ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं हैं। अमेरिका की जनता को सोचसमझकर फैसला करना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा। ईरान ने UNGA में कहा था कि वह परमाणु तकनीक का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं छोड़ेगा। IRGC की चिट्ठी अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले सामने आई है। मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की सीटों के लिए चुनाव होता है। इससे राष्ट्रपति नहीं बदलता लेकिन उसकी राजनीतिक ताकत और नीतियां लागू करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। ट्रम्प पर अपने फायदे के लिए काम करने का आरोप IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्र की बात को दोहराते हुए कहा कि ट्रम्प झूठ बोलते हैं और अपने फायदे के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जिंदगी ऐसे व्यक्ति के हाथ में है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह चिट्ठी अमेरिकी सरकार की नीति बदल देगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिकी जनता को ईरान युद्ध से जुड़ी ज्यादा जानकारी मिले तो वह अलग फैसले ले सकती है। IRGC के पत्र की 3 प्रमुख बात अमेरिका युद्ध में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। ‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। बीते दिनों ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को ट्रम्प स्ट्रेट बताया था। उन्होंने इससे जड़ा एक मैप ट्रुथ सोशल पर शेयर किया था। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव होने हैं। वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं। जबकि हाउस में 218 सीटें हैं। अगर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो संसद में ट्रम्प के लिए बिल पास कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वह अपनी मर्जी से किसी बिल को सीधे कानून नहीं बना पाएंगे। यही वजह है कि ट्रम्प मिडटर्म चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कांग्रेस में उनकी पार्टी के बहुमत पर असर न पड़े। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें हैनोई हन्ना कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे: युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। पूरी खबर यहां पढ़ें…
व्हाइट हाउस ने सोमवार को ‘ट्रम्प टीवी’ लॉन्च करने की आधिकारिक घोषणा की है। यह एक डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क होगा। इस नेटवर्क पर अमेरिकी प्रशासन से जुड़ा कंटेंट 24 घंटे स्ट्रीम किया जाएगी। इससे पहले साल 2021 में ट्रम्प अपने का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ शुरू कर चुक हैं। ट्रम्प ने 18 सितंबर को CNN, MS NOW और पॉलिटिको को व्हाइट हाउस से बैन करने का ऐलान किया था। ट्रम्प ने कहा था कि ये संस्थान लगातार फेक न्यूज फैला रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भविष्य में दूसरे मीडिया संस्थानों पर भी ऐसा एक्शन हो सकता है। ट्रम्प पहले शुरू कर चुके हैं अपने का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जनवरी 2021 में बैन X पर का सामना करने के बाद ट्रम्प ने 21 फरवरी 2022 को ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था, जिसे मुख्यधारा की पाबंदियों से मुक्त अभिव्यक्ति के लिए बनाया गया है। अभी इसके लगभग 60 लाख सक्रिय यूजर्स हैं और लेकिन अकेले ट्रम्प के इस पर 1.29 करोड़ फॉलोअर्स हैं। अमेरिकी टीवी नेटवर्क्स ने ट्रम्प की कवरेज बंद की अमेरिकी टीवी नेटवर्क ने व्हाइट हाउस से तीन प्रमुख आउटलेट्स पर प्रतिबंध के विरोध में ट्रम्प के लाइव कवरेज को रोक दिया है। इस विवाद के परिणामस्वरूप, ट्रम्प द्वारा अपने नए व्हाइट हाउस हेलीपैड के उद्घाटन और संयुक्त राष्ट्र महासभा की उनकी यात्रा का लाइव कवरेज नहीं किया जा रहा है ट्रम्प पक्षपात का आरोप लगाते रहे हैं साल 2016 से ही ट्रम्प CNN की खबरों को लगातार ‘फेक न्यूज’ कहते रहे हैं और उनके कार्यकाल में पहले भी इस चैनल के पत्रकारों के व्हाइट हाउस पास रोके जा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ जैसे बड़े और प्रतिष्ठित अखबारों पर भी अपने खिलाफ पक्षपात करने का आरोप लगाया और उन पर मानहानि के केस तक दर्ज कराए। ट्रम्प ने इन सभी संस्थानों की रिपोर्टिंग पर खुले तौर पर सवाल उठाए और उन पर जानबूझकर गलत नीयत से खबरें चलाकर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया। —————————- ये खबर भी पढे़ं… ट्रम्प ने कनाडा को लेकर यूरोप को धमकी दी:कहा- EU में शामिल किया तो भारी टैरिफ लगाऊंगा, व्यापार भी रोक दूंगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय संघ को गंभीर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर निशाना साधा है। ट्रंप ने कहा कि पुतिन इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं, न कि इसे अगले 10 साल तक चलते हुए देखना चाहते हैं। बता दें कि ट्रंप ने यह दावा जेलेंस्की के साथ हुई बातचीत के बाद किया। ट्रंप ने कहा, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध खत्म करना चाहते हैं, जबकि यूक्रेनी नेता संघर्ष को लंबा खींचना चाहते हैं।
ट्रंप ने कहा, “आज जेलेंस्की के साथ हमारी मीटिंग हुई, और उनके नजरिए से यह मीटिंग अच्छी नहीं रही। मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी स्थिति का जरूरत से ज्यादा फायदा उठाने की कोशिश की। मैं शांति चाहता हूं, न कि 10 साल तक चलने वाली जंग या कोई खेल-तमाशा। हम शांति चाहते हैं! वह लड़ते रहना चाहते हैं, जबकि हम मौतों को रोकना चाहते हैं। पिछले हफ्ते 2,000 लोग मारे गए। राष्ट्रपति पुतिन इसे खत्म करना चाहते हैं, जबकि जेलेंस्की हमें 10 साल की लड़ाई में उलझाए रखना चाहते हैं। ऐसा नहीं होगा।”
इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस ने दुर्भाग्य से अपने डीजल तेल उद्योग के कुछ हिस्सों पर से नियंत्रण खो दिया है।
ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर लिखा, “उनकी कई डीजल रिफाइनरियों को उड़ा दिया गया है और वे कम से कम कुछ समय के लिए तो बंद ही हैं। यूक्रेन के साथ चल रहे इस बेतुके और कभी न खत्म होने वाले युद्ध को खत्म किया जाना चाहिए। पूरी दुनिया को नुकसान हो रहा है क्योंकि हर महीने 25,000 लोग, जिनमें ज्यादातर सैनिक हैं, मारे जा रहे हैं। कितनी शर्म की बात है!”
ट्रंप के साथ बैठक से ‘बहुत कुछ बदल सकता है’- जेलेंस्की
ट्रंप से बातचीत के बाद, जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति उनसे न्यूयॉर्क में मिलने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बैठक से “बहुत कुछ बदल सकता है” और इससे “राजनयिक गति” मिलेगी।
जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के कीव दौरे के लिए ट्रंप का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने यूक्रेन के हालात पर विस्तार से चर्चा की।
जेलेंस्की ने आगे कहा, “शांति की कोशिश हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।” उन्होंने बताया कि तनाव कम करने और सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों को सुलझाने के लिए कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई है। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और लोगों की जान की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया, “हम अमेरिकी टीम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और बहुत गंभीर कदम उठाने के लिए तैयार हैं।”
जेलेंस्की ने ट्रंप का लिंडसे ग्राहम के समर्थन वाले बिल को कानून का रूप देने के लिए भी धन्यवाद किया। उन्होंने एक बार फिर कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि युद्ध का समाधान शांति के जरिए निकाला जाना चाहिए।
जेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन के साथ खड़े रहने वाले हर व्यक्ति का धन्यवाद। हमारी मदद करने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद।”

Top News 21 September: केरल में भारी बारिश से तबाही। टाटा संस में चेयरमैन पद पर एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट ने उठाए सवाल। ट्रंप बदल सकते हैं एआई का नाम। ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात तय। जॉर्जिया मेलोनी स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाएगी। 21 सितंबर की बड़ी खबरें :
केरल में भारी बारिश से तबाही
केरल में भारी बारिश से भारी तबाही हुई। वर्षा जन्य हादसों में 5 लोगों की मौत हो गई। मलप्पुरम, इडुक्की और कोट्टायम में बारिश से हाल बेहाल है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने राज्य के हालात का हर घंटे आकलन करने का निर्देश दिया है।
एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट का सवाल
Tata Trusts ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी है। ट्रस्ट ने कहा कि उनकी पुनर्नियुक्ति के समर्थन में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की जो व्याख्या दी जा रही है, वो सही नहीं है। Tata Trusts ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर दी जा रही दलीलों को भी खारिज किया है। ALSO READ: Tata Trust ने एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर उठाए सवाल, खारिज किया बोर्ड का फैसला, री-अपॉइंटमेंट को दी चुनौती
क्या ट्रंप बदल देंगे AI का नाम?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के नाम को बदलने की चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक ऑनलाइन पोल शुरू किया और लोगों से एआई के लिए नया नाम चुनने को कहा। ट्रंप ने सुपीरियर इंटेलिजेंस, एक्सट्रीम इंटेलिजेंस और सुप्रीम इंटेलिजेंस तीन विकल्प दिए हैं। ALSO READ: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, अमेरिका में बनेगी एआई फोर्स, क्या अब बदलेंगे AI का नाम?
ट्रंप-जेलेंस्की की मुलाकात तय
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। जेलेंस्की ने इसे बेहद अहम बातचीत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की और अब न्यूयॉर्क में मुलाकात करने पर सहमति बनी है।
बुर्के-नकाब पर मेलोनी का बड़ा फैसला
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इसके तहत इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित की जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सलाहकार नियुक्त करने की योजना के बारे में बताया। उन्होंने एक ‘AI फोर्स’ बनाने का ऐलान किया। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर यह जानकारी दी। उन्होंने दोनों योजनाओं के ढांचे और उन्हें लागू करने का तरीका नहीं बताया। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और चीन AI में बढ़त हासिल करने की होड़ में हैं। ट्रम्प की गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होनी है। ट्रम्प ने कहा कि उनका प्रशासन AI को बढ़ावा देगा। संभावित गलत कामों से निपटने के लिए मौजूदा आपराधिक और सिविल न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रम्प ने 2019 में स्पेस फोर्स बनाई थी। ट्रम्प ने लिखा, “हम इस शानदार उद्योग की ग्रोथ को किसी भी तरह नहीं रोकेंगे या दबाएंगे। इसके बजाय, हम इसे महत्व देंगे, मदद करेंगे और इसके बढ़ने पर नजर रखेंगे।” ट्रम्प ने कहा हम AI इंडस्ट्री को खत्म नहीं करना चाहते ट्रम्प ने AI और डेटा सेंटर के आलोचकों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उदारवादी लोग इस इंडस्ट्री को ‘खत्म’ करना चाहते हैं। ट्रम्प ने लिखा, “अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।” उन्होंने आगे लिखा, “हम किसी भी तरह इस शानदार इंडस्ट्री के विकास में रुकावट नहीं डालेंगे। हम इसे बढ़ने में मदद करेंगे और इसकी निगरानी करेंगे।” अमेरिका में AI कंपनियों के खिलाफ केस अमेरिका में एंथ्रोपिक, OpenAI, स्पेसएक्सएआई और गूगल के खिलाफ शनिवार को मुकदमा दायर हुआ है। इन कंपनियों पर AI विकास की रफ्तार धीमी करने के लिए अवैध समझौते का आरोप है। इसमें कहा गया है कि कंपनियों ने एंटीट्रस्ट कानून तोड़े हैं। याचिका के मुताबिक, कंपनियों के बीच तालमेल से पेड AI सब्सक्रिप्शन लेने वाले ग्राहकों को मिलने वाला लाभ कम हो सकता है। इससे पहले 12 सितंबर को एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने AI विकास धीमा करने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने के लिए उद्योग-स्तरीय सहयोग की अपील की थी। इसके बाद OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, स्पेसएक्सएआई के CEO एलन मस्क और गूगल डीपमाइंड के सह-संस्थापक व चेयर डेमिस हासाबिस ने उनके प्रस्ताव पर सहमति जताई। मुकदमे में कहा गया है कि AI क्षेत्र के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के बीच विकास की रफ्तार प्रतियोगिता से कम रखने का समझौता उपभोक्ताओं के खिलाफ प्रतिस्पर्धा-विरोधी असर डालता है। ———————————————– ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:‘2030 तक AI हम सबको मार सकता है’, रिसर्चर के इस्तीफे में चेतावनी; AI की दुनिया में अंदरखाने ऐसा क्या चल रहा ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI का दावा है कि उनके AI सिस्टम ने गणित की उस समस्या को 88 घंटे में सुलझा लिया, जिसने करीब 90 साल से इंसानों को उलझा रखा था। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती की मांग की है। खास बात यह है कि ट्रंप की यह मांग ऐसे समय आई है, जब फेडरल रिजर्व ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। हालांकि, इस बार ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श पर सीधे निशाना साधने से परहेज किया है। अब चलिए जानते हैं ट्रंप ने आखिर ब्याज दरों में कटौती की मांग क्यों की, और फेड ने इसके उलट दरें बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?
गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “हम दुनिया के लगभग हर देश का ‘बोझ उठा’ रहे हैं, और ऐसा अब और नहीं चल सकता। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के लिए ब्याज दरें कम करें, और जल्द करें!”
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि देश की क्रेडिट रेटिंग बहुत अच्छी है और निवेश तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कम लागत पर उधार लेना सही ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है, उनके साथ व्यापार बंद करने से हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमाए जा सकते हैं। दरअसल, उनका तर्क था कि व्यापार घाटा असल में नुकसान ही है।
उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में लिखा, “अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि हमारी क्रेडिट रेटिंग दुनिया में सबसे अच्छी है — और इसमें कोई शक नहीं है। हमारे देश में नए निवेश तेजी से बढ़ रहे हैं! अगर हम उन सभी देशों के साथ व्यापार बंद कर दें जिनके साथ हमारा व्यापार घाटा है — और ऐसे ज्यादातर देश हैं — तो हम हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमा सकते हैं। ‘Deficit’ शब्द असल में ‘Loss’ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक फैंसी शब्द है।”
बता दें कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। वहीं, इस फैसले के साथ फेड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को नजरअंदाज कर दिया जिसमें उन्होंने ब्याज दरें घटाने की मांग की थी। सेंट्रल बैंक के प्रमुख केविन वार्श ने कहा कि महंगाई अभी भी काफी ज्यादा है और लंबे समय से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
फेड की फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75 से 4.00% के बीच करने के लिए वोट किया। कमिटी का कहना है कि दरें बढ़ने से महंगाई को उसके 2% के लक्ष्य तक जल्द वापस लाने में मदद मिलेगी।
ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉर्श ने कहा कि यह फैसला “गंभीर” था, लेकिन इसे लेना जरूरी था।
उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “साफ बात यह है कि महंगाई बहुत ज्यादा है और काफी समय से ऐसी ही बनी हुई है।”
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा की विमान कंपनी बॉम्बार्डियर को अमेरिका में विमान बेचने से रोकने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर बॉम्बार्डियर को अमेरिकी बाजार में कारोबार करना है तो उसे विमान अमेरिका में ही बनाने होंगे। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका के बाजार का गलत फायदा उठा रहा है। हालांकि ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि बॉम्बार्डियर के विमानों की बिक्री रोकने के लिए अमेरिका कौन-सा कदम उठाएगा। ट्रम्प ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, अमेरिका में बॉम्बार्डियर विमान की बिक्री अब नहीं होगी। उन्हें अमेरिका को पिगी बैंक समझना बंद करना होगा। अमेरिका बॉम्बार्डियर के लिए सबसे बड़ा बाजार है अमेरिका बॉम्बार्डियर कंपनी के लिए बेहद अहम बाजार है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में बॉम्बार्डियर की कुल आय 9.55 अरब डॉलर रही। इस कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि कमाई का 50 प्रतिशत अमेरिका में किए गए कारोबार से आया। कंपनी ने कहा- हमने US में हजारों लोगों को नौकरी दी ट्रम्प की धमकी के बाद बॉम्बार्डियर कंपनी ने कहा कि उसका अमेरिका में बड़ा कारोबार है और इससे वहां हजारों लोगों को नौकरी मिलती है। कंपनी ने बताया कि उसकी सप्लाई चेन में अमेरिका के 47 राज्यों की करीब 2,800 कंपनियां शामिल हैं। बॉम्बार्डियर ने यह भी कहा कि उसके विमानों में अमेरिका में बने इंजन, एवियोनिक्स और कई दूसरे अहम उपकरण इस्तेमाल होते हैं। कंपनी इस साल इंडियाना के फोर्ट वेन में अपनी नई फैसिलिटी भी शुरू करने वाली है। जनवरी में भी ट्रम्प ने दी थी धमकी कनाडाई कंपनी बॉम्बार्डियर को लेकर ट्रम्प पहले भी सख्त रुख अपना चुके हैं। जनवरी में उन्होंने कंपनी के विमानों का अमेरिका में सर्टिफिकेशन रद्द करने और कनाडाई विमानों पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उस समय ट्रम्प कनाडा से इसलिए नाराज थे क्योंकि उनका आरोप था कि कनाडा ने अमेरिकी कंपनी गल्फस्ट्रीम के नए विमानों को सर्टिफिकेशन देने से इनकार किया था। उस समय ट्रम्प की धमकी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बॉम्बार्डियर के विमान अभी भी अमेरिका में सर्टिफाइड हैं। अमेरिका-कनाडा के बीच बढ़ रहा ट्रेड वॉर बॉम्बार्डियर पर ट्रम्प की नई धमकी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। पिछले महीने ट्रम्प ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% टैरिफ लगाया था। इसमें हॉकी स्टिक से लेकर सीमेंट तक के सामान शामिल थे। इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। ये टैरिफ मंगलवार से प्रभावी हो गए हैं। बॉम्बार्डियर पर रोक लगाना आसान नहीं ट्रम्प की धमकी के बावजूद बॉम्बार्डियर के विमानों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाना आसान नहीं होगा। अमेरिका में विमानों को सर्टिफाई करने की जिम्मेदारी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी FAA की है। यानी राष्ट्रपति सीधे किसी विमान का सर्टिफिकेशन रद्द नहीं कर सकते। इसके लिए संबंधित अमेरिकी एजेंसी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। अमेरिका-कनाडा के बीच विवाद की 5 बड़ी वजहें 1. टैरिफ की नई लड़ाई सबसे बड़ा विवाद टैरिफ को लेकर है। अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इसमें शराब, डेयरी, फर्नीचर, हॉकी उपकरण और कई दूसरे सामान शामिल हैं। बातचीत टूटने के बाद कनाडा ने भी डॉलर-फॉर-डॉलर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। 2. कनाडा को 51वां राज्य कहना ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका व्यापार के मामले में कनाडा को अरबों डॉलर का फायदा पहुंचाता है। यदि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन जाता है, तो यह व्यापारिक असमानता और टैरिफ से जुड़े विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे। 3. ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर कहना ट्रम्प ने कई बार कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को तंजिया लहजे में ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित किया था। कनाडाई नेताओं और जनता ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान माना। 4. सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और फेंटानिल तस्करी अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ती सीमा सुरक्षा चिंताएं भी बड़े विवाद का कारण बनी हैं। ट्रम्प प्रशासन का आरोप रहा है कि कनाडा की उत्तरी सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ और खतरनाक नशीली दवाओं (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी अमेरिका में बढ़ रही है। अमेरिका ने कनाडा से अपनी सीमाओं पर सख्त निगरानी और सख्त आव्रजन नीतियां लागू करने की मांग की है। 5. डेयरी और कृषि विवाद अमेरिका लंबे समय से कनाडा की ‘सप्लाई मैनेजमेंट’ सिस्टम का विरोध करता रहा है, जो कनाडाई डेयरी और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) मार्केट को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाती है। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपने डेयरी बाजार को अमेरिकी किसानों के लिए पूरी तरह खोले। ———————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को ‘भौंकने वाला छोटा कुत्ता’ बताया: बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कनाडा की तुलना छोटे कुत्ते से की। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया। जुलाई के के बाद ईरान पर यह पहला अमेरिकी हमला है। अमेरिकी सेना ने बताया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जवान होर्मुज स्ट्रेट में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे, तभी अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की। ईरान के सेमी-ऑफिशियल मीडिया ने लारक द्वीप के पास धमाकों की आवाज सुनाई देने की जानकारी दी। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका ने द्वीप पर ड्रोन से हमला किया। ईरानी सेना ने बताया कि हमले में उनके कई सैनिक और नागरिक मारे गए हैं। कई घायल हैं। ईरान ने हमले का जवाब देने और जिम्मेदार लोगों को सजा देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी सेना ने हाल ही में हटाई थीं बारूदी सुरंगें अमेरिकी सेना ने पिछले हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का काम पूरा किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मौजूद सभी सुरंगों को हटा दिया गया या निष्क्रिय कर दिया गया है। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई जहाज या नाव होर्मुज स्ट्रेट में नई समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश करेगी, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच का प्रमुख समुद्री रास्ता है। दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। संघर्ष से पहले दुनिया में इस्तेमाल होने वाले करीब पांचवें हिस्से के तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती थी। यही वजह है कि होर्मुज में तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही रुकने से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच यहां बढ़ती सैन्य गतिविधि को इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर माना जा रहा है। फरवरी से जारी है अमेरिका-इजराइल और ईरान का युद्ध अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों पर हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। संघर्ष को अब छह महीने से ज्यादा हो चुके हैं और हाल के हफ्तों में स्थिति गतिरोध जैसी बनी हुई है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के अलावा लेबनान में इजराइली हमलों से भी भारी नुकसान हुआ है। इन हमलों में हजारों लोगों की मौत और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की जानकारी है। होर्मुज को अमेरिका का इलाका बता चुके हैं ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपतिट्रम्प होर्मुज स्ट्रेट को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी नया अमेरिकी इलाका बता चुके हैं। 18 अगस्त को उन्होंने पहली बार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इसके बाद उन्होंने 23 अगस्त को ट्रुथ सोशल पर दोबारा ऐसी तस्वीर शेयर की, जिसमें होर्मुज को अमेरिकी इलाके के तौर पर दिखाया गया। जंग के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज जंग शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… ईरान होर्मुज में जहाजों से टोल वसूलेगा, संसद की मंजूरी ईरान की संसद ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल यानी टैक्स या फीस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिन देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, उनसे समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक ऐसा सौदा किया है, जिसके तहत इसे 6500 करोड़ बैरल से अधिक के प्रूवेन यानी मिल चुके तेल भंडार पर मेजॉरिटी कंट्रोल मिलेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार तड़के यह दावा किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस सौदे के बारे में ऐलान किया। ट्रंप ने दुनिया के इतिहास में इसे अब तक की सबसे बड़ी ऑयल डील कहा है और कहा कि इससे अमेरिका का तेल भंडार दोगुना से अधिक हो जाएगा। हालांकि उन्होंने समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि इसके बदले वेनेजुएला को क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पहले से मजबूत होते संबंधों को और मजबूत करेगा।
दावा: अमेरिका और वेनेजुएला, दोनों के लिए फायदे का सौदा
ट्रंप के अनुसार अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ मिलकर निजी कंपनियों की साझेदारी के जरिए इस सौदे पर बातचीत की। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को अमेरिकी और वेनेजुएला के लोगों के लिए बहुत बड़ी जीत बताया। ट्रंप कीके ऐलान के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व नाम Twitter) पर उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिका को स्थिर और कम लागत वाला तेल मिलेगा, तो वेनेजुएला में लगभग $10 हजार करोड़ के निजी निवेश, हजारों अच्छी सैलरी वाली नौकरियां और देश की अर्थव्यवस्था को फिर से ट्रैक पर लाने में मदद मिल सकती है।
वेनेजुएला में बढ़ रहा अमेरिका का दखल!
दोनों देशों के बीच यह समझौता वेनेजुएला में महीनों तक चली अमेरिका की गहरी दखलंदाजी के बाद हुआ है जोकि जनवरी में लंबे समय से राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो को हटाए जाने और उनके पकड़े जाने के बाद शुरू हुई थी। मादुरो के उपराष्ट्रपति रहे रोड्रिगेज ने फिर अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर कमान संभाली और अमेरिका ने उनकी सरकार के साथ बेहतर साझेदारी की उम्मीद की। वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा प्रूवेन तेल भंडार है, जिसका अनुमान लगभग 30 हजार करोड़ बैरल है।
एक्सियोस ने गुरुवार को दो अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल के ऐसे 12 प्रोडक्टिव ऑयल फील्ड्स के बारे में बातचीत चल रही थी, जिनमें लगभग 9000 करोड़ बैरल का पक्का भंडार है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मालिकाना हक के बदले इन जगहों को डेवलर करेंगी, तो वेनेजुएला को तेल से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा मिलेगा। वेनेजुएला में अभी हर दिन लगभग 12.5 लाख बैरल कच्चा तेल निकलता है।
खत्म हुआ इंतजार, जैक्सन होल की बैठक में अमेरिकी फेड ने महंगाई को लेकर जताई चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी नेगोसिएटिंग टीम से ईरान के साथ वार्ता रोकने को कहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने यह फैसला तब तक के लिए लिया है, जब तक तेहरान किसी डील के लिए तैयार नहीं हो जाता। अमेरिकी अधिकारी ने अल जजीरा को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच अब तक सकारात्मक बातचीत हुई थी, लेकिन ट्रम्प ने आगे की बातचीत शुरू करने से पहले इंतजार करने का फैसला किया। ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया था। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- नया अमेरिकी क्षेत्र ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक ग्राफिक पोस्ट किया, जिसके ऊपर ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ लिखा था। इस मैप में होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास का समुद्री इलाका दिखाया गया था। इसमें ईरान, ओमान और UAE के हिस्से भी नजर आ रहे थे। ट्रम्प बोले- होर्मुज में नाकाबंदी जारी ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज को लेकर कहा कि वहां अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी पूरी तरह लागू है। होर्मुज खुला है और वहां आवाजाही जारी है। वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के अपना वादा पूरी करने तक ईरान होर्मुज को दोबारा नहीं खोलेगा। ट्रम्प के कहने से होर्मुज अमेरिका का हिस्सा हो जाएगा? सीधा जवाब है- नहीं। होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। इस रास्ते से दुनिया के कई देशों के तेल और गैस से भरे जहाज गुजरते हैं। इसलिए इस पर सिर्फ किसी एक देश का अधिकार नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों के जहाजों को इस रास्ते से आने-जाने का अधिकार है। इसी वजह से कोई भी देश सिर्फ अपने दम पर इस समुद्री मार्ग पर कब्जे का दावा नहीं कर सकता। इसलिए ट्रम्प का मैप एक राजनीतिक दावा या मैसेज माना जा सकता है, लेकिन इससे अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट पर अपने आप कोई नया कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। होर्मुज स्ट्रेट पर किसका अधिकार है? होर्मुज स्ट्रेट का उत्तरी हिस्सा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसंदम क्षेत्र से लगता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज इसी रास्ते से अरब सागर और फिर हिंद महासागर की ओर जाते हैं। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि कई देशों के लिए अहम समुद्री मार्ग है। अमेरिका यहां अपने युद्धपोत और नौसैनिक बल तैनात रखता है ताकि समुद्री व्यापार और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है? खाड़ी देशों से दुनिया को भेजे जाने वाले करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होती है। फरवरी में अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने से पहले हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से होकर गुजरता था। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सप्लाई काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। इसी वजह से अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्द से जल्द सामान्य हो। दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और समझौते में किए गए वादे पूरे नहीं करता, तब तक यह रास्ता नहीं खोला जाएगा। ————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की लोकप्रियता घटी, सिर्फ 33% लोगों की पसंद:ईरान युद्ध के चलते गिरावट; 80% अमेरिकी बोले- जंग लंबी चलेगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता ईरान युद्ध के बीच लगातार घट रही है। रॉयटर्स/इप्सोस के ताजा सर्वे में सिर्फ 33% अमेरिकियों ने ट्रम्प के कामकाज को मंजूरी दी। पूरी खबर पढ़ें…


