स्कूलों के मर्जर के खिलाफ खोला मोर्चा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी के आंदोलन के अब मध्यप्रदेश में जेन-जी और जेन-अल्फा सिस्टम के खिलाफ पूरी मुखरता के साथ अपनी आवाज बुलंद करने लगे है। इन दिनों मध्यप्रदेश में जेन-जी और जेन-अल्फा के विरोध का नया ट्रेंड दिख रहा है। स्कूली बच्चे आंदोलन कर नेतृत्व कर रहे है और सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठा रहे है। ताजा मामला भोपाल में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्कूलों बच्चों के प्रदर्शन का है। राजधानी के नीलम पार्क में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्कूली बच्चों ने स्कूलों के मर्जर के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इससे पहले उज्जैन में इसी तरह का प्रदर्शन देखने को मिल चुका है।
 
गांवों के स्कूलों के मर्जर का विरोध-प्रदेश में सरकारी स्कलों के मर्जर के खिलाफ रविवार को नीलम पार्क में जेन अल्फा का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। नीलम पार्क में प्रदेश भर के अलग-अलग जिलों से स्कूली बच्चे मर्जर के खिलाफ धरना दिया और एक अलग ही अंदाज में अपना विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने पहुंचे बच्चों ने मांग की कि सरकार की तरफ से स्कूलों क मर्जर का जो फैसला लिया जा रहा है उसके चलते काफी परेशानियां हो रही है।

गांव-गांव में चल रहे स्कूलों का सांदीपनी स्कूल में मर्जर किया जा रहा है सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का जबरन ट्रांसफर सांदीपनि स्कूलों में किया जा रहा है। बच्चों का कहना है कि संदीपनि स्कूल गांव से काफी दूर है और इसके लिए उन्हें कही-कही 10 से 15 किलोमीटर दूर पढ़ने  के लिए जाना पड़ा रहा है। बच्चों की मांग है कि स्कूलों को मर्जर करने का फैसला वापस लिया जाए और उन्हें गांव के स्कूलों में ही पढ़ने का मौका दिया जाए।
 
ऐसा नहीं स्कूलों के मर्जर के खिलाफ यह कोई पहला प्रदर्शन हुआ है। भोपाल में इसी माह 18 अगस्त को डीएमएस को केवी में मर्ज करने के खिलाफ बच्चों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया था। भोपाल में एनसीईआरटी के डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल (डीएमएस) को केंद्रीय विद्यालय में मर्ज करने के प्रस्ताव के खिलाफ विद्यार्थी सड़क पर उतरे। 'सेव डीएमएस' के पोस्टर लेकर स्कूल की अलग पहचान बचाने की मांग की और ज्ञापन सौंपा था। ।
 
वहीं दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद उज्जैन में शासकीय सराफा कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल को 6 किमी दूर दाउदखेड़ी शिफ्ट करने के प्रस्ताव के विरोध सैकड़ों छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंच कर अपना विरोध दर्ज जताया था। बच्चों के  प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने स्कूलों की शिफ्टिंग रोक दी।
 
जेन-अल्फा के विरोध प्रदर्शन पर सियासत- भोपाल में स्कूलों के मर्जर के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन पर अब सियासत भी गर्मा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने बच्चों के साथ आते हुए स्कूलों के मर्जर पर सवाल उठा दिए। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि जिन हाथों में पढ़ने के लिए कॉपी किताब होनी चाहिए उनमें आंदोलन के बैनर पोस्टर हैं। यह मध्य प्रदेश और देश का दुर्भाग्य है। कांग्रेस ने टीला, गांव स्तर पर स्कूल बनाने का काम किया। भाजपा की सरकारे उन्हें खत्म कर रही हैं। शालाओं में इंफ्रास्ट्रक्चर और टीचर्स नहीं है। कांग्रेस ने हर जिले ब्लॉक और गांव में स्कूल खोलने का काम किया। भाजपा सरकार इन स्कूलों को बंद करने का काम कर रही है। यह देश और प्रदेश के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है।
 
वहीं भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेयी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय मजरे टोले में स्कूल इसलिए खोले जाते थे की कांग्रेस सरकार में सड़के नहीं थी अब सड़के गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। परिवहन सुविधा काफी बेहतर है। गांव-गांव तक सरकार की तरफ से बस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है बेहतर शिक्षा के लिए हम सीएम राइज और सांदीपनि स्कूल खोल रहे हैं जहां पर आधुनिक शिक्षा दी जा रही है।
 

उत्तराखंड में 50 रोपवे परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, सीएम धामी ने दिए प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

उत्तराखंड में 50 रोपवे परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, सीएम धामी ने दिए प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

CM Pushkar Singh Dhami News: उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में रोपवे परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से अपने शासकीय आवास पर बैठक के दौरान अधिकारियों को पर्वतमाला परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित 50 रोपवे परियोजनाओं के संबंध में लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने एवं सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त परियोजनाओं में हो रही देरी के कारणों की समीक्षा कर नई समयसीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए।

 

मुख्‍यमंत्री धामी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि सोनप्रयाग-केदारनाथ, टनकपुर-पूर्णागिरि, काठगोदाम-नैनीताल, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब, कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, देहरादून-मसूरी एवं जानकीचट्टी सहित प्रमुख रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी प्राप्त की। बैठक में हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र की प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं, उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड की कार्यप्रगति एवं भावी परियोजनाओं की ग्राउंडिंग के संबंध में भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

 

अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक रोपवे परियोजना के साथ पर्याप्त पार्किंग सुविधा को समेकित योजना का हिस्सा बनाने तथा निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लाइसेंसिंग एवं अनुमोदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी बनाया जाए। PPP मॉडल के माध्यम से अधिक से अधिक रोपवे परियोजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों के साथ प्रभावी समन्वय एवं ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।

मोदी-ट्रंप की G7 मुलाकात में क्या हुआ था? अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा- भारत ने कहा था ‘सवाल मत पूछिए’, फिर ट्रंप ने बदल दिया प्लान

मोदी-ट्रंप की G7 मुलाकात में क्या हुआ था? अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा- भारत ने कहा था ‘सवाल मत पूछिए’, फिर ट्रंप ने बदल दिया प्लान

modi and trump

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि फ्रांस में G-7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के प्रेस मीट को लेकर भारत ने कोई सवाल नहीं पूछने के लिए कहा था। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि किसी भी VVIP के दौरे से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर दोनों देशों के बीच बात की जाती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। ALSO READ: भारत का बांग्लादेश को बड़ा झटका! बिजली हस्तांतरण पर लगेगा नया SNA शुल्क

 

सर्जियो गोर ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 17 जून को फ्रांस में G7 समिट के दौरान मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पहले वह अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे। इस दौरान ट्रंप ने उनसे पूछा कि भारतीय पक्ष किन मुद्दों को उठाना चाहता है और दिल्ली की ओर से क्या कोई खास मांग है?

 

सर्जियो गोर ने ट्रंप को दी थी जानकारी

गोर के अनुसार, इसी बातचीत में भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से एक अनुरोध का जिक्र हुआ। इसमें कहा गया था कि बैठक में मीडिया को मौजूद रहने दिया जाए, लेकिन इसे पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तब्दील न किया जाए और पत्रकारों के सवाल न लिए जाएं। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने इस पर सहमति जताते हुए कहा था कि इसमें कोई समस्या नहीं है।

 

ट्रंप भूल गए गोर की बात

इसके बाद मोदी और ट्रंप की बैठक कैमरों और पत्रकारों की मौजूदगी में शुरू हुई। गोर ने बताया कि कमरे में करीब 50 कैमरे मौजूद थे। दोनों नेताओं ने शुरुआत में अपनी-अपनी बात रखी। लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप गोर की बात भूल गए। वे कैमरों की तरफ मुड़े और पत्रकारों से पूछा कि क्या किसी के पास सवाल है। यहीं से बैठक का स्वरूप बदल गया। पत्रकारों के सवाल शुरू होने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत का दायरा बढ़ता गया और यह मुलाकात करीब 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल गई। गोर ने कहा कि ट्रंप के इस कदम के बाद कई अहम मुद्दों पर खुलकर सवाल-जवाब हुए। ALSO READ: नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

 

अमेरिकी राजदूत के इस दावे के बाद मोदी-ट्रंप मुलाकात को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से गोर के उस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है कि भारतीय पक्ष ने प्रेस मीट में सवाल नहीं लेने का अनुरोध किया था।

 

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद दोनों देशों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर बनी हुई है।

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

UK Israel relations

UK Israel relations: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने, एक इंटरव्यू में कुछ दिन पूर्व ब्रिटेन का मज़ाक उड़ते हुए उसे “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहा। कहने की आवश्यकता नहीं कि ब्रिटिश सरकार ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूर्णतः अस्वीकार्य” बताया है।

 

इसराइली प्रधानमंत्री इस इंटरव्यू में अपने देश के प्रति ब्रिटेन के रुख की आलोचना कर रहे थे। एक मिलिट्री रेडियो पॉडकास्ट के दौरान दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्हो़ंने कहा, “किसी ने एक बार कहा था कि परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन होगा।…हम इसराइली यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान ऐसा दूसरा देश न बन पाए।” ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने नेतन्याहू की इन टिप्पणियों को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया।

ब्रिटेन में इस्लाम की बढ़ती धाक

नेतन्याहू ने ऐसा करके, अपने आप को पश्चिमी देशों के उन दक्षिणपंथी राजनेताओं और टिप्पणीकारों की पांत से जोड़ लिया है, जिन्होंने आगाह किया था कि बड़े पैमाने पर आप्रवासन (इमिग्रेशन) के कारण ब्रिटेन के कुछ हिस्से इस्लामी कानूनों के दायरे में आ गए हैं। बाद में इन नेताओं और टिप्पणीकारों पर “इस्लामोफोबिया” (इस्लाम-विरोधी होने) के आरोप भी लगे थे। ब्रिटेन उन यूरोपीय देशों में से एक है, जिन्होंने पिछले साल फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता भी दी थी; इस कदम से स्वाभाविक है कि इसराइल इन देशों से प्रसन्न नहीं है। ALSO READ: स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

 

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में अपने पूर्ववर्ती कीर स्टारमर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टारमर, गाज़ा पट्टी में अपना हमला रोकने के लिए इसराइल पर पर्याप्त दबाव बनाने में नाकाम रहे। अपना पद संभालने से कुछ समय पहले, “द गार्डियन” को दिए एक इंटरव्यू में बर्नहम ने कहा कि ग्रेट ब्रिटेन, “वेस्ट बैंक” में स्थित इसराइली बस्तियों से आने वाले सामानों के व्यापार पर रोक लगाने के बारे में गंभीरता से विचार करेगा। “वेस्ट बैंक” जॉर्डन नदी के पश्चिम में स्थित फ़िलिस्तीन का एक क्षेत्र है और 1967 से इसराइली क़ब्ज़े में है, जिसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार अवैध माना जात है।

ख़राब होते रिश्ते

ब्रिटेन पारंपरिक रूप से अमेरिका का हमेशा क़रीबी सहयोगी रहा है; इसराइल के साथ उसके रिश्ते तब से ख़राब हुए हैं जब इस साल अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया— इसी के साथ मध्यपूर्व में युद्ध भी छिड़ गया। ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका परमाणु शक्तियां हैं और यह बात भी जग-जाहिर है कि इसराइल के पास भी परमाणु हथियार हैं; हालांकि उसने सार्वजनिक रूप से इसे कभी स्वीकार नहीं किया है। 1998 में पाकिस्तान परमाणु शक्ति वाला पहला इस्लामी देश बना था।  ALSO READ: महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

 

इसराइल उस समय भारत के सहयोग से पाकिस्तानी बम बनने को रोकना चाहता था, पर इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं थीं। अत: नेतन्याहू का इसराइल, अब हर हाल में ईरान को “दूसरी इस्लामी परमाणु शक्ति” बनाने से रोकने के लिए पूर्णत: कटिबद्ध है।

 

नेतन्याहू द्वारा ब्रिटेन को एक “इस्लामिक रिपब्लिक” कहने के पीछे एक दूसर प्रमुख कारण संभवत: यह भी है कि ब्रिटेन में मुस्लिम जनसंख्या न केवल तेज़ी से बढ़ी है और अब भी बढ़ रही है, वहां की सरकारें इसे रोकने के बदले दुम दबाकर “मुस्लिम तुष्टीकरण” नीति की कायल बन गई हैं। ब्रिटेन की सरकारें मुस्लिम प्रवासियों द्वारा वहां की रहन-सहन के नियमों को ठुकराने की ही नहीं, उनका वोट पाने के लिए उनके द्वारा देश के क़ानूनों की अवहेलना के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने से बिदकती हैं। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह

ताज़े अनुमानों के अनुसार, ब्रिटेन की मुस्लिम जनसंख्या लगभग 41 लाख है, जो वहां की कुल जनसंख्या के 6.5 प्रतिशत के बराबर है। पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह हैं। अप्रैल 2026 के एक मत सर्वेक्षण के अनुसार, 25 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम इसराइल विरोधी हमास के प्रबल समर्थक हैं। 45 प्रतिशत का मानना है कि ब्रिटेन के समाचार मीडिया में यहूदियों की धाक चलती है। 16 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम सीरिया में यज़ीदियों का नरसंहार करने वाले अल बगदादी के “इस्लामी राज्य” के प्रशंसक हैं और 15 प्रतिशत ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा की यादें अब भी संजोए हुए हैं। ईरान में हर तरह के जन—असंतोष को निर्ममता से कुचलने वाले वहां के तथाकथित “पसदारान” (रिवल्यूशनरी गार्ड) के समर्थकों की संख्या भी कुछ कम नहीं है।

रोज़मर्रा की अविश्वसनीय वास्तविकता

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पॉडकास्ट वाले वक्तव्य से कुछ ही दिन पहले, ब्रिटेन के एक सांसद रूपर्ट लो ने वहां की संसद में एक ऐसा वक्तव्य पढ़ कर सुनाया, जो ब्रिटेन में रोज़मर्रा की एक अविश्सनवीय वास्तविकता है। ब्रिटेन में रहने वाले मुख्यतः पाकिस्तानियों द्वारा, वहां की मूल ईसाई लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ और बलात्कार के लिए कुख्यात, तथाकथित “ग्रूमिंग गैंग्स” के काले कारनामों का वर्णन करते हुए रूपर्ट लो ने कहा कि उनका वक्तव्य, उनकी खुद की जांच-परख पर आधारित है।

 

उदाहरण के तौर पर, बलात्कार पीड़ित एक लड़की की आपबीती को रूपर्ट लो ने उसी के शब्दों में संसद में सुनाया: “उसने (बलात्कारी ने) जैक डेनियल्स (शराब) की बोतल उठाई, जो अब खाली हो चुकी थी, और उसे ज़बरदस्ती मेरे (गुप्तांग के) अंदर घुसेड़ दिया। बोतल वहीं तोड़ दी। उस समय मैं लगभग 12 साल की थी। लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं कि गोरी लड़कियों—- यानी ईसाई लड़कियों में— नैतिकता की या अच्छे मूल्यों की कमी होती है, जबकि मुस्लिम लड़कियों को गरिमापू्र्ण और उच्च नैतिक स्तर वाला बताया जाता है।”

 

“इस पूरे यौन शोषण के दौरान, देश के अलग अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा बलात्कार किया। ईद और छुट्टियों के दौरान पार्टियां और भी बड़ी हो जाती थीं—हालात और भी बदतर हो जाते थे। पार्टियों में और अधिक हिंसक लोग शामिल हो जाते थे— और अधिक लोग हुए, तो उनकी हवश के लिए और अधिक लड़कियां भी होनी चाहिए! मुझे याद है, एक आदमी ने एक वैन का पिछला दरवाज़ा खोला और मैने देखा कि उसमें 15 से 20 लड़कियां कुत्तों के पिंजरों में बंद थीं।” यह मात्र एक उदाहरण है। ऐसे अनगिनत मामले हैं।

कु्ख्यात “ग्रूमिंग गैंग”

“ग्रूमिंग गैंग” ऐसे लोगों के एक संगठित नेटवर्क को कहते हैं, जो सुनियोजित तरीके से कमज़ोरों-पीड़ितों को—आमतौर पर बच्चों और किशोरवय लड़के-लड़कियों—को बहला-फुसलाकर उनका शोषण करते हैं। उन्हें गंभीर दुर्व्यवहार का शिकार बनाते हैं; इसमें बच्चों का यौन शोषण और मानव तस्करी भी शामिल है। अपने शिकारों को उपहारों, मादक द्रव्यों, शराब आदि के द्वारा ललचाया और पटाया जाता है। घर-परिवार से दूर रखकर, गैंग पर निर्भर बनाकर यौन शोषण सहित उनका हर तरह से दुरुपयोग किया जाता है।

 

ब्रिटिश पुलिस भी मुस्तैदी से काम नहीं करती। 2021 में, ब्रिटिश अख़बार “टाइम्स” की एक जांच से पता चला कि साउथ यॉर्कशायर पुलिस, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े संदिग्धों के मामले में नियमित रूप से यह दर्ज नहीं कर रही थी कि शोषण करने वाले किस जाति, धर्म, देश या समुदाय के लोग थे। रॉदरहैम में, पुलिस ने 67 प्रतिशत मामलों में ऐसे विवरण लिखना ज़रूरी ही नहीं समझा। ग्रेटर मैनचेस्टर इलाके में तीन साल की अवधि में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों के 52 प्रतिशत अपराधी “एशियाई” मूल के दर्ज किए गए, जिनमें सबसे बड़ा समूह पाकिस्तानियों का था, जबकि 38 प्रतिशत “श्वेत” (White) यानी गोरे दर्ज किए गए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, मैनचेस्टर की स्थानीय आबादी में 21 प्रतिशत लोग एशियाई मूल के हैं।

पाकिस्तानी लड़कियां भी सुरक्षित नहीं

पाकिस्तानी महिलाओं के एक स्थानीय समूह का कहना था कि पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर और मकान-मालिक पाकिस्तानी लड़कियों को अपनी हवश का निशाना बनाते हैं। लेकिन, इसकी शिकायत करने पर अपनी शादी की संभावनाओं पर असर पड़ने के डर से लड़कियां पुलिस के पास जा कर कोई रिपोर्ट दर्ज करने से कतराती रही हैं।

 

इन सब तथ्यों के प्रकाश में, इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का—भले मज़ाक के ही तौर पर— ब्रिटेन को “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहना क्या सही नहीं है?

Weather Update : 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, पहाड़ों में लैंडस्लाइड का खतरा; मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह

Weather Update 24 August : उत्तर भारत में भले ही मानसून कुछ कमजोर पड़ गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड मूसलाधार बारिश कहर बरपा रही है। मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में ज्यादातर नदियां उफान पर हैं और बाढ़ से हाल बेहाल है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम एक्टिव होने से देश के लगभग 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अगले 4-5 दिन भारी बारिश हो सकती है। ALSO READ: त्योहारों से पहले प्याज ने रुलाया! नासिक में 76% बढ़े दाम, कई राज्यों में कीमतें दोगुनी

 

जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के बीच लैंडस्लाइड का खतरा है। तेज हवाओं को देखते हुए ही पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे समुद्री इलाकों में मछुआरों को तूफान के दौरान समंदर से दूर रहने की सलाह दी गई है। 

 

क्या है यूपी का हाल?

मथुरा, वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में भारी बारिश से बाढ़ से हालात बने हुए हैं। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई और घरों में पानी घुस गया। मौसम विभाग ने नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, बिजनौर, महोबा, ललितपुर, आजमगढ़, गोरखपुर, झांसी, अलीगढ़, कानपुर, सोनभद्र, मथुरा, मोरादाबाद, बदायूं, इटावा और मेरठ में भारी बारिश का अलर्ट है। ALSO READ: Top News 24 August : 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, H1N1 पर ICMR का बड़ा अपडेट और मिस यूनिवर्स इंडिया बनीं केरल की केजिया लिज

 

MP के 22 राज्यों में रेड अलर्ट

मध्य प्रदेश के जबलपुर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में रविवार को भारी बारिश हुई। राजधानी भोपाल में भी रातभर बरसा पानी। राज्य के 22 जिलों में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई।

 

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी के मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हो सकती है।

 

हवा की चेतावनी

24 अगस्त तक उत्तर और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम बंगाल और उससे लगे ओडिशा व उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास और दूर 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से लेकर 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक तेज हवाएं चलने की बहुत संभावना है।

 

 

मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह

उत्तर और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम बंगाल, और उससे लगे ओडिशा व उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास और दूर समुद्र की स्थिति के 'अशांत से बहुत अशांत' रहने की पूरी संभावना है। मुछआरों को सलाह दी जाती है कि वे 24 अगस्त तक उत्तर और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी, तथा पश्चिम बंगाल-ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास और समुद्र में न जाएं।

H1N1 Strain : क्या देश में आ गया कोई नया खतरनाक वायरस? ICMR के इस बड़े खुलासे ने दूर किया सबका डर!

H1N1 Strain : क्या देश में आ गया कोई नया खतरनाक वायरस? ICMR के इस बड़े खुलासे ने दूर किया सबका डर!

ICMR on H1N1 Strain

H1N1 Strain Update: देशभर के अस्पतालों में इन दिनों बदलते मौसम और मानसून के चलते फ्लू और सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। राजधानी दिल्ली से लेकर बेंगलुरु और मुंबई तक स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामलों के बढ़ने से लोगों के मन में डर बैठ गया था कि क्या कोई नया म्यूटेंट या खतरनाक वायरस देश में पैर पसार रहा है। लेकिन अब देश की सर्वोच्च चिकित्सा अनुसंधान संस्था ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) ने इस पर आधिकारिक बयान जारी कर सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है। ALSO READ: H1N1 Cases: दिल्ली-NCR में 1,700 से ज्यादा मामले, मुंबई में भी तेजी, बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़े, जानें बचाव और कब कराएं टेस्ट

 

क्या कहती है आईसीएमआर की रिपोर्ट

ICMR के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि भारत में इन दिनों जो Influenza A (H1N1) वायरस एक्टिव हैं, वह कोई नया स्ट्रेन नहीं है। यह वायरस असल में A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09-like स्ट्रेन से मेल खाता है, जो कि क्लेड (Clade) 6B.1A.5a2a और सबकलेड D.3.1.1 के अंतर्गत आता है। इससे घबराने की जरूत नहीं है। यह स्ट्रेन साल 2025 से ही देश में सर्कुलेशन में है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में फैल रहे इन फ्लू स्ट्रेन पर उत्तरी गोलार्ध के लिए अनुशंसित मौजूदा वैक्सीन पूरी तरह प्रभावी और मेल खाने वाली हैं।

 

क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हाल ही में देश में मौसमी बीमारियों और अस्पताल की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और भीड़-भाड़ वाले इनडोर स्थानों की वजह से मौसमी फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी आम बात है। दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क है और अस्पतालों में पर्याप्त बेड व दवाइयां उपलब्ध हैं। ALSO READ: सावधान! क्या आपको भी है तेज बुखार और खांसी? नजरंदाज न करें H1N1 का यह खतरा

 

फ्लू के मुख्य लक्षण और बचाव के उपाय

मौसमी फ्लू आमतौर पर स्वतः ठीक होने वाला (Self-limiting) होता है, फिर भी इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

मुख्य लक्षण: तेज बुखार, लगातार खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द।  किन्हें है ज्यादा खतरा? छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे डायबिटीज या दिल के रोग) से पीड़ित लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

क्या रखें सावधानी?

  • ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  • जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें।
  • अपने हाथों से बार-बार अपनी आंख, नाक या मुंह को न छूएं।

डॉक्टर से संपर्क कब करें: यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तबीयत ज्यादा बिगड़े या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। उचित आराम और समय पर देखभाल से मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।