Dividend Stocks: टाइटन से नेस्ले तक… इस हफ्ते 45 कंपनियां देंगी ₹75 तक का डिविडेंड, चेक करें पूरी लिस्ट

Dividend Stocks: अगले हफ्ते यानी 6 से 10 जुलाई के बीच शेयर बाजार में कई कंपनियों के कॉरपोरेट एक्शन पर निवेशकों की नजर रहेगी। कई बड़ी कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड (Ex-Dividend) पर ट्रेड करेंगे। अगर आप डिविडेंड का फायदा उठाना चाहते हैं, तो एक्स-डेट से पहले शेयर खरीदना होगा। तभी आप कंपनी की ओर से घोषित डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

सिर्फ डिविडेंड ही नहीं, अगले हफ्ते कुछ कंपनियों के शेयर बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट के लिए भी एक्स-डेट पर ट्रेड करेंगे। ऐसे में यह हफ्ता निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाला है।

6 जुलाई को किन शेयरों पर रहेगा फोकस?

6 जुलाई को चार कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे। DCM Shriram International अपने निवेशकों को 0.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। DJ Mediaprint & Logistics ने 0.15 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

वहीं, Pilani Investment and Industries Corporation 9 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी। Sundaram Finance ने 24 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

7 जुलाई को इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड

7 जुलाई को पांच कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर ट्रेड करेंगे। Cera Sanitaryware ने 75 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। Dodla Dairy और Sun Pharmaceutical Industries दोनों 5-5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देंगी।

वहीं, JSW Steel ने 7.10 रुपये प्रति शेयर और LKP Securities ने 0.20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

8 जुलाई को किन स्टॉक्स में मिलेगा डिविडेंड?

8 जुलाई को छह कंपनियां एक्स-डिविडेंड होंगी। इनमें Bliss GVS Pharma 1 रुपये, Hannah Joseph Hospital 2 रुपये, Kesar Terminals & Infrastructure 1.25 रुपये और Morarka Finance 1.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

वहीं, Mphasis ने 62 रुपये प्रति शेयर और United Spirits ने 11 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

9 जुलाई को इन शेयरों पर रहेगी नजर

9 जुलाई को चार कंपनियां एक्स-डिविडेंड होंगी। Harsha Engineers International 1.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। RPG Life Sciences ने 24 रुपये प्रति शेयर, Sheela Foam ने 1 रुपये प्रति शेयर और Titan Company ने 15 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

10 जुलाई को सबसे ज्यादा कंपनियां

10 जुलाई इस हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन रहेगा। इस दिन 25 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर ट्रेड करेंगे। इनमें Apollo Tyres, Axis Bank, Birlasoft, CAMS, D-Link (India), Dr Reddy’s Laboratories, Geojit Financial, Hindalco, JK Cement, JSW Cement, Mahindra Logistics, Nestle India और Sobha जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों में D-Link (India) ने 20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड और 7.50 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है। Nestle India अपने निवेशकों को 5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल और 2 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड देगी।

इसके अलावा Axis Bank 1 रुपये, Hindalco Industries 5 रुपये, JK Cement 20 रुपये, Apollo Tyres 2.50 रुपये और Dr Reddy’s Laboratories 8 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट भी होंगे

अगले हफ्ते चार कंपनियों में बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट भी होने वाला है। Gujarat Inject Kerala का शेयर 8 जुलाई को 10 रुपये फेस वैल्यू से 1 रुपये फेस वैल्यू में स्टॉक स्प्लिट होगा। Goldiam International 10 जुलाई को 1:3 बोनस इश्यू के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेगी।

वहीं, Hindusthan Insulators & Industries ने 2:1 बोनस इश्यू का ऐलान किया है। Mangalam Worldwide का शेयर भी 10 जुलाई को 10 रुपये फेस वैल्यू से 1 रुपये फेस वैल्यू में स्टॉक स्प्लिट होगा।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

अगर आप डिविडेंड, बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो संबंधित कंपनी के शेयर एक्स-डेट से पहले खरीदने होंगे। साथ ही, कंपनी की ओर से तय रिकॉर्ड डेट का भी ध्यान रखना जरूरी है। रिकॉर्ड डेट पर जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वही डिविडेंड, बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट का लाभ पाने के पात्र होंगे।

IT Stocks: चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने आईटी कंपनियों की रेटिंग-टारगेट घटाए, कहा- रिकवरी में लग सकता है वक्त

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IT Stocks: चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने आईटी कंपनियों की रेटिंग-टारगेट घटाए, कहा- रिकवरी में लग सकता है वक्त

IT Stocks: ब्रोकरेज फर्म Choice Institutional Equities का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक और कमजोर तिमाही साबित हो सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मांग में सुधार नहीं दिख रहा। उल्टा हालात और बिगड़े हैं। इससे साफ है कि जिस रिकवरी की उम्मीद थी, वह अब और आगे खिसक गई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। कंपनियां नए फैसले लेने में समय लगा रही हैं। AI की वजह से प्रोडक्टिविटी बढ़ी है, लेकिन इसका असर रेवेन्यू पर दबाव के रूप में दिख रहा है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव भी बना हुआ है। इन सब वजहों से कंपनियां गैरजरूरी (Discretionary) खर्च कम कर रही हैं। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर की ग्रोथ पर पड़ रहा है।

लार्जकैप और मिडकैप पर अनुमान

ब्रोकरेज का मानना है कि बड़ी आईटी कंपनियों की कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) ग्रोथ तिमाही आधार पर सपाट रह सकती है। कुछ कंपनियों में हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है।

वहीं, मिडकैप आईटी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इसकी वजह नए डील्स का शुरू होना और बाजार हिस्सेदारी बढ़ना है।

कमाई के अनुमान में कटौती

Choice Institutional Equities का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही की ग्रोथ पूरे साल के गाइडेंस के हिसाब से कमजोर दिख रही है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में कई कंपनियां अपने गाइडेंस में बदलाव कर सकती हैं। कमाई के अनुमान भी घटाए जा सकते हैं।

इसी वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए पूरे आईटी सेक्टर की कमाई के अनुमान में 0.1% से 16.7% तक की कटौती की है। साथ ही, कई कंपनियों के टारगेट प्राइस और वैल्यूएशन में भी 0% से 21.6% तक की कमी की गई है। इसकी वजह कमजोर मांग, AI की वजह से रेवेन्यू पर दबाव और बढ़ता एग्जीक्यूशन रिस्क है।

क्या अब आईटी शेयरों में खरीदारी का मौका है?

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी शेयरों में पहले ही अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है। इसलिए अब नीचे जाने की गुंजाइश सीमित दिखती है। हालांकि, सेक्टर में दोबारा तेज तेजी तभी आएगी, जब मांग में सुधार दिखे। कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ तेज हो। साथ ही, GenAI से सिर्फ लागत घटाने के बजाय कमाई बढ़ने के भी साफ संकेत मिलें।

HCLTech : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने HCLTech की रेटिंग ‘Add’ से बढ़ाकर ‘Buy’ कर दी है। हालांकि, टारगेट प्राइस 1,500 रुपये से घटाकर 1,410 रुपये कर दिया गया है।

Mphasis : इसकी रेटिंग ‘Buy’ से घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 2,520 रुपये रखा गया है।

Persistent Systems : ब्रोकरेज ने Persistent Systems की रेटिंग घटाकर ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 5,010 रुपये तय किया गया है।

Tech Mahindra : महिंद्रा ग्रुप की आईटी कंपनी की रेटिंग भी घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। ब्रोकरेज ने शेयर का नया टारगेट प्राइस 1,600 रुपये रखा है।

Zensar Technologies : ब्रोकरेज ने Zensar Technologies की रेटिंग भी ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 560 रुपये तय किया गया है।

TCS : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने टाटा ग्रुप की आईटी TCS पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 2,625 रुपये कर दिया गया है।

Infosys : इस आईटी कंपनी पर भी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी गई है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस घटाकर 1,360 रुपये कर दिया है।

Happiest Minds : इस पर ब्रोकिंग फर्म ने ‘Buy’ रेटिंग कायम रखी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 440 रुपये कर दिया गया है।

Coforge : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने Coforge पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। कंपनी का टारगेट प्राइस 1,900 रुपये पर कायम रखा गया है।

Wipro : ब्रोकरेज ने Wipro पर ‘Add’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 185 रुपये कर दिया गया है।

Stocks to Buy: ये 10 स्टॉक्स दे सकते हैं 43% तक रिटर्न, एक्सपर्ट्स ने दी खरीदने की सलाह

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Investment Tips: ज्यादा रिटर्न के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? जानिए निवेश का वो सच जो कोई नहीं बताता

Right Investment Fund vs High Savings Rate: जब लोग निवेश करने का मन बनाते हैं, तो वे अपनी पूरी ऊर्जा और समय कुछ खास सवालों के जवाब ढूंढने में लगा देते हैं। ‘लार्ज कैप फंड बेहतर रहेगा या फ्लेक्सी कैप?’, ‘डायरेक्ट प्लान चुनें या रेगुलर?’, ‘किस म्यूचुअल फंड का 3 साल का रिकॉर्ड सबसे शानदार है?’ लोग घंटों रिसर्च और बहस करते हैं।

लेकिन, वे अक्सर उस इकलौते सवाल को पूरी तरह भूल जाते हैं जो असल में उनकी अमीरी का फैसला करने वाला है ‘आप हर महीने कितना पैसा बचाकर निवेश करने वाले हैं?’

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स इसे ‘होशियारी के भेष में काम टालना’ कहते हैं। सही फंड चुनना मजेदार और अंतहीन बहस का विषय हो सकता है, लेकिन हर महीने जेब से ज्यादा पैसा निकालकर निवेश करना थोड़ा दर्दनाक और उबाऊ होता है। इसलिए दिमाग बड़े और जरूरी सवाल को छोड़कर छोटे सवालों में उलझ जाता है। आइए समझते हैं कि निवेश में ‘फंड’ से ज्यादा ‘रकम’ क्यों मायने रखती है।

इस गणित से समझें: बेहतर रिटर्न या ज्यादा बचत, कौन जीतेगा?

मान लेते हैं दो दोस्त हैं- इन्वेस्टर ‘A’ और इन्वेस्टर ‘B’है। दोनों बिल्कुल शुरुआत से 10 साल के लिए निवेश करना शुरू करते हैं:

इन्वेस्टर ‘A’ (ज्यादा बचत, साधारण रिटर्न): यह हर महीने ₹20000 की बड़ी बचत करता है और किसी बहुत ही साधारण या सुरक्षित फंड में निवेश करता है, जहां इसे सालाना 8% का रिटर्न मिलता है।

इन्वेस्टर ‘B’ (कम बचत, बेहतरीन रिटर्न): यह बाजार की पूरी समझ रखता है, बेहतरीन रिसर्च करके बेस्ट फंड चुनता है और सालाना 14% का शानदार रिटर्न कमाता है। लेकिन अपनी इस काबिलियत के घमंड में वह हर महीने सिर्फ ₹12000 ही निवेश करता है।

10 साल बाद का नतीजा

10 साल पूरे होने पर साधारण रिटर्न (8%) वाले इन्वेस्टर ‘A’ के पास कुल ₹36 लाख का फंड जमा होगा। वहीं, अपनी काबिलियत से 14% का बंपर रिटर्न कमाने के बावजूद इन्वेस्टर ‘B’ के पास केवल ₹32 लाख ही जमा हो पाएंगे।

कम रिटर्न के बावजूद क्यों जीत गई ‘ज्यादा बचत’?

अगर आंकड़ों को करीब से देखें, तो इन्वेस्टर ‘B’ इस बात में सही था कि उसने मार्केट से ज्यादा मुनाफा कमाया। मार्केट ने उसे ₹17 लाख का रिटर्न दिया, जबकि इन्वेस्टर ‘A’ को सिर्फ ₹13 लाख का रिटर्न मिला। इन्वेस्टर ‘B’ निवेश की रेस में तो जीत गया, लेकिन उसने अपनी जेब से इतना कम पैसा लगाया था कि उसका 6% का एक्स्ट्रा रिटर्न भी ₹8000 प्रति माह की कम बचत के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाया।

शुरुआती 10 सालों में आपकी जेब का पैसा करता है ‘हेवी लिफ्टिंग’

शुरुआत के सालों में ऐसा क्यों होता है? वजह साफ है शुरुआत में आपका कुल फंड छोटा होता है। जब फंड छोटा होगा, तो उस पर मिलने वाला रिटर्न रुपयों के मामले में हमेशा कम ही रहेगा, भले ही आपका रिटर्न प्रतिशत कितना भी ऊंचा क्यों न हो।शुरुआती दशक में आपके फंड को बड़ा बनाने का असली काम वह पैसा करता है जो आप हर महीने अपनी जेब से जोड़ रहे हैं।

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रिटर्न का असली खेल तो बहुत बाद में शुरू होता है, जब आपका बेस बहुत बड़ा हो जाता है। लेकिन तब तक ज्यादा बचत करने वाले का फंड इतना आगे निकल चुका होता है कि बेस्ट फंड चुनने वाला कभी उसकी बराबरी नहीं कर पाता।

विडंबना यही है कि ज्यादातर लोग फंड चुनने पर तब सबसे ज्यादा सिर खपाते हैं जब उसकी अहमियत सबसे कम होती है (शुरुआत में), और जब इसकी असल जरूरत होती है, तब तक वे निवेश में दिलचस्पी खो देते हैं।

नए निवेशकों के लिए क्या है सही तरीका?

अगर आप निवेश की शुरुआत कर रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स के मुताबिक आपको इस क्रम का पालन करना चाहिए:

  1. अपनी बचत की क्षमता तय करें: पहले यह देखें कि आप हर महीने कितना बचा सकते हैं। फिर उस रकम को अपनी आरामदायक स्थिति से थोड़ा और ऊपर खींचें यानी जितना हो सके ज्यादा बचाएं।
  2. फंड चुनने पर बाद में सोचें: जब निवेश की रकम तय हो जाए, तब फंड्स पर ध्यान दें। निवेश को बहुत सीधा, साधारण और उबाऊ रखें। जैसे- किसी अच्छे इंडेक्स या फ्लेक्सी कैप फंड में डाल दें।
  3. समय को अपना काम करने दें: एक बार निवेश शुरू करने के बाद बार-बार पोर्टफोलियो को न छुएं, कंपाउंडिंग को अपना जादू दिखाने दें।

वैसे इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप कहीं भी लापरवाही से पैसा लगा दें। अगर आप पैसा सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में छोड़ देंगे, तो महंगाई आपके पैसे को खा जाएगी। वहीं अगर आप बिना सोचे-समझे क्रिप्टो या F&O जैसे सट्टेबाजी वाले जुए में पड़ गए, तो कोई भी बचत दर आपको बर्बाद होने से नहीं बचा सकती।

लेकिन अगर आपके विकल्प समझदारी भरे और सुरक्षित हैं, तो इस बात पर माथापच्ची करना बंद कर दीजिए कि कौन सा फंड बेस्ट है। ज्यादा से ज्यादा बचाएं, साधारण फंड चुनें और बार-बार चिंता करना छोड़ दें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market News: कच्चा तेल, मानसून और तिमाही नतीजे; इन बातों से तय होगी Sensex-Nifty की चाल

Stock Market Trend This Week: 6 जुलाई से शुरू हो रहे इस कारोबारी हफ्ते शेयर मार्केट में मार्केट सेंटिमेंट कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक रुझानों और कॉरपोरेट आय सीजन की शुरुआत पर निर्भर करेगी। एनालिस्ट्स के मुताबिक आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी टीसीएस 9 जुलाई को जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति और विदेशी निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली से भी बाजार की दिशा तय होगी। पिछले कारोबारी हफ्ते सेंसेक्स 663.44 प्वाइंट्स यानी 0.86% की बढ़त के साथ 77,763.91 तो निफ्टी 214.85 प्वाइंट्स यानी 0.89% के उछाल के साथ 24270.85 पर बंद हुआ।

मार्केट की चाल पर क्या है एक्सपर्ट्स का रुझान

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशकों की नजर 9 जुलाई को टीसीएस के कारोबारी नतीजे पर रहेगी। अजीत के मुताबिक निवेशकों का ध्यान खास तौर पर डिमांड ट्रेंड, डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग और एआई से जुड़े बिजनेस मौकों को लेकर मैनेजमेंट की बातों पर रहेगा।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ का भी कहना है कि घरेलू स्तर पर निवेशकों का ध्यान 9 जुलाई से शुरू होने रहे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन पर रहेगा। उनका मानना है कि कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री से डिमांड के माहौल, मार्जिन के रुझानों और अर्निंग्स विलिबिलिटी को लेकर अहम संकेत मिलेगा। प्रवेश के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून और खरीफ की बुवाई भी गांवों में मांग, महंगाई की रफ्तार और ओवरऑल इकनॉमिक ग्रोथ को लेकर अहम संकेत देगा।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच टेक्निकल बातचीत का अगला दौर 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि बैठक की जगह के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सप्लाई को लेकर चिंता कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल $68-$69 के आसपास स्थिर हो गए हैं और अब इन पर निवेशकों की नजर रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर फेड की जून पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स यानी बैठक के ब्यौरे पर रहेगी ताकि अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट रुझान मिल सकें।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स, घरेलू अर्निंग्स सीजन की शुरुआत और मानसून की दिशा से तय होगी।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Split: 5 छोटे टुकड़ों में टूटने वाला है टोनर मेकर का शेयर, एक महीने में दिया 18% रिटर्न

केमिकल सेक्टर की कंपनी इंडियन टोनर्स एंड डेवलपर्स का स्टॉक, स्प्लिट होने जा रहा है। इसके तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाला एक शेयर, 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 5 शेयरों में टूट जाएगा। कंपनी पहली बार स्टॉक स्प्लिट करने जा रही है। इसकी घोषणा इस साल मई महीने में हुई थी। रिकॉर्ड डेट 17 जुलाई है। इस तारीख से एक दिन पहले मार्केट क्लोजिंग तक जिनके नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुके होंगे, उनके स्टॉक स्प्लिट हो जाएंगे।

Indian Toners & Developers Ltd कम्पैटिबल कलर कॉपियर टोनर के मामले में भारत की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरर और एक्सपोर्टर होने का दावा करती है। इसने 1992 में मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी। प्रोडक्ट्स में लेजर टोनर, कलर टोनर, कॉपियर/डिजिटल टोनर, वाइड फॉर्मेट कॉपियर एंड प्रिंटर टोनर शामिल हैं।

इंडियन टोनर्स एंड डेवलपर्स के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 292.85 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 300 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर 3 महीनों में 24 प्रतिशत और एक महीने में लगभग 18 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 300 रुपये और एडजस्टेड लो 215.40 रुपये है।

कंपनी की वित्तीय सेहत

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में इंडियन टोनर्स एंड डेवलपर्स का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 45.74 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 7.62 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 165.81 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 27.23 करोड़ रुपये रहा। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 69.25 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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Mangalam Worldwide का स्टॉक भी होने वाला है स्प्लिट

स्टेनलेस स्टील सेक्टर की कंपनी मंगलम वर्ल्डवाइड लिमिटेड का स्टॉक भी स्प्लिट होने वाला है। 10 रुपये फेस वैल्यू वाला एक शेयर, 1 रुपये फेस वैल्यू वाले 10 शेयरों में टूट जाएगा। रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई है। मंगलम वर्ल्डवाइड गुजरात की कंपनी है। इसके कामकाज में स्क्रैप को पिघलाने से लेकर सीमलेस पाइप और ट्यूब बनाने तक के काम शामिल हैं। शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 376.10 रुपये है। कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 30 पैसे प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने वाली है। रिकॉर्ड डेट 17 जुलाई है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Buy: ये 10 स्टॉक्स दे सकते हैं 43% तक रिटर्न, एक्सपर्ट्स ने दी खरीदने की सलाह

Stocks to Buy: ब्रोकरेज हाउसेज ने 10 शेयरों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनके लिए 14% से 43% तक के संभावित अपसाइड का अनुमान लगाया गया है। मजबूत बिजनेस आउटलुक, कमाई में सुधार और ग्रोथ की उम्मीद के दम पर इन शेयरों को लेकर ब्रोकरेज का नजरिया पॉजिटिव बना हुआ है।

DLF

ब्रोकरेज Motilal Oswal ने DLF पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 775 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। निवेशकों को यहां करीब 14% तक का रिटर्न मिल सकता है।

ब्रोकरेज का मानना है कि कमर्शियल पोर्टफोलियो से मिलने वाली नियमित आय अगले पांच साल तक ग्रोथ का बड़ा आधार रहेगी। रेजिडेंशियल लॉन्च और मजबूत कलेक्शन से कैश फ्लो भी बेहतर रहेगा।

Hindustan Zinc

Emkay Global ने Hindustan Zinc पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 625 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर में 17% से ज्यादा की बढ़त की संभावना जताई गई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि डिमर्जर के बाद कंपनी समूह की वित्तीय और परिचालन मजबूती का अहम आधार बनेगी। रेवेन्यू और EBITDA में इसका सबसे बड़ा योगदान रहने की उम्मीद है।

Dixon Technologies

Investec ने Dixon Technologies पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 14,500 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यानी शेयर में करीब 17% तक का उछाल आ सकता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि Vivo के साथ प्रस्तावित जॉइंट वेंचर को मंजूरी मिलने से पहले भी मोबाइल फोन का वॉल्यूम मजबूत रहेगा। एक्सपोर्ट, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और नए बिजनेस से भी कमाई बढ़ने की उम्मीद है।

Coforge

ब्रोकरेज फर्म Bank of America ने Coforge पर पहली बार कवरेज शुरू करते हुए ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने 1,725 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। इस हिसाब से शेयर में करीब 18% तक की बढ़त देखने को मिल सकती है।

ब्रोकरेज का मानना है कि बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, सरकारी और ट्रैवल सेक्टर से मजबूत ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच कंपनी की ऑर्गेनिक रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

Lodha Developers

Motilal Oswal ने Lodha Developers पर ‘Buy’ रेटिंग दोहराई है। ब्रोकरेज ने 1,285 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। यह शेयर करीब 21% तक का रिटर्न दे सकता है।

ब्रोकरेज का मानना है कि नए प्रोजेक्ट लॉन्च, मजबूत एक्सीक्यूशन और लगातार बिजनेस विस्तार से कंपनी अपनी बढ़त बनाए रखेगी। ऑपरेटिंग कैश फ्लो और रेंटल कारोबार का विस्तार भी कमाई को सहारा देगा।

Bharti Airtel

Nomura ने Bharti Airtel को टेलीकॉम सेक्टर में अपनी टॉप पसंद बताया है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस 2,220 रुपये से बढ़ाकर 2,355 रुपये कर दिया है। ‘Buy’ रेटिंग भी बरकरार रखी गई है। इस हिसाब से शेयर में करीब 24% तक का अपसाइड मिल सकता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि 5G रोलआउट अब लगभग पूरा हो चुका है। इससे पूंजीगत खर्च कम होगा। फ्री कैश फ्लो बढ़ेगा और आने वाले वर्षों में कर्ज भी तेजी से घट सकता है।

MCX

Jefferies ने MCX पर पहली बार कवरेज शुरू करते हुए ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने 3,600 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। ब्रोकरेज को शेयर में करीब 28% तक की छलांग की उम्मीद है।

ब्रोकरेज का मानना है कि भारत का कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार अभी शुरुआती दौर में है। कम पैठ की वजह से आने वाले वर्षों में MCX के लिए ग्रोथ की बड़ी गुंजाइश है।

United Spirits

Antique ने United Spirits पर ‘Buy’ रेटिंग दोहराई है। ब्रोकरेज ने 1,791 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव से शेयर करीब 29% तक चढ़ सकता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि तमिलनाडु में डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बदलाव का फायदा कंपनी को मिलेगा। इससे राष्ट्रीय ब्रांडों की पहुंच बढ़ेगी। प्रीमियम पोर्टफोलियो की बिक्री को भी सहारा मिलेगा।

RBL Bank

ब्रोकरेज Nuvama ने RBL Bank पर ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने 470 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। इस टारगेट के आधार पर शेयर में करीब 30% की तेजी देखने को मिल सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि बैंक कॉरपोरेट लोन, माइक्रोफाइनेंस और क्रेडिट कार्ड कारोबार की चुनौतियों से काफी हद तक उबर चुका है। Emirates NBD के 26,000 करोड़ रुपये के निवेश से बैंक की पूंजी स्थिति भी मजबूत हुई है।

Jubilant Ingrevia

ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने Jubilant Ingrevia पर ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 975 रुपये रखा है। मौजूदा भाव 680.95 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 43% तक की बढ़त देखने को मिल सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 कंपनी के लिए टर्नअराउंड वाला साल साबित हो सकता है। भरूच प्लांट में EBITDA बेहतर होने की उम्मीद है। 6.6 करोड़ डॉलर के कर्ज को कम करने की योजना से बैलेंस शीट मजबूत होगी और वित्तीय जोखिम घटेगा।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Elon Musk अब नहीं रहे ट्रिलेनियर, Tesla-SpaceX की बिकवाली से लगा करंट, एक्सपर्ट ने किया सतर्क

दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर यानी $1 लाख करोड़ से अधिक दौलत वाले शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को टेस्ला (Tesla) और स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों की गिरावट से तगड़ा शॉक लगा। इनकी गिरावट से मस्क की दौलत से हजारों करोड़ डॉलर साफ हो गए। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या फिर एआई और स्पेस से जुड़ी हाई-ग्रोथ कंपनियों को लेकर मार्केट की सोच में बड़े बदलाव का संकेत। टेस्ला का शेयर दिसंबर 2025 में एक साल के हाई $498.83 से करीब 21% टूटकर करीब $393 पर है। वहीं अब तक के सबसे बड़ा आईपीओ लाने के बाद 12 जून को नास्डाक पर लिस्ट हुई स्पेसएक्स $225.64 के रिकॉर्ड हाई से करीब 30% टूटकर अब $157-158 के करीब आ चुका है। इस गिरावट के कारण एलन मस्क की नेटवर्थ स्पेसएक्स की लिस्टिंग के तुरंत बाद अपने $1.45 ट्रिलियन के रिकॉर्ड हाई से घटकर $1 ट्रिलियन से नीचे आ गई है।

प्रॉफिट बुकिंग है या गहरी गिरावट?

वेस्टेड फाइनेंस के सीईओ और फाउंडर विक्रम शाह का मानना है कि टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट की दोनों वजहें हैं- प्रॉफिट बुकिंग और गहरी गिरावट। शेयरों की तेज रैली के बाद निवेशकों ने पैसा निकाला शुरू किया तो इस पर दबाव पड़ा। इसके अलावा मार्केट ने अब एआई और स्पेस इकॉनमी से जुड़ी कंपनियों का वैल्यूएशन फिर से करना शुरू किया है। ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वैल्यूएशन आखिर कहां स्थिर होंगे।

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स के सिर्फ शेयर ही टूटे हैं, बिजनेस के स्तर पर अभी भी ज्यादा कुछ नहीं टूटा है। उन्होंने जिक्र किया कि टेस्ला ने अभी हाल में अपना सबसे मजबूत तिमाही डिलीवरी आंकड़ा पेश किया है, फिर भी शेयर टूटे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि निवेशक अभी कंपनी के इलेक्ट्रिक वेईकल बिजनेस की बजाय उसके लंबे समय के ऑटोनॉमस ड्राइविंग और रोबोटैक्सी विजन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। स्पेसएक्स की स्थिति भी ऐसी ही है। स्टारलिंक लगातार प्रॉफिटेबल तरीके से बढ़ रहा है और कंपनी का लॉन्च बिजनेस भी विस्तार कर रहा है, लेकिन पोस्ट-लिस्टिंग शुरुआती तेजी के बाद शेयरों पर दबाव आया है।

क्या करना चाहिए भारतीय निवेशकों को?

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट खरीदें या बेचें, फैसले जितना साधारण नहीं है बल्कि उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि पोर्टफोलियो एलोकेशन और निवेश के लॉन्ग-टर्म गोल्स पर फोकस करना चाहिए। उनका कहना है कि एआई और स्पेस में 5–10 साल के लिए निवेश कर रहे हैं तो कुछ हफ्तों की गिरावट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने निवेशकों को यह भी देखने की सलाह दी है कि कहीं इन शेयरों में उनका एक्सपोजर पहले की तेजी के कारण जरूरत से ज्यादा तो नहीं हो गया है। साथ ही उन्होंने भारतीय निवेशकों को बिना सोचे-समझे नई लिस्ट हुई हाई-वैल्यू अमेरिकी कंपनियों में निवेश करने से सावधान किया। उनका मानना है कि अमेरिकी स्टॉक्स में निवेश इतना छोटा होना चाहिए कि शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से पूरा पोर्टफोलियो प्रभावित न हो।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ITR Filing 2026: ITR भरने में हो गई गलती? बिना किसी जुर्माने के मिलता है रिटर्न सुधारने का मौका, जानें पूरी डिटेल

How Many Times Can We Revise ITR Form: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय सही फॉर्म का चुनाव करना सबसे जरूरी स्टेप है। अगर आपने गलती से गलत आईटीआर फॉर्म चुन लिया है, तो आपकी रिटर्न डिफेक्टिव या इनवैलिड घोषित हो सकती है। इससे न केवल आपका रिफंड अटक सकता है, बल्कि टैक्स विभाग का नोटिस भी आ सकता है।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपसे फॉर्म चुनने में कोई गलती हो गई है, तो आयकर विभाग के नोटिस का इंतजार करने के बजाय खुद ही उसे जल्द से जल्द सुधार लें। आइए समझते हैं कि गलत फॉर्म को कैसे सुधारा जा सकता है, कितनी बार बदलाव की अनुमति है और बजट 2026 में समय-सीमा को लेकर क्या बड़ा बदलाव हुआ है।

क्या गलत आईटीआर फॉर्म को सुधारा जा सकता है?

हां, बिल्कुल सुधारा जा सकता है। अगर आपने अपनी ओरिजिनल रिटर्न फाइल और वेरिफाई कर दी है, तो आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत आप ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ दाखिल करके अपनी गलती सुधार सकते हैं।

मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीन काकड़े बताते हैं, ‘कानूनन टैक्सपेयर्स रिवाइज्ड रिटर्न के जरिए अपना आईटीआर फॉर्म बदल सकते हैं। रिवाइज्ड रिटर्न पूरी तरह से ओरिजिनल रिटर्न की जगह ले लेती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी को कैपिटल गेंस था जिसके लिए ITR-2 भरना था, लेकिन उसने गलती से ITR-1 भर दिया, तो वह सही फॉर्म चुनकर रिवाइज्ड रिटर्न भर सकता है।’

CA श्रेया गुप्ता गोयल के मुताबिक, अगर विभाग को पहले ही गलती का पता चल जाता है और वह धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस जारी कर देता है, तो आपको तय समय के भीतर उसका जवाब देना होगा। अगर आप नोटिस को नजरअंदाज करते हैं, तो मान लिया जाएगा कि आपने रिटर्न फाइल ही नहीं की थी।

कितनी बार रिवाइज कर सकते हैं अपना ITR?

इनकम टैक्स एक्ट में इस बात पर कोई पाबंदी नहीं है कि आप कितनी बार अपनी रिटर्न को रिवाइज कर सकते हैं। अगर आपको बार-बार अपनी गलतियों का पता चलता है, तो आप तय समय-सीमा के भीतर कितनी भी बार रिवाइज्ड आईटीआर फाइल कर सकते हैं।

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वैसे भले ही रिवाइज करने की कोई लिमिट न हो, लेकिन सीए प्रवीन काकड़े सलाह देते हैं कि बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से बचना चाहिए। सभी सुधारों को एक ही बार में ठीक से चेक करके एक फाइनल रिवाइज्ड रिटर्न भरना बेहतर होता है, क्योंकि बार-बार रिवाइज करने से आपका केस टैक्स विभाग की नजरों में आ सकता है।

बजट 2026 में बढ़ गई डेडलाइन, लेकिन लगेगा जुर्माना!

बजट 2026 में रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया है, जिसे जानना बेहद जरूरी है:

विंडो को बढ़ाया गया: एसेसमेंट ईयर (AY 2026-27) के लिए रिवाइज्ड रिटर्न भरने की आखिरी तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर सीधे 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। यानी अब आपको सुधार के लिए 3 महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा।

31 दिसंबर 2026 तक फ्री: अगर आप अपनी रिटर्न में कोई भी सुधार 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले कर लेते हैं, तो आपको कोई अतिरिक्त फीस या पेनल्टी नहीं देनी होगी।

1 जनवरी के बाद ₹5000 की फीस: अगर आप इस बढ़ी हुई विंडो का फायदा उठाते हुए 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 के बीच रिवाइज्ड आईटीआर भरते हैं, तो आपको ₹5000 की फीस देनी होगी। हालांकि, अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से कम है, तो यह फीस ₹1000 होगी।

गलती न सुधारने पर क्या होगा नुकसान?

अगर आप गलत फॉर्म को समय रहते नहीं सुधारते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  1. अटक जाएगा रिफंड: फॉर्म गलत होने पर टैक्स रिफंड की प्रक्रिया रोक दी जाएगी।
  2. लॉस कैरी फॉरवर्ड नहीं होगा: आप कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे।
  3. ITR-U का आखिरी विकल्प: एक बार जब 31 मार्च की रिवाइज्ड विंडो भी बंद हो जाएगी, तो आपके पास केवल अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) भरने का रास्ता बचेगा, जिसमें आपको भारी ब्याज के साथ अतिरिक्त पेनल्टी टैक्स भी चुकाना पड़ेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

EPF Scheme 2026: नए लेबर कोड के तहत एंप्लॉयीज को अपना पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन एक लेवल तक कम करने की सहूलियत मिल रही है ताकि वह अपनी मंथली टेक-होम सैलरी बढ़ा सकें। हालांकि इससे सैलरी तुरंत अधिक मिल तो जाएगी लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट के बनाया जा रहा पैसा काफी कम हो सकता है। ऐसे में आखिरी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि क्या जितनी सैलरी अधिक मिलेगी, वह सही तरीके से निवेश करेंगे या खर्च हो जाएगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक बस इसी से तय होगा कि एंप्लॉयीज को सैलरी अधिक लेनी चाहिए या पीएफ खाते में अधिक पैसा जाते देने रहना चाहिए।

नए नियमों से कैसे बढ़ जाएगी टेक-होम सैलरी?

जैगल कंपनी टैक्सप्लानर के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि ईपीएफ खाते में में 12% ही जमा होगा लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह 12% सैलरी के किस हिस्से पर लागू होता है। पहले के फ्रेमवर्क कई कंपनियां पीएफ को या तो एक्चुअल बेसिक सैलरी पर काटते थे या हर महीने स्टैटुअरी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिससे कम से कम हर महीने पीएफ खाते में ₹1,800 जाता ही था। अब नए लेबर कोड फ्रेमवर्क में 12% का अनिवार्य कॉन्ट्रिब्यूशन अभी भी सिर्फ स्टैटुअर वेज सीलिंग तक ही लागू है। इस सीमा से ऊपर सैलरी पर कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर वालंटरी होता है और यह एंप्लॉयर-एंप्लॉयीज की आपसी सहमति से तय होता है। ऐसे में जहां एंप्लॉयीज हायर सैलरी बैस पर पीफ खाते में पैसे डाल रहे हैं, वहां एंप्लॉयर-एंप्लॉयी मिलकर इसे हर महीने ₹1800 तक सीमित रख सकते हैं और टेक-होम सैलरी बढ़ा सकते हैं।

किसके लिए सैलरी बढ़ाने का विकल्प शानदार नहीं

अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा। प्रोमोर फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और नेटवर्क एफपी की को-फाउंडर निशा सांघवी का कहना है कि कुछ खास एंप्लॉयीज के लिए सैलरी बढ़वाने का विकल्प आकर्षक नहीं है-

जो एंप्लॉयीज अपने रिटायरमेंट की मुख्य बचत को लेकर ईपीएफ पर निर्भर हैं।

जिनकी कंपनियां पूरी बैसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में डालती हैं क्योंकि कम पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन चुनने पर कंपनियां भी स्टैटुअरली लिमिट से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर सकती हैं और एंप्लॉयर-फंडेड रिटायर बेनेफिट खत्म हो जाएगा।

40 वर्ष से अधिक की उम्र के एंप्लॉयीज क्योंकि उनकी कमाई की उम्र कम रह जाती है तो पीएफ खाते में जमा घटती है तो असर बहुत बड़ा होता है।

जिनकी बचत की आदत नहीं या कोई इमरजेंसी फंड नहीं है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने वाले निवेशक। ईपीएफ पर अभी भी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है, जो अधिकतर सब्सक्राइबर्स के लिए टैक्स-एफिसिएंट बना हुआ है और इतना अधिक ब्याज देने वाला सुरक्षित फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मुश्किल है।

कितना पड़ेगा असर?

अब बात करते हैं टेक-होम सैलरी अधिक करने का रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर की। इसे लेकर निशा सांघवी का कहना है कि मान लीजिए किसी एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी ₹50 हजार है और 12% के हिसाब से हर महीने ईपीएफ खाते में ₹6 हजार जमा होता है। नए नियमों के तहत सिर्फ ₹1800 जमा करना अनिवार्य है तो इसे चुनने पर हर महीने सैलरी ₹4200 बढ़ जाएगी लेकिन अगर यही ईपीएफ खाते में जाता है तो 8.25% की दर से 25 साल में लगभग ₹41-₹42 लाख का फंड तैयार कर देता। निशा का कहना है कि अगर कंपनी ने भी अपना वालंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया तो रिटायरमेंट कॉर्पस को झटका लगभग दोगुना बढ़कर लगभग ₹80 लाख से अधिक हो सकता है। इसके अलावा टैक्स का एंगल है भी है। टेक-होम सैलरी बढ़ती है तो उस हिसाब से टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है, जब ईपीएफ में रखा पैसा अधिकतर टैक्स-फ्री ही होता है।

तो किसके लिए बेहतर है पीएफ खाते में जमा कम करना?

निशा के मुताबिक कुछ ही मामलों में पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन में कटौती करना सही हो सकता है। जैसे कि अगर किसी एंप्लॉयीज को 12-14% की अधिक दर से लोन की किश्त भरनी है तो इसका प्रीपेमेंट ईपीएफ के 8.25% की दर से ब्याज हासिल करने से बेहतर है। इसके अलावा ऐसे एंप्लॉयीज के लिए भी ईपीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करना बेहतर है, जो टेक-होम सैलरी को बेहतर तरीके से निवेश कर सकें।

सिर्फ ₹6000 की SIP से हर महीने पाएं ₹6 लाख की पेंशन, साथ में ₹2.64 करोड़ का बोनस! ये है सीक्रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।