Anubhav Plast IPO Listing: फ्लैट एंट्री के बाद नीचे आया ₹80 का शेयर, नई खरीदारी से पहले चेक करें कारोबारी सेहत

Anubhav Plast IPO Listing: अनुभव प्लास्ट के शेयरों की आज BSE SME पर फ्लैट एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 2 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹80 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹80.00 पर ही एंट्री हुई यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹76.05 (Anubhav Plast Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 4.94% घाटे में हैं।

Anubhav Plast IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

अनुभव प्लास्ट का ₹24 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 19-23 जून तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 2.18 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.23 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.49 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.60 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 30 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹2.20 करोड़ मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्रेमिसेज में ही क्रैश बैरियर्स और सोलर पैनल स्ट्रक्चर्स बनाने के लिए एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के सेटअप, ₹13.75 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Anubhav Plast के बारे में

अनुभव प्लास्ट गोल और चौकोर खोखले सेक्शन वाले इलेक्ट्रिक रेजिस्टेंस वेल्डिंग (ERW) स्टील पाइप और ट्यूब, और साथ ही स्वैज्ड स्टील ट्यूबलर पोल बनाने का काम करती है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, स्ट्रीट लाइटिंग, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, सिंचाई, पानी की सप्लाई, जनरल इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन जैसे कई क्षेत्रों में होता है। यह अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री अनुभव ब्रांड नाम से करती है। कानपुर देहात में इसके दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं और देश के कई राज्यों में यह सरकार के कई टेंडर वाले प्रोजेक्ट्स में अपनी दमदार मौजूदगी दिखा चुकी है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2023 में इसे ₹74 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष 2024 में उछलकर ₹2.08 करोड़ और फिर वित्त वर्ष 2025 में ₹6.00 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम भी सालाना औसतन 6% से अधिक की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर ₹98.31 करोड़ पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2025 में कंपनी को ₹5.30 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹80.60 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हो चुका है। दिसंबर 2025 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹34.81 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹12.85 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मिस हो गई ITR की डेडलाइन? मत होइए परेशान, इस एक तरकीब से अब भी वापस मिल जाएगा आपका टीडीएस रिफंड!

ITR Deadline Missed: क्या आपने किसी वित्तीय वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन मिस कर दी है? अगर हां, तो सबसे पहला डर यही सताता है कि जो टैक्स एडवांस में कट चुका है (TDS), क्या वह पैसा अब हमेशा के लिए डूब गया? टैक्सपेयर्स के बीच अक्सर यह उलझन रहती है कि क्या आईटीआर विंडो बंद होने के बाद भी टीडीएस रिफंड क्लेम किया जा सकता है।

जवाब है- हां, आप अभी भी अपना रिफंड पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको सही कानूनी रास्ता चुनना होगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि अपडेटेड आईटीआर भरकर रिफंड ले लेंगे, लेकिन टैक्स नियम इसके बिल्कुल उलट हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि डेडलाइन चूकने के बाद टीडीएस रिफंड वापस पाने का असली और कानूनी तरीका क्या है।

सवाल: क्या अपडेटेड आईटीआर (U-ITR) भरकर टीडीएस रिफंड मिल सकता है?

जवाब: बिल्कुल नहीं।

अक्सर टैक्सपेयर्स को सलाह मिलती है कि वे इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(8A) के तहत ‘अपडेटेड आईटीआर’ फाइल कर दें। नियम के मुताबिक, आप पिछले चार असेसमेंट ईयर के लिए यू-आईटीआर भर सकते हैं। लेकिन, इसमें एक बहुत बड़ी शर्त जुड़ी हुई है- आप अपडेटेड आईटीआर तब दाखिल नहीं कर सकते जब आपको कोई टैक्स रिफंड क्लेम करना हो या आपके ऊपर टैक्स की देनदारी शून्य से कम हो रही हो। चूंकि आप अपना टीडीएस रिफंड वापस मांग रहे हैं, इसलिए आप कानूनी रूप से अपडेटेड आईटीआर भरने के हकदार नहीं हैं।

इसके अलावा, आप किसी बीते हुए साल का टीडीएस रिफंड अगले नए फाइनेंशियल ईयर के आईटीआर में भी क्लेम नहीं कर सकते हैं। हर साल के टीडीएस का हिसाब उसी साल के रिटर्न में देना जरूरी होता है।

ये है डूबा हुआ टीडीएस वापस पाने का कानूनी तरीका

अगर रेगुलर आईटीआर की तारीख निकल चुकी है और अपडेटेड आईटीआर से रिफंड मिल नहीं सकता, तो फिर रास्ता क्या है? यहीं पर काम आती है इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119(2)(b)।

यह धारा सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस को यह विशेष पॉवर देती है कि वह उन करदाताओं को राहत दे सके जो किसी वाजिब वजह से समय पर अपना रिटर्न नहीं भर पाए थे। इसके तहत, सीबीडीटी ने 1 अक्टूबर 2024 को एक नया सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के मुताबिक, अगर कोई जेनयून मामला है, तो टैक्सपेयर ‘कॉन्डोनशेन ऑफ डिले’ यानी देरी के लिए माफी की अर्जी लगा सकता है।

माफी की अर्जी मंजूर होने की शर्तें:

अगर आप इस विशेष प्रावधान के तहत अपना छूटा हुआ टीडीएस रिफंड पाना चाहते हैं, तो आपकी अर्जी में इन बातों का होना जरूरी है:

ठोस और वाजिब कारण: आपको इनकम टैक्स विभाग को यह साबित करना होगा कि आप किसी अपरिहार्य परिस्थितियों या गंभीर कारण जैसे- बीमारी या कोई अन्य बड़ा संकट की वजह से समय पर आईटीआर नहीं भर सके।

वास्तविक कठिनाई: आपको यह दिखाना होगा कि अगर विभाग आपको रिफंड क्लेम करने की इजाजत नहीं देता है, तो आपको बड़ा वित्तीय नुकसान या वास्तविक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: कैसे मिलेगा पैसा वापस?

अर्जी दाखिल करें: सबसे पहले आपको धारा 119(2)(b) के तहत संबंधित टैक्स अथॉरिटी या सीबीडीटी के पास देरी के लिए माफी की ऑनलाइन या ऑफलाइन एप्लीकेशन देनी होगी।

आदेश का इंतजार करें: टैक्स अधिकारी आपके कारणों की समीक्षा करेंगे। अगर वे संतुष्ट होते हैं, तो देरी को माफ करने का एक आधिकारिक आदेश जारी करेंगे।

आईटीआर फाइल करें: एक बार जब आपको माफी का आदेश मिल जाता है, तो आप इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर उस आदेश का रेफरेंस नंबर दर्ज करके अपना पेंडिंग आईटीआर ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद आपका टीडीएस रिफंड प्रोसेस कर दिया जाएगा।

इसलिए, अगर आपका भी टीडीएस कटा हुआ है और आईटीआर की तारीख निकल चुकी है, तो घबराएं नहीं। अपडेटेड आईटीआर के चक्कर में पड़ने के बजाय किसी एक्सपर्ट की मदद से धारा 119(2)(b) के तहत माफी की अर्जी दाखिल करें और अपना पैसा वापस पाएं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Waterways Leisure Tourism IPO का अलॉटमेंट आज, 29 जून को; चेक करने की ये है प्रोसेस

मुंबई स्थित क्रूज ऑपरेटर वॉटरवेज लीश़र टूरिज्म का 585 करोड़ रुपये का IPO 25 जून को बंद हो चुका है। इसे 1.53 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। वॉटरवेज लीश़र टूरिज्म, कॉर्डेलिया क्रूज ब्रांड के तहत कारोबार चलाती है। देश में पहली बार किसी क्रूज ऑपरेटर की लिस्टिंग होने वाली है। IPO अलॉटमेंट सोमवार, 29 जून को फाइनल होने की उम्मीद है, जिसके बाद शेयर NSE और BSE पर 1 जुलाई को शुरुआत कर सकते हैं।

जिन लोगों ने वॉटरवेज लीश़र टूरिज्म के IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

BSE पर कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Waterways Leisure Tourism IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से कैसे करें चेक

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में Waterways Leisure Tourism को सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • सब्मिट पर क्लिक करें।

कॉर्डेलिया क्रूज भारत की प्रीमियम क्रूज लाइन है। ग्लोबल शिपिंग एंड लीश़र और राजेश चंदूमल होतवानी, वॉटरवेज लीश़र टूरिज्म के प्रमोटर हैं। कंपनी की शुरुआत एनआरआई राजेश होतवानी ने मुंबई के हितेश वकील के साथ मिलकर की थी। कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 263.25 करोड़ रुपये जुटाए।

लिस्टिंग को लेकर क्या संकेत

वॉटरवेज लीश़र टूरिज्म की लिस्टिंग घाटे में होने के संकेत हैं। ग्रे मार्केट में शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड 808 रुपये से लगभग 6% डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। IPO में 72 लाख नए शेयर जारी हुए। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 72 प्रतिशत, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.23 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 4.40 गुना भरा।

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IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

Waterways Leisure Tourism अपने IPO से हासिल इनकम में से 480 करोड़ रुपये का इस्तेमाल डिपॉजिट/एडवांस्ड लीज किराए के लिए और स्टेप-डाउन सब्सिडियरी ‘बेक्रूज शिपिंग एंड लीजिंग (IFSC) प्राइवेट लिमिटेड’ को पट्टे पर जहाजों की खरीद के लिए मंथली लीज के पेमेंट को लेकर करेगी। बाकी पैसों का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

Waterways Leisure Tourism की वित्तीय स्थिति

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 52.14 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। इससे पहले के वित्त वर्ष में कंपनी को 168.19 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। वित्त वर्ष 2026 में इनकम 586.99 करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2025 में 597.68 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर 101.90 करोड़ रुपये की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Crude Oil Price: US- ईरान शांति वार्ता अटकी, तनाव के बावजूद क्रूड $73 के नीचे

Crude Oil Price: US और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों से मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में संभावित रुकावटों की चिंता फिर से बढ़ने से सोमवार को तेल की कीमतें बढ़ गई।

US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 0.71% बढ़कर $69.72 प्रति बैरल हो गया, जो ईरान संघर्ष शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी के बाद पहली बार शुक्रवार को $70 के निशान से नीचे चला गया था। इस बीच, इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.36% बढ़कर $72.25 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “क्रूड ऑयल की कीमतें अभी $69–70 प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रही हैं, जो हाल ही में मिडिल ईस्ट में हुए झगड़े के दौरान देखी गई ऊंचाई से काफी नीचे हैं। हालांकि, रीजनल टेंशन में हालिया बढ़ोतरी से एनर्जी मार्केट में थोड़ी उतार-चढ़ाव आया, लेकिन क्रूड ऑयल की कीमतें काफी हद तक कंट्रोल में रही हैं, जिससे भारत के मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक को लगातार राहत मिली है।”

आज क्रूड ऑयल की कीमतों को क्या बढ़ा रहा है?

खबर है कि US और ईरान के बीच झगड़े को सुलझाने के लिए बातचीत रोक दी गई है, क्योंकि वॉशिंगटन ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर तेहरान के हालिया हमलों के बदले में ईरानी मिलिट्री ठिकानों पर हमले किए थे।

यह बढ़ोतरी वीकेंड में जैसे को तैसा हमलों की एक सीरीज के बाद हुई, जिसमें US ने तेहरान के स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण वॉटरवे के पास एक जहाज पर हमला करने के बाद ईरानी मिलिट्री साइट्स को निशाना बनाया। ब्लूमबर्ग द्वारा बताई गई एक्सियोस रिपोर्ट के अनुसार, नई दुश्मनी के बावजूद, दोनों पक्षों के मंगलवार को दोहा में बातचीत करने की उम्मीद है।

किकू, एक बहुत बड़ा क्रूड कैरियर है जो करीब 2 मिलियन बैरल तेल ले जाते समय टकराया था। इसे आखिरी बार ओमान की खाड़ी पर यूनाइटेड अरब अमीरात के एक पोर्ट फुजैराह के पास ट्रैक किया गया था। इस नई घटना ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल और नैचुरल गैस शिपमेंट को भी धीमा कर दिया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच अंतरिम समझौते के बाद ट्रैफिक में हुई बढ़ोतरी उलट गई है।

हालांकि स्ट्रेट से शिपिंग ट्रैफिक बढ़ गया था और US सेंट्रल कमांड ने शनिवार को कहा था कि कमर्शियल जहाज पानी के रास्ते से गुज़र रहे हैं, लेकिन कुछ टैंकरों ने बाहर निकलने की कोशिशें छोड़ दीं। जहाज मालिकों से उम्मीद है कि वे इस स्ट्रेटेजिक चोकपॉइंट से निकलने में सावधानी बरतेंगे, क्योंकि फारस की खाड़ी में अभी भी सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं।

वीकेंड में बढ़े तनाव के बीच, सऊदी अरामको का एक हेलीकॉप्टर फारस की खाड़ी के तट पर देश के मुख्य एनर्जी हब रास तनुरा के पास क्रैश हो गया। सऊदी अरब की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने ब्लूमबर्ग के हवाले से कहा कि यह घटना हुई है, लेकिन क्रैश का कारण नहीं बताया गया। यह भी साफ़ नहीं है कि रविवार को हुए इस हादसे का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई असर पड़ा या नहीं।

इस बीच, रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि देश फ्यूल सप्लाई की दिक्कतों से जूझ रहा है, जिसमें पेट्रोल स्टेशनों पर लंबी लाइनें भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी घरेलू सप्लाई की कमी को कम करने के उपायों में से एक के तौर पर डीज़ल एक्सपोर्ट पर पूरी तरह बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market cues : निफ्टी के 24200 के नीचे बने रहने तक कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद, 23800–23750 पर अहम सपोर्ट

Trade setup for today : 25 जून को,तेल की कम कीमतों और VIX के निचले स्तरों के बावजूद,दूसरे हाफ में प्रॉफिट बुकिंग के कारण निफ्टी 50 दिन के हाई से थोड़ा नीचे बंद हुआ। ऊपर की तरफ 24,100–24,200 का जोन निफ्टी के लिए एक अहम रेजिस्टेंस लग रहा है,क्योंकि पिछले हफ्ते यह क्लोजिंग के आधार पर इस लेवल से ऊपर टिक नहीं पाया था। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक निफ्टी 24,200 के नीचे ट्रेड करता रहेगा,तब तक कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। इसके लिए 23,800–23,750 पर अहम सपोर्ट है। हालांकि,जानकारों का यह भी मानना ​​है कि अगर इंडेक्स मजबूती से 24,200 के जोन के ऊपर बंद होता है तो यह 24,500–24,600 के अगले अहम रेजिस्टेंस जोन तक पहुंच सकता है। इससे निफ्टी के 24,800 के स्तर की ओर बढ़ने का रास्ता साफ हो रहा है। एक्सपर्ट्स की होर्मुज जलडमरूमध्य में नए तनाव के बाद सावधानी बरतने की भी सलाह है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,034, 23,981 और 23,896

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,204, 24,256 और 24,341

डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक छोटी बेयरिश कैंडल बनाई,जिसकी ऊपरी शैडो लंबी थी। इससे पता चलता है कि अहम रेजिस्टेंस लेवल पर बुल्स को रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इंडेक्स क्लोजिंग के आधार पर गिरती हुई रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन (जो 21 अप्रैल और 18 जून के हाई को जोड़ती है) के ऊपर टिक नहीं पाया। यह क्लोजिंग के आधार पर 100-दिन के EMA के ऊपर भी नहीं टिक सका,लेकिन शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। मोमेंटम इंडिकेटर्स ने कंसोलिडेशन का संकेत दिया,क्योंकि पॉजिटिव क्रॉसओवर के बावजूद RSI 56.97 पर स्थिर रहा। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। यह सब पॉजिटिव रुझान के साथ लगातार कंसोलिडेशन का संकेत देता है,हालांकि रैली के अगले चरण को शुरू करने के लिए रेजिस्टेंस जोन के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,559, 58,699 और 58,927

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 58,103, 57,963 और 57,735

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,332, 56,465

बैंक निफ्टी 27 पॉइंट्स की बढ़त के साथ दिन के हाई के पास बंद हुआ और डेली टाइमफ्रेम पर एक रेड कैंडल बनाई,जिसके ऊपरी हिस्से में एक बड़ी शैडो (upper shadow) थी। यह ऊंचे लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग का संकेत है। इस प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना रहा,क्योंकि बैंकिंग इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था और शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज,मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बने हुए थे। RSI बढ़कर 66.60 हो गया और इसमें बुलिश क्रॉसओवर देखा गया। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। इन सबसे पता चलता है कि ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है,हालांकि मोमेंटम थोड़ा धीमा हुआ है और निकट भविष्य में कुछ कंसोलिडेशन या रेंज-बाउंड मूवमेंट जारी रह सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

25 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 383 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,747 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX निचले स्तरों और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा। इसमें 2.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 13.05 पर आ गया,जिससे बुल्स को राहत मिली। अगर यह 12 के स्तर से नीचे आता है तो बुल्स का भरोसा और बढ़ सकता है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 25 जून को पिछले सेशन के 1.21 से गिरकर 1.06 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार, कोस्पी 1% से ज्यादा गिरा, निक्केई में भी दबाव

Asian Market Today: मिडिल ईस्ट में हुए नए डेवलपमेंट के बाद सोमवार सुबह एशिया-पैसिफिक मार्केट में मिला-जुला कारोबार हुआ। जापान का निक्केई 225 0.98% गिरा, जबकि टॉपिक्स 0.21% गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.23% फिसला, जबकि कोसडैक 0.97% चढ़ा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने बढ़त के संकेत दिए। होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग जहाजों पर ईरान के हमलों के बदले में US के ईरानी मिलिट्री ठिकानों पर हमला करने के बाद वीकेंड में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया।

गिफ्ट निफ्टी 24,087 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 15 पॉइंट्स का डिस्काउंट था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए धीमी शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट शुक्रवार को AI से जुड़े चिप स्टॉक्स में भारी गिरावट के कारण नीचे बंद हुआ।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.09% गिरकर 51,876.11 पर आ गया, जबकि S&P 500 0.05% गिरकर 7,353.95 पर बंद हुआ। नैस्डैक 0.24% गिरकर 25,297.62 पॉइंट्स पर बंद हुआ। इस हफ़्ते, S&P 500 2.05% और नैस्डैक 4.7% गिरा।

एनवीडिया के स्टॉक की कीमत 1.64% गिरी, AMD के शेयर 2.06% गिरे, ब्रॉडकॉम 3.67% गिरा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 5.71% उछले, एप्पल के स्टॉक की कीमत 3.14% बढ़ी, अमेज़न के शेयर 2.50% बढ़े, मेटा 1.36% बढ़ा, जबकि अल्फाबेट के शेयर 2.19% फिसले।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 6.69% गिरे, टेस्ला के शेयर की कीमत 1.22% बढ़ी, जबकि स्पेसएक्स के शेयर 0.15% और मॉडर्ना के शेयर की कीमत 12.59% बढ़ी।

US-ईरान युद्ध

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, US और ईरान इस हफ़्ते होर्मुज स्ट्रेट और युद्ध खत्म करने के लिए दूसरे मुद्दों पर शांति वार्ता खत्म होने से पहले एक-दूसरे पर हमला करना बंद करने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने वीकेंड में एक-दूसरे पर नए हमले किए और एक-दूसरे पर सीज़फ़ायर तोड़ने का आरोप लगाया।

हालांकि खबर आई है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए ‘एक्सियोस’ (Axios) ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार 30 जून को कतर में बैठक करेंगे।

यह घटनाक्रम कई दिनों से चल रहे सैन्य टकराव के बढ़ने के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक सफलता हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष दोहा में बातचीत आगे बढ़ने के दौरान सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है।”

US कंज्यूमर सेंटिमेंट

US कंज्यूमर सेंटिमेंट जून में रिकॉर्ड निचले स्तर से वापस उछला। यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन के कंज्यूमर सर्वे ने कहा कि उसका कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स मई में 44.8 से बढ़कर इस महीने 49.5 की फ़ाइनल रीडिंग पर पहुंच गया। यह इस महीने की शुरुआत में 48.9 से थोड़ा बेहतर था। रॉयटर्स के पोल में शामिल अर्थशास्त्रियों ने इंडेक्स के 50.0 की फ़ाइनल रीडिंग तक बढ़ने का अनुमान लगाया था।

 

आज का गोल्ड रेट

US-ईरान के नए हमलों और US फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण गोल्ड की कीमतों में गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.5% गिरकर $4,067.99 प्रति औंस हो गई, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,081.20 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर 1.1% गिरकर $58.49 प्रति औंस पर आ गया।

क्रूड ऑयल की कीमतें

मिडिल ईस्ट में यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के कई दिनों तक एक-दूसरे पर हमला करने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.67% बढ़कर $72.51 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.03% बढ़कर $69.94 प्रति बैरल पर था।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SSY vs PPF: सुकन्या समृद्धि या PPF… हर महीने ₹5000 जमा करें तो कहां बनेगा ज्यादा पैसा? समझिए पूरा हिसाब

Sukanya Samriddhi Yojana vs PPF: अगर आप हर महीने बचत करके भविष्य के लिए बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) दोनों अच्छे विकल्प हो सकते हैं। ये दोनों ही सरकार की गारंटी वाली योजनाएं हैं। इसलिए पैसा डूबने का जोखिम भी नहीं रहता। लेकिन सवाल यह है कि अगर हर महीने ₹5,000 जमा किए जाएं, तो आखिर किस योजना में ज्यादा पैसा मिलेगा? आइए पूरा हिसाब समझते हैं।

PPF और सुकन्या योजना में क्या अंतर है?

PPF में कोई भी भारतीय नागरिक खाता खोल सकता है। चाहे नौकरीपेशा हो, किसान हो, दुकानदार हो या छोटा कारोबारी। फिलहाल इस योजना पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसका लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है।

वहीं सुकन्या समृद्धि योजना सिर्फ बेटियों के लिए बनाई गई है। 10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर यह खाता खोला जा सकता है। इस समय इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसमें 15 साल तक पैसा जमा करना होता है, लेकिन खाता 21 साल बाद मैच्योर होता है।

हर महीने ₹5,000 जमा करने पर कितना निवेश होगा?

अगर आप हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं, तो सालभर में कुल ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल तक ऐसा करने पर आपका कुल निवेश ₹9 लाख होगा। अब देखते हैं कि यह ₹9 लाख आगे चलकर कितना बन सकता है।

PPF में कितना पैसा बन सकता है?

अगर PPF पर पूरे 15 साल तक 7.1% सालाना ब्याज मिलता है और आप हर साल 60,000 रुपये जमा करते हैं, तो इस दौरान आपका कुल निवेश 9 लाख रुपये होगा। इस पर आपको करीब 7.27 लाख रुपये ब्याज मिलेगा। मैच्योरिटी पर आपके हाथ में करीब 16.27 लाख रुपये होंगे। यानी 9 लाख रुपये का निवेश बढ़कर 15 साल में 16 लाख रुपये से ज्यादा हो जाएगा।

सुकन्या योजना में कितना पैसा बन सकता है?

अगर आपकी बेटी छोटी है और उसके नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवाते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। अगर आप 15 साल तक हर साल 60,000 रुपये जमा करते हैं, तो आपका कुल निवेश यहां भी 9 लाख रुपये ही रहेगा।

लेकिन 15 साल बाद जमा बंद होने के बावजूद खाते में ब्याज मिलता रहता है और यह 21 साल में मैच्योर होता है। मौजूदा 8.2% ब्याज दर के हिसाब से मैच्योरिटी पर आपको करीब 30.7 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी 9 लाख रुपये का निवेश बढ़कर 30 लाख रुपये से ज्यादा हो सकता है।

सुकन्या में ज्यादा पैसा क्यों बनता है?

इसकी दो बड़ी वजह हैं। पहली वजह है ज्यादा ब्याज दर। फिलहाल सुकन्या योजना पर PPF से ज्यादा ब्याज मिल रहा है। दूसरी वजह है लंबी कंपाउंडिंग। आप 15 साल तक पैसा जमा करते हैं, लेकिन उसके बाद भी 6 साल तक पैसा ब्याज कमाता रहता है। यही कारण है कि अंतिम रकम में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

टैक्स में भी मिलता है फायदा

PPF और सुकन्या समृद्धि योजना दोनों में टैक्स का फायदा मिलता है। इन योजनाओं में जमा रकम पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत सालाना ₹1.5 लाख तक की छूट ली जा सकती है।

सिर्फ निवेश पर ही नहीं, बल्कि मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम पर भी टैक्स नहीं लगता। यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी… तीनों स्तर पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है।

किसके लिए कौन-सी योजना बेहतर?

अगर आपकी बेटी है और आप उसकी पढ़ाई, शादी या भविष्य के लिए पैसा जोड़ना चाहते हैं, तो सुकन्या समृद्धि योजना बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें लंबी अवधि तक निवेश बढ़ने का फायदा मिलता है।

वहीं, अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट के लिए फंड बनाना है, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। इसकी एक और खासियत यह है कि इसमें कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है।

किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा?

अगर सिर्फ रिटर्न की बात करें, तो मौजूदा ब्याज दरों के हिसाब से सुकन्या समृद्धि योजना PPF से आगे नजर आती है। हर महीने ₹5,000 जमा करने पर जहां PPF में करीब ₹16.27 लाख का फंड बन सकता है, वहीं सुकन्या योजना में यह रकम करीब ₹30.7 लाख तक पहुंच सकती है।

हालांकि निवेश का फैसला सिर्फ रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि आपका पैसा किस लक्ष्य के लिए जमा किया जा रहा है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या योजना बेहतर हो सकती है। वहीं, लंबी अवधि की बचत के लिए PPF एक मजबूत विकल्प माना जाता है।

अगर आप निकालना चाहते हैं अपना पूरा PF बैलेंस, तो जानिए इस बारे में क्या कहते हैं EPFO ​​के नियम

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अब पैसे लगाने लायक हो गया शेयर बाजार? JPMorgan ने कहा- टैक्स और नीतिगत बदलावों से सुधरा माहौल

भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक JPMorgan का मानना है कि सरकार के टैक्स और नीतिगत बदलावों की वजह से अब इक्विटी में निवेश पहले से ज्यादा आकर्षक हो गया है। यही कारण है कि पिछले दो साल में बाजार की रिटर्न ज्यादा दमदार नहीं रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों का पैसा लगातार शेयर बाजार में आ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG), डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स से जुड़े टैक्स नियमों में हुए बदलावों से इक्विटी की स्थिति मजबूत हुई है। इससे लोगों का रुझान धीरे-धीरे पारंपरिक बचत की जगह वित्तीय निवेश की ओर बढ़ रहा है।

टैक्स नियमों से इक्विटी को फायदा कैसे?

JPMorgan के मुताबिक, फिलहाल इक्विटी पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं, डेट म्यूचुअल फंड पर इंडेक्सेशन का फायदा खत्म हो चुका है। कुछ इंश्योरेंस पॉलिसियों की मैच्योरिटी रकम पर भी टैक्स लागू हो गया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि इन बदलावों से दूसरे निवेश विकल्पों के मुकाबले इक्विटी ज्यादा आकर्षक बन गई है।

SIP से लगातार आ रहा पैसा

रिपोर्ट का कहना है कि घरेलू निवेशकों की सबसे बड़ी ताकत अब सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बन गया है। पिछले दो साल में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी घटाई। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने SIP के जरिए लगातार निवेश जारी रखा। इससे बाजार को मजबूत सहारा मिला।

JPMorgan का मानना है कि यह सिर्फ बाजार की चाल से जुड़ा निवेश नहीं है, बल्कि लोगों की बचत की आदत में स्थायी बदलाव का संकेत है। मतलब कि अब लोग तेजी की गिरावट की परवाह किए बगैर निवेश जारी रख रहे हैं।

घरेलू निवेशक सबसे बड़ा सहारा

ब्रोकरेज का कहना है कि घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा सहारा बन गया है। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर काफी हद तक संतुलित हो जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भी घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा वित्तीय निवेश और इक्विटी की ओर जा सकता है।

किन बातों का है जोखिम?

JPMorgan ने यह भी कहा कि उसकी यह उम्मीद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी पर टिकी है। अगर लंबे समय तक हर महीने SIP निवेश 250 अरब रुपये (25,000 करोड़ रुपये) से नीचे रहता है, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके अलावा, अगर किसी नियामकीय बदलाव की वजह से डेरिवेटिव कारोबार में 20% से ज्यादा गिरावट आती है, तो इसका असर पूरे शेयर बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

IT Stocks: AI के चलते भारतीय IT कंपनियों पर और बढ़ेगा दबाव! JPMorgan ने घटाया ग्रोथ अनुमान

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IT Stocks: AI के चलते भारतीय IT कंपनियों पर और बढ़ेगा दबाव! JPMorgan ने घटाया ग्रोथ अनुमान

IT Stocks: भारत का आईटी सेक्टर आने वाले कुछ सालों तक सुस्त रह सकता है। ब्रोकरेज फर्म JPMorgan की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से आईटी कंपनियों के कारोबार पर दबाव बना रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अभी अपने आईटी बजट को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सेक्टर में तेज रिकवरी की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है।

तीन साल से धीमी है ग्रोथ

JPMorgan के मुताबिक, पिछले तीन साल से आईटी सर्विस सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 2% से 3% के बीच रही है।

ब्रोकरेज का कहना है कि AI का असर अभी शुरुआती दौर में है। अगले दो साल तक भी ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है। इसी वजह से उसने मध्यम और लंबी अवधि के ग्रोथ अनुमान घटा दिए हैं।

अब JPMorgan को उम्मीद नहीं है कि बड़ी आईटी कंपनियां जल्द मिड-सिंगल डिजिट ग्रोथ हासिल कर पाएंगी। उसका अनुमान है कि इनकी रेवेन्यू ग्रोथ फिलहाल 3% से 4% के आसपास ही रह सकती है।

कंपनियां खर्च करने से बच रही हैं

JPMorgan की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की कंपनियां नई तकनीक और भू-राजनीतिक हालात को लेकर उलझन में हैं। इसी वजह से वे नए आईटी प्रोजेक्ट्स पर फैसले लेने में देरी कर रही हैं।

JPMorgan का कहना है कि कई बड़े सौदों की शुरुआत और नए कॉन्ट्रैक्ट साइन होने में भी देरी हो रही है। इसका असर FY27 की दूसरी तिमाही तक दिखाई दे सकता है।

AI का असर अभी शुरुआती चरण में

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी इंडस्ट्री अभी AI अपनाने के पहले चरण यानी ‘Deflation Phase’ में है। इस दौरान AI की वजह से पुराने और मेंटेनेंस वाले कामों में प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है। लेकिन उसकी भरपाई नए AI प्रोजेक्ट्स से नहीं हो पा रही है। इसलिए कंपनियों की कुल ग्रोथ पर दबाव बना हुआ है।

JPMorgan का मानना है कि सेक्टर में मजबूत रिकवरी FY29 की बजाय अब FY30 के बाद ही देखने को मिल सकती है।

FY27 के अनुमान भी घटाए

ब्रोकरेज ने पहली तिमाही के रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान भी घटा दिए हैं। साथ ही उसे उम्मीद है कि कंपनियां FY27 के लिए अपने गाइडेंस में भी कटौती कर सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार वित्त वर्ष की पहली छमाही आमतौर पर जितनी मजबूत रहती है, वैसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी।

वैल्यूएशन पर भी दबाव

JPMorgan ने सेक्टर के कई शेयरों के P/E मल्टीपल में 10% से 25% तक की कटौती की है। ब्रोकरेज का कहना है कि आईटी कंपनियों का मौजूदा वैल्यूएशन वाजिब है, क्योंकि अब सेक्टर की लंबी अवधि की ग्रोथ 7% से 8% की बजाय 5% से भी नीचे आ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी शेयरों की वैल्यूएशन तभी बेहतर हो सकती है, जब कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ में तेज सुधार दिखे। फिलहाल ऐसी संभावना साफ नजर नहीं आ रही है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।