अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

sonam wangchuk on rajghat

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

mahesh jethmalani, tavleen singh and saurabh dass on CJP party viral video

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सीजेपी से जुड़े कई लोग एक होटल में पार्टी करते दिखाई दे रहे हैं। इससे अलावा प्रदर्शनस्थल पर सीजेपी कार्यकर्ताओं के जश्न मनाते वीडियो भी जमकर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो पर मचे बवाल के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रख्यात लेखिका तवलीन सिंह के जवाब भी चर्चा में है। ALSO READ: धर्मेंद्र प्रधान पर पोस्ट से BJP में बवाल! अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता राहर घिरीं, पार्टी नेताओं ने जताई नाराजगी

 

महेश जेठमलानी ने उठाए फंडिंग पर सवाल?

इस वीडियो को सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। वायरल वीडियो में CJP के कुछ लोग एक होटल में पार्टी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहां जश्न का माहौल है और नाच-गाना भी चल रहा है।

महेश जेठमलानी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'क्या सच में ऐसा हो रहा है? CJP की लीडरशिप दिल्ली के एक होटल में पार्टी दे रही है। राजधानी दिल्ली में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए। ऐसे में सवाल यह है कि इनके ट्रैवल, खाने और रहने का खर्च किसने उठाया? इनकी फंडिंग किसने की? ALSO READ: 'बेटी के बयान से दुखी हूं, लेकिन पिता को दोष नहीं दे सकते'— केशव महंता के बचाव में बोले हिमंत बिस्वा सरमा

तवलीन सिंह ने दिया जवाब

तवलीन सिंह ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, भाजपा अब कॉकरोच को एक 'फाइव-स्टार होटल' में पार्टी करते हुए दिखाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। क्या हम यह पूछ सकते हैं कि इतने सारे भाजपा मंत्रियों और उनकी संतानों के पास डिजाइनर कपड़े और कार्टियर के चश्मे खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आते हैं? ALSO READ: प्रधान के बाद अब गडकरी निशाने पर! 100% शुद्ध पेट्रोल के लिए 'E20 जनता पार्टी' मैदान में

 

क्या बोले सौरव दास?

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद सीजेपी के कार्यकर्ताओं साथ पार्टी और डांस करने के वायरल वीडियो पर की जा रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इससे एक बार फिर साफ़ हो जाता है कि सरकार और गोदी एंकर, जेन-ज़ी और नई पीढ़ी की सोच और भाषा को समझ ही नहीं पा रहे हैं।'

 

उन्होंने कहा कि हम जितने दिन जरूरत होगी, उतने दिन सड़क पर बैठ सकते हैं। हम नाचते-गाते हुए भी प्रदर्शन कर सकते हैं। हम हाथ में कोल्ड कॉफी लेकर भी आंदोलन को संगठित कर सकते हैं। बदलाव के लिए लड़ने के लिए हमारा वैसा दिखना जरूरी नहीं है, जैसा पिछली पीढ़ियां किसी आंदोलन से उम्मीद करती हैं।

सौरव दास ने कहा कि यही इस पीढ़ी की पहचान है-आत्मविश्वासी, रचनात्मक, जुझारू और ऐसी, जिसे किसी एक तयशुदा छवि में बांधा नहीं जा सकता। अंकल-आंटी चाहे जितनी शिकायत करते रहें, उन्हें हमारी इस पीढ़ी के साथ जीना और हमें स्वीकार करना ही होगा।

छी-छी! सोया चाप पर लेटकर नहाया, पैरों से रौंदा; वायरल हो गया फैक्ट्री का वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि एक युवक सोया चाप के मैदे के ऊपर ही नहा रहा है। वहीं दूसरा उसे पैरों से रौंद रहा है। वीडियो ग्रेटर नोएडा का बताया जा रहा है।

वायरल पोस्ट: बैंक में 100 करोड़, सिलिकॉन वैली छोड़ गांव लौटा, मियां-बीवी की लड़ाई की दुखदायी कहानी

इस कहानी का हीरो कभी सिलिकॉन वैली का चमकता सितारा था। आज गांव में रहकर वीडियो बनाता है, जिसमें संघर्ष की लकीरें साफ दिखती हैं। क्योंकि, जिंदगी में कभी-कभी सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं होता।

‘हर महीने घर भेजे 70K, फिर भी माता-पिता ने मांगे पढ़ाई के 25 लाख’ कनाडा में रह रहे 22 साल के युवक का पोस्ट वायरल

कनाडा में नौकरी कर रहे एक 22 वर्षीय भारतीय युवक की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों चर्चा में है। युवक ने बताया कि हर महीने परिवार को अच्छी-खासी रकम भेजने के बावजूद वह आर्थिक दबाव महसूस कर रहा है। युवक ने बताया कि वह हर महीने अपने घर करीब 70 हजार रुपये भेजता है। युवक ने दावा किया कि, उसके माता-पिता उस पैसे का बड़ा हिस्सा चिट फंड और स्थानीय कमेटियों में निवेश कर देते हैं, जिससे घर के खर्च के लिए बहुत कम रकम बचती है। इसी वजह से घर के खर्च और पैसों के इस्तेमाल को लेकर परिवार में लगातार मतभेद बने हुए हैं।

युवक के मुताबिक, जब उसने इस पर सवाल उठाया तो माता-पिता ने उसकी पढ़ाई पर खर्च हुए 25 लाख रुपये का हवाला दिया। युवक की पोस्ट पर हजारों लोगों ने अपनी राय दी है।

यूजर ने किया पोस्ट

रेडिट पर शेयर किए गए पोस्ट में यूजर ने लिखा, “मेरे माता-पिता हर महीने मेरे भेजे गए पैसों में से 50,000 रुपये स्थानीय कमेटी (चिट फंड) में जमा कर देते हैं। इसमें 25,000 रुपये मेरी मां के नाम और 25,000 रुपये मेरे पिताजी के नाम से डाले जाते हैं। उनका मानना है कि यह जबरन बचत का एक तरीका है, लेकिन इससे यह पैसा पूरे साल के लिए फंस जाता है।”

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यूजर ने आगे लिखा, “मेरे भेजे गए 70,000 रुपये में से 50,000 रुपये कमेटी में जमा हो जाने के बाद घर के खर्च के लिए सिर्फ़ 20,000 रुपये बचते हैं। इसी रकम से किराने का सामान, बिजली-पानी के बिल, मेरी बहन की स्कूल और एडमिशन फीस सहित बाकी सभी खर्च पूरे करने पड़ते हैं। जाहिर है, 20,000 रुपये इसके लिए काफी नहीं हैं। इसलिए लगभग हर महीने मेरे माता-पिता मुझसे कहते हैं कि मैं कम पैसे भेज रहा हूं और जरूरी बिलों का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त रकम भी मांगते हैं।”

माता-पिता को समझाने की कोशिश की

यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “लगभग हर महीने मेरे माता-पिता कहते हैं कि मैं पर्याप्त पैसे नहीं भेज रहा हूं और जरूरी खर्चों के लिए अतिरिक्त रकम मांगते हैं। इसी महीने मुझे 70,000 रुपये के अलावा 25,000 रुपये और भेजने पड़े। इससे कनाडा में मेरा अपना मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया और मेरे लिए अपने खर्च संभालना मुश्किल हो गया।” यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैंने कई बार अपने माता-पिता को समझाने की कोशिश की कि जब रोजमर्रा की जरूरी जरूरतों के लिए ही पैसे कम पड़ रहे हों, तब बड़ी रकम को कमेटी में फंसा देना सही फैसला नहीं है। अगर अचानक कोई इमरजेंसी आ जाए, तो उस समय यह पैसा तुरंत इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता।”

पढ़ाई के पैसे वापस करो

युवक ने कहा कि लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव की वजह से उसे अब ऐसा महसूस होने लगा है कि वह सिर्फ परिवार की बचत योजनाओं के लिए ही काम कर रहा है, जबकि उसके अपने सपने और लक्ष्य पीछे छूटते जा रहे हैं। यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “क्या किसी और को भी अपने माता-पिता से ऐसी उम्मीदों का सामना करना पड़ा है? मुझे परिवार की मदद करने से कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि मैं पहले से ही हर महीने 70,000 रुपये भेज रहा हूं।”

उसने आगे बताया, “जब भी मैं इस व्यवस्था पर सवाल उठाता हूं, तो मेरे माता-पिता कहते हैं कि उन्होंने मेरी पढ़ाई पर जो पैसा खर्च किया है, वह पहले लौटा दो। उनके मुताबिक, मेरी पढ़ाई पर करीब 25 लाख रुपये खर्च हुए हैं और वे चाहते हैं कि मैं वह पूरी रकम वापस करूं।”

लोगों ने किया कमेंट

युवक की पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिस पर लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने सलाह देते हुए लिखा, “तुम्हें घर भेजी जाने वाली रकम कम करनी होगी। यही सबसे सही तरीका है। अपने माता-पिता को बताओ कि कनाडा में खर्चे बहुत ज्यादा हैं और उनसे कहो कि कमेटी में हर महीने 10 से 15 हजार रुपये कम जमा करें।” एक अन्य यूजर ने सलाह दी, “तुम अभी सिर्फ 22 साल के हो। शादी जैसी बातों की चिंता अभी मत करो। इस साल के अंत तक अपने परिवार का साथ दो, क्योंकि बीच में चिट फंड छोड़ने पर नुकसान हो सकता है। लेकिन अगले साल उनसे कहो कि कमेटी की जगह एफडी (FD) या आरडी (RD) जैसे सुरक्षित और आसान विकल्पों में बचत करें।”

Lucknow-Kanpur Expressway: उद्घाटन के 13वें दिन ही धंस गया कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे, NHAI ने कही ये बात

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही इसकी सड़क दो जगहों पर धंस गई है। 13 जुलाई को शुरू हुए इस एक्सप्रेसवे पर करीब 9 मीटर हिस्से में सड़क बैठ गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। उन्नाव से लखनऊ जाने वाली लेन में कोरारी के पास सड़क धंसने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। लगातार बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा इसी लेन में टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर पहले भी सड़क का लगभग 8 फीट हिस्सा धंस गया है।

शुरू हुआ मरम्मत का काम

एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। साथ ही, हादसों से बचाव के लिए प्रभावित जगहों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहनों को सावधानी से गुजरने की सलाह दी जा रही है।

4200 करोड़ की लागत से बना था एक्सप्रेसवे

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया है। इसे ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (AIMGC) तकनीक से तैयार किया गया था। दावा किया गया था कि अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में इस तकनीक से बनने वाला यह पहला एक्सप्रेसवे है। हालांकि, पहली ही मानसूनी बारिश में सड़क पर आई खराबी ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड सेक्शन में किलोमीटर संख्या 64.200 के पास कई मीटर तक सड़क की डामर परत उखड़ गई है। इस क्षतिग्रस्त हिस्से के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ग्रीनफील्ड सेक्शन के कई हिस्सों में डामर उखड़ने की शिकायत सामने आई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इससे पहले भी एक्सप्रेसवे के किनारों पर कई जगह मिट्टी का कटाव देखने को मिला था। वहीं, अचलगंज के पास अप्रोच रोड का एक हिस्सा भी धंस गया था। कई स्थानों पर मरम्मत के लिए किए गए पैचवर्क की वजह से सड़क पहले जैसी समतल नहीं रह गई है। वाहन चालकों का कहना है कि पुलों और पुलियाओं पर बने एक्सपेंशन जॉइंट्स से गुजरते समय तेज झटके महसूस हो रहे हैं। एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट मैनेजर वी. कुंडू ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कुछ जगहों पर सड़क को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। उनके मुताबिक, नया एक्सप्रेसवे होने के कारण शुरुआती दौर में इस तरह की छोटी-मोटी दिक्कतें असामान्य नहीं हैं और फिलहाल यातायात सामान्य रूप से जारी है।

Boomer को लेकर शशि थरूर ने अपने बेटे को दिया ऐसा ज्ञान कि मामला वायरल हो गया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपने मजाकिया अंदाज से लोगों का ध्यान खींचा है। इस बार उन्होंने अपने बेटे ईशान थरूर की सोशल मीडिया पोस्ट पर हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए। उन्होंने जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू की उस राय का समर्थन किया, जिसमें छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई थी।

ईशान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं मानता हूं कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए। लेकिन उससे पहले भारत में व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वाले ‘बूमर्स’ पर रोक लगाने की जरूरत है।” इस पर शशि थरूर ने मजेदार अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां पश्चिमी देशों से अलग हैं। इसलिए यहां लगभग हर पीढ़ी को “बेबी बूमर” कहा जा सकता है। उन्होंने मजाक में अपने बेटे से कहा कि इस हिसाब से उसकी पीढ़ी भी इससे अलग नहीं है।

क्या है ‘बूमर’

बूमर’ शब्द, ‘बेबी बूमर’ का छोटा रूप है। आम तौर पर इसका इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जिनका जन्म दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1964 के बीच हुआ था। हालांकि, भारत में यह शब्द अक्सर ऐसे बुजुर्गों या पुराने विचारों वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो बिना मांगे सलाह देते हैं या पारंपरिक सोच रखते हैं। जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात उस समय कही थी, जब वह फ्रांस की संसद में पारित एक विधेयक पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। इस विधेयक में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया था।

फ्रांस के संसद ने दी मंजूरी

इस सप्ताह फ्रांस की संसद के दोनों सदनों ने इस कानून को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया। नए कानून के तहत स्कूल परिसर में छात्रों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे छोटे बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से बाहर निकलकर नई चीजें सीखने और वास्तविक दुनिया से जुड़ने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा, “भारत में भी छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगनी चाहिए। मेरा मानना है कि बच्चों को मोबाइल पर समय बिताने के बजाय किताबें पढ़नी चाहिए, धूप में बाहर खेलना चाहिए और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए।” हालांकि, वेम्बू के इस सुझाव पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने उनके विचार का समर्थन किया, जबकि कई लोगों का कहना था कि सरकार को लोगों की निजी जिंदगी और उनके फैसलों में जरूरत से ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए।

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फर्जी और भ्रामक पोस्ट लोगों को भ्रमित कर सकती हैं। ये अफवाहों को बढ़ावा देती हैं। ऐसे मामलों में सतर्क रहना और सूचना की पुष्टि करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इससे गलत जानकारी के फैलने पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

पिता असम सरकार में मंत्री…बेटी छात्र प्रदर्शन में हुई शामिल, अब CM हिमंता सरमा ने कही ये बात

नीट पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में असम के मंत्री केशव महंत की बेटी के शामिल होने के वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान सामने आया है। मुख्‍यमंत्री ने कहा, ”हो सकता है वो (कैब‍िनेट मंत्री की बेटी) अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा को न मानती हों, इसके ल‍िए मेरे कैबिनेट सहयोगी को ट्रोल नहीं किया जाना चाहिएय़” बता दें कि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया गया कि दिबिसा महंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रही हैं और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  की ये अपील

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से अपील की कि मंत्री केशव महंता को उनकी बेटी के राजनीतिक विचारों के लिए निशाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति की अपनी अलग सोच और राय हो सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि केशव महंता की बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके पिता पर हमला करना या उन्हें ट्रोल करना सही है। हो सकता है कि उनकी बेटी की राजनीतिक सोच अपने पिता से अलग हो।” अपना उदाहरण देते हुए हिमंत सरमा ने कहा, “कल जब मेरा बेटा वकील बनेगा, तो हो सकता है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति का पक्ष रखे जिसे मैं पसंद नहीं करता। इसका मतलब यह नहीं कि उसके फैसलों के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जाए।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी भी माता-पिता को उनके बालिग बेटे या बेटी के राजनीतिक विचारों और उनके फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह प्रदर्शन के दौरान दिबिसा महंता की ओर से लगाए गए कथित नारों से सहमत नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब अगली बार मेरी उनसे मुलाकात होगी, तो मैं इस मुद्दे पर उनसे जरूर बात करूंगा और समझाने की कोशिश करूंगा कि उन्होंने जो बातें कही थीं, वे सही नहीं थीं।”

गुवाहाटी में भी हुआ था प्रदर्शन

गुवाहाटी में यह प्रदर्शन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में पारदर्शिता की मांग के साथ तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई थी।इस पूरे विवाद पर मंत्री केशव महंता की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उधर, कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 37 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी।

₹2 लाख सैलरी, नो लोन और अच्छी सेविंग्स… फिर भी 26 साल के युवक को क्यों लगता है कि वह गरीब है

पैसा इंसान की कई जरूरतें पूरी कर सकता है, लेकिन क्या यह हमेशा मन को संतुष्टि और सुरक्षा का एहसास भी देता है? ऐसा ही सवाल एक 26 वर्षीय युवक की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। युवक ने बताया कि वह हर महीने करीब ₹2 लाख कमाता है और उस पर किसी तरह का कर्ज भी नहीं है, फिर भी उसे कई बार खुद को आर्थिक रूप से असुरक्षित महसूस होता है।

अपनी भावनाओं को साझा करते हुए उसने ऑनलाइन कम्युनिटी में बताया कि अच्छी कमाई के बावजूद भविष्य की जिम्मेदारियों और खर्चों को लेकर चिंता बनी रहती है। उसकी पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने इस बात पर चर्चा शुरू कर दी कि आर्थिक सफलता और मानसिक संतुष्टि के बीच कितना गहरा संबंध है।

छोटे कमरे से शुरू हुआ सफर

युवक ने बताया कि उसका बचपन काफी साधारण परिस्थितियों में बीता। उसके परिवार की कुल आय कभी ₹6-7 हजार रुपये महीने से ज्यादा नहीं रही। वह 21 साल की उम्र में पहली नौकरी मिलने तक बेहद सीमित संसाधनों में रहा। उसने बताया कि वह कभी सिर्फ 10×10 के छोटे कमरे में अपने परिवार के साथ रहता था। नौकरी लगने के बाद उसकी पहली प्राथमिकता अपने माता-पिता की जिंदगी आसान बनाना थी। उसने अपने माता-पिता को काम से आराम दिया और उन्हें अपने शहर में 2BHK घर में शिफ्ट कराया। वहीं, वह खुद बेंगलुरु में अपने 2BHK घर में रहता है।

कमाई का बड़ा हिस्सा बचत और निवेश में लगा देता है

युवक ने बताया कि वह अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा भविष्य के लिए सुरक्षित रखता है।

उसके अनुसार:

  • ₹30 हजार रुपये हर महीने म्यूचुअल फंड में निवेश करता है।
  • ₹10 हजार रुपये FD या RD में डालता है।
  • ₹10 हजार रुपये गोल्ड सेविंग में लगाता है।
  • ₹15-20 हजार रुपये हर महीने माता-पिता को भेजता है।
  • किराए और अन्य खर्चों पर करीब ₹25 हजार रुपये खर्च होते हैं।

नौकरी शुरू करने के बाद उसने अलग-अलग निवेशों में अच्छी रकम जमा कर ली है। उसके पास करीब ₹4 लाख के शेयर, ₹2 लाख की FD, ₹2-2.5 लाख का सोना और ₹6 लाख रुपये बैंक खाते में हैं।

परिवार के लिए खर्च किया पैसा, फिर भी नहीं आया ‘अमीर’ होने का एहसास

युवक ने बताया कि उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा परिवार की सुविधाओं पर खर्च हुआ। उसने माता-पिता के घर को बेहतर बनाया, ₹60 हजार रुपये का स्कूटर खरीदा, ₹70 हजार रुपये का MacBook M2 और ₹25 हजार रुपये का OnePlus फोन लिया। इसके अलावा उसने माता-पिता के लिए सालाना ₹30 हजार रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और खुद के लिए ₹24 हजार रुपये की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी भी ली। लेकिन इन सब उपलब्धियों के बावजूद उसे लगता है कि वह अभी भी आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

शादी, कार और जमीन के सपने बढ़ा रहे हैं भविष्य की चिंता

युवक ने बताया कि आने वाले समय में उसके कई बड़े खर्च सामने हैं। इसी वजह से वह मानसिक दबाव महसूस करता है।

उसकी योजनाओं में शामिल हैं:

  • शादी पर करीब ₹10 लाख खर्च करना।
  • ₹3-4 लाख की कार खरीदना।
  • ₹10-15 लाख की जमीन लेना।
  • करीब ₹2 लाख की बाइक खरीदना।

उसका कहना है कि बचत होने के बावजूद वह हर चीज एक साथ नहीं खरीद सकता और हर आर्थिक फैसला उसे किसी न किसी चीज का त्याग करने जैसा लगता है।

गांव लौटने पर होती है दूसरों से तुलना

युवक ने बताया कि सबसे ज्यादा अजीब उसे तब लगता है जब वह अपने गांव जाता है और ऐसे लोगों को देखता है जो उससे काफी कम कमाते हैं, लेकिन ज्यादा खुश नजर आते हैं। उसने लिखा कि उसके कई दोस्त दिहाड़ी मजदूरी करते हैं या ऑटो चलाते हैं। उनके लिए अतिरिक्त ₹1000 भी बड़ी खुशी लेकर आता है, जबकि वह अच्छी कमाई के बावजूद संतुष्ट महसूस नहीं कर पाता।

कर्ज से दूर रहना बना उसकी सबसे बड़ी आदत

युवक ने बताया कि उसके कई दोस्त अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए लोन लेते हैं, लेकिन उसने हमेशा कर्ज से बचने की कोशिश की। हालांकि, यही सोच कई बार उसके लिए परेशानी भी बन जाती है। छोटी-छोटी चीजें खरीदते समय भी वह सोचने लगता है कि क्या उसे पैसे खर्च करने चाहिए या नहीं।

सब हासिल किया, फिर भी तनाव खत्म नहीं हुआ’

युवक ने लिखा कि उसने जिंदगी को आरामदायक बनाने के लिए लगभग सभी जरूरी कदम उठा लिए हैं, फिर भी अंदर से तनाव महसूस करता है। उसने कहा कि ₹750 से ज्यादा की शर्ट खरीदने से पहले भी वह कई बार सोचता है। हालांकि वह बाहर खाना खाता है, दोस्तों के साथ घूमता है और यात्राएं भी करता है, लेकिन फिर भी उसे अमीर होने या संतुष्ट होने का एहसास नहीं होता।

Reddit यूजर्स ने दी सलाह- उपलब्धियों को पहचानो

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने युवक को सलाह दी कि समस्या उसकी कमाई में नहीं बल्कि उस मानसिकता में है जो संघर्ष भरे बचपन से बनी है। एक यूजर ने कहा कि उसे अपनी पुरानी सोच और आज की उपलब्धियों के बीच संतुलन बनाना चाहिए। वहीं दूसरे यूजर ने सलाह दी कि वह खुद पर ज्यादा सख्ती न करे और अपनी मेहनत से हासिल की गई चीजों की सराहना करे।

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