वंदे भारत ने निकाली 180 Kmph की गजब की रफ्तार! मथुरा-नागदा रूट पर 16-कोच ट्रेन के ट्रायल की फुल रिपोर्ट

इंडियन रेलवे की नई वंदे भारत चेयर कार ट्रेन ने मथुरा-नागदा सेक्शन पर 180 km/h की स्पीड से सफल ट्रायल रन पूरा किया। 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेन को पंजाब के कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में बनाया गया है। रेल मंत्रालय के अनुसार यह ट्रायल 8 अक्टूबर, 2026 को चीफ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CCRS) की देख रेख में हुआ।

एडवांस्ड प्रोपल्शन सिस्टम से लैस इस ट्रेन की हाई-स्पीड परफॉर्मेंस, ऑपरेशनल क्षमता और सुरक्षा की जांच की गई, जो भारत की आधुनिक रेलवे मैन्युफैक्चरिंग यात्रा में एक अहम पड़ाव है। CCRS इंस्पेक्शन का सफल होना एडवांस्ड वंदे भारत ट्रेनों के विकास में एक बड़ी उपलब्धि है, जो भारत में आधुनिक रेलवे मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमताओं को दिखाता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 180 km/h की स्पीड पर ट्रायल पूरा करने का मतलब यह नहीं है कि रेगुलर पैसेंजर सर्विस के दौरान ट्रेन इसी स्पीड से चलेगी। अभी वंदे भारत ट्रेन 130 से 160 km/h की स्पीड से चलेगी, लेकिन आगे चलकर यह 180 km/h की स्पीड तक पहुंच जाएगी।

वंदे भारत ट्रेन की खासियतें

नई बनी वंदे भारत ट्रेन में आरामदायक और पीछे की ओर झुकने वाली (रिक्लाइनिंग) सीटें हैं, जिनमें पैर फैलाने के लिए काफी जगह है। इसमें बड़ी पैनोरमिक खिड़कियां हैं, जिनसे बाहर का नजारा साफ दिखता है और प्राकृतिक रोशनी आती है। साथ ही इसमें जीरो-डिस्चार्ज बायो-वैक्यूम टॉयलेट हैं, यानी इनसे कोई कचरा बाहर नहीं निकलता।

इस ट्रेन में ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे और एक स्मूथ सस्पेंशन सिस्टम भी है, जिससे झटके और कंपन कम महसूस होते हैं। इसके एयर-कंडीशंड कोच यात्रियों की संख्या के हिसाब से तापमान को एडजस्ट करने और पूरी यात्रा के दौरान आरामदायक तापमान बनाए रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर-फ्रेंडली खास टॉयलेट भी बनाए गए हैं।

RCF कपूरथला ने कोच बनाने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया

फाइनेंशियल ईयर 2025–26 में, RCF कपूरथला ने 2,383 कोच बनाकर अपना अब तक का सबसे ज्यादा सालाना प्रोडक्शन हासिल किया। इस फैक्ट्री ने मॉडर्न रेलवे कोच बनाने के एक अहम केंद्र के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। यह एडवांस्ड ट्रेनसेट के विकास में योगदान दे रही है और वंदे भारत व अमृत भारत जैसी एडवांस्ड ट्रेनों के लिए मॉडर्न कोच बना रही है।

इसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है और इसके बनाए रेलवे कोच एशिया और अफ्रीका के कई देशों में एक्सपोर्ट किए गए हैं। अब तक सभी वंदे भारत ट्रेनें चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में बनाई गई हैं।

दिल्ली से UP-बिहार जाने वालों को मिलेगी राहत? दिवाली-छठ पर चलेगी वंदे भारत स्पेशल, जानें पूरा शेड्यूल

Vande Bharat Special Train: दिवाली और छठ महापर्व के दौरान दिल्ली से उत्तर प्रदेश आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दरअसल, भारतीय रेलवे ने त्योहारों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेन चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली-पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ट्रेन करीब 994 किलोमीटर का सफर लगभग 13 घंटे में पूरा कर सकती है। हालांकि, अभी ट्रेन के संचालन को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके चलने की तारीख, समय और अन्य जानकारी साफ होगी।

यूपी के कई स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन

अगर इस वंदे भारत स्पेशल को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेन का विकल्प मिल सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, ट्रेन नई दिल्ली से चलकर अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रुकेगी। इसके बाद ट्रेन बक्सर और आरा होते हुए पटना पहुंचेगी। यानी दिल्ली से कानपुर, प्रयागराज, अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन काफी काम की हो सकती है।

दीपावली और छठ के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाली ट्रेनों में काफी दबाव रहता है। ऐसे में अगर रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलती है, तो यह वंदे भारत स्पेशल त्योहार के समय यात्रियों को भीड़ से राहत देने और सफर के लिए एक अतिरिक्त विकल्प देने में मदद कर सकती है।

21 अक्टूबर से संचालन का प्रस्ताव, त्योहार में बढ़ेंगे विकल्प

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहली ट्रेन जोड़ी 02252/02251 को नई दिल्ली से 21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक सोमवार, बुधवार और शनिवार को चलाने का प्रस्ताव है। वापसी में पटना से यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को चल सकती है। इसके अलावा, 02253/02254 ट्रेन जोड़ी चलाने का भी प्रस्ताव है। मंजूरी मिलने पर त्योहारों के दौरान दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त ट्रेन का विकल्प मिलेगा। हालांकि, अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा।

कब-कब चलेगी वंदे भारत स्पेशल?

प्रस्ताव के मुताबिक, वंदे भारत स्पेशल नई दिल्ली से सुबह 8:35 बजे रवाना होकर दोपहर करीब 2:45 बजे प्रयागराज पहुंच सकती है। इसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा होते हुए ट्रेन रात करीब 9:30 बजे पटना पहुंचने का प्रस्ताव है।

वापसी में ट्रेन पटना से सुबह 10 बजे चलकर दोपहर 3:35 बजे प्रयागराज और रात करीब 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंच सकती है। मंजूरी मिलने पर यह टाइमिंग दिल्ली और यूपी के बीच सफर करने वालों के लिए एक और विकल्प दे सकती है।

दिल्ली-यूपी सफर के लिए कितना देना होगा किराया

प्रस्ताव के मुताबिक, नई दिल्ली से पटना तक एसी चेयर कार का किराया भोजन सहित करीब 2,575-2,600 रुपये हो सकता है। वहीं, एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया करीब 4,650-4,680 रुपये रहने का अनुमान है।

हालांकि, यह अभी प्रस्तावित किराया है। अंतिम किराया रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद तय होगा। वहीं, दिल्ली से कानपुर या प्रयागराज तक जाने वालों का किराया अलग होगा, जिसकी सही जानकारी बुकिंग शुरू होने पर IRCTC पर मिलेगी।

Vande Bharat Viral Photos: वंदे भारत ट्रेन में जंग लगे टॉयलेट और गंदगी देखकर भड़का, फिर रेलवे ने दी ये सफाई

अहमदाबाद। वंदे भारत एक्सप्रेस की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद ट्रेन की साफ-सफाई और मेंटेनेंस को लेकर सवाल उठने लगे। तस्वीरों में ट्रेन का बाहरी हिस्सा गंदा, कुछ कांच के पैनल टूटे हुए और टॉयलेट के कुछ हिस्सों में जंग लगी दिखाई दे रही थी। जियोलॉजिस्ट हिमांशु मुखर्जी ने 2 अक्टूबर को X (formerly Twitter) पर फोटोज शेयर की थीं।

मुखर्जी के अनुसार, ये तस्वीरें ट्रेन नंबर 26901 की हैं, जो साबरमती से वेरावल के बीच चलती है। उन्होंने ट्रेन की हालत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी सफाई और देखभाल ठीक से नहीं हो रही है। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन और रेल मंत्रालय को टैग कर मामले पर ध्यान देने की मांग की।

तस्वीरें सामने आने के बाद ट्रेन की सफाई और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। मुखर्जी ने कहा कि वंदे भारत जैसी ट्रेन की ऐसी हालत देखकर उन्हें अच्छा नहीं लगा। साबरमती-वेरावल वंदे भारत मई 2025 में शुरू हुई थी और यह अहमदाबाद को सौराष्ट्र से जोड़ती है।

ये रहा रेलवे का जवाब

सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद अहमदाबाद के DRM ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टाफ ने ट्रेन के बताए गए हिस्सों की जांच की और जरूरी सफाई व मरम्मत का काम कर दिया।

  • ट्रेन की जांच हुई: लोकल रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन के डिब्बों का इंस्पेक्शन किया और दिखने वाली कमियों को ठीक किया।
  • पैसेंजर से अपील: रेलवे ने पैसेंजर से भी सफर के दौरान ट्रेन में सफाई रखने और कचरा सही जगह पर डालने की अपील की।

बेंगलुरु से मुंबई जाना होगा आसान, पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन! जाने स्टॉपेज और टाइम टेबल

बेंगलुरु और मुंबई के बीच सफर करने वाले पैसेंजर के लिए नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने की तैयारी है। रेलवे बोर्ड ने KSR बेंगलुरु और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के बीच इस ट्रेन को चलाने की मंजूरी दे दी है। ट्रेन के इस महीने शुरू होने की संभावना है।

इन 6 दिन चलेगी ट्रेन

  • यह ट्रेन हफ्ते में छह दिन चलेगी। बेंगलुरु से चलने वाली सर्विस सोमवार को नहीं चलेगी, जबकि मुंबई से बेंगलुरु आने वाली सर्विस मंगलवार को नहीं चलेगी।
  • इस रूट पर दो वंदे भारत स्लीपर रेक लगाए जाएंगे। शुरुआत में उद्घाटन वाली ट्रेन को स्पेशल सर्विस के तौर पर चलाया जा सकता है। इसके बाद इसे रेगुलर शेड्यूल में चलाया जाएगा।

इन स्टेशनों पर रुकेगी वंदे भारत

इस ट्रेन के रूट में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अनंतपुर, गुंटकल, रायचूर, कलबुर्गी, सोलापुर, पुणे और कल्याण स्टेशन पर रुकेगी।

रेलवे के प्लान के मुताबिक सोलापुर और पुणे में ट्रेन के लिए पानी भरने और कोच मेंटेनेंस से जुड़ी फैसिलिटी भी मिलेगी।

अब सिर्फ 16 घंटे में पूरा होगा सफर

बताए गए समय के अनुसार, ट्रेन बेंगलुरु से रात करीब 10 बजे चल सकती है। अगले दिन दोपहर करीब 1:50 बजे यह मुंबई पहुंच सकती है।

वहीं मुंबई से वापसी की ट्रेन रात करीब 10:30 बजे चल सकती है और अगले दिन दोपहर करीब 2:50 बजे बेंगलुरु पहुंच सकती है। रेलवे ने अभी इन टाइम का ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है। ट्रेन की टाइमिंग के हिसाब से दोनों शहरों के बीच सफर करीब 16 घंटे का हो सकता है।

फिलहाल बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत या दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेन नहीं चलती है। दोनों शहरों के बीच रोज चलने वाली सीधी ट्रेन उद्यान एक्सप्रेस है। यह करीब 1,134 किलोमीटर का रेल सफर लगभग 22 घंटे में पूरा करती है। सड़क से दोनों शहरों के बीच दूरी करीब 984 किलोमीटर है और सामान्य तौर पर इस सफर में 15 से 17 घंटे लग सकते हैं। ऐसे में नई स्लीपर ट्रेन से रात में सफर करने वाले पैसेंजर को एक और रेल ऑप्शन मिल सकता है।

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: नई वंदे भारत एक्सप्रेस की बुकिंग शुरू! जानिए इसका टाइम-टेबल, रूट, स्टॉपेज और किराए की सारी डिटेल

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: नई वंदे भारत ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच चलेगी। इस ट्रेन में यात्रा करने का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए खुशखबरी है। सूरत और उदयपुर के बीच प्रस्तावित नई वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए बुकिंग गुरुवार, 1 अक्टूबर को शुरू हो गई है। इससे यात्रियों को दक्षिण गुजरात और राजस्थान के बीच तेज सेमी-हाई-स्पीड रेल कनेक्शन मिलेगा।

पश्चिमी रेलवे के मुंबई सेंट्रल डिवीजन ने बताया कि ट्रेन संख्या 26903/26904 के लिए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर और IRCTC वेबसाइट के जरिए रिजर्वेशन शुरू हो गए हैं। नई वंदे भारत सेवा मंगलवार को छोड़कर, हफ्ते में सीभी छह दिन चलेगी। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यह ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी और बिजनेस, टूरिज्म और दूसरे कामों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को फायदा पहुंचाएगी।

कब शुरू होगी सूरत-उदयपुर वंदे भारत?

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस इस वीकेंड से चलना शुरू होगी। सूरत-उदयपुर ट्रेन (26903) रविवार, 4 अक्टूबर को सूरत से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी, जबकि वापसी उदयपुर-सूरत सर्विस (26904) शनिवार, 3 अक्टूबर से शुरू होगी।

वंदे भारत ट्रेन का समय क्या है?

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस करीब 690 km का सफर करीब साढ़े सात घंटे में पूरा करेगी।

ट्रेन (26903) सूरत से सुबह 6:10 बजे निकलेगी और उसी दिन दोपहर 1:40 बजे उदयपुर पहुंचेगी।

वापसी वाली ट्रेन (26904) उदयपुर से दोपहर 3:35 बजे निकलेगी और रात 11 बजे सूरत पहुंचेगी।

सूरत से यात्रा करने वाले यात्री दोपहर तक उदयपुर पहुंच सकेंगे, जबकि राजस्थान से लौटने वाले यात्री देर रात सूरत पहुंच सकते हैं।

स्टेशन जहां ट्रेन रुकेगी

वंदे भारत एक्सप्रेस दोनों दिशाओं में नौ स्टेशनों पर रुकेगी।

स्टॉपेज में भरूच, वडोदरा, आनंद, मणिनगर, असरवा (अहमदाबाद), हिम्मतनगर, शामलाजी रोड, डूंगरपुर और जावर शामिल हैं।

यह सेवा वडोदरा, आणंद और अहमदाबाद सहित गुजरात के बड़े शहरों से यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी देगी, साथ ही उदयपुर और राजस्थान के दूसरे हिस्सों तक पहुंच को बेहतर बनाएगी।

NEET PG 2026 Scorecard: नीट पीजी का स्कोरकार्ड और आंसरकी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी, जानें कैसे करना है डाउनलोड

Vande Bharat Update: क्या वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत ट्रेन को सप्ताह में सातों दिन चलाया जाएगा? अब इस नई तैयारी में उत्तर रेलवे

वाराणसी। वंदे भारत से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। वाराणसी और नई दिल्ली के बीच चलने वाली देश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस (22435/22436) को अब हफ्ते के सातों दिन चलाने की तैयारी है। उत्तर रेलवे ने दोनों ट्रेनों के ऑफ-डे खत्म करने का प्रपोजल तैयार किया है। इसका मकसद ट्रेनों को पूरे सप्ताह चलाना है, ताकि पैसेंजर को किसी एक दिन सर्विस बंद होने की परेशानी न हो।

अभी यह ट्रेन सप्ताह में 6 दिन चलती है और गुरुवार को इसका संचालन नहीं होता। अगर उत्तर रेलवे के प्रपोजल को मंजूरी मिलती है तो गुरुवार को भी यात्रियों को इस ट्रेन की सर्विस मिल सकेगी।

हफ्ते में एक दिन क्यों रुकती है वंदे भारत?

वाराणसी-नई दिल्ली रूट पर अभी दो वंदे भारत ट्रेनें चलती हैं।

– 22435/22436 – गुरुवार को बंद

– 22415/22416 – मंगलवार को बंद

ये दोनों ट्रेनें प्रयागराज होकर जाती हैं, इसलिए प्रयागराज के यात्रियों को भी इन दो दिनों में वंदे भारत नहीं मिलती। बंद रहने की वजह मेंटेनेंस है।

मेंटेनेंस के लिए तैयार किया गया नया प्लान

गुरुवार को भी ट्रेन चलाने के लिए मेंटेनेंस की समस्या को दूर करना जरूरी था। इसके लिए उत्तर रेलवे ने 20 कोच वाले एक अतिरिक्त रैक के रोटेशन की प्लानिंग बनाई है।

प्लान के मुताबिक, जिस दिन रैक की मेंटेनेंस होगी, उस दिन अतिरिक्त रैक को रूट पर चला दिया जाएगा। इससे मेंटेनेंस भी होता रहेगा और यात्रियों को ट्रेन की सर्विस भी बंद नहीं करनी पड़ेगी।

दिवाली से पहले मिल सकती है हरी झंडी

इस प्रपोजल की समीक्षा उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल में चल रही है। रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, त्योहारों के सीजन और दिवाली से पहले इस पर फैसला लिया जा सकता है। मंजूरी मिलते ही वाराणसी-प्रयागराज-नई दिल्ली रूट पर वंदे भारत पूरे हफ्ते दौड़ेगी।

₹2 लाख/वर्ग मीटर जमीन, 12-20 हजार/वर्ग फीट बिक रहे फ्लैट? समझिए ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी के पास प्रॉपर्टी को क्यों लग रहे पंख

ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी और उसके आसपास का क्षेत्र आने वाले समय में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में आकार लेता दिख रहा है। रेलवे स्टेशन, इंटरनेशनल बस अड्डा और लगभग 600 एकड़ में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की वजह से इस इलाके के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। बुनियादी ढांचे के इस बड़े विस्तार से आसपास के सेक्टरों में जमीन, आवासीय फ्लैट और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है।

बोड़ाकी बनेगा NCR का प्रमुख ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब

दादरी के पास बोड़ाकी में स्थित मौजूदा रेलवे हॉल्ट को एक आधुनिक मल्टी-मॉडल रेलवे टर्मिनल (ग्रेटर नोएडा टर्मिनल) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तैयार होने से गौतमबुद्ध नगर के लाखों यात्रियों की ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली या गाजियाबाद जाने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी। प्रस्तावित स्टेशन में 12 प्लेटफॉर्म होंगे, साथ ही बड़ी संख्या में यार्ड और लूप लाइनें तैयार की जाएंगी। दावों के मुताबिक यहां वंदे भारत और राजधानी जैसी लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन और रखरखाव की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। भविष्य में पूर्वांचल की दिशा में जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन यहां से जोड़े जाने की संभावना है।

कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए इस टर्मिनल को ‘नमो भारत’ रैपिड रेल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, बोड़ाकी में लगभग 14 एकड़ क्षेत्र में एक आधुनिक बस अड्डा, वर्कशॉप और सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की योजना है। स्टेशन परिसर में होटल, प्रमुख फूड चेन और कमर्शियल स्पेस भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र सिर्फ एक स्टेशन न रहकर बड़ा ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब बनेगा।

600 एकड़ में फैलेगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब

SVG Realty के चेयरमैन व डायरेक्टर और रियल एस्टेट एक्सपर्ट अंकुर मित्तल बताते हैं कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के समीप लगभग 600 एकड़ क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की योजना है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लोकल ट्रेन और लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी जैसी इंटिग्रेटेड सुविधाएं शामिल होंगी।

इन सुविधाओं के विकसित होने से केवल आम यात्रियों को ही सहूलियत नहीं मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार, बड़े कारोबार और कमर्शियल गतिविधियों के मौके पैदा होंगे। इसी वजह से बोड़ाकी और इसके आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है।

जमीन के रेट: डेढ़ लाख से दो लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रेटर नोएडा में जमीन की उपलब्धता और सेक्टरों के विकास की स्थिति के हिसाब से रेट्स में अंतर देखा जा रहा है। विकसित सेक्टर की बात करें तो अथॉरिटी के प्लॉटों की कीमतें लगभग 2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई हैं। सेमी-डेवलप सेक्टर में भी जमीन के दाम लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास देखे जा रहे हैं। किसानों के सेमी-कमर्शियल प्लॉट की कीमत 1 लाख रुपये से लेकर 1.25 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास बताई जा रही है।

बालाजी होम्स के रियल एस्टेट एक्सपर्ट संजय कुमार के मुताबिक, बोड़ाकी जंक्शन के पास स्थित इटा, ओमिक्रॉन और म्यू प्रमुख सेक्टरों में शामिल हैं, जहां विकास के काम तेजी से चल रहे हैं। प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे और रेलवे जंक्शन के कारण इन सेक्टरों में प्रॉपर्टी की कीमतें करीब 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक बताई जा रही हैं।

12 हजार से 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट पहुंचे फ्लैट्स के दाम

टाटा, गोदरेज और हीरो रियल्टी जैसे देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स इस क्षेत्र में अपने प्रोजेक्ट्स ला चुके हैं। नए लॉन्च हो रहे आवासीय प्रोजेक्ट्स में फ्लैटों के रेट 12 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट से शुरू होकर लग्जरी सेगमेंट में 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुंच रहे हैं। कामकाजी वर्ग और निवेशकों के बीच स्टूडियो अपार्टमेंट्स की मांग में भी इजाफा हुआ है। कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में 500 से 600 वर्ग फीट के स्टूडियो अपार्टमेंट तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी दरें 10 हजार रुपये से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के बीच हैं।

अल्फा से बोड़ाकी तक कमर्शियल कॉरिडोर में तेजी

अल्फा से बोड़ाकी के बीच करीब 5 किलोमीटर के दायरे में कमर्शियल गतिविधियों की मांग काफी बढ़ी है। ग्राउंड फ्लोर रिटेल स्पेस 30,000 रुपये से 35,000 रुपये प्रति वर्ग फीट, अपर फ्लोर कमर्शियल स्पेस करीब 20,000 रुपये प्रति वर्ग फीट और ऑफिस स्पेस 12,000 रुपये से 13,000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक जा रहे हैं।

रेलवे कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, लॉजिस्टिक्स हब और बस अड्डे जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं के चलते बोड़ाकी और आसपास के सेक्टरों का रियल एस्टेट मार्केट इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि यहां ये भी समझना जरूरी है कि किसी भी प्रॉपर्टी का अंतिम मूल्य उसकी सटीक लोकेशन, प्रोजेक्ट की स्थिति और मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करता है।

(ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

दिल्ली में मेट्रो स्टेशन के लिए 6 MMI प्लान, मां आनंदमयी मार्ग एलिवेटेड रोड और मुकरबा चौक प्रोजेक्ट मंजूर, इनकी डिटेल जानिए

दिल्ली के उप-राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में आज यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग) सेंटर (UTTIPEC) की 70वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई। इस दौरान, DMRC के छह MMI प्रोजेक्ट्स और PWD, GNCTD के दो सड़क प्रोजेक्ट्स पर चर्चा की गई और उन्हें मंजूरी दी गई।

बता दें कि बैठक में DDA, GNCTD, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, DMRC, PWD, MCD, NDMC, भारतीय रेलवे, NCRTC और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

इन 6 मेट्रो स्टेशनों के MMI प्लान को मिली मंजूरी

बैठक में मंजूर किए गए छह मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन (MMI) प्लान में येलो लाइन पर GTB नगर मेट्रो स्टेशन, वायलेट लाइन पर सरिता विहार मेट्रो स्टेशन, ब्लू लाइन पर अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन, रेड लाइन पर रोहिणी वेस्ट मेट्रो स्टेशन/डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल मेट्रो स्टेशन, येलो लाइन पर मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन और रेड लाइन पर शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।

300 मीटर के दायरे में सुधरेगी कनेक्टिविटी

MMI प्लान के तहत मेट्रो जैसे मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम स्टेशन के आसपास करीब 300 मीटर के क्षेत्र को कवर किया जाता है। इन प्लान का मकसद मेट्रो और RRTS जैसे ट्रांजिट स्टेशनों तक लोगों की पहुंच आसान बनाना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। इसके अलावा पैदल चलने की सुविधा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और यात्रियों के लिए जरूरी दूसरी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है। बता दें कि DMRC ने दिल्ली में फेज-1 और फेज-2 के मेट्रो कॉरिडोर के 31 स्टेशनों के लिए MMI प्लान तैयार किए थे। इन छह प्लान को मंजूरी मिलने के साथ ही अब UTTIPEC ने सभी 31 MMI प्लान को मंजूरी दे दी है।

दक्षिणी दिल्ली में बनेगा 5.5 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

बैठक में मां आनंदमयी मार्ग पर आउटर रिंग रोड से महरौली-बदरपुर रोड तक प्रस्तावित छह लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी गई। इसके साथ ही ओखला एस्टेट मार्ग पर क्राउन प्लाजा चौराहे के पास एक अंडरपास और गोलचक्कर (राउंडअबाउट) बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। दक्षिणी दिल्ली में बनने वाले इस एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 5.5 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर आउटर रिंग रोड को महरौली-बदरपुर रोड से जोड़ेगा।

मां आनंदमयी मार्ग पर जाम से मिलेगी राहत

प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर, मां आनंदमयी मार्ग पर लगभग 12 चौराहों को बायपास करेगा। इसका मकसद ओखला फेज-1 और फेज-2 इंडस्ट्रियल एरिया से आने वाले मिले-जुले ट्रैफिक की वजह से होने वाली भीड़ को कम करना है। क्राउन प्लाजा चौराहे पर प्रस्तावित अंडरपास और गोलचक्कर से ओखला एस्टेट मार्ग पर गाड़ियों की भीड़ कम करने में और मदद मिलेगी। जमीन के स्तर पर ट्रैफिक कम होने से, इस प्रोजेक्ट के तहत मां आनंदमयी मार्ग पर पैदल चलने वालों और बिना मोटर वाले वाहनों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा भी मिलेगी।

मुकरबा चौक पर जाम कम करने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट

बैठक में मंजूर किया गया दूसरा रोड प्रोजेक्ट उत्तर-पश्चिम दिल्ली में मुकरबा चौक पर भीड़ कम करने से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट में आउटर रिंग रोड पर मौजूद रोड ओवर ब्रिज (ROB) को छह लेन से बढ़ाकर 10 लेन का करना हैं। इसके अलावा, दिल्ली-सोनीपत रेल लाइन के ऊपर जहांगीरपुरी इंडस्ट्रियल एरिया को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने के लिए चार लेन का नया ROB बनाया जाएगा।

मौजूदा ROB को चौड़ा करने का मकसद मुकरबा चौक और मधुबन चौक के बीच आउटर रिंग रोड से सफर करने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना है। वहीं, जहांगीरपुरी इंडस्ट्रियल एरिया को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने वाली प्रस्तावित नई सड़क से मुकरबा चौक से गुजरने वाले वाहनों की संख्या में करीब 20 फीसदी तक कमी आने की उम्मीद है। इन प्रोजेक्ट्स से मुकरबा चौक के पास NH-44 पर भी ट्रैफिक जाम कम करने में मदद मिलेगी।

इन प्रोजेक्ट्स से दिल्ली में सफर होगा आसान और सुरक्षित

बैठक में मंजूर किए गए इन सभी प्रोजेक्ट्स से मेट्रो स्टेशनों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, पैदल चलने वालों के लिए आखिरी मील तक पहुंचना आसान और सुरक्षित होगा, और दिल्ली के कुछ अहम ट्रैफिक पॉइंट्स पर जाम कम होगा। सड़क से जुड़े इन उपायों से आने-जाने वालों के लिए सफर आसान होने की उम्मीद है, जबकि MMI प्लान पब्लिक ट्रांसपोर्ट और आसपास के इलाकों के बीच कनेक्शन को मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, ये उपाय दिल्ली के लोगों के लिए रोजाना के सफर को ज्यादा कुशल, सुरक्षित और बेहतर कनेक्टिविटी वाला बनाने में मदद करेंगे।

यह भी पढ़ें: Delhi Varanasi Sleeper Vande Bharat: दिल्ली से वाराणसी का सफर होगा सुहाना! रातभर दौड़ेगी ‘स्लीपर वंदे भारत’, जानें रूट और टाइमिंग

Vande Bharat Depot: टाटानगर में बनेगा वंदे भारत मेंटेनेंस डिपो, जानिए ₹383 करोड़ के प्रोजेक्ट से क्या बदलेगा

Vande Bharat Depot: बीजेपी सांसद विद्युत बरन महतो ने शुक्रवार को बताया कि रेलवे बोर्ड ने जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेन कोच के लिए 383.78 करोड़ रुपये के मेंटेनेंस डिपो को मंज़ूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट से स्टेशन के मौजूदा मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और हाई-स्पीड ट्रेन ऑपरेशन के लिए सपोर्ट मजबूत होगा।

महतो ने कहा कि रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट) सुमित कुमार ने एक औपचारिक सूचना के जरिए यह मंज़ूरी दी। यह डिपो लोको कॉलोनी इलाके में टाटानगर के मौजूदा कोचिंग डिपो का विस्तार करके बनाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि इस सुविधा से मेंटेनेंस क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।

महतो ने बताया कि साउथ ईस्टर्न रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन द्वारा जमा किए गए टेक्निकल प्रपोजल की रेलवे बोर्ड द्वारा समीक्षा के बाद इस प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी गई। इस सुविधा में वंदे भारत चेयर कार और स्लीपर रेक के टेक्निकल इंस्पेक्शन, रूटीन मेंटेनेंस और जल्दी धुलाई के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा।

अभी वंदे भारत एक्सप्रेस सर्विस टाटानगर से बिहार में पटना और ओडिशा में बेरहामपुर के लिए चलती हैं। प्रस्तावित डिपो इन ट्रेनों के लिए खास मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगा और भविष्य में टाटानगर से हाई-स्पीड सर्विस के विस्तार में मदद कर सकता है।

रोजगार और क्षमता में बढ़ोतरी

महतो ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा होंगे और इलाके में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से ट्रेनों के रखरखाव और संचालन से जुड़ी सेवाओं को भी मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा स्टेशन पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए महतो ने ‘पीएम गति शक्ति’ योजना के तहत टाटानगर में चार और प्लेटफॉर्म और एक लूप लाइन बनाने का प्रस्ताव दिया है। 482 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर अभी रेलवे बोर्ड विचार कर रहा है।

बर्फबारी और सर्दियों में भी नहीं रुकेगी वंदेभारत, कश्मीर के माइनस टेंपरेचर में भी भरेगी फर्राटा, रेलेवे ने बनाया ये प्लान

जम्मू-कश्मीर में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही ट्रेनों के देर होने और उनके कैंसिल होने की समस्या अक्सर आती है। खासकर जब घाटी में बर्फबारी होती है तो वंदे भारत ट्रेन पर भी इसका असर पड़ने लगता है। वहीं अब कश्मीर घाटी में चलने वाली वंदे भारत ट्रेनों पर ठंड और बर्फ का कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि जम्मू-कश्मीर में चलने वाले वंदे भारत ट्रेनों को बेहद ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन ट्रेनों में ऐसे खास फीचर दिए गए हैं, जो सब-जीरो टेंपरेचर और घने कोहरे जैसी मुश्किल मौसम की स्थिति में भी ट्रेन को चलाने में मदद करते हैं।

लगाए जा रहे हैं हीटिंग सिस्टम

इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) के एलएचपी डिवीजन के मुख्य वर्कशॉप इंजीनियर अनुपम चौहान ने बताया कि, बहुत ठंडे और खराब मौसम वाले इलाकों में चलने वाली ट्रेनों के लिए खास सुविधाएं जरूरी होती हैं। इन फीचर्स की मदद से ऐसी परिस्थितियों में ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और आसान बनाया जा सकता है। कश्मीर में चलने वाली वंदे भारत ट्रेनों में पानी की पाइपलाइन को जमने से बचाने के लिए खास हीटिंग सिस्टम लगाया गया है। अनुपम चौहान ने बताया कि यह सिस्टम बहुत ज्यादा ठंड और सब-जीरो तापमान में भी पाइपों के अंदर पानी को जमने नहीं देता। इससे ट्रेन के टॉयलेट और दूसरी सुविधाओं के लिए पानी की सप्लाई लगातार बनी रहती है और यात्रियों को परेशानी नहीं होती।

डीफॉगिंग सिस्टम का होगा इस्तेमाल

कश्मीर के लिए तैयार की गई खास वंदे भारत ट्रेनों में एक मजबूत डीफॉगिंग सिस्टम भी लगाया गया है। अनुपम चौहान के मुताबिक, कश्मीर में घना कोहरा और शीशों पर नमी जमने से आगे और पीछे की तरफ देखने में परेशानी हो सकती है। खासकर ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट के लिए साफ दिखाई देना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में यह सिस्टम शीशों पर जमा कोहरे और नमी को हटाकर बेहतर विजिबिलिटी बनाए रखने में मदद करता है।

बनाया गया है ये खास सिस्टम

ये खास सिस्टम जम्मू-कश्मीर के कठिन मौसम को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। यहां पड़ने वाली कड़ाके की ठंड रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनों के संचालन के लिए चुनौती बनती है। ऐसे में रेलवे आधुनिक सुविधाओं के जरिए इन ट्रेनों को खराब मौसम में भी सुरक्षित तरीके से चलाने की तैयारी कर रहा है। अनुपम चौहान ने बताया कि चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), जो भारतीय रेलवे की तीन बड़ी कोच बनाने वाली फैक्ट्रियों में से एक है, अब उत्पादन बढ़ा रही है और धीरे-धीरे वंदे भारत ट्रेनों के कोच बनाने पर भी ज्यादा ध्यान दे रही है।

देश की सबसे पुरानी और बड़ी कोच बनाने वाली फैक्ट्री इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) की शुरुआत 2 अक्टूबर 1955 को हुई थी। इसका उद्घाटन उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। शुरुआत से अब तक आईसीएफ में 80 हजार से ज्यादा रेल कोच बनाए जा चुके हैं।