बयानों की आग में झुलसता भारत: क्या शब्दों से बढ़ रही है देश की मुश्किलें?

controversial statement

भारत-जहां बुद्ध की शांति, महावीर की अहिंसा, कबीर का भ्रातृभाव और गांधी का सत्याग्रह पला-बढ़ा, आज वही देश कड़वे, विवादास्पद और घृणास्पद बयानों के तीर से बार-बार छलनी हो रहा है। हाल के समय में, चाहे वह राजनीति का गलियारा हो, धार्मिक मंच हों, या सोशल मीडिया के ट्रेंड्स- ऐसे बयानों की एक बाढ़ सी आ गई है जो देश के सामाजिक ताने-बाने को लगातार नुकसान पहुँचा भारत को अराजक रास्ते पर ले जा रही है। इस बाढ़ में सभी बह रहे हैं।

 

“शब्द यदि विचारपूर्वक न बोले जाएं, तो वे बाण से भी अधिक घातक सिद्ध होते हैं। बाण शरीर को बेधता है, किंतु अनुचित शब्द देश और समाज की आत्मा को घायल कर देते हैं।”

 

1. भाषा का गिरता स्तर और राजनीतिक मर्यादाएं

हाल के दौर में हमने देखा है कि सार्वजनिक संवाद में गरिमा की जगह तीखे व्यक्तिगत हमलों और भड़काऊ बयानबाजी ने ले ली है।

ध्रुवीकरण की राजनीति: चुनावी रैलियों और जनसभाओं के दौरान अक्सर ऐसे बयान देखने को मिलते हैं जहाँ विरोधी दल के नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल होता है।

पहचान पर प्रहार: हालिया बहसों और भाषणों में अक्सर किसी वर्ग, क्षेत्र या धर्म विशेष के लोगों को 'फर्जी', 'घुसपैठिया' या 'अराष्ट्रीय' करार देने की होड़ दिखाई देती है। राजनीतिक लाभ के लिए की जाने वाली यह बयानबाजी समाज में स्थायी दरार पैदा करती है।

 

2. नफ़रत भरे बयान (Hate Speech) और सामाजिक दरार

विभिन्न रिसर्च और रिपोर्टों (जैसे इंडिया हेट लैब और मानवाधिकार अध्ययन) के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में घृणास्पद भाषणों (Hate Speech) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

आस्था बनाम उकसावा: धार्मिक आयोजनों और रैलियों के मंचों से कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं, जहाँ एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काया जाता है या उनके बहिष्कार की बात की जाती है।

सहिष्णुता का ह्रास: जब ऐसे बयान सामने आते हैं, तो यह सदियों पुरानी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और आपसी भाईचारे की भावना को गहराई से चोट पहुँचाते हैं।

 

3. सोशल मीडिया: आग में घी का काम

आज के डिजिटल युग में एक भड़काऊ बयान केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहता जहाँ वह बोला गया।

टीआरपी और एल्गोरिदम का खेल: सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (Algorithms) विवादित बयानों को मिनटों में वायरल कर देते हैं।

अधूरी जानकारी और नफ़रत का प्रसार: भ्रामक संदर्भों और विवादित वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल युवाओं के मन में आक्रोश और ज़हर घोलने के लिए किया जा रहा है।

 

4. बयानों से भारत को होने वाले नुकसान

सामाजिक समरसता: समाज में अविश्वास और भय का माहौल बनता है, जिससे आपसी सौहार्द नष्ट होता है।

वैश्विक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक लोकतांत्रिक और सहिष्णु राष्ट्र की छवि को आघात पहुँचता है।

आर्थिक प्रगति: जिस देश या राज्य में सामाजिक अस्थिरता होती है, वहाँ निवेशक और उद्योग आने से हिचकिचाते हैं।

युवाओं पर प्रभाव: संवाद की आक्रामकता देखकर भावी पीढ़ी तर्क और विचारशीलता के स्थान पर नफ़रत को सामान्य मानने लगती है।

 

5. समाधान का मार्ग: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम ज़िम्मेदारी

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिक को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) इसके साथ युक्तियुक्त निर्बंधन (Reasonable Restrictions) भी जोड़ता है- अर्थात् यह स्वतंत्रता किसी को नफ़रत फैलाने या लोक व्यवस्था (Public Order) को बिगाड़ने का अधिकार नहीं देती।

कानूनी सख्त कार्रवाई: हेट स्पीच पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव से परे हटकर निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेताओं और जिम्मेदार पदों का आत्म-नियमन: सार्वजनिक जीवन में मौजूद लोगों को समझना होगा कि उनके हर एक शब्द का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

डिजिटल साक्षरता और संयम: आम जनता को भी सोशल मीडिया पर किसी भड़काऊ बयान को बढ़ावा देने या शेयर करने से बचना चाहिए।

 

शब्द ही जोड़ते हैं और शब्द ही तोड़ते हैं। भारत अगर विभिन्नताओं में एकता की विशाल मिसाल है, तो इस मिसाल को बनाए रखने का दायित्व हम सभी का है। जब तक सार्वजनिक जीवन में भाषण की गरिमा, मर्यादा और सत्य निष्ठा वापस नहीं लौटती, तब तक देश की आत्मा बयानों के इस ज़हर से घायल होती रहेगी। अब समय आ गया है कि हम “बोलो, पर जोड़ने के लिए; तोड़ो, पर केवल नफ़रत के बंधनों को” का विचार अपनाएं। चलिए अब जान लेते हैं 10 विवादित बयान।

 

10 विवादित बयान: 

राज बब्बर, रशीद मसूद, मायावती, अखिलेश यादव, फारूख अब्दुल्ला, मोहम्मद हामिद अंसारी, नसीरुद्दीन शाह, चंदन मित्रा, अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, बाबा रामदेव, अरविन्द केजरीवाल, नरेंद्र मोदी, बाल ठाकरे, संजय राउत, नितिन गडकरी, सलमान खुर्शीद, लालू यादव, गिरिराज सिंह, डेरेक ओ ब्रायन, ममता बनर्जी, सायली घोष आदि कई लोग हैं जो समय समय पर बयानवीर का खिताब लेते रहे हैं। देश की हर पार्टी में एक से बढ़कर एक बयानवीर भरेपड़े हैं।

 

1. “अनुपवेशकों और अधिक बच्चों वालों को धन बांटने” पर पीएम मोदी का बयान (2024)

बयान: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राजस्थान की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के घोषणापत्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि संपत्ति का सर्वे कराकर उसे “अनुप्रवेशकर्ताओं” (Infiltrators) और “जिनके ज्यादा बच्चे हैं” को बांट दिया जाएगा।

विवाद: विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला और धुव्रीकरण पैदा करने वाला बयान बताया, जिसकी काफी आलोचना हुई।

 

2. “सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया की तरह है”– उदयनिधि स्टालिन (2023)

बयान: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में कहा कि “सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि डेंगू और मलेरिया की तरह इसे समाप्त कर देना चाहिए।” उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान का समर्थन करते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि “कोई भी ऐसा धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता, जो इंसानों में भेदभाव करता है और सम्मान नहीं देता, वह बीमारी के समान है।”

विवाद: इस बयान पर देश भर में भारी आक्रोश फैला। भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने इसे बहुसंख्यक आबादी की आस्था का अपमान बताते हुए अदालतों में याचिकाएं दायर कीं। बीजेपी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस बयान को सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं पर सीधा प्रहार बताया। इसके बाद प्रियांक खरगे और उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

 

3. “मोदी सरनेम” टिप्पणी– राहुल गांधी (2019/कानूनी कार्रवाई 2023)

बयान: चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, “सब चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है?”

विवाद: इस बयान के खिलाफ गुजरात में मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ। मार्च 2023 में सूरत की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, जिसके चलते उनकी संसद सदस्यता रद्द (जो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बहाल) हो गई थी।

 

4. “शक्ति” से लड़ने संबंधी बयान– राहुल गांधी (2024)

बयान: भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर मुंबई में राहुल गांधी ने कहा, “हिंदू धर्म में एक शब्द है 'शक्ति'। हम एक शक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

विवाद: प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने इस बयान को हिंदू आस्था और नारियों की 'शक्ति' के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे चुनाव के दौरान भारी राजनीतिक घमासान मचा।

 

5. “देश के गद्दारों को, गोली मारो…” – अनुराग ठाकुर (2020)

बयान: दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक रैली में नारा लगवाया: “देश के गद्दारों को… गोली मारो सा… को।”

विवाद: इस बयान को चुनावी माहौल में नफरत और हिंसा भड़काने वाला माना गया। चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया था।

 

6. “अगर रोड खाली नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे”– कपिल मिश्रा (2020)

बयान: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने कहा था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के जाने तक हम शांत हैं, लेकिन अगर रास्ते खाली नहीं कराए गए तो हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे।”

विवाद: इस बयान के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसके लिए कई रिपोर्टों में इस भाषण को जिम्मेदार माना गया।

 

7. रामचरितमानस और पांडुलिपियों पर विवादित टिप्पणी– स्वामी प्रसाद मौर्य (2023)

बयान: समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “इनमें दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का अपमान किया गया है, इसलिए इस ग्रंथ या इसके विवादित अंशों पर बैन लगना चाहिए।”

विवाद: इस बयान से साधु-संतों और धार्मिक संगठनों में भारी रोष पैदा हुआ और देश भर में जगह-जगह मौर्य के पुतले फूंके गए थे।

 

8. किसान आंदोलन और “100-100 रुपये में आने वाली महिलाएं”- कंगना रनौत (2020)

बयान: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने एक बुजुर्ग महिला (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि “ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये लेकर धरने में बैठने आ जाती हैं।” उल्लेखनीय है कि हाल ही में कंगना ने 'जेन जी' (Gen Z) को गटर जनरेशन कहा है।

विवाद: इस बयान से किसान संगठन बेहद नाराज हुए। इसी बयान के गुस्से के कारण जून 2024 में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सुरक्षाकर्मी महिला (CISF कांस्टेबल) ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

 

9. 'कॉकरोच' (Cockroach) शब्द वाली टिप्पणी और विवाद- CJI (2026) 

बयान: कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI) की टिप्पणी में कहा गया था कि “बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह सोशल मीडिया, पत्रकारिता और RTI कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं”। उन्होंने कहा था कि कई युवा नौकरी या वकालत के पेशे में जगह न मिलने पर सोशल मीडिया, आरटीआई (RTI) एक्टिविज़्म या अन्य माध्यमों से सिस्टम पर हमला करने का जरिया ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह टिप्पणी फर्जी और जाली डिग्रियों (Fake Degrees) के जरिए वकालत या अन्य पेशों में पिछले दरवाजे से घुसे लोगों और फर्जी पत्रकारों/एक्टिविस्टों के लिए थी, न कि देश के ईमानदार छात्रों और युवाओं के लिए। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है।

विवाद: जब इस बयान पर देशभर के युवाओं में भारी विरोध और बहस छिड़ी, तो CJI ने स्पष्टीकरण जारी किया कि उनकी इस टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया था, लेकिन इस एक बयान ने CJP पार्टी को जन्म देकर देश में एक बहुत बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा कर दिया और फिर जो हुआ उसे सभी ने देखा है।

 

10. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे का विवादित बयान: 

बयान: अप्रैल 2023 में कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने सीधे हिंदू धर्म पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पर निशाना साधते हुए 'सांप' का उदाहरण दिया था। बीजेपी/आरएसएस की विचारधारा एक जहरीले सांप की तरह है। अगर आप सोचेंगे कि यह जहरीला है या नहीं, और इसे चाटकर (जांचकर) देखेंगे, तो आप मारे जाएंगे। इसलिए पहले इस सांप को मारना जरूरी है।'

विवाद: भाजपा ने इस बयान को मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता बहुसंख्यक समुदाय की विचारधारा और पार्टी का अपमान करने के लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

भारत में एवरेज क्रेडिट स्कोर क्या है?

भारत में फाइनेंशियल मामलों में क्रेडिट स्कोर का कॉन्सेप्ट तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है. क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स के बढ़ते यूज के साथ ये स्कोर लोन लेने या क्रेडिट कार्ड अप्लाई करने में बड़ा रोल प्ले करता है. ये 300 से 900 तक का थ्री-डिजिट नंबर है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर आपकी क्रेडिटवर्थीनेस को रिफ्लेक्ट करता है. हायर स्कोर बेहतर क्रेडिट हेल्थ दिखाता है. क्रेडिट स्कोर, जिसे सिबिल स्कोर भी कहते हैं, रिपेमेंट हिस्ट्री, क्रेडिट यूटिलाइजेशन, क्रेडिट हिस्ट्री कितनी पुरानी है, क्रेडिट टाइप्स और रीसेंट क्रेडिट इंक्वायरीज जैसे फैक्टर्स से तय होता है.

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर आप स्ट्रॉन्ग क्रेडिट रिपोर्ट बनाए रख सकते हैं और अपनी फाइनेंशियल प्रॉस्पेक्ट्स को बेहतर कर सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर रेंजेस

भारत में क्रेडिट स्कोर को कई रेंज में बांटा जाता है, जो क्रेडिटवर्थीनेस के अलग-अलग लेवल्स दिखाती हैं.

750 से 900: ये रेंज एक्सेप्शनल मानी जाती है. इस रेंज वाले कंज्यूमर्स को लोअर इंटरेस्ट रेट्स और हायर लोन अप्रूवल चांसेज मिलते हैं.

700 से 749: ये गुड क्रेडिट स्कोर है. ये रिलायबल क्रेडिट हिस्ट्री दिखाता है, लेकिन एक्सीलेंट जितना स्ट्रॉन्ग नहीं.

650 से 699: फेयर रेंज. क्रेडिट ऑफर्स मिल सकते हैं, लेकिन हायर इंटरेस्ट रेट्स के साथ.

600 से 649: पुअर स्कोर. क्रेडिट लेना मुश्किल हो सकता है और अगर मिले तो हायर इंटरेस्ट रेट्स.

600 से नीचे: इमीडिएट एक्शन की जरूरत, क्योंकि लेंडर्स इसे रिस्की मानते हैं.

ट्रांसयूनियन सीबिल रिपोर्ट के मुताबिक, जो कंज्यूमर्स अपनी क्रेडिट को एक्टिवली मॉनिटर करते हैं उनका एवरेज क्रेडिट स्कोर 729 होता है, जबकि जो मॉनिटर नहीं करते उनका 712. साथ ही, सेल्फ-मॉनिटरिंग करने वाले 46% कंज्यूमर्स के स्कोर छह महीने में इम्प्रूव हुए, जबकि नॉन-मॉनिटर्स में 41%.

आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं

भारत की क्रेडिट हेल्थ कैसी है?

नवंबर 2023 में पैसे बाजार क्रेडिट इनसाइट्स रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के कंज्यूमर्स की क्रेडिट हेल्थ में वैरिड ट्रेंड्स दिखते हैं. स्टडी ने 823 सिटीज के 3.7 करोड़ कंज्यूमर्स का डेटा एनालाइज किया, जो सैलरीड और सेल्फ-एम्प्लॉयड के बीच गैप्स और एज ग्रुप्स के अंतर को हाइलाइट करती है.

सैलरीड बनाम सेल्फ-एम्प्लॉयड

-सैलरीड कंज्यूमर्स में 25% से ज्यादा का क्रेडिट स्कोर 770 और ऊपर है.

-सेल्फ-एम्प्लॉयड में सिर्फ 14% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट प्रोफाइल है.

-दोनों सेगमेंट्स में 32% कंज्यूमर्स गुड क्रेडिट स्कोर कैटेगरी में आते हैं.

अर्बन बनाम नॉन-मेट्रो

-मेजर मेट्रो सिटीज में 24% कंज्यूमर्स का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर है.

-नॉन-मेट्रो में 22% का स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर, जो इन डेमोग्राफिक्स में समान क्रेडिट बिहेवियर दिखाता है.

हेल्दी क्रेडिट स्कोर वाली सिटीज

स्टडी ने क्रेडिट-हेल्दी कंज्यूमर्स के हाइएस्ट रेशियो वाली सिटीज को हाइलाइट किया:

-बेंगलुरु

-अहमदाबाद

-मुंबई

-पुणे

-चेन्नई

-दिल्ली

-हैदराबाद

-सूरत (नॉन-मेट्रो)

-कोयंबटूर (नॉन-मेट्रो)

ये फाइंडिंग्स दिखाती हैं कि मेट्रो और नॉन-मेट्रो दोनों में क्रेडिट हेल्थ नोटेबल है, और कुछ नॉन-मेट्रो सिटीज अच्छा परफॉर्म कर रही हैं.

100% Online लोन अप्लाई करें

स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर का इम्पैक्ट

स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर कई फाइनेंशियल बेनिफिट्स अनलॉक करता है, जो लोन और क्रेडिट कार्ड्स को आसान और फेवरेबल टर्म्स पर लेने में मदद करता है.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर लोन और क्रेडिट कार्ड्स सिक्योर करने के चांसेज बढ़ाता है, क्योंकि ये रिस्पॉन्सिबल फाइनेंशियल बिहेवियर दिखाता है और लेंडर्स के लिए डिफॉल्ट रिस्क कम करता है.

-हाई क्रेडिट स्कोर वाले कंज्यूमर्स को लोन पर लोअर इंटरेस्ट रेट्स मिलते हैं, जो मंथली रिपेमेंट्स को अफोर्डेबल और मैनेजेबल बनाते हैं.

-स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर प्री-अप्रूव्ड लोन और क्रेडिट कार्ड ऑफर्स के लिए क्वालिफाई करता है, जो जरूरत पड़ने पर फंड्स को फास्ट एक्सेस देता है.

-लेंडर्स हाई क्रेडिट स्कोर वालों को प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स ऑफर करते हैं, जिनमें एन्हांस्ड रिवॉर्ड्स और बेनिफिट्स होते हैं, जो परचेजिंग पावर बढ़ाते हैं.

-गुड क्रेडिट स्कोर हायर लोन अमाउंट्स और क्रेडिट लिमिट्स एक्सेस करने में मदद करता है, जो वैरियस नीड्स के लिए ग्रेटर फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी देता है.

गुड क्रेडिट स्कोर कैसे बनाएं

क्रेडिट स्कोर इम्प्रूव करने के लिए इम्पैक्टिंग फैक्टर्स पर केयरफुल अटेंशन और नॉलेज की जरूरत है. ये कुछ तरीके हैं अपनी क्रेडिटवर्थीनेस को बेहतर करने के:

-क्रेडिट कार्ड बिल्स और लोन ईएमआई का टाइमली रेपेमेंट सुनिश्चित करें, क्योंकि लेट या मिस्ड पेमेंट्स आपके क्रेडिट स्कोर को नेगेटिवली इम्पैक्ट कर सकते हैं.

-एक साथ मल्टिपल लोन एप्लिकेशंस सबमिट करने से बचें, क्योंकि ये लेंडर्स को क्रेडिट के लिए ओवरली इगर लग सकता है.

-क्रेडिट रिपोर्ट को रेगुलरली रिव्यू करें और किसी भी इनएक्युरेसी को तुरंत एड्रेस करें.

-अपनी टोटल क्रेडिट लिमिट के 30% से नीचे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो रखने की कोशिश करें, जो रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट मैनेजमेंट दिखाता है.

निचोड़ ये है कि स्ट्रॉन्ग क्रेडिट स्कोर बेहतर फाइनेंशियल ऑपर्च्युनिटीज के दरवाजे खोल सकता है. इसलिए अपनी क्रेडिट हेल्थ को ट्रैक करना बहुत जरूरी है. आप मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर इंस्टैंटली अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को मॉनिटर करने के लिए डिटेल्ड क्रेडिट रिपोर्ट को आसानी से ट्रैक करें. मनीकंट्रोल क्रेडिट डैशबोर्ड एक्सप्लोर करें ताकि फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट एक्सेस कर सकें.

2 और कंपनियों के IPO को SEBI से मंजूरी, BSE और NSE पर होंगे लिस्ट

2 और कंपनियों को अपना पब्लिक इश्यू लाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी मिल गई है। ये कंपनियां हैं- नित्यास जेम्स एंड ज्वेलरी लिमिटेड और इंटेलियस रिकोड लिमिटेड। दोनों IPO को BSE और NSE पर लिस्ट कराने की तैयारी है। नित्यास जेम्स एंड ज्वेलरी सूरत, गुजरात की कंपनी है। इसने मार्च में IPO के ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे और उसे 23 जुलाई को सेबी की मंजूरी मिली। इसके ड्राफ्ट के अनुसार, कंपनी के प्रस्तावित IPO में 1.44 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। प्रमोटर्स या मौजूदा निवेशकों की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा।

कंपनी अपने IPO से हासिल पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। इस पब्लिक इश्यू के लिए चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड, बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Bigshare Services Private Limited है।

Intellius Recode IPO

वहीं, इंटेलियस रिकोड ने मार्च में IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे। उसे 24 जुलाई को सेबी से मंजूरी मिली। ड्राफ्ट के अनुसार, कंपनी के प्रस्तावित IPO में 117 करोड़ रुपये तक के नए शेयर जारी होंगे। साथ ही 12.9 लाख शेयरों का OFS रहेगा। इस IPO के लिए Inga Ventures Pvt.Ltd. बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. है।

नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कंपनी के डिजिटल वर्कर्स के डेवलपमेंट, इससे जुड़ी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग फीस के पेमेंट और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।इंटेलियस रिकोड एक टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर है। यह कॉरपोरेट ग्राहकों के डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन में मदद करती है। कंपनी टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग और आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस बेस्ड सॉल्यूशंस की पेशकश करती है। इनमें प्रोपराइटरी एजेंटिक AI बेस्ड डिजिटल वर्कर भी शामिल हैं।

Manipal Health IPO: ₹9275 करोड़ का इश्यू 29 जुलाई से, ₹560-₹590 है प्राइस बैंड; रहेंगे ₹8000 करोड़ के नए शेयर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

गुजरात में भारी बारिश का खतरा, CM भूपेंद्र पटेल अलर्ट मोड में, बुलाई हाईलेवल बैठक

Chief Minister Bhupendra Patel conducted highlevel review of rainfall situation in Gujarat

Chief Minister Bhupendra Patel : गुजरात में सार्वभौमिक बारिश की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) का दौरा किया और एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्य सचिव एमके दास, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि और राहत आयुक्त गौरांग मकवाना सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

 

उत्तर गुजरात में भारी बारिश का अनुमान, NDRF-SDRF की टीमें तैनात 

अगले 24 घंटों में उत्तर गुजरात के पाटन, मेहसाणा, वाव-थराद और बनासकांठा जिलों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। संभावित स्थिति से निपटने और स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए NDRF और SDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिला कलेक्टरों को पूरी तरह से सतर्क और तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

ALSO READ: गुजरात में 5 वेदर सिस्टम सक्रिय; अहमदाबाद और कच्छ समेत 4 जिलों में रेड अलर्ट, 24 घंटे में कहां कितनी हुई बारिश?

 दक्षिण गुजरात में राहत और पुनर्वास कार्य जारी 

दक्षिण गुजरात में बारिश का जोर कम होने के बाद अब राहत और पुनर्वास कार्यों पर तेजी से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बारिश से प्रभावित जिलों में नागरिकों को 'कैश डोल्स' (नकद राहत सहायता) का भुगतान शुरू कर दिया गया है और घरेलू सामान के नुकसान की वित्तीय सहायता भी जल्द से जल्द चुकाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ALSO READ: गुजरात में कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों में आरक्षण लागू करने की तैयारी में सरकार

स्थानांतरण, नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी निर्देश

 भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति के कारण पूरे राज्य से अब तक 42,158 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित (शिफ्ट) किया गया है, जबकि प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार 308 मवेशियों की मौत दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ का पानी उतरते ही तुरंत सफाई अभियान चलाने, स्वास्थ्य संबंधी कदम उठाने और नुकसान का सर्वे शुरू करने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

ALSO READ: गुजरात में 14 घंटे में 400 मिमी बारिश से तबाही, जानें वैज्ञानिकों का अनुमान क्यों गलत साबित हुआ?

 बारिश के आंकड़े और जलाशयों की वर्तमान स्थिति 

राहत आयुक्त के अनुसार, जुलाई 2025 की औसत बारिश की तुलना में अब तक वलसाड में 93%, नवसारी में 97%, डांग में 71%, सूरत में 81%, अहमदाबाद में 66% और अमरेली में 63% बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा, पूरे राज्य के जलाशयों में वर्तमान स्थिति में कुल 53.14% जल संग्रह उपलब्ध है।

वलसाड में 16 घंटे में 1100 मिमी बारिश, भारत के इतिहास की तीसरी सबसे ज्यादा, डूबी हुईं ये कारें दिखा रहीं भयावहता

Valsad Heavy Rain: गुजरात में गुरुवार को जारी मूसलाधार बारिश के कारण कई जिलों में भीषण बाढ़ की स्थिति बन गई है। इसमें वलसाड जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के मुताबिक वलसाड जिले के उमरगाम में गुरुवार सुबह तक महज 16 घंटे में करीब 1100 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक वलसाड जिले के अन्य तालुकाओं में भी इसी अवधि में 600 मिमी से अधिक पानी बरसा है।

देश के इतिहास में 24 घंटे की तीसरी सबसे ज्यादा बारिश

IMD द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वलसाड जिले के उमरगाम में दर्ज यह बारिश देश के इतिहास में 24 घंटे के भीतर दर्ज की गई तीसरी सबसे अधिक बारिश है।

भारत में 24 घंटे की सबसे ज्यादा बारिश के शीर्ष रिकॉर्ड:

  • सोहरा: 16 जून 1995 को 1563.3 मिमी
  • अमीनीदिवी: 6 मई 2004 को 1168.5 मिमी
  • उमरगाम, वलसाड: 23 जुलाई 2026 को 1064 मिमी (करीब 1100 मिमी)
  • वलसाड जिले में लगातार दूसरे दिन यह असाधारण बारिश दर्ज की गई है। इससे ठीक एक दिन पहले, 22 जुलाई 2026 को वलसाड के कपराड़ा में 417 मिमी बारिश हुई थी।

वापी से सामने आया वायरल वीडियो, 50 से अधिक कारें डूबीं

वलसाड जिले के वापी कस्बे से तबाही की एक भयावह तस्वीर और वायरल वीडियो सामने आया है। किसी पास की इमारत की ऊपरी मंजिल से बनाए गए वीडियो में इलाके का भयानक मंजर देखा जा सकता है। एक रिहायशी इलाके के पार्किंग एरिया में पानी भरने से 50 से अधिक कारें लगभग पूरी तरह पानी में डूब गईं। बाढ़ का पानी इतना ज्यादा बढ़ गया कि खड़ी गाड़ियों की खिड़कियों तक पहुंच गया। आसपास की सड़कें और पूरा इलाका जलमग्न दिखाई दिया। यहां नीचे देखिए वो भयानक मंजर-

उफान पर नदियां, हजारों लोग शिफ्ट किए गए

भीषण बारिश की वजह से वलसाड की औरंगा, पार और दमन गंगा नदियां उफान पर आ गईं। इससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया। पानी का स्तर तेजी से बढ़ने पर प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। एहतियात के तौर पर सूरत शहर के संवेदनशील इलाकों से 2,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

5 जिलों में रेड अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार और शुक्रवार को अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान जताते हुए वलसाड, नवसारी, डांग, सूरत और तापी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बारिश से प्रभावित जिलों में स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के साथ राहत कार्यों के समन्वय के लिए कई मंत्रियों को तैनात किया है।

Udhna Station: सूरत के उधना स्टेशन पर बना देश का पहला स्टील सबवे! सिर्फ 8 घंटे में हुआ तैयार, रेलवे ने रचा इतिहास

Udhna Station: भारतीय रेलवे ने इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा काम कर दिखाया है। गुजरात में सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर रेलवे पटरियों के नीचे देश का पहला स्टील पैदल यात्री सबवे बनाने में सफलता हासिल हुई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्टके मुताबिक, पश्चिम रेलवे द्वारा चलाए गए इस पायलट प्रोजेक्ट को बिल्कुल नई और आधुनिक ट्रैक कट-एंड-कवर तकनीक का इस्तेमाल करके मात्र 8 घंटे के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है।

इस सबवे के बन जाने से अब प्लेटफॉर्म बदलने के लिए पटरियों को पार करने की खतरनाक प्रथा पर लगाम लगेगी और यात्रियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार होगा।

कैसे हुआ यह कारनामा? जानिए क्या है ट्रैक Cut-and-Cover तकनीक

पश्चिम रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) पंकज सिंह ने इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस तकनीक के तहत निर्धारित ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान रेलवे पटरी को काटा जाता है और पटरियों के नीचे की जमीन की खुदाई की जाती है। खुदाई के बाद फैक्ट्री में तैयार स्टील आर्च स्ट्रक्चर को नीचे स्थापित कर दिया जाता है और फिर गड्ढे को भरकर पटरी को तुरंत चालू स्थिति में बहाल कर दिया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड 8 घंटे के भीतर पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया था ताकि ट्रेन संचालन पर कम से कम असर पड़े। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस काम को तय 8 घंटे की विंडो में बिना किसी बड़े ट्रेन प्रभाव के पूरा कर लिया गया।

इस ऑपरेशन के दौरान गुजरात के उधना को महाराष्ट्र के जलगांव से जोड़ने वाली रेलवे पटरियों को अस्थायी रूप से हटाया गया, मिट्टी की खुदाई की गई, प्रीफैब्रिकेटेड स्टील आर्च स्ट्रक्चर को रखा गया और फिर लाइन को तुरंत बहाल कर दिया गया।

कितना बड़ा है यह स्टील सबवे?

पारंपरिक प्रबलित सीमेंट कंक्रीट संरचनाओं की तुलना में इसके निर्माण में काफी कम समय लगा है। इसकी लंबानी करीब 12 मीटर, चौड़ाई 4.8 मीटर और ऊंचाई 2.7 मीटर है। इसमें स्टील आर्च और प्रीकास्ट कंक्रीट नींव का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में तैयार संरचना होने के कारण गुणवत्ता बेहतर रही और ट्रैक ब्लॉक की समयसीमा को न्यूनतम करने में मदद मिली।

उधना स्टेशन पर क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

उधना रेलवे स्टेशन पर रोजाना करीब 10000 यात्री आवाजाही करते हैं। त्योहारों के सीजन में यहां यात्रियों की संख्या में भारी उछाल आता है। इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष के दौरान जब बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों को लौटे थे तब उधना स्टेशन पर यात्रियों की संख्या रोजाना 30000 को पार कर गई थी।

पटरियों को पार करके प्लेटफॉर्म बदलना या बाईपास लाइन पर जाना बेहद खतरनाक होता है, खासकर उन जगहों पर जहां मुड़े हुए ट्रैक होते हैं और विजिबिलिटी सीमित होती है। उधना बाईपास लाइन पर भी ऐसी ही खतरनाक स्थिति बनी रहती थी, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती थीं। इसी खतरे को देखते हुए और यात्रियों व कुलियों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म बदलने की सुविधा देने के लिए रेल मंत्रालय की मंजूरी के बाद इस तकनीक को अपनाया गया।

देश भर के व्यस्त स्टेशनों पर लागू हो सकता है यह मॉडल

पश्चिम रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उधना में इस पायलट प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद अब देश भर के अन्य व्यस्त रेलवे स्टेशनों और रेल सेक्शनों पर भी इस तरह के स्टील सबवे बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। एक बार इस सबवे के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद उधना में बाईपास लाइन पर खतरनाक तरीके से पटरी पार करने की समस्या खत्म हो जाएगी और दुर्घटनाओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

ये भी पढ़ें- Tripura DGP Dead: त्रिपुरा के DGP की संदिग्ध मौत से हड़कंप! पुलिस हेडक्वार्टर में मृत पाए गए अनुराग धनखड़, जानिए कौन थे IPS अधिकारी

सूरत : केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी आज मांडवी के दौरे पर

harsh sanghvi

harsh sanghvi

केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्षभाई संघवी आज सूरत जिले के मांडवी का दौरा कर रहे हैं। अपने दौरे के दौरान वे कोसंबा में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मांडवी के कोसंबा में ‘अपना घर आश्रम’ का उद्घाटन किया जाएगा। ध्रुव अनाइका फाउंडेशन, मुंबई द्वारा इस आश्रम का निर्माण किया गया है। घर से वंचित, बेसहारा और निराश्रित लोगों को आश्रय, देखभाल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह आश्रम शुरू किया जा रहा है।

 

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के अलावा राजनीतिक नेताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के उपस्थित रहने की संभावना है। यह आश्रम जरूरतमंद लोगों के लिए आश्रय और मानवता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

बुलेट-ट्रेन प्रोजेक्ट लेट होने से जापान के पूर्व मंत्री नाराज:कहा- हमने पूरी मेहनत की लेकिन भारतीय मंत्री का रवैया खराब, उन्होंने वादा नहीं निभाया

भारत-जापान के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा कि प्रोजेक्ट के लेट होने की सबसे बड़ी वजह भारतीय मंत्री का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं और जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गए। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलते रहे। इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। ‘प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला’ माकिहारा के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला। दरअसल, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1-3 जुलाई 2026 में भारत दौरे पर आई थी। इस दौरान दोनों देशों ने 129 समझौतों का ऐलान किया था। इन समझौतों का मकसद निवेश, उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है। माकिहारा ने अपनी पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की एक रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया है कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें 100% यकीन है कि इस प्रोजेक्ट के आगे न बढ़ पाने की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष की है। हालांकि, भारत सरकार या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 2017 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी के पूर्व PM शिंजो आबे ने 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में इस प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन किया था। दोनों शहरों के बीच 508 किमी का सफर बुलेट ट्रेन तीन घंटे में तय करेगी। अभी नॉर्मल ट्रेन से यह सफर तय करने में सात-आठ घंटे लगते हैं। रूट पर 12 स्टेशन मुंबई, ठाणे, विरार, भोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वड़ोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती हो सकते हैं। इनमें मुंबई स्टेशन अंडरग्राउंड होगा। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में ₹88 हजार करोड़ जापानी निवेश मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की पहले अनुमानित लागत करीब ₹2 लाख करोड़ है। इसमें से लगभग ₹88 हजार करोड़ जापान दे रहा है। यह पैसा जापान की सरकारी एजेंसी JICA बेहद सस्ती शर्तों पर दे रही है। इस कर्ज पर सिर्फ 0.1% सालाना ब्याज लगेगा, इसे चुकाने के लिए 50 साल मिलेंगे और पहले 15 साल तक किस्त नहीं देनी होगी। जापान अब तक इस परियोजना के लिए 1,150 अरब येन (करीब ₹55 हजार करोड़) मंजूर कर चुका है। इसके अलावा वह बुलेट ट्रेन की शिंकानसेन तकनीक, ट्रेनिंग और तकनीकी विशेषज्ञता भी भारत को उपलब्ध करा रहा है। रूट का 7 किमी हिस्सा समुद्र के अंदर होगा 508 किमी के रूट में से 351 किमी हिस्सा गुजरात और 157 किमी हिस्सा महाराष्ट्र से गुजरेगा। कुल 92% यानी 468 किमी लंबा ट्रैक एलिवेटेड रहेगा। मुंबई में 7 किमी का हिस्सा समुद्र के अंदर होगा। 25 किमी का रूट सुरंग से गुजरेगा। 13 किमी हिस्सा जमीन पर होगा। बुलेट ट्रेन 70 हाईवे, 21 नदियां पार करेगी। 173 बड़े और 201 छोटे ब्रिज बनेंगे। शुरुआत 10 कोच वाली 35 बुलेट ट्रेनों से होगी। ये ट्रेनें रोजाना 70 फेरे लगाएंगी। एक बुलेट ट्रेन में 750 लोग बैठ सकेंगे। बाद में 1200 लोगों के लिए 16 कोच हो जाएंगे। 2050 तक इन ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 105 करने का प्लान है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- सुजुकी दो-तिहाई कारें भारत में बना रही:जापान की मदद से देश में खाद के 1000 कारखाने लगेंगे; PM ताकाइची को बहन कहा भारत और जापान ने आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। भारत-जापान जॉइंट इकोनोमिक फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों की दिक्कतें दूर करने के लिए ‘जापान बिजनेस वीक’ शुरू करने का ऐलान किया। इसके तहत PMO के सीनियर अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों से बातचीत करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

‘हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये…’, मरीज ने शेयर किया मुंबई के अस्पताल का बिल, लोगों के उड़े होश

अस्पताल में चार दिन रहना…, एक आम सर्जरी… और 11 लाख रुपये से ज्यादा का बिल। मुंबई के एक अस्पताल में हर्निया की सर्जरी के लिए एक मरीज द्वारा 11.04 लाख रुपये चुकाने का दावा करने वाली एक वायरल पोस्ट ने बहस छेड़ दी है। इस दावे ने भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर की बढ़ती लागत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह चर्चा तब शुरू हुई जब X यूजर निखिल झा ने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि उनके एक फॉलोअर की मुंबई के एक नामी अस्पताल में इंग्वाइनल हर्निया की सर्जरी हुई थी। पोस्ट के अनुसार, मरीज से इलाज के लिए 11.04 लाख रुपये लिए गए।

जानकारी शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा था, “कल एक फॉलोअर ने हमें मुंबई के एक बड़े अस्पताल में अपनी हर्निया सर्जरी के बारे में मैसेज किया। कुल खर्च 11.04 लाख रुपये था। हां, हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये।” आगे अपनी बात रखते हुए झा ने लिखा, “हम इतनी बड़ी रकम देखकर हैरान और स्तब्ध रह गए। अगर छोटी सी हर्निया सर्जरी का खर्च इतना है, तो बड़ी सर्जरी का खर्च क्या होगा? तो क्या मुंबई में अस्पताल में भर्ती होना कोई अपराध बनता जा रहा है? क्या शहर में अच्छी हेल्थकेयर ऐसी लग्जरी बन गई है, जिसे सिर्फ बहुत अमीर लोग ही उठा सकते हैं?”

पोस्ट में एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जो इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट का मैसेज लग रहा था। इमेज के अनुसार, कुल मेडिकल खर्च 11,04,100 रुपये था, जबकि सेटल किया गया इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट 4,64,000 रुपये था। डॉक्यूमेंट से पता चला कि मरीज को इंग्वाइनल हर्निया से जुड़े इलाज के लिए 6 जुलाई से 10 जुलाई, 2026 तक अस्पताल में भर्ती किया गया था।

हालांकि, पोस्ट में इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, जैसे कि कौन सी सर्जरी हुई, कमरे की कैटेगरी, डॉक्टर की फीस, अतिरिक्त प्रक्रियाएं या क्या मरीज़ को अतिरिक्त मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। इसके बावजूद, पोस्ट ने तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने प्राइवेट अस्पतालों के खर्च और मेडिकल इलाज के खर्च को उठाने की क्षमता पर अपनी राय दी। जहां कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि हर्निया की सर्जरी का बिल इतना ज्यादा कैसे हो सकता है, वहीं दूसरों ने कहा कि मामले को ठीक से समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है।

एक डॉक्टर ने पोस्ट पर कमेंट किया, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11 लाख रुपये बहुत ज़्यादा हैं। क्या इसमें हेलीकॉप्टर से पिक-अप और ड्रॉप भी शामिल था?” एक यूजर ने हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता के बारे में चिंता जताई और लिखा, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये? यह भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 11 लाख रुपये से ज़्यादा की आम हर्निया सर्जरी कई मध्यम-वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है। इंश्योरेंस होने पर भी, अगर क्लेम सीमित हैं या रिजेक्ट हो जाते हैं, तो ऐसे खर्च आर्थिक तनाव पैदा कर सकते हैं। अस्पताल की कीमतों, इंश्योरेंस सेटलमेंट और मेडिकल बिलिंग में ज़्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए। अच्छी क्वालिटी की हेल्थकेयर सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं होनी चाहिए।”

एक और यूजर ने शहरों के बीच इलाज के खर्च की तुलना की और लिखा, “सूरत में हर्निया की सर्जरी का खर्च 1.5 लाख रुपये है, जबकि मुंबई के एक बड़े अस्पताल में उसी प्रक्रिया का खर्च 11.04 लाख रुपये है। कीमत में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद, पॉलिसीहोल्डर एक जैसा प्रीमियम देते हैं। यह दिखाता है कि कैसे बड़े मेट्रो अस्पतालों में इलाज का बढ़ता खर्च सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।”

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ अस्पताल का बिल पूरी मेडिकल स्थिति को नहीं समझा सकता। यूजर ने लिखा, “यह मैसेज यह नहीं बताता कि कौन सी प्रक्रिया की गई थी। यह समझने के लिए कि क्या मरीज को कोई कॉम्प्लिकेशन हुआ था और क्या उसे ICU में रहना पड़ा था, हमें ऑपरेशन नोट्स और डिस्चार्ज समरी देखने की जरूरत है।”

कौन हैं एमके दास? जिन्होंने PM मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन के लिए झोंक दी अपनी पूरी ताकत

Who is Manoj Kumar Das

Manoj Kumar Das (MK Das) : यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की परीक्षा पास करने वाला हर सिविल सर्वेंट ऊंचे पदों पर पहुंचकर देश सेवा करने का सपना देखता है। बिहार के दरभंगा के मूल निवासी और 1990 बैच के IAS अधिकारी मनोज कुमार दास (एमके दास) की कहानी भी कुछ ऐसी ही प्रेरणादायी है। दरभंगा में अपनी 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने प्रतिष्ठित IIT खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की और इसके बाद वे भारतीय सिविल सेवा में शामिल हो गए।

 

2. गुजरात सरकार के नए 'श्री विश्वसनीय'

नवंबर 2025 में गुजरात के मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एमके दास प्रशासनिक गलियारों में सरकार के नए 'श्री विश्वसनीय' (Mr. Dependable) बनकर उभरे हैं। पहले ऐसा माना जा रहा था कि लंबे समय तक आर्थिक और नीतिगत विभाग संभालने वाले दास के लिए सामाजिक क्षेत्र एक बड़ी चुनौती साबित होगा। हालांकि शासन की गहरी समझ और सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं को सही ढंग से पहचानकर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।

ALSO READ: गुजरात में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और AI होगा नियंत्रित

3. आलोचकों को जवाब और सामाजिक सुधार

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार में मुख्य प्रशासनिक प्रमुख के रूप में सेवा दे रहे एमके दास ने पिछले 9 महीनों में अपने आलोचकों को गलत साबित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण (Vision) के अनुरूप वे न केवल नीतिगत ढांचे को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक क्षेत्र के कल्याणकारी कार्यक्रमों को भी नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं। विशेष रूप से गुजरात में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (Dropouts) की दर को कम करने और बाल कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए उन्होंने एक निर्णायक अभियान शुरू किया है।

 

4. एमके दास का प्रगतिशील '3E' फॉर्मूला

एमके दास का मानना है कि आज के बच्चे वर्ष 2047 के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे राज्य के श्रमिकों के बच्चों तक भी 'शाला प्रवेशोत्सव' जैसे प्रगतिशील कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। वे शासन चलाने के लिए खास '3E' फॉर्मूले पर भरोसा करते हैं, जिसका अर्थ है Effective (असरदार), Efficient (कुशल) और Easy (आसान)।

ALSO READ: गुजरात के गोसाबारा तट से 30.67 लाख की चरस जब्त, नवा बंदर पुलिस को मिली बड़ी सफलता

5. फील्ड ऑफिसर से कलेक्टर तक का सफर

उन्होंने अपने सिविल सर्विस करियर की शुरुआत गुजरात के डभोई में SDM के रूप में की थी। इसके बाद, जब 2 अक्टूबर 1997 को जूनागढ़ से पोरबंदर जिला अलग हुआ, तो वे वहां के पहले जिला कलेक्टर बने। इसके अलावा, उन्होंने बनासकांठा और सूरत जैसे महत्वपूर्ण जिलों में कलेक्टर के रूप में और सूरत व वडोदरा नगर निगम में म्यूनिसिपल कमिश्नर के रूप में यादगार सेवाएं दी हैं। वडोदरा में कमिश्नर के तौर पर उनका 5 साल का कार्यकाल आज भी लोग बड़े आदर के साथ याद करते हैं।

 

6. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और CMO में दोहरी सेवा

राज्य स्तर के अलावा एमके दास ने केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिसमें गृह मंत्रालय के तहत जम्मू-कश्मीर मामलों के निदेशक (Director) के रूप में उनकी भूमिका प्रमुख है। गुजरात में उन्होंने उद्योग, राजस्व, बंदरगाह, परिवहन, पंचायत और गृह जैसे कई संवेदनशील विभागों में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के रूप में कार्य किया है।

इसके अलावा, उन्हें दो बार मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में सेवा करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने 2017-2021 और 2024-2025 के दौरान मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

ALSO READ: डिजिटल क्षेत्र में गुजरात की बड़ी छलांग, CM पटेल ने लांच की नई 'डेटा सेंटर पॉलिसी'

7. एमके दास की व्यक्तिगत प्रोफाइल और तकनीक का उपयोग

जन्म तिथि : 20 दिसंबर, 1966

सेवा प्रवेश वर्ष : 20 अगस्त, 1990

मुख्य सचिव के रूप में पदभार ग्रहण : 1 नवंबर, 2025

 

वे प्रशासनिक कार्यों में टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग के हिमायती हैं। उनके मार्गदर्शन में गुजरात में अधिकांश सरकारी प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाकर पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है और आवश्यक दस्तावेजों की संख्या में भी भारी कटौती की गई है।

 

8. पॉलिसी फ्रेमवर्क और भविष्य का प्रशासनिक नेतृत्व

गुजरात को देश का अग्रणी डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब बनाने के लिए हाल ही में 'विकसित गुजरात डेटा सेंटर नीति 2026-29' घोषित की गई है। इसके अतिरिक्त उनके नेतृत्व में पिछले 9 महीनों में 4 अन्य महत्वपूर्ण नीतियां भी लागू की गई हैं:

 

गुजरात ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति 2025-30

गुजरात एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025

विकसित गुजरात औद्योगिक नीति 2026

गुजरात निर्यात नीति 2025

ALSO READ: अहमदाबाद 2008 सीरियल ब्लास्ट केस, गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा रखी बरकरार

सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि एमके दास ने प्रशासन पर इस कदर पकड़ बनाई है कि उन्होंने लंबे समय तक सुपर-ब्यूरोक्रेट रहे के. कैलाशनाथन की कमी महसूस नहीं होने दी। उनका कार्यकाल दिसंबर 2026 के अंत में समाप्त होने जा रहा है और वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 से ठीक पहले उनकी सेवानिवृत्ति नजदीक होने के कारण 1991 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी जयंती एस. रवि को उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है।


Manoj Kumar Das