आइए जानें कि इंटरेस्ट कैलकुलेटर लोन लेने से पहले कुल लागत की तुलना करने में कैसे आपकी मदद करता है

कोई भी लोन लेने से पहले इंटरेस्ट कैलकुलेटर आपको उस पर होने वाले कुल खर्च का अंदाज़ा लगाने में आपकी मदद करता है। इससे पता चलता है कि आपको कितना ब्याज़ चुकाना होगा, आपकी महीने की किस्त कितनी होगी और कुल मिलाकर कितनी रकम वापस करनी होगी। इस कैलकुलेटर की मदद से आप लोन के अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकते हैं, अपना बजट की बेहतर योजना बना सकते हैं और समझदारी से लोन लेने का फैसला कर सकते हैं।

चाहे आप अपने घर को नए जैसा बनाना चाहते हों, आगे की पढ़ाई के लिए पैसों का इंतजाम कर रहे हों, शादी का खर्च उठाना हो या  अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी सामने आ गई हो, किसी भी स्थिति में आपको अपना लोन चुकाने की ज़िम्मेदारी को समझना बेहद जरूरी है। ऐसे मौकों पर ही पर्सनल लोन और इंटरेस्ट कैलकुलेटर आपके काम आते हैं ताकि आप ज़िम्मेदारी से लोन ले सकें।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर क्या होता है?

इंटरेस्ट कैलकुलेटर एक ऑनलाइन टूल है, जो कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखकर अंदाज़ा लगाता है कि आपको लोन पर कितना ब्याज़ देना होगा, जैसे कि:

  • लोन की रकम
  • ब्याज़ दर
  • लोन चुकाने की समय-सीमा

इस कैलकुलेटर की मदद से आप तुरंत कुछ चीजों का अंदाज़ा लगा सकते हैं, जैसे कि:

  • हर महीने की किस्त
  • चुकाया जाने वाला कुल ब्याज़
  • चुकाई जाने वाली कुल रकम
  • समय-सीमा या लोन की रकम बदलने का असर

खुद से हिसाब लगाने के झंझट के बिना, आपको तुरंत नतीजे मिल जाते हैं जिससे आप पूरे भरोसे के साथ लोन के अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकते हैं।

लोन लेने से पहले इंटरेस्ट कैलकुलेटर का इस्तेमाल करना क्यों जरूरी है?

लोन लेना पैसों से जुड़ा एक बड़ा फैसला है। इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप कोई भी लोन लेने से पहले ही उस पर होने वाले कुल खर्च को अच्छी तरह समझ सकते हैं।

लोन की अलग-अलग रकम की तुलना करें

हो सकता है आपको अपने घर के रेनोवेशन के लिए 2 लाख रुपये चाहिए या फिर शादी में होने वाले खर्च के लिए 10 लाख रुपये की ज़रूरत हो। आप इंटरेस्ट कैलकुलेटर में अलग-अलग रकम डालकर देख सकते हैं कि आपकी महीने की किस्त और कुल खर्च में कितना बदलाव आता है।

इस तरह आप बस उतना ही लोन लेते हैं जितनी आपको ज़रूरत हो, और बेवजह के आर्थिक बोझ से बच जाते हैं।

लोन की समय-सीमा के असर को समझें

आम तौर पर, कम समय के लिए लोन लेने पर आपकी हर महीने की किस्त तो ज़्यादा होगी, लेकिन कुल मिलाकर आपको काफी कम ब्याज़ चुकाना होगा। वहीं, लंबे समय के लिए लोन लेने से हर महीने खर्च का बोझ थोड़ा कम होता है, पर आपको ज़्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ सकता है।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप लोन चुकाने की अलग-अलग समय-सीमा में होने वाले खर्च को देख सकते हैं, फिर आप अपनी इनकम और आर्थिक लक्ष्यों के हिसाब से सही समय-सीमा चुन सकते हैं।

अपने महीने के बजट की बेहतर योजना बनाएँ

अगर आपको पहले से ही अपनी महीने की किस्तों के बारे में पता हो, तो इससे अपने महीने के खर्चों को अच्छी तरह संभालने में मदद मिलती है।

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले आप यह देख सकते हैं कि लोन चुकाना आपके बजट में आसानी से फिट बैठता है या नहीं।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर लोन पर होने वाले कुल खर्च की तुलना करने में कैसे मददगार है?

इंटरेस्ट कैलकुलेटर का सबसे बड़ा फायदा यही है कि ये आपसे कुछ भी नहीं छिपाता है। इसकी मदद से आप सिर्फ ब्याज़ दर ही नहीं, बल्कि कई दूसरे पहलुओं के आधार पर भी लोन की तुलना कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, हो सकता है दो अलग-अलग लोन की ब्याज़ दरें एक-समान हों, लेकिन लोन चुकाने की समय-सीमा अलग-अलग होने पर आपके द्वारा चुकाई जाने वाली कुल रकम में काफी अंतर आ सकता है।

इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप इन चीजों की तुलना कर सकते हैं:

  • चुकाई जाने वाली कुल रकम
  • हर महीने की किस्त
  • चुकाया जाने वाला कुल ब्याज़
  • समय-सीमा के अलग-अलग विकल्प
  • लोन की अलग-अलग रकम

यह पूरी जानकारी आपको ऐसा लोन विकल्प चुनने में मदद करती है, जो आपके लिए किफायती हो और जिसे चुकाना भी आसान हो।

एक ही लोन के लिए दो अलग-अलग समय-सीमा के विकल्पों की तुलना

मान लीजिए पुणे में रहने वाली 32 साल की प्रिया एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं, जिनकी महीने की इनकम 65,000 रुपये है। उन्हें अपनी बहन की शादी के लिए 5 लाख रुपये की ज़रूरत है। वह इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से सालाना 14% की ब्याज़ दर पर लोन चुकाने के दो अलग-अलग विकल्पों की तुलना करती हैं।

तुलना के बिंदुविकल्प A: 24 महीने की समय-सीमाविकल्प B: 48 महीने की समय-सीमा
लोन की रकम5,00,000 रुपये5,00,000 रुपये
ब्याज़ दर14% सालाना14% सालाना
महीने की किस्त (लगभग)24,006 रुपये13,676 रुपये
चुकाया जाने वाला कुल ब्याज़ (लगभग)76,144 रुपये1,56,448 रुपये
चुकाई जाने वाली कुल रकम (लगभग)5,76,144 रुपये6,56,448 रुपये

दोनों विकल्पों की तुलना करने पर, प्रिया को समझ आता है कि 48 महीने की समय-सीमा चुनने से उनकी महीने की किस्त में 10,330 रुपये की बचत तो होगी, लेकिन लोन की समय-सीमा के दौरान कुल मिलाकर 80,304 रुपये ज़्यादा ब्याज़ चुकाना होगा।

चूंकि उनकी महीने की इनकम इतनी है कि वह हर महीने होने वाले खर्चों के बाद भी 24 महीने की EMI आसानी से चुका सकती हैं, इसलिए वह लोन पर होने वाले कुल खर्च को कम करने के लिए कम समय-सीमा वाला विकल्प चुनती है।

कैलकुलेटर से क्या पता चला: दोनों ही मामलों में ब्याज़ की दर एक जैसी थी। सिर्फ लोन की समय-सीमा बदलने से चुकाई जाने वाली कुल रकम में 80,000 रुपये से ज्यादा का अंतर आ गया। इंटरेस्ट कैलकुलेटर के ज़रिये आप कुछ ही सेकंड में इन बातों की तुलना कर सकते हैं।

पर्सनल लोन फाइनैंसिंग का सुविधाजनक विकल्प क्यों है?

पर्सनल लोन पैसे की ज़रूरत पूरी करने के सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक हैं, क्योंकि पहले से तय और अचानक सामने आने वाले कई तरह के खर्चों को पूरा करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।

आप पर्सनल लोन ऑनलाइन के लिए आवेदन करके लोन की रकम का उपयोग इन कामों के लिए कर सकते हैं:

  • मेडिकल इमरजेंसी
  • ट्रैवल पर होने वाले खर्च
  • आगे की पढ़ाई
  • शादी का खर्च
  • घर की मरम्मत/रिनोवेशन
  • कोई बड़ी खरीदारी

सिक्योर्ड लोन के मुकाबले, पर्सनल लोन के लिए आमतौर पर किसी कोलेटरल की ज़रूरत नहीं होती है। इसके आवेदन करने का तरीका भी बहुत आसान है, जो उन लोगों के लिए सबसे बेहतर विकल्प है जिन्हें तुरंत पैसों की ज़रूरत हो।

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन कैसे आपकी मदद कर सकता है?

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन अलग-अलग तरह की पैसों की जरूरतों को पूरा करने का बेहद आसान और सुविधाजनक जरिया है। इंटरेस्ट कैलकुलेटर का उपयोग करके आप अपने लोन चुकाने की जिम्मेदारियों का अंदाज़ा लगा सकते हैं और एक सही लोन स्ट्रक्चर चुन सकते हैं।

इसके कुछ खास फायदे इस प्रकार हैं:

  • 40,000 रुपये से 55 लाख रुपये तक की लोन की रकम
  • लोन चुकाने के लिए 12 महीने से 108 महीने तक की समय-सीमा
  • सालाना 10% से 30% तक की ब्याज़ दरें
  • किसी कोलेटरल की ज़रूरत नहीं
  • तेजी से मंजूरी मिलने की प्रक्रिया
  • बहुत कम कागजी कार्रवाई
  • ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
  • वेरिफिकेशन और मंजूरी के आधार पर, सिर्फ़ 24 घंटों* में लोन की रकम पाने की सुविधा

आवेदन करने से पहले इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप जान सकते हैं कि लोन की अलग-अलग रकम और समय-सीमा आपके कुल लोन खर्च पर कैसे असर डालती है।

ऑनलाइन पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकता है?

ज्यादातर नौकरीपेशा वाले और खुद का रोजगार करने वाले लोग ऑनलाइन पर्सनल लोन चुनते हैं, क्योंकि यह सुविधाजनक है और इसकी प्रक्रिया पूरी होने में बहुत कम वक्त लगता है।

सामान्य तौर पर एलिजिबिलिटी इन बातों पर निर्भर है:

राष्ट्रीयताभारतीय
उम्र21 साल से 80 साल*
नौकरीसरकारी, प्राइवेट, या MNC.
CIBIL स्कोर650 या उससे ज्यादा
ग्राहक का प्रोफाइलखुद का रोजगार करने वाले या नौकरीपेशा

 

* लोन की समय-सीमा पूरी होने पर आपकी उम्र 80 साल या उससे कम होनी चाहिए।

लोन पाने की शर्तों को पूरा करने से मंजूरी की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि लोन देने वाले संस्थान अपने नियमों और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के आधार पर हर आवेदन की जांच करते हैं।

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले, चुकाई जाने वाली रकम का अंदाज़ा लगाने और अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से सही फैसला लेने के लिए इंटरेस्ट कैलकुलेटर का उपयोग करना बहुत मददगार साबित होता है।

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से हमें क्या फायदा होता है?

इंटरेस्ट कैलकुलेटर सिर्फ़ योजना बनाने में मदद करने वाला टूल नहीं है, बल्कि यह ज़िम्मेदारी से लोन लेने में भी बहुत उपयोगी है।

कोई भी लोन लेने से पहले, इन बातों को जरूर ध्यान में रखें:

  • बस उतनी ही रकम लोन लें जितनी आपको असल में ज़रूरत हो
  • लोन चुकाने की अपनी क्षमता के हिसाब से सही समय-सीमा चुनें
  • अपना क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर बनाए रखें
  • सभी शुल्कों और शर्तों पर अच्छी तरह गौर करें
  • ध्यान रखें कि हर महीने की किस्त आपके बजट में आ जाए

ज़िम्मेदारी से लोन लेकर आप इसे अच्छी तरह संभाल सकते हैं और भविष्य में होने वाले आर्थिक तनाव से बच सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इंटरेस्ट कैलकुलेटर चुकाई जाने वाली कुल रकम दिखाता है?

हाँ। इंटरेस्ट कैलकुलेटर से आपको यह अंदाज़ा मिलता है कि लोन के मूलधन और तय समय-सीमा में लगने वाले ब्याज़ को मिलाकर आपको कुल कितनी रकम चुकानी होगी। इससे लोन लेने से पहले आपको कुल खर्च के बारे में जानने में मदद मिलती है।

क्या मैं इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से लोन के अलग-अलग विकल्पों की तुलना कर सकता हूँ?

हाँ। इंटरेस्ट कैलकुलेटर की मदद से आप लोन की अलग-अलग रकम, ब्याज़ दर और लोन चुकाने की समय-सीमा की तुलना कर सकते हैं। इस तरह आपके लिए ऐसा विकल्प चुनना आसान हो जाता है, जो आपके बजट और आर्थिक लक्ष्यों के हिसाब से सही हो।

क्या पर्सनल लोन के लिए इंटरेस्ट कैलकुलेटर उपयोगी है?

हाँ, पर्सनल लोन के लिए इंटरेस्ट कैलकुलेटर खास तौर पर बहुत उपयोगी है, क्योंकि इससे आप हर महीने की किस्त और कुल खर्च का आसानी से अंदाज़ा लगा सकते हैं। इससे आपको लोन लेने के बारे में सही फैसला लेने और लोन चुकाने की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

इंटरेस्ट कैलकुलेटर बेहद आसान लेकिन बहुत कारगर टूल है, जिससे आपको लोन के विकल्पों की तुलना करने, लोन चुकाने के बारे में अंदाज़ा लगाने और कोई भी फैसला लेने से पहले लोन लेने की कुल लागत को समझने में मदद मिलती है। इसके ज़रिये आप  सारी चीजों को अच्छे से समझ सकते हैं, आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग बेहतर होती है और आप समझदारी से लोन ले सकते हैं।

अगर आप पहले से तय या अचानक सामने आने वाले किसी खर्च के लिए लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के साथ इंटरेस्ट कैलकुलेटर का उपयोग करके आप अपनी ज़रूरतों के हिसाब से लोन चुकाने का सही विकल्प चुन सकते हैं। आज ही अपनी एलिजिबिलिटी के बारे में जानें और ऑनलाइन आवेदन करें, ताकि आप आसान और तेज आवेदन प्रक्रिया के ज़रिये फाइनैंसिंग के सुविधाजनक विकल्पों का लाभ उठा सकें।

* नियम व शर्तें लागू

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

4% टूट गया Silver ETF, फीकी पड़ी Gold ETF की चमक, इस कारण फिसल रहा सोना-चांदी

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Jupiter Wagons Share: रेल कंपनी को मिले ₹264 करोड़ के ऑर्डर, शेयरों पर रहेगी नजर

Jupiter Wagons Share: रेल फ्रेट वैगन बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons Ltd को ₹264.32 करोड़ के दो बड़े ऑर्डर मिले हैं। इनमें एक ऑर्डर JSW (South) Rail Logistics से और दूसरा Central Warehousing Corporation (CWC) से मिला है। इन नए ऑर्डर्स से कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिलेगी और आने वाले महीनों में रेवेन्यू की बेहतर विजिबिलिटी रहेगी।

JSW से मिला ₹122.88 करोड़ का ऑर्डर

जुपिटर वैगंस ने बताया कि JSW (South) Rail Logistics के साथ ₹122.88 करोड़ का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) साइन किया गया है। इसके तहत कंपनी पांच BFNSM1 रेक और BVCM वैगन तैयार कर सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर सात महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी JSW को दो BFNV वैगन भी सप्लाई करेगी।

CWC ने दिया ₹141.44 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट

सरकारी कंपनी Central Warehousing Corporation (CWC) ने जुपिटर वैगंस को ₹141.44 करोड़ का ऑर्डर दिया है। इसके तहत कंपनी आठ BLSS रेक तैयार करेगी। इनमें 32 BLSS-A वैगन, 352 BLSS-B वैगन और आठ ब्रेक वैन शामिल होंगे। इस ऑर्डर को एक साल के भीतर पूरा करना है।

रेल लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ रही मांग

BLSS वैगन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंटेनर ट्रांसपोर्ट में होता है। ये बंदरगाहों, वेयरहाउस और औद्योगिक केंद्रों के बीच मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जुपिटर वैगंस के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया ने कहा कि ये ऑर्डर कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और समय पर डिलीवरी पर ग्राहकों के भरोसे को दिखाते हैं। उनका कहना है कि रेल लॉजिस्टिक्स और फ्रेट इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से आगे भी ऐसे ऑर्डर मिलने की अच्छी संभावना है।

जुपिटर वैगंस के शेयरों का हाल

जुपिटर वैगंस  का शेयर गुरुवार को 1.68% गिरकर ₹263.10 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.20% टूटा है। वहीं, 1 साल में इसने 31% से ज्यादा का नेगेटिव रिटर्न दिया है। हालांकि, बीते 5 साल में इसने 395.95% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.77 हजार करोड़ रुपये है।

Stock Market Holiday: लगातार तीन दिन शेयर बाजारों में नहीं होगा कारोबार, BSE और NSE में रहेगी छुट्टी

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

सोना तो सोना है! टैक्स बढ़ने के बाद भी नहीं कम हो रही गोल्ड की चमक! सर्राफा बाजारों में उमड़ रही भारी भीड़

Gold Price Alert: आदित्य बिड़ला ग्रुप के ज्वैलरी ब्रांड ‘इंद्रिया’ (Indriya) के सीईओ संदीप कोहली ने सोने को लेकर एक बड़ी बात कही है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद मई महीने में बाजार थोड़ा सुस्त जरूर हुआ था, लेकिन अब ग्राहकों की डिमांड बहुत मजबूती से वापस लौट आई है।

संदीप कोहली ने कहा, ‘कस्टम ड्यूटी में 9 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद लोग नए भाव को समझने के लिए थोड़ा रुक गए थे। पूरे ज्वैलरी उद्योग में ग्राहकों की चहल-पहल थोड़ी धीमी हो गई थी, लेकिन पिछले दो हफ्तों में मांग बहुत तेजी से बढ़ी है।’

क्यों आई थी सुस्ती और अब क्यों लौट रही है रौनक?

सरकार ने मई महीने में सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। सरकार का मकसद विदेशों से सोने की खरीद को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। इस 9% की सीधी बढ़ोतरी से अचानक सोना महंगा हो गया था।

वैसे कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद अब सोने की कीमतों में आ रही हालिया गिरावट भी ग्राहकों को दोबारा शोरूम तक खींच रही है। दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव ₹13244 प्रति ग्राम और मुंबई में ₹13229 प्रति ग्राम पर आ गया है, जिससे खरीदारों को राहत मिली है।

‘भारतीयों के लिए सोना सिर्फ निवेश नहीं, संस्कृति है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या कीमतें बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की साख कम हुई है? तो कोहली ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्वैलरी की मांग कभी खत्म नहीं हो सकती क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। कमोडिटी की कीमतें कैसी भी हों, ग्राहक दूसरे निवेशों के मुकाबले इसके रिटर्न का आकलन जरूर करते हैं, लेकिन मांग हमेशा बनी रहती है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब ग्राहक खास डिजाइन वाले गहने ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

तेजी से पैर पसार रहा है ‘इंद्रिया’ ब्रांड

साल 2024 में लॉन्च हुआ यह ब्रांड देश का सबसे तेजी से बढ़ता रिटेल ब्रांड बन गया है। फिलहाल 40 से ज्यादा शहरों में इसके 81 स्टोर्स हैं और फाइनेंशियल ईयर 2027 में कंपनी 40 नए स्टोर्स और खोलने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने स्टोर्स में ‘स्पार्कलस्कोप’ नाम की एक नई तकनीक लॉन्च की है। इसके जरिए ग्राहक खुद देख सकेंगे कि उनके हीरे में कितनी चमक है।

नेचुरल डायमंड पर है फोकस

भारत के ₹8,000 करोड़ के ज्वैलरी मार्केट में डायमंड-स्टडेड गहनों की हिस्सेदारी 11 फीसदी है, लेकिन ‘इंद्रिया’ के लिए यह हिस्सेदारी दोगुनी यानी 22 फीसदी है। आजकल बाजार में लैब में तैयार होने वाले हीरे का चलन बढ़ रहा है। जैसे कि टाटा ग्रुप के ‘टाइटैन’ ने पिछले साल दिसंबर में लैब-ग्रोन डायमंड कैटेगरी में कदम रखा है। लेकिन इसके उलट, ‘इंद्रिया’ पूरी तरह से नेचुरल हीरों पर ही फोकस कर रहा है।

संदीप कोहली का मानना है कि ग्राहकों के लिए हीरे की क्वालिटी (4Cs) के साथ-साथ उसकी चमक सबसे पहले मायने रखती है, और उनकी नई तकनीक इसी पर फोकस करती है।

Market Outlook : हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 25 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स ने दिन के दौरान हुई ज्यादातर बढ़त गंवा दी और मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,050 के आसपास रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 109.25 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर और निफ्टी 34.35 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056.00 पर सेयल हुआ। लगभग 1544 शेयरों में बढ़त हुई,2488 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन,M&M,मैक्स हेल्थकेयर,मारुति सुजुकी और टाटा कंज्यूमर शामिल रहे। जबकि ONGC,पावर ग्रिड कॉर्प,हिंडाल्को और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक महिंद्रा में गिरावट देखने को मिली।

सेक्टोरल इंडेक्स मिले-जुले रहे। FMCG में 0.7%,रियल्टी में 0.3% और ऑटो इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बढ़त हुई। जबकि IT,एनर्जी,मीडिया,मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 0.5-1% नीचे रहे। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि दिन के शुरुआती कारोबार में हुई बढ़त के बाद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से घरेलू बाजार बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से रुपये को सहारा मिला और कुछ राहत भी मिली,लेकिन यह बढ़त की रफ़्तार बनाए रखने के लिए काफी नहीं थी।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसकी वजह रही मेटल की कीमतों में नरमी,सप्लाई चेन की दिक्कतों में कमी और महीने के दौरान रिटेल डिमांड में सुधार।

कुल मिलाकर बाजार का मूड पॉजिटिव रहा। हालांकि,FII की लगातार बिकवाली से तेजी सीमित हो सकती है। आने वाले समय में,Q1 के नतीजों को लेकर कमजोर उम्मीदों और मॉनसून की असमान स्थिति का असर बाजार के मूड पर पड़ सकता है,इसलिए इन पर नजर रखनी होगी।

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, HNI ​एंड डेरिवेटिव्स,रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में आज का ट्रेडिंग सेशन थोड़ा पॉजिटिव रहा। दिन भर उतार-चढ़ाव सीमित दायरे में रहने के बावजूद बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बने रहना लगातार खरीदारी की रुचि को दिखाता है। मार्केट में नए ट्रिगर्स आने से पहले निवेशक सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।

निफ्टी 30 अंक यानी 0.12%) बढ़कर 24,050 पर बंद हुआ। यह इंडेक्स 24,000 के अहम लेवल के ऊपर बना हुआ है,जो बताता है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 24,000–23,950 के आसपास है और इसके बाद 23,850 के आसपास मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, रेजिस्टेंस 24,100–24,150 और उसके बाद 24,250 पर दिख रहा है। लगातार इन लेवल के ऊपर बने रहने से और बढ़त का रास्ता खुल सकता है।

BSE सेंसेक्स 105 अंक यानी 0.14% बढ़कर 77,100 पर बंद हुआ। इंडेक्स सीमित दायरे में ट्रेड करता रहा लेकिन पॉजिटिव जोनन में बंद होने में कामयाब रहा,जो निचले लेवल पर लगातार खरीदारी का सपोर्ट दिखाता है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,900–76,700 के आसपास है। जबकि रेजिस्टेंस 77,300–77,500 के पास दिख रहा है। इस जोन के ऊपर ब्रेकआउट से बुलिश मोमेंटम और मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर मार्केट पॉजिटिव रुख के साथ कंसोलिडेट होता रहा,जिससे पता चलता है कि सेशन के दौरान सीमित बढ़त के बावजूद खरीदारों का दबदबा बना हुआ है। जब तक अहम सपोर्ट लेवल बने हुए हैं,तब तक मार्केट का स्ट्रक्चर पॉजिटिव बना रहेगा। ट्रेडर्स अच्छे रिस्क मैनेजमेंट के साथ गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं, क्योंकि मुख्य ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आना ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की कहानी में एक बड़ा बदलाव है। यह बदलाव मांग में कमी के कारण नहीं,बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की वजह से आया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इससे सप्लाई में आई वह रुकावट दूर हो रही है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक देश भारत के लिए यह निश्चित रूप से अच्छी खबर है। तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की गिरावट से भारत का सालाना आयात बिल लगभग 12 से 15 अरब डॉलर कम हो जाता है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम होता है और भारतीय रिजर्व बैंक को विकास को बढ़ावा देने के लिए उधार की लागत (ब्याज दरों) को अनुकूल बनाए रखने की अधिक गुंजाइश मिलती है।

घरेलू बाजारों ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है। 25 जून को सेंसेक्स 77,000 के स्तर को पार कर गया और निफ्टी 24,100 के आसपास मज़बूत बना रहा। इसमें ऑटो,एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के शेयरों ने बढ़त में अहम भूमिका निभाई। भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए निकट भविष्य का आउटलुक अच्छा दिख रहा है,बशर्ते क्रूड की कीमतें 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में स्थिर रहें और मॉनसून उम्मीद के मुताबिक अच्छा रहे।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिज़नेस हेड,अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में लंबी छुट्टी से पहले,निवेशकों ने कारोबारी सत्र के अंतिम हिस्से में मुनाफावसूली की,जिससे बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। चूंकि मुहर्रम के कारण शुक्रवार को बाजार बंद रहेंगे,इसलिए निवेशकों ने अपनी इक्विटी होल्डिंग कम कर दी। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमी पर अभी भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं,ऐसे में निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज में VP टेक्निकल रिसर्च अमोल अठावले ने कहा कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। काफी उतार-चढ़ाव के बाद,निफ्टी 0.18 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स में 297 अंकों की बढ़त हुई। सेक्टरों की बात करें तो फार्मा इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई,जबकि मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट हुई और यह 4.40 प्रतिशत नीचे आया। हफ्ते के दौरान,तेज गिरावट के बाद मार्केट को 50 डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज)के पास सपोर्ट मिला और इसमें तेजी से सुधार हुआ। हालांकि,एक बार फिर इसे 24,200/77,800 के रेजिस्टेंस जोन के पास प्रॉफिट बुकिंग का सामना करना पड़ा।

टेक्निकल तौर पर मार्केट ने एक रेंज-बाउंड पैटर्न बनाया है। नीचे की तरफ,इसे 50 डे SMA या 23,800/76,200 के पास सपोर्ट मिला है,जबकि 24,200-24,250/77,800-78,000 के रेजिस्टेंस लेवल के पास लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। पोजीशनल ट्रेडर्स के लिए, 24,000/77,000 एक इमीडिएट सपोर्ट जोनन का काम करेगा। इस लेवल के ऊपर,मार्केट 24,200/77,800 को फिर से टेस्ट कर सकता है। 24,200/77,800 के लेवल को सफलतापूर्वक पार करने पर मार्केट 24,400-24,500/78,400-78,700 की ओर बढ़ सकता है।

दूसरी ओर 24,000/77,000 के नीचे जाने पर मार्केट 23,800/76,200 तक गिर सकता है। गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है और इंडेक्स 23,650/75,700 तक जा सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए,सपोर्ट जोन 57,800 और 57,500 पर हैं। इन लेवल के ऊपर,तेजी 58,700-59,000 की ओर जारी रह सकती है। इसके उलट, 57,500 के नीचे जाने पर अपट्रेंड कमजोर हो सकता है।

 

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डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SBI के शेयर में 22% उछाल का दम, बना सकता है नया रिकॉर्ड हाई; CLSA को उम्मीद

भारत के सबसे बड़े लेंडर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर में अभी अच्छी गुंजाइश बाकी है। शेयर के अपने पिछले रिकॉर्ड हाई लेवल को पार कर जाने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म CLSA ने यह अनुमान जताते हुए इस स्टॉक पर अपना पॉजिटिव नजरिया दोहराया है। ब्रोकरेज ने SBI के शेयरों पर “आउटपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,275 रुपये प्रति शेयर दिया है। यह टारगेट स्टॉक के क्लोजिंग प्राइस से 22% ज्यादा है।

साथ ही यह टारगेट शेयर के BSE पर 52 सप्ताह के एडजस्टेड हाई 1,234.8 रुपये से भी ज्यादा है। CLSA ने SBI के मैनेजमेंट से मुलाकात की। बातचीत में सामने आया कि SBI की लोन ग्रोथ सिस्टम के हिसाब से मजबूत रही है। इसमें रिटेल और कॉरपोरेट दोनों तरह की डिमांड का योगदान है।

SBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए क्रेडिट ग्रोथ 13% से 15% के बीच रहने का अनुमान जताया है और कहा है कि यह सभी सेगमेंट में व्यापक स्तर पर होगी। चेयरमैन CS सेट्टी ने कहा है कि वेस्ट एशिया में संघर्ष की वजह से कोई दबाव नहीं दिख रहा है। नए वित्त वर्ष के लिए मार्जिन को लेकर 3% का गाइडेंस बरकरार है। CLSA ने मैनेजमेंट के हवाले से कहा है कि ट्रेजरी बिल से जुड़े लोन की रीप्राइसिंग के जरिए मार्जिन गाइडेंस को हासिल किया जा सकता है।

कमजोर रहा मॉनसून तो ग्रामीण क्षेत्र से मांग पर पड़ेगा बुरा असर

बातचीत से यह भी सामने आया है कि SBI कॉर्पोरेट लेंडिंग के मामले में सोच-समझकर कदम उठा रहा है, क्योंकि उसका मकसद मुनाफे वाली ग्रोथ हासिल करना है। CLSA का कहना है कि भूराजनीतिक मोर्चे पर मैक्रो चुनौतियों के बावजूद बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है। SBI मैनेजमेंट को सिर्फ ‘अल नीनो’ की चिंता है। चेतावनी दी गई है कि अगर मॉनसून औसत से काफी कम रहा तो ग्रामीण क्षेत्र से मांग पर बुरा असर पड़ सकता है। SBI के शेयर पर 49 एनालिस्ट नजर रखते हैं। इनमें से 43 ने “बाय” रेटिंग दी है। 6 ने “होल्ड” की सलाह दी है।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

SBI के शेयर में तेजी

25 जून को SBI के शेयर में 1 प्रतिशत की तेजी रही। BSE पर यह 1045 रुपये पर बंद हुआ। बैंक का मार्केट कैप 9.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। शेयर एक महीने में 8 प्रतिशत और एक साल में 30 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल का रिटर्न 88 प्रतिशत है। बैंक में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 55.52 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Hindustan Copper Share: 45% चढ़ेगा इस सरकारी कंपनी का स्टॉक! आनंद राठी ने दी खरीदने की सलाह

Hindustan Copper Share: सरकारी मेटल कंपनी हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) के शेयर पर ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी का रुख काफी बुलिश है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए 12 महीने का टारगेट प्राइस 715 रुपये रखा है। मौजूदा बाजार भाव 490 रुपये के मुकाबले यह करीब 46% संभावित उछाल का संकेत देता है।

हिंदुस्तान कॉपर पर ब्रोकरेज क्यों बुलिश है?

आनंद राठी का मानना है कि हिंदुस्तान कॉप की मल्टी-प्रॉन्ग कैपेसिटी एक्सपेंशन रणनीति आने वाले वर्षों में ग्रोथ को नई रफ्तार दे सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, गुजरात कॉपर प्लांट (GCP) को दोबारा शुरू करने के लिए 20 साल का रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट किया गया है। इसके अलावा केन्दाडीह कॉपर माइन में प्रोडक्शन फिर शुरू हो गया है। साथ ही, क्षमता बढ़ाने की योजना पर भी काम चल रहा है।

इन प्रोजेक्ट से हिंदुस्तान कॉपर का उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ने की उम्मीद है। झारखंड और सिक्किम की कुछ बंद खदानों को दोबारा शुरू करने की संभावना है। ये भी लॉन्ग टर्म में कंपनी की ग्रोथ को मजबूती दे सकती हैं।

पहली तिमाही में मजबूत नतीजों की उम्मीद

ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही कंपनी के लिए रिकॉर्ड रहने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉपर की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये की कमजोरी और प्रोडक्शन बढ़ने से कंपनी का रेवेन्यू करीब 8.5 अरब रुपये तक पहुंच सकता है। EBITDA मार्जिन भी करीब 48% रहने का अनुमान है।

लंबी अवधि की ग्रोथ पर दांव

आनंद राठी का कहना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग से कॉपर की खपत लगातार बढ़ेगी। इसी को देखते हुए हिंदुस्तान कॉपर अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर बड़ा निवेश कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी FY30 तक बड़े कैपेक्स प्रोग्राम पर काम कर रही है। इससे आने वाले वर्षों में उत्पादन में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।

हिंदुस्तान कॉपर का टारगेट प्राइस क्या है?

आनंद राठी ने हिंदुस्तान कॉपर पर BUY रेटिंग बनाए रखते हुए 715 रुपये का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव 490 रुपये के मुकाबले यह लगभग 46% के संभावित उछाल का संकेत है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की विस्तार योजनाएं, बढ़ती उत्पादन क्षमता और मजबूत कॉपर डिमांड स्टॉक के लिए लंबे समय में पॉजिटिव साबित हो सकती हैं।

इन जोखिमों पर नजर रखना भी जरूरी

ब्रोकरेज का कहना है कि निवेशकों को कुछ जोखिमों का भी ध्यान रखना चाहिए। इनमें अंतरराष्ट्रीय कॉपर कीमतों में उतार-चढ़ाव, कैपेक्स प्रोजेक्ट्स में देरी, उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं के समय पर पूरा न होने और वैश्विक कमोडिटी बाजार में बदलाव शामिल हैं। ऐसे जोखिमों का असर शेयर के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

प्राइवेट सेक्टर के CSB Bank के शेयरों में 25 जून को दिन में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी। बीएसई पर भाव 322 रुपये के लो तक गया। शेयर में गिरावट की दो वजहें सामने आ रही हैं। पहली मुख्य वजह यह है कि ऐसी खबर है कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की अगुवाई वाली फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स, CSB बैंक में अपनी पूरी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चला है कि फेयरफैक्स ने IDBI बैंक में हिस्सेदारी की खरीद के लिए एक नई बोली लगाई है।

इस सौदे से सरकार और LIC, दोनों मुख्य शेयरधारकों को लगभग 50,000 करोड़ रुपये या 5 अरब डॉलर से कुछ अधिक मिलने की संभावना है। संशोधित प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और सौदा सही दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

इसलिए CSB Bank में बेच सकती है पूरा हिस्सा

संबंधित लोगों का यह भी कहना है कि फेयरफैक्स ने प्रतिबद्धता जताई है कि बैंकिंग क्षेत्र में IDBI बैंक ही उसका एकमात्र निवेश होगा। नतीजतन, IDBI Bank का अधिग्रहण करने पर वह CSB बैंक में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। ऐसा इसलिए क्योंकि RBI के नियमों के तहत कोई प्रमोटर दो बैंकिंग लाइसेंस नहीं रख सकता है।

फेयरफैक्स ने 2018 में CSB बैंक (जिसे तब कैथोलिक सीरियन बैंक के नाम से जाना जाता था) को बचाने के लिए एक बेलआउट डील के तहत 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। एक साल बाद बैंक को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया।

गोल्ड की कीमत में गिरावट भी एक वजह

सोने की कीमतों में दबाव के कारण गुरुवार को गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। साथ ही CSB बैंक लिमिटेड जैसे गोल्ड फाइनेंसिंग से जुड़े लेंडर्स के शेयरों में भी गिरावट है। गोल्ड के फिसलने की वजह है कि महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते US फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने और उसके बाद US डॉलर के मजबूत होने का डर बना हुआ है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है, जो पिछले 7 महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है। CSB Bank के कुल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा लगभग 42-45% है।

CSB Bank का मार्केट कैप घटकर 5600 करोड़ रुपये रह गया है। शेयर साल 2026 में अब तक 33 प्रतिशत गिरा है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FMCG Stock: कमजोर मॉनसून की चिंताओं के बीच नुवामा को FMCG में दिख रही डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद

FMCG Stock:  मॉनसून में देरी और एल नीनो की चिंताओं का असर फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) स्टॉक्स पर पड़ सकता है, लेकिन नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज को उम्मीद है कि कंज्यूमर कंपनियां एक और मजबूत तिमाही रिपोर्ट करेंगी, जिसमें पूरे सेक्टर में अच्छी सेल्स और वॉल्यूम ग्रोथ जारी रहेगी।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अबनीश रॉय ने कहा कि ज्यादातर FMCG कंपनियां 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही (Q4FY26) में देखी गई रिकवरी पर आगे बढ़ेंगी। उन्हें उम्मीद है कि नेस्ले इंडिया, मैरिको, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स इंडिया और इमामी जैसी कई कंपनियां 2026 की अप्रैल-जून तिमाही (Q1FY27) में मजबूत नंबर देगी, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी बड़ी कंपनियों की सेल्स ग्रोथ लगभग डबल-डिजिट और वॉल्यूम ग्रोथ लगभग 7% हो सकती है।

हालांकि निवेशक कमजोर बारिश और कम बुवाई एक्टिविटी को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि पुराना डेटा कंज्यूमर डिमांड में तेज गिरावट के डर को सपोर्ट नहीं करता है। “हमने देखा है कि कम से कम पिछले 10 सालों में बारिश में कमी और सेक्टर के वॉल्यूम में कमी के बीच कोई बड़ा संबंध नहीं है।”

उनके मुताबिक, बारिश की क्वालिटी और डिस्ट्रीब्यूशन, हेडलाइन मॉनसून नंबरों से ज्यादा मायने रखते हैं। उन्होंने कहा कि अभी के लिए रूरल डिमांड अच्छी बनी हुई है, जिसे कई राज्यों में सरकार के वेलफेयर उपायों से सपोर्ट मिला है। मॉनसून में किसी भी कमी का असली असर अगर सामने आता है, तो 2026-27 (FY27) के दूसरे हाफ में ही साफ हो पाएगा।

अबनीश रॉय ने कंज्यूमर सेक्टर में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स से बढ़ते कॉम्पिटिशन पर भी रोशनी डाली। उन्होंने रिलायंस को “बहुत, बहुत अहम कॉम्पिटिशन” बताया, और कैंपा कोला के तेजी से बढ़ने की ओर इशारा किया, जिसने एग्रेसिव प्राइसिंग और मजबूत डीलर इंसेंटिव के ज़रिए मार्केट शेयर हासिल किया है। हालांकि, उनका मानना ​​है कि ज़्यादातर FMCG कैटेगरी इतनी बड़ी हैं कि जाने-माने प्लेयर्स और रिलायंस एक साथ रह सकते हैं।

पेंट्स सेक्टर पर बात करते हुए अबनीश रॉय को उम्मीद है कि क्रूड ऑयल की कम कीमतों के बावजूद ग्रोथ मोमेंटम बना रहेगा। उन्होंने कहा कि पेंट कंपनियों ने मजबूत प्राइसिंग डिसिप्लिन दिखाया है और उन्हें डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ जारी रखनी चाहिए। भले ही क्रूड $60-$70 प्रति बैरल की रेंज में बना रहे और कंपनियां पहले की कीमतों में बढ़ोतरी को थोड़ा वापस ले लें, अच्छी वॉल्यूम ग्रोथ से सेल्स को सपोर्ट मिलना चाहिए।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading Strategy: अब अगली तेजी 24250 के ऊपर निकलने पर आएगी, जब तक निफ्टी 24100 के ऊपर है ट्रेंड रहेगा मजबूत

Trading Strategy: लार्जकैप के दम पर आज मार्केट में तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि मार्केट ब्रेथ कमजोर है। नरम क्रूड और रुपये की मजबूती से सेंटिमेंट अच्छे हुए हैं। निफ्टी 170 प्वाइंट से ज्यादा चढ़कर 24200 के ऊपर दिख रहा है। बैंक निफ्टी भी 58500 के पार कारोबार कर रहा है। मिडकैप में भी रौनक है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 3% फिसलकर 13 के नीचे आ गया है। कच्चे तेल में गिरावट और ब्याज दरें ना बढ़ने की उम्मीद में ऑटो शेयरों में फर्राटा रफ्तार आई है। मारुति करीब 5% उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना है। साथ ही M&M,मदरसन और TVS मोटर भी 4% दौड़े हैं।

रियल्टी,NBFCs और FMCG में भी अच्छी तेजी है। तीनों सेक्टर इंडेक्स करीब 1 फीसदी चढ़े हैं। रियल्टी में प्रेस्टीज,गोदरेज प्रॉपर्टीज और लोढ़ा 2 फीसदी चढ़े हैं। लेकिन मजबूत डॉलर इंडेक्स से मेटल शेयरों में लगातार तीसरे दिन मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।

बाजार: लार्ज कैप में रैली

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल, इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि आज फिर बाजार में चुनिंदा लार्ज कैप शेयरों में रैली हुई है। निफ्टी चला है लेकिन ब्रेथ खराब है। हालांकि 1-2 दिन की चाल को ट्रेंड नहीं समझ सकते। लेकिन ऐसा चलता रहा तो रिस्क का रास्ता खुलेगा। खैर,अगले हफ्ते उसका भी जवाब मिल जाएगा। फिलहाल आज का दिन निफ्टी के लिए बढ़िया रहा। 24,250 की रजिस्टेंस पार करने बाद रुका। ऑटो शेयरों के लिए आज शानदार दिन है। तकरीबन हर ऑटो एंसिलरी शेयर में रैली है। इंटरग्लोब फिर से आज रफ्तार का घोड़ा बना। सिर्फ मेटल में आज गिरावट आई। मेटल शेयरों की गिरावट के लिए सुबह ही तैयार किया था।

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बाजार: अब क्या?

अब अगली तेजी 24,250 के ऊपर निकलने पर आएगी। 24,100 के ऊपर जब तक हैं,ट्रेंड मजबूत है। अगर 24,200 के ऊपर क्लोजिंग हो जाए तो शानदार रहेगा। बैंक निफ्टी में 58,500 का पहला टारगेट हासिल हुआ। 59,000 और 59,500 के टापगेट अभी बाकी हैं। ऑरेकल ने फिर से आवाज के दर्शकों को मोटी कमाई कराई है। इंटरग्लोब में भी 4000 से 5400 की एकतरफा रैली रही।

निफ्टी -बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,050-24,100 पर सपोर्ट और 24,200-24,250 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 58,200-58,400 पर सपोर्ट और 58,800-59,000 पर रेजिस्टेंस है।

 

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