पावन दीयों का सियासी शस्त्रीकरण

गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। अब इस परंपरा में नरेंद्र भाई के ‘सेवा-संकल्प’ में पूरे एक महीने उत्सव और जुड़ने का हमें सौभाग्य मिला है।

ज़िंदगी रोशन करने के लिए अपने घर की मुंडेर पर दीया जलाने की हमारी परंपरा ज़्यादा नहीं तो कम-से-कम पांच हज़ार साल पुरानी तो है ही। मेरी दादी, मेरी नानी और फिर मेरी मां भी हर दिन गोधूलि बेला में घर के मंदिर और तुलसी के चौबारे पर घी का दीया जलाती थीं। मां जब तक थीं, उन्होंने इस रीत का अनवरत निर्वाह किया। वे नहीं रहीं तो बहुत अरसे तक मेरी पत्नी भी ऐसा ही करती रही। घर के छोटे-से मंदिर में रोज़ सुबह-शाम दीया-बाती करने का उस का नियम था। दिल्ली के घरों में चौबारा तो कहां से बनाएं, सो, तुलसी गमले में उगती है और मिट्टी का दीया वह हर शाम पूरे श्रद्धा भाव से उस पर रख दिया करती थी।

मगर कुछ बरस से यह नियम ज़रा लड़खड़ा-सा गया है। प्रतिदिन दीया बालने की पत्नी की हुमक अब वैसी नहीं रही है। एक तो कोरोना-काल में डर के मारे दिल्ली छोड़ कर बहुत दिनों मां, मैं और पत्नी अरण्यवास में चले गए तो गमले में लगी तुलसी सूख गई। और, सूखी तो ऐसी सूखी कि कई बार लगाने की कोशिश की, पर नहीं पनपी, तो नहीं पनपी। सो, तुलसी का दीया आजकल मौन है। फिर पत्नी-बेटियों के आग्रह पर अरसे बाद घर के भीतर हल्का-फुल्का नवीनीकरण कराया तो मंदिर के पट कुछ महीनों के लिए पूरी तरह बंद रखने पड़े और सुबह-शाम दीया लगाने का पत्नी का दस्तूर भंग हो गया। उस के बाद पट तो खुले, लेकिन दीये की निरंतरता नैपथ्य में चली गई।

नरेंद्र भाई मोदी के जन्मदिन पर देश भर में जले करोड़ों आशीर्वाद-दीयों ने मुझे दादी-नानी-मां-पत्नी के सहारे प्राणवान रहे अपने घर के परंपरागत दीये की याद दिला दी। वह दीया मेरे गांव, ननिहाल और जंगल-जंगल पदस्थ मेरे पिता के कवेलू-आवासों से ले कर अंततः दिल्ली तक के घर की सुखदायी-संतोषदायी जीवनीशक्ति बना रहा। दीये की यह भीनी टिमटिमाहट ही आज भी, जब-जब मन उदास होता है, हमारा संबल बनती है। सो, जब नरेंद्र भाई के जन्मदिन पर आशीर्वाद-दीये जलाने के आयोजन-प्रयोजन की होड़ में लगे उन के कल्याणाकांक्षियों की सघन उंदुर-दौड़ मैं ने देखी तो मेरे तो होश फ़ाख़्ता हो गए। मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि सनातनी सभ्यता की आधारशिला पावन दीये को भी कभी ऐसे सियासी शस्त्रीकरण का ज़रिया बनाने की हद तक हमारे हुक्मरान उतर सकते हैं।

मेरा जन्म मध्यप्रदेश में हुआ। अगर उसे लालन-पालन कहा जा सके तो लालन-पालन भी मध्यप्रदेश में हुआ। औपचारिक शिक्षा भी मध्यप्रदेश में हुई। पत्रकारिता के संस्कार भी मध्यप्रदेश से मिले। जब राजनीति में कूदने का चस्का लगा तो उस की मैदानी धरती भी मध्यप्रदेश ही रही। तो ज़ाहिर है कि मध्यप्रदेश से अतिरिक्त लगाव मेरी धमनियों में है। इसलिए नरेंद्र भाई के लिए देश भर में बुधवार को रोशन किए गए दीयों में मेरी नज़र सब से पहले मध्यप्रदेश के दीयों पर पड़ी। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस वज़ह से थोड़े परिचित रहे हैं कि वे भी उज्जैन के उसी विक्रम विश्वविद्यालय से पढ़ कर निकले हैं, जहां से मैं। विक्रम की शिक्षण-अध्ययन परंपरा बहुत अर्थपूर्ण और संजीदा मानी जाती रही है। महाकाल के मंदिर से उत्तर दिशा में पांच-छह किलोमीटर दूर आज भी सांदीपनि ऋषि का आश्रम मौजूद है। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण, उन के बड़े भाई बलराम और सुदामा ने एक साथ शिक्षा प्राप्त की थी।

तो मुझे लगा कि हमारे मोहन यादव में सांदीपनि की धरती की धूल का कुछ तो असर ज़रूर होगा। मगर फिर मैं ने पाया कि नरेंद्र भाई को आशीर्वाद देने के लिए 3 करोड़ 55 लाख दीये तो अकेले मध्यप्रदेश में जलाए गए। मुख्यमंत्री के ख़ुद के गृह-नगर उज्जैन में महाकाल महालोक के आसपास और क्षिप्रा नदी के घाटों पर 33 लाख 27 हज़ार दीये जला कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। अब तक नहीं समझ पा रहा हूं कि इस तिलिस्म की रचना पर गर्व करूं या दूर कहीं जा कर किसी चुल्लू की तलाश में जुटूं? मैं तो अब तक घर-बाहर के मंदिर में आनंद से झूमती दीये की लौ में ही ऐसे शक्तिपुंज के दर्शन करता रहा हूं कि ये लाखों-करोड़ों दीयो की आक्रामक दीपशिखाएं तो मेरे सामने डेढ़ दर्जन परमाणु अस्त्र ढो कर अठारह हज़ार किलोमीटर दूर तक चली जाने वाली सटन-2 मिसाइल का दृश्य पेश कर रही हैं।

नरेंद्र भाई के स्वयं गृह-प्रदेश गुजरात में साढ़े अठारह हज़ार स्थानों पर 88 लाख दीयों ने अपनी माटी के लाल पर आशीष बरसाया। अहमदाबाद की कांकरिया झील किनारे सवा लाख और अटल-पुल पर 76 हज़ार दीये जलाए गए। सूरत में दस हज़ार स्थानों पर दस लाख दीये जले। अहमदाबाद के विश्व उमियाधाम में नरेंद्र भाई के जीवन के 76 बरस पूरे होने पर 76 हज़ार दीये प्रज्वलित कर आरती की गई। गृह मंत्री अमित भाई शाह नरेंद्र भाई के जन्मस्थान वडनगर पहंुचे और आरती-पूजन समारोह का हिस्सा बने। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने भी दीयों की झड़ी लगा दी। नरेंद्र भाई के निर्वाचन क्षेत्र बनारस में दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और काशी विष्वनाथ धाम क्षेत्र में 5 लाख से अधिक दीये जले। राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों के साथ हज़ारों प्रज्वलित दीयों से बनाई गई नरेंद्र भाई की आकृति की आरती उतारी।

बिहार में 21 लाख आशीर्वाद-दीये जले। छत्तीसगढ़ में 36 लाख दीये जले। पश्चिम बंगाल में एक करोड़ घरों में दीप प्रज्वलन प्रायोजन हुआ। राजस्थान से ले कर महाराष्ट्र तक, आंध्र प्रदेश से ले कर अरुणाचल तक, ओडिशा से ले कर गोवा तक और हरियाणा से ले कर असम, त्रिपुरा, मणिपुर तक हर मतदान केंद्र के क्षेत्र को इकाई मान कर दीप प्रज्वलन के कार्यक्रम आयोजित हुए। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से अपने-अपने घरों के बाहर पांच-पांच, ग्यारह-ग्यारह दीये जलवा कर नरेंद्र भाई मोदी को शुभाशीष दिलवाया गया। भारतीय जनता पाटी की सरकारों वाले 22 राज्यों के बीच इस मामले में एक-दूसरे को पटखनी देने की होड़-सी मच गई।

आजकल देश भर में गणपति विराजे हुए हैं। गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में तेजाजी महाराज का उत्सव छह दिनों तक मनाया जाता है। हमारे देश में प्रमुख से प्रमुख देवी-देवताओं और लोकदेवताओं तक के जन्मोत्सव कई दिनों तक मनाने की प्राचीन परंपरा है।

सो, भला हुआ कि नरेंद्र भाई 76 के हुए तो अब इस परंपरा में पूरे एक महीने मनाया जाने वाला सालाना ‘सेवा-संकल्प’ उत्सव और जुड़ने का सौभाग्य हमें मिल गया है। भारत एक उत्सवधर्मी देष है। हम हर बात का उत्सव मनाते हैं। जब सात बरस पहले नरेंद्र भाई ने कहा था कि ‘डर होना चाहिए, डर अच्छी चीज़ है’ तो मुझे नहीं मालूम था कि एक दिन आएगा कि वे मेरे मन के दीये को भी सियासी-धमक का डर फैलाने के साधन में तब्दील कर लेंगे। नरेंद्र भाई के लिए एक सद्भावना-दीप मैं भी दीप्तिमान करने का मेरा भी मन था। मगर अब मेरे उंगलियां ही नहीं, टांगें तक थर-थर कांप रही हैं।

Stocks to Watch: 17 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, टाटा ग्रुप के स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Stocks to Watch: गुरुवार 17 सितंबर को शेयर बाजार में 13 कंपनियों से जुड़े अहम अपडेट देखने को मिल सकते हैं। इनमें टाटा ग्रुप के स्टॉक्स से जुड़ी खबर भी शामिल है। वहीं, कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं। कुछ ने विस्तार और अधिग्रहण की योजनाओं का ऐलान किया है।

Tata Group Stocks

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर को मुंबई में होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से पद छोड़ने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा जा सकता है। उनकी मौजूदा अवधि फरवरी 2027 में पूरी हो रही है। बैठक में संभावित लिस्टिंग, अगले चेयरमैन और ग्रुप गवर्नेंस पर भी चर्चा हो सकती है।

GNFC

सरकारी फर्टिलाइजर और केमिकल कंपनी GNFC ने संजीव कुमार को नया मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। नियुक्ति 9 सितंबर 2026 से प्रभावी है। उनका कार्यकाल पांच साल का होगा। वह राजकुमार बेनीवाल की जगह लेंगे, जिन्हें गुजरात सरकार ने सूरत का म्युनिसिपल कमिश्नर बनाया है।

Susan Electronics India

इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी Susan Electronics India के बोर्ड ने बागपत में जमीन खरीदने को मंजूरी दी है। कंपनी करीब ₹22 करोड़ में यह जमीन खरीदेगी। इसका इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने के लिए होगा। कंपनी ने जून 2026 में शेयर बाजार में शुरुआत की थी।

LT Foods

फूड सेक्टर की कंपनी LT Foods, Kameda LT Foods India में जापान की Kameda Seika की पूरी 49% हिस्सेदारी खरीदेगी। LT Foods के पास अभी 51% हिस्सेदारी है। डील के बाद हिस्सेदारी 100% हो जाएगी। यह जॉइंट वेंचर भारत में राइस स्नैक्स का कारोबार करता है और ‘Kari Kari’ ब्रांड से जुड़ा है।

Vodafone Idea

टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea पर TRAI ने ₹2 लाख की फाइनेंशियल पेनल्टी लगाई है। कंपनी ने 16 सितंबर को इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी। कार्रवाई नवंबर 2025 में क्वालिटी ऑफ सर्विस के तय मानकों को पूरा नहीं करने से जुड़ी है। कंपनी ने कहा है कि वह TRAI के आदेश की समीक्षा कर रही है।

Krsnaa Diagnostics

डायग्नोस्टिक्स सेक्टर की कंपनी Krsnaa Diagnostics ने पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉरपोरेशन के साथ 15 साल का करार किया है। इसके तहत पंजाब के चार सरकारी अस्पतालों में PET-CT डायग्नोस्टिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कंपनी इन सुविधाओं को चलाने और मेंटेन करने का काम भी करेगी।

Mazagon Dock Shipbuilders

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders ने NSHIPML के साथ समझौता ज्ञापन यानी MoU साइन किया है। इसके तहत कंपनी Dighi ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर के लिए एंकर शिपयार्ड के तौर पर काम करेगी।

Venus Pipes & Tubes

स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब बनाने वाली कंपनी Venus Pipes & Tubes के बोर्ड ने फंड जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए 371.99 करोड़ रुपये तक जुटाएगी। इसके लिए शेयरधारकों और अन्य जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियों की जरूरत होगी।

Fortis Healthcare

हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी Fortis Healthcare ने Seth Sunder Lal Jain Charitable Eye Hospital यानी SLJ Society के साथ अंतिम समझौते किए हैं। इसके तहत कंपनी नई दिल्ली के अशोक विहार में 400 से ज्यादा बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हेल्थकेयर सेवाएं देगी।

Kalpataru Projects International

इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कंपनी Kalpataru Projects International ने बताया कि उसकी 96.12% फर्स्ट-लेवल स्टेप-डाउन मटेरियल सब्सिडियरी Linjemontage I Grästorp AB को स्वीडिश फाइनेंशियल सुपरवाइजरी अथॉरिटी से मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी प्रस्तावित IPO के प्रॉस्पेक्टस से जुड़ी है।

Infosys

आईटी सेक्टर की कंपनी Infosys ने इंदौर डेवलपमेंट सेंटर का विस्तार किया है। कंपनी ने सुपर कॉरिडोर स्थित अपने कैंपस में नए Software Development Block यानी SDB-2 का उद्घाटन किया है। इससे इंदौर में कंपनी के डेवलपमेंट सेंटर की क्षमता बढ़ेगी।

Highway Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कंपनी Highway Infrastructure को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से 220.66 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर टोल कलेक्शन और टोल प्लाजा के संचालन से जुड़ा है।

Alembic Pharmaceuticals

फार्मा सेक्टर की कंपनी Alembic Pharmaceuticals ने बताया कि अमेरिकी दवा नियामक USFDA ने गुजरात के वडोदरा स्थित उसकी बायोइक्विवेलेंस फैसिलिटी का इंस्पेक्शन पूरा कर लिया है। कंपनी के मुताबिक, USFDA ने इस फैसिलिटी का निरीक्षण बंद कर दिया है।

Juniper Hotels

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कंपनी Juniper Hotels ने Novotel Imagicaa होटल को खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी इस होटल को महाराष्ट्र के खोपोली में Imagicaaworld Entertainment से 248 करोड़ रुपये में खरीदेगी। Juniper Hotels भारत में Hyatt से जुड़े होटलों की सबसे बड़ी मालिक कंपनी है।

India Pesticides Share Price: UK और अर्जेंटीना से प्रोडक्ट को मिली मंजूरी, शेयर 15% उछला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vande Bharat News: ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस पर 10 बड़े अपडेट! काशी को मिलेगी स्लीपर ट्रेन, सूरत-उदयपुर रूट को भी मंजूरी; माल ढुलाई का भी हुआ ट्रायल

Indian Railways News: ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ अब अपने विस्तार के एक नए दौर में एंट्री कर रही है। भारतीय रेलवे स्लीपर वंदे भारत सेवाओं, नए रूटों और तेज रफ्तार माल ढुलाई जैसी कई योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई नए बदलाव और प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, जिन पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में वंदे भारत नेटवर्क का विस्तार सिर्फ यात्रियों की यात्रा को तेज करने तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि लंबी दूरी की रात की यात्रा और तेज माल परिवहन में भी इसकी भूमिका बढ़ सकती है।

वाराणसी से नई दिल्ली के बीच संभावित स्लीपर वंदे भारत से लेकर सूरत-उदयपुर वंदे भारत और 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी के ट्रायल तक, रेलवे का फोकस अब सिर्फ दिन में चलने वाली चेयर-कार वंदे भारत ट्रेनों तक सीमित नहीं रह गया है।

आइए जानते हैं वंदे भारत से जुड़े 10 बड़े अपडेट

1. वाराणसी को मिल सकती है दिल्ली के लिए स्लीपर वंदे भारत

  • वाराणसी के यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर अब आगे बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड ने वाराणसी जंक्शन (कैंट) और नई दिल्ली के बीच स्लीपर वंदे भारत शुरू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि, ट्रेन का अंतिम रूट अभी तय नहीं हुआ है।
  • उम्मीद जताई जा रही है कि यह सेवा त्योहारी सीजन से पहले शुरू हो सकती है। इससे दशहरा और दिवाली के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को राहत मिल सकती है।
  • वाराणसी से पहले से ही काशी विश्वनाथ, शिवगंगा और बनारस-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा वाराणसी जंक्शन से दो वंदे भारत और तीन महामना एक्सप्रेस सेवाएं भी साप्ताहिक आधार पर संचालित होती हैं। इसके बावजूद यात्रियों की मांग काफी अधिक बनी हुई है।
  • खासकर रविवार शाम को दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में स्लीपर वंदे भारत काशी और राष्ट्रीय राजधानी के बीच लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प बन सकती है।

2. नई दिल्ली-पटना स्लीपर वंदे भारत की भी चर्चा

  • नई दिल्ली और पटना के बीच स्लीपर वंदे भारत ट्रेन को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस सेवा की शुरुआत को लेकर कोई अंतिम मंजूरी या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं दिया गया है।
  • स्लीपर वंदे भारत के विस्तार की चर्चाओं के बीच नई दिल्ली-पटना जैसे व्यस्त रूट पर ऐसी ट्रेन की संभावना यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

3. तेज रफ्तार माल ढुलाई के लिए वंदे भारत ट्रेन

  • न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वंदे भारत का इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को तेज गति से सफर कराने तक सीमित नहीं रहने वाला है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा बनाई गई 16 कोच वाली ट्रेन को पार्सल और अन्य सामान को अधिक रफ्तार से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
  • इस ट्रेन का संभावित ग्राहक आधार पारंपरिक माल ढुलाई से आगे बढ़कर ई-कॉमर्स, कूरियर सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
  • अगर तेज रफ्तार मालगाड़ियों को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक चलाया जाता है, तो समय के प्रति संवेदनशील सामान को देश के प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने के लिए कारोबारियों को परिवहन का एक और विकल्प मिल सकता है।

4. सूरत को मिली पहली वंदे भारत सेवा की मंजूरी

  • सूरत को अपनी पहली वंदे भारत सेवा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। रेलवे बोर्ड ने सूरत और उदयपुर सिटी के बीच नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी दी है।
  • प्रस्तावित ट्रेन का नंबर 26903/26904 बताया गया है। यह ट्रेन करीब 690 किलोमीटर की दूरी लगभग 7 घंटे 30 मिनट में तय करेगी।
  • ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाने की योजना है और मंगलवार को इसका विकली ऑफ रहेगा।
  • ट्रेन सूरत से सुबह 6:10 बजे रवाना होकर दोपहर 1:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। जबकि वापसी में उदयपुर से ट्रेन दोपहर 3:35 बजे चलेगी और रात 11 बजे सूरत पहुंचेगी।

5. सूरत-उदयपुर वंदे भारत के रास्ते में 9 प्रमुख ठहराव

  • आठ कोच वाली इस वंदे भारत ट्रेन के रास्ते में कुल 9 कमर्शियल स्टॉप प्रस्तावित हैं। इनमें शामिल हैं:-

भरूच

वडोदरा

आनंद

मणिनगर

असारवा

हिम्मतनगर

शामलाजी रोड

डूंगरपुर

जावर

  • यह ट्रेन गुजरात और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों को तेज रेल कनेक्टिविटी से जोड़ेगी। इससे दोनों राज्यों के बीच सफर करने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, नई सूरत-उदयपुर वंदे भारत मौजूदा उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत की जगह ले सकती है। यह ट्रेन फरवरी 2026 में शुरू हुई थी।
  • रेलवे बोर्ड की 31 अगस्त की मंजूरी के बाद नई सर्विस नवरात्रि से पहले शुरू होने की उम्मीद है। इस साल नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है।

6. मंगलुरु-बेंगलुरु वंदे भारत के समय पर उठे सवाल

  • बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच प्रस्तावित वंदे भारत का रनिंग टाइम ट्रायल पूरा हो चुका है। लेकिन ट्रायल के दौरान सामने आए समय को लेकर कर्नाटक के तटीय इलाकों के यात्री संगठनों ने चिंता जताई है।
  • दक्षिण पश्चिम रेलवे के ट्रायल में सुबह बेंगलुरु से ट्रेन चलाने और बाद में उसी दिन वापसी का कार्यक्रम शामिल था।
  • हालांकि, यात्री प्रतिनिधियों का कहना है कि अंतिम समय-सारिणी ऐसी होनी चाहिए, जिससे तटीय क्षेत्र से बेंगलुरु आने वाले कामकाजी और कारोबारी यात्रियों को वास्तविक फायदा मिल सके।
  • पश्चिम करावली रेलवे यात्री अभिवृद्धि समिति के अध्यक्ष जी. हनुमंथ कामथ ने मांग की है कि ट्रेन सुबह मंगलुरु से रवाना हो और उसी रात वापस लौटे।
  • यात्रियों की चिंता यह है कि अगर ट्रेन बेंगलुरु बहुत देर से पहुंचेगी, खासकर आधी रात के करीब, तो सरकारी या कारोबारी काम से राजधानी आने वाले यात्रियों के लिए इसका उपयोग सीमित हो जाएगा।
  • यात्री संगठनों ने मंगलुरु सेंट्रल-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल वंदे भारत का उदाहरण देते हुए कहा है कि सुबह मंगलुरु से प्रस्थान और रात में वापसी का शेड्यूल यात्रियों के लिए बेहतर काम करता है।

7. बलांगीर से वंदे भारत की मांग पर रेलवे बोर्ड का जवाब

  • ओडिशा के बलांगीर से वंदे भारत ट्रेन शुरू करने की मांग पर भी रेलवे बोर्ड ने जवाब दिया है। सांसद निरंजन बिशी ने 30 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बलांगीर से नई दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु और जम्मू जैसे प्रमुख शहरों के लिए वंदे भारत कनेक्टिविटी की मांग की थी।
  • रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में कहा कि बलांगीर के पास पहले से 66 ट्रेन सेवाएं हैं। इनमें बेंगलुरु और वाराणसी की ओर जाने वाली कई ट्रेनें शामिल हैं। दिल्ली की ओर मौजूदा कनेक्टिविटी के लिए रेलवे ने समता एक्सप्रेस और टिटलागढ़ की कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया।
  • हालांकि, रेलवे बोर्ड का जवाब नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने संकेत दिया है कि किसी नई ट्रेन सेवा की शुरुआत ट्रैफिक सर्वे, परिचालन की व्यवहार्यता और कोचों की उपलब्धता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

8. वंदे भारत के TTE का वीडियो 1 करोड़ व्यूज के पार

  • नई ट्रेनों और रेलवे की योजनाओं से अलग वंदे भारत से जुड़ी एक घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है। TTE अमित गुप्ता के अनुसार, दो लड़के एक रेलवे स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत ट्रेन में सिर्फ अंदर से ट्रेन देखने के लिए चढ़ गए थे। ट्रेन में चढ़ने के बाद उसके दरवाजे बंद हो गए। वे तुरंत नीचे नहीं उतर सके।
  • इसके बाद उनकी मुलाकात TTE से हुई। शुरुआत में TTE को लगा कि दोनों बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में उन पर 4,840 रुपये का संभावित जुर्माना लग सकता था। लड़कों ने बताया कि उनके पास सिर्फ 300 रुपये हैं। बाद में TTE को पता चला कि दोनों ट्रेन में यात्रा करने के लिए नहीं बल्कि उसे अंदर से देखने के लिए चढ़े थे।
  • इसके बाद TTE ने कथित तौर पर 300 रुपये लेने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए। उन्होंने दोनों लड़कों को अगले स्टेशन पर उतरने के लिए कहा और दरवाजे के पास वाले हिस्से में बैठने को कहा।
  • अमित गुप्ता ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। बताया गया है कि वीडियो को चार दिनों में 1 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। वीडियो पर बड़ी संख्या में लाइक्स और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं।

9. वंदे भारत बनाम राजधानी: कौन सी ट्रेन बेहतर?

  • वंदे भारत नेटवर्क के विस्तार के साथ इसकी तुलना राजधानी एक्सप्रेस से भी लगातार की जा रही है। हालांकि, दोनों ट्रेनों को अलग-अलग यात्रा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
  • पहली राजधानी एक्सप्रेस 1969 में नई दिल्ली और हावड़ा के बीच शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राजधानी और देश के प्रमुख शहरों के बीच तेज रात की यात्रा उपलब्ध कराना था।
  • वहीं, वंदे भारत ने फरवरी 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी रूट से सेवा शुरू की और इसे मुख्य रूप से तेज दिन की इंटर-सिटी यात्रा के लिए तैयार किया गया।
  • दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यात्रा के स्वरूप का है। सामान्य वंदे भारत में चेयर-कार यात्रा की सुविधा होती है, जबकि कई सेवाओं में एग्जीक्यूटिव चेयर कार भी उपलब्ध है।
  • वंदे भारत में ऑटोमैटिक दरवाजे, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और आधुनिक सीटिंग जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
  • इसके मुकाबले राजधानी एक्सप्रेस में पारंपरिक रूप से फर्स्ट AC, सेकेंड AC और थर्ड AC में सोने की सुविधा होती है। इसलिए रातभर की यात्रा के लिए राजधानी अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
  • हालांकि, स्लीपर वंदे भारत के आने के बाद दोनों ट्रेनों के बीच का यह अंतर धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है।

10. स्लीपर वंदे भारत बदल सकती है लंबी दूरी की यात्रा का समीकरण

  • स्लीपर वंदे भारत में वंदे भारत की आधुनिक डिजाइन और तकनीक को रात की लंबी दूरी की यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन ट्रेनों में सोने के लिए बर्थ, कुशन वाली बर्थ, शोर कम करने वाली तकनीक और सेंसर आधारित लाइटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
  • फर्स्ट AC सेक्शन में प्रीमियम यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं मिलने की भी उम्मीद है। इससे स्लीपर वंदे भारत कुछ चुनिंदा रूटों पर राजधानी एक्सप्रेस समेत प्रीमियम रात की ट्रेनों को सीधी टक्कर दे सकती है।
  • आखिरकार यात्रियों के लिए फैसला सिर्फ ट्रेन के नाम पर नहीं, बल्कि यात्रा का समय, कुल अवधि, सुविधा और किराए जैसे पहलुओं पर निर्भर करेगा। ताजा घटनाक्रम से साफ है कि वंदे भारत अब सिर्फ तेज रफ्तार वाली दिन की इंटर-सिटी ट्रेन तक सीमित नहीं रह गई है।
  • स्लीपर सेवाएं, नए रूट, तेज माल ढुलाई और मौजूदा सेवाओं में बदलाव इसके अगले विस्तार की दिशा तय कर रहे हैं। वाराणसी-नई दिल्ली स्लीपर वंदे भारत और सूरत-उदयपुर जैसी प्रस्तावित सेवाएं यात्रियों के लिए नई कनेक्टिविटी ला सकती हैं। जबकि तेज माल ढुलाई वाला मॉडल रेलवे के लिए एक नए कारोबारी क्षेत्र का रास्ता खोल सकता है।

ये भी पढ़ें- जेपी विशटाउन के 20,000 पेंडिंग फ्लैट्स पर बड़ा अपडेट! जानिए अब सुरक्षा ग्रुप कब तक पजेशन सौंपने की कर रहा बात

iPhone Duo vs Investment: ₹4.49 लाख का फोन खरीदना सही या इसी पैसे को निवेश करना? समझिए पूरा हिसाब

iPhone Duo vs Investment: अमेरिकी टेक कंपनी Apple का iPhone Duo 2TB भारत में ₹4.49 लाख का है। इतनी कीमत में यह फोन लग्जरी खरीदारी की कैटेगरी में आता है। ऐसे में सवाल सिर्फ ये नहीं कि आप इसे खरीद सकते हैं या नहीं। सवाल ये भी है कि अगर यही ₹4.49 लाख निवेश कर दिए जाएं, तो आगे कितनी रकम बन सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फैसला सिर्फ फोन की कीमत देखकर नहीं करना चाहिए। आपकी आमदनी, बचत, निवेश और दूसरे खर्च भी देखने होंगे। साथ ही ये भी देखना होगा कि इस पैसे को खर्च करने की निवेश करने की सूरत क्या रहेगी।

क्या ₹4.49 लाख का iPhone खरीदना सही है?

₹4.49 लाख का स्मार्टफोन खर्च है। इसे निवेश नहीं माना जा सकता। इसलिए खरीदारी तभी ठीक है, जब यह पैसा आपकी अतिरिक्त आय से आ रहा हो। इससे आपके दूसरे वित्तीय लक्ष्य भी प्रभावित नहीं होने चाहिए।

MidasX के को-फाउंडर और CIS अनिल गुप्ता ने कहा, ‘वेल्थ क्रिएशन के नजरिए से ₹4.49 लाख का प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदना कंजम्पशन डिसीजन है, निवेश का फैसला नहीं।’ उनके मुताबिक, सवाल सिर्फ फोन की कीमत का नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि अगर यही ₹4.49 लाख कहीं निवेश किए जाते, तो आगे कितनी रकम बन सकती थी।

गुप्ता का कहना है कि इंडेक्स फंड में लगाया पैसा समय के साथ बढ़ सकता है। वहीं फोन खरीदते ही उसकी वैल्यू कम होने लगती है। अगर आपके पास पहले से इमरजेंसी फंड है। पर्याप्त इंश्योरेंस है। लंबे समय के निवेश भी चल रहे हैं। तब इसे लाइफस्टाइल खर्च माना जा सकता है।

कम कीमत का फोन लेकर बाकी पैसा लगाएं?

Capwise Financial Services के फाउंडर और CEO नरेश बियानी के मुताबिक, फैसला सिर्फ फोन और इंडेक्स फंड के बीच नहीं होना चाहिए। आप कम कीमत का फोन भी खरीद सकते हैं। बची रकम को निवेश किया जा सकता है।

लोन लेकर फोन खरीद रहे हैं तो मामला और अहम हो जाता है। Anand Rathi Wealth के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष श्रीवास्तव के मुताबिक, ₹4.5 लाख के फोन पर दो साल की EMI करीब ₹18,000-19,000 महीने हो सकती है। अगर ये आपकी इनहैंड सैलरी के 5-10% से ज्यादा है और पहले से दूसरी EMI चल रही है, तो ये बड़ा बोझ बन सकता है।

₹4.49 लाख निवेश करने पर कितनी रकम बन सकती है?

मान लीजिए ₹4.49 लाख को एकमुश्त इंडेक्स फंड में लगाया गया। 11% CAGR मानने पर यह रकम 10 साल में करीब ₹12.7 लाख हो सकती है। 15 साल में करीब ₹21.5 लाख और 20 साल में करीब ₹36.2 लाख हो सकती है।

अगर Diversified Equity Fund में 13% CAGR मानें, तो यही रकम 10 साल में करीब ₹15.25 लाख हो सकती है। 15 साल में करीब ₹28.1 लाख और 20 साल में करीब ₹51.8 लाख हो सकती है।

ब्रोकिंग फर्म आनंद राठी के मुताबिक, Nifty 50 ने लंबे समय में करीब 10-11% रिटर्न दिया है। Diversified Equity Funds एक्टिव मैनेजमेंट के जरिए ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं।

खरीदने से पहले इन बातों पर गौर करें

सबसे पहले देखें कि ₹4.49 लाख आपकी सरप्लस रकम है या बचत का हिस्सा। नरेश बियानी ने इसे मासिक खर्च के हिसाब से देखने की भी सलाह दी है। तीन साल में इस खर्च को बांटें तो यह करीब ₹12,500 महीने बैठता है।

मनीष श्रीवास्तव के मुताबिक, बड़ी खरीदारी से पहले 6-8 महीने का इमरजेंसी फंड होना चाहिए। हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस भी पर्याप्त होना चाहिए। हाई-इंटरेस्ट कर्ज नहीं होना चाहिए। वित्तीय लक्ष्यों के लिए निवेश भी चलता रहना चाहिए। उनके मुताबिक, आपकी कुल मासिक EMI और फिक्स्ड खर्च आपकी आय के 40-50% से ज्यादा नहीं होने चाहिए।

आईफोन डुओ खरीदें या फिर निवेश करें?

Rupyaapaisa.com के फाउंडर और MD मुकेश पांडे के मुताबिक, अगर फोन खरीदने के बाद भी पर्याप्त खर्च करने लायक रकम बचती है। और इससे जरूरी वित्तीय लक्ष्य प्रभावित नहीं होते, तो खरीदारी की जा सकती है। लेकिन अगर ₹4.49 लाख आपकी बचत का बड़ा हिस्सा है, तो पैसा निवेश करना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

आखिर में फैसला आपकी जेब और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। अगर फोन सरप्लस इनकम से खरीदा जा रहा है, तो यह जरूरी नहीं कि फैसला गलत हो। लेकिन अगर इसके लिए निवेश रोकना पड़ रहा है या इमरजेंसी फंड खत्म हो रहा है, तो ₹4.49 लाख की Opportunity Cost काफी बड़ी हो सकती है।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख का पर्सनल लोन लेने पर कितना ब्याज देना होगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

देश की पहली बुलेट ट्रेन पर बड़ा अपडेट! 2027 में खुलेगा सूरत-वापी का 100 किमी का स्ट्रेच, स्क्वीज टेस्ट को लेकर आई ये जानकारी

भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर देशवासियों का इंतजार अब बहुत जल्द खत्म होने वाला है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की प्रगति पर एक बड़ा अपडेट साझा करते हुए बताया है कि देश की पहली बुलेट ट्रेन का औपचारिक उद्घाटन साल 2027 में तय किया गया है। इसके तहत सबसे पहले गुजरात के सूरत और वापी के बीच 100 किलोमीटर लंबे सेक्शन की शुरुआत की जाएगी। इस रूट पर निर्माण कार्य बहुत ही तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इस पूरे सेक्शन का काम इस साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

अगले साल मई-जून में पटरी पर उतरेगी ट्रेन, टेस्ट कोच बनकर तैयार

परियोजना के परीक्षण और सुरक्षा पहलुओं की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन का पहला टेस्ट कोच पिछले हफ्ते ही बनकर तैयार हो चुका है। योजना के मुताबिक अगले साल मई-जून तक ट्रेन को औपचारिक टेस्टिंग के लिए पटरी पर उतार दिया जाएगा। ट्रेन को ट्रैक पर उतारने से पहले इसके विभिन्न तकनीकी और यांत्रिक परीक्षण किए जा रहे हैं। ट्रायल और टेस्टिंग की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 2027 में इस बहुप्रतीक्षित ट्रेन सेवा का उद्घाटन कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

क्या होता है स्क्वीज टेस्ट और क्लाइमेट टेस्ट

ट्रेन कोच की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए इसे कई कड़े परीक्षणों से गुजारा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, कोच का सबसे पहला और महत्वपूर्ण परीक्षण स्क्वीज टेस्ट होता है। इस टेस्ट में कोच के ढांचे पर भारी दबाव (प्रेशर) डाला जाता है, जिससे उसकी मैकेनिकल स्ट्रेंथ यानी यांत्रिक मजबूती और संरचनात्मक सहनशक्ति के फीचर्स की बारीकी से जांच की जा सके। स्क्वीज टेस्ट में खरा उतरने के बाद कोच क ‘क्लाइमेट टेस्ट किया जाएगा। इस टेस्ट के दौरान कोच को पानी में रखने के साथ-साथ अत्यधिक उच्च और निम्न तापमान की विपरीत परिस्थितियों में रखकर परखा जाएगा। इन सभी कड़े टेस्ट में सफल होने के बाद ही कोच की इंटीरियर फर्निशिंग और बाकी के अन्य कोचों के निर्माण का काम पूरा किया जाएगा।

508 किलोमीटर लंबा है मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर

आपको बता दें कि भारत की यह पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे इस पूरे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस पूरे रूट पर कुल 12 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। इन सभी स्टेशनों को संबंधित शहर की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर खूबसूरत और आधुनिक रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जहां यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मिलेगी।

2017 में रखी गई थी इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की नींव

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी, जिसे भारत के ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक मील का पत्थर माना गया। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों यानी मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को कई घंटे घटाना ही नहीं है बल्कि भारतीय रेल यात्रियों को विश्वस्तरीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के साथ हाई-स्पीड यात्रा का एक नया और शानदार अनुभव प्रदान करना भी है।

Hanuman Ansh Director: ‘जिन लोगों ने मेरी मदद नहीं की, वे अब मुझे बधाई दे रहे हैं’, ‘हनुमान अंश’ के डायरेक्टर ने खोली बॉलीवुड की पोल

Hanuman Ansh Director: ‘हनुमान अंश’ एक ऐसी फिल्म साबित हुई है जिसे शुरू में ज़्यादा उम्मीद नहीं थी, लेकिन यह हाल के हफ़्तों की बॉक्स-ऑफ़िस पर सबसे चौंकाने वाली सफल फ़िल्मों में से एक बन गई है। 7 अगस्त को रिलीज़ हुई यह फ़िल्म देश भर में सैकड़ों शो के साथ सिनेमाघरों में शुरू हुई थी। शुरुआत में ‘हनुमान अंश’ के पूरे भारत में 350 से ज़्यादा शो थे। लेकिन दूसरी फ़िल्मों के साथ मुक़ाबले की वजह से सिनेमाघरों में इसकी मौजूदगी काफ़ी कम हो गई।

‘द रौनक पॉडकास्ट’ पर बात करते हुए विशाल ने कहा, “लोगों ने ही इस फ़िल्म को आगे बढ़ाया। जिन सिनेमाघरों में बड़ी फ़िल्में रिलीज़ होने वाली थीं, उन्होंने हमारी फ़िल्म के लिए स्क्रीन की संख्या कम कर दी। हमारे शो की संख्या 250 से घटकर 25 रह गई। अच्छी जगहों पर मौजूद PVR और सिनेपोलिस जैसे मल्टीप्लेक्स हमारे शो चलाने को लेकर हिचकिचा रहे थे।”

शो की संख्या में अचानक आई कमी से विशाल को लगा कि उनका यह पसंदीदा प्रोजेक्ट शायद फ़ेल हो गया है। इसी दौरान, इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट ने उन्हें उम्मीद से ज़्यादा हिम्मत दी। उन्होंने कहा, “इस अनिश्चितता के बीच, मुझे इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट दिखा, जिसे मैं आम तौर पर नज़रअंदाज़ कर देता हूं।

ये वो पोस्ट होते हैं जिन्हें लोग खुद लिखते हैं और महाराज जी के संदेश के तौर पर पेश करते हैं। मन ही मन मुझे लग रहा था कि मेरी फ़िल्म बुरी तरह पिट गई है। हालाँकि, ऐसे समय में उस पोस्ट में लिखा था, ‘अपना काम करो, बाकी मैं संभाल लूँगा।’ इसने पहले हफ़्ते के आखिर में मुझे अजीब तरह से प्रेरित किया।”

सिर्फ़ पारंपरिक प्रमोशन पर निर्भर रहने के बजाय, विशाल ने अपनी टीम के साथ यात्रा करने और दर्शकों से खुद मिलने का फ़ैसला किया। आज़ादी के दिन से पहले वाले शुक्रवार को, वह मुख्य अभिनेता शोबिनव सत्या और संगीतकार ऋषि पाठक के साथ सूरत गए। टीम तब पहुंची जब फ़िल्म की स्क्रीनिंग चल रही थी। दर्शकों से मिले रिस्पॉन्स ने आखिरकार फ़िल्म के प्रति थिएटर मालिक का नज़रिया बदल दिया।

उन्होंने बताया, “हम सूरत के लिए निकले, जहां उन्होंने सिर्फ़ एक शो रखा था। हम तब पहुंचे जब शो चल रहा था। जब उन्होंने हमें देखकर लोगों का रिएक्शन देखा—लोग हमें गले लगा रहे थे और रो रहे थे—तो थिएटर मालिक हैरान रह गए। उस व्यक्ति ने दूसरे थिएटरों को फ़ोन करना शुरू किया और शो की संख्या बढ़ गई। फिर हम वडोदरा और अलीगढ़ जैसी जगहों पर गए और शो की संख्या में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई।”

इसके बाद विशाल और उनकी टीम ने कई जगहों का दौरा किया, थिएटर और मंदिरों में गए और सीधे दर्शकों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ में, उस हफ़्ते जोड़े गए पहले शो के सभी टिकट 15 मिनट में ही बिक गए।

इसके बाद फ़िल्म की थिएटर यात्रा ने रफ़्तार पकड़ी; फ़िल्ममेकर से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ अब 75 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब पहुँच रही है। उन्होंने यह भी बताया कि फ़िल्म 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ किया जाएगा।

‘हनुमान अंश’ थिएटर में ‘आवारापन 2’ और ‘बंटवारा’ के साथ रिलीज़ हुई थी। फ़िल्म की सफलता के बावजूद, विशाल ने कहा कि जब फ़िल्म संघर्ष कर रही थी, तब उन्हें हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री से वैसी मदद नहीं मिली जैसी उन्हें उम्मीद थी।

उन्होंने कहा, “फ़िल्म के अच्छा प्रदर्शन करने के बाद, कई लोगों ने मुझे बधाई देने के लिए फ़ोन किया। मैं उनके नाम नहीं लेना चाहता। बधाई देने वालों में मधुर भंडारकर भी शामिल थे, जिनसे मैंने कोई मदद नहीं मांगी थी। हालांकि, मैं दूसरों का ज़िक्र नहीं कर रहा हूं क्योंकि मैंने उन लोगों से मदद मांगी थी और उन्होंने मेरी मदद नहीं की। इसलिए, मैं अभी उनके नाम नहीं लेना चाहता, सिर्फ़ इसलिए कि वे मुझे बधाई दे रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ज़्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि क्या चलेगा, फिर भी वे दूसरों को अपनी सलाह देते रहते हैं। इंडस्ट्री उलझन में पड़े लोगों से भरी हुई है। यहां दो तरह के लोग हैं – एक वे जो सच में फ़िल्में बनाना चाहते हैं, और दूसरे वे जिनमें कोई जुनून नहीं है और वे सोचते हैं कि फ़िल्म बनाना एक ऐसी चीज़ है जिसे उन्हें आज़माना चाहिए।”

Delhi Weather Today: दिल्ली में आज फिर बरसेंगे बादल! हल्की से मध्यम बारिश के आसार, 5 सितंबर से बदलेगा मौसम

Delhi Weather Today: दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को आसमान में बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, राजधानी में एक बार फिर बारिश का दौर देखने को मिल सकता है, जिससे अभी बनी हुई उमस और गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

इस दौरान अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। दिनभर उमस बनी रह सकती है और नमी का स्तर 65 से 85 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।

दिन के समय में ज्यादातर बादल छाए रहने की उम्मीद है और शहर के कई हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है। बारिश की संभावना के बावजूद, राजधानी के लिए मौसम से जुड़ी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

बता दें कि 2 सितंबर, बुधवार को दिल्ली में गर्म और उमस भरा मौसम रहा। मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिनभर आसमान में बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई थी। शहर में उमस काफी ज्यादा रही, जिससे गर्मी के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

आने वाले दिनों के मौसम के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में मौसम धीरे-धीरे बदल सकता है। 4 सितंबर को अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। साथ ही, दिन में आमतौर पर बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

5 सितंबर से बदलेगा मौसम

5 सितंबर से मौसम के अपेक्षाकृत शुष्क होने की उम्मीद है। 5 और 6 सितंबर को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, इस दौरान अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

वहीं, 7 सितंबर को अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान गिरकर लगभग 23 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की भी संभावना है। इसके अलावा, 8 सितंबर तक अधिकतम तापमान थोड़ा बढ़कर लगभग 33 डिग्री सेल्सियस हो सकता है, और न्यूनतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है।

अगले कुछ दिनों में नमी के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है, 3 और 4 सितंबर को यह लगभग 80-85 प्रतिशत थी, जो 8 सितंबर तक घटकर लगभग 70 प्रतिशत हो जाएगी।

हालांकि, गुरुवार को लोगों को बादल छाए रहने और मध्यम बारिश के लिए तैयार रहना चाहिए, खासकर तब जब बारिश तेज हो जाए। अभी तक दिल्ली के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

यह भी पढ़ें: रेलवे बोर्ड ने सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन को दी मंजूरी, 9 स्टॉपेज के साथ जानें टाइमिंग और रूट

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

climate change

प्रभाकर मणि तिवारी

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया के मुंबई, कोलकाता और ढाका समेत निचले इलाको में बसे कई शहरों में 1.40 करोड़ लोगों पर निकट भविष्य में विस्थापन का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2024 में समुद्री जलस्तर में रिकार्ड छह मिलीमीटर की वृद्धि ने इस खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या-क्या कहा गया है यूएन की रिपोर्ट में?

संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद ने 55वीं पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स मीटिंग में सोमवार को यह रिपोर्ट जारी की। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव नवीद हनीफ ने भी न्यूयार्क में पत्रकारों को विस्तार से इसकी जानकारी दी।

 

रिपोर्ट में विस्थापन के खतरे की समयसीमा के बारे में तो कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि इसके मुताबिक, दुनिया भर के करीब 77 करोड़ लोग इस खतरे की चपेट में आ सकते हैं। इसमें कहा गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आगे चल कर खाद्य सुरक्षा, पूर्वजों की जमीन और हमारी पहचान के लिए भी खतरा बन सकता है। ऐसे में सरकारों को इस मुद्दे को अपनी योजना प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए एक बहुत ही व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

 

रिपोर्ट में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने से बाढ़ और सूखे के बढ़ने की चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि ग्लेशियरों की तादाद ज्यादा होने के कारण दक्षिण एशिया दुनिया का 'तीसरा ध्रुव' बन गया है।

 

अब तक मिले संकेतों से अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगले 15-20 वर्षों में दक्षिण एशिया में ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है। उसके बाद पैदा होने वाली सूखे की स्थिति के कारण खेती और खाद्य सुरक्षा पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे बदलाव हिमालयी नदी प्रणाली और खेती पर निर्भर समुदायों को के लिए बड़ा खतरा बनेंगे।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया तेज होती है और पानी गर्म होता है। इसका असर कई स्तरों पर नजर आता है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से शहरी बुनियादी ढांचे, जल प्रणालियों, परिवहन, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को पहले ही नुकसान पहुंच रहा है। इसके दूरगामी नतीजे सामने आ रहे हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर कम ऊंचाई वाले द्वीपीय देशों पर होगा। हालांकि यह उन तक ही सीमित नहीं रहेगा।समुद्र का बढ़ता जलस्तर विकसित और विकासशील, दोनों वर्ग के देशों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका के न्यूयार्क और मियामी के अलावा ग्वांझू जैसे ज्यादा आय वाले शहरों में तटवर्ती इलाके के बुनियादी ढांचे पर भी खतरे की आशंका है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

एशिया के किन शहरों पर खतरा ज्यादा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में खासकर भारतीय शहरों कोलकाता और मुंबई के अलावा बांग्लादेश की राजधानी ढाका पर समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे गंभीर हैं।  दूसरे इलाकों की तुलना में यहां खतरा ज्यादा होने की क्या वजह है?

 

पर्यावरणविदों का कहना है कि इन शहरों में समुद्री जमीन पर तेजी से बुनियादी ढांचे के साथ ही इंसानी बस्तियां बसाई जा रही हैं। लगातार बढ़ती आबादी के कारण जमीन की कमी हो रही है। ऐसे में टाउन प्लानरों के सामने समुद्री जमीन हासिल करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।

 

उनके मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा इन शहरों के उन तटीय इलाकों में हैं जहां बीते 15-20 साल में समुद्री जमीन पर बड़े पैमाने पर बस्तियां बसाई गई हैं।

 

कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में सामुद्रिक विज्ञान संस्थान के प्रमुख डा। सुगत हाजरा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “समुद्री जमीन पर बुनियादी ढांचा और इंसानी बस्तियां बसाने की योजना बनाते समय पर्यावरणया भविष्य में पैदा होने खतरों की अनदेखी की जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए इससे निपटने के लिए दीर्घकालीन रणनीति बनाने और उस पर अमल करने की जरूरत है।”

 

हाजरा कहते हैं, “बंगाल के सुंदरबन इलाके में बसे द्वीपों पर बीते कई सालों से ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले बदलाव का असर नजर आ रहा है। बंगाल की खाड़ी के बढ़ते जलस्तर के कारण इलाके के कई द्वीप पानी में डूब चुके हैं और कई डूबने की कगार पर हैं। उन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।” ALSO READ: शहरों को ठंडा रखने वाले पेड़ों को भी अब चाहिए सहारा

 

जादवपुर विश्वविद्यालय में ही जलवायु परिवर्तनकार्यक्रम की प्रमुख जयश्री राय डीडब्ल्यू से कहती हैं, “संयुक्त राष्ट्र पहले से इस खतरे की चेतावनी देता रहा है। अफसोस की बात यह है कि सरकार ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया है। शायद इस खतरे से बचने की दिशा में ठोस पहल करने से पहले हम सिक्किम, धराली और नेपाल जैसी किसी आपदा का इंतजार कर रहे हैं।”

 

कोलकाता में मौसम विज्ञानी डा. प्रणवेश कुंडू डीडब्ल्यू से कहते हैं, “संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम एजेंसियां समय-समय पर इस खतरे से आगाह करती रही हैं। लेकिन अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद लोग इसे भूल जाते हैं।” वो बताते हैं, “वर्ष 2019 में अमेरिका स्थित शोध समूह क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर पेश की थी। उसमें में कहा गया था कि वर्ष 2050 तक भारत में बाढ़ और समुद्र का जलस्तर बढ़ने की वजह से 3।60 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।”

 

कुंडू ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में सूरत, मुंबई, कोलकाता, केरल, ओडीशा और चेन्नई जैसी तटवर्ती इलाकों पर भी भारी खतरा मंडराने की चेतावनी दी गई थी। लेकिन उसका गंभीरता से संज्ञान तक नहीं लिया गया। अब ताजा रिपोर्ट में भी वही चेतावनी दोहराई गई है।

रेलवे बोर्ड ने सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन को दी मंजूरी, 9 स्टॉपेज के साथ जानें टाइमिंग और रूट

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: रेल मंत्रालय ने गुजरात को राजस्थान से जोड़ने वाली एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को मंज़ूरी दे दी है। यह नई सेमी-हाई स्पीड ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच चलेगी। इस ट्रेन का रखरखाव और संचालन वेस्टर्न रेलवे (WR) जोन करेगा।

वेस्टर्न रेलवे और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजर (ऑपरेटिंग) को 31 अगस्त को लिखे एक पत्र में, रेलवे बोर्ड ने बताया कि उसने 26903/26904 सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने को मंजूरी दे दी है।

इंडियन रेलवे एक वंदे भारत ट्रेन बंद करेगा

रेलवे बोर्ड ने ट्रेन नंबर 26963/26964 उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत एक्सप्रेस को बंद करने की भी मंजूरी दी है। उदयपुर सिटी-असारवा (अहमदाबाद) वंदे भारत एक्सप्रेस फरवरी 2026 में शुरू की गई थी। अभी यह ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में छह दिन चलती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन: दूरी और यात्रा का समय

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन लगभग 690 किलोमीटर की दूरी 7 घंटे 30 मिनट में तय करती है। यह अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस: ​​स्टॉपेज और फ्रीक्वेंसी

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में 6 दिन चलेगी। सूरत और उदयपुर सिटी के बीच अपनी यात्रा के दौरान, यह ट्रेन 9 रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी। ये स्टेशन हैं: भरूच, वडोदरा, आणंद, मणिनगर, असरवा, हिम्मतनगर, शामलाजी रोड, डूंगरपुर और जावर।

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत: कोच की संख्या और समय

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस में 8 कोच होंगे। ट्रेन नंबर 26903 सूरत से सुबह 06:10 बजे चलेगी और दोपहर 13:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। वापसी में, ट्रेन नंबर 26904 उदयपुर सिटी से दोपहर 15:35 बजे चलेगी और रात 23:00 बजे सूरत पहुंचेगी।

स्क्रीनशॉट 2026-09-02 210246

स्क्रीनशॉट 2026-09-02 210340

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार 5वें सत्र गिरा, चांदी एक दिन में ₹5000 फिसली

Gold Silver Prices Today: सोने में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। 1 सितंबर को दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार पांचवें सत्र सोने में गिरावट आई। यह 2,700 रुपये गिरकर 1,58,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह करीब दो हफ्ते में सोने का सबसे कम भाव है। चांदी में भी बड़ी गिरावट आई।

बीते 5 सत्रों में सोना करीब 9000 रुपये सस्ता हुआ

बीते पांच सत्रों में दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 5.3 फीसदी यानी 8,900 रुपये तक सस्ता हो चुका है। 25 अगस्त को सोने का भाव 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था, जो बीते तीन महीनों में सोने का सबसे हाई लेवल था। लेकिन, उसके बाद से सोने में लगातार गिरावट दिख रही है।

दिल्ली में चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

दिल्ली सर्राफा बाजारर में चांदी में भी 1 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। यह 5,000 रुपये गिरकर 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने और चांदी में लगातार गिरावट की वजह मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव है। एक बार फिर से दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी हमले की सूरत बनती दिख रही है।

मध्यपूर्व में तनाव बढ़ने का असर बुलियन पर पड़ रहा

अमेरिका-ईरान में टेंशन बढ़ने का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा है। ब्रेंट क्रूड का प्राइस 1 सितंबर को 92 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया। अगर क्रूड की कीमतें इस लेवल पर बनी रहती हैं तो इस महीने अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श पहले ही कह चुके हैं कि उनकी प्राथमिकता महंगाई को बढ़ने से रोकना है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का डर

आनंदराठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज एंड करेंसीज) वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत में भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है। दरअसल इससे क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ रही है, जो महंगाई बढ़ा सकती हैं।

पीएम मोदी ने सोना नहीं खरीदने की अपील लोगों से की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से तब तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है, जब तक ऐसा करना बहुत जरूरी नहीं हो जाता। उन्होंने लोगों से बेवजह विदेश यात्रा नहीं करने की भी अपील की है। देश में लोगों के ज्यादा सोना खरीदने से सरकार को गोल्ड का ज्यादा आयात करना पड़ता है। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ता है। इसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी 1 सितंबर को सोने और चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 2.42 फीसदी गिरकर 4,334 डॉलर प्रति औंस चल रहा था। स्पॉट सिल्वर 3.02 फीसदी गिरकर 64.52 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म में सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है।