LIC Jeevan Utsav: बच्चों के लिए आजीवन तोहफा, हर दिन ₹160 की बचत से करें जिंदगी भर सालाना ₹100000 का इंतजाम

LIC Jeevan Utsav: एलआईसी में लोगों की जरूरतों के हिसाब से कई पॉलिसी हैं, उसमें से एक लाइफटाइम पेंशन प्लान जीवन उत्सव है। इसकी खास बात ये है कि इसमें एक तय अवधि के बाद हर साल एक फिक्स्ड अमाउंट जिंदगी भर पॉलिसीहोल्डर्स के खाते में क्रेडिट होता रहता है। इस पर मार्केट के उठा-पटक या आर्थिक मंदी या सुस्ती का कोई असर नहीं पड़ता। 1 साल की कम उम्र के किसी बच्चे लिए 16 साल तक हर दिन ₹160 बचाकर 18 वर्ष की उम्र से जिंदगी भर उसके लिए हर दिन ₹274 के हिसाब से सालाना ₹1 लाख की व्यवस्था की जा सकती है।

Jeevan Utsav: डिटेल्स

यह प्लान 30 दिन के नवजात शिशु से लेकर 65 वर्ष की उम्र के बुजुर्गो तक के लिए उपलब्ध है। 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 16 साल तक प्रीमियम चुकाना पड़ेगा तो 65 वर्ष के बुजुर्ग के लिए अधिकतम 5-10 वर्ष तक के पीरियड का ही प्रीमियम पेमेंट ऑप्शन इस पॉलिसी में है। इसमें कम से कम ₹5 लाख तक का सम एश्योर्ड लेना होता है और अधिकतम की कोई सीमा नहीं है। प्रीमियम भरने का पीरियड समाप्त होने के रेगुलर इनकम प्लान के तहत दो साल बाद से हर साल सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट होता रहेगा, जिंदगी भर। 100 साल की उम्र तक पैसा मिलता है और फिर पॉलिसी बंद कर जो भी मेच्योरिटी वैल्यू बनती है, वह पॉलिसी होल्डर्स को दे दी जाती है। किसी अनहोनी की स्थिति में पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर सम एश्योर्ड और हर साल का गारंटीड एडीशन नॉमिनी को मिलता है।

इसमें ADDB (एक्सीडेंटल डेथ एंड डिजिबिलिटी बेनेफिट राइडर), AB, AB (2 गुना), AB (3 गुना), टर्म राइडर और PWB (प्रीमियम वेवर बेनेफिट) जैसे राइडर्स थोड़े से अतिरिक्त शुल्क के साथ मिलते हैं। एडीडीबी का मतलब है कि दुर्घटना से मृत्यु होने पर अतिरिक्त पैसा मिलता है तो दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो सकते हैं। वहीं पीडब्ल्यूबी का मतलब है कि दुर्घटना के चलते स्थायी विकलांगता होने पर प्रीमियम माफ हो जाता है तो बच्चों की पॉलिसी में अभिभावक की मौत होने पर 18 साल की उम्र तक के सभी प्रीमियम माफ हो जाते हैं।

रिस्क कवर के मामले में एक बात बताना जरूरी है कि 8 साल से कम उम्र के बच्चों की पॉलिसी के मामले में पॉलिसी शुरू होने के 2 साल बाद या बच्चे के 8 साल का होने, दोनों में जो पहले हो, उस दिन से रिस्क कवर शुरू होगा। 8 साल से अधिक उम्र में पॉलिसी लेने पर पर रिस्क तुरंत चालू हो जाएगा। एक और अहम बात ये है कि बच्चे के 18 साल का होने के बाद पॉलिसी अपने आप उसके नाम पर ट्रांसफर हो जाएगी।

अब एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए कि ABC की उम्र 36 वर्ष है और एडीडीबी के राइडर के साथ वह 15 साल के लिए ₹10 लाख की पॉलिसी लेता है। 15 साल तक वह हर साल ₹66150, हर छह महीने पर ₹33653, हर तीन महीने पर ₹16950 या हर महीने ₹5691 में से एक विकल्प चुनता है और 15 साल तक लगातार प्रीमियम भरता है। 15 साल तक प्रीमियम भरने के बाद उसे दो साल तक रुकना होता है जिसके बाद 53 वर्ष की उम्र से उसे हर साल अपने बैंक खाते में सालाना ₹1 लाख यानी ₹10 लाख के सम एश्योर्ड का 10% खाते में क्रेडिट मिलता है।

किसी अनहोनी की स्थिति में बात करें तो एक्सीडेंट से पॉलिसीहोल्डर्स की मौत पर नॉमिनी को सम एश्योर्ड और जितने साल पॉलिसी मिली है, उतने समय का गारंटीड एडीशंस जोड़कर मिलेगा। जैसे कि 36 वर्ष की उम्र में पॉलिसी लेने के बाद ABC की मौत 45 वर्ष की उम्र में यानी 9 सालाना प्रीमियम भरने के बाद एक एक्सीडेंट में हो गई तो नॉमिनी को ₹24 लाख मिलेंगे।

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Pivot Path में मेजॉरिटी स्टेक बेचेगी Strides Pharma, ₹100 करोड़ में होगी डील

स्ट्राइड्स फार्मा साइंस लिमिटेड ने अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली सहायक कंपनी पिवट पाथ में मेजॉरिटी स्टेक निवेशकों के एक समूह को बेचने की घोषणा की है। यह बिक्री 100 करोड़ रुपये में की जाएगी। निवेशकों के इस समूह का नेतृत्व एसेंट कैपिटल कर रही है, जिसमें सह-निवेशक विंटेज क्लासिक भी शामिल है। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि स्ट्राइड्स फार्मा साइंस के बोर्ड ने 27 जून की मीटिंग में इस रणनीतिक निवेश को मंजूरी दी।

डील के तहत एसेंट कैपिटल, पिवट पाथ में 50 करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश करेगी। यह निवेश 31 जुलाई 2026 तक कंप्लीट होने की उम्मीद है। सौदे के शुरुआती चरण में स्ट्राइड्स फार्मा साइंस को 75 करोड़ रुपये और इसके कंप्लीट होने की पहली वर्षगांठ पर बाकी के 25 करोड़ रुपये मिलेंगे। शेयर बिक्री 30 जून 2026 तक कंप्लीट होने की उम्मीद है।

लेनदेन के बाद स्ट्राइड्स के पास पिवट पाथ में 19.95 प्रतिशत हिस्सेदारी रह जाएगी। निवेशकों की हिस्सेदारी 65.05 प्रतिशत होगी। बाकी का 15 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी स्टॉक विकल्प के तहत रिजर्व रहेगा। यह रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन नहीं हैं।

Pivot Path की वैल्यूएशन 230 करोड़ रुपये

एक अलग फाइलिंग में, स्ट्राइड्स ने कहा कि इस डील में पिवट पाथ की वैल्यूएशन पोस्ट-मनी बेसिस पर 230 करोड़ रुपये आंकी गई है। पाइवट पाथ की शुरुआत स्ट्राइड्स के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), आर्को लैब प्राइवेट लिमिटेड के भीतर हुई थी। इसने लाइफ साइंसेज कंसल्टिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्वालिटी और कंप्लायंस, और टेक्नोलॉजी-बेस्ड ऑपरेशनल सर्विस में क्षमताएं विकसित कीं।

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Stock in Focus: ₹1000 करोड़ जुटाने की योजना, बोर्ड ने भी दी खास मंजूरी, 3 वजहों से 29 जून को फोकस में रहेगा यह शेयर

Stock in Focus: दिग्गज NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) आईआईएफएल फाइनेंस के शेयरों में 29 जून को मार्केट खुलने पर तेज हलचल दिख सकती है। इसकी वजह ये है कि कंपनी अपने कैपिटल बेस को मजबूत करने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी के बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स और रेगुलेटरी मंज़ूरी मिलने पर एक या इससे अधिक किश्तों में इक्विटी शेयर या अन्य एलिजिबल सिक्योरिटीज जारी करके ₹10,000 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने इसकी जानकारी 27 जून को एक्सचेंज फाइलिंग में दी और इस खुलासे से एक कारोबारी दिन पहले 25 जून गुरुवार को बीएसई पर यह 2.75% की गिरावट के साथ ₹510.10 (IIFL Finance Share Price) पर बंद हुआ था।

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आईआईएफएल फाइनेंस के बोर्ड ने इसे ₹10 हजार करोड़ का फंड जुटाने की मंजूरी दी है। मार्केट के माहौल और कैपिटल की जरूरतों के आधार पर, फंड जुटाने का काम कई तरीकों से किया जा सकता है, जैसे कि पब्लिक इश्यू, राइट्स इश्यू, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट, प्राइवेट प्लेसमेंट, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIPs) या इन्हें मिलाकर। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी इश्यू पर बोर्ड या उसकी कमेटियां सही समय पर विचार करेंगी।

फंड जुटाने की योजना के साथ-साथ बोर्ड ने कंपनी के ग्लोबल मीडियम टर्म नोट्स (GMTN) प्रोग्राम का साइज $100 करोड़ से बढ़ाकर $200 करने को भी मंजूरी दी। इससे कंपनी को फंडिंग के लिए विदेशी मार्केट तक पहुँचने में अधिक आसानी होगी। साथ ही बोर्ड ने कंपनी की उधार लेने की सीमा और अपनी एसेट्स पर सिक्योरिटी बनाने की सीमा को भी मौजूदा ₹60,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹75,000 करोड़ करने को मंजूरी दी लेकिन इस पर कंपनी को आने वाली सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी होगी।

इसके अलावा कंपनी ने अपने फाइनेंस डिपार्टमेंट में लीडरशिप में बदलाव का भी ऐलान किया। कपिश जैन ने चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर का पद छोड़ दिया ताकि वह कंपनी के भीतर ही दूसरा पद संभाल सकें और सीएफओ के पद पर उनकी जगह विकास जैन को 27 जून से जिम्मेदारी मिली है। विकास जैन इससे पहले हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज हाउसिंग फाइनेंस और PwC जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुके है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

आईआईएफएल फाइनेंस के शेयरों ने निवेशकों को कम समय में तगड़ा झटका दिया है। इस साल की शुरुआत में 6 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹674.95 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से तीन ही महीने में यह 39.34% फिसलकर 27 अप्रैल 2026 को यह ₹409.45 के भाव पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में हुआ है भारी नुकसान? तब भी क्यों जरूरी है ITR फाइल करना, जानें टैक्स छूट का यह सीक्रेट फॉर्मूला

ITR Filing Rules: क्या शेयर बाजार में मुनाफे की बजाय नुकसान होने पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए? अक्सर देखा जाता है कि जिन निवेशकों को किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इक्विटी या म्यूचुअल फंड में घाटा होता है, वे मान लेते हैं कि उन्हें ITR फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। खासकर तब, जब उनकी कोई अन्य टैक्स योग्य आय न हो।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो घाटे वाले साल में आईटीआर फाइल न करना लंबे समय में आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप अपने इस कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड का अधिकार खो देते हैं।

इसका सीधा असर यह होगा कि भविष्य में जब आपको प्रॉफिट होगा, तब आप इस घाटे को उस मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नुकसान के बावजूद आईटीआर भरना क्यों फायदेमंद है।

लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का क्या है नियम?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नुकसान के बावजूद समय पर आईटीआर भरने से आपको अपने नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने की कानूनी अनुमति मिलती है। एनए शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं कि भले ही किसी टैक्सपेयर की कोई टैक्स देनदारी न बन रही हो और सिर्फ इक्विटी या म्यूचुअल फंड से कैपिटल लॉस हुआ हो, तब भी ड्यू डेट पर या उससे पहले आईटीआर फाइल करना बेहद फायदेमंद है।

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समय पर आईटीआर दाखिल करने से आप इस नुकसान को अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। भविष्य के सालों में जब भी आपको शेयरों या म्यूचुअल फंड से कमाई होगी, तो आप इस पुराने घाटे को उस मुनाफे से घटाकर अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम या शून्य कर सकते हैं।

क्या इक्विटी, डेट म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF के नियम अलग हैं?

कई निवेशकों को लगता है कि यह नियम सिर्फ शेयरों के लिए है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि निवेश का माध्यम कोई भी हो, नियम सभी के लिए बिल्कुल एक समान हैं। चाहे आपका नुकसान इक्विटी शेयर्स से हुआ हो, इक्विटी म्यूचुअल फंड से हो, डेट म्यूचुअल फंड से हो या फिर गोल्ड ईटीएफ से, अगर आप इस अन-एडजस्टेड लॉस को आगे ले जाना चाहते हैं, तो आपको तय तारीख के भीतर ही आईटीआर भरना होगा। नियत तारीख चूकने पर घाटे को आगे ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इक्विटी के घाटे को क्या दूसरे एसेट्स के मुनाफे से एडजस्ट कर सकते हैं?

हां, नियमों के दायरे में रहकर आप इक्विटी के घाटे को दूसरे कैपिटल एसेट्स से हुए मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट कर सकते हैं और अपना टैक्स बचा सकते हैं:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस(STCL): अगर आपको शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुनाफा शेयरों से हो, प्रॉपर्टी बेचने से हो, गोल्ड से हो या डेट म्यूचुअल फंड से।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस(LTCL): अगर आपको शेयरों में लंबी अवधि में घाटा हुआ है, तो नियम कड़े हैं। इसे केवल और केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को कौन सा ITR फॉर्म चुनना चाहिए?

सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई या नुकसान के स्रोत क्या हैं:

ITR-2: जो निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य कैपिटल एसेट्स से होने वाले केवल कैपिटल गेन्स या कैपिटल लॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना होता है।

ITR-3: लेकिन, अगर आप शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करते हैं, जिसे टैक्स की भाषा में बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आपको ITR-3 फॉर्म चुनना चाहिए।

कैपिटल लॉस रिपोर्ट करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्सपेयर्स को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि केवल वही नुकसान आगे ले जाए जा सकते हैं जो समय सीमा के भीतर फाइल किए गए रिटर्न में दिखाए गए हों। इसके अलावा, अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, ब्रोकर स्टेटमेंट्स और कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखें, क्योंकि टैक्स अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर ये सबूत के तौर पर काम आते हैं।

गोपाल बोहरा सलाह देते हैं कि आईटीआर दाखिल करने से पहले निवेशकों को अपने AIS और TIS में दर्ज ट्रांजैक्शन का मिलान अपने ब्रोकर की रिपोर्ट से जरूर कर लेना चाहिए। आईटीआर में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म नुकसान का सही खुलासा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में टैक्स छूट का लाभ लेने में कोई रुकावट न आए।

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Silver Consumer Electricals: प्री-IPO राउंड में जुटाए ₹150 करोड़; कंपनी में हार्दिक पांड्या, अर्पित खंडेलवाल जैसे दिग्गजों का है निवेश

गुजरात की कंपनी सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने प्री-IPO राउंड में लगभग 150 करोड़ रुपये जुटाए हैं। प्रमोटर ग्रुप के एक सदस्य ने 2.59 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है। कंपनी का कहना है कि धर्मशीभाई मोहनभाई बेडिया ने सेकेंडरी सेल के जरिए निवेशक रियाज सुतरवाला को 73,15,288 इक्विटी शेयर ट्रांसफर किए। यह ट्रांजेक्शन 205.05 रुपये प्रति इक्विटी शेयर की कीमत पर हुआ, जिससे कुल वैल्यू 150 करोड़ रुपये बनी। इस खरीद के बाद, सुतरवाला के पास कंपनी की प्री-ऑफर इक्विटी शेयर कैपिटल में 2.59 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।

सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स ने पिछले साल अगस्त में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था। उस वक्त धर्मशीभाई मोहनभाई बेडिया के पास 7.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वहीं उनके बेटे विनीत धर्मशीभाई बेडिया के पास 48.99 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। SEBI ने IPO ड्राफ्ट को नवंबर 2025 में मंजूरी दी।

यह IPO के जरिए 1,400 करोड़ रुपये तक जुटाना चाहती है। प्रस्तावित इश्यू में 1,000 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाने का प्लान है। साथ ही प्रमोटर विनीत धर्मशीभाई बेडिया की ओर से 400 करोड़ रुपये तक का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा।

क्या करती है Silver Consumer Electricals

गुजरात के राजकोट में स्थित सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स दो ब्रांड्स- सिल्वर और बेडिया जरिए कारोबार करती है। सिल्वर ब्रांड के तहत पंप, मोटर और खेती के उपकरण बनाती है। वहीं बेडिया ब्रांड के तहत पंखे, लाइट, हीटर, मिक्सर और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी अपने इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस के जरिए घरों, खेती और इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करती है। IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा। कंपनी 17 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट भी करती है। इसके कुल कर्मचारियों में 700 से ज्यादा महिलाएं हैं।

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पांड्या ब्रदर्स समेत किन दिग्गजों का लगा है पैसा

कंपनी में अगस्त 2025 तक एंजेल इनवेस्टर और प्लूटस वेल्थ मैनेजमेंट के मैनेजिंग पार्टनर अर्पित खंडेलवाल के पास 26.79 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वह सबसे बड़े शेयरहोल्डर थे। उन्होंने जनवरी 2023 में कंपनी में निवेश करना शुरू किया था। इसके अलावा क्रिकेटर क्रुणाल पांड्या और उनके भाई हार्दिक पांड्या भी सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स में निवेशक हैं। क्रुणाल पांड्या के पास 1.1 प्रतिशत और हार्दिक पांड्या के पास 0.017 प्रतिशत शेयर हैं। हार्दिक पांड्या कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं। मशहूर निवेशक मधु केला की पत्नी माधुरी मधुसूदन केला के पास 0.62 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स के IPO को मैनेज करने के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, ICICI सिक्योरिटीज, JM फाइनेंशियल और चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स को मर्चेंट बैंकर के तौर पर नियुक्त किया गया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इस फंड ने 10 साल में 10 हजार के मंथली निवेश को 33.87 लाख रुपये बनाया

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी का मिडकैप फंड अपने 20वें साल में प्रवेश कर लिया है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। इस स्कीम के डायरेक्ट प्लान के ग्रोथ ऑप्शन ने बीते 20 सालों में करीब 20 फीसदी कंपाउंडेंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से रिटर्न दिया है। लंबी अवधि में इतना ज्यादा रिटर्न बहुत कम फंडों ने दिया है।

एक लाख का निवेश 10 साल में 5.68 लाख बना

अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले एक लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 5.68 लाख रुपये हो गया होता। अगर आपने इस स्कीम में 10 साल पहले मंथली 10,000 रुपये का निवेश शुरू किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 33,87,433 लाख रुपये हो गया होता।

फंड मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है

यह फंड मुख्य रूप से मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। मिडकैप कंपनियों में लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना लॉर्जकैप कंपनियों के मुकाबले ज्यादा होती है। हालांकि, मिडकैप शेयरों में लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखता है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार हो रहा है। घरेलू कंजम्प्शन बढ़ रहा है। ऐसे में मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की अच्छी संभावना है।

निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल

एचडीएफसी मिडकैप स्कीम के डिसक्लोजर के मुताबिक, यह फंड निवेश में बॉटम-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। स्कीम का फोकस उन मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश पर होता है, जिनका बिजनेस मॉडल ठोस है, मैनेजमेंट अच्छा है, बाजार में कॉम्पटिटिव पोजीशन है और वैल्यूएशन सही है। इस स्कीम का एयूएम 31 मई, 2026 को 97,350 करोड़ रुपये था।

लंबी अवधि में शानदार रिटर्न जेनरेट करना मकसद

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नवनीत मुनोत ने कहा कि इस मिडकैप फंड का मकसद लंबी अवधि में इनवेस्टर्स के लिए शानदार रिटर्न जेनरेट करना है। इस स्कीम के फंड मैनेजर चिराग सितलवाड़ हैं। उन्हें निवेश का व्यापक अनुभव है। एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कई फंडों ने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं।

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क्या आपको निवेश करना चाहिए?

फाइनेंशियल एडवाइजर का कहना है कि इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिए मिडकैप फंड्स में निवेश कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि लंबी अवधि में शेयरों के रिटर्न पर उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। मिडकैप कंपनियों की ग्रोथ की संभावना अच्छी होती है। कई मिडकैप कंपनियां बाद में लार्जकैप कैटेगरी में आ जाती है। हालांकि, किसी फंड के पिछले रिटर्न को भविष्य में उसके रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता। अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय लेनी चाहिए।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

K Bhagyaraj Death: नहीं रहे फिल्ममेकर के भाग्यराज, दिल का दौरा पड़ने से 73 साल की उम्र में हुआ निधन

K Bhagyaraj Death: मशहूर एक्टर और डायरेक्टर के. भाग्यराज का शनिवार को चेन्नई में निधन हो गया। ANI के मुताबिक, अपोलो हॉस्पिटल ने भाग्यराज के निधन की पुष्टि की। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भाग्यराज को हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया। वे 73 साल के थे। उनके अंतिम संस्कार के बारे में और जानकारी का इंतजार है।

भाग्यराज के परिवार में उनकी पत्नी और एक्ट्रेस पूर्णिमा भाग्यराज, उनके बेटे और एक्टर शांतनु भाग्यराज और बेटी सारण्या भाग्यराज हैं। भाग्यराज सार्वजनिक जीवन में सक्रिय थे और कुछ ही दिन पहले उन्हें गोवा में एक्ट्रेस और पॉलिटिशियन खुशबू सुंदर की बेटी की शादी में शामिल होते देखा गया था।

तमिलनाडु के इरोड जिले में कृष्णास्वामी भाग्यराज के रूप में जन्मे भाग्यराज ने अपना सफल करियर बनाने से पहले प्रशंसित फिल्म निर्माता भारतीराजा के सहायक के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने सबसे पहले 16 वायथिनिले (1977) और सिगप्पु रोजक्कल (1978) जैसी फिल्मों में छोटी सहायक भूमिकाएं निभाईं।

इसके बाद उन्होंने भारतीराजा की दो फिल्मों – 16 वायथिनिले और किज़हक्के पोगम रेल – में सहायता की और भारतीराजा की फिल्मों किज़हक्के पोगम रेल (1978) और टिक टिक टिक (1981) के लिए स्क्रिप्ट लिखी। उन्होंने 1979 में सुवरिलाधा चिथिरंगल के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की। उन्होंने भारतीराजा की पुथिया वारपुगल में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में भी अपनी शुरुआत की।

भाग्यराज मुख्य रूप से मिडिल-क्लास परिवारों के लिए मनोरंजक फिल्में बनाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने ऐसे किरदार और कहानियां बनाईं, जिनसे लोग आसानी से जुड़ सके, और इस तरह उन्होंने पारिवारिक मनोरंजन के नज़रिए को बदल दिया। मिडिल-क्लास परिवारों पर आधारित उनकी फिल्में, बेहतरीन पटकथा लेखन और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी कहानियों ने 1980 और 1990 के दशक में तमिल सिनेमा को एक नई पहचान दी। उनकी कुछ प्रमुख फिल्मों में ‘अंधा 7 नाटकाल्’ (1981), ‘मुंधनाई मुदिचु’ (1983), ‘थूरल निन्नु पोचु’ (1982), ‘इंद्रु पोई नालई वा’ (1981) और कई अन्य फिल्में शामिल हैं।

भाग्यराज ने 25 से ज़्यादा फिल्मों का निर्देशन किया और 75 से ज़्यादा फिल्मों में अभिनय किया। भाग्यराज ने अमिताभ बच्चन की फ़िल्म ‘आखिरी रास्ता’ (1986) का निर्देशन करके हिंदी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन ने दोहरी भूमिका निभाई थी, जबकि जया प्रदा, श्रीदेवी और अनुपम खेर ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। भाग्यराज भी इस फ़िल्म में एक सहायक भूमिका में नज़र आए थे।

बाद में उन्होंने ‘मिस्टर बेचारा’ (1996) में सहायक भूमिकाएँ निभाईं, जिसमें अनिल कपूर और श्रीदेवी मुख्य भूमिकाओं में थे, और ‘पापा द ग्रेट’ (2000) में कृष्णा कुमार, नगमा और सत्य प्रकाश के साथ काम किया।

Cinema Ka Flashback: जब ‘गुजारिश’ के लिए ऐश्वर्या राय को मिलने वाला था बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड, सुपरस्टार के कहने पर काजोल को थमा दी गई थी ट्रॉफी

Cinema Ka Flashback: बॉलीवुड किसी के लिए किसी को पीछे खींचना….नीचा दिखाना….या आगे बढ़ाना बहुत आम बात है। इस ग्लैमर दुनिया में आप कब किसके लिए खास और किससे दुश्मन बन जाएं किसी को पता नहीं होता है। आए दिन दोस्ती से दुश्मनी…जलन से जुड़े किस्से सामने आते रहते हैं। एक ऐसा ही किस्सा जुड़ा है 2010-11 में एक अवॉर्ड शो से। इसके बाद से एक्टर्स के साथ-साथ दर्शकों का भी भरोसा इन शो से उठने लगा था।

ऐश्वर्या राय को भेजा गया इंवाइट

मीडिया रिपोर्ट और बॉलीवुड सोर्स के मुताबिक 2010 में ऐश्वर्या राय संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गुजारिश’ में नजर आई थीं। फिल्म में उनके अपोजिट ऋतिक रोशन थे। इस मूवी को दर्शकों का मिला जुला प्यार मिला था। लेकिन फिल्म में ऐश्वर्या के काम और खूबरत लुक्स के लोग कायल हो गए थे। इसी साल एक अवॉर्ड शो हुआ, जिसमें ऐश्वर्या को ये कहकर इंवाइट किया गया था कि जूरी ने बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड के लिए उनका नाम सजेस्ट किया है।

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लास्ट मोमेंट पर काजोल को दिया गया अवॉर्ड

ऐश्वर्या राय अवॉर्ड शो में अपना अवॉर्ड लेने पहुंची थी। लेकिन वहां जो हुआ उसने उन्हें काफी दुख और इंसल्टिंग महसूस कराया। शो में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड ऐश को न देकर My Name Is Khan के लिए काजोल को दे दिया गया। ये सब वहां मौजूद ऐश्वर्या के सामने हो रहा था।

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फिल्ममेकर का बड़ा खुलास

हंगामा तब मचा जब इस किस्से के कुछ समय बाद एक बड़े फिल्ममेकर ने इंटरव्यू में इस बात का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने सुपरस्टार का नाम लिए बिना कहा कि- एक्टर के कहने पर ऐश्वर्या राय की जगह काजोल को लास्ट मोमेंट पर ये अवॉर्ड दिया गया था। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में भी इस बात के कई दावे किए थे, कि लास्ट मोमेंट पर विनर का नाम एक्टर के कहने पर चेंज किया गया था। इस खुलासे के बाद से लोगों ने अवॉर्ड शो को कम आंकना शुरू कर दिया।

गुजारिश फिल्म

संजय लीला भंसाली की फिल्म गुजारिश 2010 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय लीड रोल में थे। ऋतिक ने इसमें लकवा ग्रस्त जादूगर का किरदार निभाते हैं। स्टेज पर हुए एक हादसे के बाद उन्हें लकवा हो जाता है। इसके बाद वह अपने जादू को एक हिट रेडियो शो के ज़रिए लोगों तक पहुंचाता है, जिसमें उसका साथ ऐश देती हैं।

माई नेम इज खान फिल्म

यह फिल्म रिजवान खान (शाहरुख खान) की कहानी है, जो एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित एक मुस्लिम है। 11 सितंबर 2001 (9/11) के हमलों के बाद अमेरिका में इस्लामोफोबिया और नस्लीय भेदभाव काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद रिजवान अमेरिका के राष्ट्रपति से मिलने और दुनिया को यह मैसेज देने के लिए एक जर्नी पर निकलते हैं-जिसमें वह लोगों को बताते हैं “मेरा नाम खान है, और मैं आतंकवादी नहीं हूं।”