3 लाख सैलरी के बाद भी लाइफ में नहीं मिल रहा सुकून, इंजीनियर की ये पोस्ट हो रही खूब वायरल

सोशल मीडिया पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि, हर महीने 3 लाख रुपये सैलरी मिलने के बावजूद वह रोज 15-16 घंटे काम करने की वजह से पूरी तरह थक चुका है। लगातार काम का दबाव, लंबे घंटे और निजी जीवन के लिए समय न मिलने की वजह से ये नौकरी उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन गई। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, वहीं कई लोग इस पर अपनी राय भी रख रहे हैं।

r/IndiaCareers पर शेयर की गई सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने एक Reddit पोस्ट किया। इस पोस्ट का टाइटल था “महीने में 3 लाख रुपये कमा रहा हूं… लेकिन फिर भी खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा हूं।” इस पोस्ट में इंजीनियर ने अपनी मानसिक थकान और बर्नआउट का अनुभव शेयर किया।

महीने की 3 लाख है सैलरी

यूज़र ने लिखा, “मैं टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं, महीने में 3 लाख रुपये से ज्यादा कमाता हूं और मेरे पास चार साल का अनुभव है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रेजुएशन के बाद से मैं एक ही मिड-साइज स्टार्टअप में काम कर रहा हूं।” उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सैलरी लगातार बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद अब उन्हें अपनी नौकरी में पहले जैसी खुशी और संतुष्टि महसूस नहीं हो रही है।

रोज उसी काम से थक गया हूं

उन्होंने आगे बताया कि अब काम पहले जैसा चुनौतीपूर्ण नहीं रहा और रोज एक ही तरह का काम करते-करते वह थक चुके हैं। यूजर ने लिखा, “आजकल ऐसा लगता है कि मैं दिन-रात बस एक ही काम कर रहा हूं। मुझे महसूस होता है कि मैंने कुछ नया सीखना बंद कर दिया है। इसके अलावा काम का दबाव इतना ज्यादा है कि कई बार रोज 15 से 16 घंटे तक काम करना पड़ता है।” पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है।

इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त नहीं

पोस्ट में यूजर ने बताया कि नई नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी करना भी उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने लिखा, “मेरे पास अपने लिए बिल्कुल समय नहीं बचता। मैं आगे बढ़ना चाहता हूं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इंटरव्यू की तैयारी के लिए वक्त ही नहीं मिल पाता। ऊपर से इस समय बहुत कम कंपनियां भर्ती कर रही हैं। अगर नौकरी बदलनी है, तो कम से कम 3 से 4 महीने की तैयारी करनी होगी और यह सब उसी काम के साथ करना पड़ेगा, जिसने पहले से ही मुझे पूरी तरह थका दिया है।”

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लोगों से मांगी सलाह

पोस्ट के आखिर में इंजीनियर ने ऐसे लोगों से सलाह मांगी, जो पहले इसी दौर से गुजर चुके थे। इसके बाद कई यूजर्स ने नौकरी बदलने, मेंटल हेल्थ का ध्यान रखने और वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर करने जैसे सुझाव दिए। एक यूजर ने कॉर्पोरेट नौकरी के अलावा दूसरे विकल्प तलाशने की सलाह दी। उन्होंने कमेंट किया, “क्यों न अपना कुछ शुरू करें? जरूरी नहीं कि वह टेक से जुड़ा हो। यह आपकी हॉबी, किसी इवेंट या छोटा-सा ऑनलाइन बिजनेस भी हो सकता है। शुरुआत में शायद उससे खर्च न निकल पाए, लेकिन आपको खुशी जरूर मिलेगी। और अगर बाद में लगे कि यह सही नहीं है, तो आप दोबारा कॉर्पोरेट नौकरी में वापस जा सकते हैं।”

एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि, “तुम्हें तैयारी के लिए 3-4 महीने क्यों चाहिए? 10-15 दिन की छुट्टी लो और दूसरी कंपनियों में आवेदन करना शुरू कर दो। मुझे लगता है कि तुम इंटरव्यू देने से घबरा रहे हो, क्योंकि काफी समय से कोई इंटरव्यू नहीं दिया है। थोड़ा ब्रेक लो और अप्लाई करना शुरू करो। अगर शुरुआत में चयन नहीं भी होता, तो चिंता की बात नहीं है, क्योंकि तुम्हारे पास पहले से नौकरी है।”

कई Reddit यूजर्स का मानना था कि इंजीनियर की सबसे बड़ी समस्या इंटरव्यू की तैयारी नहीं, बल्कि रोज़ 16 घंटे तक काम करना है। एक यूजर ने लिखा, “सबसे पहले किसी भी तरह अपने काम के घंटे कम करने की कोशिश करो। अगर जरूरत पड़े, तो स्वास्थ्य का कारण बता दो या फिर साफ कह दो कि तुम अपने लिए और परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हो। इसके अलावा, बिना किसी को बताए भी हर दिन अपने लिए थोड़ा समय निकालने की आदत डालो।”

PAK आर्मी की बर्बरता! बलूच लड़की को मारी गोली, फिर हमास स्टाइल में निकाला परेड

बलूचिस्तान में इन दिनों पाकिस्तान के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई बलूच समूह और कार्यकर्ता पाकिस्तान की सेना और वहां की खुफिया एजेंसियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैंय़ बलूचों ने पाकिस्तानी सेना को सीधी चुनौती दे दी कि बलूचिस्तान छोड़कर चले जाएं। वहीं इनसबके बीच बलूच लोगों पर पाक सेना का दमन भी बढ़ता जा रहा है। बलूचिस्तान से सामने आई कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के बाद पाकिस्तान की सेना की कार्रवाई को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।

सामने आया हैरान कर देना वाला वीडियो 

वीडियो में दावा किया जा रहा है कि सेना की कार्रवाई के दौरान एक लड़की की मौत हो गई और बाद में उसके शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। हालांकि, इस वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। वहीं, बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तान की सेना की कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब बलूचिस्तान में हाल के हफ्तों में तनाव बढ़ा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, 5 जुलाई से शुरू किए गए आतंकवाद-रोधी अभियान के बाद से पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है।

रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना पर आरोप है कि उसने एक लड़की को गोली मार दी। इसके बाद उसके शव को एक बख्तरबंद सैन्य वाहन के आगे रखकर सड़कों पर घुमाया गया। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हालांकि, इन दावों और वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पीओके में पाक सेना की बर्रबता है जारी

इस बीच, सोमवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट इलाके से हिंसा की खबरें सामने आईं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सरकार इन प्रदर्शनकारियों को “भारत जैसा दुश्मन” मानती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल एक वीडियो में ख्वाजा आसिफ कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, “मैं POK के प्रदर्शनकारियों को भारत की श्रेणी में रखता हूं और उन्हें भी भारत की तरह दुश्मन मानता हूं।” वहीं, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पिछले दो दिनों के दौरान रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। हालांकि, इन मौतों की संख्या और सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रदर्शनकारी को गोली लगने का दावा गलत, मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत

नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने के दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे थे। अब दिल्ली पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मेडिकल जांच में गोली लगने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि घायल प्रदर्शनकारी की MLC (Medico-Legal Case) रिपोर्ट में दाहिने कान के आगे (Right Tragus) हिस्से में चोट दर्ज की गई है। डॉक्टरों के अनुसार यह चोट ब्लंट इंजरी (किसी ठोस वस्तु से लगी चोट) है और यह सामान्य श्रेणी की चोट है।

 

पुलिस ने कहा कि MLC में चोट की प्रकृति ब्लंट बताई गई है। डॉक्टर की राय के अनुसार यह साधारण चोट है और गोली लगने का कोई सबूत नहीं मिला है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

 

दिल्ली पुलिस ने X से मांगी आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग

 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के दौरान संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने वाली कथित आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को पत्र लिखा था।

 

पुलिस ने X से ऐसी पोस्ट और वीडियो तुरंत हटाने की मांग की है। साथ ही संबंधित यूजर्स की पूरी जानकारी मांगी गई है, जिसमें:

 

यूजर का नाम

पता

संपर्क विवरण

ईमेल आईडी

लॉगिन और लॉगआउट रिकॉर्ड (समय और तारीख सहित)

 

शामिल हैं।

 

दिल्ली पुलिस ने प्लेटफॉर्म से संबंधित कंटेंट का डेटा सुरक्षित रखने को भी कहा है ताकि आगे की जांच में इसका इस्तेमाल किया जा सके। पुलिस ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63(4) के तहत प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश

दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों वाली पोस्ट और वीडियो हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिए हैं। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन और 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा वाले पोस्ट सामने आए थे।

 

दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस जारी कर उसे हटाने के निर्देश दिए जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, नोटिस के बाद प्रधानमंत्री के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियों और वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जा चुका है।

विदेश में बसने का सपना देखने वालों की आंखें खुल जाएंगी! पेरिस में रहने वाले तनिष्क ने बताई इस सपने के पीछे की असली कीमत

विदेश जाकर अच्छी नौकरी, ज्यादा कमाई और बेहतर जीवन जीने का सपना कई भारतीय देखते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर विदेश की चमक-दमक और शानदार लाइफस्टाइल देखकर ऐसा लगता है कि वहां सब कुछ कितना आसान है। लेकिन सच्चाई हमेशा ऐसी नहीं होती है। हाल ही में सोशल मीडिया पर पेरिस में रहने वाले एक भारतीय युवक का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में युवक ने बताया कि, विदेश में रहने का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक देखकर कोई बड़ा फैसला न लें, बल्कि हर पहलू को समझने के बाद ही विदेश जाने का निर्णय करें।

विदेश में बसने वाले लोगों को दी सलाह

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में तनिष्क लोहान ने बताया कि विदेश जाने की सोच रखने वाले कई भारतीय युवाओं को अक्सर एक जैसी सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि कुछ साल के लिए भारत छोड़ दो। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या किसी भी दूसरे देश चले जाओ। वहां पार्ट-टाइम नौकरी करके हर महीने 2 से 3 हजार यूरो कमा सकते हो। फिर जब फुल-टाइम नौकरी मिल जाएगी, तो जिंदगी पूरी तरह सेट हो जाएगी।”

लोहान ने कहा कि, इस तरह की बातें सुनकर कई लोग विदेश जाने का फैसला कर लेते हैं, लेकिन उन्हें पूरी सच्चाई नहीं बताई जाती। उन्होंने आगे कहा, “अगर आप भी ऐसी बातें सुनकर प्रेरित हो रहे हैं और विदेश आने की सोच रहे हैं, तो पहले इसकी असली हकीकत भी जान लें।”

परिवार से दूर रहना पड़ता है

तनिष्क लोहान ने बताया कि विदेश में पढ़ाई करने का खर्च सिर्फ कॉलेज की फीस और हवाई टिकट तक सीमित नहीं होता। उनके अनुसार, कई छात्र पढ़ाई के लिए 50 से 60 लाख रुपये या उससे भी अधिक का एजुकेशन लोन लेते हैं। वहीं, कुछ परिवार अपने बच्चों का सपना पूरा करने के लिए अपनी जमा-पूंजी खर्च कर देते हैं या अपनी संपत्ति तक बेच देते हैं। उनके मुताबिक, विदेश जाने से पहले इन आर्थिक जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है। लोहान ने कहा कि, विदेश में बसने की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि इमोशनल भी होती है। दूसरे देश में रहने का मतलब परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से दूर रहना होता है।

नए माहौल में ढलना आसान नहीं होता

इसके साथ ही नई भाषा, अलग संस्कृति और नए माहौल में खुद को ढालते हुए करियर की शुरुआत भी करनी पड़ती है। लोहान ने कहा कि, विदेश में पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम नौकरी करना, पढ़ाई और काम के बीच बैलेंस बनाए रखना, अच्छी फुल-टाइम नौकरी हासिल करना और नए माहौल में खुद को ढालना आसान नहीं होता। इन सबके लिए समय, धैर्य और लगातार मेहनत करनी पड़ती है। उनका कहना है कि इन चुनौतियों पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती।

 

उन्होंने कहा, “अगर आप विदेश आते हैं, तो यहां अपने लिए एक बेहतर जिंदगी बना सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको धैर्य, मेहनत और लगातार कोशिश करनी होगी। हर दिन खुद को यह भरोसा दिलाना होगा कि आप कड़ी मेहनत करेंगे और अपने लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे।” उन्होंने ये भी कहा कि, विदेश की जिंदगी सिर्फ घूमने-फिरने और छुट्टियां मनाने तक सीमित नहीं होती। उन्होंने कहा, “अच्छे पल भी आते हैं, लेकिन उनसे पहले आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है।”

सोशल मीडिया पर लोगों ने दिया रिएक्शन

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली लेकिन पॉजिटिव रिएक्शन मिले हैं। कई यूजर्स ने कहा कि यह वीडियो विदेश में रहने की सिर्फ सफलता की कहानियां नहीं, बल्कि वहां की असली चुनौतियों को भी सामने रखता है। एक यूजर ने लिखा, “बहुत शानदार बात कही दोस्त।” वहीं दूसरे ने कहा, “अक्सर लोग सिर्फ एक ही पहलू बताते हैं कि विदेश जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिए। लेकिन इस वीडियो ने पूरी तस्वीर दिखाने की कोशिश की है।”

एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “मेहनत किए बिना कहीं भी सफलता नहीं मिलती। अगर कम्फर्ट जोन में रहकर ही सब कुछ पाना है, तो फिर विदेश जाने का सोचने का क्या मतलब?” कई अन्य लोगों ने भी माना कि विदेश में बेहतर अवसर जरूर मिल सकते हैं, लेकिन वहां सफल होने के लिए धैर्य और लगातार मेहनत सबसे ज़्यादा जरूरी होती है।

जंतर-मंतर वाले वायरल अभिनव बिष्ट के इस वीडियो पर छिड़ी बहस, लोग पूछने लगे ये सवाल

जंतर-मंतर वाले वायरल अभिनव बिष्ट के इस वीडियो पर छिड़ी बहस, लोग पूछने लगे ये सवाल

Jantar Mantar Boy Abhinav Bisht: NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के प्रदर्शन ने कई नए चेहरों को रातों-रात इंटरनेट स्टार बना दिया। इन्हीं में से एक नाम है अभिनव बिष्ट, जो वहां से पल-पल की लाइव अपडेट दे रहे थे। वहीं अब रातों-रात इंटरनेट सनसनी बने अभिनव बिष्ट को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।

वायरल हुआ था ये वीडियो 

अभिनव ने टिकटॉक स्टाइल में वीडियोज बनाए, जो युवाओं को बेहद पसंद आए। RAF के जवानों के पीछे खड़े होकर दोस्तों के साथ बनाई गई उनकी एक रील ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस वीडियो को 16 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया, जिस पर 65 लाख लाइक्स और 1.34 लाख से अधिक कमेंट्स आए। इन वीडियो की वजह से उन्हें लाखों व्यूज़ मिले और उनके फॉलोअर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ गई।

8 लाख हुए फॉलोअर्स 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर कई यूजर्स का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान अभिनव बिष्ट के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स करीब 5,000 से बढ़कर 8 लाख से ज्यादा हो गए। उनकी कई छोटी वीडियो (रील्स) युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गईं। इसी बीच उनका एक और वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह अपना कंटेंट वायरल होने के बाद नया मोबाइल फोन खरीदते नजर आए। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में आंदोलन से ज्यादा फायदा कुछ कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को मिला।

अब सोशल मीडिया पर छिड़ी ये बहस

यह मामला तब और चर्चा में आ गया, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर यूज़र सुनैना होली ने आरोप लगाया कि कई कंटेंट क्रिएटर्स प्रदर्शन में मुद्दे का समर्थन करने के बजाय सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि ज्यादातर लोगों ने CJP प्रदर्शन में लाइक्स, व्यूज़, शेयर और फॉलोअर्स बढ़ाने के मकसद से हिस्सा लिया। उनका दावा था कि इससे छात्रों की लड़ाई से ज्यादा कुछ लोगों का निजी फायदा हुआ। सुनैना होली ने खास तौर पर अभिनव बिष्ट का नाम लेते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स 8 लाख से ज्यादा हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रील्स को लाखों व्यूज मिले और इससे उन्हें आर्थिक फायदा भी हुआ। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभिनव बिष्ट का पढ़ाई या शिक्षा के मुद्दों से कोई सीधा संबंध नहीं है और वह मुख्य रूप से सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का काम करते हैं।

 

NEET protest case: NEET प्रोटेस्ट मामले में नया मोड़! रूस में होने के बावजूद बिहार के युवक पर FIR दर्ज, यूजर्स ने उठाए सवाल

NEET protest case: बिहार के किशनगंज जिले के एक युवक ने दावा किया है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में राज्य पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज की है। जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। किशनगंज निवासी मोहम्मद सदाकत ने रूस से बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो वायरल हो गया है। हालांकि, पीटीआई द्वारा संपर्क किए जाने पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) हरि मोहन शुक्ला ने न तो इस दावे की पुष्टि की और न ही खंडन किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।

कथित वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने अपने खिलाफ दर्ज मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह बहादुरगंज में पिछले सप्ताह नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान मौजूद नहीं था, क्योंकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। उसने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और FIR से नाम हटाने की मांग की।

क्या बोली बिहार पुलिस?

एसपी शुक्ला ने सदाकत के कथित वीडियो के बारे में विशेष रूप से पूछे जाने पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “प्रदर्शनों से संबंधित जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे उसके निवारण के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।” बता दें कि बिहार सरकार ने सोमवार को घोषणा की थी कि वह नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज सभी मामलों को वापस लेगी और विभिन्न आरोपों में जेल भेजे गए लोगों को रिहा करेगी।

राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया था कि 26 जुलाई को सुबह छह बजे से पहले हुई घटनाओं के संबंध में दर्ज सभी FIR, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा था कि इस संबंध में गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाएगा। पिछले सप्ताह नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आयोजित बिहार बंद के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें लगभग आधे नाबालिग थे।

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युवक ने की जांच की मांग

वायरल वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चूंकि वह चार महीने से रूस में रह रहे हैं, इसलिए उन्हें नीट प्रदर्शन में शामिल बताना गलत है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि जांच के बाद यदि उनका दावा सही पाया जाए तो उनका नाम FIR से हटाया जाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद इस मामले को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

‘खराब प्रदर्शन’ कहकर निकाला, अब कंपनी को देना पड़ा ₹19 लाख का हर्जाना

सिंगापुर में नौकरी से जुड़े एक मामले ने कंपनियों की प्रोबेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला कर्मचारी को खराब प्रदर्शन का आरोप लगाकर नौकरी से हटा दिया गया था, लेकिन बाद में Employment Claims Tribunal ने कंपनी के फैसले को अनुचित माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर कर्मचारी को प्रदर्शन के मानकों की सही जानकारी नहीं दी गई थी, तो उसे उन्हीं आधारों पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

इस फैसले के बाद महिला को S$30,000 (करीब ₹19 लाख) का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। यह मामला अब कंपनियों के लिए भी एक सीख बन गया है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन स्पष्ट नियमों और सही प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

6 महीने के प्रोबेशन के बाद लिया गया था फैसला

महिला ने अप्रैल 2025 में कंपनी जॉइन की थी और उसे छह महीने के प्रोबेशन पर रखा गया था। प्रोबेशन खत्म होने से पहले कंपनी ने उसे बताया कि उसका रोजगार आगे जारी नहीं रखा जाएगा, क्योंकि उसका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं था। हालांकि, महिला ने इस फैसले को चुनौती दी और दावा किया कि उसे कभी भी उसके काम को लेकर कोई मौखिक या लिखित चेतावनी नहीं दी गई थी।

महिला ने उठाए कई सवाल

कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में कहा कि कंपनी ने जिन प्रदर्शन मानकों के आधार पर उसे अयोग्य बताया, उनके बारे में उसे कभी स्पष्ट जानकारी ही नहीं दी गई थी।

उसने यह भी आरोप लगाया कि एक प्रोजेक्ट में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाने के कारण उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। इसके अलावा, उसने भाषा को लेकर भेदभाव का भी आरोप लगाया और कहा कि कोरियन भाषा न जानने की वजह से उसे निशाना बनाया गया।

कोर्ट ने कहा- बताए बिना नहीं थोप सकते प्रदर्शन के नियम

ट्रिब्यूनल के मजिस्ट्रेट जोएल टैन ने कहा कि किसी कर्मचारी को ऐसे मानकों पर नहीं परखा जा सकता, जिनके बारे में उसे पहले बताया ही न गया हो। उन्होंने कहा कि अगर कंपनी ने अपने प्रदर्शन मानकों को स्पष्ट नहीं किया है, तो बाद में उन्हीं नियमों को आधार बनाकर कर्मचारी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

कंपनी की प्रोबेशन प्रक्रिया में मिली कमी

मजिस्ट्रेट ने माना कि कर्मचारी के काम में सुधार की गुंजाइश हो सकती थी, लेकिन कंपनी ने यह साबित नहीं किया कि उसे किन स्पष्ट मानकों पर आंका गया था। उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर लापरवाही या बड़ी गलती का नहीं था, बल्कि अस्पष्ट अपेक्षाओं के आधार पर कर्मचारी का मूल्यांकन किया गया।

भेदभाव और व्हिसलब्लोअर के आरोप हुए खारिज

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने महिला के उन आरोपों को सही नहीं माना, जिनमें उसने कहा था कि भाषा की वजह से उसके साथ भेदभाव हुआ और व्हिसलब्लोअर बनने के कारण कंपनी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की।

कंपनियों के लिए बड़ा सबक

इस फैसले से कंपनियों को संदेश मिला है कि कर्मचारियों को नौकरी से हटाने से पहले प्रदर्शन के नियम, अपेक्षाएं और सुधार के मौके स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है। ट्रिब्यूनल ने महिला को तीन महीने की सैलरी के बराबर S$34,500 का दावा योग्य माना, लेकिन कानूनी सीमा के कारण अधिकतम S$30,000 का मुआवजा दिया गया।

एक लोकेशन ने खड़ा कर दिया विवाद! गुरुग्राम में Rapido राइड का वीडियो वायरल

एक लोकेशन ने खड़ा कर दिया विवाद! गुरुग्राम में Rapido राइड का वीडियो वायरल

गुरुग्राम में Rapido राइड के बाद यात्री और बाइक राइडर के बीच हुआ विवाद अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वायरल वीडियो में महिला यात्री और राइडर के बीच ड्रॉप लोकेशन को लेकर बहस होती दिखाई दे रही है। महिला का आरोप है कि उसे तय जगह पर नहीं छोड़ा गया, जबकि राइडर का कहना है कि उसने ऐप में दिख रही लोकेशन के अनुसार ही ट्रिप पूरी की। इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं में सही लोकेशन पिन, यात्री की सुविधा और राइडर की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी इस मामले पर अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं और यह बहस तेज हो गई है कि ऐसी स्थिति में गलती आखिर किसकी मानी जाए।

ड्रॉप पॉइंट को लेकर शुरू हुआ विवाद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला यात्री राइडर पर आरोप लगाती है कि उसे गलत जगह उतारा गया। महिला का कहना था कि उसकी असली मंजिल परिसर के अंदर थी, लेकिन राइडर उसे बेसमेंट के रास्ते ले जाकर किसी दूसरी जगह छोड़ गया। गुस्से में महिला ने सवाल किया कि जब उसे सही जगह जाना था तो राइडर वहां तक क्यों नहीं पहुंचा।

राइडर ने दी अपनी सफाई

वहीं Rapido राइडर ने अपनी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा कि उसने वही किया जो ऐप में लोकेशन दिखाई गई थी। उसका कहना था कि उसने स्क्रीन पर दिख रहे डेस्टिनेशन के हिसाब से ही यात्री को वहां छोड़ा। राइडर ने सफाई देते हुए कहा कि वह ऐप की बताई हुई लोकेशन को फॉलो कर रहा था और उसी के आधार पर ट्रिप पूरी की।

वीडियो बनाने वाला शख्स भी बहस में कूदा

इस दौरान एक अन्य व्यक्ति वीडियो रिकॉर्ड करता हुआ नजर आया, जिसने बीच में आकर महिला से किराया देने के लिए कहा। उसकी बार-बार दखलअंदाजी से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। महिला ने उसे बीच में बोलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन बहस लगातार बढ़ती चली गई।

आखिर में महिला ने किया पेमेंट

काफी देर तक चली बहस के बाद महिला ने अपना फोन निकाला और Rapido राइडर के QR कोड को स्कैन कर किराया चुका दिया। हालांकि, पेमेंट करने के बाद भी उसने राइडर और वीडियो बना रहे व्यक्ति से अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद महिला वहां से चली गई, लेकिन यह मामला सोशल मीडिया पर ऐप की लोकेशन और राइडर की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ गया है।

सोशल मीडिया पर लोग दे रहे अलग-अलग राय

वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोग राइडर के पक्ष में नजर आए और बोले कि अगर ऐप में गलत लोकेशन पिन थी तो पूरी जिम्मेदारी राइडर की नहीं हो सकती। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि राइडर को यात्री से पुष्टि करके ही अंतिम ड्रॉप करना चाहिए था।

भारतीय रेलवे के कुछ डिब्बे नीले और कुछ लाल क्यों होते हैं? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

फील्डर ने उंगलियां चटकाकर मैच में किया चीटिंग! अंपायर ने दिया आउट, क्रिकेट का ये वीडियो कर देगा हैरान

इंग्लैंड के क्लब क्रिकेट में एक मैच के दौरान कथित तौर पर हैरान करने वाली घटना देखने को मिली है। एक फील्डर पर डोमेस्टिक मैच के दौरान उगंलिया चटकाकर चीटिंग करने का आरोप लगा है। फील्डर पर आरोप है कि जब गेंद बैट के पास से गुजरी तब फील्डर ने उंगलियां चटकाई। जिससे अंपायर को लगे की गेंद बल्ले से लगी है। इस घटना के सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में इसकी काफी चर्चा हो रही है। ये घटना नॉर्थ यॉर्कशायर और साउथ डरहम लीग में साल्टबर्न क्रिकेट क्लब की सेकंड-XI और मिडिल्सब्रो क्रिकेट क्लब की सेकंड-XI के बीच हुए मैच के दौरान हुई।

इस विवाद के सामने आने के बाद लीग प्रशासन ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पूरी प्रक्रिया पूरी होने तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी।

वायरल हो रहा वीडियो

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि, गेंद बल्लेबाज नोमान शब्बीर के बल्ले के बेहद करीब से निकलती है। इसी दौरान स्लिप में खड़ा साल्टबर्न का एक फील्डर उंगलियां चटकाता है, जिससे ऐसा लगता है कि गेंद बल्ले का किनारा लेकर गई है। इसके तुरंत बाद विकेटकीपर जोश बोवेस गेंद को कैच कर लेते हैं। इसके बाद साल्टबर्न की टीम के अपील करती है और अंपायर बल्लेबाज को आउट दे देते हैं। इस मुकाबले को साल्टबर्न ने 159 रन से जीता है।

जमकर हो रही आलोचना

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद क्रिकेट प्रेमियों ने इसकी जमकर आलोचना की। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि उंगलियां चटकने की आवाज से अंपायर भ्रमित हो गए और उन्होंने बल्लेबाज को आउट दे दिया। यूजर्स ने कहा कि गेंद बल्ले से नहीं लगी थी, लेकिन आवाज के कारण गलत फैसला हो गया, जिसके चलते बल्लेबाज को पवेलियन लौटना पड़ा। कई यूजर्स ने इसे क्लब क्रिकेट में खेल भावना के खिलाफ बताया और इसे अब तक की सबसे विवादित घटनाओं में से एक करार दिया।

जब देश में गर्म है छात्रों की पिटाई का मामला तब बिहार की इस महिला अफसर की क्यों हो रही तारीफ? जानिए कौन हैं IPS शैलजा दास

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में पटना में छात्रों ने बिहार बंद बुलाया था। इसकी वजह से शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे। इसी दौरान पटना पूर्वी की सिटी एसपी और 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी शैलजा दास का एक बयान चर्चा में है।

आईपीएस अधिकारी का बयान हो रहा वायरल

आईपीएस अधिकारी शैलजा ने कहा कि, “नागरिकों को अपनी बात रखने और अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। वे जो कहना चाहते हैं, कह सकते हैं। जब तक वह हम पर बल प्रयोग नहीं करेंगे, तब तक हम भी उनके खिलाफ बल प्रयोग नहीं करेंगे।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वारयल हो रहा है। लोग आईपीएस अधिकारी शैलजा की काफी तारीफ भी कर रहे हैं। आइए जानते हैं कौन है आईपीएस अधिकारी शैलजा दास

कौन है आईपीएस शैलजा दास

आईपीएस शैलजा दास बिहार कैडर की 2022 बैच की अधिकारी हैं और फिलहाल पटना पूर्वी में सिटी एसपी के पद पर तैनात हैं। आईपीएस शैलजा दास को एक संवेदनशील और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता है। सिविल सेवा परीक्षा 2021 में उन्होंने 83वीं रैंक हासिल की थी, जिसमें इतिहास उनका वैकल्पिक विषय था। पटना में तैनाती से पहले वह नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में एसडीपीओ के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। पटना में हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने धैर्य के साथ स्थिति को संभालने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर माहौल शांत रखने का प्रयास किया।

सेंट स्टीफंस कॉलेज से की है पढ़ाई

शैलजा दास की शुरुआती शिक्षा अपने गृह नगर में हुई। उन्होंने वर्ष 2013 में बुद्धा पब्लिक स्कूल से दसवीं और बाद में दिल्ली पब्लिक स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने 2021 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय 83वीं रैंक हासिल की और आईपीएस बनीं।