गाली पर इतना बवाल क्यों? भाषा बिगड़ रही है, या समाज का असली चेहरा सामने आ रहा है?

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इन दिनों गालियां फिर राष्ट्रीय बहस का विषय हैं। कभी किसी स्टैंड-अप कॉमेडियन के कारण, कभी किसी ओटीटी सीरीज़ के कारण, कभी किसी यूट्यूबर की भाषा को लेकर, तो कभी किसी छात्र आंदोलन में इस्तेमाल हुए जार्गन पर।

ऐसा लगता है मानो देश के सामने सबसे बड़ा संकट बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य या अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि शब्दों का हो। लेकिन असली सवाल यह है—क्या गालियां अचानक पैदा हुई हैं, या पहली बार माइक्रोफोन पर सुनाई देने लगी हैं?

गाली का इतिहास, इंटरनेट से कहीं पुराना है
यदि कोई यह मानता है कि गालियां इंटरनेट, ओटीटी, जेन-जी या सोशल मीडिया की देन हैं, तो उसे एक बार बनारस के अस्सी घाट की शामें, उत्तर भारत के गांवों की चौपालें, पुलिस थानों की भाषा, ट्रक चालकों की बातचीत और शादी-ब्याह में गाए जाने वाले पारंपरिक 'गारी गीत' याद कर लेने चाहिए।

भारतीय लोकसंस्कृति में गालियों का इतिहास लगभग उतना ही पुराना है, जितना लोकगीतों का। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले वे चौपालों, घाटों और आंगनों में गूंजती थीं, आज एल्गोरिदम उन्हें ट्रेंड करा देता है।

काशीनाथ सिंह ने अपने चर्चित उपन्यास 'काशी का अस्सी' में बनारस की उस भाषा को दर्ज किया है, जिसमें गाली हमेशा अपमान नहीं होती। वह आत्मीयता भी है, ठहाका भी, अपनापन भी और सत्ता से बेखौफ होकर बात करने का अंदाज़ भी। बनारस में कई बार गाली रिश्ते की दूरी नहीं, बल्कि निकटता का प्रमाण होती है।

उत्तर भारत के अनेक विवाहों में आज भी 'गारी' एक रस्म है। दूल्हे और उसके परिवार को गाकर सुनाई जाने वाली ये गालियां अपमान के लिए नहीं, बल्कि सदियों पुराने सामाजिक संकोच को तोड़ने, रिश्तों में सहजता लाने और औपचारिकता की दीवार गिराने के लिए होती हैं।

यानी भारतीय समाज ने गाली को केवल आक्रोश की भाषा नहीं बनाया; कई बार उसे हास्य, अपनत्व और लोकसंस्कृति का भी हिस्सा बनाया है।
दिलचस्प यह है कि यही समाज कबीर का भी है—

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥”

यानी हमारी संस्कृति में मधुर वाणी भी है और ठेठ गाली भी। दोनों सदियों से साथ-साथ चली हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले गालियां मोहल्ले तक सीमित थीं, अब राष्ट्रीय बहस का विषय हैं।

असली समस्या गाली नहीं, हमारा पाखंड है
हिंदी भाषी समाज शायद दुनिया के सबसे दिलचस्प भाषाई विरोधाभासों में से एक है।
औपचारिक मंच पर हम शालीनता की प्रतिमूर्ति बन जाते हैं। “आदरणीय”, “माननीय”, “श्रद्धेय” जैसे शब्दों से वाक्य शुरू करते हैं। लेकिन सड़क पर, ट्रैफिक में, क्रिकेट मैच के दौरान, दोस्तों की महफिल में, पुलिस थानों में और कभी-कभी घरों के भीतर भी वही समाज ऐसी भाषा बोलता है, जिसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने में संकोच करता है।

यानी हमारी भाषा दो हिस्सों में बंट चुकी है—एक कैमरे के लिए, दूसरी कैमरे के पीछे।
रहीम ने बहुत पहले चेताया था—

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पाताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥”

लेकिन लगता है कि हमने इस दोहे को दीवार पर टांग दिया, व्यवहार में नहीं।
ओटीटी ने भाषा नहीं बिगाड़ी, उसने मेकअप उतार दिया
हर नई वेब सीरीज़ के बाद कहा जाता है कि ओटीटी समाज को बिगाड़ रहा है।
क्या सचमुच?
या उसने सिर्फ वही भाषा रिकॉर्ड कर ली, जिसे समाज वर्षों से ऑफ रिकॉर्ड बोलता आया है?
जिस समाज में पुलिस की डांट अक्सर गाली से शुरू होती हो, जहां चुनावी मंचों से लेकर विधानसभाओं और संसद तक कई बार असंसदीय शब्द रिकॉर्ड से हटाने पड़ते हों, वहां ओटीटी पर नैतिकता का पूरा बोझ डाल देना आसान रास्ता है।
आईना हमेशा दोषी नहीं होता। कई बार चेहरा भी देख लेना चाहिए।

गाली आखिर करती क्या है?

  • गाली केवल अश्लीलता नहीं है।
  • वह गुस्से का शॉर्टकट है।
  • हताशा का विस्फोट है।
  • व्यंग्य का हथियार है।
  • और कई बार प्रतिरोध की भाषा भी।

दार्शनिक लुडविग विट्गेंस्टाइन ने लिखा था— मेरी भाषा की सीमाएँ ही मेरी दुनिया की सीमाएँ हैं।”
यदि समाज की भाषा अधिक आक्रामक हो रही है, तो संभव है कि समाज के भीतर बेचैनी भी उतनी ही बढ़ रही हो।

कई बार बहुत सारे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और पारिवारिक दबावों से बोझिल व्यक्ति के लिए अपनी असहायता, गुस्सा और झुंझलाहट निकालने का सबसे आसान माध्यम एक गाली ही बन जाती है। बिना हिंसा किए, अपमान, निरादर, क्षोभ और प्रतिरोध की जितनी तीखी अभिव्यक्ति कुछ हिंदी गालियां कर देती हैं, उतनी कई बार लंबे भाषण भी नहीं कर पाते।
इसका अर्थ यह नहीं कि हर गाली जायज़ है। लेकिन हर गाली को केवल खराब संस्कार कह देना भी उतना ही अधूरा विश्लेषण है।

गाली और बराबरी का नया विमर्श
एक दिलचस्प बदलाव और आया है। सदियों तक अधिकांश गालियां स्त्रियों के शरीर और रिश्तों के माध्यम से पुरुष का अपमान करती रहीं। यानी भाषा भी पितृसत्ता का औज़ार बनी रही।
लेकिन आज वही गालियां महिलाएं भी बोल रही हैं।

  • क्या यह भाषा का पतन है?
  • या भाषाई बराबरी का दावा?

उत्तर आसान नहीं है।
महादेवी वर्मा ने लिखा था कि श्रृंखलाएँ केवल लोहे की नहीं होतीं, भाषा की भी होती हैं।” (भावार्थ) संभव है कि नई पीढ़ी उन्हीं भाषाई श्रृंखलाओं को तोड़ने की कोशिश कर रही हो। कुछ इसे पतन कहेंगे, कुछ इसे समानता का दावा। दोनों दृष्टियाँ विचारणीय हैं।

लेकिन सावधान…
यह लेख गालियों का समर्थन नहीं है। क्योंकि जिस दिन तर्क की जगह गाली ले लेगी, उस दिन लोकतंत्र कमजोर होगा। असहमति आवश्यक है। अपमान नहीं।
व्यंग्य लोकतंत्र को जीवित रखता है। लेकिन गाली यदि विचार का विकल्प बन जाए, तो वह संवाद नहीं, शोर पैदा करती है। यहीं सबसे बड़ी सावधानी की जरूरत है।
आज की भाषा में मीम हैं, रील हैं, तंज हैं, वायरल वीडियो हैं और गालियां भी। इनसे असहमत होना आपका अधिकार है।
लेकिन इनके अस्तित्व से इनकार करना शायद वास्तविकता से इनकार करना है। आखिरकार, सवाल यह नहीं कि समाज गालियां क्यों दे रहा है।

सवाल यह है कि समाज इतना गुस्से में क्यों है?
क्योंकि शब्द अपने आप पैदा नहीं होते, वे समय की कोख से जन्म लेते हैं। गालियाँ भाषा का सौंदर्य नहीं हैं,

लेकिन वे समाज की मनःस्थिति का एक्स-रे अवश्य हैं।
इसलिए हर गाली की आलोचना कीजिए, लेकिन उसे जन्म देने वाली सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की भी पड़ताल कीजिए। क्योंकि भाषा कभी निर्वात में पैदा नहीं होती।
वह हमेशा समाज का आईना होती है। और आईना, चाहे कितना भी असुविधाजनक क्यों न लगे, झूठ नहीं बोलता।

रील बनाने जूते पहनकर ‘रथ’ पर चढ़ा मुस्लिम युवक, कोर्ट ने दी रोजाना मंदिर सफाई की सजा

Ulto rath yatra

Ulto Rath Yatra controversy: सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स हासिल करने का भूत किस तरह कानूनी मुसीबत बन सकता है, इसका ताजा उदाहरण पूर्व बर्धमान जिले के कालना से सामने आया है। 'उल्टो रथ यात्रा' के दो दिन बाद, एक मुस्लिम युवक द्वारा जूते पहनकर रथ पर चढ़कर रील (Reel) बनाने और उसे फेसबुक पर अपलोड करने के मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक और सुधारात्मक रुख अपनाया है।

 

धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपी युवक को अदालत ने जमानत तो दे दी, लेकिन इसके साथ ही एक ऐसी शर्त रखी है जो समाज में मिसाल और चर्चा का विषय बन गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना पूर्व बर्धमान जिले के समुद्रगढ़ निवासी बाबूलाल शेख से जुड़ी है। 'उल्टो रथ यात्रा' के समापन के बाद कालना क्षेत्र में खड़े एक धार्मिक रथ की सीढ़ियों पर आरोपी जूते पहनकर चढ़ गया और वहां डांस करते हुए वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय श्रद्धालुओं और निवासियों में भारी रोष फैल गया। 

  • धार्मिक समिति की शिकायत : 'पश्चिम नसरतपुर हरेकृष्ण नामहट्ट संघ' के सचिव जितेन मोंडल के नेतृत्व में समिति ने नदानघाट पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  • पुलिस कार्रवाई : एफआईआर के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबूलाल शेख को गिरफ्तार कर लिया।
  • लागू कानूनी धाराएं : आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य/दुश्मनी फैलाने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित गंभीर प्रावधानों में मामला दर्ज किया गया।

कोर्ट का फैसला : सख्त कानूनी धाराओं के बीच सुधारात्मक न्याय

आरोपी बाबूलाल शेख को कालना के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, पश्चाताप व्यक्त करने (कान पकड़कर माफी मांगने) और जांच में सहयोग करने की दलीलें दी गईं। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।

कोर्ट द्वारा तय की गई मुख्य शर्तें

  • मंदिर एवं सड़क की रोजाना सफाई : जांच पूरी होने तक आरोपी को रोजाना मंदिर परिसर और उससे सटी मुख्य सड़क की सफाई करनी होगी।
  • रथ की सीढ़ियों की धुलाई : रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी को पुलिस बल की मौजूदगी में रथ की सीढ़ियों को पानी से धोकर साफ करने का आदेश दिया गया।
  • जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी : आरोपी को हफ्ते में कम से कम एक बार जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा और विवेचना में पूर्ण सहयोग करना होगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय दंड प्रक्रिया (और अब BNS प्रक्रिया) में ऐसे कई अवसर आए हैं जहां अदालतों ने केवल जेल भेजने के बजाय 'सुधारात्मक न्याय' (Restorative Justice) का मॉडल अपनाया है। कोर्ट के इस फैसले से समाज में यह संदेश जाता है कि कानून का उद्देश्य केवल सजा देना ही नहीं, बल्कि गलती का अहसास कराना और सामाजिक समरसता को दोबारा कायम करना भी है।

रील संस्कृति पर सबक

सोशल मीडिया के लिए धार्मिक स्थलों की पवित्रता या सांस्कृतिक प्रतीकों का अनादर करने वालों के लिए यह एक सख्त चेतावनी है। सोशल मीडिया की क्षणिक प्रसिद्धि के लिए कानून और धार्मिक आस्था से खिलवाड़ भारी पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट के इस विवेकपूर्ण फैसले ने जहां एक तरफ सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पश्चाताप कर रहे युवक को समाज में सुधार का अवसर भी प्रदान किया है।

CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा आयोजित छात्रों के विरोध प्रदर्शन भले ही केंद्रीय राजनीति में बड़े बदलावों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ चर्चा में आए हों, लेकिन इसका जमीनी और सबसे व्यापक असर अब पूरे भारत के सरकारी स्कूलों में महसूस किया जा रहा है। इनमें सबसे उल्लेखनीय और सकारात्मक दृश्य यह है कि अब स्कूली बच्चे खुद अपने बुनियादी अधिकारों के लिए निडर होकर खड़े हो रहे हैं और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो दिखाती हैं कि कैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। वे पंखे, बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं और कक्षाओं में भारी शिक्षकों की कमी के खिलाफ मुखर होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

1. राजस्थान: शिक्षकों की भारी कमी पर छात्रों का फूटा गुस्सा
राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा गाँव से एक ऐसा ही बड़ा विरोध प्रदर्शन सामने आया है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

धरना और प्रशासनिक कार्रवाई: छात्रों ने कई घंटों तक स्कूल के बाहर धरना दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। अधिकारियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर शांत कराया और तुरंत चार नए शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश जारी किया। साथ ही, अगले 10 दिनों के भीतर बाकी बची तीन रिक्तियों को भी भरने का लिखित आश्वासन दिया।

छात्रों के मन की बात: एक छात्र ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा: “शिक्षा विभाग और सरकार से हमारी माँग है कि वे हमारी बात सुनें। यहाँ एक भी द्वितीय श्रेणी का शिक्षक नहीं है और प्रथम श्रेणी के भी केवल एक ही शिक्षक हैं—एक इतिहास के और दूसरे हिंदी के। इतिहास के शिक्षक के पास प्रधानाचार्य का भी प्रभार है, जिससे प्रशासनिक काम के बोझ के कारण पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। हमारी माँग है कि कक्षा 1 से 3 और एल1 व एल2 के लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो हम स्कूल पर ताला लगा देंगे।”

2. बिहार (गया): पंखे, हैंडपंप और टूटी बेंचों के खिलाफ मोर्चा
बिहार के गया जिले में एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने पंखे, हैंडपंप और बैठने के लिए बेंच न होने के कारण भारी धरना-प्रदर्शन किया।

जिलाधिकारी (डीएम) को आना पड़ा मैदान में: शुरुआत में जिला प्रशासन ने छात्रों को शांत करने के लिए एक कनिष्ठ अधिकारी को भेजा, लेकिन छात्रों ने विरोध खत्म करने से साफ इनकार कर दिया और सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से मिलने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों के इस कड़े रुख के बाद अंततः डीएम को खुद स्कूल पहुंचकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं।
 
3. महाराष्ट्र (डहानू): अस्वच्छ शौचालय और बदहाल बुनियादी ढांचा
महाराष्ट्र के डहानू में छात्रों ने अपने स्कूलों में अस्वच्छ शौचालयों, असुरक्षित माहौल और बुनियादी ढांचे की कमी के खिलाफ बहादुरी से आवाज उठाई।

छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी केवल सरकारी निरीक्षणों के दौरान ही उपलब्ध कराई जाती है, बाकी दिनों में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

4. उत्तर प्रदेश (फतेहपुर): सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों का प्रदर्शन
अभी कुछ ही दिन पहले, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर स्कूल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दबाव के चलते अंततः स्कूल प्रशासन को लिखित आश्वासन देना पड़ा कि छात्रों की सभी मांगें जल्द पूरी की जाएंगी।

बुनियादी समानता और शिक्षा का अधिकार: एक बड़ा सवाल
इन चारों राज्यों में छात्रों की माँगें काफी हद तक एक जैसी और बेहद बुनियादी हैं: सुचारू कक्षाएँ, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित माहौल, पर्याप्त शिक्षक और पीने योग्य शुद्ध पानी।

इन विरोध प्रदर्शनों ने एक पुरानी और गंभीर विषमता को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है: आसानी से मिलने वाली ये बुनियादी सुविधाएं जो शिक्षा का न्यूनतम स्तर होनी चाहिए, उनके लिए आज भी सरकारी स्कूलों के बच्चों को सड़कों पर उतरने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? बदलाव की यह बयार यह साबित करती है कि अब देश का युवा और छात्र अपनी शिक्षा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो रहा है।

फ्रिज पर मैग्नेट लगाने से पहले जान लें यह जरूरी बात, ये मैग्नेट कहीं ‘बिजली चोर’ तो नहीं!

आपने सुना है कि फ्रिज पर मैग्नेट लगाने से बिजली का बिल बढ़ जाता है। आजकल सोशल मीडिया पर यह मिथ काफी वायरल है, लेकिन यह सच है या सिर्फ एक अफवाह। इस दावे को लेकर एक्सपर्ट्स ने क्या कहा है और इसके पीछे की सच्चाई क्या है, यही जानना सबसे जरूरी है:

Fridge Magnet Myth (फ्रिज मैग्नेट का सच)

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फ्रिज पर मैग्नेट लगाने से बिजली का बिल नहीं बढ़ता। कोई भी फ्रिज मैग्नेट इतने पावरफुल नहीं होते कि वे फ्रिज के काम करने के तरीके या उसकी बिजली की खपत को बढ़ा सकें।

Heavy Magnets (भारी मैग्नेट से रखें दूरी)

How to Choose Standard Refrigerator Size for Your Home - Spinchill

अगर फ्रिज पर बहुत ज्यादा या भारी मैग्नेट लगा दिए जाएं, तो समय के साथ दरवाजे के कब्जों (हिंज) पर जयदा दबाव पड़ सकता है। इससे फ्रिज की फिटिंग और उम्र पर असर पड़ सकता है।

Cooling Performance (कूलिंग पर पड़ता है असर)

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एक्सपर्ट्स के अनुसार, फ्रिज के बाहर लगे मैग्नेट अंदर की कूलिंग, सेंसर या खाने की क्वालिटी पर कोई असर नहीं डालते। इसलिए इस बात को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

Save Electricity (बिजली बचाने का सही तरीका)

This may contain: an open refrigerator in a kitchen with food on the counter and door to the other side

अगर बिजली का बिल कम करना चाहते हैं, तो फ्रिज का दरवाजा बार-बार खुला न छोड़ें, रबर सील की जांच करते रहें, सही टेम्परेचर सेट करें और फ्रिज की रेगुलर सफाई करें। यही तरीके सच में बिजली बचाने में मदद करते हैं।

Expert Advice (क्या करें)

Best Fridge Magnets for Heavy Items: A Complete Guide - Fridge Magnets

फ्रिज पर कुछ हल्के मैग्नेट लगाना बिल्कुल सही है। बस बहुत ज्यादा भारी मैग्नेट या बिना कारण वजन दरवाजे पर न रखें, ताकि फ्रिज लंबे समय तक अच्छी तरह काम करता रहे।

PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

FIR on Meta chief on morfed video against PM Modi

छात्र प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ किए गए) कंटेंट और आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए जाने के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में Meta India के प्रमुख, कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ALSO READ: पुजारी बनकर संसद पहुंचे पप्पू यादव, राहुल गांधी ने दानपात्र में डाले पैसे; 'चढ़ावा चोरी' पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI से मॉर्फ्ड वीडियो बनाने के मामले में हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ एक केस दर्ज किया है। पीएम मोदी ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान वीडियो शेयर किया था, जिसको बाद में कुछ लोगों ने AI की मदद से एडिट किया है और गलत जानकारी सर्कुलेट की।

 

पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित मॉर्फ्ड सामग्री किसने तैयार की, किसने उसे प्रसारित किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके प्रसार को रोकने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। ALSO READ: 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

 

क्या है पूरा मामला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, NEET प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी कथित रूप से मॉर्फ्ड तस्वीरें, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तेजी से वायरल हुई थी। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि विवादित कंटेंट के प्रसार में किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका रही और क्या किसी प्लेटफॉर्म ने कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने में लापरवाही बरती।

 

किन पहलुओं की होगी जांच?

 

साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार जांच में कई बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—

  • कथित मॉर्फ्ड कंटेंट का मूल स्रोत कौन था।
  • कंटेंट किस नेटवर्क के माध्यम से वायरल हुआ।
  • संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका क्या रही।
  • लागू कानूनों और आईटी नियमों का पालन हुआ या नहीं।
  • डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई।

 

पुलिस का क्या कहना है?

साइबर क्राइम विभाग का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी, भ्रामक या मॉर्फ्ड सामग्री का प्रसार कानून के दायरे में आता है और ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट या संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

 

मॉर्फ्ड वीडियो क्या होते हैं? 

मॉर्फ्ड वीडियो, असल में ऐसे वीडियो होते हैं जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या हाव-भाव डिजिटल तकनीक, AI या वीडियो या एडिटिंग सॉफ्टवेयर के जरिए बदले जाते हैं। इन वीडियो का मकसद होता है कि लोगों को ऐसा लगे कि वह व्यक्ति कुछ ऐसा कह या कर रहा है, जो असल में उसने कहा ही नहीं था।

Spain Migrant Crisis : सीमा तोड़कर स्पेन में घुसे हजारों प्रवासी, नौ की मौत…बुलाई गई सेना मचा हड़कं

मोरक्को और स्पेन के बॉर्डर पर एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। गुरुवार को हजारों प्रवासी बॉर्डर पार करके स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी इलाके ‘स्यूटा’ में दाखिल हुए। वहीं मोरक्को से हजारों प्रवासियों के स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी शहर स्यूटा में पहुंचने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। स्थिति को देखते हुए स्पेन सरकार ने वहां सेना तैनात करने का फैसला किया है। अधिकारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में यह सबसे बड़ा सीमा संकट है। बड़ी संख्या में लोगों के सीमा पार करने के दौरान कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई। सरकार ने कहा है कि सशस्त्र बल स्यूटा में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल गार्ड की मदद करेंगे।

हालात का जायजा लेने के लिए स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ और गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का शुक्रवार को स्यूटा पहुंचे। यह नया सीमा संकट गुरुवार को शुरू हुआ, जब हजारों प्रवासी तैरकर, हवा भरे फ्लोट या अन्य तैरने वाले साधनों की मदद से और सीमा पर लगी बाड़ पार करके स्यूटा में दाखिल हो गए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो

स्यूटा में बड़ी संख्या में लोगों के घुसने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में कई प्रवासी स्पेनिश इलाके में पहुंचने के बाद जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। इससे साफ है कि बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोग सीमा पार कर गए। अधिकारियों का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी भीड़ आने से सुरक्षा बलों पर भारी दबाव पड़ गया। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, स्यूटा में सिविल गार्ड अधिकारियों के संगठन के प्रमुख रचिद स्बिही ने कहा कि हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गए हैं और सीमा सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है।

स्पेन सरकार ने अभी तक सीमा पार करने वाले लोगों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है। हालांकि, सरकारी प्रसारक TVE के अनुमान के मुताबिक, कुछ ही घंटों में करीब 2,000 से 3,000 प्रवासी स्यूटा में दाखिल हो गए। स्यूटा के प्रमुख जुआन जीसस विवास ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से समुद्र के रास्ते हर दिन करीब 300 प्रवासी शहर पहुंच रहे थे। इसकी वजह से शरण केंद्र पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक लोगों का भार झेल रहे थे और गुरुवार की घटना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

स्यूटा ने मांगी सेना की मदद

स्यूटा के प्रमुख जुआन जीसस विवास ने स्पेन सरकार से राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने और सेना तैनात करने की मांग की। उनका कहना है कि यह स्वायत्त शहर अपने दम पर इतने बड़े सीमा संकट से नहीं निपट सकता। बाद में स्पेन सरकार ने बताया कि मोरक्को के साथ एक समझौता हुआ है, जिसके तहत अवैध रूप से स्यूटा में दाखिल हुए प्रवासियों को वापस भेजा जाएगा। हालांकि, उन्हें कब तक वापस भेजा जाएगा, इसकी कोई समय-सीमा नहीं बताई गई है।

स्पेन के गृह मंत्रालय के अनुसार, मोरक्को के अधिकारी सीमा पार करने की कोशिश कर रहे लोगों को रोकने और हालात पर काबू पाने में सहयोग कर रहे हैं। वहीं, मैड्रिड स्थित मोरक्को के दूतावास ने इस घटना के लिए मानव तस्करी और प्रवासियों की तस्करी करने वाले आपराधिक गिरोहों को जिम्मेदार ठहराया है। दूतावास ने साफ कहा कि मोरक्को की सरकार या उसके अधिकारियों ने इन गतिविधियों को किसी भी तरह का समर्थन या बढ़ावा नहीं दिया है।

Meta इंडिया हेड के खिलाफ केस दर्ज, PM मोदी का AI से मॉर्फ्ड वीडियो बनाने से जुड़ा है मामला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने वाले कथित मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक वीडियो को लेकर हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ये वीडियो दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।

पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट चलाने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

मेटा इंडिया के प्रमुख भी आरोपी, पुलिस ने भेजा नोटिस

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मामलों में मेटा इंडिया के प्रमुख को भी सह-आरोपी बनाया गया है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के एक जांच अधिकारी ने बताया कि दर्ज मामलों और शिकायतकर्ताओं द्वारा साझा किए गए कथित आपत्तिजनक लिंक के संबंध में मेटा को नोटिस भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। इसके लिए सोशल मीडिया खातों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि आरोपियों का पता लगाकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान किया गया था आपत्तिजनक कमेंट

एक अन्य मामले में, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में नोएडा में एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना में गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई। शिकायत में नोएडा के सेक्टर-168 की रहने वाली रुचिका सिंह पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जीरो एफआईआर होने के कारण अब इस मामले को संबंधित पुलिस थाने को भेजकर आगे की जांच की जाएगी।

बीएनएस की कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला

एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता का आरोप है कि 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान आरोपी महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में कहा गया है कि इससे प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और सार्वजनिक शांति भंग होने तथा लोगों के बीच तनाव फैलने की आशंका पैदा हुई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, धारा 353(1) और धारा 356(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में जानबूझकर अपमान करना, सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान देना और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।

Vinnie Takair: कौन हैं विनी टकायर? डेनिश सिंगर के साथ लंदन के कैसीनो में आर्यन खान हुए स्पॉट

Vinnie Takair: शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की लंदन में हाल की एक आउटिंग सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। शाहरुख खान, गौरी खान, आर्यन, सुहाना खान और अबराम खान समेत पूरा खान परिवार कुछ समय से लंदन में छुट्टियां मना रहा है। सुहाना और गौरी के साथ शाहरुख खान के हाल ही में देखे जाने के बाद, अब आर्यन खान को देर रात बाहर घूमते हुए देखा गया।

पिछले साल नेटफ्लिक्स की पॉपुलर सीरीज ‘द बार्ड्स ऑफ बॉलीवुड’ से डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू करने वाले स्टार किड को एक मिस्टीरियस महिला के साथ देखा गया। लंदन के एक कसीनो से निकलते हुए दोनों के वीडियोज चर्चा का विषय बन गए हैं और लोग उनके डेटिंग की अफवाहों पर बातें कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियोज में आर्यन को उस मिस्टीरियस महिला के साथ देखा जा सकता है, जब वह एक फैन के साथ फोटो खिंचवाने के लिए रुके थे। इंटरनेट पर उस मिस्टीरियस महिला की पहचान करने में ज़्यादा समय नहीं लगा। वह डेनिश सिंगर Vinnie Takair हैं, जो आर्यन के साथ लंदन के एक कसीनो से निकल रही थीं। कसीनो के बाहर अपनी कार का इंतजार करते समय आर्यन और विनी दोनों ने एक जैसे काले कपड़े पहने हुए थे।

दिलचस्प बात यह है कि विनी इंस्टाग्राम पर अपनी लंदन यात्रा की तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। लेकिन उनमें से किसी में भी आर्यन नज़र नहीं आए। फिर भी, उनके ध्यान रखने वाले फ़ॉलोअर्स ने यह देख लिया कि वह और आर्यन इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फ़ॉलो करते हैं। इसके अलावा, ऐसा लगता है कि उनके कुछ कॉमन दोस्त भी हैं, जिससे लोगों को लगता है कि वे एक-दूसरे को कुछ समय से जानते हैं।

इससे पहले, ऐसी अफ़वाहें थीं कि आर्यन ब्राज़ीलियाई मॉडल और एक्ट्रेस लारिसा बोनेसी को डेट कर रहे हैं। लारिसा उनके लक्ज़री स्ट्रीटवियर ब्रांड ‘D’YAVOL X’ के प्रमोशन कैंपेन में भी नज़र आई थीं। उन्होंने मुंबई में आर्यन की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म के प्रीमियर में भी हिस्सा लिया था।

विनी टकैयर एक डेनिश म्यूज़िक आर्टिस्ट हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 11,000 फ़ॉलोअर्स हैं, जहां वह अपने म्यूज़िक और यात्राओं के बारे में अपडेट शेयर करती रहती हैं। अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल में उन्होंने कोपेनहेगन और मुंबई को अपने दो शहर बताया है। उन्होंने कई बार मुंबई में परफ़ॉर्म किया है और अपने गानों के म्यूज़िक वीडियो भी शेयर किए हैं, जैसे ‘शाइनिंग लाइट्स’, ‘मेबी आई लव यू’ और ‘ट्रो मिग’।

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ-साथ, आर्यन एक एंटरप्रेन्योर के तौर पर भी अपने काम को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि लंदन में अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के अलावा, यह युवा फ़िल्ममेकर अपने प्रीमियम ब्रांड ‘D’YAVOL Spirits’ को प्रमोट करने की तैयारी कर रहे हैं। यह एक प्रीमियम अल्कोहल ब्रांड है जिसे उन्होंने अपने पिता शाहरुख़ के साथ मिलकर बनाया है। इसे UK के मार्केट में लॉन्च किया जाएगा।

मलेशिया में पंजाबी लड़की पाकिस्तानी युवक साथ पकड़ी, थप्पड़ जड़े-VIDEO:मोगा के युवकों ने घेरा, रोड पर जोर-जोर से रोने लगी, बोली-मेरे परिवार को सब पता

मलेशिया के एक हाईवे पर पंजाबी युवती को बीच सड़क थप्पड़ मारे गए। दावा है कि मोगा की रहने वाली युवती को कुछ पंजाबी युवकों ने पाकिस्तानी युवक के साथ पकड़ा। इसके बाद बीच सड़क पर युवती से बहस हुई, उसे थप्पड़ मारे गए और पाकिस्तानी युवक के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। 30 जुलाई को शेयर किए वीडियो में युवकों ने खुद को मोगा का रहने वाला बताते हुए दावा किया कि युवती पाकिस्तान के युवक के साथ मलेशिया में रह रही है। उन्होंने इसे पंजाब की बदनामी बताते हुए युवती को डिपोर्ट कराने की मांग की। पंजाब की लड़कियां जब ऐसा करती हैं तो हमारी बेइज्जती होती है। वहीं, वीडियो में यह भी दावा किया गया कि कुछ निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन दावों और वीडियो की दैनिक भास्कर पुष्टि नहीं करता। युवती से बहस के PHOTOS… पढ़िए वीडियो में क्या दिख रहा… युवती बोली-परिवार को जानकारी, फोन नहीं लग पाया वीडियो में पाकिस्तानी युवक दावा करता है कि युवती के परिवार को उनके साथ रहने की जानकारी है और वह रोजाना उनसे बात करता है। इस पर मौजूद पंजाबी युवक उसे मौके पर ही युवती के माता-पिता से फोन मिलाने के लिए कहते हैं, लेकिन कॉल नहीं लग पाती। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो जाती है। डिपोर्ट कराने की मांग, निहंग जत्थेबंदियों का भी सपोर्ट बहस के दौरान कुछ युवक किसी ‘रूबी मैम’ को फोन कर युवती को डिपोर्ट कराने की मांग करते हैं। वीडियो में वे यह भी दावा करते हैं कि कई निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। इसी दौरान कुछ युवक पाकिस्तानियों के साथ युवती के रहने पर आपत्ति जताते हुए अपनी नाराजगी भी व्यक्त करते हैं। बहस के बाद धक्का-मुक्की वीडियो में आगे बहस बढ़ने पर पंजाबी युवक युवती से पाकिस्तानी युवक का साथ छोड़ने के लिए कहते हैं। इसी दौरान पाकिस्तानी युवक के साथ धक्का-मुक्की होती है। युवती बीच में आकर उसे बचाने की कोशिश करती दिखाई देती है। पैसों के विवाद का भी हुआ जिक्र बातचीत के दौरान कुछ युवक पाकिस्तानी युवक से कहते हैं कि उसका ‘हैप्पी’ नाम के व्यक्ति के साथ पैसों का विवाद है और उसे पहले वही मामला सुलझाना चाहिए। इस दौरान ‘रूबीना’ नाम की एक युवती का भी जिक्र होता है, जिसे वीडियो कॉल कर पूरी घटना बताने का दावा किया जाता है। युवती परिवार से बात नहीं करवा सकी वीडियो के अंत में युवती से उसके घर का पता और परिवार से बात कराने के लिए कहा जाता है। युवती कहती है कि उसके परिजनों को सब पता है, लेकिन वह मौके पर अपने माता-पिता से फोन पर बात नहीं करवा पाती।

एक और पेपर लीक? ओडिशा मेडिकल परीक्षा के दौरान WhatsApp पर शेयर किया गया क्वेश्चन पेपर

Odisha Paper Leak: एक तरफ संसद के दोनों सदनों से एंटी पेपर लीक विधेयक पारित किया गया है, ताकि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। वहीं दूसरी ओर एक और राज्य से कथित पेपर लीक का मामला सामने आया है। देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर जारी आक्रोश के बीच ओडिशा में आयोजित मेडिकल पीजी परीक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ऑल ओडिशा मेडिकल पीजी परीक्षा के 2023–26 बैच की जनरल सर्जरी MD/MS परीक्षा का प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे जाने के आरोप लगे हैं।

परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें

ओडिशा में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल परीक्षा चल रही थी, तभी प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। बताया जा रहा है कि एक छात्र को ये तस्वीरें व्हाट्सएप पर मिली थीं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला सोमवार को 2023-26 बैच की एमएस/एमडी जनरल सर्जरी की थ्योरी परीक्षा के दौरान सामने आया। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैल गईं। रिपोर्ट के अनुसार, भुवनेश्वर के एक निजी मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र ने ये तस्वीरें साझा की थीं। छात्र का कहना है कि उसे ये तस्वीरें बेरहामपुर के एक छात्र द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से मिली थीं। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान कुछ मोबाइल नंबरों से सवालों के जवाब भी भेजे गए। हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

OUHS ने दिए जांच के आदेश

इस घटना के सामने आने के बाद ओडिशा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (OUHS) ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति मानस रंजन साहू ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ ऑनलाइन बैठक की। इस दौरान उन्होंने बची हुई परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए। डीन बोले- इसे पेपर लीक नहीं कहा जा सकता

वहीं, एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य हरेकृष्ण दलाई ने कहा कि इस घटना को सीधे तौर पर पेपर लीक कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने के बाद छात्रों में बांटा जा चुका था और उसके तुरंत बाद उसकी तस्वीरें बाहर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि अगर प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले बाहर आ जाता और छात्रों तक पहुंच जाता, तब उसे पेपर लीक कहा जाता। लेकिन इस मामले में प्रश्न पत्र बांटने के तुरंत बाद ही उसकी तस्वीरें परीक्षा हॉल से बाहर पहुंचीं, इसलिए इसे उसी तरह की घटना माना जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर पहले से ही कड़ी निगरानी की जा रही है। इससे पहले नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चला यह आंदोलन 36 दिनों तक जारी रहा। इसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन समाप्त हो गया। इसके साथ ही CJP ने भी अपना विरोध अभियान वापस लेने का ऐलान कर दिया।