Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty में बढ़त को देखते हुए,भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 25 जून को बढ़त के साथ शुरुआत करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 24,081.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

24 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। IT,रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर निफ्टी ने 24,000 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बाद तेल सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं,जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 790.54 अंक या 1.04 प्रतिशत बढ़कर 76,991.22 पर और निफ्टी 197.55 अंक या 0.83 प्रतिशत बढ़कर 24,021.65 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07.40 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 87 अंक यानी 0.36 फीसदी की बढ़त के साथ 24,108.50 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 3.55 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.15 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग 1.43 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 1.13 फीसदी की बढ़त है। कोस्पी 4.62 फीसदी ऊपर दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.14 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

बुधवार को नैस्डैक और S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी वजह टेक शेयरों में आई गिरावट थी। हालांकि,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस और ट्रैवल से जुड़े शेयरों को फायदा हुआ और डाओ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 अंक या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया,जबकि S&P 500 में 7.24 अंक या 0.10% की गिरावट आई और यह 7,358.22 पर बंद हुआ। वहीं,नैस्डैक कम्पोजिट 110.40 अंक या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, बढ़त पर खुल सकते है भारतीय बाजार

डॉलर इंडेक्स

गुरुवार को डॉलर तेजी से ऊपर चढ़ते हुए चार्ट रेजिस्टेंस के स्तर को पार कर गया। यह लगभग एक साल की अपनी सबसे बड़ी मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि मज़बूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को सहारा देगी,साथ ही वे महंगाई के अहम आंकड़ों का भी इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.58 के स्तर पर नजर आ रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड एक बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.40% हो गई है। जबकि 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड मामूली रूप से बढ़कर 4.14% हो गई है।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा कमजोर दिख रहा है। इसमें 0.52 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। चीनी रेनमिनबी पर भी दबाव बना हुआ है और इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि ताइवान डॉलर 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।

उधर मलेशियाई रिंगित 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे कारोबार कर रहा है। इसके बाद फिलीपीन पेसो का नंबर है, जिसमें 0.12 प्रतिशत की मजबूती आई है। थाई बाहत में 0.07 प्रतिशत की बढ़त हुई है। जबकि, जापानी येन और सिंगापुर डॉलर में 0.03 प्रतिशत और 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त है।

कच्चे तेल में नरमी

गुरुवार को तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है और यह युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुच गया है। ईरान के साथ US इज़राइल युद्ध को खत्म करने के शुरुआती समझौते के बाद,फंसे हुए टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बाहर निकल गए हैं,जिससे तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हुईं है,इसका असर तेल कीमतों पर देखने को मिल रहा है। WTI क्रूड में 0.91 फीसदी की और ब्रेंट क्रूड में 1.03 फीसदी की गिरावट आई है।

गोल्ड

गुरुवार को सोने की कीमतों में और गिरावट आई है और ये सात महीने से ज्यादा के निचले स्तर के आस-पास ही बना हुआ है। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.38 फीसदी की गिरावट दिख रही है। वहीं,चांदी 0.39 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

24 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,843 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,637 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिला।

Crude Oil Price:वेस्ट एशिया युद्ध से पहले के लेवल के करीब आया कच्चे तेल का भाव, $73 के नीचे फिसला

Crude Oil Price: क्रूड की कीमतों ने वेस्ट एशिया युद्ध के दौरान हुई सारी बढ़त खत्म कर दी। ब्रेंट क्रूड अब उसी लेवल पर वापस आ गया है, जिस पर यह 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले था।

ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी, 2026 के बाद पहली बार $73 प्रति बैरल से नीचे फिसला है। यह 30 अप्रैल को $126 प्रति बैरल के हाई लेवल पर पहुंचा था और उस लेवल से 42% नीचे है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 1.1% से ज़्यादा गिरकर लगभग $72.8 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.2% गिरकर लगभग $69.4 प्रति बैरल पर आ गया। ।

बढ़ती सप्लाई और ईरान शांति समझौते में प्रगति के संकेतों से तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। मार्केट के खास हिस्सों में अचानक सप्लाई भर गई है, और खरीदार वेस्ट एशिया और अफ्रीका जैसे इलाकों से आए ऑफर्स से भर गए हैं।

युद्ध खत्म करने के लिए शुरुआती बातचीत के बाद US और ईरान दोनों ने प्रगति का संकेत दिया है, हालांकि दोनों पक्षों के दावे कई बार अलग-अलग रहे हैं और न्यूक्लियर मुद्दों और लेबनान में सीजफायर जैसे टॉपिक पर आगे की बातचीत में रुकावटें आ रही हैं। एक पक्के समझौते को लेकर शुरुआती उम्मीद के कारण टैंकरों में सैटेलाइट सिग्नल चालू करके होर्मुज स्ट्रेट को खुलेआम पार करने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

तेल की बढ़ती उपलब्धता ने अंगोला से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक फिजिकल बैरल की कीमत कम कर दी है। ब्रेंट का प्रॉम्प्ट स्प्रेड – मार्केट का एक बहुत ज़्यादा देखा जाने वाला मेट्रिक – युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार बुधवार को एक बेयरिश कॉन्टैंगो स्ट्रक्चर में बदल गया।

US से ईरान से पहले से लोड किए गए तेल की खरीद की इजाज़त देने के लिए एक टेम्पररी छूट से भी सप्लाई और बढ़ने वाली है। फिर भी, फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस से जुड़ी मुश्किलें बनी हुई हैं, जिनसे बिक्री कम होने की संभावना है।

युद्ध शुरू होने के बाद तेल सप्लाई की समस्या को हल करने में मिली ज़्यादातर सफलता उन इन्वेंट्री की कीमत पर मिली है जिन्हें US सहित फिर से भरना होगा। पिछले हफ़्ते कुशिंग, ओक्लाहोमा में स्टॉकपाइल लगभग 19 मिलियन बैरल तक गिर गया, जो उस लेवल से नीचे है जिसे ऑपरेशनल ज़रूरत माना जाता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

Gold-Silver Ratio: पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio या GSR) तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब है कि निवेशक चांदी की तुलना में सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार बनी महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ने की आशंका ने चांदी पर ज्यादा दबाव डाला है।

Augmont Research के मुताबिक, जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 से 4,060 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहा। वहीं चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही। इससे गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर 67:1 तक पहुंच गया।

यह मई में 55:1 था, जबकि जनवरी में यह करीब 50:1 के निचले स्तर पर था। यानी कुछ ही महीनों में यह रेशियो 11 से 17 अंक तक बढ़ गया है। आसान शब्दों में कहें तो अब 1 औंस सोना खरीदने के लिए करीब 66-67 औंस चांदी की जरूरत पड़ रही है।

चांदी क्यों पिछड़ रही है?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के मुताबिक, जून में फेडरल रिजर्व के संकेतों ने बाजार का रुख बदल दिया। अब दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 86% मानी जा रही है। साथ ही महंगाई दर 4.2% बनी हुई है।

इन वजहों से चांदी की निवेश मांग कमजोर हुई है और हाल के हफ्तों में उसका प्रदर्शन सोने से कमजोर रहा है।

अब क्या करें निवेशक?

एनालिस्टों का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर नए रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 70:30 का गोल्ड-सिल्वर पोर्टफोलियो बेहतर हो सकता है। फिलहाल सोना करीब ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.25 लाख प्रति किलो के आसपास है। पिछले 50 वर्षों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो का औसत 65:1 से 70:1 के बीच रहा है। इसलिए मौजूदा स्तर पर चांदी को बहुत सस्ता नहीं माना जा रहा।

रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर यह रेशियो 75-80 तक पहुंचता है तो निवेशक चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 60:40 या 55:45 का अनुपात अपना सकते हैं। वहीं अगर रेशियो 60 से नीचे आ जाता है तो फिर पोर्टफोलियो को दोबारा सोना-केंद्रित बनाना बेहतर होगा।

सोना और चांदी में निवेश कैसे करें?

निवेशक Gold ETF और Silver ETF के जरिए निवेश कर सकते हैं। अगर मकसद सिर्फ कीमतों में बढ़त का फायदा उठाना है, तो ETF अच्छा विकल्प हो सकता है।

वहीं भविष्य में वास्तविक डिलीवरी या उपयोग के लिए डिजिटल गोल्ड और डिजिटल सिल्वर पर भी विचार किया जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है। खासकर तब, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हो और फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति अपना रहा हो।

रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि निकट अवधि में गोल्ड-सिल्वर रेशियो स्थिर रह सकता है या थोड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि 2026 में चांदी की सप्लाई में लगातार छठे साल कमी रहने का अनुमान है। करीब 4.63 करोड़ औंस की सप्लाई कमी चांदी को मजबूत आधार दे सकती है।

अगर आगे चलकर फेड ब्याज दरों में नरमी दिखाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है या सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर से चांदी की मांग बढ़ती है, तो साल के अंत तक गोल्ड-सिल्वर रेशियो घटकर 55-60 तक आ सकता है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो कैसे निकालें?

24 जून 2026 को घरेलू बाजार में सोना ₹1,43,399 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,26,891 प्रति किलो थी। गोल्ड-सिल्वर रेशियो निकालने का फॉर्मूला है:

10 ग्राम सोने की कीमत ÷ 10 ग्राम चांदी की कीमत

इस हिसाब से:

₹1,43,399 ÷ ₹2,268.91 = 63.2

यानी फिलहाल 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए करीब 63.2 ग्राम चांदी की जरूरत है। सिर्फ 40 दिनों में यह रेशियो 7.58 अंक बढ़ चुका है।

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Stock in Focus: आईटी कंपनी HCLTech की Nokia और Neste से AI डील, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: आईटी कंपनी HCLTech ने AI बेस्ड सर्विसेज को मजबूत करने के लिए दो बड़े समझौतों का ऐलान किया है। कंपनी ने टेलीकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली Nokia और फिनलैंड की रिन्यूएबल फ्यूल कंपनी Neste के साथ साझेदारी की है। इन समझौतों का फोकस AI, नेटवर्क ऑटोमेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर रहेगा।

Nokia के साथ बनाएगी स्मार्ट नेटवर्क

HCLTech ने Nokia के साथ अपनी मौजूदा साझेदारी का विस्तार किया है। दोनों कंपनियां AI बेस्ड नेटवर्क ऑटोमेशन को बढ़ावा देंगी। इसका मकसद टेलीकॉम कंपनियों को ज्यादा स्मार्ट और ऑटोमेटेड नेटवर्क उपलब्ध कराना है।

इस समझौते के तहत HCLTech, Nokia के SMO Marketplace में चार AI बेस्ड rApps जोड़ेगी। इनमें Anomaly Detector नेटवर्क की गड़बड़ियां पकड़ने का काम करेगा। Energy Optimizer कम ट्रैफिक के दौरान बिजली की खपत घटाने में मदद करेगा।

mMIMO Interference Mitigation सिग्नल क्वालिटी बेहतर करेगा। वहीं Traffic Balancer नेटवर्क पर दबाव और लेटेंसी कम करने का काम करेगा। दोनों कंपनियां मिलकर 5G और भविष्य की नेटवर्क तकनीकों के लिए नए rApps भी विकसित करेंगी।

HCLTech के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट हरी सदरहल्ली ने कहा कि यह साझेदारी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को AI बेस्ड नेटवर्क ऑटोमेशन अपनाने में मदद करेगी। साथ ही वे सेल्फ-ड्राइविंग नेटवर्क्स की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।

Neste के साथ बढ़ाएगी ऑपरेशनल एफिशिएंसी

HCLTech को फिनलैंड की रिन्यूएबल फ्यूल कंपनी Neste ने अपने प्रदर्शन सुधार कार्यक्रम के लिए रणनीतिक साझेदार चुना है। इस समझौते के तहत HCLTech, Neste के आईटी सिस्टम को सरल बनाने पर काम करेगी। कंपनी अलग-अलग आईटी सेवाओं को कंसॉलिडेट करेगी। साथ ही ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और तकनीकी ढांचा मजबूत करने में मदद करेगी।

Neste की CFO ईवा सिपिला ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की आईटी क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे प्रदर्शन सुधार कार्यक्रम को भी गति मिलेगी। HCLTech के चीफ ग्रोथ ऑफिसर अजय बहल ने कहा कि यह समझौता Neste को ज्यादा कुशल और मजबूत तकनीकी ढांचा तैयार करने में मदद करेगा।

HCLTech का शेयर मंगलवार को 0.41% बढ़कर ₹1,114 पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक शेयर करीब 32% टूट चुका है।

ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों की तलाशी ली! 5 चौंकाने वाली बातें मिली, ₹3000 करोड़ के लेन-देन पर भी सवाल

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ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों की तलाशी ली! 5 चौंकाने वाली बातें मिली, ₹3000 करोड़ के लेन-देन पर भी सवाल

Rajesh Exports ED Raid: गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी Rajesh Exports Ltd (REL) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की है।

यह कार्रवाई 23 जून से शुरू हुई थी। जांच के दौरान ED को कई ऐसी बातें मिली हैं, जिन पर अब विस्तार से जांच की जा रही है।

1. विदेशी लेन-देन के दस्तावेज नहीं मिले

ED का कहना है कि कंपनी अपने कई विदेशी लेन-देन से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पाई। इनमें आयात-निर्यात, विदेशों में किए गए निवेश और विदेशी कंपनियों से मिलने या उन्हें दिए जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड शामिल है।

एजेंसी के मुताबिक, दस्तावेज नहीं होने की वजह से यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि ये लेन-देन वास्तव में हुए भी थे या नहीं। ED ने यह भी कहा कि कंपनी अफ्रीका की खदानों में किए गए कथित ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी नहीं दिखा पाई।

2. ₹3,000 करोड़ के लेन-देन पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स UAE और कुछ दूसरे देशों की कंपनियों के साथ अपने देनदार और लेनदार खातों को आपस में एडजस्ट कर रही थी। ED के मुताबिक, ऐसे करीब ₹3,000 करोड़ के लेन-देन मिले हैं।

एजेंसी का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि पैसा आखिर कहां से आया और कहां गया।

3. फैक्ट्री स्टॉक में 40% का अंतर

छापेमारी के दौरान ED ने फैक्ट्री में मौजूद माल का भी मिलान किया। जांच में पाया गया कि कंपनी के रिकॉर्ड में जितना स्टॉक दिखाया गया था, वास्तविक स्टॉक उससे करीब 40% कम या ज्यादा था।

यानी कागजों और जमीन पर मौजूद माल के बीच बड़ा अंतर मिला है। अब एजेंसी इसकी वजह तलाश रही है।

4. अधिकारियों की सैलरी बेहद कम

ED ने कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के CFO को साल 2020 के बाद से कोई वेतन नहीं मिला।

वहीं कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को सिर्फ करीब ₹17,000 महीने की सैलरी दी जा रही थी। ED के मुताबिक, यह आंकड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि कॉर्पोरेट जगत में ऊंचे पदों पर इतनी कम सैलरी देने का चलन नहीं है। खासकर, अगर कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू करीब ₹7.7 लाख करोड़ बताया गया होय़

5. शेयरों में हेरफेर का भी शक

ED ने कुछ संदिग्ध ब्लॉक डील्स और शेयरों में संभावित हेरफेर की ओर भी इशारा किया है।

एजेंसी के मुताबिक, इन सौदों में शामिल कुछ लोगों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की लीक रिपोर्ट्स में भी सामने आए हैं। जांच एजेंसी को शक है कि NRI बेनामी खातों का इस्तेमाल कर शेयरों में हेरफेर की गई और ₹600 करोड़ से ज्यादा रकम भारत से बाहर भेजी गई।

SEBI की रिपोर्ट के बाद बढ़ीं मुश्किलें

Rajesh Exports की मुश्किलें तब बढ़ गईं, जब हाल ही में SEBI ने कंपनी पर बड़ा आरोप लगाया। रेगुलेटर का दावा है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने अपने रेवेन्यू को कथित तौर पर ₹15.15 लाख करोड़ तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

SEBI के मुताबिक, कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़ी आय को जिस तरह पेश किया, वह उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। खासकर स्विट्जरलैंड की Valcambi SA का रेवेन्यू। रेगुलेटर को शक है कि इससे निवेशकों के सामने कंपनी के कारोबार का आकार असलियत से कहीं बड़ा दिखाया गया।

कंपनी ने आरोपों को किया है खारिज

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अगर कोई आंकड़ों में हेरफेर करना चाहे, तो वह मुनाफा बढ़ाकर दिखाएगा। सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने से कोई खास फायदा नहीं होता।

इस बीच जांच की खबरों का असर शेयर पर भी दिखा। बुधवार को Rajesh Exports का शेयर करीब 5% गिरकर ₹102.85 पर बंद हुआ। इससे पहले स्टॉक कुछ ही कारोबारी सत्र में करीब 30% तक बढ़ गया था। फिलहाल ED और SEBI दोनों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

24000 के पार Nifty बंद, Sensex में 790 प्वाइंट्स का उछाल, डेढ़ लाख करोड़ रुपये बढ़ी निवेशकों की दौलत

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ITR Filing 2026: क्या पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं?

ITR Filing 2026: कई टैक्सपेयर्स के मन में हमेशा यह सवाल चलता रहता है कि क्या पति और पत्नी अलग-अलग इनकम टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ मनीकंट्रोल ने एक्सपर्ट से इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की। दरअसल, इस बारे में एक रीडर ने सवाल पूछा है।

पति और पत्नी अलग रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं

रीडर ने पूछा था कि हम पति और पत्नी दोनों नौकरी करते हैं। मैं इनकम टैक्स की नई रीजीम के तहत सेकेक्ट 87ए के तहत मिलने वाले रिबेट का फायदा उठाना चाहती हूं। लेकिन, मेरे पति सेक्शन 80सी के बेनेफिट्स क्लेम करने के लिए इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में रिटर्न फाइल करना चाहते हैं। क्या हम पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन से पूछा।

परिवार का हर सदस्य इनकम टैक्स के लिहाज से अलग इकाई है

जैन ने कहा कि टैक्स के लिहाज से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग मानता है। सिर्फ कुछ खास स्थितियों में इनकम की क्लबिंग का प्रावधान है। सामान्य स्थितियों में हर सदस्य अपने हिसाब से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है। इंडिया में इनकम टैक्स के नियम में परिवार को टैक्स के लिहाज से एक इकाई मानने का प्रावधान नहीं है।

परिवार के सदस्य को कम लायबिलिटी वाली रीजीम चुनने का हक

उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य जैसे पति और पत्नी इनकम टैक्स की उस रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें उनकी टैक्स लायबिलिटी कम आती हो। अगर किसी परिवार में पत्नी नई रीजीम के तहत सेक्शन 87ए के तहत 12 लाख रुपये तक की इनकम पर रिबेट का फायदा उठाना चाहती है तो वह नई रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकती है। पति सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाले डिडक्शन का फायदा उठाने के लिए इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने के लिए डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करना होगा

जैन ने कहा कि ध्यान देने वाली बात यह है कि पति को पुरानी रीजीम के तहत तय अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल कर देना होगा। अगर उनकी सैलरी के अलावा कोई बिजनेस इनकम नहीं है तो रिटर्न फाइल करने के लिए उनकी डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 होगी। अगर सैलरी के साथ उनकी कोई बिजनेस इनकम भी है तो वह 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

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डेडलाइन बीत जाने के बाद नई रीजीम में रिटर्न फाइल करना होगा 

उन्होंने कहा कि अगर पति अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो ओल्ड टैक्स रीजीम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। फिर उन्हें नई टैक्स रीजीम के तहत रिटर्न फाइल करना होगा। पति संबंधित वित्त वर्ष से जुड़े होम लोन के इंटरेस्ट पर भी डिडक्शन क्लेम कर सकते है। अगर होम लोन ज्वाइंट है तो वह अपने शेयर पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

Gold Price Outlook: अगले 6 महीने में 36% बढ़ेगा सोने का भाव! UBS ने गिरावट के बाद भी जताया भरोसा

Gold Price Outlook: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि वैश्विक ब्रोकरेज UBS का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। कंपनी का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी गोल्ड का प्राइस 4046 डॉलर के करीब है। यानी UBS के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 36% की तेजी देखने को मिल सकती है।

UBS का कहना है कि मजबूत निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और आगे चलकर डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 28% नीचे

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे आ चुका था। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में ऊंची ऊर्जा कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं ने सोने पर दबाव डाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी रियल यील्ड में भी तेजी आई। इन दोनों वजहों ने सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी कर दी।

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का असर

UBS का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। वहीं डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है।

पिछले कुछ समय से बाजार में यही स्थिति देखने को मिली है। इसी वजह से सोना दबाव में रहा और इसकी कीमतों में गिरावट आई।

फिर भी सोने पर भरोसा क्यों?

UBS का कहना है कि सोने की तेजी के पीछे मौजूद बड़े कारण अब भी बरकरार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में सोने की मांग मजबूत रही। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज, अमेरिका का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति आने वाले वर्षों में सोने को सहारा देती रहेगी।

भारत में कितना बढ़ेगा भाव

UBS का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी सोना करीब 4,046 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यानी यहां से लगभग 36% की तेजी की संभावना जताई गई है।

भारत में सोने का भाव फिलहाल करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी ही तेजी आती है, तो घरेलू कीमतें ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती हैं। हालांकि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

UBS को उम्मीद है कि साल के आगे चलकर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है। इसके अलावा राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिम भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींच सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलती। यह सिर्फ थोड़े वक्त के दबाव का असर है। UBS अब भी निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने को जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में रखने की सलाह देता है।

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Trent Share Price : ट्रेंट का 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार, AGM में पॉजिटिव ग्रोथ कमेंट्री के दम पर जोर से दौड़ा शेयर

Trent Share Price : ट्रेंट के शेयर में आज 4 फीसदी की तेजी है। दरअसल ट्रेंट के AGM में नोएल टाटा की पॉजिटिव कमेंट्री से शेयर में रौनक है। नोएल टाटा ने ट्रेंट की ग्रोथ के लिए खास रोडमैप रखा है। यह नोएल टाटा की आखिरी ट्रेंट AGM थी। आज पेश कंपनी के आगे के रोडमैप में कारोबार में 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार रखा गया है। इसमें ये भी कहा गया है कि सिर्फ वेस्टसाइड ( Westside) और जूडियो (Zudio) के भरोसे लक्ष्य हासिल नहीं होगा। हर साल 50 वेस्टसाइड और 200-250 जूडियो और 25-40 स्टार स्टोर बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

लॉन्ग टर्म लक्ष्य के तहत जूडियो के 5000 स्टोर और स्टॉर को भी इसी स्केल तक पहुंचने का इरादा है। इस रोडमैप में ये भी कहा गया है कि बर्न्ट टोस्ट (Burnt Toast) और Samoh में 2-3 साल और इनक्यूबेशन की जरूरत है। फैशन LFL ग्रोथ में नरमी है लेकिन लो-डबल डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। Trent का मार्केट शेयर सिर्फ 2% है। लेकिन इसके लिए ग्रोथ के बड़े मौके मौजूद हैं। कंपनी ने 2500 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसे वेयरहाउस,IT, AI और स्टोर विस्तार पर खर्च किया जाएगा। स्टार बिजनेस पर कंपनी का भरोसा कायम है। ग्रोसरी रिटेल में मजबूत संभावनाएं दिख रही हैं। वेस्टसाइड ई-कॉमर्स रेवेन्यू 300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

बताते चलें कि 69 साल के नोएल टाटा ने यह भी कहा की है कि वे ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने जा रहे। इसके साथ ही,टाटा ग्रुप की मुख्य रिटेल कंपनी के हेड के तौर पर उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है,जबकि नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर 70 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। नोएल टाटा की चेयरमैनशिप में FY26 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग में ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का रखा गया था। तब से कंपनी की रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गई है। इस पर नोएल टाटा ने कहा “मुझे पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे जिसका मैंने ज़िक्र किया था।”

ट्रेंट पर ब्रोकरेज की राय

ट्रेंट पर ब्रोकरेज का नजरिया भी बुलिश है। HSBC ने इस स्टॉक को Buy रेटिंग देते हुए 3460 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। वहीं, मोतीलाल ओसवाल ने इसे Buy रेटिंग देते हुए 3500 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि कुछ स्टोर्स में सेल्स घटी है। LFL में रिकवरी दिख रही है। आगे डबल डिजिट LFL ग्रोथ संभव है। आगे जाकर मार्जिन में उछाल LFL ग्रोथ पर निर्भर करेगी।

ट्रेंट की चाल पर एक नजर

एनएसई पर आज यह शेयर 104.10 रुपए यानी 3.31 फीसदी की तेजी लेकर 3247 रुपए पर बंद हुआ है। आज का इसका दिन का हाई 3,309.20 रुपए और दिन का लो 3,140.00 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 4,174.00 रुपए और 52 वीक लो 2,183.67 रुपए है। स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम 3,950,989 शेयर और मार्केट कैप 173,140 करोड़ रुपए है।

1 हफ्ते में यह शेयर 4.65 रुपए और 1 महीने में 13.36 फीसदी भागा है। इस साल अब तक इसमें 13.82 फीसदी की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसमें 19.60 फीसदी की कमजोरी आई है। जबकि, 3 साल में यह शेयर 182.36 फीसदी भागा है।

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डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

नोएल टाटा छोड़ेंगे Trent के चेयरमैन का पद, AGM में कहा- कंपनी के सबसे अच्छे साल आना अभी बाकी

नोएल टाटा ने ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने की घोषणा की है। इसके साथ ही ट्रेंट के साथ उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। वह 70 साल के होने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने 23 जून को ट्रेंट की 47वीं सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स से कहा कि चेयरमैन के तौर पर यह उनकी आखिरी सालाना आम बैठक है।

टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है, जबकि नॉन-इंडिपेंडेंट नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 70 साल में रिटायर होते हैं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर 75 की उम्र में रिटायर होते हैं। ट्रेंट, टाटा ग्रुप का फैशन और लाइफस्टाइल बिजनेस है। कंपनी के Westside, Zudio और Star जैसे ब्रांड्स के तहत रिटेल स्टोर हैं।

1998 से Trent के साथ

नोएल टाटा साल 1998 में ट्रेंट के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर शामिल हुए थे। उस वक्त, जब उनकी मां सिमोन टाटा ने लैक्मे के डाइवेस्टमेंट के बाद कंपनी शुरू की थी। उन्होंने जून 1999 में ट्रेंट के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर चार्ज संभाला था। वित्त वर्ष 2026 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया। नोएल टाटा ने सालाना आम बैठक में कहा, “एक वेस्टसाइड स्टोर से 1,200 से ज्यादा स्टोर के नेटवर्क तक, हमारा सफर लगातार आगे बढ़ा है। पिछले कुछ सालों में हमने अपने पोर्टफोलियो में पावरफुल ग्रोथ इंजन जोड़े हैं- खासकर जूडियो और स्टार, जो अब हमारे पोर्टफोलियो का एक अहम हिस्सा हैं।”

नोएल टाटा का मानना है कि ट्रेंट के सबसे अच्छे साल अभी बाकी हैं। कंपनी अपनी विकास यात्रा के शुरुआती चरण में है। कंपनी के सामने मौके बहुत हैं और केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। आने वाले सालों में ट्रेंट अलग-अलग कैटेगरी में बढ़ेगी और नई जगहों पर भी पहुंचेगी।

नोएल टाटा ने कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का सोचा था। तब से रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी रन रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। टाटा ने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि हम जल्द ही उस माइलस्टोन तक पहुंच जाएंगे, जिसका मैंने जिक्र किया था।”

ट्रेंट का शेयर 3 प्रतिशत से ज्यादा उछला

24 जून को ट्रेंट के शेयर में 3.6 प्रतिशत की तेजी है। शेयर BSE पर 3255 रुपये पर बंद हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 1.73 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। जून की शुरुआत में शेयर ने एक्स-बोनस ट्रेड किया था। ट्रेंट ने अपने शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 2 शेयरों पर 1 नया शेयर बोनस के तौर पर देने का ऐलान किया था। वहीं कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दे रही है। रिकॉर्ड डेट 12 जून थी। ट्रेंट के शेयर के लिए मॉर्गन स्टेनली ने ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 3,151 रुपये प्रति शेयर दिया है।

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HSBC ग्लोबल इनवेस्टमेंट रिसर्च ने ‘बाय’ रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3,460 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल ने 3,500 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। दूसरी तरफ कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने ​’रिड्यूस’ रेटिंग दी है। लेकिन टारगेट बढ़ाकर 3,025 रुपये कर दिया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।